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समृद्धि के नये द्वार खोलेगा अष्ट महालक्ष्मी मंदिर

Ashta Mahalaxmi Temple will open new doors of prosperity  समृद्धि की अधिष्ठात्री देवी महालक्ष्मी सुख, संपत्ति और वैभव प्रदान करती हैं। माँ लक्ष्मी को धन, वैभव, संपत्ति, यश और कीर्ति की देवी कहा जाता है। धर्म ग्रंथों एवं पुराणों में माँ लक्ष्मी के आठ स्वरूपों का वर्णन है, जिन्हें अष्ट महालक्ष्मी कहा जाता है। माँ के ये अष्ट स्वरूप अपने नाम और रूप के अनुसार समस्त दुःखों का नाश कर  सुख-समृद्धि प्रदान करते हैं। मान्यता है कि माँ लक्ष्मी की कृपा के बिना जीवन में समृद्धि और संपन्नता संभव नहीं है।  डॉ. केशव पाण्डेय सात मार्च गुरुवार का दिन आध्यात्मिक, धार्मिक एवं ग्रह-नक्षत्र की दृष्टि से महत्वपूर्ण साबित होगा और भविष्य के लिए सुखद संकेत देने वाला रहेगा। कारण इस दिन प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के बाद श्री अष्ट महालक्ष्मी मंदिर के पट आमजन के लिए खुल जाएंगे। आम हो या खास सभी वैभव की देवी महालक्ष्मी के द्वार धन और समृद्धि की मनौती मांग सकेंगे। ग्वालियर जिले की डबरा तहसील के जौरासी में करीब 15 करोड़ की लागत से भव्य एवं विशाल श्री अष्ट महालक्ष्मी मंदिर का निर्माण किया गया है। ट्रस्ट हनुमान मंदिर जौरासी द्वारा इस मंदिर का निर्माण कराया गया है। जिसका उद्देश्य शनि और सूर्य की युति के चलते शहर में उत्पन्न हो रहे वास्तुदोष को दूर करना है।  श्री अष्ट महालक्ष्मी के अष्ट रूप यानी यह  आठ प्रकार के धन सभी एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। प्रत्येक व्यक्ति में यह आठ धन अधिक या कम मात्रा में होते हैं। हम उन्हें कितना सम्मान करते हैं, उनका कैसे उपयोग करते हैं, हमारे ऊपर निर्भर है। इन आठ लक्ष्मी की अनुपस्थिति को-अष्ट दरीद्रता कहा जाता है। चाहे लक्ष्मी है या नहीं, नारायण को अभी भी अनुकूलित किया जा सकता है। नारायण दोनों के हैं – लक्ष्मी नारायण और दरिद्र नारायण! दरिद्र नारायण परोसा जाता है और लक्ष्मी नारायण की पूजा की जाती है। पूरे जीवन का प्रवाह दरिद्र नारायण से लक्ष्मी नारायण तक, दुख से समृद्धि तक, जीवन में सूखेपन से दैवीय अमृत तक जा रहा है।  आदि, धन, धान्य, गज, संतान, वीर, जय और विद्या ये महालक्ष्मी के अष्ट रूप हैं। पहले इनके प्रत्येक रूप की महिमा को वर्णन करते हैं।    आदि लक्ष्मी = श्रीमद्भागवत पुराण में माँ लक्ष्मी का पहला स्वरूप कहा गया है। इन्हें मूल लक्ष्मी या महालक्ष्मी भी कहा गया है। मान्यता है कि आदि लक्ष्मी माँ ने ही सृष्टि की उत्पत्ति की है। भगवान विष्णु के साथ जगत का संचालन करती हैं। आदि लक्ष्मी की साधना से भक्त को जीवन के सर्वोच्च लक्ष्य मोक्ष की प्राप्ति होती है।  धन लक्ष्मी = माँ लक्ष्मी का दूसरा स्वरूप है। इनके एक हाथ में धन से भरा कलश है तो दूसरे में कमल का फूल है। धन लक्ष्मी की पूजा करने से आर्थिक संकट दूर होता है। कर्ज से मुक्ति मिलती है। पुराणों के अनुसार माँ लक्ष्मी ने ये रूप भगवान विष्णु को कुबेर के कर्ज से मुक्ति दिलाने के लिया था।  धान्य लक्ष्मी = यह माँ का तीसरा रूप है। संसार में धान्य या अनाज के रूप में वास करती हैं। धान्य लक्ष्मी को माँ अन्नपूर्णा का ही एक रूप माना जाता है।   गज लक्ष्मी = चतुर्थ रूप में गज लक्ष्मी हाथी के ऊपर कमल के आसन पर विराजमान हैं। माँ गज लक्ष्मी को कृषि और उर्वरता की देवी के रूप में पूजा जाता है। इनकी आराधना से संतान की प्राप्ति होती है। राजा को समृद्धि प्रदान करने के कारण इन्हें “राज लक्ष्मी“ भी कहा जाता है।  संतान लक्ष्मी = माँ के पंचम रूप को स्कंदमाता के रूप में भी जाना जाता है। इनके चार हाथ हैं तथा अपनी गोद में कुमार स्कंद को बालक रूप में लेकर बैठी हुई हैं। माना जाता है कि संतान लक्ष्मी भक्तों की रक्षा अपनी संतान के रूप में करती हैं।  वीर लक्ष्मी = माँं लक्ष्मी का यह छठवां रूप भक्तों को वीरता, ओज और साहस प्रदान करता है। वीर लक्ष्मी माँ युद्ध में विजय दिलाती है। अपने हाथों में तलवार और ढाल जैसे अस्त्र-शस्त्र धारण करती हैं।  जय लक्ष्मी =  माँ के इस रूप को विजय लक्ष्मी के नाम से भी जाना जाता है। इनकी साधना से भक्तों के जीवन के हर क्षेत्र में जय-विजय की प्राप्ति होती है। जय लक्ष्मी माँ यश, कीर्ति तथा सम्मान प्रदान करती हैं।  विद्या लक्ष्मी माँ लक्ष्मी का यह आठवां रूप विद्या लक्ष्मी है। इनका रूप ब्रह्मचारिणी देवी के जैसा है। इनकी साधना से शिक्षा के क्षेत्र में सफलता प्राप्त होती है। विश्व विख्यात श्री विद्या साधक एवं जन्म कुंडली विशेषज्ञ श्रीजी रमण योगी महाराज “साइंटिस्ट बाबा” के मुताबिक नारायण लक्ष्य है और लक्ष्मी जी उन तक पहुँचने का एक साधन। उन्होंने आठ प्रकार के धन या अष्ट लक्ष्मी के बारे में विस्तार से वर्णन करते हुए बताया कि माता महालक्ष्मी की नजर जिस तरफ पड़ेगी उस क्षेत्र का विकास होगा। महालक्ष्मी देवी का आभा मंडल आस-पास के इलाकों में अपना प्रभाव छोड़ेगा। अष्टभुजाओं का प्रकाश टेकनपुर और डबरा में तीव्र गति से विकास कराकर समृद्धि के द्वार खोलेगा। कारोबार के  साथ ही पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। जिससे लोगों को रोजगार मिलेगा। आय बढ़ने से जीवन स्तर में बदलाव आएगा और सुखद होगा।  पंडितों एवं त्योतिषाचार्यां की मानें तो ग्वालियर से 15 किलोमीटर दूर ऐंती पर्वत पर त्रेता युगीय शनि देव मंदिर है। कहा जाता है कि भगवान शनि देव उल्का पिंड के रूप में ऐंती पर्वत पर आए। जबकि गोला का मंदिर इलाके में सूर्य मंदिर स्थित है।  शनि-सूर्य की युति एक साथ होने से लोगों के जीवन पर खासा प्रभाव होता है। दोनों ही जीवन को पूर्णतः संघर्षमय बनाते हैं। जब यह युति लग्न, पंचम, नवम या दशम भाव की स्थिति में हो या फिर  दोनों में से कोई भी एक ग्रह इन भावों का कारक भी हो तो यह योग जीवन में विलंब लाता है। बेहद मेहनत के बाद समय बीत जाने पर सफलता मिलती है। क्योंकि सूर्य और शनि दोनों पिता-पुत्र होने पर भी परस्पर शत्रुता रखते हैं। वेसे भी प्रकृति की मान्यता है कि ज्ञान और अंधकार साथ मिलने पर शुभ प्रभाव अनुभूत नहीं होते हैं। ऐसे में ग्वालियर शहर में तो यह युति एक लंबे समय से बनती चली आ रही है। इस वजह से … Read more

महाशिवरात्रि के लिए फूलों से सजा महाकाल का दरबार, 750 कैमरों से रखेंगे हर आने जाने वाले पर नजर

Mahakal’s court decorated with flowers for Mahashivratri, will keep an eye on every visitor with 750 cameras महाशिवरात्रि महापर्व के पहले ही भगवान महाकाल के दरबार में फूलों से सजावट की गई है। मंदिर के मुख्य शिखर से लेकर गर्भगृह तक को फूलों से सजाया गया है। उज्जैन ! श्री महाकालेश्वर मंदिर में शिवनवरात्रि पर्व पर एक भक्त ने मंदिर के नंदी हॉल, गर्भ गृह के साथ बाहर ओंकारेश्वर महादेव, नागचंद्रेश्वर महादेव मंदिर और शिखर पर भी आकर्षक फूलों से सजावट करवाई है। शिवरात्रि के पहले नौ दिवसीय पर्व के दौरान बाबा महाकाल के दरबार में साज-सज्जा कराने वाले भक्त अपनी बारी आने का इंतजार करते हैं। रात से ही मंदिर में फूलों से सजावट का काम शुरू हो गया था। वहीं, मुख्य पर्व महाशिवरात्रि पर भी देशी-विदेशी फूलों के साथ विद्युत रोशनी कर सजावट करने का काम 7 मार्च से शुरू होगा। शिवरात्रि पर 15 लाख श्रद्धालुओं के आने की संभावना श्री महाकालेवर मंदिर में इस बार महाशिवरात्रि पर श्रद्धालुओं के आगमन का रिकॉर्ड टूटेगा। संभावना है कि करीब 15 लाख श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचेंगे। मंदिर समिति और जिला प्रशासन द्वारा श्रद्धालुओं के लिए की जा रही व्यवस्थाओं को अब अंतिम रूप दिया जा रहा है। श्रद्धालु कहां से आएंगे और कहां से जाएंगे, इसके लिए रूट प्लान जारी कर दिया गया है। कुछ दिनों पहले ही प्रशासनिक अधिकारियों ने पार्किंग स्थल से महाकाल मंदिर तक व्यवस्थाओं का जायजा लिया था। बाबा के दर्शन के लिए जगह-जगह लगेगी मेगा स्क्रीन श्रद्धालुओं की दर्शन व्यवस्था के लिए लगाए गए बैरिकेड के साथ ही कुछ स्थानों पर मंच बनाए जाएंगे। यहां भजनों की प्रस्तुति दी जाएगी। सामान्य दर्शनार्थियों के प्रवेश द्वार पर मेगा स्क्रीन लगाई जाएगी, जिससे श्रद्धालु स्क्रीन पर भी बाबा महाकाल के दर्शन कर सकेंगे। इस बार सामान्य दर्शनार्थियों को महाकाल महालोक के मानसरोवर भवन से फैसेलिटी सेंटर से कार्तिकेय मंडपम से दर्शन कराएंगे। कैमरों के साथ ड्रोन से भी रखी जाएगी नजर दर्शनार्थियों की सुविधा और सुरक्षा व्यवस्था के लिए मंदिर समिति और प्रशासन की ओर से करीब 750 सीसीटीवी कैमरे के माध्यम से नजर रखी जाएगी। मंदिर समिति के सहायक प्रशासक मूलचंद जूनवाल ने बताया कि मंदिर समिति और प्रशासन की ओर से लगने वाले करीब 750 सीसीटीवी कैमरों से पार्किंग स्थल से मंदिर तक नजर रखी जाएगी। भीड़ वाले क्षेत्र में ड्रोन कैमरे लगेंगे। सभी कैमरे मंदिर के श्री महाकाल लोक और फैसेलिटी सेंटर स्थित कंट्रोल रूम से अटैच रहेंगे। यहां पर मंदिर समिति व पुलिस और प्रशासन के अधिकारी नजर रख सकेंगे।

अमीरों के चक्कर में बेचारा गरीब पिसता ,हल्दी रस्म या फिजूल खर्ची

Haldi ritual or wasteful expenditure, the poor suffer for the sake of the rich. कमलेश अहिरवार ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे घरों में फिजूल खर्ची में पैसा पानी की तरह बहाया जाता है जिनके मां-बाप ने हाड़-तोड़ मेहनत और पसीने की कमाई से पाई-पाई जोड़ कर मकान का ढांचा खड़ा किया लेकिन ये नवयौवन लड़के-लड़कियां बिना समझे अपने मां- बाप की हैसियत से विपरीत जाकर अनावश्यक खर्चा करते हैं। हल्दी रस्म के दौरान हजारों रूपये खर्च कर के विशेष डेकोरेशन किया जाता है, उस दिन दूल्हा या दुल्हन विशेष पीत (पीले) वस्त्र धारण करते हैं। साल 2020 से पूर्व इस हल्दी रस्म का प्रचलन ग्रामीण क्षेत्रों में कहीं पर भी देखने को नहीं मिलता था, लेकिन पिछले साल दो-तीन साल से इसका प्रचलन बहुत तेजी से ग्रामीण क्षेत्र में बढ़ा है। पहले हल्दी की रस्म के पीछे कोई दिखावा नहीं होता था, बल्कि तार्किकता होती थी। पहले ग्रामीण क्षेत्रों में आज की तरह साबुन व शैम्पू नहीं थे और ना ही ब्यूटी पार्लर था। इसलिए हल्दी के उबटन से घिसघिस कर दूल्हे-दुल्हन के चेहरे व शरीर से मृत चमड़ी और मेल को हटाने, चेहरे को मुलायम और चमकदार बनाने के लिए हल्दी, चंदन, आटा, दूध से तैयार उबटन का प्रयोग करते थे। ताकि दूल्हा-दुल्हन सुंदर लगे। इस काम की जिम्मेदारी घर-परिवार की महिलाओं की थी। लेकिन आजकल की हल्दी रस्म मोडिफाइड, दिखावटी और मंहगी हो गई है। जिसमें हजारों रूपये खर्च कर डेकोरेशन किया जाता है। महंगे पीले वस्त्र पहने जाते है। दूल्हा दुल्हन के घर जाता है और पूरे वातावरण, कार्यक्रम को पीताम्बरी बनाने के भरसक प्रयास किये जाते हैं। यह पीला ड्रामा घर के मुखिया के माथे पर तनाव की लकीरें खींचता है जिससे चिंतामय पसीना टपकता है। पुराने समय में जहां कच्ची छतों के नीचे पक्के इरादों के साथ दूल्हा-दुल्हन बिना किसी दिखावे के फेरे लेकर अपना जीवन आनंद के साथ शुरू करते थे, लेकिन आज पक्के इरादे कम और दिखावा और बनावटीपन ज्यादा होने लगा है। आजकल देखने में आ रहा है कि ग्रामीण क्षेत्र में आर्थिक रूप से असक्षम परिवार के लड़के भी इस शहरी बनावटीपन में शामिल होकर परिवार पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ा रहे है। क्योंकि उन्हें अपने छुट भईए नेताओं, वन साइड हेयर कटिंग वाले या लम्बे बालों वाले सिगरेट का धुंआ उड़ाते दोस्तों को अपना ठरका दिखाना होता है। इंस्टाग्राम, फेसबुक आदि के लिए रील बनानी है। बेटे के रील बनाने के चक्कर में बाप की कर्ज़ उतरने में ही रेल बन जाती है। ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे घरों में फिजूल खर्ची में पैसा पानी की तरह बहाया जाता है जिनके मां-बाप ने हाड़-तोड़ मेहनत और पसीने की कमाई से पाई-पाई जोड़ कर मकान का ढांचा खड़ा किया लेकिन ये नवयौवन लड़के-लड़कियां बिना समझे अपने मां-बाप की हैसियत से विपरीत जाकर अनावश्यक खर्चा करते हैं। जिन परिवारों की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं हो उन परिवारों के बच्चों को मां-बाप से जिद्द करके इस तरह की फिजूल खर्ची नहीं करवानी चाहिए। आजकल काफी जगह यह भी देखने को मिलता है कि बच्चे (जिनकी शादी है) मां-बाप से कहते है आप कुछ नहीं जानते, आपको समझ नहीं है, आपकी सोच वही पुरानी अनपढ़ों वाली रहेगी, यह कहते हुए अपने माता-पिता को गंवारू, पिछड़ा, थे तो बौझ्अ बरगा हो कहते हैं। मैं जब भी यह सुनता हूं सोचने को विवश हो जाता हूं, पांव अस्थिर हो जाते हैं। बड़ी चिंता होती हैं कि मेरा युवा व छोटा भाई-बहिन किस दिशा में जा रहे हैं। आज किसी को चींटी के पैरो के सूपरू की आवाज सुनने की फुर्सत नहीं है क्योंकि सब-के-सब फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर पर खुद को बढ़ा-चढ़कर कर परोसते हैं, दिखावटीपन को चासनी में आकंठ इसे हुए हैं। इसलिए व्यक्ति बाजारवाद की गिरफ्त में जल्दी आता जा रहा है और यह पूर्णतः बाजारवाद द्वारा आजाद की हुई नई-नवेली रस्म है. इसका गला यहीं पर घोट दो अन्यथा पीसना तय इस तरह की फिजूलखनों वाली रस्म को रोकने के समाचार पढ़ कर खुशी होती है लेकिन अपने घर, परिवार, समाज, गांव में ऐसे कार्यक्रम में शरीक होकर लुत्फ उम्र रहे हैं, फोटो खिचवाकर स्टेटस लगा रहे हैं। फिर तो वही बात हो गई कि तुझे रोकना तो चाहता हूं, मगर तू रूकना नहीं, मुझे तेरी महफिल में रोकना तो बाह रहे है मगर तू रुकना नहीं हमें महफिल में शरीक होना है, यानि कथनी और करनी में अंतर स्याह है।

ब्रह्माकुमारीज की द्वादश ज्योतिर्लिंग यात्रा से शिवमय हुआ आमला

Amla became Shiva-like due to Brahma Kumaris’ Dwadash Jyotirlinga Yatra. हरिप्रसाद गोहे आमला । अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त ब्रह्माकुमारीज के स्थानीय सेवा केंद्र द्वारा मंगलवार आमला नगर में विशाल एवं भव्य द्वादश ज्योतिर्लिंग यात्रा का आयोजन किया गया । ब्रह्माकुमारीज के अनुयायियों द्वारा ब्रह्माकुमारीज केंद्र पर शिव ध्वज फहराकर शिवरात्रि पर्व मनाया बाद यात्रा निकाली गई । इस यात्रा के द्वारा इस धरा पर परमात्मा शिव के अवतरण का दिव्य संदेश दिया गया । यात्रा के द्वारा बताया गया कि कलयुग रूपी घोर रात्रि के समय परमात्मा शिव का इस धरा पर अवतरण होता है और वह अज्ञानता के अंधकार को मिटाकर हमारे जीवन में ज्ञान प्रकाश से दिव्य गुण लाते हैं और जब मनुष्य गुणवान बन जाता है तो नई सतयुगी सृष्टि , स्वर्ग की सृष्टि में जाने की वह पात्रता धारण कर लेता है अर्थात मानव ही देव मानव बन जाता है देवता बन जाता है तथा परमात्मा इस पुरानी कलयुग की दुनिया को परिवर्तन कर नई सतयुग की दुनिया लाते हैं। ब्रह्मा कुमारीज ने इस यात्रा के द्वारा सभी का आह्वान किया है की इस सृष्टि पर अवतरित हो चुके परमात्मा को पहचान कर वे भी अपने संस्कारों के परिवर्तन से संसार परिवर्तन के इस देवी कार्य में सहयोगी बने और अपने जीवन को सुखी और समृद्ध बनाएं । द्वादश ज्योतिर्लिंग का रथ बनाकर हुआ नगर भ्रमण ।यात्रा में परमात्मा शिव के द्वादश ज्योतिर्लिंग को रथ पर सजाकर सारे नगर का भ्रमण कराया गया। द्वादश ज्योतिर्लिंग में महाकालेश्वर, त्रयंबकेश्वर, घृष्णेश्वर, विश्वनाथ, बैद्यनाथ, रामेश्वरम, सोमनाथ,मल्लिकार्जुन आदि 12 ज्योतिर्लिंग को सजाकर यात्रा निकाली गई। इस यात्रा से आमला निवासी सभी शिव भक्तों ने बाबा भोलेनाथ के 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन किए। यात्रा का नगर के विभिन्न स्थानों पर भव्य स्वागत भी हुआ। यात्रा ब्रह्माकुमारी की सेवा केंद्र से निकलकर शहर के मुख्य स्थान से होते हुए पुनः ब्रह्माकुमारी केंद्र पहुंची। यात्रा ने बोड़खी की और आमला के मुख्य मार्ग का भ्रमण किया तथा भक्तों को शिव बाबा के दर्शन कराए। मनाई 88वी त्रिमूर्ति शिव जयंतीसारनी से पधारी बी के सुनीता दीदी ने बताया कि परमात्मा शिव को इस धरा पर अवतरित हुए 88 वर्ष हो चुके है। वे साधारण मानव ब्रह्मा तन का आधार लेकर श्रृष्टि परिवर्तन का कार्य कर रहे है। निकट भविष्य में शीघ्र ही स्वर्गिक सृष्टि की स्थापना होने वाली है। इसके लिए परमात्मा हमे राजयोग सीखा रहे है। वही आमला सेवाकेंद्र संचालिका बी के हेमलता बहन ने बताया की ब्रह्माकुमारीज के सेवाकेंद्र पर निशुल्क राजयोग प्रशिक्षण दिया जाता हैं जिसे कोई भी व्यक्ति आके सिख सकता है ।

संत शिरोमणि गुरु रविदास जयंती विशेष प्रकाशन

Sant Shiromani Guru Ravidas Jayanti Special Publication Ravidas Jayanti 2024: गुरु रविदास जी का जन्म कब और कहां हुआ ? संत गुरु रविदास जी को प्रेम और करुणा की शिक्षाओं और समाज से जाति के भेदभाव को दूर करने के लिए जाना जाता है. हर साल माघ पूर्णिमा को रविदास जी की जयंती के रूप में मनाया जाता है.भारत के प्रसिद्ध संत रविदास को रैदास के नाम से भी जाना जाता है. रविदास ऐसे संत और कवि थे, जिनका भक्ति आंदोलन में अहम योगदान रहा. समाज विभाजन को दूर करने पर इन्होंने जोर दिया और व्यक्तिगत आध्यात्मिक आंदोलन के लिए एकता को बढ़ावा दिया. रविदास जी के जन्मदिन को ही हर साल रविदास जयंती के रूप में मनाया जाता है, जोकि आज शनिवार, 24 फरवरी 2024 को है. संत रविदास ईश्वर को पाने का केवल एक रास्ता जानते थे और वो है ‘भक्ति’. इसलिए उनका एक मुहावरा ‘मन चंगा तो कठौती में गंगा’ वर्तमान में काफी प्रसिद्ध है. संत रविदास जी ने अपना सारा जीवन समाज सुधार कार्य, समाज कल्याण और समाज से जाति भेदभाव को दूर करने के कार्यों में समर्पित कर दिया. आइये जानते हैं गुरु रविदास जी का जन्म कब और कहां हुआ था? कब और कहां हुआ संत रविदास का जन्म संत गुरु रविदास एक महान कवि, दार्शनिक और समाज सुधारक थे. संत रविदास का जन्म उत्तर प्रदेश के वाराणसी क्षेत्र में माघ पूर्णिमा को 1377 में हुआ था. इसलिए हर साल माघ पूर्णिमा के दिन रविदास जयंती मनाई जाती है. लेकिन इनके जन्म को लेकर विद्वानों के बीच अलग-अलग मत हैं. इनकी माता का नाम कर्मा देवी और पिताजी का नाम संतोष दास था. संत रविदास का जन्म एक मोची परिवार में हुआ था और इनके पिता जूते बनाने का काम किया करते थे. रविदास जी बचपन से बहादुर और ईश्वर के भक्त थे. पंडित शारदानंद गुरु से इन्होंने शिक्षा प्राप्त की. जैसे-जैसे रविदास जी की उम्र बढ़ने लगी भक्ति के प्रति इनकी रुचि भी बढ़ गई. आजीविका के लिए रविदास जी ने पैतृक काम को करते हुए भगवान की भक्ति में भी लीन रहे. चर्मकार कुल के होने के कारण वे जूते बनाया करते थे और अपने पैतृक कार्य में उन्हें आनंद भी मिलता था. वे अपना काम ईमानदारी, परिश्रम और पूरे लगन से करते थे. साथ ही लोगों को धर्म के मार्ग पर चलने की शिक्षा भी दिया करते थे. संत शिरोमणि गुरु रविदास कौन थे, समाज के लिए क्या है इनका योगदान भारत में कई संतों ने लोगों को आपसी प्रेम, सौहार्द और गंगा जमुनी तहजीब सिखाई. इन्हीं में एक थे संत रविदास, जिनका भक्ति आंदोलन और समाज सुधार में विशेष योगदान रहा. संत गुरु रविदास भारत के महान संतों में से एक हैं, जिन्होंने अपना जीवन समाज सुधार कार्य के लिए समर्पित कर दिया. समाज से जाति विभेद को दूर करने में रविदास जी का महत्वपूर्ण योगदान रहा. वो ईश्वर को पाने का एक ही मार्ग जानते थे और वो है ‘भक्ति’, इसलिए तो उनका एक मुहावरा आज भी बहुत प्रसिद्ध है कि, ‘मन चंगा तो कठौती में गंगा’. रविदास जी का जन्म रविदास जी के जन्म को लेकर कई मत हैं. लेकिन रविदास जी के जन्म पर एक दोहा खूब प्रचलित है- चौदस सो तैंसीस कि माघ सुदी पन्दरास. दुखियों के कल्याण हित प्रगटे श्री गुरु रविदास. इस पंक्ति के अनुसार गुरु रविदास का जन्म माघ मास की पूर्णिमा को रविवार के दिन 1433 को हुआ था. इसलिए हर साल माघ मास की पूर्णिमा तिथि को रविदास जयंती के रूप में मनाया जाता है जोकि इस वर्ष 24 फरवरी 2024 को है. रविदास जी का जन्म 15वीं शताब्दी में उत्तर प्रदेश के वाराणसी में एक मोची परिवार में हुआ. उनके पिताजी जाति के अनुसार जूते बनाने का पारंपरिक पेशा करते थे, जोकि उस काल में निम्न जाति का माना जाता था. लेकिन अपनी सामान्य पारिवारिक पृष्ठभूमि के बावजूद भी रविदास जी भक्ति आंदोलन, हिंदू धर्म में भक्ति और समतावादी आंदोलन में एक प्रमुख व्यक्ति के रूप में उजागर हुए. 15 वीं शताब्दी में रविदास जी द्वारा चलाया गया भक्ति आंदोलन उस समय का एक बड़ा आध्यात्मिक आंदोलन था. समाज के लिए गुरु रविदास का योगदान संत शिरोमणि श्री गुरु रविदास जी एक महान संत और समाज सुधारक थे. भक्ति, सामाजिक सुधार, मानवता के योगदान में उनका जीवन समर्पित रहा. आइये जानते हैं गुरु रविदास के महत्वपूर्ण योगदानों के बारे में- धार्मिक योगदान: भक्ति और ध्यान में गुरु रविदास का जीवन समर्पित रहा. उन्होंने भक्ति के भाव से कई गीत, दोहे और भजनों की रचना की, आत्मनिर्भरता, सहिष्णुता और एकता उनके मुख्य धार्मिक संदेश थे. हिंदू धर्म के साथ ही सिख धर्म के अनुयायी भी गुरु रविदास के प्रति श्रद्धा भाव रखते हैं. रविदास जी की 41 कविताओं को सिखों के पांचवे गुरु अर्जुन देव ने पवित्र ग्रंथ आदिग्रंथ या गुरुग्रंथ साहिब में शामिल कराया था.सामाजिक योगदान: समाज सुधार में भी गुरु रविदास जी का विशेष योगदान रहा. इन्होंने समाज से जातिवाद, भेदभाव और समाजिक असमानता के खिलाफ होकर समाज को समानता और न्याय के प्रति प्रेरित किया.शिक्षा और सेवा: गुरु रविदास जी ने शिक्षा के महत्व पर जोर दिया और अपने शिष्यों को उच्चतम शिक्षा पाने के लिए प्रेरित किया. अपने शिष्यों को शिक्षत कर उन्होंने शिष्यों को समाज की सेवा में समर्थ बनाने के लिए प्रेरित किया. मध्यकाल की प्रसिद्ध संत मीराबाई भी रविदास जी को अपना आध्यात्मिक गुरु मानती थीं. Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि SAHARA SAMACHaar.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

आमला में होगा द्वादश ज्योतिर्लिंग यात्रा का भव्य आयोजन

A grand event of Dwadash Jyotirlinga Yatra will be held in Amla. हरिप्रसाद गोहे आमला । महा शिवरात्रि के पावन शुभ अवसर को उत्सव का रूप देने इस बार विश्व विख्यात नैतिक एवं आध्यात्मिक मूल्य शिक्षण संस्थान ब्रह्माकुमारीज के स्थानीय सेवा केंद्र बैतूल, सारणी, भौरा आदि स्थानों पर पूर्व में ब्रह्माकुमारीज के बैनर तले द्वादश ज्योतिर्लिंग दर्शन यात्रा निकाली जा चुकी है । जिसमें श्रद्धालु शिव भक्तों ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया और भगवान भोलेनाथ के ज्योर्तिलिंग स्वरूप का दर्शन लाभ प्राप्त किया । उक्त आयोजित दर्शन यात्रा अंतर्गत आगामी दिनांक 27/04/2024 दिन मंगलवार को आमला स्थित स्थानीय ब्रह्मकुमारीज आश्रम के बैनर तले द्वादश ज्योतिर्लिंग दर्शन यात्रा का आयोजन आयोजित किया जा रहा है । आमला ब्रह्मकुमारी सेवा आश्रम संचालिका बहन बीके हेमलता ने बताया अन्य सेवा केंद्रों की तरह आमला में भी दिनांक 27/02/2024 को द्वादश ज्योतिर्लिंग दर्शन यात्रा निकाली जाएगी । यात्रा में भगवान शिव के द्वादश ज्योतिर्लिंग को सजाकर नगर भ्रमण कराया जाएंगा । भ्रमण के दौरान शिव भक्त भगवान भोलेनाथ के बारह ज्योतिर्लिंग स्वरूपों का दर्शन कर सकेंगे । दर्शन यात्रा बैतूल रामनगर ब्रह्मकुमारीज सेवाकेंद्र से निकलकर शहर के सभी मुख्य मार्गो से होकर वापस आमला पहुंच आमला में दर्शन यात्रा भ्रमण करेंगी l सभी भक्तों से निवेदन रहेगा की अपने-अपने स्थान पर यात्रा का स्वागत करें तथा शिव ज्योतिर्लिंगम की पूजा अर्चना करते हुए ज्योतिर्लिंग दर्शन का लाभ अवश्य उठाएं ।

जय श्रीराम घोष से गुंजा सीताराम, संकट मोचन हनुमान मंदिर,

Sitaram echoed with Jai Shri Ram Ghosh, Sankat Mochan Hanuman Temple. हरिप्रसाद गोहेआमला। मंगलवार अयोध्या मे भगवान श्रीराम जी के मंदिर में भगवान राम लला जी की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा की गई । आज के इस दिन को राम दीपावली का नाम दिया गया श्रीराम भक्तों ने सोमवार आमला सहित अंचल के ग्रामों में भी श्री राम दीपावली जगह , जगह उत्सव की तरह मनाई । नगर के मुख्य चौराहा जनपद चौक को आकर्षक रूप दे सजाया गया था । इस मौके पर चौक को भगवा ध्वजों से पाट दिया गया था । स्वागत द्वार लगाए गए थे वही विश्व हिंदू परिषद बजरंग दल द्वारा जनपद चौक पर सुंदरकांड का आयोजन किया गया । साथ ही जनपद चौक पर स्थित प्रसिद्ध सीताराम संकट मोचन हनुमान मंदिर में भी अयोध्या में राम मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा के शुभ अवसर को उत्सव का रूप देने दिन भर विविध धार्मिक आयोजन आयोजित कर मंदिर पहुंचे श्रद्धालु भक्तो को भंडारे की प्रसादी का वितरण किया गया । मंदिर समिति प्रमुख हनुमान भक्त श्याम सरमैया ने बताया इस मौके पर सीताराम संकट मोचन हनुमान मंदिर आमला एवं स्वर्ग आश्रम दुर्गा मंदिर समिति के संयुक्त तत्वावधान में उपस्थित श्रद्धालु भक्तजनों ने ग्यारह सौ द्वीप प्रज्वलित कर धूमधाम से राम दीपावली मनाई । प्रज्वलित द्वीप अयोध्या में राम आए हैं संदेश दे रहे थे । वहीं स्वर्ग आश्रम दुर्गा मंदिर में सुसज्जित गुंबज आकर्षण का केंद्र लग रहा था । उधर जनपद चौक पर विहिप ने महाआरती की गई जिसमें जनसैलाब उमड़ा था । महाआरती के बाद प्रसाद वितरण किया गया और देर शाम हजारो दीप जलाकर दीपावली मनाई गई ।

श्री राम चंद्र जी के स्वरूप में बाबा बटेश्वर 5100 दीपों से सजा शिवालय

Baba Bateshwar pagoda decorated with 5100 lamps in the form of Shri Ram Chandra Ji भोपाल । पुराने शहर के प्राचीन से श्री बड़वाले महादेव मंदिर में अयोध्या में प्रभु श्री राम लाल विराजमान होने के उपलक्ष्य में बाबा बटेश्वर को प्रभु श्री राम जी के स्वरुप में विराजमान किया गया, समिति के संयोजक संजय अग्रवाल ने बताया कि 5100 दीपों से पूरे मंदिर को सजाया गया। मंदिर गर्भ ग्रह में रंगोली और दीपमालाएं जलाई रात्रि 8 बजे श्रृंगार दर्शन कर महाआरती एवं प्रसाद वितरण हुआ। श्री बड़वाले महादेव मंदिर से ॐ नम: शिवाय मंडल के द्वारा निकली प्रभातफेरीॐ नम: शिवाय मंडल के द्वारा प्रात: 7:00 बजे प्रभात फेरी निकाली गई, जिसमें मंडल के सदस्यों द्वारा अखण्ड ॐ नम: शिवाय एवं राम घुन के भजन गाये फेरी श्री बड़वाले महादेव मंदिर से प्रारंभ होकर पुराने शहर के दयानंद चौक, लोहा बाजार, पीपल चौक, सराफा, लखेरापुरा से सोमवारा होते हुए शिवालय भवन में समापन हुआ। प्रभु राम मंदिर निर्माण का गवाह बन हरि हरात्मक शक्ति महायज्ञ मां दुर्गा धाम शक्तिपीठ मंदिर में सोमवार 10:00 बजे ढोल तसो बाजे झांकियां के साथ सैकड़ो भक्तगण नर नारियों राममय होकर श्री राम के जयकारे लगाते हुए। राम शोभा यात्रा में सम्मिलित होकर राम मंदिर निर्माण का उत्सव भव्यता और जोश के साथ मनाया जो अशोका गार्डन के मुख्य मुख्य मार्ग से होकर पुन: दुर्गा धाम मंदिर में संपन्न हुई । दोपहर 2:00 बजे से मुख्य यज्ञाचारी पंडित युगल किशोर शास्त्री ने सर्वप्रथम महायज्ञ के 9 हवन कुंडों में श्री राम प्रभु के 1001 आहुतियां डलवा कर महायज्ञ को 26 वा ऐतिहासिक पर्व मनाया।

साईं की 42 वर्षगाठ पर मंदिर में उमड़ा भक्तों का अपार जन सैलाब

A huge crowd of devotees gathered in the temple on the 42nd anniversary of Sai Baba आमला । नगर के रमली रोड रेल्वे बांध स्थित प्रसिद्ध साई मंदिर की 42 वी वर्षगाठ रविवार साई मंदिर समिति द्वारा धूमधाम एवं हर्ष उल्लास के साथ मनाई गई । समिति के आमंत्रण पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु साई भक्त मंदिर परिसर में पहुंचे थे । कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ साई वस्त्र अभिषेक कर हवन एवं पूजा अर्चना कर किया गया। इस मौके पर साई मंदिर समिति द्वारा विशाल महा भंडारे एवं संगीतमय जागरण का आयोजन किया गया था । जहां उपस्थित भक्तों ने भंडारे का प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ अर्जित किया एवं जागरण की प्रस्तुति का आनंद उठाया । समिति के शैलेंद्र दुबे ने बताया साई बाबा की वर्षगांठ मानाने एक सप्ताह से आयोजन की तैयारी की जा रही थी । कार्यक्रम में हजारों श्रद्धालु भक्त साई बाबा की पूजा अर्चना अभिषेक करने यहा पहुंचे थे । दूर-दराज से आए हजारों श्रद्धालुओं ने विशाल भंडारे में पहुचकर प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ अर्जित किया । इस वर्ष भी रमली रोड स्थित साईं बाबा की 42 वी वर्षगांठ मनाई गई सुबह 7:00 बजे हवन पूजन एवं बाबा का अभिषेक किया गया भंडारा प्रसादी वितरण और शिव भोले जागरण द्वारा भजन कार्यक्रम की प्रस्तुति दी गई ।

ग्वालियर में वाहनों पर श्री राम की झंडिया भी लगाई गई

Shri Ram flags were also installed on vehicles in Gwalior. ग्वालियर ! 22 जनवरी को अयोध्या में हो रहे राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह को लेकर देश भर में उत्साह का माहौल है ! ऐसे में ग्वालियर में नमो नमो ग्रुप द्वारा शहर के बाजारों और चौराहों में अभियान चलाकर वाहन चालकों के वहां पर श्री राम नाम की झंडिया लगाई गई ! ग्वालियर फूलबाग पर पहुंचे नमो नमो ग्रुप के सदस्यों के साथ भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष अभय चौधरी सहित अन्य कार्यकर्ता भी मौजूद रहे ! जहां वाहन चालकों को रोक कर 22 जनवरी को अयोध्या में हो रहे ! प्राण प्रतिष्ठा समारोह आयोजन की जानकारी दी गई इसके साथ वाहनों पर श्री राम की झंडिया भी लगाई गई ! इस दौरान जय श्री राम के नारों से फूल बाग चौराहा गूंज उठा !

राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह पूर्व रोशनी से जगमगा उठी अयोध्या नगरी

Ayodhya city illuminated with lights before Ram Mandir consecration ceremony अयोध्या में दिवाली जैसा माहौल… प्राण प्रतिष्ठा समारोह से पहले रोशनी से नहाए राज सदन, पुराने मंदिर अयोध्या ! अयोध्या के पूर्व राजा का भव्य आवास राज सदन, विभिन्न मंदिर और यहां अन्य इमारतें राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह के मद्देनजर रोशनी से जगमगा उठी है, जिससे इस मंदिर नगरी में दिवाली उत्सव जैसा माहौल बन गया है। प्राचीन ‘अयोध्या नगरी’ को आकर्षक ढंग से सजाया गया है खासतौर से राम पथ और धर्म पथ की साज-सज्जा देखने लायक है। अयोध्या की गलियों में ‘राम आएंगे’ और ‘अवध में राम आए हैं” जैसी गीतों की गूंज सुनायी दे रही है और मंदिर शहर की इमारतें भगवा ध्वज से पटी पड़ी हैं।‘प्राण प्रतिष्ठा’ के दिन शहर में चकाचौंध रहने की उम्मीद है क्योंकि कई मकान, मंदिर और अन्य इमारतें रोशनी से नहायी हैं। अयोध्या के शाही परिवार का घर रहा राज सदन रोशनी से जगमग है। सैकड़ों लोग, स्थानीय निवासी और दर्शक शनिवार देर रात तक इसके सुशोभित द्वार ‘लक्ष्मीद्वार’ के सामने तस्वीरें या सेल्फी लेने के लिए उमड़ पड़े। प्रवेश द्वार के शीर्ष पर भगवान राम की धनुष और बाण लिए तस्वीर लगायी गयी है और ‘जय श्री राम’ के नारे गूंज रहे। प्रवेश द्वार के मेहराब के नीचे एक झूमर लगाया गया है। यह साज-सज्जा नजदीकी राम पथ से गुजरने वाले लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही है। अयोध्या में 22 जनवरी को दिवाली उत्सव या संभवतः उससे बड़े पैमाने पर उत्सव मनाएँ जाने की उम्मीद है। बेगमपुरा इलाके में कई महीनों पहले खुला लॉज प्रभाराज पैलेस शुक्रवार रात को रोशनी से जगमग हो उठा। अयोध्या में रामलला प्राण प्रतिष्ठा समारोह 22 जनवरी को होगा और इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहेंगे।

राममय हुआ संतनगर 11 हजार रामभक्तों के साथ मुख्यमंत्री मोहन यादव ने किया हनुमान चालीसा पाठ, राम धुन पर झूमे रामेश्वर शर्मा

Santnagar became Ram-filled; Chief Minister Mohan Yadav recited Hanuman Chalisa with 11 thousand Ram devotees. भोपाल। अयोध्यानाथ भगवान श्री राम जी के भव्य मंदिर में विराजमान होने के उपलक्ष्य में पूरा मध्यप्रदेश राममय हो रहा है। अपने नवाचारों और हिन्दुत्व वादी छवि के लिए लगातार चर्चित रहने वाले विधायक रामेश्वर शर्मा भी राजा राम के आगमन पर लगातार विभिन्न आयोजन करा रहे हैं। शनिवार को उन्होंने संत हिरदाराम नगर स्थित हेमू कालानी स्टेडियम में मध्यप्रदेश का सबसे बड़ा सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ का आयोजन कराया। इस आयोजन में 11 हजार रामभक्तों ने एक साथ उपस्थित होकर हनुमान चालीसा का पाठ किया। विधायक रामेश्वर शर्मा के कार्यक्रम में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव व उप-मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल भी सम्मलित हुए। उन्होंने दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया व रामभक्तों के साथ भक्तिभाव के साथ हनुमान चालीसा का पाठ किया। आयोजन से पूर्व मुख्यमंत्री, उप-मुख्यमंत्री व विधायक शर्मा ने शहीद हेमू कालानी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की, जिसके बाद कार्यक्रम विधिवत प्रारंभ हुआ। बच्चों के साथ राम धुन पर झूमे रामेश्वर शर्मा हेमू कालानी स्टेडियम में आयोजित सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ कार्यक्रम में इतनी भीड़ जुटी कि पूरा स्टेडियम रामभक्तों से खचाखच भरा था। कार्यक्रम के दौरान नागरिकों के उत्साह में पूरा स्टेडियम झूम उठा। 11 हजार रामभक्तों का स्वर जब हनुमान चालीसा के रूप में गूँजा तो कण-कण राममय हो गया। विधायक रामेश्वर शर्मा भी राम भजनों पर बच्चों के साथ जमकर नाचते दिखे। विधायक शर्मा ने इस दौरान भजन भी गाए और राम-गाड़ी पर बैठकर आनंद लिया।  रामेश्वर शर्मा हिन्दुओं की प्रखर आवाज हैं – राजेन्द्र शुक्ल, उप-मुख्यमंत्री मप्र कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मध्यप्रदेश के उप-मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि – वर्षों के संघर्ष के बाद यह शुभ घड़ी आई है जब हम अपने रामलला को भव्य मंदिर में विराजमान होते देख रहे हैं। इस घड़ी में ऐसा भव्य आयोजन कराकर विधायक रामेश्वर शर्मा ने रामभक्तों की आस्था को और प्रबल किया है। जिस तरह उत्तर प्रदेश में योगी जी और असम में हेमंत विस्वा सरमा हिन्दुओं की प्रखर आवाज हैं, उसी तरह मध्यप्रदेश में भाई रामेश्वर शर्मा हिन्दुओं की प्रखर आवाज है। उनका हर आयोजन भव्य और अनोखा होता है। इस सफल आयोजन के लिए उन्हें बधाई।  11 हजार रामभक्तों के साथ सामूहिक हनुमान चालीसा का पाठ प्रशंसनीय – मुख्यमंत्री मोहन यादव। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अयोध्या में श्री राम मंदिर के लिए कई जन्मों के बाद प्राण प्रतिष्ठा हो रही है। हम सभी सौभाग्यशाली हैं, ये शुभ घड़ी सामने आई है। इसके लिए गत पांच सौ वर्ष से कई पीढ़ियां खप गईं। आने वाली 22 जनवरी को सुशासन और रामराज का नया इतिहास बनेगा। नये दौर का नया भारत बनेगा। उन्होंने आगे कहा कि हनुमान चालीसा से भक्ति और शक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। अयोध्या में श्री रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर भगवान राम के अनन्य भक्त हनुमान जी को आधार बनाकर 11 हजार रामभक्तों के साथ सामूहिक हनुमान चालीसा का पाठ प्रशंसनीय है। हम सभी के लिए भगवान श्रीराम आराध्य हैं। अयोध्या में मंदिर का बनना अखंड भारत की दिशा में एक बड़ा कदम है। भारतवासी आज समृद्धशाली अतीत को याद कर रहे हैं। सात जन्मों के पुण्योदय से राम काज कर पाए रहा हूँ। – रामेश्वर शर्मा कार्यक्रम में संबोधित करते हुए विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि – धन्य हैं वो लोग जिन्होंने रामलला के लिए तन, मन, धन और प्राण समर्पित कर दिए। जिनके बलिदानों की कीमत पर आज हमने रामलला का भव्य मंदिर पाया है। मैं स्वयं कारसेवा के लिए गया। उस समय पर भी मेरा यही विचार था कि “यदि रामलला के काम न आए तो बेकार जिंदगानी है” मेरा आज भी यही विचार है। मैं तन-मन-प्राण लगाकर भी राम काज करने को आतुर रहता हूँ। उन्होंने आगे कहा कि अब कुछ घंटों के अंतराल के बाद हमारी आस्था के केन्द्र मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम अपनी जन्मभूमि पर वापस लौट रहे हैं। उनके आगमन के हर्ष में पूरा देश सराबोर है। इसी हर्ष के वशीभूत होकर हमने 11 हजार रामभक्तों के साथ सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ का आयोजन किया है।  कार्यक्रम के बाद मीडिया से चर्चा करते हुए विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि – जब 11 हजार रामभक्तों का स्वर श्री हनुमान चालीसा के रूप में गुंजायमान हुआ तो ऐसा लगा जैसे अयोध्यानाथ स्वयं प्रकट होकर पवनसुत स्तुतियों को आशीष प्रदान कर रहे हों। रामभक्ति में सब ऐसे रमे कि लग रहा था मानो स्टेडियम का कण-कण जीवंत होकर राम धुन गा रहा था। उन्होंने आगे कहा कि राम जी के अभिनंदन में यह काज करके मेरा जीवन धन्य हो गया। मेरे सात जन्मों के पुण्यों के उदय से  राम जी, हनुमान जी की कृपा से और रामभक्तों की आस्था से यह आयोजन सफलता पूर्वक सम्पन्न हुआ। संत नगर वालों ने संपत्ति छोड़ दी लेकिन धर्म नहीं छोड़ा – रामेश्वर शर्मा विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि संत नगर वो भूमि है जिसने धर्म के लिए सर्वस्व त्याग का पाठ सिखाया है। जब 1947 में देश विभाजन हुआ और सिंधी भाईयों से धर्मपरिवर्तन की शर्त रखी तो उन्होंने संपत्ति, घर, द्वार सब छोड़ दिया लेकिन अपना धर्म नहीं छोड़ा। उनकी धर्मनिष्ठा हम सबके लिए प्रेरणा है। इसलिए आज इस आयोजन के लिए संत हिरदाराम नगर की पुण्यभूमि को चुना। धर्मभूमि पर राम काज कर के स्वयं को धन्य पाता हूँ।

रामलला प्राण प्रतिष्ठा का दिन दिवाली की तरह मनाएं , उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला

Celebrate the day of Ramlala Pran Pratistha like Diwali, Deputy Chief Minister Rajendra Shukla भोपाल ! आज हमारे देश के करोड़ों लोगों का मस्तक गर्व से ऊंचा करने वाला काम हो रहा है, 22 जनवरी का दिन इतिहास के पन्नों में स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा ! उप मुख्यमत्री राजेंद्र शुक्ला ने आह्वान किया है कि 22 जनवरी को हर व्यक्ति अपने घर 11 दीपक जलाए। उन्होंने कहा कि उस पावन दिन एक भी ऐसा घर न हो, जहां ग्यारह दीपक न जले। रामनवमी को जिस उत्साह से मनाया जाता है, उसी उत्साह से उन्होने राम मंदिर उद्घाटन के दिन भी उत्सव मनाने का आग्रह किया है। उप मुख्यमंत्री ने किया दीपक जलाने का आह्वानराजेंद्र शुक्ला ने कहा कि दो दिन बाद भव्य मंदिर का उद्घाटन हो रहा है और सारा देश मोदी जी की इस कुशलता का लोहा मान रहा है। उन्होने कहा कि ‘सारे देश में उमंग और उत्साह है। हर घर में भगवान राम की पूजा आराधना हो रही है। सुंंदरकांड के पाठ हो रहे हैं। हनुमान चालीसा के पाठ हो रहे हैं। हमारी सबसे बड़ी ताकत धर्म और अध्यात्म ही है। दुनिया में बहुत से देश हो सकता है हमसे आगे हों लेकिन धर्म और अध्यात्म के मामले में वो हमारे सामने बौने हैं अभी भी। हमारे सामने सारी दुनिया परंपरा और अध्यात्म की ताकत के आगे नतमस्तक होती है। इसीलिए इसका संरक्षण और संवर्धन भी जरुरी है और उस दिशा में रामजन्मभूमि पर भव्य राममंदिर का निर्माण बहुत बड़ा कदम है जो आज हमारे देश के करोड़ों लोगों का मस्तक गर्व से ऊंचा करने वाला काम हो रहा है। 22 जनवरी का दिन इतिहास के पन्नों में स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा। इस क्षण को हम सबको आगे बढ़ कर उत्साह के साथ मनाने की जरूरत है। 22 जनवरी को कोई भी घर ऐसा न हो जहां पर हम 11 दीपक जलाकर उत्साह न मनाएं।”अयोध्या राम मंदिर उद्घाटन और रामलला की प्राण प्रतिष्ठा में सिर्फ दो दिन बाकी है और इसे लेकर देशभर में उत्साह का माहौल है। इसे लेकर अयोध्या में तो तैयारियां जारी ही हैं लेकिन देश भर के अलग अलग स्थानों पर भी ज़ोर शोर से व्यवस्थाएं की जा रही हैं। मंदिरों में सफाई अभियान चल रहा है और कई तरह के धार्मिक अनुष्ठान हो रहे हैं। अब उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने भी आह्वान किया है कि इस दिन को दीपावली की तरह मनाएं और श्रीराम के नाम पर सभी लोग अपने घरों में ग्यारह दीपक जलाएं।

साहू समाज द्वारा हल्दी कुमकुम कार्यक्रम किया

Haldi Kumkum program organized by Sahu Samaj आमला।।साहू समाज की महिलाओं ने हल्दी कुमकुम का कार्यक्रम सम्पन्न किया।आमला नगर की सभी साहू समाज की महिलाएं इस कार्यक्रम में शामिल हुई।कार्यक्रम बोडखी बाजार में मनोहर साहू के भवन में हुआ।जिसमे दुर्गा अनिल साहू,आशा विजय साहू द्वारा सभी महिलाओं को शुभकामनाएं दी और सभी के जीवन में खुशहाली की प्रार्थना कर हल्दी कुमकुम भेट की गई।

हर्ष उल्लास से गौरव दिवस मनाया व सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन 

Pride Day celebrated with joy and cultural program organized हरिप्रसाद गोहे आमला । विकास खंड आमला के ग्राम केदार खेड़ा में हर्ष उल्लास से गौरव दिवस मनाया गया । कार्यक्रम में ग्राम के बच्चे युवा साथी बुजुर्ग गण तथा माताओं बहनों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया । कार्यक्रम प्रातः 8:00 बजे राम धुन व साथ डिंडी शोभा यात्रा के साथ शुरू हुआ । डिंडी श्री सदाराम हुडे के घर से प्रारंभ होकर ग्राम के हनुमान मंदिर, माता मैया होते हुए नांदया घाट स्थित शिवालय होकर हनुमान मंदिर पर महा आरती के साथ यात्रा संपन्न हुई । गांव में डिंडी का घरोघर पूजन किया गया जिससे पूरा गांव राममय हो गया । तत्पश्चात हुए सांस्कृतिक कार्यक्रम बहुत ही आकर्षण का केंद्र रहे । बालमानुहार बच्चों ने गीत, नृत्य के जरिए अनेक शिक्षा प्रद एवं महिला सशक्तिकरण का संदेश दिया । बाद भंडारे का प्रसाद वितरण किया गया । ग्राम के मुख्य अतिथि माननीय पटेल गुरुबक्स जी पुण्डे,श्री हरिश्चंद जी हुडे एवं भीमराज जी हुडे ने सभा को संबोधन कर इनाम वितरण किया । मुख्य अतिथि श्रीमती तारा हुडे तथा कौशल्या हुडे ने भी इनाम वितरण किया । कार्यक्रम का संचालन प्रवीण हुडे ने तथा आभार प्रदर्शन संजय कायस्थ ने किया। सांस्कृतिक कार्यक्रम में टिया, राधा लुभी चानू अर्पणा सुरुचि पूर्वी एकु तिक्छू ,लक्की ड्रा कांटेस्ट  खुशबू तथा दीक्षा ने संपन्न कराया । कार्यक्रम में शामिल श्री शिवपाल जी हुडे ,चिरोजी ,राजेश उत्तम कमलेश भूषण  लीलाधर ऊदल गौरीशंकर कायस्थ नीलू परसराम दिलीप , अरविंद मारोती सतपूते, राजू कायस्थ केदार कायस्थ रोजगार सहायक हेमंत हुडे ,सरपंच प्रमोद चौकीकर ख्यालीराम मोड़क हरिराम  सतपुते कमल पुंडे  टीकाराम  संतोष कवराई  राजेंद्र धनराज जग्गू बसंत चौकीकर तथा गांव की सभी मातृशक्ति तथा ग्रामीणों ने भरपूर सहयोग किया ।

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