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कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह के भाई लक्ष्मण सिंह पर पार्टी ने बड़ा एक्शन, 6 साल के लिए पार्टी से निष्कासित

भोपाल  मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह के छोटे भाई और पूर्व सांसद लक्ष्मण सिंह को कांग्रेस पार्टी ने 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया है. कांग्रेस अनुशासन समिति ने ये कदम लक्ष्मण सिंह की ओर से पार्टी विरोधी गतिविधियों और वरिष्ठ नेताओं, विशेष रूप से पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी और रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ की गई टिप्पणियों के चलते उठाया है.  दरअसल, लक्ष्मण सिंह ने बीते दिनों एक विवादास्पद बयान दिया था, जिसमें उन्होंने राहुल गांधी, रॉबर्ट वाड्रा और जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला पर निशाना साधा था. ‘मुझे निकालना है तो निकाल दे’ उन्होंने उमर अब्दुल्ला पर आतंकवादियों से मिले होने का गंभीर आरोप लगाया था. इसके अलावा उन्होंने राहुल गांधी को नसीहत देते हुए कहा था कि पार्टी के नेताओं को सोच-समझकर बोलना चाहिए, नहीं तो उन्हें चुनाव में इसका परिणाम भुगतना पड़ेगा. लक्ष्मण सिंह ने ये भी कहा था, ‘अगर पार्टी को मुझे निकालना है तो आज ही निकाल दे.’ ‘पार्टी ने नहीं नुकसान पहुंचाने वालों की जगह’ लक्ष्मण सिंह के इस बयान को पार्टी को नुकसान पहुंचाने वाले बताया गया और हाल ही में जब राहुल गांधी भोपाल में संगठन की बैठक में शामिल होने के लिए पहुंचे थे तो उन्होंने कहा था कि पार्टी के खिलाफ बोलने वालों पर कार्रवाई होगी. राहुल गांधी ने दो टूक कहा था कि पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाने वालों को पार्टी में रखने की कोई जरूरत नहीं है. राहुल गांधी को लेकर की थी टिप्पणी लक्ष्मण सिंह ने राहुल गांधी और सांसद प्रियंका गांधी के पति रॉबर्ट वाड्रा को लेकर भी टिप्पणी करने की भी गुस्ताखी की थी. उन्होंने कहा था, रॉबर्ट वाड्रा जीजा जी, राहुल जी का, उन्होंने क्या कहा, मुसलमानों को सड़क पर नमाज नहीं पढ़ने देते इसलिए आतंकवादियों ने हमला किया. ये बचपना हम लोग कब तक झेलेंगे. राहुल गांधी सोच समझकर बात करें, वो नेता प्रतिपक्ष हैं. मध्य प्रदेश के राघोगढ़ सीट से कांग्रेस विधायक रह चुके लक्ष्मण सिंह के इस बयान ने कांग्रेस पार्टी के लिए असहज माहौल पैदा कर दिया था. पार्टी की अनुशासनात्मक कार्रवाई समिति के सदस्य सचिव तारिक अनवर की ओर से बुधवार को जारी विज्ञप्ति में यह जानकारी दी गई। विज्ञप्ति में कहा गया है, “कांग्रेस अध्यक्ष (मल्लिकार्जुन खड़गे) ने मध्य प्रदेश के पूर्व विधायक लक्ष्मण सिंह को उनकी पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण तत्काल प्रभाव से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से छह साल की अवधि के लिए निष्कासित कर दिया है।” लक्ष्मण सिंह ने हाल के दिनों में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के पति रॉबर्ट वाड्रा को लेकर आलोचनात्मक टिप्पणी की थी। कुछ सप्ताह पहले ही सिंह ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के पति रॉबर्ट वाड्रा को ‘नासमझ’ करार दिया था। साथ ही उन्होंने दावा किया था कि देश उनकी अपरिपक्वता के परिणाम भुगत रहा है। 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के कुछ दिनों बाद कांग्रेस नेता ने रॉबर्ट वाड्रा की टिप्पणी पर कड़ी आलोचना की थी। वॉड्रा ने कहा था कि आतंकवादियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संदेश दिया है कि भारत में ‘मुसलमान कमजोर महसूस कर रहे हैं।’ इस पर लक्ष्मण सिंह ने कहा कि व्यवसायी का बयान “देश की सुरक्षा के लिए खतरा है”। उन्होंने यह भी दावा किया था कि जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला आतंकवादियों के साथ “मिलीभगत” कर सकते हैं। उन्होंने कहा था, “रॉबर्ट वाड्रा का यह बयान कि आतंकवादियों ने इसलिए हमला किया क्योंकि उन्होंने मुसलमानों को सड़क पर नमाज अदा करने की अनुमति नहीं दी, न केवल गैर-जिम्मेदाराना है बल्कि यह देश की सुरक्षा के लिए भी खतरा है। मैं यह सब कैमरे के सामने कह रहा हूं, ताकि कोई भ्रमित न हो। कांग्रेस को बोलने से पहले 10 बार सोचना चाहिए, अन्यथा जनता चुनावों में इसका जवाब देगी।” कौन हैं लक्ष्मण सिंह आपको बता दें कि लक्ष्मण सिंह कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और एमपी के पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह के छोटे भाई हैं. वह मध्य प्रदेश की राजनीति में एक जाना-माना चेहरा हैं. वो पांच बार सांसद रह चुके हैं. हालांकि, बीते दिनों की पार्टी में सक्रियता भी कम देखी गई है.  

विशाल ने किया पहला वार, फिर लाश खाई में फेंकी… पति राजा की मौत का जश्न मनाती रही सोनम!

राजा को शादी के बाद सोनम ने छूने तक नहीं दिया, बोली थी कामाख्या में दर्शन के बाद ही करीब आएंगे सोनम का घातक इश्क, साजिश को प्यार समझता रहा राजा… जो-जो सोनम कहती गई चुपचाप करता गया विशाल ने किया पहला वार, फिर लाश खाई में फेंकी… पति राजा की मौत का जश्न मनाती रही सोनम!  इंदौर  राजा रघुवंशी की शादी को चंद दिन ही हुए थे. प्यार में भरोसा था, अपनापन था, लेकिन एक अजीब सी दूरी भी थी. जो उसकी पत्नी सोनम ने खुद बनाई थी. पुलिस सूत्रों के अनुसार, सोनम ने शादी के बाद राजा से साफ कह दिया था कि वह तब तक उसके पास नहीं आएगी जब तक वे दोनों कामाख्या देवी के दर्शन नहीं कर लेते. सोनम ने तो शादी के बाद राजा को छूने तक नहीं दिया था. राजा अपनी पत्नी की हर बात को आस्था और सम्मान का विषय समझता रहा, उसकी इस बात को भी मान गया.  मायके से बनी हत्या की साजिश राजा की हत्या की पूरी योजना सोनम ने अपने मायके से रहते हुए बनाई थी. 15 मई को वह मायके चली गई और वहीं रहकर गुवाहाटी की टिकट बुक करवाई. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, सोनम फोन पर अपने प्रेमी राज कुशवाहा के साथ लगातार संपर्क में थी. सोनम और राज ने मिलकर प्लान तैयार किया कि राजा को मेघालय ले जाकर रास्ते से हटा दिया जाएगा. राजा को नहीं मार पाए तो मैं खुद धक्का दे दूंगी क्राइम ब्रांच को मिले इनपुट्स के मुताबिक, सोनम ने राज कुशवाहा से कहा था कि अगर उसके दोस्त विशाल, आनंद और आकाश राजा को नहीं मार पाए तो वह खुद ही फोटो खींचने के बहाने राजा को खाई में धक्का दे देगी. इतना ही नहीं, अगर साजिश खुल जाती है तो वे नेपाल भागने की भी योजना बना चुके थे. कामाख्या से मेघालय की ओर सोनम ने राजा को कामाख्या मंदिर ले जाने के बाद मेघालय घूमने का सुझाव दिया. राजा को पहाड़ पसंद नहीं थे, लेकिन पत्नी के कहने पर वह चल पड़ा. सोनम ने न सिर्फ गंतव्य तय किया, बल्कि ट्रैवल प्लान से लेकर रहने की व्यवस्था तक खुद की. इंदौर क्राइम ब्रांच सूत्रों के अनुसार, सोनम ने राजा की हत्या की पूरी योजना शादी के बाद के एक हफ्ते में तैयार कर ली थी. जब मेघालय पुलिस ने इंदौर में पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ शुरू की तो इंदौर पुलिस ने कुछ इनपुट साझा करते हुए दावा किया कि सोनम ने पहले ही ठान लिया था कि उसे राजा को हर हाल में मारना है. वारदात का दिन 23 मई को राजा और सोनम मेघालय के नोंगरीहाट गांव के पास पहुंचे. सोनम के कहने पर राजा को सुनसान रास्ते पर ले जाया गया. वहीं पर तीनों आरोपियों  विशाल चौहान, आकाश राजपूत और आनंद कुर्मी ने उस पर हमला किया. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के अनुसार, राजा के सिर पर दो धारदार हथियार से वार किए गए एक आगे से और एक पीछे से. हत्या के बाद सोनम हुई गायब हत्या के बाद सोनम लापता हो गई. लेकिन अब खुलासा हुआ है कि 25 से 27 मई तक वह इंदौर के देवास नाका इलाके में एक किराए के फ्लैट में छिपी रही. मंगलवार को पुलिस ने यह भी बताया कि हत्याकांड में शामिल आरोपी विशाल के घर से उसके खून लगे कपड़े बरामद किए गए हैं, जिन्हें अब फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा जाएगा. सोनम का घातक इश्क, साजिश को प्यार समझता रहा राजा…  सोनम और राजा की नई-नई शादी हुई थी. रिश्ते में नयापन था, भरोसा था, और था ऐसा प्यार जिसमें ना शब्द की कोई जगह नहीं थी. पत्नी जो-जो कहती गई, वही राजा की दुनिया बनता गया. राजा रघुवंशी अपनी पत्नी सोनम की हर बात बिना किसी सवाल के मानता चला गया. और शायद यही उसकी जिंदगी का सबसे बड़ा या कहें अंतिम फैसला साबित हुआ. हनीमून पर कब जाना है, कौन-सा रास्ता चुनना है, क्या पहनना है, कितने पैसे साथ ले जाने हैं हर फैसला सोनम लेती रही और राजा सिर झुकाकर मंजूरी देता रहा. लेकिन राजा को क्या पता था कि उसकी पत्नी क्यों हर बात में उससे हां करवा रही है.सोनम तो एक ऐसी साजिश रच रही थी, जो उसे सीधा मौत की घाटी तक ले जाने वाली थी.  रिश्ता जो परिचय पुस्तिका से शुरू हुआ राजा रघुवंशी इंदौर का ट्रांसपोर्ट कारोबारी के घर का था. उसके परिवार में माता-पिता और दो भाई और भाभी हैं. सोनम का परिवार इंदौर के ही कुशवाह नगर में रहता है, जहां पिता का प्लायवुड का कारोबार है. राजा और सोनम का रिश्ता रघुवंशी समाज की परिचय पुस्तिका में दर्ज विवरणों से जुड़ा था. फिर दोनों परिवारों में संपर्क हुआ और रिश्ता तय हुआ. राजा  के घर वाले बकायदा सोनम के घर जाकर उसे पसंद कर आए थे. इसके बाद शादी तय हुई.  राजा की मां उमा रघुवंशी बताती हैं कि हमने अपनी बहू को बहुत स्नेह से स्वीकार किया था. उनकी मां से बातें होती रहती थीं, सब ठीक लग रहा था. शादी, और 4 दिन बाद विदाई 11 मई 2025 को राजा और सोनम की शादी पूरे समाज की उपस्थिति में धूमधाम से हुई. उसी रात सोनम अपने ससुराल पहुंच गई. लेकिन मात्र चार दिन बाद वह अपने मायके लौट गई. उस वक्त जेठ का महीना चल रहा था, इसलिए पगफेरे की रस्म भी नहीं हुई थी. उमा रघुवंशी कहती हैं, हमने कहा था कि बहू को बुला लें, लेकिन उनकी मां ने कहा – जून में बुलाएंगे. सोनम की कौन कौन सी बात मानता गया राजा  राजा का मन हनीमून पर जाने का नहीं था. परिवार ने बताया कि पगफेरे के बाद जून में जाने की योजना थी. लेकिन सोनम ने फोन पर जिद की शिलांग चलते हैं. राजा मान गया. उसने किसी से कुछ नहीं कहा. यह पहला संकेत था कि सोनम की बात राजा टाल नहीं पाता था. परिवार वालों के मुताबिक, राजा को पहाड़ पसंद नहीं थे, लेकिन सोनम ने उसे शिलांग की हरियाली और वादियों का सपना दिखाया. वह तैयार हो गया. इसके बाद हनीमून ट्रिप का प्लान बना, और 20 मई को दोनों मेघालय के लिए रवाना हो गए. … Read more

न हनीमून की फोटो, न वीडियो कॉल… सास की मांग को बार-बार ठुकरा रही थी वेबफ़ा सोनम

इंदौर मेघालय में हनीमून के दौरान इंदौर के राजा रघुवंशी की हत्या के मामले में गिरफ्तार उनकी पत्नी सोनम रघुवंशी की बिहार में एंट्री सोमवार को रात करीब 12 बजे बक्सर से हुई। बक्सर के आदर्श नगर थाने में मेघालय पुलिस टीम आधे घंटे तक रुकी। सिक्योरिटी को लेकर अफसरों से बात हुई। फिर वहां से मेघालय पुलिस की गाड़ी को बिहार पुलिस ने एस्कॉर्ट करना शुरू किया। इसके बाद पटना एयरपोर्ट तक एस्कॉर्ट मिलती रही। अहले सुबह करीब तीन-साढ़े तीन बजे सोनम रघुवंशी को पटना के फुलवारी शरीफ थाने में लाया गया। फिर यहां से कोलकाता और फिर शिलॉन्ग लेकर मेघालय पुलिस पहुंचेगी। सोनम पर अपने पति राजा रघुवंशी की हत्या की साजिश रचने का गंभीर आरोप है। ये पूरी घटना किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है, जिसमें प्यार, शादी, हनीमून और फिर एक खौफनाक साजिश शामिल है। गाजीपुर से पटना: रात भर जागती रही सोनम 9 जून को उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से गिरफ्तार सोनम रघुवंशी को मेघालय पुलिस की पांच सदस्यीय टीम सड़क मार्ग से पटना लेकर पहुंची। बताया जा रहा है कि गाजीपुर से रात में शुरू हुई ये यात्रा सोनम के लिए तनाव भरी रही। बक्सर के आदर्श नगर थाने में लगभग आधे घंटे के ठहराव के दौरान भी सोनम ने न तो कुछ खाया और न ही किसी से बात की। वो पूरी रात चुपचाप जागती रही, जैसा कि ड्राइवर ज्ञानंजय कुमार ने मीडिया को बताया। सोनम ने सिरदर्द की शिकायत की, लेकिन भोजन से इनकार कर दिया और लगातार पानी मांगती रही। पटना में भोजन और हवाई अड्डे तक एस्कॉर्ट सुबह करीब तीन-साढ़े तीन बजे सोनम को पटना के फुलवारी शरीफ पुलिस थाने लाया गया, जो हवाई अड्डे के पास स्थित है। यहां उसे भोजन कराया गया और थोड़ी देर आराम करने का मौका मिला। इस दौरान सोनम रघुवंशी टेबल पर माथा रखकर कुछ देर के लिए सो गई। ये सबकुछ बिहार पुलिस और मेघालय पुलिस की संयुक्त सुरक्षा व्यवस्था में हुई। बक्सर के बाद मेघालय पुलिस वाहनों से अलग हो गई, जबकि बिहार पुलिस ने एस्कॉर्ट किया। ये सुनिश्चित किया गया कि सोनम कड़ी निगरानी में रहे। गुवाहाटी होते हुए शिलॉन्ग के लिए उड़ान फुलवारी शरीफ थाने से सुबह करीब 11:30 बजे सोनम को पटना हवाई अड्डे के लिए रवाना किया गया। मेघालय पुलिस की टीम उसे 12:40 बजे की फ्लाइट से गुवाहाटी होते हुए शिलॉन्ग ले जाना चाह रही थी। हालांकि, मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सोनम का टिकट अभी तक कन्फर्म नहीं था और समय-सारणी में बदलाव की संभावना बनी हुई थी। यात्रा के दौरान सोनम की निगरानी में मेघालय से बिहार पुलिस तक संयुक्त सुरक्षा व्यवस्था रही, और गाजीपुर से बक्सर सीमा तक यूपी पुलिस एस्कॉर्ट में थी। राजा की हत्या के बाद सोनम ने इंदौर जाकर राज के साथ बिताया था वक्त इंदौर के राजा रघुवंशी की हत्याकांड में एक के बाद एक नए खुलासे हो रहे हैं। अब पता चला है कि सोनम ने अपने सामने ही राजा की हत्या कराई थी। सोनम राज को फोटो शूट के बहाने पहाड़ी पर ले गई जहां सुपारी किलर्स ने राजा को मौत के घाट उतारकर खाई में फेंक दिया गया। यह भी पता चला है कि वारदात वाली जगह पर खुद सोनम भी मौजूद थी और उसने आरोपियों से कहा- इसे मार डालो। इस बीच शिलॉन्ग के एसपी ने बताया है कि राजा की हत्या के बाद सोनम इंदौर भी गई थी। शिलॉन्ग के एसपी विवेक श्याइम ने इंडिया टुडे से बातचीत में कहा कि राजा हत्याकांड को अंजाम देने वालों को दबोचने के लिए पूरे ऑपरेशन को ‘ऑपरेशन हनीमून’ नाम दिया था, जिसमें 120 पुलिसकर्मी शामिल थे। उन्होंने बताया कि 3 बड़ी टीमों को इस काम में लगाया गया था। उन्होंने बताया कि 3-4 दिन की तहकीकात के बाद ही उन्हें पता चल गया था कि इस पूरे कांड में सोनम शामिल है। सभी तथ्यों को वेरिफाई करने के बाद आरोपियों की गिरफ्तारी शुरू की गई। हत्या के बाद इंदौर गई थी सोनम: SP एसपी ने बताया कि राजा की हत्या के बाद सोनम की आरोपियों के साथ होम स्टे के पास मुलाकात भी हुई थी, जोकि घटना स्थल से करीब 10 किलोमीटर दूर था। इंडिया टुडे की रिपोर्ट में मेघालय पुलिस के अधिकारियों के हवाले से बताया कि राजा की हत्या के बाद सोनम इंदौर भी गई थी। वह सिलीगुड़ी के रास्ते ट्रेन से इंदौर गई थी। वह वहां एक किराये के कमरे में रही। सोनम की इंदौर में राज से भी मुलाकात हुई थी। फिर वह एक किराये की गाड़ी से इंदौर से गाजीपुर गई थी जहां उसने सरेंडर किया। मेघालय पुलिस से सोनम के इस दावे का भी खंडन हो गया है जिसमें उसने कहा था कि उसे अपहरण कर लिया गया था और आरोपी गाजीपुर में उसे छोड़कर फरार हो गए। सोनम ने गाजीपुर पुलिस के साथ पूछताछ में यह भी कहा कि आरोपियों ने गहनों की लूट के लिए राजा की हत्या की थी। गौरतलब है कि 11 मई को शादी के बाद राजा और सोनम हनीमून के लिए शिलॉन्ग गए थे। यहां दोनों अचानक लापता हो गए। बाद में पता चला कि राजा की हत्या कर दी गई है। हत्या के आरोप में राजा की पत्नी सोनम और उसके कथित प्रेमी राज समेत अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है। ट्रांजिट रिमांड और विस्तृत पूछताछ की तैयारी मेघालय पुलिस को सोनम की 72 घंटे की ट्रांजिट रिमांड मिली है। इस दौरान पुलिस सोनम से गहन पूछताछ करेगी और पति राजा की हत्या की साजिश के हर पहलू को उजागर करने की कोशिश करेगी। इसी दौरान, मामले में गिरफ्तार अन्य आरोपी- राज कुशवाहा, आकाश राजपूत और विशाल सिंह चौहान को भी शिलॉन्ग लाकर उनसे पूछताछ की तैयारी है। पुलिस हत्या स्थल, हथियारों की आपूर्ति और पूरी साजिश के नेटवर्क जैसी जानकारियों को जुटाने का प्रयास करेगी। राजा के भाई का आरोप: और भी लोग शामिल राजा रघुवंशी के भाई विपिन रघुवंशी ने इस मामले में और भी लोगों के शामिल होने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि इस साजिश में पांच से ज्यादा आरोपी हैं और सोनम ने खुद को केवल मोहरा बना कर रखा है। विपिन ने दावा किया है … Read more

छात्रावासों में सुविधाओं की एकरूपता और गुणवत्ता पर जोर, लापरवाही पर होगी सख्त कार्रवाई : मुख्यमंत्री साय

रायपुर : जनजातीय समाज के विकास के प्रति हमारी अटूट प्रतिबद्धता : मुख्यमंत्री साय मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मंत्रालय में आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा नई छात्रावास-आश्रम प्रबंधन प्रणाली का शुभारंभ, आश्रम छात्रावासों के संचालन के लिए 85 करोड़ रुपए का ऑनलाइन अंतरण छात्रावासों में सुविधाओं की एकरूपता और गुणवत्ता पर जोर, लापरवाही पर होगी सख्त कार्रवाई जनजातीय समाज के विकास के प्रति हमारी अटूट प्रतिबद्धता : मुख्यमंत्री सायजनजातीय समाज के विकास के प्रति हमारी अटूट प्रतिबद्धता : मुख्यमंत्री साय रायपुर   मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में आदिम जाति विकास, अनुसूचित जाति विकास, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास विभाग के कार्यों की उच्चस्तरीय समीक्षा की। इस अवसर पर उन्होंने छात्रावास-आश्रम प्रबंधन के लिए नवीन पोर्टल का शुभारंभ किया। साथ ही, आगामी शिक्षण सत्र 2025-26 में प्रदेश के आश्रम छात्रावासों के संचालन हेतु नई व्यवस्था के अंतर्गत शिष्यवृत्ति एवं भोजन सहायता की पहली किश्त (जुलाई से सितंबर) के रूप में 85 करोड़ रुपए का ऑनलाइन अंतरण भी किया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार विशेष पिछड़ी जनजातियों और आदिवासी समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुँचाने के लिए संकल्पित है। हमारा लक्ष्य है कि इन वर्गों का जीवन स्तर बेहतर हो, वे आत्मनिर्भर बनें और विकास की मुख्यधारा में सम्मिलित हों। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जनजातीय समुदाय की सदैव चिंता करते हैं और उनके विकास के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रहे हैं। केंद्र सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और आवास जैसी बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित करने हेतु अनेक योजनाएं संचालित कर रही है। मुख्यमंत्री साय ने पीएम जनमन एवं धरती आबा जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने पीएम जनमन योजना के अंतर्गत स्वीकृत आवास और सड़क निर्माण कार्यों को उच्च गुणवत्ता के साथ समय-सीमा में पूर्ण करने पर जोर दिया। साथ ही, पीएम जनमन योजना के अंतर्गत शिविरों के माध्यम से हितग्राहियों के आधार कार्ड, आयुष्मान कार्ड, राशन कार्ड, जाति प्रमाण पत्र जैसे मूलभूत दस्तावेजों को तैयार करने का कार्य लगातार जारी रखने के निर्देश भी दिए। मुख्यमंत्री ने आश्रम-छात्रावासों की समीक्षा करते हुए कहा कि जहाँ आवश्यकता हो, वहाँ सर्वसुविधायुक्त छात्रावास बनाए जाएं। शौचालय, बेड, पेयजल और अन्य मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित हो। निरीक्षण के दौरान किसी भी प्रकार की लापरवाही पाए जाने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि आश्रम-छात्रावासों में बच्चों को दी जाने वाली सुविधाओं में एकरूपता रहे तथा छात्रावासों की निगरानी के लिए रियल टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम को अपनाया जाए। मुख्यमंत्री ने विभाग द्वारा संचालित क्रीड़ा परिसरों की भी जानकारी ली और बच्चों द्वारा विभिन्न खेलों में अर्जित सफलताओं पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी 20 क्रीड़ा परिसरों में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी ताकि खेल प्रतिभाएं और निखरें और खिलाड़ी खेलो इंडिया सहित राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन कर सकें। प्रयास विद्यालयों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इनमें उच्च शिक्षित प्रशिक्षकों की नियुक्ति होनी चाहिए। साथ ही, इंजीनियरिंग, मेडिकल, क्लैट, सीयूईटी सहित अन्य कैरियर विकल्पों के लिए भी बच्चों को तैयार करने पर विशेष ध्यान दिया जाए। मुख्यमंत्री साय ने आदिम जाति विभाग के अंतर्गत स्वीकृत एवं प्रगतिरत भवनों के निर्माण कार्यों को समय-सीमा में पूर्ण करने तथा भवनविहीन संस्थानों के लिए सर्वसुविधायुक्त भवन निर्माण कराने के निर्देश दिए। उन्होंने मध्य क्षेत्र विकास प्राधिकरण एवं अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण की बैठक भी शीघ्र आयोजित करने के निर्देश दिए। उन्होंने आदिवासी संस्कृति संरक्षण एवं विकास के अंतर्गत देवगुड़ी निर्माण और अखरा विकास के कार्यों की भी समीक्षा की। साय ने अखरा विकास के तहत आस्था स्थलों पर उपयुक्त प्रकाश, बैठक व्यवस्था, शेड और पेयजल सुविधा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने नई दिल्ली में प्रदेश सरकार द्वारा संचालित ट्राइबल यूथ हॉस्टल की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि सिविल सेवाओं की तैयारी कर रहे बच्चों के मार्गदर्शन के लिए हाल ही में चयनित अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों से चर्चा कर सुझाव लिए जाएं ताकि वर्तमान परिदृश्य के अनुरूप युवाओं को रणनीति बनाने में मदद मिल सके। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इससे प्रदेश के अधिकाधिक युवा उच्च पदों पर पहुँचकर राज्य के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। बैठक में एकलव्य आवासीय विद्यालय, मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा प्रोत्साहन छात्रवृत्ति योजना, जनजातीय बहुउद्देश्यीय विपणन केंद्र, वन अधिकार पत्र सहित अन्य विभागीय योजनाओं की भी विस्तृत समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने आदिवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय निर्माण की प्रगति की समीक्षा की मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने नवा रायपुर में निर्माणाधीन शहीद वीर नारायण सिंह आदिवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय के निर्माण कार्य की समीक्षा की। उन्होंने म्यूजियम के स्वरूप, निर्माण की गुणवत्ता और प्रस्तुत की जाने वाली सामग्री की जानकारी ली तथा आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह संग्रहालय छत्तीसगढ़ के वीर सपूतों की अमर गाथा को समर्पित होगा। इसमें परलकोट विद्रोह, सोनाखान विद्रोह और भूमकाल विद्रोह जैसे ऐतिहासिक आंदोलनों को विशेष रूप से दर्शाया जाएगा। साथ ही, प्रदेश के प्रमुख जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के योगदान को भी जीवंत रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह संग्रहालय आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा। हमें गर्व है कि छत्तीसगढ़ की धरती ने स्वतंत्रता संग्राम में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है। इन गाथाओं को आधुनिक तकनीकों के माध्यम से दृश्य-श्रव्य तरीके से रोचक और ज्ञानवर्धक रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने निर्माण कार्यों को तय समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश भी दिए। बैठक में आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने पावरप्वाइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से विभागीय गतिविधियों, उपलब्धियां और नवीन कार्य योजना की जानकारी विस्तार पूर्वक मुख्यमंत्री के सामने प्रस्तुत की। बैठक में आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग के मंत्री राम विचार नेताम, मुख्य सचिव अमिताभ जैन, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत सहित आदिवासी विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि कृषि उपज मंडियों में पारदर्शी व्यवस्था बनाकर मूंग खरीदी की जाएगी

मंडियों में किसानों को मूंग विक्रय का मिले उचित दाम : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव से भारतीय किसान संघ मध्यप्रदेश के प्रतिनिधिमंडल ने की भेंट मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि कृषि उपज मंडियों में पारदर्शी व्यवस्था बनाकर मूंग खरीदी की जाएगी भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि कृषि उपज मंडियों में पारदर्शी व्यवस्था बनाकर मूंग खरीदी की जाएगी। प्रदेश के बाहर से व्यापारियों को भी मूंग खरीदी के लिए सुविधाएं प्रदान की जाएंगी और प्रोत्साहित किया जाएगा। मंडियों में किसानों को मूंग विक्रय का उचित दाम मिल सके इसके लिए व्यापारियों को बोली लगाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंगलवार को मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में उनसे भेंट करने आए भारतीय किसान संघ मध्यप्रदेश के प्रतिनिधिमंडल से यह बात कही। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मूंग पर मंडी शुल्क में राहत दी जा सकती है या नहीं इसकी जांच की जायेगी। किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) और आईटीसी को मूंग नीलामी में शामिल करने के लिये प्रेरित किया जायेगा। हमारा प्रयास यह है कि मंडियों में मूंग की मॉडल दरे बढ़कर लगभग 7500 रूपये प्रति क्विंटल हो जाये। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से बाहर से आने वाले व्यापारियों को नये मंडी लायसेंस भी दिये जायेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के साथ खड़ी है। खेती और किसानी राज्य सरकार की प्राथमिकता में शामिल है। प्रदेश में कृषि आधारित उद्योग लगाने के लिए कोई कसर छोड़ी नहीं जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में कपास उत्पादन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। गौ-शाला संचालित करने के लिए 20 रुपए से बढ़ाकर प्रति गाय 40 रुपए अनुदान राशि दी जा रही है। उन्होंने कहा कि किसान, फसल चक्र अपना कर उत्पादन में वृद्धि कर सकते हैं। प्रतिनिधिमंडल में भारतीय किसान संघ, मध्यप्रदेश के अध्यक्ष कमल सिंह आंजना, चंद्रकात गौर और अन्य पदाधिकारी शामिल थे। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव, मुख्यमंत्री कार्यालय डॉ. राजेश राजौरा उपस्थित थे।  

Air defense system : दुश्मन को खोज कर मारने में कामयाब है क्यूआर-एसएएम सिस्टम

नई दिल्ली: भारतीय सेना को जल्द ही एक नया स्वदेशी एयर डिफेंस सिस्टम मिलने वाला है। इसपर लगभग 30,000 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इसके तहत क्यूआर-एसएएम (QR-SAM:Quick Reaction Surface to Air Missile) सिस्टम खरीदे जाएंगे। रक्षा मंत्रालय जल्द ही इस प्रस्ताव पर विचार करने वाला है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अगुवाई वाली रक्षा अधिग्रहण परिषद इस महीने के अंत तक इस प्रस्ताव को मंजूरी दे सकती है। इस मंजूरी को ‘आवश्यकता की स्वीकृति’ (Acceptance of Necessity) यानी एओएन कहा जाता है। QR-SAM सिस्टम बहुत तेजी से काम करने वाला स्वदेशी एयर डिफेंस सिस्टम है। इसे दुश्मन के लड़ाकू विमानों, हेलीकॉप्टरों और ड्रोन को 25-30 किलोमीटर की दूरी तक अचूक तरीके से मार गिराने के लिए बनाया गया है। हर तरह की कसौटी पर खरा उतरा है क्यूआर-एसएएम सिस्टम यह कदम भारत के मौजूदा एयर डिफेंस सिस्टम की कामयाबी पर विचार के बाद उठाया जा रहा है। हाल ही में इस सिस्टम ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तान की ओर से भेजे गए तुर्की मूल के ड्रोन और चीनी मिसाइलों को मार गिराने में बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। यह ऑपरेशन 7 से 10 मई को हुआ था। डीआरडीओ (रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन) और भारतीय सेना ने पिछले तीन-चार सालों में QR-SAM सिस्टम का सफल परीक्षण किया है। उन्होंने इसे अलग-अलग तरह के खतरों का सामना करने के लिए जांचा और परखा है। यह परीक्षण दिन और रात दोनों समय किया गया है। भारत इलेक्ट्रोनिक्स (Bharat Electronics) और भारत डिनामिक्स (Bharat Dynamics) नाम की सरकारी कंपनियां मिलकर QR-SAM सिस्टम बनाएंगी। दुश्मन को खोज कर मारने में कामयाब है क्यूआर-एसएएम सिस्टम एक अधिकारी के मुताबिक,यह ‘QR-SAM सिस्टम चलते-फिरते भी काम कर सकता है। यह दुश्मन को खोज और ट्रैक कर सकता है और थोड़े समय के लिए रुककर भी हमला कर सकता है। इसे टैंकों और पैदल सेना के वाहनों के साथ चलने के लिए बनाया गया है, ताकि युद्ध के मैदान में उन्हें हवाई हमलों से बचाया जा सके। सेना की वायु रक्षा (AAD) ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में बहुत अच्छा प्रदर्शन किया था। उन्हें QR-SAM की 11 रेजिमेंट चाहिए। इसके साथ ही, वे स्वदेशी आकाश सिस्टम को भी शामिल कर रहे हैं, जिसकी मारक क्षमता लगभग 25 किलोमीटर है। और मजबूत होगी वायु सेना और थल सेना की रक्षा प्रणाली QR-SAM सिस्टम के आने से IAF (भारतीय वायु सेना) और सेना की मौजूदा वायु रक्षा प्रणाली और मजबूत हो जाएगी। इस प्रणाली में लंबी दूरी की रूसी एस-400 ट्रिम्फ ‘S-400 Triumf’ मिसाइलें (380 किलोमीटर की मारक क्षमता) और बराक-8 (Barak-8) मध्यम दूरी की एसएएम(Surface to Air Missile) सिस्टम (70 किलोमीटर) शामिल हैं, जिसे इजराइल के साथ मिलकर बनाया गया है। इसके अलावा, इसमें रूसी इगला-एस (Igla-S) मिसाइलें (6 किलोमीटर), एल-70 एंटी-एयरक्राफ्ट गन (3.5 किलोमीटर) और स्वदेशी ड्रोन का पता लगाने और उन्हें नष्ट करने वाले सिस्टम (1 किलोमीटर-2 किलोमीटर) भी शामिल हैं। स्वदेशी एयर डिफेंस सिस्टम में आगे और बड़ी योजना पर काम डीआरडीओ बहुत कम दूरी की वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली (VSHORADS) भी तैयार कर रहा है, जिसकी मारक क्षमता 6 किलोमीटर है। लेकिन, असली गेम-चेंजर ‘प्रोजेक्ट कुशा’ के तहत विकसित की जा रही 350 किलोमीटर की मारक क्षमता वाली वायु रक्षा प्रणाली होगी। भारत इस लंबी दूरी की प्रणाली को 2028-2029 तक तैनात करने की योजना बना रहा है। रक्षा मंत्रालय ने सितंबर 2023 में भारतीय वायु सेना (IAF) के लिए इसके पांच स्क्वाड्रन खरीदने के लिए 21,700 करोड़ रुपये की एओएन को मंजूरी दी थी।  

प्रदेश में 15 जून से एक्टिव होगा मानसून, एमपी में 16 जून से प्रीमानसून की हलचल

भोपाल मानसून 2025, 14 दिन से महाराष्ट्र में ठहरा हुआ है। इसके आगे नहीं बढऩे से मानसून सीजन में हीटवेव ने घुसपैठ कर दी है। सोमवार 9 जून से राजस्थान से चली गर्म हवा की वजह से मध्य प्रदेश में लोग भीषण गर्मी से बेहाल हैं। यहां कई शहरों में अधिकतम तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया। मानसून 2025, 14 दिन से महाराष्ट्र में ठहरा हुआ है। इसके आगे नहीं बढऩे से मानसून सीजन में हीटवेव ने घुसपैठ कर दी है। 9 जून से राजस्थान से चली गर्म हवा की वजह से मध्य प्रदेश में लोग भीषण गर्मी से बेहाल हैं। यहां कई शहरों में अधिकतम तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया। भोपाल, ग्वालियर, इंदौर, उज्जैन समेत एमपी के कई शहरों में आसमान से आग बरसी। गर्मी ने जैसे शहरों में कर्फ्यू लगा दिया है। दोपहर का आलम ये है कि व्यस्ततम सड़कें खाली नजर आ रही हैं। नौतपा जैसी गर्मी का दौर अब चल रहा है। ग्वालियर में 24 दिन में दूसरी बार सबसे ज्यादा गर्मी इस सीजन में ग्वालियर में 24 दिन बाद दूसरी बार अधिकतम तापमान 45 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया है। इससे पहले 16 मई को तापमान 45 डिग्री सेल्सियस पर पहुंचा था। 20 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति से हीटवेव भी चलीं। मौसम विभाग ने पूरे हफ्ते भीषण गर्मी का अलर्ट जारी किया गया है। आज 11 जून को तापमान 46 डिग्री सेल्सियस दर्ज हो सकता है। गर्म हवाओं से आसमान साफ, चलीं हीट वेव्ज दरअसल जम्मू कश्मीर में पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय नहीं है। इस कारण अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से नमी नहीं आ रही है। राजस्थान की गर्म हवा 20 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति से चल रही है। इस हवा की वजह से आसमान साफ हो गया है। दोपहर में हीटवेव चलने से गर्मी बढ़ गई। छह घंटे तक तापमान 42 से 45 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा। शहर भीषण गर्मी से तप गया। सूर्य अस्त के बाद भी गर्म हवा के थपेड़ों ने लोगों को बेहाल कर दिया। 15 जून से एक्टिव होगा मानसून, एमपी में 16 जून से प्री-मानसून बंगाल की खाड़ी में 13 जून को कम दबाव का क्षेत्र विकसित हो रहा है। इसकी वजह से सुस्त अवस्था में पड़ा मानसून एक बार फिर एक्टिव हो जाएगा। पूरे महाराष्ट्र में सक्रिय होने के बाद मध्य प्रदेश में मानसून प्रवेश करेगा। 16 जून से शहर में प्री मानसून की हलचल शुरू हो जाएगी। आंधी और बारिश का दौर शुरू होगा। तापमान में गिरावट आएगी, लेकिन उमस भरी गर्मी तब भी झेलनी पड़ेगी। 14 साल का रिकॉर्ड टूटा! इस बार नहीं पड़ी नौतपे की मार मध्य प्रदेश में इस बार मौसम (MP Weather) ने पिछले 14 सालों का रिकॉर्ड तोड़ा है. 14 वर्षों के मुकाबले इस बार का नौतपा (Nautapa) सबसे ज़्यादा ठंडा रहा है. नौतपे के दौरान अत्यधिक तापमान 37 डिग्री दर्ज किया गया है, जो बीते सालों के मुकाबले सबसे कम है. कब से कब तक था नौतपा? भोपाल में इस साल का नौतपा बीते सोमवार को समाप्त हो गया. 25 मई से 2 जून तक चलने वाले नौतपा ने इस बार तापमान के लिहाज से नया रिकॉर्ड बना दिया. बीते 14 साल में यह सबसे ‘ठंडा’ नौतपा रहा. इन 9 दिनों में दिन का औसत अधिकतम तापमान महज 37.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. नौतपा में सिर्फ एक दिन ही पारा 40 डिग्री के पार पहुंच सका. इसकी विदाई भी आंधी और हल्की बौछारों के साथ हुई. इसने गर्मी और उमस को गायब कर दिया. जहां नौतपे के दौरान आम तौर पर भीषण गर्मी और हीट वेव के अलर्ट जारी होते थे तो वहीं, इस बार लगभर हर दिन 30 से 35 जिलों में बारिश के अलर्ट जारी रहे. गर्म हवाओं से आसमान साफ, चलीं हीट वेव्ज दरअसल जम्मू कश्मीर में पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय नहीं है। इस कारण अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से नमी नहीं आ रही है। राजस्थान की गर्म हवा 20 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति से चल रही है। इस हवा की वजह से आसमान साफ हो गया है। दोपहर में हीटवेव चलने से गर्मी बढ़ गई। छह घंटे तक तापमान 42 से 45 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा। शहर भीषण गर्मी से तप गया। सूर्य अस्त के बाद भी गर्म हवा के थपेड़ों ने लोगों को बेहाल कर दिया। पहला सप्ताह बीता राहत का, दूसरे में झुलसे लोग वैसे जून का पहला सप्ताह ज्यादा तपता है, लेकिन इस बार पहले सप्ताह में काफी राहत रही। तापमान सामान्य से ऊपर नहीं आ सका था, लेकिन दूसरे सप्ताह में भीषण गर्मी रही। जबकि दूसरे सप्ताह में प्री मानसून की हलचल शुरू हो जाती है। जून के तीसरे सप्ताह में आंधी व बारिश का दौर चलेगा। चौथे सप्ताह में मानसून की बारिश शुरू हो सकती है। इस बार ग्वालियर में बारिश औसत से पीछे चल रही है। पारे की चाल समय – तापमान 0530 – 31.0 0830 – 36.8 1130 – 42.4 1430 – 44.2 1730 – 43.4 जून में अगले छह दिन में दर्ज होने वाला अधिकतम तापमान तारीख- पारा 10 – 45 11 – 46 12 – 45 13 – 45 14 – 42 15 – 43 15 जून से एक्टिव होगा मानसून, एमपी में 16 जून से प्रीमानसून बंगाल की खाड़ी में 13 जून को कम दबाव का क्षेत्र विकसित हो रहा है। इसकी वजह से सुस्त अवस्था में पड़ा मानसून एक बार फिर एक्टिव हो जाएगा। पूरे महाराष्ट्र में सक्रिय होने के बाद मध्य प्रदेश में मानसून प्रवेश करेगा। 16 जून से शहर में प्री मानसून की हलचल शुरू हो जाएगी। आंधी और बारिश का दौर शुरू होगा। तापमान में गिरावट आएगी, लेकिन उमस भरी गर्मी तब भी झेलनी पड़ेगी। एमपी में 19-25 जून के बीच मानसून देगा दस्तक 19 से 25 जून के बीच मानसून की ग्वालियर चंबल संभाग में दस्तक हो सकता है, क्योंकि बंगाल की खाड़ी के सिस्टम के असर से तेज बारिश की संभावना है। मानसून की पूर्वी शाखा से अंचल में मानसून आता है। हीटवेव का अलर्ट, इस दिन होगी मानसून की एंट्री ग्वालियर चंबल, बुंदेलखंड क्षेत्र में हीटवेव का येलो अलर्ट जारी किया गया है। यह क्षेत्र सबसे ज्यादा गर्म रहे है। … Read more

रेल यात्रियों के लिए खुशखबरी! मदन महल से रायपुर के बीच एक नई इंटरसिटी एक्सप्रेस ट्रेन रोजाना संचालित की जाएगी

 रायपुर  रेल यात्रियों के लिए खुशखबरी! जबलपुर स्थित मदन महल स्टेशन से छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के बीच एक नई इंटरसिटी एक्सप्रेस ट्रेन रोजाना संचालित की जाएगी। रेलवे ने इस संबंध में आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया है, जिससे दोनों शहरों के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी। बता दें कि यह नई इंटरसिटी ट्रेन मदन महल से सुबह 6:10 बजे रवाना होगी और बालाघाट व गोंदिया होते हुए दोपहर 1:50 बजे रायपुर स्टेशन पहुंचेगी। वापसी में यह ट्रेन रायपुर से दोपहर 2:45 बजे चलकर रात 10:30 बजे मदन महल पहुंचेगी। इस इंटरसिटी एक्सप्रेस से मदन महल और रायपुर के बीच का सफर महज 6 घंटे 40 मिनट में पूरा होगा। वर्तमान में, रायपुर से जबलपुर के बीच केवल अमरकंटक एक्सप्रेस संचालित होती है, जिसे यह दूरी तय करने में लगभग 9 घंटे लगते हैं। एक ही ट्रेन होने के कारण अमरकंटक एक्सप्रेस में अक्सर लंबी वेटिंग लिस्ट रहती है, जिससे यात्रियों को कंफर्म सीट मिलने में परेशानी होती है। नई इंटरसिटी के शुरू होने से यात्रियों को कंफर्म बर्थ मिलने में सुविधा होगी और उनके यात्रा समय में 2 घंटे 20 मिनट की बचत होगी। बता दें कि वर्तमान में, रायपुर से जबलपुर के बीच केवल अमरकंटक एक्सप्रेस संचालित होती है, जिसे यह दूरी तय करने में लगभग 9 घंटे लगते हैं। एक ही ट्रेन होने के कारण अमरकंटक एक्सप्रेस में अक्सर लंबी वेटिंग लिस्ट रहती है, जिससे यात्रियों को कंफर्म सीट मिलने में परेशानी होती है। नई इंटरसिटी के शुरू होने से यात्रियों को कंफर्म बर्थ मिलने में सुविधा होगी और उनके यात्रा समय में 2 घंटे 20 मिनट की बचत होगी। टिकटों की भारी मारामारी से यात्रियों को मिलेगी राहत फिलहाल, अमरकंटक एक्सप्रेस में टिकटों की भारी मारामारी देखी जा रही है। 16 जून तक स्लीपर क्लास में और 14 जून तक एसी थ्री टायर में औसतन 50 के करीब वेटिंग चल रही है। जबलपुर से रायपुर आने वाली अमरकंटक एक्सप्रेस के स्लीपर कोच में 16 जून तक और एसी थ्री टायर में 15 जून तक वेटिंग है। नई इंटरसिटी ट्रेन के चलने से यह दबाव कम होने और यात्रियों को आसानी से टिकट मिल पाने की उम्मीद है। यात्रियों को मिलेगी राहत फिलहाल, अमरकंटक एक्सप्रेस में टिकटों की भारी मारामारी देखी जा रही है। 16 जून तक स्लीपर क्लास में और 14 जून तक एसी थ्री टायर में औसतन 50 के करीब वेटिंग चल रही है। जबलपुर से रायपुर आने वाली अमरकंटक एक्सप्रेस के स्लीपर कोच में 16 जून तक और एसी थ्री टायर में 15 जून तक वेटिंग है। नई इंटरसिटी ट्रेन के चलने से यह दबाव कम होने और यात्रियों को आसानी से टिकट मिल पाने की उम्मीद है।

कभी 10 राज्यों में लाल आतंक का पर्याय रहे माओवादी संगठन की ताकत अब बहुत कम हो गई, संगठन अब ‘टुकड़ों’ में बंटा

रायपुर  कभी 10 राज्यों में लाल आतंक का पर्याय रहे CPI (माओवादी) संगठन की ताकत अब बहुत कम हो गई है। लगातार कार्रवाई से संगठन के बड़े नेता या तो मारे गए या गिरफ्तार हो गए। अब उनके लगभग 300 सशस्त्र कैडर दंडकारण्य क्षेत्र और कुछ अन्य जगहों पर छिपे हुए हैं। संगठन अब ‘टुकड़ों’ में बंट गया है। संगठन का नंबर एक नेता ढेर छत्तीसगढ़ पुलिस ने संगठन के नंबर 1 नेता, नंबला केशव राव उर्फ बसवराजू और उनकी सुरक्षा टीम को मार गिराया। 2005 से अब तक, पोलित ब्यूरो (PB) के 14 सदस्य गिरफ्तार हो चुके हैं, मारे गए हैं या बीमारी से मर चुके हैं। सेंट्रल कमेटी (CC) के भी कई सदस्य मारे गए या गिरफ्तार हुए हैं। अब बस चार सक्रिय PB सदस्य बचे हैं। इनमें मुप्पल्ला लक्ष्मण राव उर्फ गणपति, मल्लोजुला वेणुगोपाल उर्फ अभय, थिप्पिरी तिरुपति उर्फ देवजी और मिसीर बेसरा शामिल हैं। बसवराजू की जगह कौन अभय या देवजी, दोनों तेलंगाना से हैं, बसवराजू की जगह ले सकते हैं। हालांकि, CPI (माओवादी) ने अभी तक उत्तराधिकार पर कोई बयान नहीं दिया है। हर PB सदस्य CC का हिस्सा होता है, लेकिन CC का हर सदस्य PB का हिस्सा नहीं होता है। CC के सदस्यों की संख्या भी कम हो गई है। 2007 से अब तक 26 गैर-PB सदस्य गिरफ्तार हुए, आत्मसमर्पण किए या बीमारी से मर गए। अब CC में केवल 14 सक्रिय सदस्य हैं, जिनमें चार PB नेता शामिल हैं। सेंट्रल कमेटी के एक दर्जन सदस्य अभी जेल में हैं और तीन की बीमारी से मौत हो गई है। तेलंगाना और महाराष्ट्र में कमेटी के चार सदस्यों ने आत्मसमर्पण कर दिया है और 2007 से सात को मार गिराया गया है, जिनमें से चार इस साल मारे गए हैं। सेंट्रल कमेटी के एक्टिव मेंबर कौन अब CC के सक्रिय सदस्यों में कदारी सत्यनारायण रेड्डी, चंद्रन्ना, मोडेम बालकृष्ण, गणेश उइके, गजरला रवि, अनल दा, मदवी हिडमा, के रामचंद्र रेड्डी, सुजाता और मल्ला राजा रेड्डी शामिल हैं। बस्तर के आईजीपी सुंदरराज पी ने बताया, ‘माओवादियों का कमांड स्ट्रक्चर अब चरमरा गया है। लगातार खुफिया जानकारी के आधार पर किए गए ऑपरेशनों और आत्मसमर्पणों ने संगठन को तोड़ दिया है और भटका दिया है।’ उन्होंने कहा, ‘कुल मिलाकर, 300 सशस्त्र कैडर दंडकारण्य और कुछ अन्य जगहों पर छिपे हुए हैं, उनके पास केवल दो विकल्प हैं… आत्मसमर्पण करना या मारे जाना।’ युद्धविराम के प्रयास भी फेल सीपीआई (माओवादी) ने हाल ही में कई बार युद्धविराम और बातचीत का प्रस्ताव रखा है, लेकिन PB या CC के किसी भी नेता ने सुरक्षा बलों के आत्मसमर्पण के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया है। एक अन्य अधिकारी ने कहा कि शायद यह उनके ‘अहंकार’ के कारण है। 2005 में शुरू हुआ पोलित ब्यूरो का पतन PB के सदस्यों का पतन 2005 में पश्चिम बंगाल में सुशील रॉय की गिरफ्तारी के साथ शुरू हुआ। 2008 और 2011 के बीच, कई और PB सदस्य जेल गए। प्रमोद मिश्रा को 2008 में रांची में और फिर 2022 में गिरफ्तार किया गया। कोबाड गांधी को 2009 में दिल्ली में गिरफ्तार किया गया था, हालांकि अब वह एक स्वतंत्र व्यक्ति हैं। अमिताभ बागची को 2009 में रांची में और जगदीश यादव को 2011 में गया, बिहार में गिरफ्तार किया गया। बच्चा प्रसाद सिंह और बंसी धर सिंह को 2010 में कानपुर में पकड़ा गया। झंटू मुखर्जी और नारायण सान्याल को क्रमशः 2006 और 2011 में गिरफ्तार किया गया था, लेकिन अब उनकी मृत्यु हो चुकी है। कट्टम सुदर्शन की 2023 में दंडकारण्य में मृत्यु हो गई। PB सदस्य चेरुकुरी राजकुमार उर्फ ‘आजाद’ और किशनजी 2010-2011 में मारे गए, जबकि अरविंदजी की 2018 में झारखंड में बीमारी से मृत्यु हो गई। प्रशांत बोस उर्फ किशन दा को 2021 में झारखंड से उनकी पत्नी शीला मरांडी, जो CC सदस्य हैं, के साथ गिरफ्तार किया गया था। बसवराजू की मौत सबसे बड़ा झटका CPI (माओवादी) के महासचिव बसवराजू, जो PB और CC के सदस्य थे, की मौत संगठन के लिए एक बहुत बड़ा झटका था। अब CC में केवल 14 सदस्य बचे हैं, जिनमें 4 PB नेता शामिल हैं। CC के गिरफ्तार सदस्यों में मिथिलेश मेहता (2007 और 2022), विष्णु (2007, मुंबई), मोती लाल सोरेन (2009, ओडिशा), प्रदीप सिंगला (2009), विजय कुमार आर्य (2011 और 2022) और वाराणसी सुब्रमण्यम (2011, बिहार) शामिल हैं। हाल ही में, शीला मरांडी (2021), बी वी कृष्णा मूर्ति (2022, केरल), कंचन दा (2022, असम), सब्यसाची गोस्वामी (2024, पश्चिम बंगाल) और संजय दीपक राव (2023, हैदराबाद) को गिरफ्तार किया गया।

छह साल में केबल ऑपरेटरों ने 1.95 लाख रोजगार की कटौती की

मुंबई एक समय था जब हर घर केबल लगा होता था। केबल के बिना टेलीविजन इंडस्ट्री अधूरा था, लेकिन वर्तमान में नई टेक्नोलॉजी ने इसकी जगह ले लीं और अब भारत में केबल का कारोबार संकट से जुझ रहा है। यह अपने वजूद की लड़ाई लड़ रहा है। ओवर-द-टॉप (ओटीटी) प्लेटफॉर्म से बढ़ती प्रतिस्पर्धा और डीडी फ्री डिश जैसी मुफ्त, अनलिमिटेड सर्विसेज की बढ़ती लोकप्रियता के चलते केबल टेलीविजन उद्योग में भारी गिरावट देखी गई है। पे-टीवी ग्राहकों में गिरावट के चलते साल 2018 और 2025 के बीच अनुमानतः 577,000 कम्युलेटिव नौकरियां खत्म होने का अनुमान है। इसका खुलासा एक स्टडी रिपोर्ट में किया गया है। क्या है रिपोर्ट ऑल इंडिया डिजिटल केबल फेडरेशन (एआईडीसीएफ) और ईवाई इंडिया द्वारा संयुक्त रूप से तैयार की गई रिपोर्ट ‘स्टेट ऑफ केबल टीवी डिस्ट्रीब्यूशन इन इंडिया’ में कहा गया है कि पे-टीवी सब्सक्राइबर बेस 2018 में 151 मिलियन से घटकर 2024 में 111 मिलियन हो गया है और 2030 तक इसके और घटकर 71-81 मिलियन के बीच रहने की उम्मीद है। इसमें चैनलों की बढ़ती लागत, बढ़ते ओटीटी प्लेटफॉर्म और डीडी फ्री डिश जैसी मुफ्त, अनियमित सेवाओं की बढ़ती लोकप्रियता को इस गिरावट का कारण बताया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि चार डायरेक्ट-टू-होम (डीटीएच) प्लेयर्स और दस प्रमुख केबल टीवी प्रोवाइडर्स या मल्टी-सिस्टम ऑपरेटरों (एमएसओ) के कम्युलेटिव रेवेन्यू में 2018 से 16% से अधिक की गिरावट आई है, जबकि उनके मार्जिन में 29% की कमी आई है। वित्त वर्ष 19 में, उनका संयुक्त राजस्व ₹25,700 करोड़ था, जो वित्त वर्ष 24 में घटकर ₹21,500 करोड़ रह गया। वित्त वर्ष 24 में संयुक्त एबिटा घटकर ₹3,100 करोड़ रह गया, जो वित्त वर्ष 19 में ₹4,400 करोड़ था। बता दें कि स्टडी में 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 28,181 स्थानीय केबल ऑपरेटरों (एलसीओ) से इनपुट लिए गए थे। इस असर एलसीओ वर्कफोर्स पर पड़ा है। नौकरियों पर खतरा सर्वेक्षण किए गए ऑपरेटरों ने रोजगार में 31% की गिरावट की रिपोर्ट की है, जो 37,835 नौकरियों का नुकसान दर्शाता है। जब राष्ट्रीय स्तर पर इसका अनुमान लगाया जाता है, तो यह विभिन्न परिचालन स्तरों पर 114,000 से 195,000 तक की नौकरियों के नुकसान में तब्दील हो जाता है। इसके अलावा, 2018 से अब तक लगभग 900 एमएसओ और 72,000 एलसीओ के बंद होने से ओवरएज में योगदान मिला है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2018 से लगभग 900 एमएसओ और 72,000 एलसीओ के बंद होने से कुल 577,000 लोगों की नौकरी चली गई है। हालांकि, इन चुनौतियों के बावजूद उद्योग के लीडर सतर्क रूप से आशावादी बने हुए हैं।

1 अगस्‍त से तकनीकी बदलाव करने जा रहा यूपीआई

नई दिल्ली गूगलपे, फोनपे, पेटीएम जैसे ऐप्‍स इस्‍तेमाल करने वाले करोड़ों यूजर्स के लिए काम की खबर है। 1 अगस्‍त से नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया यानी एनपीसीआई अपने एप्लीकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस (API) इस्‍तेमाल को लेकर नए नियम ला रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, यह तकनीकी बदलाव अगस्‍त से लागू होगा। आपको विषय टेक्निकल लग सकता है, लेकिन यह सीधे तौर पर आपके यूपीआई चलाने के तरीके को बदल सकता है। फाइनेंशल एक्‍सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, नया नियम लाने का मकसद यूपीआई सिस्‍टम में पड़ रहे बोझ को कम करना है। इसका असर यह होगा कि आप यूपीआई ऐप से जो बैलेंस चेक करते हैं, उस पर लिमिट लग जाएगी। जो आपने ऑटो पेमेंट सेट किए हैं, उनमें चेंज आएगा। आइए इस बारे में व‍िस्‍तार से समझते हैं। पेमेंट बढ़ने से सिस्‍टम पर आ रहा लोड रिपोर्ट के अनुसार, यूपीआई पेमेंट की संख्‍या दिनों दिन बढ़ रही है। हर महीने करीब 16 अरब ट्रांजैक्‍शन प्रोसेस किए जा रहे हैं। इतनी बढ़ी संख्‍या में ट्रांजैक्‍शंस के होने से यूपीआई सिस्‍टम पर लोड बढ़ रहा है। हाल के दिनों में बैंकों की तरफ से सिस्‍टम का गलत इस्‍तेमाल करने के मामले सामने आए थे। साथ ही कुछ तकनीकी कमजोरियां भी दिखी थीं। इनसे निपटने के लिए 1 अगस्‍त से कुछ चेंज किए जा रहे हैं। 5 घंटे तक ठप पड़ी थी सर्विस रिपोर्ट के अनुसार, बीते दो-तीन महीनों में कई वाकये हुए जब यूपीआई पेमेंट डाउन हुआ। कहा जाता है कि 12 अप्रैल को 5 घंटे तक पेमेंट डाउन रहने से लोग काफी परेशान हुए। यह तीन साल में सबसे लंबा आउटेज था। यूपीआई की वजह से कई लोगों ने वॉलेट रखना छोड़ दिया है या फ‍िर वॉलेट में पैसे नहीं रखते। ऐसे में अगर यूपीआई ही डाउन हो जाए तो लोगों को कितनी अधिक परेशानी होगी। इसी से निपटने के लिए नियमों में बदलाव किया जा रहा है। 1 मिनट डाउन होने का मतलब 4 लाख लोग परेशान रिपोर्ट बताती है कि यूपीआई पेमेंट का दायरा इतना बढ़ गया है कि इसमें जरा सी रुकावट लाखों की संख्‍या में यूजर्स को परेशान करती है। कहा जाता है कि हर सेकंड 7 हजार ट्रांजैक्‍शंस यूपीआई के जरिए प्रोसेस किए जा रहे हैं। अगर एक मिनट भी यूपीआई डाउन होता है यानी आपका फोनपे, पेटीएम या गूगलपे नहीं चलता तो 4 लाख लोग प्रभावित होते हैं। 10 मिनट यूपीआई डाउन होने पर 40 लाख लोग प्रभावित होते हैं। मौजूदा वक्‍त में यूपीआई पेमेंट करने वालों की संख्‍या 40 करोड़ से ज्‍यादा बताई जाती है। हाल में हुई जांच में सामने आया कि यूपीआई डाउन होने की अहम वजह बार-बार की जाने वाली एपीआई रिक्‍वेस्‍ट है, जिसकी वजह से सिस्‍टम पर लोड आ गया। ‘चेक ट्रांजैक्शन’ API रिक्‍वेस्‍ट अधिक आने से मार्च और अप्रैल में यूपीआई पर असर पड़ा। रिपोर्ट के अनुसार, इस संबंध में बैंकों को कुछ नियमों का पालन करना था, पर उन्‍होंने ऐसा नहीं किया। 1 अगस्‍त से क्‍या बदलाव हो रहा है NPCI ने सभी बैंकों और PSP यानी फोनपे, पेटीएम, गूगलपे आदि पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स से कहा है कि 31 जुलाई तक 10 सबसे ज्‍यादा इस्‍तेमाल होने वाले एपीआई को कंट्रोल किया जाए। यानी अगर यूजर्स यूपीआई ऐप पर बैलेंस ज्‍यादा चेक करते हैं तो अब ऐसा नहीं कर पाएंगे। रिपोर्ट के अनुसार, यूजर अब अपने ऐप पर रोजाना 50 बार बैलेंस चेक कर सकेंगे। मोबाइल नंबर से कितने अकाउंट जुड़े हैं, यह भी रोजाना 25 बार से ज्‍यादा नहीं देखा जा सकेगा। इसके अलावा ऑटोपे पेमेंट जैसे कोई एसआईपी या नेटफ्लिक्‍स की मेंबरशिप पेमेंट नॉन पीक आवर्स में ही होगी। नॉनपीक आवर्स से मतलब सुह 10 बजे से पहले, दोपहर में 1 बजे से शाम 5 बजे तक और रात साढ़े 9 बजे के बाद है।

सिब्बल ने जज यशवंत वर्मा के खिलाफ लाए जा रहे महाभियोग प्रस्ताव का विरोध करने का ऐलान किया

नई दिल्ली पूर्व केंद्रीय मंत्री और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने मंगलवार को उपराष्ट्रपति और उच्च सदन के सभापति जगदीप धनखड़ पर गंभीर सवाल उठाए हैं. सिब्बल ने सवाल पूछा कि जगदीप धनखड़ ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज शेखर कुमार यादव के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने के नोटिस पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जज को बचाने की कोशिश कर रही है, क्योंकि उन्होंने पिछले साल सांप्रदायिक बयान दिया था. न्यायपालिका को कंट्रोल करने की कोशिश इसके साथ ही सिब्बल ने दिल्ली हाई कोर्ट के जज यशवंत वर्मा के खिलाफ लाए जा रहे महाभियोग प्रस्ताव का विरोध करने का ऐलान किया है. उन्होंने कहा कि जिस तरह से राज्यसभा सभापति ने शेखर यादव के खिलाफ इन-हाउस जांच को सुप्रीम कोर्ट में चिट्ठी लिखकर रुकवा दिया, उस तरह की चिट्ठी यशवंत वर्मा के मामले में क्यों नहीं लिखी गई. सिब्बल ने कहा कि इन-हाउस रिपोर्ट के आधार पर मंत्री किरेन रिजिजू जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग लाकर उन्हें पद से हटाना चाहते हैं और इसके लिए वह वकीलों से सलाह भी ले रहे हैं. कपिल सिब्बल ने कहा कि अगर सरकार जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लेकर आती है तो हम इसका विरोध करेंगे क्योंकि यह पूरी तरह से असंवैधानिक है. उन्होंने कहा कि अगर ऐसा होता है तो इससे न्यायपालिका की आजादी को बहुत बड़ा खतरा है. सिर्फ इन-हाउस रिपोर्ट के आधार पर किसी जज को पद से नहीं हटाया जा सकता. सरकार न्यायाधीश जांच अधिनियम की अनदेखी करना चाहती है और यह न्यायपालिका को कंट्रोल करने की कोशिश कर रही है. जस्टिस वर्मा के लिए क्यों नहीं लिखी चिट्ठी सिब्बल ने जस्टिस शेखर यादव के मामले को लेकर कहा कि पूरी घटना में भेदभाव की बू आती है, क्योंकि एक ओर तो राज्यसभा के महासचिव ने भारत के चीफ जस्टिस को चिट्ठी लिखकर कहा कि वे शेखर यादव के खिलाफ इन-हाउस जांच न करें, क्योंकि उनके खिलाफ राज्यसभा में एक याचिका लंबित है, जबकि जस्टिस यशवंत वर्मा के मामले में ऐसा नहीं किया गया. कपिल सिब्बल ने जगदीप धनखड़ पर निशाना साधते हुए कहा कि यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है और जब संवैधानिक पद पर बैठा व्यक्ति, छह महीने में संवैधानिक दायित्वों को पूरा नहीं करता है तो सवाल उठना स्वाभाविक है. सिब्बल ने कहा कि 13 दिसंबर 2024 को हमने शेखर यादव के खिलाफ राज्यसभा के सभापति को महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस दिया था, इस पर 55 सांसदों के साइन थे, छह महीने बीत गए हैं, लेकिन कोई कदम नहीं उठाया गया है. साइन वैरिफाई करने में 6 महीने लगते हैं? उन्होंने ने कहा, ‘मैं उन लोगों से पूछना चाहता हूं जो संवैधानिक पदों पर बैठे हैं, उनकी जिम्मेदारी सिर्फ यह वैरिफाई करना है कि साइन हैं या नहीं, क्या इसमें छह महीने लगने चाहिए? एक और सवाल यह उठता है कि क्या यह सरकार शेखर यादव को बचाने की कोशिश कर रही है.’ उन्होंने कहा कि VHP के निर्देश पर शेखर यादव ने हाई कोर्ट परिसर में भड़काऊ भाषण दिया था और फिर मामला सुप्रीम कोर्ट में आया जिसने कार्रवाई की. सिब्बल ने कहा, ‘शेखर यादव से दिल्ली में पूछताछ की गई. इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से भी रिपोर्ट मांगी गई. मैंने सुना कि इलाहाबाद हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस ने नेगेटिव रिपोर्ट दी है और इस बीच 13 फरवरी 2025 को राज्यसभा सभापति ने कहा कि इस मामले को संवैधानिक तरीके से देखा जाना चाहिए और संसद इसे आगे बढ़ा सकती है.’ क्या धनखड़ को लेटर लिखना चाहिए? कपिल सिब्बल ने कहा कि राज्यसभा सचिवालय ने चीफ जस्टिस को लेटर भेजकर कोई कार्रवाई न करने को कहा है क्योंकि महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस है और सुप्रीम कोर्ट को शेखर यादव के खिलाफ अपनी आंतरिक प्रक्रिया रोकनी चाहिए. सिब्बल ने कहा, ‘मुझे समझ में नहीं आ रहा कि ऐसा किस आधार पर हुआ? क्या चेयरमैन को सीजेआई को ऐसा पत्र लिखना चाहिए? इन-हाउस प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट की अपनी है, इसका महाभियोग प्रस्ताव से कोई संबंध नहीं है. अभी तक महाभियोग प्रस्ताव को स्वीकार भी नहीं किया गया है, छह महीने हो गए हैं और सिर्फ साइन वैरिफाई किए जा रहे हैं.’ सिब्बल ने कहा, ‘जस्टिस यादव ने जो कहा, वह सबके सामने है, इसमें कोई शक नहीं है. उन्होंने इस पर कोई विवाद नहीं किया है. सुप्रीम कोर्ट को यह तय करना था कि क्या उन्हें ऐसा कहना चाहिए था, क्योंकि हमारे मुताबिक यह पूरी तरह सांप्रदायिक बयान है और यह भी तय करना था कि क्या उन्हें यह बयान देने के बाद जज की कुर्सी पर बैठना चाहिए.’ शेखर यादव को बचा रही है सरकार उन्होंने कहा, ‘आपने जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ इन-हाउस जांच पर लेटर क्यों नहीं लिखा? तो क्या यह सरकार शेखर यादव को बचाना चाहती है, हमें लगता है कि वे उसे बचाना चाहते हैं. सिब्बल ने कहा कि या तो शेखर यादव पर कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी या फिर वे महाभियोग नोटिस में कुछ हस्ताक्षरों को खारिज कर देंगे और प्रस्ताव को खारिज कर देंगे ताकि हम सुप्रीम कोर्ट जाएं और इसमें समय लगे जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि शेखर यादव 2026 में रिटायर हो जाएं.’ 13 दिसंबर को कई विपक्षी दलों के सदस्यों ने विश्व हिंदू परिषद के एक कार्यक्रम में इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज शेखर यादव के विवादित बयान को लेकर उनके खिलाफ महाभियोग चलाने के लिए राज्यसभा में नोटिस पेश किया था. महाभियोग प्रस्ताव लाने के नोटिस पर सिब्बल, जयराम रमेश, विवेक तन्खा, दिग्विजय सिंह, जॉन ब्रिटास, मनोज कुमार झा और साकेत गोखले सहित 55 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए. नोटिस में कहा गया है कि VHP की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान जस्टिस यादव ने भारत के संविधान का उल्लंघन करते हुए नफरत फैलाना वाला भाषण दिया, जो पूरी तरह से भड़काऊ था. नोटिस में यह भी जिक्र किया गया है कि जज ने अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया और उनके लिए पक्षपात और पूर्वाग्रह का नजरिया दिखाया.  

मोदी सरकार के कल्याणकारी योजनाओं ने करोड़ों लोगों का जीवन बदलने का कार्य किया: विष्णुदत्त शर्मा

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष व सांसद श्री विष्णुदत्त शर्मा ने भाजपा प्रदेश कार्यालय में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार के 11 वर्ष पूर्ण होने पर पत्रकार-वार्ता को संबोधित किया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि 2014 में पद संभालने के बाद से प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी देश के लिए हर कीमत चुकाने को तैयार रहे हैं। उन्होंने कई कड़े फैसले लिये और तुष्टिकरण की राजनीति को समाप्त कर दिया। प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में ऐतिहासिक फैसले लिए जो पहले कभी नहीं हुए। जो काम अर्थव्यवस्था के डॉक्टर नहीं कर सके वे काम मोदी जी ने कर दिखाया। आज आर्थिक, सामरिक, कूटनीतिक सहित हर क्षेत्र में भारत का डंका बज रहा है। प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में भारत की लोकतांत्रिक यात्रा पिछले 11 वर्षों में एक स्वर्णिम युग के रूप में दर्ज हो चुकी है। यह वह कालखंड है, जब देश ने युगपुरुष मोदी जी के कुशल, दूरदर्शी और जन-समर्पित नेतृत्व में विकास, समावेशन और आत्मनिर्भरता की नई गाथा लिखी है। सरकार की नीतियां आज 140 करोड़ भारतीयों के जीवन को न सिर्फ आसान बना रही हैं, बल्कि उन्हें नए अवसर, नई उम्मीदें और नया आत्मविश्वास भी दे रही हैं। भारत एक नए आत्मविश्वास के साथ वैश्विक मंच पर अग्रणी भूमिका निभा रहा है। यह देश अब चुनौतियों से पीछे नहीं हटता, बल्कि उन्हें अवसर में बदलता है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष व सांसद श्री विष्णुदत्त शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में पिछले 11 वर्षों में हमारी सरकार ‘‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास’’ के मंत्र को लेकर आगे बढ़ी है। यह सफलतम 11 साल सेवा, सुशासन और गरीब कल्याण के लिए समर्पित रहे हैं। इसका परिणाम है कि भारत ने जनकल्याण और विकास की दृष्टि से कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं। प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा संचालित प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना, पीएम उज्जवला योजना जन-धन योजना, आयुष्मान भारत योजना, किसान सम्मान निधि, ड्रोन दीदी, स्व-सहायता समूह जैसे कई कल्याणकारी कदम करोड़ों हितग्राहियों के जीवन बदलने में महत्वपूर्ण साबित हुए हैं। प्रधानमंत्री मोदी जी ने देशवासियों के लिए अपने समर्पण से हर क्षेत्र में भारत को आगे बढ़ाया है और जन-जन में आत्मविश्वास का संचार किया है। बीते 11 वर्षों में सरकार के कामों को समर्थन देने के साथ ही संपूर्ण देश मोदी जी के साथ विकसित भारत निर्माण के पथ पर चल पड़ा है। मोदी जी के साहसिक निर्णयों से आई अनुकूलता-डॉ. मोहन यादव  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने अपने 11 वर्षों के कार्यकाल में अनेक साहसिक निर्णय लिए। 2014 के पहले की सरकारें भ्रष्टाचार में आकंठ डूबी थी और देश की जनता में नकारात्मकता, निराशा और अविश्वास का माहौल था। प्रधानमंत्री मोदी जी के आने के बाद राजनीतिक व्यवस्था में सकारात्मकता, पारदर्शिता और परिणाम का समावेश हुआ। देश आशावाद से भर गया, लोगों में भरोसा जगा कि “मोदी है, तो मुमकिन है। ”यह केवल नारा नहीं, बल्कि जनमानस की धारणा बन गई है। राज्यसभा में बहुमत न होते हुए भी पूरे देश में जीएसटी लागू किया। शाहबानो केस में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद कांग्रेस की राजीव गांधी सरकार ने कदम पीछे खींच लिए थे, लेकिन प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने तीन तलाक विरोधी कानून बनाकर मुस्लिम बहनों को परेशानियों से मुक्ति दिलाई। न्यायालय की महत्ता को स्थापित करते हुए उन्होंने सदियों पुराने राम मंदिर विवाद का पटाक्षेप किया और अयोध्या में राम मंदिर के भूमिपूजन से लेकर उसका लोकार्पण भी किया। जबकि सोमनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार के भूमिपूजन कार्यक्रम में जाने से तत्कालीन प्रधानमंत्री पं. नेहरू ने इनकार कर दिया था। डॉ. यादव ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में धारा 370 देश के माथे पर विभाजन की लकीर की तरह थी। विरोधी दल ये धमकी दे रहे थे कि अगर धारा 370 हटाई गई, तो देश में आग लग जाएगी, खून की नदियां बह जाएंगी। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ और मोदी जी ने बड़ी सहजता से धारा 370 समाप्त कर दी। ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से प्रधानमंत्री जी ने आतंकवादियों पर जो प्रहार किए, उसके बाद पाकिस्तान की भाषा बोलने वाले लोग देश हित की बात करने लगे हैं। जब नायक शक्ति संपन्न हो, सरकार सक्षम हो तो ऐसी ही अनुकूलता आती है। मोदी जी ने अपने साहस से वातावरण बदल दिया। विदेशों में बज रहा भारत का डंका  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि कांग्रेस के जमाने में देश कहने भर को गुटनिरपेक्ष रहा, लेकिन वास्तविक गुटनिरपेक्षता मोदी जी के कार्यकाल में आई है। पड़ोसी देशों और दुनिया में भारत की छवि बदली है। हम अमेरिका से अपनी जरूरत का सामान लेते हैं और हर तरह के विरोध को नकारते हुए रूस से भी सस्ता तेल खरीदते हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच हम अपने छात्रों को वहां से निकालते हैं और भारत माता की जय बोलते हुए कई पाकिस्तानी छात्र भी वहां से निकलने में कामयाब हो जाते हैं। हम ईरान से उसके बंदरगाह का उपयोग करने का समझौता करते हैं, तो श्रीलंका को मदद देकर कर्ज से उबारते हैं और भूटान की रक्षा के लिए चीन के सामने अंगद के पैर की तरह जम जाते हैं। नेपाल में जब भूकंप आया, तो मानवीय सहायता पहुंचाने वाला भारत ही पहला देश था। पाकिस्तान से संबंध सुधारने के लिए भी प्रधानमंत्री श्री मोदी जी ने कई बार प्रयास किए, लेकिन यह बात उसे समझ नहीं आई। यह भारत की नीतियों का ही परिणाम है कि पाकिस्तान के साथ हालिया विवाद के दौरान अफगानिस्तान हमारे साथ खड़ा रहा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के कार्यकाल में मुस्लिम देशों में भी भारत के प्रति अनुकूलता आई है।  प्रधानमंत्री जी ने देश की अर्थव्यवस्था को ऐतिहासिक गति दी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि 1947 में आजादी के समय भारत दुनिया की 15 वें नंबर की अर्थव्यवस्था वाला देश था। श्रद्धेय अटलजी की गठबंधन वाली सरकार ने अपने स्तर पर अर्थव्यवस्था में सुधार के प्रयास किए। इसके बाद डॉक्टर मनमोहन सिंह की सरकार आई, जो पहले वित्त मंत्री भी थे, लेकिन भारत की अर्थव्यवस्था 11 … Read more

प्रदेश के बाहर से आयातित तुअर पर मंडी फीस से पूर्णतः छूट दिए जाने का निर्णय

प्रदेश की 20 हजार 600 सुदूर बसाहटों को मुख्य मार्ग से जोड़ने 21 हजार 630 करोड़ रूपये की सैद्धांतिक स्वीकृति मुख्यमंत्री मजरा-टोला सड़क योजना अंतर्गत 30 हजार 900 किलोमीटर सड़क का होगा निर्माण प्रदेश के बाहर से आयातित तुअर पर मंडी फीस से पूर्णतः छूट दिए जाने का निर्णय झाबुआ, सिंगरौली, देवास, नर्मदापुरम में वर्किंग वूमन हॉस्टल निर्माण का अनुमोदन मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में जिला विकास सलाहकार समिति” के गठन की स्वीकृति मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद का निर्णय भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक मंगलवार को मंत्रालय में सम्पन्न हुई। मंत्रि-परिषद द्वारा मुख्यमंत्री मजरा-टोला सड़क योजना अंतर्गत प्रदेश के सुदूर बसाहटों मजरा/टोला/धोनी/पुरा इत्यादि को बारहमासी सम्पर्कता प्रदान करने 21 हजार 630 करोड़ रूपये की सैद्धांतिक स्वीकृति दी गई। स्वीकृति अनुसार योजना का क्रियान्वयन 2 चरणों में किया जायेगा। वित्तीय वर्ष 2025-26 से 2029-30 तक पहले चरण एवं वित्तीय वर्ष 2030-31 से 2034-35 तक दूसरे चरण में कुल अनुमानित 30 हजार 900 कि.मी. मार्ग का निर्माण होगा। योजना का क्रियान्वयन राज्य मद से किया जायेगा। योजना के संबंध में मध्यप्रदेश ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण की साधिकार समिति को निर्णय लिये जाने के लिए अधिकृत किया गया है। स्वीकृति अनुसार न्यूनतम 20 आवास और 100 से अधिक जनसंख्या वाले 6 हजार वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले ऐसे क्षेत्र, जिसके 50 मीटर की दूरी में पूर्व से बारहमासी सड़क न हो, को बसाहट के अंतर्गत लिया जायेगा। इसके लिए बसाहट की जनसंख्या के घटते क्रम में विधानसभा क्षेत्रवार प्राथमिकता सूची तैयार की जायेगी। सांसद, क्षेत्रीय विधायक और जिला पंचायत सदस्यों के परामर्श पर ग्रामीणजनों की स्थानीय आवश्यकता जैसे – सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा आदि के आधार पर बसाहटों की प्राथमिकता में कलेक्टर द्वारा लिपिबद्ध कारणों से सूची में परिवर्तन किया जा सकेगा। अंतिम प्राथमिकता सूची का राज्य स्तर पर प्रकाशन किया जायेगा। योजना अंतर्गत 20 हजार 600 बसाहटों को मुख्य मार्ग से जोड़ने के लिए लगभग 30 हजार 900 किलोमीटर मार्ग का निर्माण किया जायेगा। प्रदेश के बाहर से आयातित तुअर पर मंडी फीस से पूर्णतः छूट दिए जाने का निर्णय मंत्रि-परिषद द्वारा प्रदेश में तुअर दाल उद्योगों की आवश्यकता के दृष्टिगत प्रदेश में बाहर से आयातित तुअर पर मंडी शुल्क से पूर्णतः छूट दिए जाने का निर्णय लिया गया। छूट दिए जाने से प्रदेश में तुअर दाल की पर्याप्त उपलब्धता होगी। साथ ही परिवहन बढेगा और रोजगार में वृद्धि होगी। झाबुआ, सिंगरौली, देवास, नर्मदापुरम में वर्किंग वूमन हॉस्टल निर्माण का सैद्धांतिक अनुमोदन मंत्रि-परिषद द्वारा झाबुआ, सिंगरौली, देवास और नर्मदापुरम में कामकाजी महिलाओं के जीवन को आसान बनाने के उद्देश्य से SASCI (स्पेशल असिस्टेंस टू स्टेट्स फॉर कैपिटल इनवेस्टमेंट) 2024-25 योजना अंतर्गत स्वीकृत 350 सीट्स की क्षमता वाले 4 वर्किंग वूमन हॉस्टल के निर्माण का सैद्धांतिक अनुमोदन दिया गया है। योजना पी.पी.पी मोड में संचालित की जायेगी। योजना पर 40 करोड़ 59 लाख रूपये खर्च होंगे। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में ”जिला विकास सलाहकार समिति” के गठन की स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा जिले के विकास योजना के लिए रोडमेप तैयार करने और जिले की दीर्घकालीन विकास योजनाएं बनाने के लिए सभी जिलों में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में “जिला विकास सलाहकार समिति” का गठन किये जाने का अनुमोदन दिया गया। उल्लेखनीय है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट भाषण में मध्यप्रदेश के समस्त जिलों में जिला विकास सलाहकार समिति का गठन किये जाने संबंधी निर्देश दिये गये थे। जिला विकास सलाहकार समिति में जिले के प्रभारी मंत्री उपाध्यक्ष होंगे। सांसद, जिले के समस्त विधायक, जिला मुख्यालय के महापौर या नगरपालिका अध्यक्ष, जिला पंचायत अध्यक्ष, जिले के सभी जनपद अध्यक्ष के साथ उद्योग, व्यापार, प्रगतिशील किसान, समाज सेवी, चिकित्सा, विधि आदि क्षेत्रों के 20 प्रतिनिधियों को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। कलेक्टर समिति के सदस्य सचिव होंगे। समिति के उद्देश्यों में जिले की जनता, जनप्रतिनिधियों व अन्य हितधारकों की जरूरतों और सुझावों के अनुसार जिले के दीर्घकालीन विकास की योजनाएँ बनाना है। साथ ही समिति जिले के परंपरागत कौशल को चिन्हित कर प्रधानमंत्री के वोकल फॉर लोकल” के सिद्धांत के दृष्टिगत उन्हें राष्ट्रीय और अन्तराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देते हुए जिले की समृ‌द्धि का रोडमैप तैयार करेगी। जिले की स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए शासकीय योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू करने के सुझावों पर समिति विचार करेगी। जिले में स्थानीय प्रयासों से प्रचलित नवाचारों को एक योजना के रूप में मूर्त रूप देना। जिले में रोजगार सृजन एवं विकसित मध्यप्रदेश के लक्ष्यों के संबंध में सुझाव, उद्योग, व्यापार, जल संरचनाओं के संरक्षण, निर्यात, कृषि, खनिज आदि क्षेत्रों में जिले की कार्ययोजना के लिए सुझाव देना शामिल है।  

भारत और चीन के बीच तनाव में “काफी” कमी आई है और त्रिपक्षीय समूह‘RIC’ का रुका हुआ काम फिर से शुरू होगा : पुतिन

 मॉस्को हाल के वर्षों में वैश्विक भू-राजनीति में तेजी से बदलाव आया है। इस बदलती दुनिया में रूस, भारत और चीन (RIC) त्रिपक्षीय मंच को दोबारा खड़ा करने की दिशा में सक्रिय प्रयास कर रहा है। रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने हाल ही में इस मंच को फिर से सक्रिय करने की इच्छा जताई है। लावरोव ने कहा कि भारत और चीन के बीच तनाव में “काफी” कमी आई है और त्रिपक्षीय समूह‘आरआईसी’ का रुका हुआ काम फिर से शुरू हो सकता है। रूसी राजधानी मॉस्को में ‘2050 भविष्य का मंच’ को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आरआईसी प्रारूप में संयुक्त कार्य की बहाली बहुध्रुवीय ढांचे के निर्माण समेत यूरेशियाई प्रक्रियाओं की दिशा में पहला कदम हो सकता है। लेकिन सवाल यह है कि रूस इस त्रिगुट को फिर से खड़ा करने के लिए इतना उत्सुक क्यों है? और क्या यह प्रयास वास्तव में भारत-चीन संबंधों को सामान्य कर सकता है? आइए विस्तार से समझते हैं। RIC त्रिगुट का इतिहास रूस-भारत-चीन (RIC) त्रिपक्षीय मंच की शुरुआत 1990 के दशक के अंत में हुई थी, जब रूस के तत्कालीन विदेश मंत्री येवगेनी प्रिमाकोव ने इसे अमेरिका-केंद्रित एकध्रुवीय विश्व व्यवस्था के खिलाफ एक वैकल्पिक रणनीतिक गठजोड़ के रूप में प्रस्तावित किया था। इस मंच का उद्देश्य तीनों देशों के साझा हितों को बढ़ावा देना और वैश्विक मंच पर बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करना था। 2000 के दशक में यह मंच ब्रिक्स और शंघाई सहयोग संगठन (SCO) जैसे अन्य बहुपक्षीय मंचों के साथ पूरक रूप से काम करता रहा। हालांकि, 2020 में गलवान घाटी में भारत और चीन के बीच हिंसक झड़प के बाद RIC मंच लगभग निष्क्रिय हो गया। भारत-चीन सीमा विवाद और दोनों देशों के बीच बढ़ते अविश्वास ने इस त्रिगुट को कमजोर कर दिया। इस बीच, यूक्रेन युद्ध के बाद रूस और चीन के बीच निकटता बढ़ती चली गई। हालांकि रूस बार-बार इस बात पर जोर देता रहा है कि वह भारत को अपने सबसे भरोसेमंद साझेदारों में से एक मानता है और RIC को दोबारा खड़ा करने की कोशिशों में लगा हुआ है। रूस की उत्सुकता के पीछे की वजहें रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने इससे पहले मई में भी एक बयान में कहा था कि भारत और चीन के बीच सीमा पर स्थिति को शांत करने की दिशा में प्रगति हुई है, और अब RIC मंच को फिर से सक्रिय करने का सही समय है। इस बयान के पीछे कई भू-राजनीतिक और रणनीतिक कारण हैं। पश्चिमी दबाव का जवाब: लावरोव ने बार-बार पश्चिमी देशों, खासकर अमेरिका और नाटो, पर भारत और चीन के बीच तनाव बढ़ाने का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि पश्चिम ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति के तहत भारत को चीन-विरोधी गठजोड़ (जैसे क्वाड और AUKUS) में शामिल करने की कोशिश कर रहा है। रूस का मानना है कि RIC का पुनर्जन्म पश्चिमी प्रभाव को संतुलित करने में मदद करेगा और तीनों देशों को एक स्वतंत्र, बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की दिशा में काम करने का अवसर देगा। चीन के साथ संतुलन: रूस और चीन के बीच बढ़ती साझेदारी के बावजूद, रूस नहीं चाहता कि वह बीजिंग के प्रति अत्यधिक निर्भर हो जाए। रूस को डर है कि जनसांख्यिकीय असंतुलन और साइबेरिया जैसे क्षेत्रों में चीनी प्रवासियों की बढ़ती मौजूदगी भविष्य में उसके लिए चुनौती बन सकती है। भारत, जो रूस का दशकों पुराना साझेदार है, वह इस संदर्भ में एक महत्वपूर्ण संतुलन की भूमिका निभा सकता है। भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और वैश्विक मंच पर उसकी बढ़ती भूमिका रूस के लिए आकर्षक है। भारत की रणनीतिक स्वायत्तता: भारत ने वैश्विक भू-राजनीति में अपनी स्वतंत्र नीति बनाए रखी है। वह न तो पूरी तरह पश्चिम के साथ है और न ही रूस-चीन धुरी का हिस्सा। रूस भारत की इस स्वायत्तता को महत्व देता है और इसे RIC मंच के माध्यम से मजबूत करना चाहता है। लावरोव ने कहा कि रूस के मित्र देश भारत की क्वाड में भागीदारी मुख्य रूप से केवल व्यापार और आर्थिक सहयोग तक सीमित है, और भारत इसे सैन्य गठजोड़ में बदलने के पश्चिमी प्रयासों का समर्थन नहीं करता। क्षेत्रीय स्थिरता और ब्रिक्स की भूमिका: रूस, भारत और चीन तीनों ब्रिक्स के प्रमुख सदस्य हैं। रूस का मानना है कि RIC का पुनर्जन्म ब्रिक्स को और मजबूत करेगा, जो पश्चिमी-प्रभुत्व वाली वैश्विक व्यवस्था के खिलाफ एक वैकल्पिक मंच के रूप में उभर रहा है। इसके अलावा, रूस भारत और चीन के बीच तनाव को कम करके एशिया में स्थिरता सुनिश्चित करना चाहता है, खासकर तब जब वह स्वयं यूक्रेन युद्ध के कारण पश्चिमी प्रतिबंधों का सामना कर रहा है। बातचीत शुरू कर दी है, त्रिगुट फिर खड़ा होगा- रूस रूसी समाचार एजेंसी ‘तास’ के अनुसार लावरोव ने  कहा, ‘‘मुझे वाकई उम्मीद है कि हम ‘रूस-भारत-चीन’ त्रिपक्षीय समूह के काम को फिर से शुरू कर पाएंगे। पिछले कुछ वर्षों से हमारी विदेश मंत्रियों के स्तर पर बैठक नहीं हुई है, लेकिन हम अपने चीनी सहयोगी और विदेश विभाग के भारतीय प्रमुख के साथ इस मुद्दे पर चर्चा कर रहे हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मुझे वास्तव में उम्मीद है कि अब जब भारत और चीन के बीच सीमा पर तनाव कम हो गया है- मेरी राय में यह काफी हद तक कम हुआ है और हालात स्थिर हो रहा है, नई दिल्ली और बीजिंग के बीच संवाद हो रहा है, तो हम ‘रूस-भारत-चीन’ त्रिगुट के कार्य को फिर से शुरू करने में सक्षम होंगे।’’ लावरोव ने कहा कि रूस और चीन बहुध्रुवीय संरचना के निर्माण सहित अखिल महाद्वीपीय प्रक्रिया में अग्रणी और सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं और उन्हें ऐसा करना भी चाहिए। उन्होंने कहा कि आरआईसी प्रारूप की बहाली इस दिशा में पहला कदम हो सकता है। उन्होंने कहा, “यह महाद्वीपीय प्रक्रियाओं की गति में भी एक बहुत ही महत्वपूर्ण कदम होगा।” भारत और चीन के बीच संबंधों में हाल के महीनों में कुछ सुधार के संकेत दिखे हैं। अक्टूबर 2024 में पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर सैनिकों को पीछे हटाने के समझौते ने चार साल से चले आ रहे गतिरोध को खत्म करने में मदद की। इसके अलावा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2024 में … Read more

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