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एस-400 ने 300 KM से ज्यादा की दूरी पर हवाई लक्ष्य को मार गिराकर सबसे लंबे समय तक मार करने का विश्व रिकॉर्ड बनाया

नई दिल्ली  यूक्रेन युद्ध के दौरान पश्चिमी देशों की मीडिया ने रूसी S-400 एयर डिफेंस सिस्टम को बदनाम करने की हर मुमकिन कोशिश की। उसे नाकाम बताया, लेकिन पाकिस्तान के खिलाफ S-400 ने जैसा कमाल किया है, उसे देखकर पश्चिमी देश परेशान है। भारत के रूसी हथियारों ने जिस तरह से पाकिस्तान को धूल चटाया है, वो पश्चिमी देशों को बर्दाश्त नहीं हो रहा है। एक वजह ये भी है कि पश्चिमी देशों की मीडिया ने पाकिस्तान के समर्थन में उसका भोपूं बन जाने का फैसला किया। एस-400 के पराक्रम के बारे में धीरे धीरे खुलासे होने लगे हैं और यूरेशियन टाइम्स की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान की लंबी दूरी की मिसाइलों के खिलाफ एस-400 सौ फीसदी कामयाब और प्रभावी साबित हुआ है। एस-400 ने पाकिस्तान के कई क्रूज मिसाइलों और विनाशकारी ड्रोन को मार गिराया, जिससे भारत को अपने सैन्य ठिकानों को सुरक्षित रखने में मदद मिली। आपको बता दें कि भारत ने 5.4 अरब डॉलर की लागत से रूस से एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम के पांच यूनिट खरीदे थे। जिनमें से रूसे ने अभी तक तीन एस-400 की ही डिलीवरी दी है। दो एस-400 की डिलीवरी मिलना अभी बाकी है। रूस से एस-400 खरीदने की वजह से अमेरिका ने CAATSA के तहत प्रतिबंध लगाने की भी धमकी दी थी, लेकिन भारत एस-400 खरीदने के फैसले से पीछे नहीं हटा। S-400 ने कैसे गिराया पाकिस्तानी AWACS एयरक्राफ्ट? यूरेशियन टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से बताया है कि भारतीय S-400 ने 314 किलोमीटर की दूरी पर किसी हवाई लक्ष्य को भेदकर एक रिकॉर्ड बनाया है। अधिकारी ने कहा कि एस-400 ने 300 किलोमीटर से ज्यादा की दूरी पर हवाई लक्ष्य को मार गिराकर SAM (सरफेस टू एयर मिसाइल) द्वारा सबसे लंबे समय तक मार करने का विश्व रिकॉर्ड बनाया है। इस दौरान एस-400 ने पाकिस्तान वायु सेना की आंख माने जाने वाले SAAB Erieye-2000 फ्लाइंग रडार, यानि AWACS एयरक्राफ्ट को मार गिराया था। ऐसा करके भारतीय एस-400 ने एक अनोखा रिकॉर्ड बना दिया है। अधिकारी का नाम नहीं छापने की शर्त पर यूरेशियन टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि SAAB Erieye-2000 का ये दूसरा नुकसान था। इससे पहले, पाकिस्तान के एयर मार्शल मसूद अख्तर (सेवानिवृत्त) ने खुलासा किया था, कि 9-10 मई की रात को भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान ब्रह्मोस मिसाइल से पाकिस्तान वायु सेना के एक AWACS विमान को मार गिराया था। लेकिन भारतीय अधिकारी ने कहा है कि AWACS को ब्रह्मोस से नहीं, बल्कि एस-400 से मारा गया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक अभी तक किसी भी SAM ने इतनी ज्यादा दूरी से किसी हवाई लक्ष्य को नष्ट नहीं किया है। लेकिन एस-400 ने 314 किलोमीटर से पाकिस्तानी AWACS एयरक्राफ्ट को मार गिराकर पूरी दुनिया में एक नया रिकॉर्ड बना दिया है। एस-400 की वजह से बाद में पाकिस्तान के फाइटर जेट्स ने उड़ान भरना ही बंद कर दिया था। जिसकी वजह से भारतीय वायुसेना के विमानों ने एक के बाद एक पाकिस्तानी वायुसेना के एयरबेस को निशाना बनाना शुरू कर दिया था। भारत ने पाकिस्तान के कई एयरबेस पर हमले किए थे और भारी नुकसान पहुंचाया था। एस-400 के नये ऑर्डर दे सकता है भारत भारत के पास फिलहाल एस-400 के तीन यूनिट्स हैं। जिनमें से दो को भारत ने पश्चिमी मोर्चे पर जबकि एक को पूर्वी मोर्चे पर तैनात कर रखा है। भारत अभी भी रूस से 2 और यूनिट की डिलीवरी का इंतजार कर रहा है। लेकिन यूक्रेन युद्ध की वजह से रूस डिलीवरी देने में देरी कर रहा है। इस बीच भारत के नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर अजीत डोभाल जल्द ही मॉस्को का दौरा करने वाले हैं। इस दौरान वो रूस से बाकी बचे 2 यूनिट्स की डिलीवरी के अलावा कुछ और एस-400 डिफेंस सिस्टम का भी ऑर्डर दे सकते हैं। वहीं कुछ रिपोर्ट्स में ये भी कहा गया है कि एस-400 की जगह भारत एस-500 ‘प्रोमेथियस’ को खरीदने का भी फैसला कर सकता है, जिसकी क्षमता धरती के लोअर ऑर्बिट तक मार करने की है। S-500 प्रोमेथियस रूस की अगली पीढ़ी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल और एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल सिस्टम है। अल्माज़-एंटे ने इसे डेवलप किया है और इसका ऑपरेशनल रेंज 600 किमी तक है। यह हाइपरसोनिक हथियारों, बैलिस्टिक मिसाइलों और यहां तक कि लोअर-ऑर्बिट में स्थिति सैटेलाइट्स को भी मार गिराने की क्षमता रखता है। हालांकि इसकी कीमत काफी ज्यादा होने की संभावना है। रूस ने अभी तक एस-500 की कीमत का खुलासा नहीं किया है, लेकिन इसकी कीमत 4 से 5 अरब डॉलर के बीच होने की संभावना है। एस-500 खरीदकर भारत, चीन और पाकिस्तान के स्टील्थ फाइटर जेट को न्यूट्रल कर सकता है।

देश का पहला बुलेट ट्रेन स्टेशन अहमदाबाद में बनकर तैयार, 2029 से दौड़ेगी ट्रेन…

 अहमदाबाद  भारत की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना अब नई ऊँचाइयों पर पहुंच चुकी है। मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के लिए 300 किलोमीटर लंबा वायाडक्ट लगभग पूरा हो चुका है, जिससे यह प्रोजेक्ट अपनी मंजिल के और करीब आ गया है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और गुजरात के राज्य परिवहन मंत्री ने हाल ही में इस बड़ी उपलब्धि की जानकारी फोटो और वीडियो के साथ साझा की है। यह बुलेट ट्रेन का पहला स्टेशन गुजरात के सूरत शहर में बनाया गया है। बुलेट ट्रेन के लिए 300 किलोमीटर का मजबूत वायाडक्ट तैयार मुंबई से अहमदाबाद तक बुलेट ट्रेन का मार्ग करीब 500 किलोमीटर का होगा। अब तक इस मार्ग पर 300 किलोमीटर लंबा वायाडक्ट तैयार हो चुका है। वायाडक्ट एक ऊँचा पुल जैसा ढांचा होता है जो ट्रेन को सड़क, नदियों और अन्य बाधाओं के ऊपर से गुज़रने में मदद करता है। इस 300 किलोमीटर में से 257.4 किलोमीटर का निर्माण फुल स्पैन लॉचिंग तकनीक से किया गया है, जो एक आधुनिक और तेज़ तरीका है। यह तकनीक पारंपरिक तरीकों की तुलना में 10 गुना तेजी से काम करती है। इस विधि से गर्डर (लंबे लोहे या कंक्रीट के टुकड़े) को सीधे उसके स्थान पर स्थापित किया जाता है। हर एक गर्डर लगभग 970 टन वजन का होता है। इस वजह से काम तेजी से पूरा हो पा रहा है। अब तक का काम कितना हुआ पूरा? इस बड़े प्रोजेक्ट में अब तक:     383 किलोमीटर पियर्स (उठाए गए खंभे)     401 किलोमीटर फाउंडेशन (नींव)     326 किलोमीटर गर्डर कास्टिंग (गर्डर बनाने का काम) पूरा किया जा चुका है। इसके अलावा कई नदी पुल, स्टील और पीएससी ब्रिज, और स्टेशन बिल्डिंग भी बनाए जा चुके हैं। इस बुलेट ट्रेन के रास्ते में कुल 12 स्टेशन बन रहे हैं, जिनमें से सूरत में देश का पहला बुलेट ट्रेन स्टेशन लगभग तैयार है। जापान दो बुलेट ट्रेन गिफ्ट करेगा बीते महीने खबर आई कि जापान भारत को दो शिंकानसेन ट्रेन E5 और E3 गिफ्ट करेगा. जापान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इनकी डिलीवरी 2026 की शुरुआत में हो सकती है. जापान इस वक्त शिंकानसेन की E10 सीरीज पर काम कर रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, जापान और भारत 2030 की शुरूआत में एक साथ E10 सीरीज की ट्रेन भी पटरी पर उतारने की योजना बना रहे हैं. भारत में इस प्रोजेक्ट का जिम्मा भारतीय रेलवे की सहायक कंपनी ‘नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन (NHSRC) को दिया गया है. गुजरात में बिछा दिया गया ट्रैक बेड गुजरात के लगभग 157 किलोमीटर हिस्से में ट्रेन के लिए ट्रैक बेड (रेल पटरी के नीचे की सतह) बिछा दिया गया है। ये एक बड़ा संकेत है कि ट्रेन के ट्रायल रन की तैयारी हो रही है। उम्मीद है कि अगले साल यानी 2026 में ट्रायल रन शुरू हो सकता है। 2029 तक ट्रेन शुरू होने की उम्मीद रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया है कि पूरी बुलेट ट्रेन सेवा 2029 तक शुरू हो जाएगी। इसके बाद मुंबई से अहमदाबाद तक की यात्रा केवल 2 से 3 घंटे में पूरी हो सकेगी, जो अभी कई घंटों तक लगती है। यह भारत की यात्रा की दुनिया में एक बड़ी क्रांति होगी। इस प्रोजेक्ट की सबसे खास बात यह है कि इसके लिए जरूरी उपकरण और मशीनरी भारत में ही बनाए जा रहे हैं। लॉन्चिंग गैंट्री, ब्रिज गैंट्री, और गर्डर ट्रांसपोर्टर्स जैसे भारी मशीनें देश में ही निर्मित की जा रही हैं। इससे भारत की आत्मनिर्भरता और टेक्नोलॉजी में भी मजबूती आई है। बुलेट ट्रेन के वायाडक्ट के दोनों ओर कुल 3 लाख से ज्यादा नॉइज़ बैरियर लगाए जा रहे हैं। ये बैरियर ट्रेन के तेज आवाज को कम करते हैं जिससे आसपास के इलाके शांति से रह सकें। महाराष्ट्र और गुजरात दोनों में बुलेट ट्रेन के लिए विशेष डिपो भी बन रहे हैं जहां ट्रेन का रखरखाव और मरम्मत होगी। इसके अलावा जापान से शिंकासेन ट्रेन के कोच आने की उम्मीद है। अगर सब ठीक रहा तो अगस्त 2026 तक सूरत से बिलीमोरा के बीच ट्रेन चलाने की योजना है। क्या खास है फुल स्पैन लॉचिंग तकनीक? फुल स्पैन लॉचिंग तकनीक एक ऐसी नई विधि है जिससे पुल के गर्डर को बड़े पैमाने पर और तेज़ी से स्थापित किया जा सकता है। इस तकनीक से निर्माण की गति बढ़ जाती है, जिससे समय और लागत दोनों बचती हैं। भारत में पहली बार इस तकनीक का इतना बड़ा उपयोग किया जा रहा है।

बस एक फूंक मारो और जान लो अपना शुगर लेवल, बालाघाट के प्रोफेसर और छात्रों ने निकाली ऐसी अनोखी तरकीब

बालाघाट शुगर के मरीजों के लिए अच्छी खबर. फूंक मारकर पता कीजिए शरीर का शुगर लेवल. अब बार बार सुई चुभाने और खून निकालने की जरूरत नहीं है, बस एक फूंक मारो और जान लो अपना शुगर लेवल. बालाघाट के प्रोफेसर और छात्रों ने निकाली ऐसी अनोखी तरकीब. सेकंडों में पता करें अपना सुगर लेवल बालाघाट के शासकीय जटाशंकर त्रिवेदी कॉलेज के प्रोफेसर और छात्रों ने मिलकर एक ऐसी मशीन बनाई है, जिससे आप उस मशीन में फूंक मारकर सेकंडों में पता कर सकेंगे कि आपके शरीर का शुगर लेवल कितना है. अब आपको बार बार डॉक्टर के पास जाने के झंझट से छुटकारा मिल जायेगा साथ ही आप अपने शरीर का ध्यान भी रख सकेंगे. प्रोफेसर और कॉलेज के छात्रों के द्वारा बनाई गई इस मशीन की तारीफ अब हर तरफ हो रही है. भोपाल में आयोजित सृजन कार्यक्रम में बालाघाट के इस प्रोजेक्ट ने पहला स्थान हासिल किया है, जबकि इस कार्यक्रम में प्रदेश भर से 150 प्रोजेक्ट चयनित हुए थे. बालाघाट के शुगर ब्रीथ एसीटोन 3.0 प्रोजेक्ट को पहला स्थान बता दें कि भोपाल में आयोजित सृजन कार्यक्रम के लिए पूरे प्रदेश से 150 प्रोजेक्ट चयन किये गये थे, जिसमें इस शुगर ब्रीथ एसीटोन 3.0 नाम के प्रोजेक्ट का भी चयन हुआ था. बालाघाट के इस शुगर ब्रीथ एसीटोन 3.0 नाम के प्रोजेक्ट को पहला स्थान मिला. शुगर ब्रीथ एसीटोन 3.0 मशीन क्या है? यह एक ऐसी डिवाइस है, जिसमें बिना सुई चुभाए यानी शरीर से बिना खून निकाले ही शुगर लेवल का पता लगाया जा सकता है. इस डिवाइस में सिर्फ फूंक मारना होता है. इसके बाद ये मशीन चंद सेकंड में ही आपका शुगर लेवल बता देती है. इसमें एकदम इग्जैक्ट शुगर लेवल की मात्रा तो नहीं पता चलती, लेकिन ये तीन तरह से शुगर की रीडिंग दिखाती है, इसमें ‘लो’ का मतलब शुगर लेवल कम है. वहीं, ‘मॉडरेट’ यानी शुगर लेवल सामान्य है, जबकि मशीन में जब ‘हाई’ दिखाता है, तो शुगर लेवल ज्यादा है, यानी कि डायबिटीज होने की आशंका है. एसिटोन और ग्लूकोज के संबंध का अध्ययन गौरतलब हो कि शासकीय जटाशंकर त्रिवेदी कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. दुर्गेश अगासे इस प्रोजेक्ट पर पिछले 8 सालों से काम कर रहे थे तब कहीं जाकर यह डिवाइस बन पाई है. प्रोफेसर डॉ. दुर्गेश अगासे ने बताया कि “2017 में उन्होंने इस प्रोजेक्ट को बनाना शुरू किया था. शुगर के मरीजों में कीटोजेनिक मेटाबॉलिज्म शुरू हो जाता है. उनकी बॉडी के अंदर कीटोन का निर्माण होने लगता है. फिर कीटोन में उपस्थित एसिटोन उनकी सांस में आने लगता है. ऐसे में एसिटोन और ग्लूकोज के संबंध का अध्ययन किया गया. फिर इस आधार पर इस मशीन का आविष्कार हो पाया है. इसका पेटेंट साल 2023 में किया गया. इस मॉडल में इंजीनियरिंग की अहम भूमिका रही, क्योंकि एसिटोन और ग्लूकोज के संबंध का अध्ययन और इसके अनुपात को स्पष्ट करने के लिए कोडिंग की गई. दोनों के संबंध को स्थापित करने के लिए फिर प्रोग्रामिंग की गई. ऐसे में इंजीनियरिंग की मदद से यह प्रोजेक्ट पूरा हो पाया.” ब्रेथ एनलाइजर डिवाइस, एसिटोन पर करती है काम जनरल फिजिशियन डॉ. वेदप्रकाश लिल्हारे ने चर्चा में बताया कि “प्रोफेसर और बच्चों के द्वारा यह एक अच्छा नवाचार है, जिस तरह से खून निकाल कर शुगर की जांच होती थी उससे छुटकारा मिलेगा. वहीं, डॉक्टर ने बताया कि प्रोफेसर अगासे का जो ब्रेथ एनलाइजर है वो एसिटोन पर काम कर रहा है और एसिटोन हर शुगर के मरीजों में नहीं बनता है. मैं उनसे लगातार चर्चा में हूं, वे और क्या अपडेट कर रहे हैं इसकी चर्चा भी लगातार हो रही है.”

यूनुस और सेना प्रमुख के बीच जुबानी जंग से बांग्लादेश का सियासी माहौल गर्म, यूनुस सत्ता में बने रहने की कोशिश में बनाई रणनीति

ढाका बांग्लादेश एक बार फिर नेतृत्व संकट से घिर गया है. ढाका की राजनीति संवेदनशील मोड़ पर आ खड़ी हुई है. देश के अंतरिम सरकार के प्रमुख सलाहकार और नोबेल पुरस्कार विजेता डॉ. मुहम्मद यूनुस अब खुद को बढ़ते दबावों के बीच घिरा पा रहे हैं. सेना प्रमुख जनरल वाकर-उज़-ज़मान की दो टूक चेतावनी के बाद यूनुस इस्तीफा देने पर विचार कर रहे हैं और प्लान B की तैयारी में जुट गए हैं. कहा जा रहा है कि यूनुस अब सत्ता में बने रहने के लिए सड़कों पर ताकत दिखाने जा रहे हैं. वहीं, राजनीतिक गलियारों और सैन्य हलकों में उनकी मंशा को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं. पिछले साल बांग्लादेश में जनविरोध के बाद सत्ता में उलटफेर हुआ था और 84 साल के यूनुस के हाथों में सत्ता सौंपी गई थी. बांग्‍लादेश के आर्मी चीफ जनरल वकर-उज-जमान ने रॉयटर्स को दिए इंटरव्यू में कहा था कि मुहम्मद यूनुस अगले डेढ़ साल तक सत्ता में रहेंगे. इसी बीच चुनाव कराए जाएंगे और नई सरकार का गठन होगा.उन्होंने आगे कहा था, हम जल्द ही देश में लोकतांत्रिक प्रक्रिया शुरू करना चाहते हैं. बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने आर्मी को मजिस्ट्रेट की पावर सौंपी है, जिसके बाद अंदेशा लगाया जा रहा था कि शायद अब सेना के हाथ में देश की सत्ता होगी और दोनों मिलकर सरकार चलाएंगे. सेना प्रमुख ने साफ किया था कि जब तक अंतरिम सरकार रहेगी, तब तक सेना उसके पीछ रहकर काम करेगी. यह तब तक चलेगा, जब तक कि यूनुस देश में चल रहे सुधारों को पूरा नहीं कर लेते हैं. आर्मी चीफ ने यह भी आश्वासन दिया था कि वे अंतरिम सरकार के साथ हमेशा खड़े रहेंगे, कैसी भी परिस्थिति हो. अब विवाद क्यों भड़का… दरअसल, सेना प्रमुख जनरल वाकर-उज़-ज़मान ने यूनुस के सुधार एजेंडे को खारिज कर दिया है और दिसंबर 2025 तक चुनाव कराने का आह्वान किया. जनरल वाकर-उज़-ज़मान ने पहली बार सार्वजनिक तौर पर कहा कि अंतरिम सरकार का काम सिर्फ चुनाव कराना है, नीतिगत निर्णय लेना नहीं. सैन्य मामलों में हस्तक्षेप, आंतरिक सुरक्षा में एकपक्षीय निर्णय और बाहरी शक्तियों के दबाव को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. सेना को हर रणनीतिक और सुरक्षा नीति में विश्वसनीय साझेदार की तरह शामिल किया जाना चाहिए. यह बयान यूनुस की सत्ता को खुली चुनौती के रूप में देखा गया. ज़मान ने इस बात पर भी जोर दिया कि अंतरिम सरकार कोई भी ऐसा महत्वपूर्ण निर्णय ना ले, जिससे बांग्लादेश की स्थिरता और संप्रभुता पर असर पड़े. ऐसे मुद्दों को भविष्य में निर्वाचित सरकार पर छोड़ दिया जाए. बुधवार को सेना प्रमुख ने स्पष्ट किया कि अब और देरी नहीं चलेगी. सेना को नजरअंदाज कर रणनीतिक फैसले नहीं लिए जा सकते हैं. सेना प्रमुख ने बार-बार यह स्पष्ट किया है कि वे सैन्य अधिग्रहण के खिलाफ हैं. वे यूनुस से बस यही उम्मीद करते हैं कि वे स्वतंत्र, निष्पक्ष और समावेशी चुनाव करवाएं ताकि सत्ता का सुचारू और शांतिपूर्ण हस्तांतरण निर्वाचित सरकार को हो सके, जिसके बाद सेना वापस अपने बैरक में जा सकती है. बुधवार को उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि सेना अब भीड़तंत्र और अराजकता, अंतरिम सरकार द्वारा सैन्य मामलों में किसी भी तरह का हस्तक्षेप और बांग्लादेश की संप्रभुता और स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण निर्णयों में सेना को दरकिनार करने के किसी भी प्रयास को बर्दाश्त नहीं करेगी. उन्होंने जोर देकर कहा कि सभी सुरक्षा और रणनीतिक मामलों में सैन्य नेतृत्व से सलाह ली जानी चाहिए और पीठ पीछे कुछ भी नहीं किया जाना चाहिए. यूनुस आर्मी चीफ के खिलाफ ही रच रहे साजिश, भारत के दुश्मनों के साथ सीक्रेट मीट…  बांग्लादेश में सियासी माहौल फिर से गर्म हो गया है. यूनुस और सेना प्रमुख के बीच जुबानी जंग चल रही है. ऐसे में यूनुस सेना प्रमुख को हटाना चाहते हैं. अंतरिम सरकार के प्रमुख और नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस ने भारत विरोधी दलों की एक अहम बैठक बुलाई है, लेकिन इस बैठक में क्या बात होगी, यह अभी रहस्य बना हुआ है. ढाका की सड़कों पर चर्चा है कि यूनुस अगले पांच साल तक सत्ता में बने रहना चाहते हैं. इसके लिए उनके समर्थक ‘मार्च फॉर यूनुस’ नाम से एक विशाल जनसभा की तैयारी कर रहे हैं. दूसरी तरफ, सेना प्रमुख की सख्त चेतावनी और राजनीतिक दलों की नाराजगी ने इस ड्रामे को और रोचक बना दिया है. मोहम्मद यूनुस अब सीक्रेट मीटिंग कर रहे हैं. यूनुस ने  बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) और जमात-ए-इस्लामी के नेताओं के साथ अलग-अलग बैठकें बुलाई हैं. बीएनपी के एक नेता ने बताया कि यूनुस के दफ्तर ने उन्हें इस बैठक के लिए आमंत्रित किया है. लेकिन, इन बैठकों का असली मकसद क्या है, यह कोई नहीं जानता. हालांकि उनके इस तरह के मीटिंग करने से माना जा रहा है मोहम्मद यूनुस सत्ता छोड़ने के मूड में नहीं हैं और वह सेना प्रमुख को ही विलेन बनाकर हटाना चाहते हैं. गुरुवार को यूनुस ने NCP नेता नाहिद इस्लाम से मुलाकत की थी. माना जा रहा है कि दोनों मिलकर सेना प्रमुख जनरल वाकर-उज-जमान को हटाने की रणनीति बना रहे हैं. नाहिद वही भारत विरोधी नेता है, जिसने पिछले साल शेख हसीना की सरकार के खिलाफ छात्र आंदोलन को लीड किया था. नाहिद और यूनुस की मुलाकात के बाद ये अटकलें और तेज हो गई हैं. यूनुस पांच साल संभालेंगे सत्ता? यूनुस इस पूरी लड़ाई में अपनी चालें चल रहे हैं. एक तरह वह इस्तीफा देने की बात कर रहे हैं वहीं दूसरी ओर अपने समर्थकें के जरिए प्रदर्शन करवा रहे हैं. यूनुस के समर्थकों ने ढाका के मशहूर शाहबाग चौराहे पर शनिवार को ‘मार्च फॉर यूनुस’ नाम से एक बड़ी रैली की घोषणा की है. शहर में पोस्टर लगाए जा रहे हैं और सोशल मीडिया पर ‘पांच साल तक यूनुस को सत्ता में रखो’ और ‘पहले सुधार, फिर चुनाव’ जैसे नारे ट्रेंड कर रहे हैं. समर्थकों का कहना है कि यूनुस को देश में सुधार लाने के लिए लंबा समय चाहिए. लेकिन इस रैली की टाइमिंग ने सबके कान खड़े कर दिए हैं. आर्मी चीफ की चेतावनी सेना प्रमुख जनरल वाकर-उज-जमान ने साफ कहा है कि बिना चुनाव के सत्ता में बने रहना गैरकानूनी है. सेना ने यूनुस सरकार को दिसंबर … Read more

IAF ने पाकिस्तान पर चार बड़े हवाई हमले किए थे, जिसके बाद पाकिस्तान अमेरिका से सीजफायर की गुहार लगाने लगा

नई दिल्ली  भारत के ऑपरेशन सिंदूर के खिलाफ पाकिस्तान ने 10 मई को ऑपरेशन बनयान अल-मरसूस चलाया। लेकिन यह ऑपरेशन सिर्फ आठ घंटे ही चला। सूत्रों के मुताबिक 10 मई की रात भारतीय वायुसेना (IAF) ने पाकिस्तान पर चार बड़े हवाई हमले किए थे। इंडियन एयरफोर्स ने पाकिस्तान के एयर बेस, हवाई जहाज और एयर डिफेंस सिस्टम को तबाह कर दिया जिसके बाद पाकिस्तान अमेरिका से सीजफायर की गुहार लगाने लगा। इंडियन एयरफोर्स ने पाकिस्तान को झुकने पर मजबूर किया भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने पाकिस्तान पर सटीक निशाना लगाने वाली मिसाइलें दागीं। रफाल विमानों से SCALP मिसाइलें दागी गईं। SU-30 MKI विमानों से ब्रह्मोस मिसाइलें दागी गईं। इन मिसाइलों ने चकलाल में स्थित नूर खान एयरबेस पर हमला किया। यह पाकिस्तान के उत्तरी एयर कमांड-कंट्रोल नेटवर्क का हिस्सा था। पहले हमले में ही यह तबाह हो गया। आखिरी हमला जैकोबाबाद और भोलारी एयर बेस पर किया गया। लेकिन तब तक पाकिस्तान हार मान चुका था, वह अमेरिका से युद्ध रोकने के लिए कह रहा था। पाकिस्तान ने 10 मई को सुबह 1:00 बजे ऑपरेशन बनयान अल-मरसूस शुरू किया था। उसने कहा कि वह अगले 48 घंटों में भारत के एयर बेस को तबाह कर देगा। लेकिन भारत ने पाकिस्तान पर जोरदार हमला किया। उसने हवा से सतह पर मार करने वाली कई मिसाइलें इस्तेमाल कीं। यह ऑपरेशन सुबह 9:30 बजे ही खत्म हो गया। S-400 ऑपरेशन सिंदूर के दौरान 11 बार काम किया भारत का S-400 एयर डिफेंस सिस्टम आदमपुर में है। इसने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान 11 बार काम किया। इसने पाकिस्तान के SAAB-2000 एयरबोर्न अर्ली वार्निंग सिस्टम को मार गिराया। यह सिस्टम पाकिस्तान के अंदर 315 किलोमीटर दूर था। S-400 एक ऐसा सिस्टम है जो हवा में आने वाले खतरों को भांप लेता है और उन्हें मार गिराता है। IAF के पास इस बात के सबूत हैं कि उसकी मिसाइलों ने एक C-130J विमान, एक JF-17 और दो F-16 लड़ाकू विमानों को भी मार गिराया। IAF ने SCALP और ब्रह्मोस मिसाइलों को एक साथ इस्तेमाल किया ताकि निशाना चूक न जाए। 7 मई को भारत ने नौ आतंकी कैंपों पर हमला किया था। सात कैंपों को अलग-अलग तरह के गोला-बारूद से निशाना बनाया गया। सेना, वायुसेना और नौसेना ने मिलकर यह हमला किया था। मुरिदके और बहावलपुर में मौजूद आतंकी ठिकानों पर SCALP और ब्रह्मोस मिसाइलों से हमला किया गया। ये मिसाइलें सटीक निशाना लगाती हैं। सूत्रों के अनुसार, 10 मई को भारत ने लाहौर में चीन में बने LY-80 एयर डिफेंस सिस्टम को HARPY कामिकेज़ ड्रोन से मार गिराया। इसके अलावा, कराची के मलीर में HQ-9 (S-300 का चीनी वर्जन) को भी एक भारतीय मिसाइल ने तबाह कर दिया। पाकिस्तान के DGMO ने युद्धविराम की गुहार लगाई भारतीय नौसेना 10 मई की सुबह कराची नौसेना बंदरगाह पर हमला करने के लिए तैयार थी। उसका जहाजी बेड़ा मकरान तट से 260 मील दूर था। लेकिन पाकिस्तान के DGMO ने फोन करके कहा कि अगर भारत ने ब्रह्मोस मिसाइलों से बंदरगाह पर हमला किया तो वह जवाबी कार्रवाई करेगा। पाकिस्तान की धमकी से भारतीय सेना और सरकार डरे नहीं। लेकिन 10 मई की दोपहर तक पाकिस्तान के DGMO ने युद्धविराम की गुहार लगाई।

केंद्रीय कृषि मंत्री चौहान ने ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ के विचार को खुलकर समर्थन दिया

भोपाल केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ के विचार को खुलकर समर्थन दिया है. उनका तर्क है कि बार-बार चुनाव होने से न केवल सरकार के कामकाज में बाधा आती है, बल्कि इसका खर्च भी आसमान छू रहा है. उन्होंने बताया कि 1952 में चुनावों पर 9,000 करोड़ रुपये खर्च हुए थे, जबकि 2024 में यह आंकड़ा 1 लाख करोड़ रुपये से भी ज्यादा पहुंच गया. चौहान के मुताबिक अगर राज्यों के विधानसभा चुनाव और स्थानीय निकाय चुनाव भी जोड़ लिए जाएं, तो यह खर्च 7 लाख करोड़ रुपये तक जा सकता है. चौहान ने मध्य प्रदेश का उदाहरण देते हुए बताया कि सितंबर 2023 से लेकर जून 2024 तक आचार संहिता लागू रहने के कारण कोई बड़ा काम नहीं हो सका. उन्होंने यह भी जोड़ा कि अधिकारियों का ध्यान भी चुनावी ड्यूटी में लगा रहता है जिससे योजनाओं की रफ्तार धीमी हो जाती है. ऐसे में एक बार में सभी चुनाव कराना ही बेहतर विकल्प है. कांग्रेस की आशंकाएं: लोकतंत्र पर खतरा? कांग्रेस पार्टी इस विचार का खुलकर विरोध करती रही है. पार्टी का मानना है कि ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में संघीय ढांचे के खिलाफ है. कांग्रेस का तर्क है कि इससे राज्यों की स्वायत्तता पर चोट पहुंचेगी और केंद्र सरकार को अतिरिक्त राजनीतिक लाभ मिल सकता है. पार्टी यह भी कहती है कि हर राज्य की राजनीतिक परिस्थितियाँ अलग होती हैं, ऐसे में एक साथ चुनाव कराना व्यावहारिक नहीं है. क्षेत्रीय दलों की राय: सत्ता के केंद्रीकरण का खतरा तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), राष्ट्रीय जनता दल (राजद), वाम मोर्चा, शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) और अन्य क्षेत्रीय दल भी इस प्रस्ताव पर सवाल उठा चुके हैं. टीएमसी की ओर से कहा गया है कि यह प्रस्ताव भारतीय लोकतंत्र की विविधता को समाप्त करने की दिशा में एक कदम है. वाम मोर्चा इसे चुनावी ‘केंद्रवाद’ करार देता है, जिससे क्षेत्रीय मुद्दे गौण हो जाएंगे. शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) और राजद ने किया विरोध राजद के नेता भी मानते हैं कि यह एक राजनीतिक चाल है जिसका उद्देश्य विपक्षी दलों को कमजोर करना और केंद्र की सत्ता को मजबूत करना है. शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) ने भी कहा है कि इससे राज्यों की राजनीति दब जाएगी और केवल राष्ट्रीय मुद्दे ही चुनाव में हावी रहेंगे, जिससे स्थानीय जनता की समस्याएं अनसुनी रह जाएंगी. भाजपा की रणनीति और नेता शिवराज सिंह चौहान का बयान भाजपा के वरिष्ठ नेता शिवराज सिंह चौहान का बयान इस दिशा में पार्टी की रणनीतिक सोच को दर्शाता है. भाजपा लगातार इस विषय को उठाती रही है और अब इसे एक प्रमुख चुनावी एजेंडा बनाने की तैयारी में है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कई बार इस विचार का समर्थन किया है. सहम‍ति होना मुश्किल, राजनेताओं ने बना दी कठिन राह शिवराज सिंह चौहान का बयान भाजपा के भीतर इस मुद्दे को लेकर एकता और दृढ़ता को दर्शाता है, जबकि विपक्षी दल इससे लोकतंत्र और संघीय ढांचे के लिए खतरा मानते हैं. जहां सरकार इसे खर्च और प्रशासनिक कुशलता के नजरिए से देख रही है, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक संतुलन को बिगाड़ने वाला कदम मानता है.  

पंचतत्व में विलीन हुए शहीद लेफ्टिनेंट शशांक तिवारी

अयोध्या सिक्किम में शहीद लेफ्टिनेंट शशांक तिवारी अयोध्या में पंचतत्व में विलीन हो गए। उनका अंतिम संस्कार पवित्र सरयू के जमथरा घाट पर किया गया। मुखाग्नि शहीद के पिता जंग बहादुर तिवारी ने दी। इस दौरान सेना के अफसरों ने शहीद के पिता को ढांढस बंधाया। इससे पहले शहीद के आवास से हजारों की संख्या में स्थानीय लोग अंतिम यात्रा में शामिल हुए। सेना के अधिकारियों ने जमथरा घाट पर श्रद्धांजलि देते हुए सलामी दी। रामनगरी के लाल शहीद लेफ्टिनेंट शशांक तिवारी का पार्थिव शरीर शुक्रवार की रात उनके गद्दोपुर मझवा स्थित आवास पहुंचा। सेना के अधिकारी मिलिट्री हॉस्पिटल से पार्थिव शरीर लेकर उनके घर पहुंचे। शनिवार को सुबह से उनके घर पर श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लगा रहा। जनप्रतिनिधियों के साथ ही स्थानीय नागरिकों ने शशांक को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद सेना के जवान पार्थिव शरीर को लेकर सरयू के जमथरा घाट पहुंचें। इस दौरान भारत माता की जय, शहीद शशांक अमर रहें…जैसे नारों से क्षेत्र गुंजायमान हो उठा। वहां पर शहीद लेफ्टिनेंट शशांक तिवारी का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। लोगों ने शहीद शशांक तिवारी को दी श्रद्धांजलि जिले के प्रभारी मंत्री सूर्य प्रताप शाही सहित जिलाधिकारी निखिल टीकाराम फुंडे, एसएसपी गौरव ग्रोवर, डोगरा रेजीमेंट सेंटर के उच्चाधिकारियों और विधायक वेद प्रकाश गुप्त, रामचंद्र यादव, अमित सिंह, महापौर गिरीश पति त्रिपाठी, पूर्व सांसद लल्लू सिंह, पूर्व मंत्री पवन पांडेय, पूर्व मेयर ऋषिकेश उपाध्याय, भाजपा महानगर अध्यक्ष कमलेश श्रीवास्तव समेत अन्य लोगों ने शहीद शशांक तिवारी को श्रद्धांजलि दी।  

नीति आयोग की बैठक में पीएम मोदी ने सीएम साय से कहा – छत्तीसगढ़ की बात अभी बाकी है

रायपुर   नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की बैठक के दौरान एक आत्मीय क्षण सामने आया, जिसने सबका ध्यान खींचा। लंच ब्रेक के समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का हाथ थामते हुए मुस्कराकर कहा कि  “छत्तीसगढ़ की बात अभी बाकी है।” इस एक वाक्य में प्रधानमंत्री का स्नेह, विश्वास और राज्य के प्रति विशेष रुचि झलक रही थी। उस क्षण, आसपास उपस्थित आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री एन. चंद्रबाबू नायडू और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री श्री एम.के. स्टालिन भी मुस्कराते हुए इस संवाद के साक्षी बने। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ के आदिवासी अंचलों में हो रहे सकारात्मक बदलाव, औद्योगिक निवेश, और ‘आत्मनिर्भर बस्तर’ की दिशा में राज्य सरकार द्वारा उठाए गए ठोस कदमों की सराहना की। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बताया कि कैसे बस्तर अब संघर्ष नहीं, संभावना का प्रतीक बन रहा है – जहाँ कभी बंदूकें चलती थीं, वहाँ अब मशीनें, लैपटॉप और स्टार्टअप की चर्चा हो रही है। नवा रायपुर में देश की पहली सेमीकंडक्टर यूनिट और एआई डेटा सेंटर की स्थापना से लेकर लिथियम ब्लॉक की नीलामी तक – छत्तीसगढ़ अब संसाधनों से परिपूर्ण राज्य बनने की ओर अग्रसर है और देश के विकास में छत्तीसगढ़ की बेहद महत्वपूर्ण भूमिका है। यह क्षण किसी औपचारिक संवाद का नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के द्वारा छत्तीसगढ़ के विकास के लिए प्रतिबद्ध मुख्यमंत्री श्री साय के प्रयासों की सहज स्वीकृति और सराहना का था। नीति आयोग की बैठक में जहां देशभर के राज्यों ने अपने विकास मॉडल प्रस्तुत किए, वहीं छत्तीसगढ़ की प्रस्तुति ने प्रधानमंत्री की विशेष रुचि और सराहना प्राप्त की। यह स्पष्ट संकेत है कि छत्तीसगढ़ अब केवल एक उभरता हुआ राज्य नहीं, बल्कि देश के समग्र विकास में एक निर्णायक भूमिका निभाने वाला राज्य बन चुका है।

अगर केंद्र और सभी राज्य एक साथ मिलकर टीम इंडिया की तरह काम करें तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं: पीएम मोदी

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को नीति आयोग की 10वीं गवर्निंग काउंसिल की बैठक में अपने उद्घाटन भाषण में कहा कि भारत को भविष्य के लिए तैयार शहरों के विकास की दिशा में काम करना चाहिए। उन्होंने केंद्र और सभी राज्यों से एक साथ मिलकर विकास की गति बढ़ाने का आग्रह किया। पीएम मोदी ने कार्यक्रम में कहा, “भारत में तेजी से शहरीकरण हो रहा है। हमें भविष्य के लिए तैयार शहरों की दिशा में काम करना चाहिए। विकास, नवाचार और स्थिरता हमारे शहरों के विकास का इंजन होना चाहिए।” उन्होंने आगे कहा, “हमें विकास की गति बढ़ानी होगी। अगर केंद्र और सभी राज्य एक साथ मिलकर टीम इंडिया की तरह काम करें तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं हो सकता है।” उन्होंने राज्यों से देश में पर्यटन को बढ़ावा देने में योगदान देने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा, “राज्यों को वैश्विक मानकों के अनुरूप तथा सभी सुविधाएं और इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध करवाते हुए प्रत्येक राज्य में कम से कम एक पर्यटन स्थल विकसित करना चाहिए। ‘एक राज्य, एक वैश्विक गंतव्य’ बनाया जाना चाहिए। इससे पड़ोसी शहरों का भी पर्यटन स्थल के रूप में विकास होगा।” पीएम मोदी ने 140 करोड़ नागरिकों की आकांक्षा को ‘विकसित होना’ बताया और कहा, “विकसित भारत हर भारतीय का लक्ष्य है। जब हर राज्य विकसित होगा तभी भारत भी विकसित होगा। यह 140 करोड़ नागरिकों की आकांक्षा है।” इसके अलावा, उन्होंने देश के वर्कफोर्स में महिलाओं की संख्या बढ़ाने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा, “हमें अपने वर्कफोर्स में महिलाओं को शामिल करने की दिशा में काम करना चाहिए। हमें ऐसे कानून और नीतियां बनानी चाहिए, जिससे महिलाओं को वर्कफोर्स में सम्मानपूर्वक शामिल किया जा सके।” भारत मंडपम, नई दिल्ली में आयोजित होने वाली इस गवर्निंग काउंसिल की बैठक का विषय ‘विकसित भारत : 2047 के लिए विकसित राज्य’ है। यह बैठक केंद्र, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को ‘विकसित भारत : 2047’ के विजन को आगे बढ़ाने के उपायों पर विचार-विमर्श करने और इस बात पर आम सहमति बनाने के लिए एक मंच प्रदान करती है कि कैसे राज्य भारत को एक ‘विकसित राष्ट्र’ बनाने के लिए आधारशिला बन सकते हैं। इसके अलावा, बैठक में उद्यमिता को बढ़ावा देने, कौशल बढ़ाने और देश भर में स्थायी रोजगार के अवसर पैदा करने के उपायों पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।

बैठक ‘विकसित राज्य फॉर विकसित भारत @2047’ थीम पर केंद्रित रही

मध्यप्रदेश को अग्रणी राज्य बनाने के लिए सरकार संकल्पित: मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नीति आयोग की विकसित राज्य फॉर विकसित भारत @2047 बैठक में की सहभागिता बैठक ‘विकसित राज्य फॉर विकसित भारत @2047’ थीम पर केंद्रित रही भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता मे नीति आयोग की शासी परिषद (गवर्निंग काउंसिल) की 10वीं बैठक में भाग लिया। यह बैठक ‘विकसित राज्य फॉर विकसित भारत @2047’ थीम पर केंद्रित रही। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘विकसित भारत-आत्मनिर्भर भारत’ के निर्माण के विजन से प्रेरित होकर मध्यप्रदेश को देश के अग्रणी राज्यों की प्रथम पंक्ति में स्थापित करने के लिए राज्य सरकार संकल्पित है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बैठक में शामिल होकर प्रधानमंत्री मोदी का मार्गदर्शन प्राप्त किया और इसे भारत के भविष्य निर्माण की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल बताया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर कहा कि प्रधानमंत्री जी के दूरदर्शी नेतृत्व में सभी राज्य ‘टीम इंडिया’ की भावना के साथ कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज मध्यप्रदेश विकास और लोक कल्याण के संकल्प पथ पर अग्रसर है और निरंतर नए प्रतिमान स्थापित कर रहा है।  

‘IAS’ का फॉर्म अब आधार के बिना नहीं भर सकेंगे, UPSC चेयरमैन का बड़ा बयान

चेन्नई  राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्षों की स्थायी समिति की बैठक शनिवार 24 मई को चेन्नई के सरकारी गेस्ट हाउस में शुरू हुई. संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष अजय कुमार ने बैठक की अध्यक्षता की. बैठक में हरियाणा, आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, असम, बिहार, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र, नागालैंड, राजस्थान, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश के राज्य लोक सेवा आयोगों के अध्यक्षों ने भाग लिया. यह बैठक दो दिनों तक चलेगी. पहले दिन सरकारी कर्मचारियों की चयन प्रक्रिया में निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने, आपस में सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने, चयन प्रक्रियाओं में आधुनिक तकनीकों का उपयोग करने तथा चयन संबंधी मामलों के प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा की गई. दूसरे दिन भी परीक्षा से संबंधित आनेवाली परेशानियों पर चर्चा की जाएगी.     मीडिया को संबोधित करते हुए संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष अजय कुमार ने कहा, “यूपीएससी देशभर में परीक्षाएं आयोजित करने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. राज्य स्तर की परीक्षाएं भी महत्वपूर्ण मानी जाती हैं. हम लगातार सलाह देते रहे हैं कि ऐसी परीक्षाएं पारदर्शी होनी चाहिए. आने वाले समय में हम यूपीएससी परीक्षाओं के लिए ऑनलाइन आवेदन करते समय आधार को अनिवार्य बनाने की प्रक्रिया शुरू करने जा रहे हैं.” संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि दो दिवसीय स्थायी समिति की इस बैठक में सरकारी सेवा परीक्षाओं के महत्वपूर्ण पहलुओं पर विभिन्न चर्चाएं होंगी. तमिलनाडु लोक सेवा आयोग (टीएनपीएससी) के अध्यक्ष एस के प्रभाकर ने कहा, “इस बैठक में हम परीक्षा आयोजित करने के तरीकों, इसमें आने वाली कठिनाइयों, सुधार पद्धति और पारदर्शिता के साथ परीक्षा आयोजित करने की पद्धति सहित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करेंगे.” टीएनपीएससी के अध्यक्ष ने कहा, इसके अलावा परीक्षाओं में ओएमआर शीट को बेहतर बनाने, ओएमआर शीट में आने वाली कठिनाइयों को दूर करने, सुरक्षा सुविधाएं जोड़ने और उत्तर पुस्तिकाओं को सही करने के लिए कई योजनाएं बनाई हैं. दूसरे राज्यों में परीक्षा देते समय तमिलनाडु के छात्रों को होने वाली कठिनाइयों पर भी चर्चा की जाएगी.

केरल में मानसून का आगमन पिछले 16 वर्षों में सबसे जल्दी, मानसून 25 मई तक केरल में, भारी बारिश की संभावना

तिरुवनन्तपुरम केरल में मानसून अगले 24 घंटों में दस्तक देने वाला है। यह अपने तय समय से करीब एक सप्ताह पहले चल रहा है। इस साल केरल में मानसून का आगमन पिछले 16 वर्षों में सबसे जल्दी होने वाला है। राज्य में मानसून के आगमन के लिए सभी अनुकूल परिस्थितियां तैयार हो गई हैं। पिछले दो दिनों में केरल के कई हिस्सों में भारी बारिश हुई है। यह कम दबाव वाले क्षेत्र और आगे बढ़ते मानसून सिस्टम के संयोजन के कारण हुई है। पिछली बार राज्य में मानसून इतनी जल्दी 2009 और 2001 में पहुंचा था। तब यह 23 मई को राज्य में पहुंचा था। आमतौर पर मानसून केरल में 1 जून को दस्तक देता है। हालांकि, सबसे पहले 1918 में 11 मई को मानसून ने केरल में दस्तक दे दी थी। देरी से मानसून के आने का रिकॉर्ड 1972 में था, जब मानसूनी बारिश 18 जून से शुरू हुई थी। पिछले 25 वर्षों में सबसे देरी से मानसून का आगमन 2016 में हुआ था, जब मानसून ने 9 जून को केरल में प्रवेश किया था। अगले 24 घंटे में करेल में दस्तक दे सकता है मानसून आईएमडी ने एक बयान में कहा, ‘अगले 2-3 दिनों में केरल में मानसून के आगमन के लिए परिस्थितियां अनुकूल होने की संभावना है.’ इस वर्ष मानसून के आने का पूर्वानुमान आईएमडी के 27 मई के डेडलाइन के भीतर है, जिसमें चार दिनों का मॉडल एरर मार्जिन चलता है. पिछले साल मानसून ने केरल में 30 मई को दस्तक दी थी. मानसून का समय पर आगमन भारत के लिए एक महत्वपूर्ण कारक है, जहां वार्षिक वर्षा का लगभग 70% जून-सितंबर की अवधि के दौरान होता है. मानसून की बारिश फसलों की सिंचाई और भूजल एवं जलाशयों को पुनः भरने के लिए महत्वपूर्ण है, तथा इसका सीधा प्रभाव देश के कृषि उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ता है. आईएमडी ने 2025 के लिए औसत से अधिक मानसून की बारिश का अनुमान लगाया है, जिससे खरीफ सीजन की फसलों का रिकॉर्ड उत्पादन होने की उम्मीद बढ़ गई है. उत्पादन बढ़ने से ग्रामीण आय में वृद्धि होगी, खाद्य सुरक्षा बढ़ेगी और देश के समग्र आर्थिक विकास में कृषि क्षेत्र का योगदान बढ़ेगा. शुरुआती बारिश से धान, मक्का, कपास, सोयाबीन और तिलहन की बुवाई को बढ़ावा मिलने तथा रबी सीजन से पहले जलाशयों का जलस्तर बढ़ने की उम्मीद है. पूर्वी मध्य अरब सागर के ऊपर बना लो प्रेशर सिस्टम केरल के अलावा, आईएमडी ने दक्षिण-पश्चिम मानसून के दक्षिण और मध्य अरब सागर, मालदीव और कोमोरिन क्षेत्र, लक्षद्वीप के कुछ हिस्सों, कर्नाटक, तमिलनाडु, दक्षिण और मध्य बंगाल की खाड़ी, उत्तरी बंगाल की खाड़ी और पूर्वोत्तर राज्यों के कुछ हिस्सों में इसी अवधि के दौरान आगे बढ़ने का अनुमान लगाया है. इसके समानांतर, दक्षिण कोंकण-गोवा तट से दूर, पूर्वी मध्य अरब सागर के ऊपर एक लो प्रेशर वेदर सिस्टम बनने की खबर है. अगले 36 घंटों में उत्तर की ओर बढ़ते हुए यह लो प्रेशर वेदर सिस्टम और भी मजबूत हो सकता है और स्थानीय वेदर पैटर्न को प्रभावित कर सकता है, जिससे पश्चिमी तट के कुछ हिस्सों में बारिश और हवा में बदलाव हो सकता है. देश के कुछ हिस्सों में चल रही गर्मी की स्थिति से राहत मिलने की व्यापक उम्मीद के बीच मानसून की प्रगति पर कड़ी नजर रखी जा रही है. अभी तक, मानसून की राह में कोई बड़ी देरी या विचलन नहीं देखा गया है. यह भारत भर में कृषि के लिए बारिश पर निर्भर क्षेत्रों के लिए सकारात्मक खबर है. जहां तक उत्तर भारतीय राज्यों की बात है, तो इस क्षेत्र में 25 से 30 जून के बीच मानसून के आगमन की संभावना आईएमडी ने जताई है. यह क्षेत्र देश के दक्षिणी और मध्य भागों की तुलना में मौसमी बदलाव को थोड़ा देर से दर्शाता है. पश्चिमी भारत में 15 से 20 जून के बीच मानसून की बारिश होने का अनुमान है. दक्षिणी राज्यों में भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने शनिवार को केरल, तटीय-दक्षिण आंतरिक कर्नाटक, कोंकण और गोवा में अलग-अलग स्थानों पर भारी से भारी वर्षा की संभावना जताई है। मौसम विभाग ने कहा कि 29 मई तक केरल और तटीय कर्नाटक में भारी से अत्यधिक भारी वर्षा होने की संभावना है। इस दौरान 40-50 किमी प्रति घंटे की गति से तेज हवाएं चलेंगी। तमिलनाडु, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में भी अगले पांच दिनों में छिटपुट बारिश और गरज के साथ छींटे पड़ सकते हैं। पूर्व-मध्य अरब सागर पर एक दबाव बना दक्षिण कोंकण तट के पास पूर्व-मध्य अरब सागर पर एक दबाव बना है। यह 24 मई की सुबह रत्नागिरी से लगभग 40 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में स्थित था। इसके पूर्व की ओर बढ़ने और आज सुबह रत्नागिरी और दापोली के बीच तट को पार करने की उम्मीद है। बीते साल 30 मई को मानसून ने दी थी दस्तक पिछले साल 30 मई को दक्षिणी राज्य में मानसून ने दस्तक दी थी। 2023 में मानसून 8 जून को, 2022 में 29 मई को, 2021 में 3 जून को, 2020 में 1 जून को, 2019 में 8 जून को और 2018 में 29 मई को केरल पहुंच था। आईएमडी ने अप्रैल में 2025 के मानसून सीजन में सामान्य से अधिक वर्षा का अनुमान लगाया था। इसमें अल नीनो की स्थिति की संभावना को खारिज कर दिया गया था। अल नीनो भारतीय उपमहाद्वीप में सामान्य से कम वर्षा से के लिए जिम्मेदार होता है। ऐसी रहती है देश में मानसून की गति आम तौर पर दक्षिण-पश्चिम मानसून 1 जून तक केरल में दस्तक देता है। इसके बाद 8 जुलाई तक यह पूरे देश को कवर कर लेता है। यह 17 सितंबर के आसपास उत्तर-पश्चिम भारत से पीछे हटना शुरू करता है और 15 अक्तूबर तक पूरी तरह से वापस चला जाता है। आपके राज्य के लिए पूर्वानुमान     महाराष्ट्र: भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने शुक्रवार दोपहर को महाराष्ट्र के तटीय जिलों में भारी बारिश की संभावना जताते हुए रेड अलर्ट जारी किया। रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई में गरज के साथ बिजली चमकने, हल्की से मध्यम बारिश और अलग-अलग इलाकों में 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलने की संभावना है।     गोवा: भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने … Read more

EPFO के 7 करोड़ सब्सक्राइबर्स के लिए Good news, 8.25% ब्याज दर को सरकार ने किया मंजूर, अब खातों में आएगा पैसा

 नयी दिल्ली  सरकार ने वित्त वर्ष 2024-25 के लिए कर्मचारी भविष्य निधि पर 8.25 प्रतिशत ब्याज दर को मंजूरी दी है। इससे ईपीएफओ अपने सात करोड़ से अधिक अंशधारकों के भविष्य निधि पर वार्षिक ब्याज जमा कर सकेगा। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने 28 फरवरी को वित्त वर्ष 2024-25 के लिए कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) जमा पर 8.25 प्रतिशत की ब्याज दर को बरकरार रखने का फैसला किया था। यह इससे पिछले वित्त वर्ष में दिये गये ब्याज दर के बराबर है।  बता दें, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने 28 फरवरी को वित्त वर्ष 2024-25 के लिए कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) जमा पर 8.25 प्रतिशत की ब्याज दर को बरकरार रखने का फैसला किया था। यह इससे पिछले वित्त वर्ष में दिये गये ब्याज दर के बराबर है। तय किए ब्याज दर को वित्त मंत्रालय की मंजूरी के लिए भेजा गया था। फाइनेंस मिनिस्ट्री ने मंजूरी दी EPFO ने 28 फरवरी को ईपीएफ के इंटरेस्ट रेट को 8.25 फीसदी बनाए रखने का फैसला किया था। इसे मंजूरी के लिए फाइनेंस मिनिस्ट्री को भेजा गया था। बताया जाता है कि फाइनेंस मिनिस्ट्री ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। लेबर मिनिस्ट्री के एक अधिकारी ने बताया, “फाइनेंस मिनिस्ट्री ने पिछले वित्त वर्ष के लिए 8.25 फीसदी इंटरेस्ट रेट के प्रस्ताव को अपनी मंजूरी दे दी है। यह फिस्कल ईयर 2024-25 के लिए होगा। इस फैसले के बारे में लेबर मिनिस्ट्री ने ईपीएफओ को 22 मई को सूचित कर दिया।” ईपीएफओ के 7 करोड़ सब्सक्राइबर्स को फायदा सरकार के इस फैसले के बाद ईपीएफ के 7 करोड़ से ज्यादा सब्सक्राइबर्स के ईपीएफ अकाउंट में इंटरेस्ट का पैसा आने का रास्ता साफ हो गया है। 28 फरवरी को ईपीएफओ के सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टी (CBT) की बैठक हुई थी। केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया के नेतृत्व में हुई इस बैठक में FY25 के लिए इंटरेस्ट रेट को 8.25 फीसदी बनाए रखने के प्रस्ताव पर फैसला हुआ था। फरवरी 2024 में इंटरेस्ट बढ़ाने का फैसला ईपीएफओ ने फरवरी 2024 में ईपीएफ के डिपॉजिट पर इंटरेस्ट रेट बढ़ाने का फैसला किया था। उसने इसे 8.15 फीसदी से बढ़ाकर 8.25 फीसदी कर दिया था। यह वृद्धि फाइनेंशियल ईयर 2023-24 के डिपॉजिट के लिए की गई थी। फाइनेंशियल ईयर 2022-23 में इंटरेस्ट रेट 8.15 फीसदी था। मार्च 2022 में ईपीएफओ ने इंटरेस्ट रेट को 8.5 फीसदी से घटाकर 8.1 फीसदी कर दिया था। यह 4 दशक से ज्यादा समय में सबसे कम इंटरेस्ट रेट था। ईपीएफ अकाउंट का मतलब प्राइवेट सेक्टर में नौकरी करने वाले लोग ईपीएफओ की स्कीम के तहत आते हैं। इसमें हर महीने एंप्लॉयी की सैलरी का 12 फीसदी (बेसिक प्लस डीए) उसके ईपीएफ अकाउंट में जमा होता है। उतना ही पैसा एंप्लॉयर एंप्लॉयी के ईपीएफ अकाउंट में हर महीने डिपॉजिट करता है। ईपीएफ अकाउंट के दो हिस्से होते हैं-ईपीएफ और ईपीएस। एंप्लॉयर के कंट्रिब्यूशन का 8.33 फीसदी हर महीने ईपीएस में जमा होता है। एंप्लॉयी के रिटायर होने पर ईपीएफ अकाउंट में जमा पूरा पैसा उसे एकमुश्त मिल जाता है। ईपीएफ में जमा पैसे पर उसे हर महीने पेंशन मिलती है। 7 करोड़ खातों में आएगा ब्याज का पैसा लेबर मिनिस्ट्री के एक अधिकारी ने पीटीआई से कहा, “वित्त मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2024-25 के लिए ईपीएफ पर 8.25 प्रतिशत ब्याज दर देने पर सहमति दे दी है और श्रम मंत्रालय ने गुरुवार को ईपीएफओ को इस संबंध में सूचना दे दी है।” अब वित्त वर्ष 2024-25 के लिए स्वीकृत दर के अनुसार ब्याज ईपीएफओ के सात करोड़ से अधिक सब्सक्राइबर्स के खातों में जमा किया जाएगा। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया की अध्यक्षता में 28 फरवरी को नयी दिल्ली में ईपीएफओ के केंद्रीय न्यासी बोर्ड की 237वीं बैठक में ब्याज दर पर निर्णय लिया गया था। बीते कुछ सालों में ब्याज दरों में हुई है कटौती ईपीएफओ ने फरवरी 2024 में 2023-24 के लिए ब्याज दर को मामूली बढ़ाकर 8.25 प्रतिशत किया था जो 2022-23-में 8.15 प्रतिशत था। वहीं, मार्च 2022 में 2021-22 के लिए ईपीएफ पर ब्याज को घटाकर चार दशक से अधिक के निचले स्तर 8.1 प्रतिशत कर दिया गया था। यह 2020-21 में 8.5 प्रतिशत था।

12 वीं बोर्ड के छात्र-छात्राओं के लिए खुशखबरी, 75% या उससे अधिक अंक लाने वाले मेधावी स्टूडेंट्स को लैपटॉप के लिए राशि देने का आदेश जारी

भोपाल मध्य प्रदेश के 12वीं के बोर्ड छात्रों के लिए खुशखबरी है. माध्यमिक शिक्षा मंडल भोपाल ने 12वीं की परीक्षा में 75% या उससे अधिक अंक लाने वाले मेधावी छात्रों को लैपटॉप के लिए राशि देने का आदेश जारी किया है. शुक्रवार को लोक शिक्षण संचालनालय ने इसके लिए आदेश जारी कर दिए गए हैं. जिला शिक्षा अधिकारियों से बच्चों के बैंक खाता की जानकारी मांगी गई है. संचालक लोक शिक्षण डीके कुशवाहा ने मध्य प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को आदेश जारी कर निर्देश दिया है. मुख्यमंत्री मेधावी विद्यार्थी योजना के तहत मिल रहा लाभ प्रतिभाशाली विद्यार्थी प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत माध्यमिक शिक्षा मंडल के सत्र 2024 25 की कक्षा 12वीं की परीक्षा में 75% या उससे अधिक अंक लाने वाले छात्रों के शिक्षा पोर्टल पर दर्ज बैंक खाता संबंधित पत्र जारी किया जाए. जिला शिक्षा अधिकारियों को जारी पत्र में संचालक ने साफ किया कि पिछले वर्षों में देखा गया था कि कई छात्रों के बैंक खाता उनके परिवारजनों के नाम से संचालित थे ओर कई बैंक खातों में गड़बड़ी भी देखी गई,जिससे वन क्लिक के माध्यम से छात्रों के खाते में राशि ही नहीं पहुंच पाई थी. ऐसे में पूर्व सावधानी से पात्र छात्रों के बैंक खाते की प्रविष्टि की जाए. एक हफ्ते में पोर्टल में दर्ज करना होगी जानकारी इसमें पात्र विद्यार्थियों के नाम से संचालित बचत बैंक खाता क्रमांक, आईएफसी कोड और बैंक शाखा का नाम एक सप्ताह के अंदर शिक्षा पोर्टल पर दर्ज करवाना है। प्रदेश में मुख्यमंत्री प्रोत्साहन योजना के तहत मप्र माध्यमिक शिक्षा मंडल से 12वीं में 75 प्रतिशत या उससे अधिक अंक लाने वाले मेधावी विद्यार्थियों को लैपटॉप के लिए 25-25 हजार रुपये की राशि दी जाती है। इस बार माशिम की 12वीं की परीक्षा में 75 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों की संख्या 94 हजार के आसपास है। जुलाई में लैपटाप की राशि मिलने की संभावना पिछले सत्र के मेधावी विद्यार्थियों को इस साल फरवरी में लैपटॉप की राशि दी गई थी। इस बार सरकार का प्रयास है कि जुलाई तक विद्यार्थियों को लैपटॉप की राशि प्रदान कर दी जाए। माध्यमिक शिक्षा मंडल ने अपलोड की पात्र स्टूडेंट्स की लिस्ट मुख्यमंत्री मेधावी विद्यार्थी योजना के अंतगर्त 12 वीं के एग्जाम में जिन छात्र-छात्राओं को लाभ मिलना है, उनकी लिस्ट माध्यमिक शिक्षा मंडल भोपाल ने अपने पोर्टल पर अपलोड की है. यदि टॉपर छात्र-छात्राएं नाम देखना चाहते हैं, तो पोर्टल पर विजिट कर सकते हैं. लैपटॉप के लिए पैसे मिलने की जानकारी जैसे ही टॉपर्स स्टूडेंट्स को मिली, तो उनके चेहरे खुशी से खिल उठे. योजना के मुख्य उद्देश्य…     डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देना।     मेधावी छात्रों को लैपटॉप खरीदने के लिए आर्थिक सहायता देना।     छात्रों को तकनीकी दक्षता और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए प्रोत्साहित करना।     शिक्षा में समानता और अवसर प्रदान करना। पात्रता मानदंड (Eligibility Criteria)…     आवेदक मध्य प्रदेश का स्थायी निवासी होना चाहिए।     MP बोर्ड से 12वीं पास हो।     सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए न्यूनतम 85% अंक।     SC/ST/अन्य आरक्षित वर्ग के लिए न्यूनतम 75% अंक।     परिवार की वार्षिक आय 6 लाख रुपए से अधिक नहीं होनी चाहिए।     आधार कार्ड, बैंक खाता, और आवश्यक दस्तावेज होना अनिवार्य। 1. आधिकारिक वेबसाइट [shikshaportal.mp.gov.in] पर जाएं। 2. ‘पात्रता जांचें’ लिंक पर क्लिक करें। 3. 12वीं बोर्ड का रोल नंबर दर्ज करें और जानकारी प्राप्त करें। 4. पात्रता मिलने पर ऑनलाइन आवेदन फॉर्म भरें। 5. सभी जरूरी दस्तावेज अपलोड करें। 6. आवेदन सबमिट करें और प्रिंट निकाल लें। 7. आवेदन की स्थिति पोर्टल पर चेक करें। राशि ट्रांसफर सीधे DBT के जरिए बैंक खाते में…     चयनित छात्रों को 25,000 रुपए की राशि सीधे उनके बैंक खाते में डायरेक्ट बैंक ट्रांसफर (DBT) के जरिए दी जाएगी।     राशि से छात्र अपने मनपसंद लैपटॉप खरीद सकते हैं।     साथ ही सरकार की ओर से सम्मान पत्र भी दिया जाएगा। इस साल कितने प्रतिशत पर मिलेगा लैपटॉप?     सामान्य वर्ग के लिए 12वीं बोर्ड में 85% या उससे अधिक अंक।     SC/ST और अन्य आरक्षित वर्ग के लिए 75% या उससे अधिक अंक। फ्री लैपटॉप योजना के फायदे…     25,000 की आर्थिक सहायता सीधे खाते में।     छात्रों के लिए डिजिटल शिक्षा और तकनीकी कौशल विकास।     प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में मदद।     ऑनलाइन शिक्षा में सहजता।     आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह से ऑनलाइन और पारदर्शी।     सभी वर्गों के मेधावी छात्रों को समान अवसर। योजना से जुड़ी जरूरी जानकारियां (Important Information)… बिंदु                              जानकारी योजना का नाम       मध्य प्रदेश फ्री लैपटॉप योजना लाभार्थी                 12वीं में अच्छे अंक लाने वाले छात्र प्रोत्साहन राशि         ₹25,000 कटऑफ प्रतिशत     सामान्य – 85%, SC/ST – 75% आवेदन तरीका        ऑनलाइन जरूरी दस्तावेज        आधार, मार्कशीट, जाति प्रमाण पत्र, बैंक पासबुक आधिकारिक वेबसाइट     shikshaportal.mp.gov.in राशि का वितरण           डायरेक्ट बैंक ट्रांसफर (DBT) योजना के लिए आवश्यक दस्तावेज…     आधार कार्ड     12वीं बोर्ड की मार्कशीट     जाति प्रमाण पत्र (यदि लागू हो)     बैंक पासबुक या बैंक खाता विवरण पिछले वर्षों का डेटा और योजना की सफलता पिछले साल 78,641 छात्रों ने इस योजना का लाभ लिया। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में और अधिक मेधावी छात्र इस योजना का लाभ उठाएं और डिजिटल शिक्षा से जुड़ें। एमपी फ्री लैपटॉप योजना के लाभ…     ऑनलाइन पढ़ाई का मौका     प्रतियोगी परीक्षाओं की बेहतर तैयारी     तकनीकी कौशल में सुधार     रोजगार के नए अवसर     आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनना डिजिटल युग में सफलता की एक मजबूत सीढ़ी… यह योजना मध्य प्रदेश के छात्रों के लिए डिजिटल युग में सफलता की एक मजबूत सीढ़ी साबित हो रही है। अगर आप भी 12वीं में अच्छे अंक लाए हैं तो इस अवसर का लाभ अवश्य उठाएं।

अगर कोई देश हमें कॉल करे, हमसे बात करे, हम उसे अपने कदमों के बारे में बताएं तो उसे मध्यस्थता नही कहा जाएगा- थरूर

नई दिल्ली पाकिस्तान की पोल खोलने के लिए टीम इंडिया ग्लोबल मिशन पर है. शनिवार सुबह कांग्रेस सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर के नेतृत्व वाला प्रतिनिधिमंडल विदेश रवाना हो गया है. ये प्रतिनिधिमंडल अमेरिका, पनामा, गुयाना, ब्राजील और कोलंबिया में पाकिस्तान के काले कारनामों से रूबरू कराएगा. इससे पहले थरूर ने  बातचीत में भारत की भूमिका, विदेश नीति और वैश्विक कूटनीतिक को लेकर रुख स्पष्ट किया. उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मध्यस्थता वाले बयान पर भी टिप्पणी की है. कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने स्पष्ट किया है कि भारत की विदेश नीति में पारदर्शिता और संवाद की परंपरा रही है, लेकिन इसे ‘मध्यस्थता’ कहना गलत होगा. थरूर ने कहा, आप हमारी सरकार का रुख बहुत अच्छे से जानते हैं. किसी भी संकट के दौरान उन देशों के साथ हमेशा संपर्क होता है, जो फोन करते हैं और मदद मांगते हैं. लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि कोई औपचारिक मध्यस्थता की प्रक्रिया हुई है. ना ऐसा कोई अनुरोध आया, ना ही भारत ने ऐसी कोई पहल की है. थरूर ने उदाहरण देकर समझाया थरूर ने उदाहरण देते हुए कहा, अगर कोई देश हमें कॉल करे, हमसे बात करे, और हम उसे अपने कदमों के बारे में बताएं तो क्या उसे मध्यस्थता कहा जाएगा? मुझे नहीं लगता है. उन्होंने आगे जोड़ते हुए कहा, हमारे विदेश मंत्री हमेशा यह बात सार्वजनिक तौर पर साझा करते हैं कि किसने उनसे संपर्क किया. जब भी किसी अन्य विदेश मंत्री ने उन्हें कॉल किया, उन्होंने उसे सोशल मीडिया पर पोस्ट के जरिए स्पष्ट किया है. थरूर उन सात संसदीय समूहों में से एक का नेतृत्व कर रहे हैं, जिन्हें विभिन्न देशों में भारत की ओर से प्रतिनिधित्व करने के लिए भेजा जा रहा है. ‘भारत का रुख साफ है…’ थरूर ने कहा है कि जब वे विदेश यात्रा पर जा रहे हैं तो वहां वो भारत का स्पष्ट और एकजुट रुख पेश करेंगे. उन्होंने कहा, यह बेहद अहम है, जब दुनिया भारत को देख रही है, हम सब एक ही पेज पर हों. थरूर ने बताया कि सरकार की ओर से जो ब्रीफिंग दी गई, उसका मकसद भी यही था कि सभी सांसद एक साझा रुख को लेकर आगे बढ़ें. उन्होंने कहा, हम सब इस भावना के साथ जा रहे हैं कि हम देश की ओर से बोल रहे हैं. जब उनसे पूछा गया कि क्या कांग्रेस के आंतरिक मतभेद उनके विदेश दौरे को प्रभावित करेंगे तो थरूर ने स्पष्ट किया कि हम जब अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा होते हैं तब हम देश का प्रतिनिधित्व करते हैं, पार्टी का नहीं. घरेलू राजनीति की चर्चा का स्थान संसद या देश के मंच हैं. न कि अंतरराष्ट्रीय सभाएं. किन देशों के दौरे पर हैं थरूर? शशि थरूर ग्रुप 5 की अगुवाई कर रहे हैं. ये ग्रुप अमेरिका, पनामा, गयाना, ब्राजील और कोलंबिया की यात्रा करेगा. इस प्रतिनिधिमंडल में LJP, JMM, TDP, BJP और शिवसेना के सांसद भी शामिल हैं.  डोनाल्ड ट्रंप लगातार क्या बयान दे रहे हैं? अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत-पाकिस्तान युद्ध में मध्यस्थता का दावा किया है. ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्षविराम में मदद की है और यह व्यापार वार्ताओं के जरिए संभव हुआ. उन्होंने कहा, मैं नहीं कहना चाहता कि मैंने किया, लेकिन मैंने मदद की. हालांकि, भारत ने ट्रंप के इन दावों को खारिज किया है और स्पष्ट किया है कि संघर्षविराम दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच सीधे संवाद का परिणाम था.  

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