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इंदौर : राजवाड़ा में होगी 20 मई को कैबिनेट बैठक, अफसरों को जिम्मेदारी सौंपी गई

 इंदौर इंदौर का दिल कहे जाने वाले राजवाड़ा पैलेस में 20 मई को प्रदेश सरकार बैठक करने जा रही है। अलग-अलग विभाग इसकी तैयारियों में जुट गए है। राजवाड़ा के गणेश हाॅल में बैठक होगी। वहां की रंगाई-पुताई,फर्श की सफाई की जा रही है। कैबिनेट बैठक के बाद पैलेस के खुले हिस्से में भोजन की व्यवस्था रहेगी। इसके लिए डोम भी बनाया जाएगा। अब बैठक में तीन दिन शेष है। इस कारण राजवाड़ा पैलेस को पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया है। अब राजवाड़ा पैलेस पर्यटकों के लिए 20 मई के बाद ही खुलेगा। यहां हर दिन शाम को लाइट एंड साउंड शो भी आयोजित किया जाता है। वह भी फिलहाल बंद रहेगा।  कैबिनेट बैठक की तैयारियों के मद्देनजर अफसरों ने राजवाड़ा पैलेस और उद्यान का दौरा भी किया। संभावित बारिश के मद्देनजर भी व्यवस्थाएं जुटाने के लिए कहा गया है।  पहला मौका है जब शहर में कैबिनेट बैठक होने जा रही है। इससे पहले इंदौर जिले के उज्जैनी में नर्मदा-शिप्रा संगम स्थल पर बैठक आयोजित की गई थी। देवी अहिल्या की 300 वीं जयंती के मौके पर राजवाड़ा के पैलेस में बैठक करने का फैसला लिया गया है।   इंदौर में कैबिनेट बैठक दोपहर 12 बजे होगी। बैठक में प्रदेश के अलग-अलग एजेंडों पर चर्चा होगी और उन्हे मंजूरी दी जाएगी। इसके अलावा मुख्यमंत्री मोहन यादव लालबाग पैलेस के गार्डन और राजवाड़ा पैलेस के कामों का भी भूमिपूजन करेंगे। बैठक से पहले राजवाड़ा चौक पर लगी देवी अहिल्या की प्रतिमा पर माल्यार्पण करने भी मुख्यमंत्री मोहन यादव जाएंगे। नगर निगम 20 लाख रुपये खर्च कर उद्यान को भी संवार रहा है।   200 साल पुराना है राजवाड़ा राजवाड़ा 200 साल पुराना है। 1984 के दंगों में राजवाड़ा का एक हिस्सा जल गया था। 25 साल पहले राजवाड़ा की जीर्णद्धार किया गया था। इसके बाद चार साल पहले स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत 20 करोड़ रुपये से राजवाड़ा को नया स्वरुप दिया गया। राजवाड़ा होलकर राज परिवार का राज दरबार था। देवी अहिल्या ने तो अपनी राजधानी महेश्वर को बनाया था, लेकिन बाद में यशवंत राव होलकर, तुकोजीराव होलकर ने इंदौर में रहकर राज चलाया। कौन क्या देखेंगे…? ● मुख्य आयोजन स्थल राजबाड़ा : अपर कलेक्टर रिंकेश वैश्य, एसडीएम निधि वर्मा व तहसीलदार नारायण नांदेड़ा ● सीएम ग्रीन रूम : एसडीएम सीमा कनेश व तहसीलदार विकास रधुवंशी ● अहिल्या प्रतिमा स्थल : निगम अपर आयुक्त अभय राजनगांवकर ● अतिथि सत्कार व प्रतीक चिन्ह वितरण : आइडीए सीईओ आरपी अहिरवार व संपदा अधिकारी मनीष श्रीवास्तव ● राजबाड़ा प्रवेश द्वार : एसडीएम गोपाल वर्मा व तहसीलदार याचना दीक्षित ● अस्थाई सीएम कार्यालय : एसडीएम कल्याणी पांडे व आइटी अधिकारी शीतल पाठक ● सीएम घोषणा संबंधी – जिला योजना अधिकारी माधव बेंड़े ● पर्यटन स्थल भ्रमण व भोजन : नगर निगम अपर आयुक्त अभिलाष मिश्रा व खाद्य आपूर्ति अधिकारी एमएल मारू ● पार्किंग व बसों की व्यवस्था : एसडीएम विजय मंडलोई व आरटीओ प्रदीप शर्मा ● रेसीडेंसी कोठी : एसडीएम प्रियंका चौरसिया ● होटल : अपर कलेक्टर राजेंद्र रघुवंशी ● सेफ हाऊस : नायब तहसीलदार दयाराम निगम ● कंट्रोल रूम : नायब तहसीलदार धर्मेंद्र चौहान व अजय अहिरवार ● स्वास्थ्य व्यवस्था : सीएमएचओ बीएस सैत्या व सिविल सर्जन गिरधारी लाल सोढ़ी  

बुदनी मेंकिसानों को खेती के अत्याधुनिक उपकरणों के उपयोग और ड्रोन चलाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा

 सीहोर सीहोर के बुदनी नगर के केंद्रीय कृषि मशीनरी प्रशिक्षण एवं परीक्षण संस्थान में देश का पहला ग्री ड्रोन ट्रेनिंग सेंटर खोला जा रहा है। किसानों को खेती की सुरक्षा का ड्रोन के जरिए प्रशिक्षण देने के लिए इस संस्थान में ड्रोन सियुलेशन लैब बनकर तैयार हो गई है। एक ड्रोन भी लैब में आ गया है। बताया जा रहा है कि 25 मई को इसका शुभारंभ हो सकता है। महिलाओं को भी दी जाएगी ट्रेनिंग ड्रोन प्रशिक्षण सेंटर में किसानों को खेती के अत्याधुनिक उपकरणों के उपयोग और ड्रोन चलाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य किसानों को खेती में उपयोग की जा रही हाईटेक पद्धतियों के बारे में प्रशिक्षित करना है। बताया जा रहा है कि इस सेंटर पर महिलाओं को भी ड्रोन चलाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे वे अपने परिवार में पुरुष किसानों के साथ तकनीकी का फायदा उठाकर खेती में हाथ बंटा सकें। अफसर बता रहे हैं कि प्रशिक्षित किसान नई तकनीकों का प्रयोग कर अपनी आय को बढ़ा सकेंगे, जिससे वे खेती के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनेंगे। किसानों के लिए ड्रोन खेती एक महत्वपूर्ण तकनीक है, जो फसलों की निगरानी, छिड़काव और फसल निरीक्षण में मददगार है। इससे न केवल लागत कम होगी, बल्कि फसल की गुणवत्ता भी बेहतर होगी। ड्रोन के लिए उपयुक्त बुदनी का केंद्रीय कृषि मशीनरी प्रशिक्षण एवं परीक्षण संस्थान 1955 में बना था। यह ड्रोन उड़ाने के लिए उपयुक्त व ग्रीन जोन है। सुरक्षा कारणों से कहीं भी ड्रोन को उड़ाना मना है, लेकिन बुदनी का केंद्रीय कृषि मशीनरी प्रशिक्षण एवं परीक्षण संस्थान इसके लिए उपयुक्त है। यह ड्रोन पायलट प्रशिक्षण केंद्र 20 सीट का है। किसानों के प्रशिक्षण के लिए इसमें रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया अपनाई जाएगी। 10वीं पास किसान ड्रोन चलाने का प्रशिक्षण ले सकेंगे। बुदनी में यह पूरा सेंटर ड्रोन इंस्ट्रक्टर राय सिंह गुर्जर, डायरेक्टर पीपी राव, ट्रेनिंग हेड अनिल कुमार उपाध्याय, वरिष्ठ कृषि अभियंता जीआर अंवालकर के मार्गदर्शन में तैयार किया जा रहा है। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय की टीम जल्द ही इसका निरीक्षण करेगी, उसके बाद यहां ड्रोन चलाने का प्रशिक्षण देना शुरु हो जाएगा। ड्रोन का कृषि में उपयोग     फसल निगरानी ड्रोन का उपयोग फसलों की निगरानी करने, उनकी वृद्धि और स्वास्थ्य की जांच करने में किया जा सकता है।     ड्रोन का उपयोग सिंचाई प्रणाली की निगरानी करने और पानी की बचत करने में किया जा सकता है।     ड्रोन का उपयोग कीटनाशक और उर्वरक छिडकाव में किया जा सकता है, जिससे समय और श्रम की बचत होती है।     ड्रोन का उपयोग फसल कटाई में भी किया जा सकता है, खासकर उन फसलों के लिए जो ऊंचाई पर उगाई जाती हैं।     मिट्टी की जांच ड्रोन का उपयोग मिट्टी की जांच करने और उसकी गुणवत्ता का विश्लेषण करने में किया जा सकता है। …..  

दिल्ली के नबी करीम इलाके में दर्दनाक हादसा, निर्माणाधीन इमारत गिरी, दो की मौत

नई दिल्ली पुरानी दिल्ली के नबी करीम इलाके में एक निर्माणाधीन इमारत गिरने की सूचना है। इसमें दो लोगों की मौत हो गई, जबकि कई के फंसे होने की आशंका व्यक्त की जा रही है। पुलिस ने बताया कि दमकल की तीन गाड़ियां मौके पर भेजी गई है, जिसने राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिया है। पुलिस अधिकारियों ने कई लोगों के फंसे होने की आशंका व्यक्त की है। बारिश और आंधी के कारण कई जगहों पर पेड़ गिरा दिल्ली पुलिस ने कहा कि इस इमारत का निर्माण कार्य चल रहा था। मलबे को हटाकर फंसे लोगों को निकाला जा रहा है। दो मृतकों का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। बता दें, शनिवार को आंधी और बारिश के कारण कई जगहों पर पेड़ गिरने की भी सूचना है।

जल नहीं होगा तो जीवन मुश्किल में पड़ जाएगा, प्रकृति हमें वर्षा के माध्यम से पर्याप्त जल उपलब्ध कराती है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मानव और जीवों के अस्तित्व के लिए सबसे महत्वपूर्ण तत्व जल है। जल नहीं होगा तो जीवन मुश्किल में पड़ जाएगा। प्रकृति हमें वर्षा के माध्यम से पर्याप्त जल उपलब्ध कराती है। वर्तमान समय में जल को संरक्षित करना मानव जीवन के लिए महती आवश्यकता बन गया है। हम सब को वर्षा के जल को संग्रहित कर न केवल वर्तमान बल्कि आने वाली पीढ़ी के सुरक्षित करना होगा। इसके लिए पुरानी जल संरचनाओं का जीर्णोद्धार और नई जल संरचनाओं के निर्माण को प्राथमिकता देना होगी, जिससे जल की एक-एक बूंद को संरक्षित किया जा सके। प्रदेश में इसी उद्देश्य से 30 अप्रैल से जल गंगा संवर्धन अभियान चलाया गया है, जो आगामी 30 जून तक जारी रहेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अभियान अंतर्गत जहां एक ओर पुरानी बावडियों और तालाबों का जीर्णोद्धार किया जा रहा है, वहीं बड़े पैमाने पर किसानों के खेतों में “खेत तालाब” भी बनाए जा रहे हैं। वर्षा के जल को संग्रहित करने स्टॉपडेम सहित अन्य जल संरचनाओं का निर्माण भी हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अभियान की विशेषता यह है कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में जन-भागीदारी भी व्यापक रूप ले चुकी है। श्रमदान कर जन-भागीदारी को कर रहे हैं प्रोत्साहित मुख्यमंत्री डॉ. यादव अभियान में जन-भागीदारी को प्रोत्साहित करने विभिन्न जिलों में जाकर स्वयं भी श्रमदान कर रहे हैं। मंत्रि-परिषद के सदस्य, सांसद, विधायक, नगरीय एवं पंचायत प्रतिनिधि, जन अभियान परिषद सहित अनेक स्वयं सेवी संस्थाएं भी अभियान का अभिन्न हिस्सा बन कर इसे जन आंदोलन बना रही हैं। जल गंगा संवर्धन अभियान की विशेषता 30 अप्रैल से क्षिप्रा के घाट से प्रारंभ हुआ अभियान 30 जून 2025 तक चलेगा। प्रत्येक गाँव में तैयार किये गये जल दूत। पुरानी बावडियों एवं जल संरचनाओं का किया जा रहा है जीर्णोद्धार। किसानों के लिए बनाये जा रहे है “खेत तालाब”। जल बांध, नहरों एवं जल संरचनाओं का सफाई और सुदृढ़ीकरण किया जा रहा है। जन-भागीदारी को बढ़ाने के लिए जल-पंचायतों का आयोजन। दीवार-लेखन सहित प्रचार की विभिन्न गतिविधियों से नागरिकों को जल संवर्धन के प्रति जागरूक किया जा रहा है। स्कूलों और कॉलेजों में भी जन-जागरूकता की गतिविधिया संचालित हो रही हैं। जल संरक्षण के लिए शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में नागरिक श्रमदान भी कर रहे हैं। अभियान अंतर्गत बड़े पैमाने पर पौध-रोपण भी किया जाएगा। जल संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारी और कर्मचारियों को पुरस्कृत करने की योजना भी लागू की गई। जल संरचनाओं की सफाई, निर्माण और जीर्णोद्धार का अभियान जारी देवास जिले में “जल गंगा संवर्धन अभियान” जन भागीदारी से अपने चरम पर है। जन-जीवन से जुड़े इस महत्वपूर्ण अभियान के अंतर्गत ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व वाले तालाबों, जल स्रोतों तथा देवालयों में जल-संरक्षण के कार्य भी किये जा रहे हैं। जन-प्रतिनिधियों, स्थानीय समुदाय की भागीदारी, आमजन और सरकार के संयुक्त प्रयास से अभियान में मशीन, सामग्री व श्रम का समुचित नियोजन किया जा रहा है। जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत बागली विकासखंड की ग्राम पंचायत बरझाई में जन सहयोग से बावड़ी एवं घाट का जीर्णोद्धार कर उनकी साफ-सफाई की गई। जल स्त्रोतों की साफ-सफाई एवं गहरीकरण से इनकी जल संग्रहण की क्षमता बढ़ेगी, साथ ही आस पास की छोटी जल संरचनाओं में भी भू-जल पर्याप्त मात्रा में बना रहेगा। अब नहीं सूखेगी भितरवार की बर्षाती नदी ग्वालियर जिले के विकास खंड भितरवार में जल गंगा संवर्धन अभियान में स्थानीय वर्षाती नदी के संरक्षण के लिए श्रमदान किया गया। मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद से जुड़ी नवांकुर संस्था के संयुक्त प्रयास से ग्राम पंचायत कैथी और भेंगना के बीच बर्षाती नदी पर युवाओं ने श्रमदान किया। संचार युवा मंडल के पदाधिकारियों ने भी श्रमदान में सहभागिता की। इससे नदियों के संरक्षण के साथ जल संरक्षण के लिए लोगों को जागरूक किया गया। पांढुर्ना की जाम नदी के तट पर सफाई अभियान मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष श्री मोहन नागर के नेतृत्व में पांढुर्ना जिले के जनप्रतिधियों ने स्थानीय समुदाय के साथ मिल कर मां जाम नदी के तट पर साफ-सफाई के लिए श्रमदान किया। मां जाम नदी के घाट परिसर की स्वच्छता के अभियान में जन अभियान परिषद और ग्रामीण आदिवासी समाज कल्याण विकास संस्थान की टीम का सहयोग महत्वपूर्ण रहा।  

एक ही जगह मिलेगी सभी पद्धतियों की दवाएं, हर मंडल में आयुष महाविद्यालय; CM योगी का निर्देश

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को आयुष विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। इस दौरान उन्होंने निर्देश दिया कि प्रदेश के प्रत्येक मंडल में एक इंटीग्रेटेड आयुष महाविद्यालय की स्थापना सुनिश्चित की जाए, जिसमें आयुर्वेद, यूनानी, होम्योपैथी समेत आयुष की सभी पद्धतियों को एक ही परिसर में उपलब्ध कराया जाए। यह कदम न केवल आयुष चिकित्सा पद्धति को सुदृढ़ करेगा, बल्कि भविष्य की स्वास्थ्य-आधारित शिक्षा प्रणाली को भी सशक्त बनाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार आयुष चिकित्सा पद्धति को जन-जन तक पहुंचाने के लिए मिशन मोड में कार्य कर रही है। उन्होंने निर्देश दिया कि सभी आयुष संस्थानों में नेचुरोपैथी और योग सेंटर की स्थापना अनिवार्य रूप से की जाए और सभी स्वीकृत शैक्षणिक व चिकित्सकीय पदों को शत-प्रतिशत भरने की कार्यवाही समयबद्ध ढंग से पूरी की जाए। प्रदेश के हर जनपद में हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर प्रारंभ किए जाएं, जो सरकारी या पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मोड में संचालित हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि आयुष विश्वविद्यालय का निर्माण गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध ढंग से हो और प्रदेश भर में आयुष विभाग की निर्माणाधीन परियोजनाओं को भी प्राथमिकता से पूरा किया जाए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यना ने निजी क्षेत्र को भी इस क्षेत्र में आगे आने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि निजी निवेशकों को आयुष सेक्टर में निवेश के लिए आकर्षित किया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि निजी क्षेत्र में संचालित आयुष महाविद्यालयों एवं चिकित्सालयों के बुनियादी ढांचे, प्रयोगशालाओं, पुस्तकालयों, फैकल्टी एवं स्टाफ की गुणवत्ता का गहन परीक्षण कराया जाए ताकि कोई कमी न रह जाए। आयुर्वेद में पंचकर्म जैसी विशिष्ट पद्धतियां गंभीर बीमारियों के उपचार में अत्यंत प्रभावी हैं, इसलिए इन पद्धतियों को प्रदेश के सभी आयुष संस्थानों में बढ़ावा दिया जाए। उन्होंने कहा कि आयुष चिकित्सा की लोकप्रियता को देखते हुए यह समय है जब भारत की परंपरागत चिकित्सा को वैज्ञानिक रूप से प्रस्तुत कर वैश्विक मंच पर स्थापित किया जाए। उन्होने कहा कि डाबर, वैद्यनाथ और पतंजलि जैसी आयुर्वेदिक उत्पादक संस्थाओं के साथ एमओयू कर सभी आयुष चिकित्सालयों में आवश्यक दवाओं की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी भी मरीज को चिकित्सकीय उपचार के लिए दवा की कमी न हो। बैठक के दौरान आयुष विभाग के अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया कि वर्तमान में प्रदेश में 2,127 आयुर्वेदिक, 259 यूनानी और 1,598 होम्योपैथिक चिकित्सा संस्थान संचालित हैं, जो आयुष सेवाओं को जनसामान्य तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि इन संस्थानों की कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए निरंतर मॉनिटरिंग की जाए और आवश्यकतानुसार संसाधन उपलब्ध कराए जाएं।

वीर सैनिकों के सम्मान में उमड़ा जनसैलाब, देशभक्ति के नारों से गूंजा बैरसिया: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत वर्तमान युग में एक नई शक्ति के रूप में उभर रहा है। ऑपरेशन सिंदूर से थल, वायु और नौसेना ने अद्वितीय साहस और पराक्रम का परिचय देते हुए दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब दिया है। भारतीय सेना ने मात्र 4 दिन के अल्प समय में ऐतिहासिक सफलता प्राप्त की है। इस अभियान ने दुनिया को भारत की सैन्य क्षमता, एकजुटता और आधुनिक तकनीकी सामर्थ्य का परिचय दिया है। आतंकवाद के मंसूबों को ध्वस्त किया गया है। आज कोई भी शक्ति भारत की प्रगति को रोक नहीं सकती। हम सभी इस तिरंगा यात्रा से भारतीय सेना को सम्मान देने के लिए एकत्र हुए हैं। यह तिरंगा यात्रा ग्राम पंचायत से लेकर जिला स्तर तक निरंतर आयोजित की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को भोपाल जिले के बैरसिया में वीर सैनिकों के सम्मान में निकाली गई तिरंगा यात्रा में शामिल हुए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे शूरवीरों ने पाकिस्तान को आधी रात में ऐसा सबक सिखाया कि पाकिस्तान के साथ दुनिया के 200 देश में से सिर्फ दो देश साथ आए- एक तुर्किए और दूसरा अजरबैजान। अब देश की जनता तुर्किए का बहिष्कार कर रही है और भविष्य में अजरबैजान के साथ भी ऐसा ही होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने तिरंगा यात्रा मार्ग में उपस्थित जनसमूह का अभिवादन किया। पूरा बैरसिया देशभक्ति की भावना से सराबोर हो उठा। भारत माता की जय और वंदे मातरम् के गगनभेदी नारों से वातावरण गूंज उठा। इस यात्रा में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी आयु वर्ग के नागरिक उत्साहपूर्वक शामिल हुए। हर धर्म, जाति और वर्ग के लोगों ने देश के प्रति अपनी निष्ठा और वीर जवानों के प्रति सम्मान प्रकट किया। विधायक श्री विष्णु खत्री ने कहा कि भारतीय सेना ने पाकिस्तान के आतंकियों का खात्मा किया है। आज की यह विशाल तिरंगा यात्रा हमारे वीर सैनिकों के सम्मान में आयोजित की गई है। परमाणु शक्ति का डर दिखाने वाला पाकिस्तान 4 दिन में घुटनों पर आ गया। यह भारतीय सेना के पराक्रम और नेतृत्व का कमाल है। सभा में अन्य वक्ताओं ने कहा कि देश और प्रदेश में आज मजबूत सरकारें हैं। जनता के कल्याण के सभी कदम उठाए गए हैं। इस अवसर पर सांसद श्री आलोक शर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती रामकुंवर नवरंग गुर्जर सहित जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद रहे।  

इसरो कल पीएसएलवी-सी61के माध्यम से खास ईओएस-09 (RISAT-1B) सैटेलाइट को प्रक्षेपित करने जा रहा

नई दिल्ली भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) एक बार फिर अपनी तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन करने के लिए तैयार है। इसरो 18 मई यानी कल अपने विश्वसनीय पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (पीएसएलवी-सी61) के माध्यम से खास ईओएस-09 (RISAT-1B) सैटेलाइट को प्रक्षेपित करने जा रहा है। यह प्रक्षेपण सुबह 5:59 बजे श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से होगा। इस सैटेलाइट के साथ भारत की रात के समय और हर मौसम में निगरानी की क्षमता को अभूतपूर्व बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। बादलों के आर-पार देखने की क्षमता यह उपग्रह न केवल बादलों के आर-पार देख सकता है, बल्कि रात के अंधेरे में भी हाई-रिजॉल्यूशन तस्वीरें ले सकता है। इसके जरिए भारत की अंतरिक्ष से निगरानी क्षमता को और अधिक मजबूती मिली है, खासतौर पर उस समय जब पाकिस्तान के साथ सीमा पर भले ही अभी शांति हो, लेकिन भारत हर स्थिति को लेकर सतर्क बना हुआ है। यह सैटेलाइट आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से इसरो के भरोसेमंद रॉकेट पीएसएलवी (PSLV) के जरिए छोड़ी जाएगी। यह इसरो की अब तक की 101वीं बड़ी रॉकेट लॉन्चिंग है। EOS-9 का वजन 1,696 किलोग्राम है और इसे पृथ्वी की सतह से करीब 500 किलोमीटर ऊपर की कक्षा में स्थापित किया जाएगा। कम रोशनी में भी जमीन की सटीक तस्वीरें इस सैटेलाइट को इसरो के यू आर राव सैटेलाइट सेंटर, बेंगलुरु में पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से तैयार किया गया है। इसमें C-बैंड सिंथेटिक अपर्चर रडार (SAR) तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जो हर मौसम में और कम रोशनी में भी जमीन की सटीक तस्वीरें लेने में सक्षम है। यह “जासूसी सैटेलाइट” भारत के उस सैटेलाइट सिस्टम का हिस्सा बनेगी, जिसमें पहले से ही 50 से अधिक सैटेलाइट अंतरिक्ष में तैनात हैं। इनमें से सात रडार सैटेलाइट्स विशेष रूप से सीमा क्षेत्रों की निगरानी में सक्रिय हैं, जो अप्रैल 22 को हुए पहगाम हमले और उसके बाद दोनों देशों के बीच हुई सैन्य गतिविधियों के दौरान अहम भूमिका में रही हैं। सुरक्षा एजेंसियों को काफी मदद मिलेगी EOS-9 से पहले भारत के पास जो प्रमुख इमेजिंग सैटेलाइट Cartosat-3 थी, वह रात में तस्वीरें नहीं ले पाती थी। EOS-9 इस कमजोरी को दूर करेगी और इससे मिली तस्वीरें पहले से ज्यादा स्पष्ट और सटीक होंगी, जिससे सुरक्षा एजेंसियों को काफी मदद मिलेगी। हाल ही में इसरो अध्यक्ष डॉ वी. नारायणन ने इस मौके पर कहा, “कम से कम 10 सैटेलाइट चौबीसों घंटे देश की सुरक्षा में लगे हैं। भारत को अपनी 7,000 किलोमीटर लंबी समुद्री सीमा और पूरे उत्तरी क्षेत्र की निगरानी करनी होती है। यह सैटेलाइट और ड्रोन तकनीक के बिना संभव नहीं है।” वहीं, केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने इस लॉन्च पर कहा, “सटीकता, टीमवर्क और इंजीनियरिंग भारत की अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं को शक्ति देती हैं।” इस ऐतिहासिक लॉन्च को देखने के लिए कई सांसद और वैज्ञानिक श्रीहरिकोटा में मौजूद रहे। मुख्य बातें:     अंतरिक्ष एजेंसी इसरो का यह 101वां मिशन है।     शनिवार सुबह सात बजकर 59 मिनट पर उलटी गिनती शुरू हो गई। कुल 22 घंटे की उलटी गिनती है।     सैटेलाइट का नाम: EOS-9     वजन: 1,696 किलोग्राम     लॉन्च व्हीकल: PSLV     स्थान: सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा     खासियत: बादलों के आर-पार और रात में भी हाई-रिजॉल्यूशन इमेजिंग     तकनीक: C-बैंड Synthetic Aperture Radar (SAR)     निर्माण: यू आर राव सैटेलाइट सेंटर, बेंगलुरु राष्ट्रीय सुरक्षा और आपदा प्रबंधन में योगदान यह लॉन्च भारत की सुरक्षा और अंतरिक्ष तकनीक दोनों के लिए मील का पत्थर है। ईओएस-09 की उन्नत रडार इमेजिंग क्षमता इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण बनाती है। यह सैटेलाइट भारत की सीमाओं और तटीय क्षेत्रों की 24×7 निगरानी करने में सक्षम होगी, जिससे सैन्य और रक्षा तैयारियों को मजबूती मिलेगी। इसके अलावा, यह सैटेलाइट कृषि, वानिकी, बाढ़ निगरानी, मृदा नमी मूल्यांकन, भूविज्ञान, समुद्री बर्फ और तटीय निगरानी जैसे नागरिक अनुप्रयोगों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। कुल मिलाकर इस मिशन का उद्देश्य देश भर में विस्तारित तात्कालिक समय पर होने वाली घटनाओं की जानकारी जुटाने की आवश्यकता को पूरा करना है। पृथ्वी अवलोकन सैटेलाइट-09 वर्ष 2022 में प्रक्षेपित किए गए ईओएस-04 जैसा ही एक सैटेलाइट है। पीएसएलवी-सी61 रॉकेट 17 मिनट की यात्रा के बाद ईओएस-09 उपग्रह को सूर्य तुल्यकालिक ध्रुवीय कक्षा (एसएसपीओ) में स्थापित कर सकता है। सैटेलाइट के वांछित कक्षा में अलग होने के बाद वैज्ञानिक बाद में कक्षा की ऊंचाई कम करने के लिए वाहन पर ‘ऑर्बिट चेंज थ्रस्टर्स’ (ओसीटी) का उपयोग करेंगे। इसरो ने बताया कि ईओएस-09 की मिशन अवधि पांच वर्ष है। वैज्ञानिकों के अनुसार, सैटेलाइट को उसकी प्रभावी मिशन अवधि के बाद कक्षा से बाहर निकालने के लिए पर्याप्त मात्रा में ईंधन आरक्षित कर लिया गया है ताकि इसे दो वर्षों के भीतर कक्षा में नीचे उतारा जा सके, जिससे मलबा-मुक्त मिशन सुनिश्चित हो सके।

मई में एक साथ मिलेगा तीन महीने का राशन,अगर आपने एक जरूरी काम नहीं क‍िया तो आप इससे हाथ धो सकते हैं

भोपाल शासकीय उचित मूल्य की दुकानों से हर महीने राशन लेने वाले पात्र हितग्राहियों के लिए ये महत्वपूर्ण खबर है, राज्य शासन ने आदेश दिया है कि उन्हें तीन महीनों का राशन एकमुश्त दिया जायेगा, यानि जून, जुलाई और अगस्त का राशन हितग्राहियों को एक साथ दिया जायेगा, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण संचालनालय भोपाल ने इस आशय के आदेश जारी कर दिए हैं। संचालनालय ने सभी जिला आपूर्ति नियंत्रकों को निर्देश दिए हैं कि पात्र परिवारों को समय-सीमा में राशन सामग्री उपलब्ध करने हेतु NFSA/PMGKAY अंतर्गत सम्मिलित पात्र परिवारों को जून से अगस्त 2025 तक की एकमुश्त राशन सामग्री के आवंटन, उठाव एवं वितरण किया जाए। 20 तारीख तक मई का और 21 से जून, जुलाई, आगस्त का राशन मिलेगा निर्देश में कहा गया कि मई हेतु आवंटित राशन सामग्री का वितरण हर हाल में 20 मई तक समस्त पात्र परिवारों को कराया जाए, उसके बाद अगले दिन 21 मई से जून से अगस्त 2025 तक की एकमुश्त राशन सामग्री (PMGKAY, MDM, ICDS, KKY का खा‌द्यान्न, शक्कर एवं नमक) का पात्रतानुसार वितरण कराया जाए। POS मशीन पर तीन महीने के राशन वितरण की सुविधा आदेश में कहा गया है कि जून से अगस्त तक का एकमुश्त आवंटन जारी किया गया है जिसे 31 मई, 2025 तक प्रदाय केन्द्रों पर उठाव कराकर उचित मूल्य दुकानों पर भंडारण सुनिश्चित कराया जाए, पीओएस मशीन में माह जून से अगस्त, 2025 तक की राशन सामग्री माहवार वितरण की सुविधा उपलब्ध कराई गई है अर्थात् पात्र हितग्राही को राशन प्राप्त करने हेतु माहवार क्रमानुसार पीओएस मशीन पर एथेंटिकेशन किया जाकर राशन का वितरण कराया जाए। मानसून को देखते हुए सरकार का फैसला तीन महीने का राशन एक साथ वितरित कराने का कारण मानसून सीजन बताया गया है, आदेश में कहा गया है की मानसून सीजन में संभावित बाढ़ के कारण राशन सामग्री के परिवहन, भंडारण एवं वितरण में आने वाली समस्याओं के निराकरण एवं पात्र परिवारों को समय-सीमा में राशन सामग्री उपलब्ध करने हेतु ये व्यवस्था की गई है। 3 महीने के राशन से धो बैठेंगे हाथ! अगर 31 मई से पहले नहीं क‍िया ये काम अगर अब भी आप राशन कार्ड का ई-केवाईसी कराने में आलस दिखाएंगे तो एक नहीं लगातार तीन महीने का गेहूं-चावल और चीनी का नुकसान करा लेंगे। देशभर में तमाम राज्यों में जून-जुलाई और अगस्त का राशन एक साथ देने का फैसला किया गया है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून (NFSA) के तहत यूपी, मध्य प्रदेश, झारखंड समेत कई राज्यों में तीन महीने का एडवांस राशन दिया जाएगा। 21 मई से राशन मिलने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। हालांकि अगर आपके राशन कार्ड का ई-केवाईसी नहीं हुआ है तो आपको तगड़ा झटका लग सकता है। इसके बाद राशन सीधे सितंबर में मिलेगा। केंद्र सरकार की ओर से राज्यों को निर्देश दिए गए हैं कि गड़बड़ियों को रोकने और सही लाभार्थियों तक लाभ पहुंचाने के लिए सभी राशन कार्ड धारकों का ई-केवाईसी कराया जाए। सरकारें लगातार इसे लेकर मौके दे रही हैं। बावजूद इसके अभी भी बहुत से लोगों ने ई-केवाईसी नहीं कराया है। यूपी में मई-जून में ही मिलेगा 3 महीने का राशन यूपी सरकार के खाद्य एवं रसद विभाग की बैठक में तय हुआ है कि मई का राशन 20 मई तक वितरित कर दिया जाएगा। इसके बाद 21 मई से 31 मई तक जून का राशन बांटा जाएगा। फिर 5 जून से 16 जून तक जुलाई का राशन मिलेगा। जून में ही 19 से 30 जून तक अगस्त का राशन भी मिल जाएगा। इसके बाद फिर सीधे सितंबर में राशन मिलेगा। झारखंड में 1 जून से 30 जून के बीच जून, जुलाई और अगस्त का एडवांस राशन मिलेगा। अनुमान के मुताबिक झारखंड में करीब 2.88 करोड़ लाभार्थी हैं, जो सरकार द्वारा सब्सिडी पर मिलने वाला राशन लेते हैं। मध्य प्रदेश में भी 21 मई से तीन महीने का राशन एक साथ मिलना शुरू हो जाएगा। अन्य राज्यों में भी एडवांस राशन बांटने की तैयारी हो गई है। ऐसे करें ई-केवाईसी राशन कार्ड का ई-केवाईसी कराना बहुत ही आसान है। आप मोबाइल से बस 2 मिनट में इस काम को कर सकते हैं। मोबाइल में 2 एप डाउनलोड करें- ‘मेरा KYC’ और AadhaarFaceRD मोबाइल एप। बस आपको अपना आधार नंबर डालकर लोकेशन के साथ वेरिफाई करना है और फिर मोबाइल कैमरे से अपनी वेरिफिकेशन को पूरा करना है। बस हो गया ई-केवाईसी। आप चाहें तो पास की राशन कार्ड की दुकान पर आधार कार्ड ले जाकर भी यह काम करा सकते हैं। क्यों मिल रहा 3 महीने का एडवांस राशन सरकार द्वारा तीन महीने का एडवांस राशन मिलने को कुछ लोग पाकिस्तान के साथ तनाव के साथ जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि ऐसा नहीं है। दरअसल मानसून में कई तरह की दिक्कतें आने लगती हैं। राशन का ट्रांसपोर्टेशन, उसका वितरण, स्टोरेज जैसी बहुत सी समस्याएं आती हैं। ऐसे में कोई परिवार इस वजह से भूखा न सोए, इसलिए सरकार मानसून खत्म होने तक का राशन एडवांस में दे रही है। कई बार सरकार ऐसा कदम जरूरत से ज्यादा अनाज उत्पादन की वजह से भी करती है। अंत्योदय अन्न योजना (AAY) राशन कार्ड धारकों को प्रति परिवार 35 किलो राशन दिया जाता है। जबकि पीएचएच कार्ड पर परिवार में प्रति व्यक्ति 5 किलो अनाज दिया जाता है।

UPSC ने DGP के चयन के लिए तीन IPS के नामों का किया चयन, अरुण देव सहित तीनों के नाम शामिल…

रायपुर छत्तीसगढ़ में अब जल्द ही पूर्णकालिक डीजीपी (Director General of Police) की नियुक्ति होने वाली है। इसको लेकर आज यूपीएससी (UPSC) की सलेक्शन कमेटी की एक बैठक आयोजित की गई, जिसमें मुख्य सचिव अमिताभ जैन ने भाग लिया।छत्तीसगढ़ के नए डीजीपी के लिए UPSC से 3 अधिकारियों के नाम काे क्लीयरेंस मिल गई है। विभागीय सूत्रों के अनुसार छत्तीसगढ़ के स्थायी डीजीपी बनने की रेस में IPS अरुण देव गौतम के अलावा, IPS पवन देव और IPS जीपी सिंह का नाम शामिल है। वर्तमान में DGP की जिम्मेदारी IPS अरुण देव गौतम के पास है। सरकार ने गौतम को डीजीपी पद की अस्थायी जिम्मेदारी दी है। बताया जा रहा है कि IPS अरुण देव गौतम के लिए प्रदेश के नेताओं की लॉबी लगी हुई है। वहीं IPS पवन देव के लिए बिहार के राजनेता लॉबी कर रहे हैं। इसी तरह से IPS जीपी सिंह के लिए प्रदेश के राजनेताओं के अलावा दिल्ली के राजनेता और अफसर लॉबी कर रहे हैं। इन तीनों में से कोई एक छत्तीसगढ़ पुलिस का स्थायी मुखिया होगा। हालांकि सूत्रों का कहना है कि अरुण देव का नाम सबसे टॉप पर है। UPSC से छत्तीसगढ़ वापस आ गई फाइल गृह विभाग के विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक, यूपीएससी से सीएम सचिवालय फाइल और लेटर आ चुका है। राज्य सरकार के जिम्मेदारों ने यूपीएससी से आए पत्र पर अंतिम निर्णय लेने की कवायद शुरू कर दी है।जून माह तक नए डीजीपी का नाम सार्वजनिक किया जाएगा। 4 फरवरी को IPS गौतम को मिली थी डीजीपी की जिम्मेदारी राज्य सरकार ने 4 फरवरी को आईपीएस अरुण देव गौतम को डीजीपी की अस्थायी जिम्मेदारी दी थी। इस संबंध में गृह विभाग के विशेष सचिव ने निर्देश जारी किया था। जिस समय आईपीएस गौतम को डीजीपी बनाया गया था, उस समय उनके पास नगर सेना एवं नागरिक सुरक्षा नवा रायपुर के महानिदेशक, लोक अभियोजन नवा रायपुर के संचालक की भी जिम्मेदारी थी। स्थायी DGP की रेस में शामिल IPS वर्तमान में यहां हैं पदस्थ     IPS अरुण देव गौतम: अस्थायी डीजीपी, नगर सेना एवं नागरिक सुरक्षा नवा रायपुर के महानिदेशक, लोक अभियोजन नवा रायपुर के संचालक     IPS पवन देव: चेयरमेन पुलिस हाउसिंग कॉर्पोरेशन     IPS जीपी सिंह: डीजी पीएचक्यू पहले मुख्यमंत्री सीधे करते थे डीजीपी की नियुक्ति छत्तीसगढ़ में पहले मुख्यमंत्री खुद ही डीजीपी की नियुक्ति करते थे। इस प्रक्रिया को लेकर कोई निर्धारित नियम नहीं था। 2011 में एएन उपध्याय की नियुक्ति के बाद तक यूपीएससी को नाम भेजने का नियम लागू नहीं हुआ था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट द्वारा गाइडलाइन जारी की गई, जिसमें कहा गया था कि डीजीपी की नियुक्ति कम से कम दो साल के लिए की जानी चाहिए। साथ ही अगर नियुक्ति के बाद छह महीने से कम समय में रिटायरमेंट का समय बचा हो, तो भी उन्हें दो साल का कार्यकाल पूरा करना होगा। छत्तीसगढ़ में इस गाइडलाइन का पालन करते हुए, अशोक जुनेजा को इसका लाभ मिला था। अब इस नियम के तहत छत्तीसगढ़ को जल्द ही अपना नया और पूर्णकालिक डीजीपी मिलेगा, जो राज्य की कानून व्यवस्था को मजबूती से संभालेगा। केंद्रीय गृह मंत्रालय को तीन नामों का पैनल: यूपीएससी सलेक्शन कमेटी केंद्रीय गृह मंत्रालय को तीन नामों का पैनल तैयार कर भेजेगा। वहां से छत्तीसगढ़ सरकार को फिर पेनल आएगा। जिस पर मुख्यमंत्री को अधिकार होगा कि वह इन तीन नामों के पेनल में से किसी एक नाम पर वे टिक लाएंगे, हालांकि, पहले डीजीपी की नियुक्ति मुख्यमंत्री सीधे करते थे। और एएन उपध्याय की नियुक्ति होने तक यूपीएससी को नाम भेजने का कोई नियम नहीं बना था। मुख्यमंत्री उस समय सीधे डीजीपी अपाइंट करते थे। लेकिन सुप्रीम कोर्ट इसके बाद गाइडलाइन आ गया, जिसके अब कम-से-कम दो साल के लिए डीजीपी की नियुक्ति होगी। अशोक जुनेजा को इसका लाभ : इसके साथ ही अगर उनकी नियुक्ति के बाद रिटायरमेंट में छह महीने भी टाईम बचा हो तो भी उन्हें दो साल का नियुक्ति के बाद अवसर दिया जाएगा। इसका लाभ छत्तीसगढ़ में अशोक जुनेजा को मिला है।छह महीने से छत्तीसगढ़ के डीजीपी के लिए मामला यूपीएससी में लटका था। वहीं इससे पहले डीपीसी हुई भी मगर जीपी सिंह की इंट्री के बाद एक बार फिर से कई तरह की जानकारियां राज्य सरकार से  यूपीएससी ने मंगवाई थी। ज्ञात हो कि डीजीपी सलेक्शन के लिए  सरकार ने दिसंबर 2024 में प्रस्ताव भेज दिया था। लेकिन अब यह समझा जाता है कि भारत सरकार को यूपीएससी जल्द अब पेनल बनाकर भेज सकती है।

भारत को दुनिया का सबसे प्राचीन देश,भारत की भूमिका बड़े भाई की जैसी : मोहन भागवत

जयपुर जयपुर में हाल ही में आयोजित एक कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने अपने विचार साझा किए. उन्होंने कहा कि शक्ति हो तो दुनिया प्रेम की भाषा भी सुनती है. उन्होंने अपने भाषण में भारत की प्राचीन संस्कृति और त्याग की परंपरा को याद दिलाया. उन्होंने बताया कि भारत के इतिहास में भगवान श्री राम से लेकर भामाशाह जैसे महान व्यक्तित्वों ने त्याग और सेवा की मिसाल पेश की है. मोहन भागवत ने कहा कि विश्व को धर्म सिखाना भारत का कर्तव्य है. धर्म के माध्यम से ही मानवता की उन्नति संभव है. उन्होंने विशेष रूप से हिंदू धर्म की भूमिका को महत्वपूर्ण माना और कहा कि विश्व कल्याण हमारा प्रमुख धर्म है.  उन्होंने भारत को दुनिया का सबसे प्राचीन देश बताते हुए कहा कि भारत की भूमिका बड़े भाई की जैसी है. विश्व में शांति और सौहार्द कायम करने की दिशा में प्रायसरत! मोहन भागवत का कहना है कि भारत विश्व में शांति और सौहार्द कायम करने की दिशा में निरंतर प्रयासरत है. उन्होंने कहा कि भारत किसी से द्वेष नहीं रखता लेकिन जब तक आपके पास शक्ति नहीं होगी, तब तक विश्व प्रेम और मंगल की भाषा नहीं समझेगा. इसलिए उनके मुताबिक, विश्व कल्याण के लिए शक्ति का होना आवश्यक है, और ये कि हमारी ताकत विश्व ने देखी है. शक्ति ही एक माध्यम है! मोहन भागवत ने यह भी बताया कि शक्ति ही वह माध्यम है जिससे विश्व में भारत अपनी बात प्रभावी ढंग से रख सकता है और वह पहले भी कह चुके हैं कि अपनी सांस्कृतिक विरासत का प्रसार भी तभी किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि यह स्वभाव विश्व का है, इसे बदला नहीं जा सकता. इसके साथ ही उन्होंने संत समाज की भूमिका की भी प्रशंसा की, और कहा कि ऋषि परंपरा का निर्वहन करते हुए संस्कृति और धर्म की रक्षा कर रहे हैं.  

राष्ट्रपति के संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को बदला जा सकता है? अनुच्छेद 143 और सलाहकार क्षेत्राधिकार की व्याख्या

नई दिल्ली भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अनुच्छेद 143(1) के तहत सुप्रीम कोर्ट की सलाह मांगी है कि क्या राज्य विधानसभाओं द्वारा पारित विधेयकों पर निर्णय लेने के लिए राष्ट्रपति और राज्यपालों के लिए निर्धारित समयसीमा देश की सर्वोच्च अदालत के द्वारा तय की जा सकती है। यह कदम तब उठाया गया जब 8 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने अपने ऐतिहासिक फैसले में कहा कि राज्यपाल द्वारा राष्ट्रपति को भेजे गए विधेयकों को राष्ट्रपति को तीन माह में निपटाना होगा। क्या है अनुच्छेद 143(1)? संविधान के अनुच्छेद 143(1) के तहत राष्ट्रपति किसी कानूनी मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट से सलाह ले सकते हैं। यह राय बाध्यकारी नहीं होती, लेकिन इसका संवैधानिक महत्व काफी अधिक होता है। सुप्रीम कोर्ट को यह सलाह संविधान के अनुच्छेद 145(3) के तहत पांच न्यायाधीशों की पीठ द्वारा दी जाती है। राष्ट्रपति ने यह संदर्भ 13 मई को भेजा और इसमें कुल 14 कानूनी प्रश्न शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट क्या पहले भी राय देने से मना कर चुका है? सुप्रीम कोर्ट ने दो बार राष्ट्रपति की राय मांगने पर जवाब देने से इनकार किया है। 1993 में जब राम जन्मभूमि–बाबरी मस्जिद विवाद में मंदिर की पूर्वस्थिति पर राय मांगी गई थी, जिसे कोर्ट ने धार्मिक और संवैधानिक मूल्यों के विपरीत मानते हुए खारिज कर दिया। इससे पहले 1982 में पाकिस्तान से आए प्रवासियों के पुनर्वास संबंधी कानून पर राय मांगी गई थी, लेकिन बाद में वह कानून पारित हो गया और कोर्ट में याचिकाएं दायर हो गईं, जिससे राय अप्रासंगिक हो गई। कब-कब सुप्रीम कोर्ट ने दी थी राय? संविधान के अनुच्छेद 143 के तहत सबसे पहले महत्वपूर्ण मामले में दिल्ली लॉज एक्ट- 1951 में सुप्रीम कोर्ट ने अपनी राय दी थी. केरल शैक्षणिक बिल- 1957 पर संदर्भ को संवैधानिक तौर पर व्याख्या करने के साथ सुप्रीम कोर्ट ने अपनी राय दी थी, लेकिन अयोध्या में राम मंदिर विवाद पर नरसिंह राव सरकार के समय भेजे गए संदर्भ पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा था की ऐतिहासिक और पौराणिक तथ्यों से जुड़े मामलों में राय देना अनुच्छेद 143 के दायरे में नहीं आता है. साल 1993 में कावेरी जल विवाद मामले के संदर्भ पर भी सुप्रीम कोर्ट ने राय देने से मना कर दिया था. साल 2002 में गुजरात चुनाव के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अपील या पुनर्विचार याचिका दायर करने के बजाय 143 के तहत संदर्भ भेजा जाना सांविधानिक तौर पर गलत विकल्प है. हालांकि, पूर्व चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के फैसलों की तरह संदर्भ पर राय बाध्यकारी नहीं होना संविधानिक तौर पर विचित्र है. राज्यपाल मामले से जुड़े कुछ पहलू 2G मामले में यूपीए सरकार के संदर्भ से मेल खाते हैं, तब सुप्रीम कोर्ट ने 122 फर्म और कंपनियों के 2G लाइसेंस पर स्पेक्ट्रम आवंटन को रद्द कर दिया था. तब केंद्र ने उसे फैसले के खिलाफ संदर्भ भेजते हुए पूछा था कि क्या नीतिगत मामलों में सुप्रीम कोर्ट की दखलअंदाजी होनी चाहिए. दरअसल, केशवानंद भारती मामले में संविधान पीठ के फैसले के अनुसार नीतिगत मामलों में संसद और केंद्र के निर्णय पर अदालतों की दखलंदाजी नहीं होनी चाहिए. तमिलनाडु राज्य बनाम राज्यपाल मामले में क्या हुआ? राज्यपाल मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला दो जजों ने दिया था. कानूनविदों की मानें तो इस मामले में कम से कम पांच जजों की संविधान पीठ में सुनवाई होनी चाहिए थी. दरअसल, पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु राज्य बनाम तमिलनाडु के राज्यपाल मामले में ऐतिहासिक निर्णय देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 201 के तहत राष्ट्रपति को उन विधेयकों पर कार्रवाई करने के लिए समय-सीमा निर्धारित की थी जिन्हें राज्यपाल ने राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए आरक्षित किया. आठ अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने राज्यपाल को राज्य विधानमंडल द्वारा पारित विधेयकों पर कार्रवाई करने के लिए एक समय-सीमा निर्धारित कर दी थी. इस फैसले के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की ओर से सुप्रीम कोर्ट से सवाल किए गए हैं कि जबकि संविधान में ऐसा जिक्र नहीं है, फिर भी सुप्रीम कोर्ट ने व्यवस्था दे दी. कानूनविद दो जजों की पीठ के फैसले पर इसलिए भी सवाल उठा रहे हैं, क्योंकि पूर्व में दिया गया सर्वोच्च अदालत की बड़ी पीठ का फैसले में सुप्रीम कोर्ट की भूमिका की सीमा तय की गई है. दूसरी ओर संविधान में राष्ट्रपति या राज्यपाल के पास विधायक कितने दिन लंबित रहेगा, इसका जिक्र नहीं है. संविधान में जो प्रावधान नहीं है उसकी व्याख्या करके सुप्रीम कोर्ट ने नए प्रावधान बना दिए. जबकि केशवानंद भारती फैसले के अनुसार सुप्रीम कोर्ट को कानून निर्माण या संविधान संशोधन की शक्ति नहीं है सरकार की खामियों, कानून के निर्वात को ठीक करने के लिए जजों को संरक्षक की भूमिका मिली है. लेकिन यह साफ है कि राष्ट्रपति की ओर से भेजे गए संदर्भ पर अगर सुप्रीम कोर्ट आगे बढ़ता है यानी राय देता है तो वह बाध्यकारी नहीं होगी. वह महज एक राय, सलाह या मशविरा होगा. क्या राष्ट्रपति निर्णय को पलटना चाहती हैं? सुप्रीम कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि अनुच्छेद 143 का उपयोग किसी पहले से दिए गए निर्णय की समीक्षा या पलटने के लिए नहीं किया जा सकता है। 1991 में कावेरी जल विवाद पर कोर्ट ने कहा था कि निर्णय देने के बाद उसी विषय पर राष्ट्रपति की राय मांगना न्यायपालिका की गरिमा के विरुद्ध है। यदि सरकार चाहे तो वह पुनर्विचार याचिका या क्युरेटिव याचिका दायर कर सकती है, जो कि न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है। राष्ट्रपति ने पूछे कैसे प्रश्न? अधिकांश प्रश्न 8 अप्रैल के फैसले से जुड़े हैं, लेकिन अंतिम कुछ प्रश्नों में सुप्रीम कोर्ट की स्वयं की शक्तियों पर भी सवाल उठाए गए हैं। प्रश्न 12 में पूछा गया है कि क्या सुप्रीम कोर्ट को पहले यह तय करना चाहिए कि कोई मामला संविधान की व्याख्या से जुड़ा है या नहीं, ताकि उसे बड़ी पीठ को भेजा जा सके? इसी तरहा प्रश्न 13 में पूछा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के अनुच्छेद 142 (पूर्ण न्याय करने की शक्ति) के प्रयोग की सीमा क्या है। प्रश्न संख्या 14 में पूछा गया है कि केंद्र-राज्य विवादों की मूल सुनवाई का अधिकार किसके पास है। सिर्फ सुप्रीम कोर्ट के पास या अन्य अदालतों के पास … Read more

व्यापमं घोटाले में सीबीआई कोर्ट ने 11 लोगों को पाया दोषी, आरोपियों को सुनाई 3-3 साल की सजा, 16 हजार जुर्माना भी लगाया

भोपाल  मध्य प्रदेश के बहुचर्चित व्यापमं घोटाले में शुक्रवार को भोपाल सीबीआई की विशेष अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया। एमपी पीएमटी-2009 परीक्षा में फर्जी तरीके से सिलेक्ट होने वाले 11 आरोपियों को दोषी ठहराया गया। विशेष न्यायाधीश सचिन कुमार घोष की अदालत ने सभी को तीन-तीन साल जेल और 16-16 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। साथ ही अदालत ने इन सभी दोषियों पर कुल 16,000 रुपए का जुर्माना भी लगाया है। यह मामला गांधी मेडिकल कॉलेज, भोपाल में वर्ष 2009 की एमबीबीएस प्रवेश परीक्षा से जुड़ा है, जिसमें फर्जी अभ्यर्थियों और सॉल्वरों की मदद से एडमिशन दिलाने का षड्यंत्र रचा गया था। इनमें चार  उम्मीदवार विकास सिंह, कपिल पारटे, दिलीप चौहान, प्रवीण कुमार थे, जिन्होंने मेडिकल प्रवेश के लिए सॉल्वर के माध्यम से परीक्षा दी थी। पांच सॉल्वर नागेन्द्र कुमार, दिनेश शर्मा, संजीव पांडे, राकेश शर्मा, दीपक ठाकुर ऐसे थे, जिन्होंने असली परीक्षार्थियों की जगह परीक्षा दी, जबकि एक बिचौलिया सत्येन्द्र सिंह इस पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहा था। विशेष सीबीआई न्यायाधीश (व्यापमं प्रकरण) की अदालत ने सभी आरोपियों को आईपीसी की धारा 419, 420, 467, 468, 471 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत दोषी ठहराया। अदालत ने टिप्पणी की कि शिक्षा और चिकित्सा जैसे गंभीर क्षेत्र में इस तरह की धोखाधड़ी समाज के लिए खतरनाक है और इसे किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। इस मामले की जांच पहले एसटीएफ के पास थी, जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपा गया था।    फर्जी अभ्यर्थियों और सॉल्वरों की मदद से एडमिशन दिलाने का षड्यंत्र यह मामला गांधी मेडिकल कॉलेज, भोपाल में वर्ष 2009 की एमबीबीएस प्रवेश परीक्षा से जुड़ा है, जिसमें फर्जी अभ्यर्थियों और सॉल्वरों की मदद से एडमिशन दिलाने का षड्यंत्र रचा गया था। इनमें चार  उम्मीदवार विकास सिंह, कपिल पारटे, दिलीप चौहान, प्रवीण कुमार थे, जिन्होंने मेडिकल प्रवेश के लिए सॉल्वर के माध्यम से परीक्षा दी थी। पांच सॉल्वर नागेन्द्र कुमार, दिनेश शर्मा, संजीव पांडे, राकेश शर्मा, दीपक ठाकुर ऐसे थे, जिन्होंने असली परीक्षार्थियों की जगह परीक्षा दी, जबकि एक बिचौलिया सत्येन्द्र सिंह इस पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहा था। मामले का खुलासा होने के बाद भोपाल के कोहेफिजा थाने में 2012 में एफआईआर दर्ज की गई थी। सीबीआई की विशेष अदालत ने आरोपियों ने 419, 420, 467, 468, 471 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दोषी ठहराया है। फैसला सुनाते वक्त अदालत ने टिप्पणी की कि शिक्षा और चिकित्सा जैसे गंभीर क्षेत्र में इस तरह की धोखाधड़ी समाज के लिए खतरनाक है और इसे किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। मध्यप्रदेश में व्यापम घोटाला बहुचर्चित फर्जीवाड़ा है। इसमें बड़े पैमाने पर घोटाला हुआ था, जिसके अंदर सरकार की तरफ से आयोजित होने वाली कई भर्ती परीक्षा में अभ्यर्थी की जगह फर्जी अभ्यर्थियों ने परीक्षाएं दी थी।  फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद कई अधिकारी और नेताओं पर इसकी आंच आई थी। कोर्ट का फैसला मामले का खुलासा होने पर राजधानी के कोहेफिजा थाने में वर्ष 2012 में एफआईआर दर्ज की गई थी, जिसपर अब सीबीआई की विशेष अदालत ने आरोपियों ने 419, 420, 467, 468, 471 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दोषी माना है। कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए ये टिप्पणी की कि, शिक्षा और चिकित्सा जैसे गंभीर क्षेत्र में इस तरह की धोखाधड़ी समाज के लिए खतरनाक है। इसे किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। मध्यप्रदेश में व्यापम घोटाला बहुचर्चित फर्जीवाड़ा है। इसमें बड़े पैमाने पर घोटाला हुआ था, जिसके अंदर सरकार की तरफ से आयोजित होने वाली कई भर्ती परीक्षा में अभ्यर्थी की जगह फर्जी अभ्यर्थियों ने परीक्षाएं दी थी। याद हो कि, व्यापमं घोटाला सामने आने के बाद कई अधिकारियों के साथ-साथ नेताओं तक पर इसकी जांच की आंच आई थी।  

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने जगद्गुरु रामभद्राचार्य महाराज को ‘ज्ञानपीठ पुरस्कार-2023’ से सम्मानित किए जाने पर दी हार्दिक बधाई

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु द्वारा पूज्य संत, पद्मविभूषित जगद्गुरु तुलसीपीठाधीश्वर, रामानंदाचार्य स्वामी रामभद्राचार्य जी महाराज को संस्कृत भाषा और साहित्य के क्षेत्र में उनके अमूल्य योगदान हेतु प्रतिष्ठित ‘ज्ञानपीठ पुरस्कार-2023’ से सम्मानित किए जाने पर हर्ष व्यक्त करते हुए उन्हें आत्मीय बधाई दी है। उपमुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी का संपूर्ण जीवन त्याग, तपस्या, विद्वता और करुणा का अनुपम संगम है। उन्होंने शारीरिक सीमाओं के बावजूद ज्ञान, संस्कृति और संस्कृत साहित्य के संवर्धन हेतु जो कार्य किया है, वह समूचे विश्व के लिए प्रेरणास्रोत है। उनका यह सम्मान वास्तव में उस सनातन चेतना का सम्मान है, जो भारत की आत्मा में प्रवाहित होती है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि संस्कृत भाषा और दर्शन को जन-जन तक पहुँचाने के लिए जगद्गुरु जी ने जो अनथक साधना की है, वह एक युगद्रष्टा संत की पहचान है। ज्ञानपीठ जैसा सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान उनके तप और कर्म की स्वीकृति है। यह केवल एक संत का नहीं, अपितु सम्पूर्ण भारतीय संस्कृति और परंपरा का गौरव है। उल्लेखनीय है कि जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी जन्म से दृष्टिबाधित होने के बावजूद रामायण, महाभारत, वेद, उपनिषद, दर्शन और संस्कृत साहित्य में अप्रतिम विद्वान हैं। वे अनेक भाषाओं में निपुण हैं और उन्होंने दर्जनों ग्रंथों की रचना की है। वे तुलसीपीठ, चित्रकूट के अधिष्ठाता हैं और शिक्षा, दिव्यांगजन सेवा व धर्म के क्षेत्र में अनेक संस्थाओं के माध्यम से कार्य कर रहे हैं।  

ऑपरेशन सिंदूर : शहबाज शरीफ ने खुद बताया, भारत के हमले से कहां-कहां हुआ नुकसान

इस्लामाबाद पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) के तहत भारतीय वायुसेना के जवाबी हमले की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि भारतीय बैलेस्टिक मिसाइलों ने 9-10 मई की मध्यरात्रि में पाकिस्तान के कई एयरबेस, खासकर नूरखान एयरबेस को निशाना बनाया।     शहबाज शरीफ के अनुसार, वजीर-ए-आजम को यह सूचित किया गया कि नूरखान एयरबेस पर मिसाइलें गिरी हैं, जिसके बाद पाकिस्तान की वायुसेना ने स्वदेशी तकनीक और आधुनिक चीनी लड़ाकू विमानों पर अत्याधुनिक गैजेट का उपयोग कर बचाव किया। मुनीर ने 2.30 बजे फोन करके हमलों के बारे में बताया शरीफ ने इस्लामाबाद में संवाददाताओं से कहा कि जनरल मुनीर ने मुझे सुबह 2.30 बजे व्यक्तिगत रूप से फोन करके हमलों के बारे में जानकारी दी। यह गंभीर चिंता का क्षण था। भाजपा के राष्ट्रीय आईटी विभाग के प्रमुख अमित मालवीय ने एक्स पर वीडियो साझा करते हुए इस घटना को ऑपरेशन सिंदूर की साहस और दक्षता का प्रमाण बताया। हमले में नूरखान एयरबेस समेत कई ठिकाने हुए तबाह मालवीय ने लिखा, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने खुद माना है कि जनरल असीम मुनीर ने उन्हें रात 2.30 बजे फोन करके बताया कि भारत ने नूर खान एयर बेस और कई अन्य स्थानों पर बमबारी की है। प्रधानमंत्री को आधी रात को पाकिस्तान के अंदर हमलों की खबर के साथ जगाया गया। यह ऑपरेशन सिंदूर के पैमाने, सटीकता और साहस के बारे में बहुत कुछ बताता है। पाक सेना ने स्वदेशी तकनीक और चीनी लड़ाकू विमानों का किया इस्तेमाल पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि हमारी वायुसेना ने अपने देश को बचाने के लिए स्वदेशी तकनीक का इस्तेमाल किया। उन्होंने चीनी लड़ाकू विमानों पर आधुनिक गैजेट और तकनीक का भी इस्तेमाल किया। शहबाज शरीफ ने कहा, आज हर जगह यही बात की जा रही है कि पाकिस्तान की सेना ने किस तरह हिंदुस्तान को जवाब दिया। पठानकोट, उधमपुर और न जाने कहां कहां हमारी सेना ने हमले किए और दुश्मनों को सिर छिपाने की जगह नहीं मिल रही थी। नूरखान एयरबेस की अहमियत और हमले की सटीकता नूरखान एयरबेस, इस्लामाबाद के निकट होने के कारण पाकिस्तान की सैन्य रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह एयरबेस VVIP और उच्चस्तरीय सैन्य विमानन का केंद्र है, जहां से पाकिस्तान के टॉप अधिकारी और वायुसेना के ऑपरेशंस संचालित होते हैं। स्पेस इंटेलिजेंस कंपनी सैटलॉजिक (Satellogic) की सैटेलाइट तस्वीरें इस बात की पुष्टि करती हैं कि भारतीय वायुसेना ने रावलपिंडी के नूरखान एयरबेस पर सटीक हमला किया, जिससे कमांड और कंट्रोल यूनिट को भारी क्षति पहुंची।इन तस्वीरों में 10 मई को एयरबेस के पास एक सफेद गल्फस्ट्रीम G450 विमान भी दिखा, जो आमतौर पर प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और विदेश मंत्रियों के लिए उपयोग होता है। इस हमले ने पाकिस्तान की रक्षा प्रणाली को गंभीर झटका दिया है और यह साबित करता है कि भारतीय वायुसेना ने बेहद कुशलता से ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम दिया। यह पहली बार है जब पाकिस्तान ने खुलकर स्वीकार किया है कि भारतीय एयरस्ट्राइक से उन्हें नुकसान हुआ है। इससे पहले पाकिस्तान लगातार ऐसे हमलों को नकारता आया था, पर अब शहबाज शरीफ के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जिसमें उन्होंने स्पष्ट रूप से हमले की बात स्वीकार की है। यह ऑपरेशन न केवल भारत की सैन्य ताकत और सटीकता को दर्शाता है, बल्कि यह क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन में भी बदलाव का संकेत है। भारत ने आधुनिक तकनीक और रणनीतिक हमलों से पाकिस्तान की महत्वपूर्ण सैन्य संपत्तियों को निशाना बनाकर उसकी युद्ध क्षमता को कम करने की कोशिश की है।

10 लाख फिलिस्तीनियों को लीबिया Settle करने की तैयारी में हैं ट्रंप – रिपोर्ट , पढ़ें क्या है पूरा मामला

वाशिंगटन गाजा को लेकर अमेरिका का एक चौंकाने वाला प्लान सामने आया है। अमेरिका की डोनाल्ड ट्रंप सरकार युद्धग्रस्त गाजा पट्टी से करीब 10 लाख फिलिस्तीनियों को स्थायी रूप से लीबिया भेजने की योजना बना रही है। ट्रंप प्रशासन इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर रहा है और इस संबंध में लीबिया के नेतृत्व के साथ चर्चा भी कर चुका है। इस योजना के तहत, लीबिया को उन अरबों डॉलर की धनराशि को जारी करने का प्रस्ताव दिया गया है, जो अमेरिका ने एक दशक से अधिक समय पहले फ्रीज कर दी थी। एनबीसी न्यूज ने पांच सूत्रों के हवाले से लिखा है कि इस योजना पर पिछले कुछ समय से अमेरिका तथा लीबिया की लीडरशिप के बीच बातचीत चल रही है। इन चर्चाओं की जानकारी रखने वाले दो व्यक्तियों और एक पूर्व अमेरिकी अधिकारी ने NBC को बताया कि इस प्रस्ताव के तहत अमेरिका लीबिया की अरबों डॉलर की संपत्ति को वापस देने पर विचार कर रहा है। हालांकि, अमेरिकी सरकार के एक प्रवक्ता ने इन रिपोर्ट्स को खारिज करते हुए कहा, “ये रिपोर्टें असत्य हैं। जमीन पर हालात ऐसे किसी प्लान के अनुकूल नहीं हैं। ऐसी कोई योजना चर्चा में नहीं रही और इसका कोई तर्क नहीं बनता।” लीबिया में दो प्रतिस्पर्धी प्रशासनों का शासन नाटो समर्थित विद्रोह के बाद 2011 में लीबिया में अराजकता फैल गई थी, जिसमें लंबे समय से शासन कर रहे तानाशाह मुअम्मर गद्दाफी को सत्ता से हटा दिया गया और उनकी हत्या कर दी गई. देश विभाजित हो गया, और इसके पूर्वी और पश्चिमी हिस्से पर दो प्रतिद्वंद्वी मिलिशिया समूहों ने नियं​त्रण कर लिया. लीबिया में वर्तमान में दो प्रतिस्पर्धी प्रशासनों का शासन है: अब्दुल हामिद दबीबेह के नेतृत्व वाली अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय एकता सरकार (Government of National Unity), और प्रतिनिधि सभा समर्थित राष्ट्रीय स्थिरता सरकार (Government of National Stability), जिसका नेतृत्व लीबियाई नेशनल आर्मी और उसके कमांडर खलीफा हफ्तार के वास्तविक शासन के तहत ओसामा हम्माद द्वारा किया जाता है. जीएनयू त्रिपोली में स्थित है और देश के पश्चिमी हिस्से को नियंत्रित करता है, जबकि जीएनएस पूर्वी और मध्य क्षेत्र में काम करता है. इस विभाजन ने लीबिया में सत्ता के दो केंद्र स्थापित कर दिए हैं, जिसमें दोनों सरकारें वैधता और देश पर नियंत्रण के लिए होड़ कर रही हैं. कई सालों से अस्थिरता से जूझ रहा लीबिया 2011 में मुअम्मर गद्दाफी की हत्या और शासन के पतन के बाद से लीबिया लगातार अस्थिरता का सामना कर रहा है। देश पूर्व और पश्चिम में दो भागों में विभाजित हो गया है, जहां विभिन्न सशस्त्र गुट सत्ता के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे में फिलिस्तीनी नागरिकों को वहां पुनर्वासित करना एक व्यवहारिक और मानवीय चुनौती बन सकती है। गाजा में भीषण हमले, 100 से अधिक की मौत इधर, इजरायल ने शुक्रवार को गाजा में दर्जनों हवाई हमले किए, जिनमें स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार 108 लोगों की मौत हो गई, जिनमें अधिकांश महिलाएं और बच्चे शामिल थे। इजरायल का कहना है कि ये हमले हमास पर दबाव बनाने और बंधकों की रिहाई के लिए युद्ध को अगले चरण में ले जाने की तैयारी का हिस्सा हैं। इजरायल ने यमन के दो बंदरगाहों पर भी हमले किए, जिनके बारे में उसका दावा है कि वहां से हूती विद्रोही हथियारों को ट्रांसफर कर रहे थे। स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि इन हमलों में एक व्यक्ति की मौत हो गई और नौ घायल हो गए। ट्रंप की फिलिस्तीनियों को अन्य अरब देशों में बसाने की इच्छा जनवरी में डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि वे चाहते हैं कि जॉर्डन, मिस्र और अन्य अरब देश गाजा से फिलिस्तीनी शरणार्थियों को अधिक संख्या में स्वीकार करें, ताकि “इस तबाह हो चुके इलाके को साफ किया जा सके और एक नया शुरुआत दी जा सके।” उन्होंने कहा था, “यह लगभग एक ध्वस्त इलाका है। लगभग सब कुछ नष्ट हो गया है, लोग मर रहे हैं। मैं चाहूंगा कि कुछ अरब देशों के साथ मिलकर कहीं और मकान बनाएं, जहां ये लोग शायद शांति से रह सकें।” हमास ने बंधक सौदे के बदले युद्ध रोकने का प्रस्ताव दिया हमास के गाजा प्रमुख और इजरायल के साथ अप्रत्यक्ष वार्ताओं में शामिल खलील अल-हय्या ने टेलीविजन पर दिए एक भाषण में कहा कि उनका संगठन सभी बंधकों के बदले इजरायली जेलों में बंद फिलिस्तीनी कैदियों की रिहाई के लिए तत्पर है- बशर्ते युद्ध को पूरी तरह समाप्त किया जाए। उन्होंने अंतरिम संघर्षविराम के किसी भी प्रस्ताव को ठुकरा दिया। इजराइल ने गाजा और यमन में हमले बढ़ाए इस बीच, इजरायल ने शुक्रवार को गाजा में दर्जनों हवाई हमले किए, जिसमें स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा कि 108 लोग मारे गए, जिनमें ज्यादातर महिलाएं और बच्चे थे. इजरायली अधिकारियों ने इसे हमास पर बंधकों को रिहा करने के लिए दबाव बनाने के अभियान की शुरुआत बताया. इजराइल ने यमन में दो बंदरगाहों पर भी हमला किया, जिसके बारे में उसने कहा कि हूती उग्रवादी समूह द्वारा हथियारों को स्थानांतरित करने के लिए इनका इस्तेमाल किया जाता था. स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा कि कम से कम एक व्यक्ति की मौत हो गई और नौ घायल हो गए. इस बीच हमास के गाजा प्रमुख ने कहा कि समूह सभी बंधकों को इजरायल द्वारा जेल में बंद फिलिस्तीनियों की एक निश्चित संख्या के साथ बदलने के लिए तत्काल बातचीत करने के लिए तैयार है, जिससे इस क्षेत्र में युद्ध समाप्त हो जाएगा. इजरायल के साथ अप्रत्यक्ष वार्ता के लिए हमास वार्ता दल का नेतृत्व करने वाले खलील अल-हय्या ने टेलीविजन पर दिए भाषण में कहा कि समूह अंतरिम युद्धविराम समझौते से इनकार करता है.  

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