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22 मई को बीकानेर से पीएम मोदी 103 रेलवे स्टेशनों का करेंगे वर्चुअल उद्घाटन

बीकानेर बीकानेर के पास स्थित पलाना गांव 22 मई को एक ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनने जा रहा है। इस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देशभर के 103 रेलवे स्टेशनों का सामूहिक रूप से वर्चुअल उद्घाटन करेंगे और कुछ प्रस्तावित स्टेशनों का शिलान्यास भी किया जाएगा। यह कार्यक्रम भारतीय रेलवे के अब तक के सबसे बड़े वर्चुअल लोकार्पण आयोजनों में से एक माना जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के इस कार्यक्रम के लिए बीकानेर में तैयारियां जोरों पर हैं। इसे लेकर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा 17 मई को पलाना पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा लेंगे। जानकारी के अनुसार रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव भी प्रधानमंत्री के साथ इस दौरे में शामिल हो सकते हैं। गुरुवार को बीकानेर की जिला कलेक्टर नम्रता वृष्णि और पुलिस अधीक्षक कावेन्द्र सिंह सागर ने पलाना पहुंचकर कार्यक्रम स्थल और हेलीपैड के लिए उपयुक्त स्थानों का निरीक्षण किया। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने कार्यक्रम की पुष्टि करते हुए कहा कि यह भारतीय रेलवे का एक बड़ा और महत्वपूर्ण आयोजन होगा। हालांकि रेलवे प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक सूचना जारी नहीं की गई है, लेकिन स्थानीय प्रशासन ने तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। सुरक्षा, यातायात और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासनिक अमला पूरी गंभीरता से जुटा हुआ है और सभी तैयारियां तेजी से आगे बढ़ रही हैं। रेल मंत्रालय की अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत बीकानेर मंडल में डबवाली, गोगामेड़ी और लालगढ़ जैसे रेलवे स्टेशन अत्याधुनिक स्वरूप में तैयार किए जा चुके हैं। जोधपुर मंडल के देशनोक रेलवे स्टेशन का कार्य भी पूर्ण हो चुका है। कुल मिलाकर बीकानेर मंडल के 22 रेलवे स्टेशनों का पुनर्विकास किया जा रहा है, जिनमें यात्री सुविधाओं के साथ-साथ स्टेशन इन्फ्रास्ट्रक्चर को भी अत्याधुनिक स्वरूप दिया गया है। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से दौरे के संकेत मिलने के बाद जिला प्रशासन पूरी तरह सक्रिय हो गया है। अधिकारियों का कहना है कि तैयारियों को समयबद्ध ढंग से पूरा कर लिया जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा न सिर्फ रेलवे विकास को रफ्तार देगा, बल्कि बीकानेर संभाग के लिए भी एक अहम राजनीतिक और विकासात्मक संदेश माना जा रहा है।  

अपने शौर्य और पराक्रम से वीरता की अप्रतिम गाथा रचने वाले भारत के वीर सैनिकों के सम्मान में निकली तिरंगा यात्रा

भारतीय सेना ने दिखायी ऐतिहासिक शौर्य, पराक्रम और वीरता : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री तिरंगा यात्रा में हुए शामिल-पूरा इंदौर हुआ देश भक्ति से ओतप्रोत अपने शौर्य और पराक्रम से वीरता की अप्रतिम गाथा रचने वाले भारत के वीर सैनिकों के सम्मान में निकली तिरंगा यात्रा हर तरफ हुआ भारत माता की जय और वंदे-मातरम् का उदघोष इन्दौर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में अब नए दौर का शक्तिशाली भारत दिखाई दे रहा है। ऑपरेशन सिंदूर से हमारी तीनों सेना ने अपने साहस, शौर्य, पराक्रम और वीरता से दुश्मनों को करारा जवाब दिया है। भारतीय सेना ने दुश्मन को अल्प समय में ऐतिहासिक जवाब दिया है। ऑपरेशन सिंदूर से पूरी दुनिया ने हमारी ताकत, एकजुटता और अत्याधुनिक हथियारों का उपयोग देखा है। आतंकवादियों के मंसूबों को भी नाकाम किया गया है। कोई भी ताकत अब भारत को आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती। हम सब सेना को सम्मान देने के लिए इस यात्रा में एकत्रित हुए हैं। लगातार तिरंगा यात्राओं से सेना के प्रति सम्मान व्यक्त किया जा रहा है। यह यात्रा जिला से लेकर पंचायत स्तर तक लगातार जारी रहेगी। उन्होंने इंदौर की तिरंगा यात्रा को ऐतिहासिक बताया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को इंदौर में अपने शौर्य और पराक्रम से वीरता की अप्रतिम गाथा रचने वाले भारत के वीर सैनिकों के सम्मान में अपार जोश और उल्लास के साथ निकली तिरंगा यात्रा में शामिल हुए। इन्दौर में तिरंगा यात्रा बड़ा गणपति से प्रारंभ हुई और गोराकुण्ड, खजुरी बाजार होते हुए ऐतिहासिक महत्व के राजबाड़ा पर सम्पन्न हुई। यात्रा में मुख्यमंत्री डॉ. यादव विशेष रथ में सवार थे। उन्होंने हर तरफ हाथ हिलाकर नागरिकों का अभिवादन किया। यात्रा से पूरा शहर राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत हो गया और पूरा आसमान भारत माता की जय और वंदे-मातरम् के उदघोष से गुंजायमान रहा। यात्रा में बच्चों से लेकर वृद्धों तक हर आयु वर्ग के लोगों की भागीदारी रही। यात्रा में हर धर्म, हर जाति और हर वर्ग के लोग इस यात्रा में शामिल हुये और उन्होंने अपने राष्ट्रप्रेम की झलक बिखरते हुए सेना के प्रति अपना सम्मान व्यक्त किया। यात्रा में नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, सांसद शंकर लालवानी तथा सुकविता पाटीदार, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, पूर्व लोकसभा अध्यक्ष श्रीमती सुमित्रा महाजन, विधायकगण रमेश मेंदोला, गोलू शुक्ला, श्रीमती मालिनी गौड़, महेंद्र हार्डिया, मनोज पटेल, सुमित मिश्रा तथा श्रवण चावड़ा सहित अन्य जनप्रतिनिधि भी साथ थे। महापुरुषों की प्रतिमा पर माल्यार्पण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने तिरंगा यात्रा के प्रारंभ में बड़ा गणपति पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। उन्होंने तिरंगा यात्रा के समापन के बाद लोकमाता देवी अहिल्या बाई होलकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर को समर्पित 10 दिनी उत्सव का होगा आयोजन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रदेश में लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर की 300वीं जयंती मनाई जा रही है। यह संयोग है कि 20 मई को तिथि के अनुसार उनकी जयंती है और विवाह की वर्षगांठ भी है। साथ ही उनके ससुर मल्हारराव होलकर की पुण्यतिथि भी है। इसको देखते हुए 20 मई को इंदौर के राजवाड़ा में कैबिनेट की बैठक आयोजित की जा रही है। इसी दिन से पूरे प्रदेश में 10 दिनी उत्सव का आयोजन भी शुरू किया जा रहा है। इसका समापन भोपाल में भव्य रूप से 31 मई को किया जाएगा। प्रदेश में 10 दिनी उत्सव के तहत जगह-जगह कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।  

CG में एसीबी और ईओडब्ल्यू की छापेमारी, 100 अधिकारी, नेता-मंत्री के घर में घुसे धड़ाधड़

रायपुर  छत्तीसगढ़ में एसीबी और ईओडब्ल्यू की टीम ने पूर्व मंत्री कवासी लखमा और उनके करीबियों के ठिकानों पर छापेमारी की है. प्रदेश में हुए शराब घोटाले को लेकर एसीबी और ईओडल्ब्यू की टीम ने पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा और उनके करीबियों के ठिकाने पर फिर छापा मारा. शनिवार सुबह ईओडलब्यू की टीम ने रायपुर, जगदलपुर, सुकमा, तोंगपाल, दंतेवाड़ा, अंबिकापुर सहित करीब 15 ठिकानों पर दबिश दी है. लगभग 100 अफसरों की अलग-अलग टीमों ने छापा मारा. छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा, सुकमा और अंबिकापुर में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) और इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (EOW) की संयुक्त टीमों ने शनिवार को छापा मारा. यह कार्रवाई शराब घोटाले और आय से अधिक संपत्ति के मामलों को लेकर की गई. सूत्रों के मुताबिक, दंतेवाड़ा जिले के तोंगपाल और सुकमा में पूर्व मंत्री कवासी लखमा से जुड़े लोगों के ठिकानों पर छापे मारे गए. कांग्रेस नेता राजकुमार तांबों के ठिकानों पर छापा दंतेवाड़ा में कांग्रेसी नेता राजकुमार तांबों के निवास पर ACB और EOW की टीमें सुबह पहुंचीं. तांबों को कवासी लखमा का करीबी और गरीबों का नेता माना जाता है. सूत्रों का कहना है कि टीमें महत्वपूर्ण दस्तावेजों के आधार पर कार्रवाई कर रही हैं. शराब घोटाले से संबंधित सबूतों की तलाश में उनके घर और कार्यालयों की गहन जांच चल रही है. वहीं, अंबिकापुर में प्रतिष्ठित व्यवसायी अशोक अग्रवाल के घर ACB की टीम ने छापा मारा. अग्रवाल ध्वजाराम रामकुमार व्यवसायिक प्रतिष्ठान के संचालक हैं और शासकीय विभागों में सामग्री आपूर्ति का काम करते हैं. सकुमा जिले में 4 ठिकानों पर छापे कोतवाली थाना क्षेत्र के बसंतलाल गली स्थित उनके निवास पर सुबह तीन गाड़ियों में पहुंची ACB की टीम ने जांच शुरू की. सुकमा जिला मुख्यालय में भी ACB ने एक हार्डवेयर दुकानदार के घर छापेमारी की. आय से अधिक संपत्ति के मामले में यह कार्रवाई की जा रही है. जिला मुख्यालय में चार अलग-अलग स्थानों पर एक साथ छापे मारे गए. ACB और EOW की इस कार्रवाई से क्षेत्र में हड़कंप मचा है. सभी स्थानों पर जांच जारी है और महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए जा रहे हैं. अधिकारियों ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है. रायपुर के देवेंद्र नगर के शहीद हेमू कलाणी वार्ड स्थित जी नागेश्वर राव और जी श्रीनिवास राव के घर भी छापा पड़ा है। श्रीनिवास कांग्रेस से पार्षद प्रत्याशी थे। नागेश्वर राव कवासी लखमा और उनके बेटे हरीश लखमा के करीबी हैं। सुबह 2 गाड़ियों में करीब 8-10 अधिकारियों ने दबिश दी है। EOW-ACB की टीम दस्तावेज खंगाल रही है। वहीं दंतेवाड़ा में कांग्रेस नेता राजकुमार तामो के घर ACB-EOW ने दबिश दी है।राजकुमार तामो को कवासी लखमा का करीबी माना जाता है। सुकमा जिले में 4 स्थानों पर छापेमारी हुई है। इसमें जिला मुख्यालय के 3 और तोंगपाल के 1 स्थान पर कार्रवाई जारी है। अंबिकापुर में कपड़ा व्यवसाय से जुड़ी फर्म के खिलाफ रेड इनमें हार्डवेयर और पेट्रोल पंप कारोबारी भी शामिल हैं। ये सभी व्यक्ति भी कवासी लखमा के नजदीकी बताए जा रहे हैं। वहीं अंबिकापुर में भी कार्रवाई की गई है। यहां ACB-EOW की टीम ने कपड़ा व्यवसाय से जुड़ी फर्म धजाराम-विनोद कुमार के संचालकों के ठिकानों पर छापा मारा है। इस फर्म का नाम पहले भी चर्चित डीएमएफ (DMF) घोटाले में आ चुका है। इनके खिलाफ एफआईआर दर्ज है। पहले भी ईडी (ED) और आयकर विभाग (IT) इन व्यापारियों पर कार्रवाई कर चुके हैं। फर्म के संचालक मुकेश अग्रवाल और विनोद अग्रवाल हैं, जिनके घरों पर शनिवार सुबह छापेमारी शुरू हुई। घोटाले में और बड़े नाम सामने आ सकते हैं छापेमारी के दौरान दस्तावेजों और लेन-देन से जुड़ी कई अहम जानकारियां जुटाई जा रही हैं। फिलहाल ACB-EOW की टीमें जांच में जुटी हैं। पूरे नेटवर्क को खंगालने का काम चल रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस घोटाले में और बड़े नाम सामने आ सकते हैं। क्या है शराब घोटाला ? छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में ED जांच कर रही है। ED ने ACB में FIR दर्ज कराई है। दर्ज FIR में 2 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा के घोटाले की बात कही गई है। ED ने अपनी जांच में पाया कि तत्कालीन भूपेश सरकार के कार्यकाल में IAS अफसर अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के एमडी AP त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के सिंडिकेट के जरिए घोटाले को अंजाम दिया गया था। ED की ओर से दर्ज कराई गई FIR की जांच ACB कर रही है। ACB से मिली जानकारी के अनुसार साल 2019 से 2022 तक सरकारी शराब दुकानों से अवैध शराब डुप्लीकेट होलोग्राम लगाकर बेची गई। इससे शासन को करोड़ों के राजस्व का नुकसान हुआ है। ED का आरोप- लखमा सिंडिकेट का अहम हिस्सा थे ED का आरोप है कि पूर्व मंत्री और मौजूदा विधायक कवासी लखमा सिंडिकेट के अहम हिस्सा थे। लखमा के निर्देश पर ही सिंडिकेट काम करता था। इनसे शराब सिंडिकेट को मदद मिलती थी।वही शराब नीति बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे छत्तीसगढ़ में FL-10 लाइसेंस की शुरुआत हुई। वही ED का दावा है कि लखमा को आबकारी विभाग में हो रही गड़बड़ियों की जानकारी थी, लेकिन उन्होंने उसे रोकने के लिए कुछ नहीं किया। कमिशन के पैसे से बेटे का घर बना, कांग्रेस भवन निर्माण भी ED के वकील सौरभ पांडेय ने बताया कि, 3 साल शराब घोटाला चला। लखमा को हर महीने 2 करोड़ रुपए मिलते थे। इस दौरान 36 महीने में लखमा को 72 करोड़ रुपए मिले। ये राशि उनके बेटे हरीश कवासी के घर के निर्माण और कांग्रेस भवन सुकमा के निर्माण में लगे। ईडी ने कहा कि छत्तीसगढ़ में शराब घोटाले से सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ है। शराब सिंडिकेट के लोगों की जेबों में 2,100 करोड़ रुपए से अधिक की अवैध कमाई भरी गई। घोटाले की रकम 2100 करोड़ से ज्यादा लखमा के खिलाफ एक्शन को लेकर निदेशालय की ओर से कहा गया कि जांच में पहले पता चला था कि अनवर ढेबर, अनिल टुटेजा और अन्य लोगों का शराब सिंडिकेट छत्तीसगढ़ राज्य में काम कर रहा था। इस घोटाले की रकम 2100 करोड़ रुपए से ज्यादा है। 2019 से 2022 के बीच चले शराब घोटाले में ED के मुताबिक ऐसे होती थी अवैध कमाई।     पार्ट-A कमीशन: CSMCL … Read more

प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक परिदृश्य बदल दिया है, देश के नागरिक एकजुट हैं:CM यादव

मध्यप्रदेश, गुजरात की तर्ज पर कर रहा है उद्योगों का तेजी से विकास : मुख्यमंत्री डॉ. यादव भारत टैक्स 2026 से पहले मेटेक्सिल के विशेष-सत्र में उद्योग प्रतिनिधियों की सहभागिता आरआईसी और जीआईएस भोपाल के बाद अब विषयवार उद्योग संवर्धन कार्यक्रम प्राथमिकता प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक परिदृश्य बदल दिया है, देश के नागरिक एकजुट हैं इंदौर मेट्रोपोलिटिन एरिया के विकास का संकल्प कारखाने हमारे हैं मंदिर भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश देश के मध्य में होने, श्रमिकों, सहयोगी नागरिकों, सड़क और अन्य आवागमन सुविधाओं, प्रशासनिक प्रक्रियाओं की सरलता के कारण औद्योगिक निवेश के लिए सर्वाधिक अनुकूल राज्य है। गुजरात हमारे लिए आदर्श है। मध्यप्रदेश भी गुजरात की तर्ज पर उद्योगों के विकास का कार्य कर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हाल ही में बेंगलुरू में भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (बीईएमएल) द्वारा मध्यप्रदेश में रायसेन जिले में मेट्रो और रेल कोच निर्माण इकाई की स्थापना के लिए की गई पहल पर त्वरित कार्रवाई कर कुल 60.063 हेक्टेयर भूमि आवंटन का निर्णय बिना विलंब के लिया गया। यह प्रदेश की उद्योग संवर्धन और निवेश वृद्धि की पारदर्शी नीति का नवीनतम उदाहरण है। मध्यप्रदेश उद्योगों के अनुकूल नीतियों को लागू कर उस स्वस्थ प्रतिस्पर्धा में शामिल है, जिसके लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी प्रयासरत हैं। उन्होंने हाल ही में पाकिस्तान को मुँहतोड़ जवाब देकर सशक्त नेतृत्व की बेहतरीन मिसाल पेश की है। ‘मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार की शाम इंदौर में टेक्सटाइल एक्सपो को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों से देश का समूचा परिदृश्य बदल गया है। उद्योगों के विकास के साथ धन के अर्जन के साथ मानवीय पक्ष को महत्व देने की भारतीय संस्कृति रही है। कोरोना के कठिन समय में प्रधानमंत्री मोदी ने अनेक देशों में लोगों का जीवन बचाने का कार्य किया। यह भारत के इतिहास का गौरवशाली पृष्ठ है। आपरेशन सिंदूर के क्रियान्वयन में प्रधानमंत्री मोदी का नेतृत्व और भारत की सेनाओं का साहस हम सभी के लिए हर्ष और गर्व का विषय है। एक वस्त्र की बुनाई के लिए जिस तरह एक-एक धागे का अपना महत्व है, उसी तरह संकट के समय में भारत के सभी नागरिक भेदभाव से रहित होकर एकजुटता का परिचय देने में आगे रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कारखाने हमारे लिए मंदिर की तरह हैं। देवालय और मंदिर जिस तरह श्रद्धा का केंद्र होते हैं, उसी तरह कारखाने बड़े वर्ग को लाभान्वित करने के पवित्र भाव के साथ संचालित होते हैं। शासन द्वारा लागू अनुकूल नीतियों और सुशासन का लाभ उद्योगों को दिलाने के लिये मध्यप्रदेश में विशेष अभियान चल रहा है। मध्यप्रदेश में जो उद्योगपति आते हैं वे यहीं के होकर रह जाते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गत वर्ष मध्यप्रदेश के सभी संभागों में रीजनल इन्डस्ट्री कॉन्क्लेव आयोजित की गईं। इसके बाद इस वर्ष फरवरी में भोपाल में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट का सफल आयोजन हुआ। इन प्रयासों से 30 लाख हजार करोड़ से अधिक का निवेश लाने में सफलता मिली। अब विभिन्न सेक्टर को ध्यान में रखकर उद्योग संवर्धन कार्यक्रम हो रहे हैं। यह क्रम निरंतर चलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इंदौर स्वच्छता, स्वाद और सुशासन की नगरी है। प्रदेश में टेक्सटाइल क्षेत्र में नया इतिहास लिखा जाएगा। इंदौर इसका प्रमुख केंद्र होगा। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि इंदौर, उज्जैन ,देवास, मक्सी आदि क्षेत्रों को मिलाकर इंदौर मेट्रोपोलिटिन एरिया विकसित किया जाएगा। अधोसंरचना विकास से नागरिक सुविधाएं बढ़ेंगी। प्रदेश के 2 बड़े महानगरीय क्षेत्रों में से एक, इंदौर क्षेत्र के समग्र विकास का संकल्प राज्य सरकार साकार करेगी। राज्यों के मध्य विवाद हो रहे समाप्त मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पानी, भूमि और फसल के मुद्दों पर दक्षिण भारत से लेकर अन्य राज्यों तक विवाद रहे हैं। लेकिन, अब प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में इनका समाधान हो रहा है। मध्यप्रदेश ने वर्षों से लंबित पार्वती-कालीसिंध-चम्बल (पीकेसी) परियोजना से जुड़ी असहमतियों को राजस्थान के साथ संवाद कर समाप्त किया है। राष्ट्र के विकास के लिए प्रधानमंत्री मोदी राज्यों के परस्पर विवादों को समाप्त करने का ऐतिहासिक कार्य कर रहे हैं। प्रमुख सचिव, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन राघवेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि प्रदेश में निवेश के लिए एक समर्थ, अनुकूल और प्रतिस्पर्धी औद्योगिक वातावरण विकसित किया गया है। राज्य न केवल पॉवर सरप्लस है, बल्कि कुल विद्युत आपूर्ति में 30 प्रतिशत हरित ऊर्जा का योगदान है। टेक्सटाइल क्षेत्र के लिए विशेष अवस्थापना सुविधाएं विकसित की गई हैं, जिनमें पानी की प्रचुर उपलब्धता, SCADA-नियंत्रित यूटिलिटीज, ज़ीरो लिक्विड डिस्चार्ज (ZLD) युक्त कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP), 220 केवी का सब स्टेशन तथा 20 एमएलडी पानी की आपूर्ति शामिल हैं। धार में प्रधानमंत्री मेगा इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल रीजन एंड अपैरल (PM MITRA) पार्क देश का सबसे लागत-कुशल और उच्चतम रिटर्न देने वाला इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल पार्क बनने की दिशा में अग्रसर है, जहाँ 100 प्रतिशत भूमि अधिग्रहित कर ली गई है। प्रमुख सचिव सिंह ने बताया कि मध्यप्रदेश देश का एकमात्र ऐसा राज्य है जहाँ 4 औद्योगिक कॉरिडोर संचालित हो रहे हैं और एक प्रस्तावित है। छह इनलैंड कंटेनर डिपो (ICD) तथा राष्ट्रीय स्तरीय संस्थान जैसे NIFT भोपाल, NID भोपाल, IITDM जबलपुर और ग्लोबल स्किल्स पार्क की उपस्थिति से प्रदेश एक सशक्त और आधुनिक मूल्य श्रृंखला विकसित करने में सक्षम है। MSME विकास नीति 2025 के अंतर्गत निर्यात और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने के लिए भी व्यापक सहायता प्रावधान किए गए हैं। सिंह ने कहा कि मध्यप्रदेश में निवेश का बेहतर वातावरण है। यहां कहीं भी किसी बात के लिए उद्योगपतियों को परेशान नहीं होना पड़ेगा। यहां पर सभी अनुमतियों को लेख सेवा केंद्र के माध्यम से नियत समय सीमा में दिए जाने का प्रावधान किया गया है। यहां 30 दिन में उद्योग को प्रारंभ कर सकते हैं साथ ही टैक्सटाइल एंड गारमेंट्स सेक्टर में विशेष अतिरिक्त इंसेंटिव्स दिए जाते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के औद्योगिक योगदान और पर्यावरणीय दृष्टिकोण को सम्मानित करते हुए मेटेक्सिल के चेयरमैन शालीन तोशनीवाल ने स्मृति चिन्ह एवं अंगवस्त्र भेंट किए। साथ ही 25 पौधे महाराष्ट्र में रोपण कर उन्हें जीवित रखने का संकल्प-पत्र भी सौंपा।” “एक्सपोर्ट पोटेंशियल मैन मेड फाइबर टेक्सटाईल्स, होम टेक्सटाईल्स एण्ड टेक्निकल टेक्सटाईल मध्यप्रदेश” सेमिनार मैटेक्सिल के एक्जिक्यूटिव डायरेक्टर ए. रवि … Read more

मुख्यमंत्री रेनेसां यूनिवर्सिटी के ‘कृष्ण तत्व’ कार्यक्रम में हुए शामिल

भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षाएं जीवन के हर कदम पर हमारी मार्गदर्शक :मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री ने श्रीकृष्ण के जीवन-दर्शन को जोड़ा वर्तमान संदर्भों से मुख्यमंत्री ने छात्रों से किया संवाद मुख्यमंत्री रेनेसां यूनिवर्सिटी के ‘कृष्ण तत्व’ कार्यक्रम में हुए शामिल भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर की रेनेसां यूनिवर्सिटी में ‘कृष्ण तत्व’ विषयक सेमिनार में संबोधित करते हुए कहा कि श्रीकृष्ण का मटकी फोड़ना बाललीला नहीं, अत्याचारियों की रसद रोकने की रणनीति थी। मस्तक पर मोर-पंख धारण करना और प्रकृति से प्रेम करना उनके मानवीय पक्ष को दर्शाता है। सुदामा से मित्रता और कंस वध के बाद उग्रसेन को सिंहासन सौंपना न्याय और निष्ठा का प्रतीक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने श्रीकृष्ण के कर्मयोग, समत्व और न्याय के सिद्धांतों पर विशेष बल देते हुए कहा कि श्रीकृष्ण का संदेश है कि छोटे से छोटा काम भी महत्व रखता है। उन्होंने जीवन भर अन्याय के विरुद्ध संघर्ष किया और समानता का अधिकार सुनिश्चित किया। यही सिद्धांत हमारी शासन-नीति की प्रेरणा भी हैं। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने विश्वविद्यालय परिसर स्थित गार्डन में हुए इस भव्य आयोजन में भगवान श्रीकृष्ण के जीवन, दर्शन और उपदेशों पर छात्रों को संबोधित करते हुए श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़ी घटनाओं को वर्तमान सामाजिक संदर्भों से जोड़कर उनकी प्रासंगिकता समझाई। इंदौर की रेनेसां यूनिवर्सिटी में बुधवार रात आयोजित ‘कृष्ण तत्व’ विषयक सेमिनार में विश्वविद्यालय परिसर स्थित गार्डन में हुए इस भव्य आयोजन में भगवान श्रीकृष्ण के जीवन, दर्शन और उपदेशों पर आज के संदर्भ में संवाद हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को भारतीय संस्कृति और मूल्यों से जोड़ना था। शिक्षा और रोजगार पर विशेष बल मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने श्रीकृष्ण की शिक्षाओं से प्रेरित होकर शिक्षा नीति में ऐसे बदलाव किए हैं जो छात्रों को केवल नौकरी की ओर नहीं, बल्कि स्वरोजगार और उद्यमिता की ओर भी प्रेरित करें। उन्होंने बताया कि रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव से राज्य में करोड़ों का निवेश हुआ है। इससे लाखों रोजगार के अवसर सृजित हो रहे हैं। विकास परियोजनाओं की जानकारी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पार्वती-कालीसिंध-चंबल (पीकेसी) और केन-बेतवा जैसी प्रमुख परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य सरकार हर क्षेत्र में संतुलित विकास के लिए प्रतिबद्ध है। धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने छात्रों से किया संवाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने छात्रों से संवाद कर उनके विचार सुने। छात्रों को उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से प्रेरणा लेकर जीवन में आगे बढ़ने की सीख दी। कार्यक्रम में जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, सांसद शंकर लालवानी विधायक सर्व गोलू शुक्ला , रमेश मेंदोला,मनोज पटेल, कुलाधिपति स्वप्निल कोठारी, सुमित मिश्रा मौजूद थे।  

मुख्यमंत्री साय की बड़ी घोषणाएं: झुरानदी को मिले स्कूल भवन, सीसी सड़क और दो उच्चस्तरीय पुल

रायपुर : झुरानदी में बिना पूर्व सूचना पहुंचे मुख्यमंत्री, चौपाल लगाकर सुनीं ग्रामीणों की समस्याएं झुरानदी गांव में बरगद पेड़ की छांव में लगी मुख्यमंत्री की चौपाल मुख्यमंत्री साय की बड़ी घोषणाएं: झुरानदी को मिले स्कूल भवन, सीसी सड़क और दो उच्चस्तरीय पुल मुख्यमंत्री ने झुरानदी में 5 करोड़ से अधिक के विकास कार्यों की घोषणा रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सहजता और सरलता से झुरानदी गांव के ग्रामीण अभिभूत हो उठे। तपती दोपहरी में मुख्यमंत्री का हेलीकॉप्टर अचानक खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के ग्राम झुरानदी में उतरा। बिना किसी पूर्व सूचना के मुख्यमंत्री को अपने बीच पाकर ग्रामीणों को हर्ष मिश्रित आश्चर्य हुआ। मुख्यमंत्री ने गांव के बरगद पेड़ की छांव में चौपाल लगाई और बेहद आत्मीय अंदाज में ग्रामीणों से संवाद किया। देखते ही देखते पूरा गांव उमड़ पड़ा और माहौल उत्सव जैसा बन गया। मुख्यमंत्री के साथ उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री साय ने ग्रामीणों से बातचीत की शुरुआत करते हुए कहा कि मैंने बस्तर, सरगुजा के अनेकों जिले में और जांजगीर, चांपा, कबीरधाम, बेमेतरा जिले जैसे जिलों के सुदूर गांवों तक जाकर जनचौपाल की है। उन्होंने कहा कि आज मानपुर-मोहला-अंबागढ़ चौकी जिले से होकर आपके इस गांव झुरानदी में सीधे पहुंचा हूं। हमारी सरकार गांव, गरीब और किसान की सरकार है। हम हर घर तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुंचाना चाहते हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ग्रामीणों की मांगों और समस्याओं पर त्वरित कार्रवाई की जाए तथा योजनाओं का लाभ हर पात्र हितग्राही तक समय पर पहुंचे। मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों की मांग पर झुरानदी गांव में हाई स्कूल एवं हायर सेकेंडरी स्कूल भवन निर्माण की घोषणा की। उन्होंने ग्राम में सीसी सड़क निर्माण के लिए 20 लाख रूपए, दो उच्च स्तरीय पुल निर्माण- गंडई से कृतबाधा पहुंच मार्ग पर उच्च स्तरीय पुल निर्माण के लिए 2 करोड़ 54 लाख रूपए और गंडई कर्रानाला पहुँचमार्ग पर लिमो में उच्च स्तरीय पुल निर्माण के लिए 2 करोड 52 लाख रूपए और ग्रामीणों की मांग पर ग्राम पंचायत भोरमपुर में नए पंचायत भवन निर्माण की घोषणा की। मुख्यमंत्री साय ने गांव के बीच बाजार पड़ाव में बरगद पेड़ की छांव में जनचौपाल लगाई और वहां उपस्थित ग्रामीणों से छत्तीसगढ़ी भाषा में ही संवाद की शुरुआत की, जिससे ग्रामीणों के साथ भावनात्मक जुड़ाव और गहराता गया। उन्होंने ग्रामीणों से उनकी समस्याएं, सुझाव और योजनाओं के क्रियान्वयन से जुड़े अनुभव भी सुने। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री साय के सहज, सरल, सादगीपूर्ण और विनम्र व्यवहार की खुले दिल से सराहना की। बुजुर्गों ने कहा कि वर्षों में पहली बार ऐसा अवसर आया है, जब प्रदेश के मुखिया सीधे उनके गांव में पहुंचे। किसानों और युवाओं ने मुख्यमंत्री की माटी से जुड़ी शैली को नज़दीक से देखा और महसूस किया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस मौके पर सुशासन तिहार के उद्देश्यों को स्पष्ट करते हुए कहा कि इस अभियान में मुख्यमंत्री से लेकर मंत्री, सांसद, विधायक और स्थानीय जनप्रतिनिधि सभी सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं और जमीनी हकीकत का मूल्यांकन कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि वे स्वयं बस्तर से लेकर सरगुजा तक अनेक गांवों का दौरा कर चुके हैं, और योजनाओं की प्रगति की प्रत्यक्ष जानकारी ले रहे हैं। मुख्यमंत्री ने गांव के बाजार पड़ाव स्थित पवनपुत्र हनुमान मंदिर में पूजा अर्चना कर प्रदेशवासियों की खुशहाली की कामना की। इस मौके पर पूर्व विधायक कोमल जंघेल, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती प्रियंका खम्हन ताम्रकर सहित अनेक जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे। झुरानदी गांव में 180 पीएम आवास पूर्ण खैरागढ़ विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत झुरानदी की जनसंख्या 1935 है। यह गांव लोधी एवं वर्मा समाज की बहुलता है। गांव में स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली एवं पेयजल की समुचित व्यवस्था उपलब्ध है। आंगनबाड़ी केंद्र भी संचालित है। गांव में प्राथमिक शाला, माध्यमिक शाला और हाई स्कूल की सुविधा उपलब्ध है, जिससे बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल रही है। ग्राम पंचायत में प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत कुल 217 आवास स्वीकृत हुए हैं, जिनमें से 180 पूर्ण हो चुके हैं तथा 37 निर्माणाधीन हैं। महतारी वंदन योजना से 616 महिलाएं लाभान्वित हो रही हैं। जल जीवन मिशन के तहत जल आपूर्ति की जा रही है। ग्रामीणों को मनरेगा के अंतर्गत रोजगार मिल रहा है। गांव में 17 स्वसहायता समूह की महिलाएं आजीविका गतिविधियों से जुड़ी है।

हम निरंतर जनता के बीच पहुंचकर योजनाओं के प्रभाव और लाभ का आकलन कर रहे हैं:मुख्यमंत्री देव साय

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय  मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के मानपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम सीतागांव में आयोजित समाधान शिविर में शामिल हुए। इस अवसर पर उनके साथ उप मुख्यमंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री श्री विजय शर्मा तथा मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध सिंह भी उपस्थित थे। सुशासन तिहार के तृतीय चरण अंतर्गत आज के समाधान शिविर में क्षेत्र की 8 ग्राम पंचायतों—सीतागांव, मदनवाड़ा, कारेकट्टा, हलांजुर, हुरेली, कंदाडी, कोहका, हलोरा—को क्लस्टर के रूप में शामिल किया गया था। मुख्यमंत्री श्री साय ने इन पंचायतों के हितग्राहियों से सीधा संवाद कर शासन की योजनाओं के जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन की जानकारी ली और उनकी समस्याएं सुनीं। मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने संबोधन में कहा कि पूरे प्रदेश में सुशासन तिहार 2025 मनाया जा रहा है। हमारी सरकार को कार्यभार संभाले डेढ़ वर्ष हुआ है और इस दौरान हम निरंतर जनता के बीच पहुंचकर योजनाओं के प्रभाव और लाभ का आकलन कर रहे हैं। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह सरकार पारदर्शिता और जनभागीदारी की भावना से कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य में सरकार बनने के बाद 18 लाख प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के लिए 15 हज़ार विशेष मकानों की स्वीकृति दी गई है। महतारी वंदन योजना का लाभ सभी पात्र बहनों को दिया जा रहा है।  उन्होंने कहा कि सरकार ने 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी की है। जमीन की रजिस्ट्री के साथ अब नामांतरण की प्रक्रिया भी स्वतः पूर्ण होगी। हक त्याग अब केवल 500 रुपये में हो रहा है। प्रदेश के 1460 ग्राम पंचायतों में अटल डिजिटल सेवा केंद्र स्थापित किए गए हैं, जिन्हें आगामी एक वर्ष में सभी ग्राम पंचायतों तक विस्तारित किया जाएगा। मुख्यमंत्री श्री साय ने बताया कि नया रायपुर में स्थापित आदिवासी संग्रहालय जनजातीय संस्कृति के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। राज्य सरकार नक्सलवाद को समाप्त करने के लिए लगातार प्रयासरत है और मार्च 2026 तक इसे पूर्ण रूप से समाप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने सीतागांव उप स्वास्थ्य केंद्र को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के रूप में उन्नयन करने, मोहला में बस स्टैंड और छात्रावास का निर्माण करने, सीतापुर में हाई स्कूल का हायर सेकेंडरी स्कूल में उन्नयन करने और अंबागढ़ चौकी क्षेत्र में 132 केवी सब स्टेशन की स्थापना की घोषणा की। मुख्यमंत्री श्री साय ने पात्र हितग्राहियों को हितग्राहीमूलक  सामग्री का वितरण कर लाभान्वित किया । इसमें मत्स्य विभाग द्वारा जाल का, खाद्य विभाग द्वारा राशन कार्ड का, प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत ‘खुशियों की चाबी’ का वितरण किया गया। शिविर में स्वच्छ भारत मिशन अंतर्गत हितग्राहियों को लाभ दिया गया तथा स्वच्छता दीदियों को सम्मानित किया गया। पेंशन योजना के हितग्राही भी लाभान्वित हुए। मुख्यमंत्री श्री साय ने क्षेत्र के मेधावी छात्र-छात्राओं को भी पुरस्कृत किया। उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने समाधान शिविर में लोगों से संवाद करते हुए कहा कि सरकार लोगों की समस्याओं के निराकरण और उनकी मांगों को पूरा करने के लिए गंभीरता से काम कर रही है। इसके लिए एक महीने पहले से आवेदन लेकर परीक्षण किया गया और अब लोगों को शिविरों के आयोजन के माध्यम से लाभ प्रदान किया जा रहा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय स्वयं समाधान शिविरों में पहुंचकर मैदानी स्तर पर समस्याओं के समाधान की पड़ताल कर रहे हैं। उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने बताया कि रजिस्ट्री, नामांतरण और हक त्याग की प्रक्रिया में क्रांतिकारी सुधार किए गए हैं। अब लोगों को कागज़ लेकर इधर-उधर नहीं भटकना पड़ेगा। रजिस्ट्री होते ही नामांतरण स्वमेव हो जाएगा। महतारी वंदन योजना और प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से सरकार ने महिलाओं और गरीबों की चिंता की है। केंद्र और राज्य सरकार के साझा प्रयासों से नक्सलवाद को समाप्त करने की दिशा में बड़ी कामयाबी मिल रही है। इस अवसर पर विभिन्न जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।

नीरज चोपड़ा ने पार किया 90 मीटर का मार्क बोले अब मेरा अगला लक्ष्य..

दोहा  भारत के स्टार जैवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा शुक्रवार (16 मई) को दोहा डायमंड लीग 2025 में उतरे. दोहा डायमंड लीग में नीरज ने मेन्स जैवलिन थ्रो स्पर्धा में दूसरा स्थान हासिल किया. नीरज ने तीसरे प्रयास में 90.23 मीटर का बेस्ट थ्रो किया. जर्मनी के जूलियन वेबर 91.06 मीटर के थ्रो के साथ पहले नंबर पर रहे. यह थ्रो वेबर ने छठे प्रयास में किया था. नीरज के अलावा उनके हमवतन किशोर जेना भी मेन्स जैवलिन थ्रो सपर्धा में भाग ले रहे थे, जो आठवें नंबर पर रहे. बता दें कि डायमंड लीग के एक लेग में पहले स्थान पर रहने के लिए एथलीट को 8 अंक मिलते हैं. जबकि दूसरे स्थान पर रहने के लिए 7, तीसरे स्थान पर रहने के लिए 6 और चौथे स्थान पर रहने के लिए 5 अंक दिए जाते हैं. यानी नीरज चोपड़ा को 7, जबकि वेबर को 8 अंक मिले. डायमंड लीग 2025 का समापन 27 और 28 सितंबर को ज्यूरिख में डायमंड लीग फाइनल के साथ होना है. डायमंड लीग फाइनल के विजेता को डायमंड ट्रॉफी मिलती है.  नीरज चोपड़ा के कीर्तिमान की तारीफ, बोले- भारत को गर्व है नीरज चोपड़ा ने शुक्रवार (16 मई) को दोहा डायमंड लीग 2025 में 90 मीटर का बैर‍ियर पार कर दिया. जैवल‍िन थ्रो इवेंट में दूसरा स्थान हास‍िल करने के बावजूद नीरज ने इत‍िहास रच द‍िया. नीरज की इस उपलब्धि पर प्रधानमंत्री मोदी ने उनकी जमकर तारीफ की. पीएम मोदी ने नीरज की मेहनत और उनके अनुशासन का भी ज‍िक्र अपने पोस्ट में क‍िया. नीरज ने पहली बार पार किया 90 मीटर का बैरियर दोहा डायमंड लीग में नीरज चोपड़ा का पहला अटेम्प शानदार रहा और उन्होंने 88.44 मीटर का थ्रो किया. वहीं नीरज का दूसरा अटेम्प फाउल रहा. नीरज का तीसरा अटेम्प 90.23 मीटर का रहा. पहली बार नीरज ने अपने करियर में 90 मीटर का बैरियर पार किया. देखा जाए तो पहली बार किसी भारतीय खिलाड़ी ने 90 मीटर की दूरी पारी की है. यानी नीरज ने जैवलिन थ्रो में नेशनल रिकॉर्ड बना दिया. नीरज चोपड़ा का चौथा थ्रो उतना अच्छा नहीं रहा और इसमें उन्हें 80.56 मीटर की दूरी मिली. नीरज का पांचवां प्रयास फाउल रहा. जबकि छठे प्रयास में उन्होंने 88.20 मीटर की दूरी हासिल की. दोहा डायमंड लीग में नीरज चोपड़ा के सामने एंडरसन पीटर्स (ग्रेनाडा), जैकब वाडलेच (चेक गणराज्य), जूलियन वेबर और मैक्स डेहनिंग (दोनों जर्मनी), जूलियस येगो (केन्या), रोड्रिक डीन (जापान) जैसे खिलाड़ियों की चुनौती थी. पेरिस ओलंपिक 2024 के स्वर्ण पदक विजेता पाकिस्तान के अरशद नदीम ने दोहा डायमंड लीग में भाग नहीं लिया. इससे पहले नीरज चोपड़ा का सर्वश्रेष्ठ निजी प्रदर्शन 89.94 मीटर था. यह थ्रो उन्होंने साल 2022 में स्टॉकहोम डायमंड लीग में किया था. नीरज चोपड़ा ने सबसे पहले 2018 में दोहा डायमंड लीग में भाग लिया था और चौथे स्थान पर रहे थे. उन्होंने 2023 में यहां पहला स्थान हासिल किया, जबकि 2024 में वो दूसरे स्थान पर रहे. चोपड़ा ने पार किया 90 मीटर का मार्क बोले अब मेरा अगला लक्ष्य.. आज से ठीक 9 महीने 7 दिन पहले 9 अगस्त 2024 को नीरज ने पेरिस ओलिंपिक में सिल्वर जीतने के बाद कहा था, ‘आज मेरा दिन नहीं था। मुझे लग रहा था कि आज वो दिन है, जब 90 मीटर का थ्रो आएगा, लेकिन भगवान को कुछ और मंजूर था।’ 9 महीने 7 दिन में नीरज ने 90 मीटर की बाधा कैसे पार कर ली क्यों खास है 90 मीटर मार्क? जेवलिन में अब तक के इतिहास में दुनिया भर 25 जेवलिन थ्रोअर ही 90 मीटर भाला फेंक सके हैं। एशिया में ऐसा करने वाले 3 प्लेयर ही हैं। इनमें नीरज के अलावा, पाकिस्तान के अरशद नदीम और चीनी ताइपे चाओ-त्सुन चेंग शामिल हैं। 2024 ओलिंपिक से पहले चेंग ही यह कारनामा कर सके थे। 1. वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने वाले जान जेलेजनी से ट्रेनिंग ली नीरज ने वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर जान जेलेजनी से ट्रेनिंग लेने का फैसला लिया। उन्होंने नवंबर 2024 में चेक गणराज्य के जेलेजनी को अपना कोच बनाया। दोनों ने फरवरी महीने में कोचिंग शुरू की। जेलेजनी के नाम भाला फेंक का वर्ल्ड रिकॉर्ड है, उन्होंने 1996 में 98.48 मीटर भाला फेंका था। वे तीन ओलिंपिक में गोल्ड मेडल जीत चुके हैं। जर्मन बायोमैकेनिक्स विशेषज्ञ डॉ क्लॉस बार्टोनिट्ज की कोचिंग में नीरज ने 2020 में टोक्यो ओलिंपिक में गोल्ड मेडल जीता। उसके बाद पेरिस में सिल्वर मेडल भी हासिल किया। इस बीच नीरज डायमंड लीग, वर्ल्ड चैंपियनशिप जैसे टूर्नामेंट में मेडल जीतते रहे, लेकिन 90 मीटर मार्क हासिल नहीं कर सके। 2. नए कोच ने गलतियां बताईं, तकनीकी बदलाव किए नीरज ने एक इंटरव्यू में कहा था कि कोच जेलेजनी ने पेरिस ओलिंपिक के वीडियो देखकर उन्हें 2 कमियां बताई थीं। उन्होंने नीरज की तकनीक में कुछ बदलाव भी किए थे, जिनका जिक्र नीरज ने एक इंटरव्यू में किया था। 3. जेलेजनी के बताए डॉक्टर से इलाज करवाया जेलेजनी से जुड़ने के बाद नीरज ने अपनी कमर की चोट के लिए जेलेजनी के बताए गए डॉक्टर से सलाह ली। नीरज ने एक इंटरव्यू में कहा था, ‘मैं अपनी चोट के कारण अपनी तकनीक में 100 प्रतिशत नहीं दे पा रहा था। मैं प्राग में जेलेजनी के डॉक्टर के पास गया और उन्होंने कुछ एक्सरसाइज बताई।’ नीरज काफी समय से कमर की चोट से परेशान थे। उन्होंने माना कि वे चोट की वजह से पेरिस ओलिंपिक में अपना बेस्ट प्रदर्शन नहीं कर पाए। सिल्वर जीतने के बाद नीरज ने कहा था- ‘मुझे लगता है कि मैं फाइनल में अधिक दूरी तक थ्रो कर सकता था। भले ही मानसिक रूप से मैं तैयार था, लेकिन मेरा शरीर मेरी कमर की चोट के बढ़ने के डर की वजह से पीछे हट रहा था। मैं ट्रैक पर रनअप के साथ संघर्ष कर रहा था, जिसके कारण मेरे कई अटेम्ट फाउल रहे।’ 4. ट्रेनिंग के लिए जल्दबाजी में शादी, रिसेप्सन भी टाला नीरज चोपड़ा को अपनी ट्रेनिंग की शुरुआत करने के लिए जल्दबाजी में शादी करनी पड़ी। इतना ही नहीं, रिसेप्शन को भी टालना पड़ा। नीरज ने अपनी सीक्रेट शादी के सवाल पर एक चैनल से कहा था- ‘मुझे ट्रेनिंग करनी थी, इस वजह से जल्दी में शादी की।’ नीरज ने कहा … Read more

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा, मंदिरों में सिर्फ ब्राह्मण ही पुजारी क्यों?

भोपाल मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा है। याचिका में सवाल उठाया गया है कि राज्य सरकार द्वारा संचालित धार्मिक स्थलों में पुजारी के रूप में केवल ब्राह्मणों को ही क्यों मौका दिया जाता है। याचिका अनुसूचित जाति-जन जाति अधिकारी कर्मचारी संघ की ओर से दायर की गई है। लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट मंगलवार को राज्य सरकार द्वारा संचालित किए जाने वाले धार्मिक स्थलों से जुड़ी एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में सवाल उठाया गया है कि इन धार्मिक स्थलों में पुजारी के रूप में नियुक्ति के लिए केवल ब्राह्मणों को ही अवसर क्यों दिया जाता है। हिंदू धर्म की सभी जातियों को क्यों नहीं। मुख्य न्यायाधीश सुरेश कुमार कैत और जस्टिस विवेक जैन की खंडपीठ ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर चार हफ्ते में इस सवाल का जवाब देने का आदेश दिया है। अनुसूचित जाति-जन जाति अधिकारी कर्मचारी संघ (अजजाक्स) द्वारा दायर याचिका में मध्य प्रदेश विनिर्दिष्ट मंदिर विधेयक 2019 के तहत अध्यात्म विभाग द्वारा 4 अक्टूबर 2018 और 4 फरवरी 2019 को पारित आदेशों की संवैधानिकता को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट रामेश्वर सिंह ठाकुर और पुष्पेंद्र शाह ने कोर्ट के समक्ष दलील दी कि निर्दिष्ट मंदिर विधेयक 2019 की धारा 46 के तहत सरकार ने अनुसूची 1 में 350 से अधिक मंदिरों और अन्य धार्मिक स्थलों को अधिसूचित किया है, जो राज्य के नियंत्रण में हैं। आदेश में एक विशेष जाति को पुजारी के रूप में नियुक्त करने की अनुमति दी गई है। इसके लिए राजकोष से निश्चित वेतन का प्रावधान है। यह प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 16 और 21 का उल्लंघन है क्योंकि हिंदुओं में ओबीसी/एससी/एसटी वर्ग शामिल हैं। इसलिए पुजारी के पद के लिए केवल एक जाति को प्राथमिकता देना अनुचित है। राज्य सरकार की ओर से डिप्टी एडवोकेट जनरल अभिजीत अवस्थी ने पक्ष रखते हुए कहा कि याचिकाकर्ता कर्मचारियों का संगठन है, जिसे याचिका दायर करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। इस पर याचिकाकर्ताओं के वकील ने कहा कि सदियों से मंदिरों में केवल ब्राह्मण ही पूजा करते आ रहे हैं। सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं रहा है। 2019 से राज्य सरकार ने धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप करते हुए वेतन आधारित पुजारी नियुक्त करने का कानून बना दिया है। इसके बारे में आम जनता को जानकारी नहीं है। याचिका पर सुनवाई करने के बाद हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव जीएडी, सामाजिक न्याय मंत्रालय, धार्मिक एवं धर्मस्व मंत्रालय एवं लोक निर्माण विभाग को नोटिस जारी कर 4 हफ्ते के अंदर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।  

India जल्द बनने वाला है दुनिया की तीसरी बड़ी इकॉनमी, जापान की इकनॉमी की ग्रोथ रेट अभी शून्‍य से भी नीचे

नई दिल्‍ली भारत ने हाल में ही जर्मनी को पीछे छोड़कर चौथी बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था का खिताब हासिल कर लिया है और अब उसकी निगाह तीसरी बड़ी अव्‍यवस्‍था बनने पर है. भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था से आगे फिलहाल जापान, चीन और अमेरिका ही बचे हैं. इसमें भी जापान की हालत लगातार खराब होती जा रही है. जापान सरकार ने  एक रिपोर्ट जारी कर बताया कि उसकी सालाना ग्रोथ रेट 2025 की पहली तिमाही में गिरकर 0.7 फीसदी पर आ गई है, जबकि भारत अभी 6 फीसदी से ज्‍यादा की दर से आगे बढ़ रहा है. जापान सरकार की ओर से जारी बयान के अनुसार, जापान का वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (या किसी देश की वस्तुओं व सेवाओं का माप) जनवरी-मार्च में अक्टूबर-दिसंबर 2024 (पिछली तिमाही) की तुलना में अनुमान से भी ज्‍यादा 0.2 फीसदी सिकुड़ गया है. पिछले एक साल में पहली बार इसमें संकुचन दर्ज किया गया. संकुचन का मतलब है कि जापान की ग्रोथ रेट शून्‍य से भी नीचे चली गई है और यह अर्थव्‍यवस्‍था का आकार बढ़ने के बजाय घटने लगा है. कहां से कहां पहुंच गया जापान रिपोर्ट के अनुसार, जापान की अर्थव्यवस्था 2024 की अंतिम तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) में 2.4 फीसदी की वार्षिक दर से बढ़ रही थी. निर्यात में 2.3 फीसदी की दर से गिरावट दिख रही, जबकि उपभोक्ता खर्च स्थिर रहा और पूंजी निवेश में 5.8 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. इससे पहले जनवरी-मार्च, 2024 की तिमाही में भी जापान की इकनॉमी शून्‍य से नीचे जाकर माइनस 0.4 फीसदी रही थी. इस तरह, सालाना आधार पर देखा जाए तो अभी जापान की अर्थव्‍यवस्‍था माइनस 0.7 फीसदी की दर से घट रही है. मंदी की तरफ जा रहा जापान जापान की मुश्किलें अभी खत्‍म नहीं हुई हैं, बल्कि आगे और चुनौतियां आ रही हैं. दरअसल, अमेरिकी शुल्क से जापान के बड़े निर्यातकों, खासतौर पर मोटर वाहन विनिर्माताओं को नुकसान होने की आशंका है. न केवल जापान से भेजे जाने वाले उत्पादों के लिए, बल्कि मैक्सिको और कनाडा जैसे अन्य देशों से भी. जापान के अधिकारियों ने माना कि प्रतिक्रिया की योजना बनाना भी एक चुनौती है, क्योंकि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपना रुख बदलते रहते हैं. ऐसे में जापान की तरफ से कोई प्रस्‍ताव देना भी बड़ा मुश्किल काम है. अगर टैरिफ का असर दिखा तो 2025 की दूसरी तिमाही में भी जापान की ग्रोथ रेट शून्‍य से नीचे रहने की आशंका है, जिससे यह तकनीकी रूप से मंदी में चला जाएगा. अभी कहां खड़ा है जापान साल 2025 में जापान की जीडीपी 4.39 ट्रिलियन डॉलर रहने का अनुमान है. इस दौरान जापान की पर्चेजिंग पॉवर 6.77 ट्रिलियन डॉलर रहने का अनुमान लगाया गया है. इस लिहाज से देखा जाए तो जापान अभी तीसरी अर्थव्‍यवस्‍था बना हुआ है. साल 2024 में जापान की पर्चेजिंग पॉवर 6.31 ट्रिलियन डॉलर रही थी. अब जबकि जापान की इकनॉमी ग्रोथ शून्‍य से भी नीचे चली गई है तो उसकी अर्थव्‍यवस्‍था का आकार भी कम हो सकता है. कहां खड़ा है भारत अगर भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था की बात करें तो अभी इसका आकार 4.3 ट्रिलियन डॉलर है. तमाम रेटिंग एजेंसियों ने अनुमान लगाया है कि भारत हर डेढ़ साल में अपनी इकनॉमी में 1 ट्रिलियन डॉलर जोड़ सकता है. इस तरह, देखा जाए तो अगले 2 से 3 महीने में ही भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था जापान को पीछे छोड़ देगी. भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था की ग्रोथ रेट अभी 6.5 फीसदी के आसपास चल रही है, जबकि जापान शून्‍य से भी नीचे चला गया है. लिहाजा जल्‍द ही भारत इसे पीछे छोड़ते हुए तीसरी बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था बन जाएगा. भारत की तेज गति भारत को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्‍यवस्‍था तक पहुंचने में 60 साल का समय लगा, जबकि 1 से 2 ट्रिलियन डॉलर का सफर महज 7 साल में पूरा किया. इसके बाद 3 और 4 ट्रिलियन डॉलर की इकनॉमी बनने में भी सिर्फ 4 साल का समय लगा. अब तो ग्रोथ इतनी तेज हो गई है कि भारत हर डेढ़ साल में अपनी इकनॉमी को 1 ट्रिलियन डॉलर बढ़ाने की क्षमता रखता है. आईएमएफ ने क्‍या लगाया अनुमान आईएमएफ ने साल 2025 में दुनिया की टॉप-5 इकनॉमी के साइज का अनुमान जारी किया है. इसमें सबसे ऊपर 30.5 ट्रिलियन डॉलर के साथ अमेरिका है. दूसरे पायदान पर 19.2 ट्रिलियन डॉलर के साथ चीन के रहने का अनुमान है. जर्मनी की इकनॉमी 5 ट्रिलियन डॉलर के साथ तीसरे पायदान पर और भारत की इकनॉमी 4.34 ट्रिलियन डॉलर के साथ चौथे तो जापान की इकनॉमी 4.38 ट्रिलियन डॉलर के साथ पांचवें पायदान पर रहने का अनुमान है.  

36 किमी लंबी कलियासोत नदी अब पूरे साल कल-कल करती बहेगी, स्टॉप डैम बनेंगे, जल-संसाधन विभाग सर्वे कर रहा

भोपाल मध्य प्रदेश के भोपाल जिले में स्थित 36 किलोमीटर लंबी कलियासोत नदी को साल भर पानी से भरपूर बनाए रखने के लिए जल-संसाधन विभाग ने तीन स्टॉप डैम बनाने का प्रस्ताव रखा है। इसके लिए वर्तमान में विस्तृत सर्वे किया जा रहा है। यह परियोजना नदी की जल उपलब्धता बढ़ाने और भू-जल संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। कलियासोत नदी की खासियत और परियोजना का उद्देश्य कलियासोत नदी, जो कि कलियासोत वन क्षेत्र के जलस्रोतों से निकलती है, लगभग 36 किलोमीटर लंबी है। वर्तमान में यह नदी साल के अधिकांश महीनों में सूखी रहती है, केवल 3-4 महीने ही इसमें पानी बहता है। नदी के किनारे लगभग 8,000 एकड़ निजी जमीन है। नदी का प्रवाह भोजपुर से मिसरोद तक लगभग 17 किलोमीटर का है। इस नदी को गुजरात की साबरमती नदी की तरह विकसित करने की योजना है ताकि यह पूरे साल पानी से भरी रहे। तीन स्टॉप डैम कहां-कहां बनेंगे? जल-संसाधन विभाग द्वारा किए गए प्रारंभिक सर्वे के अनुसार, तीन प्रमुख स्थानों पर स्टॉप डैम बनाए जाएंगे:- स्टॉप डैम 1 :– सर्वधर्म पुल के पास, जो नदी के एक ढाई किलोमीटर के भीतर है। स्टॉप डैम 2 :- जेके अस्पताल पुल और दानिश कुंज ब्रिज के बीच, लगभग दो किलोमीटर दूरी पर। स्टॉप डैम 3 :- सलैया ब्रिज से आगे, जहां मौजूदा ब्रिज डूब जाएगा इसलिए नया पुल बनाना होगा। इन तीनों स्टॉप डैम से लगभग 30 लाख घनमीटर पानी जमा किया जा सकेगा और इससे नदी में लगभग 8 किलोमीटर तक लगातार पानी बना रहेगा। शहर में नदी का बहाव 17 किमी 36 किमी लंबी नदी के किनारे 8,000 एकड़ के करीब निजी जमीन है। शहर में इसका बहाव भोजपुर से मिसरोद तक 17 किमी है। इसे गुजरात की साबरमती की तर्ज पर विकसित करने की योजना है। अभी नदी 8-9 माह सूखी रहती है। कोई घाट नहीं है। नदी भोजपुर के पास बेतवा में मिलती है। अभी सीवेज का गंदा पानी ● शाहपुरा के पास कोलार रोड से नदी में टीटी नगर, मैनिट, पंचशील नगर, चार इमली, चूनाभट्टी के नालों से घरेलू कचरा मिल रहा है। ● मंडीदीप के पश्चिमी भाग के नाले से और दक्षिण पूर्वी भाग की बस्तियों से नदी में सीवेज व गंदा पानी जा रहा है। औद्योगिक क्षेत्र का कचरा मिलने से भी नदी दूषित हो रही है। ● मिसरोद व इससे जुड़ी आबादी का सीवेज नदी को गंदा कर रहा है। तीन नए डैम से बदलेगी तस्वीर रिवर डेवेलपमेंट के इस प्रोजेक्ट को गुजरात की साबरमती नदी की तर्ज पर विकसित किया जाएगा, जिससे नदी के आस-पास का क्षेत्र भी बेहतर तरीके से विकसित होगा। इस प्रक्रिया से नदी में पानी का प्रवाह बढ़ेगा और यह पर्यावरणीय दृष्टि से भी लाभकारी होगा। हालांकि, नदी के रास्ते में कुछ समस्या भी मौजूद है। शाहपुरा, टीटी नगर, मैनिट, और चूनाभट्टी जैसे इलाकों से सीवेज का गंदा पानी नदी में मिल रहा है, जिससे नदी का पानी प्रदूषित हो रहा है। इसके अलावा, औद्योगिक क्षेत्रों और मिसरोद से भी गंदा पानी नदी में मिल रहा है। यह समस्या भविष्य में परियोजना की सफलता के लिए चुनौती बन सकती है, और इसे सही तरीके से नियंत्रित किया जाना जरूरी होगा। नदी के पुनर्जीवन की उम्मीद यह परियोजना नदी के पुनर्जीवन के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। जैसे ही इन तीन स्टॉप डैमों का निर्माण होगा, कलियासोत नदी की स्थिति में बदलाव आएगा, और यह नदी जीवनदायिनी बनकर पूरे साल बहती रहेगी। इससे शहर में जलवायु और पर्यावरणीय स्थिति में भी सुधार होगा। नदी की वर्तमान स्थिति और पर्यावरणीय चुनौतियां हालांकि नदी के संरक्षण की यह योजना सराहनीय है, किन्तु नदी पर कई पर्यावरणीय चुनौतियां भी हैं:- सीवेज का मिलना :– शाहपुरा क्षेत्र के कोलार रोड से आने वाले नालों से मैनिट, पंचशील नगर, चार इमली, चूनाभट्टी जैसे इलाकों का घरेलू और औद्योगिक कचरा सीधे नदी में जा रहा है, जिससे नदी दूषित हो रही है। औद्योगिक प्रदूषण :– मंडीदीप के पश्चिमी भाग के नाले और दक्षिण पूर्वी बस्तियों से भी सीवेज और औद्योगिक कचरा नदी में मिल रहा है। नदी के किनारे अवैध निर्माण :– दी और इसके बफर जोन में लगभग 1100 से अधिक निर्माण हो चुके हैं, जो भविष्य में डैम बनने पर पानी की पकड़ में आ सकते हैं और इन्हें हटाना आवश्यक होगा। सर्वे के बाद की संभावनाएं जल-संसाधन विभाग के पीएस विनोद देवड़ा के अनुसार, 1998 में भी कलियासोत नदी पर एक डैम बनाया गया था। वर्तमान सर्वे इसी को आधार बनाकर तीन स्टॉप डैम बनाने के लिए प्रारंभिक तथ्य एकत्रित कर रहा है। यदि ये डैम बन जाते हैं, तो नदी का जल प्रवाह स्थायी होगा और भू-जल स्तर भी बढ़ेगा। साथ ही नदी के किनारे के इलाकों में खेती और जल संचयन को लाभ मिलेगा।

MP में किसानों को जो सोलर पम्प दिए जाएंगे उनकी जियो टैगिंग की जाएगी, किसान जमा करेंगे 10 प्रतिशत राशि

भोपाल प्रदेश में किसानों को सोलर पम्प देने की तैयारी में जुटी मोहन यादव सरकार ने इसको लेकर नियम तय कर दिए हैं। किसानों को जो सोलर पम्प दिए जाएंगे उनके सोलर प्लांट की जियो टैगिंग की जाएगी। इससे सोलर पम्प और बिजली कनेक्शन पर अनुदान की डुप्लीकेसी की स्थिति से मिलेगी राहत। इस योजना में यह भी तय किया गया है कि 3 हार्स पावर तक के सोलर प्लांट के लिए किसानों को 5 प्रतिशत और इससे अधिक क्षमता की सोलर एनर्जी जनरेट करने वाले सोलर प्लांट के लिए 10 प्रतिशत मार्जिन मनी जमा करनी होगी। इसके लिए नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा विभाग ने नोटिफिकेशन जारी किया है। यह योजना मार्च 2028 तक लागू रहेगी। जनवरी में कैबिनेट ने दी थी मंजूरी     24 जनवरी 2025 को हुई कैबिनेट मीटिंग में सिंचाई के लिए सोलर पम्प स्थापना योजना को मंजूरी दी गई थी।     भारत सरकार की कुसुम योजना के घटक में देय अनुदान के माध्यम से प्रधानमंत्री कृषक मित्र सूर्य योजना मार्च 2028 तक प्रभावी रहेगी।     पांच और सात हार्स पावर के सोलर पम्प कनेक्शन सिर्फ उन्हीं किसानों को मिलेंगे जिनके पास स्थायी विद्युत कनेक्शन नहीं है।     हर सोलर पम्प के साथ एक बोर्ड लगाया जाएगा।     इसमें योजना के नाम और अनुदान का उल्लेख होगा।     पम्प पर लगे क्यूआर कोड से पूरी जानकारी हासिल की जा सकेगी।     मुख्यमंत्री सोलर पम्प योजना में रजिस्टर्ड किसान शर्तों को पूरा करने पर योजना का लाभ ले सकेंगे। दूसरे स्टेप में मिलेगा स्थायी कनेक्शन वाले किसानों को लाभ योजना के पहले चरण का लाभ सिर्फ ऐसे किसानों को दिया जाएगा, जिनके पास बिजली कनेक्शन नहीं है। दूसरे स्टेप मे स्थायी विद्युत पम्प का उपयोग कर रहे किसानों को भी सोलर पम्प दिया जाएगा। विद्युत वितरण कम्पनियों द्वारा वर्ष 2023-24 और वर्ष 2024-25 में अस्थायी विद्युत कनेक्शन और स्थायी विद्युत कनेक्शन लेने वाले उपभोक्ताओं की समग्र और आधार ई-केवाईसी का उपयोग कर उनकी जमीन की डिटेल निकाली जाएगी। इसके आधार पर तैयार होने वाले डेटाबेस पर राज्य सरकार द्वारा ऋण भुगतान किया जाएगा। इसी के आधार पर सब्सिडी वाले किसान तय किए जाएंगे। सिंचाई के अलावा दूसरे कामों में उपयोग की जा सकेगी जनरेट हुई बिजली     सोलर पैनल से साल भर में 330 दिन व औसत 8 घंटे ऊर्जा का उत्पादन होता है।     खेती के लिए पंपिंग की जरूरत मात्र 150 दिन ही होती है।     सोलर एनर्जी से जनरेट होने वाली ऊर्जा के वैकल्पिक उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा।     बची हुई ऊर्जा का उपयोग चाफ कटर, आटा चक्की, कोल्ड स्टोरेज, ड्रायर, बैटरी चार्जर आदि कामों में किया जा सकेगा।     सोलर पम्प के साथ ड्रिप या स्प्रिंकलर सिस्टम लगाने किसान कल्याण, उद्यानिकी और खाद्य प्रसंस्करण विभाग प्राथमिकता पर काम करेगा। राज्य और जिला स्तर पर बनेगी कमेटी योजना के क्रियान्वयन के लिए राज्य और जिला स्तर पर कमेटी बनेगी। राज्य स्तर पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कमेटी काम करेगी। इसमें सचिव नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा विभाग सदस्य सचिव होंगे। ऊर्जा, वित्त, नगरीय विकास और आवास, किसान कल्याण और कृषि विकास विभाग, पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग, राजस्व विभाग, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव सदस्य के रूप में होंगे। जिला स्तरीय कमेटी के अध्यक्ष कलेक्टर होंगे। जिला पंचायत सीईओ, उप संचालक कृषि, प्रबंधक जिला सहकारी बैंक, सहायक संचालक उद्यानिकी, महाप्रबंधक या अधीक्षण यंत्री विद्युत वितरण कम्पनी, जिला अक्षय ऊर्जा अधिकारी ऊर्जा विकास निगम सदस्य के रूप में शामिल होंगे। योजना में ऐसे मिलेगा अनुदान     भारत सरकार की कुसुम योजना के अंतर्गत 3 हार्स पावर तक के सोलर पम्प पर 30 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा।     किसान को 5 प्रतिशत मार्जिन मनी देनी होगी और 65 प्रतिशत राशि कृषक ऋण से आएगी।     3 हार्स पावर से अधिक वाले पंपों पर 30 प्रतिशत अनुदान भारत सरकार से मिलेगा।     60 प्रतिशत से अधिक राशि कृषक ऋण के रूप में होगी।     किसान को मार्जिन मनी के रूप में 10 प्रतिशत राशि देना होगी।     कुसुम बी योजना में 7.5 हार्स पावर से अधिक के पम्प पर केंद्र के अंश की राशि 7.5 एचपी पम्प पर दिए जाने वाले अनुदान तक ही रहेगी।  

चिलवाहा बायोगैस संयंत्र में हर दिन पांच टन बायो गैस और 50 टन बायोमास पैलेट का निर्माण होगा

भोपाल मध्य प्रदेश के रायसेन जिले को उद्योग के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि मिलने वाली है। रायसेन तहसील के ग्राम चिलवाहा में बायो गैस संयंत्र (biogas plant) की स्थापना के लिए प्रक्रिया शुरू हो गई है। केंद्र सरकार के ग्लोबल बायो फ्यूल एलायंस के तहत कपर्दी बायो एनर्जी लिमिटेड द्वारा चिलवाहा में बायोगैस संयंत्र लगाया जा रहा है। जिसमें हर दिन पांच टन बायो गैस और 50 टन बायोमास पैलेट का निर्माण होगा। खास बात यह कि ये उत्पाद नरवाई से बनाए जाएंगे, जो जिले के किसानों से ही खरीदी जाएगी। संयंत्र लगाने के लिए कंपनी ने पांच एकड़ जमीन पर कार्य शुरू कर दिया है। फिलहाल जमीन की लेवलिंग का काम किया जा रहा है।  कंपनी के कार्यकारी अधिकारी अभिषेक पाठक ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2023 में आयोजित जी-20 शिखर सम्मेलन में ग्लोबल बायोफ्यूल्स अलायंस का शुभारंभ किया था, जिसके तहत 2030 तक शुद्ध-शून्य कार्बर उत्सर्जन का लक्ष्य तय किया था। इसी के तहत बायो गैस प्लांट की स्थापना जिले में की जा रही है। रायसेन. संयंत्र लगाने शुरू हुआ काम। बायो गैस प्लांट बनने के बाद होंगे ये फायदे     नरवाई से बनाएंगे बायो गैस तथा बायोमास पैलेट     स्थानीय किसानों से नरवाई (पराली) खरीदी जाएगी। जिससे किसानों को फायदा होगा।     किसान नरवाई जलाना बंद करेंगे।     पर्यावरण सुरक्षित होगा।     क्षेत्र में बायो गैस के उपयोग से पर्यावरण सुरक्षित होने के साथ तापमान पर नियंत्रण होगा।     15 हजार हैक्टेयर फसल की नरबाई का उपयोग बायो गैस बनाने में होगा।     संयंत्र में गोवंश के अवशेष का उपयोग भी बायोगैस बनाने में किया जाएगा, जिससे गोवंश पालकों को भी अतिरिक्त आय होगी।     संयंत्र में गैस बनाने से जैविक खाद बनेगा, जिसे किसानों को दिया जाएगा।     यह खाद पूर्ण जैविक होगा, जिससे किसानों की फसलों का उत्पादन बढ़ने के साथ रसायनों से मुक्ति मिलेगी। किसानों के साथ पर्यावरण को फायदा अभिषेक पाठक ने बताया कि चिलवाहा में बनने वाली बायो गैस और बायोमास पैलेट इंडियन ऑयल कार्पोरेशन लिमिटेड को देंगे, जिसके जरिए यह उपभोक्ताओं तक पहुंचेगी। गैल कंपनी से भी इस संबंध में अनबंध किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि जिले में गैल कंपनी ने रसोई गैस सप्लाई पर काम शुरू किया है। घरों में पाइप लाइन लगाई जा रही है।

राजधानी भोपाल से होगी प्रदेशभर में बसों की निगरानी, बीमा-फिटनेस खत्म होते ही जाएगा संदेश

भोपाल बाणगंगा चौराहा हादसे से सबक लेते हुए परिवहन विभाग ने प्रदेश में बसों की निगरानी के लिए नई व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है। हादसे में जिस बस से महिला डॉक्टर की मौत हुई थी, उसका फिटनेस सर्टिफिकेट ही नहीं था। अब ऐसी लापरवाही रोकने के लिए एक केंद्रीकृत निगरानी सिस्टम शुरू किया जा रहा है, जिसकी कमान भोपाल में बने कंट्रोल रूम के हाथ में होगी। भोपाल स्थित परिवहन आयुक्त के कैंप ऑफिस में यह कंट्रोल रूम स्थापित किया जा रहा है, जहां से पूरे मध्यप्रदेश की बसों के फिटनेस, परमिट, पीयूसी और व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (VLTD) की निगरानी की जाएगी। परिवहन आयुक्त विवेक शर्मा ने बताया कि इस व्यवस्था की जिम्मेदारी एआरटीओ स्तर के अधिकारियों को दी गई है। पूरे प्रदेश से जुटाया जा रहा डेटा राज्यभर से पंजीकृत 57 हजार बसों की जानकारी एकत्र की जा रही है। इसमें बसों का रजिस्ट्रेशन, परमिट, फिटनेस, पीयूसी और VLTD की स्थिति शामिल है। यह सारा डेटा कंप्यूटर में फीड कर एक एनालिटिकल सॉफ्टवेयर से जोड़ा जाएगा, जो दस्तावेजों की वैधता खत्म होने से पहले ही अलर्ट भेजेगा। अलर्ट सिस्टम देगा पहले से सूचना सिस्टम में ऐसा अलर्ट फीचर जोड़ा गया है, जो किसी दस्तावेज की वैधता खत्म होने से 7 दिन पहले कंट्रोल रूम की स्क्रीन पर अलर्ट दिखाएगा। जैसे अगर किसी बस का परमिट 15 तारीख को समाप्त हो रहा है, तो 8 तारीख से ही अलर्ट दिखने लगेगा। चिन्हित बसों की जानकारी संबंधित जिले के आरटीओ को भेजी जाएगी, जो बस मालिक को नोटिस जारी कर दस्तावेज अपडेट कराने को कहेगा। तय समय तक दस्तावेज अपडेट नहीं करने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।     तीन चरणों में लागू होगा प्रोजेक्ट     पहला चरण: 26 हजार शैक्षणिक बसें     दूसरा चरण: 20 हजार यात्री बसें     तीसरा चरण: 11 हजार औद्योगिक संस्थानों की बसें पहले चरण की मॉनिटरिंग इसी महीने के अंत तक शुरू हो जाएगी। भोपाल आरटीओ का नया प्रभार बाणगंगा हादसे के बाद भोपाल आरटीओ रहे जितेंद्र शर्मा को निलंबित कर दिया गया था। उनके स्थान पर सीहोर के जिला परिवहन अधिकारी रितेश तिवारी को भोपाल आरटीओ का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। साथ ही, निलंबन के बाद खाली हुए नरसिंहपुर जिला परिवहन अधिकारी का कार्यभार जबलपुर की संभागीय उप परिवहन आयुक्त रमा दुबे को दिया गया है। सचिव परिवहन विभाग मनीष सिंह ने गुरुवार को इस संबंध में आदेश जारी किए। हर जिले से रजिस्टर्ड बसों की जानकारी मंगाई जा रही है। इसमें रजिस्ट्रेशन, परमिट, फिटनेस, पीयूसी की वैधता और वीएलटीडी की स्थिति शामिल है। सारा डेटा कंप्यूटर में फीड कर एक एनालिटिकल सॉफ्टवेयर से जोड़ा जाएगा। तीन चरणों में शुरू होने वाले इस प्रोजेक्ट के पहले चरण की मॉनिटरिंग इसी महीने के अंत तक शुरू हो जाएगी। परिवहन विभाग बुलवा रहा है 57 हजार बसों की जानकारी, आरटीओ को बताएंगे बस का फिटनेस कब खत्म हो रहा है नोटिस से पहले अलर्ट जैसे ही अलर्ट सिस्टम में कोई बस चिन्हित होगी, उसका डेटा संबंधित जिले के आरटीओ को भेजा जाएगा। वहां से बस मालिक को नोटिस भेजकर दस्तावेज समय रहते अपडेट कराने को कहा जाएगा। तय समय तक अपडेट नहीं होने पर कार्रवाई की जाएगी। कैसे काम करेगा सिस्टम: डिप्टी टीसी किरण शर्मा ने बताया कि सॉफ्टवेयर में ऐसा अलर्ट सिस्टम होगा, जो किसी भी दस्तावेज की वैधता खत्म होने से 7 दिन पहले स्क्रीन पर जानकारी ब्लिंक करेगा। मसलन, अगर किसी बस का परमिट 15 तारीख को खत्म हो रहा है, तो 8 तारीख से ही कंट्रोल रूम में अलर्ट आने लगेगा। रितेश तिवारी को भोपाल आरटीओ का अतिरिक्त प्रभार बाणगंगा चौराहा पर अनफिट बस से हुए हादसे के बाद खाली हुए भोपाल आरटीओ के पद का प्रभार रितेश तिवारी को सौंपा गया है। अब तक वह जिला परिवहन अधिकारी सीहोर थे। अब उन्हें भोपाल क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी का भी अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। उनका मूल पद सहायक क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी है। तीन दिन पहले बाणगंगा चौराहा पर हुए हादसे के बाद भोपाल संभागायुक्त संजीव सिंह ने भोपाल आरटीओ रहे जितेंद्र शर्मा को निलंबित कर दिया था। तब जितेंद्र शर्मा के पास नरसिंहपुर जिले के आरटीओ का भी अतिरिक्त प्रभार था। उनके निलंबन आदेश के बाद नरसिंहपुर जिला जिला परिवहन अधिकारी का पद भी खाली हो गया था। इसलिए जबलपुर कार्यालय संभागीय उप परिवहन आयुक्त रमा दुबे को नरसिंहपुर जिला परिवहन अधिकारी का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है। सचिव परिवहन विभाग मनीष सिंह ने गुरुवार को आदेश जारी कर दिए हैं।

मुख्यमंत्री ने की किसान-कल्याण तथा कृषि विकास विभाग की समीक्षा, प्रबंधन पर दें विशेष ध्यान

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में रागी, कोदो-कुटकी, ज्वार-बाजरा, मक्का जैसे श्रीअन्न का उत्पादन बढ़ाया जाए और किसानों को श्रीअन्न उत्पादन के लिए प्रोत्साहि त किया जाए। किसानों द्वारा उत्पादित श्रीअन्न अब सरकार खरीदेगी। उन्होंने कहा कि तुअर उत्पादक किसानों को अच्छे किस्म के खाद, बीज और उत्पादन वृद्धि के लिए प्रोत्साहन भी दिया जाए। इसके लिए किसानों को फसल अनुदान देने और उनकी फसल का बीमा कराने जैसे नवाचार भी किये जा सकते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को मंत्रालय में किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री श्री एदल सिंह कंषाना, मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय डॉ. राजेश राजौरा, अपर मुख्य सचिव सहकारिता श्री अशोक बर्णवाल, सचिव कृषि श्री एम. सेल्वेन्द्रम सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे। कृषि उपज मंडी के अलावा फल व सब्जी मंडी, मसाला मंडी स्थापना के लिए भी करें प्रयास मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश की सभी मंडियों में प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी मंडियों का विभागीय वरिष्ठ अधिकारियों से आकस्मिक निरीक्षण करायें। मंडियों की व्यवस्थाओं को और भी बेहतर बनाया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नई जरूरतों के मुताबिक अब अलग-अलग मंडियों की स्थापना पर विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मंडियों का फसलवार मॉडल तैयार करें। कृषि उपज मंडी के अलावा अब फल व सब्जी मंडी, मसाला मंडी या अन्य विशेष पैदावार की मंडी स्थापना के लिए भी प्रयास किए जाएं। इसके लिए रोडमैप तैयार किया जाए और यदि आवश्यकता है तो इसमें प्रायवेट सेक्टर को भी सम्मिलित किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मंडियों में जारी वर्तमान व्यवस्थाओं का समुचित तरीके से किसानों के हित में प्रबंधन किया जाए। मंडी शुल्क की प्राप्त राशि से किसानों की कल्याण गतिविधियों पर फोकस किया जाए। आदर्श बनें प्रदेश की कृषि उपज मंडियां मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश की कृषि उपज मंडियों को आदर्श बनाया जाए। मंडियों में कृषि आधारित सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित हों। मंडियों में किसानों को फसल बेचने में किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। मंडी में अपनी फसल बेचने आने वाले हर किसान को उसकी उपज का सही दाम मिले किसी का भी नुकसान न होने पाए। मंडियों को और अधिक आधुनिक बनाया जाए यहां किसानों को उनके उपज में गुणवत्ता संवर्धन के बारे में भी बताया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सभी मंडियां अपने विकास कार्यों के लिए आत्मनिर्भर बनें। उन्होंने कृषि अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे स्थानीय निकायों से नई मंडियों की स्थापना/ फसल भण्डारण क्षमता बढ़ाने के लिए समन्वय करें, जिससे किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए अधिक सुविधाएं मिल सकें। किसानों को मिले प्रोत्साहन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि फसलों का उत्पादन बढ़ाने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएं। प्रदेश के किसानों को रासायनिक उर्वरकों के स्थान पर उन्नत किस्म के बीज, आधुनिक कृषि यंत्रों, अच्छा भाव, अनुदान आदि का प्रोत्साहन मिले। उन्होंने कहा कि श्रीअन्न रागी, कोदो-कुटकी, मक्का, ज्वार, बाजरा की फसलों को प्रोत्साहन दिया जाए। इन फसलों के उत्पादक क्षेत्र को अच्छी पैदावार करने के लिए प्रोत्साहन मिले। आवश्यकता अनुसार अनुदान की राशि भी बढ़ाई जाए। ग्रीष्मकालीन मूंग में खरपतवारनाशकों के उपयोग को करें हतोत्साहित मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ग्रीष्मकालीन मूंग में खरपतवारनाशकों के उपयोग से लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसलिए खरपतवारनाशकों को हतोत्साहित करने की कोशिश करें। उन्होंने कहा कि प्रदेश में प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा मिले। स्वाभाविक फसलों की पैदावार पर विशेष जोर दिया जाए। कृषि उद्योग समागम के अनुभवों से आगे बढ़ें, किसानों को मिले बेहतर परिणाम मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने प्रदेश के हर संभाग में किसान मेलों का आयोजन करने का निर्णय लिया है। इन मेलों में कृषि आधारित उद्योगों में निवेश पर जोर दिया जा रहा है। हाल ही में मंदसौर जिले के सीतापुर में आयोजित कार्यक्रम में किसानों को कृषि के आधुनिक यंत्रों और तकनीक से अवगत कराया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सीतामऊ में हुए कृषि उद्योग समागम के अनुभवों को सामने रखें और इन अनुभवों के आधार पर आगे होने वाले कृषि उद्योग समागमों की तैयारी करें, जिससे किसानों को इन समागमों से अधिक और बेहतर परिणाम प्राप्त हों। उन्होंने कहा कि किसानों को खेतों में नरवाई जलाने से रोकने के प्रयास किए जाएं। किसानों को हैप्पी सीडर कृषि यंत्र का उपयोग करने के लिए जागरूक किया जाए। उन्होंने कृषि यंत्रों को प्रोत्साहन और हर ग्राम पंचायत में हैप्पी सीडर की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। तीन फसलों को जल्द ही मिलेगा जीआई टैग बैठक में बताया गया कि राज्य शासन की प्रगतिशीलता से प्रदेश में उत्पादित होने वाली 3 फसलों को बहुत जल्द जीआई-टैग मिल जाएगा। सचिव कृषि ने बताया कि डिंडोरी जिले की नागदमन मकुटकी, सिताही कुटकी और बैंगनी अरहर की फसल को जीआई टैग परीक्षण के लिए भेजा गया है, उम्मीद है कि जल्द ही इन फसलों को जीआई टैग प्राप्त होगा। उन्होंने बताया कि ई-अनुज्ञा प्रणाली लागू करने के बाद प्रदेश में बीते एक अप्रैल 2025 से प्रदेश की सभी 259 मंडियों में ई-मंडी योजना भी लागू कर दी गई है। सभी मंडियों में अब डिजीटल तरीके से रिकार्ड कीपिंग की जा रही है। 26,27 एवं 28 मई को नरसिंहपुर में होगा कृषि आधारित उद्योगों का सम्मेलन बैठक में सचिव कृषि ने जानकारी दी कि आगामी 26, 27 एवं 28 मई को जिला मुख्यालय नरसिंहपुर में कृषि आधारित उद्योगों का सम्मेलन सह विशाल कृषि मेला आयोजित किया जाएगा। आयोजन में कृषि आधारित उद्योगों के बारे में जानकारी के अलावा दुग्ध उत्पादन, मत्स्य उत्पादन, शाक-सब्जी उत्पादन, श्रीअन्न उत्पादन, उद्यानिकी, बागवानी, उन्नति किस्म के बीज, खाद, उर्वरक की जानकारी सहित उन्नत कृषि उपकरणों का प्रदर्शन भी किया जाएगा। उन्होंने बताया कि तीन दिन अलग-अलग गतिविधियां होंगी। इस दौरान उन्नत कृषि उपकरणों के साथ किसानों से आधुनिक कृषि उपकरणों की बुकिंग भी कराई जाएगी। कृषि के क्षेत्र में नए र्स्टाट-अप्स के बारे में जानकारी भी दी जाएगी। उन्होंने बताया कि नरसिंहपुर के बाद 8 से 10 जून 2025 तक सतना में विशाल … Read more

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