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प्रधानमंत्री जी की पहल से हम पिछड़ी जनजातियों के भाग्य खुल गए , हर प्रकार की सरकारी सुविधाओं के साथ पक्का आवास भी मिलने लगा

रायपुर : धन्यवाद उन सभी का, जिन्होंने हमारी सुध ली रायपुर हम लोग पहाड़ी कोरवा है बाबू,  जंगल से जुड़े हैं, जो कुछ है हमारा सबकुछ जंगल ही है, हमारे पुरखे ही नहीं, हम लोग का जीवन संघर्षों के साथ ही बीता है किसी ने आँसू तक नहीं पोछा…किसी ने हमारी सुध नहीं ली, आज हमें साफ पानी..गाँव तक सड़क..गाँव में स्कूल…बीमारी से इलाज के लिए आयुषमान कार्ड और पक्का मकान दिया जा रहा है..हमें पैरों में खड़ा करने के साथ ही..हमारे पांव पखारे जा रहे हैं। यह हमारा सौभाग्य है। धन्यवाद उन सभी लोगों का, जिन्होंने हमारी सुध ली और हमें सम्मान दे रहे हैं। यह कहना है विशेष पिछड़ी जनजाति परिवार की पहाड़ी कोरवा फूलो बाई और शनी राम कोरवा का। ये पहाड़ी कोरवा परिवार प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना के तहत आशियाना मिलने के बाद गृह प्रवेश से पहले केंद्रीय कृषि एवं पंचायत मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के हाथों पाँव पखारने के पश्चात अभिभूत और खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहे थे। छत्तीसगढ़ के दौरे पर आए केंद्रीय कृषि एवं पंचायत मंत्री  श्री शिवराज सिंह, मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय तथा अन्य अतिथियों ने आज अम्बिकापुर में प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों के पाँव को पखारकर गृह प्रवेश कराया। इस मौके पर प्रदेश के 51 हजार हितग्राहियों को आवास की चाबी सौंपी। जशपुर जिले के बगीचा ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंडरापाठ की रहने वाली फूलो बाई बताती है कि उनका जीवन संघर्षों से गुजरा। दो साल पहले पति के मौत के बाद उनकी मुश्किलें और भी बढ़ गई थीं। उनका कहना था कि पति जब तक जीवित थे तब तक उनको पूरा भरोसा था कि पक्का मकान एक दिन बना लेंगे, लेकिन असमय उनकी मौत ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया था। देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने वनांचलों में रहने वाले विशेष पिछड़ी जनजाति परिवारों की सुध ली है। प्रधानमंत्री जी की पहल से हम पिछड़ी जनजातियों के भाग्य खुल गए हैं। हर प्रकार की सरकारी सुविधाओं के साथ पक्का आवास भी मिलने लगा है। ग्राम ढेलवाडाँड़-बोकाई पंचायत जिला सरगुजा के पहाड़ी कोरवा शनी राम ने बताया कि जंगलों के आसपास रहते हमारी कई पीढ़ियां बीत गई। हमारी पीढ़ियों ने पानी भी ढोढ़ी का पीया। घास-फूस के घर में रहे और आंधी-तूफान, बारिश के दिनों में डर के साये में जैसे-तैसे जिंदगी काटी। हमने तो कभी सोचा भी नहीं था कि एक दिन हमारी जिंदगी के कठिन दिन बहुरेंगे। अब पीएम जनमन से हमारे पक्के मकान बन गए। नल कनेक्शन, बिजली कनेक्शन मिल रहा। इलाज के लिए कार्ड बन रहा है। गाँव तक पक्की सड़क बन रही है। हमारे पांव पखार कर सम्मान दिया गया वह एक सुखद अनुभूति है, यह हमारे आने वाली पीढ़ी की तकदीर बदलने की शुरूआत है, इसके लिए हम जितना भी आभार जताए..कम ही है।

सोफिया कुरैशी के खिलाफ अभद्र टिप्पणी पर भड़के अजय राय, कहा- ऐसा बयान उनके घिनौने सोच को बताता है

भोपाल कर्नल सोफिया कुरैशी पर पूरे देश को गर्व है। लेकिन मध्यप्रदेश के जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह ने उनको लेकर ‘गंदी बात’ कर दी। इतनी गंदी कि नवभारत टाइम्स डॉट कॉम उसे बता भी नहीं सकता। बयान के वायरल होते ही हल्ला मच गया। सीधे शाह को भाजपा कार्यालय तलब कर लिया गया, जहां जाकर उन्होंने माफी मांग ली। आलाकमान के तेवर को देखते हुए मंत्री विजय शाह हवाई चप्पल में ही भागते हुए पार्टी ऑफिस पहुंचे। हवाई चप्पल में ही आए पार्टी दफ्तर पार्टी ने इस तरह फटकार लगाई कि वे हवाई चप्पल पहनकर भाजपा प्रदेश कार्यालय पहुंचे और मीडिया से बचने के लिए दौड़ते हुए कार्यालय में दाखिल हो गए। भाजपा राष्ट्रीय नेतृत्व द्वारा संज्ञान लिए जाने के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्‌डा ने इस मामले पर एमपी संगठन से रिपोर्ट मांगी। इसके बाद प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने मंत्री शाह को मिलने बुलाया तो उनके होश फाक्ता हो गए। वे हवाई चप्पल में ही पार्टी कार्यालय पहुंच गए। पार्टी नेतृत्व से मांगी माफी उन्होंने पार्टी के नेतृत्व से माफी मांगी और मीडिया में कहा कि मैं बहन सोफिया से हजार बार माफी मांग सकता हूं। आपको बता दें कि जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह सोमवार को इंदौर के महू के रायकुंडा गांव में आयोजित हलमा कार्यक्रम में पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर बेहद घटिया बयान दे दिया। लेकिन घटना का वीडियो मंगलवार को वायरल हुआ। वीडियो में उन्होंने इतनी गंदी बात कही है कि हमारे लिये यहां लिखना भी कर्नल सोफिया की बेकद्री हो सकती है। यहां पर हम इसलिए बयान नहीं लिख रहे। दस बार माफी मांग लूंगा मीडिया से चर्चा में विजय शाह ने कहा कि जो घटना हुई उस पर भी आप जाओ। सबसे पहले मैं ये बता दूं कि मेरा पूरा परिवार, खानदान मिलिट्री बेस्ड रहा है। कारगिल से लेकर और तमाम जगहों पर मेरे परिवार में कई लोग शहीद हुए। मैं उस बात से मैं न सिर्फ विचलित था बल्कि बहुत दुखी था। हम सपने में भी उनके अपमान का सोच भी नहीं सकते। फिर भी किसी को ऐसा लगा हो, किसी समाज को या किसी व्यक्ति को तो मैं दस बार माफी मांगने को तैयार हूं। शाह ने कहा कि मैंने कहा न कि दुखी मन से और इतनी विपरीत परिस्थितियों में अगर मेरे मुंह से कुछ गलत निकल गया है। पार्टी ने दूसरे मैटर के लिए बुलाया था हालांकि विजय शाह ने इस बात से मुकर गए कि पार्टी संगठन ने उन्हें बयानबाजी के लिए बुलाया था। शाह ने कहा है कि महामंत्री जी से दूसरे मैटर पर बात करने के लिए बुलाया था। बीजेपी नेताओं ने परिवार से की मुलाकात वहीं, मंत्री विजय शाह के बयान से पार्टी को नुकसान हुआ है। मध्य प्रदेश बीजेपी अब डैमेज कंट्रोल में जुटी है। प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा का संदेश लेकर बीजेपी नेताओं ने कर्नल सोफिया कुरैशी के परिवार से नौगांव जाकर मुलाकात की है। सोफिया कुरैशी के खिलाफ अभद्र टिप्पणी पर भड़के अजय राय  मंत्री विजय शाह के कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित बयान ने अब तूल पकड़ लिया है। विपक्षी दल लगातार विजय शाह को घेर रहे हैं। इतना ही नहीं, भाजपा संगठन ने भी विजय शाह को तलब कर लिया है। इसी बीच यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय का बयान सामने आया है। जिममें उन्होंने केन्द्र सरकार को मंत्री का इस्तीफा लेने की बात कही है। कर्नल सोफिया कुरैशी का अपमान अजय राय ने कहा कि मध्य प्रदेश के मंत्री विजय शाह ने अपने बयान से देश की वीरांगना बिटिया कर्नल सोफिया कुरैशी का अपमान करके नारीशक्ति, देश की सेना के साथ-साथ हमारी एकता पर भी चोट किया है। उनका बयान उनके छोटे और घिनौने सोच को बताता है। किसी जिम्मेदारी पर बैठा आदमी ऐसा अनैतिक और नफरती बयान कैसे दे सकता है। अजय राय ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस मंत्री से तुरंत इस्तीफा लेना चाहिए या बर्खास्त कर देना चाहिए अन्यथा यही माना जाएगा कि इस ओछी बयानबाजी में उनकी भी मूक सहमति है। हालांकि अगर ऐसा हुआ भी तो कोई ताज्जुब की बात नहीं होगी। क्योंकि, भाजपा और संघ का इतिहास ही महिला विरोध के साथ-साथ नफरत फैलाने वाला रहा है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने की उच्च स्तरीय समीक्षा

रायपुर : छत्तीसगढ़ की पहचान बनेगा नया विधानसभा भवन: सितम्बर 2025 तक निर्माण हर हाल में पूर्ण करने के निर्देश 51 एकड़ क्षेत्र में बन रहा है भव्य और आधुनिक सुविधाओं से युक्त नया विधानसभा परिसर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने की उच्च स्तरीय समीक्षा रायपुर नवा रायपुर के सेक्टर-19 में 51 एकड़ भूमि पर छत्तीसगढ़ की नवीन विधानसभा का निर्माण तीव्र गति से जारी है। अब तक 95 प्रतिशत से अधिक कार्य पूर्ण हो चुका है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय एवं विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने आज मुख्यमंत्री निवास में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में निर्माण की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की और इसे सितम्बर 2025 तक हर हाल में पूर्ण करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह भवन छत्तीसगढ़ की लोकतांत्रिक चेतना और सांस्कृतिक गरिमा का प्रतीक बनेगा। इसकी भव्यता और कार्यक्षमता नई पीढ़ी को प्रेरित करेगी। नवीन विधानसभा भवन के निर्माण कार्यों को तीन प्रमुख विंगों में विभाजित किया गया है—विधानसभा सचिवालय, विधानसभा सदन और सेंट्रल हॉल परिसर। इनमें दर्शक दीर्घा, मीडिया दीर्घा, सभागृह कक्ष, पुस्तकालय, विद्युतीकरण, वातानुकूलन, डामरीकरण, उद्यानिकी, जल एवं विद्युत आपूर्ति, आंतरिक साज-सज्जा और फिक्स्ड फर्नीचर का कार्य तीव्र गति से जारी है। हर विभाग की जिम्मेदारी तय: समन्वय से बनेगा आदर्श परिसर बैठक में लोक निर्माण विभाग, उद्यानिकी, संस्कृति विभाग और चिप्स द्वारा किए जा रहे कार्यों की समीक्षा की गई। सभी विभागों को निर्धारित समयसीमा में कार्य पूर्ण करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए। सुरक्षा और ऊर्जा संरक्षण का समावेश: फायर फाइटिंग से लेकर सोलर पैनल तक विधानसभा परिसर में फायर फाइटिंग सिस्टम, रेन वाटर हार्वेस्टिंग, अत्याधुनिक ऑडियो-वीडियो प्रणाली, 300 किलोवॉट सोलर पैनल और 500 सीटर ऑडिटोरियम की स्थापना की जा रही है, जिससे यह परिसर पर्यावरणीय दृष्टि से भी आदर्श उदाहरण बने। संस्कृति का संगम: छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति पर आधारित संग्रहालय भी होगा शामिल संस्कृति विभाग द्वारा परिसर में छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक-संस्कृति को समर्पित संग्रहालय का निर्माण भी किया जाएगा, जो राज्य की सांस्कृतिक विविधता और धरोहर को प्रदर्शित करेगा। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव, वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव श्री पी. दयानन्द, श्री मुकेश बंसल, डॉ. बसवराजू एस, विधानसभा सचिव श्री दिनेश शर्मा सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

जस्टिस बीआर गवई आज ली 52वें सीजेआई के रूप में शपथ, दे चुके हैं ये बड़े फैसले

नई दिल्ली जस्टिस भूषण रामकृष्ण गवई ने आज सुप्रीम कोर्ट के नए मुख्य न्यायाधीश के तौर पर शपथ ले ली है. वह सुप्रीम कोर्ट के 52वें सीजेआई बन गए हैं. देश के इस अहम पद पर बैठने से पहले उन्होंने अपनी मां का आशीर्वाद लिया. CJI पद की शपथ लेते ही सबसे पहले उन्होंने अपनी मां कमलताई गवई के पैर छुए. जस्टिस गवई भारत के पहले बौद्ध सीजेआई हैं. आजादी के बाद वह देश में दलित समुदाय से दूसरे सीजेआई हैं.  सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस के तौर पर उनका कार्यकाल छह महीने का होगा.   जस्टिस वीआर गवई के अहम फैसले जानें न्यायधीश रहते जस्टिस वीआर गवई ने कई अहम फैसले दिए, जिनकी खूब चर्चा हुई. उनके मुख्य फैसलों में बुलडोजर जस्टिस, अनुच्छेद 370 को निरस्त करने को बरकरार रखना, डिमोनेटाइजेशन को बरकरार रखना, अनुसूचित जाति कोटे में उप-वर्गीकरण को बरकरार रखना, शराब नीति में के कविता को जमानत देना, तेलंगाना के सीएम रेवंत रेड्डी की दो बार आलोचना करना शामिल हैं. देश के 52वें मुख्य न्यायाधीश बने जस्टिस गवई परंपरा के अनुसार, वर्तमान सीजेआई अपने उत्तराधिकारी के रूप में सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश की सिफारिश करते हैं। जस्टिस गवई वरिष्ठता के क्रम में सबसे आगे थे, जिसके चलते उनके नाम की सिफारिश की गई। कानून मंत्रालय ने सीजेआई जस्टिस खन्ना से उनके उत्तराधिकारी का नाम देने की आधिकारिक अपील की थी। ऐसा रहा करियर 16 मार्च, 1985 को वकालत शुरू करने वाले न्यायमूर्ति भूषण रामकृष्ण गवई ने नागपुर नगर निगम, अमरावती नगर निगम और अमरावती विश्वविद्यालय के स्थायी वकील के रूप में कार्य कर चुके हैं। उन्होंने अगस्त 1992 से जुलाई 1993 तक बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ में सहायक सरकारी वकील और अतिरिक्त लोक अभियोजक के रूप में सेवा दी। 17 जनवरी, 2000 को उन्हें नागपुर खंडपीठ के लिए सरकारी वकील और लोक अभियोजक नियुक्त किया गया। 14 नवंबर, 2003 को वे बॉम्बे हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश बने और 12 नवंबर, 2005 को स्थायी न्यायाधीश नियुक्त हुए। 24 मई, 2019 को उन्हें सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनाया गया। न्यायमूर्ति गवई सर्वोच्च न्यायालय में कई ऐसी संविधान पीठों में शामिल रहे, जिनके फैसलों का महत्वपूर्ण प्रभाव रहा। दिसंबर 2023 में, उन्होंने पांच जजों की संविधान पीठ में जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के केंद्र के फैसले को सर्वसम्मति से बरकरार रखा। पिता रहे हैं बिहार और केरल के पूर्व राज्यपाल जस्टिस गवई का जन्म 24 नवंबर 1960 को महाराष्ट्र के अमरावती में हुआ था। जस्टिस गवई के पिता दिवंगत आरएस गवई भी एक मशहूर सामाजिक कार्यकर्ता और बिहार और केरल के पूर्व राज्यपाल रहे। जस्टिस गवई देश के दूसरे अनुसूचित जाति से संबंध रखने वाले मुख्य न्यायाधीश होंगे। उनसे पहले जस्टिस केजी बालाकृष्णन साल 2010 में यह उपलब्धि हासिल कर चुके हैं। कई मामलों पर जस्टिस बीआर गवई ने सुनाए ऐतिहासिक फैसले राजीव गांधी हत्याकांड (2022) जस्टिस गवई की अध्यक्षता वाली बेंच ने 30 साल से ज्यादा समय से जेल में बंद दोषियों की रिहाई को मंजूरी दी, यह मानते हुए कि तमिलनाडु सरकार की सिफारिश पर राज्यपाल ने कोई कार्रवाई नहीं की थी। वणियार आरक्षण (2022) तमिलनाडु सरकार को वणियार समुदाय को विशेष आरक्षण देने के निर्णय को सुप्रीम कोर्ट ने असंवैधानिक करार दिया, क्योंकि यह अन्य पिछड़ा वर्गों के साथ भेदभावपूर्ण था। नोटबंदी (2023) जस्टिस गवई ने 2016 की नोटबंदी योजना को 4:1 बहुमत से वैध ठहराते हुए कहा कि यह निर्णय केंद्र सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक के बीच परामर्श के बाद लिया गया था और यह “अनुपातिकता की कसौटी” पर खरा उतरता है। ईडी निदेशक का कार्यकाल (2023) जुलाई 2023 में जस्टिस गवई की बेंच ने प्रवर्तन निदेशालय के निदेशक संजय कुमार मिश्रा के कार्यकाल विस्तार को अवैध करार दिया और उन्हें 31 जुलाई 2023 तक पद छोड़ने का निर्देश दिया था। बुलडोजर कार्रवाई (2024) 2024 में, जस्टिस गवई और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने कहा कि केवल आरोपी या दोषी होने के आधार पर किसी की संपत्ति को ध्वस्त करना असंवैधानिक है। कार्रवाई बिना कानूनी प्रक्रिया के नहीं कर सकते, अगर होती है तो संबंधित अधिकारी जिम्मेदार होगा।   अन्य फैसले     मोदी सरनेम केस में कांग्रेस नेता राहुल गांधी को राहत दी थी। उन्हें इस केस में दो साल की सजा के बाद लोकसभा से अयोग्य करार दिया गया था।     सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता शीतलवाड़ को जमानत दी।     दिल्ली शराब घोटाले में दिल्ली के पूर्व उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को जमानत दी।     दिल्ली शराब घोटाले में बीआरएस नेता के कविता को भी जमानत दी। 1985 में की वकालत की शुरुआत नए CJI गवई का जन्म 24 नवंबर 1960 को महाराष्ट्र के अमरावती में हुआ था. उन्होंने 16 मार्च 1985 को वकालत शुरू की. शुरुआती सालों में उन्होंने बार. राजा एस. भोसले (पूर्व महाधिवक्ता एवं उच्च न्यायालय के न्यायाधीश) के साथ 1987 तक कार्य किया. इसके बाद 1987 से 1990 तक उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट में स्वतंत्र रूप से प्रैक्टिस की. जस्टिस गवई ने 1990 के बाद मुख्य रूप से बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेचं में प्रैक्टिस की, जिसमें संवैधानिक और प्रशासनिक कानून विशेष क्षेत्र रहे. वह नागपुर नगर निगम, अमरावती नगर निगम और अमरावती विश्वविद्यालय के लिए स्थायी वकील रहे. इसके अलावा, उन्होंने सीकोम, डीसीवीएल जैसी विभिन्न स्वायत्त संस्थाओं और निगमों, विदर्भ क्षेत्र की कई नगर परिषदों के लिए नियमित रूप से पैरवी की.  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हॉस्पिटल में पेट स्कैन मशीन का शुभारंभ करने के साथ हॉस्पिटल का अवलोकन भी किया

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नवनिर्मित अपोलो हॉस्पिटल का किया अवलोकन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कैंसर यूनिट और पेट स्कैन मशीन का किया शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हॉस्पिटल में पेट स्कैन मशीन का शुभारंभ करने के साथ हॉस्पिटल का अवलोकन भी किया जबलपुर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि अपोलो हॉस्पिटल, जबलपुर सहित मध्य भारत के लिए स्वास्थ्य जगत के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने संस्कारधानी को मिली अपोलो हॉस्पिटल की श्रृंखला की सौगात को संपूर्ण महाकौशल के लिए बड़ी उपलब्धि बताया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को जबलपुर पाटन बायपास स्थित नवनिर्मित अपोलो जेबीपी हॉस्पिटल के कैंसर यूनिट के लोकार्पण समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हॉस्पिटल में पेट स्कैन मशीन का शुभारंभ करने के साथ हॉस्पिटल का अवलोकन भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपोलो जेबीपी हॉस्पिटल के प्रबंधक बड़ेरिया परिवार की प्रशंसा की। उन्होंने ने कहा कि कोरोना काल में स्वास्थ्य के क्षेत्र में उनके द्वारा दी गई सेवाएं अविस्मरणीय हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं से लैस हॉस्पिटल में स्थापित राधाकृष्ण जी की प्रतिमा की पूरे विधि विधान से पूजा अर्चना की। इस अवसर पर लोक निर्माण मंत्री श्री राकेश सिंह, सांसद श्री आशीष दुबे, महापौर श्री जगत बहादुर सिंह अन्नू, विधायक पनागर श्री सुशील तिवारी इंदु, जबलपुर केंट के विधायक श्री अशोक रोहाणी, जबलपुर उत्तर के विधायक डॉ. अभिलाष पांडे, विधायक सिहोरा श्री संतोष वरकड़े, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती आशा मुकेश गोटिया, भाजपा के नगर अध्यक्ष श्री रत्नेश सोनकर, भाजपा के ग्रामीण अध्यक्ष श्री राजकुमार पटेल, पूर्व महापौर श्री प्रभात साहू, पूर्व विधायक श्री नीलेश अवस्थी, डॉ. जितेंद्र जामदार, कलेक्टर दीपक सक्सेना, पुलिस अधीक्षक संपत उपाध्याय, निगमायुक्त श्रीमती प्रीति यादव, अस्पताल प्रबंधन के सौरभ बड़ेरिया, डॉ. राजीव बड़ेरिया, शोभित बड़ेरिया एवं डॉ. सुनील मिश्रा सहित अस्स्पताल के चिकित्सक, स्टॉफ व आमजन उपस्थित रहे।  

जल्द मध्‍य प्रदेश में विधायकों को दिया जा सकता है एक और कर्मचारी

भोपाल मध्य प्रदेश के सभी विधायकों को अभी विधायी और क्षेत्र की जनता से जुड़े कामकाज के लिए एक सरकारी कर्मचारी दिया जाता है। इनके बीमार होने या अन्य कारण से अवकाश पर चले जाने के कारण कार्य प्रभावित होता है। इसे देखते हुए विधानसभा की सदस्य सुविधा समिति ने विधायकों को एक-एक कर्मचारी और दिए जाने की सरकार से अनुशंसा की है। सामान्य प्रशासन विभाग समिति यह प्रस्ताव विचार करने के लिए उच्च स्तर पर भेजेगा। विधायकों को विधानसभा सत्र के दौरान प्रश्न या अन्य सूचनाओं समय पर विधानसभा सचिवालय भेजनी होती है।       पूरी व्यवस्था ऑनलाइन हो चुकी है। इसी तरह, स्वेच्छानुदान और निर्वाचन क्षेत्र विकास निधि से जुड़े कामों को लेकर पत्राचार करना होता है।     चूंकि, विधायक क्षेत्र के दौरे पर रहते हैं, इसलिए इस कार्य के लिए उन्हें सहायक की आवश्यकता होती है।     इसे देखते हुए सरकार ने जिला स्तर पर एक तृतीय श्रेणी कर्मचारी विधायकों को देने की व्यवस्था बनाई है।     1995 में इसको लेकर सामान्य प्रशासन विभाग ने परिपत्र भी जारी किया।     विधायकों ने सदस्य सुविधा समिति के समक्ष यह मांग रखी कि वर्तमान संदर्भ में काम बढ़ गया है।     केंद्र और राज्य सरकार की तमाम योजनाएं हैं, जिन्हें लेकर पत्राचार करने होते हैं।     विधायक कई समितियों के सदस्य भी होते हैं। ऐसे में एक कर्मचारी अपर्याप्त है।     वह कार्यालयीन समय के बाद चला जाता है या अवकाश पर होता है तो काम प्रभावित हो जाता है।     इसे देखते हुए एक कर्मचारी और दिया जाना चाहिए।     समिति ने मांग को व्यावहारिक मानते हुए सरकार से अनुशंसा की है कि विधायकों को एक-एक कर्मचारी और दिया जाए।     सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारियों के साथ ही समिति की बैठक में इस पर चर्चा भी हो चुकी है।     नीतिगत मामला होने के कारण यह प्रस्ताव मुख्यमंत्री तक जाएगा और अंतिम निर्णय होगा।  

इन्वेस्ट इन एमपी सत्र में प्रमुख उद्योग समूह होंगे शामिल

मुख्यमंत्री डॉ. यादव 14 मई को बेंगलुरु में इन्वेस्ट इन मध्यप्रदेश रोड शो में निवेशकों से होंगे रूबरू  इन्वेस्ट इन मध्यप्रदेश रोड शो में बीईएमएल के साथ औद्योगिक साझेदारी को मिलेगा नया विस्तार इन्वेस्ट इन एमपी सत्र में प्रमुख उद्योग समूह होंगे शामिल भोपाल मध्यप्रदेश में औद्योगिक निवेश को नई ऊंचाई देने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 14 मई को बेंगलुरु में सीइन्वेस्ट इन एमपीसी सत्र में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बीईएमएल (भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड) परिसर का भ्रमण करेंगे, साथ ही 2100वें मेट्रो कोच के लोकार्पण समारोह में सम्मिलित होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव, ‘इन्वेस्टमेंट अपॉर्च्युनिटीज़ इन मध्यप्रदेश’ विषय पर आयोजित इन्टरैक्टिव सेशन को संबोधित कर राज्य की औद्योगिक क्षमताओं और नीतिगत प्रतिबद्धताओं को देश के अग्रणी निवेशकों के समक्ष प्रस्तुत करेंगे। बीईएमएल परिसर में रहेगा कार्यक्रमों का सिलसिला मुख्यमंत्री डॉ. यादव बेंगलुरु पहुंचने के बाद बीईएमएल परिसर जाएंगे, जहां उनका स्वागत बीईएमएल के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक और बोर्ड के सदस्यों द्वारा किया जाएगा। बीईएमएल शॉप विज़िट के बाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव मेट्रो कोच लोकार्पण और टेस्ट राइड में सम्मिलित होंगे। इसके उपरांत वे इंटीग्रेटेड डिज़ाइन सेंटर का भ्रमण करेंगे और बीईएमएल के भोपाल संयंत्र पर प्रस्तुति देखेंगे। बीईएमएल द्वारा मध्यप्रदेश में स्थापित की जा रही इकाई के लिए ज़मीन आवंटन पत्र सौंपे जाने की औपचारिकता भी इस अवसर पर होगी। बेंगलुरु में ‘इन्वेस्ट इन एमपी’ सत्र में होगा राज्य की औद्योगिक ताकत का प्रदर्शन ‘द लीला पैलेस’ में आयोजित इन्टरैक्टिव सत्र में मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रमुख उद्योग समूहों, निवेशकों और टेक्नोलॉजी कंपनियों से संवाद करेंगे। इस सत्र में मध्यप्रदेश की औद्योगिक नीतियों, अधोसंरचना और क्षेत्रवार निवेश अवसरों पर विभिन्न विभागों द्वारा प्रस्तुतियाँ दी जाएंगी। प्रमुख सचिव, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन श्री राघवेंद्र सिंह, अतिरिक्त मुख्य सचिव विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग श्री संजय दुबे तथा प्रमुख सचिव संस्कृति एवं पर्यटन श्री शिव शेखर शुक्ला शामिल मध्यप्रदेश में निवेश के अवसरों पर निवेशकों जानकारी देंगे । निवेशकों के साथ होंगे वन-टू-वन मीटिंग मुख्यमंत्री डॉ. यादव निवेशकों के साथ वन-टू-वन बैठकों के माध्यम से सीधे संवाद करेंगे। इन संवादों में आईटी, इलेक्ट्रॉनिक्स, मैन्युफैक्चरिंग, डिफेंस, ऑटोमोबाइल, टूरिज्म और टेक्नोलॉजी सेक्टर के प्रमुख निवेशक शामिल होंगे। मध्यप्रदेश बन रहा है ‘मेक इन इंडिया’ का भरोसेमंद प्लेटफॉर्म मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश लगातार एक मजबूत औद्योगिक आधार तैयार कर रहा है। देश के बड़े औद्योगिक समूहों के साथ संवाद की यह श्रृंखला राज्य को निवेश के नए क्षितिज की ओर ले जा रही है, जहां नीति, संसाधन और नेतृत्व तीनों ही स्तर पर उद्योगों को सुरक्षित और गतिशील मंच प्राप्त हो रहा है। भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (BEML) भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत एक प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम है, जो मेट्रो रेल कोच, रक्षा उपकरण, खनन एवं निर्माण मशीनरी के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। बेंगलुरु स्थित इसका विनिर्माण परिसर आधुनिक इंजीनियरिंग और स्वदेशी तकनीक का प्रतिनिधित्व करता है, और यह आत्मनिर्भर भारत के विजन में महत्त्वपूर्ण भागीदार है।  

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मेडिसिटी निर्माण को देख शहर को मेडिकल टूरिज्म हब के रूप में प्लानिंग कर विकास कार्य करने के निर्देश दिए

 उज्जैन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव(CM Mohan Yadav) ने उज्जैन को एक बार बड़ी सौगात दी है। उन्होंने दो एलिवेटेड कॉरिडोर(Elevated Corridors) बनाने की सैद्धांतिक सहमति दी है। यह कॉरिडोर मकोड़िया आम चौराहे से चामुंडा चौराहे, रेलवे स्टेशन होते हुए हरिफाटक ब्रिज और निकास चौराहे से दौलतगंज होते हुए इंदौरगेट बनेंगे। सिंहस्थ में यात्रियों के लिए रेलवे स्टेशनों के बीच समानांतर फोरलेन योजना बनाने को कहा। मेडिसिटी निर्माण को देख शहर को मेडिकल टूरिज्म हब के रूप में प्लानिंग कर विकास कार्य करने के निर्देश दिए हैं। कार्यों की मॉनिटरिंग आधुनिक तकनीक से करने के निर्देश सीएम ने  सिंहस्थ 2028 की तैयारियों को लेकर समीक्षा की। अधिकारियों से कहा कि सभी कार्य समय सीमा में गुणवत्ता और मापदंड के अनुसार हों। एजेंसियां समन्वय बनाकर कार्य करे। उन्होंने सिंहस्थ निर्माण कार्यों में शहर के आसपास सड़कों का जाल बिछाकर यातायात सुगम करने और संपूर्ण मेला क्षेत्र की कनेक्टिविटी 4 और 6 लेन करने की जानकारी दी। सीएम ने कार्यों की मॉनिटरिंग आधुनिक तकनीक से करने को कहा। सिंहस्थ में 30 करोड़ श्रद्धालु आने का अनुमान सीएम बोले- हमने अधिकारियों को ये भी कहा कि इसके ऊपर पिलर और जोड़ दें, ताकि भविष्य में मेट्रो निकल सके। सिंहस्थ में करीब 30 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है। भीड़ प्रबंधन बड़ी चुनौती रहने वाली है। इसके लिए उज्जैन की चारों दिशाओं के मार्गों का विस्तार हो रहा है। आंतरिक मार्ग भी चौड़े हो रहे हैं। एलिवेटेड ब्रिज बनाकर भी भीड़ प्रबंधन की प्लानिंग की गई है। नागपुर में ऐसे एलिवेटेड ब्रिज हैं, जिनमें नीचे ट्रक-बस गुजरते हैं और ऊपर मेट्रो ट्रेन चलती है। लोनिवि की सेतु शाखा सर्वे कर सौपेंगी रिपोर्ट सीएम द्वारा एलिवेटेड ब्रिज की मंजूरी के बाद अब लोनिवि की सेतु शाखा का अमला जल्द ही शहर के कुछ मार्ग पर इनके निर्माण की संभावनाओं को तलाशेगा। कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने बताया कि मुख्य रूप से बुधवारिया से इंदौर गेट तक और मकोड़ियाआम नाका-इंदिरा नगर से रेलवे स्टेशन-हरिफाटक तक एलिवेटेड ब्रिज के लिए सर्वे किया जाएगा। इधर इसके अलावा इन ब्रिज से नीलगंगा-पेशवाई स्थल, मंछामन गणेश मंदिर क्षेत्र को भी जोड़ने के लिए सर्वे होगा। इसके बाद ही फाइनल हो पाएगा कि वास्तव में किस मार्ग पर ये एलिवेटेड ब्रिज बनेंगे, क्योंकि समय सीमा की भी चुनौती रहने वाली है। कलेक्टर ने यह भी बताया कि हवाई पट्टी का भी विस्तार किया जाना है। इसके लिए एयरपोर्ट अथॉरिटी सर्वे कर चुकी है। बुधवारिया से इंदौर गेट तक के मार्ग को चौड़ा करने के लिए नगर निगम की टीम ने सर्वे कर लिया था। इसमें बड़ी संख्या में मार्ग के दोनों तरफ के व्यापारी प्रभावित हो रहे थे। चूंकि, अब इस मार्ग के ऊपर एलिवेटेड ब्रिज की मंजूरी सीएम ने दे दी है तो चौड़ीकरण नहीं होगा। कोई टूट-फूट नहीं होगी। बोले कि जब हमारे प्रधानमंत्री एक भी सैनिक को पार कराए बगैर रावलपिंडी में अटैक कर सकते हैं तो हमने भी सोचा कि निकास चौराहा (बुधवारिया) से इंदौर गेट तक बगैर किसी मकान को हाथ लगाए ऊपर रोड-ब्रिज बना दिए जाएं, ताकि नीचे कारोबार होता रहे और ऊपर से बस-ट्रक गुजरते रहे। इससे अच्छा क्या प्लान हो सकता हैं। ये हमारे शहर का सर्वाधिक व्यस्ततम मार्ग भी है। नीचे महाकाल की सवारी, जलसे-जुलूस निकलेंगे और ऊपर से वाहन गुजरते रहेंगे। तैयारी के निर्देश     सभी मुख्य देवस्थानों को जल्द ही देवलोक के रूप में विकसित करने की कार्ययोजना बनाएं।     न्यायिक संस्था शुरू की जाएगी। कार्ययोजना पाइपलाइन में रखें।     इंदौर मेट्रोपॉलिटन सिटी की कार्ययोजना में उज्जैन में विकास कार्य का ब्लूप्रिंट तैयार करें।

सरकार ने ग्रीन सिटी पायलट प्रोजेक्ट सांची और खजुराहो में शुरू कर दिया, जल्द ही अन्य नगरों में भी काम शुरू हो जाएगा

भोपाल  मध्यप्रदेश में दो वर्ष के अंदर 10 शहरों को ग्रीन सिटी(Green Cities) के तौर पर विकसित करने की कोशिश है। इसके लिए मुख्यत: हेरिटेज टाउन, पर्यटन स्थल और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय महत्त्व के नगरों को चुना जाएगा। इन नगरों में 75% नवीकरणीय ऊर्जा (आरई) का उपयोग किया जाएगा। सरकार ने पायलट प्रोजेक्ट सांची और खजुराहो में शुरू कर दिया है। जल्द ही अन्य नगरों में भी काम शुरू हो जाएगा। ग्रीन सिटी के तौर पर विकास के लिए नगरों के चयन की प्रक्रिया जारी है। इसमें महेश्वर, चंदेरी, मांडू, ओरछा, अमरकंटक, भीमबेटका, ओंकारेश्वर, चित्रकूट जैसे नगरों के चयन पर विचार चल रहा है। नवीकरणीय ऊर्जा नीति 2025 की गाइडलाइन में इस संबंध में प्रावधान किया गया है। नवीकरणीय ऊर्जा विभाग के एसीएस मनु श्रीवास्तव के अनुसार चयनित नगरों में सालभर घरेलू व व्यावसायिक उपभोक्ता जितनी बिजली का उपयोग करते हैं उसका 75त्न हिस्सा नवीकरणीय ऊर्जा से सप्लाई करने की व्यवस्था बनाई जाएगी। धार्मिक, सांस्कृतिक महत्त्व के भवनों में शत प्रतिशत नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग होगा। 6 किलोवाट से अधिक लोड वाले उपभोक्ता आरई पर होंगे शिफ्ट अधिकारियों के अनुसार ग्रीन सिटीज में 6 किलोवाट से अधिक लोड के कनेक्शन वाले उपभोक्ताओं को नवीकरणीय ऊर्जा पर शिफ्ट किया जाएगा। उन्हें प्रोत्साहित किया जाएगा। नीति के तहत सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी। धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों के लिए १००त्न नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग अनिवार्य होगा। स्कूल, राशन दुकान, आंगनबाड़ी, स्वास्थ्य केंद्र आदि में जहां सुबह 6 से रात 8 बजे तक काम होता है, वहां भी नवीकरणीय ऊर्जा की सप्लाई होगी। इस तरह बदलेंगे ग्रीन सिटी में     इन नगरों में अलग ग्रीन सबस्टेशन बनाए जाएंगे।     हॉकर्स और वेंडर्स भी सोलर लैंटर्न का उपयोग करेंगे, इसके लिए सहायता भी मिलेगी।     सभी स्ट्रीट लाइट्स सोलर से संचालित होंगी। इन्हें ग्रीन स्ट्रीट्समें बदला जाएगा।     रहवासी समितियां और बहुमंजिला भवनों में कॉमन एरिया में नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग बढ़ेगा।     6 किलोवाट से अधिक लोड वाले घरेलू और व्यावसायिक उपभोक्ताओं को अपनी छत पर उपयोग किए जा रहे लोड के 50 फीसदी क्षमता का सोलर रूफ टॉप लगानाअनिवार्य होगा।     ग्रीन सिटीज में इलेक्ट्रिक व्हीकल को बढ़ावा दिया जाएगा। चार्जिंग स्टेशनों को भी 50 फीसदी बिजली नवकरणीय स्रोतों से लेना होगी।     ग्रीन सिटीज में कम्युनिटी बेस्ड रीन्यूवेबल फार्मिंग को बढ़ावा देकर वहां आरई पावर प्लांट लगाया जाएगा। इसे पॉलिसी के तहतइंसेंटिव और सब्सिडी मिलेगी।     इसी प्रकार कम्युनिटी बेस्ड बायोगैस प्लांट भी विकसितकिए जाएंगे। इसे भी सरकारइंसेंटिव देगी।

एमपी में मृतक खा गए करोड़ों का गेहूं-चावल, जांच में हुआ बड़ा खुलासा

 गुना मध्यप्रदेश के गुना शहर के वार्ड आठ में रहने वाली कला बाई, लक्ष्मण सिंह अब इस संसार में नहीं हैं। इसी तरह बमोरी के प्रेमा, प्रताप, और मारकीमहू की पिंकी भी दुनिया छोड़कर जा चुक है। लेकिन इन लोगों के नाम से आज भी प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना(Pradhan Mantri Garib Kalyan Yojana) का राशन जारी होता रहा। जिले में ऐसे कई मामले हैं जहां इस प्रकार का फर्जीवाड़ा किया जा रहा है। जिले में 4989 मृतकों के नाम राशन जारी होने की जानकारी सामने आई है। इससे महीने करीब 8.43 लाख रुपए चपत सरकार को लग रही है। यह स्थिति पिछले तीन से चार साल से चल रही है। लेकिन कभी विभाग की नजर में यह नहीं आया। केंद्र सरकार ने स्मार्ट पीडीएस सिस्टम लागू कराने के लिए जैसे ही उपभोक्ताओं की ईकेवायसी कराई तो पूरी गड़बड़ी सामने आ गई। इसके बाद अब ऐसे लोगों के नाम उड़ाए जा रहे हैं, जिनका निधन हो चुका है, लेकिन उनके परिवार के सदस्य इनके नाम से राशन ले रहे थे। इस तरह एक साल में एक करोड़ से अधिक की चपत शासन को लग रही थी। अगर पिछले पांच साल की स्थिति देखे तो तीन से चार करोड़ रुपए का नुकसान सरकार को उठाना पड़ा है। इस तरह पकड़ी गई पूरी गड़बड़ी दरअसल केंद्र सरकार ने पीडीएस सिस्टम को ऑनलाइन करने को लेकर स्मार्ट राशन व्यवस्था लागू की है। इसके तहत जिले के प्रत्येक वह व्यक्ति जिसके नाम से राशन जारी होता है, उसकी बायोमैट्रिक ईकेवायसी होनी है। यह प्रक्रिया जिले में पिछले दो साल से चल रही है। इस दौरान जिला आपूर्ति विभाग का अमला, पंचायत के कर्मचारी और मैदानी अमला जांच कर रहा है। परिवार के यहां पहुंचकर जब सभी सदस्यों की जानकारी ली जाती है तो पता चलता है कि कई लोगों की मौत हो चुकी है, लेकिन किसी ने भी पात्रता पर्ची से नाम नहीं कटवाया है। इस वजह से राशन जारी होता रहा। हालांकि जिले में दिवंगत 4989 लोगों के नाम से राशन जारी होता रहा। यह स्थिति लंबे समय से चल रही है। मृतकों की संख्या हर साल बढ़ती गई, लेकिन पात्रता पर्ची से नहीं घटी। इसलिए इन सभी के नाम अब उड़ा दिए गए हैं। शहर से लेकर गांव तक फैला है जंजाल शहर के वार्ड क्रमांक आठ में कला बाई, लक्ष्मण की डेढ़ साल पहले ही मौत हो चुकी है। लेकिन इनके नाम से राशन जारी हो रहा था। इसी तरह मारकीमहू बाली बाई, पिंकी का भी निधन हो चुका है, लेकिन परिवार के लोग राशन ले रहे थे। वहीं बमोरी के डोगरी में प्रेमा, करोला में प्रताप के नाम से भी राशन जारी होता रहा, जबकि इनका निधन काफी समय पहले हो चुका है। फर्जीवाड़े का पूरा गणित गरीब कल्याण योजना के तहत जिले भर में 2 लाख 17 हजार परिवारों को मुत अनाज दिया जाता है। इन परिवारों में सदस्य संया 9 लाख 50 हजार है। इस तरह प्रत्येक सदस्य के नाम पर दो किलो गेहूं और तीन किलो चावल दिए जाते हैं। वहीं एक रुपए किलो नमक दिया जाता है। शासन द्वारा प्रत्येक सदस्य को 30 रुपए किलो कीमत का गेहूं और 40 रुपए किलो कीमत का चावल मुत दिया जाता है। इस तरह एक सदस्य पर प्रतिमाह 170 रुपए खर्च किए जाते हैं। लेकिन जिले में 4989 सदस्यों जो मृत हो चुके हैं, उनके नाम पर भी राशन जारी हुआ। इस तरह इन मृत सदस्यों के राशन पर शासन ने हर माह 8.43 लाख रुपए खर्च किए। अगर साल का आंकड़ा देखें तो यह एक करोड़ से अधिक पर पहुंच जाता है। इस तरह यह गड़बड़ी पिछले तीन से चार साल से चल रही है। केंद्र सरकार का स्मार्ट पीडीएस सिस्टम लागू होने वाला है, इस दौरान हर परिवार के सदस्यों की ईकेवायसी कराई जा रही है। इसी दौरान पता चला है कि दिवंगत लोगों के नाम से भी परिवार के लोगों ने राशन ले लिया है। अब इनके नाम काटे जा रहे हैं। वहीं लोगों से अपील की गई है कि वह अपनी पात्रता पर्ची को दुरुस्त कराएं।- अवधेश पांडे, जिला आपूर्ति अधिकारी

महाकाल मंदिर के लड्डू की मांग राेज 30 क्विवंटल, प्रसाद पैकेट के लिये 5 करोड़ का टेंडर

उज्जैन ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में भक्तों को 400 रुपये किलो का लड्डू प्रसाद 500 रुपये किलो में खरीदना पड़ रहा है। वजह काउंटरों पर अधिकांश समय सिर्फ 100 और 200 ग्राम के पैकेट ही उपलब्ध रहते हैं। इनकी कीमत क्रमश: 50 व 100 रुपये है। वजन के हिसाब से प्रसाद की कीमत देखें तो यह 500 रुपये किलो पड़ता है। भक्तों की संख्या बढ़ी तो गायब हो गए बड़े पैकेट     महाकालेश्वर मंदिर समिति महाकाल के लड्डू प्रसाद के रूप में शुद्ध देशी घी से निर्मित बेसन के लड्डू विक्रय करती है। मंदिर परिसर व महाकाल महालोक के काउंटरों से लड्डू प्रसाद का विक्रय किया जाता है।     समिति 100, 200, 500 ग्राम तथा एक किलो के पैकेट में प्रसाद का विक्रय करती है। इनकी कीमत क्रमश: 50,100,200 व 400 रुपये है। 100 व 200 ग्राम के छोटे पैकेट में प्रसाद 500 रुपये किलो पड़ता है।     500 ग्राम व 1 किलो के पैक में प्रसाद की कीमत 400 रुपये किलो आती है। जब लड्डू प्रसाद का दाम 400 रुपये किलो निर्धारित किया गया था। उस समय काउंटरों पर चारों पैक में प्रसाद उपलब्ध रहता था, लेकिन धीरे-धीरे समिति ने आधा किलो व एक किलो के पैकेट में प्रसाद का विक्रय बंद कर दिया।     दिखावे के लिए काउंटरों पर आधा किलो व एक किलो के पैकेट रखे जाने लगे। जैसे-जैसे भक्तों की संख्या बढ़ी मंदिर प्रशासन ने बड़े पैक में प्रसाद गायब ही कर दिया। इन दिनों काफी समय से बड़े पैक में प्रसाद उपलब्ध नहीं है। इसका कारण समय पर कच्चे माल की उपलब्धता नहीं होना बताया जा रहा है। मांग और पूर्ति में अंतर महाकाल मंदिर में लड्डू प्रसाद की कमी को मांग और पूर्ति में अंतर को बताया जा रहा है। अब यह किल्लत कच्चे माल की कमी के कारण हो रही है या समय पर हलवाई लड्डू प्रसाद तैयार नहीं कर पा रहे हैं। बताया जाता है हाथ से लड्डू बनाने तथा पैकिंग करने में समय लगता है। बावजूद इसके मंदिर समिति आधुनिक प्लांट नहीं लगा रही है। मशीन से लड्डू बनाने की योजना खटाई में महाकाल मंदिर में सिंहस्थ 2028 को देखते हुए अन्नक्षेत्र परिसर में अत्याधुनिक लड्डू प्रसाद इकाई का निर्माण किया जा रहा था। इसमें मशीन से लड्डू बनाने का अत्याधुनिक प्लांट भी स्थापित किया जाना था। आधुनिक यूनिट का आधार भाग तैयार भी हो गया था लेकिन अचानक मंदिर समिति ने यह प्लान कैंसिल कर दिया। लड्डू प्रसाद निर्माण का कभी टेंडर नहीं होता महाकाल मंदिर समिति सफाई, सुरक्षा, खाद्य सामग्री, कर्मचारियों की आउटसोर्सिंग भर्ती का साल दो साल में टेंडर जारी करती है। जिस प्रकार मंदिर की यह सभी व्यवस्था टेंडर प्रक्रिया के जरिए चलती है, उसी प्रकार लड्डू प्रसाद निर्माण का भी टेंडर होना चाहिए। पहली बार टेंडर प्रक्रिया के जरिए ही हलवाई को लड्डू बनाने का ठेका दिया गया था। उसके बाद से लड्डू प्रसाद निर्माण टेंडर प्रक्रिया से बाहर हो गया। बताया जाता है मंदिर समिति हर बार हलवाई का अनुबंध बढ़ा देती है। चार दिन पहले हुए प्रबंध समिति की बैठक में फैसिलिटी मैनेजमेंट का तो टेंडर जारी हुआ, लेकिन लड्डू प्रसाद निर्माण का टेंडर करने की बजाय फिर से अनुबंध बढ़ा दिया गया। समिति ने इसकी जानकारी भी मीडिया से साझा नहीं की है। उज्जैन के श्री महाकाल मंदिर की प्रबंध समिति ने लड्डू प्रसाद के पैकेट के लिये 5 करोड़ रुपए का टेंडर निकाला है। मंदिर के लड्‌डू प्रसाद की देशभर में मांग है। रोज करीब 30 क्विवंटल लड्डू प्रसाद का निर्माण मंदिर समिति करती है और पूरा प्रसाद दर्शनार्थी खरीदकर ले जाते हैं। श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति ने 8 मई को लड्डू पैकेट के लिए टेंडर निकाला है। जिसमें एक साल के लड्डू पैकेट सप्लाई के लिए 5 करोड़ का प्रावधान रखा गया है। यह पैकेट प्रिंटेड होंगे जिसकी डिजाइन मंदिर प्रबंध समिति द्वारा तय की जायेगी। पिछले साल ही बदली थी लड्डू पैकेट की डिजाइन गौरतलब है कि पहले प्रसाद के पैकेट पर महाकाल शिखर और ओम की तस्वीर होती था। हांलाकि, इस डिजाइन पर विवाद होने के बाद मंदिर समिति ने इसे बदलकर पैकेट पर फूल का फोटो लगाया था। इसे एक बार फिर बदल दिया गया है और नई डिजाइन के साथ पैकेट जारी किया गया है। बता दें कि प्रसाद के पैकेट की पुरानी डिजाइन पर कुछ साधु, संतों एवं धार्मिक संगठनों ने आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि प्रसाद के पैकेट को फेंक दिया जाता है, ऐसे में धार्मिक प्रतीकों का अपमान होता है, इसलिए पैकेट की डिजाइन बदल दी जाए। इस पर इंदौर हाईकोर्ट ने मंदिर समिति को 3 महीने में मामले का समाधान करने का निर्देश दिया था। इसके बाद मंदिर समिति ने लड्डू प्रसाद के पैकेट की डिजाइन बदल दी  थी। हर दिन करीब 30 क्विंटल लड्डू बनते हैं सूत्रों के मुताबिक श्री महाकालेश्वर मंदिर की लड्डू निर्माण ईकाई में हर दिन करीब 30 क्विंटल लड्डू बनते हैं। और रोज ही इतने लड्डू की खपत हो जाती है। विशेष पर्व जैसे सावन सोमवार, महाशिवरात्रि व अन्य मौकों पर 50-65 क्विंटल लड्डू तैयार किए जाते हैं। इनकी भी एक दिन में खपत हो जाती है। लड्डूओं के 100 ग्राम, 200 ग्राम, 500 ग्राम और एक किलो के पैकेट तैयार किए जाते हैं। जिन्हें भक्त 50, 100, 200 और 400 रुपये में खरीदते हैं। साल 2024 में 53 करोड़ का प्रसाद बिका था श्री महाकालेश्वर मंदिर का  लड्डू प्रसाद देशभर में प्रसिद्ध है। प्रसाद की गुणवत्ता को देखते हुए एफसीसीसीआई से भी फाइव स्टार रेटिंग की गई है। लंबे समय तक प्रसाद की गुणवत्ता बरकरार रहती है। साल 2024 में जनवरी से 13 दिसंबर तक मंदिर को कुल आय 165 करोड़ रुपये से अधिक हुई थी, जिसमें लड्डू  प्रसादी से करीब  53 करोड़ 50 लाख रुपये की आय शामिल थी।

नई दिल्ली ने मॉस्को से एस-400 की और खेप की डिलीवरी की मांग रखी, रूस निकट भविष्य में मंजूरी दे सकता है

नई दिल्ली ऑपरेशन सिंदूर के दौरान S-400 एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम ने अहम भूमिका निभाई। इसे देखते हुए भारत ने रूस से इस प्लेटफॉर्म की अतिरिक्त यूनिट्स की अपील की है। नई दिल्ली ने मॉस्को से एस-400 की और खेप की डिलीवरी की मांग रखी है। इस तरह वायु रक्षा क्षमताओं का विस्तार करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सूत्रों से यह संकेत मिला कि रूस निकट भविष्य में इस अपील को मंजूरी दे सकता है। रूस में बना S-400 सिस्टम भारतीय सेना में पहले से ही तैनात है। हाल के संघर्ष के दौरान पाकिस्तान की ओर से दागी गई मिसाइलों और ड्रोनों को रोकने में इसने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। रूस का S-400 एयर डिफेंस सिस्टम विश्व की सबसे उन्नत प्रणालियों में से एक है, जिसे विभिन्न हवाई खतरों जैसे विमान, ड्रोन, क्रूज मिसाइल और बैलिस्टिक मिसाइलों को नष्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है। यह सिस्टम 600 किमी तक टारगेट को ट्रैक और 400 किमी की रेंज में उन्हें नष्ट कर सकता है। इसका अपडेटेड फेज्ड-ऐरे रडार एक साथ 100 से अधिक लक्ष्यों को ट्रैक करता है। S-400 चार प्रकार की मिसाइलें दाग सकता है, जो विभिन्न दूरी और ऊंचाई पर खतरों का मुकाबला करती हैं। भारत ने 2018 में रूस के साथ 5.43 बिलियन डॉलर में 5 S-400 यूनिट्स का सौदा किया, जिनमें से पहली 2021 में पंजाब में तैनात की गई। सीमा सुरक्षा के लिए S-400 सिस्टम कितना अहम ऑपरेशन सिंदूर के दौरान S-400 ने भारत की वायु रक्षा में बेहद खास भूमिका निभाई। पाकिस्तान की ओर से दागी गई मिसाइलों व ड्रोनों को रोकने और विफल करने में इसकी सटीकता काम आई। एस-400 के चलते पाकिस्तानी जेट विमानों और मिसाइलों को मिशन रद्द करने या मार्ग बदलने के लिए मजबूर होना पड़ा। ऐसी स्थिति में उसके हमले की योजनाओं को गंभीर झटका लगा। S-400 ने पश्चिमी सीमा से आने वाले हवाई खतरों को त्वरित और प्रभावी ढंग से नष्ट किया, जिससे भारत की रक्षा क्षमता मजबूत हुई। इस शानदार प्रदर्शन ने ही भारत को अतिरिक्त S-400 यूनिट्स के लिए रूस से अपील को प्रेरित किया। एस-400 की तैनाती ने न केवल भारत के रक्षा ढांचे को मजबूती दी, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता में भी योगदान दिया।

मुख्यमंत्री ने की पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण तथा विमुक्त, घुमन्तु और अर्द्ध घुमन्तु विभाग के कार्यों की समीक्षा

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि विमुक्त, घुमन्तु और अर्द्ध घुमन्तु समुदायों की प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करें। समुदाय के अनेक विद्यार्थियों ने लोक सेवा आयोग जैसी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त की है। प्रदेश के विभिन्न जिलों में इनका निवास है। इनकी पुरानी पृष्ठभूमि अथवा पूर्व धारणा के आधार पर इन जातियों के सभी लोगों को अपराधी ना माना जाए। पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई में भी जातिगत संबोधन से संबोधित ना किया जाए। अपराधियों की जानकारी में जातियों का उल्लेख नहीं किया जाएं। इस तरह की असम्मानजनक शब्दावली से बचा जाना चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंगलवार को समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) में विभाग की बैठक में इस संबंध में निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जिला स्तर पर पुलिस प्रशासन द्वारा इन जातियों के ऐसे लोगों को अपराधों से विमुख करने के लिए प्रयास किया जाए जो विभिन्न कारणों से अपराधों से जुड़ जाते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राजगढ़ जिले में पुलिस प्रशासन द्वारा सांसी जाति के कल्याण के लिए किए गए कार्यों की सराहना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पिछड़ा वर्ग के कल्याण के कार्यों को प्रभावी रूप से संपादित करने के निर्देश दिए। उन्होंने विभिन्न छात्रवृतियों की राशि शैक्षणिक सत्र के दौरान ही वितरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण, विमुक्त, घुमन्तु और अर्द्ध घुमन्तु कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर ने कहा कि आगामी शिक्षण सत्र में विभिन्न जिलों में पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों के छात्रवृत्ति वितरण के कार्य तय समय में किया जाएगा। इस बारे में विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया गया है। उन्होंने अन्य पिछड़ा वर्ग छात्रावासों में मेस सुविधा संचालन की स्वीकृति दिए जाने पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पहली बार अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रावासों में मेस संचालन शुरू होगा। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने कहा कि दिल्ली छात्र गृह योजना में वर्तमान में स्वीकृत 50 सीट की वृद्धि कर 150 सीट किया जाना प्रस्तावित किया गया है। उन्होंने कहा कि विभिन्न कन्या छात्रावास में बाउंड्री वॉल का निर्माण पूर्ण होने तक कांटेदार फेंसिंग की जाए। वक्फ सम्पत्तियों के डिजिटलाइजेशन में मध्यप्रदेश बन रहा है मॉडल राज्य मंत्री श्रीमती गौर ने बताया कि प्रदेश की वक्फ समितियों का डिजिटलाइजेशन राजस्व विभाग के सहयोग से किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश वक्फ समितियों के डिजिटलाइजेशन सहित अन्य कार्यों में मध्यप्रदेश मॉडल के रूप में कार्य कर रहा है। बैठक में प्रमुख सचिव श्री ई. रमेश कुमार ने अन्य पिछड़ा वर्ग कल्याण के विद्यार्थियों के लिए छात्रावासों के निर्माण, छात्रवृत्ति राशि के वितरण और अन्य योजनाओं की जानकारी दी। संचालक विमुक्त, घुमन्तु और अर्द्ध घुमन्तु कल्याण श्री नीरज वशिष्ठ ने जानकारी दी कि प्रदेश में विमुक्त, घुमन्तु और अर्द्ध घुमन्तु समुदाय की 51 जातियां हैं। इन जातियों में 14 जातियां अनुसूचित जाति वर्ग, 10 जातियां अन्य पिछड़ा वर्ग और 27 जातियां सामान्य वर्ग की श्रेणी में आती हैं। उन्होंने कहा कि इन सभी जातियों को विमुक्त, घुमन्तु और अर्द्ध घुमन्तु समुदाय की जाति का प्रमाण पत्र दिया जाता है और विमुक्त, घुमन्तु और अर्द्ध घुमन्तु समुदाय के लिए संचालित योजनाओं से लाभान्वित भी किया जा रहा है। बैठक में अन्य पिछड़ा वर्ग के संचालित विभिन्न स्वरोजगार योजनाओं और सामुदायिक विकास कार्यक्रमों पर भी चर्चा की गई। बैठक में मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री कार्यालय) डॉ. राजेश राजौरा, आयुक्त अन्य पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण श्री सौरभ सुमन तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।  

केंद्रीय कृषि मंत्री चौहान ने जशप्योर ब्रांड के उत्पादों की सराहना की

रायपुर केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले की समृद्ध संस्कृति, परंपरा और स्वावलंबन की भावना से ओतप्रोत “जशप्योर” ब्रांड के उत्पादों की सराहना की।  केंद्रीय मंत्री चौहान ने “जशप्योर” के उत्पादों की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। ‘जशप्योर’ न केवल एक ब्रांड है, यह छत्तीसगढ़ी माटी की महक, आदिवासी बहनों की मेहनत और आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ का प्रतीक बन चुका है। उल्लेखनीय है कि मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने उन्हें जशपुर जिले के स्व सहायता समूह की महिलाओं के द्वारा तैयार की गई जशप्योर ब्रांड की खाद्य पदार्थों से सुसज्जित विशेष परंपरागत टोकरी भेंट की।छत्तीसगढ़ की पहचान बन चुके “जशप्योर” ब्रांड की यह टोकरी केवल उपहार नहीं थी, बल्कि आत्मनिर्भरता, परिश्रम और स्वदेशी कौशल का एक जीवंत प्रतीक थी। छींद कांसा की हस्तनिर्मित टोकरी में सजाए गए उत्पादों में डेकी, कुटा, जवां फूल चावल, टाऊ पास्ता, महुआ कुकीज, रागी, मखाना लड्डू, महुआ गोंद लड्डू, महुआ च्यवनप्राश, ग्रीन टी, शहद और हर्बल सिरप जैसे विविध उत्पाद शामिल थे।  केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने उत्पादों में गहरी रुचि दिखाई और प्रत्येक वस्तु की जानकारी बड़े उत्साह से ली। उन्होंने कहा कि इन उत्पादों में केवल स्वाद ही नहीं, बल्कि हमारे जनजातीय समुदाय का परिश्रम और गौरव झलकता है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस अवसर पर कहा कि हमारी सरकार प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जी के ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को आत्मसात करते हुए, ऐसे लोकल ब्रांड्स को सशक्त बना रही है जो न केवल आर्थिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देते हैं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक धरोहर को भी जीवंत बनाए रखते हैं। उन्होंने आगे कहा कि छत्तीसगढ़ की स्व सहायता समूहों की महिलाएं केवल उत्पाद नहीं बना रहीं, बल्कि आत्मनिर्भर  छत्तीसगढ़ की नींव गढ़ रही हैं।

मध्यप्रदेश के 2 और महाराष्ट्र के 3 ज्योतिर्लिंगों को मिलाकर सर्किट किया जाएगा विकसित:CM यादव

प्रधानमंत्री मोदी को मंत्रि-परिषद ने ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के लिए दी बधाई कम समय में तकनीकी श्रेष्ठता के साथ सेना द्वारा तीव्र गति से की गई कार्रवाई ने विश्व को भारत के बदलते दौर के नेतृत्व क्षमता से परिचित करवाया मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र की साझी ऐतिहासिक-सांस्कृतिक विरासत पर गतिविधियां होंगी संचालित:CM यादव मध्यप्रदेश के 2 और महाराष्ट्र के 3 ज्योतिर्लिंगों को मिलाकर सर्किट किया जाएगा विकसित:CM यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रि-परिषद की बैठक के पहले सदस्यों को किया संबोधित भोपाल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पाकिस्तान के विरुद्ध संचालित ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रि-परिषद की ओर से बधाई दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री मोदी, रक्षा मंत्री, केंद्रीय गृहमंत्री, भारतीय सेना और अर्ध सैनिक बलों के सभी जवानों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि तकनीक का उपयोग करते हुए, कम समय में तीव्र गति से की गई कार्रवाई से विश्व, भारत के बदलते दौर के नेतृत्व की क्षमता से परिचित हुआ है, यह सभी भारतवासियों के लिए सौभाग्य का विषय है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रि-परिषद की बैठक से पहले अपने संबोधन में मंत्रीगण को प्रदेश में गेहूं उपार्जन की स्थिति, महाराष्ट्र के साथ नदी जोड़ो अभियान के लिए हुए एमओयू, महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश द्वारा परस्पर समन्वय से आगामी दिनों में की जाने वाली सांस्कृतिक-धार्मिक व इतिहास केंद्रित गतिविधियों, प्रदेश में निवेश संवर्धन और औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार के लिए बेंगलुरु और इंदौर में होने वाले आयोजनों तथा 20 मई को इंदौर में होने वाली मंत्रि-परिषद की बैठक तथा विजन डॉक्यूमेंट@2047 पर चर्चा के संबंध में अवगत कराया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गेहूं उपार्जन में 5 मई तक प्रदेश के 3475 केंद्रों पर उपार्जन हुआ, इसमें 9 लाख किसानों की फसल का उपार्जन हुआ। प्रदेश में 77.74 लाख मैट्रिक टन गेहूं का उपार्जन किया गया, जिसमें से 74.42 लाख मीट्रिक टन भंडारण में आ गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि किसानों को अब तक 18 हजार 471 करोड़ रुपए का भुगतान भी किया जा चुका है। अब मात्र 400 करोड़ रुपए का भुगतान शेष है, जो शीघ्र कर दिया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस के साथ 10 मई को तापी बेसिन मेगा रिचार्ज योजना के संबंध में हुए एम.ओ.यू. की मंत्रि-परिषद को बधाई दी। उन्होंने जानकारी देते हुए कहा कि यह नदी जोड़ो अभियान का राज्य सरकार का तीसरा एम.ओ.यू. है। इस परियोजना से बुरहानपुर व खण्डवा जिले में भूजल में सुधार होगा। मध्यप्रदेश को 1 लाख 23 हजार हैक्टेयर और महाराष्ट्र को 2 लाख 37 हजार हैक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो सकेगी। इस परियोजना को राष्ट्रीय स्तर पर अंतर्राज्यीय योजना के रूप में भारत सरकार से स्वीकृत कराने के लिए त्रिपक्षीय समझौते पर सहमति बनी है। इसकी विशेषता यह होगी कि प्रदेश को परियोजना की मात्र 5 प्रतिशत राशि देनी होगी, शेष लागत केन्द्र सरकार द्वारा वहन की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र का साझा ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संदर्भ रहा है। दोनों राज्यों द्वारा बाजीराव पेशवा, तात्या टोपे, रानी लक्ष्मीबाई, अप्पाजी भोंसले इत्यादि के गौरवशाली अतीत की घटनाओं के इतिहास लेखन, दस्तावेज संकलन, डिजिटाइलिजेशन, मोढ़ी लिपि के संरक्षण, लोकमाता देवी अहिल्या बाई होल्कर के धार्मिक-प्रशासनिक अवदानों के संरक्षण के लिए कार्य करने पर सहमति हुई है। मध्यप्रदेश में उज्जैन और ओंकारश्वर के ज्योतिर्लिंग तथा महाराष्ट्र के 3 ज्योतिर्लिंग का सर्किट विकसित करने पर भी सहमति हुई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि शेगांव के गजानन ट्रस्ट द्वारा इच्छुक व्यक्तियों को सेवा का प्रशिक्षण देकर स्वयं सेवकों को सेवा और प्रबंधन के कार्य में लगाया जाता है। उनकी इस प्रणाली का लाभ महाकाल मंदिर प्रबंधन के लिए लेने पर भी विचार-विमर्श हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि शुक्रवार 16 मई को इंदौर में रीजनल ग्रोथ कॉन्क्लेव मैन मेड टेक्निकल टेक्सटाइल एक्सपो का आयोजन होने जा रहा है। इसी प्रकार 14 मई को बैंगलोर में निवेश संवर्धन के संबंध में संवाद होगा।  

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