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एमपी-यूपी इकोनॉमिक कॉरिडोर छतरपुर के लिए वरदान साबित, बुंदेलखंड के पिछड़े जिलों को लाभ मिलेगा

छतरपुर एमपी-यूपी इकोनॉमिक कॉरिडोर छतरपुर जिले के लिए वरदान साबित होने वाला है. इसके बनने से बुंदेलखंड के पिछड़े जिलों को इसका लाभ मिलेगा. इसके चलते अभी से जमीन के दाम बढ़ने लगे हैं. सागर- कानपुर फोरलेन के काम में लगातार रफ्तार बढ़ रही है.अधिकारियों ने भी अधिग्रहित की गई जमीनों का मुआवजा देना शुरू कर दिया है. 223 किमी लंबा फोरलेन हो रहा तैयार सागर से कबरई तक जाने वाला 223.7 किमी लंबा फोरलेन एमपी और यूपी के औद्योगिक शहरों को जोड़ने का काम करेगा. ये फोरलेन सागर से शुरू होकर बंडा, शाहगढ, बड़ामलहरा, छतरपुर, गढ़ीमलहरा, श्रीनगर और महोबा होते हुए बनाया जा रहा है. इस फोरलेन की अनुमानित लागत 2653 करोड़ रुपए है और भविष्य में इसे लखनऊ से जोड़ दिया जाएगा. आसमान छूने लगे जमीनों के दाम सागर से कानपुर तक बन रहा एमपी-यूपी इकोनॉमिक कॉरिडोर आने वाले दिनों में बुंदेलखंड के कुछ जिलों के लिए वरदान साबित होगा. इसका असर भी अब दिखने लगा है. छतरपुर जिले में जहां-जहां से फोरलेन निकलेगी, वहां के जमीनों के दाम आसमान छूने लगे हैं. आने वाले दिनों में छतरपुर केन्द्र बिंदु बनेगा तो छतरपुर से अयोध्या, बनारस, कानपुर और लखनऊ का सफर आसान हो जाएगा. एमपी-यूपी इकोनॉमिक कॉरिडोर के तहत सागर-कबरई फोरलेन प्रोजेक्ट का काम तेज गति से चल रहा है. इस हाईवे का बड़ा हिस्सा बुंदेलखंड से गुजर रहा है, इसलिए यहां के कई जिलों को बड़ा फायदा मिलेगा. छतरपुर की 4 तहसीलों से गुजरेगा हाईवे छतरपुर जिले की 4 तहसीलों से यह हाईवे गुजरेगा. जिसमें बड़ामलहरा, छतरपुर, महाराजपुर, नौगांव से होते हुए यूपी के महोबा, कबरई होते हुए निकलेगा. वहीं जिन लोगों की इस हाईवे में जमीन अधिग्रहण हुई है उनको सरकार के द्वारा मुआवजा मिलना शुरू हो गया है. हाईवे बनने के बाद जिले की तस्वीर और तकदीर बदलेगी. रोजगार के साधन आने की संभावना दिखाई दे रही तो बड़े बड़े शॉपिंग कॉम्प्लेक्स खुलने के असर भी बनेंगे. सागर से कबरई तक 5 फेज में हो रहा काम छतरपुर एसडीएम अखिल राठौर ने बताया कि “नेशनल हाईवे 34 पर सागर से कानपुर तक कबरई-सागर मार्ग पर फोरलेन बनाया जा रहा है. सागर से कबरई तक फोरलेन का काम 5 फेज में किया जा रहा है. फेज-2 में होने वाले निर्माण के लिए हीरापुर साठिया घाट इलाके में निर्माण कार्य भी तेजी से चल रहा है. वहीं फेज-1 में सागर से मोहारी तक काम जारी है, जो करीब 38 किलोमीटर का फोरलेन छतरपुर के बड़ामलहरा तक बन रहा है. इसी तरह 5वें फेज में यह काम पूरा होगा. सागर से कानपुर तक फोरलेन हाईवे बनाने के लिए अप्रैल 2023 में डीपीआर मंजूर हुआ था और इसे साल 2026 तक तैयार करना है लेकिन 2027 तक इसके पूरा होने की संभावना बताई जा रही है.” इन कंपनियों को मिला ठेका इस प्रोजेक्ट की आधारशिला केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने जनवरी 2023 में रखी थी. एनएचएआई ने साल 2026 तक इस प्रोजेक्ट को पूरा करने का लक्ष्य रखा है. इस प्रोजेक्ट के तहत 223 किलोमीटर लंबी सड़कों का निर्माण किया जाना है. पहले फेज के तहत सागर से मोहारी गांव तक 50 किलोमीटर लंबे हाईवे का काम एनएचएआई की सागर इकाई के अधीन तेजी से चल रहा है. छतरपुर जिले की सीमा में साठिया घाटी से चौका गांव तक तीसरे फेज में काम किया जाना है, इसका टेंडर वेल्जी रत्ना सोराठिया इंफ्रास्ट्रक्चर को मिला है. तीसरे फेज में 55 किलोमीटर लंबा फोरलेन सडक का निर्माण 717 करोड़ रुपए की लागत से किया जाएगा. चौका गांव से कैमाहा बैरियर तक चौथे फेज में कुल 43 किलोमीटर लंबे फोरलेन का निर्माण किया जाना है. इसका टेंडर एमकेसी इंफ्रास्ट्रक्चर गुजरात को मिला है। चौथे फेज में 43 किलोमीटर लंबी सडक 688 करोड़ रुपए की लागत से कंपनी निर्माण करेगी.

दुनिया पर निर्भर नहीं, भारत के पास गोला बारूद का खजाना-रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

नई दिल्ली  रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने  सर्वदलीय बैठक में बताया कि भारत के पास पर्याप्त गोला-बारूद है। रक्षा मंत्री ने कहा कि देश के पास पर्याप्त गोला-बारूद है। सरकारी कंपनियों ने गोला बारूद का उत्पादन बढ़ा दिया है और वे इसे और भी बढ़ा सकती हैं। सूत्रों ने बताया कि राजनाथ सिंह ने कहा कि प्राइवेट सेक्टर भी इसमें बड़ा योगदान दे रहा है। भारत का रक्षा क्षेत्र अब तेजी से आगे बढ़ रहा है। सरकार ने पिछले साल ही 1.45 लाख करोड़ रुपये की बड़ी सैन्य खरीद परियोजनाओं को मंजूरी दी थी। इसका मकसद देश में ही रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देना है। इस वजह से, कई सरकारी रक्षा कंपनियां (PSU) गोला बारूद का उत्पादन कर रही हैं। बोफोर्स के गोले बहुत महंगे खरीदे गए थे आज देश में ही गोला-बारूद बनाया जा रहा है, लेकिन करगिल युद्ध के दौरान जब गोला-बारूद कम पड़ने लगे तो उस समय की सरकार को कई दूसरे देशों से महंगे गोला-बारूद खरीदने पड़े थे। यह भी कहा जाता है कि उस दौरान कुछ मित्र देशों ने भी गोला-बारूद देने के लिए भारत सरकार तय कीमत से कहीं ज्यादा पैसे लिए थे। तैयारी बहुत पहले से ही थी सरकार देश में ही उत्पादन को बढ़ावा दे रही है और रक्षा क्षेत्र को आधुनिक बना रही है। इससे उम्मीद है कि ये PSU कंपनियां आने वाले समय में अच्छा मुनाफा कमाएंगी, साथ ही सुरक्षा के मोर्चे पर देश को मजबूत भी बनाएंगी। आसान लहजा में कहें तो सरकार रक्षा क्षेत्र को मजबूत करने के लिए कई कदम उठा रही है। इससे HAL, BEL, BDL, MDL और GRSE जैसी कंपनियों को फायदा होगा। इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक एंटिक स्टॉक ब्रोकिंग ने पांच ऐसी कंपनियों को चुना है जिनमें विकास की अच्छी संभावना है। ये कंपनियां हैं: हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL), भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL), भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL), मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL), और गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (GRSE)। ये पांचों कंपनियां भारत के लिए पांच तरह के हथियार बना रही हैं बिल्कुल वैसे ही जैसे महर्षि दधीचि की हड्डियों का उपयोग देवराज इंद्र के वज्र, पिनाक धनुष, सारंग धनुष, और गांडीव धनुष बनाने में किया गया था। इन धनुषों और वज्र का इस्तेमाल देवताओं ने असुरों के खिलाफ युद्ध में किया था। 1. हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) भारत की एक बड़ी एयरोस्पेस कंपनी है। HAL के पास FY24 तक 94,000 करोड़ रुपये के ऑर्डर हैं। मतलब अगले 3.2 सालों तक कंपनी अच्छी कमाई करती रहेगी। HAL को Su-30 MKI विमान के लिए 240 एयरो इंजन का 26,000 करोड़ रुपये का ऑर्डर मिलने वाला था। इससे HAL का ऑर्डर बढ़कर 1.2 लाख करोड़ रुपये हो जाएगा। HAL को ALH (25), LUH (12), Su-30 (12), और RD-33 इंजन (80) के भी ऑर्डर मिलने वाले थे। 2. मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड रिपोर्ट के मुताबिक मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) के पास तीनों शिपयार्ड में सबसे ज्यादा ऑर्डर हैं। 14 अगस्त 2024 तक MDL के पास 40,400 करोड़ रुपये के ऑर्डर थे। इसमें P17A स्टील्थ फ्रिगेट और P15B डिस्ट्रॉयर के बड़े ऑर्डर शामिल हैं। अगले दो सालों में MDL सात जहाजों की डिलीवरी करने वाला है। सरकार नौसेना को मजबूत करने पर ध्यान दे रही है, जिससे MDL को फायदा होगा। नए खरीद प्रस्तावों से MDL के ऑर्डर और बढ़ सकते हैं। 3. गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (GRSE) के पास अभी 25,230 करोड़ रुपये के ऑर्डर हैं। जून तिमाही में कंपनी को 3,610 करोड़ रुपये के नए ऑर्डर मिले। GRSE अभी अपने मौजूदा ऑर्डर को पूरा करने पर ध्यान दे रही है। इसमें अगली पीढ़ी के अपतटीय गश्ती जहाजों के ऑर्डर शामिल हैं। GRSE का काम समय पर चल रहा है। उम्मीद है कि FY26 और FY27 तक कंपनी को अपने ऑर्डर बुक का एक बड़ा हिस्सा मिल जाएगा। इससे GRSE का विकास जारी रहेगा। 4. भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) को भी फायदा होगा। सरकार ने हाल ही में एयर डिफेंस फायर कंट्रोल रडार खरीदने की मंजूरी दी है। BEL ऐसे रडार बनाने में माहिर है। BEL इलेक्ट्रॉनिक्स और रडार सिस्टम के क्षेत्र में एक बड़ी कंपनी है। यह भारत के रक्षा क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। BEL के पास अच्छे ऑर्डर हैं और यह रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है। इसलिए, BEL का विकास जारी रहेगा। 5. भारत डायनेमिक्स लिमिटेड भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) गोला-बारूद और मिसाइल सिस्टम बनाने वाली एक बड़ी कंपनी है। BDL को फ्यूचर रेडी कॉम्बैट व्हीकल्स (FRCV) प्रोजेक्ट से फायदा होगा। BDL के पास अच्छे ऑर्डर हैं और यह अपनी उत्पादन क्षमता को बढ़ाने पर ध्यान दे रही है। इससे BDL आधुनिक रक्षा सिस्टम की बढ़ती मांग को पूरा कर पाएगी।

अबतक पाकिस्तान की हरकतों की वजह से भारत ने 11 बार उसे खुलकर मुंहतोड़ जवाब दिया

नई दिल्ली पाकिस्तान के साथ भारत का तनाव उसकी पैदाइश के साथ से ही चल रहा है। अबतक पाकिस्तान की हरकतों की वजह से भारत ने इस दौरान कम से कम 11 बार उसे खुलकर मुंहतोड़ जवाब दिया है। अभी ऑपरेशन सिंदूर की वजह से पाकिस्तान की दुनिया भर में भद पिट रही है। हर मिलिट्री ऑपरेशनों ने भारत की सैन्य ताकत का लोहा मनवाया है और पाकिस्तान को नाक रगड़ने को मजबूर होना पड़ा है, लेकिन उसकी आदतें नहीं बदली हैं। बार-बार मुंह की खाने के बाद भी पाकिस्तान और उसकी फौज कुछ न कुछ ऐसा कर देता है, जिसकी वजह भारत को कार्रवाई करनी पड़ती है। 1. ऑपरेशन रिडल (1965) सबसे पहले बात करते हैं ‘ऑपरेशन रिडल’ की। पहला मिलिट्री ऑपरेशन 1965 में किया गया। पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ करने की कोशिश की। उन्होंने ‘ऑपरेशन जिब्राल्टर’ और ‘ग्रैंड स्लैम’ नाम से हमले किए। इसके जवाब में भारत ने ‘ऑपरेशन रिडल’ शुरू किया। 6 सितंबर,1965 को भारतीय सेना ने लाहौर और कसूर पर हमला बोल दिया। भारत की इस कार्रवाई से पाकिस्तानी सेना हिल गई। 2. ऑपरेशन एब्लेज (1965) इसके बाद ‘ऑपरेशन एब्लेज’ हुआ। यह भी 1965 में ही हुआ था। यह एक तरह की सैन्य तैयारी थी। भारतीय सेना ने पश्चिमी सीमा पर अपनी सेना की मौजूदगी बढ़ा दी। हालांकि, इसमें सीधा युद्ध नहीं हुआ, लेकिन यह युद्ध की तैयारी का एक अहम हिस्सा था। नतीजा: इन दोनों ऑपरेशनों के बाद सोवियत संघ (USSR) ने बीच में आकर ताशकंद समझौता कराया। 3. ऑपरेशन कैक्टस लिली (1971) 1971 में बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान ‘ऑपरेशन कैक्टस लिली’ चलाया गया। भारतीय सेना और वायुसेना ने मिलकर मेघना नदी पार की। उन्होंने पाकिस्तानी ठिकानों को पीछे छोड़ते हुए ढाका की ओर बढ़ना शुरू कर दिया। 4. ऑपरेशन ट्राइडेंट (1971) ‘ऑपरेशन ट्राइडेंट’ में भारतीय नौसेना ने पाकिस्तान के कराची बंदरगाह पर दो बार हमला किया। पहला हमला 4-5 दिसंबर को हुआ। भारतीय सेना पूर्वी और पश्चिमी दोनों मोर्चों पर पाकिस्तानी फौज के नाक में दम कर रही थी। 5.ऑपरेशन पाइथन (1971) ऑपरेशन ट्राइडेंट के बाद ‘ऑपरेशन पाइथन’ हुआ। एक के बाद इन तीनों हमलों से पाकिस्तान बिखर गया और उसके नौसैनिक ढांचे को काफी नुकसान पहुंचा। ऑपरेशन पाइथन में पहली बार एंटी-शिप मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया। नतीजा: इन तीन ऑपरेशनों का नतीजा यह हुआ कि पाकिस्तान हार गया और बांग्लादेश नाम का एक नया देश बना। 6. ऑपरेशन मेघदूत (1984) सियाचिन में पाकिस्तान की हरकतों को रोकने के लिए भारत ने अप्रैल 1984 में ‘ऑपरेशन मेघदूत’ शुरू किया। भारतीय वायुसेना की मदद से सैनिकों को दुनिया की सबसे ऊंची युद्ध भूमि पर पहुंचाया गया। उन्होंने महत्वपूर्ण चोटियों पर कब्जा कर लिया। नतीजा: ऑपरेशन मेघदूत से भारत को सामरिक बढ़त मिली और भारत आज भी वहां लाभ की स्थिति में है। 7. ऑपरेशन विजय (1999) मई 1999 में पाकिस्तानी घुसपैठियों ने कारगिल की चोटियों चोरी-चोरी पर कब्जा कर लिया। भारत ने ‘ऑपरेशन विजय’ चलाकर इन इलाकों को वापस अपने कब्जे में ले लिया। यह ऑपरेशन भारतीय सेना की ताकत और बलिदान का प्रतीक है। 8. ऑपरेशन सफेद सागर (1999) ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ भी कारगिल युद्ध के दौरान ही हुआ। यह भारतीय वायुसेना का ऑपरेशन था। इसमें कारगिल की पहाड़ियों में पाकिस्तान की चौकियों और ठिकानों पर हवाई हमले किए गए। 1971 के बाद यह पहली बार था, जब इतने बड़े पैमाने पर वायुसेना का इस्तेमाल किया गया। नतीजा: इन दोनों मिलिट्री ऑपरेशन में पाकिस्तानी फौज को भारतीय सेना और वायुसेना ने बुरी तरह से पीटा और वे पीछे हटने को मजबूर हुए। 9. सर्जिकल स्ट्राइक (2016) उरी हमले के बाद भारत ने 2016 में सर्जिकल स्ट्राइक की। भारत की स्पेशल फोर्सेज ने पाकिस्तान अधिकृत जम्मू कश्मीर (PoJK) में आतंकी ठिकानों पर हमला किया। यह पहली बार था, जब भारत ने खुलकर पाकिस्तानी कब्जे वाले इलाके में अपनी सैन्य कार्रवाई की घोषणा की। नतीजा: पाकिस्तान समेत पूरी दुनिया में संदेश गया कि आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत अब भारत दुश्मन के घर में घुसकर मारने लगा है। 10. ऑपरेशन बंदर (2019) पुलवामा हमले के बाद भारत ने 26 फरवरी, 2019 को ‘ऑपरेशन बंदर’ को अंजाम दिया। इसके तहत पाकिस्तान के करीब 80 किलोमीटर भीतर घुसकर बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी कैंपों पर एयर स्ट्राइक किया गया। 1971 के बाद यह पहली बार था, जब भारत ने नियंत्रण रेखा (LoC) के पार अपनी वायुसेना का इस्तेमाल किया। नतीजा: भारत ने पूरी दुनिया को संकेत दे दिया कि ‘नया भारत’ अब अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए हर तरह के मिलिट्री ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए तैयार है। 11. ऑपरेशन सिंदूर (2025) भारत ने 6 और 7 अप्रैल, 2025 की दरमियानी रात पाकिस्तान और इसके कब्जे वाले जम्मू और कश्मीर (PoJK) के 9 आतंकी ठिकानों पर हमला किया। इसे ऑपरेशन सिंदूर का नाम दिया गया। इसमें भारत ने अंतरराष्ट्रीय सीमा (IB) या नियंत्रण रेखा (LoC) का उल्लंघन नहीं किया और मिसाइल, ड्रोन और अन्य बमों का इस्तेमाल करके दहशतगर्दी कैंपों में तबाही मचा दी। नतीजा: पहली बार पाकिस्तान खुद मान रहा है कि भारत ने किस तरह से मिलिट्री ऑपरेशन को अंजाम दिया है। इसमें अंतरराष्ट्रीय सीमा से 100 किलोमीटर दूर बहावलपुर तक में आतंकी इंफ्रास्ट्रक्चर ध्वस्त हुए हैं और जैश-ए-मोहम्मद का सरगना अजहर मसूद खुद मान रहा है कि उसके परिवार के 10 लोगों समेत कुल 14 लोग मारे गए हैं।

एस-400 मिसाइल सिस्टम को भारतीय वायुसेना के बेड़े में सबसे ताकतवर हथियार

नई दिल्ली भारत लगातार अपनी वायु रक्षा प्रणाली को मजबूत कर रहा है ताकि पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों से उत्पन्न होने वाले हवाई खतरों का प्रभावी ढंग से मुकाबला कर सके. भारतीय वायु रक्षा प्रणाली में उन्नत मिसाइल सिस्टम, रडार और कमांड सेंटर शामिल हैं, जो दुश्मन के विमानों, ड्रोन और मिसाइलों को नष्ट करने में सक्षम हैं. भारत के दो तरफ उसके दुश्मन हैं. दोनों के पास खतरनाक मिसाइलों का जखीरा है. ड्रोन्स हैं. अटैक हेलिकॉप्टर्स हैं. फाइटर जेट्स हैं. भारत की सुरक्षा का लेवल बहुत जटिल है. सीमाओं और जरूरी स्थानों की सुरक्षा के लिए सटीक एयर डिफेंस सिस्टम की जरूरत है, ताकि चीन या PAK के हवाई हमले को करारा जवाब दिया जा सके. इजरायल के आयरन डोम जैसी हथियार प्रणाली की जरूरत है. क्या भारत में ऐसी प्रणाली है. या नहीं. दोनों तरफ दुश्मन, दोनों के पास खतरनाक हथियार पाकिस्तान और चीन के पास के पास कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें हैं. लंबी दूरी के रॉकेट्स हैं. कुछ तो 300 किलोमीटर की रेंज से भी ज्यादा के हैं. ये भारतीय सीमा के पास के शहरों, कस्बों और गांवों के लिए खतरा है. इजरायल का आयरन डोम कम दूरी के रॉकेट्स, आर्टिलरी गोले और बैलिस्टिक मिसाइलों को आसमान में ही खत्म कर देता है. इसलिए भारत को भी ऐसे ही रक्षाकवच की जरूरत है. भारत की जो भौगोलिक स्थिति है. जिस तरह से उसके दुश्मन दो अलग-अलग लोकेशन पर मौजूद हैं, उसके हिसाब से भारत को बहुत बड़े पैमाने पर खतरों का सामना करना है. इन खतरों में बैलिस्टिक, क्रूज और हाइपरसोनिक मिसाइलों और हथियारों का खतरा है. इसलिए भारत को ज्यादा सटीक बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (BMD) सिस्टम चाहिए. जिसमें कई तरह के लेयर हों. कम दूरी से लेकर अंतरिक्ष तक हमला करने लायक मिसाइलें. कैसे-कैसे एयर डिफेंस सिस्टम हैं भारत के पास? भारत को अपने एयर डिफेंस सिस्टम को विदेशी डिफेंस सिस्टम के साथ मिलाकर तैनात करने होंगे. भारत के एयर डिफेंस सिस्टम को मल्टी लेयर बनाना होगा. जैसे- पृथ्वी एयर डिफेंस (PAD), एडवांस्ड एयर डिफेंस (AAD) और तीसरा लॉन्ग रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल (LRSAM). रूस से लिए गए S-400 एयर डिफेंस सिस्टम से खाली काम नहीं चलेगा. इसके अलावा भारत को अपने छोटे से लेकर बड़े एयर डिफेंस सिस्टम को आपस में जोड़कर रखना होगा. ताकि वो बेहतर तरीके और सामंजस्य के साथ काम कर सके. एक्स-राड और स्वाति रडार डीआरडीओ द्वारा विकसित उन्नत रडार सिस्टम. 300 किमी तक लक्ष्य का पता लगाना, स्टील्थ विमानों को ट्रैक करने की क्षमता. ये रडार पाकिस्तानी विमानों और मिसाइलों की गतिविधियों को शुरुआती चेतावनी के साथ ट्रैक कर सकते हैं, जिससे जवाबी कार्रवाई तुरंत हो सकती है. आइए जानते हैं कि भारत के पास कौन-कौन से एयर डिफेंस सिस्टम हैं… इंडियन बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस प्रोग्राम इस प्रोग्राम के तहत कई रेंज की बैलिस्टिक मिसाइलों से बचाव के लिए डिफेंस सिस्टम बनाया गया है. इसके लिए दो लेयर वाली इंटरसेप्टर मिसाइलें बनाई गईं. ये हैं- पृथ्वी एयर डिफेंस (PAD), जिसकी मिसाइलें बेहद अधिक ऊंचाई पर जाकर दुश्मन टारगेट को बर्बाद कर सकती हैं. दूसरा है एडवांस्ड एयर डिफेंस (AAD), इसकी मिसाइलें कम ऊंचाई वाले टारगेट्स को मार गिराने के लिए बनाई गई हैं. ये मिसाइल सिस्टम 5 हजार किलोमीटर या उससे ज्यादा दूरी से आने वाली हवाई खतरों को हवा में ही खत्म कर देती हैं. क्योंकि भारत को हमेशा से पाकिस्तान और चीन की बैलिस्टिक मिसाइलों को खतरा बना हुआ है. PAD सिस्टम की मिसाइलों की रेंज 300 से 2000 किलोमीटर है. ये जमीन से 80 किलोमीटर ऊपर दुश्मन टारगेट को नष्ट कर सकते हैं. ये मिसाइलें 6174 km/hr की स्पीड से दुश्मन की तरफ बढ़ती हैं. इसमें पृथ्वी सीरीज की सभी मिसाइलें शामिल हैं. अगर एडवांस्ड एयर डिफेंस यानी AAD की बात करें तो इसकी मिसाइलें वायुमंडल के नीचे अधिकतम 30 किलोमीटर की ऊंचाई तक टारगेट को ध्वस्त कर सकती हैं. इनकी ऑपरेशनल रेंज 150 से 200 किलोमीटर है. ये मिसाइलें 5556 km/hr की स्पीड से दुश्मन की तरफ बढ़ती हैं. इंटरमीडिएट इंटरसेप्शन यानी S-400 एयर डिफेंस सिस्टम S-400 एक बार में एक साथ 72 मिसाइल छोड़ सकती है. इस एयर डिफेंस सिस्टम को कहीं मूव करना बहुत आसान है क्योंकि इसे 8X8 के ट्रक पर माउंट किया जा सकता है. माइनस 50 डिग्री से लेकर माइनस 70 डिग्री तक तापमान में काम करने में सक्षम इस मिसाइल को नष्ट कर पाना दुश्मन के लिए बहुत मुश्किल है. क्योंकि इसकी कोई फिक्स पोजिशन नहीं होती. इसलिए इसे आसानी से डिटेक्ट नहीं कर सकते.   S-400 मिसाइल सिस्टम में चार तरह की मिसाइलें होती हैं जिनकी रेंज 40, 100, 200, और 400 km तक होती है. यह सिस्टम 100 से लेकर 40 हजार फीट तक उड़ने वाले हर टारगेट को पहचान कर नष्ट कर सकता है.  एस-400 मिसाइल सिस्टम का राडार बहुत अत्याधुनिक और ताकतवर है. इसका रडार 600 km तक की रेंज में करीब 300 टारगेट ट्रैक कर सकता है. यह सिस्टम मिसाइल, एयरक्राफ्ट या फिर ड्रोन से हुए किसी भी तरह के हवाई हमले से निपटने में सक्षम है. शॉर्ट रेंज इंटरसेप्शन… आकाश, पिछोरा जैसी मिसाइलें पेचोरा मिसाइल सिस्टम सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल है पेचोरा (Pechora). भारत के पास इसके 30 स्क्वॉड्रन्स हैं. जो अलग-अलग सीमाओं पर सुरक्षा के लिए तैनात हैं. इसके 12 वैरिएंट्स हैं, जिनका इस्तेमाल दुनियाभर के 31 देश कर रहे हैं. इसमें लगी मिसाइल 953 kg वजनी होती है. इसकी नाक पर 60 kg का फ्रैगमेंटेड हाई एक्सप्लोसिव हथियार लगाते हैं. इसके ऑपरेशनल रेंज 3.5 से 35 km है. अधिकतम 59 हजार फीट की ऊंचाई तक जा सकती है. इसकी स्पीड 3704 से 4322 km/hr की गति से उड़ती है. पेचोरा मिसाइल की सबसे खास बात है कम ऊंचाई पर उड़ते हुए टारगेट को खत्म करने की ताकत. इसका राडार 32 से 250 किलोमीटर तक की रेंज में दुश्मन पर नजर रखता है. मिसाइल थोड़ा पुराने टेक्नीक पर काम करती है, यानी रेडियो कमांड गाइडेंस सिस्टम पर. कोई भी अत्याधुनिक विमान सबकुछ बंद कर सकता है लेकिन वह अपना रेडियो बंद नहीं कर सकता. अगर दुश्मन का विमान, हेलिकॉप्टर रेडियो बंद नहीं कर पाएगा तो यह मिसाइल उसे ध्वस्त कर देगी. यहां तक कि छोटे-मोटे ड्रोन्स का भी … Read more

सिंहस्थ 2028 को लेकर इंदौर में तैयारियां शुरू, अब एमआर-10 का रेलवे ओवर 8 लेन का होगा, 2026 तक काम पूरा करना होगा

इंदौर एमआर-10 का रेलवे ओवर ब्रिज 4 की जगह 8 लेन का होगा। इससे सिंहस्थ से पहले मार्ग पर बॉटल नेक की स्थिति खत्म हो जाएगी। 48.82 करोड़ में बनने वाले ओवर ब्रिज के लिए आइडीए ने टेंडर जारी कर दिया है। ठेकेदार कंपनी को वर्ष 2026 तक काम पूरा करना होगा।  सिंहस्थ 2028 को लेकर इंदौर में तैयारियां शुरू हो गई हैं। उज्जैन की ओर जाने वाली अहम सड़क एमआर-10 पर बने रेलवे ओवर ब्रिज पर बॉटल नेक की स्थिति रहती है, क्योंकि यहां रेलवे ओवर ब्रिज 4 लेन का है, जबकि बाकी सड़क 8 लेन की है। आइडीए ने यहां 8 लेन बनाने का प्रस्ताव रेलवे को भेजा था, जिसे हाल ही में रेलवे ने मंजूरी दी। आइडीए 15 दिन में ठेकेदार कंपनी का चयन कर लेगा। 18 माह में ठेकेदार कंपनी काम पूरा करेगी। 50 हजार वाहन रोज गुजरते हैं विजय नगर सहित शहर के पूर्वी क्षेत्र को एयरपोर्ट और उज्जैन रोड से जोड़ने में एमआर-10 सड़क अहम है। यहां 50 हजार से अधिक वाहन नियमित रूप से आते-जाते हैं। दो दशक पहले आइडीए ने रेलवे ओवर ब्रिज बनवाया था और 17 साल तक टोल लिया गया। उत्तरी हिस्से में बनेगा ब्रिज एमआर-10 के दक्षिणी हिस्से में मेट्रो ट्रेन का ट्रैक व स्टेशन बनाया गया है। 8 लेन रेलवे ओवर ब्रिज उत्तरी हिस्से में बनेगा। यानी लवकुश चौराहे से विजय नगर आने वाले रास्ते के बाईं तरफ होगा। मौजूदा मार्ग लवकुश चौराहे की ओर जाने वाला हो जाएगा। ये भी पढें – NH-44 पर बनेगी सर्विस रोड, नितिन गडकरी ने दिए निर्देश 27 लाख रुपए जमा कराई फीस रेलवे ट्रैक के ऊपर ब्रिज बनाने में कठिन काम रेलवे की मंजूरी होता है। कुछ महीने पहले आइडीए ने 27 लाख फीस जमा कराई। इस पर रेलवे ने जनरल अरेंजमेंट ड्राइंग को मंजूरी दी। इसकी लंबाई 713.5 मीटर, चौड़ाई 14.50 मीटर तो रेलवे के ऊपर का हिस्सा 18 मीटर रहेगा। रेलवे के ऊपर का हिस्सा रेलवे ही बनाता है। एमआर-10 के रेलवे ओवर ब्रिज को 8 लेन किया जा रहा है। वर्तमान के फोर लेन ओवर ब्रिज के साथ 4 लेन और बनाई जाएगी। इसका टेंडर जारी कर दिया है। 2026 के अंत तक ठेकेदार कंपनी को काम पूरा करना होगा। -आरपी अहिरवार, सीईओ, आइडीए

जल गंगा संवर्धन अभियान: 4 हजार 700 का मिला था लक्ष्य, बनाए 4 हजार 838

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश पुराने जल स्त्रोतों को सहेजने, नया जीवन देने और किसानों को सिंचाई व पीने के लिए नलकूप, कुओं से पर्याप्त मात्रा में पानी मिले, इसके लिए राज्य सरकार द्वारा प्रदेश भर में जल गंगा संवर्धन अभियान चलाया जा रहा है। प्रदेश के सभी जिलों में मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) अंतर्गत खेत तालाब, कूप रिचार्ज पिट, सोख्ता गड्ढ़ा, बोरी बंधान सहित बारिश का पानी रोकने के लिए अन्य कार्य किए जा रहे हैं। इसके लिए सभी जिलों को लक्ष्य भी दिया गया है। खंडवा जिला प्रदेश का पहला ऐसा जिला बना है, जिसने कूप रिचार्ज पिट निर्माण में 100 फीसदी का लक्ष्य हासिल किया है। 4 हजार 700 का मिला था लक्ष्य, बनाए 4 हजार 838 जल गंगा संवर्धन अभियान अंतर्गत खंडवा जिले को 4 हजार 700 कूप रिचार्ज पिट बनाने का लक्ष्य मिला था, जिसे समय से पहले और लक्ष्य से अधिक पूरा कर लिया गया है। जिले में 4 हजार 838 कूप रिचार्ज पिट बनाए गए हैं। जिला पंचायत सीईओ खंडवा नागार्जुन बी. गौड़ा ने बताया कि कलेक्टर ऋषव गुप्ता के मार्गदर्शन में जिले में 15 हजार कूप रिचार्ज पिट बनाए जा रहे हैं, करीब 10 हजार का कार्य प्रगतिरत है। जल संचय, जन भागीदारी अभियान में देश में तीसरे नंबर पर है खंडवा जिला बारिश के पानी का संचयन करने के लिए भारत सरकार के केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय द्वारा ” जल संचय, जन भागीदारी अभियान राष्ट्रीय अभियान चलाया जा रहा है, इसमें देश के सभी जिलों में बारिश के पानी को एकत्र करने के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग रिचार्ज पिट, स्टॉप डैम, सोख्ता गड्ढा सहित विभिन्न प्रकार के कार्य किए जा रहे हैं। मध्यप्रदेश का खंड़वा जिला 7 मई की स्थिति में देश में तीसरे नंबर पर है। 30 मार्च 2025 से 30 जून 2025 तक चलेगा अभियान प्रदेश में बारिश के पानी को सहेजने, पुराने जल स्रातों को संवारने के लिए राज्य सरकार द्वारा प्रदेशभर में 30 मार्च 2025 से 30 जून 2025 तक जल गंगा संवर्धन अभियान चलाया जा रहा है। कूप रिजार्च पिट के फायदे कूप रिचार्ज पिट, जिसे रिचार्ज शाफ्ट या रिचार्ज पिट भी कहा जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य भू-जल स्तर को बढ़ावा देना है। बारिश का पानी जमीन के अंदर रिसने से भू-जल स्तर बढ़ता है। साथ ही कूप या नलकूपों के सूखने की संभावना भी कम रहती है। साथ ही सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बनी रहती है।  

41 दिनों में ही तय लक्ष्य से ज्यादा अमृत सरोवरों को बनाने का काम शुरू

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृव में प्रदेश में जल गंगा संवर्धन महाअभियान चलाया जा रहा है। इस महाअभियान की शुरुआत मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन से की थी। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल प्रदेश में जलसंरचनाओं के संरक्षण के लिए प्रदेश में नदियों के उदगम स्थलों का दौरा कर रहे हैं। अभियान तीव्र गति से अपने लक्ष्यों को पूर्ण करने की ओर बढ़ रहा है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) के तहत प्रदेश में 1 हजार अमृत सरोवरों के निर्माण का लक्ष्य रखा था। अभियान के 41 दिवस में ही निर्धारित लक्ष्य से अधिक प्रदेश में 1012 अमृत सरोवरों को बनाने का काम भी शुरू कर दिया गया है। अभियान में कूप रिचार्ज पिट, बावड़ी, खेत-तालाब, अमृत सरोवर, बोरी बंधान, चेकडैम सहित अन्य कार्य कराए जा रहे हैं। इसके साथ पुराने जल स्त्रोतों की सफाई, नदियों की जल धाराओं को जीवित के लिए गेबियन संरचना, कंटूर ट्रेंच जैसे जल संरक्षण संरचनाओं का कार्य किया जा रहा है। अमृत सरोवरों से बढ़ेगा भू-जल स्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में अमृत सरोवर बन जाने से प्रदेश का भू-जल स्तर बढ़ेगा। इससे जल संकट की समस्या से निजात मिलेगी। गर्मियों में कुओं, हैंडपंपों और ट्यूवबेलों का जलस्तर कम नहीं होगा। साथ ही, ग्रामीण आजीविका के साधन भी बढ़ेंगे। सिंचाई के साथ मछली पालन और सिंघाड़े की खेती सहित अन्य गतिविधियों में सरोवरों का पानी इस्तेमाल किया जा सकेगा। जल गंगा संवर्धन अभियान जल गंगा संवर्धन अभियान का मुख्य उद्देश्य बारिश के पानी सहेजना और पुराने जल स्त्रोतों को संवारना है। प्रदेश सरकार द्वारा चलाए जा रहे महाअभियान में प्रदेश में भू-जल स्तर पर सुधार आएगा। कुओं, नलकूपों का जलस्तर बढ़ेगा। इसके साथ ही किसानों को फसलों की सिंचाई के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी भी उपलब्ध होगा। 30 जून तक जारी रहेगा अभियान प्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान तीन माह तक चलेगा। प्रदेश सरकार द्वारा 30 मार्च से प्रदेशव्यापी महाअभियान की शुरुआत की गई है, जो 30 जून 2025 तक संचालित किया जाएगा।  

मंत्री विश्वास सारंग ने प्रभात चौराहे पर ड्रेनेज सिस्टम का निरीक्षण कर निगम के अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए

भोपाल सहकारिता मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग ने रविवार को भोपाल शहर में नाले-नालियों की वृहद रुप से साफ-सफाई अभियान अंतर्गत नरेला विधानसभा के प्रभात चौराहे पर ड्रेनेज सिस्टम का निरीक्षण कर नगर निगम के अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। मंत्री श्री सारंग ने बताया कि मानसून में जलभराव की स्थिति निर्मित न हो इसके लिए वृहद रूप से सफाई अभियान की शुरुआत की गई है। उन्होंने कहा कि इस अभियान के तहत भोपाल शहर के सभी नाले-नालियों की सफाई सुनिश्चित होगी। साथ ही नालों में लोग कचरा न डालें इसके लिए जनजागरण अभियान भी चलाया जाएगा। निरीक्षण के दौरान भोपाल नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों सहित क्षेत्रवासी उपस्थित रहे। मानसून के पहले भोपाल के सभी नाले-नालियां होंगे साफ मंत्री श्री सारंग ने बताया कि इस बार मौसम विभाग ने अनुमान जताया है कि मानसून भोपाल में एक सप्ताह पहले प्रवेश करेगा। इसे देखते हुए भोपाल शहर के सभी नाले नालियों की सफाई वृहद के लिये अभियान की शुरुआत की गई है। उन्होंने कहा कि हर वर्ष मानसून पूर्व नगर निगम सफाई अभियान चलता है। मंत्री श्री सारंग ने निर्देश दिये कि इस कार्य की शुरुआत पहले से ही कर दी जाए। इससे समय पर सफाई कार्य पूर्ण हो सकेगा और भविष्य में जलभराव की स्थिति निर्मित नहीं होगी। मंत्री श्री सारंग ने जनजागरण और कचरा प्रबंधन पर दिया जोर मंत्री श्री सारंग ने कहा कि मशीनों के माध्यम से समुचित रूप से नालों की सफाई सुनिश्चित की जाएगी और इसके साथ यह भी ध्यान रखा जाएगा कि जिन क्षेत्रों में नाले आसपास स्थित हैं, वहाँ के निवासियों को हिदायत दी जाए कि वे नालों में कचरा न डालें। इस दिशा में जन जागरण अभियान भी चलाया जाएगा इससे नागरिकों को नालों की स्वच्छता बनाए रखने की महत्ता समझाई जा सकेगी। उन्होंने कहा कि पॉलीथीन जैसे अपशिष्ट पदार्थ नालों में जल प्रवाह को अवरुद्ध करते हैं। इससे जलभराव और ओवरफ्लो की स्थिति उत्पन्न होती है। इसके लिए नालों के समीप कचरा निस्तारण के लिए डंप स्टेशन भी बनाए जाएंगे, जिससे कि कचरा सीधे नालों में न जाए।  

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा- हमारे राज्य का युवा सक्षम, योग्य और आत्म-निर्भर बने यह राज्य सरकार की प्राथमिकता है

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हमारे राज्य का युवा सक्षम, योग्य और आत्म-निर्भर बने यह राज्य सरकार की प्राथमिकता है। हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है कि रोजगार और स्वरोजगार देकर स्वावलम्बी समाज और स्वावलम्बी प्रदेश बनाया जाये। इस दिशा में हम तेजी से लगातार आगे बढ़ रहे है। प्रदेश में हर क्षेत्र में रोजगार सृजन के लिये तेजी से प्रयास किये जा रहे है, चाहे वह परम्परागत दुग्ध पालन का क्षेत्र हो या आधुनिक आईटी का क्षेत्र। प्रदेश में रोजगार आधारित औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिये इंड्रस्टी कॉन्क्लेव व्यापक स्तर पर आयोजित की गई। इसके बेहतर परिणाम भी सामने आ रहे है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव आज रविवार को दशहरा मैदान, इंदौर में आयोजित महापौर मेगा रोजगार मेला के उद्घाटन अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रोजगार मेले को मिले बेहतर प्रतिसाद की सराहना की और कहा कि ऐसे रोजगार मेलों के माध्यम से सरकार और प्रशासन युवाओं को अवसर, मंच और मार्गदर्शन प्रदान कर रहा है। उन्होंने युवाओं को रोजगार देने की दिशा में इंदौर जिले में हर एक पंचायत में स्थापित किये गये उद्योग लगाने के अभियान की भी प्रशंसा की। उल्लेखनीय है कि इंदौर जिले में अभियान चलाकर सभी पंचायतों में उद्योग स्थापित कराने का कार्य किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने युवाओं से कहा कि आज का युग कौशल का है। डिग्री के साथ व्यवहारिक ज्ञान और संवाद कौशल भी ज़रूरी हैं। मुझे गर्व है कि इंदौर ने इस दिशा में एक अनुकरणीय पहल की है। मुख्यमंत्री ने युवाओं से अपील की कि वे इन अवसरों का लाभ उठाएँ और अपने भविष्य को उज्ज्वल बनाएँ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भारत-पाकिस्तान संबंधों और सीमा सुरक्षा के मुद्दे पर कहा कि देश अब पहले जैसा नहीं रहा।  प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने वैश्विक मंच पर अपनी शक्ति, रणनीति और तकनीकी क्षमता से यह सिद्ध कर दिया है कि हम शांति चाहते हैं, लेकिन आवश्यकता पड़ने पर करारा जवाब देना भी जानते हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी जी के नेतृत्व में भारत ने एक नई दिशा प्राप्त की है। आज भारत किसी को छेड़ता नहीं है, लेकिन अगर कोई भारत को छेड़ने की गलती करता है, तो उसे हम कभी छोड़ते नहीं हैं। हमारी सेनाएं अब पारंपरिक युद्ध पद्धतियों से आगे बढ़कर अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग कर रही हैं। इससे दुश्मनों को हर मोर्चे पर जवाब दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भारत की रक्षा नीति की तुलना ‘नए युग के नए भारत’ से करते हुए कहा कि यह वही भारत है जो संयम रखता है, परंतु आवश्यकता होने पर शौर्य और पराक्रम का परिचय देने में पीछे नहीं हटता। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में भारत आत्म-निर्भरता की दिशा में भी तेज़ी से अग्रसर है, चाहे वह रक्षा उत्पादन हो, सामरिक नीति हो या वैश्विक कूटनीति। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नागरिकों से कहा कि सरकार और सेनाओं पर विश्वास रखें,  भारत अब एक सशक्त, आत्मनिर्भर और निर्णायक राष्ट्र के रूप में उभर रहा है। नगरीय प्रशासन एवं आवास मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि भारत की पहचान उसके युवा हैं, और यही युवा देश का भविष्य हैं। उन्होंने कहा कि विश्व में भारत एक ऐसा देश है जहाँ सबसे अधिक युवा जनसंख्या है, जो हमारे लिए गौरव की बात है। श्री विजयवर्गीय ने बताया कि युवाओं के कल्याण और उन्हें रोजगार उपलब्ध कराने के लिए केंद्र एवं राज्य सरकार मिलकर सतत् प्रयास कर रही हैं। उन्होंने कहा, हम सौभाग्यशाली हैं कि हमारे देश को प्रधानमंत्री श्री मोदी जैसा नेतृत्व मिला है। उनके नेतृत्व में भारत निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के दृढ़ निश्चय और इच्छाशक्ति से देश ने आतंकवाद के खिलाफ मजबूती से लड़ाई लड़ी है। उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि वे देश के विकास में सक्रिय भागीदारी निभाएं और राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दें। तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री गौतम टेटवाल ने कहा कि प्रदेश में कौशल विकास और रोजगार सृजन के क्षेत्र में इंदौर अग्रणी भूमिका निभा रहा है। लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर ने हमें रोजगार सृजन के क्षेत्र में नई दिशा दिखाई है। उनके बताए मार्ग पर चलते हुए राज्य सरकार लगातार नए रोजगार के अवसरों का निर्माण कर रही है। उन्होंने कहा कि पशुधन आधारित अर्थव्यवस्था और पारंपरिक कारीगरी जैसे क्षेत्रों में अपार संभावनाएं हैं, जिन्हें बढ़ावा देकर युवाओं को आत्म-निर्भर बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में चल रहे कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को उद्योगों की आवश्यकतानुसार प्रशिक्षण देकर उन्हें रोजगार से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है। प्रारंभ में स्वागत भाषण देते हुए महापौर श्री पुष्यमित्र भार्गव ने रोजगार मेला आयोजन के उदे्श्यों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मेले को भारी सफलता मिली है। अपेक्षा से अधिक युवाओं ने हिस्सा लिया। मेले में आये युवाओं की सुविधा का पूरा ध्यान रखा गया। उनके लिये 145 काउंटर बनाये गये और नियोजको से रूबरू कराया गया। उन्होंने कहा कि यह मेला न केवल रोजगार का माध्यम है, बल्कि युवाओं में आत्मविश्वास और दिशा निर्माण का प्रेरक मंच भी सिद्ध हुआ है।  

पीएम मोदी ने कहा- ऑपरेशन सिंदूर से भारत ने हासिल किए तीन लक्ष्य, मिट्टी में मिला देंगे और फिर….

नई दिल्ली ऑपरेशन सिंदूर से भारत ने पाकिस्तान की कमर तोड़ दी। कई आतंकी ठिकानों पर हमले करके 100 से ज्यादा आतंकवादियों को ढेर कर दिया गया। इस पूरे ऑपरेशन से भारत ने तीन बड़े लक्ष्य हासिल किए हैं, जिसमें सैन्य, राजनैतिक और मनोवैज्ञानिक उद्देश्य शामिल हैं। सैन्य उद्देश्य में पीएम मोदी ने कहा कि मिट्टी में मिला देंगे और फिर बहावलपुर, मुरीदके और मुजफ्फराबाद में जैश और लश्कर के आतंकी कैंपों को मिट्टी में मिला दिया गया। इसी तरह ऑपरेशन सिंदूर से भारत ने जो दूसरा लक्ष्य हासिल किया है, वह राजनैतिक है। इसके तहत, बताया गया कि सिंधु जल संधि सीमा पार आतंकवाद से जुड़ी है। जब तक सीमा पार से आतंकवाद बंद नहीं हो जाता, तब तक यह स्थगित रहेगी। वहीं, तीसरा लक्ष्य मनोवैज्ञानिक है, जोकि घुस के मारेंगे है और इसके तहत भारत ने पाकिस्तान के दिल में गहरी चोट पहुंचाई है। भारतीय सेना का ऑपरेशन पूरी तरह से सफल रहा है।  

मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने कहा- उच्चतम न्यायालय एवं उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के लिये इंदौर में बनेगा गेस्ट हाउस

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने प्रसन्नता जताते हुए कहा कि इंदौर में सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के न्यायाधीशों के लिए गेस्ट हाउस बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रेसीडेन्सी कोठी परिसर इंदौर में गेस्ट हाउस का शिलान्यास किया। इस अवसर पर सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री जे. के. माहेश्वरी, न्यायमूर्ति श्री एस.सी.शर्मा, उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश श्री सुरेश कुमार कैत, उच्च न्यायालय के प्रशासनिक न्यायमूर्ति एवं निर्माण समिति के चेयरमैन श्री संजीव सचदेवा मौजूद रहे। शिलान्यास समारोह में उच्च न्यायालय के एडमिनिस्ट्रेटिव जज श्री विवेक रुसिया,उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल श्री धर्मेन्द्र सिंह, न्यायामूर्ति श्री आनंद पाठक सहित उच्च न्यायालय के न्यायामूर्ति एवं एडवोकेट विशेष रूप से उपस्थित थे। इस मौके पर नगरीय प्रशासन एवं आवास मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय, जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट, कौशल विकास एवं रोजगार विभाग मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री गौतम टेटवाल, महापौर श्री पुष्यमित्र भार्गव, विधायक श्रीमती मालिनी गौड़, श्री रमेश मेंदोला, श्री गोलू शुक्ला,श्री सुमित मिश्रा, संभागायुक्त श्री दीपक सिंह, पुलिस कमिश्नर श्री संतोष सिंह, कलेक्टर श्री आशीष सिंह सहित वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।  

राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा- जनजातीय समुदाय की सतत आजीविका के लिए राज्य सरकार के प्रयास सराहनीय

भोपाल राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा है कि जनजातीय द्वारा सदियों से संरक्षित खान-पान, लोक कलाएं, शिल्प, वस्त्र, आभूषण, उपकरण और चिकित्सा पद्धतियां सभी हमारी अनमोल धरोहर है। हमारी इस लोक संस्कृति का संरक्षण और प्रोत्साहन समाज का दायित्व है। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा जनजातीय समुदाय की सतत आजीविका के लिए प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित मौलिक, स्वाभाविक, कला, शिल्प और संस्कृति की सृजनशीलता को निखार कर व्यवसायिक बनाने के प्रयासों की सराहना की है। राज्यपाल श्री पटेल तीन दिवसीय शिल्प ग्राम महोत्सव के समापन कार्यक्रम को रवीन्द्र भवन में संबोधित कर रहे थे। महोत्सव का आयोजन जनजातीय कार्य विभाग द्वारा वन्या प्रकाशन, राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान और ट्राइबल रिसर्च इंस्टीट्यूट के समन्वय से किया गया था। राज्यपाल श्री पटेल ने समापन कार्यक्रम के पूर्व सभागार में उपस्थित कलाकारों के पास पहुंचे और समक्ष में उनसे चर्चा की। कार्यक्रम में राज्यपाल को बैतूल जिले के शिल्पकारों की बेल मेटल से बनी जनजातीय कलाकृति स्मृति प्रतीक के रूप में और महोत्सव के प्रशिक्षणार्थी शिल्पियों, कलाकारों द्वारा निर्मित उत्पादों का सेट भेंट किए गए। राज्यपाल का वरिष्ठ गोंड कलाकार श्री आनंद श्याम ने पारंपरिक गोंड परंपरा के अनुसार साफा और बीरन माला से स्वागत किया। राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि जनजातीय समुदाय के लिए गर्व की बात है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने जनजातीय समुदाय को सक्षम बना कर उनके विकास और खुशहाली के लिए अभूतपूर्व कार्य किए हैं।पूरे देश में जनजातीय आबादी के लिए समान अवसरों के सृजन, सामाजिक-आर्थिक स्तर को उठाने, स्वास्थ्य, शिक्षा, बुनियादी ढांचे में सुधार और आजीविका के कार्य ‘धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान’ के तहत किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी ने देश की अति पिछड़ी जनजातियों जिनमें राज्य के बैगा, भारिया, सहरिया जनजातीय समुदाय शामिल हैं, उनके लिए जनमन योजना के तहत सुरक्षित आवास, स्वच्छ पेयजल तक पहुँच, बेहतर स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा, पोषण, सड़क एवं दूरसंचार कनेक्टिविटी के साथ-साथ स्थायी आजीविका के अवसर उपलब्ध कराए हैं। राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री ने जनजाति समुदाय की आनुवंशिक बीमारी सिकल सेल को वर्ष 2047 तक समाप्त करने का संकल्प किया है। संकल्प की सफलता के लिए सरकार और समाज को मिलकर आगे आना होगा। राज्य सरकार द्वारा अभियान के रूप में कार्यवाही करते हुए प्रदेश की 1 करोड़ 6 लाख जनजातीय बहनों-भाईयों की स्क्रीनिंग कर ली है। स्क्रीनिंग में 2 लाख 6 हजार से अधिक वाहक और 28 हजार से अधिक रोगी मिले है। सभी को आवश्यक उपचार दिया जा रहा है। सिकल सेल की गर्भावस्था में और प्रसूति के 72 घन्टों के भीतर नवजात की जांच की सुविधाएं भी उपलब्ध करा दी गई है। वर्ष 2047 तक रोग उन्मूलन के लिए समुदाय को दो बातों पर विशेष ध्यान देना होगा। पहली, हर गर्भवती महिला की गर्भावस्था में और नवजात शिशु की 72 घन्टों के भीतर जांच हो जाए। दूसरी, जेनेटिक कार्ड मिलाकर ही विवाह संबंध तय किए जाए। किसी एक के रोगी, वाहक होने पर विवाह किया जा सकता है, किन्तु रोगी युवक-युवती का आपस में विवाह नहीं होना चाहिए। राज्यपाल श्री पटेल ने जनजातीय समुदाय के गौरव रानी दुर्गावती और बिरसा मुण्डा का संदर्भ देते हुए कहा कि समुदाय को उनके गौरव से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ने के प्रयास करने होंगे। शिक्षा प्रगति की पहली सीढ़ी होती है। संतान को अच्छी से अच्छी शिक्षा दिलाएं। सरकार द्वारा शिक्षा के लिए समुदाय को सभी तरह की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने जनजातीय समुदाय विशेषकर युवाओं को सामाजिक कुरीतियों के प्रति आगाह किया, कहा कि प्रगति के लिए प्राथमिक आवश्यकता व्यसनों से दूर रहना है। जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने कहा कि देश में पहली बार मध्यप्रदेश ने जनजातीय कला-शिल्प, संस्कृति-सभ्यता, रीति-रिवाज और मान्यताओं-परंपराओं के संरक्षण और भावी पीढ़ी में हस्तांतरण की सार्थक पहल की है। शीघ्र ही हरसूद में 100 सीटर बालिका-बालक प्रशिक्षण केन्द्र प्रारंभ किया जाएगा। केन्द्र में जनजातीय समुदाय के शिल्पकार, कलाकारों द्वारा जनजातीय संस्कृति और सभ्यता के विभिन्न आयामों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्यपाल श्री पटेल ने उनको बताया है कि कला का सम्मान समाज का दायित्व है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि राज्यपाल महोदय की भावना के अनुसार निर्माणाधीन प्रशिक्षण केन्द्र द्वारा प्रशिक्षक कलाकारों को सम्मान जनक मानदेय दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य की मोहन सरकार द्वारा जनजातीय समुदाय की खुशहाली के कार्यों में कोई कोर-कसर छोड़ी नहीं जाएंगी। आयुक्त जनजातीय कार्य एवं प्रबंध संचालक वन्या प्रकाशन श्री श्रीमन शुक्ला ने महोत्सव की जानकारी देते हुए बताया कि परंपरा को डिजाइन का साथ मिलता है तो वह आजीविका और आत्मनिर्भरता का प्रतीक बन जाता है। उन्होंने बताया कि महोत्सव के दौरान विशेषज्ञों द्वारा जनजातीय कलाकारों को तकनीकी ज्ञान देने के साथ ही जनजातीय शिल्प, कौशल व्यंजन परंपरा की प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया था। समापन कार्यक्रम में गोंड चित्र कलाकार श्री गगन सिंह मरावी, गौंड चित्रकार एवं नृत्यांगना श्रीमती संदीप्ती परस्ते ने प्रशिक्षण के अनुभवों को साझा किया। आयुक्त आदिमजाति क्षेत्रीय विकास योजनाएं श्रीमती वंदना वैद्य ने आभार प्रदर्शन में बताया कि महोत्सव में जनजातीय कार्य मंत्री ने क्रेता के रूप में आकर प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया था। कार्यक्रम का संचालन श्री विनय उपाध्याय ने किया।  

बुधनी में देश का पहला कृषि केंद्र खुलेगा, जहां पुरुष और महिला कृषकों को हाईटेक ड्रोन खेती के गुण सिखाए जाएंगे

भोपाल केंद्रीय कृषि मशीनरी प्रशिक्षण और परीक्षण संस्थान केंद्र से मध्य प्रदेश को बड़ी सौगात मिली है. सीहोर जिले के बुधनी में देश का पहला कृषि केंद्र खुलेगा. जहां पुरुष और महिला कृषकों को हाईटेक ड्रोन खेती के गुण सिखाए जाएंगे. बता दें कि प्रशिक्षण के पहले चरण में 20 सीटें उपलब्ध होंगी. इसके लिए आवेदक को कम से कम 10वीं पास होना आवश्यक है. आवेदन करने के लिए संबंधित विभाग या कार्यालय से संपर्क करना होगा. कृषि केंद्र से प्रशिक्षित किसान नई तकनीकों का प्रयोग कर अपनी आय को और बढ़ा सकते हैं. साथ ही खेती के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सकते हैं. क्योंकि आज के समय में किसानों के लिए ड्रोन खेती एक महत्वपूर्ण तकनीक बन चुकी है. जो फसलों की निगरानी, छिड़काव और फसल निरीक्षण में मददगार है. इससे न केवल लागत कम होगी, बल्कि फसल गुणवत्ता भी बेहतर होगी.

ब्रह्मोस मिसाइल की ताकत आपने ऑपरेशन सिंदूर में देखी होगी, अगर नहीं देखी तो पाकिस्तान वालों से पूछ लो : CM योगी

लखनऊ यूपी की राजधानी लखनऊ में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डिफेंस इंड्यूटियल कॉरिडोर में ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल प्रोडक्शन यूनिट का वर्जुअली उद्घाटन किया. इस दौरान कार्यक्रम में सीएम योगी आदित्यनाथ शामिल थे. इस यूनिट को हर साल 80 से 100 मिसाइलों के प्रोडक्शन के लिए डिजाइन किया गया है. इस मौके पर सीएम योगी ने कहा कि आतंकवाद कुत्ते की पूंछ है, जो कभी सीधी नहीं होगी. उसको उसी भाषा में जवाब देना होगा. हमने ब्रह्मोस मिसाइल के लिए दो सौ एकड़ जमीन दी. अब यहां ब्रह्मोस बनना शुरू होगा. ब्रह्मोस मिसाइल की ताकत आपने ऑपरेशन सिंदूर में देखी होगी, अगर नहीं देखी तो पाकिस्तान वालों से पूछ लो कि ब्रह्मोस मिसाइल की ताकत क्या है? उन्होंने कहा कि आतंकवाद के प्रति प्रधानमंत्री ने घोषणा की है कि कोई भी आतंक घटना अब युद्ध मानी जाएगी और याद रखना आतंकवाद को जब तक हम पूरी तरह कुचलेंगे नहीं, तब तक समस्या का समाधान नहीं होगा. अब समय आ गया है इसको कुचलने के लिए हम सभी को एक स्वर से प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में पूरे भारत को पूरे उत्तर प्रदेश को मिलकर अभियान के साथ जुड़ना होगा.   उन्होंने कहा कि आतंकवाद कुत्ते की पूंछ है, जो कभी सीधी नहीं होने वाली. जो प्यार की भाषा मानने वाले नहीं हैं, उनको उनकी भाषा में जवाब देने के लिए तैयार होना होगा. इस दिशा में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से दुनिया को एक संदेश दे दिया है. लखनऊ में शुरू की गई एयरोस्पेस इंटीग्रेशन एंड टेस्टिंग फैसिलिटी से हर साल 80 से 100 ब्रह्मोस मिसाइलों का उत्पादन किया जाएगा. इसके अलावा हर साल 100 से 150 Next Generation की ब्रह्मोस मिसाइलों का भी निर्माण किया जाएगा. ये मिसाइलें एक साल के अंदर तैयार कर दी जाएंगी. अभी तक सुखोई जैसे लड़ाकू विमान सिर्फ एक ब्रह्मोस मिसाइल ही ले जा सकते हैं, लेकिन अब वे Next Generation की तीन ब्रह्मोस मिसाइलें ले जा सकेंगे. Next Generation की ब्रह्मोस मिसाइल की मारक क्षमता 300 किलोमीटर से अधिक होगी और इसका वजन 1,290 किलोग्राम होगा, जबकि वर्तमान ब्रह्मोस मिसाइल का वजन 2,900 किलोग्राम है. लखनऊ में 300 करोड़ रुपये की लागत से तैयार यह प्रोडक्शन यूनिट ब्रह्मोस मिसाइलों का निर्माण करेगी, जिसकी मारक क्षमता 290 से 400 किलोमीटर है और इसकी अधिकतम गति मैक 2.8 है. भारत और रूस के संयुक्त उद्यम ब्रह्मोस एयरोस्पेस द्वारा विकसित इस मिसाइल को जमीन, समुद्र या हवा से लॉन्च किया जा सकता है. यह ‘फायर एंड फॉरगेट’ गाइडेंस सिस्टम को फॉलो करती है. बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2018 के वैश्विक निवेशक शिखर सम्मेलन के दौरान रक्षा औद्योगिक कॉरिडोर पहल के हिस्से के रूप में प्रोडक्शन यूनिट की घोषणा की गई थी. इसके बाद साल 2021 में इसकी आधारशिला रखी गई थी. ब्रह्मोस मिसाइलें भारत के डीआरडीओ और रूस के एनपीओ मशीनोस्ट्रोयेनिया द्वारा संयुक्त रूप से विकसित की गई हैं और इन्हें भारत के डिफेंस सिस्टम के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है. इसी कार्यक्रम में टाइटेनियम और सुपर अलॉयज मैटीरियल प्लांट (स्ट्रैटेजिक मैटीरियल टेक्नोलॉजी कॉम्प्लेक्स) का भी शुभारंभ किया गया. इसमें एयरोस्पेस और रक्षा विनिर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री का प्रोडक्शन जाएगा. इसके अलावा रक्षा परीक्षण अवसंरचना सिस्टम (डीटीआईएस) की आधारशिला रखी गई. डीटीआईएस का उपयोग रक्षा उत्पादों के परीक्षण और प्रमाणन के लिए किया जाएगा. उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा निःशुल्क उपलब्ध कराई गई 80 हेक्टेयर भूमि पर निर्मित ब्रह्मोस प्रोडक्शन यूनिट साढ़े तीन वर्षों में पूरी हुई. यूपी डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में छह नोड हैं, जिनमें लखनऊ, कानपुर, अलीगढ़, आगरा, झांसी और चित्रकूट शामिल है. इसका उद्देश्य प्रमुख रक्षा निवेशों को आकर्षित करना है. तमिलनाडु के बाद उत्तर प्रदेश ऐसा कॉरिडोर स्थापित करने वाला दूसरा राज्य है.  

मध्य प्रदेश में अभी तक 15 लाख ऐसे हितग्राही चिह्नित, 83 लाख का ई-केवायसी बाकी

भोपाल खाद्य सुरक्षा कानून के अंतर्गत प्रतिमाह दिए जाने वाले निश्शुल्क खाद्यान्न का लाभ केवल पात्र व्यक्तियों को ही मिले, इसके लिए ई-केवायसी करवाया जा रहा है। मध्य प्रदेश में अभी तक 15 लाख ऐसे हितग्राही चिह्नित किए गए हैं, जिनका या तो निधन हो गया है या फिर वे चार माह से खाद्यान्न लेने नहीं आए। इन सभी के नाम पात्रता सूची से हटाए गए हैं। अभी भी 83 लाख हितग्राहियों का ई-केवायसी होना बाकी है। इनमें भी तीन से चार लाख ऐसे हितग्राही हो सकते हैं, जिनका नाम दो जगह दर्ज है, उनका निधन हो चुका है या फिर खाद्यान्न लेने ही नहीं आ रहे हैं। ऐसे हितग्राहियों का नाम सूची से काटकर नए नाम जोड़े जाएंगे।   खाद्य सुरक्षा कानून के प्रविधान के अंतर्गत मध्य प्रदेश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के 5.46 करोड़ हितग्राही हो सकते हैं। यह संख्या साढ़े पांच करोड़ को पार कर गई थी। जांच कर कुछ नाम छांटे गए फिर भी अपात्रों को राशन मिलने की शिकायतें आ रही थीं। इसे देखते हुए सरकार ने ई-केवायसी की प्रक्रिया प्रारंभ की। इसमें एक-एक हितग्राही की पहचान सुनिश्चित करने के लिए आधार आधारित बायोमैट्रिक सत्यापन कराया जा रहा है। साढ़ें चार लाख हितग्राही राशन लेने ही नहीं आ रहे इसमें साढ़े चार लाख हितग्राही तो ऐसे पाए गए जो चार माह से राशन लेने के लिए नहीं आ रहे हैं। जबकि, योजना में निश्शुल्क खाद्यान्न देने का प्रविधान है। इसी तरह जांच में यह भी सामने आया कि लगभग 10 लाख हितग्राही ऐसे हैं, जिनका या तो निधन हो चुका है या फिर कहीं चले गए हैं। ऐसे सभी लोगों के नाम काटे जाने चाहिए थे लेकिन सूची में दर्ज थे। इनके नाम पर खाद्यान्न भी आवंटित हो रहा है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जनवरी से अप्रैल, 2025 के बीच 15 लाख नाम सार्वजनिक वितरण प्रणाली के हितग्राहियों की सूची से हटाए जा चुके हैं। यह प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है इसलिए संख्या बढ़ भी सकती है।   समग्र के डाटा से हटते हैं नाम विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जब भी किसी हितग्राही परिवार के किसी सदस्य का निधन होता है या फिर विवाह कर लड़की ससुराल चली जाती है तो उसका नाम हटाना होता है। इसकी जानकारी स्थानीय निकायों द्वारा संग्रहित कर समग्र पोर्टल पर दर्ज कराई जाती है। वहां से खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग को प्रतिमाह डाटा मिलता है, जिसके आधार पर नाम हटाए जाते हैं। इंदौर में सर्वाधिक और भिंड में सबसे कम ई-केवायसी प्रदेश में अभी तक 84 प्रतिशत ई-केवायसी का काम हो चुका है। सर्वाधिक 92 प्रतिशत हितग्राहियों का ई-केवायसी इंदौर में हुआ है, जबकि सबसे कम 75 प्रतिशत भिंड जिले का रहा है। बालाघाट में 90, भोपाल 85, उज्जैन 83 जबलपुर 81 प्रतिशत हितग्राहियों का ई-केवायसी किए जा चुका है। टीकमगढ़, शिवपुरी, आलीराजपुर, अशोक नगर जिले में 80 प्रतिशत से कम काम हुआ है। 2.90 लाख टन प्रतिमाह लगता है गेहूं-चावल सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत प्रतिमाह 2.90 लाख टन निश्शुल्क खाद्यान्न दिया जाता है। इसमें 1.74 लाख टन चावल और 1.16 लाख टन गेहूं है। प्रदेश सरकार ने चावल का कोटा कम करके गेहूं का बढ़ाने की मांग की है। गेहूं उपार्जन का काम पूरा हो चुका है इसलिए अब कोटा में परिवर्तन संभव है।

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