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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा – मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र विभिन्न क्षेत्रों में साथ कार्य करेंगे

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र विभिन्न क्षेत्रों में साथ कार्य करेंगे। दोनों राज्यों की साझा विरासत के संरक्षण में मिलकर कार्य करेंगे। उद्योगों के क्षेत्र और सांस्कृतिक आध्यात्मिक परंपराओं, पर्यटन और बागवानी के क्षेत्र में दोनों राज्यों की परस्पर सहयोग की गतिविधियां बढ़ाई जाएंगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शनिवार को कुशाभाऊ ठाकरे सभागृह में “तापी मेगा रिचार्ज परियोजना” से संबंधित एमओयू हस्ताक्षरित होने के पश्चात अन्य क्षेत्रों में मिलकर कार्य करने के बारे में विचार व्यक्त किए। जबलपुर- नागपुर कॉरिडोर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश से फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल्स तथा कृषि उत्पादन का महाराष्ट्र के विभिन्न बंदरगाहों के माध्यम से काफी निर्यात होता है। महाराष्ट्र के विभिन्न बंदरगाहों में एक डेडिकेटेड निर्यात सुविधा प्रकोष्ठ के गठन की संभावनाओं पर विचार किया जाएगा। जबलपुर से नागपुर के मध्य एक डेडिकेटेड फ्रंट कॉरिडोर बन जाने से मध्य भारत क्षेत्र में माल परिवहन में भाड़ा, समय और लागत की अत्यधिक बचत संभव होगी। आध्यात्मिक पर्यटन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे अनेक तीर्थ दोनों राज्यों और देश के नागरिकों के आस्था केंद्र हैं। मध्यप्रदेश के दोनों ज्योतिर्लिंग श्री महाकालेश्वर और श्री ओंकारेश्वर को महाराष्ट्र के ज्योतिर्लिंग श्री त्र्यंबकेश्वर, श्री भीमाशंकर और श्री घृष्णेश्वर से जोड़कर धार्मिक पर्यटन सर्किट विकसित किया जा सकता है। देवी अहिल्या के योगदान से दोनों राज्यों के युवाओं को कराएंगे अवगत लोकमाता अहिल्या बाई होल्कर का महाराष्ट्र से संबंध था। बुनकर समाज के हित में महेश्वर सहित मालवा के अन्य स्थानों पर प्रशिक्षण और व्यवसाय उन्नयन के प्रयास किए जा रहे हैं। लोकमाता अहिल्या बाई होल्कर के सांस्कृतिक, धार्मिक और सुशासन क्षेत्र के योगदान से दोनों प्रदेशों के प्रमुख नगरों में लाइट एण्ड साउंड शो, नाटक मंचन के माध्यम से वर्तमान पीढ़ी को अवगत करवाया जा सकता है। आगामी 20 मई को राजवाड़ा इंदौर में कैबिनेट बैठक का आयोजन लोकमाता अहिल्या बाई होल्कर के सम्मान में हो रहा है। साहसी योद्धाओं के स्वर्णिम इतिहास पर दोनों राज्यों को गर्व मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मराठा राजशाही का संबंध मध्यप्रदेश से रहा है। साहसी योद्धा बाजीराव पेशवा सहित होलकर, शिंदे (सिंधिया), तात्या टोपे, रानी लक्ष्मी बाई, अप्पाजी भोंसले से जुड़े इतिहास के गौरवशाली दस्तावेजों के संकलन और डिजिटलाइजेशन के कार्य भी किए जायेंगे। इसी क्रम में मोड़ी लिपि की पांडुलिपियों को संरक्षित करने और उनके प्रकाशन में दोनों राज्य सहभागिता कर सकते हैं। प्रदेश में मोड़ी लिपि के लगभग 21 लाख दस्तावेज संरक्षित किए जा चुके हैं। केला महोत्स और आम महोत्सव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में जहां बुरहानपुर में केला महोत्सव होता है, वहीं महाराष्ट्र के रत्नागिरी में आम महोत्सव का प्रचलन है। इन दोनों महोत्सवों को जोड़कर पर्यटन और उद्यानिकी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा सकता है।  

15 जून तक आ सकता है मानसून, मध्‍य प्रदेश में सामान्य से अधिक होगी बारिश

भोपाल प्रदेश में इस बार दक्षिण-पश्चिम मानसून अपने तय समय (15 जून) पर प्रदेश में पूर्वी क्षेत्र से दस्तक दे सकता है। प्रवेश करने के पांच दिन में मानसून के पूरे प्रदेश में छा जाने की भी संभावना जताई गई है। मौसम विज्ञानियों ने मध्य प्रदेश में मानसून की वर्षा सामान्य से अधिक होने की भी उम्मीद जताई है। बता दें कि पिछले वर्ष प्रदेश में मानसून छह दिन की देरी से 21 जून को आया था। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने इस बार देश में मानसून का प्रवेश चार दिन पहले अर्थात 27 मई तक होने का अनुमान लगाया है। इस हिसाब से 15 से 18 दिन में मानसून के मप्र में प्रवेश करने के आसार हैं। प्रदेश में मानसून आने की सामान्य तारीख 15 जून है। हालांकि पिछले कुछ वर्षों से मानसून की प्रदेश में एंट्री 18 जून के बाद ही हुई है। मौसम विज्ञान केंद्र की वरिष्ठ मौसम विज्ञानी डा. दिव्या ई. सुरेंद्रन ने बताया कि यदि देश में मानसून जल्दी आता है, तो प्रदेश में भी इसके तय समय पर आने की संभावना है। पिछले वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून ने 21 जून को प्रदेश के पूर्वी क्षेत्र पांर्ढुना, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी और अनूपपुर जिलों में प्रवेश किया था। इस बार भी इन्हीं जिलों से मानसून के प्रवेश की संभावना बताई जा रही है। सामान्य से बेहतर रहने की उम्मीद प्रदेश में इस बार मानसून के सामान्य से बेहतर रहने की उम्मीद है। अनुमान के मुताबिक, प्रदेश में 104 से 106 प्रतिशत अर्थात औसत 38-39 इंच वर्षा हो सकती है। जबलपुर-शहडोल संभाग में सबसे ज्यादा वर्षा संभावित है। जबकि ग्वालियर, चंबल, इंदौर, उज्जैन और भोपाल संभाग में भी वर्षा का कोटा फुल हो सकता है। बता दें कि प्रदेश की सामान्य वर्षा औसत 37.3 इंच है। पिछले 10 वर्षों में प्रदेश में कब-कब आया मानसून वर्ष- आगमन- विदा हुआ2024- 21 जून- 07 अक्टूबर2023- 24 जून- 09 अक्टूबर2022- 16 जून- 14 अक्टूबर2021- 09 जून- 11 अक्टूबर2020- 14 जून- 21 अक्टूबर2019- 24 जून- 12 अक्टूबर2018- 25 जून- 04 अक्टूबर2017- 22 जून- 11 अक्टूबर2016- 19 जून- 13 अक्टूबर2015- 15 जून- 02 अक्टूबर(मौसम विज्ञान केंद्र के सौजन्य से)

महाकाल मंदिर में अब सीमित को ही भस्म आरती में शामिल होने की अनुमति प्रदान की जाएगी

उज्जैन ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में अब सीमित संख्या में भक्तों को ही भस्म आरती में शामिल होने की अनुमति प्रदान की जाएगी। कितने भक्तों को प्रतिदिन अनुमति दी जाएगी, इसकी संख्या समिति तय करेगी। इसके लिए जल्द ही उच्च स्तरीय समिति का गठन किया जाएगा। यह निर्णय गुरुवार को प्रबंध समिति की बैठक में लिया गया है। बता दें, वर्तमान में करीब 1800 भक्तों को प्रतिदिन भस्म आरती दर्शन अनुमति दी जा रही है।   नंदी, गणेश और कार्तिकेय मंडपम में बैठते हैं भक्त महाकाल मंदिर में प्रतिदिन तड़के चार बजे भगवान महाकाल की भस्म आरती की जाती है। मंदिर में स्थान सीमित है, इसलिए मंदिर समिति प्रतिदिन 1800 भक्तों को ही अनुमति देती है। इन दर्शनार्थियों को नंदी, गणेश व कार्तिकेय मंडपम में बैठाकर भस्म आरती के दर्शन कराए जाते हैं। देखने में आ रहा है कि जो दर्शनार्थी गर्भगृह के द्वार की सीध में बैठे होते हैं उन्हें दर्शन हो जाते हैं लेकिन जो आसपास बैठते हैं, उन्हें सुविधा से दर्शन नहीं हो पाते हैं। दर्शनार्थियों की सीमित संख्या होने पर श्रद्धालु ऐसे स्थान पर बैठ पाएंगे, जहां से भस्म आरती के सुविधापूर्वक दर्शन हो सकेंगे। चलायमान व्यवस्था करेंगे प्रभावी प्रबंध समिति ने चलायमान व्यवस्था से अधिक श्रद्धालुओं को भस्म आरती दर्शन कराने का निर्णय लिया है। 11 जुलाई से श्रावण मास की शुरुआत भी होने वाली है, ऐसे में चलायमान व्यवस्था को सुदृढ़ बनाया जाएगा। यह व्यवस्था पूरी तरह निश्शुल्क है और इसके लिए किसी प्रकार की कोई अनुमति भी नहीं लेनी पड़ती है। भक्तों को तड़के चार बजे से ही भगवान महाकाल के दर्शन सुलभ हो जाते हैं।   इन माध्यमों से मिलती है अनुमति ऑनलाइन मंदिर की वेबसाइट पर भक्त आनलाइन दर्शन अनुमति प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए प्रतिव्यक्ति 200 रुपये शुल्क चुकाना होता है। प्रतिदिन 400 भक्तों को आनलाइन अनुमति दी जाती है। ऑफलाइन महाकाल महालोक स्थित बुकिंग काउंटर के माध्यम से प्रतिदिन 300 भक्त आफलाइन अनुमति प्राप्त कर सकते हैं। ऑफलाइन अनुमति निश्शुल्क है। प्रोटोकाल सांसद, मंत्री, विधायक, विभिन्न विभागों के प्रमुखों की अनुशंसा पर करीब 600 लोगों को प्रतिदिन दर्शन अनुमति दी जाती है। प्रोटोकाल दर्शन अनुमति के लिए भी 200 रुपये शुल्क चुकाना होता है। पुजारी, पुरोहित मंदिर समिति प्रतिदिन पुजारी, पुरोहित व उनके प्रतिनिधियों के यजमानों को करीब 500 अनुमति जारी करती है। इसके लिए भी यजमानों को प्रति व्यक्ति 200 रुपये शुल्क चुकाना होता है।

मौसम विभाग ने बताया-इस बार समय से पांच दिन पहले ही मॉनसून केरल तट पर पहुंच सकता है

नई दिल्ली   मौसम को लेकर बड़ा अपडेट आ गया है। मौसम विभाग के मुताबिक इस बार समय से पांच दिन पहले ही मॉनसून केरल तट पर पहुंच सकता है। 27 मई को मॉनसून पहुंचने की संभावना जताई गई है। आम तौर पर मॉनसून 1 जून को केरल तट पर पहुंचता है। आईएमडी के आंकड़े के अनुसार, यदि मानसून केरल में उम्मीद के अनुरूप पहुंचता है, तो यह 2009 के बाद से भारतीय मुख्य भूमि पर मानसून का समय से पहले आगमन होगा। तब मानसून 23 मई को आया था। आमतौर पर, दक्षिण-पश्चिम मानसून एक जून तक केरल में दस्तक देता है और 8 जुलाई तक पूरे देश में छा जाता है। यह 17 सितंबर के आसपास उत्तर-पश्चिम भारत से पीछे हटना शुरू कर देता है और 15 अक्टूबर तक पूरी तरह से वापस चला जाता है। आईएमडी ने अप्रैल में 2025 के मानसून में सामान्य से अधिक कुल वर्षा का पूर्वानुमान जताया था और अल नीनो परिस्थितियों की संभावना को खारिज कर दिया था, जो भारतीय उपमहाद्वीप में सामान्य से कम वर्षा से जुड़ी है। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय में सचिव एम रविचंद्रन ने कहा था, ‘भारत में चार महीने के मानसून (जून से सितंबर) में सामान्य से अधिक वर्षा होने की संभावना है।’ इस बार प्री मॉनसून ऐक्टिविटी भी काफी देखी जा रही है। पिछले एक महीने से देश के बड़े हिस्से में तेज हवाओं और बारिश की गतिविधियां जारी ही रही हैं। शनिवार को भी राजधानी दिल्ली में बौछार पड़ने के बाद मौसम ठंडा हो गया। वहीं बीते पांच दिनों में उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा और पंजाब में अलग-अलग इलाकों में बारिश हुई है। पश्चिमी विक्षोभ और अन्य कारणों से उत्तर भारत में होने वाली बारिश के चलते अब तक हीटवेव का ज्यादा प्रकोप देखने को नहीं मिला है। वहीं गर्मी बढ़ने की संभावना के बीच मॉनसून जल्दी आने की खबर भी राहत भरी है।

स्टारलिंक को भारत में सर्विसेज शुरू करने की हरी झंडी मिली, लगेगा 4 % स्पेक्ट्रम शुल्क

नई दिल्ली  दुनिया के सबसे बड़े रईस एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक को भारत में सर्विसेज शुरू करने की हरी झंडी मिल गई है। यह कंपनी सैटेलाइट के जरिए दुनिया के 100 से अधिक देशों में इंटरनेट सर्विसेज देती है। इस बीच दूरसंचार नियामक ट्राई ने स्टारलिंक जैसे उपग्रह संचार सेवा प्रदाताओं पर वार्षिक राजस्व का चार प्रतिशत स्पेक्ट्रम शुल्क लगाने की सिफारिश की है। ट्राई ने दूरसंचार विभाग को दी गई अपनी सिफारिश में कहा है कि शहरी क्षेत्रों में सेवाएं देने वाले सेवा प्रदाताओं को प्रति ग्राहक 500 रुपये अतिरिक्त शुल्क देना होगा। हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों में सेवाओं के लिए इन कंपनियों को कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा। ट्राई ने सिफारिश की है कि उपग्रह ब्रॉडबैंड स्पेक्ट्रम पांच साल के लिए आवंटित किया जाए जिसे बाद में दो साल के लिए बढ़ाया जा सकता है। AGR का चार प्रतिशत स्पेक्ट्रम शुल्क भू-स्थैतिक कक्षा (जीएसओ) और गैर-भूस्थैतिक कक्षा (एनजीएसओ) में स्थित उपग्रहों के जरिये सेवाएं देने वाली दोनों तरह की उपग्रह संचार कंपनियों को देना होगा। न्यूनतम वार्षिक स्पेक्ट्रम शुल्क 3,500 रुपये प्रति मेगाहर्ट्ज होगा। एजीआर का उपयोग उस राजस्व की गणना करने के लिए किया जाता है, जिसे दूरसंचार कंपनियां स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क और लाइसेंस शुल्क के रूप में सरकार के साथ साझा करती हैं। ट्राई का यह प्रस्तावित शुल्क सेवा प्रदाता कंपनियों के अनुरोध से काफी अधिक है। मस्क की स्टारलिंक और एमेजन इंक की सहायक कंपनी कुइपर सिस्टम्स ने ट्राई के साथ परामर्श के दौरान स्पेक्ट्रम शुल्क को एजीआर के एक प्रतिशत से कम रखने और कोई अन्य शुल्क नहीं लगाने का आग्रह किया था। ट्राई के चेयरमैन अनिल कुमार लाहोटी ने सिफारिशें जारी करते हुए कहा कि उपग्रह संचार सेवाएं उन वंचित क्षेत्रों में संपर्क स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं, जहां दूरसंचार नेटवर्क उपलब्ध नहीं हैं। इन सेवाओं की आपदाओं, बचाव और राहत कार्यों में भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ट्राई ने कहा कि स्पेक्ट्रम शुल्क को कारोबारी सुगतमा को बढ़ाते हुए एजीआर के प्रतिशत के रूप में लगाया जाना चाहिए। नियामक ने कहा, ‘कुल मिलाकर स्पेक्ट्रम शुल्क स्पेक्ट्रम के आवंटन को कवर करने के लिए जरूरी प्रशासनिक लागतों से अधिक नहीं होना चाहिए। यह निवेश और नवाचार को भी सुविधाजनक बनाएगा। डीओटी इन सिफारिशों पर कार्रवाई करेगा। यह उन्हें संशोधित कर सकता है या पूरी तरह स्वीकार कर सकता है और उन्हें मंजूरी के लिए मंत्रिमंडल को भेज सकता है। एक बार मंजूरी मिलने के बाद उपग्रह संचार कंपनियां लाइसेंस के लिए आवेदन कर सकती हैं। लेना होगा लाइसेंस स्टारलिंक को दो दिन पहले ही सेवा शुरू करने का आशय पत्र (LOI) दिया गया था। अब कंपनी को भारत में सेवाएं शुरू करने से पहले लाइसेंस हासिल करना होगा। स्पेसएक्स ने भारत में स्टारलिंक की ब्रॉडबैंड इंटरनेट सेवाओं की शुरुआत के लिए पहले ही रिलायंस जियो और भारती एयरटेल के साथ समझौता कर लिया है। ट्राई ने इन तर्कों को खारिज किया कि उपग्रह संचार सेवाएं स्थलीय मोबाइल नेटवर्कों के साथ सीधे प्रतिस्पर्धा करेंगी। इसके लिए दूरसंचार नियामक ने इन दोनों की नेटवर्क क्षमताओं और संचालन के पैमाने के बीच बहुत बड़ा अंतर होने का हवाला दिया। लाहोटी ने उपग्रह संचार पर अपनी अनुशंसा सौंपे जाने के बाद संवाददाताओं से कहा कि इनमें प्रतिस्पर्धा को लेकर कोई तुलना नहीं है, ये पूरक सेवाएं हैं। यह पूछने पर कि क्या उपग्रह संचार सेवाओं के लिए स्पेक्ट्रम पर ट्राई की सिफारिशों से स्थलीय मोबाइल सेवा प्रदाताओं को किसी तरह का झटका लगेगा, उन्होंने कहा, ‘इन सिफारिशों के कारण (दूरसंचार कंपनियों को) कोई नुकसान नहीं होगा।’ समान अवसर ट्राई ने अपनी प्रस्तुति में कहा कि उपग्रह संचार सेवाएं निकट भविष्य में स्थलीय सेवाओं के लिए काफी हद तक पूरक बनी रहेंगी और दोनों सेवाओं की परिचालन क्षमताओं तथा पैमाने में काफी अंतर है। भारतीय अंतरिक्ष संघ (आईएसपीए) ने कहा कि उपग्रह संचार सेवाओं के मूल्य निर्धारण पर ट्राई की सिफारिशें सरकार के लिए राजस्व जरूरतों और उपग्रह सेवाओं को किफायती एवं सुलभ रखने के बीच संतुलन बनाती हैं। इसके साथ ही आईएसपीए ने कहा कि इस सिफारिश में सबको समान अवसर देने पर भी ध्यान दिया गया है।

मुख्यमंत्री साय ने अपने हस्ताक्षर कर हाइड्रोजन ट्रक के चालक को सौंपी ट्रक की चाबी, दिखाई हरी झंडी

लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में स्वच्छ और ग्रीन ट्रांसपोर्ट को मिलेगा बढ़ावा रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी स्थित अपने निवास परिसर से देश के पहले हाइड्रोजन फ्यूल लॉजिस्टिक ट्रक को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने अपने हस्ताक्षर कर हाइड्रोजन ट्रक के चालक को चाबी सौंपी और इस अभिनव पहल के लिए सीएसपीजीसीएल और अडानी नैचरल रिसोर्सेस  को शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि यह पहल छत्तीसगढ़ और देश को हरित ऊर्जा की ओर अग्रसर करने वाला क्रांतिकारी कदम होगा।          मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ लगातार विकास कर रहा है और इसमें आज एक नया आयाम जुड़ा है। भारत के पहले हाइड्रोजन फ्यूलड लॉजिस्टिक ट्रक का शुभारंभ छत्तीसगढ़ में हो रहा है। उन्होंने कहा कि हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने पर विशेष फोकस है और उन्होंने वर्ष 2070 तक भारत को शून्य कार्बन उत्सर्जन वाला देश बनाने का जो संकल्प लिया है, उसे पाने की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण है। पर्यावरण संरक्षण और औद्योगिक विकास के बीच संतुलन साधने में भी यह कदम मददगार होगी। श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ खनिज संपदा समृद्ध प्रदेश है और इस ट्रक का उपयोग खनिज परिवहन में होने से कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पारंपरिक संसाधनों के साथ-साथ ग्रीन टेक्नोलॉजी और नवाचार को भी प्राथमिकता दी जा रही है। श्री साय ने कहा कि विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ संभव हैं और ऐसी पहल से हमारे संकल्प को और मजबूती मिलेगी। इस मौके पर अडानी एंटरप्राइजेज के नैचरल रिसोर्सेस के सीईओ डॉ. विनय प्रकाश ने भी अपने विचार साझा किए और इस पहल को खनन क्षेत्र में सतत विकास के लिए मील का पत्थर बताया। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ राज्य बीज विकास निगम के अध्यक्ष श्री चंद्रहास चंद्राकर, छत्तीसगढ़ स्टेट पावर जेनरेशन कंपनी लिमिटेड के प्रबंध संचालक श्री संजीव कटियार और अडानी ग्रुप के प्रतिनिधि मौजूद रहे। हाइड्रोजन ईंधन के उपयोग से ग्रीन एनर्जी को मिलेगा बढ़ावा        हाइड्रोजन प्रचुर मात्रा में पाया जाने वाला तत्व है और सबसे विशेष बात यह किसी भी प्रकार का हानिकारक उत्सर्जन नहीं करता है। हाइड्रोजन फ्यूल सेल से चलने वाले वाहन डीज़ल ट्रक जितनी दूरी और लोड उठाने की क्षमता रखते हैं। लेकिन धुएं के बजाए ये सिर्फ पानी की भांप और गर्म हवा उत्सर्जित करते हैं और आवाज़ भी बहुत कम करते हैं। चूंकि माइनिंग क्षेत्र में अधिकांश मशीनें मुख्य रूप से डीज़ल से ही चलती है, ऐसे में स्वच्छ ईंधनों को अपनाने से प्रदूषण और शोर को कम करने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही, यह कदम भारत की कच्चे तेल पर निर्भरता घटाने और कार्बन फुटप्रिंट कम करने में भी सहायक होगा। खास बात यह है कि अडानी नैचरल रिसोर्सेस एशिया की पहली कंपनी है, जिसने ‘डोज़र पुश सेमी ऑटोनॉमस तकनीक को अपनाया है, जिससे सुरक्षा और स्थिरता, दोनों को बढ़ावा मिल रहा है।          गौरतलब है कि भारतीय एवं अंतर्राष्ट्रीय तकनीकी साझेदारी से यह ट्रक तैयार किया गया है और इसमें ईंधन के तौर पर हाइड्रोजन का उपयोग होगा। इसके अंतर्गत माल परिवहन के लिए हाइड्रोजन फ्यूल सेल बैटरी से चलने वाले ट्रक विकसित किया जा रहा है। प्रत्येक ट्रक स्मार्ट तकनीक और तीन हाइड्रोजन टैंक से लैस होगा, जिसमें 200 किलोमीटर की दूरी तक 40 टन तक का माल ले जाने की क्षमता होगी। प्रदेश में हरित भविष्य को सुरक्षित करने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ स्टेट पावर जनरेशन कंपनी लिमिटेड और अदाणी नैचरल रिसोर्सेस ने यह साझा प्रयास किया है।छत्तीसगढ़ स्टेट पावर जेनरेशन कंपनी लिमिटेड द्वारा रायगढ़ जिले के गारे पेल्मा-3 कोल ब्लॉक से राज्य की विद्युत उत्पादन इकाई तक कोयला परिवहन में इसका उपयोग किया जाएगा।

नौ साल बाद प्रदेश में मोहन सरकार पदोन्नति की व्यवस्था शुरू करने की मंशा के साथ नए नियम बनाने में जुटी

भोपाल नौ साल बाद प्रदेश में मोहन सरकार पदोन्नति की व्यवस्था शुरू करने की मंशा के साथ नए नियम बनाने में जुटी है। इसमें जो प्रविधान प्रस्तावित किए जा रहे हैं वे पदोन्नति में आरक्षण नियम 2002 के तरह ही हैं। इसमें एससी-एसटी वर्ग के लिए आरक्षण अनुसार पदोन्नति के पद सुरक्षित रहेंगे। शेष अनारक्षित पदों के लिए जो योग्यता सह वरिष्ठता का फार्मूला बनेगा, उसमें आरक्षित वर्ग भी शामिल रहेगा। यही पदोन्नति में आरक्षण नियम-2002 के विरोध का प्रमुख कारण था।    कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों का कहना है कि सरकार को क्रमोन्नति जैसा फार्मूला निकालना चाहिए जिसमें सबको बराबरी से आगे बढ़ने का अवसर मिले। यही स्थिति अब फिर बनती नजर आ रही है। सामान्य, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक वर्ग अधिकारी-कर्मचारी संघ के प्रांताध्यक्ष केपीएस तोमर का कहना है कि अभी नए नियम का प्रारूप हमसे साझा नहीं किया गया है। पर जो बात सामने आ रही है, वह इशारा कर रही है कि लगभग पुरानी व्यवस्था ही बहाल करने की तैयारी है। यदि ऐसा होता है तो यह सुप्रीम कोर्ट के एम.नागराज सहित समय-समय पर दिए गए निर्देशों के विपरीत होगा। इसको लेकर हम विभाग के सामने प्रस्तुतीकरण भी दे चुके हैं। एससी-एसटी वर्ग को जनसंख्या के अनुपात में पदोन्नति में आरक्षण दिया जाता है और अनारक्षित पदों पर उन्हें अनारक्षित मानकर योग्यता सह वरिष्ठता के आधार पर लाभ दिया जाता है तो यह दोहरा लाभ देने और सामान्य वर्ग के कर्मचारियों के हितों की अवहेलना का मामला होगा। वर्ष 2016 तक पुराने नियम से पदोन्नति पाकर आरक्षित वर्ग के अधिकारी-कर्मचारी पहले ही ऊपर आ चुके हैं। यहीं से फिर पदोन्नति की प्रक्रिया आरंभ करने पर निश्चित तौर पर वे ही लाभान्वित होंगे। उच्च पदों पर अनारक्षित वर्ग पहुंच ही नहीं पाएगा। एम. नागराज के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कार्य दक्षता का आकलन करने के निर्देश दिए थे, उसका प्रविधान होना चाहिए और इसके लिए अलग प्रणाली हो। क्रीमीलेयर की तो बात ही नहीं हो रही है, जबकि हरियाणा के पदोन्नति में आरक्षण देने के निर्णय को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट निर्णय सुना चुकी है कि पदोन्नति में आरक्षण देने से पहले क्रीमीलेयर के सिद्धांत का पालन करना अनिवार्य होगा। समयमान का फार्मूला ही बेहतर उधर, मंत्रालयीन अधिकारी-कर्मचारी संघ के अध्यक्ष सुधीर नायक का कहना है कि यह बात समझ नहीं आती है कि पदोन्नति के मामले में असंमजस क्यों है। समयमान के साथ उच्च पदनाम देकर आसानी से समाधान हो सकता है। इसमें न किसी वर्ग की नाराजगी होगी और न ही कोर्ट की अवमानना। राज्य प्रशासनिक सेवा, कोष एवं लेखा, स्वास्थ्य, स्कूल शिक्षा, जनजातीय कार्य सहित अन्य विभाग इसे अपना भी चुके हैं और वहां कोई विवाद भी नहीं है। समयमान वेतनमान के साथ उच्च पदनाम देना ही इस मुद्दे का निर्विवाद और सर्वमान्य हल है। नियम लागू करते ही कैविएट लाएगी सरकार नए पदोन्नति नियम में आरक्षण शब्द ही नहीं रखा जा रहा है। इस नियम को पदोन्नति नियम-2025 कहा जाएगा। इसे कैबिनेट की मंजूरी मिलती है तो सामान्य प्रशासन विभाग हाई कोर्ट में कैविएट दायर करेगा ताकि यदि कोई इसे चुनौती देता है तो बिना सरकार का पक्ष सुने कोई आदेश न हो। दरअसल, विभाग को अंदेशा है कि नियम लागू होते ही प्रभावित पक्ष कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकता है।  

दिलीप जायसवाल ने कहा- प्रदेश में हाथकरघा एवं हस्तशिल्प के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए गए हैं

भोपाल कुटीर एवं ग्रामोद्योग राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री दिलीप जायसवाल ने कहा है कि प्रदेश में हाथकरघा एवं हस्तशिल्प के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए गए हैं। वित्तीय वर्ष 2024-25 में भोपाल, शहडोल, जबलपुर, ग्वालियर, सागर और इन्दौर में आयोजित रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव में हाथकरघा एवं हस्तशिल्प विकास निगम द्वारा सफलतापूर्वक भाग लिया गया। निगम के मृगनयनी एम्पोरियम, मुम्बई व टी.टी. नगर, भोपाल को विश्व स्तर पर आकर्षित करने के लिये आंतरिक साज-सज्जा की गयी। राज्यमंत्री श्री जायसवाल ने कहा कि हैण्डलूम दिवस के उपलक्ष्य में प्रदेश के 5 बुनकरों को पुरस्कृत किया गया। हैण्डलूम कपड़ों पर आधारित फैशन-शो का आयोजन कॉलेज की छात्राओं के सहयोग से गौहर महल भोपाल में किया गया। निगम ने बर्मिंघम, इंग्लैंड में 1 से 4 सितम्बर 2024 तक आयोजित ओटोमन फेयर में भी भाग लिया। वित्तीय वर्ष 2024-25 में कुल लक्ष्य 32 करोड़ रूपये के विरूद्ध 20 करोड़ रूपये की लक्ष्य उपलब्धि प्राप्त हुई, जो विक्रय लक्ष्य का 62.5 प्रतिशत है। वर्ष 2025-26 के लिये निगम की ब्रिकी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 34.71 करोड़ रूपये का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। एम्पोरियम के माध्यम से प्रदर्शनी, थीम सेल, एक्सपो का आयोजन कर अधिक से अधिक बिक्री कर लक्ष्य की प्राप्ति की जायेगी। राज्यमंत्री श्री जायसवाल ने कहा कि माह मार्च 2025 में हैरिटेज कलेक्शन प्रदर्शनी का आयोजन गौहर महल भोपाल में किया गया। निगम की वेब साइट का निर्माण एमपीएसईडीसी के माध्यम से किया जा रहा है, जिसका निगम के उत्पादों की बिक्री के लक्ष्य प्राप्ति में अहम योगदान होगा। वर्ष 2024-25 में विशेष रूप से बड़ी प्रदर्शनी जैसे सावन मेला, दीपोत्सव मेला, लोकमाता देवी अहिल्या बाई होल्कर मेले का आयोजन किया, जिससे प्रदेश के बुनकरों और शिल्पियों को अपना जीवन स्तर बेहतर बनाने तथा अधिक आय प्राप्त करने के अवसर मिले। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च 2025 के उपलक्ष्य में महिला ग्राहकों को हैण्डलूम सामग्री को आकर्षित करने के लिए 35 प्रतिशत फ्लैट डिस्काउंट समस्त एम्पोरियमों में दिया गया। इस अवसर पर 1 करोड़ 10 लाख रूपये का विक्रय हुआ, जिससे प्रदेश के बुनकरों को भी लाभ हुआ। वित्तीय वर्ष 2025-26 में विभाग द्वारा प्रस्तावित नवीन उल्लेखनीय कार्य राज्यमंत्री श्री जायसवाल ने कहा कि हाथकरघा बुनकरों के बच्चों को प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रवेश दिलाए जाने के लिए विभाग द्वारा तकनीकी शिक्षा विभाग की मेधावी छात्रा योजना में अन्तर्विभागीय लिंक स्थापित करने की कार्रवाई की जा रही है। बुनकरों एवं शिल्पियों को भविष्य में दिए जाने वाले कई प्रकार के लाभ सीधे उनके बैंक खातों में प्रदान किए जाना प्रस्तावित है। प्रदेश के आदिवासी जिले अनूपपुर में हाथकरघा प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना प्रस्तावित है। प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना में प्रदेश में बनाए जाने वाले उत्पादों के विक्रय के लिए संत रविदास हस्तशिल्प विकास निगम, भोपाल में लगभग 3 हजार वर्गफीट का स्थान आरक्षित किया जा चुका है। शोरूम की आंतरिक साज-सज्जा, भव्यता के लिये केंद्र शासन को एक प्रस्ताव भेजा गया है, इस राशि के प्राप्त होते ही प्रदेश में अपने प्रकार का एक विशिष्ट एवं उत्कृष्ट शोरूम स्थापित किया जाएगा। ओडीओपी योजना में प्रदेश के 7 जिलों में विशिष्ट उत्पादों का जीआई पंजीकरण कराया जा रहा है और इन उत्पादों को निर्यात किए जाने की कार्यवाही की जा रही है। प्रदेश में सोने और चांदी के उत्पादों की ‘ठेवा कला’ के माध्यम से राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्थान प्राप्त करने के लिए विशिष्ट योजना तैयार की जा रही है। लोकमाता देवी अहिल्या बाई होल्कर की 500वीं जयंती के अवसर पर महेश्वर में महेश्वरी वस्त्रों और साड़ियों का 500 नगों में विशिष्ट संग्रह तैयार कराया जा रहा है, जिसे शीघ्र ही ‘माँ अहिल्या देवी संग्रह’ के नाम से विक्रय केन्द्रों में उपलब्ध कराया जाएगा। शासन के निर्देशानुसार एवं वर्तमान समय की आवश्यकताओं के अनुरूप विभागीय योजनाओं का आधुनिकीकरण एवं विस्तार किया जा रहा है।  

प्रदेश का दुग्ध उत्पादन 50 लाख लीटर प्रतिदिन होगा: पशुपालन राज्य मंत्री लखन पटेल

भोपाल उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने रीवा जिले के होटल विजय विलास में आयोजित प्रांतीय राजपत्रित पशु चिकित्सक संघ के सम्मेलन का शुभारंभ किया। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि निराश्रित और बीमार गौवंश की सेवा तथा पुनर्वास वर्तमान समय की बड़ी चुनौती है। सरकार आधुनिक गौशालाओं का निर्माण कराकर निराश्रित गौवंश को आश्रय देने तथा खेती को बचाने का प्रयास कर रही है। प्रदेश भर में बड़ी संख्या में उन्नत गौशालाओं का निर्माण किया जा रहा है। इनमें हजारों गायों को नया जीवन मिलेगा। इस अभियान में निजी क्षेत्र की भी भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। गौमाता की सेवा से ही मानव जाति का कल्याण होगा। अगर गौमाता बेसहारा रही तो मानव जाति का भविष्य सुरक्षित नहीं होगा। श्री शुक्ल ने कहा कि रीवा में बसामन मामा गौवन्य विहार में सात हजार से अधिक निराश्रित गायों को आश्रय दिया गया है। इन गायों की सेवा में पशु चिकित्सक बड़ी तत्परता और लगन से कार्य कर रहे हैं। शीघ्र ही हिनौती में भी आधुनिक गौशाला शुरू होगी जिसमें लगभग 25 हजार गौवंश को रखने का लक्ष्य रखा गया है। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि पशुपालन को आधुनिक और व्यवस्थित बनाना आवश्यक है। पशुपालन को अपनाकर ही किसान खेती को लाभ का व्यवसाय बना सकेंगे। गौवंश को दूध न देने पर बेसहारा छोड़ने की मानसिकता है। गौमाता यदि दूध नहीं दे रही है तो भी उसका गोबर और गौमूत्र बहुमूल्य है। गौमाता में देवताओं का वास माना जाता है। इसलिए गोबर का उपयोग पूजा में भी किया जाता है। आधुनिक गौशालाओं में गोबर से अनेक उपयोगी वस्तुएं बनाने के साथ सीएनजी प्लांट लगाए जा रहे हैं। पशु चिकित्सकों की सराहना करते हुए उप मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉक्टर तो रोगी से पूछकर उसका इलाज करते हैं। पशु चिकित्सक बेजुबान पशुओं के लिए भगवान की तरह हैं। बाबा साहब अंबेडकर गौ संवर्धन योजना से डेयरी को मिलेगा नया आयाम – मंत्री पटेल पशुपालन एवं डेयरी विकास राज्यमंत्री श्री लखन पटेल ने कहा कि पशुपालन विभाग को विभिन्न नवाचारों के माध्यम से आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने सदैव पशुपालन विभाग को प्राथमिकता दी है। डेयरी के विकास के लिए बाबा साहब अंबेडकर गौ संवर्धन योजना लागू की गई है। इसमें कम से कम 25 दुधारू पशु की एक यूनिट बनाई गई है। प्रत्येक यूनिट पर पशुपालक को अनुदान दिया जा रहा है। इस योजना से डेयरी व्यवसाय को नया आयाम मिलेगा। अभी प्रदेश में 10 लाख लीटर दूध का प्रतिदिन संग्रहण होता है। इसे 50 लाख लीटर प्रतिदिन करने का लगातार प्रयास किया जा रहा है। समारोह में पशु चिकित्सा अधिकारियों की विभिन्न मांगों के संबंध में मंत्री श्री पटेल ने कहा कि मेडिकल के डॉक्टरों की तरह पशु चिकित्सा अधिकारियों को भी सभी सुविधाएं दी जाएंगी। इसके लिए प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। पशु चिकित्सा संघ की सभी उचित मांगे पूरी की जाएंगी। पशु चिकित्सा अधिकारियों का कार्य मानव के डॉक्टरों से अधिक कठिन और महत्वपूर्ण है। प्रदेश में हेल्पलाइन 1962 की गाड़ियों से पशुओं का उपचार बेहतर हुआ है। इन गाड़ियों की संख्या दुगनी करने का प्रयास किया जा रहा है। प्रदेश में निराश्रित गौवंश बड़ी चुनौती हैं। बेसहारा गायों के लिए प्रदेश में 22 स्थानों पर शीघ्र ही आधुनिक गौशालाओं का संचालन शुरू हो जाएगा। सरकार दो वर्षों में सभी बेसहारा गायों को गौशाला में व्यवस्थित कर देगी तब सड़कों पर गौवंश नहीं दिखेगा। गौशालाओं को पर्यटन स्थल और तीर्थ स्थल की तरह विकसित करेंगे। पशु चिकित्सा अधिकारी संघ के प्रांतीय अध्यक्ष डॉ मनोज गौतम ने कहा कि सरकार ने गौशाला के गौवंश के लिए 20 रुपए प्रतिदिन से राशि बढ़ाकर 40 रुपए कर दी है। इसी तरह आधुनिक डेयरी निर्माण के लिए भी ऋण और अनुदान का लाभ दिया जा रहा है। इस अवसर पर स्थानीय जनप्रतिनिधि तथा रीवा और शहडोल संभाग के सभी जिलों के पशु चिकित्सा अधिकारी शामिल रहे। समारोह में अतिथियों और सेवानिवृत्त पशु चिकित्सा अधिकारियों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। कार्यशाला का संचालन श्री अवनीश शर्मा ने किया।  

ऊर्जा मंत्री तोमर ने कहा- वित्तीय वर्ष 2024-25 में एनर्जी हैंडलिंग का नया कीर्तिमान

भोपाल ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया कि प्रदेश ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में विद्युत प्रणाली के संचालन में ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित किया है। इस वर्ष प्रदेश के पारेषण नेटवर्क ने कुल 1,01,039.88 मिलियन यूनिट ऊर्जा का सफलतापूर्वक संचालन किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 6.2 प्रतिशत अधिक है।ऊर्जा मंत्री श्री तोमर ने कहा कि यह उपलब्धि प्रदेश की विद्युत कंपनियों के अभियंताओं और तकनीशियनों की विशेषज्ञता, कुशल प्रबंधन और विद्युत प्रणाली के उत्कृष्ट रख-रखाव का प्रतिफल है। उन्होंने इस उपलब्धि के लिए तीनों विद्युत कंपनियों के अधिकारियों और कर्मचारियों को बधाई दी है। एक दिन में सर्वाधिक एनर्जी हैंडलिंग का रिकॉर्ड भी बना ऊर्जा मंत्री  श्री तोमर ने बताया कि 24 फरवरी 2025 को मध्यप्रदेश में एक दिन में सर्वाधिक एनर्जी हैडलिंग का रिकॉर्ड भी बना। इस दिन 353.77 मिलियन यूनिट ऊर्जा का सफलतापूर्वक संचालन किया गया, जो राज्य की विद्युत प्रणाली की उच्च कार्य क्षमता, विश्वसनीयता और स्थिरता का प्रतीक है। बिजली की मांग में वृद्धि और निरंतर आपूर्ति ऊर्जा मंत्री श्री तोमर ने यह जानकारी भी दी कि पिछले वित्तीय वर्ष 2023-24 में प्रदेश में कुल 95,137 मिलियन यूनिट ऊर्जा का संचालन किया गया था। इस वर्ष बिजली की निरंतर बढ़ती मांग को सफलतापूर्वक पूरा करते हुए 6.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। यह उपलब्धि राज्य में सभी स्तरों पर विद्युत प्रणाली की लगातार उपलब्धता के कारण संभव हो सकी। विगत दो वर्षों से प्रदेश में एनर्जी हैंडलिंग (ऊर्जा संचालन) में निरंतर वृद्धि हो रही है। वर्ष 2022-23 में 88,850 मिलियन यूनिट, वर्ष 2023-24 में 95,137 मिलियन यूनिट, और अब 2024-25 में 1,01,039.88 मिलियन यूनिट ऊर्जा का सफल संचालन हुआ है।  

विदेश मंत्रालय ने दी जानकारी, सीजफायर सहमति के बाद अब 12 मई को फिर करेंगे बात

नई दिल्ली भारत और पाकिस्‍तान के बीच तनातनी के बीच बड़ी खबर है। दोनों देशों के बीच सीजफायर पर सहमति बन गई है। इसे आज शाम 5 बजे से लागू कर दिया गया है। अब 12 मई को दोपहर 2 बजे फिर से इस पर बात होगी। यह जानकारी विदेश मंत्रालय ने दी। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा, “पाकिस्तान के डीजीएमओ ने आज दोपहर 15:35 बजे भारतीय डीजीएमओ को फोन किया। उनके बीच सहमति बनी कि दोनों पक्ष शाम 5 बजे से जमीन, हवा और समुद्र में सभी तरह की गोलीबारी और सैन्य कार्रवाई बंद कर देंगे।   सरकार का बड़ा फैसला: किसी भी आतंकी घटना को भारत के खिलाफ युद्ध माना जाएगा, उसी के हिसाब से देंगे जवाबसरकार का बड़ा फैसला: किसी भी आतंकी घटना को भारत के खिलाफ युद्ध माना जाएगा, उसी के हिसाब से देंगे जवाब इस सहमति को लागू करने के लिए दोनों पक्षों को निर्देश दिए गए हैं। वे 12 मई को 12 बजे फिर से बात करेंगे।” भारत-पाक युद्धविराम समझौते के बाद कमोडोर रघु आर नायर, विंग कमांडर व्योमिका सिंह और कर्नल सोफिया कुरैशी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। अब आगे क्‍या होगा दिल्ली: कमोडोर रघु आर नायर ने कहा, “समुद्र, हवा और जमीन पर सभी सैन्य गतिविधियों को रोकने के लिए सहमति बन गई है। भारतीय सेना, भारतीय नौसेना और भारतीय वायु सेनाओं को इस सहमति का पालन करने का निर्देश दिया गया है…”। कर्नल सोफिया कुरैशी ने किया पाक के तमाम दावों का खंडन     कर्नल सोफिया कुरैशी ने कहा, “पाकिस्तान ने दावा किया कि उसने अपने JF 17 से हमारे S400 और ब्रह्मोस मिसाइल बेस को नुकसान पहुंचाया, जो पूरी तरह से गलत है।     दूसरे, उसने एक गलत सूचना अभियान भी चलाया कि सिरसा, जम्मू, पठानकोट, भटिंडा, नलिया और भुज में हमारे हवाई अड्डों को नुकसान पहुंचाया गया, और उसकी यह गलत सूचना भी पूरी तरह से गलत है।     तीसरे, पाकिस्तान के गलत सूचना अभियान के अनुसार, चंडीगढ़ और व्यास में हमारे गोला-बारूद डिपो को नुकसान पहुंचाया गया, जो भी पूरी तरह से गलत है।     पाकिस्तान ने झूठे आरोप लगाए कि भारतीय सेना ने मस्जिदों को नुकसान पहुंचाया।     मैं यह स्पष्ट करना चाहती हूं कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है और हमारी सेना भारत के संवैधानिक मूल्य का एक बहुत ही सुंदर प्रतिबिंब है…” विंग कमांडर व्योमिका सिंह ने कहा, “सर्वोच्च सम्मान के साथ, हमारे अभियान विशेष रूप से भारत विरोधी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किए जा रहे आतंकवादी शिविरों और सुविधाओं पर लक्षित हैं। भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा किसी भी धार्मिक स्थल को निशाना नहीं बनाया गया है…”

एमपी-महाराष्ट्र के बीच एमओयू, मध्यप्रदेश के लिए 10 मई का दिन बेहद खास रहा

भोपाल मध्यप्रदेश के लिए 10 मई का दिन बेहद खास रहा। प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपने ज्ञान (गरीब-युवा-अन्नदाता-नारी शक्ति) को लेकर एक और ठोस कदम उठाया। दरअसल, शनिवार को मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र ने ‘तापी बेसिन मेगा रीचार्ज परियोजना’ पर एमओयू साइन साइन किया। इस परियोजना से मध्यप्रदेश में एक लाख और महाराष्ट्र में 2 लाख से ज्यादा हैक्टेयर जमीन पर सिंचाई होगी। मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र की इस संयुक्त परियोजना से हजारों किसानों को फायदा पहुंचेगा। दोनों सरकारों के बीच ये एमओयू महाराष्ट्र अंतरराज्यीय नियंत्रण मंडल की 28वीं बैठक के बाद हुआ। यह बैठक राजधानी भोपाल के कुशाभाऊ कंवेंशन सेंटर में हुई। बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ-साथ महाराष्ट्र के सीएम देवेन्द्र फडणवीस भी मौजूद थे।   दोनों मुख्यमंत्रियों ने दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम की शुरुआत की। इसके बाद दोनों मुख्यमंत्रियों ने एमओयू साइन कर एक-दूसरे के साथ फाइलों का आदान प्रदान किया। इस मौके पर सीएम यादव ने कहा कि आज महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश के रिश्तों के नए अध्याय की शुरुआत हुई है। मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद देता हूं कि उन्होंने दो राज्यों के बीच होने वाले नदी के समझौतों को गंभीरता से लिया और उसके लिए कोष की व्यवस्था की। गोदावरी और ताप्ती नदी को लेकर हमारा और महाराष्ट्र का अलग संबंध है। ताप्ती नदी का महत्व मां नर्मदा की तरह है। मध्यप्रदेश नदियों का मायका है। यहां से 247 से ज्यादा नदियां बहती हैं। हमारे प्रदेश में कोई ग्लैशियर नहीं है, लेकिन उसके बाद जलराशि इतनी ज्यादा है कि वो गंगा-यमुना से ज्यादा पानी दूसरे प्रदेशों को देती है। हमारी नदियां देश के हर राज्य की नदी से जुड़ी हैं और उन्हें लाभ प्रदान कर रही हैं। इससे लागत मे बचत होगी। सीएम डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के महाकालेश्वर और ओंकारेश्वर को नासिक के त्र्यंबकेश्वर, भीमाशंकर और घृष्णेश्वर से जोड़कर धार्मिक पर्यटन का सर्किट बनाएंगे। राज्यों की अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी- महाराष्ट्र सीएम फडणवीस     कार्यक्रम में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि आज का दिन एतिहासिक है, क्योंकि, कई वर्षों से तापी रीचार्ज का प्रोजेक्ट संकल्पित हुआ था। लेकिन, किन्हीं कारणों से पीछे रहा था।     आज दोनों राज्यों ने उस पर सहमति व्यक्त की है। हमने उस पर आज हस्ताक्षर भी कर दिए। 25 साल बाद आज अंतरराज्यीय नियंत्रण बोर्ड की मीटिंग हुई।     साल 2016 में मोदी सरकार आने के बाद अंतरराज्यीय पानी के समझौतों को एक बल दिया गया। और, उसके तहत हमने फिर इस पर विचार शुरू किया।     मैं प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव का आभार व्यक्त करता हूं कि उन्होंने इसमें तेजी दिखाई और प्रोजेक्ट को इस स्तर तक ले आए। तापी मेगा प्रोजेक्ट दुनिया का अजूबा है।     हम जब साइट पर गए तो लगा कि एक गुप्त नदी आती है और पानी कूएं में जाता है। लगातार 24 घंटे तक पानी जाने के बावजूद भी कूएं का जलस्तर ओवरफ्लो नहीं होता।     इसलिए इस प्रोजेक्ट से मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र को बड़ा फायदा होने वाला है। इससे ओकाला, बुलढाणा, अमरावती की सूरत बदल जाएगी। लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।     किसानों का जीवन बदल जाएगा। ये दोनों राज्यों की अर्थव्यस्था को भी गति देगा। मैं नागपुर से आता हूं।     नागपुर विदर्भ का हिस्सा है और विदर्भ प्रदेश की राजधानी हुआ करती थी। इस तरह हमारा और मध्यप्रदेश का गहरा नाता है।  

शिक्षा विभाग के अधिकारियों का तबादला, शिक्षा व्यवस्था में लापरवाही बर्दाश्त नहीं : मुख्यमंत्री साय

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की जीरो टॉलरेंस नीति और परिणाम आधारित कार्यशैली का असर अब स्पष्ट रूप से दिखने लगा है। राज्य शासन के स्कूल शिक्षा विभाग ने आज महासमुंद जिले में पदस्थ जिला शिक्षा अधिकारी का स्थानांतरण करते हुए यह स्पष्ट कर दिया है कि शिक्षा व्यवस्था में लापरवाही, निष्क्रियता और खराब प्रदर्शन अब किसी भी स्तर पर स्वीकार्य नहीं है। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार महासमुंद जिले के प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी प्राचार्य एम.आर. सावंत को उनके पद से हटाकर कार्यालय संभागीय संयुक्त संचालक, शिक्षा विभाग, जगदलपुर में सहायक संचालक के पद पर पदस्थ किया गया है। उनके स्थान पर विकासखंड शिक्षा अधिकारी नवागढ़ (जांजगीर-चांपा) के पद पर कार्यरत प्राचार्य विजय कुमार लहरे को प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी महासमुंद नियुक्त किया गया है। वहीं  भूपेंद्र कुमार कौशिक को जांजगीर चांपा जिले के नवागढ़ विकासखंड का विकासखंड शिक्षा अधिकारी नियुक्त किया गया है। यह निर्णय उस समीक्षा बैठक के बाद सामने आया है, जिसमें मुख्यमंत्री श्री साय ने महासमुंद जिले की बोर्ड परीक्षा में खराब परिणामों पर गहरी नाराजगी व्यक्त की थी। सुशासन तिहार के तीसरे चरण में महासमुंद में आयोजित समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री साय ने स्पष्ट कहा था कि शिक्षा की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को कड़ी चेतावनी देते हुए सुधार लाने का निर्देश दिया था। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा की गई यह कार्रवाई दर्शाती है कि मुख्यमंत्री साय की सरकार परिणाम आधारित कार्यशैली में विश्वास रखती है और प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए हर आवश्यक कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध है।

जम्मू-कश्मीर में फिर ड्रोन हमले और गोलाबारी, पाकिस्तान ने किया सीजफायर का उलंघन

नई दिल्ली भारत-पाकिस्तान के बीच 86 घंटों तक चला युद्ध शनिवार शाम 5 बजे खत्म हो गया. जब दोनों देशों के बीच सीजफायर पर सहमति बन गई. लेकिन इसके 4 घंटे बाद ही पाकिस्तान ने सीजफायर का उल्लंघन हुआ है.  जम्मू-कश्मीर में सीमा पार से पाकिस्तान की उकसावेभरी गतिविधियां एक बार फिर तेज़ हो गई हैं. शनिवार रात को पाकिस्तान ने कई इलाकों में संघर्षविराम का उल्लंघन करते हुए भारी गोलाबारी की, वहीं एक संदिग्ध ड्रोन को लेकर कश्मीर के बारामूला जिले में धमाका हुआ है. जानकारी के अनुसार, अखनूर, राजौरी और आरएसपुरा अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पाकिस्तान द्वारा तोपखाने से गोलाबारी की गई है. वहीं, बारामुला में एक ड्रोन से अटैक हुआ है. पाकिस्तान ने जम्मू के पलनवाला सेक्टर में भी संघर्ष विराम का उल्लंघन किया है.

भारत को अब पाकिस्तान द्वारा किए जा रहे आतंकी हमले बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं होंगे: भारत सरकार

नई दिल्ली भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। लगातार पिछली दो रातों में पाकिस्तान ने भारत पर ड्रोन से हमले करने की कोशिश की, जिसे हवा में ही नाकाम कर दिया गया। इस बीच, भारत सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार के सूत्रों के अनुसार, अब अगर भारत के खिलाफ आतंकी हमला हुआ तो उसे युद्ध माना जाएगा और उसी प्रकार जवाब भी दिया जाएगा। सरकार के फैसले ने साफ कर दिया है कि भारत को अब पाकिस्तान द्वारा किए जा रहे आतंकी हमले बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं होंगे। यदि पाकिस्तान अब भी आतंकी हमलों से बाज नहीं आता है तो फिर भारत उसे युद्ध मानते हुए, उसी हिसाब से निपटेगा। 22 अप्रैल को पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा के मुखौटा आतंकी संगठन टीआरएफ ने पहलगाम में आतंकी हमले को अंजाम दिया था। इसमें 26 लोगों की जान चली गई थी, जबकि कई अन्य घायल हो गए थे। आतंकियों ने भारतीय पर्यटकों से उनका धर्म पूछकर गोली मारी थी, जिससे देशभर में पाकिस्तान के खिलाफ काफी गुस्सा था। भारत ने पाकिस्तान के आतंकी हमले का जवाब देते हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ लॉन्च किया। पाक और पीओके में नौ आतंकी ठिकानों पर एयर स्ट्राइक करते हुए 100 से ज्यादा आतंकियों को ढेर कर दिया था। इसमें जैश-ए-मोहम्मद चीफ मसूद अजहर के परिवार के दस सदस्य भी मारे गए। इसके अलावा, कई अन्य बड़े आतंकियों को भी मार गिराया गया। भारत की कार्रवाई से बौखलाए पाकिस्तान ने गुरुवार की रात जम्मू समेत कई शहरों में 400 तुर्की ड्रोन से हमला बोल दिया था। हालांकि, भारत को इससे ज्यादा नुकसान नहीं हुआ और एयर डिफेंस सिस्टम ने आसमान में ही इन हमलों को नाकाम कर दिया। शुक्रवार की रात को फिर से पाकिस्तान ने भारत के 26 शहरों पर ड्रोन अटैक किया। इसे भी नाकाम कर दिया गया। पाकिस्तान ने भारत के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की कोशिश की थी। भारत ने भी बीती रात पाकिस्तान के छह एयरबेस को निशाना बनाते उन पर जवाबी कार्रवाई की है। कर्नल सोफिया कुरैशी ने कहा कि रफीकी, मुरीद, चकलाला, रहीम यार खान, सुक्कुर और चुनियां में पाकिस्तानी सैन्य अड्डों पर भारतीय लड़ाकू विमानों से हवा से वार करने वाले सटीक हथियारों के जरिए हमला किया गया और यह जवाबी कार्रवाई मुख्य रूप से कमान एवं नियंत्रण केंद्रों, रडार स्थलों और हथियार भंडारण क्षेत्रों पर केंद्रित रही। उन्होंने कहा कि पसरूर और सियालकोट हवाई अड्डे के रडार स्थलों को भी हथियारों से निशाना बनाया गया। इस दौरान, भारत ने सुनिश्चित किया कि इन जवाबी कार्रवाइयों के दौरान न्यूनतम अवांछित क्षति हो।

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