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मुख्यमंत्री कल्याणी विवाह : सभी जिला अधिकारी ऑनलाइन प्राप्त आवेदन पत्रों का परीक्षण कर 30 दिवस में अनिवार्य रूप से निराकरण करेंगे

मुख्यमंत्री कल्याणी विवाह सहायता योजना के आवेदन प्रक्रिया हुई ऑनलाइन  मुख्यमंत्री कल्याणी विवाह सहायता योजना के आवेदन प्रक्रिया को ऑनलाइन कर आसान बना दिया गया मुख्यमंत्री कल्याणी विवाह : सभी जिला अधिकारी ऑनलाइन प्राप्त आवेदन पत्रों का परीक्षण कर 30 दिवस में अनिवार्य रूप से निराकरण करेंगे मंत्री ने 30 दिवस में अनिवार्य रूप से निराकरण के दिये निर्देश भोपाल सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने कहा है कि प्रदेश में मुख्यमंत्री कल्याणी विवाह सहायता योजना के आवेदन प्रक्रिया को ऑनलाइन कर आसान बना दिया गया है। कल्याणी महिला (विधवा महिला) सामाजिक न्याय दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के विवाह पोर्टल https://vivahportal.mp.gov.in पर ऑनलाइन आवेदन कर सकती है। मंत्री कुशवाह ने सभी जिलाधिकारियों को प्राप्त आवेदन पत्रों का 30 दिवस में अनिवार्य रूप से निराकरण के निर्देश दिए है। प्रमुख सचिव सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण सशक्तिकरण श्रीमती सोनाली वायंगणकर ने बताया कि प्रदेश में निवासरत कल्याणी बहनों को समाज की मुख्य धारा से जोड़ने के उद्देश्य से वर्ष 2018 से मुख्यमंत्री कल्याणी विवाह सहायता योजना संचालित की जा रही है। योजना में कल्याणी बहनों को विवाह उपरांत 2 लाख की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। विभाग द्वारा योजनांतर्गत आवेदन प्रक्रिया को आसान बनाया गया है। इच्छुक हितग्राही https://vivahportal.mp.gov.in पर पब्लिक डोमेन से ऑनलाइन आवेदन कर सकते है। उन्होंने बताया कि विवाह पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन के लिये समग्र पोर्टल पर जानकारी अपडेट होना आवश्यक है। आवेदिका एवं उसके पति का आधार ई-केवायसी समग्र पोर्टल पर होना अनिवार्य है, समग्र पोर्टल पर वैवाहिक स्थिति विवाहित होना अनिवार्य है, 8 अंको की समग्र परिवार आईडी एक ही होना अनिवार्य है। सभी जिला अधिकारी ऑनलाइन प्राप्त आवेदन पत्रों का परीक्षण कर 30 दिवस में अनिवार्य रूप से निराकरण करेंगे। अनावश्यक रूप से आवेदन लंबित रखने पर संबंधित अधिकारी के विरूद्ध कार्रवाई की जा सकती है। प्रमुख सचिव श्रीमती वायंगणकर ने स्पष्ट किया कि जिला कार्यालय में सीधे आवेदन (ऑफलाइन) लेने ने मना नहीं किया जायेगा। जिला कार्यालय स्वयं पोर्टल पर लॉगइन कर आवेदन को ऑनलाइन प्रक्रिया में शामिल कर कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे।  

हितग्राहियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मोबाईल फोन पर ई-केवायसी की सुविधा भी उपलब्ध : खाद्य मंत्री राजपूत

भोपाल  प्रदेश में पीडीएस अंतर्गत उचित मूल्य की दुकानों से राशन प्राप्त करने वाले सभी हितग्राहियों की ई-केवायसी कराने के लिए 9 से 30 अप्रैल तक पूरे प्रदेश में अभियान चलाया जा रहा है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया है कि  हितग्राहियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मोबाईल फोन पर ई-केवायसी की सुविधा भी गुरूवार से उपलब्ध करायी जा रही है। इसके लिए “मेरा ई-केवायसी” ऐप प्रदेश में लांच किया गया है। इस ऐप के माध्यम से राशन लेने वाले वृद्ध, दिव्यांग एवं बच्चों  सहित कोई भी हितग्राही किसी भी एन्ड्राइड मोबाईल फोन से अपना और अपने परिजन का आधार नम्बर ओटीपी दर्ज करके घर बैठे ई-केवायसी कर सकते हैं। शिविर लगाकर किया जा रहा ई-केवायसी मंत्री राजपूत ने बताया है कि ऐप के साथ ही राशन लेने वाले हितग्राहियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए हर जिले में गांव और वार्ड  स्तर पर ई-केवायसी कराने के लिए शिविर लगाये जा रहे हैं।  शिविर में उचित मूल्य दुकान के विक्रेता, वार्ड प्रभारी, ग्राम पंचायत सचिव और रोजगार सहायक  के दल द्वारा पीओएस मशीन को शिविर में ले जाकर हितग्राहियों के अंगूठे लगाकर उनकी ई-केवायसी की जा रही है। खाद्य मंत्री ने की ई-केवायसी कराने की अपील खाद्य मंत्री राजपूत ने प्रदेश के सभी राशन लेने वाले हितग्राही, जिन्होने अभी तक ई-केवायसी नहीं करवाई है, उन सभी से अपील  की है  कि अभियान के तहत मोबाईल फोन अथवा पीओएस मशीन से अतिशीघ्र अपनी और अपने परिवारजनों की शत-प्रतिशत ई-केवायसी पूर्ण करायें। इससे मई माह से आप सभी को सुविधापूर्वक राशन प्राप्त हो सकेगा।  

मंत्री सिंह ने कहा कि ऑनलाइन शिक्षकों की अटेंडेंस को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर उज्जैन और नरसिंहपुर जिले में तत्काल लागू किया जाये

भोपाल स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा है कि प्रदेश में स्कूल शिक्षा की गुणवत्ता के लिये विद्यार्थियों से जुड़े सभी कार्य निर्धारित कैलेण्डर में पूरा किया जाना सुनिश्चित किया जाये। उन्होंने शिक्षकों की उपस्थिति के लिये ऑनलाइन व्यवस्था की प्रशंसा की। मंत्री सिंह ने कहा कि ऑनलाइन शिक्षकों की अटेंडेंस को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर उज्जैन और नरसिंहपुर जिले में तत्काल लागू किया जाये। मंत्री सिंह गुरूवार को लोक शिक्षण संचालनालय में विभागीय अधिकारियों की बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में सचिव स्कूल शिक्षा संजय गोयल, आयुक्त लोक शिक्षण श्रीमती शिल्पा गुप्ता, संचालक राज्य शिक्षा केन्द्र हरजिंदर सिंह, पाठ्य पुस्तक निगम के एमडी विनय निगम विशेष रूप से उपस्थित थे। स्कूल शिक्षा मंत्री सिंह ने विभाग में लंबित अनुकंपा नियुक्ति के प्रकरणों के निराकरण में संवेदनशील रूख रखने के निर्देश दिये। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि स्कूल शिक्षा से जुड़ी केन्द्रीय योजनाओं में राज्य को मिलने वाली राशि को प्राप्त करने के लिये विशेष पहल की जाये। मंत्री सिंह ने कहा कि विभाग में ऐसी व्यवस्था की जाये कि सेवानिवृत्त होने के बाद शिक्षकों और कर्मचारियों के स्वत्वों का भुगतान समय पर हो जाये। जन-प्रतिनिधियों से प्राप्त होने वाले पत्र पर विभाग की ओर से शीघ्र कार्यवाही पत्र भेजने की व्यवस्था की जाये। योजना के क्रियान्वयन की स्थिति बैठक में बताया गया कि शैक्षणिक सत्र 2025-26 में 82 लाख विद्यार्थियों को पाठ्‌य पुस्तकों का वितरण होना है। विभाग द्वारा 60 प्रतिशत पाठ्य पुस्तकों के वितरण का कार्य पूरा किया जा चुका है। कक्षा 1 से 8 तक के करीब 60 लाख विद्यार्थियों को यूनिफार्म डीबीटी के माध्यम से दिये जाने की व्यवस्था की जा रही है। बैठक में निशुल्क साइकिल, छात्रवृत्ति, लैपटॉप, स्कूटी वितरण की प्रक्रिया समय-सीमा में किये जाने की जानकारी दी गई। बैठक में माध्यमिक शाला से हाई स्कूल, हाई स्कूल से हायर सेकण्डरी स्कूल के उन्न्यन की जानकारी दी गई। उन्नयन की कार्यवाही इस वर्ष 15 जून तक पूरी कर ली जायेगी। सचिव स्कूल शिक्षा डॉ. गोयल ने बताया कि ग्रीष्म काल में उन स्कूलों की पहचान कर ली जायेगी, जो जर्जर हो गये हैं। उनके वैकल्पिक स्थान, अतिरिक्त कक्ष निर्माण मरम्मत संबंधी कार्य प्राथमिकता के साथ किये जायेंगे। मरम्मत कार्य के लिये 149 करोड़ और अतिरिक्त कक्षा निर्माण के लिये 100 करोड़ रूपये का प्रावधान रखा गया है। बैठक में स्मार्ट क्लास, आईसीटी लेब की भी जानकारी दी गई। बैठक में बताया गया कि 45 हजार 500 हायर सैकेण्डरी, 1 लाख 62 हजार प्राथमिक शिक्षकों को टेबलैट प्रदाय किये जा चुके हैं। 75 हजार माध्यमिक शिक्षकों को टेबलैट प्रदान किये जाने की कार्रवाई की जा रही है। स्टार्च प्रोजेक्ट के अंतर्गत 52 सीएम राइज स्कूलों में रोबोटिक्स लैब की स्थापना की जा रही है। 458 पीएमविद्यालयों में अटल टिंकेरिंग लेब स्थापित की जा रही है। बैठक में फर्नीचर व्यवस्था के संबंध में भी चर्चा की गई।  

मंत्री सारंग ने कहा कि केन्द्र सरकार की गाइडलाइन अनुसार रूपरेखा करें निर्धारित

भोपाल केन्द्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह द्वारा राज्य स्तरीय सहकारी सम्मेलन में दिये गये निर्देशों के परिपालन में सहकारिता मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने मंत्रालय में गुरूवार को उच्च स्तरीय बैठक ली और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार की गाइडलाइन अनुसार रूपरेखा निर्धारित कर कार्य-योजना बनाई जाये। बैठक में अपर मुख्य सचिव सहकारिता अशोक वर्णवाल भी उपस्थित थे। सहकारिता एक्ट और गाइडलाइन के अध्ययन के लिये कमेटी मंत्री सारंग ने कहा कि कमेटी गठित कर सहकारिता एक्ट और गाइडलाइन का अध्ययन किया जाये। यह कमेटी अपनी अनुशंसा उच्च स्तर पर प्रस्तुत करेगी। बैठक में कमेटी के सदस्यों में आयुक्त सहकारिता एवं पंजीयक मनोज पुष्प, प्रबंध संचालक अपेक्स बैंक मनोज गुप्ता, अपेक्स बैंक ट्रेनिंग कॉलेज के प्राचार्य पी.एस. तिवारी, संयुक्त आयुक्त के.के. द्विवेदी और एच.एस.बघेला को शामिल किया गया है। देशभर के सहकारिता अधिकारी समझेंगे सीपीपीपी मंत्री सारंग ने को-ऑपरेटिव पब्लिक प्रायवेट पाटनरशिप (सीपीपीपी) मॉडल पर एक वर्कशॉप आयोजित करने के निर्देश भी दिये। वर्कशॉप में देशभर के सहकारिता से जुड़ें अधिकारियों को सीपीपीपी मॉडल का प्रजेटेंशन दिया जायेगा। आगामी 20 जून को यह प्रशिक्षण आयोजित करने के निर्देश दिये गये। मंत्री सारंग ने सीपीपीपी मॉडल के माध्यम से सहकारी क्षेत्र में निवेश बढ़ाने की रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा की। सीपीपीपी मॉडल के तहत प्रदेश में सहकारी संस्थाओं को सशक्त बनाने के साथ निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा दिया जा रहा है। यह मॉडल न केवल आर्थिक विकास को गति देगा बल्कि रोजगार के नये अवसर सृजित करेगा। पैक्स का विस्तार मंत्री सारंग ने कहा कि प्रदेश में अभी 10 हजार प्राथमिक दुग्ध सहकारी समितियां है। सभी जिला अधिकारियों को इसको विस्तार करते हुए 26 हजार का लक्ष्य देकर तत्परतापूर्वक कार्य करने के निर्देश दिये जाये। पैक्स का विस्तार टाइम लिमिट में करें। उन्होंने कहा कि 637 नई समितियों के गठन की कार्ययोजना बनाकर अंतिम रूप दें। उन्होंने कहा कि जहां-जहां नई सोसायटियाँ गठित की जाना है वहां लक्ष्य तय कर त्वरित गति से कार्य किया जाये। उन्होंने नवाचार के संबंध में जेआर और डीआर की वीडियो क्रॉन्फेसिंग कर आवश्यक मार्गदर्शन दिये जाने के भी निर्देश दिये। बैठक में समितियों के चुनाव संबंध में भी चर्चा की गई। निवेश विंग की स्थापना बैठक में बताया गया कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में उच्च स्तर से निर्णय के बाद सहकारिता क्षेत्र में निवेशकर्ताओं को सभी आवश्यक सुविधाएँ एक स्थान पर सुनिश्चित करने के लिये “निवेश विंग आई डब्ल्यू” बनायी गई है। इसमें अम्बरीष वैद्य को नोडल अधिकारी बनाया गया है। प्रबंध संचालक अपेक्स बैंक मनोज गुप्ता और प्रबंध संचालक बीज संघ महेन्द्र दीक्षित समन्वय अधिकारी होंगे। निवेश विंग में मुख्य संयोजक सुगुंजन राय और सहायक समन्वयक श्रीमती प्रियंका शाक्य रहेगी। बैठक में प्रबंध संचालक विपणन संघ आलोक कुमार सिंह, आयुक्त सहकारिता एवं पंजीयक मनोज पुष्प, उप सचिव मनोज सिन्हा, प्रबंध संचालक अपेक्स बैंक मनोज गुप्ता, प्रबंध संचालक सहकारी संघ ऋतुराज रंजन, प्रबंध संचालक बीज संघ महेन्द्र दीक्षित और संयुक्त आयुक्त अम्बरीष वैद्य उपस्थित थे।  

इलाहाबाद हाईकोर्ट बोला- स्वेच्छा से शादी करने वाले जोड़ों को समाज का सामना करना सीखना होगा

प्रयागराज इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि स्वेच्छा से शादी करने वाले जोड़ों को समाज का सामना करना सीखना होगा। सिर्फ भागकर शादी करने के आधार पर सुरक्षा नहीं दी जा सकती। उन्हें यह साबित करना होगा कि उनके जीवन और स्वतंत्रता को वास्तविक खतरा है। न्यायमूर्ति सौरभ श्रीवास्तव ने चित्रकूट की श्रेया केसरवानी की याचिका निस्तारित करते हुए यह टिप्पणी की है। चित्रकूट के कर्वी थाना निवासी श्रेया ने कोर्ट से शांतिपूर्ण वैवाहिक जीवन में विपक्षियों के हस्तक्षेप न करने के लिए निर्देश देने की गुहार लगाई थी। याची अधिवक्ता की दलील थी कि शादी करने वाले जोड़े बालिग हैं। जिले के विवाह अधिकारी के यहां सिविल मैरिज के लिए आवेदन दिया हुआ है। परिवार की मर्जी के खिलाफ शादी की है। आशंका है कि परिजन उन्हें क्षति पहुंचा सकता है। लड़की के साथ पहले भी दुर्व्यवहार हुआ है। ऐसे में उन्हें सुरक्षा दी जाए। वास्तविक खतरे के मुताबिक पुलिस उठा सकती है कानूनी कदम कोर्ट ने कहा कि याचियों ने एसपी चित्रकूट को प्रत्यावेदन दिया है। पुलिस वास्तविक खतरे के मुताबिक कानूनी कदम उठा सकती है। रिकॉर्ड में ऐसा कोई तथ्य नहीं है, जिससे यह प्रतीत हो कि याचियों को गंभीर खतरा है और उन्हें सुरक्षा मिलनी चाहिए। विपक्षियों की ओर से याचियों पर शारीरिक या मानसिक हमला करने का कोई साक्ष्य भी प्रस्तुत नहीं किया गया है। पुलिस सुरक्षा देने का नहीं बनता मामला याचियों ने विपक्षियों के किसी अवैध आचरण को लेकर एफआईआर दर्ज करने के लिए संबंधित थाने में कोई अर्जी भी नहीं दी है। न ही मुकदमा दर्ज करने के लिए कोई तथ्य प्रस्तुत किया गया। ऐसे में पुलिस सुरक्षा देने का कोई केस नहीं बनता। कोर्ट ने याचिका निस्तारित करते हुए कहा कि परेशानी होने पर प्रार्थना पत्र देने पर पुलिस उचित कार्रवाई करेगी। ब्रेकअप के प्रतिशोध में झुलस रही वैवाहिक रिश्तों की पवित्रता : हाईकोर्ट इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सहमति संबंध के पल भर में बनते-बिगड़ते रिश्तों पर गंभीर चिंता जताई है। हाईकोर्ट ने कहा कि ब्रेकअप से पैदा हुए प्रतिशोध की आग में वैवाहिक रिश्तों की पवित्रता झुलस रही है। नई पीढ़ी के बीच आपसी सहमति से बन रहे अंतरंग संबंधों की तकरार को आपराधिक रंग देने की प्रवृत्ति बढ़ रही है, जो वास्तव में कानून का दुरुपयोग है।  इस तल्ख टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति कृष्ण पहल की अदालत ने 25 वर्षीय युवती संग दुष्कर्म के आरोपी बांदा निवासी अरुण कुमार मिश्रा की जमानत अर्जी मंजूर कर ली। कोर्ट ने कहा कि असफल अंतरंग संबंधों में उपजे कलह का प्रतिशोध लेने के लिए आपराधिक कानून के दुरुपयोग की इजाजत नहीं दी जा सकती।  पीड़िता वाकिफ थी कि आरोपी पहले तीन महिलाओं से शादी कर चुका है। फिर भी उसके संग संबंध बनाए। पीड़िता ने आरोपी के खिलाफ बांदा जिले के महिला थाने में दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कराया है। आरोप लगाया कि वह दिल्ली के निजी बैंक में काम कर रही थी।   इसी दौरान हुई मुलाकात में आरोपी ने उसे अपनी कंपनी में नौकरी दिलाने को कहा तो उसने नौकरी छोड़ दी। इसके बाद आरोपी संग कंपनी में काम करने लगी। आरोप है कि जनवरी 2024 में आरोपी ने उसे नशीली दवा पिला कर दुष्कर्म किया। अश्लील वीडियो बना कर ब्लैकमेल भी किया।

हिंदुओं के तिलक पर विवादित टिप्पणी करने वाले मंत्री पर होगी FIR, मद्रास हाईकोर्ट का आदेश

चेन्नई मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को निर्देश दिया है कि राज्य के मंत्री पोनमुडी के खिलाफ महिलाओं और धार्मिक समुदायों के खिलाफ आपत्तिजनक बयान देने के मामले में FIR दर्ज की जाए. कोर्ट ने सरकार को 23 अप्रैल तक का समय दिया है. कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए यह भी कहा कि अगर तय समय सीमा तक FIR दर्ज नहीं की गई, तो अदालत स्वत: संज्ञान लेते हुए कार्रवाई शुरू करेगी. बता दें कि मंत्री के. पोनमुडी ने पिछले दिनों एक कार्यक्रम में धार्मिक संदर्भ में सेक्स वर्कर का उल्लेख करते हुए आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था. इस बयान को लेकर पार्टी की सांसद कनिमोझी ने भी नाराज़गी जाहिर करते हुए कहा था कि मंत्री पोनमुडी का हालिया भाषण स्वीकार्य नहीं है. उन्होंने जिस भी कारण से ये बातें कहीं, इस तरह की अश्लील भाषा निंदनीय है. हिंदुओं के तिलक पर विवादित टिप्पणी करने वाले मंत्री पर DMK का एक्शन तमिलनाडु के वन मंत्री और सीनियर डीएमके नेता के पोनमुडी (K Ponmudi) एक सार्वजनिक समारोह में दी गई अपनी स्पीच की वजह से विवादों में आ गए हैं. उन्होंने हिंदू धार्मिक पहचान को यौन स्थितियों से जोड़ने वाली टिप्पणी की थी. एक वायरल वीडियो में पोनमुडी को यह कहते हुए सुना गया, “महिलाओं, कृपया आप गलतफहमी न पालें.” इसके बाद वे एक चुटकुला सुनाते हैं, जिसमें एक आदमी एक सेक्स वर्कर से मिलने जाता है, जो फिर उस आदमी से पूछती है कि वह शैव है या वैष्णव. डीएमके नेता के द्वारा सुनाए जा रहे किस्से में, जब आदमी को समझ में नहीं आता, तो सेक्स वर्कर यह पूछकर स्पष्ट करती है कि क्या वह पट्टई (क्षैतिज तिलक, जो शैव धर्म से जुड़ा है) या नामम (लंबवत तिलक, जो वैष्णव धर्म से जुड़ा है) पहनता है. फिर वह समझाती है कि अगर वह शैव है, तो स्थिति ‘लेटी हुई’ है, और अगर वैष्णव है, तो स्थिति ‘खड़े होकर’ है. डीएमके सांसद कनिमोझी ने पोनमुडी के बयान की निंदा की है. उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “मंत्री पोनमुडी का हालिया भाषण अस्वीकार्य है. भाषण का कारण चाहे जो भी हो, ऐसी अभद्र टिप्पणी निंदनीय है.” अभिनेत्री और बीजेपी नेता खुशबू सुंदर ने सोशल मीडिया पोस्ट में मुख्यमंत्री एमके स्टालिन को टैग करते हुए पूछा, “क्या आप कभी उन्हें उनकी कुर्सी और पद से हटाने की हिम्मत कर पाएंगे? या आप और आपकी पार्टी महिलाओं और हिंदू धर्म का अपमान करने में सुख पाती है?”

सीआरपीएफ ने आतंकवाद और उग्रवाद विरोधी गतिविधियों में निभाई अहम भूमिका: केन्द्रीय मंत्री शाह

प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में वर्ष-2026 तक देश होगा नक्सलवाद से मुक्त : केन्द्रीय मंत्री शाह देश की आंतरित सुरक्षा में सीआरपीएफ का अदम्य साहस और समर्पण सराहनीय सीआरपीएफ ने आतंकवाद और उग्रवाद विरोधी गतिविधियों में निभाई अहम भूमिका राष्ट्र की सुरक्षा के‍लिये सीआरपीएफ जवानों ने वीरता का प्रदर्शन कर बलिदान दिया सीएपीएफ में अब महिला कर्मियों की हो रही है भर्ती आयुष्मान कार्ड और आवास योजना का भी दिया जा रहा है लाभ केन्द्रीय मंत्री शाह और मुख्यमंत्री डॉ. यादव नीमच में सीआरपीएफ के स्थापना दिवस कार्यक्रम में हुए शामिल विशिष्ट सेवाओं के लिये सुरक्षा बल कर्मियों को किया पुरस्कृत नीमच केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में अग्रसर है। उनके मार्गदर्शन में वर्ष 2026 तक देश नक्सलवाद से मुक्त होगा। इस प्रण को पूरा करने में सीआरपीएफ की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। सीआरपीएफ ने जम्मू-कश्मीर में धारा 370 हटने के बाद शांतिपूर्ण तरीके से चुनाव संपन्न कराए। कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक जहां जरूरत होती है, सीआरपीएफ के जवान सदैव कर्तव्य पथ पर तत्पर रहते हैं। देश का जब भी स्वर्णिम इतिहास लिखा जाएगा, उसमें सीआरपीएफ के शहीदों के नाम स्वर्ण अक्षरों से लिखे जाएंगे। केंद्रीय गृह मंत्री शाह गुरुवार को नीमच स्थित सीआरपीएफ के ग्रुप सेंटर में सीआरपीएफ के 86वें स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, जिले की प्रभारी मंत्री सुनिर्मला भूरिया, सीआरपीएफ के महानिदेशक ज्ञानेन्‍द्र प्रताप सिह, क्षेत्र के लोकसभा सांसद सुधीर गुप्‍ता, राज्‍यसभा सांसद बंशीलाल गुर्जर सहित जिले के तीनों विधायक व अन्‍य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। केंद्रीय मंत्री शाह ने देश की आंतरिक सुरक्षा में सीआरपीएफ के कर्मियों के अदम्य साहस और समर्पण की सराहना की। उन्होंने सीआरपीएफ की आतंकवाद और उग्रवाद विरोधी गतिविधियों, शांति स्थापना के कार्यों में निभाई गई भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि “जहां सीआरपीएफ है, वहां चिंता करने की कोई बात नहीं”। केंद्रीय मंत्री शाह ने कहा कि आज सीआरपीएफ के 3 लाख जवान देश में कानून-व्यवस्था और शांति स्थापित करने के लिए कार्य कर रहे हैं। देश की संसद पर आतंकी हमले और श्रीराम जन्मभूमि पर हमले जैसी मुश्किल समय में कई बार सीआरपीएफ जवानों ने वीरता का प्रदर्शन करते हुए राष्ट्र की सुरक्षा के लिए सर्वस्व न्यौछावर करते हुए बलिदान दिया। केन्द्रीय मंत्री शाह ने केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल के शहीद जवानों को नमन करते हुए कहा कि सीमा क्षेत्रों से लेकर अंदरूनी इलाकों तक देश की सुरक्षा में सीआरपीएफ के योगदान को कोई भुला नहीं सकता। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार द्वारा सीएपीएफ कर्मियों को आयुष्मान कार्ड और आवास योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। सीआरपीएफ में अब महिलाओं की भी भर्ती हो रही है। उनके लिये भी आवास सुविधा विकसित की जा रही है। सीआरपीएफ को आधुनिक बनाए रखने के लिये केन्द्र सरकार की ओर से उत्कृष्ट सुविधा प्रदान की जा रही है। सीआरपीएफ को 2708 वीरता पदक प्राप्त हुए हैं, जो अद्भुत वीरता के परिचालक हैं। स्थापना दिवस पर केन्द्रीय गृह मंत्री शाह ने परेड का निरीक्षण कर सलामी ली। परेड में सीआरपीएफ की 8 टुकड़ियों ने मार्च पास्ट किया। शाह ने कहा कि आज की परेड जवानों में नई ऊर्जा का संचार करेगी। इस अवसर पर केन्द्रीय मंत्री ने वीरता पदकों के लिए चयनित जवानों को सम्मानित कर विशिष्ट सेवाओं के लिये सुरक्षा बल के जवानों को पुरस्कृत भी किया। समारोह में कोबरा, आरएएफ वैली क्यूएटी और डॉग स्क्वॉड जैसी विशेष इकाईयों द्वारा प्रभावशाली एवं आकर्षक प्रदर्शन किया गया। केन्द्रीय गृह मंत्री शाह ने सीआरपीएफ परिसर स्थित शहीद स्मारक पर पुष्प-चक्र अर्पित कर वीर जवानों को श्रृद्धांजलि अर्पित की। प्रदर्शनी का अवलोकन किया सीआरपीएफ के स्‍थापना दिवस समारोह की परेड के बाद केन्द्रीय गृहमंत्री शाह ने मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ सीआरपीएफ कैम्प नीमच के परिसर में ‘’राष्‍ट्र सेवा में समर्पित सीआरपीएफ के विभिन्‍न आयाम चित्र प्रदर्शनी का अवलोकन किया। प्रदर्शनी में सीआरपीएफ की स्‍थापना से अब तक फोर्स द्वारा अर्जित उपलब्धियों एवं विभिन्‍न गतिविधियों को चित्रों के माध्‍यम से प्रदर्शित किया गया। उल्लेखनीय है कि 86वीं सीआरपीएफ दिवस परेड इस वर्ष 17 अप्रैल को विस्तारित समारोहों के अन्तर्गत आयोजित की गई। सामान्यतः सीआरपीएफ दिवस प्रतिवर्ष 19 मार्च को मनाया जाता है, क्योंकि 1950 में इसी दिन भारत के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने सीआरपीएफ को ध्वज प्रदान किया था। इस वर्ष नीमच में आयोजन का विशेष महत्व इसलिए भी है क्योंकि यहीं 27 जुलाई 1939 को ब्रिटिश शासन के दौरान ‘क्राउन रिप्रेजेंटेटिव पुलिस’ की स्थापना हुई थी। स्वतंत्रता के बाद, 28 दिसंबर 1949 को सरदार पटेल ने इसे “केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (सीआरपीएफ)” नाम दिया। आज सीआरपीएफ देश की आंतरिक सुरक्षा का मजबूत स्तंभ है हर चुनौतीपूर्ण मोर्चे पर अग्रिम पंक्ति में डटे रहकर, “सेवा और निष्ठा” के अपने मूल मंत्र को चरितार्थ कर रहा है।  

सोनिया-राहुल के खिलाफ भोपाल में BJYM का प्रदर्शन: नेशनल हेराल्ड केस को लेकर युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने किया प्रदर्शन

भोपाल नेशनल हेराल्ड मामले में बयानबाजी के बाद अब बीजेपी और कांग्रेस कार्यकर्ता सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन कर रहे हैं…नेशनल हेराल्ड मामले में जमकर सियासत हाे रही है। जहां कल कांग्रेस ने चार्ज शीट में राहुल गांधी और सोनिया गांधी का नाम आने के बाद ED दफ्तर के बाहर  प्रदर्शन किया….तो वहीं आज राजधानी भोपाल में भारतीय जनता पार्टी के युवा मोर्चा ने राहुल गांधी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया… यह विरोध प्रदर्शन नेशनल हेराल्ड मामला और कांग्रेस की दबाव की नीति के खिलाफ था,कांग्रेस पार्टी लगातार ED और जांच एजेंसियों को टारगेट कर रही है। भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष बोले- देश के सामने सच्चाई आए भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष वैभव पवार ने कहा, कांग्रेस इस देश में भ्रम और झूठ फैलाने का प्रयास कर रही है। उनके खिलाफ मामला दर्ज है और जांच एजेंसियां अपना काम कर रही हैं, लेकिन कांग्रेस नेता सड़क पर उतरकर जांच एजेंसियों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने कहा, जांच एजेंसियों पर दबाव बनाकर कांग्रेस नेता उस भ्रष्टाचार की जांच से बचने की कोशिश कर रहे हैं, जो उन्होंने किया है। यह उनका झूठा प्रयास है। इसी के खिलाफ युवा मोर्चा ने कांग्रेस के खिलाफ प्रदर्शन कर राहुल गांधी और सोनिया गांधी का पुतला दहन किया है। देश के सामने सच्चाई आनी चाहिए। उसके खिलाफ भारतीय जनता युवा मोर्चा भी सड़कों पर उतरा पुलिस प्रशासन ने बीजेपी युवा मोर्चा को कांग्रेस कार्यालय की तरफ जाने से रोका जिसके बाद कार्यकर्ता बैरिकेटिंग में चढ़ गए और राहुल गांधी, सोनिया गांधी के खिलाफ नारे लगाए। वहीं बीजेपी युवा मोर्चा ने राहुल गांधी का पुतला दहन किया…जिसको पुलिस ने अग्निशामक यंत्र की मदद से बुझाया बीजेपी युवा कांग्रेस का कहना है कि कांग्रेस जांच एजेंसियों को टारगेट करना और उनपर दबाव बनाना बंद करे कांग्रेस अदालत को जवाब दे।

मध्यप्रदेश में गेहूं की MSP पर खरीदी जारी, सीहोर ने नया रिकॉर्ड बनाया, अभी तक 5 लाख 29 हजार 482 टन की हुई खरीदी

 सीहोर   समर्थन मूल्य केंद्रों पर इस साल किसानों की गेहूं बेचने की होड़ लगी हुई है। एक माह की खरीदी में ही इस बार सीहोर ने नया रिकॉर्ड बना दिया है। पिछले साल पूरे सीजन में 5 लाख 6 हजार 40 टन गेहूं खरीदा गया था। इस बार सिर्फ एक महीने में 5 लाख 29 हजार 482 टन की खरीदी हो चुकी है। इस तरह सीहोर प्रदेश में सबसे आगे निकल गया है, जबकि उज्जैन 4 लाख 68 हजार टन के साथ दूसरे नंबर पर है। इस सीजन में किसान बड़ी संख्या में समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने आ रहे हैं। इस बार मौसम अनुकूल रहा। फसल की बुवाई से लेकर कटाई तक बारिश ने साथ दिया। कटाई के समय मौसम साफ रहा। इससे फसल की निकासी में कोई रुकावट नहीं आई। किसानों को उपज का भुगतान भी 3 से 7 दिन में मिल रहा है। साथ ही 175 रुपये प्रति क्विंटल बोनस भी मिल रहा है। इसके अलावा खुले बाजार और मंडी में गेहूं के दाम कम है। इसके कारण किसान अपनी उपज समर्थन मूल्य केंद्रों पर ले जा रहे हैं। समर्थन केंद्रों पर किसानों की उपज बेचने भीड़ कम होने का नाम नहीं ले रही है। जिले में 820 करोड़ रुपये का हो चुका भुगतान इस सीजन में 15 मार्च से खरीदी शुरू हुई थी। 15 अप्रैल तक 5 लाख 29 हजार टन गेहूं खरीदा जा चुका है। पिछले साल खरीदी 20 मार्च से शुरू होकर 31 मई तक चली थी। इस बार 5 मई तक ही खरीदी होनी है। यानी कुल 51 दिन का समय मिलेगा। इसके बावजूद अगले 20 दिन में 1.25 लाख से 1.50 लाख टन गेहूं और खरीदे जाने की उम्मीद है। अब तक जिले में 4 लाख 22 हजार टन गेहूं की खरीदी हो चुकी है। किसानों को 820 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। पूरे सीजन में अब तक 1376 करोड़ की खरीदी हो चुकी है। इसमें से 1203 करोड़ के ईपीओ जनरेट हो चुके हैं। किसानों के खातों में 1192 करोड़ रुपये पहुंच चुके हैं। 61 हजार 296 किसान बेच चुके अपनी उपज इस बार 88 हजार 292 किसानों ने पंजीयन कराया है। इनमें से 61 हजार 296 किसान अब तक अपनी उपज बेच चुके हैं। जिले में 240 खरीदी केंद्र बनाए गए हैं। शुरुआत में ही 140 केंद्रों पर खरीदी शुरू कर दी गई थी। पिछले साल की तुलना में इस बार खरीदी 5 दिन पहले शुरू हुई। मंडी में इस बार गेहूं के भाव कम हैं। मिल क्वालिटी गेहूं 200 से 300 रुपए प्रति क्विंटल कम दाम में बिक रहा है। जबकि समर्थन मूल्य पर ज्यादा दाम मिल मिल रहे रहे हैं। इसलिए किसान मंडी की बजाय खरीदी केंद्रों पर गेहूं बेच रहे हैं। भुगतान की व्यवस्था भी बेहतर हुई है। पिछले साल 10 से 15 दिन में भुगतान होता था। इस बार 3 से 7 दिन में पैसा मिल रहा है। यही वजह है कि इस बार खरीदी में रिकॉर्ड बना है। गेहूं खरीदी में सीहोर नंबर 1 इस संबंध में जिला खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के आकाश चंदेल ने बताया कि गेहूं खरीदी में सीजन में अभी तक सीहोर नंबर वन पर है। इस साल अभी तक 5 लाख 29 हजार मेट्रिक टन गेहूं की खरीदी हो चुकी है।  

मुखिया मोहन यादव ने लिखा कि गर्मी का मौसम,अपनों के साथ,लस्सी का स्वाद…

नीमच गर्मी का मौसम हो और ठंडी-ठंडी लस्सी मिल जाए तो क्या ही कहने। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने आज नीमच में भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ एक दुकान पर लस्सी का स्वाद लिया। इसका वीडियो खुद सीएम ने अपने एक्स हैंडल पर डाला है। आज मोहन यादव सीआरपीएफ के स्थापना दिवस के मौके पर नीमच आए थे। यहां उन्होंने इस अवसर पर आयोजित एक खास कार्यक्रम में भाग लिया। मोहन यादव के अलावा देश के गृह मंत्री अमित शाह भी थे। मध्य प्रदेश के मुखिया मोहन यादव ने लिखा कि गर्मी का मौसम,अपनों के साथ,लस्सी का स्वाद…आज नीमच प्रवास के दौरान कार्यकर्ता बंधुओं के साथ लस्सी का आनंद लिया। इसके साथ उन्होंने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर एक 46 सेकेंड का वीडियो भी डाला है। मोहन यादव के इस वीडियो पर लोगों ने भी अलग-अलग कॉमेंट किए हैं। एक एक्स यूजर ने लिखा कि बहुत बढ़िया आपका व्यवहार बड़ा सरल स्वभाव का है। दूसरे ने लिखा कि आप की ड्रेस तथा जैकेट एकदम से मैचिंग है..शॉप की अम्बिएंस के साथ।आप का चाहने वाला बिहार से। इससे पहले आज नीमच में 86वें केंद्रीय रिजर्व पुलिस फोर्स के स्थापना दिवस पर कार्यक्रम आयोजि हुआ था। इसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी शिरकत की थी। मोहन यादव ने सीआरपीएफ जवानों के सम्मान में लिखा कि CRPF के जवानों के हौसले ने हृदय को गर्व से भर दिया…नीमच की धरती पर 86वें केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल दिवस परेड समारोह में शामिल होकर हमारे वीर जवानों के अदम्य साहस,समर्पण और राष्ट्रभक्ति को नमन किया।

दिग्विजय सिंह ने स्वीकार ही किया कि बाबरी मस्जिद कांड के बाद दंगा फसाद उन्हीं ने कराया:मंत्री सारंग

भोपाल खेल एवं सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग ने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का एक वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया, जिसमें दिग्विजय सिंह बाबरी मस्जिद के गिरने के बाद हुए दंगे के बारे में बात कर रहे थे। 1 मिनट 12 सेकेंड के वीडियो में पूर्व सीएम कह रहे हैं ऐसे अनेक मेरे पास उदाहरण हैं, जब बाबरी मस्जिद शहीद हुई थी उस समय मैं प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष था, भोपाल शहर में 1947 में भी दंगा नहीं हुआ लेकिन बाबरी मस्जिद गिरने पर दंगा हुआ। लगभग दो हफ्ते तक मैंने प्रदेश कांग्रेस कमेटी के दफ्तर में रात बिताई। मैं घर नहीं जाता था। लेकिन हमने दंगा फसाद होने में पूरी कोशिश की। पूर्व मुख्यमंत्री ने बाबरी मस्जिद के संदर्भ में आगे कहा कि भोपाल में एक काजी कैम्प है, जहां सलामत सिद्दीकी नामक पार्षद ने उन्हें बताया था कि पुलिस की वर्दी में लोग रात के समय उनके घर आए थे। गोलीबारी होती है, और गरीब के बच्चे मारे जाते हैं बुधवार को शाजापुर में नेशनल हेराल्ड मामले को लेकर हुए प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे दिग्विजय सिंह ने शाजापुर शहर के चोबदारवाड़ी में मुस्लिम समुदाय के सद्भावना सम्मेलन में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने कहा, “कई बार शिकायत करने के बाद भी पुलिस प्रकरण दर्ज नहीं करती है, वहीं दूसरी तरफ झूठी शिकायतें दर्ज की जाती हैं। जब लोगों पर अत्याचार बढ़ जाता है, तो गुस्से के कारण विवाद की स्थिति उत्पन्न होती है।” दिग्विजय ने आगे कहा, “दंगे में गरीबों के बच्चे शामिल होते हैं, बड़े नेताओं के बच्चे नहीं। पुलिस के डंडे चलते हैं, गोलीबारी होती है, और गरीब के बच्चे मारे जाते हैं।” कांग्रेस ने इस देश में दंगा फसाद कराने का काम किया इस वीडियो को शेयर करते हुए खेल मंत्री विश्वास सारंग ने कहा, “दिग्विजय सिंह ने स्वीकार ही किया कि बाबरी मस्जिद कांड के बाद दंगा फसाद उन्हीं ने कराया। वह स्वयं कह रहे हैं कि बाबरी मस्जिद शहीद हुई और उसके बाद कांग्रेस अध्यक्ष रहते हुए दंगा फसाद कराया।” सारंग ने आगे कहा, “यह बयान साफ करता है कि कांग्रेस ने इस देश में दंगा फसाद कराने का काम किया है। दिग्विजय सिंह ने खुद कबूल किया है कि दंगे उन्होंने कराए थे।” दिग्विजय बोले- बयान तोड़-मरोड़ कर पेश किया पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने अपने बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनका बयान तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है और बीजेपी इसे गलत तरीके से प्रचारित कर रही है। उन्होंने कहा, “मैंने कहा था कि जब प्रदेश में सांप्रदायिक तनाव था, तब मैंने 15 दिन कांग्रेस के पीसीसी दफ्तर में रहकर हिंदू और मुस्लिम समाज के बीच समन्वय की कोशिश की थी ताकि दंगा-फसाद न हो।” साथ ही दिग्विजय ने बाबरी मस्जिद के गिरने को लेकर कहा, “अगर आप जबरन किसी धार्मिक स्थल को गिराएंगे, तो लोग क्या कहेंगे? जो सच है, वही बोला।”

सुप्रीम कोर्ट ने नए वक्फ कानून पर फिलहाल रोक से इनकार किया, वक्फ परिषद और बोर्डों में कोई नियुक्ति नहीं

नई दिल्ली  नए वक्फ कानून के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने लगातार दूसरे दिन सुनवाई हुई। इस दौरान सर्वोच्च अदालत ने वक्फ कानून पर फिलहाल स्टे नहीं लगाया है। सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के इस बयान को रिकॉर्ड में लिया कि केंद्र सात दिनों के भीतर जवाब देगा। शीर्ष अदालत ने कहा कि सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट को आश्वासन दिया कि काउंसिल और बोर्ड को कोई नियुक्ति नहीं की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सॉलिसिटर जनरल ने आश्वासन दिया कि अगली सुनवाई की तारीख तक, वक्फ, जिसमें पहले से पंजीकृत या अधिसूचना के माध्यम से घोषित वक्फ शामिल हैं। उनको न तो डीनोटिफाई किया जाएगा और न ही कलेक्टर को बदला जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्र को सात दिनों के भीतर जवाब दाखिल करना चाहिए। वक्फ कानून पर SC ने नहीं लगाई रोक वक्फ संशोधन अधिनियम पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर एडवोकेट बरुण कुमार सिन्हा ने कहा, ‘सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ कानून पर रोक नहीं लगाई है। भारत के सॉलिसिटर जनरल ने कहा है कि नए संशोधन अधिनियम के तहत परिषद या बोर्ड में कोई नियुक्ति नहीं की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश में लिखा है कि सरकार अगली तारीख तक उन संपत्तियों (वक्फ-बाय-यूजर) को डी-नोटिफाई नहीं करेगी जो रजिस्टर्ड और गजटेड हैं। हालांकि, सरकार अन्य संपत्तियों पर कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है। ओवैसी बोले- हम इस एक्ट को असंवैधानिक मानते हैं अधिवक्ता बरुण सिन्हा ने आगे कहा कि केंद्र ने कोर्ट से कहा कि आप संसद की ओर से पारित कानून पर रोक नहीं लगा सकते और केंद्र रोजाना सुनवाई के लिए तैयार है। इस मुद्दे को अब 5 मई के लिए लिस्ट किया गया है और उसी दिन सुनवाई शुरू होगी। वहीं सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई पर एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने रिएक्ट किया। उन्होंने कहा कि हम इस एक्ट को असंवैधानिक मानते हैं। ‘इस एक्ट के खिलाफ कानूनी लड़ाई जारी रहेगी’ ओवैसी ने आगे कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है कि सेंट्रल वक्फ काउंसिल और स्टेट वक्फ काउंसिल का गठन नहीं किया जाएगा। ‘वक्फ बाय यूजर’ को हटाया नहीं जा सकता। जेपीसी की चर्चा के दौरान मैंने सरकार की ओर से प्रस्तावित सभी संशोधनों का विरोध करते हुए एक रिपोर्ट दी थी और बिल पर बहस के दौरान मैंने बिल को असंवैधानिक बताया था। इस एक्ट के खिलाफ हमारी कानूनी लड़ाई जारी रहेगी। वक्फ कानून पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी बड़ी बातें     सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ कानून की संवैधानिक वैधता के खिलाफ दायर याचिकाओं पर जवाब देने के लिए केंद्र सरकार को सात दिन का समय दिया।     सर्वोंच्च अदालत ने कहा कि इस बीच केंद्रीय वक्फ परिषद और बोर्डों में कोई नियुक्ति नहीं होनी चाहिए।     केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट से एक सप्ताह का समय मांगा था, जिसके बाद अदालत ने उन्हें वक्त दिया।     शीर्ष कोर्ट ने कहा कि मामले में इतनी सारी याचिकाओं पर विचार करना असंभव, केवल पांच पर ही सुनवाई होगी।     याचिकाओं पर सुनवाई के दूसरे दिन प्रधान न्यायाधीश संजीव खन्ना ने कहा कि अगर किसी वक्फ संपत्ति का रजिस्ट्रेशन 1995 के अधिनियम के तहत हुआ है तो उन संपत्तियों को नहीं छेड़ा जा सकता।     केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को आश्वासन दिया कि वह अगली सुनवाई तक ‘वक्फ बाय डीड’ और ‘वक्फ बाय यूजर’ को गैर-अधिसूचित नहीं करेगा।     सुनवाई के बाद उच्चतम न्यायालय ने वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 की वैधता के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई के लिए पांच मई की तारीख तय की। सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम आदेश में और क्या-क्या कहा?     सुप्रीम कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में कहा कि वक्फ बाय यूजर में बदलाव नहीं किया जाएगा। सात दिनों में सरकार जवाब दाखिल करें।     जवाब तक वक्फ संपत्ति की स्थिति नहीं बदलेगी। अगली सुनवाई तक यथास्थिति बनी रहेगी।     सरकार फिलहाल कोई नियुक्ति नहीं होगी। ना कोई नया बोर्ड बनेगा, ना काउंसिल बनेगी।     एसजी तुषार मेहता ने आश्वासन दिया है कि अगली सुनवाई तक संशोधित कानून के तहत कोई नियुक्ति या बोर्ड नहीं गठित किया जाएगा।     केंद्र सरकार ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट अंतरिम आदेश जारी करने से पहले विचार करे कि इसका परिणाम क्या होगा। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की इस दलील को ठुकरा दिया।     एसजी तुषार मेहता ने आश्वासन दिया है कि अगली सुनवाई तक संशोधित कानून के तहत कोई नियुक्ति या बोर्ड नहीं गठित किया जाएगा।     सीजेआई संजीव खन्ना ने कहा कि सुनवाई के दौरान एसजी तुषार मेहता ने कहा कि प्रतिवादी सरकार 7 दिनों के भीतर एक संक्षिप्त जवाब दाखिल करना चाहते हैं और आश्वासन दिया कि अगली तारीख तक 2025 अधिनियम के तहत बोर्ड और परिषदों में कोई नियुक्ति नहीं होगी।     उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि अधिसूचना या राजपत्रित द्वारा पहले से घोषित उपयोगकर्ता द्वारा वक्फ सहित वक्फ की स्थिति में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।     जवाब 7 दिनों के भीतर दाखिल किया जाना चाहिए। उस पर प्रतिउत्तर अगले 5 दिनों के भीतर दाखिल किया जाना चाहिए।     सीजेआई ने कहा कि अगली सुनवाई से केवल 5 रिट याचिकाकर्ता ही न्यायालय में उपस्थित होंगे। हम यहां केवल 5 ही चाहते हैं। आप 5 का चयन करें। अन्य को या तो आवेदन के रूप में माना जाएगा या निपटाया जाएगा। हम नाम का उल्लेख नहीं करेंगे। अब इसे कहा जाएगा- इन री: वक्फ संशोधन अधिनियम मामला  

यूपी के मजदूरों के भरोसे तमिलनाडु की इंडस्ट्री, आज पूरी दुनिया की इकॉनमी सस्ते श्रम के भरोसे ही : अन्नामलाई

 चेन्नई तमिलनाडु की डीएमके सरकार नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत तीन भाषा नीति, जनसंख्या के आधार पर परिसीमन आदि का विरोध कर रही है. तमिलनाडु सीएम स्टालिन ने बीते दिनों अपने एक बयान में कहा था कि दक्षिणी राज्यों को जनसंख्या नियंत्रित करने के लिए दंडित नहीं किया जाना चाहिए. उनका आरोप रहा है कि अगर परिसीमन जनसंख्या के आधार पर हुआ तो इससे दक्षिणी राज्यों में लोकसभा की सीटें घट जाएंगी और संसद में उनका राजनीतिक प्रतिनिधित्व घटेगा. अब तो तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने स्वायत्तता का राग अलापना भी शुरू किया है. दरअसल स्टालिन ही नहीं दक्षिण के राज्यों को यूपी से बहुत दिक्कत रही है. पिछले महीने तो स्टालिन ने यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ तक को निशाने पर ले लिया. दरअसल तमिलनाडु में हिंदी विरोध के पीछे एक अहसास यह है कि यह पिछड़े और गरीब लोगों की भाषा है. अगर ऐसा नहीं होता तो विदेशी भाषा होते हुए भी अंग्रेजी को क्यों सम्मान मिलता? पर उल्लेखनीय यह भी है कि तमिलनाडु के बीजेपी नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अन्नामलाई को हिंदी और हिंदी भाषी प्रदेशों से कोई दिक्कत नहीं है. वो अपने राज्य में ही तर्क देकर यह बताते हैं कि जब से केंद्र में बीजेपी की सरकार बन गई है तब से दक्षिण के राज्यों को केंद्र से मिलने वाले अनुदान में आनुपातिक बढ़ोतरी हुई है. इतना ही नहीं वो दक्षिण के राज्यों विशेषकर तमिलनाडु को आगाह करते हैं कि यूपी को जगाओ मत ,अगर यह राज्य जग गया तो दक्षिण की छुट्टी हो जाएगी.  योगी को क्यों निशाने पर लिया स्टालिन ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में लिखा कि ‘तमिलनाडु की भाषा नीति और निष्पक्ष परिसीमन की मांग आज पूरे देश में गूंज रही है. भाजपा इससे परेशान है, जो उनके नेताओं के इंटरव्यू से पता चलता है. अब माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हमें नफरत पर भाषण देना चाहते हैं? हमें बख्श दीजिए. ये तो राजनीतिक कॉमेडी हो गई.’ इसके बाद स्टालिन ने योगी आदित्यनाथ के आरोपों पर सफाई देते हुए कहा कि ‘हम किसी भाषा का विरोध नहीं कर रहे हैं बल्कि हम थोपने और अंधराष्ट्रीयता का विरोध कर रहे हैं. यह वोट बैंक की राजनीति नहीं है बल्कि ये न्याय और स्वाभिमान की लड़ाई है. दरअसल योगी ने तमिलनाडु में भाषा नीति और परिसीमन के विरोध को लेकर बयान दिया था. योगी आदित्यनाथ ने भाषा विवाद को छोटी राजनीतिक सोच करार दिया. उन्होंने कहा कि स्टालिन धर्म और भाषा के आधार पर बांटने की कोशिश कर रहे हैं क्योंकि उनका वोटबैंक खिसक रहा है. योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भाषा को लोगों को एकजुट करना चाहिए न कि बांटना चाहिए. उन्होंने लोगों को भी बांटने वाली राजनीति से सावधान रहने की सलाह दी थी. अन्नामलाई के तर्क अन्नामलाई पिछले साल एक उत्तर भारत बनाम दक्षिण भारत को लेकर हुए एक डिबेट में तर्कों की झड़ी लगा दी थी. वो बताते हैं कि केंद्र से मिलने वाली राज्यों की मदद के बंटवारे का जो फार्मूला इंदिरा गांधी के समय लाया गया उसमें जनसंख्या का आधार 50 प्रतिशत रखा गया. अन्नामलाई समझाते हैं कि अगर 100 रुपये केंद्र को राज्यों को बांटने थे उसमें स 50 रुपये का आधार जनसंख्या होने के चलते उत्तर के राज्यों को फायदा मिलता था. बाद में जनसंख्या का बेस और बढ़ा. पर आज बीजेपी के राज में यह कम होकर केवल 15 परसेंट हो गया है. यानि केंद्र सरकार से मिलने वाली राशि के बंटवारे का फायदा अब अधिक जनसंख्या वाले राज्यों को नहीं मिलता है. इसके साथ ही 45 परसेंट आधार अमीर और गरीब राज्यों के लिए बराबर हो गया है. इसी तरह 15 प्रतिशत वेटेज वित्तीय सेक्टर में अच्छा प्रदर्शन करने वाले राज्यों के लिया रखा गया है.15 प्रतिशत का वेटेज विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए रखा गया है. इसके साथ ही 10 प्रतिशत का वेटेज इकोलॉजी को दिया गया है. 15 प्रतिशत भौगोलिक एरिया को वेटेज मिल रहा है.  अन्नामलाई के कहने का मतलब साफ है कि उपरोक्त आधारों का अगर विश्वेषण करें तो साफ पता चलता है कि दक्षिण के राज्यों के हितों का ध्यान उत्तर से ज्यादा रखा गया है. जनसंख्या के आधार को कहां 60 प्रतिशत से नीचे लाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया. गुड गवर्ननेंस के नाम पर कोई फायदा नहीं होता था पर आज इसके नाम पर 15 प्रतिशत का लाभ होता है. अन्ना मलाई इस बात के लिए स्टालिन और अन्य नेताओं की आलोचना करते हैं कि वे देश और राज्य को चलाने के लिए जिस फार्मूले की बात कर रहे हैं वो न्यायपूर्ण नहीं है. वो उदाहरण देते हैं कि तमिलनाडु में 34 परसेंट रेवेन्यू 4 जिलों से आता है. क्या राज्य के कुल रेवेन्यू का 34 प्रतिशत इन चार जिलों को ही मिलना चाहिए? अन्नामलाई कहते हैं कि इस तरह से देश नहीं चल सकता है. यूपी के मजदूरों के भरोसे तमिलनाडु की इंडस्ट्री अन्ना मलाई बताते हैं कि तमिलनाडु में यूपी के 25 लाख रजिस्टर्ड मजदूर हैं. अगर अनऑफिशियल को भी जोड़ लिया जाए तो करीब 40 लाख लेबर यूपी के तमिलनाडु में हैं. अन्ना कहते हैं कि कल्पना करिए अगर योगी आदित्यनाथ और नीतीश कुमार कहें कि इतने सस्ता श्रम क्यों आपको उपलब्ध कराएं तो तमिलनाडु क्या कर लेगा? आज पूरी दुनिया की इकॉनमी सस्ते श्रम के भरोसे ही है. वास्तव में अगर यूपी और बिहार की ओर से यह मांग रख दी जाए कि उनके राज्य के लोगों को एक निश्चित रकम जरूर मिलना चाहिए अन्यथा उनके जाने पर रोक लगा दी जाएगी . कल को योगी और नीतीश कुमार अगर यह मांग करें कि हर मजदूर के नाम 10 हजार रुपये उनके राज्य को चाहिए तो हम क्या इनकार कर पाएंगे?  पर देश ऐसे नहीं चलता है. अन्ना मलाई कहते हैं कि याद करिए जब कोविड के समय मजदूरों को वापस बुलाने के लिए तमिलनाडु के इतिहास में पहली बार हिंदी में प्रेस रिलीज जारी किया गया था. 4- वास्तव में यूपी की तरक्की हैरान करने वाली है अन्नामलाई कहते हैं कि जिस तरह कहा जाता है कि चीन सो रहा है उसे मत छेड़ो, उसी तरह यूपी सो रहा उसे जगाओगे तो … Read more

उज्जैन में सिंहस्थ 2028 के लिए अभी से तैयारी शुरू, भीड़ प्रबंधन और स्वच्छ जल में स्नान कराना प्रशासन के लिए भी बड़ी चुनौती

उज्जैन  भगवान महाकाल की नगरी उज्जैन में शिप्रा नदी किनारे वर्ष 2028 में लगने वाले महाकुंभ सिंहस्थ की तारीख शासन ने घोषित कर दी है। सिंहस्थ मेला अधिकारी आशीष सिंह ने बताया कि इस बार सिंहस्थ दो माह का होगा। 27 मार्च से 27 मई तक लगेगा। नौ अप्रैल से आठ मई तक तीन अमृत स्नान और सात स्नान पर्व होंगे। गत सिंहस्थ एक माह का था। उज्जैन में हर 12 वर्ष के अंतराल पर महाकुंभ सिंहस्थ लगता है, जिसमें दुनियाभर से साधु-संत और श्रद्धालु शिप्रा नदी में स्नान करने आते हैं और धर्म, संस्कृति का प्रचार-प्रसार करते हैं। इस बार के महाकुंभ में 14 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान सरकार ने लगाया है। सिंहस्थ में अब 35 महीने का समय शेष रह गया है और स्थिति यह है कि सड़क, पुल, बिजली सहित अधिकांश प्रोजेक्ट कागजों में ही सिमटे पड़े हैं। आगे चलकर हो सकती है बड़ी मुसीबत प्रमुख बात यह है कि सालभर में सिंहस्थ मद के केवल दो काम ही धरातल पर प्रारंभ हो पाए हैं। विभागीय मद के अधिकांश प्रोजेक्ट सक्षम स्वीकृति और ठेकेदार चयन प्रक्रिया में ही उलझा रखे हैं। यह विशुद्ध रूप से अफसरों की उदासीनता एवं लापरवाही का प्रमाण है, जो समय रहते काम प्रारंभ और समाप्त न होने से आगे चलकर बड़ी मुसीबत खड़ी कर सकती है। श्रद्धालुओं के लिए होगी व्यवस्थाएं एक रिपोर्ट के अनुसार सिंहस्थ की महत्ता और विशालता को ध्यान में रख श्रद्धालुओं के लिए व्यापक व्यवस्थाएं करने को 11 विभाग 15751 करोड़ रुपये के 102 कार्य की योजना प्रस्तावित हैं, जिनमें 5133 करोड़ रुपये से 75 कार्य इस वर्ष सिंहस्थ मद से कराने की अनुशंसा संभागीय समिति ने की है। ध्यान देने वाली बात यह है कि प्रदेश बजट में सिंहस्थ मद दो हजार करोड़ का ही रखा गया है। प्रश्न उठता है कि भविष्य में मद बढ़ाया जाएगा या कुछ कार्यों की छंटनी होगी। सबसे बड़ी चुनौती भीड़ प्रबंधन और स्वच्छ जल में स्नान सिंहस्थ कराने में सबसे बड़ी चुनौती भीड़ प्रबंधन और स्वच्छ जल में श्रद्धालुओं को स्नान कराने की है। भीड़ प्रबंधन तभी संभव है जब शहर की आंतरिक सड़कें चौड़ी, पुलों का दोहरीकरण और शिप्रा नदी पर घाट की लंबाई बढ़े। ये तीनों ही काम करने में यहां का प्रशासन पिछड़ा है। ट्रैफिक नियंत्रण के लिए बनी रोप-वे, फ्रीगंज समानांतर रेलवे ओवर ब्रिज सरिकी अनेक विभागीय योजना सक्षम स्वीकृति के बाद भी धरातल पर शुरू न हो सकी है। सरकार को प्रारंभिक तौर पर अनुमान है कि सिंहस्थ में 14 करोड़ से अधिक श्रद्धालु उज्जैन आ सकते हैं। ऐसे में इनके लिए व्यवस्था करना भी आसान काम नहीं है। ऐसे में प्रशासन ने अनुमान के आधार पर कुम्भ मेले के दौरान कुछ महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। जिनको कुंभ के दौरान लागू किया जाएगा। कुंभ में होंगी ये व्यवस्थाएं कुंभ मेले के दौरान मेला क्षेत्र में प्रतिदिन 16 हजार से ज्यादा सफाईकर्मी स्वच्छता की व्यवस्था संभालेंगे। साथ ही श्रृद्धालुओं की सुविधा के लिए 50 हजार शौचालय का निर्माण भी किया जाएगा। आने वाले श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए 500 अस्थाई अस्पताल और कैम्प लगाने का भी निर्णय लिया गया है। सिंहस्थ में लगेंगे इतने सफाईकर्मी बताया जा रहा है कि उज्जैन में सड़क और अन्य क्षेत्रों को मिलाकर 11 हजार 220 सफाईकर्मियों की आवश्यकता होगी। कचरा संग्रहण के लिए लगभग 5 हजार सफाईकर्मियों की जरूरत पड़ेगी। कुल मिलाकर 16 हजार 220 सफाई कर्मियों की आवश्यकता सिंहस्थ में होगी। सिंहस्थ में आ सकते हैं 14 करोड़ श्रद्धालु सिंहस्थ में 14 करोड़ से अधिक श्रद्धालु आ सकते हैं। ऐसे में हर दिन सिंहस्थ मेला क्षेत्र में 740 टन कचरा उत्पन्न होने का अनुमान है। इसे नियंत्रित करने के लिए 50 हजार बायो-टॉयलेट बनाए जाएंगे। सिंहस्थ कुम्भ मेले में 500 अस्थाई अस्पताल और कैम्प लगाए जाएंगे। स्वास्थ्य सुविधाओं को सिंहस्थ मेला क्षेत्र के अनुसार 6 जोन में बांटा जाएगा। वहीं, स्वास्थ्य सेवाओं का डिजीटल रिकॉर्ड मेंटेन किया जाएगा। डॉक्टर और पेरामेडिकल स्टॉफ की ट्रेनिंग होगी। इसके साथ ही सुरक्षा के मद्देनजर पर्याप्त सुरक्षाबलों को तैनात किया जाएगा।

सरला मिश्रा केस की फाइल 28 साल बाद फिर खुलेगी, पुलिस की खात्मा रिपोर्ट खारिज, दिग्विजय सिंह की बढ़ सकती हैं मुश्किलें? जानें मामला

भोपाल मध्य प्रदेश के राजनीतिक इतिहास के सबसे चर्चित मामलों में से एक कांग्रेस नेत्री सरला मिश्रा की मौत का मामला 28 साल बाद फिर से खुलने जा रहा है. 1997 में भोपाल स्थित सरकारी आवास में जलने से उनकी मौत हो गई थी. इस मामले में सरला मिश्रा के भाई ने एमपी के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह पर गंभीर आरोप लगाए हैं. ऐसे में उनकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं. भोपाल कोर्ट के आदेश के बाद सरला मिश्रा की मौत का मामला फिर से खुलने जा रहा है.  अनुराग ने कहा, सियासी अदावत में बहन की हत्या हुई। सरला की मौत की जांच पर शुरू से अंगुलियां उठती रही हैं। आरोप लगे कि भोपाल की टीटी नगर पुलिस की हत्या को आत्महत्या बताया। पीएम करने वाले डॉक्टर पर आरोप लगे। अब अनुराग ने कहा, उम्मीद है, अब न्याय मिलेगा। जांच के नाम पर कागजी घोड़े : पुलिस ने 7 मार्च 1997 को बयान लिया। एक अन्य बयान 15 फरवरी 2010 को लिया। जांच के आदेश के कोर्ट ने लिखा- पुलिस ने जांच न कर कागजी घोड़े दौड़ाए। सरला जल रही थी, दरवाजे खुले थे: जांच में कहा गया था, जब साक्षी राजीव दुबे घटनास्थल पर पहुंचे तो सरला जल रही है। मकान के दरवाजे खुले थे। कोर्ट ने लिखा है, यह असंभव है। सरला के भाई ने दिग्विजय सिंह पर गंभीर आरोप लगाए इस मामले में सरला के भाई ने दिग्विजय सिंह पर गंभीर आरोप लगाए हैं। भोपाल का बहुचर्चित कांड सरला मिश्रा सुर्खियों में रहा है। सरला के भाई अनुराग मिश्रा का कहना है कि उनकी बहन सरला मिश्रा 14 फरवरी 1997 को संदिग्ध अवस्था में जली हुई पाई गई थीं। इस मामले में आत्महत्या का मामला दर्ज किया गया था पुलिस ने उस समय इस मामले में आत्महत्या का मामला दर्ज किया था, जबकि वो मामला हत्या का था। इसी मामले में दिग्विजय सिंह के भाई लक्ष्मण सिंह का नाम भी सामने आया था। ऐसे आरोप थे कि सरला की हत्या राजनीतिक साजिश के तहत की गई थी। जब सरला मिश्रा का 1997 को निधन हुआ था, तब मध्य प्रदेश में कांग्रेस सरकार थी और दिग्विजय सिंह मुख्यमंत्री थे। सरला मिश्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी सरला मिश्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के मामले में भोपाल के टीटी नगर थाने की ओर से पेश खात्मा रिपोर्ट को न्यायालय ने नामंजूर कर दिया है। सरला के भाई अनुराग मिश्रा की आपत्तियों के आधार पर न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी पलक राय ने टीटी नगर पुलिस को मामले की पुन: जांच कर आरोप-पत्र संबंधित न्यायालय में पेश करने का आदेश दिया है। मामला करीब 28 वर्ष पुराना है। 14 फरवरी 1997 को सरला मिश्रा भोपाल के साउथ टीटी नगर स्थित सरकारी आवास में संदिग्ध परिस्थितियों में जल गई थीं। उन्हें इलाज के लिए पहले हमीदिया अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बाद में सफदरजंग अस्पताल, नई दिल्ली ले जाया गया था, जहां 19 फरवरी 1997 को उनकी मौत हो गई। कोर्ट ने कहा- पुलिस जांच में कई गंभीर खामियां भोपाल कोर्ट की न्यायाधीश पलक राय ने अपने आदेश में कहा कि मृतका के मृत्यु पूर्व बयान की मेडिकल पुष्टि नहीं की गई। बयान के समर्थन में जो कागज के टुकड़े मिले, उनकी भी स्वतंत्र जांच नहीं कराई गई। घटनास्थल से कोई फिंगरप्रिंट भी नहीं लिया गया। परिवार ने इसे हत्या बताया था और कुछ नेताओं पर आरोप भी लगाए थे। साल 2000 में पुलिस ने केस की फाइल बंद कर दी थी। खात्मा रिपोर्ट अगले 19 वर्ष तक कोर्ट में पेश नहीं की गई। फरवरी 2025 में हाईकोर्ट ने आदेश दिए कि पहले खात्मा रिपोर्ट में बयान दर्ज हों और फिर कार्रवाई की जाए। इसके बाद भोपाल कोर्ट में सुनवाई चली और अनुराग के बयान दर्ज हुए। भाई ने कहा- हत्या हुई, पुलिस ने माना सुसाइड अनुराग मिश्रा ने बताया- सरला दीदी मेरी सगी बड़ी बहन थी। हम शुरू से कहते आ रहे हैं कि उनकी हत्या हुई है। पुलिस ने संदिग्ध स्थिति में जला मानकर 309 में केस दर्ज कर लिया और कहा था कि इन्होंने आत्महत्या की है। हम उसी समय के जांच अधिकारी से कहते रहे कि इसमें हत्या हुई है। हमनें लिखकर दिया फिर भी उसकी जांच नहीं हुई। घटना स्थल पर सबसे पहले मेरे माता-पिता पहुंचे थे। उन्हें घटना वाले मकान से बाहर करके ताला लगा दिया था। पुलिस ने माता-पिता और मेरी एक और सगी बड़ी बहन के बयान नहीं लिए। जलते हुए कोई कैसे फोन कर सकता है? अनुराग कहते हैं दीदी के पड़ोसी राजीव दुबे का बयान था कि सरला का मेरे घर फोन आया था कि मैं जल रही हूं। आप आकर मुझे बचाओ। उसी समय तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के निवास से राजीव दुबे और योगीराज शर्मा को फोन पहुंचता है कि सरला मिश्रा का इलाज कराओ। ये दोनों दो घंटे तक उनको लेकर बैठे रहे। अस्पताल लेकर क्यों नहीं गए? डॉ. योगीराज शर्मा का पुलिस रिकॉर्ड में बयान है कि जब मैं घटना वाले घर पहुंचा तो मकान धुला और पोछा हुआ था। उसकी पुलिस ने जांच क्यों नहीं की। लैंडलाइन फोन की जांच और जब्ती क्यों नहीं की अनुराग मिश्रा ने कहा- बहन के लैंडलाइन की कॉल डिटेल, वह फोन जब्त क्यों नहीं किया? डॉ. सत्पथी ने सारी बातें लिख दीं लेकिन, टेलीफोन का जिक्र ही नहीं किया। पुलिस डायरी में जैसा लिखा कि तत्कालीन एसपी के मौखिक आदेश पर डॉ. सत्पथी घटना की फोरेंसिक जांच के लिए पहुंच गए थे। ये क्यों नहीं बताया कि मौखिक आदेश में क्या कहा गया था। क्या रिपोर्ट बनाना है? बेड पर मिले कागज की जांच क्यों नहीं की भाई का आरोप है कि घटना के बाद हर्ष शर्मा पहुंचे थे उन्होंने अभिमत दिया था कि सरला मिश्रा के बेड पर एक कागज मिला था। उसकी राइटिंग की जांच इसलिए नहीं की क्योंकि मृत्यु पूर्व बयानों में हस्ताक्षर अलग हो जाते। इसलिए पुलिस ने उनके अभिमत को भी नहीं माना। उस समय विधानसभा सत्र में भाजपा के विधायकों ने इस मामले को उठाया था और सीबीआई जांच की मांग की। उसके बाद हम हाईकोर्ट भी गए। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट जबलपुर में एक रिट याचिका … Read more

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