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सिंचाई के क्षेत्र में हासिल की अभूतपूर्व उपलब्धियां: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

जन्मदिवस पर विशेष भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अक्सर कहते हैं कि प्राचीन काल में भारत में पारस पत्थर हुआ करता था, जिसके स्पर्श से लोहा सोना हो जाता था। इस पारस पत्थर का काम पानी करता है जब वह सूखे खेतों पर पहुंचता है। जल के स्पर्श से खेतों में सुनहरी फसलें लहलहाती हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के देश की धरती को “शस्य श्यामला” बनाने के संकल्प से ही जुड़ा हुआ है मुख्यमंत्री डॉ. यादव का “संकल्प “हर किसान के खेत तक पानी पहुंचाना” जिससे हर खेत में सुनहरी फसलें लहलहाएं और किसान समृद्धशाली बने। इसी संकल्प को पूरा करने के लिए वे निरंतर जुटे हुए हैं और इसके परिणाम स्वरुप प्रदेश ने गत 1 वर्ष में सिंचाई के क्षेत्र में अभूतपूर्व उपलब्धियां हासिल की हैं। पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेई ने दो दशक पहले देश की नदियों को जोड़कर हर खेत तक पानी पहुंचाने का सपना देखा था, जो राज्यों के बीच जल विवाद के चलते दो दशकों से अधिक समय से ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ था। केन-बेतवा और पार्वती-कालीसिंध-चंबल जैसी महत्वाकांक्षी अंतर्राज्यीय नदी जोड़ो परियोजनाएं मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के बीच सहमति न बन पाने के कारण आगे नहीं बढ़ पा रही थीं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने केंद्र सरकार और राज्यों से निरंतर चर्चा कर इन परियोजनाओं के गतिरोध को समाप्त किया और प्रदेश ने दो बड़ी परियोजनाओं के रूप में अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल की। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वयं भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेई जी की 100वीं जयंती पर मध्यप्रदेश आकर देश की पहली नदी जोड़ो राष्ट्रीय परियोजना केन-बेतवा का शिलान्यास किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के अथक प्रयासों का ही परिणाम है कि अब महाराष्ट्र सरकार के साथ वार्ता के बाद विश्व की सबसे बड़ी ग्राउण्ड वॉटर रीचार्ज अंतर्राज्यीय संयुक्त परियोजना “ताप्ती बेसिन मेगा रीचार्ज परियोजना” का अवरोध दूर हो गया है। मध्यप्रदेश शीघ्र ही महाराष्ट्र सरकार के साथ इस संबंध में करार करने की ओर बढ़ रहा है। जल्द ही केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को भोपाल आमंत्रित कर करार की कार्यवाही की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का कहना है कि “ताप्ती मेगा रिचार्ज योजना के जरिए हम महाऱाष्ट्र सरकार के साथ मिलकर ताप्ती नदी की तीन धाराएं बनाकर राष्ट्रहित में नदी जल की बूंद-बूंद का उपयोग सुनिश्चित कर कृषि भूमि का कोना-कोना सिंचित करेंगे।” केन-बेतवा लिंक राष्ट्रीय परियोजना एक महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय परियोजना है, जिसमें केन नदी पर दौधन बांध एवं लिंक नहर का निर्माण किया जाना प्रस्तावित है। रूपये 44 हजार 605 करोड़ लागत की इस परियोजना के पूर्ण होने पर मध्यप्रदेश के सूखाग्रस्त बुन्देलखण्ड क्षेत्र के 08 लाख 11 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा और प्रदेश की 44 लाख आबादी को पेयजल सुविधा प्राप्त होगी। साथ ही परियोजना से 103 मेगावाट बिजली का उत्पादन भी होगा, जिसका पूर्ण उपयोग मध्यप्रदेश करेगा। इस परियोजना से मध्यप्रदेश के 10 जिले-छतरपुर, पन्ना, दमोह, टीकमगढ़, निवाड़ी, शिवपुरी, दतिया, रायसेन, विदिशा एवं सागर के लगभग 02 हजार ग्रामों के लगभग 07 लाख 25 हजार किसान परिवार लाभांवित होंगे। सूखाग्रस्त बुन्देलखण्ड क्षेत्र में भू-जल स्तर की स्थिति सुधरेगी। औद्योगीकरण, निवेश एवं पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा तथा रोजगार के अवसर भी उपलब्ध होंगे। इससे स्थानीय स्तर पर लोगों में आत्मनिर्भरता आयेगी तथा लोगों का पलायन रुकेगा। परियोजना के साकार रूप लेने पर मध्यप्रदेश के बुन्देलखण्ड क्षेत्र की तस्वीर बदलेगी। संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चम्बल अन्तर्राज्यीय नदी लिंक परियोजना के क्रियान्वयन के लिए मध्यप्रदेश और राजस्थान राज्यों एवं केन्द्र के मध्य 28.01.2024 को त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित हुआ और दोनों राज्यों एवं केन्द्र के मध्य 05.12.2024 को जयपुर में अनुबंध सहमति पत्र (मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट) हस्ताक्षरित किया गया। परियोजना की अनुमानित लागत 72 हजार करोड़ रूपये की है, जिसमें मध्यप्रदेश 35 हजार करोड़ एवं राजस्थान 37 करोड़ की हिस्सेदारी होगी। परियोजना से मध्यप्रदेश में मालवा एवं चंबल क्षेत्र के 11 जिले क्रमशः गुना, शिवपुरी, मुरैना, उज्जैन, सीहोर, मंदसौर, देवास, इंदौर, आगर-मालवा, शाजापुर एवं राजगढ़ जिलों में कुल 6.14 लाख हेक्टेयर नवीन सिंचाई एवं चंबल नहर प्रणाली के आधुनीकरण से भिंड मुरैना एवं श्योपुर के 3.62 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा सुनिश्चत की जायेगी। परियोजना से लगभग 03 हजार 150 ग्रामों की 40 लाख आबादी लाभान्वित होगी एवं इस समेकित परियोजना में मध्यप्रदेश की 19 सिंचाई परियोजनाओं को शामिल किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का संकल्प है कि क्षिप्रा स्वच्छ और निरंतर प्रवहमान बने और सिहंस्थ 2028 में क्षिप्रा के जल में ही श्रद्धालुओं को स्नान कराया जाए। क्षिप्रा नदी के जल को शुद्ध रखने के लिए 900 करोड़ रूपये की लागत की “कान्ह डयवर्सन क्लोज डक्ट परियोजना” के द्वारा कान्ह नदी के दूषित जल को क्षिप्रा नदी में मिलने से रोका जायेगा। वर्ष-2028 से पहले यह योजना पूर्ण कर ली जायेगी। क्षिप्रा को वर्ष भर अविरल, प्रवहमान बनाने के लिए उज्जैन जिले की सेवरखेडी एवं सिलारखेडी (लागत लगभग 615 करोड़) योजना का कार्य भी आंरभ हो गया है। इससे आमजन एवं श्रद्धालुओं को पूरे वर्ष भर विशेष पर्वों पर उनकी धार्मिक भावनाओं के अनुरूप क्षिप्रा नदी में स्नान करने का अवसर मिलेगा। क्षिप्रा नदी पर सिंहस्थ में स्नान सुविधा के लिये क्षिप्रा नदी के दोनों तटों पर लगभग 29 किलोमीटर लंबाई में घाटों का निर्माण किया जायेगा, जिसकी राशि रू. 778.91 करोड़ की प्रशासकीय स्वीकृति दी जा चुकी है। मध्यप्रदेश के बुन्देलखण्ड क्षेत्र में भू-जल स्तर को बढ़ाने, पेयजल संकट को दूर करने एवं सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से “अटल भू-जल योजना” प्रारंभ की गई है। यह योजना प्रदेश के 06 जिलों के 09 विकासखण्डों में क्रियान्वित की जा रही है। इस परियोजना से चयनित क्षेत्रों में भू-जल स्तर में सुधार होने से स्थानीय किसानों को लाभ प्राप्त होगा तथा किसानों की आय बढ़ेगी। इसके अतिरिक्त जल जीवन मिशन के अन्तर्गत जल प्रदाय के लिये टिकाऊ जल स्त्रोत भी उपलब्ध हो सकेंगे। बांधों की सुरक्षा भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। बांधों की सुरक्षा को लेकर मध्यप्रदेश सरकार पूरी सजगता के साथ काम कर रही है। इसके लिये प्रदेश में “डैम सेफ्टी रिव्यू पेनल” गठित है, जो प्रतिवर्ष संवेदनशील बांधों का निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करता है। आने वाले 05 वर्षों में प्रदेश के 27 बांधों की सुरक्षा एवं मरम्मत की जावेगी। इसके लिये विश्व बैंक के सहयोग से 551 करोड़ … Read more

लखनऊ के मुंह से आशुतोष-विपराज ने छीनी जीत, आखिरी पांच ओवरों में पलट दी हारी हुई बाजी, पंत हुए मायूस

 नई दिल्ली  आशुतोष शर्मा और विपराज निगम ने हैरतअंगेज बल्लेबाजी करते हुए सोमवार को लखनऊ सुपरजायंट्स के मुंह से जीत छीन दिल्ली कैपिटल्स को दे दी। इन दोनों की तूफानी पारियों के दम पर दिल्ली ने आईपीएल-2025 के अपने पहले मैच में लखनऊ को 1 विकेट से हरा दिया। दिल्ली को जीत के लिए 210 रन चाहिए थे। उसने अपने पांच विकेट 65 रनों पर ही खो दिए थे। ट्रिस्टन स्टब्स ने कुछ लड़ाई लड़ी। हालांकि वह 13वें ओवर की तीसरी गेंद पर 113 के कुल स्कोर पर आउट हो गए। यहां से आशुतोष और विपराज ने जो अटैकिंग बैटिंग की है उसने सभी को हैरान कर दिया और दिल्ली को वहां से जीत दिलाई जहां से किसी को उम्मीद नहीं थी। ये दिल्ली की लखनऊ के खिलाफ रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए सबसे बड़ी जीत है। लखनऊ के लिए निकोलस पूरन ने 30 गेंदों पर 75 रनों की तूफानी पारी खेली जिसमें छह चौके और सात छक्के शामिल रहे। उनके अलावा मिचेल मार्श ने 36 गेंदों पर 72 रनों की पारी खेली जिसमें छह चौके और इतने ही छक्के जड़े। दिल्ली के लिए कोई भी मार्श और पूरन वाला काम नहीं कर सका। नहीं मिली अच्छी शुरुआत दिल्ली के पास जैक फ्रेसर मैक्गर्क और फाफ डु प्लेसी की सलामी जोड़ी है। ये दोनों अपनी तूफानी बैटिंग के लिए जाने जाते हैं, लेकिन शार्दुल ठाकुर ने दिल्ली का पूरा गेम बिगाड़ दिया। नीलामी में ठाकुर को किसी ने नहीं खरीदा था। मोहसिन खान के चोटिल होने के बाद वह टीम में आए और इस मैच में खेले। पहले ही ओवर की तीसरी गेंद पर उन्होंने मैक्गर्क (1) को बड़ोनी के हाथों में कैच कराया। इसके बाद उन्होंने अभिषेक पोरेल को पवेलियन की राह दिखाई। वह खाता तक नहीं खोल सके। समीर रिजवी को एम सिद्धार्थ ने अपना शिकार बनाया और दिल्ली को तीसरा झटका दिया। अक्षर और डुप्लेसी भी फेल उम्मीद अब डुप्लेसी और कप्तान अक्षर से थी। दोनों ने कुछ अच्छे शॉट्स मार उम्मीद भी जगाई। ज्यादा तेजी दिखाने के चक्कर में अक्षर, दिग्वेश राठी का शिकार बने। अक्षर ने 11 गेंदों पर 22 रन बनाए जिसमें तीन चौके और एक छक्का शामिल रहा। रवि बिश्नोई ने डुप्लेसी को डेविड मिलर के हाथों कैच करा दिल्ली तो पांचवां झटका दिया। डुप्लेसी ने 18 गेंदों पर 29 रन बनाए। ट्रिस्टन स्टब्स आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए टीम को रास्ते पर लाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन ज्यादा आगे नहीं जा सके। सिद्धार्थ की गेंद ने उनके डंडे उड़ा दिए। स्टब्स ने 22 गेंदों पर 34 रन बनाए। आशुतोष और विपराज निगम ने बांधा दिल्ली की टीम ने अभी भी हार नहीं मानी थी। आशुतोष शर्मा और विपराज निगम तेजी से रन बना टीम को जीत दिलाने की कोशिश में लगे हुए थे। इन दोनों ने 22 गेंदों पर 55 रन जोड़े। तभी 16वें ओवर के बाद टाइम आउट हुआ और इसके बाद पहली गेंद पर विपराज गलत शॉट खेल दिग्वेश का शिकार बने। उन्होंने 15 गेंदों पर पांच चौके और दो छक्कों की मदद से 39 रन बनाए। 18वें ओवर की पहली गेंद पर बिश्नोई ने स्टार्क को आउट कर दिल्ली को आठवां झटका दिया। आशुतोष ने 18वें ओवर की आखिरी तीन गेंद पर छक्का, चौका और छक्का मार एक बार फिर दिल्ली को मैच में ला दिया। आखिरी दो ओवरों में दिल्ली को जीत के लिए 22 रन चाहिए थे। कुलदीप 19वें ओवर की पहली गेंद पर चौका मार तीसरी गेंद पर रन आउट हो गए। चौथी गेंद पर दो रन लेकर आशुतोष ने अपना अर्धशतक पूरा किया। आखिरी ओवर की तीसरी गेंद पर आशुतोष ने छक्का मार अपनी टीम को जीत दिलाई। लखनऊ का तूफान इससे पहले, पहली पारी खेलने उतरी लखनऊ ने विशाखापट्टनम के एसीए-वीडीसीए स्टेडियम में तूफान ला दिया। मिचेल मार्श और एडेन मार्करम की जोड़ी ने टीम को तेज शुरुआत दी। पहले विकेट के लिए दोनों ने 46 रन जोड़े। विपराज निगम ने मार्करम को आउट कर दिल्ली को पहली सफलता दिलाई। उन्होंने 15 रन बनाए। इसके बाद आया असली तूफान। मार्श और पूरन ने फिर दिल्ली के गेंदबाजों की अच्छे से खबर ली। मार्श ने 21 गेंदों पर अपना अर्धशतक पूरा किया। दोनों ने टीम का स्कोर 133 रनों तक पहुंचा दिया। मुकेश कुमार ने मार्श को 12वें ओवर की चौथी गेंद पर आउट कर लखनऊ को दूसरा झटका दिया। उनके बाद आए कप्तान पंत खाता तक नहीं खोल सके। हालांकि, पूरन एक छोर से मार रहे थे और लग रहा था कि लखनऊ आसानी से 230 के पार जाएगी। पूरन को मिचेल स्टार्क ने 15वें ओवर की पांचवीं गेंद पर बोल्ड कर लखनऊ को चौथा झटका दिया। यहां से फिर दिल्ली ने वापसी की। मिलर ने पहुंचाया 200 पार दिल्ली ने फिर बडोनी (4), ठाकुर (0), शाहबाज अहमद (9) के विकेट जल्दी खो लिए और यहां लगने लगा कि लखनऊ अब 200 के पार भी नहीं जा पाएगी। 19वें ओवर की आखिरी गेंद पर रवि बिश्नोई भी आउट हो गए और उनके रूप में लखनऊ ने अपना आठवां विकेट खोया। आखिरी ओवर में डेविड मिलर ने दो छक्के मार टीम का स्कोर 200 के पार पहुंचाया। दिल्ली के लिए स्टार्क ने तीन विकेट लिए। कुलदीप के हिस्से दो विकेट आए। निगम और मुकेश कुमार को एक-एक सफलता मिली।

रूसी तेल पर अमेरिकी बैन बेअसर, रूस के तेल का भारत में फिर से आयात बढ़ गया

नई दिल्ली रूसी तेल पर अमेरिकी बैन बेअसर नजर आ रहा है। भारत ने रूस से तेल खरीदना फिर से तेज कर दिया है। जनवरी और फरवरी के मुकाबले मार्च में इसमें तेजी आई है। जनवरी में अमेरिका ने रूस पर कुछ बैन लगाए थे। इसमें भारत और चीन बेचे जाने वाला कच्चा तेल भी शामिल था। यह बैन जो बाइडेन के प्रशासन ने लगाए थे। डोनाल्ड ट्रंप के सत्ता संभालने के बाद भी ये बैन लगे हुए हैं। हालांकि रूस ने मार्च में तेल बेचने की रफ्तार बढ़ाई है। इंडियन एक्सप्रेस की एक खबर के मुताबिक भारत ने मार्च में रूस से काफी मात्रा में तेल खरीदा है। इसकी वजह ये है कि रूस का तेल आसानी से मिल रहा है। वहीं ज्यादातर तेल 60 डॉलर प्रति बैरल से कम कीमत पर मिल रहा है। इससे भारत को तेल लाने के लिए बिना पाबंदी वाले जहाज आसानी से मिल जा रहे हैं। रूस के पास तेल ज्यादा होने की एक बड़ी वजह ये भी है कि यूक्रेन ने रूस के तेल कारखानों पर ड्रोन से हमले किए हैं। इससे रूस में तेल की खपत कम हो गई है और वो तेल बाहर बेचने को मजबूर है। कितना खरीदा तेल? तेल बाजार पर नजर रखने वाली कंपनी केप्लर (Kpler) ने कुछ आंकड़े जारी किए हैं। इन आंकड़ों के अनुसार मार्च के पहले 21 दिनों में भारत ने रूस से हर दिन औसतन 1.85 मिलियन बैरल तेल खरीदा है। फरवरी में ये आंकड़ा 1.47 मिलियन बैरल प्रतिदिन (bpd) था। वहीं जनवरी में यह 1.64 मिलियन bpd था। इसका मतलब है कि भारत ने मार्च में रूस से ज्यादा तेल खरीदा है। मार्च में भारत ने जितना भी तेल खरीदा है, उसमें से रूस की हिस्सेदारी 35 फीसदी से ज्यादा रही है। फरवरी में ये हिस्सेदारी 31% और जनवरी में 33% थी। भारत और चीन सबसे आगे जनवरी से मार्च के महीने में भारत ने रूस से हर दिन औसतन 1.75 मिलियन bpd तेल खरीदा है। पिछले दो सालों में भी भारत ने लगभग इतना ही तेल खरीदा था। रूस ने फरवरी 2022 में यूक्रेन पर हमला कर दिया था। इसके बाद पश्चिमी देशों ने रूस से तेल खरीदना कम कर दिया। तब से भारत और चीन, रूस से सबसे ज्यादा तेल खरीदने वाले देश बन गए हैं। बाइडेन प्रशासन ने लगाया था बैन रूसी तेल पर जनवरी में जो बाइडेन प्रशासन ने बैन लगाया था। बाइडेन ने यह फैसला डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति पद संभालने से कुछ दिनों पहले ही लिया था। इस दौरान बाइडेन प्रशासन ने 183 जहाजों पर भी बैन लगाया था। ये जहाज रूस से तेल लाने-ले जाने का काम करते थे। इसके अलावा उन्होंने रूस की दो बड़ी तेल कंपनियों और बीमा कंपनियों पर भी पाबंदी लगाई थी। जब बैन तो फिर क्यों आई तेजी? अब सवाल है कि जब अमेरिका ने रूसी तेल पर बैन लगाया है तो फिर ऐसे में रूस तेल क्यों बेच रहा है। दरअसल बैन के कारण भारत के तेल कारखानों को रूस से तेल लाने में थोड़ी दिक्कत हो रही थी। वे ऐसे जहाजों और बीमा कंपनियों के साथ काम नहीं करना चाहते थे, जिन पर पाबंदी लगी हुई थी। लेकिन अब रूस के तेल की कीमत 60 डॉलर प्रति बैरल से कम हो गई है। ऐसे में जहाजों और बीमा की दिक्कत दूर हो गई। G7 देशों और उनके साथियों ने एक नियम बनाया है कि अगर रूस के तेल की कीमत 60 डॉलर से कम है तो पश्चिमी देशों के जहाज और बीमा कंपनियां रूस से तेल लाने-ले जाने में मदद कर सकती हैं। Kpler के डेटाबेस के अनुसार रूस से भारत आने वाले सभी जहाज बिना पाबंदी वाले हैं।

मोहन यादव आज 25 मार्च को अपने जन्मदिन के दिन उज्जैन में रहेंगे, शहर में आयोजित होंगे कई कार्यक्रम

उज्जैन  मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का आज 25 मार्च को जन्मदिन है. मुख्यमंत्री के शहर उज्जैन में सड़के पोस्टर से पट गई है. यह भी संभावना जताई जा रही है कि भगवान महाकाल का आशीर्वाद लेने के लिए मुख्यमंत्री आज मंगलवार को उज्जैन आ सकते हैं. जिला प्रशासन द्वारा इसकी तैयारी की जा रही है. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 25 मार्च को अपने जन्मदिन के दिन उज्जैन में रहेंगे। वे कालिदास संस्कृत अकादमी में आयोजित विक्रमोत्सव के पौराणिक फिल्म महोत्सव के समापन समारोह में मुख्य अतिथि होंगे। सम्राट विक्रमादित्य शोधपीठ के निदेशक श्री राम तिवारी ने इस बारे में जानकारी दी। कार्यक्रम में कई विदेशी राजनयिक शिरकत करेंगे। इनमें वेनेजुएला के एच.ई. कैपाया रोड्रिग्ज गोंजालेज, राजदूत अल्फ्रेडो जीसस काल्डेरा गुज़मैन और क्यूबा की काउन्सलर मैलेना रोजास मदीना शामिल हैं। समारोह में मुंबई की सीमा कपूर की आत्मकथा ‘यूं गुजरी है अब तलक’ का लोकार्पण भी किया जाएगा। मुख्यमंत्री के जन्मदिन के अवसर पर शहर के विभिन्न स्थानों पर उनके स्वागत और सम्मान के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। मोहन यादव का आज मंगलवार (25 मार्च) को जन्मदिन है. उनके जन्मदिन के पहले ही उज्जैन में बीजेपी नेताओं ने बधाई और स्वागत के पोस्टर से सड़कों को भर दिया है. मुख्यमंत्री भगवान महाकाल की पूजा अर्चना करने और आशीर्वाद लेने के लिए मंगलवार को उज्जैन भी आ सकते हैं. हालांकि, अभी इसकी औपचारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन यह प्रयास लगाए जा रहे हैं कि वे अपने व्यस्ततम समय में से कुछ समय भगवान महाकाल का आशीर्वाद लेने आने के लिए निकाल सकते हैं. सुरक्षा की दृष्टि से हर दिन रहती है तैयारी उज्जैन कलेक्टर नीरज कुमार सिंह के मुताबिक अभी आज मंगलवार (25 मार्च) के दौरे के संबंध में औपचारिक जानकारी नहीं आई है, मगर जिला प्रशासन द्वारा पूरी तैयारी रहती है. मुख्यमंत्री का उज्जैन गृह नगर है. ऐसे में कभी भी आ सकते हैं. पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा के मुताबिक मुख्यमंत्री मोहन यादव के डर आने वाले दिनों में भी प्रस्तावित है, इसलिए सुरक्षा की दृष्टि से हर दिन तैयारी रहती है. पूरा परिवार साथ मनाता है जन्मदिन मुख्यमंत्री मोहन यादव का परिवार हर साल उनके जन्मदिन एक साथ एकत्रित होकर मानता है, क्योंकि वे भोपाल के सीएम हाउस में अकेले रहते हैं. उनका पूरा परिवार उज्जैन में रहता है, इसलिए परिवार के साथ भी वे समय व्यतीत करने के लिए उज्जैन आ सकते हैं. उज्जैन की सड़कों पर बड़ी संख्या में समर्थकों ने पोस्टर लगा दिए हैं. इससे भी यह संभावना है कि वे उज्जैन आ सकते हैं.

Ladli Behna Yojana की अप्रैल में आएगी 23वीं किस्त, फिर खाते में आएंगे 1250 रुपए, क्या बढ़ेगी राशि?

भोपाल मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना की 1.27 करोड़ लाड़ली बहनों के लिए अपडेट है। योजना के लिए नए पंजीयन कब से शुरू होंगे? कब राशि बढ़ाई जाएगी? विधानसभा में विपक्ष द्वारा पूछे गए इस सवाल पर महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने जवाब देते हुए कहा कि फिलहाल लाडली बहना योजना की राशि बढ़ाने और नई लाडली बहनों के नाम जोड़ने का विभाग स्तर पर कोई प्रस्ताव नहीं है। मंत्री ने आगे कहा कि अब तक 15,748 महिलाओं के नाम उनकी मृत्यु के बाद हटाए गए हैं, जबकि 60 वर्ष की उम्र पूरी करने वाली 3,19,991 महिलाओं के नाम स्वतः पोर्टल से हट गए हैं। हालांकि राशि 1250 रुपए से बढ़ाकर 3 हजार रुपए तक करने को लेकर मुख्यमंत्री मोहन यादव कई बार ऐलान कर चुके हैं। कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल ने विधानसभा में सवाल किया था कि क्या सरकार दोबारा से नए पंजीयन शुरू करेगी और ₹3,000 की राशि देने का वादा कब पूरा होगा?इस पर मंत्री ने यह जवाब दिया है। 8 मार्च शनिवार अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर सीएम मोहन यादव ने 1.27 करोड़ बहनों के खाते में 22वीं किस्त के 1552.73 करोड़ की राशि और 26 लाख बहनों के खाते में सिलेंडर रीफिलिंग के लिए 55.95 करोड़ की राशि अंतरित कर दी है।अब अप्रैल में 23वीं किस्त जारी की जाएगी।इसके तहत फिर 1.27 करोड़ लाड़ली बहनों के खाते में 1250 रुपए भेजे जाएंगे।चुंकी आमतौर पर हर माह की 10 तारीख को योजना की राशि जारी होती है हालांकि कई बार त्यौहार और विशेष अवसर पर समय से पहले भी पैसे भेजे जाते है।अब देखना है कि इस बार अगली राशि कब आएगी। लाड़ली बहना योजना में हर माह मिलते है 1250 रु     लाड़ली बहना योजना पिछली शिवराज सिंह चौहान सरकार द्वारा मई 2023 में शुरू की गई थी।लाड़ली बहना योजना का मुख्य उद्देश्य मध्य प्रदेश की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और उनके जीवन को बेहतर बनाना है।     अब इस योजना के तहत 1250 रुपए महीना के हिसाब से महिलाओं को सालाना 15,000 रुपये मिलते हैं।     इस योजना के तहत 21 से 60 वर्ष की विवाहित महिलाओं को 1000 रुपए देने का फैसला किया गया था और फिर इसकी पहली किस्त 10 जून को जारी की गई थी।     इसके बाद रक्षाबंधन 2023 पर राशि को बढ़ाकर 1250 रुपए कर दिया गया था।     लाड़ली बहनों को जून 2023 से मार्च 2025 तक मासिक आर्थिक सहायता राशि की कुल 22 किश्तों का अंतरण किया गया है।     जनवरी 2024 से फरवरी 2025 तक लाड़ली बहनों के खाते में 22 हजार 227.89 करोड़ की राशि जारी की गई है।     इसके अतिरिक्त माह अगस्त 2023 एवं 2024 में (कुल 2 बार) लाभार्थी महिलाओं को 250 रुपये की राशि की विशेष आर्थिक सहायता का भी अंतरण किया गया। इन लाड़ली बहनों को मिलता है योजना का लाभ     इस योजना में 1 जनवरी 1963 के बाद लेकिन 1 जनवरी 2000 तक जन्मी मध्यप्रदेश की स्थानीय निवासी समस्त विवाहित महिलाएं (विधवा, तलाकशुदा एवं परित्यक्ता समेत) वर्ष 2023 में आवेदन के लिए पात्र मानी जाती है।     महिलाएं, खुद या उनके परिवार में कोई टैक्सपेयर नहीं होना चाहिए ।परिवार की सालाना आय 2.5 लाख रुपये होना चाहिए।     अगर संयुक्त परिवार है तो 5 एकड़ से ज्यादा जमीन न हो, परिवार में कोई भी व्यक्ति सरकारी नौकरी न करता हो।घर पर ट्रैक्टर, चारपहिया वाहन न हो।     यदि कोई महिला 60 वर्ष से कम उम्र की है और किसी अन्य सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के तहत पहले से ही प्रति माह 1250 रुपये से कम प्राप्त कर रही है, तो उस महिला को भी 1250 रुपये तक की राशि दी जाएगी।     विवाहित महिलाओं में विधवा, और तलाकशुदा महिलाएं भी शामिल हैं।जिस साल आवेदन किया जाए, उस साल 1 जनवरी को आवेदक की उम्र 21 वर्ष पूरी हो चुकी होनी चाहिए और अधिकतम उम्र 60 वर्ष से कम होनी चाहिए।     जिनके परिवार का कोई सदस्य वर्तमान अथवा भूतपूर्व सांसद, विधायक हो या फिर किसी सरकारी पद का लाभ ले रहा है, उस परिवार की महिलाएं भी लाड़ली बहना योजना के लिए पात्र नहीं होंगी।     यदि महिला के पति के पास सरकारी योजना के तहत लाभ प्राप्त करने के लिए पात्रता नहीं है। ऐसे करें चेक अबतक की अपडेट     लाड़ली बहना की आधिकारिक वेबसाइट https://cmladlibahna.mp.gov.in/ पर जाएं।     वेबसाइट के मुख्य पृष्ठ पर “आवेदन एवं भुगतान की स्थिति” वाले विकल्प पर     क्लिक करें।     दूसरे पृष्ठ पर पहुंचने के बाद, अपना आवेदन नंबर या सदस्य समग्र क्रमांक दर्ज करें।     कैप्चा कोड सबमिट करने के बाद, मोबाइल पर एक ओटीपी भेजा जाएगा।     मोबाइल नंबर पर प्राप्त ओटीपी दर्ज करें और वेरिफाई करें।     ओटीपी वेरिफाई करने के बाद “सर्च” विकल्प पर क्लिक करें और आपका भुगतान स्थिति खुल जाएगी।

मध्य प्रदेश सरकार अंगदान करने वालों के स्वजन को एक और बड़ी सुविधा देने जा रही, मिलेगा इस योजना का लाभ

भोपाल अंगदानियों को अंतिम संस्कार के समय ‘गार्ड आफ आनर’ देने का निर्णय लेने के बाद मध्य प्रदेश सरकार उनके स्वजन को एक और बड़ी सुविधा देने जा रही है। उन्हें आयुष्मान भारत योजना का लाभ दिया जाएगा, जिसमें प्रति परिवार वर्ष में पांच लाख रुपये तक निश्शुल्क उपचार की सुविधा रहेगी। इसमें आय सीमा का कोई बंधन नहीं रहेगा। इसके प्रचार-प्रसार व जागरूकता के लिए 18 लाख रुपये से डाक्यूमेंट्री बनवाई जा रही है। ब्रेन डेड रोगियों के अंगदान के लिए स्वजन को प्रोत्साहित करने को प्रदेश सरकार यह कदम उठाने जा रही है। इसके अलावा स्टेट आर्गन एवं टिश्यू ट्रांसप्लांट आर्गनाइजेशन एक पोर्टल भी तैयार कर रहा है, जिसमें अंगदान करने वाले और जरूरतमंद दोनों पंजीयन करा सकेंगे। पोर्टल में अंगदान के नियम प्रक्रिया की भी जानकारी दी जाएगी। तमिलनाडु अंगदान में सबसे आगे बता दें कि नेशनल आर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट आर्गेनाइजेशन की वर्ष 2023 में अंगदान की रिपोर्ट के अनुसार अंगदान के मामले में तमिलनाडु देश में अव्वल है। जहां वर्ष 2023 में 500 से अधिक अंग प्रत्यारोपण हुए। इसके बाद तेलंगाना, महाराष्ट्र, गुजरात का नंबर है। एमपी में 2016 से अब तक 243 अंगदान हुए मध्य प्रदेश में वर्ष 2016 से अब तक करीब 65 ब्रेन डेड लोगों के 243 अंगदान हुए हैं। इस लिहाज से यहां जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है। प्रदेश के कुछ बड़े निजी और सरकारी अस्पतालों में हार्ट सहित सभी अंगों के प्रत्यारोपण की सुविधा है। दरअसल, ‘आयुष्मान भारत’ केंद्र की योजना है, जिसमें केंद्र और राज्य दोनों मिलकर प्रीमियम देते हैं, पर राज्य आवश्यकता के अनुसार कुछ समूहों को अलग से जोड़ सकते हैं। इनका प्रीमियम राज्य सरकार चुकाती है। ब्रेन डेड के अंगदान जब किसी व्यक्ति का ब्रेन(दिमाग) काम करना बंद कर देता है, पर दिल काम करता रहता है, तो इसे ब्रेन डेड की अवस्था कहा जाता है। ऐसे रोगियों का कुछ घंटे बाद दिल भी काम करना बंद कर देता है। उसके पहले उसके अंग निकाले जाते हैं। फेफड़ा, हार्ट, दो किडनी, लिवर, पैंक्रियाज, कार्निया दान की जा सकती है। डाक्यूमेंट्री भी तैयार कराई जा रही     अंगदान करने वालों के स्वजन को आयुष्मान भारत योजना का लाभ दिया जाएगा। शीघ्र ही इस संबंध में शासन स्तर पर निर्णय हो जाएगा। लोगों में जागरूकता बढ़ाने के लिए भी कई प्रयास किए जा रहे हैं। डाक्यूमेंट्री तैयार कराई जा रही है। – डॉ. एके श्रीवास्तव, संचालक चिकित्सा शिक्षा मप्र।  

इंदौर में 200 स्कूल 31 मार्च से बंद होंगे, हजारों विद्यार्थी प्रभावित

इंदौर इंदौर में लगभग 200 स्कूल बंद होने वाले हैं। यह स्कूल नए नियमों का पालन नहीं कर पाए। इस कारण 2025-26 के सत्र से इन्हें बंद किया जा रहा है। इससे हजारों छात्र प्रभावित होंगे। छात्रों और अभिभावकों को स्कूल बंद होने की जानकारी नहीं दी गई है। प्रशासन ने इन छात्रों के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं की है। छात्रों को दूसरे स्कूलों में दाखिला लेने में परेशानी हो सकती है। खासकर गरीब परिवारों के बच्चों को दिक्कत आएगी। ये 200 स्कूल 31 मार्च से बंद हो जाएंगे। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि उन्होंने मान्यता के नए नियमों का पालन नहीं किया। राज्य सरकार ने कहा था कि 2025-26 सत्र के लिए मान्यता नवीनीकरण 20 मार्च तक कराना होगा। जिले के 1684 स्कूलों में से केवल 1478 ने ही नवीनीकरण के लिए आवेदन किया। अब उनका निरीक्षण चल रहा है। 1 अप्रैल से बंद हो जाएंगे ये स्कूल जिन 206 स्कूलों ने नवीनीकरण के लिए आवेदन नहीं किया, वे 31 मार्च से बंद हो जाएंगे। इससे हजारों छात्र सीधे तौर पर प्रभावित होंगे। ज्यादातर स्कूलों ने अभिभावकों को इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी है। कई छात्र परीक्षा दे चुके हैं और अगली कक्षा में जाने का इंतजार कर रहे हैं। उन्हें यह भी नहीं पता कि उनका स्कूल 1 अप्रैल से बंद हो जाएगा। एडमिशन के लिए बच्चे होंगे परेशान स्कूल बंद होने की वजह से अभिभावकों ने दूसरे स्कूलों में दाखिले की प्रक्रिया शुरू नहीं की है। इससे स्थिति और भी मुश्किल हो गई है। सरकार ने 1 अप्रैल से सरकारी स्कूलों में ‘एडमिशन फेस्टिवल’ शुरू करने की घोषणा की है। लेकिन बंद हो रहे स्कूलों के छात्रों को सरकारी स्कूलों में दाखिला दिलाने के लिए कोई खास इंतजाम नहीं किए गए हैं। गरीब बच्चों के लिए खासी परेशानी अधिकारियों का कहना है कि छात्र अपनी पसंद के किसी भी स्कूल में दाखिला ले सकते हैं। लेकिन गरीब परिवारों के छात्रों के लिए यह आसान नहीं होगा। कई स्कूल जो बंद होने वाले हैं, वे पिछड़े इलाकों में हैं। वहां प्राइवेट स्कूल कम हैं या छात्रों के घरों से बहुत दूर हैं। प्राइवेट स्कूलों में सीटें भी कम हैं। इसलिए सभी छात्रों को दाखिला मिलना मुश्किल है। ऐसे में सरकारी स्कूल ही एकमात्र विकल्प हैं। अधिकारी का कहना जिला परियोजना समन्वयक संजय कुमार मिश्रा ने कहा कि प्रभावित छात्रों को सरकारी स्कूलों में दाखिला दिलाने के लिए 25 अप्रैल के बाद एक प्रक्रिया शुरू की जाएगी। जिन स्कूलों को मान्यता नहीं मिली है, उन्हें भी कहा गया है कि वे अभिभावकों को दूसरे स्कूल चुनने के लिए कहें। प्रशासन ने अधिकारियों को 25 मार्च तक 100% नामांकन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। नए छात्रों को मुफ्त पाठ्यपुस्तकें मिलेंगी और सीनियर छात्र उनका स्वागत करेंगे।  

IMF के अनुसार पिछले दशक में भारत की GDP दोगुनी हुई, 2025 में अर्थव्यवस्था $4.3 ट्रिलियन होगी, जापान और जर्मनी से आगे निकल जाएगी.

नई दिल्ली भारत की अर्थव्यवस्था बीते 10 वर्षों में तेजी से बढ़ी है और इसकी जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) में दोगुनी हो गई है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के ताजा आंकड़ों के अनुसार भारत की जीडीपी 2015 में 2.1 ट्रिलियन डॉलर थी, जो 2025 में बढ़कर 4.3 ट्रिलियन डॉलर होने का अनुमान है। नीतिगत सुधार और स्थिर आर्थिक विकास से सम्भव हुई तेज आर्थिक वृद्धि तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के चलते भारत 2025 में जापान और 2027 में जर्मनी को पीछे छोड़ देगा। इससे भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। IMF ने कहा कि भारत की तेज आर्थिक वृद्धि का मुख्य कारण मजबूत नीतिगत सुधार और स्थिर आर्थिक विकास है। बीजेपी नेता अमित मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि साहसिक आर्थिक नीतियों, संरचनात्मक सुधारों और व्यापार करने में आसानी पर फोकस के कारण भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बन गया है। उन्होंने यह भी कहा कि आजादी के बाद किसी भी सरकार को यह सफलता हासिल नहीं हुई थी। 2025 तक जर्मनी, 2027 तक जापान को छोड़ देगी पीछे बीजेपी नेता अमित मालवीय द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर की गई पोस्ट में कहा गया कि विकास की यह गति भारत को एक वैश्विक आर्थिक महाशक्ति के रूप में स्थापित करती है, जो 2025 तक जापान और 2027 तक जर्मनी को पीछे छोड़ देगी. मालवीय ने आगे कहा कि यह असाधारण उपलब्धि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और उनकी सरकार के अथक प्रयासों का प्रमाण है. सक्रिय आर्थिक नीतियों, साहसिक संरचनात्मक सुधारों और व्यापार करने में आसानी पर निरंतर फोकस के माध्यम से मोदी सरकार ने भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना दिया है. शानदार वृद्धि के पीछे कई अन्य कारक मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया और उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजनाओं ने निवेशकों का भरोसा मजबूत किया है। मजबूत स्टार्टअप तंत्र और आईटी क्षेत्र की निरंतर प्रगति ने भी आर्थिक विकास को गति दी है। 10 साल में कोई और देश भी आसपास नहीं देश 2015 में जीडीपी 2025 में जीडीपी वृद्धि दर जर्मनी 3.4 4.9 44% जापान 4.4 4.4 0% यूके 2.9 3.7 28% फ्रांस 2.4 3.3 38% इटली 1.8 2.5 39% कनाडा 1.6 2.3 44% ब्राजील 1.8 2.3 28% रूस 1.4 2.2 57% द. कोरिया 1.5 1.9 27% ऑस्ट्रेलिया 1.2 1.9 58% स्पेन 1.2 1.8 50%   महत्वपूर्ण सुधारों को अपनाने में करता है मदद   अमित मालवीय ने साथ ही कहा कि यह एक ऐसी उपलब्धि जो आजादी के बाद से किसी भी पिछली सरकार को हासिल नहीं हुई थी. इस महीने की शुरुआत में, भारत की विवेकपूर्ण नीतियों की सराहना करते हुए आईएमएफ के कार्यकारी बोर्ड ने कहा है कि देश का मजबूत आर्थिक प्रदर्शन 2047 तक विकसित अर्थव्यवस्था बनने के लिए महत्वपूर्ण सुधारों को अपनाने में मदद कर सकता है.आईएमएफ के कार्यकारी बोर्ड ने कहा कि संरचनात्मक सुधार देश में उच्च-गुणवत्ता की नौकरियां पैदा करने और निवेश के लिए काफी जरूरी हैं. इस महीने की शुरुआत में IMF के कार्यकारी बोर्ड ने भी भारत की आर्थिक नीतियों की तारीफ की। बोर्ड ने कहा कि भारत का मजबूत प्रदर्शन उसे 2047 तक विकसित अर्थव्यवस्था बनने में मदद कर सकता है। IMF ने यह भी सुझाव दिया कि भारत को लेबर मार्केट में सुधार करने और महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए, जिससे उच्च गुणवत्ता वाली नौकरियों का सृजन हो सके।  

मुस्‍कान के बाद अब साहिल ने भी जेल प्रशासन से सरकारी वकील की मांग की

 मेरठ मेरठ में क्रूरता से सौरभ राजपूत की हत्‍या करने वाली उसकी पत्‍नी मुस्‍कान और उसका प्रेमी साहिल शुक्‍ला जेल में हैं। मुस्‍कान के बाद अब साहिल ने भी जेल प्रशासन से सरकारी वकील की मांग की है। इस सनसनीखेज हत्‍याकांड के सामने आने के दोनों के परिवारों ने उनसे पल्‍ला झाड़ लिया है। मुस्‍कान के पिता प्रमोद रस्‍तोगी ने तो यहां तक कहा है कि वह अपनी बेटी से मिलने कभी नहीं जाएंगे। उसके लिए कभी वकील नहीं करेंगे। इतना ही नहीं अपने दामाद को इंसाफ दिलाने के लिए कोर्ट में बेटी के खिलाफ गवाही भी देंगे। अपने माता-पिता के गुस्‍से से वाकिफ मुस्‍कान रस्‍तोगी ने जेल अधीक्षक से मिलकर सरकारी वकील दिलाने की मांग की थी। अब साहिल ने भी ऐसा ही किया है क्‍योंकि उसे भी लग गया है कि परिवार से उसकी मदद के लिए कोई आगे नहीं आएगा। सौरभ राजपूत हत्‍याकांड के बाद मुस्‍कान के माता-पिता ने खुलकर अपनी बेटी के खिलाफ बयान दिए थे। उनका दावा है कि मुस्‍कान ने 18 मार्च को जब उन्‍हें अपने गुनाहों की जानकारी दी तो वे ही उसे लेकर थाने गए और पुलिस के हवाले कर दिया। मुस्‍कान के माता-पिता उसके लिए फांसी की मांग कर रहे हैं। वे मुस्‍कान-साहिल के हाथों बेरहमी से कत्‍ल किए गए अपने दामाद सौरभ राजपूत को अपने बेटे की तरह बता रहे हैं। उधर, साहिल के पिता नीरज शुक्ला का भी ऑडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है। नीरज शुक्ला भी अपने बेटे साहिल शुक्ला से पल्ला झाड़ते दिख रहे हैं। मुस्‍कान या साहिल से जेल में अब तक कोई मिलने भी नहीं आया है। जेल अधीक्षक वीरेश राज शर्मा ने मुस्‍कान के लिए सरकारी वकील की व्‍यवस्‍था कराने की बात पहले ही बताई थी। अब साहिल की मांग सामने आने के बाद माना जा रहा है कि जेल प्रशासन दोनों प्रार्थना पत्र जल्‍द ही कोर्ट को भेजेगा। जेल अधिकारियों के अनुसार यदि कोई बंदी सरकारी वकील की मांग करता है तो यह जेल प्रशासन का कर्तव्‍य है कि वह न्‍यायालय के माध्‍यम से उसे सरकारी वकील उपलब्‍ध कराए। जाहिर है मुस्‍कान-साहिल की मांग पर उन्‍हें भी जल्‍द ही सरकारी वकील मुहैया करा दिया जाएगा। एक गलती से खुला सौरभ मर्डर का ड्रम वाला राज मेरठ के खौफनाक सौरभ हत्याकांड केस में लगातार नए खुलासे हो रहे हैं। इस बीच एक जानकारी यह भी सामने आई है कि मुस्कान और साहिल ने उस ड्रम को हिमाचल से लौटने के बाद फेंकने का प्लान बनाया था, जिसमें उन्होंने शव के 15 टुकड़ों को सीमेंट के साथ मिलाकर भरा था। लेकिन यहीं पर उनसे चूक हो गई। दरअसल जिस नीले ड्रम में सीमेंट के साथ मिलाकर वे सौरभ के शव के टुकड़ों को रख गए थे, वह बहुत भारी हो गया था। मुस्कान और साहिल को इस चीज का शव को छिपाते वक्त अंदाजा नहीं था, लेकिन पूरा ड्रम ही जब सीमेंट से भर गया और उसमें शव के टुकड़े भी थे तो उसका वजन बहुत ज्यादा बढ़ गया। पुलिस की जांच के अनुसार मुस्कान और साहिल ने 3 मार्च की रात को सौरभ को मार डाला था। फिर उसके शव के 15 टुकड़े कर डाले। इन टुकड़ों को गीले सीमेंट में मिला गया और उसे ड्रम में भर दिया गया। मुस्कान और साहिल इसके बाद दो सप्ताह की हिमाचल ट्रिप पर निकल गए। उनका प्लान था कि लौटने के बाद ड्रम को कहीं फेंक देंगे। दोनों इसी इरादे के साथ 17 मार्च को छुट्टियां मनाकर वापस लौटे। इसके लिए उन्होंने अगले कुछ मजदूरों को बुलाया और कहा कि वे ड्रम को उठाकर कहीं फेंक आएं। उन मजदूरों ने ऐसा करने की कोशिश भी की, लेकिन वजन बहुत ज्यादा होने के चलते उठा नहीं सके। ऐसा करने के दौरान ड्रम का ढक्कर जरूर एक तरफ से खुलने लगा। इसके चलते अंदर बंद शव के सड़े हुए टुकड़ों से बदबू बाहर आने लगी। इस पर मजदूरों को भी संदेह हुआ और वे वहां से चले गए। अब उस ड्रम को साहिल और मुस्कान के बस का उठाना नहीं था। अंत में मुस्कान अपने मायके चली गई और साहिल अपने कमरे पर निकल गया। मां-बाप के यहां पहुंची मुस्कान ने शुरुआत में सौरभ के मर्डर का जिम्मा उसकी बहन और बहनोई पर डालने की कोशिश की। लेकिन पूरी कहानी में मुस्कान की मां और पिता को झोल नजर आया। उन्होंने उसे खूब झकझोरा तो उसने बता दिया कि साहिल के साथ मिलकर मैंने ही सौरभ को मार डाला है। एक पड़ोसी ने बताया कि साहिल अकसर मुस्कान के यहां आता था। लेकिन उनका यह भी कहना था कि दोनों मिलकर ऐसा कोई कांड करेंगे। इस बात का दूर-दूर तक कोई अंदेशा नहीं था। उन्होंने कहा कि मुस्कान का व्यवहार काफी सही थी। उसके बर्ताव से किसी तरह का कभी संदेह नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि 17 मार्च को मुस्कान को शांत अकेले ही बैठा देखा था। वह कहते हैं कि अब हमें लगता है कि शायद वह सोच रही थी कि कैसे ड्रम को ठिकाने लगाया जाए। मुझे भी किसी ने बताया कि इसके लिए मजदूर बुलाए थे, लेकिन वे ड्रम को उठा ही नहीं पाए। बता दें कि सौरभ और मुस्कान की 2016 में लव मैरिज हुई थी। मुस्कान ने 2019 में एक बेटी पीहू को जन्म दिया था, लेकिन उसके ठीक बाद से ही दोनों के रिश्ते बिगड़ते गए। इसकी वजह साहिल की मुस्कान की जिंदगी में एंट्री थी। फिर यहीं से सौरभ की जिंदगी की मुस्कान छिनती चली गई।

सरकार ने एमएसएमई में निवेश और टर्नओवर की सीमा बढ़ाई, इस कदम से छोटे उद्योगों को मिलेगा बड़ा फायदा

नई दिल्ली  अगर आप कोई छोटा कारोबार शुरू करने जा रहे हैं तो MSME (माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज) से जुड़े नए नियम जरूर जान लें। सरकार ने MSME की परिभाषा बदल दी है। अब निवेश और टर्नओवर के आधार पर तय किया जाएगा कि कौन सा बिजनेस माइक्रो की कैटेगरी में आएगा और कौन सा स्मॉल व मीडियम की कैटेगरी में। ये नए नियम 1 अप्रैल 2025 से लागू होंगे। सरकार ने 1 फरवरी को पेश किए बजट में एमएसएमई के नए नियम के बारे में घोषणा की थी। इन नए नियमों के लागू होने के बाद अब एमएसएमई को नए तरीके से पहचाना जाएगा। इससे छोटे उद्योगों को आगे बढ़ने में मदद मिलेगी। सरकार ने एमएसएमई के लिए निवेश और कारोबार की सीमा बढ़ा दी है। पहले के मुकाबले अब ज्यादा निवेश और कारोबार करने वाले उद्योग भी एमएसएमई में शामिल हो सकेंगे। क्या हुआ बदलाव? अब एमएसएमई को पहचानने के लिए उनके निवेश और कारोबार की सीमा को बढ़ाया गया है। निवेश की सीमा को 2.5 गुना और कारोबार की सीमा को 2 गुना कर दिया गया है। इससे ज्यादा एमएसएमई सरकार की योजनाओं का फायदा उठा पाएंगे।     अगर किसी कंपनी ने 2.5 करोड़ रुपये तक का निवेश किया है तो उसे माइक्रो एंटरप्राइजेज माना जाएगा। पहले यह सीमा 1 करोड़ रुपये थी।     इसी तरह 25 करोड़ रुपये तक के निवेश वाली कंपनियों को स्मॉल एंटरप्राइजेज कहा जाएगा। पहले यह सीमा 10 करोड़ रुपये थी।     अगर किसी एमएसएमई ने 125 करोड़ रुपये तक का निवेश किया है तो उसे मीडियम एंटरप्राइजेज माना जाएगा। पहले यह सीमा 50 करोड़ रुपये थी। टर्नओवर के मामले में नए नियम     अगर किसी माइक्रो एंटरप्राइजेज का टर्नओवर 10 करोड़ रुपये तक है तो उसे माइक्रो एंटरप्राइजेज माना जाएगा। पहले यह सीमा 5 करोड़ रुपये थी।     स्मॉल एंटरप्राइजेज के लिए टर्नओवर की सीमा 50 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 100 करोड़ रुपये कर दी गई है।     मीडियम एंटरप्राइजेज के लिए भी सीमा बढ़ाई गई है। इसे बढ़ाकर 500 करोड़ रुपये कर दिया गया है। पहले यह सीमा 250 करोड़ रुपये थी। क्यों लिया यह फैसला? एक फरवरी को बजट के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था, ‘आजकल 1 करोड़ से ज्यादा एमएसएमई रजिस्टर्ड हैं। ये 7.5 करोड़ लोगों को नौकरी देते हैं और हमारे देश के मैन्युफैक्चरिंग का 36% हिस्सा हैं। ये एमएसएमई अच्छी क्वालिटी के प्रोडक्ट बनाते हैं और हमारे एक्सपोर्ट का 45% हिस्सा इन्हीं का है। इनको और बेहतर बनाने के लिए, टेक्नोलॉजी में आगे बढ़ाने के लिए और आसानी से पैसे मिल सके, इसलिए हमने इनके निवेश और टर्नओवर की सीमा को बढ़ाया है। इससे उन्हें आगे बढ़ने और युवाओं को नौकरी देने का हौसला मिलेगा।’ क्या मिलेगा फायदा? इन बदलावों से एमएसएमई यानी छोटे उद्योगों को बड़ा फायदा होगा। वे अब बिना किसी डर के अपना कारोबार बढ़ा सकेंगे। सरकार का यह कदम एमएसएमई सेक्टर को मजबूत करने और देश की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में मदद करेगा। छोटे कारोबारियों को अब ज्यादा मौके मिलेंगे और वे देश के विकास में और भी ज्यादा योगदान दे पाएंगे।

प्रदेश सरकार गरीब, युवा, महिला और किसान कल्याण के लिए लगातार काम कर रही है: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व में विगत सवा वर्ष में मध्यप्रदेश सरकार ने विरासत को साथ लेकर विकास के नए आयाम स्थापित किये हैं, जिससे उन्हें संतोष है। प्रदेश सरकार गरीब, युवा, महिला और किसान कल्याण के लिए लगातार काम कर रही है। इंदौर की हुकुमचंद मिल के श्रमिकों का कई वर्षों से लंबित भुगतान जहां एक ओर पूरा कर दिया गया है, वहीं दूसरी ओर राज्यों के साथ सौहार्दपूर्ण संबंधों के आधार पर 20 वर्ष पुरानी पार्बती-कालीसिंध-चंबल नदी जोड़ो परियोजना भी मूर्त रूप ले रही है। प्रधानमंत्री आवास योजना में प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में साढ़े आठ लाख आवास और ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग 36 लाख आवास में गृह प्रवेश करवाया जा चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि जड़ों से जुड़े रहकर ही विकास पथ पर आगे बढ़ा जा सकता है। उन्होंने ये विचार रविवार को दिल्ली में एक निजी समाचार चैनल द्वारा आयोजित ‘डायमंड स्टेट्स समिट’ कार्यक्रम में व्यक्त किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि 2000 वर्ष पूर्व सम्राट विक्रमादित्य ने वीरता, न्यायप्रियता और दानशीलता से शासन की व्यस्थाओं का संचालन किया और विदेशी आक्रांताओं से स्वतंत्रता दिलाकर सुशासन स्थापित किया, जो प्रदेश की गौरवशाली विरासत है। विक्रम संवत का प्रवर्तन इसी गौरवशाली परंपरा का हिस्सा है। सम्राट विक्रमादित्य ने अपने राज्य में जनता का कर्ज माफ किया और बिना ब्याज का धन जनता को उपलब्ध कराया। उनके पुरुषार्थ के विभिन्न आयामों का उत्सव मनाने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार आगामी 12 से 14 अप्रैल तक दिल्ली में विक्रमादित्य महानाट्य का आयोजन करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन महाकाल और काल की नगरी है। यहां पृथ्वी 23.6 अंश पर झुकी हुई है जो इसे कालगणना के लिए सर्वोत्तम स्थल बनाती है। उज्जैन को विश्व का मीन टाइम बनाने के उद्देश्य से यहां वैदिक घड़ी की स्थापना की गई है, जो भारतीय ज्ञान की गौरवशाली परंपरा को पुनर्स्थापित करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जीवन के उच्च आदर्शों और नैतिकता को जीवन शैली में सम्मिलित करने के लिए प्रदेश सरकार संकल्पित है। प्रदेश में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा दिया जा रहा है। महर्षि सांदीपनि के आश्रम को तीर्थ के रूप में विकसित कर नई शिक्षा नीति के तहत शिक्षा के महत्व को रेखांकित किया जा रहा है। भगवान श्रीकृष्ण से जोड़कर आदर्श गोकुल ग्राम बनाए जा रहे हैं, जिसके माध्यम से देश के दुग्ध उत्पादन में प्रदेश की हिस्सेदारी को 9% से बढ़ाकर 20% करने का लक्ष्य है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि वर्ष 1956 में गेहूं का समर्थन मूल्य 94 रुपए प्रति क्विंटल और वर्ष 2002-03 में 600 रुपए था, जिसे आज बढ़ाकर 2600 रुपए कर दिया गया है। वर्ष 2002-03 में राज्य का बजट केवल 23 हजार करोड़ का था, जो वर्तमान में बढ़कर 4 लाख 21 हजार करोड़ का हो गया है। पूरे देश में सबसे सस्ती बिजली मध्यप्रदेश में उपलब्ध है, जो दिल्ली मेट्रो को भी प्रदाय की जा रही है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार प्रदेश को सक्षम और सम्पन्न राज्य बनाने के लिए हर संभव कदम उठा रही है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव को ‘डायमंड स्टेट अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया।  

केंद्र सरकार ने सांसदों के वेतन और पेंशन में की बढ़ोतरी, अधिसूचना जारी

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने सांसदों के वेतन में 24 प्रतिशत की वृद्धि को अधिसूचित कर दिया है। यह बढ़ोतरी 1 अप्रैल 2023 से प्रभावी होगी और इसे मूल्य वृद्धि सूचकांक के आधार पर तय किया गया है। संसदीय कार्य मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, न केवल सांसदों के वेतन में वृद्धि की गई है, बल्कि बैठकों में भाग लेने पर मिलने वाले दैनिक भत्ते, पूर्व सांसदों की पेंशन, और अतिरिक्त सेवा वर्षों के लिए दी जाने वाली पेंशन में भी बढ़ोतरी की गई है। नए वेतन और भत्ते इस प्रकार हैं: सांसदों का मासिक वेतन पहले: 1,00,000 रुपए प्रति माह अब: 1,24,000 रुपए प्रति माह दैनिक भत्ता (संसद सत्र के दौरान बैठकों में भाग लेने पर) पहले: 2,000 रुपए प्रति दिन अब: 2,500 रुपए प्रति दिन पूर्व सांसदों की मासिक पेंशन पहले: 25,000 रुपए प्रति माह अब:  31,000 रुपए प्रति माह अतिरिक्त पेंशन (पांच वर्ष की सेवा से अधिक के प्रत्येक वर्ष के लिए) पहले:  2,000 रुपए प्रति माह अब:  2,500 रुपए प्रति माह सरकार ने यह बढ़ोतरी सांसद वेतन, भत्ता और पेंशन अधिनियम के तहत आयकर अधिनियम, 1961 में निर्दिष्ट मूल्य वृद्धि सूचकांक के आधार पर अधिसूचित की है।

प्रदेश में सामुदायिक सहभागिता से 5 हजार से अधिक ग्राम पंचायतों को क्षयरोग मुक्त घोषित किया जा चुका

टीबी मुक्त भारत के लिए मध्यप्रदेश प्रतिबद्ध : उप मुख्यमंत्री शुक्ल उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने निक्षय भारत अभियान में मध्यप्रदेश के उत्कृष्ट प्रदर्शन पर स्वास्थ्यकर्मियों, निक्षय मित्रों की सराहना की  प्रदेश में सामुदायिक सहभागिता से 5 हजार से अधिक ग्राम पंचायतों को क्षयरोग मुक्त घोषित किया जा चुका उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने 5 हजार से अधिक ग्राम पंचायतें क्षयरोग मुक्त घोषित भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने निक्षय भारत अभियान के उत्कृष्ट क्रियान्वयन के लिए स्वास्थ्यकर्मियों, निक्षय मित्रों, सामाजिक कार्यकर्ताओं की सराहना की है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि मध्यप्रदेश 2025 तक टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि यह लक्ष्य केवल शासकीय प्रयासों से ही संभव नहीं है, बल्कि समाज के हर वर्ग की सक्रिय भागीदारी से ही इसे साकार किया जा सकता है। उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की है कि इस अभियान में सहयोग दें और टीबी मुक्त मध्यप्रदेश बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने विश्व टीबी दिवस पर स्वास्थ्यकर्मियों, निक्षय मित्रों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों की प्रतिबद्धता और समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि सबकी मेहनत और सेवा भाव से ही मध्यप्रदेश क्षयरोग उन्मूलन की दिशा में इतनी तेज गति से आगे बढ़ा है। निक्षय मित्रों ने अपने स्तर पर आर्थिक और पोषण सहायता प्रदान कर मरीजों को नया जीवन दिया है, जो एक अनुकरणीय उदाहरण है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि समाज के हर वर्ग की भागीदारी से हम टीबी मुक्त भारत का सपना साकार करेंगे। मध्यप्रदेश में 100 दिवसीय विशेष निक्षय शिविर अभियान के तहत 7 दिसंबर 2024 से 23 जिलों में गहन टीबी खोज और उपचार अभियान चलाया गया। इस अभियान का उद्देश्य उच्च टीबी बोझ वाले जिलों में टीबी रोगियों की शीघ्र पहचान, मृत्यु दर में कमी और नए मामलों को रोकना है। इस अभियान के तहत 78 लाख से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग की गई, जिसमें 21 हजार 430 नए टीबी मरीज चिन्हित (नोटिफाई) किए गए और उनका तुरंत उपचार शुरू कराया गया। डीबीटी के माध्यम से आर्थिक सहायता भी प्रदान की गई। इस दौरान 19 हजार से अधिक निक्षय मित्रों ने 25 हजार से अधिक टीबी मरीजों को पोषण सहायता प्रदान की और 4 लाख से अधिक नागरिकों ने टीबी मुक्त भारत के संकल्प की शपथ ली। प्रदेश में सामुदायिक सहभागिता के अंतर्गत 5 हजार से अधिक ग्राम पंचायतों को क्षयरोग मुक्त घोषित किया जा चुका है। मध्यप्रदेश ने क्षयरोग (टीबी) उन्मूलन के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण लक्ष्यों को प्राप्त किया है। वर्ष 2020 में संभावित क्षयरोगी दर 532 प्रति लाख थी, जो 2024 में बढ़कर 3031 प्रति लाख हो गई, जो रोगियों की शीघ्र पहचान और बेहतर निगरानी का प्रमाण है। वर्ष 2024 में 1 लाख 90 हजार क्षय रोगियों को खोजने के लक्ष्य के विरुद्ध 1 लाख 81 हजार 85 (95%) रोगियों की पहचान की गई। प्रदेश में टीबी उपचार की सफलता दर 87% है, जो राष्ट्रीय औसत से बेहतर प्रदर्शन को दर्शाती है। गत 1 नवंबर 2024 से सभी अधिसूचित टीबी मरीजों को उपचार के दौरान एक हजार रूपये प्रतिमाह की आर्थिक सहायता दी जा रही है, जो पहले 500 रूपये प्रतिमाह थी। इसके अलावा, अधिसूचित जनजातीय क्षेत्रों में सभी खोजे गए टीबी रोगियों को 750 रूपये की एकमुश्त राशि भी प्रदान की जा रही है। प्रदेश की सभी जेलों में भी समय-समय पर आईसीएमआर की हैंड-हेल्ड एक्स-रे मशीनों के माध्यम से टीबी स्क्रीनिंग अभियान चलाया जा रहा है। बलगम के नमूने लेकर उन्हें सीबीनेट और टूनेट मशीनों द्वारा जांच की जाती है, जिससे जेलों में क्षयरोग के मामलों की शीघ्र पहचान हो रही है।  

पंत और केएल राहुल होंगे आमने-सामने, दिल्ली और लखनऊ में होगा रोमांचक मुकाबला

विशाखापत्‍तनम  नए कप्तान और नई टीम के साथ दिल्ली कैपिटल्स और लखनऊ सुपरजायंट्स की टीम सोमवार को जब आमने-सामने होगी तो उनका लक्ष्य आईपीएल के नए सत्र का आगाज जीत से करना होगा। यह लगातार दूसरा वर्ष होगा जबकि दिल्ली की टीम अपने दो घरेलू मैच यहां खेलेगी। अपने आईपीएल करियर में अभी तक केवल दिल्ली की टीम से खेलने वाले ऋषभ पंत इस बार लखनऊ की टीम की कमान संभाल रहे हैं जिसने उन्हें नीलामी में रिकॉर्ड 27 करोड़ रुपये में खरीदा था। अपनी महंगी कीमत के कारण पंत का चर्चा में रहना लाजमी है, लेकिन यह विकेटकीपर बल्लेबाज इन सब बातों को दरकिनार कर अच्छा प्रदर्शन करके सीमित ओवरों की राष्ट्रीय टीम में अपना स्थान पक्का करना चाहेगा। पंत-राहुल पर नजरें पंत चैंपियंस ट्रॉफी के लिए भारतीय टीम में शामिल थे, लेकिन उन्हें एक भी मैच में खेलने का मौका नहीं मिला था। दूसरी तरफ के एल राहुल हैं जो पिछले दो सत्र में लखनऊ की कमान संभालने के बाद इस बार एक खिलाड़ी के रूप में दिल्ली कैपिटल्स की तरफ से खेलेंगे। दिल्ली की टीम ने ऑलराउंडर अक्षर पटेल को कप्तान नियुक्त किया है, लेकिन बल्लेबाजी में राहुल की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। दिल्ली की टीम में दक्षिण अफ्रीका के अनुभवी बल्लेबाज फाफ डु प्लेसिस भी हैं जो पिछले साल तक आरसीबी की कमान संभाल रहे थे। दिल्ली ने उन्हें उपकप्तान बनाया है। कागजों पर मजबूत दिल्‍ली कागजों पर दिल्ली की टीम काफी मजबूत नजर आती है क्योंकि उसके पास विदेशी और भारतीय खिलाड़‍ियों का अच्छा संयोजन है। दूसरी तरफ लखनऊ के पास केवल छह विदेशी खिलाड़ी हैं। दिल्ली को बल्लेबाजी में जहां डु प्‍लेसिस के अनुभव का फायदा मिलेगा वहीं गेंदबाजी में उसके पास ऑस्ट्रेलिया के अनुभवी तेज गेंदबाज मिचेल स्टार्क हैं। करुण नायर की मौजूदगी में दिल्ली का मध्यक्रम मजबूत नजर आता है जिसमें राहुल, ट्रिस्टन स्टब्स, समीर रिजवी और आशुतोष शर्मा भी शामिल हैं। दिल्ली की गेंदबाजी इकाई भी मजबूत नजर आ रही है, जिसके स्पिन विभाग में भारत के दो अनुभवी स्पिनर अक्षर और कुलदीप यादव शामिल हैं। उसके तेज गेंदबाजी विभाग में स्टार्क के अलावा टी नटराजन, मोहित शर्मा, मुकेश कुमार और दुशमंत चमीरा शामिल हैं। लखनऊ इन पर रहेगा निर्भर लखनऊ को उम्मीद होगी कि उनके भारतीय खिलाड़ी विदेशी खिलाड़‍ियों के साथ अच्छी तरह से सामंजस्य बिठाएंगे। ऑस्ट्रेलियाई ऑलराउंडर मिचेल मार्श केवल एक विशेषज्ञ बल्लेबाज के रूप में उपलब्ध हैं। ऐसे में लखनऊ को डेविड मिलर और एडेन मार्करम की दक्षिण अफ्रीकी जोड़ी से अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद रहेगी। निकोलस पूरन के रूप में लखनऊ के पास विस्फोटक बल्लेबाज है, जो अपने दम पर मैच का पासा पलट सकता है। उनके अलावा लखनऊ की टीम में आयुष बडोनी, अब्दुल समद और शाहबाज अहमद के रूप में अच्छे भारतीय बल्लेबाज हैं।  बल्लेबाजों या गेंदबाजों में से किसका रहेगा जलवा? पढ़ें पिच रिपोर्ट नए कप्तान और नई टीम के साथ दिल्ली कैपिटल्स और लखनऊ सुपर जायंट्स की टीम सोमवार को जब यहां आमने-सामने होगी तो उनका लक्ष्य इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के नए सत्र का आगाज जीत से करना होगा। यह लगातार दूसरा वर्ष होगा जबकि दिल्ली की टीम अपने दो घरेलू मैच यहां खेलेगी। अपने आईपीएल करियर में अभी तक केवल दिल्ली की टीम से खेलने वाले ऋषभ पंत इस बार लखनऊ की टीम की कमान संभाल रहे हैं जिसने उन्हें आईपीएल की नीलामी में रिकॉर्ड 27 करोड़ रुपए में खरीदा था। अपनी महंगी कीमत के कारण पंत का चर्चा में रहना लाजमी है लेकिन यह विकेटकीपर बल्लेबाज इन सब बातों को दरकिनार कर अच्छा प्रदर्शन करके सीमित ओवरों की राष्ट्रीय टीम में अपना स्थान पक्का करना चाहेगा। पंत चैंपियंस ट्रॉफी के लिए भारतीय टीम में शामिल थे लेकिन उन्हें एक भी मैच में खेलने का मौका नहीं मिला था। दूसरी तरफ केएल राहुल हैं जो पिछले तीन सत्र में लखनऊ की कमान संभालने के बाद इस बार एक खिलाड़ी के रूप में दिल्ली कैपिटल्स की तरफ से खेलेंगे। दिल्ली की टीम ने ऑलराउंडर अक्षर पटेल को कप्तान नियुक्त किया है लेकिन बल्लेबाजी में राहुल की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। दोनों टीमों के बीच एक रोमांचक मुकाबला होने की पूरी उम्मीद है। तो आइये ऐसे में आपको बताते हैं कि विशाखापत्तनम की पिच बल्लेबाज या गेंदबाजों में किसके लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। दिल्ली कैपिटल्स बनाम लखनऊ सुपर जायंट्स की पिच रिपोर्ट विशाखापत्तनम के एसीए वीडीसीए क्रिकेट स्टेडियम की पिच बल्लेबाजों और गेंदबाजों दोनों के लिए अच्छी साबित होती है। यहां पर बल्ले और गेंद के बीच अच्छा बैटल देखने को मिलता है। यहां पर पिछले सीजन हुए दोनों मुकाबले हाई स्कोरिंग रहे थे। काली मिट्टी की पिच स्पिनर्स के लिए मददगार रहती है। शुरुआत में तेज गेंदबाजों को भी फायदा हो सकता है। वहीं बल्लेबाज भी यहां खुलकर खेलते हैं और चौके-छक्के की बारिश करते हैं। वाइजेग की पिच बल्लेबाजों और गेंदबाजों दोनों के लिए अनुकूल रहती है। दिल्ली कैपिटल्स ने इस मैदान पर अब तक 7 मैच खेले हैं, जिसमें से 3 दिल्ली ने जीते हैं जबकि 4 में उनको हार का सामना करना पड़ा है। आईपीएल के विशाखापत्तनम में हुए हैं 15 मैच विशाखापत्तनम में अब तक आईपीएल के 15 मैच हुए हैं, जिनमें पहले बल्लेबाजी करने वाली टीमों ने 8 मैच जीते हैं और दूसरी बल्लेबाजी करने वाली टीमों ने 7 मैच जीते हैं। कोई भी मैच बिना नतीजे या टाई के खत्म नहीं हुआ है। इस मैदान पर पहली पारी का औसत स्कोर 167 रन है। स्टेडियम में सबसे बड़ा टीम स्कोर 272 (केकेआर ने पिछले सीजन दिल्ली के खिलाफ बनाया था) रन रहा है, जबकि सबसे बड़ा सफल लक्ष्य 173 रन रहा है। ये आंकड़े बताते हैं कि इस मैदान पर हाई स्कोरिंग मैच हो सकते हैं। यहां पर बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों टीमों के पास हावी होने का मौका होता है। दिल्‍ली और लखनऊ की संभावित प्‍लेइंग 11 दिल्‍ली कैपिटल्‍स – जैक फ्रेजर मैकगर्क, फाफ डु प्‍लेसिस, अभिषेक पोरेल, केएल राहुल, ट्रिस्‍टन स्‍टब्‍स, अक्षर पटेल (कप्‍तान), आशुतोष शर्मा, समीर र‍िजवी, कुलदीप यादव, मिचेल स्‍टार्क और टी नटराजन। लखनऊ सुपरजायंट्स – युवराज चौधरी, मिचेल मार्श, ऋषभ पंत (कप्‍तान), निकोलस पूरन, आयुष बडोनी, डेविड मिलर, अब्‍दुल समद, शाहबाज अहमद, राजवर्धन हंगरगेकर, रवि बिश्‍नोई और शमार जोसेफ।

अब सांसदों को हर महीने 1,24,000 रुपये मिलेंगे, जो पहले एक लाख रुपये थी

 नई दिल्ली केंद्र सरकार ने सांसदों के वेत्तन और भत्ते में बढ़ी बढ़ोत्तरी की है। इसके साथ ही पूर्व सांसदों के पेंशन में भी इजाफा किया गया है। बड़ी बात यह है कि यह बढ़ोत्तरी 1 अप्रैल, 2023 से ही प्रभावी होगी। अब सांसदों को हर महीने 1,24,000 रुपये मिलेंगे, जो पहले एक लाख रुपये थी। इसके अलावा, सांसदों का दैनिक भत्ता भी बढ़ाकर अब 2000 से ढाई हजार कर दिया गया है। पूर्व सांसदों का पेंशन 25 हजार से बढ़ाकर अब 31 हजार रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है। यह बढ़ोत्तरी संसद सदस्यों के वेतन, भत्ते और पेंशन अधिनियम, 1954 द्वारा प्रदत्त शक्तियों के तहत किया गया है। यह आयकर अधिनियम, 1961 में उल्लिखित लागत मुद्रास्फीति सूचकांक पर आधारित है।सरकार ने वेतन बढ़ोत्तरी से जुड़ी अधिसूचना जारी कर दी है।संसदीय कार्य मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार संसद सदस्यों के वेतन में लागत मुद्रास्फीति सूचकांक के आधार पर 24 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है, जो एक अप्रैल, 2023 से प्रभावी होगी। हर पांच साल पर होनी है वेतन की समीक्षा सरकारी अधिसूचना के मुताबिक, वैसे पूर्व सांसदों के अतिरिक्त पेंशन में भी बढ़ोत्तरी की गई है, जो एक से ज्यादा कई कार्यकाल तक सांसद रहे हैं। इसके तहत पूर्व सांसदों को सेवा के हरेक वर्ष के लिए अतिरिक्त पेंशन के तौर पर अब 2500 रुपये मासिक पेंशन मिलेंगे, जो पहले 2,000 प्रति माह थी। वेतन-भत्ते में यह बढ़ोत्तरी 2018 के बाद से लागू किए गए उस नियम के तहत किया गया है, जिसमें सांसदों के वेतन और भत्ते की हर पांच साल पर समीक्षा करने का प्रावधान है। यह समीक्षा महंगाई दर पर आधारित होती है। बता दें कि यह कदम कर्नाटक सरकार द्वारा मुख्यमंत्री, मंत्रियों और विधायकों के वेतन में 100% वृद्धि को मंजूरी दिए जाने के कुछ दिनों बाद उठाया गया है। हालांकि, कर्नाटक विधानसभा में विधायकों के वेतन भत्ते में बढ़ोतेतरी पर तीखी बहस हुई थी।

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