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इजराइल के ताजा हवाई हमलों में कम से कम 200 लोगों की हुई मौत, फिलिस्तीनी अधिकारियों ने दी जानकारी

 गाजा जराइल ने मंगलवार सुबह गाजा पट्टी क्षेत्र में हमास के ठिकानों को निशाना बनाते हुए सिलसिलेवार हवाई हमले किए। फिलिस्तीनी अधिकारियों ने हमले में कम से कम 200 से अधिक लोगों की मौत की जानकारी दी है। कहा जा रहा है जनवरी में युद्धविराम के प्रभावी होने के बाद से यह गाजा में अब तक का सबसे भीषणतम हमला है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि युद्धविराम को बढ़ाने के लिए वार्ता में कोई खास प्रगति नहीं होने के कारण उन्होंने हमले का आदेश दिया। नेतन्याहू के कार्यालय ने कहा, ‘‘इजराइल अब सैन्य ताकत बढ़ाकर हमास के खिलाफ कार्रवाई करेगा।’’ फिर से संघर्ष जारी होने की आशंका रातभर हुए हमलों ने शांति का दौर खत्म कर दिया है और 17 माह से जारी संघर्ष के फिर से शुरू होने की आशंका को बढ़ा दिया है जिसमें 48,000 से ज्यादा फलस्तीनी मारे गए थे और गाजा तबाह हो गया। हमास द्वारा बंधक बनाकर रखे गए लगभग 24 इजराइली नागरिकों के भविष्य के बारे में इजराइल के हमलों के कारण संशय की स्थिति पैदा हो गई है जिनके बारे में माना जाता है कि वे अब भी जीवित हैं। हमास ने एक बयान में इजराइल की ओर से किए गए हमलों की निंदा की और कहा कि इन हमलों ने बंधकों के भविष्य को खतरे में डाल दिया है। ‘बेगुनाह लोगों के खिलाफ…’ हमास के एक अधिकारी ताहिर नुनू ने इजरायली हमलों की आलोचना की है. उन्होंने कहा, “अंतर्राष्ट्रीय समुदाय का मोरल टेस्ट हो रहा है, या तो वह कब्जे वाली सेना द्वारा किए गए अपराधों की वापसी की अनुमति दे या फिर गाजा में बेगुनाह लोगों के खिलाफ आक्रामकता और जंग को खथ्म करने की प्रतिबद्धता को लागू करे.” गाजा में तमाम जगहों पर विस्फोटों की आवाजें सुनी जा सकती थीं और मिडिल गाजा के अल-अक्सा हॉस्पिटल में एम्बुलेंस पहुंच रही थीं.” युद्ध विराम को लेकर क्या हुआ था? जंग को रोकने के लिए युद्ध विराम पर सहमति बनने के दो महीने बाद ताजे हमले  हुए हैं. छह हफ्ते में हमास ने करीब 2,000 फिलिस्तीनी कैदियों के बदले में करीब तीन दर्जन बंधकों को रिहा किया. लेकिन दो हफ्ते पहले युद्ध विराम का पहला चरण खत्म होने के बाद से, दोनों पक्ष करीब 60 बचे बंधकों को रिहा करने और युद्ध को पूरी तरह से खत्म करने के मकसद से दूसरे चरण के साथ आगे बढ़ने के तरीके पर सहमत नहीं हो पाए हैं. नेतन्याहू ने बार-बार जंग को फिर से शुरू करने की धमकी दी है और इस महीने की शुरुआत में हमास पर दबाव बनाने के लिए घेरे हुए क्षेत्र में सभी खाद्य और सहायता डिलीवरी को रोक दिया.   हमास ने कही ये बात वहीं, एक इजराइली अधिकारी ने नाम उजागर न करने की शर्त पर बताया कि इजराइल हमास के उग्रवादियों, इसके नेताओं और बुनियादी ढांचों पर हमला कर रहा है तथा हवाई हमलों से परे अभियान को और बढ़ाने की योजना बना रहा है। इस बीच हमास ने चेतावनी दी है कि मंगलवार की सुबह इजरायल के नए हवाई हमलों ने उनके बीच हुए सीजफायर को तोड़ दिया है। उसने साथ ही धमकी भरे अंदाज में यह भी कहा कि इजरायल की इस हरकत ने बंधकों के भाग्य को खतरे में डाल दिया है। वहीं, इजरायल ने कहा कि उसने सीजफायर को बढ़ाने के लिए चल रही बातचीत में कोई प्रगति न देखते हुए गाजा पट्टी में हवाई हमले किए हैं।

गर्मी में कलेक्टर, नगरीय निकायों तथा पंचायतों को सार्वजनिक स्थानों पर प्याऊ लगाने के दिए निर्देश: मुख्यमंत्री

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गर्मी के मौसम को देखते हुए जिलों के कलेक्टर, नगरीय निकायों तथा पंचायतों को सार्वजनिक स्थानों पर प्याऊ लगाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि उपयुक्त स्थलों पर छाया की व्यवस्था भी की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस संबंध में जन प्रतिनिधियों से भी अपील की है। उन्होंने कहा कि जन सामान्य के लिए ग्रीष्म ऋतु में प्याऊ लगवाने की परंपरा प्राचीन काल से रही है। जल संरक्षण के साथ-साथ जल की सहज उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए यह व्यवस्था आवश्यक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मीडिया को दिए संदेश के माध्यम से प्रदेशवासियों से जल गंगा अभियान के अंतर्गत बूंद- बूंद जल बचाने के लिए संचालित होने वाली गतिविधियों में सहभागिता करने का भी आव्हान किया।  

छत्तीसगढ़ जून से प्रीपेड मीटर की सुविधा, मोबाइल की तरह हर माह होगा रिचार्ज

रायपुर छत्तीसगढ़ के 11 लाख उपभाेक्ताओं काे बिजली के लिए जून माह से रिचार्ज कराना होगा. घर में लगे प्रीपेड स्मार्ट मीटर काे रिचार्ज कराने पर ही बिजली मिलेगी. जिनके घरों में स्मार्ट मीटर नहीं लगा है उनके यहां भी इस साल के अंत तक लग जाएगा. केंद्र सरकार के रिवेम्पड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम के तहत ये मीटर लगाए जा रहे हैं. स्मार्ट मीटर लगाने के मामले में छत्तीसगढ़ देश में तीसरे नंबर पर पहुंच गया है. केंद्र की इस योजना के तहत कृषि उपभोक्ताओं को छोड़कर सभी उपभोक्ताओं के यहां प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाए जाएंगे. जानकारी के मुताबिक, इस मीटर की मैनुअल रीडिंग की आवश्यकता नहीं हाेगी. कर्मचारी स्टेशन से ही प्रत्येक घर की बिजली की खपत की गणना कर सकते हैं. राजधानी रायपुर स्मार्ट मीटर लगाने के मामले में रायपुर दो लाख 59 हजार मीटर के साथ पहले नंबर पर है. वहीं बिलासपुर में एक लाख नौ हजार स्मार्ट मीटर लग चुके हैं. इसी तरह धमतरी में 98 हजार, बलौदाबाजार में 78 हजार, महासमुंद में 82 हजार, राजनांदगांव में 67 हजार, जांजगीर चांपा में 29 हजार और कोरबा में 42 हजार स्मार्ट मीटर समेत पूरे 11 लाख प्रीपेड मीटर लगाए जा चुके हैं. रिचार्ज खत्म होते ही कट जाएगी बिजली छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी के मुताबिक प्रदेश में वर्तमान में 59 लाख बिजली उपभोक्ता हैं. इनमें से लगभग 5 लाख 50 हजार उपभोक्ता कृषि कनेक्शन वाले हैं. इन कृषि उपभोक्ताओं को केंद्र सरकार की योजना से बाहर रखा गया है. उपभोक्ता को एडवांस में रिचार्ज कराना होगा. इस मीटर के सक्रिय हो जाने के बाद उपभोक्ता रिचार्ज खत्म होते ही बिजली अपने आप कट जाएगी. रिचार्ज खत्म होने से पहले ही उपभोक्ताओं के फोन पर बैलेंस रिचार्ज का मैसेज आ जाएगा.

मुख्यमंत्री ने पेयजल प्रबंधों की जानकारी लेकर दिए निर्देश

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि ग्रीष्मकाल के दृष्टिगत प्रदेश के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में नागरिकों के लिए पर्याप्त पेयजल प्रबंध सुनिश्चित किए जाएं। सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से सार्वजनिक प्याऊ स्थापित कर राहगीरों के लिए भी पीने के पानी का प्रबंध किया जाए। शहरों में प्रत्येक मोहल्ले में पेयजल की उपलब्धता, पानी की टंकियों की स्वच्छता और व्यवस्थित पेयजल वितरण जैसे कार्य सुचारू रूप से सम्पन्न हों। ग्रामों में नल-जल योजनाओं के क्रियान्वयन से ग्रामीण आबादी को लाभान्वित किया जाए। हर घर में टोंटी से जल पहुंचाने के कार्य पूर्ण किए जाएं। जिन क्षेत्रों में पेयजल की समस्या है, वहां लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, स्थानीय निकाय मिलकर नागरिकों के लिए समाधान की कार्यवाही करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) में हुई एक बैठक में पेयजल प्रबंधों की समीक्षा कर रहे थे। बैठक में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी श्रीमती संपतिया उइके, मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय डॉ. राजेश राजौरा एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के जनजातीय बहुल क्षेत्रों में धरती आबा उत्कर्ष अभियान में अन्य विभागों के सहयोग से पेयजल प्रबंध के कार्य भी सम्पन्न किए जाएं। अन्य ग्रामों में एकल ग्राम नल-जल योजना और जल जीवन मिशन के अंतर्गत हर घर जल घोषित ग्रामों में पेयजल की सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं। पेयजल प्रदाय के साथ ही स्वच्छता से संबंधित गतिविधियों का भी संचालन किया जाए। पंचायत एवं ग्रामीण विकास और कृषि विभाग के अमले का सहयोग भी पेयजल प्रदाय में प्राप्त किया जाए। पंचायतों के पदाधिकारी और शहरों में नगरीय निकायों के अमले द्वारा पेयजल प्रदाय को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पेयजल के साथ स्वच्छता के कायों को पूर्ण कर प्रदेश को, देश में मॉडल बनाया जा सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जल गंगा जल संवर्धन अभियान में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की सक्रिय भूमिका की अपेक्षा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अनुपयोगी हैंडपम्पों को उपयोगी बनाने के लिए रिचार्ज करने की योजना का क्रियान्वयन भी प्रदेश में किया जाए। बैठक में जानकारी दी गई कि प्रदेश में जल जीवन मिशन के प्रारंभ होने से लेकर अब तक 62 लाख 71 हजार 124 कनेक्शन प्रदान किए गए हैं। यह प्रदेश के कुल घरों एक करोड़ 11 लाख 80 हजार 901 का 63.81 प्रतिशत है। दिनांक 16 मार्च 2025 की स्थिति में प्रदेश के 76 लाख 24 हजार 275 घरों में नल कनेक्शन दिए जा चुके हैं, यह उपलब्धि 68.19 प्रतिशत है। प्रदेश में 147 समूह नल जल प्रदाय योजनाओं के माध्यम से 23 हजार 164 ग्राम और 27 हजार 990 ग्राम, एकल ग्राम नल जल योजनाओं के माध्यम से लाभान्वित हो रहे हैं। प्रदेश में ग्रामीण क्षेत्रों में हैंडपम्पों का संधारण लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग और नल जल योजनाओं का संचालन संधारण संबंधित ग्राम पंचायतों द्वारा किया जा रहा है। प्रदेश में 5 लाख 62 हजार 776 हैंडपम्प पेयजल प्रदाय में सहयोगी हैं।  

एक अप्रैल से छत्तीसगढ़ में खुलेंगी 67 नई शराब दुकानें

रायपुर छत्तीसगढ़ में एक अप्रैल 2025 से 67 नई शराब दुकानें खोली जा रही हैं. नई आबकारी नीति में नई दुकान खोलने का निर्णय लिया गया है. साथ ही प्रीमियम शॉप के संचालन की भी अनुमति दी गई है. नई 67 दुकानें खुलने से दुकानों की संख्या बढ़कर 741 हो जाएगी. यह दुकानें सीमावर्ती इलाके और 30 किमी के दायरे के बीच दुकान नहीं होने की स्थिति में खोलने का निर्णय लिया गया है. वर्तमान में राज्य में 674 देशी-विदेशी शराब की दुकानें हैं. इसके अलावा बड़े मॉल या शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में प्रीमियम शॉप अलग से संचालित हो रही है. राज्य सरकार ने नए वित्तीय वर्ष में एक भी शराब दुकान बंद नहीं करने का फैसला लिया है. शराब दुकानों की संख्या बढ़ने से राज्य के राजस्व में भी करीब हजार करोड़ की वृद्धि अनुमानित है. आगामी वर्ष आबकारी से साढ़े 12 हजार करोड़ राजस्व प्राप्ति का अनुमान लगाया गया है. छत्तीसगढ़ सरकार की नई आबकारी नीति वर्ष 2025-26 में भी देशी विदेशी शराब दुकानों का संचालन छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कार्पोरेशन लिमिटेड द्वारा करने का निर्णय लिया है. नई नीति में अधोसंरचना विकास शुल्क के नाम पर प्रति बोतल 5 रुपए से लेकर 10, 20, 40 और 60 रुपए वसूला जाएगा. नई आबकारी नीति में दुकानों का स्थानांतरण किया जा सकेगा, लेकिन इसके लिए कलेक्टरों को एक अप्रैल 2025 से पहले आयुक्त आबकारी को प्रस्ताव भेजना अनिवार्य होगा. नई आबकारी नीति में 10 प्रतिशत यानी 67 नई दुकान खोलने का निर्णय लिया गया है. इसके लिए भी कलेक्टरों को प्रस्ताव भेजना होगा. इसके पीछे विभाग का तर्क है कि राज्य के कई जिलों में शराब दुकानों के बीच 30 किमी का गैप है. इसके चलते अवैध शराब का कारोबार पनपता है. वहीं सीमावर्ती क्षेत्रों में शराब दुकान नहीं होने के कारण भी अन्य राज्यों की शराब छत्तीसगढ़ आती है, जिसे ध्यान में रखते हुए विभाग ने 10 प्रतिशत दुकान बढ़ाने का निर्णय लिया है. मालूम हो कि नई आबकारी नीति में कंपोजिट दुकानों की स्थिति यथावत रखी गयी है. देशी और विदेशी शराब दुकानों की बिक्री एक ही स्थान पर होगी. इसी तरह अहाता की व्यवस्था भी यथावत रखी गई है. इसके लिए विभाग अलग से निर्देश जारी करेगा. नई आबकारी नीति में भी कांच की बोतल में शराब की बिक्री होगी, जिस पर होलोग्राम के अलावा ईएएल चस्पा करना अनिवार्य किया गया है. अधिकतम 6 बोतल, 12 अद्धी और 24 पौव्वा शराब एक व्यक्ति को बेची जा सकेगी. साल में चार दिन शराब दुकानें रहेंगी बंद राज्य शासन की नई आबकारी नीति में चार दिन शराब दुकानें बंद रखने का निर्णय लिया गया है, जिसके तहत 26 जनवरी, 15 अगस्त, 2 अक्टूबर गांधी जयंती और बाबा गुरु घासीदास जयंती 18 दिसंबर को शराब दुकानें बंद रहेंगी. इसके अलावा मद्य निषेध नीति के तहत दुकानें भी बंद रहेगी. दुकानों के खुलने के समय में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है. दुकानें सुबह 10 से रात्रि 10 बजे तक खुलेंगी और बंद होगी. इसके अलावा मद्य निषेध नीति के तहत दुकानें बंद रखी जाएंगी. होटल, बार और रेस्टोरेंट के खुलने और बंद होने के समय का नीति में उल्लेख नहीं है. इसके लिए भी अलग से निर्देश जारी होंगे.

सीएम मोहन यादव ने दिए संकेत, प्रदेश में 9 साल बाद होंगे कर्मचारियों के प्रमोशन

भोपाल मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 14 मार्च को विधानसभा में ये बयान दिया था। इसके साथ ही सीएम ने संकेत दिए हैं कि जल्द ही कर्मचारियों के प्रमोशन का रास्ता साफ होने वाला है। दरअसल, मध्यप्रदेश में पिछले 9 साल से कर्मचारी-अधिकारियों के प्रमोशन नहीं हुए हैं। इस दौरान 1 लाख से ज्यादा अधिकारी-कर्मचारी बिना प्रमोशन के ही रिटायर हो चुके हैं। मंत्रालय सूत्र बताते हैं कि सरकार ने प्रमोशन के लिए तीन क्राइटेरिया तय किए हैं। ये भी तय किया है कि जो भी प्रमोशन होंगे, वो सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अधीन रहेंगे। विधानसभा में मुख्यमंत्री का बड़ा बयान विधानसभा में मुख्यमंत्री ने कहा, “हम किसी भी विभाग में पद खाली नहीं रहने देंगे। विपक्ष थोड़ी मदद करेगा तो हम प्रमोशन पर भी ठीक रास्ते पर जा रहे हैं। हम सभी वर्गों के जो प्रमोशन अटके हैं, उनका समाधान खोज रहे हैं, ताकि नीचे के रिक्त पद भी भरे जा सकें। यह काम हमारी सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ करेगी।” 9 साल से अटके हैं प्रमोशन मप्र में प्रमोशन प्रक्रिया पिछले 9 साल से रुकी हुई है। इस दौरान करीब 1 लाख से ज्यादा अधिकारी और कर्मचारी बिना प्रमोशन के ही रिटायर हो चुके हैं। निचले स्तर से लेकर वरिष्ठ पदों तक पदोन्नति की राह में कानूनी और प्रशासनिक बाधाएं बनी हुई हैं। इससे न सिर्फ कर्मचारियों में असंतोष है बल्कि कई विभागों में रिक्तियों के कारण कामकाज भी प्रभावित हो रहा है। आखिर क्यों अटके थे प्रमोशन? दरअसल, पदोन्नति में आरक्षण से जुड़ा मामला सुप्रीम कोर्ट में लम्बित था। कोर्ट के निर्देशों और विभिन्न याचिकाओं के चलते सरकार प्रमोशन की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ा पाई। इस कानूनी पेच के चलते पिछले 9 वर्षों से कोई भी विभाग प्रमोशन नहीं कर सका। सरकार ने निकाला समाधान सूत्रों के अनुसार, सरकार ने प्रमोशन प्रक्रिया को लेकर तीन क्राइटेरिया तय कर लिए हैं। पहला, प्रमोशन प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अधीन होगी। दूसरा, प्रक्रिया में सभी संवर्गों का संतुलन रखा जाएगा। तीसरा, विभागवार रिक्तियों और पात्रता के अनुसार चरणबद्ध ढंग से प्रमोशन किए जाएंगे। मंत्रालय के उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि सरकार जल्द ही विस्तृत गाइडलाइन जारी कर सकती है, ताकि सुप्रीम कोर्ट की शर्तों का पालन करते हुए प्रमोशन की प्रक्रिया शुरू की जा सके। कर्मचारियों में उम्मीद मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद राज्य के विभिन्न विभागों के कर्मचारियों में एक बार फिर आशा जगी है। कर्मचारी संगठन भी सरकार के रुख का स्वागत कर रहे हैं और जल्द ही कोई ठोस निर्णय लिए जाने की अपेक्षा कर रहे हैं। कैसे शुरू हुआ विवाद? साल 2002 में तत्कालीन मध्यप्रदेश सरकार ने प्रमोशन में आरक्षण का प्रावधान करते हुए प्रमोशन नियम बनाए। इसके बाद आरक्षित वर्ग के कर्मचारियों को पदोन्नति में आरक्षण का लाभ मिलने लगा, लेकिन अनारक्षित वर्ग के कर्मचारियों में असंतोष पनपने लगा। मामला तब गंभीर हो गया जब बड़ी संख्या में अनारक्षित वर्ग के कर्मचारी प्रमोशन से वंचित रह गए और कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि प्रमोशन में आरक्षण का लाभ सिर्फ एक बार मिलना चाहिए। हाईकोर्ट का फैसला और सुप्रीम कोर्ट की रोक इन तर्कों के आधार पर मप्र हाईकोर्ट ने 30 अप्रैल 2016 को मप्र लोक सेवा (पदोन्नति) नियम 2002 को खारिज कर दिया। सरकार ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने का आदेश देते हुए प्रमोशन पर रोक लगा दी। इसके बाद से मप्र में सभी विभागों में प्रमोशन ठप हो गए। राजनीतिक गलियारों में उठा बवाल हाईकोर्ट के फैसले के बाद राजनीति में भी गर्माहट आ गई। 12 जून 2016 को तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अनुसूचित जाति, जनजाति कर्मचारी-अधिकारियों (अजाक्स) के सम्मेलन में पहुंचे। उस समय विधानसभा चुनाव में करीब ढाई साल का समय बाकी था। सम्मेलन में शिवराज ने कहा था, “मेरे होते हुए कोई माई का लाल आरक्षण खत्म नहीं कर सकता। मध्यप्रदेश सरकार प्रमोशन में भी आरक्षण देगी।” उन्होंने यह भी जोड़ा, “संविदा भर्तियों में भी आरक्षण दिया जाएगा। डॉ. भीमराव अंबेडकर के आरक्षण की बदौलत ही मैं मुख्यमंत्री और नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बन सके हैं।” जातिगत राजनीति और नाराजगी शिवराज सिंह का यह बयान सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक चर्चा में आ गया। सवर्ण वर्ग, जो पहले से आर्थिक आधार पर आरक्षण की वकालत कर रहा था, खुलकर नाराज हो गया। ग्वालियर-चंबल अंचल में इस बयान के खिलाफ सबसे ज्यादा आंदोलन हुए। आंदोलन इतने व्यापक हो गए कि कई जगहों पर सरकार विरोधी प्रदर्शन हुए और सवर्ण संगठनों ने बीजेपी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। 2018 के चुनाव में दिखा असर 2018 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को इसका खामियाजा भुगतना पड़ा। राजनीतिक पंडितों का मानना था कि शिवराज के ‘माई का लाल’ वाले बयान ने पार्टी को ग्वालियर-चंबल जैसे मजबूत गढ़ों में नुकसान पहुंचाया। परिणामस्वरूप बीजेपी कई अहम सीटें हार गई और कांग्रेस सत्ता में लौट आई। अब क्या तैयारी कर रही सरकार? अब मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने संकेत दिए हैं कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों और सभी वर्गों के संतुलन के साथ प्रमोशन की प्रक्रिया फिर से शुरू करने की दिशा में बढ़ रही है। सरकार तीन अहम क्राइटेरिया के आधार पर योजना बना रही है, ताकि एक संतुलित और कानूनी रूप से मजबूत समाधान सामने लाया जा सके। क्या होगा असर? विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रमोशन की प्रक्रिया शुरू होती है तो इससे जहां वर्षों से अटके अधिकारियों और कर्मचारियों को राहत मिलेगी, वहीं सरकार को प्रशासनिक स्तर पर रिक्त पदों को भरने में भी मदद मिलेगी। राजनीतिक नजरिए से भी अहम यह मुद्दा आगामी चुनावों से पहले सरकार के लिए भी बेहद संवेदनशील है। सरकार प्रमोशन प्रक्रिया को लेकर सतर्कता बरत रही है ताकि किसी भी वर्ग में असंतोष न फैले। अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि सरकार कोर्ट के फैसले की दिशा में आगे बढ़कर इस जटिल मुद्दे को किस तरह सुलझाती है।

मध्य प्रदेश में 61,000 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू हो रही, शिक्षा क्षेत्र में भी 19,362 नियुक्तियां करेंगे

भोपाल  मध्य प्रदेश में 61,000 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू हो रही है। इसमें 8,500 पुलिसकर्मियों की भर्ती भी है। 5 साल में ढाई लाख नौकरी का लक्ष्य है, जिससे युवाओं को रोजगार के अधिक मौके मिलें। शिक्षा क्षेत्र में भी 19,362 नियुक्तियां करेंगे। हर विधानसभा क्षेत्र में खेल मैदान की व्यवस्था करेंगे। सीएम डॉ. मोहन यादव ने राजगढ़ में जिला अस्पताल के नए भवन के लोकार्पण दौरान सभा में ये बातें कहीं। विपक्ष पर निशाना सीएम ने कहा, कांग्रेस सरकार ने कई सुविधाएं बंद कर दी थी, इनमें परिवहन निगम भी है। कांग्रेस ने कई तरह की नौकरियां और योजनाओं पर ताला लगाया, हम उन तालों को खोलने का काम कर रहे हैं। सीएम ने कहा, राजगढ़ में ₹500 करोड़ के निवेश से विभिन्न क्षेत्रों में औद्योगिक इकाइयां स्थापित की जाएंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम सभी विभागों में निरंतर भर्तियां निकालकर पदपूर्ति करने जा रहे हैं. सरकार ने प्रत्येक जिले में पुलिस बैंड की पुनः स्थापना की. इसके लिए नवीन पदों का सृजन भी किया है. पुलिस बैंड, पुलिस का गौरव है, जो अपनी प्रस्तुति से 26 जनवरी और 15 अगस्त के कार्यक्रमों को गरिमा प्रदान करता है. ’61 हजार लोगों को मिला नियुक्ति पत्र’ उन्होंने कहा, “मौजूदा समय में कुल मिलाकर 267 शासकीय आईटीआई संचालित कर रहे हैं और 22 नए आईटीआई  शुरू करेंगे. साथ ही 5,280 अतिरिक्त सीट की बढ़ोतरी की जाएगी. जबकि एक साल के अंदर हमने 61 हजार लोगों को नियुक्ति पत्र दिए हैं.” जल्द आएगी वैकेंसी उन्होंने कहा कि सरकार ने 6,600 से अधिक पुलिसकर्मियों की भर्ती की है. प्रदेश में जल्द ही 8,500 से अधिक पुलिस कॉन्स्टेबल और सब-इंस्पेक्टर की नवीन भर्तियां भी शीघ्र निकाली जाएंगी. सीएम यादव ने कहा है कि पुलिस सब प्रकार की चुनौतियों का सामना कर समाज को बेफिक्र होकर जीने का अनुकूल माहौल प्रदान करती है. सीएम ने पुलिस के काम को भी सराहा पुलिस होली, दीपावली और अन्य त्योहारों पर अपने घर से दूर रहकर अपनी पूरी निष्ठा से समाज के प्रति अपने उत्तरदायित्व का निर्वहन करती है. सुरक्षाकर्मियों का समाज में विशेष सम्मान और महत्व है. बाबा महाकाल की नगरी में पुलिसकर्मियों के साथ होली खेलना हर्ष की बात है. पुलिस के लिए होली पर्व पर व्यवस्था करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है. पुलिस की सेवा के कारण ही सभी नागरिक हर्षोल्लास और आनंद के साथ होली का पर्व मनाते हैं. पुलिस, समाज की सुरक्षा के लिए एक अहम कड़ी है.

भोपाल मेट्रो में सफर करने की तैयारी कर रहे लोगों को अभी थोड़ा और इंतजार करना पड़ेगा, कमर्शियल रन अगस्त में

भोपाल भोपाल मेट्रो में सफर करने की तैयारी कर रहे लोगों को अभी थोड़ा और इंतजार करना पड़ेगा। जून में शुरू होने वाला कमर्शियल रन अब अगस्त 2025 में शुरू होगा। इससे पहले मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉपोरेशन एम्स, अलकापुरी और डीआरएम मेट्रो स्टेशन का काम पूरा करेगा। सुभाष नगर से रानी कमलापति रेलवे स्टेशन के बीच करीब करीब काम पूरा हो गया है। अब इन स्टेशनों पर फिनिशिंग का काम चल रहा है। भोपाल मेट्रो का कमर्शियल रन सुभाष नगर से एम्स भोपाल मेट्रो स्टेशन के बीच शुरू होगा। कॉरपोरेशन के अधिकारियों ने अब इसकी नई तारीख अगस्त 2025 दी है। इससे पहले रेलवे ब्रिज पर मेट्रो का लोड भी चेक किया जाएगा। इसके बाद सब कुछ ठीक रहने पर मेट्रो रेल सेफ्टी कमिश्नर मई या जून में ट्रेक का निरीक्षण कर सकते है, जिनकी रिपोर्ट ठीक आने पर कमर्शियल रन शुरू हो जाएगा। 6.22 किमी की दूरी 11 मिनट में तय करेगी मेट्रो मेट्रो के ट्रायल रन के दौरान इसे रानी कमलापति स्टेशन से एम्स तक 10-20 किमी प्रति घंटा की गति से चलाया गया। कमर्शियल रन में मेट्रो की स्पीड 70-90 किमी प्रति घंटा होगी, जिससे 6.22 किमी की दूरी मात्र 11 मिनट में पूरी की जा सकेगी। प्राक्कलन समिति भी जता चुकी है नाराजगी पिछले दिनों विधानसभा की प्राक्कलन समिति ने भोपाल मेट्रो प्रोजेक्ट का निरीक्षण किया था। समिति ने मेट्रो के काम में देरी को लेकर नाराजगी जताई थी। उस समय मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के अधिकारियों ने 15 अगस्त तक कमर्शियल रन शुरू करने की समयसीमा दी थी। छह मेट्रो भोपाल पहुंची, 21 और आएंगी भोपाल मेट्रो स्टेशन पर तीन-तीन कोच की मेट्रो को शुरुआत में चलाया जाएगा। स्टेशन छह कोच के हिसाब से तैयार किए गए हैं। अभी भोपाल में 6 मेट्रो कोच के सेट आ गए हैं। इस तरह के कुल 27 मेट्रो कोच के सेट भोपाल आएंगे। अभी 21 मेट्रो कोच के सेट आना बाकी हैं।  

रील बनाओ…पाओ लाखो का इनाम, रील बनाने पर सरकार देगी पैसा, बस करना होगा ये काम

ग्वालियर मध्यप्रदेश मे अब राज्य सरकार रील बनाने पर युवाओं को पैसा देगा. रील प्रतियोगिता के तहत सरकार युवाओं को दो लाख रुपए तक की प्रोत्साहन राशि देगी. दरअसल, राज्य सरकार की तरफ से स्वच्छ एमपी रील प्रतियोगिता की घोषणा की गई है. इसके लिए प्रतिभागियों को 15 अप्रैल तक गांवों में कचरे से जुड़ी जागरूकता पर रील बनाकर सरकार द्वारा निर्धारित लिंक पर अपलोड करनी होगी. पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने प्रतियोगिता की घोषणा करते हुए कहा कि, प्रदेशभर से प्राप्त रीलों में से सर्वश्रेष्ठ पांच प्रतिभागियों को नकद पुरस्कार दिया जाएगा.  इस अभियान की शुरूआत की है। इसे स्वच्छ एमपी रील प्रतियोगिता नाम दिया गया है। इस कंपटीशन के विषयों और थीम पर रील बनाकर प्रदेशवासी सहभागिता कर सकते हैं। कचरा नहीं यह कंचन है, इसे अलग-अलग करें और पैसा कमाएं की थीम पर रखी गई कंपटीशन की आखिरी तारीख 15 अप्रेल रखी गई है। 30 से 45 सेकंड की एचडी फॉर्मेट रील इस कंपटीशन के लिए 30 से 45 सेकंड तक का एचडी फॉर्मेट में रील बनानी (पोटे्रट फॉर्मेट) होगी। इसकी भाषा सरल हिंदी, स्थानीय भाषा रखनी होगी। वीडियो रील शेयर करने के लिए अपने वीडियो को फेसबुक / यूट्यूब इंस्टाग्राम पर शेयर करें और उसकी लिंक को एमपी.मायजीओवी.इन पर सबमिट करें। रील में म्यूजिक, टेक्स्ट और विजुअल इफेक्ट्स का इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन वह सकारात्मक और सभ्य हो। स्वच्छता पर बनाएं रील मंत्री प्रहलाद पटेल ने कहा कि, गांवों में कचरा न फैले, इसके लिए कचरा प्रबंधन पर सभी को साथ मिलकर काम करना होगा. इस उद्देश्य से स्वच्छ एमपी रील प्रतियोगिता शुरू की जा रही है. इस प्रतियोगिता के तहत नौजवान बेटे-बेटियां और अभिभावक स्वच्छता और अच्छी आदतों पर रील बनाकर भेज सकते हैं. रील बनाने पर मिलेगा इनाम प्रहलाद पटेल ने कहा इस पहल से न केवल प्रतिभागी आर्थिक पुरस्कार प्राप्त करेंगे, बल्कि समाज को जागरूक करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे. इसलिए सभी से अनुरोध है कि, एक बार कैमरा उठाएं और स्वच्छता के संदेश के साथ रील बनाने के लिए आगे आएं. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वच्छ भारत मिशन की कल्पना की थी. इसी को साकार करने के लिए सरकार ने ‘कचरा नहीं, यह कंचन है’ का संदेश दिया है. यदि कचरे को सही तरीके से अलग किया जाए, तो यह आय का भी स्रोत बन सकता है. इस लिंक पर करें अपलोड स्वच्छता के प्रति जागृति संबंधी रील बनाकर https://mp.mygov.in/task/swachh-madhya-pradesh-reel-making-contest… पर रजिस्ट्रेशन कर रील अपलोड करना होगा. इसमें प्रथम पुरस्कार की राशि 2 लाख रुपए है. मंत्री प्रहलाद पटेल से आग्रह किया है कि ‘स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत ‘स्वच्छ एमपी रील प्रतियोगिता’ में भाग लेकर http://mp.mygov.in पर 15 अप्रैल तक अपलोड करें. बता दें कि पहला पुरस्कार दो लाख रुपए, दूसरा पुरस्कार एक लाख रुपए और तीसरा पुरस्कार 50 हजार रुपए दिलाएगा. इसके अलावा 25-25 हजार रुपए के दो सांत्वना पुरस्कार दिए जाएंगे. ये रखे गए हैं विषय प्रदेश के विभिन्न गांव के लिए वेस्ट मैनेजमेंट पर रील्स बनाना है, जिसके मुख्य विषय ये रखे गए हैं।     गीला सूखा कचरा को अलग-अलग रखना एवं उसका उचित निपटान।     कचरे के दोबारा उपयोग पर रील्स।     खुले में कचरा नहीं फेंकना।     ये मिलेंगे पुरस्कार     प्रथम पुरस्कार : 2,00,000 रुपए     द्वितीय पुरस्कार : 1,00,000 रुपए     तृतीय पुरस्कार : 50,000 रुपए     सांत्वना पुरस्कार (2) : 25,000 रुपए (प्रत्येक)

बलूचिस्तान में चरम पर आजादी की लड़ाई, चीन के CPEC प्रोजेक्ट में 60 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश

बीजिंग/इस्लामाबाद  बलूचों की आजादी की जंग ने पाकिस्तान में हड़कंप मचा दिया है। पाकिस्तान को समझ नहीं आ रहा है कि बलूचिस्तान को कैसे कंट्रोल में रखा जाए। अगर हालात बिगड़ते हैं तो ना सिर्फ पाकिस्तान टूट जाएगा, बल्कि चीन ने अरबों डॉलर का जो निवेश कर रखे हैं, वो भी डूब जाएंगे। दूसरी तरफ पिछले हफ्ते जाफर एक्सप्रेस को हाईजैक करने के बाद बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने बलूचिस्तान में एक बार फिर से पाकिस्तान की सेना पर भीषण हमला किया है। BLA ने पाकिस्तान जवानों को ले जा रही एक बस को उड़ा दिया और दावा किया कि उसके हमले में कम से कम 90 जवान मारे गये हैं। यानि बलूचों ने पाकिस्तान की सरकार के खिलाफ आजादी की जंग को काफी तेज कर दिया है, जिससे घबराए चीन ने पाकिस्तान को फौरन सैन्य सहायता देने की पेशकश की है। रिपोर्ट के मुताबिक चीन ने पाकिस्तान को आतंकवाद विरोधी अभियान में मदद करने के लिए सैन्य सहायता देने की पेशकश की है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माओ निंग ने जाफर एक्सप्रेस हाईजैक को लेकर पूछे गये सवाल पर कह है कि “हमने रिपोर्टों पर गौर किया है और इस आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा की है।” चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा है कि “चीन पाकिस्तान के साथ आतंकवाद विरोधी और सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने और संयुक्त रूप से क्षेत्र को शांतिपूर्ण, सुरक्षित और स्थिर रखने के लिए तैयार है।” बलूचों के आंदोलन से क्यों घबराया चीन? आपको बता दें कि पिछले हफ्ते BLA के फ्रीडम फाइटर्स ने जाफर एक्सप्रेस को हाईजैक कर लिया था, जिसमें 440 यात्री सवार थे। BLA ने 200 से ज्यादा पाकिस्तानी सेना के जवानों को मारने का दावा किया है। जबकि पाकिस्तान की सेना ने करीब 50 मौतों की बात कबूली है। जाफर एक्सप्रेस हाईजैक ने बीजिंग में तहलका मचा दिया है। वो अपने चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) की सुरक्षा को लेकर डर गया है। चीन को लग रहा है कि अरबों डॉलर के इस प्रोजेक्ट को बलूच फूंक देंगे। चीन ने 3,000 किलोमीटर लंबे CPEC में करोड़ों डॉलर का निवेश किया है। अनुमान है कि चीन ने बलूचिस्तान में अलग अलग प्रोजेक्ट्स के जरिए करीब 65 अरब डॉलर का निवेश किया है, जो बीजिंग के लिए मध्य पूर्व के बाजारों तक सस्ते और तेज मार्ग और दक्षिण एशिया में प्रभाव बनाने का रास्ता बनाता है। लेकिन अब चीन का ये प्रोजेक्ट फंस गया है और भारत को घेरने का प्लान फेल होता नजर आ रहा है। बलूच विद्रोहियों की मांग ना सिर्फ पाकिस्तान से आजादी है, बल्कि वो चीनी प्रोजेक्ट का भी विरोध कर रहा हैं। बलूचों का कहना है की चीन उनकी संसाधनों को लूट रहा है। लिहाजा बलूच विद्रोही, बलूचिस्तान को चीन के शिनजियांग प्रांत से जोड़ने वाली सीपीईसी परियोजनाओं पर काम कर रहे चीनी कर्मियों पर भी कई हमले किए हैं। बलूचिस्तान संसाधन संपन्न इलाका है, जहां प्राकृतिक गैस, कोयला, तांबा और अन्य मूल्यवान खनिजों का भंडार है। पाकिस्तान और चीन मिलकर इन खनिजों को लूट रहे हैं और बलूचों को कुछ भी नहीं मिल रहा है। लिहाजा बलूचों ने अब बंदूक उठा लिए हैं। बलूच नेशनल मूवमेंट के अध्यक्ष नसीम बलूच ने कहा है कि इस प्रोजेक्ट की वजह से बलूचों को काफी नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि ग्वादर पोर्ट बनाने के लिए हजारों बलूचों को उनके घरों से विस्थापित कर दिया गया और उन्हें कहीं और बसाने के भी कोई इंतजाम नहीं किए गये। लिहाजा चीनी कर्मचारियों पर हमले हो रहे हैं। जिससे घबराए चीन ने पाकिस्तान पर अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के जवानों को तैनात करने के लिए पाकिस्तान पर भारी दबाव बना रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान, चीन के प्रस्ताव को स्वीकार करने में हिचकिचा रहा है, क्योंकि उसे अपनी धरती पर चीनी सुरक्षाकर्मियों को अनुमति देने पर घरेलू राजनीतिक प्रतिक्रिया का डर है। लेकिन अब जबकि बलूचों के हमले खतरनाक स्तर तक पहुंच चुके हैं तो ऐसी आशंका है कि चीन अपने जवानों को बलूचिस्तान में तैनात कर सकता है।

स्व-सहायता समूह की 25 महिला सदस्यों द्वारा मधुमक्खी पालन कर लगभग 120 बॉक्स के साथ अपना रोजगार किया प्रारंभ

ग्वालियर राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं ने संगठित होकर मधुमक्खी पालन को अपना व्यवसाय बनाकर अपने जीवन को बेहतर बनाने का उल्लेखनीय कार्य किया है। स्व-सहायता समूह की 25 महिला सदस्यों द्वारा मधुमक्खी पालन कर लगभग 120 बॉक्स के साथ अपना कार्य प्रारंभ किया है। महिलाओं के उत्साह और मेहनत से 700 किलोग्राम शहद एवं 25 किलोग्राम मोम समूह ने एकत्रित किया है। जिले की ग्राम पंचायत उदयपुरा, जखारा एवं इकहरा के 4 स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने प्रशिक्षण प्राप्त कर मधुमक्खी पालन का व्यवसाय प्रारंभ किया। महिलाओं की मेहनत और प्रशासनिक अधिकारियों के मार्गदर्शन से समूह का काम निखरने लगा और उन्हें आर्थिक लाभ भी प्राप्त होने लगा। मधुमक्खी पालन समूह की महिलाओं ने सोमवार को कलेक्ट्रेट कार्यालय में पहुँचकर कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान को समूह द्वारा तैयार किए गए शहद की बोतल भी प्रदान की। कलेक्टर ने महिलाओं से विस्तार से चर्चा की तथा मधुमक्खी पालन के संबंध में जानकारी प्राप्त की। समूह की महिलाओं ने कलेक्टर को बताया कि जिला पंचायत के माध्यम से स्व-सहायता समूह की महिलाओं को मधुमक्खी पालन का प्रशिक्षण दिलाया गया है। इसके साथ ही समूह द्वारा 120 बॉक्स के माध्यम से मधुमक्खी पालन का कार्य प्रारंभ किया गया। समूह की महिलाओं ने बताया कि शुरूआत में काफी परेशानियां आईं। लेकिन धीरे-धीरे काम बेहतर होने लगा और सभी के प्रयासों से शहद एवं मोम भी समूह को प्राप्त होने लगा। प्राप्त शहद को समूह के माध्यम से कृषि विज्ञान केन्द्र मुरैना में प्रोसेसिंग कराकर बाजार में 350 रूपए से 400 रूपए प्रतिकिलो के हिसाब से विक्रय किया जा रहा है। कलेक्टर श्रीमती चौहान ने स्व-सहायता समूह की महिलाओं का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि उनके द्वारा किया जा रहा कार्य सराहनीय है। समूह की महिलायें स्वयं भी करें और अधिक से अधिक महिलाओं को स्वरोजगार के कार्य में जोड़ने का कार्य भी करें। कलेक्टर के निर्देश पर समूह द्वारा तैयार किए गए शहद विक्रय के लिये एक अस्थायी केन्द्र कलेक्ट्रेट में बनाया गया। जिले के अधिकारियों ने भी स्व-सहायता समूह की महिलाओं से शहद क्रय कर उनका उत्साहवर्धन किया। इस मौके पर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री विवेक कुमार ने मधुमक्खी पालन के कार्य में लगे स्व-सहायता समूह के संबंध में विस्तार से जानकारी ली। इसके साथ ही जिले में अन्य जगहों पर भी स्व-सहायता समूहों द्वारा किए जा रहे कार्यों के बारे में बताया।

खाद्य मंत्री राजपूत ने बताया- समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी 5 मई तक होगी

भोपाल न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेंहू की खरीदी 15 मार्च से शुरू हो चुकी है। समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीदी 5 मई तक की जायेगी। खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य 2425 रूपये के अलावा किसानों को 175 रुपये प्रति क्विटल बोनस भी देगी। इस बार 2600 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं खरीदा जाएगा। किसानों गेहूं बेचने के लिए ऑनलाइन स्लॉट बुकिंग करनी होगी। साथ ही जिन किसानों ने गेहूं उपार्जन के लिए अभी तक पंजीयन नहीं कराया है, वे 31 मार्च 2025 तक करवा सकते हैं। खरीदी केंद्रों पर किसानों की सुविधा के लिए टेंट, बैठने की व्यवस्था, पानी, पंखे, तौल मशीन और कंप्यूटर जैसी सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। गेहूं की साफ-सफाई के लिये क्लीनिंग मशीन भी लगाई जा रही है।  

प्रधानमंत्री ने शहडोल दौरे को किया याद, कहा चार पीढ़ियों से लोग खेल रहे फुटबाल

भोपाल प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने अमेरिकन पॉडकास्टर लेक्स फ्रिडमैन के साथ विस्तार से बातचीत में मध्यप्रदेश के शहडोल जिले के दौरे की स्मृतियों को साझा की। पॉडकास्ट में पीएम श्री मोदी ने शहडोल जिले के जनजातीय बाहुल्य गांव विचारपुर की चर्चा की। उन्होंने कहा कि शहडोल जिले की यात्रा में उन्हें उस जगह के बारे में पता चला, जहां के निवासियों में फुटबॉल के प्रति अटूट प्रेम है। वे अपने क्षेत्र को मिनी ब्राजील कहते हैं। अमेरिकन पॉडकास्ट में पीएम श्री मोदी ने कहा कि हमारे यहां सेंट्रल पार्ट ऑफ इंडिया में मध्यप्रदेश एक स्टेट है, वहां शहडोल एक जिला है, शहडोल जिला बहुत बड़ा ट्राइबल बेल्ट है, जहां काफी ट्राइबल लोग रहते हैं वहां ट्राइबल महिलाएं स्व-सहायता समूह चलाती हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने शहडोल यात्रा में स्व-सहायता समूह की महिला सदस्यों और शहडोल संभाग की फुटबाल क्रांति के प्रणेता खिलाड़ियों से मिलकर चर्चा की और उनका उत्साह बढ़ाया। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने शहडोल जिले के भ्रमण की स्मृतियों को साझा करते हुए कहा कि मैं उनसे बातचीत कर रहा था। शहडोल में देखा कि स्पोर्ट्स की ड्रेस पहने हुए वहां 80 से 100 के करीब नौजवान, छोटे बच्चे, सभी लोग एक ही प्रकार से बैठे थे। मैं उनके पास गया, उनसे पूछा कि आप लोग कहां से हैं? जवाब मिला, हम मिनी ब्राजील से हैं। मैंने खिलाड़ियों से पूछा कि मिनी ब्राजील क्या है? तो खिलाड़ियों ने बताया कि हमारे गांव विचारपुर को लोग मिनी ब्राजील कहते हैं। मैंने फिर पूछा कैसे मिनी ब्राजील कहते हैं? खिलाड़ियों ने बताया कि हमारे गांव में हर परिवार में चार पीढ़ियों से लोग फुटबॉल खेलते आ रहे हैं। गाँव से 80 से अधिक नेशनल प्लेयर निकले हैं। पूरा गाँव फुटबॉल को समर्पित है और वो कहते हैं कि हमारे गांव का इंडिविजुअल मैच जब होता है, तो 20 से 25 हजार दर्शक तो आसपास के गांव से ही आ जाते हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि भारत में फुटबॉल का क्रेज इन दिनों बढ़ रहा है, मैं उसके लिए शहडोल के मिनी ब्राजील को शुभ संकेत मानता हूं। इससे टीम स्पिरिट पैदा होती है। प्रधानमंत्री श्री मोदी का मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने माना आभार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रधानमंत्री श्री मोदी के प्रोत्साहन के लिये आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इससे शहडोल ही नहीं पूरे प्रदेश के खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में फुटबाल को और अधिक प्रोत्साहित करने के लिये राज्य सरकार की ओर से हरसंभव मदद दी जायेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार खेलों को बढ़ावा देने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। हमारी खेल अकादमियों के खिलाड़ियों राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर मध्यप्रदेश और देश का नाम रोशन किया है। पूर्व कमिश्नर श्री शर्मा ने भी किया प्रोत्साहित शहडोल संभाग में फुटबाल को प्रोत्साहित करने के लिए शहडोल संभाग के पूर्व कमिश्नर श्री राजीव शर्मा की पहल पर फुटबाल खिलाड़ियों को बेहतर से बेहतर सुविधाएं मुहैया कराने के प्रयास किये गए है। इसके अपेक्षित परिणाम मिल रहे हैं। शहडोल जिले के ग्राम विचारपुर गांव सहित शहडोल संभाग के लगभग सभी गांवों में फुटबाल क्लबों का गठन किया गया है तथा फुटबाल खिलाड़ियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। मन की बात में भी हो चुका है जिक्र प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा पूर्व में भी “मन की बात” कार्यक्रम में भी शहडोल संभाग की फुटबाल क्रांति के संबंध में चर्चा की जा चुकी है, जिससे शहडोल संभाग के फुटबाल खिलाड़ियों में नया उत्साहवर्धन हुआ है।  

चैंपियंस ट्रॉफी से पाकिस्तान को 800 करोड़ नुकसान, खिलाड़ियों की सैलरी काटने पर मजबूर PCB

लाहौर  पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) चैंपियंस ट्रॉफी 2025 की मेजबानी के बाद भारी आर्थिक नुकसान से जूझ रहा है। टूर्नामेंट में पाकिस्तान टीम का प्रदर्शन भी निराशाजनक रहा। लगभग 869 करोड़ रुपये खर्च करने के बावजूद पीसीबी को सिर्फ 52 करोड़ रुपये की ही कमाई हुई, जिससे उसे 739 करोड़ रुपये का घाटा हुआ। इस नुकसान की भरपाई के लिए PCB ने घरेलू खिलाड़ियों की मैच फीस में भारी कटौती की है। पाकिस्तान को तगड़ा झटका चैंपियंस ट्रॉफी 2025 पाकिस्तान के लिए दोहरी मार साबित हुई। एक तो मेजबान होने के बावजूद पाकिस्तानी टीम ग्रुप स्टेज से ही बाहर हो गई। दूसरा, टूर्नामेंट के आयोजन में भारी खर्च के बाद भी PCB को अपेक्षित लाभ नहीं हुआ, बल्कि भारी नुकसान उठाना पड़ा। इससे PCB की आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो गई है। PCB ने टूर्नामेंट के लिए स्टेडियमों के नवीनीकरण, आयोजन और अन्य तैयारियों पर कुल 869 करोड़ रुपये खर्च किए। नाकामी का उदाहरण बना चैंपियंस ट्रॉफी पाकिस्तान को पहले मुकाबले में न्यूजीलैंड और दूसरे मैच में भारत ने हराया. बांग्लादेश के खिलाफ ग्रुप का आखिरी मैच रावलपिंडी में बारिश के कारण धुल गया. उसने इस टू्र्नामेंट के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए थे, लेकिन टीम के शर्मनाक प्रदर्शन सबको निराश कर दिया. चैंपियंस ट्रॉफी पाकिस्तान के लिए अरबों रुपये की बर्बादी साबित हुई. यह वित्तीय और लॉजिस्टिक नाकामी का उदाहरण बन गया. लाहौर के गद्दाफी स्टेडियम में न्यूजीलैंड के खिलाफ अपने एकमात्र घरेलू मैच के लिए पीसीबी ने करीब 100 मिलियन डॉलर खर्च कर दिया. करोड़ों रुपये का नुकसान स्टेडियमों के नवीनीकरण पर ही लगभग 560 करोड़ रुपये खर्च हुए, जो उनके मूल बजट के आधे से भी ज्यादा थे। बाकी 347 करोड़ रुपये टूर्नामेंट की अन्य तैयारियों पर खर्च किए गए। हालांकि, मेजबानी फीस और टिकटों की बिक्री से PCB को केवल 52 करोड़ रुपये की ही आमदनी हुई। इस प्रकार, PCB को कुल 739 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। पाकिस्तान में 29 साल बाद किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट टूर्नामेंट का आयोजन हुआ था। PCB को उम्मीद थी कि इस टूर्नामेंट से उसे अच्छी कमाई होगी। लेकिन, नतीजा इसके उलट निकला। टूर्नामेंट से होने वाले नुकसान ने PCB की आर्थिक स्थिति को और कमजोर कर दिया है। इससे PCB को घरेलू खिलाड़ियों की मैच फीस में भारी कटौती करने का फैसला लेना पड़ा है। खिलाड़ियों के पैसे कटेंगे पीसीबी के इस फैसले से घरेलू खिलाड़ी काफी निराश हैं। टीम XI के खिलाड़ियों की फीस में 90 प्रतिशत की कटौती की गई है। रिजर्व खिलाड़ियों को तो पिछली फीस की तुलना में सिर्फ 12.50 प्रतिशत राशि ही मिल रही है। यह कटौती खिलाड़ियों के लिए बड़ा झटका है। चैंपियंस ट्रॉफी के आयोजन में हुए भारी नुकसान के बाद पीसीबी की आर्थिक स्थिति चिंताजनक हो गई है। इससे PCB के आगे के कार्यक्रमों पर भी असर पड़ सकता है। यह देखना होगा कि पीसीबी इस मुश्किल से कैसे निपटता है और अपनी आर्थिक स्थिति को कैसे सुधारता है। इस घटना ने पीसीबी के लिए एक बड़ी सीख छोड़ दी है। भविष्य में ऐसे आयोजनों के लिए बेहतर वित्तीय योजना बनाने की आवश्यकता है। साथ ही, टीम के प्रदर्शन पर भी ध्यान देना होगा ताकि दर्शकों की संख्या बढ़े और राजस्व में वृद्धि हो। इस पूरे घटनाक्रम ने पाकिस्तान क्रिकेट के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले समय में पीसीबी के लिए चुनौतियों कम नहीं होंगी। उसे अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। साथ ही, टीम के प्रदर्शन में सुधार लाना भी जरूरी होगा। तभी पाकिस्तान क्रिकेट फिर से अपनी पुरानी शान हासिल कर पाएगा। यह समय PCB के लिए आत्ममंथन करने का है। बगैर मैच जीते 5 दिन में बाहर हुई थी पाकिस्तानी टीम यह पीसीबी के कुल बजट का 50 प्रतिशत ज्यादा है. 40 मिलियन डॉलर (करीब 347 करोड़ भारतीय रुपये) टूर्नामेंट की तैयारी में खर्च किए. इतना कुल खर्च करने के बाद पीसीबी को करीब 52 करोड़ रुपये का ही फायदा हुआ है. ऐसे में उसे टूर्नामेंट में करीब 85% नुकसान झेलना पड़ा. पाकिस्तान क्रिकेट टीम ने अपने घर में हुए इस चैम्पियंस ट्रॉफी में शर्मनाक प्रदर्शन किया था. यह टीम बगैर कोई मैच जीते 5 दिन में ही बाहर हो गई थी. टीम ग्रुप स्टेज से आगे नहीं बढ़ सकी. पाकिस्तान को न्यूजीलैंड और भारत ने हराया, जबकि बांग्लादेश के खिलाफ मैच बारिश से धुल गया था.

19 माओवादियों ने हिंसा का रास्ता छोड़ किया आत्मसमर्पण

बीजापुर छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में पुलिस को नक्सल उन्मूलन अभियान में बड़ी सफलता मिली है. सरकार की महत्वपूर्ण पुनर्वास नीति और “नियद नेल्लानार” योजना से प्रभावित होकर 19 नक्सलियों ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया है. इनमें से 10 नक्सलियों पर कुल 29 लाख रुपये का इनाम घोषित था. 2025 में अब तक 84 नक्सलियों ने छोड़ा हिंसा का रास्ता इस आत्मसमर्पण के साथ ही वर्ष 2025 में अब तक कुल 84 नक्सलियों ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया है. इसके अलावा अब तक 137 नक्सली गिरफ्तार किए गए हैं और 56 माओवादियों को अलग-अलग मुठभेड़ में सुरक्षाबल के जवानों ने मार गिराया गया है. आत्मसमर्पण करने वाले सभी 19 नक्सली पूर्व में फायरिंग, आईईडी ब्लास्ट, आगजनी जैसे अन्य नक्सली घटनाओं में शामिल थे. प्रत्येक नक्सली को मिली 25-25 हजार रुपये की सहायता राशि इन सभी नक्सलियों ने सीआरपीएफ डीआईजी देवेन्द्र सिंह नेगी, पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेन्द्र यादव, एएसपी मयंक गुर्जर (आईपीएस), डीएसपी शरद जायसवाल और अन्य अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण किया है. पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण करने वाले सभी माओवादियों को अधिकारियों ने 25-25 हजार रुपये नगद राशि प्रदान किया गया.

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