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Neja Mela : संभल जिला प्रशासन ने साफ कह दिया कि वह लुटेरों के नाम पर मेले का आयोजन नहीं होने देगा

 संभल यूपी के संभल जिले में सैयद सालार मसूद गाजी के नाम पर लगने वाले ‘नेजा मेले’ का आयोजन अब नहीं होगा. ‘नेजा मेला’ कमेटी के लोग अनुमति मांगने एडिशनल एसपी श्रीशचंद्र के पास पहुंचे थे, लेकिन एडिशनल एसपी ने कमेटी को दो टूक मना कर दिया. साथ ही नसीहत देते हुए कहा कि सोमनाथ मंदिर को लूटने वाले, भारत में लूटमार व कत्लेआम मचाने वाले की याद में किसी भी मेले का आयोजन नहीं होना चाहिए. उन्होंने कहा कि एक लुटेरे के नाम पर मेले का आयोजन करके आप लोग अभी तक अपराध करते रहे हैं, लेकिन अब ऐसा नहीं चलेगा. आपको बता दें कि सैयद सालार मसूद गाजी विदेशी आक्रांता महमूद गजनवी का भांजा और सेनापति था.  गजनवी ने 1000 से 1027 ईस्वी के बीच भारत पर 17 बार हमला किया था. इस दौरान उसने हिंदुओं की आस्था के प्रतीक सोमनाथ मंदिर सहित कई बड़े मंदिरों पर भी आक्रमण किया था. संभल पुलिस की ‘नेजा मेला’ कमेटी को दो टूक संभल के एसएसपी श्रीशचंद्र ने ‘नेजा मेला’ कमेटी के लोगों से कहा कि सोमनाथ मंदिर को लूटने वाले, लुटेरे-हत्यारे की याद में किसी भी मेले का जिले में नहीं होगा. जो कोई व्यक्ति हत्यारे और लुटेरे के साथ रहेगा वह देश के साथ अपराध कर रहा है. आप लोग लुटेरे के नाम पर मेले का आयोजन करके अपराध करते रहे हैं. जिसने इस लुटेरे के नाम पर मेले का आयोजन किया वह व्यक्ति भी फिर देशद्रोही है. एसएसपी ने कहा कि ‘नेजा मेला’ एक बुरी कुरीति थी. किसी भी लुटेरे के नाम पर मेले का आयोजन किया जाना पूरी तरह से गलत है.  कानून व्यवस्था के चलते इजाजत नहीं दी जा रही है. मेला लगाने की कोई अनुमति नहीं है. अगर कोई नियम तोड़ेगा तो उसपर एक्शन लिया जाएगा. संभल में होली के बाद सैयद सालार मसूद गाजी की याद में ‘नेजा मेला’ लगाया जाता था. इस आयोजन को लेकर पहले भी आपत्ति जताई गई थी. अब संभल जिला प्रशासन ने साफ कह दिया है कि वह लुटेरों के नाम पर मेले का आयोजन नहीं होने देगा. इस साल संभल में सैयद सालार मसूद गाजी की याद में आयोजित होने वाला ‘नेजा मेला’ नहीं लगेगा. इससे पहले ‘नेजा कमेटी’ के पदाधिकारियों ने एसडीएम डॉ. बंदना मिश्रा से मुलाकात की थी. पदाधिकारियों ने उनसे मेले के आयोजन की अनुमति मांगी थी, लेकिन तब भी एसडीएम ने साफ कर दिया था कि ‘नेजा मेले’ के नाम पर कोई अनुमति नहीं दी जाएगी. वहीं, पदाधिकारियों ने तर्क दिया कि ‘नेजा मेला’ सदियों पुरानी परंपरा है और इसे उसी स्वरूप में आयोजित किया जाना चाहिए. लेकिन प्रशासन ने स्पष्ट किया कि सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए अनुमति नहीं दी जाएगी. नेजा मेला क्यों लगाया जाता है संभल में हजारों सालों से चला आ रहे नेजा मेले का इतिहास उस समय का है जब महाराजा पृथ्वीराज चौहान की राजधानी संभल हुआ करती थी। धार्मिक नगर नेजा कमेटी संभल के अध्यक्ष शाहिद मसूदी ने निजा मेला क्यों मनाया जाता है इसके संबंध में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पृथ्वीराज चौहान की राजधानी संभल हुआ करती थी और उस समय संभल में हजरत शेख पचासे मियां रहमतुल्लाह अलैह का परिवार रहा करता था। उनकी बेटी बहुत खूबसूरत थी, पृथ्वीराज चौहान के बेटे का दिल हजरत शेख पचासे मियां की बेटी पर आ गया। पैगाम पाकर आने का लिया फैसला पिता ने बेटी को सारा माजरा बताया तो बेटी ने कुछ वक्त लेने की बात कही और एक पैगाम अफगानिस्तान में सय्यद सालार मसूद गाजी रहमतुल्ला अलैह को भेजा और मदद की ख्वाहिश जाहिर की। सय्यद सालार मसूद गाजी रहमतुल्लाह अलैह ने पैगाम पाकर संभल आने का फैसला किया। उसने यहां पृथ्वीराज चौहान को जंग में पराजित किया। इस जंग में शहीद हुए उसके साथियों के आज भी मजार संभल में हैं, जहां मेला लगाया जाता है।  नेजा मेले की खास परंपरा, यहां सजकर बैठतीं हैं दुल्हनें संभल में सैयद सलार मसूद गाजी की याद में लगने वाले नेजा मेला पर खास परम्परा के तहत दुल्हनें सजकर बैठीं और घर परिवार व मौहल्ले की महिलाओं ने उनके साज श्रंगार की सराहना कर उन्हें ईनाम दिया। नेजा मेला पर हर साल वह दुल्हनें सजकर बैठती हैं जिनकी शादी पिछले एक साल के दौरान हुई होती है। दुल्हन उसी तरह सजती संवरती है जैसे वह शादी के वक्त सजती संवरती है। शहर के मौहल्ला चौधरी सराय सहित कई मौहल्लों में दुल्हनें सजकर बैठीं। पहले बहुत ज्यादा संख्या में दुल्हनों के सजने की परम्परा था मगर अब बदले वक्त में कुछ संगठन इस पुरानी प्रथा का विरोध करने लगे हैं।  

रेलवे ने डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने कैश काउंटर किए बंद, यात्री परेशान, टिकट काउंटरों में लंबी लाईनें

रायपुर   दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे जोन के अधिकारियों ने आरक्षण केंद्र और अनारक्षित टिकट केंद्र में कई कैश काउंटर बंद कर डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने का अभियान शुरू किया है. इसका नतीजा ये हो रहा है कि टिकट काउंटरों में लंबी लाईने लगी हुई है और वो यात्री परेशान हो रहे है जिनके पास डिजिटल पेमेंट का कोई ऑपशन नहीं है. रायपुर रेलवे स्टेशन के अनारक्षित टिकट काउंटर के लंबी लाईन में खड़े रहने के बाद जब आप काउंटर पर टिकट लेने पहुंचेंगे तो पता चलेगा कि उक्त काउंटर सिर्फ डिजिटल पेमेंट के लिए ही है, इसके बाद आपको पुनः उस लाईन में लगना होगा जहां कैश में टिकट उपलब्ध होगी. संभव है कि ऐसे में या तो यात्री बिना टिकट ट्रेन में सफर करने को मजबूर होंगे या टिकट के चक्कर में यात्रियों की ट्रेनें ही छूट जाएगी. कई टिकट काउंटर बंद मिले होली (Holi) से घर जाने वाले यात्रियों की संख्या बढ़ने के वजह से सोमवार को अनारक्षित टिकट काउंटरों ( unreserved ticket counter ) में यात्रियों की लंबी लाईने देखने को मिली. टिकट लेने के लिए यात्रियों को आधे घंटे से अधिक की वेटिंग मिली, ऐसी स्थिति में भी रेलवे ने कई टिकट काउंटरों को बंद ही रहा. यहां टिकट काउंटर नंबर 6, 7, 8 और 3 और 2 नंबर काउंटर बंद मिले. यानी कुल 5 टिकट काउंटर रायपुर रेलवे स्टेशन में बंद पड़े है. इसके अलावा टिकट काउंटर नंबर 5 सिर्फ डिजिटल पेमेंट (Digital Payment) से टिकट लेने वाले यात्रियों के लिए खुला मिला, काउंटर नंबर 4 में कैश और ऑन लाइन दोनो पेमेंट मोड की सुविधा मिली. वहीं 1 नंबर काउंटर केवल महिलाओं के लिए रिजवर्ड है, लेकिन उन्हें यहां भी सिर्फ ऑन लाईन पेमेंट में ही टिकटें दी जा रही थी. इसका मतलब ये है कि सिर्फ एक टिकट काउंटर में यात्रियों को कैश में टिकटें उपलब्ध है, हालांकि यहां 2 एटीवीएम (ATVM) मशीनें भी शुरू मिली जहां यात्री टिकट ले सकते है. आरक्षण केंद्र का भी यही हाल, तत्काल टिकटें लेने के लिए यात्री हो रहे परेशान आरक्षण केंद्र में टिकटें लेने जाने वाले यात्रियों का भी यही हाल है. यहां भी कई काउंटरों में कैश लेन-देन बंद कर दिया गया है. इसका सबसे ज्यादा नुकसान उन यात्रियों को हो रहा है जो तत्काल टिकटें लेने आरक्षण केंद्र पहुंच रहे है. क्योंकि डिजिटल पेमेंट के प्रोसेस में 30 से 50 सैकेंड का वक्त लग ही जाता है. ऐसे में 1-2 नंबर पर खड़े यात्रियों को ही टिकटें मिल पाती है और 3 के पहुंचते तक टिकटें खत्म हो जाती है. इसके अलावा यहां वो भी यात्री परेशान हो रहे है जिनके पास केवल कैश ही मौजूद है. Raipur Parcel Office में कैश बंद अब यदि आपको पार्सल ऑफिस में बुकिंग के लिए जाना है तो जेब में कैश रखकर जाने से आपका सामान यहां बुकिंग नहीं होगा. क्योंकि यहां कैश काउंटर (Cash Counter) में कैश लेन-देन पूरे तरीके से बंद कर दिया गया है. यानी आपे पास कैश होते हुए भी आपका पार्सल यहां बुकिंग नहीं होगा या तो अपना पार्सल बुकिंग करने के लिए आपको दलालों से संपर्क करना पड़ेगा. लंबी लाईन से बचना है तो डाउनलोड करे ये APP रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यात्री UTS App के माध्यम से आसानी से टिकट बुक कर सकते है और लंबी लाईनों से छुटकारा पा सकते है. भारतीय रेलवे (Indian Railway) का UTS (Unreserved Ticketing System) मोबाइल ऐप आपकी यात्रा को सरल और सुविधाजनक बना सकता है. इस ऐप के जरिए आप बिना किसी परेशानी के अनरिजर्व्ड, प्लेटफॉर्म और सीजन टिकट बुक कर सकते हैं. यह ऐप खासकर उन यात्रियों के लिए फायदेमंद है जो रोज ट्रेन से यात्रा करते हैं या जिन्हें अचानक यात्रा करनी होती है. ऐप का उपयोग करने के लिए, यात्रियों को पहले अपना मोबाइल नंबर और पासवर्ड से रिजिस्टर करना होता है. इसके के बाद, आप इस ऐप का उपयोग टिकट बुक करने, टिकट की उपलब्धता देखने, और ट्रेन के समय की जानकारी प्राप्त करने के लिए कर सकते हैं. यदि जरूरत हो तो टिकट को कैंसिल भी किया जा सकता है. यहां हम आपको इस आप से जुड़ी हर जानकारी देने जा रहे हैं. UTS ऐप क्या है और कैसे काम करता है? अनरिज़र्व टिकटिंग सिस्टम (UTS) एक मोबाइल एप्लिकेशन है जिसे 2014 में रेलवे सूचना प्रणाली केंद्र (CRIS) द्वारा लॉन्च किया गया था, जो भारतीय रेलवे का एक सहायक संगठन है. इस ऐप के माध्यम से यात्री अनरिज़र्व ट्रेन टिकट जनरेट या कैंसिल कर सकते हैं, सीज़नल टिकट बुक कर सकते हैं, पास को  रिन्यू कर सकरते हैं, और प्लेटफॉर्म टिकट खरीद सकते हैं. यह उन यात्रियों के लिए फायदेमंद है जो अक्सर यात्रा करते हैं और अचानक कहीं जाने की आवश्यकता होती है. UTS ऐप को Android और iOS प्लेटफार्म दोनों के लिए संबंधित ऐप स्टोर्स से मुफ्त में डाउनलोड किया जा सकता है. UTS  App से कितने तरह की ट्रेन टिकट बुकिंग कर सकते हैं?     यात्री UTS Android मोबाइल टिकटिंग ऐप का उपयोग करके पांच तरह के ट्रेन टिकट बुक कर सकते हैं:     सामान्य टिकट बुकिंग (Normal Ticket Booking)     क्विक टिकट बुकिंग (Quick Ticket Booking)     प्लेटफॉर्म  टिकट बुकिंग (Platform Ticket Booking)     सीज़नल टिकट बुकिंग/रिन्यूअल (Season Ticket Booking/Renewal)     QR बुकिंग (QR Booking) UTS ऐप पर रजिस्ट्रेशन करने का प्रोसेस     Google Play या Apple iOS पर UTS मोबाइल एप्लिकेशन सर्च करें और इसे डाउनलोड करें.     ऐप पर रजिस्ट्रेशन करने के लिए अपना फोन नंबर, नाम, लिंग, और जन्म तिथि दर्ज करें.     एक पासवर्ड जनरेटर उपलब्ध होगा. UTS ऐप के लिए एक याद पहने वाला मजबूत  पासवर्ड बनाएं.     अब UTS मोबाइल ऐप की टर्म और कंडीशन से सहमत हों.     रजिस्ट्रर बटन पर क्लिक करें.     टिकट बुक करने के लिए, अपना यूज़र आईडी और पासवर्ड दर्ज करें.     ट्रेन टिकट बुक करने के लिए इन स्टेप्स को फॉलो करें:     सबसे पहले, पेपरलेस या पेपर टिकट का चयन करें.     “Depart from” (जहां से यात्रा शुरू होगी) और “Going to” (जहां जाना है) स्टेशन चुनें.     “Next” पर क्लिक करें और फिर “Get Fare” पर क्लिक करें.     “Book ticket” बटन दबाएं … Read more

470 किमी लंबे इलाके में बहने वाली सिंध नदी कई जगहों पर सूखकर गड्ढों में तब्दील हो गई

विदिशा एमपी की एक बड़ी नदी सूख गई है। 470 किमी लंबे इलाके में बहने वाली यह नदी कई जगहों पर सूखकर गड्ढों में तब्दील हो गई है वहीं कुछ जगहों पर नदी पोखरनुमा बन गई है जहां बहुत कम पानी बचा है। नदी की दुर्दशा से इसके किनारों की बसाहटों में हाहाकार सा मच गया है। एमपी के विदिशा जिले से निकलकर यूपी के जालौन में यमुना से मिलनेवाली सिंध नदी का यह बुरा हाल हुआ है। भीषण गर्मी के कारण मार्च में ही सिंध नदी के सूख जाने से कई गांवों में पीने के पानी का संकट गहरा गया है।  सिंध नदी विदिशा जिले के सिरोंज तहसील के नैनवास कला स्थित ताल से निकलती है जोकि यमुना की सहायक नदी है। यह नदी एमपी के गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, दतिया, ग्वालियर और भिंड जिलों से होकर बहती है उत्तरप्रदेश के जालौन जिले में यमुना नदी में मिलती है। इस प्रकार मालवा के पठार से उत्तर-उत्तर-पूर्व की ओर बहती हुई चंबल और यमुना के संगम के ठीक बाद यमुना में समाती है। जब हर तरफ नदियों के प्रदूषित हो जाने से लोग चिंतित हैं तब सिंध नदी एक खुशनुमा एहसास कराती रही है। यह नदी देश की सबसे साफ सुथरी नदियों में शामिल है, बहुतायत में अब भी लोग सिंध के पानी का उपयोग पीने के लिए करते हैं। यही कारण है कि सिंध नदी का सूख जाना लाखों लोगों के लिए चिंता का कारण बन गया है।  अशोकनगर में​ सिंध में पानी ही नहीं बचा है। जिले के अंतिम छोर पर पीलीघटा में नदी का दृश्य, सूखती सिंध की हालत के बारे में बहुत कुछ कह रहा है। यहां नदी के सूख जाने से पोखर बन गए हैं। इन हिस्सों में मवेशी अपनी प्यास बुझाने जाते हैं। अब इन पोखरों पर भी सकंट मंडरा गया है। इनमें भी आसपास के किसानों ने पाइप डाल रखे हैं और मोटर पंप से पानी खींचा जा रहा है। सिंध की कुल 470 किलोमीटर (290 मील) की लंबाई में से 461 किलोमीटर (286 मील) मध्यप्रदेश में और महज 9 किलोमीटर (5.6 मील) उत्तर प्रदेश में हैं। सिंध के सूखने से इसके किनारों पर रहनेवालों के लिए पेयजल का संकट गहरा रहा है। दतिया जिले के सेंवढ़ा तहसील के किसान और मल्लाह समुदाय के लोग अब भी सिंध नदी का पानी पीते हैं। पूरे इलाके में होनेवाली शादियों या धार्मिक कार्यक्रमों के लिए लोग सिंध का पानी ही सीधे इस्तेमाल करते हैं। नदी से टैंक में पानी स्टोर कर पेयजल के रूप मे इसका उपयोग करते हैं। सिंध किनारे स्थित खमरौली गांव के लोग कहते हैं कि यह दूसरी नदियों के पानी से कई गुना स्वच्छ है। बरसात के दिनों को छोड़ कर हम हर मौसम में सिंध का पानी पीते हैं। सिंध नदी के स्वच्छ होने की पुष्टि कई सरकारी मानकों से भी होती है। इस नदी के कम प्रदूषित होने की सबसे बड़ी वजह मानव और औद्योगिक गतिविधियों का कम होना है। सिंध के किनारे पर एक भी बड़ी आबादी वाला शहर नहीं है। ग्वालियर जिले का डबरा सबसे बड़ा शहर है जिसकी आबादी 2011 की जनगणना के अनुसार महज 2.37 लाख थी। मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने गंगा बेसिन में जिन 19 प्रमुख औद्योगिक इकाइयों को प्रदूषण के खतरे के मद्देनजर चिह्नित किया है उसमें एक भी सिंध नदी के तट पर नहीं है। इसके तट पर अधिकांश छोटे शहर या कस्बे हैं जहां बड़े उद्योग या कल-कारखाने नहीं हैं। सिंध किनारे के गांवों में मुख्यत: खेती और पशुपालन किया जाता है। सीमित संसाधन व कम जरूरत के कारण सिंध स्वच्छ बनी रही लेकिन इसके सूखने से चिंता व्याप्त हो गई है।

MP में औद्योगिक विकास और निवेशकों को बढ़ावा देने, नगरों के सुव्यवस्थित विकास के लिए दो मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र बनाने की कवायद शुरू

भोपाल  मध्यप्रदेश में औद्योगिक विकास और निवेशकों को बढ़ावा देने के साथ-साथ नगरों के सुव्यवस्थित विकास के लिए दो मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र बनाने की कवायद शुरू हो गई है। पहला मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र इंदौर-उज्जैन-देवास और धार को मिलाकर और दूसरा मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र भोपाल-सीहोर, रायसेन-विदिशा-ब्यावरा (राजगढ़) को मिलाकर विकसित किया जाएगा।  केंद्र के विजन के मुताबिक राज्य के प्रमुख संभाग मुख्यालय ग्वालियर, सागर, रीवा, जबलपुर, नर्मदापुरम और शहडोल को रीजनल इकोनॉमिक ग्रोथ हब के रूप में विकसित करने की तैयारी है। सरकार का यह प्रयास अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के साथ-साथ रोजगार, व्यापार और निवेश के नये अवसरों को भी बढ़ावा देने के लिए किया जा रहा है। सुविधाओं में होगा सुधार जानकारी के तहत इंदौर मेट्रोपॉलिटन सिटी में इंदौर का 100 प्रतिशत क्षेत्र शामिल किया जाएगा, जबकि उज्जैन का 44 प्रतिशत धार और नागदा का भी कुछ हिस्सा इसमें जोड़ा जाएगा। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य औद्योगिक और शहरी विकास को संगठित तरीके से आगे बढ़ाना है, जिससे आधारभूत सुविधाओं में सुधार हो और निवेशकों को आकर्षित किया जा सके।   बनेंगी पांच नई तहसीलें, सभी 8 तहसीलों के होंगे अपने भवन भोपाल वासियों को जमीन से लेकर राजस्व के मामले को निपटाने के लिए अब दूर नहीं जाना होगा। जिला पुनर्गठन के प्रशासनिक प्रस्ताव पर शासन जल्द ही अंतिम मुहर लगाएगा। जिला प्रशासन द्वारा भेजे प्रस्ताव में शासन की ओर से मांगी गई आपत्तियों पर एसडीएम और तहसीलदार को 15 दिन में जवाब देना है। नीति के तहत भोपाल में पांच नई तहसीलों का गठन होगा। मौजूदा तीन तहसीलों के साथ पांच नई तहसीलों(Five New Tehsil) के साथ फिर कुल संख्या आठ हो जाएगी। इससे लोगों को अपने आवास क्षेत्र में ही तहसील कार्यालय में कार्य करवाना आसान हो जाएगा। 10 बदलाव प्रस्तावित ● मौजूदा उपनगर ही नई तहसील बनेंगे। बैरागढ़, कोलार, भेल गोविंदपुरा, पुराना शहर व नया शहर, नर्मदापुरम रोड की नई तहसील होंगी। ● नई तहसीलें दूरी व क्षेत्रफल के अनुसार अलग से नजूल क्षेत्र तय करेंगे। ● शहरी और ग्रामीण क्षेत्र का नक्शा अलग किया जाएगा। ● जिला-तहसील क्षेत्रों को नगर निगम के वार्ड से भी जोड़ा जाएगा। ● तहसील व नजूल में तहसील अधिकारियों व कर्मचारियों की संख्या बढ़ेगी। ● शहरी क्षेत्र की तहसीलों में आबादी चार लाख के भीतर तय की जाएगी। इसलिए जरूरी पुनर्गठन अभी जिले में कोलार, हुजूर व बैरसिया तहसील हैं। आठ नजूल क्षेत्र हैं। इनके एसडीएम है। कोलार, बैरसिया को छोडकऱ बाकी में तहसील(Five New Tehsil) कार्यालय अन्य क्षेत्रों में हैं। एमपी नगर नजूल कोलार तहसील में है तो बैरागढ़, हुजूर, ओल्ड सिटी नजूल पुराने शहर में कलेक्ट्रेट में है। गोविंदपुरा भी पुराने शहर के कलेक्टे्रट में है। हुजूर तहसील में शहर व ग्रामीण का 70 फीसदी क्षेत्र है जिससे काम कठिन होता है। जिले के पुनर्गठन की प्रक्रिया की जा रही है। लोगों की सुविधा की दृष्टि से बेहतर योजना तय की जा रही है। इससे सबको लाभ होगा। – कौशलेंद्र विक्रमसिंह, कलेक्टर

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और बिल गेट्स, सोशल मीडिया अकाउंट एक्स और इंस्टाग्राम पर शेयर कीं तस्वीरें

भोपाल/ नई दिल्ली  केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान (Union Minister Shivraj Singh Chauhan) ने माइक्रोसॉफ्ट के को-फाउंडर तथा गेट्स फाउंडेशन के सह-संस्थापक बिल गेट्स (Bill Gates) से मुलाकात की। वे दिल्ली में कृषि भवन (Krishi Bhawan Delhi) में आयोजित एक बैठक में शामिल हुए। बैठक में इन मुद्दों पर हुई चर्चा इस बैठक में शिवराज सिंह चौहान ने कृषि, खाद्य सुरक्षा, महिला सशक्तिकरण, तकनीकी नवाचार और ग्रामीण विकास से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की। चौहान ने भारत और गेट्स फाउंडेशन के बीच साझेदारी को गहरा करने की संभावनाओं पर जोर दिया। उनका पूरा फोकस डिजिटल कृषि, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, बायोटेक्नोलॉजी और जलवायु अनुकूलित कृषि तकनीकों के क्षेत्रों पर रहा। इस दौरान उन्होंने कहा कि, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हमारा आजीविका मिशन महिला सशक्तिकरण का आंदोलन बन गया है, जिसने महिलाओं की जिंदगी बदल दी है। बिल गेट्स ने की कृषि अनुसंधान की तारीफ बिल गेट्स ने इस दौरान भारत में हो रहे कृषि अनुसंधान की सराहना की। प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि इससे पूरी दुनिया को बहुत फायदा हो सकता है। उन्होंने भारत की नेतृत्व क्षमता और नवाचार को वैश्विक प्रगति के लिए महत्वपूर्ण बताया। शिवराज सिंह चौहान ने ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के सिद्धांत पर चलते हुए वैश्विक कल्याण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने आशा जताई कि गेट्स फाउंडेशन और अन्य वैश्विक साझेदारों के साथ मिलकर हम नवाचार, तकनीक और समावेशी विकास को बढ़ावा देकर भूखरहित, सशक्त और आत्मनिर्भर विश्व का निर्माण करेंगे। बैठक में कृषि पैदावार बढ़ाने, डिजिटल कृषि विस्तार प्रणाली, प्रिसीजन एग्रीकल्चर, पोषण सुरक्षा, समावेशी आजीविका कार्यक्रम, उन्नत पशु वैक्सीन, कृषि और ग्रामीण विकास में वैश्विक सहयोग को बढ़ाने के उपायों पर भी विस्तृत चर्चा की गई। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे को सहयोग करने के प्रति आश्वस्त किया। शिवराज सिंह चौहान ने किया ट्वीट, इंस्टा पर शेयर किया वीडियो बता दें कि केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बिल गेट्स के साथ महत्वपूर्ण बैठक को लेकर अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स और इंस्टाग्राम पर भी भी शेयर किया। इस पोस्ट में शिवराज ने लिखा कि…     बिल गेट्स फाउंडेशन द्वारा विश्व के कई देशों में कृषि और ग्रामीण विकास सहित विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य किया जा रहा है।     आज डिजिटल कृषि में सहयोग, ICAR के साथ अनुसंधान एवं विकास में सहयोग की संभावनाएँ, ग्रामीण विकास में सहयोग के साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंसी सहित… pic.twitter.com/YpgaetiOC6     — Shivraj Singh Chouhan (@ChouhanShivraj) March 17, 2025 ‘आज कृषि भवन, नई दिल्ली में गेट्स फाउंडेशन के सह-संस्थापक श्री बिल गेट्स से मुलाकात की। हमने कृषि, खाद्य सुरक्षा, महिला सशक्तिकरण, तकनीकी नवाचार और ग्रामीण विकास से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की। भारत और गेट्स फाउंडेशन के बीच साझेदारी को गहरा करने की असीम संभावनाएं हैं, विशेषकर डिजिटल कृषि, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, बायोटेक्नोलॉजी एवं जलवायु अनुकूलित कृषि तकनीकों के क्षेत्र में। हम नवाचार, तकनीक और समावेशी विकास को बढ़ावा देकर भूखरहित, सशक्त और आत्मनिर्भर विश्व के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध हैं।’

‘गामिनी’ और 4 शावकों को मिली आजादी… Kuno के खुले जंगल में अब 17 चीते

 श्योपुर भारत की महत्वाकांक्षी चीता संरक्षण परियोजना के तहत सोमवार को मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क (KNP) में एक और बड़ा कदम उठाया गया. दक्षिण अफ्रीकी मादा चीता गामिनी और उसके 4 शावकों को पार्क के खजूरी वन क्षेत्र में खुले जंगल में सफलतापूर्वक छोड़ दिया गया. सिंह परियोजना के डायरेक्टर ने बताया कि मां और चारों शावक पूरी तरह स्वस्थ हैं. खजूरी वन क्षेत्र अहेरा पर्यटन जोन का हिस्सा है, जिसके कारण अब पर्यटकों को सफारी के दौरान चीतों को देखने का मौका मिल सकता है. 17 चीते अब खुले जंगल में गामिनी और उसके चार शावकों को जंगल में छोड़े जाने के बाद अब कूनो नेशनल पार्क में 17 चीते खुले में स्वतंत्र रूप से विचरण कर रहे हैं. अधिकारियों ने पुष्टि की कि सभी चीते स्वस्थ हैं गामिनी ने 10 मार्च, 2024 को छह शावकों को जन्म दिया था, लेकिन बाद में दो शावकों की मौत हो गई. इससे पहले, 21 फरवरी 2025 को नामीबियाई मादा चीता ज्वाला और उसके चार शावकों को भी केएनपी के जंगल में छोड़ा गया था. चीता परियोजना की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 सितंबर 2022 को अपने जन्मदिन के अवसर पर नामीबिया से लाए गए 8 चीतों (पांच मादा और तीन नर) को कूनो नेशनल पार्क में छोड़कर इस ऐतिहासिक परियोजना की शुरुआत की थी. इसके बाद फरवरी 2023 में दक्षिण अफ्रीका से 12 अतिरिक्त चीतों को केएनपी में स्थानांतरित किया गया. इस परियोजना का उद्देश्य भारत में चीतों की विलुप्त प्रजाति को पुनर्जनन करना और वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ पर्यटन को बढ़ावा देना है. KNP में चीतों की कुल संख्या 26 वर्तमान में कूनो नेशनल पार्क में चीतों की कुल संख्या 26 हो गई है, जिसमें भारतीय धरती पर जन्मे 14 शावक शामिल हैं. यह परियोजना न केवल जैव विविधता को संरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है, बल्कि क्षेत्र में पर्यटन और रोजगार के नए अवसर भी पैदा कर रही है. गामिनी और उसके शावकों को जंगल में छोड़ने से चीता संरक्षण के प्रयासों को और मजबूती मिली है. खाजुरी वन क्षेत्र में छोड़ा गया गामिनी और उसके शावकों को अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक उत्तम कुमार शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि गामिनी और उसके 12 माह के चार शावकों (दो नर और दो मादा) को श्योपुर जिले के खाजुरी वन क्षेत्र में छोड़ा गया है। यह क्षेत्र अहेरा टूरिज्म ज़ोन का हिस्सा है, जिससे अब पर्यटकों को जंगल सफारी के दौरान चीतों को देखने का मौका मिल सकता है। वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि कूनो नेशनल पार्क में चीतों की बढ़ती संख्या से पर्यटकों को उनके प्राकृतिक आवास में देखने का अवसर मिलेगा, जिससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है। गामिनी के पहले शावकों की जानकारी गामिनी ने 10 मार्च 2024 को अपने पहले लिटर में छह शावकों को जन्म दिया था, लेकिन बाद में दो शावकों की मृत्यु हो गई थी।

अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट ने 400 करोड़ सरकार को दिए टैक्स, 5 साल में खर्च किए 2150 करोड़

अयोध्या  श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सचिव चंपत राय ने रविवार को कहा कि ट्रस्ट ने धार्मिक पर्यटन में उछाल के बीच पिछले पांच वर्षों में सरकार को लगभग 400 करोड़ रुपये का कर चुकाया है। उन्होंने कहा कि यह राशि पांच फरवरी 2020 से पांच फरवरी 2025 के बीच चुकाई गई। उन्होंने कहा कि इसमें से 270 करोड़ रुपये माल और सेवा कर (जीएसटी) के रूप में भुगतान किए गए, जबकि शेष 130 करोड़ रुपये अन्य विभिन्न कर श्रेणियों के तहत भुगतान किए गए। उन्होंने कहा कि अयोध्या में श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या में 10 गुना वृद्धि हुई है, जिससे यह एक प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्र बन गया है और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं। उन्होंने कहा कि महाकुंभ के दौरान 1.26 करोड़ श्रद्धालु अयोध्या आए थे। राय ने कहा कि ट्रस्ट के वित्तीय रिकार्ड का नियमित रूप से नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) के अधिकारियों द्वारा ऑडिट किया जाता है। जीएसटी में 272 करोड़ रुपये दिए गए राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक मणिरामदास छावनी में संपन्न हुई। न्यास की बैठक संपन्न हुई। सात सदस्य मौके पर रहे उपस्थित, चार सदस्य विशेष आमंत्रित के तौर पर बैठक में उपस्थित थे। बैठक में सदस्य कामेश्वर चौपाल और पुजारी सत्येंद्र दास जी श्रद्धांजलि दी। बैठक में अकाउंट में जानकारियां दी गईं। 5 फरवरी 2020 को ट्रस्ट का गठन हुआ था। 5 वर्षों में ट्रस्ट के अकाउंट से सरकार के विभिन्न एजेंसियों में 396 करोड़ का भुगतान हुआ है। अकेले जीएसटी 272 करोड़ रुपये दी गई। 2150 करोड़ कुल खर्च किया गया अयोध्या विकास प्राधिकरण को जन्मभूमि के नक्शे के लिए 5 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। जमीन रजिस्ट्रेशन फीस रिवेन्यू टैक्स के तौर पर 29 करोड़ का भुगतान किया गया है। 10 करोड़ का बिजली का बिल का भरा गया है। वहीं पिछले 5 वर्षों में 2150 करोड़ कुल खर्च का भुगतान किया है। वहीं उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम को राम मंदिर ट्रस्ट की तरफ से200 करोड़ रुपये का काम दिया गया है। जून तक पूरा हो जाएगा राम मंदिर मंदिर निर्माण को लेकर के भी बैठक में जानकारी दी गई। रामलला का मंदिर जून तक तैयार हो जाएगा। परकोटा निर्माण का कार्य लगभग अक्टूबर तक चलेगा। शबरी निषाद और ऋषियों के सप्त मंदिर मई महीने में पूरे हो जाएगा। शेषा अवतार मंदिर का निर्माण अगस्त में पूरा होगा। मंदिर निर्माण का कार्य 96 प्रतिशत हो गया है। 30 अप्रैल तक राम मंदिर में बनाए जाने वाले सभी मंदिर की मूर्तियां अपने स्थान पर स्थापित हो जाएगी। राम मंदिर में मुख्य पुजारी नहीं होगा राम मंदिर में यात्रियों की सुविधा के लिए गेस्ट हाउस बनाया जाएगा। यात्रियों के सहयोग से नॉमिनल खर्च देकर के यात्री इसका लाभ ले सकते हैं। वहीं लार्सन टुब्रो को मंदिर निर्माण के लिए 1200 करोड़ रुपये भुगतान किया गया। साथ ही बताया गया कि आचार्य सत्येंद्र दास के बाद अब राम मंदिर में कोई मुख्य पुजारी नहीं होगा।

मंडला विधायक ओमकार सिंह मरकाम ने कहा कि सरकार मंडला एनकाउंटर की जांच कराने को तैयार नहीं

भोपाल  मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र का आज सोमवार को 5वां दिन है। सदन में प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस विधायकों ने मंडला में हुए नक्सली एनकाउंटर को फर्जी बताया। साथ ही, उस एनकाउंटर की जांच की मांग करते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा है। यही नहीं, सदन में काफी देर नारेबाजी करते हुए कांग्रेस ने वॉकआउट कर दिया।  मंडला विधायक ओमकार सिंह मरकाम ने कहा कि सरकार मंडला एनकाउंटर की जांच कराने को तैयार नहीं है। विधानसभा अध्यक्ष ने भी हमारी मांग खारिज कर दी। भाजपा सरकार के इस तानाशाह रवैये के विरोध में हमने विधानसभा की कार्यवाही का बहिष्कार किया है। बजट पर चर्चा हुई वहीं, सदन में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने मध्य प्रदेश नगर तथा ग्राम निवेश संशोधन विधेयक पेश किया। इसके बाद बजट पर चर्चा शुरु हुई। कमलनाथ पहुंचे विधानसभा इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ भी सोमवार को विधानसभा पहुंचे। उन्होंने मऊगंज में एएसआई की हत्या और इंदौर में वकील-पुलिस झड़प को लेकर कहा कि मध्य प्रदेश कानून-व्यवस्था की नहीं, अव्यवस्था की राजधानी बन चुका है। भ्रष्टाचार की राजधानी बन चुका है। पूरा देश मध्य प्रदेश की ओर देख रहा है। जल जीवन मिशन में 17,136 करोड़ का प्रावधान रहली से भाजपा विधायक गोपाल भार्गव ने बजट पर चर्चा के दौरान कहा कि एक दौर था, जब पानी का संकट गंभीर रूप धारण कर चुका था। लोगों को 15 किलोमीटर दूर तक सिर पर गागर रखकर पानी लाने के लिए जाना पड़ता था। लेकिन, अब स्थिति में बड़ा बदलाव आया है। सरकार ने जल जीवन मिशन के तहत 17,136 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। अब घर-घर में नल से पानी मिलेगा। भार्गव के अनुसार, पानी के संकट से जूझ रहे कई गांवों में तो बेटों के विवाह तक नहीं हो पाते थे। लोग ऐसे गांवों में अपनी बेटियों का विवाह करने से कतराते थे। लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल गए हैं और इन गांवों में भी सुविधाएं उपलब्ध होने लगी हैं। मंडला एनकाउंटर की जांच की मांग कांग्रेस विधायकों ने मंडला में हुए नक्सली एनकाउंटर को फर्जी बताते हुए जांच की मांग की। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर नारेबाजी करने के बाद सदन से वॉकआउट किया। इसपर मंडला विधायक ओमकार सिंह मरकाम ने कहा कि सरकार मंडला एनकाउंटर की जांच कराने को तैयार नहीं है। विधानसभा अध्यक्ष ने भी हमारी मांग खारिज कर दी है। भाजपा सरकार के इस तानाशाह रवैये के विरोध में हमने विधानसभा की कार्यवाही का बहिष्कार किया है। लोकायुक्त से मिलने पहुंची कांग्रेस नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में कांग्रेस विधायकों का एक प्रतिनिधिमंडल भोपाल में लोकायुक्त से मिलने पहुंचा है। यह प्रतिनिधिमंडल ने लोकायुक्त को परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा घोटाले से संबंधित सबूत सौंपे। साथ ही, प्रतिनिधिमंडल लोकायुक्त से इस मामले की जांच में तेजी लाने की मांग की। लाल बसों का मुद्दा गर्माया भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने भोपाल में संचालित लाल बसों के संचालन पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि भोपाल की किन-किन रूटों पर लाल बसों का संचालन हो रहा है और किन एजेंसियों से इन बसों का संचालन किया जा रहा है। शर्मा ने यह भी सवाल किया कि अगर लाल बसों का परिचालन सफलतापूर्वक नहीं हो रहा है, तो इसके लिए जिम्मेदार एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है। भोपाल से आसपास के इलाकों तक बसें नहीं चल रही रामेश्वर ने बताया कि भोपाल से मंडीदीप, सांची, झगरिया, सीहोर, रायसेन और भोजपुर जैसे इलाकों तक बसें नहीं चल रही हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में 100 नई बसें आने वाली हैं, और यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि पहले की तरह कोई गड़बड़ी न हो। उन्होंने जोर देकर कहा कि, नई बसों के संचालन की पूरी निगरानी होनी चाहिए। साथ ही, पहले बस संचालन में हुई अनियमितताओं की जांच के लिए एक समिति गठित की जानी चाहिए। इसपर परिवहन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने जवाब देते हुए कहा- प्रमुख सचिव को जांच के निर्देश दे दिए जाएंगे।

वक्फ बोर्ड अध्यक्ष सनवर पटेल का कांग्रेस पर आरोप, बिल पर बढ़ा विवाद, जंतर-मंतर धरना गैरजरूरी…

भोपाल मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष सनवर पटेल ने जंतर-मंतर पर वक्फ संशोधन बिल के खिलाफ चल रहे धरने को गैरजरूरी करार दिया है. उन्होंने कहा कि हर किसी को अपना मत रखने का अधिकार है, लेकिन इस प्रदर्शन की कोई जरूरत नहीं है. पटेल ने इस मुद्दे पर कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पार्टी समाज को गुमराह और बांटने में माहिर है, जो कि वह बरसों से करती आ रही है और अब भी पर्दे के पीछे से ऐसा प्रयास कर रही है. सनवर पटेल ने कहा, “जंतर-मंतर पर वक्फ बिल को लेकर जो प्रदर्शन हो रहा है, उसकी कोई जरूरत नहीं है. जेपीसी (संयुक्त संसदीय समिति) में जो संशोधन प्रस्तावित हैं, वे अभी अंतिम रूप से तय नहीं हुए हैं. फिर भी लोगों को डराने का काम किया जा रहा है कि वक्फ की संपत्ति पर कब्जा हो जाएगा. सच यह है कि अगर वक्फ की संपत्ति वैधानिक है, तो एक इंच भी संपत्ति कोई नहीं ले सकता. सुप्रीम कोर्ट भी कह चुका है कि ‘Once Waqf is always Waqf’.” कांग्रेस पर तीखा प्रहार उन्होंने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा, “समाज को गुमराह करना और समाज को बांटने में कांग्रेस को महारथ हासिल है. यह पार्टी बरसों से ऐसा करती आ रही है और आज भी पर्दे के पीछे से इस काम को अंजाम देने की कोशिश कर रही है.” पटेल ने दावा किया कि वक्फ बिल से गरीबों को लाभ होगा, जो अब तक इस व्यवस्था से वंचित रहे हैं. गरीबों और कब्जाधारियों पर टिप्पणी वक्फ बोर्ड अध्यक्ष ने कहा, “इस बिल से हमारे समाज के गरीब लोगों को लाभ मिलेगा, जो अब तक इस व्यवस्था से अछूते रहे हैं. लेकिन जिनके पेट में दर्द हो रहा है, उन लोगों ने बड़ी-बड़ी संपत्तियों पर कब्जा कर रखा है और गरीबों को लाभ नहीं मिलने दिया. ऐसे करीब 95% लोग हमारे ही समाज से हैं.” उन्होंने जोर देकर कहा कि वैधानिक वक्फ संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित रहेगी और कोई भी उस पर अतिक्रमण नहीं कर सकता. माहौल और आगे की राह पटेल के बयान के बाद इस मुद्दे पर सियासी बहस और तेज हो गई है. जंतर-मंतर पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड समेत कई संगठनों द्वारा आयोजित धरना आज भी जारी है, जहां वक्फ संशोधन बिल को लेकर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश हो रही है. दूसरी ओर, कैबिनेट मंत्री दर्जा प्राप्त मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड अध्यक्ष पटेल का यह बयान सरकार के रुख का समर्थन करता नजर आ रहा है, जो बिल को पारदर्शिता और गरीबों के कल्याण से जोड़ रही है. अब यह देखना होगा कि जेपीसी की रिपोर्ट और बिल पर आगे की कार्रवाई कैसे होती है.  

भारत और चीन अब 2020 से पहले की स्थितियों को बहाल करने के लिए काम कर रहे हैं: पीएम मोदी

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मशहूर अमेरिकी पॉडकास्टर लेक्स फ्रिडमैन के साथ पॉडकास्ट रिलीज हो चुका है। पॉडकास्ट के दौरान पीएम मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के साथ भारत के रिश्तों को लेकर भी बात की। डोनाल्ड ट्रंप की ‘विनम्रता’ की प्रशंसा करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उनके दिमाग में एक स्पष्ट रोडमैप है, जिनमें से प्रत्येक उन्हें उनके लक्ष्यों की ओर ले जाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। पीएम मोदी ने कहा कि ट्रंप ‘अमेरिका फ़र्स्ट’ के पक्षधर हैं जबकि ‘मैं इंडिया फ़र्स्ट’ के पक्ष में हूं। हाउडी मोदी कार्यक्रम में ट्रंप ने ऐसा क्या किया? राष्ट्रपति ट्रंप का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “सितंबर 2019 में ह्यूस्टन में हुए हाउडी मोदी कार्यक्रम में ट्रंप और मैं दोनों वहां थे और पूरा स्टेडियम पूरी तरह से भरा हुआ था। हम दोनों ने भाषण दिया और वह नीचे बैठे, मेरी बातें सुनते रहे। अब यह उनकी विनम्रता है। जब मैं मंच से बोल रहा था, तब अमेरिका के राष्ट्रपति दर्शकों में बैठे थे, यह उनकी ओर से एक इशारा था। भाषण के बाद मैंने ट्रंप को स्टेडियम का चक्कर लगाने के लिए कहा और बिना किसी हिचकिचाहट के वह सहमत हो गए और मेरे साथ चलने लगे। उनकी पूरी सुरक्षा व्यवस्था चौंक गई, लेकिन मेरे लिए वह क्षण वास्तव में दिल को छू लेने वाला था। इसने मुझे दिखाया कि इस आदमी में साहस है। वह अपने फैसले खुद लेता है। यह आपसी विश्वास की भावना थी, हमारे बीच एक मजबूत बंधन था जिसे मैंने उस दिन वास्तव में देखा और जिस तरह से मैंने राष्ट्रपति ट्रंप को उस दिन सुरक्षाकर्मियों से पूछे बिना हजारों की भीड़ में चलते हुए देखा, वह वास्तव में आश्चर्यजनक था।” ‘जब ट्रंप पर हुआ हमला’ पिछले साल जुलाई में ट्रंप पर हुए जानलेवा हमले का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “मैंने उसी दृढ़ निश्चयी और दृढ़निश्चयी राष्ट्रपति ट्रंप को देखा, जो उस स्टेडियम में मेरे साथ हाथ में हाथ डालकर चल रहे थे। गोली लगने के बाद भी वे अमेरिका के प्रति अडिग रहे। उनका जीवन उनके राष्ट्र के लिए है। उनमे अमेरिका फर्स्ट भावना दिखाई दी, ठीक वैसे ही जैसे मैं नेशन फर्स्ट में विश्वास करता हूं। मैं इंडिया फर्स्ट के लिए खड़ा हूं और यही कारण है कि हम इतने अच्छे से जुड़ते हैं।” अपनी पहली मुलाकात को याद करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “जिस क्षण मैंने व्हाइट हाउस में कदम रखा, उन्होंने तुरंत सभी औपचारिक प्रोटोकॉल तोड़ दिए। फिर, वे व्यक्तिगत रूप से मुझे व्हाइट हाउस के दौरे पर ले गए। जब ​​उन्होंने मुझे चारों ओर दिखाया, तो मैंने एक खास बात देखी, उनके हाथ में कोई नोट या क्यू कार्ड नहीं था, न ही उनकी सहायता के लिए कोई उनके साथ था। उन्होंने खुद ही चीजों को दिखाया। मुझे यह अविश्वसनीय रूप से प्रभावशाली लगा। इससे पता चलता है कि वे राष्ट्रपति पद का कितना सम्मान करते थे और अमेरिका के इतिहास से कितने सम्मानजनक और गहरे जुड़े हुए थे। बाइडेन शासन के दौरान जब भी हम दोनों को जानने वाला कोई व्यक्ति उनसे (ट्रंप) मिलता था और ऐसा दर्जनों बार हुआ होगा, तो वे कहते थे, मोदी मेरे मित्र हैं, मेरा अभिवादन कहना। इस तरह का इशारा दुर्लभ है। भले ही हम वर्षों तक शारीरिक रूप से नहीं मिले, लेकिन हमारा प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कम्युनिकेशन, हमारी निकटता और हमारे बीच का विश्वास अडिग रहा।” चीन के साथ रिश्तों को लेकर बोले पीएम मोदी पीएम मोदी ने चीन को लेकर भी बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि भारत और चीन अब 2020 से पहले की स्थितियों को बहाल करने के लिए काम कर रहे हैं। पीएम मोदी ने कहा, “यह सच है कि हमारे बीच सीमा विवाद चल रहे हैं। 2020 में सीमा पर हुई घटनाओं ने हमारे देशों के बीच काफी तनाव पैदा किया। हालांकि राष्ट्रपति शी के साथ मेरी हालिया बैठक के बाद, हमने सीमा पर सामान्य स्थिति की वापसी देखी है। अब हम 2020 से पहले की स्थितियों को बहाल करने के लिए काम कर रहे हैं। धीरे-धीरे लेकिन निश्चित रूप से विश्वास, उत्साह और ऊर्जा वापस आ जाएगी। लेकिन निश्चित रूप से इसमें कुछ समय लगेगा, क्योंकि पांच साल का अंतराल रहा है। हमारा सहयोग न केवल फायदेमंद है, बल्कि वैश्विक स्थिरता और समृद्धि के लिए भी आवश्यक है। चूंकि 21वीं सदी एशिया की सदी है, इसलिए हम चाहते हैं कि भारत और चीन स्वस्थ और स्वाभाविक तरीके से प्रतिस्पर्धा करें। प्रतिस्पर्धा कोई बुरी चीज नहीं है, लेकिन इसे कभी भी संघर्ष में नहीं बदलना चाहिए।” पीएम मोदी ने आगे कहा, “देखिए भारत और चीन के बीच संबंध कोई नई बात नहीं है। दोनों देशों की संस्कृति और सभ्यताएं प्राचीन हैं। आधुनिक दुनिया में भी, वे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अगर आप ऐतिहासिक रिकॉर्ड देखें, तो सदियों से भारत और चीन एक-दूसरे से सीखते आए हैं। साथ मिलकर उन्होंने हमेशा किसी न किसी तरह से वैश्विक भलाई में योगदान दिया है। पुराने रिकॉर्ड बताते हैं कि एक समय में भारत और चीन अकेले दुनिया के GDP का 50% से अधिक हिस्सा थे। भारत का योगदान इतना बड़ा था।” पीएम मोदी ने कहा कि मेरा मानना ​​है कि हमारे संबंध बहुत मजबूत रहे हैं, गहरे सांस्कृतिक जुड़ाव के साथ। उन्होंने कहा, “अगर हम सदियों पीछे देखें, तो हमारे बीच संघर्ष का कोई वास्तविक इतिहास नहीं है। यह हमेशा एक-दूसरे से सीखने और एक-दूसरे को समझने के बारे में रहा है। एक समय में बौद्ध धर्म का चीन में गहरा प्रभाव था, और वह दर्शन मूल रूप से यहीं से आया था। हमारे रिश्ते भविष्य में भी उतने ही मजबूत रहने चाहिए। इसे आगे बढ़ना जारी रखना चाहिए। बेशक, मतभेद स्वाभाविक हैं। जब दो पड़ोसी देश होते हैं, तो कभी-कभी असहमति होना लाजिमी है। यहां तक ​​कि एक परिवार के भीतर भी सब कुछ हमेशा सही नहीं होता है। लेकिन हमारा ध्यान यह सुनिश्चित करने पर है कि ये मतभेद विवाद में न बदल जाएं। हम इसी दिशा में सक्रिय रूप से काम करते हैं। मतभेद के बजाय हम संवाद पर जोर देते हैं, क्योंकि केवल संवाद के माध्यम से ही हम एक स्थिर संबंध 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कांग्रेस आज मुसलमानों को 4% आरक्षण दे रही , कल वह खुद के लिए राजनीति में 4% आरक्षण मांगेगी: रामेश्वर शर्मा

भोपाल  कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार ने सार्वजनिक खरीद पारदर्शिता (KTPP) अधिनियम में संशोधन को मंजूरी दे दी है। इसका मकसद मुस्लिम ठेकेदारों को टेंडर में चार प्रतिशत आरक्षण प्रदान करना है। इस पर बीजेपी हमलावर हो गई है। मध्य प्रदेश के बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा ने  मुस्लिम ठेकेदारों को 4% आरक्षण देने की नीति की कड़ी आलोचना की है। शर्मा ने कहा कि कांग्रेस संविधान विरोधी होती जा रही है।   कांग्रेस ‘एक कांग्रेस थी’ की स्थिति में आ जाएगी- रामेश्वर शर्मा    बीजेपी विधायक शर्मा ने कहा कि कांग्रेसियों को ये समझ लेना चाहिए कि सोनिया जी ने तो अपने परिवार को लोकसभा और राज्यसभा भेजकर उनके भरण-पोषण की व्यवस्था कर ली है। लेकिन आने वाले राजनीतिक दिनों में यदि यही हालात रहे तो हिन्दुस्तान की राजनीति में जो कांग्रेस ‘एक कांग्रेस थी’ की स्थिति में आ जाएगी। उन्होंने कहा कि जो कांग्रेस आज मुसलमानों को 4% आरक्षण दे रही है, कल वह खुद के लिए राजनीति में 4% आरक्षण मांगेगी। रामेश्वर शर्मा ने कहा कि हिन्दुस्तान की राजनीति जग चुकी है, हर नागरिक सशक्त और सावधान है। वह यह देख रहा है कि कौन तुष्टिकरण करके भारत की संस्कृति के साथ खिलवाड़ कर रहा है। कांग्रेस ये खिलवाड़ बंद करे अन्यथा हिन्दू समाज जागेगा और कांग्रेस का प्रतिकार करेगा। कर्नाटक सरकार ने लिया है ये फैसला कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया ने मुस्लिम ठेकेदारों को 4 प्रतिशत रिजर्वेशन देने का फैसला किया है। सिद्धारमैया की अध्यक्षता में हुई कर्नाटक कैबिनेट की बैठक में सरकारी टेंडरों में मुस्लिम ठेकेदारों को 4 प्रतिशत आरक्षण देने का फैसला किया गया। कैबिनेट ने कर्नाटक सार्वजनिक खरीद पारदर्शिता (KTPP) अधिनियम में संशोधन को मंजूरी दे दी है, जिसका मकसद मुस्लिम ठेकेदारों को टेंडर में चार प्रतिशत आरक्षण प्रदान करना है। 

9 महीने के इंतजार के बाद सुनीता विलियम्स की वापसी तय, जानें पूरा शेड्यूल

वाशिंगटन भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और उनके साथी बुच विलमोर के लिए राहत की खबर है। 9 महीने से ISS (इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन) में फंसे दोनों अंतरिक्ष यात्रियों को वापस लाने के लिए भेजा गया Crew Dragon स्पेसक्राफ्ट सफलतापूर्वक ISS से जुड़ चुका है। 16 मार्च को डॉकिंग प्रक्रिया पूरी हुई, और अब वे 19 मार्च को धरती पर वापसी करेंगे। 14 मार्च को लॉन्च हुए Crew-10 मिशन ने ISS तक पहुंचकर चार नए अंतरिक्ष यात्रियों को वहां पहुंचाया और वापसी के लिए रास्ता साफ कर दिया। सुनीता और विलमोर को सिर्फ एक हफ्ते बाद लौटना था, लेकिन बोइंग स्टारलाइनर स्पेसक्राफ्ट की तकनीकी खराबी के चलते वे 9 महीने तक फंसे रह गए। अब NASA और SpaceX के इस मिशन के जरिए उनकी वापसी संभव हो रही है, और पूरी दुनिया इस ऐतिहासिक पल का इंतजार कर रही है। कैसे हुई Crew-10 की लॉन्चिंग? 14 मार्च को स्पेसएक्स ने Crew-10 मिशन लॉन्च किया था। इस मिशन के तहत फॉल्कन-9 रॉकेट से Crew Dragon कैप्सूल को अंतरिक्ष में भेजा गया। यह मिशन NASA के कमर्शियल क्रू प्रोग्राम के तहत भेजी गई 11वीं क्रू फ्लाइट थी। इस सफल लॉन्चिंग के बाद अब सुनीता विलियम्स की वतन वापसी की उम्मीदें मजबूत हो गई हैं। क्या होती है डॉकिंग प्रक्रिया? डॉकिंग वो प्रक्रिया होती है, जिसमें स्पेसक्राफ्ट अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन से जुड़ता है। इसके पूरा होते ही अंतरिक्ष यात्री अपने स्पेससूट उतारते हैं और कार्गो को उतारने की तैयारी शुरू होती है। इसके बाद हैच खोलकर ISS में प्रवेश किया जाता है। NASA इस मौके पर Crew-10 के स्वागत समारोह का सीधा प्रसारण भी करेगा। सुनीता विलियम्स की वापसी पर डोनाल्ड ट्रंप की नजर सुनीता विलियम्स की वापसी पर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी लगातार नजर बनाए हुए हैं। उन्होंने टेस्ला के मालिक एलन मस्क से अनुरोध किया था कि इस मिशन को जल्द से जल्द पूरा किया जाए ताकि सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर को सुरक्षित वापस लाया जा सके। स्पेसक्राफ्ट में कौन-कौन आया ISS? इस मिशन के तहत ISS में चार नए एस्ट्रोनॉट पहुंचे हैं— NASA की कमांडर: ऐनी मैक्कलेन पायलट: अयर्स जापान की JAXA एजेंसी के अंतरिक्ष यात्री: ताकुया ओनिशी रूस के कोस्मोनॉट: किरिल पेसकोव ये स्पेसक्राफ्ट वापसी में अटलांटिक महासागर में लैंड कर सकता है। 9 महीने से ISS में फंसी थीं सुनीता विलियम्स सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर पिछले साल 5 जून को ISS गए थे। उन्हें एक हफ्ते बाद लौटना था, लेकिन बोइंग स्टारलाइनर में तकनीकी खराबी आ जाने की वजह से वे 9 महीने से अंतरिक्ष में फंसे हुए थे। अब Crew-10 मिशन उनकी वापसी सुनिश्चित करेगा। कैसा है इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन जहां 9 महीने से फंसी हैं सुनीता विलियम्स इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन वो अंतरिक्ष में मौजूद वो प्लेटफॉर्म है जहां अंतरिक्ष जाने वाली सवारियां उतरती हैं, यहां पर रहती हैं और विज्ञान के बड़-बड़े एक्सपेरिमेंट करती हैं. लेकिन धरती से यहां की जिंदगी एकदम ही अलग है. आप ये जानकर अचंभित हो सकते हैं कि इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में 24 घंटे में 16 बार सूर्योदय और 16 बार सूर्यास्त होता है. ऐसा क्यों होता है हम आपको आगे बताएंगे? भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स इसी इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में 9 महीने से फंसी है और धरती वापसी का इंतजार कर रही हैं. अगर आप समझते हैं कि इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन नई दिल्ली रेलवे स्टेशन अथवा दिल्ली एयरपोर्ट जैसा कोई स्थायी बना हुआ ढांचा है तो आप गलत हैं. दरअसल इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन कोई स्थिर संरचना नहीं है, बल्कि सतत घुमते रहने वाला एक बड़ा अंतरिक्ष यान है. इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन लगातार पृथ्वी का चक्कर काटते रहता है. धरती से कितना दूर है इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पृथ्वी से 403 किलोमीटर की ऊंचाई पर पृथ्वी के चक्कर लगाता रहता है. इस दौरान इसमें अंतरिक्ष यात्री मौजूद रहते हैं. यानी कि सुनीता विलियम्स पिछले 9 महीनों से लगातार पृथ्वी के चक्कर लगा रही है. इसका एक मतलब यह भी है कि इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन धरती से 403 किलोमीटर की दूरी पर है. इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन की स्पीड लेकिन सबसे दंग करने वाला है इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन की स्पीड. इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन 17500 मील प्रति घंटे की रफ्तार से पृथ्वी की परिक्रमा करता है. इसे किलोमीटर में कहें तो इसका मतलब ये होगा कि 28163 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पृथ्वी की परिक्रमा करता है. इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन की साइज अमेरिकी स्पेस एंजेसी नासा के अनुसार इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन का आकार पांच बेडरूम वाले घर या दो बोइंग 747 जेटलाइनर जितना है. यहां 6 लोगों की टीम और कुछ मेहमान रह सकते हैं. इस वक्त स्पेस स्टेशन में 8 लोग हैं. पृथ्वी पर अंतरिक्ष स्टेशन का वजन लगभग दस लाख पाउंड यानी कि 453592.37 किलोग्राम होगा. अगर इसके सभी छोर को मिलाकर इसका आकार मापा जाए तो इसकी लंबाई फुटबॉल मैदान के बराबर होगी. इस स्पेस स्टेशन में इसमें संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस, जापान और यूरोप के प्रयोगशाला मॉड्यूल शामिल हैं. 90 घंटे का दिन और 90 घंटे की रात का राज इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में 24 घंटे में 16 सूर्योदय और 16 सूर्यास्त देखने का अनुभव होता है. इसे आप इस तरह से भी कह सकते हैं कि यहां 90 मिनट का दिन और 90 मिनट की रात होती है और ऐसा 24 घंटे में 16-16 बार होता है. ऐसा पृथ्वी के आकार इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन की बहुत तेज गति के कारण संभव होता है. लगभग 28 हजार किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पृथ्वी की परिक्रमा करता है. इसमें उसे 90 मिनट लगते हैं. यानी कि एक चक्कर लगाने में 90 मिनट. स्पेस स्टेशन में क्रू 10 के सदस्यों ने रविवार को सुनीता विलियम्स समेत दूसरे अंतरिक्ष यात्रियों से मुलाकात की. इसका मतलब है कि 24 घंटे में ISS पृथ्वी के चारों ओर लगभग 16 चक्कर (24 घंटे ÷ 90 मिनट = 16) लगाता है. चूंकि इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन हर 90 मिनट में एक चक्कर पूरा करता है, इसका मतलब है कि हर चक्कर के दौरान ये स्पेस स्टेशन लगभग 45 मिनट दिन (सूर्य की रोशनी में) और लगभग 45 मिनट रात (पृथ्वी की छाया में) रहता है. इसलिए हर … Read more

सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच भीषण मुठभेड़ के दौरान एक आतंकी को मार गिराया

कुपवाड़ा जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच भीषण मुठभेड़ जारी है। इस दौरान सेना के जवानों के एक आतंकी को मार गिराया है। यह अभियान भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और विशेष अभियान समूह द्वारा संयुक्त रूप से चलाई रही है जहां सेना को बड़ी कामयाबी मिली है। जानकारी के मुताबिक यह ऑपरेशन खुफिया जानकारी के बाद शुरू किया गया था। सेना के मुताबिक यहां 2-3 आतंकवादियों के छिपे होने की आशंका है। अभियान के दौरान एक पुलिसकर्मी के जख्मी होने की खबर भी मिली है। जानकारी के मुताबिक सेना ने सूचना मिलने के बाद कुपवाड़ा जिले में स्थित हंदवाड़ा के क्रुम्हूरा-जचलदारा इलाके में तलाशी अभियान शुरू किया गया था। जैसे ही सुरक्षाकर्मी करीब पहुंचे, आतंकवादियों ने गोलीबारी शुरू कर दी, जिसके बाद जवानों ने जवाबी कार्रवाई की। अधिकारियों ने इलाके को सील कर दिया है और यहां अतिरिक्त बल की तैनाती की गई है। वहीं आम लोगों से इलाके से दूर रहने की अपील की गई है। इससे पहले कश्मीर जोन पुलिस ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस ऑपरेशन की जानकारी दी थी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कश्मीर पुलिस ने बताया, “हंदवाड़ा के क्रुम्हूरा जचलदारा इलाके में मुठभेड़ शुरू हो गई है। पुलिस और सुरक्षा बल ऑपरेशन में जुटे हुए हैं। तलाशी ली जा रही है।” इससे पहले सेना ने रविवार को कुपवाड़ा से बड़े पैमाने पर हथियार भी बरामद किए थे।

मध्य प्रदेश: छावा फिल्म का क्रेज, CM मोहन यादव आज मंत्रियों और विधायकों के साथ इस थिएटर में देखेंगे

भोपाल छत्रपति संभाजी महाराज पर बनी फिल्म छावा का क्रेज पूरे देश में दिखाई दे रहा है। मध्य प्रदेश में भी इस फिल्म को लेकर काफी उत्साह नजर आ रहा है। ऐसे में आज मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार इस फिल्म को देखेगी। आज शाम 7:30 बजे सीएम, मंत्री और विधायक यह फिल्म देखेंगे। कहां देखी जाएगी फिल्म? भोपाल के लेक व्यू अशोका होटल ओपन थिएटर में मुख्यमंत्री मोहन यादव तमाम मंत्रियों और विधायकों के साथ फिल्म छावा देखेंगे। फिल्म के बाद सभी नेता डिनर करेंगे। बता दें कि मध्य प्रदेश में छावा फिल्म को सीएम मोहन यादव पहले ही टैक्स फ्री कर चुके हैं। सीएम ने छावा को टैक्स फ्री करने का किया था ऐलान मध्य प्रदेश में ‘छावा’ फिल्म टैक्स फ्री है। सीएम डॉ. मोहन यादव ने 19 फरवरी को ‘छावा’ को कर मुक्त करने का ऐलान किया था। जबलपुर में स्टेडियम लोकार्पण कार्यक्रम में उन्होंने कहा था, “संभाजी महाराज ने अपने जीवन में सभी यातनाएं सहते हुए राष्ट्र और धर्म के लिए अपने प्राण दे दिए थे। छावा उन पर बनी ऐतिहासिक फिल्म है। यह फिल्म राष्ट्रप्रेम का संदेश देती है। शिवाजी महाराज के पुत्र संभाजी महाराज की देश भक्ति और उनके जीवन की विभिन्न महत्वपूर्ण घटनाओं से नागरिकों को परिचित करवाने के लिए मध्यप्रदेश में फिल्म टैक्स फ्री रहेगी।” जाने फिल्म के बारे में  छत्रपति शिवाजी महाराज के दिवंगत होने के बाद हिंदवी स्वराज की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले संभाजी महाराज का इतिहास अत्यंत गौरवपूर्ण रहा है। औरंगजेब द्वारा छल-बल का उपयोग कर छत्रपति शंभूराजे और उनके मित्र कवि कलश को गिरफ्त में ले लिया गया था। इसके बाद उन्होंने इस्लाम धर्म स्वीकार न करते हुए 39 दिन की असहनीय प्रताड़ना को स्वीकार कर धर्म का संरक्षण करते हुए सर्वस्व न्योछावर कर दिया। लेकिन अपना धर्म नहीं छोड़ा और छत्रपति के रूप में धर्म का संरक्षण किया। गोवा में भी टैक्स फ्री है छावा गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने छत्रपति शिवाजी महाराज की 395वीं जयंती के अवसर पर एक्स पर एक पोस्ट के जरिए ये घोषणा की थी की गोवा में इस फिल्म को टैक्स फ्री कर दिया गया है। गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने एक्स पर लिखा, ‘मुझे यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि छत्रपति संभाजी महाराज के जीवन और बलिदान पर आधारित फिल्म छावा को गोवा में टैक्स फ्री किया जाएगा।’ उन्होंने जोर देकर कहा कि यह फिल्म संभाजी महाराज की वीरता और साहस को दर्शाती है, जिन्होंने ‘देव, देश और धर्म’ के लिए मुगलों और पुर्तगालियों के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी। इससे पहले महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी फिल्म ‘छावा’ को टैक्स फ्री करने की अपील का स्वागत किया था। उन्होंने फिल्म के ऐतिहासिक प्रस्तुतिकरण की तारीफ की और कहा कि उन्हें जनता से फिल्म के बारे में अच्छी प्रतिक्रिया मिली है। सीएम फडणवीस ने कहा, ‘मुझे खुशी है कि छत्रपति संभाजी महाराज के जीवन पर एक बहुत अच्छी फिल्म बनाई गई है। हालांकि, मैंने इसे अभी तक नहीं देखा है, लेकिन मुझे जो प्रतिक्रिया मिली है, उससे पता चलता है कि इस फिल्म में इतिहास को विकृत नहीं किया गया है।’

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सोनार समाज के सामाजिक भवन के लिए 25 लाख रुपये की घोषणा

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय राष्ट्रीय कन्नौजिया सोनार महापरिवार के प्रतिभा सम्मान समारोह में हुए शामिलमुख्यमंत्री विष्णुदेव साय राष्ट्रीय कन्नौजिया सोनार महापरिवार के प्रतिभा सम्मान समारोह में हुए शामिलमुख्यमंत्री विष्णुदेव साय राष्ट्रीय कन्नौजिया सोनार महापरिवार के प्रतिभा सम्मान समारोह में हुए शामिल मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय  जशपुर विकासखंड के श्याम पैलेस में आयोजित राष्ट्रीय कन्नौजिया सोनार महापरिवार जशपुर मंडल के प्रतिभा सम्मान समारोह में शामिल हुए। उन्होंने समाज को सामाजिक भवन के निर्माण के लिए 25 लाख रुपये की वित्तीय सहायता देने की घोषणा की। इस अवसर पर उन्होंने कक्षा 10वीं और 12वीं में उत्कृष्ट अंक प्राप्त करने वाले, आईआईटी और मेडिकल प्रवेश परीक्षा में सफलता पाने वाले होनहार छात्रों को प्रतीक चिन्ह और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। सोनार समाज के सामाजिक कार्यों की सराहना मुख्यमंत्री साय ने अपने संबोधन में कहा कि सोनार समाज सामाजिक सेवा के क्षेत्र में अनुकरणीय कार्य कर रहा है। उन्होंने विशेष रूप से निशुल्क मोतियाबिंद ऑपरेशन शिविर, निर्धन बेटियों के विवाह, रक्तदान शिविर और वृक्षारोपण जैसे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि समाज सेवा के ये प्रयास दूसरों के लिए भी प्रेरणादायक हैं और इससे पूरे समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। शिक्षा को बताया सबसे बड़ा हथियार, कमजोर परिवारों की मदद का आह्वान मुख्यमंत्री साय ने कहा कि शिक्षा व्यक्ति के जीवन को नई दिशा देती है और उसके रहन-सहन को संवारती है। उन्होंने सोनार समाज से अपील की कि वे अपने बच्चों को शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ाएं और कमजोर परिवारों के बच्चों को भी पढ़ाई में सहयोग दें। उन्होंने कहा कि शिक्षा सबसे बड़ा हथियार है, जिससे न केवल व्यक्ति का भविष्य उज्ज्वल होता है, बल्कि पूरे समाज की प्रगति सुनिश्चित होती है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि उनकी सरकार को बने 15 महीने हो चुके हैं, और इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की गारंटी को पूरा करने के लिए तेजी से कार्य किया जा रहा है। इस अवसर पर जिला पंचायत सदस्य शौर्य प्रताप सिंह जूदेव, कृष्णा राय, डॉ. राम प्रताप सिंह, विजय आदित्य सिंह जूदेव, सोनार समाज के जिला अध्यक्ष विकास सोनी सहित बड़ी संख्या में सोनार समाज के लोग उपस्थित थे।

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