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बजट में आज किसानों को गेहूं, धान, श्रीअन्न के उत्पादन के लिए किया जाएगा प्रोत्साहित, 2025-26 में एक लाख पदों पर होंगी भर्तियां

भोपाल आज 12 मार्च यानी बुधवार को विधानसभा में मोहन सरकार का दूसरा बजट प्रस्तुत होगा। जाहिर है कि मोदी सरकार के बजट की रोशनी में इसे तैयार किया गया है और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ज्ञान मंत्र पर आधारित रहेगा। ज्ञान यानी गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी। इसके लिए चार मिशन भी लागू किए जा चुके हैं। अब बजट में पूर्व से संचालित योजनाओं में प्रावधान किए जाएंगे। वहीं, किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए कृषक उन्नति योजना प्रारंभ करने की घोषणा हो सकती है। इसमें गेहूं, धान और श्रीअन्न के उत्पादन पर प्रोत्साहन दिया जाएगा। 2025-26 में एक लाख पदों पर होंगी भर्तियां     युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए अगले दो वर्ष में ढाई लाख सरकारी रिक्त पदों पर भर्ती का रोडमैप भी प्रस्तुत किया जा सकता है। 2025-26 में एक लाख पदों पर राज्य लोक सेवा आयोग और कर्मचारी चयन मंडल के माध्यम से प्रतियोगी परीक्षाएं कराकर भर्तियां की जाएंगी।     मध्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार कृषि और उससे संबद्ध क्षेत्र हैं। एक करोड़ से अधिक खातेदार कृषक हैं, जिनमें 67 प्रतिशत लघु और सीमांत हैं। किसानों को उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए भारत सरकार द्वारा घोषित समर्थन मूल्य से इतर प्रोत्साहन राशि देने का निर्णय लिया गया है।     अब इसके लिए जितने भी प्रावधान होंगे, वे सब कृषक उन्नति योजना में किए जाएंगे। कैबिनेट योजना को मंजूरी दे चुकी है। इसके प्रविधान कृषि बजट में किए जाएंगे। उत्पादन में वृद्धि के लिए आवश्यक सिंचाई क्षमता का विस्तार सरकार की प्राथमिकता में है।     इसे ध्यान में रखते हुए केन-बेतवा और पार्वती-कालीसिंध-चंबल नदी जोड़ो योजना के लिए राज्यांश बढ़ाएगी। उल्लेखनीय है कि दोनों नदी जोड़ो परियोजना का हिस्सा हैं, जिसमें 90 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार द्वारा वहन की जाएगी।     सिंचाई क्षमता 50 लाख से बढ़ाकर 100 लाख हेक्टेयर तक पहुंचाने के लिए जल संसाधन और नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण की विभिन्न योजनाओं के लिए बजट प्रावधान बढ़ाया जाएगा। अधोसंरचना विकास पर रहेगा जोर सरकार को जोर पिछले वर्षों की तरह इस बार भी अधोसंरचना विकास पर रहेगा। दरअसल, अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए औद्योगिकीकरण आवश्यक है। इसके लिए नए औद्योगिक केंद्र विकसित किए जाएंगे तो सड़क, बिजली और पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर काम होगा। नगरीय क्षेत्रों में डेढ़ हजार किलोमीटर सड़क का निर्माण किया जाएगा। लोक निर्माण विभाग उन सड़कों को प्राथमिकता के आधार पर बनाएगा, जो पूर्व से स्वीकृत हैं। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में एलिवेटेड कॉरिडोर का निर्माण तेजी के साथ करने के लिए बजट आवंटित किया जाएगा। विभाग को दस हजार करोड़ रुपये से अधिक बजट मिल सकता है। इसी तरह स्कूल और कॉलेजों का बजट भी बढ़ाया जाएगा ताकि गुणवत्ता युक्त शिक्षा के लिए आवश्यक संसाधनों की पूर्ति सुनिश्चित हो सके। आवास के लिए पांच हजार करोड़ रुपये सूत्रों का कहना है कि आने वाले तीन वर्षों में 30 लाख से अधिक आवास शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में बनाए जाएंगे। इसके लिए नगरीय विकास एवं आवास और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को राशि उपलब्ध कराई जाएगी। उल्लेखनीय है कि शहरी क्षेत्रों में आगामी तीन वर्षों में दस लाख और ग्रामीण क्षेत्रों में 20 लाख आवास बनाए जाने का लक्ष्य है। इसके लिए पांच हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया जा सकता है।

वर्ष 2025-26 के लिए किए गए शराब ठेकों के समूहों की नीलामी से 17 हजार करोड़ रुपये से अधिक मिलने की उम्मीद

भोपाल  मध्य प्रदेश में शराब के दाम 10 प्रतिशत बढ़ सकते हैं। वजह यह है कि राज्य सरकार ने शराब पर 10 प्रतिशत वैट (वैल्यू एडेड टैक्स) बढ़ाने का निर्णय लिया है। उदाहरण के लिए शराब पर वैट 350 रुपये प्रूफ लीटर था, 10 प्रतिशत बढ़ोतरी करने पर यह 385 रुपये प्रूफ लीटर हो जाएगा। बता दें कि एक लीटर के बराबर एक प्रूफ लीटर होता है।     हालांकि, वैट बढ़ाने के साथ ही आबकारी विभाग ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि शराब निर्माता कंपनी मनमाने तरीके से शराब का मूल्य नहीं बढ़ा सकेंगी।     दरअसल, शराब निर्माता कंपनी का तर्क होता है कि उनकी शराब विभिन्न राज्यों में विक्रय की जाती है।     ऐसे में दूसरे राज्यों से तुलना कर शराब की कीमत में वृद्धि की जाती है।     लेकिन अब शराब की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) और (एमआरपी) मध्य प्रदेश के पड़ोसी राज्यों में शराब पर वैट और कीमत की तुलना कर जो राज्य के अनुकूल होगा, उसके आधार पर ही शराब का मूल्य तय किया जाएगा। 31 जिलों में शराब के ठेकों की ई-टेंडरिंग और बिड से होगी नीलामी मध्य प्रदेश में 21 जिलों में शराब ठेकों की 100 प्रतिशत नीलामी की जा चुकी है। 81 समूहों ने शराब के ठेके उठाए हैं। अब 31 जिलों में शराब के ठेके होना है। नीलामी की प्रक्रिया के बावजूद जबलपुर और दमोह सहित अन्य जिलों में ठेके नहीं उठ पा रहे हैं। यहां ई-टेंडरिरंग और बिडिंग से नीलामी की जाएगी। 21 जिलों में नीलामी पूरी अभी तक 21 जिलों में शराब ठेकों की नीलामी पूरी हो चुकी है। 81 समूहों ने ठेके लिए हैं। 31 जिलों में अभी नीलामी होनी बाकी है। कुछ जिलों जैसे जबलपुर और दमोह में ठेके नहीं उठ पा रहे हैं। विभाग ई-टेंडरिंग और बिडिंग पर विचार कर रहा है। राजस्व का लक्ष्य  चालू वित्तीय वर्ष में राज्य सरकार का 15 हजार करोड़ रुपये का राजस्व लक्ष्य है, जिसमें से 12,500 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हो चुका है। यह लक्ष्य इसी महीने हासिल कर लिया जाएगा। वहीं, वर्ष 2025-26 के लिए शराब ठेकों की नीलामी से 17 हजार करोड़ रुपये से अधिक की आय होने की उम्मीद है। शराब की कीमतें भले ही हर साल बढ़ती रहे मगर दूसरी तरफ उसकी खपत में कमी होने के बजाय उल्टा बढ़ोतरी हो रही है। इस बार भी शासन ने अपनी आबकारी नीति में वर्तमान शराब ठेकेदारों को ही यह विकल्प दिया कि वे 20 प्रतिशत अधिक दर पर अपनी दुकानों का आगामी वित्त वर्ष के लिए नवीनीकरण करा सकते हैं, जिसके चलते इंदौर जिले में 80 की बजाय 83 फीसदी बढ़ा हुआ राजस्व 139 दुकानों पर प्राप्त हुआ और 1476 करोड़ रुपए की ये दुकानें नीलाम हो गई। अब सिर्फ 13 समूह की 34 दुकानें बची है, जिनका आरक्षित मूल्य 304 करोड़ रुपए आंका गया है।

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट उन लोगों की जांच कर रहा है जो खेती के नाम पर गलत तरीके से इनकम टैक्स बचा रहे हैं

नई दिल्ली  अगर आप खेती के नाम पर गलत तरीके से इनकम टैक्स बचा रहे हैं तो आपके ऊपर कार्रवाई हो सकती है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट (IT विभाग) उन लोगों की जांच कर रहा है जो खेती के नाम पर गलत तरीके से इनकम टैक्स बचा रहे हैं। बता दें कि खेती की आमदनी पर इनकम टैक्स और जीएसटी दोनों ही नहीं लगता। दरअसल, कई दशकों से खेती की आमदनी और जमीन बेचने का इस्तेमाल ब्लैक मनी को सफेद करने और टैक्स बचाने के लिए होता रहा है। अब इनकम टैक्स डिपार्टमेंट पूरे देश में छानबीन कर रहा है। कई राज्यों में ऐसे मामले सामने आए हैं जहां लोगों और कंपनियों ने बिना जमीन के ही 50 लाख रुपये या उससे ज्यादा की खेती की आमदनी दिखाई है। विभाग की किन मामलों पर नजर? इनकम टैक्स डिपार्टमेंट कई ऐसे मामलों पर भी नजर रखे हुए है जहां 5 लाख रुपये प्रति एकड़ की फर्जी खेती की आमदनी दिखाई गई है। ये आंकड़े आम चलन और सरकारी आंकड़ों से बिलकुल मेल नहीं खाते। अगर विभाग इस मामले की गहराई से जांच करता है तो कई जगहों पर बवाल हो सकता है। क्योंकि कई बड़े नेता और रसूखदार लोग सीधे-सीधे या परोक्ष रूप से जमीन के मालिक हैं। ये जांच उनके लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती है। जयपुर से शुरू हुई जांच इकॉनमिक टाइम्स के मुताबिक यह जांच जयपुर के कुछ मामलों से शुरू हुई है। इन मामलों में कुछ लोगों ने अपने इनकम टैक्स रिटर्न में 50 लाख रुपये से ज्यादा की खेती की आमदनी दिखाई थी। ‘हाई-रिस्क केस’ के तौर पर चिन्हित इन मामलों में विभाग टैक्स भरने वालों के दावों की जांच करेगा। ये मामले साल 2020-21 के हैं। आशीष करुंडिया एंड कंपनी के फाउंडर आशीष करुंडिया बताते हैं कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने जिन लोगों की पहचान की है उन्हें ये साबित करना होगा कि उन्होंने अपनी जमीन खेती के लिए इस्तेमाल की है। खासकर जब पहले भी सैटेलाइट इमेज से खेती की जांच की जाती रही है। ये आमदनी में शामिल नहीं जमीन की प्लॉटिंग और बिक्री, शहर की जमीन बेचना, कमर्शियल इस्तेमाल के लिए फार्महाउस किराए पर देना, मुर्गी पालन और ऐसी ही दूसरी गतिविधियों से होने वाली आमदनी खेती से मिलने वाली आमदनी में शामिल नहीं है। इस पर टैक्स देना होगा। अगर किसी ने अपनी गैर-खेती जमीन स्टांप ड्यूटी वैल्यू से कम दाम पर बेची है तो उन पर भी टैक्स लग सकता है। ये शामिल हो सकता है खेती की आमदनी में फसल बेचने से होने वाली कमाई या जमीन का किराया शामिल हो सकता है। ये जमीन नगर निगम की सीमा से बाहर होनी चाहिए और कानून में तय न्यूनतम आबादी वाले इलाके में होनी चाहिए। खेती की जमीन बेचने से होने वाला मुनाफा भी टैक्स से छूट सकता है। ये तब होगा जब जमीन इनकम टैक्स ऐक्ट, 1961 की धारा 2(14)(iii) में दी गई ‘कैपिटल असेट’ की परिभाषा में नहीं आती हो। इन मामलों में टैक्स ‘कैपिटल असेट’ के तौर पर पहचान के लिए, खेती की जमीन गांव की या शहरी, दोनों ही हो सकती है। जब गांव की जमीन बेची जाती है तो उस पर कैपिटल गेन टैक्स नहीं लगता। लेकिन शहरी खेती की जमीन बेचने पर कैपिटल गेन टैक्स लगता है। सिर्फ किसान ही नहीं, बल्कि दूसरे लोग भी खेती की जमीन खरीदते हैं। वो इसका इस्तेमाल दूसरे कामों के लिए करते हैं। इसके लिए जरूरी मंजूरियां और शुल्क चुकाना पड़ता है। खेती की आमदनी के मामले में खेती की उपज के सबूत दिखाए जा सकते हैं। लेकिन अगर किसी के पास इतनी आमदनी है जिसके लिए उपज या बिक्री का कोई सबूत नहीं है तो गलत तरीके से छूट का दावा करने पर जुर्माना लग सकता है।

ई-श्रम पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन 30.68 करोड़ के पार, फ्री बीमा समेत मिलते हैं ये फायदे, , 50 प्रतिशत से अधिक महिलाएं

नई दिल्ली ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकृत श्रमिकों की संख्या बढ़कर 30.68 करोड़ से अधिक हो गई है। अच्छी बात यह है कि इनमें से 53.68 प्रतिशत (3 मार्च तक) महिलाएं हैं। बताना चाहेंगे केंद्रीय श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री, शोभा करंदलाजे ने लोकसभा को यह जानकारी दी। 21 अक्टूबर, 2024 को ई-श्रम-“वन-स्टॉप-सॉल्यूशन” किया गया था लॉन्च असंगठित श्रमिकों को विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं तक पहुंच प्रदान करने के लिए वन-स्टॉप-सॉल्यूशन के रूप में ई-श्रम को विकसित करने की बजट घोषणा के विजन को ध्यान में रखते हुए, श्रम और रोजगार मंत्रालय ने 21 अक्टूबर, 2024 को ई-श्रम-“वन-स्टॉप-सॉल्यूशन” लॉन्च किया। इस पोर्टल पर विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को एकीकृत करना शामिल “ई-श्रम-“वन-स्टॉप-सॉल्यूशन” में एक ही पोर्टल पर विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को एकीकृत करना शामिल है। यह ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकृत असंगठित श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं तक पहुंचने और ई-श्रम पोर्टल के माध्यम से अब तक उनके द्वारा प्राप्त लाभों को देखने में सक्षम बनाता है। 13 योजनाओं को ई-श्रम के साथ पहले ही किया जा चुका एकीकृत अब तक, विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों की 13 योजनाओं को पहले ही ई-श्रम के साथ एकीकृत किया जा चुका है, जिनमें प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (पीएम-स्वनिधि), प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (पीएमएसबीवाई), प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (पीएमजेजेबीवाई), राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना (एनएफबीएस), महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा), प्रधानमंत्री आवास योजना – ग्रामीण (पीएमएवाई-जी), आयुष्मान भारत योजना शामिल हैं। ई-श्रम पोर्टल को राष्ट्रीय करियर सेवा के साथ किया एकीकृत रोजगार और कौशल विकास के अवसर प्रदान करने के लिए ई-श्रम पोर्टल को राष्ट्रीय करियर सेवा (एनसीएस) और स्किल इंडिया डिजिटल पोर्टल के साथ भी एकीकृत किया गया है। वहीं, पेंशन योजना के तहत नामांकन की सुविधा के लिए, ई-श्रम को प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन (पीएमएसवाईएम) के साथ एकीकृत किया गया है। असंगठित श्रमिकों का बड़ा राष्ट्रीय डेटाबेस बनाने के लिए किया था ई-श्रम पोर्टल लॉन्च मंत्रालय ने आधार से जुड़े असंगठित श्रमिकों का एक बड़ा राष्ट्रीय डेटाबेस बनाने के लिए 26 अगस्त, 2021 को ई-श्रम पोर्टल लॉन्च किया था। ई-श्रम पोर्टल का उद्देश्य असंगठित श्रमिकों को सेल्फ-डिक्लेरेशन के आधार पर एक यूएएन प्रदान करके उनका पंजीकरण करके सहायता करना है। क्या है ई-श्रम पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया ई-श्रम पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करना बेहद आसान है. मजदूर अपना रजिस्ट्रेशन खुद ऑनलाइन कर सकते हैं या नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के माध्यम से भी करवा सकते हैं. रजिस्ट्रेशन के लिए आवश्यक डॉक्यूमेंट में आधार कार्ड, बैंक अकाउंट डिटेल्स और मोबाइल नंबर की जरूरत होती है. 13 योजनाओं का मिलता है फायदा अब तक विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों की 13 योजनाओं को ई-श्रम के साथ इंटीग्रेट किया जा चुका है. इन योजनाओं में प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY), प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY), आयुष्मान भारत, पीएम-स्वनिधि, पीएम आवास योजना आदि शामिल हैं. ई-श्रम पोर्टल पर रजिस्टर्ड मजदूरों को प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY) के तहत 2 लाख रुपये तक का इंश्योरेंस फायदा मिलता है. इसमें इंश्योरेंस के लिए मजदूरों को प्रीमियम देने की जरूरत नहीं है. किन लोगों को मिल सकता है फायदा? रेहड़ी-पटरी वाले खोमचा लगाने वाले सब्जी और दूध बेचने वाले लोग घर बनाने वाले लोग रिक्शा और ठेला चालक नाई धोबी दर्जी मोची आदि

देश में मकानों की बिक्री में दिल्ली-एनसीआर में 63% उछाल, मुंबई और हैदराबाद को पीछे छोड़ा.

नई दिल्‍ली  देश में सबसे ज्‍यादा मकान बेचने वाला शहर अब दिल्‍ली-एनसीआर बन गया है. इस शहर ने मुंबई और हैदराबाद को भी पीछे छोड़ दिया है. इस तरह, दिल्‍ली-एनसीआर ने साल 2024 में सबसे ज्यादा घर बेचा है. इस बार सिर्फ गुरुग्राम में ही बिक्री मूल्य में 66% की वृद्धि हुई है. इसके साथ ही, दिल्ली-एनसीआर ने 1 लाख करोड़ रुपये की बिक्री मूल्य की सीमा को भी पार कर लिया है. डेटा एनालिटिक्स फर्म प्रॉपइक्विटी के अनुसार, 2024 में दिल्ली-एनसीआर में कुल मकानों का बिक्री मूल्य 63% बढ़कर 1.53 लाख करोड़ रुपये हो गया. इसी दौरान मुंबई का बिक्री मूल्य 13% बढ़कर 1.38 लाख करोड़ रुपये और हैदराबाद का बिक्री मूल्य 18% घटकर 1.05 लाख करोड़ रुपये रह गया है. साल 2023 में दिल्ली-एनसीआर में बेचे गए घरों की कुल बिक्री मूल्य 94,143 करोड़ रुपये रहा था, जबकि इसी दौरान मुंबई में 1.22 लाख करोड़ रुपये और हैदराबाद में 1.28 लाख करोड़ रुपये के मकान बिके थे. हैदराबाद से आगे निकला गुरुग्राम गुरुग्राम में साल 2023 में कुल बिक्री मूल्य 64,314 करोड़ रुपये था, जो हैदराबाद का लगभग आधा था. लेकिन, 2024 में गुरुग्राम ने हैदराबाद को भी पीछे छोड़ दिया. प्रॉपइक्विटी के संस्थापक और सीईओ समीर जसूजा ने कहा कि गुरुग्राम ने अकेले ही 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बिक्री के साथ दिल्ली-एनसीआर की कुल बिक्री मूल्य का 66% से अधिक हिस्सा बेचा है. यह शहर शीर्ष पर उभर कर आया है. गुरुग्राम का बिक्री मूल्य मुंबई के बाद दूसरे स्थान पर है. गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, फरीदाबाद और नई दिल्ली जैसे शहरों में भी 2024 में बिक्री मूल्य में काफी वृद्धि देखी गई है. बस नोएडा में थोड़ी गिरावट आई है. लग्‍जरी मकानों की डिमांड बढ़ी दिल्ली-एनसीआर में औसत बिक्री मूल्य 12,469 रुपये प्रति वर्ग फुट तक बढ़ गया है और 2024 में यूनिट्स का औसत आकार 2,229 वर्ग फुट हो गया है. आधे से अधिक बिक्री 2 करोड़ रुपये और उससे अधिक कीमत वाले घरों की हुई है और एक चौथाई बिक्री 1-2 करोड़ रुपये के बीच कीमत वाले घरों की हुई है. इसका मतलब है कि कुल बिक्री में 75 फीसदी हिस्‍सेदारी तो सिर्फ 1 करोड़ से ज्‍यादा की कीमत वाले घरों की है. हैदराबाद में बड़ी गिरावट क्‍यों हैदराबाद के आवासीय बाजार ने साल 2024 में महत्वपूर्ण गिरावट देखी, जिसमें नए लॉन्च 2020 के बाद से सबसे कम और बिक्री 2021 के बाद से सबसे कम रही. इस तरह देखा जाए तो डिमांड और सप्‍लाई में 25% व 49% की वार्षिक गिरावट आई है. लिहाजा तैयार खड़े मकानों की संख्‍या 2023 में 17 महीनों से बढ़कर 2024 में 20 महीनों तक पहुंच गया है. देश में हुई कुल बिक्री मूल्‍य में दिल्‍ली-एनसीआर का हिस्‍सा 2023 के 16% से बढ़कर 2024 में 23% हो गया. मुंबई का हिस्सा 2023 में 20% से बढ़कर 2024 में 21% हो गया, जबकि हैदराबाद का हिस्सा 2023 के 21% से घटकर 2024 में 16% रह गया. 2024 में शीर्ष 9 शहरों का कुल बिक्री मूल्य 12% बढ़कर 6.73 लाख करोड़ रुपये रहा, जो एक साल पहले 6 लाख करोड़ था. इन शहरों में दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, नवी मुंबई, पुणे, ठाणे, कोलकाता, बैंगलोर, चेन्नई और हैदराबाद शामिल है.

पीएम मोदी को मॉरीशस सरकार ने अपना सबसे बड़ा नागरिक सम्मान दिया, सम्मान को पाने वाले पहले भारतीय बने

मॉरीशस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मॉरीशस सरकार ने अपना सबसे बड़ा नागरिक सम्मान ‘द ग्रैंड कमांडर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द स्टार एंड की ऑफ द इंडियन ओशन’ से नवाजा है। पीएम मोदी इस प्रतिष्ठित सम्मान को पाने वाले पहले भारतीय बने हैं। गौरतलब है कि यह पीएम मोदी को किसी देश द्वारा दिया गया 21वां अंतरराष्ट्रीय सम्मान है। सम्मान पर क्या बोले पीएम मोदी इस सम्मान को स्वीकार करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “मैं इसे विनम्रता से स्वीकार करता हूं। यह सम्मान भारत और मॉरिशस के गहरे रिश्तों का सम्मान है। यह उन भारतीयों का भी सम्मान है, जिन्होंने पीढ़ी-दर-पीढ़ी इस धरती की सेवा की और इसे ऊंचाइयों तक पहुंचाया। मैं मॉरिशस की जनता और सरकार का तहेदिल से आभार व्यक्त करता हूं।” पीएम मोदी ने याद किया कि 10 साल पहले इसी तारीख को वे मॉरिशस आए थे। उन्होंने कहा, “तब भारत में होली बीते हफ्ता भर हुआ था, और मैं अपने साथ भगवा की उमंग लेकर आया था। इस बार होली के रंग अपने साथ लेकर जाऊंगा।” उन्होंने अपने अंदाज में होली का जिक्र करते हुए कहा, “राम के हाथे ढोलक सोहे, लक्ष्मण हाथ मंजीरा, भरत के हाथ कनक पिचकारी, शत्रुघ्न हाथ अबीरा… जोगीरा!” पीएम मोदी ने भारत और मॉरिशस के ऐतिहासिक संबंधों को मिठास से जोड़ा और बताया कि एक जमाने में भारत में मिठाई बनाने के लिए चीनी मॉरिशस से आती थी। इसी वजह से गुजरात में चीनी को मॉरस भी कहा जाता है। उन्होंने कहा, “समय के साथ भारत और मॉरिशस के रिश्तों में यह मिठास और बढ़ती जा रही है।” मॉरिशस में भारत की खुशबू हर तरफ: पीएम मोदी पीएम मोदी ने कहा कि जब भी वे मॉरिशस आते हैं, उन्हें अपनों के बीच होने का एहसास होता है। उन्होंने कहा, “यहां की हवा, मिट्टी और पानी में अपनापन महसूस होता है। गीत-गवाई में, ढोलक की थाप में और गातो पिमा (मॉरिशस की पारंपरिक डिश) में भारत की खुशबू है।” पीएम मोदी ने मॉरिशस के प्रधानमंत्री नवीनराम गुलाम और उनकी कैबिनेट का आभार जताते हुए मॉरिशस की जनता को राष्ट्रीय दिवस की बधाई दी। उन्होंने कहा, “हम सब एक परिवार हैं, और यह रिश्ता हमेशा मजबूत रहेगा।”

2028-29 तक सकल घरेलू उत्पाद दोगुना करने का लक्ष्य : उप मुख्यमंत्री देवड़ा

भोपाल मध्‍यप्रदेश का सकल घरेलू उत्‍पाद वर्ष 2024-25 प्रचलित भावों पर रूपये 1503395 करोड़ पहुंच गया है, जो वर्ष 2023-24 में रूपये 1353809 करोड़ था। पिछले वित्‍तीय वर्ष से 11.05 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उप मुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश ने वर्ष 2028-29 तक राज्‍य के सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) को दोगुना करने का लक्ष्य रखा है। मंगलवार को विधान सभा में प्रस्तुत मध्‍यप्रदेश आर्थिक सर्वेक्षण वर्ष 2024-25 के अनुसार मध्‍यप्रदेश का सकल घरेलू उत्‍पाद वर्ष 2024-25 में स्थिर भावों पर जीएसडीपी 712260 करोड़ रूपये है जो वर्ष 2023-24 में 671636 करोड़ रहा। यह 6.05 प्रतिशत की वास्‍तविक वृद्धि दिखाता है। मध्‍यप्रदेश की प्रति व्‍यक्ति आय वर्ष 2024-25 प्रचलित भावों पर रूपये 152615 हो गई है। स्थिर भाव पर वर्ष 2024-25 में प्रति व्‍यक्ति आय रूपये 70434 है । मध्‍यप्रदेश के सकल मूल्य वर्धन में प्रचलित भावों पर वर्ष 2024-25 में क्षेत्रवार हिस्‍सेदारी क्रमश: प्राथमिक क्षेत्र में 44.36 प्रतिशत, द्वितीयक क्षेत्र में 19.03 प्रतिशत तथा तृतीयक क्षेत्र में 36.61 प्रतिशत रही है। मध्‍यप्रदेश ने लोक वित्‍त में अपनी मजबूत अर्थव्‍यवस्‍था बनाये रखने के लिये प्रभावी कदम उठाये गये है। वित्‍तीय वर्ष 2024-25 में राजस्‍व अधिशेष रूपये 1700 करोड़ रहने का अनुमान है, जबकि राजकोषीय घाटा जीएसडीपी के 4.11 प्रतिशत तक सीमित रहेगा। राजस्‍व प्राप्तियां रूपये 263344 करोड़ तक पहॅुचने का अनुमान है। आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार कृषि फसल क्षेत्र का प्राथमिक क्षेत्र के अंतर्गत योगदान वर्ष 2024-25 में 30.90 प्रतिशत रहा लेकिन प्रचलित भाव पर यह 10.8 प्रतिशत बढ़ा जबकि स्थिर भाव में 1.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इसी तरह पशुधन क्षेत्र में 7.45 प्रतिशत का योगदान रहा । इसकी वृद्धि स्थिर भाव पर क्रमश: 11.93 प्रतिशत एवं 8.39 प्रतिशत रही। “विकसित भारत” की कल्पना के अनुरूप “विकसित मध्यप्रदेश के रूप में राज्य अपनी महत्वपूर्ण भागीदारी सुनिश्चित करेगा। प्रदेश की मजबूत बैंकिंग प्रणाली और वित्तीय समावेश की शक्ति से आर्थिक तंत्र निरंतर सशक्त हो रहा है। कृषि और कृषि प्र-संस्करण के माध्यम से आय के स्रोतों में वृद्धि हो रही है, जबकि सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग, बड़ी अधोसंरचनात्मक परियोजनाएं, वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों का विस्तार, और ऊर्जा उपलब्धता में बढ़ोतरी जैसे महत्वपूर्ण घटक एक आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था के निर्माण की दिशा में प्रदेश की प्रगति को दर्शाते हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, आर्थिक और सामाजिक समावेश तथा महिला सशक्तिकरण को प्राथमिकता देने से आर्थिक और सामाजिक उन्नति में व्यापक भागीदारी सुनिश्चित हो रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में गरीब कल्याण, युवा शक्ति, अन्नदाता, और नारी शक्ति जैसे चार प्रमुख मिशनों की शुरुआत की है। ये मिशन क्रमशः समाज के वंचित वर्गों, युवाओं, किसानों और महिलाओं के समग्र विकास एवं आर्थिक स्वतंत्रता को सुनिश्चित करने कार्यरत हैं। सरकार का संकल्प है कि राज्य की आर्थिक नीतियां समाज के प्रत्येक वर्ग के विकास में सहायक हों और व्यापक आर्थिक समृद्धि सुनिश्चित करें। मध्यप्रदेश सरकार ने ‘ईज़ ऑफ लिविंग’ और ‘ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस’ को बढ़ावा देने के लिए मानकों के सरलीकरण, जनविश्वास बिल, राजस्व महाभियान और पीएम जनमन कार्यक्रम जैसे प्रभावी उपायों को अपनाया है, जिससे सुशासन को और अधिक प्रभावी बनाया गया है। राज्य के प्राकृतिक संसाधनों की समृद्धि, टाइगर एवं चीता रिजर्व, धार्मिक एवं सांस्कृतिक धरोहरें, और पर्यटन स्थलों ने मध्यप्रदेश को पर्यटन और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में स्थापित किया है। मध्यप्रदेश आर्थिक सर्वेक्षण वर्ष 2024-25 प्रदेश की आर्थिक प्रतिबद्धताओं, विकास योजनाओं और उनके प्रभावी क्रियान्वयन का विश्लेषण प्रस्तुत करता है। यह सर्वेक्षण राज्य की विकास यात्रा को प्रतिबिंबित करता है और यह दर्शाता है कि मध्यप्रदेश सतत और समावेशी आर्थिक विकास के मार्ग पर अग्रसर है। मध्‍यप्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2025 को “उद्योग वर्ष’’ घोषित किया गया है। वित्‍तीय वर्ष 2024-25 में द्वि‍तीयक क्षेत्र में 2.73 लाख करोड़ रूपये के सकल मूल्‍य वर्धन तक पहॅुच गया। राज्‍य में औद्योगिक क्षेत्र में बुनियादी ढॉचे के विकास कार्यो के लिये वर्ष 2024-25 में 145.13 करोड़ रूपये की राशि स्‍वीकृत की गई तथा दिसम्‍बर 2024 तक 4.17 लाख करोड़ के निवेश प्रस्‍ताव प्राप्‍त हुये। राज्‍य में सामाजिक क्षेत्र के लिये महत्‍वपूर्ण बजटीय आवंटन किये गये है जिसमें पिछले चार वर्षो में 82.52 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। सरकार ने समस्‍त बाल विकास को प्राथमिकता देते हुये राज्‍य के कुल बजट का 21.6 प्रतिशत बजट आवंटित किया है। ‘’ पोषण भी पढाई भी’’ ‘’ स्‍व-सहायता समूह’’ ‘’ सामुदायिक संस्‍थागत विकास’’ ‘’ लखपति दीदी’’ ‘’विकसित मध्‍यप्रदेश विजन 2047’’ आदि इस दिशा में अग्रणी प्रयास है। स्‍वास्‍थ्य क्षेत्र मे राज्‍य का बजट वर्ष 2024-25 में 15744 करोड़ रूपये तक पहॅुच गया है। आयुष्मान भारत योजना के तहत 4.85 करोड़ से अधिक कार्ड जारी किये गये है। वर्ष 2024-25 में शिक्षा का बजट 11.26 प्रतिशत आवंटित किया गया है। सी.एम.राईज स्‍कूल योजना के तहत 274 स्‍कूलों का निर्माण कार्य प्रगति पर है। व्‍यावसायिक शिक्षा में 14 ट्रेडस शुरू किये गये है। उच्‍च शिक्षा के अंतर्गत 1346 महाविद्यालय में 10.5 लाख सीट उपलब्‍ध है।

मंत्री सिलावट ने कहा- मोदी एवं सीएम यादव का संकल्प है कि हर घर स्वच्छ पेयजल और खेती के लिए हर खेत तक पानी पहुंचे

भोपाल जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का संकल्प है कि हर घर स्वच्छ पेयजल और खेती के लिए हर खेत तक पानी पहुंचे। इसके लिए प्रदेश में केन-बेतवा और पार्वती-कालीसिंध-चंबल परियोजनाओं के बाद ताप्ती मेगा बेसिन परियोजना बनाई जा रही है। इसके साथ ही प्रदेश के विभिन्न सिंचाई योजनाओं के माध्यम से सिंचाई के रकबे में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। प्रदेश में जल संरक्षण एवं संवर्धन के लिए तालाब एवं अन्य जल स्त्रोतों के उन्नयन, विकास, गहरीकरण, जल स्त्रोतों को अतिक्रमण मुक्त करने और उनके आसपास पौधा-रोपण आदि के उद्धेश्य से प्रदेश में 30 मार्च 2025 से 30 जून 2025 तक “जल गंगा संवर्धन अभियान” चलाया जाएगा। उन्होंने प्रदेश में जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने का जनता से आहवान किया। जल संसाधन मंत्री श्री सिलावट ने मंगलवार को प्रमुख अभियंता जल संसाधन कार्यालय के सभाकक्ष में अभियान की तैयारियों के संबंध में बैठक ली। बैठक में अपर मुख्य सचिव जल संसाधन विभाग डॉ. राजेश राजौरा, प्रमुख अभियंता जल संसाधन श्री विनोद कुमार देवड़ा सहित सभी संबंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे। जल संसाधन मंत्री श्री सिलावट ने कहा कि जल संसाधन विभाग में प्रदेश में 32 वृहद, 120 मध्यम एवं 5 हजार 800 लघु जल संरचनाएं हैं। इनमें बनाए गए बांधों की नहर प्रणाली 40 हजार किलोमीटर की है जिनमें 16 हजार किलोमीटर पक्की और 24 हजार किलोमीटर कच्ची नहरें हैं। इन नहरों से सिंचाई के लिए खेतों तक पानी पहुंचाया जाता है। अभियान के अंतर्गत जल संरचनाओं की आवश्यक मरम्मत, सौंदर्यीकरण एवं विकास कार्य किया जाना है। जल संसाधन मंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश में जल संरक्षण एवं संवर्धन की समृद्धशाली परंपरा रही है। यहां की चंदेल कालीन जल संरक्षण प्रणाली न केवल भारत बल्कि पूरे विश्व में प्रसिद्ध रही है। जल संसाधन संभाग छतरपुर में 44, टीकमगढ़ में 71 और पन्ना में 5 चंदेल/बुंदेलकालीन तालाब हैं। अभियान के अंतर्गत इन सभी का संरक्षण किया जाना है। जल संसाधन मंत्री श्री सिलावट ने निर्देश दिए कि प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों में जल संरक्षण के लिए छोटी-छोटी योजनाएं बनाकर कार्य कराया जाए। आगामी बारिश के पूर्व प्रदेश के सभी पुराने बांधों एवं जल स्त्रोतों की मरम्मत सुनिश्चित की जाए। इसके लिए गत वर्ष में जिन-जिन तालाबों/ जल स्त्रोतों में क्षति हुई उनकी सूची बनाई जाए तथा उन जल स्त्रोतों का विशेष ध्यान रखा जाए। बांधों की सुरक्षा के लिए हर संभव उपाय किए जाएं। जल संसाधन मंत्री ने विभाग के सभी मुख्य अभियंताओं को निर्देश दिए कि वे अपने बेसिन के अंतर्गत आने वाली जल संरचनाओं के संरक्षण एवं विकास का कार्य सुनिश्चित करें। जल संरक्षण एवं विकास कार्य में जन सहयोग लें। सीएसआर गतिविधि के अंतर्गत तालाबों को रख-रखाव के लिए गोद दिया जा सकता है। जल संरक्षण एवं जल संवर्धन के इस कार्य में समाज के सभी वर्गों, जनप्रतिनिधियों, समाजसेवियों, धर्म गुरूओं, मीडिया आदि का पूरा सहयोग लिया जाए। जल संसाधन विभाग के अंतर्गत प्रदेश में 10 रिवर बेसिन (नदी कछार) हैं। जल गंगा संवर्धन अभियान में होने वाली प्रमुख गतिविधियां सभी नहरों को विलेज मेप पर राजस्व विभाग की सहायता से मार्क किया जाना तथा विलेज मेप पर “शासकीय नहर” अंकित किया जाना। बांध तथा नहरों को अतिक्रमण मुक्त किया जाना। नहर के अंतिम छोर पर जहां नहर समाप्त होकर किसी नाले मे मिलती है, उस स्थान पर किलो मीटर स्टोन लगाया जाना। 40 हजार किलोमीटर की नहर प्रणाली में मनरेगा की सहायता से सफाई का कार्य किया जाना। जलाशयों में यदि रिसाव की स्थिति हो तो रिसाव रोकने के लिये पडल तथा आवश्यक हटिंग कार्य किये जा रहे हैं। तालाब के पाल (बंड) की मिट्टी के कटाव अथवा क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में पुनः निर्मित किये जाने का कार्य। तालाबों की पिचिंग, बोल्डर टो तथा घाट आदि की मरम्मत का कार्य। स्टॉप-डेम, बैराज, वियर में गेट लगाना तथा मेन-वॉल, साइड-वॉल, की-वॉल, एप्रॉन इत्यादि में मरम्मत/अतिरिक्त निर्माण कार्य। जल संरचनाओं के किनारों पर यथा संभव बफर – जोन तैयार किए जाकर जल संरचनाओं के किनारों पर अतिक्रमण को रोकने के लिये फेंसिंग के रूप में वृक्षारोपण का कार्य किए जाना। फ्लशबार की मरम्मत का कार्य किए जाना। स्लूस वैल की सफाई का कार्य किए जाना।  

पशुओं की बीमारियों के समुचित इलाज के लिए वैकल्पिक पशु चिकित्सा पद्धतियों का उपयोग भी आवश्यक: मंत्री लखन पटेल

भोपाल पशु पालन एवं डेयरी राज्यमंत्री, स्वतंत्र प्रभार श्री लखन पटेल ने कहा है कि पशुओं की बीमारियों के समुचित इलाज के लिए वैकल्पिक पशु चिकित्सा पद्धतियों का उपयोग भी आवश्यक है। वर्तमान में आधुनिक चिकित्सा पद्धति के कारण मनुष्यों एवं पशुओं में जीवाणु रोधी दवाइयां के प्रति प्रतिरोधकता का बढ़ना महामारी का रूप ले रहा है, जो एक भयानक वैश्विक खतरा बनता जा रहा है। आधुनिक चिकित्सा पद्धति से एवं एंटीबॉयोटिक के दुरुपयोग से इसका दुष्प्रभाव मनुष्य एवं पशुओं में देखा जा रहा है, जिसके कारण एएमआर (एंटी माइक्रोबियल रेजिस्टेंस) की वैश्विक समस्या उत्पन्न हो गई है। अल्टरनेट वेटरिनरी प्रैक्टिस जैसे आयुर्वेद, होम्योपैथी, पारंपरिक चिकित्सा, यूनानी चिकित्सा इत्यादि का प्रयोग अत्यंत आवश्यक है, जिससे कम खर्च पर आसानी से पशुओं की बिना किसी दुष्प्रभाव के चिकित्सा की जा सकती है। पशु पालन राज्यमंत्री श्री पटेल ने मंगलवार को होटल पलाश रेसीडेंसी में “पशुओं की वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति” पर दो दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ किया। कार्यशाला में पूर्व मंत्री उत्तर प्रदेश श्री महेंद्र सिंह, दीनदयाल शोध संस्थान चित्रकूट के श्री अभय महाजन, अध्यक्ष, वेटनरी काउंसिल ऑफ इंडिया डॉ. उमेशचंद शर्मा, संचालक, पशुपालन एवं डेयरी डॉ. पी एस पटेल आदि उपस्थित थे। कार्यशाला में देश के विभिन्न राज्यों के 13 विषय विशेषज्ञ और लगभग 100 से अधिक विभागीय अधिकारी शामिल हुए। पशु पालन राज्यमंत्री श्री पटेल ने कहा कि भारत में आदिकाल से पारंपरिक एवं वैकल्पिक पशु चिकित्सा पद्धति का उपयोग किया जाता था, जिसे पुनः पशुओं की चिकित्सा में बढ़ावा देने एवं जन-जन तक पहुंचाने के लिए कार्यशाला आयोजित की गई है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि दो दिवसीय इस कार्यशाला में विषय विशेषज्ञों के विचार मंथन से पशु चिकित्सा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण सुझाव आयेंगे।  

मॉरीशस में भोजपुरी भाषा की महत्वपूर्ण मौजूदगी पर भी खुशी जाहिर की, पीएम मोदी ने बताया-गौरव की बात

पोर्ट लुईस पीएम मोदी ने कहा कि वह मॉरीशस में अविस्मरणीय स्वागत से बहुत अभिभूत है। उन्होंने मॉरीशस में भोजपुरी भाषा की महत्वपूर्ण मौजूदगी पर भी खुशी जाहिर की। पीएम मोदी ने पोर्ट लुईस पहुंचने के बाद एक्स पर हिंदी और भोजपूरी भाषा में पोस्ट किया। उन्होंने लिखा, “मॉरीशस में अविस्मरणीय स्वागत से बहुत अभिभूत हूं। यहां की संस्कृति में भारतीयता किस तरह रची-बसी है, उसकी पूरी झलक ‘गीत-गवई’ में देखने को मिली। हमारी भोजपुरी भाषा मॉरीशस में जिस तरह से फल-फूल रही है, वह हर किसी को गौरवान्वित करने वाली है।” वहीं भोजपुरी भाषा में उन्होंने एक्स पर पोस्ट किया, “मॉरीशस में यादगार स्वागत भइल। सबसे खास रहल गहिरा सांस्कृतिक जुड़ाव, जवन गीत – गवई के प्रदर्शन में देखे के मिलल। ई सराहनीय बा कि महान भोजपुरी भाषा मॉरीशस के संस्कृति में आजुओ फलत-फूलत बा और मॉरीशस के संस्कृति में अबहियो जीवंत बा।” इससे पहले सर शिवसागर रामगुलाम अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीनचंद्र रामगुलाम ने पीएम मोदी का माला पहनाकर स्वागत किया। भारतीय समुदाय की तरफ से पीएम मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया गया। समुदाय की महिलाओं ने ‘गीत गवई’ नामक पारंपरिक बिहारी सांस्कृतिक प्रस्तुति के माध्यम से उनका सम्मान किया। पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा, “मॉरीशस में भारतीय समुदाय द्वारा किए गए गर्मजोशी भरे स्वागत से मैं बहुत प्रभावित हूं। भारतीय विरासत, संस्कृति और मूल्यों से उनका गहरा जुड़ाव वाकई प्रेरणादायक है। इतिहास और दिल का यह बंधन पीढ़ियों से चला आ रहा है।” प्रधानमंत्री मोदी बुधवार को देश के राष्ट्रीय दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। भारतीय नौसेना के एक जहाज के साथ भारतीय रक्षा बलों की एक टुकड़ी भी समारोह में भाग लेगी। यह प्रधानमंत्री मोदी की 2015 के बाद पहली मॉरीशस यात्रा है। प्रधानमंत्री मोदी की वर्तमान यात्रा से विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।  

पाकिस्‍तान :बलूचिस्तान में बलूच विद्रोहियों ने ट्रेन को हाईजैक किया, 500 यात्री बंधक, 6 पाकिस्‍तानी सैनिकों को मौत के घाट उतारा

इस्लामाबाद  पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में मंगलवार को एक यात्री ट्रेन को हाईजैक कर लिया गया है। इस ट्रेन में करीब 500 यात्री सवार हैं। बलूचिस्तान के अलगाववादी गुट बीएलए ने एक बयान जारी कर ट्रेन पर कब्जा करने का दावा किया है। गुट का कहना है कि ट्रेन को हाईजैक करने की कोशिश पाकिस्तान के छह सैन्यकर्मी भी मारे गए हैं। इस संघर्ष के बाद उन्होंने ट्रेन को काबू करते हुए 100 से ज्यादा यात्रियों को बंधक बनाने का दावा किया है। हालांकि बंधकों की सही संख्या की जानकारी नहीं मिल सकी है। पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार की ओर से अभी तक कोई बयान इस संबंध में नहीं आया है। सेना ने भी इस संबंध में अभी कुछ नहीं कहा है। हाईजैक हुई ट्रेन पाकिस्तान के दक्षिण-पश्चिमी बलूचिस्तान प्रांत के क्वेटा से खैबर पख्तूनख्वा के पेशावर जा रही थी, तभी उस पर हमला हुआ। पाक अखबार डॉन के मुताबिक रेलवे नियंत्रक मुहम्मद काशिफ ने बताया कि नौ डिब्बों वाली इस ट्रेन में करीब 500 यात्री सवार थे। ऐसे में ये स्पष्ट नहीं है कि कितने लोग बंधक बनाए गए हैं। महिला, बच्चों और बलूच लोगों को छोड़ देने का दावा किया जा रहा है। टनल पर रोकी गई है ट्रेन मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, हथियारबंद लोगों ने जाफर एक्सप्रेस नाम की इस ट्रेन को बलूचिस्चान में टनल 8 पर रोक रखा है। लंबे समय से बलूचिस्तान में पाकिस्तान सरकार के खिलाफ लड़ रहे गुट बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने ट्रेन को हाईजैक करने के बाद जारी बयान में कहा गया है कि बंधकों में पाकिस्तानी सेना के जवान और सुरक्षा एजेंसियों के सदस्य शामिल हैं। बीएलए ने कहा है कि उनकी बात ना माने जाने पर इनको नुकसान पहुंचाया जा सकता है। बीएलए ने कहा है कि उन्होंने ट्रेन में महिलाओं, बच्चों और बलूच यात्रियों को रिहा कर दिया है। उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया है कि सभी बंधक पाकिस्तानी सेना के ही लोग हैं। उन्होंने कहा कि विदेशियों को बंध बनाने का उनका इरादा नहीं है। बलूचिस्तान में अलगाववादी बीएलए और पाकिस्तानी सरकार के बीच लंबे समय से संघर्ष चल रहा है। ट्रेन हाईजैक की ये घटना इस संघर्ष के तेज होने का इशारा करती है। बीएलए लंबे समय से इस क्षेत्र में स्वायत्तता की मांग कर रहा है। बीएलए लड़ाके पहले भी पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और सरकारी प्रतिष्ठानों पर हमले करते रहे हैं। हालांकि ट्रेन को हाईजैक करने का ये अपनी तरह का पहला मामला है। बलूचिस्तान प्रांत में बताया जा रहा है कि बोलान इलाके में ट्रेन सुरंग के अंदर पहुंची, जब यह हमला हुआ. मसलन, ट्रेन सुरंग नंबर 8 में ट्रेन जैसे ही पहुंची और ट्रैक पर धमाका हो गया. ट्रेन रुक गई और हमलावरों ने ट्रेन के इंजन पर फायरिंग की और इसमें ड्राइवर जख्मी हो गया. क्वेटा से पेशावर तक चलती है जाफर एक्सप्रेस जाफर एक्सप्रेस क्वेटा से पेशावर के बीच हर रोज चलती है. यह एक यात्री ट्रेन है. ये ट्रेन रोहरी-चमन रेलवे लाइन और कराची-पेशावर रेलवे लाइन के एक हिस्से के साथ यात्रा करते हुए, 1,632 किलोमीटर (1,014 मील) की दूरी तय करती है. ये दूरी कवर करने में ट्रेन को 34 घंटे 10 मिनट लगते हैं. पाकिस्तानी सेना के 100 से ज्यादा जवान भी बंधक बलूच लिब्रेशन आर्मी ने एक बयान में कहा है कि उनके पास 100 से भी ज्यादा पाकिस्तानी सेना के जवान बंधक हैं. इस बीच बीएलए ने पाकिस्तानी आर्मी के छह जवानों को मौत के घाट उतार दिया है. इसके साथ ही चेतावनी दी है कि अगर किसी तरह की कार्रवाई की जाती है तो सभी को मार दिया जाएगा. बलूचिस्तान में लंबे समय से पाकिस्तान का विरोध होता है.

स्थानीय कारीगरों को मिलेगा ग्लोबल-वोकल सपोर्ट : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि ‘एक जिला-एक उत्पाद’ हमारे कारीगरों और किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट भोपाल में आयोजित ‘एक जिला-एक उत्पाद’ (ओडीओपी) एक्सपो ने स्थानीय कारीगरों और किसानों के उत्पादों को वैश्विक मंच प्रदान किया। जीआईएस-भोपाल में 38 जिलों के विशिष्ट ओडीओपी उत्पादों का प्रदर्शन किया गया, जिसमें परंपरा और नवाचार का अनूठा संगम देखने को मिला। जीआईएस-भोपाल में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ओडीओपी को आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक सशक्त पहल बताया। उन्होंने कहा कि हर जिले का एक खास उत्पाद उसकी सांस्कृतिक और आर्थिक पहचान बन सकता है। ओडीओपी कार्यक्रम से लोकल प्रोडक्ट्स को ग्लोबल ब्रांड बनाने का मार्ग प्रशस्त हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जीआईएस-भोपाल में ओडीओपी-एक्सपो से हमारे स्थानीय उत्पादों, विशेष रूप से हस्तशिल्प और कृषि उत्पादों को वैश्विक मंच पर पहचान बनाने का अवसर मिला है। कला , हस्तशिल्प और कृषि उत्पादों का हुआ सजीव प्रदर्शन एक्सपो में ओडीओपी के लिए विशेष स्टॉल लगाए गए, जिन्हें लाइव काउंटर और प्रोसेस काउंटर में विभाजित किया गया। लाइव काउंटर में बाग प्रिंट, जरी जरदोजी, बटिक प्रिंट, कालीन, चंदेरी साड़ी, बांस, बलुआ पत्थर और कपड़े की जैकेट जैसे आठ प्रमुख उत्पादों की निर्माण प्रक्रिया को कारीगरों ने लाइव प्रदर्शित किया। जीआईएस-भोपाल में आयोजन के दौरान विदेशी निवेशकों और उद्योगपतियों ने स्थानीय कारीगरों के हुनर को करीब से देखा और उनकी कार्यशैली को समझा। एक्सपो के ‘कुम्हार पुरा’ और ‘टेक्निकल ज़ोन’ के लाइव काउंटर भी प्रमुख आकर्षण का केंद्र बने रहे।  खाद्य और कृषि उत्पादों को मिली नई पहचान ओडीओपी-एक्सपो में खाद्य, मसाले और फलों से जुड़े 38 जिला विशिष्ट उत्पादों को उनके निर्माण प्रक्रिया के साथ प्रदर्शित किया गया। इन उत्पादों की खरीद और निर्यात के अवसर भी उपलब्ध कराए गए। साथ ही, निवेशकों ने विशिष्ट उत्पादों के सेंपल लिए, जिससे भविष्य में व्यापारिक संबंध स्थापित होने की संभावना बढ़ी। मध्यप्रदेश के विशिष्ट ओडीओपी उत्पाद मध्यप्रदेश में ओडीओपी के तहत विभिन्न जिलों के पारंपरिक, वस्त्र और कृषि उत्पादों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इनमें बुरहानपुर का केला, ग्वालियर के आलू आधारित उत्पाद और स्टोन टाइल्स, खरगोन की मिर्च उत्पाद, मंदसौर के लहसुन उत्पाद, नीमच के धनिया उत्पाद, सतना के टमाटर आधारित उत्पाद, मुरैना की गजक और सरसों उत्पाद, इंदौर के आलू आधारित उत्पाद, भोपाल के अमरूद उत्पाद, चंदेरी की साड़िया, महेश्वर की साड़ियां और हथकरघा उत्पाद, टीकमगढ़ के मिट्टी शिल्प और हस्तशिल्प उत्पाद और धार के बाग प्रिंट शामिल है। राज्य के इन उत्पादों को मिला है जीआई टैग बाग प्रिंट, बालाघाट का चिन्नौर चावल, दतिया और टीकमगढ़ बेल धातु का कार्य, चंदेरी साड़ी, गोंड पेन्टिंग, ग्वालियर के हैन्डमेड कारपेट, जबलपुर का पत्थर शिल्प, झाबुआ का कड़कनाथ, इंदौर के चमड़े के खिलौने, माहेश्वरी की साड़ी, मुरैना की गजक, रतलामी सेव, रीवा का सुन्दरजा, उज्जैन का बटिक प्रिंट, सीहोर का शरबती गेहूँ, वारासिवनी की हेण्डलूम साड़ी, डिण्डोरी के मेटल वर्क को जीआई टैग मिला है। एक्सपो में हुआ निवेशकों और स्थानीय उद्यमियों में संवाद एक्सपो में निवेशकों और स्थानीय उद्यमियों के बीच संवाद का अवसर मिला, जिससे प्रदेश के कारीगरों और उत्पादों को नए बाजारों तक पहुंचाने की नींव रखी गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा “विदेशी निवेशकों से हुए मेल-मिलाप ने प्रदेश के उत्पादों को ग्लोबल व्यावसायिक मंच देने की आधारशिला रखी गई है।” जीआईएस, भोपाल में ओडीओपी-एक्सपो ने यह साबित कर दिया कि मध्यप्रदेश के पारंपरिक उत्पादों में वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता है। यह आयोजन स्थानीय उत्पादों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।  

भारत सरकार द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण का विस्तार अब वर्ष 2028-29 तक कर दिया गया

उत्तर बस्तर कांकेर भारत सरकार द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण का विस्तार अब वर्ष 2028-29 तक कर दिया गया है, इसके तहत सर्वे का कार्य भी प्रारंभ हो चुका है। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री हरेश मंडावी ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत नए पात्र हितग्राहियों के चयन हेतु सर्वे का कार्य प्रारंभ हो गया है। उन्होंने बताया कि इसमें ऐसे लोगों को शामिल किया जाएगा, जिनके नाम वर्ष 2011 और 2018 की सर्वे सूची से छूट गए हैं। सीईओ श्री मंडावी ने यह भी बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में पात्र परिवारों का सर्वेक्षण आवास प्लस मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से कराया जाएगा। इसके लिए ग्राम पंचायत सचिव, रोजगार सहायक तथा आवास मित्रों को प्रगणक के तौर पर नियुक्त किया गया है। साथ ही यह भी बताया गया कि कोई पात्र परिवार सर्वे से छूट जाता है तो वे अपने ग्राम पंचायत सचिव, रोजगार सहायक तथा आवास मित्र से सम्पर्क कर सर्वे का कार्य पूर्ण करा सकते हैं। जिला सीईओ ने बताया कि आवास प्लस 2024 सर्वे के लिए आवेदक स्वयं अपना पंजीयन करा सकते हैं। इसके लिए किसी भी एंड्रायड मोबाइल के गूगल प्ले स्टोर का उपयोग करके  AawaasPlus 2024  नामक एप को डाउनलोड किया जा सकता है। पीएमएवाय की पात्रता के लिए निर्धारित मापदंड :- प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण हेतु सर्वे कार्य प्रारंभ हो चुका है, इसके लिए परिवार/हितग्राही की पात्रता के लिए शासन द्वारा निर्धारित मापदंड इस प्रकार हैं- परिवार/हितग्राही के पास मोटरयुक्त तिपहिया/चौपहिया वाहन न हो। मशीनीकृत तिपहिया/चौपहिया कृषि उपकरण न हो। 50 हजार रूपए अथवा इससे अधिक ऋण सीमा वाले किसान क्रेडिट कार्ड न हो। ऐसे परिवार जिनका कोई सदस्य सरकारी कर्मचारी न हो, सरकार के पास पंजीकृत गैर कृषि उद्यम वाले परिवार न हो। ऐेसे परिवार जिनका कोई सदस्य 15 हजार रूपए से अधिक प्रतिमाह न कमा रहा हो। आयकर देने वाले परिवार न हो, व्यवसाय कर (टैक्स) देने वाले परिवार न हो। साथ ही ऐसे परिवार जिनके पास 2.5 एकड़ या इससे अधिक सिंचित भूमि न हो तथा वे परिवार जिनके पास 05 एकड़ या इससे अधिक असिंचित भूमि नहीं होना चाहिए।

हाईकोर्ट का आदेश बिना मान्यता के छात्रों को एडमिशन देने वाली यूनिवर्सिटी-कॉलेज पर केस दर्ज करो

जबलपुर रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के अंतर्गत सेंट्रल लॉ कॉलेज के छात्रों को मान्यता न होने के चलते बार काउंसिल में रजिस्ट्रेशन ना होने के मामले में अब कॉलेज सहित रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय पर भी गाज गिर सकती है। हाईकोर्ट ने इसे छात्रों के साथ धोखाधड़ी करार देते हुए भोपाल कमिश्नर को जांच के लिए आदेशित किया है। बार काउंसिल में एनरोलमेंट ना होने का मामला जबलपुर हाईकोर्ट में व्योम गर्ग,रागिनी गर्ग, शिखा पटेल एवं अन्य के ने स्टेट वॉर काउंसिल में होने वाले स्टूडेंट्स के एनरोलमेंट नहीं किए जाने पर याचिका दायर की गई थी। इस याचिका में बताया कि स्टेट वॉर काउंसिल और यूनिवर्सिटी ने एफिलेटेड कॉलेज से लॉ की डिग्री प्राप्त किए जाने के बावजूद भी एनरोलमेंट नहीं किए। साथ ही याचिकार्ताओं ने हाईकोर्ट से मामले में दखल दिए जाने की गुहार लगाई। कोर्ट के द्वारा पिछली सुनवाई के दौरान लगाई गई थी फटकार इस याचिका में सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की मुख्य बेंच ने राज्य सरकार को याचिका में मौजूद कॉलेज एवं यूनिवर्सिटी समेत उन सभी कॉलेजों पर जो बिना मान्यता के संचालित हो रहे हैं उन पर कार्रवाई कर उसकी रिपोर्ट को अगली सुनवाई में पेश करने के निर्देश दिए गए थे। जिस पर राज्य सरकार के द्वारा रिपोर्ट पेश नहीं किए जाने पर कोर्ट ने फटकार लगाई। राज्य सरकार में उच्च शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव के खिलाफ अवमानना का नोटिस भी कोर्ट ने जारी किया। राज्य सरकार ने अपना पल्ला झाड़ा इस याचिका में हुई पूर्व की सुनवाई में सभी प्रतिवादियों की ओर से जवाब दाखिल किया गए। जिसमें बार काउंसिल ऑफ इंडिया के द्वारा कॉलेज(सेंट्रल इंडिया लॉ कॉलेज) के द्वारा मान्यता शुल्क न दिए जाने की वजह से उसे मान्यता नहीं दिए जाने की बात कही गई है। जिस पर सरकार की तरफ से कोर्ट में बताया गया कि इस पूरे मामले में संबंधित यूनिवर्सिटी के द्वारा गलती की गई है। यूनिवर्सिटी ने कॉलेज का वेरिफिकेशन क्यों नहीं किया। जिस पर यूनिवर्सिटी ने यह तर्क दिया गया की बार काउंसिल ऑफ इंडिया के द्वारा 2021-22 के लिए जारी कॉलेज की सूची में इस कॉलेज को व्यक्तिगत तौर पर अमान्य नहीं बताया गया था। कोर्ट ने बताया एडमिनिस्ट्रेटिव फैलियर अमान्य घोषित नहीं होने की वजह से इसे पोर्टल पर अपलोड किया गया और कॉलेज के द्वारा खुद को एफिलेटेड बताते हुए बच्चों के एडमिशन किए जाने का जवाब कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट के द्वारा सभी तर्कों के आधार पर इस पूरे मामले को एडमिनिस्ट्रेटिव फैलियर माना। हालांकि फिर भी राज्य की तरफ से खुद को गलत ना ठहराते हुए मामले से पल्ला झाड़ता की कोशिश की गई। चीफ जस्टिस की बेंच ने की सुनवाई इस याचिका पर सुनवाई चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत और जस्टिस विवेक जैन की डिवीजन बेंच ने की। जिसमें सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आए कि नियम अनुसार नए कॉलेजों को प्रोविजनल मान्यता 3 सालों के लिए एवं रेगुलर कॉलेज को यह मान्यता 5 सालों के लिए दी जा सकती है। इसके बाद भी वार काउंसिल ऑफ इंडिया के द्वारा कई मामलों में 20 साल बाद भी पूर्वाधार पर मान्यता दी गई है। जिसे कोर्ट ने छात्रों के साथ सीधी तौर पर धोखाधड़ी बताया। उच्च शिक्षा विभाग की ओर से कोर्ट में वीसी के माध्यम से प्रस्तुत हुए उच्च शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अनुपम राजन को भी कोर्ट ने फटकार लगाई। भोपाल कमिश्नर को जांच के आदेश कोर्ट ने कहा कि अब तक आप लोग क्या कर रहे थे। इसके साथ ही को कोर्ट ने भोपाल कमिश्नर को इस मामले की जांच करने के आदेश दिए हैं और इस जांच में बार काउंसिल को भी भोपाल कमिश्नर की पूरी सहायता करने साथ ही जांच की रिपोर्ट को कोर्ट के समक्ष दो हफ्तों में पेश किए जाने के निर्देश जारी करते हुए इस मामले की अगली सुनवाई 25 मार्च को तय की गई है। इसके बाद जांच रिपोर्ट के आधार पर कॉलेज सहित रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय पर भी आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जा सकता है।

Immigration and Foreigners Bill : अवैध अप्रवास रोकने के लिए सरकार ने नया विधेयक…

नई दिल्ली घुसपैठ और अवैध अप्रवास रोकने के लिए लाेकसभा में मंगलवार को अप्रवासन और विदेशी विधेयक 2025 पेश किया गया है। अमित शाह की तरफ से गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने विधेयक पेश किया। उन्होंने कहा कि किसी को देश में आने से रोकने के लिए यह बिल नहीं लाया गया है, बल्कि यह विधेयक इसलिए लाया गया है कि विदेशी भारत आएं। वे यहां के नियमों का पालन करके ही आएं। हालांकि कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी और टीएमसी सांसद सौगत राय ने बिल का विरोध किया है। Immigration and Foreigners Bill 2025 का क्या है उम्मीद इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य भारत के इमिग्रेशन नियमों को आधुनिक बनाना और उन्हें मजूबत करना है। यह बिल भारत में दाखिल होने और यहां से बाहर जाने वाले व्यक्तियों के संबंध में पासपोर्ट या बाकी यात्रा दस्तावेजों की जरूरतों और विदेशियों से संबंधित मामलों को रेगुलेट करने की शक्तियां केंद्र सरकार को देगा। इनमें वीजा और रजिस्ट्रेशन की जरूरत और उससे संबंधित मामलों को शामिल किया गया है। इमिग्रेशन से जुड़ा यह विधेयक देश की सुरक्षा के लिहाज से काफी अहम है। इस विधेयक में कानूनी स्थिति साबित करने की जिम्मेदारी राज्य के बजाय व्यक्ति पर डाल दी गई है। यह विधेयक स्पष्ट रूप से भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा, संप्रभुता या अखंडता के लिए खतरा माने जाने वाले किसी भी विदेशी नागरिक के प्रवेश या निवास पर पाबंदी लगाता है। साथ ही अनिवार्य करता है कि सभी विदेशी आगमन पर रजिस्ट्रेशन करें और उनकी आवाजाही, नाम परिवर्तन और संरक्षित या प्रतिबंधित क्षेत्रों में उनकी एंट्री पूरी तरह बैन हो। इसके अलावा, शैक्षणिक प्रतिष्ठानों, अस्पतालों और नर्सिंग होम जैसी संस्थाओं को इमिग्रेशन ऑफिसर को विदेशी नागरिकों की मौजूदगी की जानकारी देनी पड़ेगी। इमिग्रेशन नियमों के उल्लंघन के लिए सख्त सजा का भी प्रावधान प्रस्तावित कानून में इमिग्रेशन नियमों के उल्लंघन के लिए सख्त सजा का भी प्रावधान किया गया है। वैध पासपोर्ट या वीज़ा के बिना भारत में अवैध रूप से एंट्री करने पर पांच साल तक की कैद और 5 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। जाली दस्तावेज़ों का इस्तेमाल करने वालों को दो से सात साल तक जेल और एक लाख रुपये से 10 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। निर्धारित समय से अधिक समय तक रहना, वीजा शर्तों का उल्लंघन करना या प्रतिबंधित क्षेत्रों में प्रवेश करने जैसे अपराधों के लिए तीन साल तक की कैद, 3 लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। बिना उचित दस्तावेज के व्यक्तियों को लाने और ले जाने वाले ट्रांसपोर्ट को भी जवाबदेह ठहराया जाएगा। उन पर 5 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है और भुगतान न करने पर उनके वाहन जब्त किए जा सकते हैं। ऐसे मामलों में जहां किसी विदेशी को प्रवेश से वंचित किया जाता है। ट्रांसपोर्टर पर उनके तत्काल प्रस्थान को सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी होगी। विधेयक में आव्रजन अधिकारियों को ज्यादा शक्तियां भी दी गई हैं। जिसमें बिना वारंट के व्यक्तियों को गिरफ्तार करने का अधिकार तक शामिल है। केंद्र सरकार के पास विदेशी नागरिकों के आवाजाही को लेकर इस कानून के बाद ज्यादा अधिकार आएंगे। इसमें प्रस्थान को रोकने, प्रवेश को प्रतिबंधित करने और महत्वपूर्ण क्षेत्रों तक पहुंच को प्रतिबंधित करने की पावर शामिल है। विदेशी नागरिकों को अपने खर्च पर भारत से बाहर निकलना होगा। पहचान के उद्देश्य से बायोमेट्रिक डेटा देना होगा।     प्रस्तावित कानून विदेशी अधिनियम 1946     भारत में प्रवेश के लिए पासपोर्ट अधिनियम 1920     विदेशियों का पंजीकरण अधिनियम 1939     आव्रजन यानी वाहक दायित्व अधिनियम 2000 समेत कई औपनिवेशिक युग के कानूनों को बदलने की कोशिश है। ये कानून, मूल रूप से विश्व युद्ध के समय युद्धकालीन परिस्थितियों के लिए बनाए गए थे, अब पुराने हो चुके हैं। सरकार ने तर्क दिया कि आव्रजन नियमों को आधुनिक बनाने और गैर जरूरी प्रावधानों को खत्म करने के लिए एक एकीकृत कानून की जरूरत है। गृह राज्य मंत्री ने भी बिल पेश करते हुए इस बात पर जोर दिया कि यह बिल की पूरी तरह संवैधानिक है और सातवीं अनुसूचि में यह विषय आता है। भारत में प्रवेश और निष्कासन विषय के तहत यह बिल लाया गया है। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा के लिहाज से यह बिल बहुत जरूरी है। राय ने कहा कि हम किसी को रोकने के लिए यह बिल नहीं ला रहे बल्कि जो लोग आएं वे भारत के कानून का पालन करें। इसके लिए यह बिल ला रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी विदेशी के अस्पताल या फिर शैक्षणिक परिसर में जाने से पहले उसकी जानकारी अब भी मुहैया कराई जाती थी। लेकिन अब तक प्रावधान आदेश के रूप में था। जिसे कानून के रूप में लाया जा रहा है। नित्यानंद राय की ओर से बिल पेश करने के दौरान कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने बिल का विरोध करते हुए कहा कि यह मूलभूत अधिकारों का हनन है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक संविधान के मुताबिक नहीं है और इसमें विदेशी नागरिकों के अस्पताल में भर्ती होने तक का ब्यौरा मांगा गया है जो कि मेडिकल एथिक्स के खिलाफ है। तिवारी ने मांग करते हुए कहा कि इस बिल को वापस लिया जाए या फिर जेपीसी के पास भेजा जाए।  

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