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उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा- मंत्रालय में रीवा एवं मऊगंज ज़िले में जल जीवन मिशन के कार्यों की समीक्षा की

भोपाल उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि स्वच्छ पेय जल अच्छे स्वास्थ्य की आधारशिला है। इससे जलजनित बीमारियों पर नियंत्रण होता है, साथ ही अस्पतालों पर भी दबाव कम होता है। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने जल जीवन मिशन के कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण किया जाये। जल की गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाये। ऐसे क्षेत्र जहाँ कार्य पूर्ण हो चुका है, वहाँ मॉनिटरिंग करके, प्रत्येक घर में उचित मात्रा और गुणवत्ता पूर्ण जल की आपूर्ति सुनिश्चित की जाये। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने मंत्रालय में रीवा एवं मऊगंज ज़िले में जल जीवन मिशन के कार्यों की समीक्षा की। प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी श्री पी. नरहरि, एमडी जल निगम श्री केवीएस चौधरी सहित विभागीय वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कंदेला सामुदायिक योजना के अंतर्गत ग्राम सगरा, इटौरा, भाटी, पुरैना, टिकुरी, अजगरहा, नवागांव, लक्ष्मणपुर लौवा, कपुरी, सनौरा, कुशहा आदि में गांवों की जलापूर्ति की स्थिति का भौतिक सत्यापन कर त्वरित समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। जल जीवन मिशन अंतर्गत स्वीकृत 32 एकल नल-जल योजनाओं की टेंडर प्रक्रिया को शीघ्र पूरा करने और समयबद्ध रूप से कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिये। उन्होंने टमस सामुदायिक योजना में 20 जल टंकियों का कार्य शीघ्र प्रारंभ करने के निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि योजनाओं की प्रभावी निगरानी कर समय-सीमा में कार्यों की पूर्ति सुनिश्चित की जाये।  

चैंपियन ट्रॉफी के फाइनल में शान से बनाई भारत ने जगह, ऑस्ट्रेलिया को दी 5 विकेट से मात

नई दिल्ली. भारतीय टीम ने ऑस्ट्रेलिया को हराकर आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी 2025 के फाइनल में जगह बना ली है। टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी ऑस्ट्रेलिया की टीम ने 49.3 ओवर में सभी विकेट खोकर 264 रन बनाए, इसके जवाब में भारत ने स्टार बल्लेबाज विराट कोहली की अर्धशतकीय पारी की बदौलत 11 गेंद शेष रहते मैच अपने नाम किए। भारत की ओर से विराट कोहली ने सर्वाधिक 84 रन बनाए। आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी 2025 का पहला सेमीफाइनल भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेला जा रहा है। ऑस्ट्रेलिया ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 49.3 ओवर में सभी विकेट खोकर 264 रन बनाए हैं। 265 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम को 30 के स्कोर पर पहला झटका लगा है। गिल 11 गेंद में 8 रन बनाकर आउट हुए। भारतीय कप्तान रोहित शर्मा 29 गेंद में 28 रन बनाकर पवेलियन लौट गए हैं। उन्होंने अपनी पारी में तीन चौके और एक छक्का लगाया। श्रेयस अय्यर 62 गेंद में 45 रन बनाकर आउट हुए। अक्षर पटेल 30 गेंद में 27 रन बनाकर आउट हुए। स्टार बल्लेबाज विराट कोहली 98 गेंद में 84 रन बनाकर पवेलियन लौटे। हार्दिक पांड्या 24 गेंद में 28 रन बनाकर आउट हुए। रविंद्र जडेजा और हार्दिक पांड्या क्रीज पर मौजूद हैं। टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी ऑस्ट्रेलिया की शुरुआत बेहद खराब रही है। सलामी बल्लेबाद कूपर कॉनली बिना खाता खोले पवेलियन लौटे। उन्हें मोहम्मद शमी ने पवेलियन का रास्ता दिखाया। ट्रेविस हेड ने धीमी शुरुआत के बाद ताबड़तोड़ बड़े शॉट खेले और जब भारत के लिए खतरा बन रहे थे तो वरुण चक्रवर्ती ने उन्हें अपनी जाल में फंसाया। हेड 33 गेंद में 39 रन बनाकर आउट हुए। मार्नस लाबुशेन 36 गेंद में 29 रन बनाकर आउट हुए। लाबुशेन ने स्मिथ के साथ तीसरे विकेट के लिए 56 रन की साझेदारी की। जोश इंग्लिस 12 गेंद में 11 रन ही बना सके। स्टीव स्मिथ 96 गेंद में 73 न बनाकर आउट हुए। कप्तान ने अपनी पारी में चार चौके और एक छक्का लगाया। ग्लेन मैक्सवेल सात रन ही बना सके। बेन 29 गेंद में 19 रन बनाकर आउट हुए। एलेक्स कैरी ने 57 गेंद में 61 रन बनाए। नाथन एलिस ने 10 रन बनाए। हार्दिक ने जंपा को क्लीन बोल्ड करके ऑस्ट्रेलिया की पारी का अंत किया। भारत के लिए मोहम्मद शमी ने तीन वरुण चक्रवर्ती और रविंद्र जडेजा ने 2-2 विकेट लिए।

देश में एमएसएमई की संख्या आज बढ़कर 6 करोड़ से भी ज्यादा हो गई: पीएम मोदी

नई दिल्ली पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि देश में एमएसएमई की संख्या आज बढ़कर 6 करोड़ से भी ज्यादा हो गई है। इसी के साथ करोड़ों लोगों को रोजगार के अवसर मिले हैं। पीएम मोदी ने पोस्ट-बजट वेबिनार के मंच से सभा को वर्चुअली संबोधित करते हुए कहा कि 2020 में हमने एमएसएमई की परिभाषा में संशोधन किया। यह 14 साल बाद किया गया। इससे यह डर दूर हो गया कि बढ़ते कारोबार से सरकारी लाभ खत्म हो जाएंगे। एमएसएमई को निरंतर आगे बढ़ते रहने का आत्मविश्वास मिले, इसके लिए इस बजट में एमएसएमई की परिभाषा का विस्तार किया गया है। उन्होंने लोन वितरण के लिए नए तरीके अपनाने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि नए तरीकों के साथ एमएसएमई को कम लागत और समय पर लोन मिलना सुनिश्चित हो सकेगा। उन्होंने उद्योगों को एमएसएमई को सहयोग देने के क्रम में मेंटरशिप कार्यक्रम शुरू करने को कहा। बजट में एमएसएमई के लिए क्रेडिट गारंटी कवर को 5 करोड़ से बढ़ाकर 10 करोड़ कर दिया गया था। उन्होंने कहा, “आज 14 सेक्टर्स को पीएलआई योजना का लाभ मिल रहा है। इस योजना के तहत 7.5 करोड़ यूनिट को मंजूरी दी गई है। इससे देश में 1.5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश आया है और 13 लाख करोड़ से ज्यादा का उत्पादन हुआ है। इसी के साथ 5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का निर्यात हुआ है।” मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को लेकर पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि आज दुनिया का हर देश, भारत के साथ अपनी इकोनॉमिक भागीदारी को मजबूत करना चाहता है। उन्होंने मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर से इस पार्टनरशिप का ज्यादा से ज्यादा लाभ उठाने के लिए आगे आने का आग्रह किया। उन्होंने भारत की मैन्युफैक्चरिंग यात्रा में रिसर्च और डेवलपमेंट (आरएंडडी) के अहम योगदान को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि इसे आगे बढ़ाने और गति देने की जरूरत है। उन्होंने सुझाव दिया कि आरएंडडी से हम इनोवेटिव प्रोडक्ट्स पर फोकस कर सकते हैं और साथ ही प्रोडक्ट्स में वैल्यू एडिशन कर सकते हैं।  

अब चीन का एक्शन, अमेरिकी आयात पर इतने प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने एक्शन से टैरिफ वॉर शुरू करते दिख रहे हैं और इसने वर्ल्ड इकनॉमी में खलबली मचा दी है. अमेरिका के राष्ट्रपति बनने के बाद से डोनाल्ड ट्रंप एक के बाद एक देशों से आयात पर टैरिफ (टैक्स) लगा रहे हैं और अब दूसरे देश जवाबी कदम उठा रहे हैं. मंगलवार, 4 मार्च को पहले कनाडा, मैक्सिको और चीन के खिलाफ ट्रंप के नए टैरिफ की घोषणा की और इसके लागू होते ही चीन और कनाडा ने जवाबी कार्रवाई का ऐलान कर दिया है. यहां हम आपको बताएंगे कि अमेरिका ने किन देशों पर कितना टैरिफ लगाया है और उन देशों ने जवाब में क्या कदम उठाए हैं. फिर आपको आसान शब्दों में बताएंगे कि टैरिफ होता क्या है और ट्रंप इसका इस्तेमाल क्यों कर रहे हैं. अमेरिका ने किसपर कितना टैरिफ लगाया? राष्ट्रपति ट्रंप ने कनाडा और मैक्सिको के खिलाफ 25% टैरिफ और चीन के खिलाफ 20% टैरिफ की घोषणा की है. चीन पर पिछले महीने जो 10% टैरिफ लगाया गया था, उसे अब दोगुना कर दिया गया है. चीन की जवाबी कार्रवाई बीजिंग के वित्त मंत्रालय ने चिकन, गेहूं, मक्का और कपास सहित कई अमेरिकी कृषि आयातों पर 15% टैरिफ की घोषणा की है. साथ ही सोयाबीन, पोर्क, बीफ, फल, सब्जियां और डेयरी उत्पादों जैसे अन्य उत्पादों पर 10% टैरिफ लगाया है. ये टैक्स 10 मार्च से लागू होंगे. साथ ही चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने 10 अमेरिकी कंपनियों को तथाकथित “अविश्वसनीय इकाई सूची” (unreliable entity list) में और 15 अमेरिकी संस्थाओं को निर्यात नियंत्रण सूची में जोड़ा है, जो आज से प्रभावी हो जाएगा. जिन अमेरिकी संस्थाओं को चीन ने निशाना बनाया है, उनमें अमेरिकी बायोटेक फर्म इल्लुमिनिया (Illuminia) शामिल है. चीन ने इल्लुमिनिया पर आरोप लगाया है कि वह “चीनी कंपनियों के खिलाफ भेदभावपूर्ण कदम” उठाती है. 4 मार्च से इल्लुमिनिया को चीन में जीन अनुक्रमण यानी सिक्वेंसिंग की मशीनों के निर्यात पर बैन लगा दिया है. चीन की निर्यात नियंत्रण लिस्ट में जोड़ी गई 15 संस्थाओं में एविएशन, समुद्री इंजीनियरिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्षेत्र की कंपनियां शामिल हैं. कनाडा ने भी टैरिफ लादा कनाडा ने घोषणा की है कि वह 4 मार्च से 107 बिलियन डॉलर (155 बिलियन कनाडाई डॉलर) के अमेरिकी सामानों पर 25% का जवाबी टैरिफ लगाएगा. रायटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, कनाडाई प्रधान मंत्री जस्टिन ट्रूडो ने अमेरिका के टैरिफ को टालने के प्रयास में कहा कि अगर ट्रंप प्रशासन अपनी योजना पर अमल करता है तो कनाडा मंगलवार से अमेरिकी सामानों पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाएगा. मैक्सिको ने भी कर ली तैयारी बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार जहां एक तरफ कनाडा और चीन पहले ही जवाबी टैरिफ लगाने की कसम खा चुके हैं, वहीं मेक्सिको भी 24 घंटे के अंदर जवाबी टैरिफ लगा सकता है. मैक्सिको से होने वाले आयात पर अमेरिका के 25% टैरिफ लागू होने से पहले, मैक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाम ने कहा कि उनके देश ने आकस्मिक योजनाएं बनाई हैं. उन्होंने कहा, “इस स्थिति में, हमें संयम, शांति और धैर्य की आवश्यकता है. हमारे पास प्लान ए, प्लान बी, प्लान सी और यहां तक ​​कि प्लान डी भी है.” शीनबाम ने कहा कि वह कनाडाई समयानुसार मंगलवार को मेक्सिको के जवाब के बारे में और बात करेंगी. टैरिफ क्या होता है? टैरिफ दूसरे देशों से आयात होने वाली वस्तुओं पर लगाया जाने वाला टैक्स है. जो कंपनियां विदेशी सामान देश में लाती हैं वे सरकार को टैक्स देती हैं. सरकार इस टैक्स को बढ़ाकर उस सामान की कीमत बढ़ा सकती है और टैक्स कम करके उसकी कीमत कम कर सकती है. यानी कुल मिलाकर सरकार टैरिफ के जरिए इस चीज को कंट्रोल करती है कि उसे देश में कौन सा विदेशी सामान चाहिए और कितना चाहिए. आमतौर पर, टैरिफ किसी प्रोडक्ट के कीमत का एक खास प्रतिशत होता है. आपको उदाहरण से बताते हैं. जैसे ट्रंप ने चीन पर 20% टैरिफ लगाया है. अब इसका मतलब हुआ कि चीन से अगर 10 डॉलर का कोई सामान अमेरिका के अंदर आता है तो उसपर 2 डॉलर का अतिरिक्त टैक्स लगेगा. अब यह कंपनियों पर निर्भर करता है कि वो टैरिफ की कुछ या पूरी लागत अपनी ग्राहकों पर डालती है या नहीं. अब अमेरिका में चीन, कनाडा और मेक्सिको से आने वाले सामान की कीमत अचानक से बढ़ सकती है. ट्रंप टैरिफ क्यों लगा रहे हैं? इसका आसान सा जवाब ट्रंप के चुनावी स्लोगन ‘अमेरिका फर्स्ट’ में छिपा है. ट्रंप संरक्षणवादी है यानी अमेरिका के अपने बिजनेस को तरजीह देते हैं. ऐसे में जो टैरिफ वाला हथकंडा है वो ट्रंप की आर्थिक योजनाओं का एक केंद्रीय हिस्सा है. उनका कहना है कि टैरिफ से अमेरिकी के अंदर मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलेगा और नौकरियों की रक्षा होगी, साथ ही सरकार को मिलने वाला टैक्स बढ़ेगा और अर्थव्यवस्था में बढ़ोतरी होगी. ड्रग्स सप्लाई पर ऐक्शन ट्रंप ने फरवरी में तीनों देशों पर टैरिफ जड़ने का ऐलान किया था। ट्रंप के मुतबिक कनाडा और मेक्सिको की सीमा से अवैध नशीले पदार्थों का कारोबार चल रहा है जिसकी रोकथाम के लिए यह कदम उठाया जा रहा है। बाद में कनाडा और मेक्सिको की ओर से सीमा सुरक्षा को लेकर वादे करने पर उनके ऊपर 25% टैरिफ के फैसले को एक महीने के लिए स्थगित कर दिया था। उनसे सोमवार को इस बारे में सवाल किया गया कि क्या अभी दोनों देशों से इसे लेकर कोई डील की जा सकती है तो उन्होंने साफ इनकार कर दिया और दोहराया कि टैरिफ मंगलवार से लागू हो रहे हैं। ट्रंप ने 2 अप्रैल से जवाबी टैरिफ जड़ने का ऐलान भी किया है। फरवरी अपने ट्रुथ सोशल प्लेटफॉर्म पर ट्रंप ने कहा था कि मेक्सिको और कनाडा से अभी भी बड़े और अस्वीकार्य स्तर पर ड्रग्स आ रहे हैं। ट्रंप के मुताबिक 1 लाख से ज्यादा लोगों की मौत इन ड्रग्स के कारण हुई है। उन्होंने दावा किया था कि इनमें से ज्यादातर, जो फेंटनिल प्रकार के हैं, वे चीन से सप्लाई हो रहे हैं। अपने हालिया फैसले में ट्रंप ने चीन के ऊपर लगने वाली 10% ड्यूटी के ऊपर अतिरिक्त 10% ड्यूटी जड़ दी है। राष्ट्रपति का आरोप है कि चीन ने अवैध ड्रग्स के कारोबार को रोकने के … Read more

अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने भी प्रयागराज महाकुंभ की प्रशंसा की : सीएम योगी

 लखनऊ उत्तर प्रदेश की विधानसभा में बोलते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ ने महाकुंभ का जिक्र किया. उन्होंने मजबूत कानून-व्यवस्था का उदाहरण देते हुए कहा कि महाकुंभ में 33 करोड़ महिलाएं आईं, लेकिन उत्पीड़न/अपराध की एक भी घटना नहीं हुई. कुल 67 करोड़ श्रद्धालु कुंभ आए लेकिन एक भी अपराध की घटना नहीं हुई. वहीं, समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए सीएम योगी ने कहा- “आप(समाजवादी पार्टी) भारत की आस्था के साथ खिलवाड़ करते हैं.  आपने कहा कि हमारी सोच सांप्रदायिक है लेकिन आप हमें बताएं कि हम कैसे सांप्रदायिक हो सकते हैं? हम सबका साथ, सबका विकास की बात करते हैं… 45 दिनों के आयोजन(महाकुंभ) ने भारत की विरासत और विकास की एक अनुपम छाप न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया में छोड़ी है.” प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ पर यूपी विधानसभा में बोलते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा, “महाकुंभ के 45 दिनों में देश और दुनिया से 66 करोड़ से अधिक लोग मेले में आए. महाकुंभ में आए 66 करोड़ लोगों में से आधी संख्या महिला तीर्थयात्रियों की रही होगी, लेकिन उत्पीड़न, लूट, अपहरण या हत्या की एक भी घटना नहीं हुई… महाकुंभ में अपेक्षा से अधिक लोग आए और जो लोग आए और पवित्र स्नान किया, वे अभिभूत होकर लौटे. अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने भी प्रयागराज महाकुंभ की प्रशंसा की.” सीएम योगी ने आगे कहा- “आज की समाजवादी पार्टी डॉ. लोहिया का नाम तो लेती है, लेकिन उनके आदर्शों से दूर हो गई है. डॉ. लोहिया के आचरण, आदर्शों और सिद्धांतों को सपा भूल गई है. उन्होंने कहा कि विष्णु, शंकर और राम भारत की एकता के आधार हैं, लेकिन समाजवादी पार्टी इसमें विश्वास नहीं करती. हम सबका साथ-सबका विकास की बात करते हैं. महाकुंभ में भारत की विरासत और विकास की अनूठी छाप देखने को मिली. महाकुंभ में जाति, धर्म या क्षेत्र के आधार पर किसी भी तरह का कोई भेदभाव नहीं देखा गया.” बकौल सीएम योगी- इस बार के महाकुंभ में 66 करोड़ 30 लाख लोगों ने स्नान किया. ये विश्व का सबसे बड़ा आध्यात्मिक आयोजन था.  इसकी दुनिया भर में प्रशंसा हो रही है. दुनिया भर के मीडिया ने कहा कि इतना बड़ा आयोजन किसी चमत्कार से कम नहीं है. मगर कुछ लोग ऐसे हैं जिन्हें सिर्फ कमियां ही नजर आ रही थीं.    

मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने भेजा 20 करोड़ का मानहानि नोटिस, नेता प्रतिपक्ष बोले- न डरे हैं, न डरेंगे

 भोपाल मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार को 20 करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस भेजा है. मंत्री पर जमीन खरीद घोटाले और परिवहन विभाग में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए जाने के बाद यह नोटिस जारी किया गया है. राजपूत ने सिंघार पर उनकी छवि खराब करने का आरोप लगाते हुए नोटिस में 15 दिनों के भीतर जवाब देने और सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है. नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने गोविंद सिंह राजपूत पर आरोप लगाया था कि उन्होंने परिवहन मंत्री रहते हुए परिवहन विभाग के भ्रष्टाचार से प्राप्त धन से 1250 करोड़ रुपये की जमीन खरीदी. इसके अलावा, सिंघार ने पूर्व आरटीओ कांस्टेबल सौरभ शर्मा के मामले को उठाते हुए परिवहन घोटाले में राजपूत की संलिप्तता का दावा किया था. इन आरोपों को राजपूत ने सिरे से खारिज करते हुए इसे उनकी प्रतिष्ठा को धूमिल करने की साजिश करार दिया. सिंघार ने कहा था-राजपूत ने खरीदी 400 करोड़ की जमीनें नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने 15 फरवरी को कांग्रेस प्रदेश कार्यालय में पत्रकार वार्ता में मंत्री गोविंद सिंह राजपूत पर कई आरोप लगाए थे. उन्होंने कहा था “2019 से 2024 तक गोविंद सिंह राजपूत और परिवार के लोगों के लोगों ने करोड़ों की जमीन खरीदी. उन्होंने रजिस्ट्री के कागजात दिखते हुए कहा था कि मंत्री गोविंद सिंह, पत्नी सविता सिंह, पुत्र आकाश सिंह, आदित्य सिंह के नाम पर सागर शहर में तिलीमाफी, बशियाभान्या, कनेरादेव, भापेल, जैसीनगर, झिला, नरयावली सहित कई क्षेत्रों में 150 एकड़ से ज्यादा जमीन की खरीदारी का रिकॉर्ड दर्ज है. उन्होंने पूछा था कि आखिर क्यों सौरभ शर्मा और उसके साथियों की गिरफ्तारी के बाद भी डायरी में छिपे नाम सामने नहीं आ रहे हैं.” नोटिस से बढ़ी सिंघार की मुश्किलें उनके आरोपों के बाद मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने 20 करोड़ के मानहानी का नोटिस उमंग सिंघार को भेज दिया है. वकील के माध्यम से भेजे गए नोटिस में कहा गया है कि छवि खराब करने के लिए झूठे आरोप लगाए गए हैं. नोटिस में 15 दिनों में नेता प्रतिपक्ष से जवाब देने के लिए कहा गया है. वहीं मानहानि नोटिस मामले में उमंग सिंघार ने सोशल मीडिया X पर प्रतिक्रिया दी है. नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि “नोटिस का जवाब भी देंगे और कोर्ट भी जाएंगे. न डरे हैं, न डरेंगे! नोटिस के जवाब में उमंग सिंघार ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने ट्वीट किया, “नोटिस का जवाब भी देंगे और कोर्ट भी जाएंगे. न डरेंगे, न झुकेंगे.” सिंगार ने अपने आरोपों पर कायम रहते हुए कहा कि वे इस मामले को कानूनी रूप से लड़ेंगे. गोविंद सिंह राजपूत ने नोटिस में स्पष्ट किया कि उमंग सिंघार के ‘बेबुनियाद और दुर्भावनापूर्ण’ आरोपों ने उनकी सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचाया है. नोटिस में सिंगार से माफी मांगने के साथ-साथ 20 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की गई है. यह विवाद भोपाल की सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है, और अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि यह मामला कोर्ट में क्या मोड़ लेता है.

सर्बियाई विपक्षी सांसदों ने सरकार की नीतियों के विरोध में संसद के अंदर धुआंधार ग्रेनेड और आंसू गैस के गोले फेंके

बेलग्रेड यूरोपीय देश सर्बिया की संसद में विपक्षी सांसदों ने भारी बवाल मचाया है. विपक्षी सांसदों ने संसद में एक के बाद एक कई स्मोक ग्रेनेड और आंसू गैस के गोले फेंके जिससे संसदीय सत्र में भारी अव्यवस्था फैल गई. संसद में हाथापाई भी देखने को मिली. संसदीय सत्र के लाइव टेलीविजन प्रसारण में दिखाया गया कि सर्बियाई विपक्षी सांसदों ने मंगलवार को सरकार की नीतियों के विरोध में संसद के अंदर स्मोक ग्रेनेड और आंसू गैस के गोले फेंके. इसके बाद पूरे संसद में काला और गुलाबी धुआं फैल गया. विपक्षी सांसद सरकार से नाराज प्रदर्शन कर रहे छात्रों का भी समर्थन कर रहे थे. किस बात पर नाराज विपक्ष ने संसद में मचाया उत्पात चार महीने पहले सर्बिया में रेलवे स्टेशन की छत गिरने से 15 लोगों की मौत हो गई थी. इसके बाद सरकार के खिलाफ प्रदर्शन शुरू हुए जो अब सरकार के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गए हैं. विधान सभा सत्र में, सर्बियाई प्रगतिशील पार्टी (एसएनएस) के नेतृत्व वाले सत्तारूढ़ गठबंधन ने सत्र के एजेंडे को मंजूरी दी जिसके बाद कुछ विपक्षी नेता अपनी सीट से उठकर संसद के अध्यक्ष की तरफ दौड़े. इस दौरान सुरक्षा गार्ड्स से उनकी हाथापाई देखने को मिली. वहीं, कुछ विपक्षी सांसदों ने स्मोक ग्रेनेड और आंसू गैस के गोले फेंके. लाइव प्रसारण में संसद की इमारत के अंदर काला और गुलाबी धुआं उठता दिखाई दिया. स्पीकर एना ब्रनाबिक ने कहा कि इस दौरान दो सांसद घायल हुए हैं, जिनमें से एक, एसएनएस पार्टी की जैस्मिना ओब्राडोविक को स्ट्रोक हुआ है और उसकी हालत गंभीर है. उन्होंने सत्र में कहा, ‘संसद काम करना और सर्बिया की रक्षा करना जारी रखेगी.’ मंगलवार को सर्बियाई संसद को देश की यूनिवर्सिटीज के लिए धनराशि बढ़ाने वाला कानून पारित करना था. इस कानून की मांग को लेकर दिसंबर से ही सर्बिया के छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं. संसद में देश के प्रधानमंत्री मिलोस वुसेविक के इस्तीफे पर भी चर्चा होनी थी लेकिन सत्तारूढ़ गठबंधन ने सत्र के एजेंडे में कई ऐसे मुद्दों को रखा जिससे विपक्ष बुरी तरह भड़क गया.   संसदीय सत्र के लाइव टेलीविजन प्रसारण में दिखाया गया कि सर्बियाई विपक्षी सांसदों ने मंगलवार को सरकार की नीतियों के विरोध में संसद के अंदर धुआंधार ग्रेनेड और आंसू गैस के गोले फेंके. इसके बाद पूरे संसद में काला और लाल धुआं फैल गया. विपक्षी सांसद सरकार से नाराज प्रदर्शन कर रहे छात्रों का भी समर्थन कर रहे थे.

ट्रंप ने यूक्रेन की आर्मी मदद पर लगाई रोक, अब पुतिन से कैसे लोहा लेंगे जेलेंस्की

न्यूयॉर्क रूस और यूक्रेन के बीच लगभग तीन साल से युद्ध चल रहा है। इस दौरान अमेरिका ने यूक्रेन को हर तरह से मदद दी है। लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप की जीत के बाद हालात पूरी तरह से बदल गए हैं। हाल ही में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने अमेरिका का दौरा किया और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से मुलाकात की थी। लेकिन इस दौरान दोनों के बीच जमकर बहस हुई, जिसके बाद जेलेंस्की व्हाइट हाउस से बिना प्रेस वार्ता के निकल गए। अब राष्ट्रपति ट्रम्प ने जेलेंस्की को झटका देते हुए यूक्रेन को मिलने वाली मिलिट्री मदद पर रोक लगा दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति निवास व्हाइट हाउस ने इस संबंध में जानकारी दी है। व्हाइट हाउस का कहना है कि पिछले सप्ताह यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की केसाथ तीखी बहस के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन को मिलने वाली सभी तरह की मिलिट्री मदद पर रोक लगा दी है। नाम नहीं छापने की शर्त पर एक अमेरिका अधिकारी ने बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ तौर पर कह दिया है कि उनका ध्यान शांति पर है। हमें चाहिए कि हमारे साझेदार भी उस लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्ध हों। हम अपनी सहायता रोक रहे हैं, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि यह समाधान में योगदान दे रही है। ट्रंप का यह आदेश तुरंत प्रभाव से लागू हो गया है। इसके मुताबिक ऐसी मदद से जो अमेरिका से अभी तक यूक्रेन नहीं पहुंची है, उसे भी रोक दिया गया है। इसमें पोलैंड तक पहुंच चुका सामान भी शामिल है। यूक्रेन और अमेरिका ने नहीं दिया जवाब व्हाइट हाउस के एक अधिकारी के मुताबिक, यूक्रेन को रोकी गई मदद तब तक बहाल नहीं की जाएगी। जब तक राष्ट्रपति ट्रंप को यह यकीन नहीं हो जाता कि यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की वास्तव में शांति चाहते हैं। यूक्रेन को सैन्य मदद रोके जाने को लेकर फिलहाल अमेरिकी रक्षा विभाग और न ही राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से कोई टिप्पणी आई है। वहीं अमेरिकी सहायता रोके जाने पर यूक्रेन राष्ट्रपति जेलेंस्की की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। ट्रंप प्रशासन के एक अधिकारी का कहना है कि इस सहायता पर रोक लगाना पूरी तरह से स्थाई नहीं है। यह एक विराम है। एक अरब डॉलर की मदद रुकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इससे एक अरब डॉलर के हथियार और गोला-बारूद संबंधी मदद पर असर पड़ सकता है। इन्हें जल्द ही यूक्रेन को डिलीवर किया जाना था। इधर यूक्रेनी अधिकारियों का कहना है कि उसके पास सिर्फ गर्मियों तक रूस से लड़ने के लिए आपूर्ति है। ऐसे में रूस से लडाई के लिए यूक्रेन संसाधनों की कमी से जूझ सकता है। यूरोपीय देशों पर बढ़ेगा यूक्रेन की मदद का दबाव रूस के खिलाफ युद्ध में अब अमेरिका के यूक्रेन की मदद नहीं करने से यूरोपीय देशों पर यूक्रेन की मदद का दबाव बनेगा। अब तक कई यूरोपीय देशों ने इस युद्ध में यूक्रेन की मदद की है, लेकिन उतनी नहीं जितनी अमेरिका ने की है। अमेरिका ने इस युद्ध की शुरुआत से ही यूक्रेन को वित्तीय सहायता के साथ ही सैन्य सहायता भी मुहैया कराई है। लेकिन अब इस पर रोक लगा दी गई है। जिससे यूरोपीय देशों पर इस युद्ध में यूक्रेन को कमजोर न पड़ने देने का दबाव बनेगा। रूस को मिलेगा अमेरिका का सीधा समर्थन ट्रंप और जेलेंस्की की बहस के बाद अमेरिका और यूक्रेन में तकरार आ गई है। इस बहस का सीधा फायदा रूस को मिलेगा। ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अच्छे दोस्त हैं। ट्रंप के फिर से राष्ट्रपति बनने के बाद से ही उनका झुकाव रूस की ओर रहा है। अब इस युद्ध में अमेरिका की तरफ से रूस को सीधा समर्थन मिल सकता है। हालांकि अमेरिका, रूस की इस युद्ध में कोई मदद नहीं करेगा, लेकिन अमेरिका की तरफ से रूस को समर्थन जरूर मिलेगा। व्हाइट हाउस की तरफ से कहा गया है कि राष्ट्रपति ट्रंप का मकसद शांति स्थापित करना है। हम चाहते हैं कि हमारा सहयोगी भी शांति के लिए प्रतिबद्ध हो। आज हम अपनी सहायता को रोक रहे हैं और उसकी समीक्षा कर रहे हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह समाधान में सहयोग दे रही है। इधर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने यूक्रेन की मदद करने पर पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन और उनके प्रशासन की भी जमकर आलोचना की है। अमेरिका और यूक्रेन के बीच खनिज सौदे पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, ‘…यह हमारे लिए बहुत बड़ी बात है क्योंकि बाइडेन ने बहुत ही मूर्खतापूर्ण तरीके से एक देश को युद्ध लड़ने के लिए 350 बिलियन डॉलर दे दिए… हमें कुछ नहीं मिला… हम 350 बिलियन डॉलर से अपनी पूरी अमेरिकी नौसेना का पुनर्निर्माण कर सकते थे…’

‘किसी को मियां-टियां या पाकिस्तानी कहना गलत, पर अपराध नहीं’, आरोपी को दोषमुक्त करते हुए कोर्ट की टिप्पणी: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम समुदाय से जुड़ी टिप्पणी को लेकर अहम बात कही। शीर्ष अदालत ने कहा कि किसी व्यक्ति को ‘मियां-तियां’ और ‘पाकिस्तानी’ कहना गलत होगा, लेकिन इससे उसकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का अपराध नहीं माना जाएगा। अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 298 (जानबूझकर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के इरादे से शब्द आदि बोलना) के तहत आरोप से एक व्यक्ति को मुक्त कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अपीलकर्ता पर उसे ‘मियां-तियां’ और ‘पाकिस्तानी’ कहकर उसकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप है। अदालत ने कहा कि निस्संदेह, दिए गए कथन गलत है। हालाँकि, इससे याचिकाकर्ता की धार्मिक भावनाओं को ठेस नहीं पहुचती है। झारखंड हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती जस्टिस बी वी नागरत्ना और सतीश चंद्र शर्मा की बेंच झारखंड उच्च न्यायालय के उस फैसले के खिलाफ दायर अपील पर विचार कर रही थी, जिसमें अपीलकर्ता को आरोप मुक्त करने से इनकार कर दिया गया था। मामला उप-विभागीय कार्यालय, चास में एक उर्दू अनुवादक और कार्यवाहक क्लर्क (सूचना का अधिकार) की तरफ से दर्ज एफआईआर से जुड़ा था। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि जब वह आरटीआई आवेदन के संबंध में जानकारी देने के लिए अपीलकर्ता से मिलने गया, तो आरोपी ने उसके धर्म का हवाला देकर उसके साथ दुर्व्यवहार किया। साथ ही आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन को रोकने के लिए आपराधिक बल का इस्तेमाल किया। अदालत ने 11 फरवरी को दिए अपने फैसले में कहा, “निस्संदेह, दिए गए बयान सुनने में ठीक नहीं लगते हैं। लेकिन, इससे सूचना देने वाले की धार्मिक भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचती। इसलिए, हमारा मानना है कि अपीलकर्ता को आईपीसी की धारा 298 के तहत आरोपमुक्त किया जाना चाहिए।” शिकायतकर्ता, जो एक उर्दू अनुवादक और सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत कार्यवाहक क्लर्क है, ने अपीलीय प्राधिकारी के आदेश के बाद आरोपी सिंह को व्यक्तिगत रूप से कुछ जानकारी दी थी। सिंह ने शुरू में दस्तावेज स्वीकार करने में अनिच्छा दिखाई, लेकिन अंततः उन्होंने दस्तावेज स्वीकार कर लिए, लेकिन कथित तौर पर उन्होंने शिकायतकर्ता के धर्म का हवाला देते हुए उसे अपशब्द कहे। यह भी आरोप लगाया गया कि सिंह ने शिकायतकर्ता को डराने और लोक सेवक के रूप में अपने कर्तव्यों का पालन करने से रोकने के इरादे से उसके खिलाफ आपराधिक बल का प्रयोग किया। इसके परिणामस्वरूप सिंह के खिलाफ आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई, जिनमें धारा 298 (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना), 504 (शांति भंग करने के लिए जानबूझकर अपमान करना), 506 (आपराधिक धमकी), 353 (लोक सेवक को कर्तव्य से रोकने के लिए हमला या आपराधिक बल का प्रयोग) और 323 (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना) शामिल हैं। मजिस्ट्रेट ने मामले की समीक्षा करते हुए धारा 353, 298 और 504 के तहत आरोप तय किए, जबकि साक्ष्य के अभाव में धारा 323 और 506 के तहत आरोपों को खारिज कर दिया। सिंह की आरोपमुक्ति की याचिका को पहले सत्र न्यायालय और बाद में राजस्थान उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया, जिसके बाद उन्हें सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा। सर्वोच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया कि भारतीय दंड संहिता की धारा 353 के तहत आरोप को कायम रखने के लिए हमले या बल प्रयोग का कोई सबूत नहीं है। अदालत ने कहा कि उच्च न्यायालय ने इस प्रावधान के तहत आरोपी को आरोपमुक्त न करके गलती की है। शीर्ष अदालत ने आगे कहा कि भारतीय दंड संहिता की धारा 504 भी लागू नहीं होती, क्योंकि सिंह की ओर से ऐसा कोई कार्य नहीं किया गया, जिससे शांति भंग हो सकती हो। धारा 298 के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने माना कि सिंह की टिप्पणी अनुचित थी, लेकिन आईपीसी के तहत धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए कानूनी तौर पर पर्याप्त नहीं थी। नतीजतन, सिंह को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया। आईपीसी 504 के तहत आरोप नहीं लगा सकते आखिरकार, अपीलकर्ता के खिलाफ आईपीसी की धारा 353, 298 और 504 के तहत आरोप तय किए गए। सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि शिकायत में अपराध के तत्व नहीं बताए गए थे। कोर्ट ने कहा कि जाहिर है, अपीलकर्ता ने धारा 353 आईपीसी को आकर्षित करने के लिए कोई हमला या बल का प्रयोग नहीं किया था। कोर्ट ने आगे कहा कि अपीलकर्ता पर धारा 504 आईपीसी के तहत आरोप नहीं लगाया जा सकता, क्योंकि उसकी ओर से ऐसा कोई कार्य नहीं किया गया जिससे शांति भंग हो सकती हो।

कैबिनेट में विकास योजना के लिए नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम की धारा 66 में संशोधन करने का निर्णय लिया गया

भोपाल मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में उज्जैन में महाकाल मंदिर में होमगार्ड स्वयंसेवी सैनिकों के 488 पद स्वीकृत करने की मंजूरी दी गई। इस पर सालाना 17 करोड़ रुपये का व्यय आएगा। एक वर्ष के भीतर यह प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। मोहन कैबिनेट के अन्य अहम फैसले     विकास योजना के लिए नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम की धारा 66 में संशोधन करने का निर्णय लिया गया। अब विशेष क्षेत्र के बाहर यदि किसी विभाग को परियोजना लेकर आनी है तो उसे शासन द्वारा अनुमति दे दी जाएगी।     यह परियोजना किसी भी सूरत में 500 करोड़ रुपये से कम की नहीं होगी। इसके साथ ही गेहूं के समर्थन मूल्य के ऊपर 175 रुपये प्रति क्विंटल और 2024 में उपार्जित धान के लिए कृषकों को चार हजार रुपये प्रति हेक्टेयर प्रोत्साहन राशि देने के निर्णय का अनुसमर्थन किया गया।     प्रदेश में 30 मार्च से 30 जून तक जल गंगा संवर्धन अभियान चलेगा। इसमें समस्त जल संरचनाओं की संरक्षण और संवर्धन का काम होगा। आंगनबाड़ी के कार्यकर्ताओं को बच्चों को सामान्य ज्ञान देने के लिए प्रशिक्षण दिलवाया जाएगा। किसानों के लिए फैसले मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के अनुसार, 15 मार्च से शुरू होने जा रही गेहूं की एमएसपी दर पर खरीदी के तहत सरकार 175 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से बोनस देने का फैसला किया है। ये बोनस एमएसपी की दर 2425 रुपए के अतिरिक्त दिया जाएगा। यानी समर्थन मूल्य पर किसानों को 2600 रुपए प्रति क्विंटल के भाव मिलेंगे। यही नहीं धान पर 4 हजार प्रति हैक्टेयर प्रोत्साहन राशि देने के प्रस्ताव को भी मंजूरी मिली। सीमांकन-बटांकन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन डिजीटाइलेशन के लिए बैठक में 138.41 करोड़ का प्रावधान करने का फैसला लिया गया। कैबिनेट में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को मास्टर टीचर का प्रशिक्षण देने का भी फैसला लिया गया। इसमें आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को सिखाया जाएगा कि आंगनवाड़ी आने वाले बच्चों को व्यवहारिक ज्ञान के साथ सामान्य ज्ञान कैसे पढ़ाया जाए। एक और महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए सरकार ने तय किया है कि प्लानिंग एरिया के बाहर भी उद्योग स्थापित हो सकेंगे। प्रस्ताव आने पर बड़े उद्योग प्लानिंग एरिया के बाहर स्थापित करने का फैसला सरकार ले सकेगी। सीएम का अभिनंदन बैठक की शुरुआत से पहले कैबिनेट के सदस्यों ने सफल जीआईएस को लेकर मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव का अभिनंदन किया। बैठक में 30.77 लाख करोड़ के निवेश जमीन पर उतारने की प्लानिंग साझा की गई। मुख्यमंत्री का फॉर्मूला तय किया गया कि सभी विभागों के प्रमुख सचिव हर सप्ताह निवेश प्रस्तावों की समीक्षा करेंगे। मुख्य सचिव हर महीने समीक्षा करेंगे और मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हर दो महीने में समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी। जल संरचनाओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए 30 मार्च से पूरे प्रदेश में जय गंगा जल संवर्धन अभियान चलेगा। 30 जून तक चलने वाले इस अभियान के तहत वॉटर रिचार्ज को लेकर भी काम होंगे। कैबिनेट ने फैसला लिया है कि भारतीय नया साल यानी गुड़ी पड़वा का पर्व सरकार धूमधाम से मनाएगी। गुड़ी पड़वा पर पूरे प्रदेश में कार्यक्रम होंगे, तो उज्जैन में चल रहे विक्रमोत्सव के दौरान 30 मार्च को बड़ा आयोजन होगा। जनजातीय देवलोक की स्थापना और बजट सत्र की तैयारियां बैठक में एक और महत्वपूर्ण विषय जनजातीय देवलोक की स्थापना पर चर्चा होगी, जो राज्य के जनजातीय समुदाय के सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम होगा। इसके अलावा, 10 मार्च से शुरू होने वाले बजट सत्र में पेश होने वाले बजट पर भी विस्तृत चर्चा की जाएगी। मुख्यमंत्री इस सत्र में की जाने वाली नई घोषणाओं और योजनाओं को लेकर कैबिनेट के समक्ष अपनी राय रखेंगे। 15000 करोड़ रुपए से अधिक का होगा बजट बैठक में द्वितीय अनुपूरक बजट का भी अनुमोदन किया गया। यह 15000 करोड़ रुपये से अधिक होगा। 16 वें वित्त आयोग के समक्ष प्रदेश की वित्तीय स्थिति और 2026 से 2031 तक के लिए केंद्र सरकार से प्राप्त की जाने वाली राशि के संबंध में प्रस्तुतीकरण छह मार्च को होगा। इसमें सभी मंत्री उपस्थित रहेंगे। बजट सत्र के सवालों और सरकार की हाजिर जवाबी पर चर्चा मंत्रालय में हो रही इस बैठक में मंत्रियों को बजट सत्र के दौरान उठाए गए सवालों का समय पर जवाब देने की जिम्मेदारी दी जाएगी। इस सत्र में सरकार की हाजिर जवाबी को लेकर भी चर्चा होगी, जिससे सरकार के संवाद कौशल और कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। अनुपूरक बजट पर भी मंजूरी मिली बैठक में दूसरे अनुपूरक बजट के प्रस्तावों पर भी चर्चा की जाएगी। इस बजट में सड़क, बिजली, इन्फ्रास्ट्रक्चर सहित अन्य विकास योजनाओं पर फोकस किया जाएगा। इसके अलावा, ब्याज की देनदारी से संबंधित बड़ी रकम को भी अनुपूरक बजट में शामिल किया जा सकता है। यह सरकार की वित्तीय स्थिति और विकास कार्यों को सुचारू रूप से आगे बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम होगा।

Bhopal gas tragedy: यूका का 10 टन कचरा 75 घंटे में भस्म, मानक सीमा में उत्सर्जन का दावा

इंदौर  मध्यप्रदेश के पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र के एक अपशिष्ट निपटान संयंत्र में भोपाल के यूनियन कार्बाइड कारखाने के 337 टन कचरे में से 10 टन अपशिष्ट को परीक्षण के तौर पर भस्म किए जाने की करीब 75 घंटे चली प्रक्रिया सोमवार को खत्म हो गई और इस दौरान पार्टिकुलेट मैटर (पीएम), कार्बन और अलग-अलग गैसों का उत्सर्जन मानक सीमा के भीतर रहा। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि 1984 की भोपाल गैस त्रासदी के लिए जिम्मेदार कारखाने के कचरे के निपटान के पहले दौर के परीक्षण को मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के आदेश पर एक निजी कंपनी के संचालित अपशिष्ट निपटान संयंत्र में अंजाम दिया गया। इस कचरे के निपटान की प्रक्रिया शुरू होने के बीच पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए। इंदौर संभाग के आयुक्त दीपक सिंह ने संवाददाताओं को बताया, ‘‘हमने पीथमपुर के अपशिष्ट निपटान संयंत्र के भस्मक में यूनियन कार्बाइड कारखाने के 10 टन कचरे को परीक्षण के तौर पर जलाने की प्रक्रिया शुक्रवार (28 फरवरी) को शुरू की थी जो सोमवार को खत्म हो गई।’’ उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के दल ने परीक्षण की पूरी निगरानी की और इस दौरान पीथमपुर और इससे करीब 30 किलोमीटर दूर इंदौर की वायु गुणवत्ता ‘‘सामान्य’’ बनी रही। सिंह ने बताया कि पीथमपुर के अपशिष्ट निपटान संयंत्र में दूसरे दौर के परीक्षण की तैयारी की जा रही है और इस चरण में भी यूनियन कार्बाइड कारखाने के 10 टन कचरे को भस्म किया जाएगा। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से जारी विज्ञप्ति के मुताबिक कचरे के निपटान के दौरान पिछले 24 घंटे में इस संयंत्र से पार्टिकुलेट मैटर (पीएम), सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड, कार्बन मोनो ऑक्साइड, हाइड्रोजन क्लोराइड, हाइड्रोजन फ्लोराइड और टोटल ऑर्गेनिक कार्बन का उत्सर्जन मानक सीमा के भीतर पाया गया। विज्ञप्ति के मुताबिक पहले दौर के परीक्षण के दौरान हुए इन उत्सर्जनों का विश्लेषण किया जा रहा है और दूसरे दौर का परीक्षण चार मार्च (मंगलवार) से शुरू किया जाना प्रस्तावित है। रिपोर्ट आते ही शुरु होगा दूसरे चरण का ट्रायल वहीं आज यानी 4 मार्च से दूसरे चरण का ट्रायल शुरू होगा। श्रीनिवास द्विवेदी ने बताया कि, पहले चरण में कचरे को 135 किलोग्राम प्रति घंटे की दर से जलाया गया था। अब दूसरे चरण में कचरे की जलाने की दर को बढ़ाकर 180 किलोग्राम प्रति घंटे किया जाएगा। इस दौरान उन्होंने ये भी बताया कि, पहले चरण की रिपोर्ट आज ही आ जाएगी, जिसके बाद ये फैसला लिया जाएगा कि, कचरे को आज कब जलाया जाएगा। रिपोर्ट के आधार पर ही दूसरे चरण के कचरे को जलाने की तैयारी शुरू की होगी। स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर से हो रहा निष्पादन वहीं मामले में धार कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने बताया कि “पीथमपुर में हाईकोर्ट के दिशा निर्देश पर ही कचरा जलाया जा रहा है. इसके लिए प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने जो स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर तैयार किया है. उसी के अनुसार कचरे का निष्पादन होना है. उन्होंने बताया कचरे को अनलोड किए जाने और अलग-अलग पैकेट में तैयार करने के बाद अब वास्तविक रूप से कचरा जलाने की प्रक्रिया शुरू हो रही है. 72 घंटे में जलेगा 10 टन कचरा इस प्रक्रिया के दौरान लगातार 72 घंटे तक करीब 10 टन कचरा जलाया जाएगा. जिसकी लाइव मॉनिटरिंग की व्यवस्था की गई है. कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने बताया जिन कर्मचारियों की ड्यूटी संयंत्र के अंदर है. वह भी प्रदूषण से सुरक्षा के तमाम प्रोटोकॉल का पालन करते हुए काम कर रहे हैं. वही शहर भर में लोगों को विश्वास में लेकर उन्हें कचरे की लाइव मॉनिटरिंग की भी सुविधा दी गई है. उन्होंने बताया कचरा जलाए जाने के दौरान पूरे पीथमपुर में कहीं कोई विरोध नहीं है.” रामकी एनवायरो में जलेगा 10 टन कचरा दरअसल यूनियन कार्बाइड कचरे को लेकर लोगों तक वास्तविक जानकारी पहुंचाने का परिणाम है. उन्होंने कहा इसके अलावा जो लोग विरोध कर रहे थे. उन्होंने भी कोर्ट के समक्ष अपना तर्क रखा, हालांकि कोर्ट ने ही अब कचरे के निष्पादन के आदेश दिए हैं, तो पूरी सुरक्षा व्यवस्था और तमाम प्रोटोकॉल का पालन करते हुए कचरा जलाया जा रहा है. 900 डिग्री सेल्सियस के तापमान में जलेगा कचरा परिसर में यूनियन कार्बाइड के कचरे को अनलोड करने के बाद मिक्सिंग और जलाने की प्रक्रिया केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण मंडल की देखरेख में की जा रही है. पहले कंटेनर से कचरा अलग किया गया. फिर संयंत्र के इंसीनरेटर में 900 डिग्री सेल्सियस के तापमान में कचरे को जलाया जा रहा है. बताया जा रहा है कि यूनियन कार्बाइड के कचरे में नेपथॉल सेमी प्रोसैस्ट पेस्टिसाइड 47 समेत यूनियन कार्बाइड से इकठ्ठा मिट्टी के भी अवेशष हैं. यूनियन कार्बाइड में प्लांट के अंदर स्थित अन्य सामग्री भी कचरे में शामिल है, जिसे इंसीनरेटर में चूना मिलकर जलाया जा रहा है. 9-9 किलो के बनाए गए पैकेट 10 टन के कचरे को 72 घंटे यानि 3 दिन में जलाया जाएगा. जिसके लिए सबसे पहले 9-9 किलो के पैकेट बनाए गए हैं. हर पैकेट में साढ़े 4 किलो कचरा और इतनी ही मात्रा में चूना है. जिससे रासायनिक प्रभाव को न्यूट्रल किया जा सके. कचरा जलाने के लिए गुरुवार रात से ही इंसीनरेटर को चालू कर दिया गया था. जिसे 900 डिग्री सेल्सियस तक गर्म रखने के लिए चालू रहना जरूरी है. शुक्रवार सुबह यह तापमान 850-900 डिग्री पहुंचा. फिर उसमें कचरे के पैकेट डालना शुरू किया गया. कचरे के जलने पर जो धुआं या गैस या तत्व निकलेगा, उस पर प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अधिकारी नजर बनाए हुए हैं. विज्ञप्ति में बताया गया कि राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड यूनियन कार्बाइड का कचरा जलाए जाने के दौरान पीथमपुर के अपशिष्ट निपटान संयंत्र के आस-पास पांच स्थानों पर परिवेशीय वायु गुणवत्ता माप रहा है जिनमें तीन गांव शामिल हैं। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी श्रीनिवास द्विवेदी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि यूनियन कार्बाइड के कचरे को जलाने का पहला परीक्षण करीब 75 घंटे चला और इस दौरान संयंत्र के भस्मक में हर घंटे 135 किलोग्राम कचरा डाला गया। उन्होंने बताया कि दूसरे दौर के परीक्षण के दौरान भस्मक में हर घंटे 180 किलोग्राम कचरा डाला जाएगा। द्विवेदी ने बताया कि पहले दौर के परीक्षण को करीब … Read more

मध्यप्रदेश के गौरवशाली इतिहास को फिर से जीवंत करेगा नया प्रवेश द्वार: मुख्यमंत्री यादव

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बड़ी घोषणा की है कि राजधानी भोपाल के प्रमुख मार्गों पर महापुरुषों के नाम से द्वार बनाए जाएंगे, जिससे भोपाल और मध्यप्रदेश के गौरवशाली इतिहास को संजोया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि एमपी की पहचान यहां के वीर शासकों से रही है और इस विरासत को सहेजने के लिए सरकार द्वारा ये निर्णय लिया गया है। भोपाल का इतिहास परमार राजाओं, गोंड शासकों और नवाबों से जुड़ा रहा है। वहीं, पूरे मध्य प्रदेश में सम्राट विक्रमादित्य, राजा भोज, चंद्रगुप्त मौर्य, सम्राट अशोक, रानी दुर्गावती जैसे कई महान शासकों ने शासन किया है। सरकार की इस पहल से इन महापुरुषों की विरासत को और अधिक मजबूती मिलेगी। सीएम मोहन यादव की घोषणा ‘महापुरुषों के नाम पर बनेंगे द्वार’ मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के ऐतिहासिक गौरव को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने  महत्वपूर्ण घोषणा की है। उन्होंने कहा कि ‘भोपाल और पूरे मध्य प्रदेश की पहचान वीर शासकों से रही है। सम्राट विक्रमादित्य ने चक्रवर्ती सम्राट की तरह शासन किया। उनका न्याय, ज्ञान, वीरता, दानशीलता, धैर्य, पराक्रम, पुरुषार्थ कई गुणों से उनकी अलग पहचान रही है। उनके एक हजार साल बाद राजा भोज भी अद्वितीय शासक रहे हैं। राजा भोज के कारण भोपाल की विशेष पहचान है। ऐसे में हमारी सरकार ने तय किया है कि हमारी राजधानी का गौरवशाली अतीत है। उस अतीत को सामने लाने की आवश्यकता है। इसलिए राजधानी के प्रमुख मार्गों पर ऐसे महापुरुषों के नाम से द्वार बनाए जाएंगे, जिससे भोपाल और मध्यप्रदेश का गौरवशाली इतिहास संजोया जा सके। मध्यप्रदेश की विरासत को संजोने का फैसला प्रदेश सरकार का यह कदम भोपाल को एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान देने के उद्देश्य से लिया गया है। इससे न सिर्फ शहर की ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित किया जाएगा, बल्कि युवाओं और आने वाली पीढ़ी को भी अपने गौरवशाली अतीत के बारे में परिचय मिलेगा। इस फैसले के तहत भोपाल के अलग-अलग क्षेत्रों में ऐतिहासिक महत्व रखने वाले राजाओं, सम्राटों और अन्य महापुरुषों के नाम पर प्रवेश द्वार बनाए जाएंगे। इससे भोपाल में आने वाले पर्यटकों को भी राज्य की समृद्ध ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के बारे में जानकारी मिलेगी। ऐतिहासिक महत्व के द्वार भोपाल, जो पहले से ही ऐतिहासिक धरोहरों से समृद्ध है, अब इन विशेष स्मारक द्वारों के माध्यम से अपनी संस्कृति और परंपरा को और अधिक मजबूती से प्रदर्शित करेगा। इन द्वारों का निर्माण शहर के प्रमुख मार्गों, चौराहों और प्रवेश स्थलों पर किया जाएगा। हर द्वार का नाम किसी महान नेता, स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक या ऐतिहासिक शख्सियत के नाम पर रखा जाएगा, जिससे आने वाली पीढ़ियां उनके योगदान को जान सकें। पर्यटन और सांस्कृतिक विकास को बढ़ावा सरकार के इस फैसले से न केवल शहर की खूबसूरती बढ़ेगी, बल्कि पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। भोपाल आने वाले पर्यटक जब इन भव्य द्वारों को देखेंगे, तो उन्हें राज्य के गौरवशाली इतिहास की झलक मिलेगी। साथ ही, यह योजना प्रदेश के अन्य शहरों के लिए भी एक प्रेरणा बनेगी। इस निर्णय से राजधानी के नागरिकों को अपने राज्य के ऐतिहासिक व्यक्तित्वों पर गर्व महसूस करने का अवसर मिलेगा। ये द्वार न केवल स्थापत्य कला के उत्कृष्ट उदाहरण होंगे, बल्कि वे राज्य की समृद्ध संस्कृति और परंपराओं का प्रतीक भी बनेंगे।

बाल अपराधों को रोकने में बाल अधिकार संरक्षण आयोग की भूमिका सर्वाधिक महत्वपूर्ण: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

जीरो टॉलरेंस नीति से प्रदेश में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों में आई गिरावट : मुख्यमंत्री डॉ. यादव शिक्षा के अधिकार का विस्तार कक्षा 12वीं तक हो: मुख्यमंत्री डॉ. यादव बाल अपराधों को रोकने में बाल अधिकार संरक्षण आयोग की भूमिका सर्वाधिक महत्वपूर्ण: मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम, पोक्सो एक्ट और किशोर न्याय अधिनियम राज्य स्तरीय जागरूकता कार्यशाला का किया शुभारंभ भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों में गिरावट आई है। यह स्पष्ट रूप से राज्य सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का परिणाम है। हम सुरक्षा, सशक्तिकरण और न्याय के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को निरंतर सुदृढ़ कर रहे हैं, जिससे अपराधों पर अंकुश लगा है। पिछले वर्षों में महिला एवं बाल अपराधों के प्रति सरकार की सख्ती स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है। प्रदेश में महिलाओं और बच्चों के विरूद्ध गंभीर अपराधों के दोषियों के लिए मृत्युदंड का प्रावधान किया गया है। न्यायालयों द्वारा 48 प्रकरणों में मृत्युदंड के निर्णय दिए जा चुके हैं। सरकार और समाज मिलकर महिलाओं और बच्चों के साथ होने वाले अत्याचारों के प्रति जागृति लाएं। इस कार्य में बाल संरक्षण आयोग की भूमिका भी अहम है। सरकार आयोग के सुझावों को अमल में लाने के लिए संकल्पित है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोमवार को कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में मध्यप्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला में यह बातें कही। कार्यशाला में प्रदेश के सभी जिलों से विभिन्न विभागों के अधिकारी, बाल कल्याण समिति के सदस्य समेत अन्य सदस्यों ने निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम-2009, पॉक्सो अधिनियम-2012 तथा किशोर न्याय अधिनियम-2015 जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया। इस अवसर पर महिला बाल विकास मंत्री श्रीमती निर्मला भूरिया, सदस्य बाल संरक्षण आयोग श्रीमती मेघा पवार और डॉ. निवेदिता शर्मा, डॉ. निशा सक्सेना सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में देश, स्वर्णिम काल में प्रगति के पथ पर अग्रसर है। विश्व में भारत की ख्याति फैल रही है। विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश भारत में प्रत्येकव्यक्ति निरंतर समर्थ हो रहा है। भारत बाहरी दुश्मनों से निपटने में सक्षम होने के साथ-साथ आंतरिक चुनौतियों का भी प्रभावी रूप से सामना कर रहा है। उन्होंने रामायण के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि बच्चों और किशोरों में अपार क्षमता और ऊर्जा विद्यमान रहती है। इसीलिए महर्षि विश्वामित्र ने असुरों का विनाश करने के लिए महाराज दशरथ से बचपन में प्रभु श्रीराम और लक्ष्मण को मांगा था। प्रभु श्रीराम ने अपने पुरुषार्थ के बल पर असुरों का सर्वनाश किया। भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण का बाल्य स्वरूप सद्मार्ग पर चलने के लिए समाज को भिन्न-भिन्न रूप से प्रेरित करता है। जरूतमंद बच्चे जो आप तक नही आ पाये, उन तक आप पहुंचें : सुभूरिया महिला बाल विकास मंत्री सुनिर्मला भूरिया ने कहा की बच्चों के विकास की पहली शर्त उनका संरक्षण है और मुझे गर्व है कि डॉ. यादव के नेतृत्व में बच्चों के संरक्षण के लिये विभाग और प्रशासन सजग है। उन्होंने मध्यप्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग को बधाई देते हुए कहा कि आयोग बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा, उनके संरक्षण और उनके समुचित विकास से जुड़े अधिनियम-नियम पर केन्द्रित इस राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया। कार्यशाला न केवल बच्चों के शिक्षा के अधिकार के लिये है वरन बच्चों के संरक्षण के लिये बनाये गये विभिन्न अधिनियमों जैसे पॉक्सो अधिनियम और किशोर न्याय अधिनियम से जागरूक करने को लेकर भी है। मंत्री सुभूरिया ने उपस्थित बाल कल्याण आयोग और किशोर न्याय बोर्ड के अध्यक्ष/ सदस्यों से आग्रह किया कि उन्हें जो जिम्मेदारी दी गई है वो बहुत महत्वपूर्ण है और बच्चों को न्याय दिलाने के लिये है। समाज सेवा का ऐसा अवसर बार-बार नहीं मिलता इसलिये पूरी सजगता से बच्चों का संरक्षण सुनिश्चित हो इसका ध्यान रखें। आज अनाथ बच्चा किस संस्था में जायेगा या उसका पुनर्वास कहाँ होगा ये अधिकार आपके पास है और किसी के पास नहीं। तो इस अधिकार से बच्चों के प्रति संरक्षण के दायित्व मानकर उपयोग करें और कोशिश करें कि जरूतमंद बच्चे जो आप तक नही आ पाये उन तक आप पहुंचें। बच्चे ईश्वर का रूप होते हैं, बच्चे देश का भविष्य हैं और यदि हमें प्रधानमंत्री मोदी के विजन अनुसार देश का भविष्य स्वर्णिम बनाना है तो आज के बच्चों और युवाओं के वर्तमान को भी संवारना होगा, संरक्षित करना होगा और मुझे खुशी है कि आज मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में न केवल बच्चों के वर्तमान को मजबूत बनाया जा रहा है वरन उन्हें सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराया जा रहा है ताकि उनके व्यक्तित्व का अधिकतम विकास हो। मध्यप्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष रवींद्र मोरे ने कहा कि जिला स्तर पर प्रशासनिक अधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता एवं बाल कल्याण समिति के कार्यकर्ता की शक्तियां कम ज्यादा हो सकती हैं, लेकिन वे समान रूप से बाल कल्याण को समर्पित हैं और बच्चों के प्रति पूर्ण संवेदनशीलता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं। बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने संविधान में यह प्रावधान किया था कि राज्य सरकारों को बच्चों के कल्याण के लिए नियम बनाने का अधिकार मिलना चाहिए। यह उनकी दूरदर्शिता का घोतक है। मध्यप्रदेश सरकार ने बच्चों की शिक्षा की चिंता की है। मोरे ने शिक्षा का अधिकार को 12वीं कक्षा तक लागू करने का सुझाव मुख्यमंत्री डॉ. यादव के सामने रखा एवं कार्यशाला में सहभागिता के लिए उनका आभार माना।  

मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय बजट में उद्घोषित नवीन योजनाओं तथा प्रचलित कार्यक्रमों में की गई वृद्धि के संदर्भ में अधिकारियों को दिए निर्देश

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है‍कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मंशा के अनुसार गरीब, युवा, अन्नदाता और महिला सशक्तिकरण राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इनके कल्याण के लिए संचालित योजनाओं और कार्यक्रमों में केन्द्र सरकार द्वारा वर्ष 2025-26 के बजट में प्रदेश के लिए की गई वृद्धि का शत-प्रतिशत उपयोग सुनिश्चित करते हुए गतिविधियां संचालित की जाएं। प्रदेश में वर्ष 2025 को उद्योग वर्ष घोषित किया गया है, युवाओं में उद्यमिता विकास और कौशल उन्नयन के लिए संबंधित संस्थाओं में बाजार की आवश्यकता के अनुसार गतिविधियां संचालित की जाएं। ग्राम स्तर तक स्वास्थ्य सुविधा और शिक्षा व्यवस्था का संचालन संवेदनशीलता के साथ हो। मुख्यमंत्री डॉ. यादव केन्द्र सरकार द्वारा वर्ष 2025-26 के बजट में उद्घोषित नवीन योजनाओं में किए गए प्रावधानों तथा प्रचलित योजनाओं में की गई वृद्धि के दृष्टिगत प्रदेश की प्राथमिकताओं के अनुरूप विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों के क्रियान्वयन के संबंध में अधिकारियों से समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) में चर्चा कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के बड़े नगरों के आस-पास विद्यमान नगरीय निकायों और ग्राम पंचायतों में सड़क, पेयजल, विद्युत आपूर्ति, सीवेज जैसी मूलभूत व्यवस्थाओं का विकास इस दृष्टि से किया जाए ताकि नगरों की जनसंख्या बढ़ने पर जनसामान्य का जीवन सुगम बना रहे। नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे अतिरिक्त संसाधनों का उपयोग करते हुए प्रदेश को प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में आदर्श राज्य के रूप में विकसित किया जाए। इसके साथ ही कृषकों को मूंगफली, सरसों जैसी तिलहन फसलों और ग्रीष्मकालीन मूंग के स्थान पर अन्य वैकल्पिक फसलों को लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। बैठक में मुख्य सचिव अनुराग जैन, प्रमुख सचिव वित्त मनीष रस्तोगी सहित विभिन्न विभागों के अपर मुख्य सचिव तथा प्रमुख सचिव उपस्थित थे।  

सेमीफाइनल मैच की ये है बेस्ट ड्रीम टीम, रोहित शर्मा-ट्रेविस हेड के बीच होगी टक्कर

दुबई आईसीसी चैम्पियंस ट्रॉफी 2025 का पहला सेमीफाइनल मुकाबला आज (4 मार्च) दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में खेला जाएगा. इस सेमीफाइनल में भारतीय टीम की टक्कर ऑस्ट्रेलिया से होगी. यह मैच दोपहर 2.30 बजे से शुरू होगा. रोहित शर्मा की कप्तानी में भारतीय टीम इस टूर्नामेंट में अब तक कोई मैच नहीं हारी है. भारतीय टीम ने चैम्पियंस ट्रॉफी 2025 के ग्रुप स्टेज में 3 मैच खेले और तीनों जीते हैं. अब उसकी नजर सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया को हराकर फाइनल में एंट्री करने पर है. मगर रोहित ब्रिगेड के लिए यह इतना आसान नहीं होने वाला है. ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ICC टूर्नामेंट्स के नॉकआउट मैचों में भारतीय टीम का रिकॉर्ड पिछले 14 सालों में बेहद खराब रहा है. इस दौरान जब भी दोनों टीमें आमने-सामने आई हैं, तब भारत को हार मिली है. इससे पहले भारतीय टीम ने 2007 टी20 और 2011 वनडे वर्ल्ड कप जीता है. दोनों ही बार नॉकआउट मुकाबलों में ऑस्ट्रेलिया को हराया है. यदि इस बार भी सेमीफाइनल में भारतीय टीम जीतती है तो उसका खिताब पक्का हो सकता है. आज दुबई की पिच कैसी होगी? क्या बल्लेबाज आसानी से रन बनाएंगे या फिर गेंदबाज कहर बरपाएंगे? साथ ही भारत-ऑस्ट्रेलिया सेमीफाइनल किस पिच पर खेला जाएगा. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत-ऑस्ट्रेलिया सेमीफाइनल नई पिच पर खेला जाएगा. इस तरह ग्राउंड में बदलाव नहीं होगा, लेकिन पिच बदला-बदला नजर आएगा. ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ नई पिच पर खेलेगी भारतीय टीम दरअसल, इससे पहले भारतीय टीम बांग्लादेश और पाकिस्तान के खिलाफ अलग-अलग पिच पर खेली. लेकिन अगर भारत-ऑस्ट्रेलिया सेमीफाइनल नई पिच पर होता है तो हालात कितने बदले नजर आएंगे? क्रिकेट के जानकारों का कहना है कि अगर नई पिच पर मैच होता है तो पिच का मिजाज बदला-बदला नजर आएगा. यह पिच फिर उस तरह नहीं खेलेगी, जिस तरह बांग्लादेश, पाकिस्तान और न्यूजीलैंड के खिलाफ खेली. इस पिच के स्वाभाव में बदलाव आ जाएगा. वहीं, इस समय आईसीसी की देखरेख में एमिरेट्स क्रिकेट बोर्ड नई पिच तैयार करने में लगा है. साथ ही ऑस्ट्रेलिया के मैथ्यू सैंड्री क्यूरेटर की भूमिका निभा रहे हैं. अगर ऐसा हुआ तो टीम इंडिया को लगेगा झटका दरअसल, न्यूजीलैंड के खिलाफ टीम इंडिया 4 स्पिनरों के साथ उतरी थी. उस मैच में वरुण चक्रवर्ती, कुलदीप यादव, रवींद्र जडेजा और वरुण चक्रवर्ती प्लेइंग इलेवन का हिस्सा थे. अगर नई पिच हुई तो स्पिनरों के लिए बॉल टर्न करवाना आसान नहीं होगा. ऐसे में भारतीय टीम के लिए बड़ा झटका माना जाएगा, क्योंकि स्पिन बॉलिंग भारतीय टीम का मजबूत पक्ष रहा है. इससे पहले न्यूजीलैंड के खिलाफ वरुण चक्रवर्ती ने 5 विकेट लिए थे. अगर पिच के स्वाभाव में बदलाव हुआ तो वरुण चक्रवर्ती के साथ-साथ अन्य भारतीय स्पिनरों के लिए मुश्किलें बढ़ जाएंगी. 2011 वर्ल्ड कप के बाद भारतीय टीम का बुरा हाल दरअसल, ICC टूर्नामेंट्स के नॉकआउट मैचों में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भारतीय टीम का पलड़ा लगभग बराबरी का रहा है. इस दौरान दोनों टीमों के बीच कुल 7 बार आमना-सामना हुआ, जिसमें भारत ने 3 बार जीत दर्ज की है. 4 बार उसे हार मिली है. मगर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 2011 वर्ल्ड कप के बाद भारतीय टीम का बुरा हाल दिखा है. 2011 वर्ल्ड कप के क्वार्टरफाइनल में भारतीय टीम ने ऑस्ट्रेलिया को करारी शिकस्त दी थी. इसके बाद से किसी भी ICC नॉकआउट मैच में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भारतीय टीम को सफलता नहीं मिल सकी है. 2011 वर्ल्ड कप के बाद ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अगली टक्कर 2015 वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में हुई थी. फिर दोनों टीमों का आमना-सामना 2023 वर्ल्ड कप के फाइनल में हुआ था. भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच 2023 में वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप का फाइनल भी हुआ था. मगर हर बार भारतीय टीम को करारी शिकस्त झेलनी पड़ी. हालांकि इस दौरान भारतीय टीम ने 2023 वर्ल्ड कप में एक बार ऑस्ट्रेलिया को हराया है, लेकिन यह सिर्फ ग्रुप मैच था. कंगारू टीम से गायब हैं 5 स्टार खिलाड़ी हालांकि इस बार ऑस्ट्रेलियाई टीम कागजों पर कमजोर नजर आ रही है. इस स्क्वॉड में तेज गेंदबाज पैट कमिंस, जोश हेजलवुड, मिचेल स्टार्क, मिचेल मार्श और मार्कस स्टोइनिस नहीं हैं. कमिंस को एंकल और हेजलवुड को हिप में चोट लगी है. स्टार्क निजी कारणों से बाहर हैं, जबकि मार्श भी चोटिल ही हैं. दूसरी ओर स्टोइनिस ने टूर्नामेंट से ठीक पहले संन्यास का ऐलान कर दिया था. आज के मैच के बेस्ट कप्तान और उपकप्तान ऑस्ट्रेलिया की ओर से ट्रेविस हेड सबसे महत्वपूर्ण खिलाड़ी हैं, क्योंकि पिच से गेंदबाजों और बल्लेबाजों दोनों को मदद मिलने की उम्मीद है। वह पारी की शुरुआत करेंगे और उनसे कुछ ओवर गेंदबाजी करने की उम्मीद है। उन्होंने नौ आमने-सामने के मैचों में 345 रन बनाए हैं। दूसरी और अक्षर पटेल भारतीय टीम के सबसे महत्वपूर्ण खिलाड़ियों में से एक हैं। वह बेहतरीन फॉर्म में हैं और आज के मैच में उनसे अहम भूमिका निभाने की उम्मीद है। वह मिडिल ऑर्डर में बल्लेबाजी करेंगे और अपने ओवरों का कोटा पूरा करेंगे। भारत बनाम ऑस्ट्रेलिया के मैच की ड्रीम-11 टीम     विकेटकीपर: जोश इंगलिस     बल्लेबाज: शुभमन गिल, स्टीवन स्मिथ, विराट कोहली, ट्रैविस हेड, श्रेयस अय्यर     ऑलराउंडर: ग्लेन मैक्सवेल, अक्षर पटेल, हार्दिक पांड्या     गेंदबाज: एडम जम्पा, वरुण चक्रवर्ती     कप्तान: अक्षर पटेल     उपकप्तान: ट्रेविस हेड   ICC नॉकआउट मैचों में भारत Vs ऑस्ट्रेलिया कुल मैच: 7 भारत जीता: 3 ऑस्ट्रेलिया जीता: 4 ICC नॉकआउट के नतीजे: 1998 चैम्पियंस ट्रॉफी: भारत ने 44 रन से जीत दर्ज की 2003 वनडे वनडे कप: ऑस्ट्रेलिया ने 125 रन से मैच जीता 2007 टी20 वर्ल्ड कप: भारतीय टीम 15 रन से मुकाबला जीती 2011 वनडे वर्ल्ड कप: भारत ने 5 विकेट से जीत दर्ज की 2015 वनडे वर्ल्ड कप: ऑस्ट्रेलिया ने 95 रन से जीत दर्ज की 2023 वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप फाइनल: ऑस्ट्रेलियाई टीम 209 रनों से जीती 2023 वनडे वर्ल्ड कप: ऑस्ट्रेलियाई टीम ने 6 विकेट से जीत दर्ज की चैम्पियंस ट्रॉफी के लिए दोनों स्क्वॉड: भारतीय टीम: रोहित शर्मा (कप्तान), शुभमन गिल (उप-कप्तान), विराट कोहली, श्रेयस अय्यर, केएल राहुल (विकेटकीपर), ऋषभ पंत (विकेटकीपर), हार्दिक पंड्या, रवींद्र जडेजा, अक्षर पटेल, कुलदीप यादव, वरुण चक्रवर्ती, हर्षित राणा, मोहम्मद शमी, अर्शदीप सिंह, वॉशिंगटन सुंदर. ऑस्ट्रेलिया की टीम: स्टीव स्मिथ (कप्तान), सीन एबॉट, एलेक्स कैरी, बेन ड्वारशुइस, … Read more

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