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विशेषज्ञ, नीति निर्माता और निवेशक होंगे एक मंच पर : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश अपने रणनीतिक प्रयासों से औद्योगिक विकास के नए युग की ओर अग्रसर है। निवेशकों को अधिक प्रभावी अवसर देने के लिए ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में राज्य के प्रमुख 6 सेक्टर्स पर केंद्रित समिट के आयोजन की महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। यह पहली बार होगा जब हर सेक्टर के विशेषज्ञ, नीति-निर्माता और निवेशक एक मंच पर आकर विशेषज्ञ चर्चाओं, अवसरों और नीतिगत सुधारों पर संवाद करेंगे। इससे निवेश प्रक्रिया को अधिक सुगम, पारदर्शी और परिणामोन्मुखी बनाया जा सकेगा। देश का आकर्षक डेस्टिनेशन बनता मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश की अद्वितीय भौगोलिक स्थिति, समृद्ध प्राकृतिक संसाधन, विकसित बुनियादी ढांचा और उद्योग-अनुकूल नीतियां इसे निवेश के लिए देश का सबसे आकर्षक डेस्टिनेशन बनाती हैं। शहरी विकास, पर्यटन, माइनिंग, रिन्यूएबल एनर्जी, आईटी और एमएसएमई, ये सभी क्षेत्र अपनी असीमित संभावनाओं और अनुकूल वातावरण से निवेशकों को आकर्षित कर रहे हैं। मध्यप्रदेश न केवल देश का पहला डायमंड प्रोड्यूसिंग स्टेट है, बल्कि ग्रीन एनर्जी हब, विश्वस्तरीय पर्यटन केंद्र और उभरते हुए टेक्नोलॉजी हब के रूप में भी अपनी पहचान बना रहा है। इन विभागीय समिट से सरकार निवेशकों को नीतिगत प्रोत्साहन, संसाधनों की उपलब्धता और औद्योगिक ईको सिस्टम की मजबूती से अवगत कराएगी। इससे जीआईएस में होने वाली चर्चाएं वास्तविक निवेश प्रस्तावों में तब्दील हो सकेंगी। शहरी विकास समिट मध्यप्रदेश का शहरी बुनियादी ढांचा तेजी से सुदृढ़ हो रहा है। राज्य की स्मार्ट सिटी परियोजनाएं, मेट्रो रेल प्रोजेक्ट और लॉजिस्टिक्स हब इसे एक आदर्श रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश डेस्टिनेशन बना रहे हैं। जीआईएस में शहरी विकास समिट के माध्यम से स्मार्ट और सतत् शहरों के निर्माण पर केंद्रित चर्चा होगी, जिससे नवाचार और आधुनिक शहरी विकास को बढ़ावा मिलेगा। पर्यटन समिट मध्यप्रदेश को ‘भारत का दिल’ कहा जाता है और इसके धार्मिक, ऐतिहासिक और प्राकृतिक सौन्दर्य से पूर्ण पर्यटन क्षेत्र पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। खजुराहो, उज्जैन, साँची, पचमढ़ी, कान्हा और बांधवगढ़ जैसे विश्व स्तरीय पर्यटन स्थल निवेशकों के लिए आकर्षक अवसर उपलब्ध कराने के लिये तैयार हैं। पर्यटन समिट में हॉस्पिटैलिटी, थीम-बेस्ड डेस्टिनेशन और एडवेंचर टूरिज्म में निवेश को बढ़ावा देने के लिए गहन चर्चा होगी।  माइनिंग समिट मध्यप्रदेश खनिज संपदा से समृद्ध राज्य है। यह देश में डायमंड, लाइमस्टोन, बॉक्साइट, कोयला, मैंगनीज और तांबे का प्रमुख उत्पादक है। पन्ना स्थित एशिया की एकमात्र डायमंड माइंस और विशाल कोयला भंडार राज्य को माइनिंग इंडस्ट्री के लिए एक आदर्श डेस्टिनेशन बनाते हैं। जीआईएस में माइनिंग समिट से खनन आधारित उद्योगों, मूल्यवर्धित प्र-संस्करण और नीतिगत प्रोत्साहनों पर चर्चा होगी। रिन्यूएबल एनर्जी समिट मध्यप्रदेश ग्रीन एनर्जी हब बनने की दिशा में तेजी से अग्रसर है। रीवा सोलर प्लांट, ओंकारेश्वर फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट और ग्रीन हाइड्रोजन में हो रहे विकास इसे नवकरणीय ऊर्जा निवेशकों के लिए एक प्रमुख केंद्र बना रहे हैं। जीआईएस में आयोजित रिन्यूएबल एनर्जी समिट में सौर, पवन और हाइड्रोजन ऊर्जा के क्षेत्र में निवेश के लिए ठोस रणनीतियां प्रस्तुत की जाएंगी। आईटी एंड टेक्नोलॉजी समिट मध्यप्रदेश अब टेक्नोलॉजी और डिजिटल इनोवेशन का केंद्र बन रहा है। इंदौर आईटी हब, डेटा सेंटर पॉलिसी, स्टार्ट-अप ईको सिस्टम और उभरते एआई और साइबर सिक्योरिटी क्षेत्रों में तेजी से निवेश आ रहा है। जीआईएस में आईटी समिट के माध्यम से डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, आईटी पार्क और नई टेक्नोलॉजीज पर निवेश की संभावनाओं को रेखांकित किया जाएगा। एमएसएमई समिट मध्यप्रदेश का एमएसएमई सेक्टर राज्य की आर्थिक रीढ़ है, जहां लाखों सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम कार्यरत हैं। वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट योजना, नए क्लस्टर और निर्यात प्रोत्साहन नीतियां इसे निवेश के लिए एक डेस्टिनेशन बना रही हैं। एमएसएमई समिट में उद्योगों को वित्तीय सहयोग, टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन और नए बाजारों तक पहुंच को लेकर चर्चा होगी। प्रवासी समिट मध्यप्रदेश प्रवासी भारतीयों को प्रदेश के उद्योग, स्टार्ट-अप, पर्यटन, शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में सहभागिता के लिए आमंत्रित किया गया है। यह समिट न केवल राज्य की आर्थिक प्रगति में प्रवासी भारतीयों की भागीदारी सुनिश्चित करेगा, बल्कि मध्यप्रदेश को वैश्विक निवेश का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। मध्यप्रदेश प्रवासी भारतीय समिट का उद्देश्य विश्वभर में बसे मध्यप्रदेश के प्रवासी भारतीयों को एक मंच पर लाना और उनकी उपलब्धियों को सम्मानित करने के साथ ही मध्यप्रदेश के विकास में प्रवासी भारतीयों की भूमिका पर चर्चा की जाएगी। साथ ही समिट मध्यप्रदेश के प्रवासी भारतीयों को अपनी जड़ों से जुड़ने का महत्वपूर्ण अवसर भी मिलेगा। इन विभागीय समिट से सरकार मध्यप्रदेश में निवेशकों को सुरक्षित, पारदर्शी और उद्योग-अनुकूल वातावरण देने के लिए प्रतिबद्ध है। जीआईएस के इस नए स्वरूप से न केवल उद्योग और निवेश को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि रोजगार और आर्थिक विकास के नए अवसर भी सृजित होंगे। मध्यप्रदेश अब सिर्फ निवेश का केंद्र नहीं, बल्कि भारत के औद्योगिक भविष्य का निर्माण करने वाला प्रमुख राज्य बन रहा है।  

सिंहस्थ के दौरान शहर और मेला क्षेत्र स्वच्छ और हरियाली से आच्छादित रहेंगे, नगर निगम ने ‘ग्रीन सिंहस्थ, क्लीन सिंहस्थ’ अवधारणा पर काम शुरू किया

 उज्जैन  तीन साल बाद उज्जैन में लगने जा रहे महाकुंभ सिंहस्थ में 22 हजार 200 टन कचरा निकलने का अनुमान नगर निगम ने लगाया है। अनुमान है कि प्रतिदिन औसत 740 टन कचरा (सालिड वेस्ट) निकलेगा। इतने कचरे का बेहतर प्रबंधन करने के लिए सरकार से 15220 सफाई कर्मचारी, 379 वाहन, चार नए कचरा ट्रांसफर स्टेशन और 50 हजार बायो टायलेट की अपेक्षा की गई है। पिछली बार महाकुंभ में सात करोड़ श्रद्धालु आए थे, इस बार 13 करोड़ श्रद्धालुओं के आगमन का अनुमान है। ढाई से तीन गुना बढ़ी श्रद्धालुओं की संख्या बता दें कि 92.68 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले उज्जैन शहर की आबादी सात लाख के करीब है। यहां ‘महाकाल महालोक’ के रूप में ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर मंदिर का विस्तार होने के बाद श्रद्धालुओं की संख्या ढाई से तीन गुना बढ़ गई है। उज्जैन स्मार्ट सिटी लिमिटेड का कहना है कि उज्जैन शहर में रोजाना चार लाख 81 हजार लोगों का आवागमन होता है। रेलवे का कहना है कि वर्तमान में उज्जैन रेलवे स्टेशन से प्रतिदिन औसत 36946 व्यक्ति ट्रेन से उतरते-चढ़ते हैं। पिछले सिंहस्थ में सात करोड़ श्रद्धालु आए थे सिंहस्थ के दरमियान ये संख्या 66132 हो सकती है। नगर निगम का कहना है कि अभी प्रतिदिन शहर से रोजाना औसत 240 टन (महीने में 7200 टन) कचरा निकलता है। पिछले सिंहस्थ के दौरान महीनेभर में सात करोड़ श्रद्धालु उज्जैन आए थे, तब महीनेभर में 18700 टन कचरा निकला था। इसकी कीमत 150 रुपये प्रति टन के हिसाब से 28 लाख पांच हजार रुपये थी। इन सब आंकड़ों का अध्ययन, विश्लेषण करने के बाद ही नगर निगम ने सिंहस्थ के दौरान 22200 टन कचरा उत्सर्जित होने का अनुमान लगाया है। इतने कचरे के एकत्रीकरण, परिवहन एवं सड़क-नाली की सफाई के लिए वाहन एवं कर्मचारियों की उपलब्धता का आकलन किया है। प्रारंभिक योजना से अपर मुख्य सचिव डा. राजेश राजोरा को अवगत कराया जा चुका है। ‘ग्रीन सिंहस्थ, क्लीन सिंहस्थ’ अवधारणा पर होगा काम पिछली बार की तरह इस बार भी यहां ग्रीन सिंहस्थ, क्लीन सिंहस्थ अवधारणा पर काम होगा। इसका मतलब है कि महाकुंभ के दौरान शहर और मेला क्षेत्र स्वच्छ तो होगा ही हरियाली से आच्छादित भी होगा। नगर निगम हर संभव प्रयास करेगा कि मेला प्रतिबंधित प्लास्टिक कचरा मुक्त हो। योजना, जीरो वेस्ट सिंहस्थ इवेंट की बनाई जा रही है। इसमें सारे कचरे का बेहतर तरीके से संग्रहण कर वैज्ञानिक तरीके से निष्पादन किया जाएगा। शहर से 12 किलोमीटर दूर गोंदिया ट्रेचिंग ग्राउंड में भारत सरकार की नवरत्न कंपनी गैस अथारिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड द्वारा स्थापित किए जाने वाले कम्प्रेस्ड बायोमिथिनेशन प्लांट की इसमें अहम भूमिका होगी। मच्छर मारने तक के होंगे इंतजाम सिंहस्थ में कचरा संग्रहण, सफाई कार्य के साथ मच्छर मारने तक के इंतजाम होंगे। पिछली बार मच्छरों को पनपने से रोकने और मलेरिया की रोकथाम पर सवा करोड़ रुपये खर्च हुए थे। घाट क्षेत्र में शाही स्नान वाले दिन सुगंधित स्प्रे भी किया था। ऐसा इस बार भी किए जाने की योजना है। सिंहस्थ 2028 के लिए बनाया जा रहा प्लान     सिंहस्थ-2028 के लिए कचरा प्रबंधन का विस्तृत प्लान तैयार किया जा रहा है। अभी आकलन में यह बात सामने आई है कि सिंहस्थ के दरमियान महीनेभर में 22 हजार 200 टन कचरा निकलेगा। कचरा प्रबंधन के लिए 15220 सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति, 379 वाहनों की खरीदी, चार नए कचरा ट्रांसफर स्टेशन और 50 हजार बायो टायलेट बनाने का प्रस्ताव शासन को दिया जा रहा है। – आशीष पाठक, आयुक्त, नगर निगम, उज्जैन  

मध्यप्रदेश वन्यजीव संरक्षण में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा, माधव टाइगर अभयारण्य जल्द ही राज्य का 9वां टाइगर रिज़र्व बनेगा

शिवपुरी चंबल रीजन के शिवपुरी में मध्य प्रदेश का 9वां टाइगर रिजर्व बनने जा रहा है. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बताया कि हमारे राज्य में बनने जा रहे एक नए टाइगर रिजर्व के लिए औपचारिकताएं भी लगभग पूरी हो चुकी हैं. CM यादव ने अपने एक बयान में कहा, मध्यप्रदेश वन्यजीव संरक्षण में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है. माधव टाइगर अभयारण्य जल्द ही राज्य का 9वां टाइगर रिज़र्व बनेगा, जिससे चंबल अंचल में वन्यजीवों की समृद्धि बढ़ेगी. बुधवार को कूनो में 5 और चीते छोड़े गए हैं. यह गर्व की बात है कि पहले छोड़े गए चीते न केवल शिकार कर रहे हैं, बल्कि कुशलता से जंगल में विचरण कर रहे हैं. प्रकृति और संतुलन की यह अनमोल झलक हमारे प्रदेश में दिख रही है. बता दें कि पिछले साल राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) की तकनीकी समिति ने शिवपुरी जिले के माधव राष्ट्रीय उद्यान को मध्य प्रदेश के 9वें टाइगर रिजर्व के रूप में घोषित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी. एनटीसीए की तकनीकी समिति ने प्रस्तावित बाघ अभयारण्य का कोर क्षेत्र 375 वर्ग किलोमीटर, बफर क्षेत्र 1276 वर्ग किलोमीटर और कुल क्षेत्रफल 1751 वर्ग किलोमीटर होगा. समिति ने इस राष्ट्रीय उद्यान में एक नर और एक मादा बाघ को छोड़ने की भी मंजूरी दी है. मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश पर राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण को माधव नेशनल पार्क को टाइगर रिजर्व घोषित करने के लिए प्रस्ताव भेजा था. मध्यप्रदेश में हो जाएंगे 9 अभ्यारण्य माधव टाइगर रिजर्व के बाद मध्यप्रदेश में टाइगर रिवर्ज की संख्या 9 हो जाएगी. देश में लगभग 60 टाइगर रिजर्व हैं, इनमें से 9 मध्यप्रदेश में हैं. देश में सबसे ज्यादा टाइगर रिजर्व मध्य प्रदेश में हैं. पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ एल कृष्णमूर्ति बताते हैं कि, ”इस बाघ अभ्यारण्य का कोर क्षेत्र 375 वर्ग किलोमीटर का और बफर जोन 1276 वर्ग किलोमीटर और कुल क्षेत्रफल 1751 वर्म किलोमीटर का होगा.” 1958 में हुई माधव राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना माधव राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना 1958 में मध्यप्रदेश राज्य की स्थापना के बाद ही हो गई थी. यह क्षेत्र कभी ग्वालियर के महाराजाओं और मुगल बादशाहों का शिकारगाह हुआ करता था. ग्वालियर राजघराने द्वारा साल 1918 में मनिहार नदी पर बांध का निर्माण कर माधव तालाब बनाया गया था. यह इस पार्क का सबसे बड़ा जल क्षेत्र है. लाया जाएगा बाघ का जोड़ा माधव नेशनल पार्क को टाइगर रिजर्व बनने के बाद इस क्षेत्र में पर्यटन के मामले में काफी संभावनाएं बढ़ जाएंगी. इससे शिवपुरी क्षेत्र को विश्व स्तर पर पहचान मिलेगी. उधर माधव टाइगर रिजर्व में बाधों की संख्या बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं. यहां जल्द ही एक बाघ का जोड़ा दिया जाएगा. इसमें एक नर और मादा होगा. अभी माधव टाइगर रिजर्व में तीन टाइगर और दो शावक हैं. वन्यजीव विशेषज्ञों के मुताबिक, ”माधव टाइगर रिजर्व प्राकृतिक रूप से काफी संपन्न क्षेत्र हैं और यह क्षेत्र टाइगर के लिए प्राकृतिक आवास रहा है. इसलिए आने वाले समय में यहां टाइगर की संख्या में अच्छी बढ़ोत्तरी होगी.” कैसा है ये टाइगर रिजर्व? एनटीसीए की तकनीकी समिति ने प्रस्ताव दिया है कि बाघ अभयारण्य का कोर एरिया 375 वर्ग किलोमीटर, बफर एरिया 1276 वर्ग किलोमीटर तथा कुल क्षेत्रफल 1751 वर्ग किलोमीटर होगा. समिति ने राष्ट्रीय उद्यान में एक नर और एक मादा बाघ छोड़ने की भी स्वीकृति दी है. मुख्यमंत्री डॉ यादव के निर्देश पर माधव राष्ट्रीय उद्यान को बाघ अभयारण्य घोषित करने के लिए राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) को प्रस्ताव भेजा गया था.  

डोनाल्ड ट्रंप का गाजा का पुनःनिर्माण में निकल जाएंगा पसीना! सिर्फ मलबा साफ करने में 1.2 अरब डॉलर से ज्यादा खर्च

गाजा  अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा पर कब्जा करने और उसे जन्नत बनाने की बात कही है। ट्रंप के बयान ने दुनिया को चौंका दिया है। अरब देशों के साथ साथ अमेरिका की डेमोक्रेटिक पार्टी ने भी उनके प्लान की निंदा की है। डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा को ‘मध्य पूर्व का रिवेरा’ बनाने और ‘गाजा को फिर से महाने बनाने’ का अपना प्लान पेश किया है। जिसके तहत गाजा में रहने वाले करीब 23 लाख लोगों को उन्होंने मिस्र, जॉर्डन और अरब देशों में भेजने की पेशकश की है। हालांकि, उनके प्लान को अरब देशों ने फौरन ही खारिज कर दिया। डोनाल्ड ट्रंप के प्लान पर विवाद जरूर हो रहे हैं, लेकिन एक सवाल भी उठ रहे हैं कि इजरायली बमबारी में ध्वस्त हो चुके गाजा का फिर से निर्माण कैसे होगा? डोनाल्ड ट्रंप के प्लान पर शक करने वाले लोगों का कहना है, कि असल में ये गाजा में रहने वाले लोगों के सफाए के लिए बनाया गया ये एक फॉर्मूला है। लोगों का कहना है कि ट्रंप का प्लान असल में गाजा पर कब्जा करना है। लेकिन सवाल ये है, कि गाजा को जन्नत बनाने में कितने साल लगेंगे? और गाजा स्वर्ग की तरह दिखे, ऐसा होने में जो खर्च आएगा, उसे कौन वहन करेगा? एक्सपर्ट्स का मानना है कि डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा के लिए जो प्लान किया है, उसे पूरा करने में कई सालों का वक्त लगेगा और अरबों डॉलर का खर्च आएगा। गाजा को फिर से बनाने में कितने साल लगेंगे? गाजा में जिस तरह की बर्बादी फैली है, उसे देखते हुए एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि पुननिर्माण में कम से कम 20 सालों से ज्यादा का वक्त लगेगा। गाजा को साफ करने में अमेरिका को लाखों टन मलबा पट्टी से बाहर निकालना होगा। मलबे को निकालने में ही कई सालों का वक्त लग जाएगा। सवाल ये भी हैं, कि आखिर इतना मलबा कहां रखा जाएगा? ब्रिटिश सेना के कर्नल रिचर्ड केम्प ने द सन की रिपोर्ट में डोनाल्ड ट्रंप के प्लान का समर्थन किया है। उन्होंने इसे एक तार्किक योजना बताया है। उन्होंने कहा, कि “गाजा के पुनर्निर्माण में कम से कम एक दशक का समय लगेगा।” केम्प ने द सन की रिपोर्ट में कहा है, कि “गाजा को एक ऐसी जगह में बदलने के लिए, जहां लोग फिर से रह सकें, इसमें शायद कम से कम एक दशक लगने वाला है।” उन्होंने कहा, कि “इसमें शायद अरबों डॉलर खर्च होंगे, लेकिन मध्य पूर्व में कई अरब देश हैं, और वो इस प्रोजेक्ट में मदद दे सकते हैं।” हालांकि, बुधवार को व्हाइट हाउस ने कहा है, कि ट्रंप ने फिलिस्तीनी एन्क्लेव के अपने प्रस्ताव के तहत गाजा पट्टी में अमेरिकी सैनिकों को तैनात करने के लिए कोई प्रतिबद्धता नहीं जताई है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने संवाददाताओं से कहा, कि ट्रंप का मानना है कि “क्षेत्र में स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए” गाजा के पुनर्निर्माण में संयुक्त राज्य अमेरिका को शामिल होना चाहिए। गाजा पट्टी में कितनी बर्बादी फैली है? यूनाइटेड नेशंस ने अनुमान लगाा है, कि गाजा में करीब 50 मिलियन टन मलबा फैला है, जिसे साफ करने में 21 सालों का वक्त लग सकता है। अनुमान में कहा गया है, कि गाजा पट्टी से सिर्फ मलबा साफ करने में 1.2 अरब डॉलर से ज्यादा खर्च हो सकते हैं। केम्प ने कहा कि, “मेरा मानना है, कि गाजा में लोगों को ट्रंप के प्लान के मुताबिक अलग रखा जाए, सुरंगों को साफ किया जाए, हथियारों को हटाया जाए और फिर एक नये गाजा का निर्माण किया जाए। हवाई अड्डे का निर्माण हो, बंदरगाह का निर्माण हो और ये सभी के लिए बेहतर होगा।” लेकिन असल सवाल ये है, कि क्या गाजा से लोगों को निकालना संभव है? डोनाल्ड ट्रंप ने सुझाव दिया है, कि गाजा के लोगों को निकालकर अस्थाई तौर पर मिस्र और जॉर्डर में बसाया जाए, जिसे दोनों देशों ने खारिज कर दिया है। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, कि “गाजा के लोगों ने मौत और विनाश के अलावा कुछ नहीं देखा है और अगर नये गाजा का निर्माण होगा, तो कौन होगा जो वापस नहीं जाना चाहेगा।” अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, गाजा “मध्य पूर्व का रिवेरा” होगा। लेकिन, सवाल ये है कि क्या ऐसा संभव है?

60 साल बाद त्रिग्रही योग में मनेगी महाशिवरात्रि, दूल्हा बनेंगे भोलेनाथ, चार प्रहर की साधना देगी धन, यश, प्रतिष्ठा व समृद्धि

ज्योतिष शास्त्र व पंचांग की गणना के अनुसार इस बार महाशिवरात्रि का पर्वकाल त्रिग्रही युति योग में मनाया जाएगा। इस योग में की गई शिव साधना मनोवांछित फल प्रदान करने वाली मानी गई है। शिव साधना की दृष्टि से ऐसा शुभ संयोग वर्ष 2025 से पहले सन 1965 में बना था। मकर राशि में तीन ग्रहों की युति रहेगी     ज्योतिषाचार्य  ने बताया कि महाशिवरात्रि 26 फरवरी को बुधवार के दिन श्रवण उपरांत धनिष्ठा नक्षत्र, परिघ योग, वणिज उपरांत शकुनीकरण तथा मकर राशि के चंद्रमा की साक्षी में आ रही है।     जब भी कोई महापर्व आता है, तो ग्रह योग, नक्षत्र व संयोग देखा जाता है, क्योंकि ग्रहों की साक्षी एवं परिभ्रमण का प्रभाव जीवन पर पड़ता है। ग्रहों के परिभ्रमण का लाभ लेते हुए साधना की दृष्टि से जीवन को कैसे सुखमय बनाया जाए ज्योतिष शास्त्र इसका मार्ग बताते हैं।     महाशिवरात्रि पर मकर राशि के चंद्रमा की साक्षी में सूर्य, बुध व शनि की युति कुंभ राशि में रहेगी। सूर्य व शनि पिता पुत्र हैं और सूर्य शनि की कक्षा अर्थात शनि की राशि कुंभ में रहेंगे।     इस दृष्टि से यह विशिष्ट संयोग भी है, यह योग लगभग एक शताब्दी में एक बार बनता है। इस योग में की गई साधना परम पद व आध्यात्मिक धार्मिक उन्नति प्रदान करती है। इस दृष्टि से इन योग संयोग में विशिष्ट साधना अवश्य करनी चाहिए। -महाशिवरात्रि का पूजन रात्रि में करने का है विशेष प्रावधान  इस वर्ष आठ मार्च की महाशिवरात्रि बेहद खास है। ज्योतिषविदों के अनुसार 60 साल के बाद शिव योग एवं सवार्थ सिद्धि योग के साथ ग्रहों की शुभ युति के त्रिग्रही योग में मनाई जाएगी। इसमें सिद्धि योग एवं श्रवण नक्षत्र का भी संयोग बना है। कुंभ राशि में सूर्य, शनि व शुक्र साथ मिलकर त्रिग्रही योग का निर्माण कर रहे हैं। ग्रहों की युति के साथ ही शिवयोग, प्रदोष व्रत एवं सवार्थ सिद्धि योग के दुर्लभ बना यह संयोग लगभग तीन सौ साल के बाद आया है। पंडित सुनील दाधीच ने बताया कि ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार ऐसा योग बेहद दुर्लभ और अकल्पनीय सुखद संयोग लेकर आता है। इस दिन की भगवान शिव के व्रत एवं अर्चन की तुलना सामान्य दिनों में होने वाले पूजन कार्यों से नहीं की जा सकती है। मेष, वृषभ, तुला, मकर एवं कुंभ राशि के लिए बेहद खास रहेगा यह संयोग। शनिदेव अपनी मूल त्रिकोण राशि कुंभ में विराजमान है। इसके साथ ही सूर्यदेव अपने पुत्र एवं आदर्श शत्रु शनि की राशि कुंभ में चन्द्रमा के साथ विराजित रहेंगे। ग्रहों की ये स्थिति त्रिग्रही योग का निर्माण कर रही है। जो कि फलदायी है। रात्रि में ही क्यों मनाई जाती है महाशिवरात्रि ज्योतिषी महेश गुरु के अनुसार ईषान संहिता में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि रात्रि के द्वितीय पहर में शिवलिंग का प्रादुर्भाव हुआ था। शिव यानि की रात्रि के प्रतीक हैं, और यह भूतेश्वर या भूतनाथ कहे जाते हैं। भूत आदि रात्रि में ही सक्रिय होते हैं। इस दिन में रात्रि में ही इनका प्रादुर्भाव होने की वजह से ही महाशिवरात्रि मनाई जाती है। शिवरात्रि पर चार प्रहर में यानि की चार बार पूजन का विधान आता है। पहले प्रहर में दूध से शिव के ईशान स्वरूप का, दूसरे प्रहर में दही से अघोर स्वरूप का, तीसरे प्रहर में घी से वामदेव रूप का और चौथे प्रहर में शहद से सद्योजात स्वरूप का अभिषेक कर पूजन करना चाहिए। यदि कन्याएं चार बार पूजन न कर सकें, तो पहले प्रहर में एक बार तो पूजन अवश्य ही करें। महाशिवरात्रि की रात महासिद्धिदायिनी होती है। इस रात्रि को निशा रात्रि भी कहते हैं। यानि की चारों ओर घोर अंधकार की स्थिति में शिवलिंग का उद्भव अंधकार में प्रकाश का भी प्रतीक माना जाता है। पूजा पद्धति सात्विक व शाक्त अलग-अलग विधियों से संपन्न कराई जाती है। इसी दिन शिव एवं पार्वती का पाणीग्रहण भी हुआ था। इस वजह से भी पूरी रात्रि को उत्सव की तरह मनाया जाता है। रात्रि पूजन का है विशेष विधान महाशिवरात्रि पर ऐसे की जा सकती है पूजा पूरी तरह से शुद्ध होने के बाद घर के मंदिर में या शिव मंदिर में जाकर भगवान शिव की पूजा की जा सकती र्है। पहले शिवलिंग में चंदन का लेप करने के साथ ही पंचामृत से स्नान कराना चाहिए। इसमें गन्ने के रस, कच्चे दूध, या शुद्ध घी से शिवलिंग का अभिषेक करना चाहिए। इसके पश्चात महादेव को बेलपत्र, धतूरा, जायफल, कमल गट्टे, फल, फूल, मिठाई, मीठा पान, इत्र आदि अर्पित करना चाहिए। अर्चन सदैव पूर्वाभिमुखी या फिर उत्तरामुखी करनी चाहिए। इसके पश्चात शिव पंचाक्षर मंत्र आदि के साथ शिव ताण्डव स्तोत्र आदि का पाठ किया जा सकता है। व्रत रहने वाले को पूरा दिन निराहार रहना चाहिए। रोगी या अशक्त फलाहार कर सकते हैं। व्रत रखने वाले को फल, फूल, चंदन, बिल्व पत्र, धतूरा, धूप व दीप से रात के चारों प्रहर में शिवजी की पूजा करनी चाहिए साथ ही भोग भी लगाना चाहिए। दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से अलग-अलग तथा सबको एक साथ मिलाकर पंचामृत से शिवलिंग को स्नान कराकर जल से अभिषेक भी किया जाता है। भव, शर्व, रुद्र, पशुपति, उग्र, महान, भीम और ईशान, इन आठ नामों से फूल अर्पित कर भगवान शिव की आरती और परिक्रमा करने का विधान है। इसमें पूजन तो चारों पहर में होता है, लेकिन मध्यरात्रि की पूजा को ज्यादा महत्वपूर्ण माना जाता है।  

सौरभ ने राजदारों के नाम पर पूछताछ में साध ली चुप्पी, 54 किलो सोना, क्विंटलों चांदी के बारे में नहीं मिली जानकारी, अब नार्को टेस्ट

भोपाल  54 किलो सोना, ढाई क्विंटल चांदी और करोड़ों रुपए की काली कमाई का ‘मालिक’ परिवहन विभाग का पूर्व सिपाही सौरभ शर्मा लोकायुक्त के लिए समस्या बना हुआ है। वह मुंह खोलने का नाम ही नहीं ले रहा है। अब तक की पूछताछ में लोकायुक्त पुलिस उससे कुछ खास जानकारियां नहीं निकाल पाई है। अब सूत्रों ने नवभारतटाइम्सडॉट.कॉम से दावा किया है कि लोकायुक्त पुलिस कोर्ट में आवेदन देकर सौरभ का नार्को टेस्ट करवाने का सोच रही है। दरअसल, सौरभ शर्मा से सात दिन की पूछताछ में लोकायुक्त पुलिस कोई भी जानकारी निकालने में सफल नहीं हो पाई। इसलिए विधि विशेषज्ञों की सलाह के बाद नार्को टेस्ट कराया जा सकता है। कई नेताओं और अधिकारियों की खुल सकती है पोल आरोप हैं कि सौरभ के पास मिला माल कई नेताओं और अधिकारियों का है। ऐसे में सौरभ जानबूझकर मुंह नहीं खोल रहा है। सौरभ ही नहीं, उसके पार्टनर चेतन सिंह गौर और शरद जायसवाल भी मुंह नहीं खोल रहे हैं। अब लोकायुक्त पुलिस के सामने प्रश्न यह है कि कार में मिला 54 किलो सोना और 10 करोड़ रुपये नकद किसके हैं? यह सोना कहां से आया? खरीदी के लिए भुगतान किसने और किस माध्यम से किया? 18 दिसंबर को मारा था सौरभ के घर छापा बता दें कि लोकायुक्त पुलिस ने 18 दिसंबर को सौरभ और चेतन सिंह गौर के आवास पर छापा मारा था। इसके बाद देर रात आयकर विभाग को इनोवा कार में करीब 57 किलो सोना और 10 करोड़ रुपये नकद मिले थे। इसके 40 दिन बाद कोर्ट में सरेंडर के लिए आते समय सौरभ को पुलिस ने 28 जनवरी को गिरफ्तार कर लिया था। उसके साथी चेतन सिंह गौर और शरद जायसवाल को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया था। 17 फरवरी तक हिरासत उधर, तीनों आरोपितों की पुलिस रिमांड अवधि पूरी होने पर लोकायुक्त पुलिस ने मंगलवार को उन्हें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम राम प्रताप मिश्र की विशेष न्यायालय में प्रस्तुत किया। यहां से तीनों को 17 फरवरी तक की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। सौरभ के साथ दो और साथी गिरफ्तार लोकायुक्त पुलिस ने सौरभ और चेतन सिंह गौर के आवास पर 18 दिसंबर को छापा मारा था। इसके 40 दिन बाद कोर्ट में सरेंडर के लिए आते समय सौरभ को पुलिस ने 28 जनवरी को गिरफ्तार कर लिया था। उसी दिन सौरभ के करीबी चेतन सिंह गौर और शरद जायसवाल को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया था। जीनकारी नहीं उगलवा सकी पुलिस पुलिस हिरासत में लेकर तीनों से एक सप्ताह तक पूछताछ की पर सौरभ की संपत्तियों के बारे में पुलिस खास जानकारी नहीं उगलवा सकी। मंगलवार को सौरभ सहित तीनों आरोपितों को जेल भेजने के न्यायालय के आदेश के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी आरोपितों से पूछताछ के लिए कोर्ट में आवेदन लगाया। कोर्ट ने दी पूछताछ की इजाजत कोर्ट ने ईडी को जेल में आरोपितों से पूछताछ की अनुमति दे दी है। बता दें कि लोकायुक्त पुलिस में आय से अधिक संपत्ति के मामले में सौरभ सहित तीनों आरोपितों के विरुद्ध दर्ज एफआइआर के आधार पर ईडी ने प्रकरण कायम किया था। इसके बाद ईडी ने भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर और पुणे में सौरभ के रिश्तेदार व करीबियों के यहां दो अलग-अलग दिन छापा मारकर संपत्ति के दस्तावेज जब्त किए थे। सौरभ की मां उमा शर्मा, पत्नी दिव्या तिवारी और चेतन सिंह गौर से जांच एजेंसी पहले ही पूछताछ कर चुकी है।  

समाज के विकास में हर संभव सहयोग देने और सहभागिता बढ़ाने की दी सीख: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राष्ट्रीय सेवा योजना व्यक्तित्व विकास और राष्ट्र प्रेम की सीख देने की जीवंत इकाई है। इसके नाम से ही सेवा का भाव उत्पन्न होता है। यह संगठन विद्यार्थियों के गुणों का संवर्धन कर उन्हें समुदाय विकास की मूल भावना से ओत-प्रोत कर देश के विकास में सहयोग देता है। यह बेहद प्रशंसनीय है कि आज हमारे विद्यार्थी एनएसएस को एक विषय के रूप में पढ़ रहे हैं। युवा ही देश का भविष्य हैं और इनमें सेवा भावना के विकास से देश का विकास और अधिक तीव्र गति से होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरूवार को समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) में गणतंत्र दिवस परेड-2025 नई दिल्ली में मध्यप्रदेश का गौरव बढ़ाने वाले राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के विद्यार्थियों के सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एनएसएस के समर्पण और सेवा भावना की सराहना करते हुए परेड में शामिल हुए विद्यार्थियों और उनके समन्वयकों को मैडल देकर सम्मानित किया और शुभाशीष भी दिया। इन एनएसएस विद्यार्थियों ने कर्तव्यपथ, नई दिल्ली में 26 जनवरी 2025 को हुई गणतंत्र दिवस परेड में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर मध्यप्रदेश का नाम रौशन किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना युवाओं में समाजसेवा, राष्ट्रभक्ति, अनुशासन और साहचर्य की भावना विकसित करने का एक महत्वपूर्ण मंच है। मध्यप्रदेश के विद्यार्थियों ने इस परेड में बेहतरीन प्रदर्शन कर पूरे प्रदेश को गौरवान्वित किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विद्यार्थियों को आगे भी समाजसेवा में हरसंभव सहयोग देने और राष्ट्रीय जागरूकता से जुड़े कार्यों में सक्रिय सहभागिता के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार युवाओं के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। युवा ऊर्जा को सही दिशा देकर हम सभी युवाओं की प्रतिभाओं को तराशकर प्रदेश के विकास में उनका सहयोग ले रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि युवा देश और प्रदेश के विकास की धुरी हैं। सभी को अपना कॅरियर बनाकर आगे बढ़ना चाहिए। देश के विकास के लिए युवाओं को राजनीति में भी आना चाहिए। राजनैतिक विकास से ही देश के सामाजिक विकास को बल मिलेगा। युवा सिर्फ रोजगार के पीछे न रहें। वे रोजगार मांगने वाले नहीं, वरन् रोजगार देने वाले बनें। हमारा राष्ट्र वसुधैव कुटुम्बकम की वैश्विक भावना से दुनिया में अच्छाईयां बांटने के लिए जाना जाता है। अच्छाईयां बांटना हमारी संस्कृति है, हमारी जीवनशैली है। इसलिए युवा अपने जीवन के बाकी गुणों के विकास के साथ-साथ सेवा भावना को भी अपनाएं और जीवन में आगे बढ़ें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एनएसएस द्वारा स्वच्छता, शुचिता, रक्तदान, जनजागरूकता कार्यक्रमों में सहभागिता की सराहना करते हुए कहा कि यह संगठन हमें सह अस्तित्व भाव से जीवन पथ पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। एनएसएस से जुड़े हैं 1.60 लाख से अधिक विद्यार्थी अपर मुख्य सचिव, उच्च शिक्षा विभाग श्री अनुपम राजन ने कहा कि एनएसएस शिक्षा द्वारा समाज सेवा और समाज सेवा द्वारा शिक्षा की मूल भावना से कार्य करने वाला राष्ट्रीय संगठन है। प्रदेश के सभी महाविद्यालयों के करीब एक लाख 60 हजार से अधिक विद्यार्थी इस संगठन से जुड़े हैं। जिन महाविद्यालयों में एनएसएस नहीं है, वहां भी एनएसएस यूनिट तैयार करने के प्रयास जारी हैं। उन्होंने राष्ट्रीय गणतंत्र दिवस परेड-2025 में शामिल हुए मध्यप्रदेश के एनएसएस दल के सभी स्वयंसेवकों को बधाई दी और कहा कि राष्ट्र सेवा से जुड़कर सभी विद्यार्थी एक जिम्मेदार नागरिक बनें। कार्यक्रम के आरंभ में मुख्यमंत्री डॉ. यादव का एनएसएस बैच लगाकर स्वागत किया तथा प्रतीक चिन्ह देकर अभिनंदन किया गया। कार्यक्रम में पूर्व मंत्री एवं विधायक श्री ओमप्रकाश सखलेचा, उच्च शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, राष्ट्रीय सेवा योजना के समन्वयक और भोपाल के विभिन्न महाविद्यालयों के एनएसएस स्वयंसेवक भी उपस्थित थे। आभार आयुक्त उच्च शिक्षा श्री निशांत वरवड़े ने माना। मध्यप्रदेश एनएसएस दल ने दिखाया अनुशासन और सेवा भावना मध्यप्रदेश से चयनित एनएसएस विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय गणतंत्र दिवस परेड में अनुशासन और समर्पण का बेहतरीन उदाहरण प्रस्तुत किया। मध्यप्रदेश का दल पूरे देश से चुने गए एनएसएस के विद्यार्थियों के बीच अपनी प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराने में सफल रहा। कार्यक्रम में सम्मानित विद्यार्थियों ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव से चर्चा करते हुए अपने अनुभव साझा किए और इस ऐतिहासिक पल का हिस्सा बनने पर हर्ष व्यक्त किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एनएसएस के विद्यार्थियों के साथ समूह चित्र खिंचवाकर उन्हें उज्जवल भविष्य की शुभकामना दी।  

सुप्रीम कोर्ट ने ‘डेड बॉडी के साथ यौन संबंध बनाना ‘बलात्कार’ अपराध की दलील खारिज की

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चूंकि दंड कानून नेक्रोफीलिया को अपराध नहीं मानते, इसलिए वह हाईकोर्ट के आंशिक बरी करने के आदेश में हस्तक्षेप नहीं कर सकता, जिसमें आरोपी ने मृतक की हत्या करने के बाद उसके शव के साथ यौन संबंध बनाए थे। जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की खंडपीठ कर्नाटक हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें आरोपी को मृत शरीर के साथ यौन संबंध बनाने के लिए बलात्कार के आरोपों से बरी कर दिया गया, लेकिन हत्या के अपराध के तहत दोषसिद्धि बरकरार रखी। यहां राज्य सरकार ने वर्तमान एसएलपी दायर की।  हाई कोर्ट ने शख्स को रेप के आरोप से बरी कर दिया था, लेकिन हत्या की सजा कायम रही। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भारतीय दंड संहिता (IPC) में नेक्रोफिलिया (Necrophilia) यानी शव के साथ कामुकता को अपराध नहीं माना गया है। कर्नाटक हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ याचिका सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की बेंच कर्नाटक हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस मामले में कर्नाटक सरकार की ओर से अडिशनल एडवोकेट जनरल अमन पंवार ने तर्क दिया कि IPC की धारा 375(c) में ‘शरीर’ शब्द को मृत शरीर भी शामिल माना जाना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि रेप की परिभाषा के तहत प्रावधान में कहा गया है कि यदि कोई महिला सहमति नहीं दे सकती है तो इसे बलात्कार माना जाएगा। इसी तर्क के आधार पर मृत शरीर भी सहमति नहीं दे सकता, इसलिए यह अपराध बलात्कार की श्रेणी में आना चाहिए। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार करने से इनकार कर दिया और कहा कि नेक्रोफिलिया भारतीय दंड संहिता के तहत कोई अपराध नहीं है, इसलिए वह हाई कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने को इच्छुक नहीं है। कर्नाटक हाई कोर्ट ने क्या कहा था? कर्नाटक हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि मृत शरीर के साथ यौन संबंध को बलात्कार नहीं माना जा सकता, क्योंकि IPC की धारा 375 और 377 केवल जीवित मनुष्यों पर लागू होती है। धारा 375 और 377 का गहराई से अध्ययन करने पर यह स्पष्ट होता है कि मृत शरीर को ‘व्यक्ति’ या ‘मानव’ नहीं माना जा सकता। इसलिए, इन धाराओं के तहत कोई अपराध नहीं बनता और आरोपी को IPC की धारा 376 के तहत सजा नहीं दी जा सकती। हाई कोर्ट ने यह भी स्वीकार किया कि नेक्रोफिलिया एक गंभीर समस्या है और संसद को इसे अपराध घोषित करने के लिए कानून बनाना चाहिए। एक मामले में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने भी दिसंबर में कहा था कि किसी मृत महिला या बच्ची के साथ यौन अपराध किया जाता है तो उसे IPC की धारा 375 (बलात्कार) या POCSO अधिनियम के तहत अपराध नहीं माना जा सकता। कानून में बदलाव की दरकार अस्पतालों और मुर्दाघरों में युवतियों के शवों के साथ यौन संबंध की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं, लेकिन भारत में ऐसे मामलों के लिए कोई विशेष कानून नहीं है। नेक्रोफिलिया एक मनो-यौन विकार (psychosexual disorder) है। यह सही समय है कि केंद्र सरकार मृत व्यक्ति, विशेषकर महिलाओं की गरिमा बनाए रखने के लिए IPC की धारा 377 में संशोधन करे और नेक्रोफिलिया को अपराध घोषित करे, जैसा कि यूनाइटेड किंगडम, कनाडा, न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका में किया गया है। यह मामला भारतीय दंड संहिता में संशोधन की आवश्यकता को उजागर करता है ताकि मृत व्यक्ति की गरिमा और अधिकारों की रक्षा की जा सके।

भोपाल में बनेगा आचार्यश्री विद्यासागर स्माकर और शोध संस्थान यह घोषणा मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने स्मृति दिवस कार्यक्रम में की

भोपाल भोपाल में जैन संत आचार्यश्री विद्यासागर जी की स्मृति में एक स्मारक स्थल का निर्माण किया जाएगा, यह घोषणा मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने विधानसभा में आयोजित स्मृति दिवस कार्यक्रम में की। मुनिश्री प्रमाण सागर जी महाराज और अन्य संसघ जैन संतों के सान्निध्य में आचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज का प्रथम स्मृति दिवस मनाया गया। सीएम बोले- आचार्यश्री साक्षात देवता थे अपने संबोधन में सीएम डॉ. यादव ने आचार्य श्री का पुण्य स्मरण करते कहा कि इसी विधानसभा में उनके अलौकिक स्वरुप के दर्शन किये तो ऐसा लगा था कि साक्षात देवता हमारे बीच पधारे थे। ये कहना गलत होगा कि आचार्यश्री हमारे बीच नहीं हैं, वे हमारे ही बीच हैं बस उन्हें स्मरण करने की देर है। आचार्यश्री ने सच्चे अर्थों में मानव सेवा के साथ प्रकृति सेवा की। उनके सामने तप, संयम, त्याग, सेवा ये शब्द छोटे पड़ जाते हैं। आचार्यश्री भले ही कर्नाटक में जन्मे लेकिन आज हर कोई उन्हें अपना मानता है। आचार्यश्री ने गौसंरक्षण के लिए चलाया था अभियान सीएम डॉ. यादव ने कहा कि आचार्यश्री ने गौपालन, गौसंरक्षण और गौसंवर्धन पर भी जोर दिया। उन्होंने गौमांस निर्यात का विरोध करने कई वर्षों पर पहले अभियान शुरू कर दिया था। आज जैन समाज की ओर से पूरे देश में कई गौशालाएं संचासलित की जा रही है। क्योंकि गोमाता के माध्यम से पूरी प्रकृति बदल सकती है। गोमाता के भीतर वह भाव है जो अपने बच्चों का ख्याल रखती है और मनुष्य के बच्चों का भी ख्याल रखती है।   भोपाल में बनेगा स्मारक स्थल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन के अंत में एक बड़ी घोषणा की। उन्होंने कहा कि आचार्यश्री की स्मृति में भोपाल में भी एक स्मारक स्थल बनाया जाएगा जहां उनसे जुड़ी स्मृतियां संजोई जाएंगी। स्थान चयन बाद में किया जाएगा। सीएम डॉ. यादव की इस घोषणा का जैन समाज के हजारों लोगों ने काफी देर तक तालियां बजाकर जोरदार स्वागत किया।   मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुनिश्री के किये पादप्रक्षालन मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कार्यक्रम की शुरुआत में मुनिश्री प्रमाण सागर जी महाराज के पादप्रक्षालन (चरण पखारकर) उनका आशीर्वाद लिया। साथ ही आचार्यश्री के जीवन पर आधारित 25 पुस्तकों का विमोचन भी किया गया। इस कार्यक्रम में भोपाल सांसद आलोक शर्मा, विधायक भगवानदास सबनानी, भोपाल दिगंबर जैन समाज के अध्यक्ष मनोज जैन बांगा समेत कई जनप्रतिनिधि और पदाधिकारी मौजूद रहे। संयम, ज्ञान, सेवा, समर्पण, न्याय का आदर्श हैं विद्यासागर जी महाराज जिस तरह दृश्य बदलते हैं, उसी तरह महा पुरुष शरीर बदलते हैं। विद्यासागर जी महाराज ने अपने जीवन आदर्शों से वह आदर्श प्रस्तुत किए, जिससे वे जीते जी देवता की तरह पूजे गए, पूजे जाते रहेंगे। वे सिर्फ आंखों से ओझल हुए हैं, लेकिन वे, उनके आदर्श, उनके बताए गए सद्मार्ग हमेशा हमारे साथ रहने वाले हैं। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने गुरुवार को जैन मुनि विद्यासागर जी महाराज की पहली समाधि स्मृति दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में यह बात कहीं। उन्होंने कहा कि मुनि विद्यासागर जी महाराज ने अपने जीवनकाल में उन सभी आदर्शों और नियमों का पालन किया, जो एक सफल जीवन के लिए आवश्यक है।

मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा बीते 10 साल के दौरान मोबाइल फोन के कॉल दरों में 94 फीसदी तक की गिरावट आई

नई दिल्ली  संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने गुरुवार कहा कि दूरंसचार कंपनियों ने 5 जी सेवाओं के लिए 4.50 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया है और इस निवेश की भरपाई के लिए दूरसंचार टैरिफ में 10 प्रतिशत की वृद्धि किये जाने के बावजूद भारत पूरी दुनिया में अब भी सबसे किफायती टेलीकॉम सेवाएं दे रहा है। श्री सिंधिया ने प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस के रणदीप सिंह सुरजेवाला के एक पूरक प्रश्न के उत्तर में कहा कि वर्ष 2014 में एक मिनट कॉल की कीमत औसतन 50 पैसे थी, जबकि 2025 में यह 94 प्रतिशत कम होकर तीन पैसे प्रति मिनट है। इसी तरह से वर्ष 2014 में एक जीबी डेटा की कीमत 270 रुपये थी, जबकि 2025 में यह 93 प्रतिशत कम होेकर 9.70 रुपये प्रति जीबी है। ग्राहकों की संख्या भी बढ़ी ज्योतिरादित्य सिंधिया ने गुरुवार को राज्यसभा में कहा कि साल 2014 से मोबाइल फोन कॉल दरों में 94 फीसदी की कमी आई है। सिंधिया ने उच्च सदन में प्रश्नकाल के दौरान पूरक सवालों का जवाब देते हुए कहा कि देश में पहले 90 करोड़ मोबाइल फोन उपभोक्ता थे जो अब बढ़कर 116 करोड़ हो गए हैं। इंटरनेट की पहुंच बढ़ी और दर घटी उन्होंने कहा, ‘‘…इंटरनेट पहुंच की बात करें तो 2014 में 25 करोड़ उपभोक्ता थे और आज यह संख्या 97 करोड़ है।’’ मंत्री ने कहा कि जब उपभोक्ताओं की संख्या बढ़ती है तो आवश्यक है कि शुल्क दरों की निगरानी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि साल 2014 में जहां एक मिनट की कॉल की दर 50 पैसे थी, वहीं आज यह घट कर तीन पैसे रह गई है। इस प्रकार दर में 94 फीसदी की गिरावट आई है। सिंधिया ने कहा कि कि 2014 में डेटा यानी इंटरनेट 270 रुपये प्रति जीबी थी जो अब घटकर 9.70 रुपये प्रति जीबी हो गई है जो ‘टैरिफ’ में 93 प्रतिशत की गिरावट को दर्शाता है। दुनिया में सबसे किफायती देश उन्होंने कहा कि भारत दुनिया में इंटरनेट और कॉल दरों के मामले में सबसे किफायती देश है। उन्होंने कहा कि ‘टैरिफ’ में 10 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, ऐसा देश में 5जी सेवा के लिए किए गए निवेश के कारण हुआ है। उन्होंने सदन को बताया कि काफी तेज गति से 5जी सेवा शुरू की गयी है और इसमें करीब 4.5 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया गया है। शुल्क वृद्धि सही उन्होंने शुल्क दरों में वृद्धि को सही ठहराते हुए कहा कि निवेश पर ‘रिटर्न’ मिलना चाहिए। श्री सुरजेवाला ने कहा था कि दूरसंचार कंपनियों ने टैरिफ में वृद्धि करके 38 हजार करोड़ रुपये से अधिक का बोझ उपभोक्ताओं पर डाला है। श्री सिंधिया ने कहा कि पिछले 10 वर्षाें में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में संचार क्षेत्र में बड़ा बदलाव आया है। टेलीकॉम कंपनियां रिकार्ड 22 महीने में देश के 98 प्रतिशत जिलों और 82 प्रतिशत आबादी को 5 जी के दायरे में लायी है। इसके लिए कंपनियों ने 4.50 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया है। मंत्री ने कहा कि कंपनियों को अपने निवेश पर रिटर्न भी चाहिए होता है। इसके लिए टैरिफ में 10 प्रतिशत की बढोतरी की गयी है। इससे उपभोक्ताओं पर बड़ा बोझ नहीं पड़ेगा। एक अन्य प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि आदिवासी बहुल क्षेत्रों में 2590 ऐसे गांवों की पहचान की गयी है जहां दूरसंचार सेवाएं पहुंचायी जा रही है। इसके लिए 15 राज्यों में 1716 टावर लगाये जा रहे हैं। 901 गांवों में टावर लगाये जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि झारखंड में भी कुछ क्षेत्रों में टावर लगाये जा रहे हैं लेकिन राज्य सरकार का पूरा सहयोग नहीं मिल रहा है। राज्य सरकार टावर लगाने के लिए भूमि भी उपलब्ध कराने में देरी कर रही है। इसके साथ ही दूरस्थ और पहाड़ी एवं जंगली क्षेत्रों में टावर लगाना कठिन होता है।

एमपी में निजी स्कूलों के लिए बदले फीस के नियम, फीस बढ़ाने के लिए जिला समिति की अनुमति लेनी होगी

 भोपाल  मध्यप्रदेश में निजी स्कूलों में बस किराया और ट्यूशन फीस को लेकर बड़ा अपडेट है। अब निजी स्कूल अलग से बस फीस नहीं ले पाएंगे और इसे भी वार्षिक का ही भाग माना जाएगा। मध्यप्रदेश निजी विद्यालय अधिनियम-2024 सदन से पारित होने के बाद राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने मुहर लगा दी है। नए नियम के तहक बिना अनुमति अब 10% से अधिक फीस नहीं बढ़ेगी। ₹25000 से ज्यादा सालाना फीस लेने वाले स्कूलों को फीस बढ़ाने के लिए जिला समिति की अनुमति लेनी होगी। इसी फीस में बस का शुल्क भी शामिल होगा। नई कानून पर राज्यपाल ने मुहर लगाई है। मध्यप्रदेश के 18000 स्कूल इसके दायरे में आएंगे। इस नए नियम से अभिभावकों को बड़ी राहत मिलेगी। फीस नियंत्रण पर अभिभावकों को राहत यह विधेयक निजी स्कूलों की फीस नीति को नियमित करने और पारदर्शिता लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह न सिर्फ अभिभावकों के आर्थिक बोझ को कम करेगा, बल्कि शिक्षा में समानता और सभी बच्चों को शिक्षा का अधिकार सुनिश्चित करेगा। सरकार के इस प्रयास से शिक्षा क्षेत्र में बड़े बदलाव की उम्मीद है, जो छात्रों और अभिभावकों के हित में साबित हो सकते हैं। यह विधेयक निजी स्कूलों की फीस नीति को नियमित करने और पारदर्शिता लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। प्रदेश में 16 हजार स्कूल ऐसे आपको बता दें कि मध्यप्रदेश में करीब 34,652 निजी स्कूल हैं। इनमें से लगभग 16 हजार ऐसे स्कूल हैं, जिनकी किसी भी कक्षा में वार्षिक फीस 25 हजार रुपये या इससे कम है। मध्य प्रदेश निजी विद्यालय अधिनियम-2017 के तहत वर्ष 2020 में नियम बनाए गए हैं। इसके अनुसार सरकार को यह अधिकार दिया गया कि वह निजी स्कूलों की फीस और अन्य विषयों पर निर्णय लेकर फीस विनियमन कर सकेगी। नए प्रवाधानों में क्या नए प्रावधानों के अनुसार 10 प्रतिशत वार्षिक फीस बिना अनुमति के बढ़ाई जा सकती है लेकिन इससे अधिक वृद्धि के लिए जिला समिति की अनुमति लेना जरूरी होगा। स्कूल 25 हजार रुपये तक फीस लेने वाले स्कूलों को शिक्षकों के वेतन सहित अन्य व्यवस्थाओं के लिए वित्तीय प्रबंधन में परेशानी होती है। आपको बता दें कि यदि दस प्रतिशत वृद्धि करते हैं तो अभिभावकों पर अधिक भार नहीं पड़ता है, इसलिए नई उपधारा प्रस्तावित की गई है कि 25 हजार रुपये वार्षिक फीस लेने वाले स्कूल अधिनियम के दायरे से बाहर रहेंगे। साथ ही परिवहन फीस स्कूलों की वार्षिक फीस का भाग होगा। अभी स्कूल इसे वार्षिक फीस से अलग लेते हैं और इसमें वृद्धि भी अधिक होती है। इससे वार्षिक फीस नियंत्रित रहेगी। समिति के अध्यक्ष होंगे शिक्षा मंत्री नए नियमों के अनुसार फीस बढ़ाने पर आपत्ति की अपील सुनने मंत्री की अध्यक्षता में समिति अधिनियम में यह संशोधन भी प्रस्तावित किया गया है कि वार्षिक फीस में 15 प्रतिशत से अधिक वृद्धि के आदेश के विरुद्ध अपील सुनने के लिए राज्य स्तरीय समिति होगी। इसके अध्यक्ष स्कूल शिक्षा मंत्री रहेंगे। समिति को यह अधिकार रहेगा कि वह विभागीय समिति द्वारा किसी स्कूल पर लगाए गए अर्थदंड को घटा या बढ़ा सकेगी। अलग से बस फीस नहीं ले पाएंगे प्राइवेट स्कूल मध्यप्रदेश सरकार ने  मध्य प्रदेश निजी विद्यालय अधिनियम-2024 में संशोधन के लिए प्रस्तुत विधेयक पेश किया। इसमें ये प्रावधान किया गया है कि प्राइवेट स्कूलों के द्वारा बस फीस अलग से वसूली नहीं जा सकेगी और बस फीस को स्कूल की वार्षिक फीस का ही हिस्सा माना जाएगा। मध्य प्रदेश निजी विद्यालय अधिनियम-2024 सदन से पारित होने के बाद राज्यपाल मंगुभाई पटेल के पास अनुमति के लिए भेजा जाएगा और वहां से मंजूरी मिलते ही प्रभावी हो जाएगा।

तप, त्याग, सेवा, संयम, समर्पण जैसे शब्द विद्यासागर जी के व्यक्तित्व के सम्मुख छोटे लगते हैं – मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि संत शिरोमणि आचार्य 108 विद्यासागर जी महामुनिराज की स्मृति में भोपाल में स्मृति स्थल विकसित किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विद्यासागर जी महाराज के प्रथम समाधि स्मृति दिवस पर विधानसभा परिसर में आयोजित गुरु गुणानुवाद सभा में गुरु वंदना कर अतिशय पुण्य अर्जित करने पधारे समर्पित भक्तों का राज्य शासन की ओर से अभिवादन किया। उन्होंने कहा कि आचार्य विद्यासागर जी ने अपने जीवन में सभी आवश्यक नियमों का पालन किया। संत परंपरा का अनुसरण करते हुए उनके प्रकृति के साथ संबंध, जीवन शैली, मानव सेवा और समाज को मार्गदर्शन के माध्यम से वे अपने जीवन काल में ही देवता के रूप में स्वीकारे जाने लगे। व्यक्तिगत जीवन में तप, संयम, त्याग, सेवा, समर्पण जैसे शब्द उनके व्यक्तित्व के सम्मुख छोटे पड़ जाते हैं। कार्यक्रम में सांसद भोपाल आलोक शर्मा, महापौर श्रीमती मालती राय, विधायक भगवानदास सबनानी, मुख्य सचिव अनुराग जैन, विधानसभा के प्रमुख सचिव ए.पी. सिंह, जनप्रतिनिधि राहुल कोठारी तथा जैन समाज के वरिष्ठ पदाधिकारी और बड़ी संख्या में समाजबंधु उपस्थित थे। मुख्यमंत्री का मुकुट और स्मृति चिन्ह भेंट कर किया स्वागत मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का दिगम्बर जैन पंचायत कमेटी ट्रस्ट द्वारा कार्यक्रम में आयोजनकर्ताओं ने मुकुट तथा स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिवादन किया। उनको शॉल भी सम्मानपूर्वक भेंट की गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संत शिरोमणि 108 विद्यासागर जी महाराज जी के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्जवलित किया तथा मुनि108 प्रमाण सागर जी महाराज का पाद प्रक्षालन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आचार्य विद्यासागर जी महाराज के जीवन और कृतित्व पर आधारित 25 पुस्तकों का विमोचन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उन्हें नेमावर में संत-के सानिध्य का सौभाग्य प्राप्त हुआ था। साक्षात देवता के दर्शन के समान प्रतीत होता संत-का अलौकिक व्यक्तित्व जीवन को धन्य करने वाला था। जैन और सनातन दर्शन में आत्मा की भूमिका आवागमन की बताई गई है। यह माना जाता है कि वस्त्र बदलने के समान ही पवित्र आत्मा शरीर बदलती है। इस दृष्टि से यह मानना कि महाराज जी हमारे बीच नहीं है, व्यर्थ है। वास्तविकता यह है कि उन्हें स्मरण करने और मन की आंखों से देखने के क्षणिक प्रयास मात्र से ही आचार्य विद्यासागर जी के आस-पास होने की सहज अनुभूति होती है। उनके व्यवहार, स्वरूप और विचार के प्रभाव के परिणाम स्वरूप सभी व्यक्ति उन्हें अपना मानते थे। प्रदेशवासियों में संत-के प्रति इतने अपनत्व और आदर का भाव था कि यह किसी को अनुभूति ही नहीं होती थी कि वे कर्नाटक से हैं। संत-ने जीवन के कई क्षेत्रों में समाज को दिशा दी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आचार्य विद्यासागर जी ने अपनी इच्छा शक्ति से जीवन के कई क्षेत्रों में समाज को दिशा दी। स्वरोजगार के क्षेत्र में जेल से लेकर समाज में महिलाओं को रोजगार देने का मार्ग प्रशस्त किया। गौ-माता की भी उन्होंने चिंता की तथा गौ-माता के माध्यम से लोगों के जीवन और प्रकृति में बदलाव के लिए गतिविधियों को प्रोत्साहित किया। इसी प्रकार किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में की गई उनकी पहल अनुकरणीय है। आचार्यने अपने विचार, भाव और कर्म से समाज को प्रकृति व परमात्मा के समान पुष्पित-पल्लवित, प्रेरित करने का कार्य किया। भारतीय जनतंत्र की सांस्कृतिक जड़ें, नई शिक्षा नीति का आधार है मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि संत-का विचार था कि शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधा सभी के लिए सुलभ होना चाहिए। वे भाषाओं की समृद्धि पर विशेष ध्यान देते थे, उनका विचार था कि भाषाओं की विविधता की जानकारी से भारत की आंतरिक शक्ति में भी वृद्धि होती है और ज्ञान के लिए भाषाओं की समृद्धि आवश्यक है। गुणवत्ता शिक्षा के लिए प्रदेश में निरंतर प्रयास जारी हैं, इस क्रम में 55 एक्सीलेंस कॉलेज आरंभ किए गए हैं। प्रधानमंत्री मोदी के अनुसार भारतीय जनतंत्र की सांस्कृतिक जड़ें, नई शिक्षा नीति का आधार है। इसी का परिणाम है की नई शिक्षा नीति में जैन दर्शन सहित भारतीय ज्ञान परंपरा के सभी विचारों को शामिल किया गया है। प्रदेश में खुले में मांस की दुकानों को भी बंद किया गया। तेज ध्वनि को नियंत्रित करने के लिए राज्य सरकार संवदेनशील है। प्रदेश में शराब बंदी की दिशा में कदम बढ़ाते हुए 17 धार्मिक नगरों में शराबबंदी लागू की गई। समाज में इस दिशा में सुधार की आवश्यकता है। देश और समाज के प्रमुख आयोजन तिथियों के आधार पर हों मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भारतीय संस्कृति में तिथियों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय काल गणना देश के प्राचीन ज्ञान, कौशल के बल पर स्थानीय ऋतुओं और परिस्थितियों के अनुसार विकसित हुई, जिस पर सभी को गर्व है। देश और समाज के प्रमुख आयोजन तिथियों के आधार पर होना चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि संत शिरोमणि आचार्य 108 विद्यासागर जी महामुनिराज संत नहीं जीवित देवता हैं, उनका स्नेह, प्रेम, दुलार और आशीर्वाद सब पर बना रहे यही कामना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्मृति दिवस पर पधारे मुनि-के विचारों का श्रवण भी किया।  

पीएम मोदी राज्यसभा में चर्चा करते हुए कांग्रेस पर किया हमला, कहा- उनके लिए फैमिली फर्स्ट, हमारे लिए नेशन फर्स्ट

नई दिल्ली पीएम मोदी राज्यसभा में धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा करते हुए कांग्रेस पर हमला बोला। मोदी ने राज्यसभा में धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि राष्ट्रपति ने अपने भाषण में देश की दिशा को लेकर विस्तार से बात की और हम सभी के लिए एक मार्गदर्शन दिया। राष्ट्रपति का अभिभाषण प्रेरणादायक और प्रभावी था। यह सबके लिए भविष्य की दिशा को स्पष्ट करता है। मोदी ने कहा कि इसे हर किसी ने अपनी समझ के हिसाब से अलग-अलग तरीके से समझा। उन्होंने ‘सबका साथ, सबका विकास’ के बारे में भी कहा और इसे हमारा दायित्व बताया। कांग्रेस का मॉडल फैमिली फर्स्ट- पीएम मोदी कांग्रेस पर टिप्पणी करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उनसे इस बारे में कोई उम्मीद करना एक बड़ी गलती होगी, क्योंकि उनकी सोच इस दिशा में नहीं जाती। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अब एक परिवार के लिए समर्पित हो गई है, और उनके लिए ये संभव नहीं है। मोदी ने यह भी बताया कि कांग्रेस का मॉडल “फैमिली फर्स्ट” है। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि देश की जनता ने हमें तीसरी बार लगातार सेवा करने का मौका दिया है, जो यह दिखाता है कि लोगों ने हमारे विकास मॉडल को समझा और उसे समर्थन दिया। उन्होंने अपने मॉडल को एक शब्द में “नेशन फर्स्ट” बताया और कहा कि इसी भावना के साथ हमारी सरकार ने नीतियों और कार्यों को लागू किया है। समाज में जाति का जहर फैलाने की कोशिश हो रही- पीएम मोदी राज्यसभा में बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा, “आज समाज में जाति का जहर फैलाने की कोशिश की जा रही है… कई सालों से सभी दलों के ओबीसी सांसद ओबीसी पैनल को संवैधानिक दर्जा देने की मांग कर रहे थे। लेकिन उनकी मांग को खारिज कर दिया गया, क्योंकि यह उनकी (कांग्रेस) राजनीति के अनुकूल नहीं था। लेकिन हमने इस पैनल को संवैधानिक दर्जा दिया।” कांग्रेस ने बाबा साहेब को भारत रत्न के लायक नहीं समझा राज्यसभा में बोलते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “यह सर्वविदित है कि कांग्रेस के मन में डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर के प्रति कितना गुस्सा और नफरत थी। उन्होंने कभी भी बाबा साहेब को भारत रत्न के लायक नहीं समझा। लेकिन आज मजबूरी में उन्हें ‘जय भीम’ का नारा लगाना पड़ रहा है।”

बागेश्वर धाम आ सकते हैं पीएम मोदी, धीरेंद्र शास्त्री ने भेजा निमंत्रण; एक साथ करेंगे दो बड़े काम

 छतरपुर  मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में 24 फरवरी को होने जा रहे ग्लोबल इन्वेस्टर समिट में शामिल होने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 23 फरवरी को छतरपुर के बागेश्वर धाम जा सकते हैं. पीएम मोदी बागेश्वर धाम ट्रस्ट द्वारा बनाए जा रहे बड़े कैंसर हॉस्पिटल की आधारशिला रखेंगे. कार्यक्रम के बाद प्रधानमंत्री मोदी भोपाल आएंगे और मध्य प्रदेश राज भवन में रात्रि विश्राम करेंगे. बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र शास्त्री के मुताबिक, ”कैंसर हॉस्पिटल के भूमि पूजन का निमंत्रण प्रधानमंत्री मोदी को दिया गया है.” हालांकि प्रधानमंत्री कार्यालय से अभी तक पीएम मोदी के छतरपुर जाने की अधिकृत मंजूरी नहीं आई है. राज्य सरकार तैयारी में जुटी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मध्य प्रदेश प्रवास को लेकर राज्य सरकार तैयारी में जुटी हुई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राजधानी भोपाल में होने जा रही ग्लोबल इन्वेस्टर सबमिट के उद्घाटन सत्र में 24 फरवरी को शामिल होंगे. माना जा रहा है कि इसके पहले प्रधानमंत्री मोदी छतरपुर स्थित बागेश्वर धाम जाएंगे और इसके बाद भोपाल आएंगे. 24 फरवरी को ग्लोबल इन्वेस्टर सम्मिट में शामिल होंगे. अडानी, गोदरेज सहित बड़े बिजनेसमैन का आना तय इन्वेस्टर समिट में देश के बड़े उद्योग समूह अडानी समूह, गोदरेज, जेके सीमेंट के राघव पाठ सिंघानिया, आईटीसी लिमिटेड के संजीव पुरी कुमार, मंगलम बिड़ला सहित 100 से ज्यादा कंपनियों के अध्यक्ष और मैनेजिंग डायरेक्टर शामिल होंगे. इसके अलावा कनाडा, जर्मनी, जापान, स्विट्जरलैंड, नीदरलैंड, थाईलैंड, इटली, यूके सहित देश के हाई कमिश्नर एम्बेसडर ने भी इन्वेस्टर सबमिट में शामिल होने के लिए अपनी सहमति दी है. इन्वेस्टर समिट में देश और विदेश के 10 हजार निवेशक शामिल होने के लिए अपना रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं. 3 लाख करोड़ के प्रस्ताव प्राप्त हुए वहीं, इन्वेस्टर समिट में मध्य प्रदेश में निवेश की बड़ी राह खुलने की उम्मीद जताई जा रही है. मध्य प्रदेश सरकार को देश और विदेश के निवेशकों से अभी तक 3 लाख करोड़ से ज्यादा के प्रस्ताव मिल चुके हैं. यह प्रस्ताव मध्य प्रदेश के उद्योग विभाग द्वारा शुरू किए गए इन्वेस्ट पोर्टल पर प्राप्त हुए हैं. निवेशकों ने मध्य प्रदेश में फूड प्रोसेसिंग, सोलर सेक्टर, खनिज टेक्सटाइल सहित कई क्षेत्रों में निवेश को लेकर अपनी रुचि जताई है. वहीं, इसके पहले मध्य प्रदेश सरकार द्वारा प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में रीजनल इन्वेस्टर समिट भी की थी. इसमें भी मध्य प्रदेश सरकार को चार लाख करोड़ से ज्यादा के निवेश के प्रस्ताव प्राप्त हुए थे. राज्य सरकार सरल बना रही नीति उधर, राज्य सरकार प्रदेश में निवेश को बढ़ाने के लिए लगातार नीतियों को सरल बना रही है. इसके लिए सरकार नीतियों में लगातार बदलाव कर रही है. राज्य सरकार द्वारा प्रदेश में अलग-अलग क्षेत्रों में की गई रीजनल इंवेस्टर्स समिट में उद्योगपतियों से चर्चा के दौरान निवेश की राह में रोड़ा बनने वाली नीतियों को लेकर कई सुझाव मिले थे. इसके आधार पर सरकार नीतियों में लगातार बदलाव कर रही है और ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट के पहले कई नीतियों में बदलाव करने जा रही है. सरकार को उम्मीद है कि प्रदेश में बड़ा निवेश आने से प्रदेश के युवाओं को रोजगार के मामले में बड़े रास्ते खुलेंगे. वहीं आर्थिक गतिविधियां भी बढ़ेंगी. Global Investor Summit, 24 और 25 फरवरी ● 250 एकड़ क्षेत्र में मानव संग्रहालय में तैयारियां जोरों पर ● 30 से अधिक देशों के निवेशक जिनमें जापान, जर्मनी, अमेरिका और इंग्लैंड शामिल ● 50 से अधिक देश के बड़े उद्योगपतियों को भेजा गया आमंत्रण पत्र ● 23 की रात को भोपाल पहुंचेंगे पीमए मोदी राजभवन में करेंगे रात्रि विश्राम ● 23 को बागेश्वर धाम(Bageshwar Dham) भी जा सकते हैं पीएम मोदी ● 24 की सुबह मानव संग्रहालय में आयोजित कार्यक्रम में होंगे शामिल ● 25 जेट विमानों की पार्किंग की जगह बनाई गई एयरपोर्ट पर ● 250 एकड़ में डोम, अस्थाई कक्ष, कैंप के साथ लाइव एग्जीबिशन

मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में लड़ाकू विमान दुर्घटनाग्रस्त, विमान ने घरों को बचाते हुए खाली स्थान पर क्रैश लैंडिंग की

शिवपुरी मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के करैरा तहसील के नरवर क्षेत्र में भारतीय वायुसेना का एक लड़ाकू विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। घटना के अनुसार, विमान ने घरों को बचाते हुए एक खाली स्थान पर क्रैश लैंडिंग की। हादसे में पायलट सुरक्षित हैं और किसी भी नागरिक को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। दुर्घटना के कारणों की जांच के लिए वायुसेना के अधिकारी मौके पर पहुंच गए हैं। बता दें कि  देश के विभिन्न हिस्सों में वायुसेना के विमानों की दुर्घटनाओं की घटनाएं लगातार सामने आई हैं। सितंबर 2024 में, राजस्थान के बाड़मेर जिले में एक मिग-29 लड़ाकू विमान नियमित प्रशिक्षण मिशन के दौरान तकनीकी खराबी के कारण दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, जिसमें पायलट सुरक्षित रूप से बाहर निकलने में सफल रहे थे।वायुसेना द्वारा इन घटनाओं की जांच की जा रही है ताकि भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं को रोका जा सके और विमानों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। रक्षा अधिकारी की ओर से बताया गया, एक दो सीटों वाला मिराज 2000 लड़ाकू विमान आज मध्य प्रदेश के शिवपुरी के पास उस समय दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जब वह नियमित प्रशिक्षण उड़ान पर था। दुर्घटना के कारण का पता लगाने के लिए कोर्ट ऑफ इंक्वायरी का आदेश दिया जा रहा है। अधिक जानकारी की प्रतीक्षा है।

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