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इंदौर में जनवरी ने या फरवरी महीने से मेट्रो रेल दौड़ना शुरू हो जाएगी

इंदौर इंदौर में मेट्रो रेल परियोजना के शुरू होने में ज्यादा समय नहीं लगेगा। मेट्रो चलाने के लिए अब मेट्रो रेल सुरक्षा आयुक्त (CMRS) की हरी झंडी का इंतजार है और सब कुछ ठीक रहा, तो शहर में इस महीने या अगले महीने से मेट्रो रेल दौड़ना शुरू कर सकती है। मध्यप्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एमपीएमआरसीएल) ने तैयारी पूरी कर ली है। मेट्रो के अधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया कि एमपीएमआरसीएल द्वारा सीएमआरएस को जरूरी दस्तावेज जमा किए जाने का काम अंतिम दौर में है। उन्होंने इसके बाद सीएमआरएस का दल मेट्रो रेल के डिपो और स्टेशनों के निरीक्षण की तारीख तय करके सुरक्षा इंतजामों का जायजा लेगा। उन्होंने बताया कि निरीक्षण के बाद सीएमआरएस की हरी झंडी मिलने की स्थिति में शहर में मेट्रो रेल का वाणिज्यिक परिचालन इस महीने या फरवरी से शुरू हो सकता है। मेट्रो अधिकारी ने बताया कि शुरुआत में शहर के गांधी नगर स्टेशन से सुपर कॉरिडोर के स्टेशन क्रमांक-तीन के बीच 5.90 किलोमीटर के सर्वोच्च प्राथमिकता वाले गलियारे पर मेट्रो रेल चलाई जाएगी। उन्होंने बताया कि इस गलियारे पर मेट्रो रेल प्रायोगिक परीक्षण (ट्रायल रन) सितंबर 2023 में किया गया था। बहरहाल, जानकारों का कहना है कि इस मार्ग पर छितराई आबादी के कारण मेट्रो रेल को शुरुआत में यात्रियों की कमी का सामना करना पड़ सकता है। एमपीएमआरसीएल अधिकारी ने कहा कि शहर में एक बार मेट्रो रेल शुरू हो जाने और इसके मार्ग की लम्बाई बढ़ने के बाद यात्रियों की कोई कमी नहीं होगी। इस बारे में जानकारी देते हुए एक मेट्रो अधिकारी ने बताया कि शहर में मेट्रो रेल के स्टेशन इस तरह डिजाइन किए गए हैं कि इनके जरिये छह डिब्बों की रेल चलाई जा सकती है। उन्होंने हालांकि बताया कि शुरुआत में हम तीन डिब्बों की रेल चलाएंगे। यात्रियों की तादाद बढ़ने पर इसमें तीन और डिब्बे जोड़े जा सकते हैं। अधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया कि मेट्रो रेल के एक डिब्बे में करीब 300 यात्री सफर कर सकते हैं जिनमें सीट पर बैठने वाले 50 लोग शामिल हैं। उन्होंने बताया कि इंदौर में 7,500.8 करोड़ रुपये की कुल लागत वाली मेट्रो रेल परियोजना के पहले चरण की नींव 14 सितंबर 2019 को रखी गई थी। इसके तहत शहर में गोल आकार वाला करीब 31.50 किलोमीटर लम्बा मेट्रो रेल गलियारा बनाया जाना है।

मोहन सरकार का पहला जनता दरबार 6 जनवरी को आयोजित किया जाएगा, हर समस्या की होगी सुनवाई

भोपाल मोहन सरकार का मध्य प्रदेश में नए साल पर एक नया प्रयोग देखने को मिलने वाला है. जहां मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भोपाल के सीएम हाउस में ‘जनता दरबार’ की शुरुआत करेंगे. हालांकि मध्य प्रदेश की राजनीति में यह प्रयोग राजनीति में नया नहीं है, क्योंकि इससे पहले भी प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री जनता दरबार लगा चुके हैं. जबकि दूसरे राज्यों के कई सीएम अभी भी जनता दरबार लगाते हैं, जिनमें उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ का नाम भी शामिल है. सीएम मोहन यादव जनता दरबार के जरिए आम लोगों की समस्याओं को सुनेंगे और उनका समाधान करेंगे. बताया जा रहा है कि भोपाल में पहला जनता दरबार 6 जनवरी को लग सकता है, जिसके लिए प्रशासनिक स्तर पर भी तैयारियां की जा रही हैं. हालांकि सीएम के इस प्रयोग की चर्चा सियासी गलियारों में शुरू हो गई है. सीएम मोहन सुनेंगे जनता की समस्याएं सूत्रों के हिसाब से सीएम मोहन यादव का पहला जनता दरबार 6 जनवरी को हो सकता है, जो सुबह 10 से 12 बजे तक चलेगा. जहां सीएम हाउस पर पहुंचे लोगों से मुख्यमंत्री मिलेंगे और उनकी समस्याओं का समाधान अधिकारियों के जरिए करेंगे. बताया जा रहा है कि इसके लिए सीएम के पास पहुंचने वाली शिकायतों की स्क्रूटनी होगी और उन्हीं के हिसाब से समस्याएं सुलझाई जाएगी. जनता दरबार में ट्रांसफर और पोस्टिंग जैसे मुद्दों की कोई सुनवाई नहीं होगी, यहां केवल बीमारी, जरूरतमंदों के आवेदनों पर ही सुनवाई होगी. जबकि ग्रामीण लोगों की समस्याओं को भी सुना जाएगा, माना जा रहा है कि एक बार के जनता दरबार में 500 से भी ज्यादा लोग आ सकते हैं. ऐसे में इसी हिसाब से व्यवस्थाएं की जाएगी. मध्यप्रदेश में मौजूदा समय में साप्ताहिक जनसुनवाई होती है, जहां जिला स्तर पर सभी जिला कलेक्टर और पुलिस कप्तान प्रत्येक मंगलवार को जनता की समस्याओं को सुनते हैं. इसके अलावा, सीधे जनता की समस्याओं को निपटाने के लिए सीएम हेल्पलाइन पोर्टल भी है. इस पर लोग अपनी शिकायतें और समस्याएं दर्ज करवाते हैं और उसके निराकरण के बाद पोर्टल पर ही शिकायत बंद भी करवा सकते हैं. हालांकि, सीएम हेल्पलाइन को लेकर बीच-बीच में शिकायतें आती रहती हैं. माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री अब खुद जनता से मिलकर यह देखना चाहते हैं कि सरकार की योजनाएं जनता तक पहुंच रही हैं या नहीं? जनता दरबार का आयोजन: कब और कैसे?     मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का पहला जनता दरबार 6 जनवरी को सीएम हाउस पर आयोजित होगा। यह दरबार सुबह 10 बजे से 12 बजे तक चलेगा, जिसमें लोग अपनी समस्याओं को मुख्यमंत्री के सामने रख सकेंगे। इस कार्यक्रम में पहले से आई शिकायतों को प्राथमिकता दी जाएगी, लेकिन ट्रांसफर-पोस्टिंग के आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे। इसमें मुख्य रूप से बीमार और जरूरतमंदों के आवेदन लिए जाएंगे। अनुमान है कि 500 से 600 लोग इस जनता दरबार में शामिल होंगे। सीएम हेल्पलाइन और अन्य समस्याओं के समाधान का तरीका मुख्यमंत्री ने इस पहल को लेकर दो मुख्य कारण बताए हैं। पहला, कि कई प्लेटफॉर्म्स होने के बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा था, जिससे लोग अफसरों और दफ्तरों के चक्कर काटते रहते थे। दूसरा, सीएम हेल्पलाइन जैसी योजनाओं में अक्सर शिकायतों को दबा दिया जाता था, जिससे समस्याओं का समाधान नहीं होता। पिछले नेताओं के जनता दरबार का इतिहास मध्यप्रदेश में जनता दरबार की परंपरा पहले भी रही है। उमा भारती और दिग्विजय सिंह जैसे नेताओं ने भी सीएम हाउस पर जनता दरबार लगाए थे। दिग्विजय सिंह के समय, मुख्यमंत्री हाउस में लोग सुबह 5 बजे से ही अपनी शिकायतें लेकर पहुंच जाते थे। उमा भारती के कार्यकाल में भी यह दरबार बहुत लोकप्रिय हुआ, हालांकि भीड़ को नियंत्रित करना एक बड़ी चुनौती साबित हुआ था। शिवराज सिंह चौहान का तरीका और मोदी की सीख शिवराज सिंह चौहान ने भी अपनी सरकार के दौरान जनसुनवाई की व्यवस्था लागू की थी। उन्होंने जिला और प्रदेश स्तर पर जनसुनवाई की शुरुआत की और लोकसेवा गारंटी अधिनियम को लागू किया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसी तर्ज पर एक नया कदम उठाया है, ताकि जनता की समस्याओं का समाधान सीधे सीएम हाउस में किया जा सके। योगी आदित्यनाथ से प्रेरणा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2017 में जनता दरबार की शुरुआत की थी, जिसे लखनऊ और गोरखपुर में आयोजित किया जाता है। वहां पर भी मुख्यमंत्री खुद लोगों से मिलकर उनकी समस्याओं का समाधान करते हैं। इस तर्ज पर डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश में भी जनता दरबार की शुरुआत की है।

छत्तीसगढ़ में इस बार प्रदेश अध्यक्ष ओबीसी वर्ग से हो सकता, अध्यक्ष किरण सिंहदेव को कैबिनेट में शामिल किए जाने की अटकलें

रायपुर  नए साल 2025 में बीजेपी को नया प्रदेश अध्यक्ष मिलेगा। बीजेपी में संगठन चुनाव का दौर चल रहा है। माना जा रहा है कि जनवरी महीने में जिला अध्यक्षों की नियुक्ति की लिस्ट जारी हो जाएगी। उसके बाद प्रदेश अध्यक्ष का नाम घोषित किया जाएगा। छत्तीसगढ़ में इस बार प्रदेश अध्यक्ष ओबीसी वर्ग से हो सकता है। बीजेपी में ऐसी चर्चा चल रही है। हालांकि इस संबंध में किसी ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। वहीं, मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंहदेव को कैबिनेट में शामिल किए जाने की अटकलें लगाई जा रही हैं। ओबीसी कार्ड खेलने की तैयारी में बीजेपी छत्तीसगढ़ बीजेपी के नेताओं और पदाधिकारियों में यह चर्ता है कि नया प्रदेश अध्यक्ष ओबीसी वर्ग से हो सकता है। क्योंकि प्रदेश के मुख्यमंत्री आदिवासी वर्ग से हैं और मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंहदेव सामान्य वर्ग से आते हैं। विष्णुदेव साय की कैबिनेट में सभी वर्ग के नेताओं को शामिल किया गया है। बीजेपी अब राज्य की सियासत में ओबीसी कार्ड खेलने की तैयारी कर रही है। नए चेहरे को मिल सकती है जगह माना जा रहा है कि अब संगठन किसी ऐसे चेहरे को आगे करेगा जिसकी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं के बीच अच्छी पकड़ हो। चर्चा है कि इस बार प्रदेश अध्यक्ष रायपुर जिले से हो सकता है। अगर किरण सिंहदेव को कैबिनेट में शामिल किया जाता है तो उन नेताओं को मौका मिल सकता है जो कैबिनेट में शामिल होने की दौड़ में हैं। किस वर्ग से कौन से नेता हैं प्रबल दावेदार छत्तीसगढ़ बीजेपी सूत्रों के अनुसार, इस बार आदिवासी या फिर ओबीसी वर्ग के नेता को प्राथमिकता दी जाएगी। ओबीसी वर्ग का अध्यक्ष बनाकर बीजेपी भूपेश बघेल के सामने एक बड़ा चेहरा खड़ा कर सकती है। ऐसे में ओबीसी वर्ग से धरमलाल कौशिक, आदिवासी वर्ग से विक्रम उसेंडी औऱ सामान्य वर्ग से शिवरतन शर्मा का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है। कैबिनेट विस्तार की अटकलें छत्तीसगढ़ में कैबिनेट विस्तार की भी अटकलें लगाई जा रही हैं। विष्णुदेव साय की कैबिनेट में दो विधायकों को मंत्री बनाया जा सकता है। माना जा रहा है कि कैबिनेट विस्तार और प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति के बीच बीजेपी ऐसे नेता को आगे बढ़ा सकती है जिसके नाम से किसी भी गुट को दिक्कत नहीं हो। दिल्ली में हुई थी बैठक हाल ही में सीएम विष्णुदेव साय दिल्ली के दौरे पर थे। सीएम विष्णुदेव साय ने दिल्ली दौरे में संगठन चुनाव को लेकर आयोजित बैठक में हिस्सा लिया था। इस बैठक नें प्रदेश अध्यक्ष, प्रदेश प्रभारी समेत पार्टी के सीनियर नेता मौजूद थे। कहा जा रहा है कि इसी बैठक में प्रदेश अध्यक्ष और कैबिनेट विस्तार को लेकर फॉर्म्युला बनाया गया है।

मुख्यमंत्री युवा अन्नदूत योजना के हितग्राहियों को बड़ी सौगात, 14 लाख का बीमा कराएगी सरकार

भोपाल  युवा अन्नदूत योजना के अनुबंधित परिवहनकर्ता हितग्राहियों को 3064 रुपये के वार्षिक प्रीमियम पर 14 लाख रुपये का बीमा कराया जाएगा। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया है कि इस योजना के हितग्राहियों की असामयिक मृत्यु पर कोई सहायता नहीं प्राप्त होने से परिवार को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता था। मंत्री राजपूत ने बताया कि हितग्राहियों के बीमा के लिए तीन बीमा योजनाओं का क्रियान्वयन किया जाएगा। इनमें से पहली सामूहिक बीमा योजना का क्रियान्वयन फरवरी-2025 से होगा। इसका वार्षिक प्रीमियम 2608 रुपये और बीमित राशि 10 लाख रुपये है। वहीं, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना का क्रियान्वयन जून-2025 से होगा। इसका वार्षिक प्रीमियम 436 रुपये और बीमित राशि दो लाख रुपये है। प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना का क्रियान्वयन जून-2025 से होगा। इसका वार्षिक प्रीमियम 20 रुपये और बीमित राशि दो लाख रुपये है। कब मिलेगा बीमा का लाभ योजना में पालिसी जारी होने की दिनांक से हितग्राही की दुर्घटना में मृत्यु होने पर पूरी बीमा राशि मिलेगी। पालिसी जारी होने की दिनांक से 30 दिन के बाद हितग्राही की अन्य कारण से (दुर्घटना को छोड़कर) मृत्यु होने पर पूरी बीमा राशि दी जाएगी। अन्य कारणों से 30 दिन में मृत्यु होने पर हितग्राही द्वारा देय प्रीमियम राशि का 80 प्रतिशत भुगतान किया जाएगा। बीमा पालिसी जारी होने के एक वर्ष की अवधि में आत्महत्या करने पर जीवन बीमा की राशि देय नहीं होगी, मात्र देय प्रीमियम राशि का 80 प्रतिशत भुगतान किया जाएगा। हितग्राही की उम्र 18 से 60 वर्ष के बीच होना चाहिए। जीवन बीमा एक वर्ष के लिए होगा, जिसका प्रतिवर्ष नवीनीकरण कराना होगा। हितग्राही की मृत्यु पर बीमा राशि परिवार को दी जाएगी। इन अधिकारियों को मिला उच्च पद का प्रभार मंत्री गोविंद सिंह राजपूत की पहल पर खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग में कार्यरत अधिकारियों को उच्च पद का प्रभार दिया गया है। विभाग के 65 कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारियों को वर्तमान पद स्थापना वाले जिले में ही उच्च पद का प्रभार देकर सहायक आपूर्ति अधिकारी का प्रभार सौंपा गया है। वहीं, नौ नापतौल निरीक्षकों को प्रभारी सहायक नियंत्रक नापतौल, एक सहायक नियंत्रक नापतौल को प्रभारी उप नियंत्रक नापतौल, एक उप नियंत्रक नापतौल को प्रभारी संयुक्त नियंत्रक नापतौल, नौ सहायक आपूर्ति अधिकारी प्रभारी को प्रभारी जिला आपूर्ति अधिकारी और आठ जिला आपूर्ति अधिकारी को प्रभारी जिला आपूर्ति नियंत्रक बनाया गया है।

सरकारी नौकरी में तलाश में लगे युवाओं के लिए खुशखबरी, आबकारी आरक्षक पदो की भर्ती परीक्षा के लिए नोटिफिकेशन जारी, आवेदन 15 फरवरी से

भोपाल सरकारी नौकरी में तलाश में लगे युवाओं के लिए खुशखबरी है। मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन बोर्ड (एमपीईएसबी) की ओर से आबकारी विभाग, मध्यप्रदेश के अन्तर्गत आबकारी आरक्षक पदो की सीधी एवं बैकलॉग भर्ती परीक्षा-2024 के लिए नोटिफिकेशन जारी कर भर्ती का एलान किया गया है। अधिसूचना के मुताबिक इस भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 15 फरवरी 2025 से शुरू कर दी जाएगी जो निर्धारित अंतिम तिथि 1 मार्च 2025 तक जारी रहेगी। आवेदन शुरू होने के बाद अभ्यर्थी ऑनलाइन माध्यम से भर्ती में शामिल होने के लिए फॉर्म भर सकेंगे। भर्ती से जुड़ी महत्वपूर्ण तिथियां कार्यक्रम महत्वपूर्ण तिथियां एप्लीकेशन शुरू होने की तिथि 15 फरवरी 2025 आवेदन पत्र भरने की लास्ट डेट 1 मार्च 2025 एप्लीकेशन फॉर्म में संशोधन करने की तिथि 15 फरवरी से 8 मार्च 2025 परीक्षा की तिथि 8 जुलाई 2025 कौन ले सकेगा भर्ती में भाग एमपी एक्साइज कांस्टेबल भर्ती में भाग लेने के लिए अभ्यर्थी का किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 12वीं कक्षा उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। इसके साथ ही निर्धारित कटऑफ डेट से अभ्यर्थी की न्यूनतम आयु 18 वर्ष से कम और अधिकतम आयु 33 साल से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। आरक्षित वर्ग को ऊपरी उम्र में नियमानुसार छूट दी जाएगी। इसके साथ ही उम्मीदवारों को शारीरिक मापदंड को भी पूरा करना होगा। ध्यान दें कि यह जानकारी पिछली भर्ती के अनुसार है, विस्तृत नोटिफिकेशन जारी होते ही नई जानकारी अपडेट कर दी जाएगी। परीक्षा के बारे में डिटेल एमपीईएसबी की ओर से जारी किये गए विज्ञापन के मुताबिक इस भर्ती के लिए परीक्षा की संभावित तिथि 8 जुलाई 2025 तय की गई है। परीक्षा का आयोजन दो शिफ्ट में करवाया जायेगा। पहली शिफ्ट का एग्जाम सुबह 9 से 11 बजे तक संपन्न होगा वहीं दूसरी शिफ्ट की परीक्षा का आयोजन दोपहर 2:30 से 4:40 तक करवाया जायेगा। पहली शिफ्ट के लिए उम्मीदवारों को सुबह 7 से 8 के बीच परीक्षा केंद्र पर रिपोर्टिंग करनी होगी वहीं दूसरी शिफ्ट के परीक्षार्थी दोपहर 1 से लेकर 2 बजे तक रिपोर्टिंग कर सकेंगे। आवेदन शुल्क इस भर्ती में आवेदन के साथ अनारक्षित अभ्यर्थियों के लिए 500 रुपये तय किया गया है। मध्य प्रदेश के मूल निवासी जो एससी/ एसटी/ ओबीसी/ दिव्यांगजन/ ईडब्ल्यूएस वर्ग से आते हैं उनको शुल्क के रूप में 250 रुपये का भुगतान करना होगा। कियोस्क के माध्यम से आवेदन करने पर आपको 60 रुपये पोर्टल शुल्क देना होगा वहीं रजिस्टर्ड सिटीजन यूजर के माध्यम से आवेदन करने पर पोर्टल शुल्क 20 रुपये देना होगा।

राजाभोज एयरपोर्ट पर पहली बार दिसंबर में 1,50,976 यात्रियों का आवागमन हुआ, 1,373 उड़ानों का मूवमेंट दर्ज किया गया

 भोपाल  मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल का राजा भोज विमानतल लोगों को काफी पसंद आ रहा है. यहां सेआने-जाने वाले यात्रियों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है. फ्लाइटों की संख्या में वृद्धि और विमानतल पर मिलने वाली सुविधाओं के चलते भोपाल एयरपोर्ट यात्रियों को रास आने लगा है.इसकी वजह से लगातार लाखों की संख्या में यात्री अब भोपाल से देश के कोने-कोने में यात्रा कर रहे हैं. संत हिरदाराम नगर स्थित राजाभोज एयरपोर्ट ने दिसंबर 2024 में रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन किया है।बता दें कि पहली बार इस महीने में 1,50,976 यात्रियों का आवागमन हुआ। इसके साथ ही 1,373 उड़ानों का मूवमेंट दर्ज किया गया, जो पिछले साल की तुलना में 20 प्रतिशत अधिक है। 2023 के दिसंबर में यह आंकड़ा 1,31,259 यात्रियों और 1,143 उड़ानों का था। इस तरह यात्रियों की संख्या में 15 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। यात्रियों की संख्या में इजाफा विंटर शेड्यूल में उड़ानों की संख्या बढ़ने से यात्रियों की संख्या में इजाफा हुआ है। एयरपोर्ट अथॉरिटी के अनुसार, पूरे साल 2024 में 14,711 उड़ानों का मूवमेंट हुआ, जो 2023 के 13,481 उड़ानों से 9 प्रतिशत अधिक है। साल 2023 में कुल 13,20,205 यात्रियों ने यात्रा की थी, जबकि 2024 में यह संख्या बढ़कर 15,26,629 तक पहुंच गई, जो 16 प्रतिशत की बढ़त है। बात करें नवंबर 2024 की तो इस महीने में 1,37,157 यात्रियों का आवागमन हुआ और 1,224 उड़ानों का मूवमेंट हुआ। आर्थिक रुप से मिली मजबूती इन आंकड़ों से यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि यात्रियों की संख्या में काफी अधिक बढ़ोतरी हुई है। इससे पिछले पूराने रिकॉर्ड टूट चुके हैं। यात्रियों की संख्या में बढ़ोतरी होने पर राज्य सरकार को आर्थिक रुप से भी मजबूती मिली है।

नए साल में इंदौर वासियों को मेट्रो ट्रेन की सुविधा मिलने वाली है. उम्मीद है कि अगले महीने से मेट्रो पटरी पर दौड़ने लगेगी

इंदौर नए साल में इंदौर वासियों को मेट्रो ट्रेन की सुविधा मिलने वाली है. उम्मीद है कि अगले महीने से मेट्रो पटरी पर दौड़ने लगेगी. मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (MPMRCL) की तैयारी अंतिम चरण में है. बस मेट्रो रेल सुरक्षा आयुक्त  (CMRS) की हरी झंडी का इंतजार है. अधिकारियों का कहना है कि हरी झंडी मिलने के बाद मेट्रो ट्रेन का संचालन शुरू हो जाएगा. दावा किया जा रहा है कि जनवरी या फरवरी माह में मेट्रो ट्रेन दौड़ने लगेगी. बुधवार को अधिकारियों ने बताया कि शुरुआत में गांधीनगर स्टेशन से सुपर कॉरिडोर के स्टेशन क्रमांक 3 के बीच लगभग 6 किलोमीटर के सर्वोच्च प्राथमिकता वाले गलियारे पर मेट्रो ट्रेन चलाई जाएगी. उन्होंने बताया कि इस कॉरिडोर पर मेट्रो रेल प्रायोगिक परीक्षण (ट्रायल रन) सितंबर 2023 में किया गया था. अधिकारियों ने आगे बताया कि मेट्रो का संचालन शुरू होने के बाद मार्ग की लंबाई भी बढ़ाई जाएगी. कलेक्टर आशीष सिंह के मुताबिक मेट्रो शुरू होने से सड़क यातायात का दबाव कम होगा. इसके अलावा लोगों को कम समय में सफर की सुविधा भी मिलेगी. शुरुआत में चलाई जाएगी तीन डिब्बों की मेट्रो ट्रेन सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक शुरुआत में तीन डिब्बों की मेट्रो ट्रेन चलाई जाएगी. यात्रियों की संख्या बढ़ने पर मेट्रो में तीन अतिरिक्त डिब्बे जोड़ दिए जाएंगे. डिब्बों को बढ़ाने का फैसला यात्रियों की तादाद पर निर्भर होगा. बताया जा रहा है कि मेट्रो ट्रेन के एक डिब्बे में 300 यात्री सफर करेंगे और सीट पर बैठने वाले 50 यात्री शामिल हैं. इंदौर में 7500 करोड़ की लागत वाली मेट्रो ट्रेन परियोजना के पहले चरण नींव 14 सितंबर 2024 को रखी गई थी.  शहर में गोल आकार वाला करीब 31.50 किलोमीटर लंबा मेट्रो ट्रेन का गलियारा का बनाया जाना है. मेट्रो ट्रेन के चलने की खबर से इंदौर वासी उत्साहित हैं.

पर्यटन स्थलों पर लोगों की रही भीड़, हुए दो हादसे , कही पलटी नाव, तो कही पलटी बोलेरो

रायगढ़ नए साल के पहले दिन जिले के पर्यटन स्थल पर लोगों की भीड़ रही. वहीं आज दो अलग-अलग हादसे हुए, जिसमें लोग बाल-बाल बचे. टीपाखोल डेम में नाव पलटी है. नाव में सवार तीन लोग बाल-बाल बचे हैं. लाइफ जैकेट के कारण गहरे पानी में डूबने से पहले गोताखोरों ने बचा लिया. वहीं दूसरी घटना भी डेम के पास हुई है जहां पर्यटकों से भरा बोलेरो पलटने से अफरा-तफरी मच गई. बता दें कि टीपाखोल डेम शहर से सात किलोमीटर दूर है. नए साल के कारण यहां भारी भीड़ रही. ग्राम पंचायत टीपाखोल द्वारा डेम में मोटर वोट और नाव चलाई जाती है. डेम के पास ही नया साल मनाने गए पर्यटकों से भरा बोलेरो वाहन पलट गया. इस हादसे में भी लोग बाल-बाल बचे.

सरकार ने आज से “वन नेशन, वन सब्‍सक्रिप्‍शन” योजना शुरू की, डिजिटल ज्ञान संसाधनों तक निर्बाध पहुंच

नईदिल्ली सरकार ने आज से वन नेशन वन ससब्‍सक्रिप्‍शन-ओएनओएस योजना की शुरुआत की। इस योजना का उद्देश्‍य विद्यार्थियों को सिंगल सब्‍सक्रिप्‍शन प्‍लेटफार्म के तहत शोधपत्रों, जरनलों और शैक्षिक सामग्री सहित व्‍यापक डिजिटल ज्ञान संसाधनों तक निर्बाध पहुंच उपलब्‍ध कराना है। इस योजना से अलग-अलग जगह सब्‍सक्रिप्‍शन लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी और ज्ञान सबको सुलभ होगा। विश्‍वविद्यालयों और आईआईटी सहित सरकारी सहायता प्राप्‍त उच्‍च शिक्षा संस्‍थानों के एक करोड 80 लाख विद्यार्थियों को इस पहल के अंग के रूप में दुनिया भर के शीर्ष जरनल में प्रकाशित शोध पत्रों को देखने की सुविधा मिलेगी। प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रोफेसर अजय कुमार सूद ने बताया कि योजना तीन चरणों में लागू होगी। फेज-वन में हमने सारी रिसर्च सैंट्रल और स्‍टेट गवर्मेंट की जितनी रिसर्च इन्‍स्‍टीट्यूट, यूनिवर्सिटीज़, कॉलेजिस सबको मिलाया। उसको एक्‍सपीरियंस करके हम फेज-टू में हमारी जो प्राइवेट यूनिवर्सिटीज़ और कॉलेजिस हैं उनको हम देखेंगे कि कैसे मिलाया जाए फेज टू में और फेज-थ्री जब होगा कि जब आपके कोई भी नागरिक देश का अगर वो नॉलेज को एक्सिस करना चाहता है कर पाए तो वो फेज-थ्री होगा। तो पहले तीन साल हमने फेज-वन किया है उसके बाद फेज-टू और उसके बाद फेज-थ्री। केन्‍द्रीय मंत्रिमण्‍डल ने पिछले वर्ष 25 नवम्‍बर को वन नेशन, वन सब्‍सक्रिप्‍शन योजना को स्‍वीकृति दी थी। मंत्रिमंडल के फैसले के दौरान केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्‍णव ने योजना के बारे में विस्‍तार से बताया था। उन्‍होंने बताया कि ओएनओएस योजना के तहत तीन वर्ष की अवधि के लिए छह हजार करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया गया है। यह चुनिंदा उत्‍कृष्‍ट ओपन एक्‍सेस जर्नलों में प्रकाशन के वास्‍ते लाभार्थी लेखकों के लिए सालाना एक सौ पचास करोड़ रुपए की केंद्रीय सहायता भी उपलब्‍ध कराएगी। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 25 नवंबर 2024 को इस दृष्टिकोण के अनुरूप वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन योजना को मंजूरी दे दी है। इस पहल का उद्देश्य देश के सरकारी उच्च शिक्षा संस्थानों (एचईआई) और केंद्र सरकार के अनुसंधान एवं विकास केंद्रों के सभी छात्रों,  शिक्षकों, शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों को अंतरराष्ट्रीय विद्वानों की पत्रिकाओं और लेखों तक पहुंच प्रदान करके ज्ञान की बाधाओं को तोड़ना है। इसका लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि भारत के शैक्षणिक और अनुसंधान समुदाय सर्वोत्तम वैश्विक संसाधनों से लैस हों, नवाचार को बढ़ावा दें और विभिन्न विषयों में अनुसंधान की गुणवत्ता को बढ़ाएं। वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन योजना वर्ष 2047 तक आत्मनिर्भर और विकसित राष्ट्र बनने की भारत की महत्वाकांक्षा की आधारशिला है। यह पहल विकासशील भारत@2047 विजन का एक प्रमुख घटक है। यह रोडमैप अत्याधुनिक अनुसंधान, तकनीकी उन्नति और आत्मनिर्भर प्रगति द्वारा संचालित एक अग्रणी वैश्विक शक्ति के रूप में भारत के उभरने की कल्पना करता है। ऐसी पहलों के माध्यम से, भारत ज्ञान की अपनी समृद्ध विरासत का निर्माण करने की तैयारी कर रहा है, जिससे वह वैश्विक नवाचार और खोज में सबसे आगे खड़ा हो सके। एक अच्‍छा जनरल की एक्सेस कितनी कम रहती इसलिए प्रधानमंत्री जी ने इसको एक नए स्‍वरूप में डाला है कि क्‍यों ना हम सभी यूनिवर्सिटी अपने रिसोर्सिस को पूल कर लें, कॉमन कर लें। कॉमन करके जितने विश्‍व प्रसिद्ध जनरल हैं उन सबको खरीदें उनका सब्सक्रिप्‍शन करें और उसके बाद में देशभर में जितने भी हमारे एजुकेशनल इन्‍स्‍टीट्यूशंस हैं उन सब में वो उपलब्‍ध हो जाएं। इट्स ए वेरी इंट्रेस्टिंग थॉट एंड दिस इज़ लेट टू द सिक्‍स थाउजेंड करोड़, प्रोग्राम फॉर वन नेशन, वन सब्‍सक्रिप्‍शन।

नए साल में सतना को बड़ा तोहफा,सतना से पीएम पर्यटन हवाई सेवा की हुई शुरुआत

सतना आज पूरे भारतवर्ष में नए साल का जश्न बड़े ही धूमधाम से मनाया जा रहा है। रात 12 बजे से ही लोग पटाखे फोड़ कर एक-दूसरे को बधाइयां देकर नए साल की शुरुआत कर रहे हैं। आज के दिन को स्पेशल बनाने के लिए लोग तमाम तरह की एक्टीविटिज करते हैं। दोस्तों के संग पिकनिक, पार्टी आदि करते हैं। कुछ लोग घर पर ही पार्टी ऑर्गेनाइजर करते हैं। कुछ लोग साल के पहले दिन मंदिर घूमने जाते हैं। वहीं, मध्य प्रदेश की सतना वीडियो के लिए भी नया साल ढ़ेरों सौगात लेकर आया है। दरअसल, आज से पीएम पर्यटन हवाई सेवा शुरू हुई । जब रनवे पर सुबह 11:30 छह सीटर प्लेन उतरा । यह स्थानीय लोगों के लिए नए साल का बेहतरीन तोहफा माना जा रहा है। पीएम पर्यटन हवाई सेवा शुरू हवाई सेवा के शुरू होने से एक शहर से दूसरे शहर की कनेक्टिविटी बेहद आसान और सुगम हो जाएगी। अब लोगों को कहीं जाने के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। पहले कनेक्टिविटी नहीं होने के कारण लोगों को दूसरे शहर जाने के लिए ट्रेन या बस का सहारा लेना पड़ता था, लेकिन अब उनकी यह समस्या दूर हो चुकी है। हालांकि, यह हवाई सेवा सप्ताह में केवल दो दिन मिलेगी जिनमें रविवार और बुधवार शामिल है। रविवार को पैसेंजर्स सतना से वाया खजुराहो होकर भोपाल की यात्रा कर सकते हैं। वहीं, बुधवार को सतना से वाया जबलपुर होकर भोपाल के लिए फ्लाई ओला एयरलाइन की वायु सेवा जाएगा। यात्रा करने से पहले फ्लाइट के रूट के बारे में अवश्य जान लें। रूट     रविवार को सबसे पहले फ्लाइट भोपाल से खजुराहो आएगी। यहां से सतना आकर सिंगरौली जाएगी। उसके बाद सिंगरौली से फिर रवाना होकर सतना होते हुए खजुराहो होकर भोपाल को वापसी करेगी।     वहीं, बुधवार को भी भोपाल से जबलपुर और फिर सतना जाकर सिंगरौली जाएगी। इसी तरह वापसी में सिंगरौली से वापस सतना होते हुए जबलपुर के रास्ते भोपाल को पहुंचेगी। किराया किराए की बात करें तो यह यात्रियों की सुविधा को देखते हुए बहुत कम रखा गया है। एक तरफ के लिए यात्रियों को 2500 से ₹4000 तक खर्च करने होंगे।

नए साल में मोदी सरकार का किसानों को बड़ा तोहफा, आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने विभिन्न योजनाओं को मंजूरी

नई दिल्ली 1 जनवरी 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में किसानों के लिए कई बड़े और महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। इस बैठक में सरकार ने किसानों की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने के उद्देश्य से विभिन्न योजनाओं और पैकेजों को मंजूरी दी। इन फैसलों से किसानों को राहत मिल सकती है, खासकर उर्वरकों और फसल बीमा से जुड़े मामलों में। डीएपी उर्वरक कंपनियों के लिए स्पेशल पैकेज केंद्र सरकार ने डीएपी (डायअमोनियम फास्फेट) उर्वरक बनाने वाली कंपनियों के लिए एक स्पेशल पैकेज की घोषणा की है। इस पैकेज के तहत कंपनियों को मिलने वाली सब्सिडी के अतिरिक्त वित्तीय सहायता भी प्रदान की जाएगी। डीएपी उर्वरक की मांग भारत में बहुत अधिक है, लेकिन इसके अधिकतर कच्चे माल का आयात किया जाता है, खासकर चीन, सऊदी अरब और मोरक्को जैसे देशों से। वैश्विक बाजार में कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि के कारण डीएपी की लागत बढ़ी है, जिससे किसानों के लिए उर्वरक की कीमतें भी बढ़ी हैं। सरकार ने इन कंपनियों को वित्तीय सहायता देने का फैसला लिया है ताकि उर्वरक की कीमतों को स्थिर रखा जा सके और किसानों को राहत मिले। यह पैकेज 31 दिसंबर 2025 तक लागू रहेगा, जिससे अगले कुछ वर्षों तक किसानों को महंगे उर्वरकों से राहत मिलेगी और उनकी उत्पादन लागत में कमी आएगी। फसल बीमा योजना में किए सुधार केंद्र सरकार ने किसानों के लिए फसल बीमा योजना को और अधिक आकर्षक बनाने के लिए कई अहम फैसले किए हैं। फसल बीमा योजना का उद्देश्य प्राकृतिक आपदाओं, बीमारी या अन्य कारणों से फसल को हुए नुकसान के लिए किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान करना है। अब, सरकार ने इस योजना के नियमों को संशोधित करने का निर्णय लिया है, ताकि यह किसानों के लिए और अधिक सुलभ हो। सरकार के मुताबिक, फसल बीमा योजना के तहत प्रीमियम की दर को कम किया जाएगा और बीमा प्राप्त करना किसानों के लिए आसान बनाया जाएगा। पहले जहां किसानों को बीमा लेने के लिए जटिल प्रक्रिया का सामना करना पड़ता था, वहीं अब इसे सरल बनाया जाएगा। इसके अलावा, सरकार इस योजना में कवरेज की सीमा बढ़ाने पर भी विचार कर रही है, ताकि किसानों को और अधिक सहायता मिल सके। इस कदम से छोटे और मझले किसानों को फायदा होने की संभावना है, क्योंकि उन्हें कम खर्च में अधिक बीमा कवर मिलेगा और प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षा प्राप्त होगी। संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) का सुप्रीम कोर्ट की कमेटी से किया मना इस बीच, संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित कमेटी के साथ बातचीत करने से मना कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट की कमेटी ने एसकेएम को 3 जनवरी 2025 को बैठक में शामिल होने का निमंत्रण भेजा था, लेकिन एसकेएम ने इसे ठुकरा दिया। एसकेएम का कहना है कि वे किसी भी न्यायालयिक हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं करते क्योंकि उनकी लड़ाई केंद्र सरकार के साथ नीतिगत मुद्दों पर है, और इसमें न्यायालय की कोई भूमिका नहीं हो सकती। एसकेएम ने यह भी स्पष्ट किया कि वे अपने संघर्ष को न्यायालय से बाहर, सीधे तौर पर सरकार से करेंगे। एसकेएम के नेताओं का कहना है कि वे सरकार से किसानों के लिए ज्यादा राहत देने और उनके मुद्दों को सुलझाने के लिए बातचीत करेंगे, लेकिन सुप्रीम कोर्ट की कमेटी के साथ कोई भी बैठक नहीं करेंगे। खनौरी बॉर्डर पर महापंचायत की घोषणा संयुक्त किसान मोर्चा ने 4 जनवरी 2025 को खनौरी बॉर्डर पर एक महापंचायत बुलाने की घोषणा की है। इस महापंचायत में पंजाब और आसपास के राज्यों के किसानों को आमंत्रित किया गया है। किसान नेता जगजीत डल्लेवाल ने इस महापंचायत का आयोजन किया है, और उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम में किसानों को महत्वपूर्ण संदेश दिए जाएंगे। किसान नेताओं का कहना है कि इस महापंचायत में आगामी आंदोलन की रणनीतियों और किसानों की समस्याओं को लेकर चर्चा की जाएगी। इसके अलावा, किसान नेताओं का कहना है कि महापंचायत के माध्यम से वे सरकार को यह संदेश देंगे कि किसानों के अधिकारों की रक्षा की जाएगी और उनके हितों के खिलाफ किसी भी नीतिगत फैसले को मंजूरी नहीं दी जाएगी। किसानों के संघर्ष की निरंतरता किसान आंदोलन ने पिछले कुछ वर्षों में कई महत्वपूर्ण मोड़ लिए हैं, और अब यह आंदोलन कृषि नीतियों के विरोध में केंद्र सरकार से सीधे संवाद की ओर बढ़ रहा है। जबकि सरकार ने अब तक कई फैसले किसानों के पक्ष में लिए हैं, एसकेएम और अन्य किसान संगठन चाहते हैं कि सरकार उनके द्वारा उठाए गए प्रमुख मुद्दों पर पूरी तरह से ध्यान दे और ठोस कदम उठाए। इस महापंचायत में किसानों को आगामी फैसलों और रणनीतियों पर बातचीत करने का अवसर मिलेगा। एसकेएम के नेता इसे किसानों की आवाज को और अधिक मजबूत करने के एक मौके के रूप में देख रहे हैं। सरकार के फैसलों का असर सरकार द्वारा लिए गए इन फैसलों का असर किसानों पर पड़ेगा, क्योंकि ये न केवल उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार लाने का प्रयास कर रहे हैं, बल्कि उन्हें कृषि उत्पादन में वृद्धि के लिए आवश्यक संसाधन और सहायता भी प्रदान कर रहे हैं। विशेषकर डीएपी की सब्सिडी और फसल बीमा में सुधार से किसानों को सीधी राहत मिल सकती है, जो उनकी आय को स्थिर रखने में मदद करेगा। सरकार का यह कदम कृषि क्षेत्र के सुधारों की दिशा में एक और महत्वपूर्ण पहल है, जो किसानों की जरूरतों और समस्याओं को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।

26/11 हमले के आरोपी तहव्वुर राणा को जल्द लाया जायेगा भारत, प्रत्यर्पण के लिए अमेरिका तैयार

मुंबई भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई में 26/11 आतंकी हमले में शआमिल रहा पाकिस्तान मूल का कनाडाई बिजनेसमैन तहव्वुर राणा को जल्द ही भारत को सौंपा जा सकता है। इसके लिए डिप्लोमैटिक चैनल्स पर काम शुरू हो गया है। अमेरिका की एक कोर्ट तहव्वुर राणा के भारत प्रत्यर्पण को जायज बता चुकी है, जिसके बाद दोनों देशों के बीच प्रत्यर्पण को लेकर बातचीत चल रही है।  रिपोर्ट के अनुसार, तहव्वुर राणा को राजनयिक माध्यमों से भारत लाने की प्रक्रिया चल रही है। अगस्त 2024 में, नौवें सर्किट के लिए अमेरिकी अपील न्यायालय ने फैसला सुनाया कि तहव्वुर राणा दोनों देशों के बीच प्रत्यर्पण संधि के तहत भारत को प्रत्यर्पित किया जा सकता है। अमेरिकी पैनल ने दी प्रत्यर्पण को लेकर जानकारी पैनल ने जिला न्यायालय द्वारा तहव्वुर हुसैन राणा की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को खारिज करने के निर्णय की पुष्टि की, जिसमें मुम्बई में आतंकवादी हमलों में कथित भागीदारी के लिए राणा को भारत को प्रत्यर्पित करने योग्य घोषित करने के मजिस्ट्रेट न्यायाधीश के निर्णय को चुनौती दी गई थी। पैनल ने यह भी माना कि भारत ने मजिस्ट्रेट जज के इस निष्कर्ष के समर्थन में पर्याप्त सक्षम साक्ष्य उपलब्ध कराए हैं कि राणा ने आरोपित अपराध किए हैं। मुंबई पुलिस ने 26/11 हमलों के सिलसिले में 405 पन्नों की चार्जशीट में राणा का नाम शामिल किया है। राणा पर पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) और आतंकी समूह लश्कर-ए-तैयबा का ऑपरेटिव होने का आरोप है। प्रत्यर्पण को लेकर क्या हैं पेच? अदालत ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच प्रत्यर्पण संधि में Non Bis is Idem एक अपवाद है, जो कि तब लगा होता है, जब आरोपी को उसी अपराध के लिए पहले दोषी ठहराया जा चुका हो, या बरी किया जा चुका है। हालांकि, अदालत ने यह भी कहा कि राणा के खिलाफ भारत में लगाए गए आरोप अमेरिकी अदालतों में उनके खिलाफ चलाए गए मामलों से अलग हैं, इसीलिए नॉन बिस, इन आइडम अपवाद लागू नहीं होता है। बता दें कि 26 नवंबर 2011 को मुंबई में हुई हमलों के लगभग एक साल बाद FBI ने शिकागो में राणा को गिरफ्तार किया था। राणा और उसके साथी कोलमैन हेडली ने मिलकर मुंबई हमलों के लिए जगहों की रेकी की थी, और पाकिस्तान के आतंकवादियों को अंजाम देने के लिए एक खाका तैयार किया गया है। तहव्वुर राणा के खिलाफ सबूत अमेरिकी अदालत ने राणा के प्रत्यर्पण के खिलाफ याचिका खारिज कर दी, जिसमें भारत द्वारा उसके खिलाफ पर्याप्त सबूतों का हवाला दिया गया। उसका नाम 26/11 हमलों के लिए मुंबई पुलिस की चार्जशीट में शामिल है। उस पर पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) और आतंकवादी समूह लश्कर-ए-तैयबा का सक्रिय सदस्य होने का आरोप है। राणा ने कथित तौर पर मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड डेविड कोलमैन हेडली की मुंबई में संभावित ठिकानों की टोह लेने में मदद की थी। आरोपपत्र में हेडली के साथ मिलकर इन हमलों की योजना बनाने में उसकी संलिप्तता का विवरण दिया गया है। गैर-बिस इन आइडेम क्लॉज नहीं होंगे लागू अदालत ने कहा कि भारत-अमेरिका प्रत्यर्पण संधि में गैर-बिस इन आइडेम क्लॉज यहां लागू नहीं होता है। यह क्लॉज उस स्थिति में प्रत्यर्पण को रोकता है जब किसी व्यक्ति पर उसी अपराध के लिए कहीं और मुकदमा चलाया गया हो। हालांकि, राणा के खिलाफ भारत और अमेरिका में आरोप अलग-अलग हैं, इसलिए यह अपवाद अप्रासंगिक है। मुंबई हमलों के एक साल बाद शिकागो से गिरफ्तार हुआ राणा मुंबई आतंकी हमलों के करीब एक साल बाद FBI ने राणा को शिकागो में गिरफ्तार किया था। अमेरिका में आरोपों से बरी होने के बावजूद, भारत के प्रत्यर्पण अनुरोध के कारण वह हिरासत में है। 26/11 की पूरी प्लानिंग तहव्वुर राणा और डेविड कोलमैन हेडली ने मिलकर मुंबई को निशाना बनाने वाले पाकिस्तानी आतंकवादियों के लिए एक योजना बनाई। उनके ब्लूप्रिंट में हमलों के लिए प्रमुख स्थानों की पहचान की गई थी। वर्तमान में, राणा लॉस एंजिल्स की जेल में बंद है और भारत में उसके प्रत्यर्पण के संबंध में आगे की कार्यवाही का इंतजार कर रहा है।

यूनियन कार्बाइड का जहरीला कचरा पीथमपुर में नष्ट होगा, भोपाल से ले जाने के लिए बनेगा ग्रीन कॉरिडोर

भोपाल  यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री में रखा 40 साल से रखा 337 मिट्रिक टन कचरे का का निपटान पीथमपुर में किया जाएगा। इसके लिए भोपाल से पीथमपुर तक 250 किमी तक ग्रीन कॉरिडोर बनाया जाएगा। कचरे को 12 कंटेनरों से पशिष्ट की पैकिंग, लोडिंग और परिवहन सीपीसीबी द्वारा निर्धारित मापदंडों के अनुसार और सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों के साथ किया जाएगा। कंटेनर्स के साथ पुलिस सुरक्षा बल, एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड तथा क्विक रिस्पॉस टीम रहेगी। यह कंटेनर लीक प्रूफ फायर रेजिस्टेंट हैं। प्रति कंटेनर में दो प्रशिक्षित ड्राइवर नियुक्त हैं। इन कंटेनरों का मूवमेंट जीपीएस से मॉनिटर किया जाएगा। ग्रीन कॉरिडोर भोपाल, सीहोर, देवास, इंदौर से धार होते हुए पीथमपुर के बीच बनेगा।   यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के जहरीले कचरे को भरने का काम रविवार को शुरू हुआ। इसको कंटेनरों में पैक करने के लिए दो सौ से ज्यादा मजदूरों की ड्यूटी लगाई गई। इनकी तीस-तीस मिनट की शिफ्ट लगाई गई,जिससे उनको किसी प्रकार का नुकसान ना हो यह सुनिश्चित किया जा सके। मजदूरों को पीपीई किट दी गई और उनका बल्ड प्रेशर नापने की मशीन भी रखी गई। 2015 में किया 10 मीट्रिक टन कचरे का निपटान सीपीसीबी की कॉनिटरिंग में सभी निर्धारित पैरामीटर अनुसार सुरक्षा मानकों का ध्यान रखते हुए 10 मीट्रिक टन अपशिष्ट विनिष्टिकरण का ट्रॉयल रन-2015 में किया गया। शेष बचे 337 मीट्रिक टन रासायनिक अपशिष्ट पदार्थों का निष्पादन सर्वोच्च न्यायालय तथा उच्च न्यायालय द्वारा समय-समय पर पारित आदेशों के अनुक्रम में तथा उच्च न्यायालय द्वारा गठित ओवर साइट कमेटी/टास्क फोर्स कमेटी के निर्णय 19 जून 2023 के अनुक्रम में किया जा रहा है।     पीथमपुर में रासायनिक कचरे के निपटान के बनाया प्लांट मध्य प्रदेश में औद्योगिक इकाईयों में निकलने वाले रासायनिक तथा अन्य अपशिष्ट निष्पादन के लिए धार जिले के पीथमपुर में प्लांट लगाया गया है। यहां पर भस्मीकरण से अपशिष्ट पदार्थाें का निपटान किया जाता है। यह प्लांट प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्र में स्थापित उद्योगों द्वारा जनित खतरनाक एवं रासायनिक अपशिष्ट के सुरक्षित निष्पादन के लिए स्थापित किया गया है। यह प्लांट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (सीपीसीबी) के दिशो निर्देेशानुसार संंचालित हैं। देश में पीथमपुर जैसे 42 संयंत्र क्रियाशील हैं, जिसमें ऐसे रासायनिक अपशिष्ट पदार्थों का उपचार उपरांत निपटान किया जाता है। पीथमपुर में स्थापित यह कॉमन हैज़र्डस वेस्ट ट्रीटमेंट, स्टोरेज और डिस्पोज़ल फैसिलिटी (CHW-TSDF) एक अत्याधुनिक सुविधा है, जिसमें ख़तरनाक कचरे को सटीकता और सुरक्षा के साथ निष्पादन करने हेतु डिज़ाइन किया गया है। मजदूरों की सुरक्षा का ख्याल रखा जा रहा है काफिले के साथ पुलिस की गाड़ियां और एम्बुलेंस रहेगी जिससे आपात स्थिति में काफिले के साथ मौजूद स्टाफ को ज़रूरत पड़ने पर त्वरित मेडिकल सहायता उपलब्ध हो सकेगी. सभी केमिकल को विशेष तरह के बैग्स में भरा जा रहा है, जिसमें लीकेज नहीं होता. कचरा हटाने के लिए जो मजदूर लगाए गए हैं, उन सब का हेल्थ चेकअप किया गया है। एक मजदूर को सिर्फ 30 मिनट काम करना होगा, जिसके बाद दोबारा काम शुरू करने से पहले उसे आराम करने का समय दिया जाएगा. एक ट्रक में 30 टन कचरा डाला जाएगा. हर मजदूर को सुरक्षा किट और मास्क के साथ ही फैक्ट्री में प्रवेश दिया जा रहा है। पीथमपुर में रासायनिक कचरे के निपटान के बनाया प्लांट  मध्य प्रदेश में औद्योगिक इकाईयों में निकलने वाले रासायनिक तथा अन्य अपशिष्ट निष्पादन के लिए धार जिले के पीथमपुर में प्लांट लगाया गया है। यहां पर भस्मीकरण से अपशिष्ट पदार्थाें का निपटान किया जाता है। यह प्लांट प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्र में स्थापित उद्योगों द्वारा जनित खतरनाक एवं रासायनिक अपशिष्ट के सुरक्षित निष्पादन के लिए स्थापित किया गया है। यह प्लांट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (सीपीसीबी) के दिशो निर्देेशानुसार संंचालित हैं। देश में पीथमपुर जैसे 42 संयंत्र क्रियाशील हैं, जिसमें ऐसे रासायनिक अपशिष्ट पदार्थों का उपचार उपरांत निपटान किया जाता है। पीथमपुर में स्थापित यह कॉमन हैज़र्डस वेस्ट ट्रीटमेंट, स्टोरेज और डिस्पोज़ल फैसिलिटी (CHW-TSDF) एक अत्याधुनिक सुविधा है, जिसमें ख़तरनाक कचरे को सटीकता और सुरक्षा के साथ निष्पादन करने हेतु डिज़ाइन किया गया है।   

घुसपैठ कर भारत आई प्रधान बनी बांग्लादेशी महिला? TMC नेता पर लगे फर्जी दस्तावेजों से नागरिकता हासिल करने के आरोप

कलकत्ता पश्चिम बंगाल के रशीदाबाद की ग्राम पंचायत की मुखिया लवली खातून की नागिरकता को लेकर विवाद गहराता जा रहा है. मालदा जिले में टीएमसी के नेतृत्व वाली रशीदाबाद ग्राम पंचायत की मुखिया लवली खातून को लेकर कहा जा रहा है कि वो बांग्लादेशी अप्रवासी हैं. इतना ही नहीं उनपर आरोप है कि वो बिना पासपोर्ट के अवैध रूप से भारत में घुसी थीं. मीडिया रिपोर्ट्स में लवली खातून का असली नाम नासिया शेख बताया जा रहा है. ऐसे में स्थानीय चुनाव में हिस्सेदारी और पंचायत प्रमुख बनने के बारे में सवाल उठना लाजमी हो गए हैं. इस संबंध में कलकत्ता हाई कोर्ट ने SDO से रिपोर्ट भी तलब कर ली है. चुनाव जीतने के बाद TMC में हुई शामिल चंचल की रहने वाली रेहाना सुल्ताना ने 2024 में कलकत्ता उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की थी. रेहाना ने 2022 में ग्राम पंचायत चुनाव लड़ा था लेकिन वो लवली खातून से चुनाव हार गईं थीं. सुल्ताना के वकील अमलान भादुड़ी ने कहा,’याचिका दाखिल करने वाली रेहाना सुल्ताना ने टीएमसी उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था लेकिन लवली खातून से हार गईं, जिन्होंने कांग्रेस और वाम गठबंधन की उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था. खातून के चुनाव जीतने के बाद एक या दो महीने के भीतर वह टीएमसी में शामिल हो गईं.’ भारत में रहकर बनवाए फर्जी दस्तावेज मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि लवली खातून का असली नाम नासिया शेख है और वह कथित तौर पर बांग्लादेशी अप्रवासी है, जो बिना पासपोर्ट के अवैध रूप से भारत में घुसी थी. उन्होंने आगे आरोप लगाया कि 2015 में खातून के नाम पर आधार कार्ड जारी किया गया था और 2018 में जन्म प्रमाण पत्र, लेकिन सभी फर्जी दस्तावेजों की बुनियाद पर ये डॉक्यूमेंट्स बने हैं. याचिकाकर्ता का दावा है कि यह साबित करने के लिए सबूत हैं कि खातून ने अपना नाम और आधिकारिक रिकॉर्ड बदलने सहित अपनी पहचान बदल दी है. लवली खातून से हारी थीं रेहाना सुल्ताना के वकील अमलान भादुड़ी ने कहा कि याचिका दायर करने वाली रेहाना सुल्ताना ने टीएमसी उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था, लेकिन वह लवली खातून से हार गई थीं, जिन्होंने कांग्रेस और वाम गठबंधन की उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था। खातून के चुनाव जीतने के एक या दो महीने के भीतर ही वह टीएमसी में शामिल हो गई थीं। लवली खातून पर क्या हैं आरोप? इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में वकी भादुड़ी ने कहा कि लवली खातून का असली नाम नासिया शेख है और वह कथित तौर पर एक बांग्लादेशी अप्रवासी है, जो बिना पासपोर्ट के अवैध रूप से भारत में घुसी थी। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि 2015 में खातून के नाम पर आधार कार्ड जारी किया था, और 2018 में जन्म प्रमाण पत्र जारी किया गया। बांग्लादेश से आया चालाक घुसपैठिया भादुड़ी ने कहा है कि लवली खातून ने चुनाव के लिए अपनी पात्रता साबित करने के लिए अपने आधार कार्ड, वोटर कार्ड और यहां तक ​​कि ओबीसी स्टेटस जैसे फर्जी दस्तावेज भी बनवाए हैं। हमें स्थानीय लोगों से यह भी पता चला कि खातून एक पड़ोसी गांव में गई थी। एक व्यक्ति से अपने पिता का नाम बताने के लिए कहा था। हर कोई जानता है कि उसके पिता का नाम शेख मुस्तफा नहीं बल्कि जमील बिस्वास है, यहां तक ​​कि राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर में भी शेख मुस्तफा के परिवार में लवली का कोई जिक्र नहीं है। वकील ने आगे सवाल उठाया कि खातून कैसे चुनाव लड़ सकती हैं, जबकि वह भारतीय नागरिक नहीं हैं। इस बीच लवली खातून ने द एक्सप्रेस द्वारा किए गए कॉल का जवाब नहीं दिया। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब अवैध रूप से देश में प्रवेश करने वाले बांग्लादेशी नागरिकों के लिए जाली दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट बनाने के आरोप में सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है। ‘पड़ोसी गांव में किसी को बनाया पिता’ रेहाना के वकील भादुड़ी ने कहा,’हम स्थानीय पुलिस स्टेशन और स्थानीय प्रशासन के पास गए थे लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई, इसलिए हम 2024 में कलकत्ता उच्च न्यायालय चले गए.’ उन्होंने कहा कि लवली खातून ने चुनाव के लिए अपनी पात्रता साबित करने के लिए अपने आधार कार्ड, वोटर कार्ड और यहां तक ​​कि ओबीसी स्थिति जैसे दस्तावेजों में भी हेराफेरी की है. हमें स्थानीय लोगों से यह भी पता चला कि खातून एक पड़ोसी गांव में गई थी और एक व्यक्ति से अपने पिता का नाम बताने के लिए कहा था. सभी जानते हैं कि उनके पिता का नाम शेख मुस्तफा नहीं बल्कि जमील बिस्वास है, यहां तक कि राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NRC) में भी शेख मुस्तफा के परिवार में लवली का कोई जिक्र नहीं है.’ यह ऐसे समय में हुआ है जब बांग्लादेश के नागरिकों के लिए जाली दस्तावेजों के साथ पासपोर्ट बनाने के आरोप में सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जो अवैध रूप से देश में घुस आए थे.

Ex Constable Saurabh Sharma के घर 9 दिन से जारी Raid में मिला 93 Crore का खजाना

भोपाल  27 दिसंबर से भोपाल के करोड़पति आरटीओ पूर्व कॉन्स्टेबल सौरभ शर्मा के यहां छापेमारी देश भर में सुर्खियों में रही। उसके घर 9 दिन में बैक टू बैक तीन एजेंसियों ने छापे मारे। इस दौरान धनकुबेर सौरभ के पास 93 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति मिली है। इनमें 52 किलो सोना और 11 करोड़ कैश से लेकर 23 करोड़ की अन्य संपत्तियों और 6 करोड़ की एफडी शामिल है। इतने खुलासों ने जांच दलों को भी हैरानी में डाल दिया है। उसके यहां ईडी से लेकर लोकायुक्त और आयकर विभाग तीनों कार्रवाई को अंजाम दिया। शर्मा पर मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है। उसके पास आय से कई गुना अधिक चल अचल संपत्ति मिली है। वह भी मात्र कुछ सालों के काम करने के बाद। छापेमारी का क्रम ऐसा रहा ईडी ने 27 दिसंबर को सौरभ शर्मा, चेतन सिंह गौर, शरद जायसवाल और रोहित तिवारी के ठिकानों पर छापे मारे थे। ये सभी लोग सौरभ के काम में मददगार बताए जा रहे हैं। शुरुआती छापेमारी में सौरभ की कार से 52 किलो सोना और 11 करोड़ रुपये नकद बरामद हुए थे। इसके बाद ईडी ने जांच का दायरा बढ़ाया और उनके परिवार, दोस्तों और सहयोगियों के ठिकानों पर भी छापेमारी की। इस दौरान भी कई चौकाने वाले खुलासे हुए हैं, जिसने सभी को हैरत में डाल दिया है। ईडी को अब तक शर्मा के परिजनों और दोस्तों के खातों में 4 करोड़ रुपये मिले हैं। इसके अलावा 23 करोड़ रुपये की और संपत्ति भी जांच के घेरे में है। परिवार और दोस्तों के नाम बेनामी संपत्तियां भोपाल, जबलपुर और ग्वालियर में की गई छापेमारी में 6 करोड़ रुपये की एफडी भी मिली हैं। ईडी को शक है कि शर्मा ने अपने परिवार, दोस्तों और कंपनियों के नाम पर कई बेनामी संपत्तियां खरीदी हैं। ईडी का कहना है कि ये सभी लोग सौरभ के अवैध कारोबार से फायदा उठा रहे थे। या फिर उसके काम में मदद कर रहे थे। इस मामले में अभी जांच जारी है और आगे और भी खुलासे हो सकते हैं। बता दें सौरभ शर्मा का अब तक लोकायुक्त पता नहीं लगा सकी है। सौरभ शर्मा दुबई में है या भारत में इसको लेकर एजेंसी के अधिकारी ही कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे पा रहे हैं। इस बीच सौरभ शर्मा के यहां लगातार अलग-अलग एजेंसियों की तलाशी में काली कमाई निकल रही है। जानकारी के अनुसार सौरभ शर्मा के करीबियों की शिकायत पर लोकायुक्त पुलिस ने उसके ठिकानों पर 19 और 20 दिसंबर को सर्च की थी। इस दौरान सौरभ के भोपाल स्थित घर और कार्यालय से 7.98 करोड़ रुपए की चल संपत्ति बरामद की गई थी। वहीं, आयकर विभाग ने भी एक कार से 52 किलो सोना और 11 करोड़ रुपए कैस जब्त किया था।    लाल डायरी में छिपा है 2000 करोड़ का घोटाला?   पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने दावा किया कि सौरभ शर्मा से जब्त की गई लाल डायरी में नेता और अफसरों के नाम पर 2000 करोड़ रुपए के लेन-देन का हिसाब दर्ज है। इस डायरी में कोड वर्ड्स का इस्तेमाल किया गया है, जिससे नेता और अधिकारियों की पहचान छिपाई गई है।   पटवारी की मांग: केंद्रीय एजेंसी से जांच हो पटवारी ने मांग की है कि लाल डायरी का सत्यापन केंद्रीय एजेंसियों से करवाया जाए। उन्होंने आशंका जताई कि लोकायुक्त पुलिस के पास मौजूद डायरी में छेड़छाड़ की जा सकती है। उन्होंने इसे सार्वजनिक करने की भी मांग की।

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