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भोपाल में मदरसों में राष्ट्रगान को लेकर दो दिग्गज नेता आपस में भिड़े, सरकारी मदरसों में राष्ट्रगान अनिवार्य

भोपाल  भोपाल में मदरसों में राष्ट्रगान को लेकर दो दिग्गज नेता आपस में भिड़ गए है। भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने मांग की कि सरकारी मदरसों में राष्ट्रगान अनिवार्य हो। वहीं कांग्रेस एमएलए आरिफ मसूद ने इसका विरोध किया है। दोनों नेताओं के बीच तीखी बहस हुई। शर्मा ने मसूद को राष्ट्रगान गाने की चुनौती भी दी। वहीं बीजेपी की एक और विधायक उषा ठाकुर ने सभी शिक्षण संस्थानों में राष्ट्रगान अनिवार्य करने का समर्थन किया है। भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा का कहना मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में मदरसों में राष्ट्रगान को लेकर दो वरिष्ठ विधायकों के बीच तीखी नोक-झोंक देखने को मिल रही है। हुजूर विधानसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी के हिंदूवादी विधायक रामेश्वर शर्मा ने विधानसभा में बयान दिया। उन्होंने कहा कि राज्य के सरकारी अनुदान प्राप्त मदरसों में राष्ट्रगान अनिवार्य किया जाए। शर्मा ने आगे कहा कि अगर सरकार मदरसों को जमीन और आर्थिक सहायता देती है, तो वहां राष्ट्रगान अनिवार्य क्यों नहीं हो सकता? इसमें क्या गलत है? सभी सरकारी अनुदान प्राप्त शिक्षण संस्थानों के लिए नियम समान होना चाहिए। आरिफ मसूद ने दी प्रतिक्रिया इस पर भोपाल मध्य विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने शर्मा की आलोचना करते हुए कहा कि बीजेपी एमएलए को विधानसभा में कोई भी अप्रासंगिक बयान देने से पहले मदरसों का दौरा करना चाहिए। मसूद ने कहा कि अगर बीजेपी विधायक कभी मदरसों में गए होते, तो उन्हें पता होता कि मदरसों में दाखिला लेने वाला हर बच्चा बिना किसी रुकावट के राष्ट्रगान गाता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि भाजपा विधायक खुद राष्ट्रगान नहीं गा सकते। सार्वजनिक स्थान पर आकर राष्ट्रगान गाने की चुनौती जाहिर है कि कांग्रेस नेता आरिफ मसूद का यह बयान रामेश्वर शर्मा को पसंद नहीं आया और उन्होंने कांग्रेस नेता पर पलटवार किया। रामेश्वर शर्मा ने मसूद को सार्वजनिक स्थान पर राष्ट्रगान गाने की चुनौती दी। गुरुवार को शर्मा ने कहा कि मैं उन्हे चुनौती देता हूं कि अगर आता है राष्ट्रगान तो गाए। वे राष्ट्रगान गा के दिखाए मेरे सामने तो मैं उनके लिए ताली बजाऊंगा।

ऑनलाइन फूड डिलीवरी ऐप से खाना ऑर्डर करना सस्ता होगा, आज जीएसटी काउंसिल की बैठक

नई दिल्ली  स्विगी और जोमैटो जैसे ऑनलाइन फूड डिलीवरी ऐप से खाना ऑर्डर करना सस्ता हो सकता है। दरअसल, सरकारी ऑनलाइन फूड डिलीवरी ऐप पर जीएसटी की दर कम कर सकती है। वहीं इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर जीएसटी दर बढ़ाई जा सकती है। इससे ये महंगी हो जाएंगी। जीएसटी की इन दरों के बारे में कल यानी शनिवार को निर्णय लिया जाएगा। शनिवार 21 दिसंबर को जीएसटी काउंसिल की 55वीं बैठक होगी। जीएसटी परिषद इस बैठक के दौरान लाइफ और हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर टैक्स दरों को कम करने पर चर्चा कर सकती है। साथ ही यह कलाई में पहने जाने वाली लक्जरी घड़ियों, जूते और कपड़ों पर टैक्स बढ़ाने पर विचार कर सकती है। इसके अलावा तंबाकू जैसी हानिकारक चीजों पर 35% का एक अलग से जीएसटी स्लैब पेश किया जा सकता है। कितनी सस्ता होगा खाना ऑर्डर करना? इकनॉमिक टाइम्स के अनुसार जीएसटी काउंसिल की यह बैठक वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में और राज्य के समकक्षों की मौजूदगी में होगी। इसमें स्विगी और जोमैटो जैसे फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म के लिए जीएसटी दर को मौजूदा 18% (इनपुट टैक्स क्रेडिट के साथ) से घटाकर 5% (इनपुट टैक्स क्रेडिट के बिना) करने का प्रस्ताव है। 148 चीजों के टैक्स पर बदलाव संभव इस बैठक में करीब 148 वस्तुओं की जीएसटी दर में बदलाव हो सकता है। साथ ही विमानन टरबाइन ईंधन (एटीएफ) को भी जीएसटी के दायरे में लाने पर भी विचार-विमर्श होगा। फिटमेंट कमेटी (जिसमें केंद्र और राज्यों के टैक्स अधिकारी शामिल हैं) ने इस्तेमाल किए गए ईवी के साथ-साथ छोटे पेट्रोल और डीजल वाहनों की बिक्री पर मौजूदा 12 फीसदी से 18 फीसदी तक की दर बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है। इस बढ़ोतरी से इस्तेमाल की गई और पुरानी छोटी कारें और ईवी पुराने बड़े वाहनों के बराबर हो जाएंगे। सस्ता हो सकता है हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम परिषद के एजेंडे में प्रमुख रूप से हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस के प्रीमियम पर जीएसटी दर तय करना है। बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में परिषद की ओर से गठित एक मंत्री समूह ने नवंबर में अपनी बैठक में टर्म लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसियों के लिए भुगतान किए गए बीमा प्रीमियम को जीएसटी से छूट देने पर सहमति व्यक्त की थी। साथ ही सीनियर सिटीजन को हेल्थ इंश्योरेंस कवर के लिए भुगतान किए गए प्रीमियम को भी टैक्स से छूट देने का प्रस्ताव किया गया है। वरिष्ठ नागरिकों के अलावा अन्य व्यक्तियों के 5 लाख रुपये तक के कवरेज वाले हेल्थ इंश्योरेंस के लिए भुगतान किए गए प्रीमियम पर जीएसटी से छूट देने का प्रस्ताव है।

देश के उत्तरी राज्‍यों में कड़ाके की सर्दी पड़ रही, तापमान में गिरावट जारी, पारा 0º, बर्फ जमी

नई दिल्‍ली देश के उत्तरी राज्‍यों में कड़ाके की सर्दी पड़ रही है। तापमान में गिरावट जारी है। हरियाणा और हिमाचल के कुछ शहरों में तापमान शून्य डिग्री  सेल्सियस तो जम्मू-कश्‍मीर और उत्तराखंड में पारा माइनस 4 डिग्री  सेल्सियस तक पहुंच गया है। राजस्‍थान, मध्‍य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और दिल्ली में सर्दी रिकॉर्ड तोड़ रही है। मौसम विभाग की मानें तो मैदानी इलाकों में हरियाणा का हिसार सबसे ठंडा रहा। राजस्थान के पांच शहरों में तापमान 4 डिग्री सेल्सियस से नीचे रिकॉर्ड किया है। शनिवार-रविवार में तापमान और गिरेगा। भीषण शीतलहर भी चलेगी। कुछ राज्‍यों में बारिश भी होगी। यहां कई जिलों में पारा 0 डिग्री पहुंच गया है। मौसम विभाग ने कहा- मैदानी इलाकों में हरियाणा का हिसार सबसे ठंडा रहा। यहां तापमान 0.8 डिग्री तक दर्ज किया गया। वहीं, हिमाचल के भुंतर में तापमान शून्य डिग्री के करीब पहुंच गया। ओस की बुंदे जमकर बन रही बर्फ मध्य भारत के राज्यों, राजस्थान और मध्य प्रदेश में भी सर्दी कम नहीं हो रही है। राजस्थान के करौली में तापमान 1.3 डिग्री पहुंच गया। सीकर, झुनझुन समेत कई जगहों पर पत्तों में जमी बर्फ देखने को मिल रही है। बीते 24 घंटे में राजस्थान के 5 शहरों में रात का पारा 4 डिग्री से नीचे रिकॉर्ड हुआ। माउंट आबू में 2.0°, फतेहपुर 2.2°, संगरिया 3.3°, चूरू 3.5° और करौली में 3.4 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। एमपी और दिल्ली में भी कड़ाके की ठंड मध्य प्रदेश के 12 शहरों का न्यूनतम तापमान 8 डिग्री से नीचे रहा। सबसे कम तापमान 3.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। दिल्ली में भी तापमान 5 डिग्री रिकॉर्ड किया गया। यहां आज तापमान में और गिरावट हो सकती है।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा- प्रदेश में म्यूचुअल फंड में सवा लाख करोड़ रुपये का निवेश है, जो यहां हुए विकास को दर्शाता है

भोपाल प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश तेज गति से आगे बढ़ रहा है। विभिन्न सेक्टरों के साथ म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री भी तेजी से आगे बढी है। म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में निवेश 10 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 68 लाख करोड़ रूपये से अधिक हो गया है। प्रदेश में म्यूचुअल फंड में सवा लाख करोड़ रुपये का निवेश है, जो यहां हुए विकास को दर्शाता है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर में आयोजित म्युचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर्स के 2 दिवसीय निवेश मंत्रणा कार्यक्रम में ये बातें कहीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उन्होंने कहा प्रदेश सरकार का बजट सवा तीन लाख करोड़ रुपये है जिसे बढ़ाकर 7 लाख करोड रुपये ले जाने के बड़े लक्ष्य के साथ प्रदेश सरकार कार्य कर रही है। हम अनावश्यक खर्चों को कम करके आय में वृद्धि करने पर जोर देते हुए कार्य कर रहे है।   देश और प्रदेश हर क्षेत्र में बड़े लक्ष्यों को लेकर आगे बढ़ रहा है। बदलते दौर में व्यवस्थाएं क्रांतिकारी रूप से परिवर्तित हुई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा बिजली उत्पादन के क्षेत्र में किसानों को सौर ऊर्जा पंप के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रदेश में विशेष प्रयास किये जा रहे है। इस योजना के क्रियान्वयन से प्रदेश सरकार की बिजली पर खर्च होने वाली बडी राशि की बचत होगी। उन्होंने कहा प्रदेश में 2003 में 5 मेडिकल कालेज थे। वर्तमान में 30 मेडिकल कॉलेज है, जिसमें 5 हजार सीटे है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा आने वाले समय में प्रदेश में 52 मेडिकल कॉलेज स्थापित करने के लक्ष्य के साथ कार्य किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा नदी जोड़ो अभियान में प्रदेश में 2 नदी जोड़ो अभियान पर विशेष रूप से कार्य किया जा रहा है। इन योजनाओं से प्रदेश में वर्तमान सिंचाई का रकबा 45 लाख हेक्टेयर से बढ़कर एक करोड़ हेक्टेयर हो जाएगा। इससे प्रदेश में सिंचाई के साथ-साथ उद्योगों को भी लाभ मिलेगा। प्रदेश में सिंचाई क्षेत्र बढ़ने से विकास के साथ-साथ रोजगार बढ़ेंगे। उन्होंने कहा म्यूचुअल फंड निवेश मंत्रणा कार्यक्रम में होने वाले मंथन के माध्यम से भविष्य के अच्छे सोपान निकल कर आएंगे। कार्यक्रम में प्रदेश के जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट, विधायक श्री गोलू शुक्ला, श्री गौरव रणदिवे, म्युचुअल फंड एसोसिएशन के सेंट्रल इंडिया अध्यक्ष राजेश कूलवाल, श्री अभिलाष जैन, श्री अमित माहेश्वरी, श्री प्रमोद सराफ सहित देश भर के बड़ी संख्या में म्युचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर उपस्थित थे।  

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एनसीआर क्षेत्र में राजस्थान के हिस्से में भी पटाखों पर पूर्ण बैन होना चाहिए

नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली की तरह ही यूपी और हरियाणा को पटाखे पर पूर्ण बैन लगाने का निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एएस ओका की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि हम इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि पटाखे पर बैन तभी प्रभावी हो सकेगा, जब एनसीआर राज्यों में भी इसी तरह का बैन लागू किया जाए। कोर्ट में दिल्ली सरकार की ओर से बताया गया कि पटाखे पर पूरे साल के लिए बैन किया है। कोर्ट ने कहा कि एनसीआर इलाके में आने वाले राजस्थान के हिस्से में भी इसी तरह का बैन होना चाहिए। हम फिलहाल उत्तर प्रदेश और हरियाणा को निर्देश देते हैं कि दिल्ली द्वारा 19 दिसंबर, 2024 को लगाए गए प्रतिबंध की तरह वे भी प्रतिबंध लागू करें। कोर्ट में एमसी मेहता की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान उक्त आदेश पारित किया। जस्टिस ओका की अगुवाई वाली बेंच दिल्ली और एनसीआर में एयर पल्यूशन से निपटने के उपाय को लेकर सुनवाई कर रही है। सुनवाई के दौरान पटाखों पर साल भर के लिए बैन, जीआरएपी और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के अमल को लेकर विचार हुआ। दिल्ली सरकार का क्या पक्ष? दिल्ली सरकार की ओर से सीनियर वकील शादान फरासत ने अदालत को बताया कि दिल्ली में पटाखों के निर्माण, स्टोरेज और बिक्री के साथ वितरण और उपयोग पर व्यापक बैन लगाया गया है। लेकिन ये उपाय तभी प्रभावी हो सकेंगे, जब एनसीआर राज्य भी ऐसे बैन लगाएं। क्योंकि इन राज्यों से पटाखे दिल्ली में लाए जा सकते हैं। अदालत को बताया गया कि राजस्थान के एनसीआर इलाकों में पटाखों पर पूर्ण बैन लगाया गया है। साथ ही, हरियाणा में ग्रीन पटाखों के इस्तेमाल की इजाजत दी गई है। अदालत ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 5 के तहत शक्तियों का उपयोग करते हुए, दिल्ली सरकार ने एनसीटी दिल्ली में सभी प्रकार के पटाखों के निर्माण, भंडारण, बिक्री, ऑनलाइन मार्केटिंग प्लैटफॉर्म के माध्यम से डिलिवरी और फोड़ने पर तत्काल प्रभाव से पूरे वर्ष के लिए पूर्ण प्रतिबंध लगाया है। अदालत ने कहा कि एक बार के लिए हम सुझाव देते हैं कि दिल्ली मॉडल का पालन किया जाए। मामले की अगली सुनवाई 15 जनवरी 2025 को होगी, जिसमें पटाखों के प्रतिबंध पर अतिरिक्त निर्देशों पर विचार किया जाएगा। क्या है मामला सुप्रीम कोर्ट ने पहले दिल्ली-एनसीआर में पटाखों पर प्रतिबंध लागू करने में कमी पर चिंता व्यक्त की थी। 12 दिसंबर को कोर्ट ने दिल्ली सरकार और एनसीआर राज्यों को पटाखों के निर्माण, भंडारण, बिक्री, वितरण, और उपयोग पर पूरे वर्ष के लिए प्रतिबंध लगाने का निर्णय लेने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने जोर देकर कहा था कि यह प्रतिबंध वायु और ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक है। पहले कोर्ट ने यह भी कहा था कि कोई भी धर्म प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों को बढ़ावा नहीं देता और नागरिकों के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत स्वच्छ पर्यावरण के अधिकार को ध्यान में रखते हुए प्रतिबंध को सख्ती से लागू करने का आह्वान किया था।

छत्तीसगढ़ के बजट का आकार बढ़कर हुआ 1 लाख: 55 हजार 580 करोड़ रूपए

 छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना के 25वें वर्ष को ‘अटल निर्माण वर्ष’ के रूप में मनाएगी सरकार : अधोसंरचना विकास के लिए रहेगा समर्पित वर्ष 2024-25 के लिए 805 करोड़ 71 लाख 74 हजार 286 रूपए का द्वितीय अनुपूरक बजट पारित छत्तीसगढ़ के बजट का आकार बढ़कर हुआ 1 लाख:  55 हजार 580 करोड़ रूपए राज्य में 30 हजार करोड़ रूपए के सड़क निर्माण का कार्य आगे बढ़ रहा रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सरकार का द्वितीय अनुपूरक बजट विधानसभा में पारित हुआ। वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी द्वारा वर्ष 2024-25 के लिए प्रस्तुत किए गए 805 करोड़ 71 लाख 74 हजार 286 रूपए का द्वितीय अनुपूरक बजट आज विधानसभा में पारित किया गया। आज पारित हुए अनुपूरक बजट को मिलाकर चालू वित्तीय वर्ष 2024-25 में राज्य के बजट का आकार कुल 01 लाख 55 हजार 580 करोड़ रूपए का हो गया है। इसमें मुख्य बजट के रूप में पारित 1 लाख 47 हजार 446 करोड़, प्रथम अनुपूरक बजट में 7 हजार 329 करोड़ रूपए और द्वितीय अनुपूरक बजट का 805 करोड़ 71 लाख 74 हजार 286 रूपए शामिल है।     वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने अनुपूरक बजट पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की जनता मोदी की गारंटी पर भरोसा करती है। सरकार बनने के 12 दिनों बाद ही मोदी की गारंटी के अनुरूप सरकार ने 12 लाख से अधिक किसानों को दो साल के बकाया बोनस राशि 3716 करोड़ रूपए का भुगतान किया। शपथ ग्रहण के अगले ही दिन कैबिनेट की बैठक में राज्य के 18 लाख गरीब परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना अंतर्गत आवास देने का निर्णय लिया गया। इस निर्णय को अमल में लाते हुए 8 लाख हितग्राहियों को आवास निर्माण के लिए पहली किस्त जारी की जा चुकी है। चौधरी ने कहा कि वर्ष 2003 में छत्तीसगढ़ में 5 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी होती थी। हमारी सरकार ने खरीफ वर्ष 2023 में रिकार्ड 145 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की है। कृषक उन्नति योजना के माध्यम से किसानों को 13 हजार 320 करोड़ रूपए भुगतान किया गया है। उन्होंने कहा कि दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषक मजदूर योजना के अंतर्गत हितग्राहियों को राशि का भुगतान सरकार जल्द करेगी।     वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने अनुपूरक बजट पर चर्चा के जवाब में कहा कि हम लोग सरकार बनने के तीसरे महीने से ही महिलाओं को महतारी वंदन योजना का लाभ दे रहे हैं। यह योजना राज्य की महिलाओं के सामाजिक सशक्तिकरण का नया अध्याय लिखेगी। इस योजना की लाभार्थी महिलाओं को ग्रामीण विकास बैंक द्वारा महतारी सशक्तीकरण योजना के माध्यम से 9 प्रतिशत ब्याज पर 25 हजार रूपए का लोन दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि वनांचलों में तेन्दूपत्ता संग्राहकों का मानदेय 4000 रूपए प्रति मानक बोरा से बढ़ाकर 5500 रूपए किया गया है। राज्य के साढ़े 12 लाख परिवारों को इसका लाभ मिल रहा है। तेन्दूपत्ता संग्राहकों को राजमोहिनी देवी तेन्दूपत्ता सामाजिक सुरक्षा योजना के तहत बीमा का लाभ मिल रहा है। उनके लिए चरण पादुका योजना दोबारा शुरू कर रहे हैं।     मंत्री चौधरी ने कहा कि राज्य शासन तेज आर्थिक और सुधारवादी विकास के लिए प्रतिबद्ध है। छत्तीसगढ़ स्थापना के 25वें वर्ष को अटल निर्माण वर्ष के रूप मनाया जाएगा। इसके तहत अधोसंरचना विकास के कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी। सड़क, पुल, अस्पतालों और रेल लाईनों में पूंजीगत व्यय के लिए पर्याप्त राशि प्रदान की जाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य में 30 हजार करोड़ रूपए के सड़कों का काम आगे बढ़ रहा है। इनमें 4 राष्ट्रीय राजमार्गों को फोरलेन करने के साथ ही रायपुर के सरोना चौक, तेलीबांधा चौक और धनेली में फ्लाई ओवर के निर्माण शामिल है। चौधरी ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं के अधोसंरचना की मजबूती के लिए भी हम पर्याप्त राशि दे रहे हैं। गीदम, कबीरधाम, जांजगीर-चांपा और मनेन्द्रगढ़ में 4 नए मेडिकल कॉलेजों के लिए 1280 करोड़ रूपए की स्वीकृति दी गई है। रायपुर मेडिकल कॉलेज के लिए 232 करोड़, सिम्स बिलासपुर के लिए 700 करोड़ और अम्बिकापुर मेडिकल कॉलेज के लिए 109 करोड़ रूपए मंजूर किए गए हैं।     अनुपूरक बजट पर चर्चा का उत्तर देते हुए वित्त मंत्री चौधरी ने कहा कि हम वित्तीय अनुशासन के साथ सुधारवादी बजट लेकर आए हैं। द्वितीय अनुपूरक बजट में प्रावधानित 806 करोड़ रूपए में से 508 करोड़ रूपए पूंजीगत व्यय के लिए और 298 करोड़ रूपए राजस्व व्यय के लिए है। इसमें राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के लिए 250 करोड़ रूपए, नगरीय निकायों में अधोसंरचना विकास के लिए 200 करोड़ रूपए और मुख्यमंत्री समग्र ग्रामीण विकास योजना के लिए 100 करोड़ रूपए का अतिरिक्त प्रावधान किया गया है।     वित्त मंत्री चौधरी ने बताया कि द्वितीय अनुपूरक बजट मेें घरेलू विमान सेवा (उड़ान योजना) के लिए 25 करोड़ रूपए, हस्तशिल्प उत्पादों को राजधानी रायपुर में एक जगह उपलब्ध कराने के लिए बनाए जा रहे यूनिटी मॉल के 19 करोड़ 50 लाख रूपए का प्रावधान किया गया है। बजट में चित्रोत्पला फिल्म सिटी, बस्तर ओलंपिक, नियद नेल्लानार, धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान, पीएम जनमन योजना और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन जैसी योजनाओं के लिए भी प्रमुखता से प्रावधान किए गए हैं। उन्होंने बताया कि राज्य के युवाओं को जॉब-सीकर्स (JOB-SEEKER) से जॉब-क्रिएटर्स (JOB-CREATERS)  बनाने और सिंगल विंडो क्लियरेंस सिस्टम के लिए नई औद्योगिक नीति में जोर दिया गया है।

Para Athletics World Championships 2025 की पहली बार भारत में, मेजबानी करेगा नई दिल्ली

नई दिल्ली पैरा एथलेटिक्स विश्व चैंपियनशिप 2025 का आयोजन 26 सितंबर से 5 अक्टूबर 2025 तक जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में होगा, जो अगले मार्च में पहली बार विश्व पैरा एथलेटिक्स ग्रैंड प्रिक्स की मेजबानी भी करेगा। अगले साल पैरा एथलेटिक्स विश्व चैंपियनशिप नई दिल्ली में होगी, भारत पहली बार इस आयोजन की मेजबानी करेगा, विश्व पैरा एथलेटिक्स (डब्ल्यूपीए) ने गुरुवार (19 दिसंबर) को इसकी घोषणा की। प्रतियोगिता जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में आयोजित की जाएगी पैरा एथलेटिक्स विश्व चैंपियनशिप, दुनिया की सबसे बड़ी एकल पैरा खेल प्रतियोगिता, 26 सितंबर से 5 अक्टूबर 2025 तक जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में आयोजित की जाएगी। नई दिल्ली 2025 चैंपियनशिप का 12वां संस्करण होगा और दोहा 2015, दुबई 2019 और कोबे 2024 के बाद चौथी बार एशिया में इसकी मेजबानी की जाएगी। इसके अलावा, डब्ल्यूपीए ने घोषणा की कि नई दिल्ली अगले साल पहली बार विश्व पैरा एथलेटिक्स ग्रैंड प्रिक्स की मेजबानी भी करेगा। जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में 11 से 13 मार्च तक होने वाला यह आयोजन प्रशंसकों को विश्व चैंपियनशिप से पहले पैरा एथलेटिक्स के रोमांच का अनुभव करने का एक प्रारंभिक अवसर देगा। 2025 पैरा एथलेटिक्स विश्व चैंपियनशिप भारत में होने वाली अब तक की सबसे बड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता होगी विश्व पैरा एथलेटिक्स के प्रमुख पॉल फिट्ज़गेराल्ड ने विश्व पैरा एथलेटिक्स प्रेस विज्ञप्ति के हवाले से कहा, “हमें यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि लॉस एंजिल्स 2028 की ओर नए पैरालंपिक चक्र की पहली प्रमुख चैंपियनशिप नई दिल्ली में आयोजित की जाएगी। 2025 पैरा एथलेटिक्स विश्व चैंपियनशिप भारत में होने वाली अब तक की सबसे बड़ी अंतरराष्ट्रीय पैरा खेल प्रतियोगिता होगी, जो हमारे खेल, हमारे प्रशंसक आधार को बढ़ाने और दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले देश में विकलांग व्यक्तियों के बारे में समाज की धारणा को प्रभावित करने का एक बड़ा अवसर पेश करेगी।” भारत पैरा एथलेटिक्स के विकास का सबसे अच्छा उदाहरण उन्होंने कहा, “भारत पिछले दशक में पैरा एथलेटिक्स के विकास का सबसे अच्छा उदाहरण है। दोहा 2015 विश्व चैंपियनशिप में दो रजत पदक जीतने से लेकर कोबे में इस साल के विश्व चैंपियनशिप में छह स्वर्ण सहित 17 पदक हासिल करने तक, प्रगति स्पष्ट है। यह सफलता भारत की राष्ट्रीय पैरालंपिक समिति के काम और देश में खेलों, विशेष रूप से पैरा एथलेटिक्स में किए जा रहे निवेश को दर्शाती है। हमने देखा है कि प्रमुख आयोजनों का क्या प्रभाव हो सकता है और वे पैरा खेलों को और अधिक दृश्यमान और सभी के लिए सुलभ बनाने के लिए क्या विरासत छोड़ सकते हैं। हमारा मानना ​​है कि यह नई दिल्ली में हो सकता है, और हम अगले साल भारत में दुनिया के सर्वश्रेष्ठ एथलीटों का स्वागत करने के लिए उत्सुक हैं।” पैरालंपिक का आयोजन भारत के वैश्विक खेल महाशक्ति बनने की यात्रा में महत्वपूर्ण भारतीय राष्ट्रीय पैरालंपिक समिति (एनपीसी इंडिया) ने एक बयान में कहा, “एनपीसी इंडिया को भारत में पहली बार पैरा एथलेटिक्स विश्व चैंपियनशिप की मेजबानी करने का सौभाग्य मिला है। यह ऐतिहासिक आयोजन भारत के वैश्विक खेल महाशक्ति बनने की यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है और 2036 ओलंपिक और पैरालंपिक खेलों की मेजबानी के लिए हमारी बोली को मजबूत करता है। यह प्रतिष्ठित चैंपियनशिप न केवल वैश्विक खेल मानचित्र पर भारत की स्थिति को ऊंचा करेगी बल्कि देश के भीतर पैरालंपिक आंदोलन को गति देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। 60 मिलियन से अधिक विकलांग व्यक्तियों की आबादी के साथ, यह आयोजन समावेशिता को बढ़ावा देने, एथलीटों को सशक्त बनाने और विकलांग एथलीटों के लिए अवसरों का विस्तार करने में एक महत्वपूर्ण कदम है।” खेल का आयोजन भारत के विकास का प्रमाण बयान में कहा गया, “हम पैरा खेलों के क्षेत्र में भारत की अद्वितीय प्रगति को प्रदर्शित करने के लिए दुनिया भर के एथलीटों, कोचों और अधिकारियों का स्वागत करने के लिए उत्साहित हैं। यह आयोजन भारत के विकास का प्रमाण होगा, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जोर दिए गए “नए भारत” के दृष्टिकोण के अनुरूप होगा।” मई में जापान के कोबे में आयोजित विश्व चैंपियनशिप के पिछले संस्करण में सौ से अधिक देशों के 1,000 से अधिक एथलीटों ने हिस्सा लिया था। चीन 33 स्वर्ण सहित 87 पदकों के साथ पदक तालिका में शीर्ष पर रहा, जबकि भारत पहली बार शीर्ष छह में रहा।

दमोह में निजी चिकित्सक ओपीडी प्रिस्क्रिप्शन में उप मुख्यमंत्री शुक्ल दे रहे जागरूकता संदेश

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल कहा है कि टीबी उन्मूलन के लिए सामूहिक प्रयास करने होंगे। नि:क्षय शिविर अभियान सामुदायिक भागीदारी से अपने लक्ष्य को प्राप्त करेगा। उन्होंने सभी सामाजिक संगठनों और समाजसेवकों से आह्वान किया है कि वे इस अभियान का हिस्सा बनें और हर टीबी मरीज तक जरूरी सहायता पहुंचाने में सहयोग करें। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने नागरिकों से अपील की है कि वे अपने आस-पास के टीबी मरीजों की पहचान करने और उन्हें समय पर इलाज दिलाने में सहयोग करें। यदि किसी व्यक्ति को लगातार दो सप्ताह से अधिक खांसी, बुखार या वजन घटने जैसी शिकायत हो, तो उसे तुरंत स्वास्थ्य केंद्र ले जाएं। टीबी का इलाज पूरी तरह संभव है, इसके लिए समय पर पहचान और उपचार महत्वपूर्ण है। सभी के समेकित प्रयास से टीबी मुक्त मध्यप्रदेश का लक्ष्य हम शीघ्र प्राप्त करेंगे। उन्होंने अभियान में सक्रिय भूमिका निभा रहे स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, समाजसेवियों, संस्थाओं, नि:क्षय मित्रों की सराहना की है। मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य विभाग द्वारा वर्ष 2025 तक टीबी (क्षय रोग) को समाप्त करने के राष्ट्रीय लक्ष्य को साकार करने के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान चला रहा है। इस अभियान में समाज के हर वर्ग को जोड़ते हुए, एनजीओ, समाजसेवी संगठनों, और आम जनता से सक्रिय सहयोग की अपील की जा रही है। 100 दिवसीय नि:क्षय शिविर अभियान में प्रदेश के 23 उच्च प्राथमिकता वाले जिलों में टीबी के प्रति जागरूकता बढ़ाने, रोग की पहचान, रोकथाम और उपचार को गति देने के प्रयास किए जा रहे हैं। अभियान में टीबी की घटनाओं में 80% कमी लाने, मृत्यु दर में 90% गिरावट और मरीजों के चिकित्सा व्यय को शून्य करने के लक्ष्य की प्राप्ति के लिये नि:क्षय मित्रों, स्वयं सेवकों और सामाजिक संगठनों को शामिल कर सघन प्रयास किये जा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने टीबी के खिलाफ जागरूकता को जनआंदोलन का रूप देने के लिए विभिन्न रचनात्मक पहलें की हैं। सिवनी जिले में ‘न्यू पहल’ फाउंडेशन ने 400 मस्जिदों में उर्दू भाषा में जागरूकता सामग्री प्रदाय की है, जिससे समुदाय के हर वर्ग तक टीबी की जानकारी पहुंचे। मंदसौर में ब्लॉक प्रोग्राम मैनेजर कमलेश भाटी ने एक शादी समारोह में टीबी जागरूकता का संदेश देकर समाज के बीच जागरूकता का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया। इसी तरह, जबलपुर रेलवे स्टेशन पर लाखों यात्रियों को टीबी की जानकारी देने के लिए पोस्टर और फ्लेक्स लगाए गए हैं। विशेष शिविर लगाकर की जा रही हैं जाँच दमोह जिले में निजी चिकित्सकों ने अपने मरीजों के बीच जागरूकता फैलाने के लिए ओपीडी प्रिस्क्रिप्शन में टीबी जागरूकता के संदेश देने की पहल की है। सीधी जिले में स्थानीय “बघेली” भाषा में दीवार लेखन के माध्यम से सैकड़ों प्रेरक नारों को लिखा गया है, जो समुदाय के लोगों के बीच जागरूकता फैलाने में मदद कर रहे हैं। दतिया में आईसीएमआर टीम ने जेल के कैदियों की हैंडहेल्ड एक्स-रे तकनीक से स्क्रीनिंग की, जबकि मंडला जिले के कार्य स्थलों पर शिविर लगाकर 417 मजदूरों की जांच की गई। नीमच जिले में स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने टीबी मरीजों को पोषण सामग्री उपलब्ध कराकर उनके समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा देने की कोशिश की है।  

मुख्यमंत्री ने म.प्र. आईएएस एसोसिएशन के सिविल सर्विस मीट -2024 का किया शुभारंभ

भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी, जनता के जीवन में सकारात्मक बदलाव और व्यवस्थाओं को सुव्यवस्था में बदलने में सक्षम : मुख्यमंत्री डॉ. यादव विश्व में देश की विशिष्ट पहचान बनाने में आईएएस अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका  : मुख्यमंत्री डॉ. यादव सर्विस मीट का विचार मंथन नए दौर के नए मध्यप्रदेश के निर्माण में सहायक मुख्यमंत्री ने म.प्र. आईएएस एसोसिएशन के सिविल सर्विस मीट -2024 का किया शुभारंभ भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भारत जैसे विशाल और विविधताओं वाले देश की विश्व में विशिष्ट छवि बनाने में भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। आज भारत की अलग पहचान बनी है और देश को आदर-सम्मान के साथ देखा जाता है। भारतीय प्रशासनिक सेवा का स्वरूप अन्य सेवाओं से भिन्न है। कठोर परिश्रम के साथ-साथ ईश्वर प्रदत्त भाग्य से ही मनुष्य को भारतीय प्रशासनिक सेवा से जन सेवा का अवसर प्राप्त होता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मध्यप्रदेश आईएएस ऑफिसर्स एसोसिएशन द्वारा आयोजित सिविल सर्विस मीट-2024 का प्रशासन अकादमी में शुभारंभ कर कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का अंगवास्त्रम् भेंट कर स्वागत किया गया। मुख्य सचिव अनुराग जैन ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को प्रतीक चिन्ह भेंट किया। दक्षता से लिए गए निर्णयों से ही अधिकारी इतिहास बनाते हैं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पौराणिक संदर्भ का उल्लेख करते हुए कहा कि ईश्वर प्रदत्त यश का सदुपयोग जनहित में करना ही श्रेष्ठतम है। भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी, लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने और व्यवस्थाओं को सुव्यवस्था में बदलने में सक्षम हैं। व्यक्तिगत स्तर पर की गई ऐसी पहल, सुख और संतोष प्रदान करती है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के अनुसार बेहतर अवसरों के साथ अपनी दक्षता और सूझ-बूझ से लिए गए निर्णय और उनके बेहतर क्रियान्वयन से ही अधिकारी इतिहास बनाते हैं। निर्णयों के क्रियान्वयन में आईएएस अधिकारियों की दक्षता प्रशंसनीय मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि व्यवस्था संचालन में विधायिका, न्यायपालिका और कार्यपालिका के अलग-अलग दायित्व हैं। उनके निर्वहन की अपनी-अपनी विशेषज्ञता भी है। इन सभी संस्थाओं ने लोकतंत्र को बनाए रखने में अपने-अपने स्तर पर योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि निर्णय लेना या एक विचार देना सरल है, लेकिन बड़े फलक पर उसका क्रियान्वयन चुनौती पूर्ण होता है। भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की निर्णयों के क्रियान्वयन में दक्षता प्रशंसनीय है। सेवाकाल के बाद भी देश की उन्नति और जनकल्याण में दें योगदान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिविल सर्विस मीट का विचार मंथन नए दौर के नए मध्यप्रदेश के निर्माण में सहायक होगा। प्रशासनिक अधिकारियों के लंबे अनुभवों को साझा करने के लिए किसी संस्था की संरचना करने पर विचार होना चाहिए। इससे अलग-अलग क्षेत्र के व्यक्तियों के साथ विचारों के आदान-प्रदान तथा सेवाकाल के बाद भी देश की उन्नति और जन कल्याण में अपना योगदान देने के लिए मंच उपलब्ध हो सकेगा। वैश्विक परिदृश्य में हो रही घटनाओं की दृष्टि से भारत का वर्तमान समय बहुत अनुकूल और सकारात्मक है। पड़ौसी देशों में हो रहे घटनाक्रम से इसका आंकलन किया जा सकता है। विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में भारत की व्यवस्थाएं विश्व में आदर्श प्रस्तुत कर रही हैं। इसमें भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों का योगदान महत्वपूर्ण है। सर्विस मीट, टीम भावना विकसित करने और नवाचारों को जानने व सीखने में सहायक एसोसिएशन के अध्यक्ष मोहम्मद सुलेमान ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव से परिवार के मुखिया के रूप में सदैव मार्गदर्शन प्राप्त होता है। तीन दिवसीय सर्विस मीट से एसोसिएशन के सदस्यों में टीम भावना विकसित करने, नवाचारों को जानने और सीखने तथा बेहतर परिणाम देने के लिए स्वयं को तैयार करने का अवसर प्राप्त होता है। जी-20 इंडिया के शेरपा तथा नीति आयोग के पूर्व अध्यक्ष अमिताभ कांत रहे उपस्थित कार्यक्रम में मुख्य सचिव अनुराग जैन, जी-20 इंडिया के शेरपा तथा नीति आयोग के पूर्व अध्यक्ष अमिताभ कांत, प्रशासन अकादमी के महानिदेशक जे.एन. कंसोटिया, एसोसिएशन के पदाधिकारी अनुपम राजन, विवेक अग्रवाल सहित भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी उपस्थित थे।  

एमवाय अस्पताल में केवल सात दिन की दवाइयां मिलती थीं, अब एक साथ एक माह की दवाई मिलने लगी

 इंदौर  मरीजों को अब अपनी दवाई लेने के लिए बार-बार शासकीय अस्पतालों के चक्कर नहीं लगाना पड़ेंगे, क्योंकि अब उन्हें एक साथ एक माह की दवाई मिलने लगी है। इससे सिर्फ शहर के ही नहीं एमवाय अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले संभागभर के मरीजों को लाभ मिलने लगा है। अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि पहली बार प्रदेश की किसी शासकीय अस्पताल में इस तरह की पहल की जा रही है। अभी तक एमवाय अस्पताल में मरीजों को सिर्फ सात दिन की दवाईयां मिलती थी, जिसके कारण धार, झाबुआ, अलीराजपुर, देवास, खरगोन, खंडवा आदि से आने वाले मरीजों को समस्या होती थी। इसमें आने-जाने के खर्च के साथ ही समय भी खराब होता था। कई बीमारियां ऐसी होती है जिनकी दवाईयां लंबे समय तक चलती है। जैसे डायबीटिज, हाइपरटेंशन आदि। यह सुविधा उन्हीं मरीजों को दी जा रही है, जिन्हें बार-बार विशेषज्ञों के परामर्श की आवश्यकता नहीं होती है। फ्री मिलती हैं दवाईयां बता दें कि शासकीय अस्पतालों में सरकार की ओर से आने वाली विभिन्न बीमारियों की सभी दवाईयां मरीजों को निश्शुल्क दी जाती है। हालाकि अभी भी कई गंभीर बीमारियों की दवाईयां ऐसी है जो मरीज को बाहर से ही खरीदना पड़ती है। एमवाय अस्पताल सहित अन्य अस्पताल में भर्ती जिन मरीजों की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होती है, उनकी मदद के लिए कई संस्थाएं भी कार्य कर रही है। बार-बार आने जाने का खर्च बच जाता है     डायबीटिज, हाइपरटेंशन के मरीज जिन्हें एक ही दवाई लंबे समय तक लेनी है, उन्हें अब अस्पताल में एक माह की दवाईयां दी जा रही है। इससे उनका आने-जाने का खर्च भी बच जाता है। मरीजों की समस्याओं को देखते हुए यह सुविधा शुरू की गई है।  

राष्ट्रीय बाल रंग का प्रति वर्ष भोपाल में होना देशभर में मध्यप्रदेश को गौरवान्वित करता- अमिताभ पांडे

भोपाल राष्ट्रीय बाल रंग का प्रति वर्ष भोपाल में होना देशभर में मध्यप्रदेश को गौरवान्वित करता है। यह एक ऐसा मौका होता है, जब देश के विभिन्न प्रांतों के बच्चे अपने राज्यों की संस्कृति को समेटे प्रतिभा का प्रदर्शन भोपाल में करते हैं। यह विचार शुक्रवार को निदेशक इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय प्रो. अमिताभ पांडे ने बाल रंग के शुभारंभ समारोह में व्यक्त किये। कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न संभागों से आये एक हजार से अधिक और विभिन्न प्रांतों के बच्चे मौजूद थे। निदेशक प्रो. पांडे ने कहा कि प्रति वर्ष बाल रंग में बच्चों के आने से मानव संग्रहालय में रौनक आ जाती है। तीन दिवसीय समारोह में बच्चे अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हैं। प्रतियोगिता में बच्चों में टीम भावना भविष्य में उनको जिम्मेदार नागरिक बनाने में काफी मददगार साबित होती है। उन्होंने कहा कि देश की एकता विभिन्न राज्यों की संस्कृतियों के सौहार्द मिलन से मजबूत होती है। प्रो. पांडे ने बच्चों को विभिन्न राज्यों में अधिक से अधिक मित्र बनाने की सलाह भी दी। उन्होंने कार्यक्रम के आयोजन के लिये स्कूल शिक्षा विभाग को बधाई दी। संचालक लोक शिक्षण डी.के. कुशवाह ने बताया कि बाल रंग बच्चों में नयी ऊर्जा पैदा करता है। उन्होंने कहा कि बाल रंग में लगने वाली प्रदशर्नी की थीम वर्ष 2047 में विकसित भारत रखी गयी है। स्वागत संबोधन में शिक्षा विभाग के अधिकारी अरविन्द कुमार चौरगड़े ने बताया कि पहले दिन प्रदेश के विभिन्न संभागों के बच्चे लोक संस्कृति पर आधारित नृत्यों और विविध कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां देंगे। बाल रंग में 21 और 22 दिसम्बर को 17 राज्यों सहित 5 केन्द्र शासित प्रदेश के करीब 10 हजार बच्चे सहभागिता करेंगे। विविध गतिविधियां बाल रंग में स्कॉउट कैम्प, विजन-2024 पर केन्द्रित सजीव प्रदशर्नी, विभिन्न राज्यों के व्यंजनों के स्टॉल लगाये गये हैं। बाल रंग की सबसे खास बात यह है कि यहां प्रदेश के विभिन्न प्रांतों की संस्कृति की दर्शाने के लिये राज्यों की स्टॉल लगाये गये हैं। इन स्टॉलों में उन राज्यों के पुरातत्व स्थल, लोक संस्कृति, त्यौहार, मंदिर, पारंपरिक वेश-भूषा देखने को मिलेगी। केरल राज्य के पंडाल में भोपाल के जवाहर चौक स्थित कस्तूरबा स्कूल की बालिकाओं ने मॉडल के जरिये वहां की संस्कृति को दिखाने का प्रयास किया है। यहाँ पर केरल का प्रसिद्ध पद्मनाभस्वामी मंदिर का मॉडल प्रदर्शित किया गया है। प्राचार्य श्रीमती उषा भदौरिया और श्रीमती शालिनी श्रीवास्तव ने बताया कि केरल राज्य में ओणम का त्यौहार पारंपरिक रीति-रिवाजों और विशेष वेश-भूषा के साथ बनाया जाता है। बाल रंग में तात्कालिक भाषण, लोक गीत, शास्त्रीय नृत्य, सुगम संगीत, सामुहिक लोक नृत्य, दिव्यांगों की साहित्यिक एवं सांस्कृतिक प्रतियोगिताएं, वेद पाठ, नृत्य नाटिका, योग जैसी अनेक प्रतियोगिताएं होंगी। बाल रंग में 21 और 22 दिसम्बर को प्रात: 10 बजे से शाम 5 बजे तक आयोजन होंगे।  

डॉ. बी.आर. अम्बेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय महू का हुआ छठवाँ दीक्षांत समारोह

महू राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने सम्मानपूर्वक जीवन जीने के लिए समरस, समावेशी राष्ट्र के संविधान निर्माता डॉ. बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर को नमन करते हुए कहा कि बाबा साहेब ने अपनी अद्भुत दूरदृष्टि से हमें संविधान के रूप में जाति, लिंग, भाषा, धर्म, धन और शक्ति बल आदि के भेदभावों से मुक्त समावेशी, समरस समाज की धरोहर सौंपी है। राज्यपाल पटेल शुक्रवार को महू में डॉ. बी.आर. अम्बेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय के 6वें दीक्षांत समारोह में अध्यक्षीय उद्बोधन दे रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मुख्य आतिथ्य में आयोजित समारोह में जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय लखनऊ के पूर्व कुलाधिपति डॉ. प्रकाश सी बरततूनिया, विधायक सुउषा ठाकुर उपस्थित थे। राज्यपाल पटेल ने कहा कि हमारा संविधान प्रेरणादायक जीवंत दस्तावेज और स्वतंत्र भारत का आधुनिक धर्म ग्रंथ है, जिसका समर्पित भाव से पालन, हर भारतीय का परम कर्तव्य है। विद्यार्थियों का दायित्व है कि संविधान का अपने आचरण, व्यवहार में समर्थन और संरक्षण करें। समाज के तुलनात्मक रूप से वंचित, पिछड़े वर्गों, समुदायों के भाई बहनों के विकास की जवाबदारी, जिम्मेदारी के साथ स्वीकार करें। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने बाबा साहेब के सपनों के अनुरूप राष्ट्र निर्माण के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति के द्वारा शिक्षण संस्थानों को ऐसे नागरिकों को तैयार करने का अवसर दिया है। यह जरूरी है कि विश्वविद्यालय और शिक्षक, हमारी संस्कृति के अनुरूप देश और समाज की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए सामाजिक समृद्धि और समानता के प्रति समर्पित युवा ध्वज वाहक तैयार करें। राज्यपाल ने शिक्षकों से अनुरोध किया कि शिक्षण प्रणाली को वह विद्यार्थियों की उद्यमिता को बढ़ावा देने, नवाचार की प्रेरणा देने, चिंतन, नेतृत्व के गुणों के साथ सामाजिक सरोकारों में सहभागिता के संस्कार प्रदान करने वाली बनाएं। युवा ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति है, देश जब आजादी की 100वीं सालगिरह मनाएगा, देश का नेतृत्व युवा कर रहे होंगे, उस समय विकसित भारत का स्वरूप कैसा हो उसके लिए युवाओं को आज से ही कार्य करना होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि बाबा साहेब अंबेडकर ने विपरीत परिस्थितियों में शिक्षा दीक्षा ग्रहण करने को गौरव की बात बताते हुए अनुकरणीय बताया। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब ने जो सीखा, वो समाज को समर्पित किया। देश का संविधान इस बात का प्रमाण है जिसमें भारत की विविधता भरी संस्कृति, जनजाति नागरिक आदि को एक साथ जोड़ा गया है। बाबा साहेब ने चित्रों के संयोजन से संविधान को गौरवान्वित किया है। उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री रहने के दौरान इस विश्वविद्यालय में कई संकाय शुरू किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जरूरत के मुताबिक और नए संकाय खोले जाएँगे। जनवरी माह में राज्यपाल की अध्यक्षता में कुलगुरूओं की बैठक में इस पर निर्णय लिए जाने का मुख्यमंत्री ने भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि युवाओं के कौशल विकास और स्पष्ट दिशा देने के साथ ही विश्वविद्यालय की आत्मनिर्भरता के लिए प्रयास किए जाएँगे। मुख्यमंत्री ने दीक्षांत समारोह के माध्यम से विद्यार्थियों को उपाधि देने के सिलसिले को आरम्भ करने में राज्यपाल की पहल का अभिनंदन भी किया। उन्होंने विद्यार्थियों को शिक्षा दीक्षा के ज़रिए अपना भविष्य उज्जवल बनाने की शुभकामनाएं भी दीं। समारोह को सारस्वत अतिथि बरतूनिया ने भी संबोधित किया दीक्षांत समारोह में संस्थान के 16 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई। अम्डेकर विश्वविद्यालय के द्वारा विगत 5 वर्षों में 100 से अधिक शोधार्थियों ने पीएचडी की उपाधि प्राप्त की है। वहीं बीते सत्र में विश्वविद्यालय से 851 विद्यार्थियों ने डिग्री हासिल की है। इसमें से पीएचडी करने वाले विद्यार्थियों को मंच पर डिग्री प्रदान की गई। आरंभ में अतिथियों द्वारा माँ सरस्वती, भगवान बुद्ध और बाबासाहेब की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलित कर समारोह का शुभारंभ किया। स्वागत उद्बोधन विश्वविद्यालय के कुलगुरु रामलाल अत्राम ने दिया। आभार कुलसचिव ने माना।  

अब विधानसभा के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष वेतन-भत्ता सहित अन्य परिलब्धियों पर लगने वाले आयकर को स्वयं भरेंगे

भोपाल मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री और मंत्रियों के बाद अब विधानसभा के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष वेतन-भत्ता सहित अन्य परिलब्धियों पर लगने वाले आयकर को स्वयं भरेंगे। अभी तक इसका भुगतान सरकार करती थी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर पहले मंत्रियों और बाद में विधानसभा अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष ने अपना आयकर स्वयं भरने की घोषणा की थी। इसे नियम में लाने के लिए विधानसभा में संसदीय कार्य विभाग द्वारा प्रस्तुत संशोधन विधेयक को सर्वसम्मति से पारित किया गया। संशोधन विधेयक प्रस्तुत किया संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने पहले विधानसभा अध्यक्ष-उपाध्यक्ष और फिर नेता प्रतिपक्ष वेतन भत्ता संशोधन विधेयक प्रस्तुत किया। इस पर चर्चा में भाग लेते हुए कांग्रेस विधायक ओमकार सिंह मरकाम ने कहा कि नियम बनाकर इसे बंधनकारी नहीं बनाया जाना चाहिए। यह अध्यक्ष के विवेक पर छोड़ा जाएगा कि आयकर वह स्वयं भरना चाहते हैं या सरकार भरे। सबकी परिस्थिति एक जैसी नहीं होती है। भौगोलिक दृष्टि से विधायक जितनी दूर से आते हैं और आप जितना वेतन भत्ता देते हैं, उतना तो डीजल में चला जाता है। मुख्य सचिव का वेतन अध्यक्ष से भी ज्यादा कुछ विधायकों का व्यवसाय है, वह थोड़ा भार संभाल लेते हैं पर सब ऐसे नहीं हैं। दिल्ली सहित अन्य प्रांतों में विधायकों का वेतन अधिक है, इस पर विचार करें। इसके साथ ही यह भी देखें किन्हें कितना वेतन-भत्ता मिल रहा है। मुख्य सचिव को वेतन हमारे अध्यक्ष से भी अधिक है। सर्वसम्मति से विधेयक को पारित किया गया सरकार को अध्यक्ष की सुविधाओं पर ध्यान देना चाहिए। इस पर अध्यक्ष ने कहा कि हमने और नेता प्रतिपक्ष ने स्वयं ही घोषित किया है कि अपना आयकर स्वयं भरेंगे, इसलिए नियम प्रक्रिया के अंतर्गत विधेयक प्रस्तुत किया गया है। बाद में इसे सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया। सदन में उठे उठाएं गए ये मुद्दे बीजेपी विधायक ने उठाया अवैध कॉलोनी का मुद्दा बीजेपी विधायक विष्णु खत्री ने अपने विधानसभा क्षेत्र में अवैध कॉलोनियों के निर्माण का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि कृषि भूमि पर कॉलोनियां काटी जा रही हैं। इससे कृषि का रकबा लगातार कम हो रहा है। इसके साथ ही यहां रहने वाले लोगों को मूलभूत सुविधाओं का भी लाभ नहीं मिल पा रहा। नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि अवैध कॉलोनी विकसित न हो इसके लिए सरकार लगातार काम कर रही है। जहां से सूचना मिलती है वहां कार्रवाई की जाती है। सरकार और कठोर कानून बनाएगी, ताकि सजा और जुर्माना ज्यादा हो। नेता प्रतिपक्ष ने उठाए ये सवाल नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि सरकार कांग्रेस विधायकों को विकास की राशि देने में भेदभाव कर रही है। इसके विरोध में कांग्रेस विधायक अपना वेतन वापस करेंगे। इधर, नल जल योजना को लेकर कांग्रेस के प्रदर्शन और आरोपों पर बीजेपी ने भी पलटवार किया। विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि आज नल जल योजना के माध्यम से घर-घर पानी पहुंच रहा है। कांग्रेस के समय बहुत दिक्कत होती थी। कांग्रेस ने सिर्फ भ्रष्टाचार ही किया है। आज बंटी-बबली की जोड़ी घूम रही है। शर्मा ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को बंटी-बबली बताया। इधर, कैग रिपोर्ट को लेकर भी कांग्रेस ने सरकार को घेरा। कांग्रेस विधायक महेश परमार ने कहा कि अस्पताल, मेडिकल कॉलेज, ग्रामीण विकास , स्कूल शिक्षा हर जगह भ्रष्टाचार हो रहा है। कैग की रिपोर्ट हर साल आती है। उसमें खुलासे होते हैं। इस पर सरकार को ध्यान देना चाहिए। 1. मध्य प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र 2024 में कौन-कौन से महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए गए हैं? मध्य प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र 2024 में अनुपूरक बजट, खाद संकट, अवैध कॉलोनियों के निर्माण, नल जल योजना, और भ्रष्टाचार के आरोप जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए गए हैं। 2. अनुपूरक बजट कब पेश किया गया और कितना था? मध्य प्रदेश में अनुपूरक बजट 17 दिसंबर 2024 को पेश किया गया, जिसका कुल आकार 22,224 करोड़ रुपये था। 3. शीतकालीन सत्र में किस विधेयक को पास किया गया? सत्र के चौथे दिन, विधानसभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के वेतन भत्ते से संबंधित संशोधन विधेयक पास किया गया, जिसके तहत वे अपनी आयकर की रकम खुद जमा करेंगे। 4. अवैध कॉलोनियों के मुद्दे पर क्या चर्चा हुई? बीजेपी विधायक विष्णु खत्री ने कृषि भूमि पर अवैध कॉलोनियों के निर्माण का मुद्दा उठाया। नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि सरकार अवैध कॉलोनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रही है और कानून को और सख्त किया जाएगा। 5. “MP Assembly Winter Session 2024” में कांग्रेस ने किन मुद्दों पर सरकार को घेरा? कांग्रेस ने नल जल योजना, विकास निधि में भेदभाव और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सरकार को घेरा। विधायक महेश परमार ने कैग रिपोर्ट का हवाला देते हुए सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार के आरोप लगाए।  

मध्य प्रदेश में मौसम ने करवट बदली, अगले 4 दिन रात का टेम्प्रेचर 3 डिग्री तक बढ़ने की संभावना, आज इन जिलों में कोहरे का असर

भोपाल  मध्य प्रदेश में मौसम ने करवट बदली है। हवा का रुख बदलने से न्यूनतम तापमान में धीरे-धीरे बढ़ोतरी हुई है। पारा बढ़ने से कड़ाके की ठंड से राहत मिली है। मौसम विभाग के मुताबिक, एमपी में अगले 3-4 दिन तक रात का टेम्प्रेचर 2 से 3 डिग्री तक बढ़ सकता है। ग्वालियर, चंबल और सागर संभाग में कोहरा रहेगा। इसके बाद फिर कड़ाके की ठंड का दौर शुरू होगा। शुक्रवार (20 दिसंबर) को ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना सहित 8 शहरों में कोहरे का असर रहेगा। दिन में धूप भी खिली रह सकती है। इन शहरों में रात का पारा सबसे कम हिल स्टेशन पचमढ़ी में सबसे ज्यादा सर्दी पड़ रही है। पचमढ़ी में रात का टेम्प्रेचर 3.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। शहडोल के कल्याणपुर में 3.7 डिग्री, मंडला में 4.5 डिग्री, उमरिया में 5.3 डिग्री तापमान रहा। भोपाल और ग्वालियर में 6.4 डिग्री पारा दर्ज किया गया। जबलपुर 5.2, उज्जैन 9.8 डिग्री और इंदौर में 11.8 डिग्री सेल्सियस रहा। उमरिया में 5.3 डिग्री, नौगांव में 5.4 डिग्री, राजगढ़ में 5.6 डिग्री और टीकमगढ़ में 6.7 डिग्री पारा रिकॉर्ड हुआ। रीवा, रायसेन, मलाजखंड और छिंदवाड़ा में 8 डिग्री के नीचे रात का पारा दर्ज किया गया। जानें क्यों बढ़ रहा एमपी का पारा मौसम वैज्ञानिक के मुताबिक, एमपी में अलग-अलग स्थानों पर सक्रिय मौसम प्रणालियों के प्रभाव से हवा का रुख बदला है। इसलिए प्रदेश में शीतलहर नहीं चल रही है। अगले 2-3 दिन तक रात के टेम्प्रेचर में बढ़ोतरी रहेगी। जिससे ठंड का असर कम रहेगा। उत्तर भारत में वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) एक्टिव है। इसके गुजरने के बाद बर्फबारी होगी। जिससे उत्तरी हवाएं फिर से चलने लगेंगी। इसके बाद प्रदेश में कड़ाके की ठंड का दौर फिर से आएगा। आज इन शहरों में कोहरे का असर ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़ और छतरपुर में आज (शुक्रवार) को कोहरे का असर रहेगा। दिन में धूप भी खिली रह सकती है। अभी पचमढ़ी ही सबसे ठंडा, पारा 3.3 डिग्री प्रदेश का इकलौता हिल स्टेशन पचमढ़ी अभी सबसे ठंडा है। यहां बुधवार-गुरुवार की रात में टेम्प्रेचर 3.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। शहडोल के कल्याणपुर में 3.7 डिग्री, मंडला में 4.5 डिग्री, उमरिया में 5.3 डिग्री, उमरिया में 5.3 डिग्री, नौगांव में 5.4 डिग्री, राजगढ़ में 5.6 डिग्री और टीकमगढ़ में 6.7 डिग्री रहा। रीवा, रायसेन, मलाजखंड, छिंदवाड़ा में 8 डिग्री के नीचे रहा। बड़े शहरों में जबलपुर सबसे ठंडा है। यहां तापमान 5.2 डिग्री रहा। भोपाल-ग्वालियर में 6.4 डिग्री, उज्जैन में 9.8 डिग्री और इंदौर में 11.8 डिग्री सेल्सियस रहा। आज इन जिलों में कोहरे का असर मौसम विभाग ने शुक्रवार को भी प्रदेश की कुछ जिलों में कोहरा छाए रहने की चेतावनी जारी की है। ग्वालियर, दतिया, भिंड, मुरैना, श्योपुर, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में कोहरे का असर रहेगा। दिन में धूप भी खिली रह सकती है। हालांकि किसी भी जिले में शीतलहर या अन्य तरह की ठंड को लेकर कोई विशेष चेतावनी जारी नहीं की गई है। दिन का पारा भी बढ़ा एमपी में पिछले एक सप्ताह तेज सर्दी पड़ी। कड़ाके की ठंड से लोगों की कंपकंपी छूट गई। अब तीन-चार दिन सर्दी से राहत मिलेगी। हवा कर रुख बदलने से इंदौर, धार, गुना, नर्मदापुरम, खंडवा, खरगोन, नरसिंहपुर, सागर, सिवनी जैसे शहरों में तो पारा 10-11 डिग्री तक पहुंच गया है। अधिकांश शहरों में दिन का तापमान में बढ़ा है। दमोह, सिवनी, खजुराहो, मंडला, नवगांव, रीवा, सागर, टीकमगढ़, उमरिया, मलाजखंड, बैतूल, गुना, इंदौर, रतलाम, रायसेन सहित कई जिलों में दिन के तापमान में भी 3 डिग्री तक बढ़ोतरी हुई है। इसलिए बदला मौसम मौसम वैज्ञानिक वीएस यादव ने बताया, पिछले सप्ताह पूरे प्रदेश में शीतलहर और कोल्ड डे यानी, ठंडे दिन की कंडिशन रही, जो दो-तीन दिन से खत्म हो गई है। इस कारण अगले 2-3 दिन तक रात के टेम्प्रेचर में बढ़ोतरी रहेगी। जिससे ठंड का असर कम रहेगा। उत्तर भारत में एक्टिव वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) एक्टिव है। इसके गुजरने के बाद बर्फबारी होगी। जिससे उत्तरी हवाएं फिर से चलने लगेंगी। इसके बाद प्रदेश में कड़ाके की ठंड का दौर फिर से आएगा। दिसंबर में रिकॉर्ड तोड़ चुकी ठंड इस बार दिसंबर महीने में ही ठंड रिकॉर्ड तोड़ चुकी है। स्थिति यह रही कि पूरे प्रदेश में जनवरी से भी ठंडा दिसंबर रहा। भोपाल समेत कई शहरों में ठंड ने रिकॉर्ड तोड़ दिए। 9 दिन से शीतलहर चली। बुधवार से शीतलहर का दौर थमा। भोपाल में दिसंबर की सर्दी ने 58 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर समेत कई जिलों में स्कूलों की टाइमिंग बदल दी गई है, जबकि भोपाल के वन विहार नेशनल पार्क में जानवरों को सर्दी से बचाने के लिए हीटर लगाए गए हैं। भगवान को भी ठंड से बचाने के लिए जतन किए जा रहे हैं। पहले ही पखवाड़े में तेज सर्दी सीनियर वैज्ञानिक डॉ. वेदप्रकाश सिंह ने बताया, उत्तर के मैदानी इलाकों से जब ठंडी हवा और पहाड़ी इलाकों से बर्फीली हवा हमारे यहां आती है, तब तेज ठंड पड़ती है। यह सब उत्तर भारत में पहुंचने वाले मौसमी सिस्टम वेस्टर्न डिस्टरबेंस के कारण होता है। ऐसे में यदि जेट स्ट्रीम भी बन जाए तो सर्दी दोगुनी हो जाती है। इस बार यही हो रहा है। इस कारण अबकी बार पहले ही पखवाड़े में तेज सर्दी का दौर शुरू हो गया। अमूमन दिसंबर के दूसरे सप्ताह में तेज ठंड पड़ती है। पिछले 10 साल से यही ट्रेंड रहा है। नवंबर में भी सर्दी तोड़ चुकी रिकॉर्ड बता दें कि नवंबर में भी सर्दी रिकॉर्ड तोड़ चुकी है। भोपाल में तो 36 साल का रिकॉर्ड टूटा है। इंदौर, उज्जैन, जबलपुर और ग्वालियर में भी पारा सामान्य से 7 डिग्री तक नीचे रहा। अब दिसंबर में भी कड़ाके की ठंड पड़ रही है।

पंडित प्रदीप मिश्रा की शिव महापुराण कथा के दौरान मची भगदड़, कई महिलाएं और बुजुर्ग दबे

मेरठ मेरठ में शुक्रवार को पंडित प्रदीप मिश्रा की शिव महापुराण कथा के दौरान भगदड़ मच गई। इसमें कई महिलाएं और बुजुर्ग दब गए। कहा गया है कि कथा के दौरान भीड़ बेकाबू होने से भगदड़ मची। हादसे में कई घायल हो गए। बता दें कि आज कथा का छठा दिन है। कल कथा का अंतिम दिन होगा। ऐसे में आज लाखों की संख्या में भक्तों की भीड़ जमा है। शुरुआती जानकारी के अनुसार कथा में पहुंचने वालों की भीड़ बेकाबू हो रही थी। ऐसे में वहां तैनात सुरक्षा कर्मियों ने रोकने की कोशिश की। लोगों ने पहले तो धक्का-मुक्की शुरू की इसके बाद वहां भगदड़ मच गई। पिछले 6 दिनों से चल रही कथा में रोज एक लाख से अधिक लोग पंडित प्रदीप मिश्रा को सुनने के लिए पहुंच रहे हैं। पुलिस बल पहले से ही पंडाल और उसके आस-पास तैनात है। भगदड़ की जानकारी होते ही अन्य थानों की पुलिस और प्रशासन अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए हैं। बताया जा रहा है कि हादसे में कई महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग घायल हो गए हैं। भगदड़ में आधा दर्जन महिलाएं गंभीर रूप से चोटिल हो गई हैं। सभी को इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल ले जाया गया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर भीड़ को काबू किया। फिलहाल स्थिति सामान्य बताई जा रही है। साथ ही मेडिकल टीम भी मौके पर पहुंच गई है। एंट्री गेट पर अव्यवस्था की वजह से धक्का-मुक्की हुई। मेरठ के एसएसपी ने बताया कि भीड़ ज्यादा होने की वजह से ऐसे हालात बने और कोई भी गंभीर रूप से घायल नहीं हुआ है। स्थिति पूरी तरह से संभाल ली गई है। घटनास्थल पर कई पुलिस अधिकारी, मेडिकल की टीम और एम्बुलेंस मौजूद हैं ।

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