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बंदूक की नोक पर किया युवक का अपहरण, मांगी 10 लाख की फिरौती, 4 आरोपियों को किया गिरफ्तार

रायसेन  मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के बरेली में 13 साल के बच्चे का अपहरण का मामला सामने आया है। यहां सतलापुर थाना क्षेत्र के मारुती नगर में ट्यूशन से पढ़कर घर लौट रहे 13 साल के एक छात्र का अपहरण कर लिया गया। इसके बाद आरोपियों ने फोन कर परिजनों से 10 लाख रुपए फिरौती की मांग की। इस दौरान बच्चे के पिता से कहा कि अगर जल्द से जल्द पैसों का इंतजाम नहीं हुआ था, सुबह तक बेटे की लाश मिलेगी। पुलिस ने मामले में 4 आरोपियों को दबोचा है। जानकारी के मुताबिक 13 साल का कक्षा 7वीं का छात्र नवनीत धाकड़ बरेली के मारुति नगर में मंगलवार की शाम 6:00 बजे के लगभग ट्यूशन पढ़कर घर आ रहा था। इस दौरान कार से आए आरोपियों ने रास्ता पूछने के बहाने छात्र को बुलाया फिर जबरदस्ती बंदूक की नोक पर वाहन में बैठाकर फरार हो गए। इसके बाद छात्र के पिता को फोन कर एक घंटे के अदंर 10 लाख रुपए की मांग कर दी। इधर फोन आने के बाद घबराए पिता ने तत्काल  इसकी सूचना सतलापुर थाना पुलिस को दी। जिसके बाद थाना प्रभारी विजय त्रिपाठी प्लानिंग के तहत पैसों का इंतजाम कर आरोपियों के बताए पते के अनुसार बच्चें के परिजनों को मौके पर भेजा। जैसे ही आरोपी वहां आए पुलिस ने उन्हें धर दबोचा। घटना का मुख्य आरोपी शिवम साहू और शुभम साहू सहित दो अन्य आरोपी को बरेली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। वहीं बच्चे को भी सही सलामत बरामद कर लिया है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।

आयकर विभाग के अफसरों ने टीम के साथ भोपाल के आधा दर्जन से अधिक इलाकों में छापेमारी की

भोपाल आयकर विभाग ने बुधवार सुबह भोपाल में त्रिशूल कंस्ट्रक्शन कंपनी के मालिक राजेश शर्मा और उनके आधा दर्जन सहयोगियों के ठिकानों पर छापा मार कार्रवाई की हैं।खनन और कंस्ट्रक्शन कारोबार से जुड़े राजेश शर्मा पूर्व मुख्य सचिव के करीबी माने जाते हैं। इसके साथ ही पूर्व मंत्री से भी उनकी नजदीकी बताई जा रही है। आयकर विभाग के अफसरों ने टीम के साथ भोपाल के आधा दर्जन से अधिक इलाकों में छापेमारी की है। नीलबड़, रातीबड़, सूरज नगर, मेंडोरा के अलावा भोपाल के कस्तूरबा नगर स्थित राजेश शर्मा के आवास पर सीआरपीएफ टीम के साथ आयकर विभाग की टीमें जांच कर रही हैं। राजेश शर्मा के अलावा उनके सहयोगी दीपक भावसार, विनोद अग्रवाल और अन्य ठिकानों पर भी कार्यवाही जारी है राजेश शर्मा त्रिशूल कंस्ट्रक्शन कंपनी के मालिक होने के साथ भोपाल में क्रेशर संचालकों के संगठन का नेतृत्व भी करते रहे हैं। उनके द्वारा राजधानी और आसपास के इलाकों में खदानों के ठेके और क्रेशर संचालन का काम भी किया जाता रहा है। इसके साथ ही वे कंस्ट्रक्शन कारोबार से भी जुड़े हैं। सीएम राइज स्कूल का ठेका भी मिला था त्रिशूल कंस्ट्रक्शन कंपनी के संचालक राजेश शर्मा की सत्ता पक्ष के कई नेताओं से खासी दोस्ती है। इसके चलते ही शर्मा को सीएम राइज स्कूलों के कंस्ट्रक्शन का भी कार्य से मिला है। रायसेन का सीएम राइज स्कूल शर्मा द्वारा ही बनाया जा रहा है। शर्मा बीजेपी सरकार में पूर्व मंत्री रहे रामपाल सिंह के करीबी बताए जाते हैं। इसके अलावा स्टोन क्रेशर के कारोबार से भी शर्मा और उनके सहयोगियों ने मोटी कमाई की है। मौके पर दो दर्जन से ज्यादा CRPF जवान मौजूद जानकारी के मुताबिक मौके पर 25-30 CRPF जवान मौजूद हैं। इसके साथ ही एक रियल एस्टेट कारोबारी के यहां भी आईटी के छापे की खबर है। दोनों जगहों पर इनकम टैक्स की छापेमार कार्रवाई जारी है। इनके यहां भी IT का छापा इसके अलावा दीपक भावसार, विनोद अग्रवाल, रूपम शिवानी के यहां भी आईटी के छापे की खबर है। ये सभी जमीन की खरीद ब्रिकी का काम करते हैं।  

MP में चार से पांच दिन तक टेम्प्रेचर में बढ़ोतरी रहेगी, 9 दिन शीतलहर की चपेट में रहा प्रदेश; ग्वालियर-चंबल में आज कोहरा

भोपाल  मध्य प्रदेश में हाड़ कंपाने वाली सर्दी के तेवर कम होने का नाम ही नहीं ले रहे। प्रदेश के सभी जिलों में ठंड का तेज असर दिखाई दिया। लोग रजाई में दुबकने के लिए मजबूर हो रहे हैं। मंगलवार को भी राजधानी भोपाल सहित 7 जिलों में रात का तापमान 5 डिग्री सेल्सियसस से नीचे रहा। राज्य के 10 शहरों में शीतलहर चली। प्रदेश में सबसे कम तापमान पचमढ़ी में 1.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ। इसलिए बदला मौसम मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार उत्तर भारत के राज्यों से ठंडी हवाएं प्रदेश की ओर आ रही हैं। उत्तर भारत के पहाड़ी क्षेत्रों में तापमान काफी कम हैं। वहीं से लगातार आ रही सर्द हवाओं के कारण मध्य प्रदेश में ठंड के तेवर तीखे बने हुए हैं। वहीं, राजस्थान पर एक प्रेरित चक्रवात के बनने से हवाओं का रुख बदला है। इसके प्रभाव से कड़ाके की ठंड से राहत मिलने का अनुमान नजर आ रहा है। मध्यप्रदेश में कड़ाके की ठंड से लोगों को अगले 4 से 5 दिन तक थोड़ी राहत मिल सकती है। मौसम विभाग ने बुधवार से दिन और रात के टेम्प्रेचर में बढ़ोतरी होने का अनुमान जताया है। हालांकि, कुछ जिलों में कोहरे का असर रह सकता है। बुधवार सुबह ग्वालियर-चंबल में कोहरा .मौसम वैज्ञानिक वीएस यादव ने बताया, शीतलहर और कोल्ड डे यानी, ठंडे दिन की कंडीशन खत्म हो गई है। चार से पांच दिन तक टेम्प्रेचर में बढ़ोतरी रहेगी। जिससे ठंड का असर कम रहेगा। उत्तर भारत में एक्टिव वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) के गुजरने के बाद बर्फबारी होगी। जिससे उत्तरी हवाएं फिर से चलने लगेंगी। इसके बाद प्रदेश में कड़ाके की ठंड का दौर फिर से आएगा। आज इन जिलों में कोहरा ग्वालियर, दतिया, मुरैना, भिंड में कोहरा रहेगा। शिवपुरी के कुछ हिस्से में भी हल्का कोहरा रह सकता है। यहां 5 डिग्री के नीचे पहुंचा पारा भोपाल, पचमढ़ी, राजगढ़, खजुराहो, मंडला, नौगांव, उमरिया में सोमवार—मंगलवार की रात का तापमान पांच डिग्री से कम पर रहा। वहीं, भोपाल, सीहोर, विदिशा, शाजापुर, उमरिया, मंडला, नौगांव, पचमढ़ी में शीतलहर चली। शहडोल और सिवनी में तीव्र शीतलहर का प्रभाव रहा। कहां कितना पारा प्रदेश में सबसे कम न्यूनतम तापमान हिल स्टेशन पचमढ़ी में 1.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ। मैदानी जिलों की बात करें तो मंडला में तीन, उमरिया में तीन, नौगांव में 3.8, भोपाल में 4, राजगढ़ में 4.4, खजुराहो में 4.4, जबलपुर में पांच, उज्जैन में 8, इंदौर में 10.6 और ग्वालियर में 5 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम तापमान दर्ज हुआ। हालांकि प्रदेश के अधिकतम तापमान में अधिकांश जिलों में हल्की वृद्धि देखने को मिली। इंदौर में तो अधिकतम तापमान बढ़कर 30.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। मौसम विभाग का पूर्वानुमान मौसम विभाग ने बुधवार को भी कई जिलों में शीत लहर पाला और कोहरा छाए रहने को लेकर चेतावनी जारी की है। विदिशा, सीहोर, भोपाल, राजगढ़, शाजापुर, शहडोल, उमरिया, जबलपुर, सिवनी, मंडला, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी जिलों में शीत लहर चल सकती है। वहीं रायसेन नर्मदा पुरम जिलों में पाला पड़ सकता है और शीत लहर भी चल सकती है। ग्वालियर, दतिया, भिंड और मुरैना जिले में हल्के से लेकर मध्यम कोहरा छाया रह सकता है। ठंड हो सकती है कम राजस्थान पर बने प्रेरित चक्रवात के कारण प्रदेश के अधिकतर क्षेत्रों में हवाओं का रुख दक्षिण-पश्चिमी होने लगा है। इस वजह से रात के तापमान में अब धीरे-धीरे बढ़ोतरी होने लगेगी। बुधवार से एक नए पश्चिमी विक्षोभ के भी सक्रिय होने के आसार हैं। भोपाल में 4 डिग्री, ग्वालियर-जबलपुर में 5 डिग्री पारा सोमवार-मंगलवार की रात में कई शहरों में रात के टेम्प्रेचर में गिरावट दर्ज की गई। इकलौते हिल स्टेशन पचमढ़ी में पारा 1.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इस वजह से यह शिमला, नैनीताल, जम्मू शहर, कटरा, धर्मशाला, पालमपुर, देहरादून से भी ठंडा रहा। भोपाल में 4 डिग्री तापमान दर्ज किया गया। ग्वालियर-जबलपुर में 5 डिग्री, जबकि इंदौर में 10.6 डिग्री और उज्जैन में 8 डिग्री दर्ज किया गया। पचमढ़ी के अलावा मंडला, उमरिया, नौगांव, राजगढ़, खजुराहो में भी कड़ाके की ठंड रही। मंडला-उमरिया में 3 डिग्री, नौगांव में 3.8 डिग्री, राजगढ़ में 4.4 डिग्री दर्ज किया गया। टीकमगढ़, रायसेन, रीवा, छिंदवाड़ा, मलाजखंड और सतना में तापमान 7 डिग्री से नीचे रहा। हालांकि, मंगलवार को दिन के तापमान में 1 से 2 डिग्री की बढ़ोतरी हुई है। इस बार रिकॉर्ड तोड़ चुकी ठंड, जनवरी से भी ठंडा रहा दिसंबर इस बार ठंड रिकॉर्ड तोड़ चुकी है। स्थिति यह रही कि पूरे प्रदेश में जनवरी से भी ठंडा दिसंबर रहा। भोपाल समेत कई शहरों में ठंड ने रिकॉर्ड तोड़ दिए। पिछले 9 दिन से शीतलहर चली। भोपाल में दिसंबर की सर्दी ने 58 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर समेत कई जिलों में स्कूलों की टाइमिंग बदल दी गई है, जबकि भोपाल के वन विहार नेशनल पार्क में जानवरों को सर्दी से बचाने के लिए हीटर लगाए गए हैं।

Ladli Behna Yojana फिर जल्द ही शुरू होने वाला है नया रजिस्ट्रेशन, विधानसभा में से मिला अपडेट

भोपाल मध्य प्रदेश की चर्चित लाडली बहना योजना को लेकर बड़ी जानकारी सामने आई है. दरअसल, महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने विधानसभा में बताया कि इस योजना में 20 अगस्त 2023 के बाद नया रजिस्ट्रेशन शुरू नहीं किया गया है. एक सवाल के जवाब में उन्होंने इसकी जानकारी दी.बता दें कि सूबे की सियासत के चर्चा के केंद्र में रही इस योजना से सरकार पर बोझ भी पड़ रहा है. कुछ दिनों पहले सीएम मोहन यादव ने इसे स्वीकार किया था. मंत्री ने सदन में बताया कि ये योजना जारी है और पात्र लाभार्थियों को इसका लाभ भी दिया जा रहा है. उनसे ये सवाल कांग्रेस के विधायक प्रताप ग्रेवाल ने पूछा था जिसका उन्होंने लिखित जवाब दिया. मध्य प्रदेश में लाडली बहना योजना नवंबर 2023 में हुए विधानसभा चुनाव से करीब छह महीने शुरू की गई थी. इसके तहत राज्य सरकार पात्र महिलाओं को हर महीने 1250 रुपये उनके खाते में भेजती है. राज्य में इस योजना के लाभार्थियों की संख्या करीब 1.29 है.कांग्रेस विधायक ग्रेवाल ने सदन में योजना से संबंधित कई सवाल पूछे. इसमें इसके जारी रहने और नए रजिस्ट्रेशन से जुड़े सवाल शामिल थे. मंत्री भूरिया ने अपने लिखित जवाब में कहा कि पहले फेज में 20 अगस्त 2023 तक रजिस्ट्रेशन किए गए. नया रजिस्ट्रेशन अभी शुरू नहीं किया गया है. मंत्री ने यह भी कहा कि योजना के तहत नये आवेदन प्राप्त करने के लिये अलग से निर्देश जारी किये गये हैं. इसके साथ ही उन्होंने बताया कि प्री-रजिस्ट्रेशन 4 मार्च 2023 और 20 जुलाई 2023 को किया गया. इसके बाद चरणबद्ध तरीके से योजना को लागू किया गया. मंत्री ने बताया कि ये योजना जारी है और जो इसकी लाभार्थी हैं उन्हें इसका लाभ मिल रहा है.गौरतलब है कि मार्च 2023 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लाडली बहना योजना की घोषणा की थी. शुरुआत में इसके तहत 1000 रुपये प्रति महीने दिए जाते थे. अक्टूबर 2023 में इसकी राशि को बढ़ाकर 1250 किया गया था. क्या है लाडली बहना योजना? लाडली बहना योजना मध्य प्रदेश सरकार की एक महत्वपूर्ण योजना है, जिसका उद्देश्य प्रदेश की गरीब और पिछड़ी जातियों की महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान करना है। इस योजना के तहत महिलाओं को हर महीने ₹1250 की राशि दी जाती है, जो उनके जीवन स्तर को सुधारने में मदद करती है। भाजपा सरकार ने इस योजना को अपने चुनावी वादों में प्रमुखता से रखा था, और इसका वादा किया गया था कि इस राशि को ₹3000 तक बढ़ाया जाएगा। सरकार की स्थिति और विपक्ष का आरोप मध्य प्रदेश में इस योजना को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक मतभेद खुले तौर पर सामने आ रहे हैं। कांग्रेस ने इस सवाल को बार-बार उठाया है कि भाजपा सरकार ने चुनावी समय में लाडली बहन योजना में राशि बढ़ाने का वादा किया था, लेकिन अब तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। विपक्ष का आरोप है कि भाजपा ने सिर्फ वोट बैंक की राजनीति के लिए इस वादे का इस्तेमाल किया, और अब सत्ता में आने के बाद सरकार इस पर ध्यान नहीं दे रही। वहीं, सरकार का तर्क है कि योजना की प्रक्रिया को सही तरीके से लागू किया जा रहा है और वर्तमान समय में बजट के बारे में कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। क्या हो सकता है आगे? वर्तमान में, लाडली बहना योजना में किसी भी प्रकार की राशि वृद्धि या नई महिलाओं के पंजीकरण के लिए कोई ठोस कदम उठाने का कोई संकेत नहीं मिला है। वहीं, विपक्षी दल कांग्रेस का कहना है कि यदि सरकार ने जल्द ही इस मुद्दे पर कोई निर्णय नहीं लिया, तो वे इसे विधानसभा में फिर से उठाएंगे और जनता के बीच इस मामले को प्रमुख रूप से प्रसारित करेंगे। यह भी देखा जाएगा कि आने वाले बजट सत्र में क्या सरकार इस योजना के लिए कोई नया प्रस्ताव पेश करती है या नहीं। अगर ₹3000 की राशि के वादे को लागू नहीं किया गया, तो यह विधानसभा चुनाव में भाजपा के लिए एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है। इस बीच, लाडली बहन योजना के लाभार्थी महिलाएं सरकार के फैसले का इंतजार कर रही हैं कि क्या वाकई उनकी सहायता राशि बढ़ेगी या फिर 1250 रुपए पर ही टिके रहेंगे।

मुस्लिमों के डर से मुजफ्फरनगर के इस मोहल्ले को छोड़कर चले गए हिंदू सभी हिंदू, खंडहर शिव मंदिर दे रहा इसकी गवाही

मुजफ्फरनगर मुजफ्फरनगर में मुस्लिम आबादी में इजाफा और हिंदू समुदाय के पलायन की रिपोर्ट ने क्षेत्र में सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को जन्म दिया है। इस स्थिति ने स्थानीय समुदायों के बीच तनाव को बढ़ाया है और धार्मिक स्थलों की स्थिति पर भी असर डाला है, जैसे कि खंडहर बन गए शिव मंदिर का उदाहरण। इस मंदिर के बारे में ज्यादा बात बताते हुए यहां से पलायन करने वाले परिवार के सदस्य अमरेश सिंह जो कि बीजेपी नेता भी हैं ने बताया कि सबसे पहले 1970 में इस मंदिर का निर्माण हुआ था।  मामला मोहनलाल लद्दावाला मोहल्ले का है। वहां पूजा अर्चना निरंतर होती रही मगर जैसे ही अयोध्या के राम मंदिर का मसला जोर शोर से उठा तो लोग मोहल्ले को छोड़ गए. क्योंकि, वहां मुस्लिम की जनसंख्या बहुत बढ़ गई थी. इधर-उधर मांस की दुकानें आदि खुल गई थीं. ऐसे में पूजा-पाठ मुश्किल था। इसकी के चलते सन् 1990-91 में हिंदू लोग मंदिर से मूर्तियां उठाकर अपने साथ लेकर चले गए और दूसरे स्थान पर स्थापित कर दिया। खंडहर बन गए शिव मंदिर की स्थिति यह दर्शाती है कि धार्मिक स्थलों की देखभाल और संरक्षण की आवश्यकता है। यह न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि स्थानीय इतिहास और संस्कृति का भी हिस्सा है। हिंदू शख्स का दावा इस मंदिर के बारे में अधिक जानकारी देते हुए यहां से पलायन करने वाले परिवार के सदस्य सुधीर खटीक जो कि बीजेपी नेता भी हैं ने बताया कि सबसे पहले 1970 में इस मंदिर की स्थापना हुई थी. वहां पूजा अर्चना लगातार होती रही. मगर जैसे ही अयोध्या के राम मंदिर का मुद्दा जोर शोर से उठा तो लोग मोहल्ले को छोड़ गए. क्योंकि, वहां मुस्लिम आबादी बहुत बढ़ गई थी. इधर-उधर नॉनवेज शॉप आदि खुल गई थीं. ऐसे में पूजा-पाठ मुश्किल था. इसलिए 1990-91 में हिंदू लोग मंदिर से मूर्तियां उठाकर अपने साथ लेकर चले गए और दूसरी जगह स्थापित कर दीं. जब लंबे वक्त तक मंदिर में पूजा अर्चना नहीं हुई तो आसपास के लोगों ने अतिक्रमण कर लिया. किसी ने अपने घर के छज्जे निकाल लिए तो किसी ने पार्किंग बना ली. मंदिर खंडहर बन गया और सिकुड़ गया. सुधीर खटीकने कहा कि सरकार से आग्रह है कि इस मंदिर की पुनर्स्थापना कराई जाए. उसे पुराना रूप दिया जाए ताकि पूजा-पाठ शुरू हो सके. क्योंकि, हिंदू अगर अपनी संस्कृति को भूल गए, अपने धर्म को भूल गए तो राष्ट्र सुरक्षित नहीं हो सकता. राष्ट्र भी जब ही सुरक्षित रहता है जब आपका धर्म सुरक्षित हो. मुस्लिम शख्स का बयान वहीं, मुजफ्फरनगर के मोहनलाल लद्दावाला मोहल्ले के निवासी मोहम्मद समीर आलम ने कहा कि यह स्थल 1970 में बना था. बुजुर्गों ने बताया था कि यहां पाल जाति के लोग अधिक थे. उन्होंने ही इसका निर्माण कराया होगा. हालांकि, बाद में वो अपनी प्रॉपर्टी सेल आउट करके दूसरी जगह शिफ्ट हो गए. जाते वक्त मंदिर से शिवलिंग और मूर्तियां भी ले गए. फिलहाल, काफी समय से मंदिर बंद पड़ा है, कोई देखने नहीं आता. जो भी रंग-रोगन का काम हुआ मुस्लिम समुदाय ने किया. अगर कोई पूजा-पाठ के लिए आने चाहे तो आए, हम नहीं रोकते. हमारे द्वारा किसी को क्यों रोका जाएगा, यह तो सार्वजनिक है, कोई भी आ सकता है, मंदिर हो या मस्जिद. हालांकि, 1994 से देख रहा हूं कोई पूजा करने नहीं आया आज तक. 

जिले वासियों को निःशुल्क अयोध्या और बाबा विश्वनाथ के दर्शन करवाए , विशेष ट्रेनों के माध्यम से श्रद्धालुओं को यात्रा की सुविधाएं उपलब्ध करवाई

मनेन्द्रगढ़/एमसीबी  छत्तीसगढ़ सरकार की श्रीरामलला दर्शन योजना से एमसीबी जिले के लिए किसी सौगात से कम नहीं है। इस योजना के माध्यम से यहॉ के श्रद्धालुओं का वर्षों पुराना सपना साकार हो रहा है। योजना के अंतर्गत जिले वासियों को निःशुल्क अयोध्या धाम और काशी में बाबा विश्वनाथ के दर्शन करवाए जा रहे हैं। विशेष ट्रेनों के माध्यम से श्रद्धालुओं को यात्रा की सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं, जहां उन्हें उत्कृष्ट व्यवस्था के साथ धार्मिक स्थलों का दर्शन कराया जा रहा है। अयोध्या और काशी की यात्रा किसी भी श्रद्धालु के लिए आध्यात्मिक सुख और जीवन का महत्वपूर्ण अवसर है। इस योजना के माध्यम से एमसीबी जिले के लोग अपने आराध्य श्रीरामलला और बाबा विश्वनाथ के दर्शन कर रहे हैं। इस योजना ने श्रद्धालुओं के लिए एक ऐसी सुविधा प्रदान की है, जो न केवल उनकी आस्था को मजबूत कर रही है बल्कि समाज में सकारात्मक वातावरण का निर्माण कर भी रहा है। जिला एमसीबी के ओमप्रकाश जैन अपनी पत्नी के साथ रामलला के दर्शन करने गए थे। यात्रा के बाद उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार की इस योजना ने उनके जैसे आम लोगों को भी अयोध्या और काशी के दर्शन का अवसर प्रदान किया है। उन्होंने बताया कि यात्रा के दौरान सारी व्यवस्थाएं बेहतरीन था। और किसी को किसी प्रकार की कोई दिक्कत नहीं हुई। खाने-पीने की उत्तम व्यवस्था के साथ-साथ स्वास्थ्य सुविधाओं का भी ध्यान रखा गया। ओमप्रकाश जैन ने भावुक होते हुए कहा कि अयोध्या धाम में रामलला के दर्शन करना हमारे लिए सौभाग्य की बात है। यह अवसर हमें मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की वजह से मिला है। उन्होंने अपना वादा निभाया और हमारे लिए यह अविस्मरणीय अनुभव बना दिया। उनकी पत्नी ने भी यात्रा के अनुभव को साझा करते हुए बताया कि पूरे सफर के दौरान महिलाओं के लिए विशेष ध्यान रखा गया। ट्रेन में स्वच्छता से लेकर सुरक्षा तक की सारी व्यवस्था बहुत अच्छी थी। उन्होंने कहा कि इस यात्रा के दौरान हमने कभी यह महसूस नहीं किया कि हम किसी प्रकार की परेशानी में हैं। यात्रा बहुत सुखद और आनंदमयी रही। जिले में बढ़ती रही श्रद्धालुओं की संख्या रामलला दर्शन योजना के अंतर्गत एमसीबी जिले से अब तक कुल 6 बार विशेष ट्रेन के माध्यम से श्रद्धालुओं को अयोध्या धाम की यात्रा करा चुके हैं। इस जिले से लगभग 322 श्रद्धालुओं को रामलला के दर्शन का अवसर मिला है। यात्रा से लौटने वाले श्रद्धालुओं ने मुख्यमंत्री और राज्य शासन का बार-बार आभार व्यक्त किया। यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं ने बताया कि उनके लिए यह जीवन का सबसे महत्वपूर्ण और सुखद अनुभव रहा। यात्रा कर लौटे श्रद्धालुओं का कहना है कि मुख्यमंत्री ने हमें यह अवसर देकर हमारे जीवन की सबसे बड़ी इच्छा पूरी कर दी है। हम भगवान श्रीरामलला के दर्शन कर पाए, यह हमारे लिए सौभाग्य की बात है। यात्रा के दौरान हमें किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा। व्यवस्था इतनी बेहतरीन थी कि हमें घर जैसा अनुभव हुआ। सुरक्षा और सुविधाओं का दिया जा रहा विशेष ध्यान यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम किए गए थे। खाने-पीने की उत्तम व्यवस्था के साथ-साथ स्वास्थ्य सुविधाओं का भी ध्यान रखा गया। ट्रेन में सफाई की व्यवस्था इतनी अच्छी थी कि यात्रियों ने विशेष रूप से इसका जिक्र किया। यात्रा के दौरान सभी यात्रियों को समय-समय पर भोजन और नाश्ते की सुविधा उपलब्ध कराई गई। इसके साथ ही बुजुर्गों और महिलाओं के लिए विशेष सुविधा और सहारा उपलब्ध था। श्रद्धालुओं ने बताया कि यात्रा के दौरान न केवल हमारी जरूरतों का ध्यान रखा गया, बल्कि पूरे सफर को आनंददायक बनाने के लिए हर छोटी-बड़ी बात पर विषेश ध्यान दिया गया। सरकार की इस योजना ने हमें यह महसूस कराया   कवे हमारी आस्था और भावनाओं का सम्मान करते हैं। श्रद्धालुओं ने अपनी यात्रा के सुखद अनुभव को किया साझा एमसीबी जिले के कई श्रद्धालुओं ने अपनी यात्रा के अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि अयोध्या धाम पहुंचकर जब उन्होंने रामलला के दर्शन किए, तो उनकी आंखों में आंसू आ गए। यह उनके जीवन का सबसे यादगार पल था। उन्होंने कहा कि अयोध्या में रामलला के दर्शन का अनुभव शब्दों में बयां करना मुश्किल है। यह सिर्फ एक यात्रा नहीं थी, बल्कि हमारे लिए जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य था। वहीं ओमप्रकाश जैन ने यात्रा को याद करते हुए कहा कि यात्रा के दौरान हमें हर तरह की सुविधा मिली। सरकार ने यह सुनिश्चित किया कि हमें किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। खाने-पीने से लेकर आराम करने तक की सारी व्यवस्थाएं बहुत ही व्यवस्थित थीं। मुख्यमंत्री के प्रति श्रद्धालुओं ने जताया आभार व्यक्त यात्रा से लौटे श्रद्धालुओं ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों और जिले वासियों से किया गया अपना वादा निभाया है। यह योजना न केवल श्रद्धालुओं के लिए एक अवसर है बल्कि यह छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक और धार्मिक आस्था को भी सशक्त बना रही है। श्रद्धालुओं ने बताया कि हमारे मुख्यमंत्री ने हमें भगवान श्रीरामलला और बाबा विश्वनाथ के दर्शन करवाकर हमारी वर्षों पुरानी मनोकामना पूरी कर दी। उनके प्रति हम सदैव कृतज्ञ रहेंगे। जिले में हो रहा रामलला दर्शन योजना का व्यापक असर श्रीरामलला दर्शन योजना का असर पूरे प्रदेश में देखने को मिल रहा है। यह योजना न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि यह सामाजिक एकता और सद्भाव को भी बढ़ावा दे रही है। प्रदेश के विभिन्न जिलों से लोग इस यात्रा में शामिल होकर अपने जीवन का सबसे सुखद अनुभव प्राप्त कर रहे हैं। जिला एमसीबी के श्रद्धालु इस योजना के माध्यम से बार-बार अयोध्या और काशी की यात्रा पर जाना चाहते हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि यदि अवसर मिला तो हम लोग दोबारा यह यात्रा करना चाहेंगे।

Ravichandran Ashwin ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा की, गाबा टेस्ट के बाद लिया फैसला

नई दिल्ली भारत के दिग्गज स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने का फैसला किया है। उन्होंने गाबा टेस्ट के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसकी घोषणा की। अश्विन कप्तान रोहित शर्मा के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में पहुंचे थे और वहां इसकी घोषणा की। संन्यास से पहले अश्विन ड्रेसिंग रूम में विराट कोहली के साथ बैठे नजर आए थे। इस दौरान कोहली ने उन्हें गले भी लगाया था। अश्विन एडिलेड डे नाइट टेस्ट में टीम इंडिया का हिस्सा रहे थे। 38 साल का यह स्पिनर भारत के लिए कई रिकॉर्ड बना चुका है। वह टेस्ट में सबसे ज्यादा विकेट लेने वालों में सातवें स्थान पर हैं। अश्विन के नाम 106 टेस्ट में 537 विकेट हैं। 59 रन देकर सात विकेट उनकी सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी है। इस दौरान उनका औसत 24.00 का और स्ट्राइक रेट 50.73 का रहा है। अश्विन टेस्ट में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले भारतीय में अनिल कुंबले के बाद दूसरे नंबर पर हैं। कुंबले के नाम 619 टेस्ट विकेट थे। अश्विन का एलान चौंकाने वाला है, क्योंकि वह भारतीय सरजमीं पर भारतीय स्पिन अटैक की धार थे। ऑस्ट्रेलिया आकर अचानक से रिटायरमेंट का फैसला लेना चौंकाने वाला है। यह मेरा आखिरी दिन – अश्विन ने संन्यास को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ”बतौर भारतीय क्रिकेटर इंटरनेशनल लेवल पर यह मेरा आखिरी दिन है.” अश्विन प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भावुक नजर आए. उनके साथ कप्तान रोहित भी बैठे थे. ऐसा रहा अश्विन का टेस्ट करियर – अश्विन ने भारत के लिए 106 टेस्ट मैच खेले हैं. उन्होंने इस दौरान 3503 रन बनाए. अश्विन ने टेस्ट में 6 शतक और 14 अर्धशतक जड़े हैं. उनका सर्वश्रेष्ठ टेस्ट स्कोर 124 रन रहा. वे भारत के लिए कई बार मुश्किल परिस्थिति में दमदार प्रदर्शन कर चुके हैं. अश्विन ने बैटिंग के साथ-साथ बॉलिंग में भी कमाल दिखाया. उन्होंने इस दौरान 537 विकेट झटके. अश्विन का एक टेस्ट पारी में 59 रन देकर 7 विकेट लेना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा है. अश्विन ने भारत के लिए 41 वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) मैच खेले हैं और उनके नाम 195 विकेट हैं, जो किसी भी खिलाड़ी द्वारा लिए गए सबसे ज्यादा विकेट हैं। टेस्ट क्रिकेट में अपने शानदार प्रदर्शन के अलावा अश्विन ने भारत के लिए 116 वनडे और 65 T20I खेले हैं। दोनों में उन्होंने क्रमशः 156 और 72 बल्लेबाजों को आउट किया है। अश्विन के संन्यास पर भारतीय कप्तान रोहित शर्मा ने कहा कि वह अपने फैसले को लेकर काफी आश्वस्त था, हमें उसकी इच्छा का सम्मान करना चाहिए। वहीं, BCCI ने एक बयान में कहा कि निपुणता, कौशल, प्रतिभा और नवीनता के पर्याय हैं अश्विन। 537 विकेट लेने के अलावा अश्विन ने अपनी बल्लेबाजी से भी भारत को कई टेस्ट मैच जिताए हैं। वे टेस्ट में भारत के लिए 151 बार बल्लेबाजी करने उतरे और छह शतकों और 14 अर्द्धशतकों की मदद से 3503 रन बनाए। अपने 14 साल के अंतरराष्ट्रीय करियर के दौरान अश्विन ने भारत के लिए 44 टेस्ट सीरीज खेली। इस दौरान वह 11 मौकों पर प्लेयर ऑफ द सीरीज का पुरस्कार जीता, जो कि खेल के टेस्ट फॉर्मेट में किसी भी खिलाड़ी द्वारा संयुक्त रूप से सबसे अधिक है। 106 टेस्ट मैचों में अश्विन ने 37 बार पांच विकेट लिए हैं, जो खेल के पांच दिवसीय फॉर्मेट में किसी भारतीय गेंदबाज द्वारा लिया गया सबसे ज्यादा है। इस लिस्ट में अश्विन से आगे सिर्फ श्रीलंका के मुथैया मुरलीधरन (67) हैं। अश्विन ने 12 जून 2010 को जिम्बाब्वे के खिलाफ हरारे में भारत के लिए अपना टी20 अंतरराष्ट्रीय पदार्पण किया। उन्होंने कुल 65 मैच खेले, जिसमें उन्होंने 72 विकेट लिए। अश्विन के नाम टेस्ट में 37 फाइव विकेट हॉल है, जो कि किसी भारतीय गेंदबाज द्वारा सबसे ज्यादा है। उनके बाद कुंबले का नंबर आता है। कुंबले ने टेस्ट में 35 बार पारी में पांच विकेट लिए थे। ओवरऑल सबसे ज्यादा पारी में पांच विकेट लेने का रिकॉर्ड श्रीलंका के मुथैया मुरलीधरन के नाम है। उन्होंने 67 बार ऐसा किया था। अश्विन शेन वॉर्न के साथ संयुक्त रूप से दूसरे नंबर पर हैं। अश्विन 106 टेस्ट खेलने के अलावा 116 वनडे और 65 टी20 में भी टीम इंडिया का हिस्सा रहे। उन्होंने वनडे में 156 विकेट और टी20 में 72 विकेट लिए थे। वनडे में उनकी सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी 25 रन देकर चार विकेट और टी20 में आठ रन देकर चार विकेट है। वनडे में उनकी इकोनॉमी 4.93 की और टी20 में 6.90 की रही है। हालांकि, इन दोनों में वह एक बार भी पारी में पांच विकेट नहीं ले पाए। इसके अलावा अश्विन ने टेस्ट में काफी रन भी बनाए हैं। उनके नाम टेस्ट में 3503 रन हैं। इस दौरान उनका औसत 25.75 का रहा है। अश्विन के नाम टेस्ट में सर्वोच्च स्कोर 124 रन का रहा है। उन्होंने छह शतक और 14 अर्धशतक लगाए हैं। इसके अलावा वनडे में उन्होंने 16.44 की औसत से 707 रन और टी20 में 114.99 के स्ट्राइक रेट से 184 रन बनाए हैं। अश्विन ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में डेब्यू पांच जून 2010 को हरारे में श्रीलंका के खिलाफ वनडे में किया था। वहीं, टी20 डेब्यू उन्होंने 12 जून 2010 को ही हरारे में जिम्बाब्वे के खिलाफ किया था। अश्विन का टेस्ट डेब्यू 2011 में वेस्टइंडीज के खिलाफ दिल्ली में हुआ था। वह टेस्ट में सबसे ज्यादा प्लेयर ऑफ द सीरीज अवॉर्ड जीतने वाले खिलाड़ी भी हैं। उन्होंने टेस्ट में 11 बार प्लेयर ऑफ द सीरीज अवॉर्ड जीता है। इस मामले में वह मुरलीधरन की बराबरी पर हैं।  

‘चिकित्सा पेशे में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी, भारत बन रहा है एक विकसित समाज’

अमरावती राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि चिकित्सा पेशे में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और उनका महत्वपूर्ण योगदान दर्शाता है कि भारत वास्तव में एक विकसित समाज बन रहा है. मुर्मू ने यहां मंगलागिरी में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के प्रथम दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि समग्र स्वास्थ्य को निरंतर बढ़ावा देना तथा सभी के लिए स्वास्थ्य सुनिश्चित करना इस संस्थान के प्रत्येक चिकित्सा पेशेवर का मार्गदर्शक सिद्धांत होना चाहिए. राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘चिकित्सा पेशे में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और उनका महत्वपूर्ण योगदान यह दर्शाता है कि हम वास्तव में एक विकसित समाज बन रहे हैं. इससे यह तथ्य भी उजागर होता है कि अवसर मिलने पर हमारी बेटियां हर क्षेत्र में उत्कृष्टता हासिल करती हैं.’’ उन्होंने कहा कि सरकार ने आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा योजना सहित कई योजनाएं शुरू की हैं और उपचार में कठिनाइयों का सामना करने वालों के लिए इलाज सुलभ बनाया है. मुर्मू ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार के साथ-साथ जागरूक समाज की भी यह जिम्मेदारी है कि वह सुनिश्चित करे कि कोई भी व्यक्ति वित्तीय या अन्य कारणों से चिकित्सा सेवाओं से वंचित न रहे. राष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय चिकित्सक अपनी प्रतिभा और कड़ी मेहनत के दम पर विकसित देशों में अग्रणी स्थान पर हैं. उन्होंने कहा कि दूसरे देशों से लोग स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाने के लिए भारत आते हैं. उन्होंने कहा कि भारत विश्व मानचित्र पर किफायती चिकित्सा पर्यटन के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है. उन्होंने कहा कि देश के चिकित्सक इस संबंध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. उन्होंने युवा चिकित्सकों से ग्रामीण, आदिवासी और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को चिकित्सा देखभाल और सेवाएं प्रदान करने को प्राथमिकता देने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि समग्र स्वास्थ्य देखभाल के संदर्भ में योगासन और प्राणायाम को आधुनिक दृष्टिकोण से भी स्वीकार किया गया है. इस अवसर पर आंध्र प्रदेश के राज्यपाल एस. अब्दुल नजीर, मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू, केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव, आंध्र प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सत्य कुमार यादव और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे. एम्स-मंगलागिरि की आधारशिला 2015 में रखी गई थी और एमबीबीएस छात्रों के पहले बैच को 30 अगस्त, 2018 को शामिल किया गया था, जो आज उत्तीर्ण हुए.

अब रूस जाने के लिए नहीं पड़ेगी वीजा की जरूरत, पुतिन जल्द करेंगे घोषणा

नई दिल्ली भारतीय पर्यटकों के लिए एक अच्छी खबर है. भारत के लोग जल्द ही बिना वीजा के रूस घूम सकते हैं. भारत और रूस के बीच 2025 में इसे लेकर एक सिस्टम विकसित होने की संभावना है. अब कुछ ही समय बाद भारतीयों को रूस जाने के लिए टूरिस्ट वीजा की आवश्यकता नहीं होगी. इससे पहले रूस ने भारतीयों के लिए अगस्त 2023 से ई-वीजा की शुरुआत की थी जिसकी प्रक्रिया पूरे होने में लगभग 4 दिन लगते हैं. हालांकि, अब नई वीजा-फ्री व्यवस्था से भारतीयों के लिए रूस की यात्रा और भी सरल हो जाएगी. रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल रूस ने जितने ई-वीजा जारी किए, उसमें भारत टॉप पांच देशों में शामिल था. रूस ने भारतीयों को 9,500 ई-वीजा दिए. बिना वीजा के रूस जा सकेंगे भारतीय रूस और भारत के बीच द्विपक्षीय समझौते के तहत ग्रुप टूरिस्ट एक्सचेंज के लिए वीजा नियमों को आसान बनाने की प्रक्रिया जून 2023 में शुरू हुई थी. रूस के आर्थिक विकास मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी, निकिता कोंद्रात्येव ने कहा, “भारत इस समझौते को अंतिम रूप देने के अंतिम चरण में है.” माना जा रहा है कि यह समझौता साल के अंत तक पूरा हो जाएगा, जिसके बाद भारतीय नागरिक बिना वीजा के रूस की यात्रा कर सकेंगे. रूस में भारतीय यात्रियों की बढ़ती संख्या हाल के वर्षों में रूस जाने वाले भारतीय यात्रियों की संख्या में लगातार वृद्धि देखी गई है. 2023 में, रूस ने भारतीय यात्रियों को 9,500 ई-वीजा जारी किए, जो कुल ई-वीजा का 6% था. 2024 की पहली छमाही में, 28,500 भारतीय यात्रियों ने मॉस्को का दौरा किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 1.5 गुना अधिक है. 2023 में, 60,000 से अधिक भारतीयों ने रूस की यात्रा की, जो 2022 की तुलना में 26% अधिक है. मॉस्को सिटी टूरिज्म कमेटी के चेयरमैन, एवगेनी कोज़लोव ने बताया, “2023 की पहली तिमाही में, भारत गैर-CIS देशों के व्यापार पर्यटकों में तीसरे स्थान पर था.” मॉस्को के अधिकारियों का मानना है कि भारत रूस के लिए एक प्राथमिक बाजार है, क्योंकि दोनों देशों के बीच मजबूत और ऐतिहासिक संबंध हैं. रूस और भारत के बीच गहरी ऐतिहासिक और कूटनीतिक मित्रता रही है. नई वीजा-फ्री नीति से न केवल पर्यटन बल्कि व्यापारिक संबंधों को भी बल मिलेगा. 58 देशों में भारतीयों की वीजा फ्री एंट्री वर्तमान में भारतीय पासपोर्टधारियों को 58 देशों में वीजा फ्री एंट्री का अधिकार हासिल है. हेनले पासपोर्ट इंडेक्स 2024 में भारत का पासपोर्ट 83वें स्थान पर है जिसकी मदद से भारतीय थाईलैंड, इंडोनेशिया, मालदीव, श्रीलंका , मोरिशियस और कतर जैसे ट्रैवल डेस्टिनेशन्स पर बिना वीजा के यात्रा कर सकते हैं.

2024 का साल खास तौर पर लोकसभा चुनाव, विपक्षी एकजुटता, राज्यों में राजनीतिक बदलाव भरा रहा

नई दिल्ली 2024 का साल भारतीय राजनीति में महत्वपूर्ण बदलावों और घटनाओं से भरा रहा। यह साल खास तौर पर लोकसभा चुनाव, विपक्षी एकजुटता, राज्यों में राजनीतिक बदलाव और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के लिए चुनौतियों का साल रहा। आइए, 2024 के राजनीतिक घटनाक्रम पर एक नजर डालते हैं। 1. लोकसभा चुनाव 2024: मोदी की तीसरी बार वापसी 2024 में भारत में हुए लोकसभा चुनाव ने भारतीय राजनीति में एक बार फिर से बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सत्ता में लौटाया। बीजेपी ने अपने चुनावी प्रचार में विकास, सुरक्षा और कड़े प्रशासनिक उपायों को प्रमुख मुद्दा बनाया। नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता और उनके नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने तीसरी बार शानदार जीत दर्ज की, लेकिन इस बार मुकाबला पहले से कहीं कठिन था। विपक्षी गठबंधन ने बीजेपी के खिलाफ एकजुट होकर चुनाव लड़ा। इस गठबंधन में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, शिवसेना, समाजवादी पार्टी, और अन्य क्षेत्रीय दल शामिल थे। हालांकि, बीजेपी ने बहुमत से सत्ता में वापसी की, लेकिन कुछ राज्यों में विपक्ष ने अच्छा प्रदर्शन किया। खासकर दक्षिण भारत, पश्चिम बंगाल, और उत्तर-पूर्वी राज्यों में बीजेपी को कड़ी टक्कर मिली। इसने दिखा दिया कि भारतीय राजनीति में अब क्षेत्रीय दलों की ताकत लगातार बढ़ रही है और भविष्य में ये दल राष्ट्रीय राजनीति में अहम भूमिका निभा सकते हैं। 2. विपक्ष का एकजुट होना 2024 का साल विपक्ष के लिए अहम था, क्योंकि विभिन्न विपक्षी दलों ने मिलकर बीजेपी के खिलाफ मोर्चा खोला। ‘INDIA’ गठबंधन के तहत कांग्रेस और अन्य क्षेत्रीय दलों ने बीजेपी के खिलाफ एकजुट होकर चुनाव लड़ा। हालांकि, यह गठबंधन अपनी पूरी ताकत के साथ चुनाव में सफलता हासिल नहीं कर सका, लेकिन यह विपक्ष के लिए एक नया रास्ता दिखाने का काम किया। इस गठबंधन का मुख्य उद्देश्य बीजेपी को रोकना था, लेकिन कई राज्यों में विपक्ष के बीच आंतरिक मतभेद और नेतृत्व को लेकर समस्याएं सामने आईं। इसके बावजूद, विपक्ष का एकजुट होना यह दर्शाता है कि भविष्य में बीजेपी को चुनौती देने के लिए विपक्षी दलों को एक साथ आना होगा। 3. राज्य चुनावों में बदलाव 2024 में कई राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए, जिनमें बीजेपी और विपक्ष दोनों के लिए बड़े बदलाव देखने को मिले। राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, और तेलंगाना में कांग्रेस ने शानदार प्रदर्शन किया और बीजेपी को कड़ी टक्कर दी। राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ने सत्ता बरकरार रखी, जबकि मध्यप्रदेश और तेलंगाना में बीजेपी को अपनी ताकत साबित करनी पड़ी। इन चुनावों में क्षेत्रीय दलों की भूमिका भी अहम रही, जैसे कि तेलंगाना में केसीआर (कांग्रेस नेता) और बंगाल में ममता बनर्जी ने अपनी पकड़ मजबूत बनाई। इन चुनावों ने यह साबित किया कि भारतीय राजनीति में राज्य स्तर पर क्षेत्रीय दलों का प्रभाव बढ़ता जा रहा है और राष्ट्रीय राजनीति में उनका रोल भी महत्वपूर्ण हो सकता है। साथ ही, यह दिखाता है कि बीजेपी को राज्यों में अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए लगातार कड़ी मेहनत करनी होगी। 4. कृषि और किसान आंदोलनों का असर 2024 में कृषि और किसान आंदोलनों का भी बड़ा राजनीतिक प्रभाव रहा। किसान विरोधी कानूनों को लेकर 2020 में शुरू हुआ आंदोलन अब भी पूरी तरह से समाप्त नहीं हो पाया था। हालांकि, 2024 में सरकार ने किसानों के लिए कुछ राहत के कदम उठाए, लेकिन किसानों के मुद्दे और उनके अधिकारों को लेकर विवाद जारी रहा। किसानों का आंदोलन और उनके समर्थन में विपक्षी दलों ने इसे अपने राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा बनाया। इसने न सिर्फ सरकार को चुनौती दी, बल्कि यह भी साबित किया कि किसानों और ग्रामीण इलाकों के मुद्दे राजनीति में अहम बन चुके हैं। 5. राष्ट्रीय सुरक्षा: विदेश नीति की दिशा 2024 में भारतीय राजनीति में राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति भी प्रमुख मुद्दा बने। मोदी सरकार ने अपने कार्यकाल में कई अहम कदम उठाए, जैसे कि पाकिस्तान और चीन के साथ सीमा विवाद पर कड़े रुख अपनाना। चीन के साथ सीमा पर तनाव और पाकिस्तान से संबंध जैसे मुद्दों ने राजनीतिक माहौल को प्रभावित किया। प्रधानमंत्री मोदी ने कूटनीतिक तरीके से कई बार इन दोनों देशों से अपने रिश्तों को सुधारने की कोशिश की, लेकिन सीमा पर स्थिति तनावपूर्ण रही। अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में भारत ने अपनी स्थिति मजबूत की और अमेरिका, रूस और यूरोपीय संघ जैसे देशों के साथ रिश्तों को और प्रगाढ़ किया। 2024 में G20 की अध्यक्षता के दौरान भारत ने वैश्विक मंच पर अपनी कूटनीतिक ताकत का प्रदर्शन किया। 6. समाजवादी और क्षेत्रीय दलों की बढ़ती ताकत 2024 में एक और बड़ा बदलाव देखने को मिला, वह था क्षेत्रीय दलों और समाजवादी दलों की बढ़ती ताकत। उदाहरण के लिए, पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस, तेलंगाना में के. चंद्रशेखर राव की टीआरएस, और उत्तर-पूर्वी राज्यों में विभिन्न क्षेत्रीय दलों ने भारतीय राजनीति में अपनी महत्वपूर्ण जगह बनाई। इन दलों ने न सिर्फ राज्य स्तर पर, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी अपनी उपस्थिति दर्ज की और अब उनका राष्ट्रीय निर्णयों पर असर होता है। इन दलों ने यह साबित किया कि राष्ट्रीय चुनावों में उनकी भूमिका और ताकत दिन-ब-दिन बढ़ रही है। 7. सवर्ण और पिछड़ा वर्ग के बीच टकराव 2024 में भारत में समाजिक न्याय और आरक्षण को लेकर भी राजनीति गरमाई। कई राज्य सरकारों ने सवर्ण और पिछड़े वर्गों के बीच आरक्षण की नीति को लेकर विवादों को जन्म दिया। बीजेपी सरकार ने सवर्णों के लिए आरक्षण बढ़ाने की योजना बनाई, वहीं विपक्ष ने इसे गरीबों के हक में न होने की आलोचना की। इन सामाजिक मुद्दों ने राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी राजनीतिक बहसें छेड़ीं, जिससे राजनीतिक दलों के बीच खींचतान बनी रही। 2024 भारतीय राजनीति के लिए एक महत्वपूर्ण साल था, जिसमें भारतीय जनता पार्टी ने अपनी सत्ता बरकरार रखी, लेकिन विपक्षी दलों ने भी अपनी चुनौती पेश की। राज्य चुनावों, किसान आंदोलनों, राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक मुद्दों ने राजनीति को नया मोड़ दिया। यह साल यह दिखाता है कि भारतीय राजनीति अब केवल दो प्रमुख दलों तक सीमित नहीं रही, बल्कि क्षेत्रीय और समाजवादी दल भी राष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। 2024 ने यह साबित किया कि भारतीय राजनीति में भविष्य में और अधिक बदलाव और संघर्ष देखने को मिल सकता है।  

बीजेपी को फरवरी के अंत तक नया राष्ट्रीय अध्यक्ष मिल सकता है, राज्यों की इकाई में भी होगा बड़ा बदलाव

नई दिल्ली बीजेपी को फरवरी के अंत तक नया राष्ट्रीय अध्यक्ष मिल सकता है। पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी के मुताबिक जनवरी के मध्य तक आधे राज्यों में चुनाव की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। उन्होंने कहा कि राज्यों में भी 60 फीसदी इकाई अध्यक्षों के कार्यकाल पूरे होने वाले हैं। अगले महीने के मध्य तक नए अध्यक्ष बनाए जा सकते हैं। बता दें कि जेपी नड्डा 2020 से ही बीजेपी अध्यक्ष हैं। इसके अलावा वह केंद्र में स्वास्थ्य मंत्री भी हैं। एक सीनियर नेता ने कहा, फरवरी के अंत तक बीजेपी के नए अध्यक्ष पद ग्रहण कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि नए अध्यक्ष सरकार से भी हो सकते हैं और संगठन से भी हो सकते हैं। इसपर कोई अंतिम फैसला नहीं किया गया है। आम तौर पर बीजेपी अध्यक्ष का कार्यकाल तीन साल का ही होता है। हालांकि 2024 के आम चुनाव को देखते हुए जेपी नड्डा का कार्यकाल बढ़ा दिया गया था। आम चुनाव के बाद बीजेपी की वापसी भी हो गई। बीजेपी में अध्यक्ष पद को लेकर मंथन लंबे समय से चल रहा है। अगस्त में भी इसको लेकर मंथन किया गया था लेकिन उस समय महाराष्ट्र, झारखंड और जम्मू-कश्मीर, हरियाणा के चुनाव करीब थे। ऐसे में यथास्थिति बनाए रखने का ही फैसला किया गया। 2014 में केंद्र में पूर्ण बहुमत से मोदी सरकार बनने के बाद अमित शाह को तीन साल के लिए पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया था। पार्टी के संविधान मुताबिक उसी को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया जा सकता है जो कि कम से कम 15 साल से पार्टी का सदस्य हो। इससे पहले 2010 से 2013 तक संगठन की कमान नितिन गडकरी के पास थी। राजनाथ सिंह 2005 से 2009 तक और फिर 2013 से 14 तक बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे। 2014 से 2020 तक अमित शाह ने बीजेपी की कमान संभाली।

रायपुर, अंबिकापुर और बिलासपुर शहरों को जोड़ने नई विमान सेवा 19 दिसंबर से शुरू होगी

पहले आओ पहले पाओ के आधार पर होगी बुकिंग, शुरूआती किराया मात्र 999 सप्ताह में तीन दिन गुरुवार, शुक्रवार और शनिवार को संचालित होगी उड़ानें रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल पर छत्तीसगढ़ में केन्द्र सरकार की रिजनल कनेक्टिविटी योजना के तहत हवाई सेवाओं का तेजी से विस्तार हो रहा है।रिजनल कनेक्टिविटी योजना के तहत शुरू हो रही नई उड़ान सेवाओं का उद्देश्य हवाई यात्रा को न केवल किफायती बनाना है बल्कि क्षेत्र में यात्रियों के लिए पसंदीदा विकल्प भी बनाना है। इन उड़ानों के शुरू होने से व्यापारिक यात्रियों, पर्यटकों और स्थानीय समुदायों को बहुत लाभ होगा, समय की बचत होगी और आर्थिक विकास के नए द्वार खुलेंगे।       इसी कड़ी में रायपुर, अंबिकापुर और बिलासपुर को एयर कनेक्टिविटी से जोड़ने के लिए बड़ा कदम उठाया गया है। इन तीनों शहरों को जोड़ने के लिए नई उड़ान सेवा का संचालन 19 दिसंबर, 2024 से शुरू होने जा रहा है।       रायपुर, अंबिकापुर और बिलासपुर को जोड़ने वाली नई उड़ानें सप्ताह में तीन दिन गुरुवार, शुक्रवार और शनिवार को संचालित होंगी। यह नई सेवा न केवल यात्रा के समय को कम करेगी बल्कि इंटरसिटी यात्राओं को एक आरामदायक और सुविधाजनक बनाएगी, जिससे पर्यटन, व्यापार के अवसरों और क्षेत्रीय विकास को और बढ़ावा मिलेगा। इन शहरों में पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर यात्री विमान सेवा के लिए बुकिंग करा सकते हैं। इस नई उड़ान सेवा का शुरुआती किराया मात्र 999 रूपए रखा गया है। इस संबंध में अधिक जानकारी और बुकिंग के लिए www.flybig.in पर सम्पर्क किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मुख्य आतिथ्य में आज ‘खेल प्रतिभाओं का सम्मान एवं प्रोत्साहन समारोह’ होगा

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मुख्य आतिथ्य में आज दोपहर 12:30 बजे तात्या टोपे खेल स्टेडियम में मुख्यमंत्री जनकल्याण पर्व के उपलक्ष्य में ‘खेल प्रतिभाओं का सम्मान एवं प्रोत्साहन समारोह’ होगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग करेंगे। खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा मध्यप्रदेश के श्रेष्ठ खिलाड़ियों को सम्मानित करने के लिये यह आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम में मध्यप्रदेश के प्रतिभावान खिलाड़ियों को सम्मानित किया जायेगा। इस परिप्रेक्ष्य में मंत्री श्री सारंग ने विधानसभा स्थित अपने कक्ष में खेल अधिकारियों के साथ समारोह पूर्व समीक्षा कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिये। मंत्री श्री सारंग ने कहा कि समारोह गरिमापूर्ण एवं भव्य हो। समारोह में खिलाड़ियों को किट वितरण, श्रेष्ठ खिलाड़ियों का सम्मान और खेल प्रोत्साहन की अन्य गतिविधियों को शामिल किया जाये। इसमें उत्कृष्ट खिलाड़ी, कोच एवं स्थानीय जन-प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया जाये। स्पोर्ट्स एक्टिविटी में शामिल लोगों का सहयोग लिया जाये। कार्यक्रम की ब्रॉण्डिंग एवं बोर्डिंग की व्यवस्थाएँ भी सुनिश्चित हो। मंत्री श्री सारंग ने कहा कि खेल छात्रवृत्ति में स्वर्ण जीतने वाले बच्चों को प्रतीकात्मक रूप से चेक वितरण किया जाये। समारोह में खिलाड़ियों को किट वितरण, अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ियों को प्रोत्साहन राशि, प्रशिक्षण केन्द्र संचालन को प्रोत्साहन राशि आदि का वितरण भी सुनिश्चित हो। उपलब्धियों पर आधारित शॉर्ट फिल्म का प्रदर्शन भी समारोह में किया जाये। बैठक में संचालक श्री रवि कुमार गुप्ता, संयुक्त संचालक श्री बी.एल. यादव, उप सचिव श्री संजय जैन सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।  

इस वर्ष प्रदेश में राज्य सरकार ने परिवहन से राजस्व आय 3 हजार 54 करोड़ रूपये हुई

भोपाल परिवहन विभाग को इस वर्ष अप्रैल से नवम्बर 2024 तक 3 हजार 54 करोड़ रूपये की राजस्व आय प्राप्त हुई है। इस वर्ष प्रदेश में राज्य सरकार ने परिवहन से राजस्व आय का लक्ष्य 5 हजार 500 करोड़ रूपये का निर्धारित किया है। परिवहन विभाग को पिछले वर्ष 2023-24 में 4 हजार 606 करोड़ रूपये का राजस्व प्राप्त हुआ था, जो वर्ष 2022-23 के मुकाबले 14.61 प्रतिशत अधिक रहा था। परिवहन विभाग की 50 सेवाएं फेसलेस परिवहन विभाग की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिये विभाग ने अनेक कार्य किये हैं। वाहनों के रजिस्ट्रेशन, परमिट और ड्राइविंग लाइसेंस से संबंधित अधिकतर सेवाओं एनआईसी के पोर्टल “वाहन” और “सारथी” माध्यम से फेसलेस रूप में शुरू की गई हैं। अब आवेदक को सेवा प्राप्त करने के लिये ऑनलाइन आवेदन करने के बाद कार्यालय में जाने की आवश्यकता नहीं है। विभाग ने अपनी 50 सेवाओं को फेसलेस किया है। परिवहन विभाग ने वाहन चेकिंग के दौरान पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से चेकिंग में वसूल किये जाने वाले राजस्व को केशलेस रूप में वसूल किये जाने के लिये भारतीय स्टेट बैंक से अनुबंध किया है। अनुबंध के बाद प्रदेश के सभी परिवहन कार्यालयों एवं रोड सेफ्टी एण्ड एनफोर्समेंट चेकिंग पाइंट पर पीओएस मशीन उपलब्ध कराई हैं। इस व्यवस्था से विभाग को अच्छे परिणाम भी मिले हैं।  

वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने 22 हजार 460 करोड़ का सदन में किया अनुपूरक बजट पेश, चर्चा आज होगी

भोपाल मध्यप्रदेश विधानसभा का शीतकालीन सत्र जारी है। सदन में दूसरे दिन अनुपूरक बजट पेश किया गया। वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने 22 हजार 460 करोड़ का सप्लीमेंट्री बजट पटल पर रखा। आज सदन में इस पर चर्चा होगी। एमपी विधानसभा शीताकालीन सत्र का आज दूसरा दिन है। सदन में वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने 2024-25 के लिए 22 हजार 460 करोड़ का सप्लीमेंट्री बजट पटल पर रखा है। कल बुधवार को इस पर चर्चा होगी। बजट पर चर्चा के लिए चार घंटे का समय तय किया गया है। इसके साथ ही विधानसभा की कार्यवाही कल तक के लिए स्थगित कर दी गई है। मंत्री धर्मेंद्र लोधी का प्रस्ताव, कांग्रेस ने पूछे सवाल मंत्री धर्मेंद्र लोधी ने प्रस्ताव पेश किया। उन्होंने कहा कि शारदा देवी मंदिर अधिनियम संशोधन स्वीकार किया जाय। सतना जिला अब मैहर किया जाय। न्यायालय सतना से मैहर किया जाना है। भूमि अर्जन से जुड़े मामले मैहर से होने की मांग की है। वहीं कांग्रेस विधायक बाला बच्चन ने मंत्री लोधी से सवाल पूछा। संशोधन पर उन्होंने कहा कि मंदिर समिति का उल्लेख हो, मंत्रीजी शासकीय अशासकीय सदस्यों की जानकारी दे। भूमि अर्जन प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट करें। अब विधानसभा में इस प्रस्ताव पर कल चर्चा होगी। MP विधानसभा में PM मोदी और सोनिया गांधी पर टिप्पणी कांग्रेस विधायक ओमकार सिंह मरकाम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर टिप्पणी की। इसके बाद मंत्री इंदर सिंह परमार ने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी पर टिप्पणी की। टिप्पणियों के बाद दोनों तरफ से विरोध हुआ। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने टिप्पणियों को विलोपित कर दिया।

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