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किसान भाई यूरिया से बचे और जैविक खेती की ओर रूख करें : मंत्री श्री विजयवर्गीय

भोपाल म ध्यप्रदेश और राजस्थान को समृद्ध और किसानों को खुशहाल बनाने वाली पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना के लिये त्रि-स्तरीय अनुबंध प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की मौजूदगी में आज जयपुर में हुआ। पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्व. अटल बिहारी वाजपेयी के नदी जोड़ो अभियान के स्वप्न को साकार करने प्रधानमंत्री श्री मोदी ने मध्यप्रदेश और राजस्थान के बीच समझौता कराते हुए पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना को मूर्त रूप दिया। यह परियोजना मध्यप्रदेश के देवास, गुना, शिवपुरी, सीहोर,  राजगढ़, उज्जैन, आगर-मालवा, इंदौर, शाजापुर, मंदसौर एवं मुरैना के किसानों को सिंचाई के लिये भरपूर पानी और पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करेगी। इससे किसानों के जीवन में खुशहाली आने के साथ उनकी फसलें भी लह-लहा उठेंगी। सोनकच्छ क्षेत्र का एक खेत भी ऐसा नहीं रहेगा जहां पानी न पहुँचे देवास जिले में जिला स्‍तरीय किसान सम्‍मेलन टोंकखुर्द के मंडी प्रांगण में नगरीय प्रशासन एवं आवास मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय की उपस्थिति में हुआ। मंत्री श्री विजयवर्गीय ने इस मौके पर कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने इतनी बड़ी योजना की सौगात दी है कि सोनकच्छ क्षेत्र का एक खेत भी ऐसा नहीं रहेगा जहां पर पानी नहीं पहुंचेगा। मंत्री श्री विजयवर्गीय ने कहा कि पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना के अंतर्गत रणजीत सागर कॉम्पलेक्स सिंचाई परियोजना से किसानों के खेत में पानी पहुँचेगा तो किसान चार-चार फसल ले पाएंगे। उन्‍होंने कहा कि किसान भाई रसायनिक खाद से बचे और जैविक खेती की और रुख करें। रासायनिक खाद के उपयोग से गांव-गांव तक शुगर और कैंसर जैसी गंभीर बीमारी पहुँच रही है। मंत्री श्री विजयवर्गीय ने कहा कि केन्‍द्र और प्रदेश सरकार किसान, महिला सशक्तिकरण, गरीब और युवाओं के कल्याण के लिए तेजी से कार्य कर रही है। स्‍व-सहायता समूह के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक रूप से समृद्ध किया जा रहा है। उन्‍होंने कहा कि देवास जिले की ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को स्‍व-सहायता समूह से जोड़ा जाएगा। 36 हजार 500 हेक्टेयर क्षेत्र में हो सकेगी सिंचाई पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना अंतर्गत रणजीत सागर कॉम्पलेक्स सिंचाई परियोजना अनुमानित लागत 02 हजार 182 करोड़ रूपये है। रणजीत सागर कॉम्पलेक्स सिंचाई परियोजना से 36 हजार 500 हेक्टेयर में सिंचाई हो सकेगी। इससे 74 गाँव लाभान्वित होंगे, जिसमें देवास जिले के 68 गांव और उज्‍जैन जिले के 6 गांव शामिल है। इस परियेाजना से मुख्य रूप से देवास जिले में सिंचाई, पेयजल, मत्स्य पालन और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। कार्यक्रम में देवास जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती लीला अटारिया और स्थानीय जनप्रतिनिधि मौजूद थे।  

व्यापम मामले में विशेष न्यायालय ने चार आरोपियों को सात-सात साल की सजा और 10-10 हजार का जुर्माना लगाया

भोपाल मध्य प्रदेश के व्यापम मामले में चार आरोपियों को सजा सुनाई गई है। भोपाल की विशेष न्यायालय ने चार आरोपियों को सात-सात साल की सजा और 10-10 हजार का जुर्माना लगाया है। आरोपियों ने अपने स्थान पर दूसरे छात्रों को बिठाकर परीक्षा पास की थी। सीबीआई व्यापम प्रकरण के विशेष न्यायाधीश नीतिराज सिंह सिसोदिया ने एसटीएफ भोपाल के अपराध क्रमांक 12/2015 जो कि 15.04.2014 एसटीएफ भोपाल द्वारा कायम किया गया था। जिसमें माननीय उच्चतम न्यायालय के निर्देशानुसार सीबीआई ने अग्रिम विवेचना कर पूरक अभियोग पत्र प्रस्तुत किया गया था। इस पूरे मामले में कुल 4 आरोपीयों को प्रत्येक को सात-सात साल के कठोर कारावास और दस-दस हजार रुपये के अर्थ दंड से भी दंडित किया है। सी.बी.आई. के लोक अभियोजक सुशील कुमार पांडेय ने बताया कि व्यापम ने वर्ष 2012 में मध्य प्रदेश वन रक्षक भर्ती परीक्षा-2012 आयोजित की थी। जिसमें 4 अभ्यथियों रामचित्र कौशल, भूप सिंह, शेर सिंह जाटव और राजेश सोलंकी ने अपने स्थान पर किसी अन्य व्यक्ति (प्रतिरूपक) को लिखित परीक्षा में बैठाकर पास करने के लिए दलालों के व मध्यस्तों से मिलीभगत कर परीक्षा पास की थी। इन चारों आभ्यर्थी के स्थान पर अज्ञात प्रतिरूपको ने परीक्षा दी थी। परिणाम स्वरूप ये चारों अभ्यार्थी मध्य प्रदेश वन रक्षक भर्ती परीक्षा-2012 में पास हो गए थे। आज मंगलवार को न्यायालय ने कई गवाहों, दस्तावेजों और आर्टिकल्स आधार पर चारों अभ्यथियों रामचित्र कौशल, भूप सिंह, शेर सिंह जाटव और राजेश सोलंकी को सजा सुनाई है। सभी को न्यायालय ने सात-सात वर्ष कठोर कारावास के साथ ही दस-दस हजार रुपए अर्ध दण्ड से भी दण्डित किया है।

किसानों के नाम पर बड़ी बड़ी बातें करने वाले न तो खुद किसानों के लिए कुछ करते हैं न ही दूसरों को कुछ करने देते हैं: मोदी

जयपुर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अप्रत्यक्ष रूप से कांग्रेस पर निशाना साधते हुए मंगलवार को कहा कि किसानों के नाम पर बड़ी बड़ी बातें करने वाले न तो खुद किसानों के लिए कुछ करते हैं न ही दूसरों को कुछ करने देते हैं। इसके साथ ही मोदी ने कहा कि भाजपा की नीति विवाद की नहीं संवाद की है और वह व्यवधान में नहीं समाधान में विश्वास रखती है। मोदी राजस्थान सरकार के कार्यकाल का एक साल पूरा होने पर यहां दादिया में आयोजित ‘एक वर्ष-परिणाम उत्कर्ष’ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में उन्होंने ऊर्जा, सड़क व रेलवे से जुड़ी 46,300 करोड़ रुपये से अधिक की 24 परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। राजस्थान के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ईआरसीपी) के कार्यान्वयन में गत कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में विलंब की ओर इशारा करते हुए मोदी ने कहा,‘‘ईआरसीपी को कांग्रेस ने कितना लटकाया, ये भी कांग्रेस की नीयत का प्रत्यक्ष प्रमाण है। ये किसानों के नाम पर बातें बड़ी-बड़ी करते हैं लेकिन किसानों के लिए न खुद कुछ करते हैं और न ही दूसरों को करने देते हैं।’’ मोदी ने कहा,‘‘भाजपा की नीति विवाद की नहीं, संवाद की है। हम विरोध में नहीं, सहयोग में विश्वास करते हैं। हम व्यवधान में नहीं, समाधान पर यकीन करते है। इसलिए हमारी सरकार ने पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना को स्वीकृत भी किया और इसका विस्तार भी किया है।’’ उन्होंने कहा कि जैसे ही मध्य प्रदेश व राजस्थान में भाजपा की सरकार बनी तो पार्वती कालीसिंध चम्बल परियोजना एमपीकेसी लिंक परियोजना पर समझौता हो गया। मोदी ने कहा कि बीते एक वर्ष में राजस्थान के विकास को नई गति, नई दिशा देने में मुख्यमंत्री भजनलाल जी और उनकी पूरी टीम ने बहुत परिश्रम किया है। उन्होंने कहा कि आज भाजपा की डबल इंजन की सरकारें सुशासन का प्रतीक बन रही हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि भाजपा जो भी संकल्प लेती हैं वो पूरा करने का ईमानदारी से प्रयास करती हैं। उन्होंने कहा,‘‘आज देश के लोग कह रहे हैं कि भाजपा सुशासन की गारंटी है। तभी तो एक के बाद एक राज्यों में आज भाजपा को इतना भारी जनसमर्थन मिल रहा है।’’ उन्होंने कहा,‘‘21वीं सदी के भारत के लिए नारी का सशक्त होना बहुत जरूरी है। नारी शक्ति को मजबूत करने के लिए हम अनेक नई योजनाएं बना रहे हैं।’’ मोदी खुली छत वाले वाहन में सवार होकर सभा स्थल पर पहुंचे। उनके साथ वाहन में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा व भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ भी मौजूद थे। तीनों नेताओं ने उपस्थित जनसमूह का हाथ हिलाकर अभिवादन किया। कार्यक्रम में राज्यपाल हरिभाऊ बागडे, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव भी मौजूद थे।  

एनटीए अगले साल से भर्ती परीक्षाएं आयोजित नहीं कराएगा, अगले साल एनटीए का पुनर्गठन होगा: शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान

नई दिल्ली नीट, जेईई मेन, सीयूईटी और यूजीसी नेट जैसी महत्वपूर्ण परीक्षाएं कराने वाली नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) के कामकाज के तौर तरीके में सुधार को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मंगलवार को ऐलान किया कि वर्ष 2025 से उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए एनटीए सिर्फ प्रवेश परीक्षाएं कराएगा। एनटीए अगले साल से भर्ती परीक्षाएं आयोजित नहीं कराएगा। उन्होंने यह भी कहा कि अगले साल एनटीए का पुनर्गठन होगा। परीक्षा एजेंसी में 10 नए पद सृजित किए जाएंगे। केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘सरकार निकट भविष्य में कंप्यूटर बेस्ड परीक्षा और टेक्नोलॉजी बेस्ड प्रवेश परीक्षा की ओर कदम बढ़ाना चाहती है।’ मेडिकल प्रवेश परीक्षा को लेकर उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ इस संबंध में बातचीत जारी है कि नीट यूजी परीक्षा पेन पेपर मोड से आयोजित की जाए या ऑनलाइन। केंद्रीय मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (सीयूईटी) यूजी का आयोजन साल में एक बार ही किया जाएगा। आपको बता दें की सीयूईटी यूजी से ही डीयू, बीएचयू, जामिया, इलाहाबाद विश्वविद्यालय देश के 260 से ज्यादा विश्वविद्यालयों के स्नातक कोर्सेज में दाखिला मिलता है। उन्होंने कहा, ‘एजेंसी का 2025 में पुनर्गठन किया जाएगा, कम से कम दस नए पद सृजित किए जा रहे हैं । काम में कोई गलती न हो, यह सुनिश्चित करने के लिए एनटीए के कामकाज में कई बदलाव किए जाएंगे।’ उन्होंने कहा कि सरकार भविष्य में कंप्यूटर अडैप्टिव टेस्ट, तकनीक आधारित प्रवेश परीक्षाओं की ओर बढ़ने पर विचार कर रही है। ये बड़े एंट्रेंस एग्जाम कराता है एनटीए नीट: गौरतलब है कि नीट यूजी 2024 और यूजीसी नेट में अनियमितताएं उजागर होने के बाद केंद्र सरकार ने एनटीए की कार्यशैली में सुधार और इसके द्वारा आयोजित की जाने वाली प्रवेश परीक्षाओं के पारदर्शी, सुचारू और निष्पक्ष संचालन सुनिश्चित करने के लिए समिति का गठन किया था। इस समिति ने कई सुधारों की सिफारिश की थी। कमिटी की ओर से दिए गए थे ये सुझाव 1- जेईई मेन की तरह नीट भी एक से अधिक चरणों में कराया जाए। 2- ऑफलाइन परीक्षाओं को कम किया जाए, जहां ऑनलाइन मोड पर संभव नहीं, वहां हाइब्रिड (ऑनलाइन व ऑफलाइन पेन पेपर मोड दोनों) परीक्षाओं का विकल्प हो। जहां ऑनलाइन एग्जाम संभव न हो वहां प्रश्न पत्रों को डिजिटल मोड में भेजा जाए और आंसर ओएमआर शीट पर लिखे जाएं। 3- मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट सहित प्रमुख परीक्षाओं में प्रयासों की संख्या सीमित की जाए। 4- सीयूईटी की परीक्षा में विषयों की संख्या कम की जाए। 5- आउटसोर्सिंग कर्मियों की भूमिका को कम किया जाए। आउटसोर्सिंग कर लिए जाने वाले प्राइवेट सेंटरों की संख्या कम की जाए। 6- एनटीए में परमानेंट कर्मचारियों की संख्या बढ़ाई जाए। जेईई और नीट आयोजन प्रक्रिया में बदलाव के संकेत इससे पहले दिसंबर के दूसरे सप्ताह में एक्सएलआरआई, जमशेदपुर में उन्होंने कहा था कि जेईई और नीट समेत अन्य केंद्रीय प्रतियोगिता परीक्षाओं में अगले साल से कई बदलाव किए जाएंगे। इसके आयोजन के लिए राज्य सरकारों की भी मदद ली जाएगी। चूंकि ये परीक्षाएं अलग-अलग राज्यों में आयोजित की जाती हैं, इसलिए अब इनका आयोजन राज्य सरकारों के साथ किया जाएगा। इसके लिए एनटीए और राज्य सरकारों में समन्वय स्थापित किया जाएगा। अब तक यह परीक्षाएं केंद्रीय एजेंसी की ओर से ही आयोजित की जाती थी, लेकिन पिछले दिनों पेपर लीक का मामला सामने आने के बाद शिक्षा मंत्रालय ने इन परीक्षाओं के आयोजन को लेकर यह बदलाव किए हैं। प्रधान ने कहा कि पिछले दिनों हुई पेपर लीक की घटना के बाद इसकी जांच कमेटी गठित कर कराई गई थी। पारदर्शिता लाने को लेकर इसकी जांच रिपोर्ट के मिल जाने के बाद अब पेपर लीक की घटनाओं की पुनरावृत्ति ना हो, इसके लिए रोड मैप तैयार किया गया है।

एक देश- एक चुनाव विधेयक को मंजूरी मिलने के बाद क्या बदलेगा? बिल के पक्ष में 269, विरोध में पड़े 198 वोट

नई दिल्ली ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ विधेयक मंगलवार को लोकसभा में पेश किया गया। विपक्ष ने इस बिल का पुरजोर विरोध किया। इसके मद्देनजर सरकार ने बिल को जॉइंट पार्लियामेंटरी कमिटी यानी संयुक्त संसदीय समिति को भेजने का फैसला किया है। केंद्रीय कैबिनेट ने 12 दिसंबर को इस बिल को मंजूरी थी। घमासान की वजह से वक्फ संशोधन बिल की तरह ‘एक देश एक चुनाव’ बिल भी जेपीसी के पास जा रहा है। आइए एक नजर डालते हैं कि संसद में किन पार्टियों ने इस बिल के समर्थन और किन्होंने विरोध का ऐलान किया। भाजपा और उसके सहयोगी दल इस विधेयक के समर्थन में हैं। बीजू जनता दल, वाईएसआर कांग्रेस जैसे कुछ गैर-एनडीए दलों का भी इस बिल को समर्थन है। दूसरी तरफ कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और डीएमके जैसे कई विपक्षी दल इसका विरोध कर रहे हैं। कुल 32 राजनीतिक दल इस बिल का समर्थन कर रहे हैं, जबकि 15 दल इसका विरोध कर रहे हैं। बिल पेश करने को लेकर लोकसभा में हुआ मत विभाजन बिल को पेश करने को लेकर विपक्ष ने मत विभाजन की मांग की, जिसके बाद वोटिंग हुई। बिल को सदन पटल पर रखे जाने के पक्ष में 269 वोट पड़े जबकि विरोध में 198 वोट पड़े। अब सदन में बिल को जेपीसी में भेजने की औपचारिकता पूरी की जाएगी। कोविंद कमिटी ने दो चरणों में एक साथ चुनाव कराने की सिफारिश की है पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली एक उच्च स्तरीय समिति ने एक साथ चुनाव कराने की सिफारिश की थी। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सितंबर में इन सिफारिशों को स्वीकार कर लिया था। समिति ने दो चरणों में एक साथ चुनाव कराने की सिफारिश की थी। पहले चरण में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने की सिफारिश की गई थी। स्थानीय निकाय चुनाव (पंचायत और नगर पालिका) आम चुनाव के 100 दिनों के भीतर कराने की बात कही गई थी। समिति ने सभी चुनावों के लिए एक समान मतदाता सूची बनाने की भी सिफारिश की थी।

पार्वती, कालीसिंध, चंबल जोड़ो परियोजना का पीएम मोदी की मौजूदगी में हुआ MoU हुआ साइन, एमपी-राजस्थान में किसानों को होगा लाभ

भोपाल मध्यप्रदेश और राजस्थान को समृद्ध और किसानों को खुशहाल बनाने वाली पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना के लिए त्रि-स्तरीय अनुबंध हो गया है। यह कार्यक्रम राजस्थान के जयपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में हुआ। एक तरफ जयपुर में मुख्य कार्यक्रम चल रहा था, जो दूसरी ओर मध्य प्रदेश के योजना से लाभान्वित होने वाले जिलों में किसान सम्मान किया गया। देवास जिले में जिला स्तरीय किसान सम्मेलन टोंकखुर्द में मंडी मैदान में सुबह 10.30 बजे से आयोजित हुआ। जल संसाधन विभाग की 3612.90 करोड़ रुपये की पार्वती, कालीसिंध, चंबल नदी जोड़ो परियोजना का भूमि पूजन मंगलवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया। सीधा प्रसारण उज्जैन सहित प्रदेशभर के जिला मुख्यालयों पर किया गया। योजना के क्रियान्वयन से उज्जैन के 171 गांव के किसान लाभान्वित होंगे। इस जानकारी के साथ अन्य जानकारी साझा करने को सुबह 10 बजे इंदौर की चिमनगंज कृषि उपज मंडी प्रांगण में जिला स्तरीय किसान सम्मेलन रखा गया।

कोरोना संक्रमण से पैरोल, प्रदेशभर की जेलों से लापता हैं 70 बंदी

रायपुर रायपुर सेंट्रल जेल से सात ऐसे बंदी हैं, जो पैरोल पर छूटने के बाद वापस नहीं लौटे। एक बंदी दिसंबर 2002 से गायब हैं। इनमें अधिकतर बंदी हत्या के प्रकरण में जेल में बंद थे। जेल और पुलिस प्रशासन ने इन बंदियों की कई बार तलाश की, लेकिन अब तक उनका कोई पता नहीं चला। प्रदेशभर में ऐसे बंदियों की संख्या करीब 70 है। अब जेल प्रशासन इन बंदियों की वापसी की राह ताक रहा है। सूचना के अधिकार के तहत रायपुर जेल के वारंट अधिकारी ने सात बंदियों के पेरोल पर छोड़े जाने के बाद से नहीं लौटने की जानकारी दी है। इसके अनुसार हत्या के केस में बंद शिवकुमार उर्फ मुन्ना पांच दिसंबर 2002, गणेश देवांगन 23 जुलाई 2008, संजीत उर्फ सुजीत आठ सितंबर 2010, कृष्ण कुमार 31 अगस्त 2013, राजीव कुमार दो अप्रैल 2020, रूपेंद्र साहू 21 नवंबर 2022 और नरेंद्र श्रीवास 18 जनवरी 2024 से पेरोल पर जेल से छोड़े गए थे। हाई कोर्ट ने दिखाई सख्ती जेल मुख्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, पिछले महीने हाई कोर्ट में पैरोल पर गए कैदियों की वापसी न होने के मामले में मुख्य न्यायाधीश रमेश कुमार सिन्हा और न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद की डबल बेंच ने इस मुद्दे पर सख्ती दिखाई थी। मुख्य न्यायाधीश ने डीजीपी जेल से ताजा रिपोर्ट शपथ पत्र के जरिए पेश करने को कहा था। इसके बाद डीजी जेल की ओर से हाई कोर्ट को जानकारी दी गई कि प्रदेश के पांच सेंट्रल जेलों ने 83 कैदी पैरोल से नहीं लौटे थे, जिनमें 10 को गिरफ्तार कर लिया गया और तीन की मृत्यु हो गई थी। अभी भी प्रदेश भर के जेलों से करीब 70 बंदी पैरोल से छूटने के बाद वापस नहीं लौटे हैं। बिलासपुर जेल में भी 22 बंदी नहीं लौटे केंद्रीय जेल बिलासपुर से पैरोल पर गए 22 बंदी लौटे ही नहीं। उनके स्वजन को बार-बार सूचना देने के बाद भी जब बंदी नहीं लौटे, तो जेल प्रबंधन ने संबंधित थानों को फरार बंदियों की जानकारी दी है। प्रबंधन की मानें, तो थानों में उनके फरार होने की एफआईआर दर्ज कराई गई है। सजायाफ्ता बंदियों के वापस जेल नहीं पहुंचने पर जेल प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। बिलासपुर के जेल अधीक्षक खोमेश मंडावी ने बताया कि न्यायालय के निर्देश पर बंदियों को एक निर्धारित अवधि के बाद पैरोल के बाद वापस जेल लौटना होता है। अधिकांश बंदी लौट भी आते हैं। मगर, 22 बंदी ऐसे हैं जो जेल से बाहर तो निकले, लेकिन वापस लौटकर नहीं आए। कोरोना संक्रमण को देखते हुए दी गई पैरोल कोरोना महामारी के दौरान फैलते संक्रमण को देखते हुए जेल प्रशासन ने अच्छे चाल-चलन वाले बंदियों को पैरोल पर भेजा था। कोरोना के बढ़ते संक्रमण के दौरान पैरोल की अवधि कई बार बढ़ाई गई थी। नहीं लौटने वालों में इनकी ही संख्या अधिक है। छत्तीसगढ़ में कुल पांच सेंट्रल जेल रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, जगदलपुर और अंबिकापुर में हैं। इसके अलावा 12 जिला और 16 उप जेल हैं। केंद्रीय जेलों के अलावा इन जेलों में भी बंदियों को राहत दी गई थी। बंदियों को अंतरिम जमानत पर छोड़ा गया था। इनकी संख्या और वापसी की पुख्ता जानकारी नहीं है। जानकार बताते हैं कि अंतरिम जमानत पर जेल के बाहर गए ज्यादातर बंदियों ने कोर्ट से अपनी जमानत करवा ली है। ऐसे में इन बंदियों की निश्चित संख्या की जानकारी जेल प्रबंधन के पास भी नहीं है।

हंगामे के बाद कार्यवाही कल तक के लिए स्थगित, विधानसभा के शीतकालीन सत्र में दो विधायकों ने ली शपथ

भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा का शीतकालीन सत्र आज से शुरू हो गया। अमरवाड़ा से विधायक कमलेश शाह और बुधनी से विधायक रमाकांत भार्गव के शपथ ग्रहण से विधानसभा की कार्यवाही शुरू हुई। इस दौरान कांग्रेस विधायकों ने खाद की खाली बोरियां लेकर विरोध प्रदर्शन किया। वे किसानों को खाद नहीं मिलने का मुद्दा उठा रहे थे। इसके बाद कार्यवाही कल तक के लिए स्थगित कर दी गई। शीतकालीन सत्र में सरकार जन विश्वास विधेयक प्रस्तुत करेगी, जिसके माध्यम से छोटे-छोटे मामलों को कोर्ट-कचहरी के स्थान पर अर्थदंड लगाने का अधिकार अधिकारियों को दिया जाएगा। इसके साथ ही वर्ष 2024-25 के लिए 17 दिसंबर को 15,000 करोड़ रुपये से अधिक के प्रथम अनुपूरक बजट के साथ नगर निगम और नगर पालिका अधिनियम और निजी विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक भी प्रस्तुत किए जाएंगे। एमपी सरकार पेश करेगी विधेयक कामकाज को सरल बनाने के लिए केंद्र सरकार ने वर्ष 2023 में जन विश्वास विधेयक प्रस्तुत किया था। इसी तरह मध्य प्रदेश सरकार भी विधेयक प्रस्तुत करने जा रही है। इसमें नगरीय विकास, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, ऊर्जा, श्रम, सहकारिता सहित अन्य विभागों के उन अधिनियमों में संशोधन किया जा रहा है, जिनमें दो-तीन माह की सजा या जुर्माने का प्रविधान है। ऐसे मामलों में समझौते का प्रविधान शामिल किया जा रहा है। उधर, नगर निगम, नगर पालिका और नगर परिषद के अध्यक्ष के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव तीन वर्ष की कार्यावधि पूरी होने के बाद प्रस्तुत करने और उसे पारित कराने के लिए तीन चौथाई पार्षदों का समर्थन आवश्यक संबंधी प्रविधान करने अधिनियम में संशोधन प्रस्तावित किया गया है। भाजपा के दो विधायक की शपथ विधानसभा के आज से प्रारंभ हुई शीतकालीन सत्र में सबसे पहले उपचुनाव में निर्वाचित दो विधायकों को शपथ दिलाई गई। लोकसभा चुनाव के समय छिंदवाड़ा जिले की विधानसभा सीट अमरवाड़ से कांग्रेस विधायक कमलेश शाह ने त्यागपत्र देकर भाजपा की सदस्यता ले ली थी। जुलाई 2024 में उपचुनाव कराए गए, जिसमें भाजपा के प्रत्याशी कमलेश शाह विजयी रहे। उन्होंने तब विधानसभा की सदस्यता नहीं ली थी। अब उन्हें शपथ दिलाई जाएगी। इसी तरह, शिवराज सिंह चौहान के विदिशा से सांसद निर्वाचित होने पर बुधनी और रामनिवास रावत के विधानसभा की सदस्यता से त्यागपत्र देने पर विजयपुर में उपचुनाव कराया गया था।

शवयात्रा को लेकर स्टालिन सरकार-भाजपा में तनातनी, तमिलनाडु-कोयंबटूर बम धमाकों के मास्टरमाइंड बाशा की मौत

कोयंबटूर। कोयंबटूर में 1998 में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों के मास्टर माइंड एसए बाशा की सोमवार शाम को मौत हो गई। पुलिस ने बताया कि एसए बाशा को उम्र संबंधी बीमारियों के इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। यहां उसकी मौत हो गई। पुलिस के मुताबिक बाशा के परिजन उसकी शवयात्रा निकालने की तैयारी कर रहे हैं। इसके लिए पुलिस बल तैनात किया जा रहा है। इसे लेकर स्टालिन सरकार और भाजपा में तनातनी हो गई है। भाजपा ने एक अपराधी और आतंकी की शवयात्रा निकालने की अनुमति देने का विरोध किया है। एसए बाशा प्रतिबंधित संगठन अल-उम्मा का संस्थापक-अध्यक्ष था। उसने 14 फरवरी 1998 को कोयंबटूर में हुए सिलसिलेवार बम विस्फोटों की योजना बनाई थी। इसमें 58 लोगों की जान चली गई थी। जबकि 231 लोग घायल हुए थे। मई 1999 में अपराध शाखा सीआईडी की विशेष जांच टीम ने बाशा के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया। उस पर भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी की हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाया गया। बाशा और उसके संगठन के 16 अन्य लोगों को 1998 के बम धमाकों के आरोप में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। हाल ही में मद्रास उच्च न्यायालय ने उसे पैरोल दी थी। पुलिस ने बताया कि वह पैरोल पर था और पिछले कुछ समय से उसकी तबीयत ठीक नहीं थी। तबीयत बिगड़ने पर उसे एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया और 35 साल जेल में रहने के बाद सोमवार शाम को उसकी मौत हो गई। बाशा के परिजन दक्षिण उक्कदम से फ्लावर मार्केट स्थित हैदर अली टीपू सुल्तान सुन्नत जमात मस्जिद तक उसकी शवयात्रा निकालने की योजना बना रहे हैं। इसलिए पुलिस बल तैनात किया गया है। भाजपा ने किया विरोध भाजपा तमिलनाडु के उपाध्यक्ष नारायणन तिरुपति ने कहा कि पुलिस को शवयात्रा निकालने की अनुमति नहीं देनी चाहिए। अगर किसी अपराधी, आतंकी, हत्यारे को शहीद घोषित किया गया तो इससे समाज में एक गलत मिसाल कायम होगी। उन्होंने एक्स पर लिखा कि किसी भी निर्मम हत्यारे के अंतिम संस्कार की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। यह शांतिपूर्ण तरीके से किया जाना चाहिए। यह बड़े सम्मान के साथ नहीं किया जाना चाहिए। क्योंकि वे इसके हकदार नहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि कट्टरपंथी विचार, हिंसा और सांप्रदायिक समस्याएं 1998 के कोयंबटूर बम विस्फोटों से शुरू हुईं और बाशा इसके लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार था। आज भी विभिन्न राजनीतिक दलों और आंदोलनों में ऐसे सैकड़ों लोग हैं जो प्रतिबंधित अल-उम्मा के सदस्य रहे हैं। भाजपा नेता ने कहा कि उसकी शवयात्रा 1998 की भूली-बिसरी यादें ताजा कर सकती है। इससे भविष्य में सांप्रदायिक मुद्दे बढ़ सकते हैं। मुख्यमंत्री एमके स्टालिन यह तय करें कि उसका जुलूस न निकले और मारे गए आतंकी बाशा का अंतिम संस्कार सिर्फ उनके परिवार के सदस्यों के साथ ही किया जाए।

आज पेश हो सकता है ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ बिल, लोकसभा की कार्यवाही शुरू

नई दिल्ली। संसद के शीतकालीन सत्र में मंगलवार को लोकसभा की कार्यवाही की शुरुआत हुई। देशभर की निगाहें आज संसद पर टिकी हुई हैं, क्योंकि केंद्र सरकार आज ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ बिल पेश कर सकती है। यह बिल देशभर में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने की व्यवस्था को लागू करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ बिल को लेकर देश में चल रही सियासत के बीच भाजपा ने अपने लोकसभा सांसदों के लिए व्हिप जारी किया है। बता दें कि 20 दिसंबर तक संसद का शीतकालीन सत्र है। इससे पहले यह चर्चा चली थी कि सोमवार को लोकसभा में ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ बिल पेश हो सकता है। हालांकि, सोमवार को ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ बिल पेश नहीं किया गया। उल्लेखनीय है कि 12 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस बिल को मंजूरी दे दी गई थी। कैबिनेट ने दो ड्रॉफ्ट कानूनों को मंजूरी दी थी, इसमें से एक संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा एवं राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने से संबंधित है, जबकि दूसरा विधेयक विधानसभाओं वाले तीन केंद्र शासित प्रदेशों के एक साथ चुनाव कराने के संबंध में हैं। सूत्रों के अनुसार, इस बिल पर आम लोगों की राय भी लेने की योजना है। विचार-विमर्श के दौरान बिल के प्रमुख पहलुओं, इसके फायदे और पूरे देश में एक साथ चुनाव कराने के लिए जरूरी कार्यप्रणाली और चुनावी प्रबंधन पर बातचीत की जाएगी। इस मुद्दे पर विपक्षी दलों से बातचीत की जिम्मेदारी के लिए केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, अर्जुन राम मेघवाल और किरेन रिजिजू को नियुक्त किया गया है।

हर साल प्रदेश में बंद पड़ी खदानों में डूबने से हो जाती है 50 लोगो की मौतें

रायपुर जिले में छह वर्षों में 300 से अधिक लोगों की मौत बंद पड़ी खदानों में डूबने से हुई है। ये आंकड़े जिला आपदा प्रबंधन से मिले हैं। खदान में डूबने से हर साल औसतन 50 से अधिक लोगों की जान चली जाती है। इसी तरह आगजनी और सर्पदंश से मौतों का आंकड़ा दूसरे नंबर पर है। जिले में आगजनी और सर्पदंश से भी हर वर्ष औसतन 20 से 25 लोगों की मौत हो जाती है। पिछले 11 महीनों में प्राकृतिक आपदा से मृत्यु के 191 प्रकरण हैं, जिनमें मृतक के स्वजनों को सात करोड़ 52 लाख रुपये की सहायता राशि स्वीकृत की गई है। साल 2014 से 2024 तक लंबित प्रकरणों में भी मृतकों के स्वजनों को सहायता राशि दी गई है। चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्राकृति आपदा से मृत्यु होने पर मृतकों के स्वजनों को चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता राशि दी जाती है। इस राशि से मृतक के स्वजनों को अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने में बड़ी मदद मिलती है। इसमें पानी में डूबने के अलावा बिच्छूदंश, आकाशीय बिजली गिरने, भारी बारिश होने से पेड़ व मकान गिरने, खदान धसकने जैसी घटनाएं भी शामिल हैं। हालांकि, ऐसी घटनाओं से मौतों की संख्या बंद खदानों में डूबने, आगजनी और सर्पदंश से मृत्यु की तुलना में बहुत कम हैं। आर्थिक सहायता से होगा लाभ प्राकृतिक आपदा से जिन लोगों की मौत हुई है, उनमें ऐसे कई ऐसे थे जिनकी आय से ही परिवार का जीवन-यापन निर्भर था। ऐसे में उनकी मृत्यु से परिवार में आय के साधन भी बंद हो गए थे। इस सहायता राशि से मृतक के परिवार अब कोई व्यवसाय या अन्य किसी काम में लगा पाएंगे, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। इनका कहना प्राकृतिक आपदा से मृत्यु के 191 प्रकरणों में सहायता राशि की स्वीकृति दी गई है। मृतकों के स्वजनों को सात करोड़ 52 लाख रुपये बांटे गए हैं। ऐसे प्रकरणों में तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। डॉ. गौरव सिंह, कलेक्टर, रायपुर

डिजिलॉकर में स्टोर होगा निवेशकों के शेयर्स-म्यूचुअल फंड होल्डिंग डिटेल्स : सेबी

नई दिल्ली शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड में निवेश करने वाले किसी भी निवेशक के निधन के बाद उसके नाम पर मौजूद फाइनेंशियल एसेट्स के ट्रासंफर को आसान बनाने के लिए शेयर बाजार के रेगुलेटर सेबी डिजिलॉकर के इस्तेमाल करने पर जोर देने की तैयारी में है. निवेशकों के फाइनेंशियल एसेट्स डिमैट खातों जिसमें शेयर्स के साथ ही म्यूचुअल फंड में मौजूद यूनिट्स को सरकारी डिजिटल स्टरेज सिस्टम डिजिलॉकर में सुरक्षित स्टोर किया जाएगा.   DigiLocker में स्टोर होगा स्टॉक-म्यूचुअल फंड यूनिट डिटेल्स मार्केट रेगुलेटर सिक्योरिटी एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया ने केंद्र सरकार के डिजिटल स्टोरेज सिस्टम डिजिलॉकर के इस्तेमाल करने का प्रस्ताव दिया है. इस प्रस्ताव का मकसद किसी भी निवेशक के निधन होने पर उसके नाम पर मौजूदा फाइनेंशियल एसेट्स के ट्रांसफर को सरल और सुगम बनाया जा सके. निवेशक के नाम पर जो भी फाइनेंशियल एसेट्स मौजूद है वो उसके नॉमिनी या वारिस को आसानी से ट्रांसफर किया जा सके. निवेशकों के फाइनेंशियल एसेट्स में डिमैट अकाउंट्स के स्टेटमेंट जिसमें शेयर्स, डिबेंचर होते हैं. इसके अलावा म्यूचुअल फंड स्कीमों में निवेशकों के नाम पर यूनिट्स भी होता है. निवेशकों के इन सभी फाइनेंशियल एसेट्स में निवेश का स्टेटमेंट डिजिलॉकर में सुरक्षित स्टोर किया जाएगा. निवेशक के निधन पर नॉमिनी को करेगा नोटिफाई इस प्रस्ताव के मुताबिक निवेशक के निधन के बाद डिजिलॉकर उनके अकाउंट को अपडेट कर उन्हें नोटिफाई करेगा जिन्हें निवेशक ने अपना नॉमिनी या वारिस बनाया है जिससे वो व्यक्ति फाइनेंशियल एसेट्स को मैनेज कर सके. इस तरह जिस निवेशख का निधन हुआ है नॉमिनी उनके फाइनेंशियल एसेट्स डिटेल्स को एक्सेस कर सकेंगे और एसेट्स को ट्रांसफर कर सकेंगे. सेबी का मकसद स्टॉक्स और म्यूचुअल फंड को अनक्लेम्ड एसेट्स होने से रोकना है और सही वारिस तक एसेट्स को ट्रांसफर करना है. 31 दिसंबर तक दे सकते हैं सुझाव सेबी ने अपने कंसलटेशन पेपर में ये प्रस्ताव दिया है कि है कि डिपॉजिटरीज और म्यूचुअल फंड्स डिमैट और म्यूचुअल फंड होल्डिंग स्टेटमेंट को डिजिलॉकर पर उपलब्ध कराएं. ये भी प्रस्ताव दिया गया है कि केवाईसी रजिस्ट्रेशन एजेंसीज डिजिलॉकर के साथ निवेशक के निधन की सूचना को शेयर करें. डिजिलॉकर यूजर्स किसी भी व्यक्ति को अकाउंट एक्सेस करने के लिए नॉमिनेट कर सकता है. सेबी ने 31 दिसंबर, 2024 तक लोगों को इसे लेकर सुझाव मांगा है. 

रिपोर्ट : भारत में लगातार बेहतर परफॉर्म करने वाली कंपनियों की संख्या अमेरिका के बाद दूसरे नंबर पर

 नई दिल्ली भारत ने ग्लोबल लेवल पर अपनी आर्थिक ताकत का मजबूत प्रदर्शन किया है. डीएसपी म्यूचुअल फंड्स की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में लगातार बेहतर परफॉर्म करने वाली कंपनियों की संख्या अमेरिका के बाद दूसरे नंबर पर है. ये भारतीय स्टॉक मार्केट के साथ ही देश के बिजनेस इंफ्रास्ट्रक्चर की ताकत का भी सबूत है. रिपोर्ट के मुताबिक 39 भारतीय कंपनियों ने बीते 20 साल में अपनी बुक वैल्यू में लगातार इजाफा किया है, इनमें 7 कंपनियों का परफॉर्मेंस बेहद शानदार रहा है. भारतीय कंपनियों ने 2008 की ग्लोबल इकोनॉमिक मंदी और कोविड-19 महामारी के बावजूद बेहतरीन प्रदर्शन किया है. चुनौतियों के बावजूद भारतीय कंपनियों का जोरदार परफोरमेंस रिपोर्ट बताती है कि इन भारतीय कंपनियों ने अपनी मजबूत फाइनेंशियल सेहत और मैनेजमेंट क्षमता के चलते लंबे समय तक स्टेबिलिटी बनाए रखी है. डीएसपी म्यूचुअल फंड्स की रिपोर्ट के मुताबिक, एक दशक से ज्यादा समय से भारतीय कंपनियां इक्विटी पर लगातार 20 फीसदी से ज्यादा रिटर्न दे रही हैं. 75 फीसदी से ज्यादा भारतीय कंपनियों ने चुनौतीपूर्ण आर्थिक स्थितियों में भी पॉजिटिव बुक वैल्यू दर्ज की है. किसी कंपनी की बुक वैल्यू में लगातार बढ़ोतरी बताती है कि वो अपने इन्वेस्टर्स को लंबे समय तक हाई रिटर्न देने की क्षमता रखती है. ये रिपोर्ट इस बात का भी संकेत देती है कि भारतीय इकोनॉमी ने 2008 की मंदी और कोविड-19 महामारी जैसी चुनौतियों का डटकर सामना किया है. भारतीय शेयर बाजार में भी बेहतर रिटर्न घरेलू शेयर बाजार में कंपनियों के बेहतर परफॉर्मेंस ने भारत को ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर मजबूत पोज़िशन में ला खड़ा किया है. डीएसपी म्यूचुअल फंड्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय शेयर बाजार के बेहतर प्रदर्शन की मुख्य वजह इसका मजबूत रिटर्न ऑन इक्विटी यानी ROE है. ये आंकड़े दिखाते हैं कि भारत के पास तेज इकोनॉमिक ग्रोथ के लिए मजबूत आधार होने के साथ ही किसी भी ग्लोबल संकट से निपटने की ताकत है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारतीय कंपनियों की ये स्टेबिलिटी इन्वेस्टर्स के कॉन्फिडेंस को बढ़ाने के साथ ही देश की आर्थिक तरक्की का भी मजबूत बेस है. भारतीय कॉरपोरेट सेक्टर की मजबूती ने घरेलू स्टॉक मार्केट को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है. ये रिपोर्ट इस बात का सबूत है कि भारतीय कंपनियों का प्रदर्शन ना केवल डोमेस्टिक लेवल पर बल्कि इंटरनेशनल लेवल पर भी सराहनीय है. मजबूत बुनियाद और फाइनेंशियल सेहत के दम पर भारतीय कंपनियां भविष्य में भी ग्लोबल लेवल पर अपनी पहचान बनाए रखने की ताकत दिखा रही हैं.  

प्रदेश में प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी 2.0 की हुई शुरूआत, 22 हजार 800 करोड़ रूपये की राशि हुई जारी

भोपाल नगरीय विकास एवं आवास विभाग प्रदेश में प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी 2.0 की शुरूआत हो गई है। इस योजना में प्रदेश के जरूरतमंद हितग्राहियों के लिये 10 आवास बनाये जायेंगे। इस योजना का लाभ उन हितग्राहियों को दिया जायेगा, जिन्हें किसी कारण से अब तक आवास योजना का लाभ प्राप्त नहीं हुआ है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने मैदानी अमले को योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिये हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी 2.0 के आवेदन संबंधी जानकारी नजदीकी नगरीय निकायों से प्राप्त की जा सकती है। योजना के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिये केन्द्र सरकार ने यूनीफाइड वेब पोर्टल पर भी जानकारी अपलोड की है। प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी 2.0 में 4 प्रकार के घटक शामिल किये गये हैं। हितग्राही आवेदन करते समय अपनी पात्रता और आवश्यकता के अनुसार घटक का चयन कर सकते हैं। योजना संबंधी निर्देशिका https://pmaymis.gov.in/PMAYMIS2_2023/PmayDefault.aspx पोर्टल से प्राप्त की जा सकती है। प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी 2.0 में देश में एक करोड़ आवास और मध्यप्रदेश में 10 लाख आवास बनाये जाने का कार्यक्रम तैयार किया गया है। प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी 2.0 में विशेष वर्गों को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया गया है। इनमें पीएम स्वनीधि योजना, भवन निर्माण श्रमिक, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, पीएम विश्वकर्मा योजना के कारीगर, सफाई कर्मी और झुग्गी बस्ती में रहने वाले परिवार शामिल है। प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी 1.0 में 8 लाख 25 हजार आवास बनकर हो गये हैं तैयार प्रदेश में प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी में अब तक 8 लाख 25 हजार जरूरतमंद हितग्राहियों के आवास निर्माण पूरे किये जा चुके हैं। प्रदेश में प्रधानमंत्री आवास योजना के पहले चरण में 9 लाख 45 हजार आवास स्वीकृत किये गये थे। प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी के प्रथम चरण के क्रियान्वयन की सम्पूर्ण अवधि में मध्यप्रदेश देशभर में अग्रणी स्थान पर है। योजना के उत्कृष्ट क्रियान्वयन के लिये मध्यप्रदेश और प्रदेश की कई नगरीय निकायों को राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार भी प्राप्त हुए हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी के प्रथम चरण में प्रभावी क्रियान्वयन का श्रेय न्यूनतम दर पर आवास उपलब्ध कराने के लिये राज्य सरकार द्वारा किये गये कई नवाचारों को जाता है। स्वीकृत आवासों के निर्माण कि लिये केन्द्रांश और राज्यांश की अनुदान राशि 19 हजार 700 करोड़ रूपये एवं क्रेडिट लिंक सब्सिडी स्कीम (सीएलएसएस) घटक के लिये ब्याज अनुदान के रूप में 3 हजार 900 करोड़ रूपये, इस प्रकार कुल राशि 23 हजार 600 करोड़ रूपये स्वीकृत की जा चुकी है। हितग्राहियों को अब तक 22 हजार 800 करोड़ रूपये की राशि जारी की जा चुकी है।  

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी Navi Mumbai के खारघर में Iskcon Temple का करेंगे उद्घाटन

 मुंबई नवी मुंबई के खड़गपुर में 12 साल की मेहनत के बाद भव्य इस्कोन मंदिर बनकर तैयार हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले महीने 15 तारीख को इस मंदिर का उद्घाटन करने वाले हैं। मंदिर का नाम राधा मदनमोहनजी मंदिर दिया गया है। जानकारी के मुताबिक इस मंदिर के निर्माण में 170 करोड़ रुपये का खर्च आया है। मंदिर के ट्रस्टी और अध्यक्ष सूरदास प्रभु ने कहा कि आधुनिक समय में यह मंदिर बड़ा आध्यात्मिक केंद्र बनने वाला है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यहां कल्चरल सेंटर और वैदिक संग्रहालय का भी शिलान्यास करेंगे। इसमें भारत की महान संस्कृति की छवि देखने को मिलेगी। उन्होंने कहा कि निर्माण के दौरान भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंदिर देखने आ चुके हैं। 12 अक्टूबर को नवी मुंबई दौरे के समय वह यहां आए थे। उन्होंने कहा कि नवी मुंबई में हरियाली के बीच यह मंदिर बहुत बहुत भव्य नजर आता है। मंदिर के उद्घाटन का कार्यक्रम 9 जनवरी से ही शुरू हो जाएगा। इसके बाद यह कार्यक्रम एक सप्ताह तक चलेगा। 15 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसका उद्घाटन करेंगे। मंदिर की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक मकर संक्रांति के मौके पर इसका उद्घाटन किया जाना है। इस मंदिर में भक्तिवेदंत कॉलेज ऑफ वैदिक एजुकेशन, एक लाइब्रेरी, आयुर्वेदिक हीलिंग सेंटर, गौशाला, वरिष्ठ नागरिकों के लिए आश्रम, जैविक खेत भी होंगे। इस कार्यक्रम में महाराष्ट्र के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन,मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और अजित पवार भी शामिल हो सकते हैं। एक सप्ताह के कार्यक्रम के दौरान आध्यात्मिक सेमिनार, भजन संध्या, सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाएगा। इस मंदिर में दशावतार की मूर्तियां भी स्थापित की गई हैं।

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