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आईटी रिटर्न में गड़बड़ी वालों से सरकार ने डेटा और एनालिटिक्स का उपयोग कर, वसूले 37,000 करोड़ रुपये

नई दिल्ली इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने पिछले 20 महीनों में ऐसे लोगों से ₹37,000 करोड़ वसूले हैं, जो टैक्सेबल इनकम होने के बावजूद रिटर्न दाखिल नहीं कर रहे थे। अधिकारियों ने बताया कि हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शंस के एनालिसिस के बाद ऐसे लोगों की पहचान की। यह खर्च नकद में किया गया था। इन लोगों ने 2019-20 के दौरान रत्न और आभूषणों की खरीद, प्रॉपर्टी और लग्जरी होलिडेज पर जमकर खर्च किया था। एक वरिष्ठ अधिकारी ने ईटी को बताया कि ये ऐसे मामले हैं, जहां लोग बड़ी खरीदारी करने के बावजूद टैक्स रिटर्न दाखिल नहीं कर रहे थे। विभाग ने पिछले 20 महीनों में उनसे संपर्क किया था। अधिकारी ने कहा कि व्यापक और अधिक सख्त टैक्स कलेक्शन और स्रोत पर कटौती (TDS) व्यवस्था ने हाई वैल्यू ट्रांजैक्शन को ट्रैक करने में मदद की है। ये ऐसे ट्रांजैक्शन थे जो किसी तरह टैक्स अधिकारियों की नजरों से छूट गए थे। कई ऐसे भी मामले भी हैं जिनमें लोगों ने जमकर खर्च किया और टैक्स देनदारी के बावजूद जीरो इनकम घोषित करते हुए रिटर्न दाखिल किया। अधिकारी ने कहा कि ₹37,000 करोड़ में से हाई वैल्यू ट्रांजैक्शन करने वाले लोगों से ₹1,320 करोड़ की वसूली की गई। विभाग उन टैक्सपेयर्स से संपर्क साध रहा है जिनका खर्च पैटर्न और आईटी रिटर्न में गड़बड़ी है। कैसे पकड़ी गई चोरी इनकम टैक्स विभाग टैक्स चोरी का पता लगाने के लिए डेटा और एनालिटिक्स का उपयोग कर रहा है और ऐसे व्यक्तियों की पहचान करने के लिए वित्त वर्ष 2021 से गैर-फाइलर मॉनीटरिंग सिस्टम को तैनात किया गया है। अधिकारी ने कहा कि कई स्रोतों से प्राप्त डेटा टैप और सिंक्रोनाइज किया जा रहा है। इससे विभाग के लिए टैक्स चोरी की पहचान करना और ऐसे लोगों को पकड़ना आसान हो जाता है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल-नवंबर में प्रत्यक्ष कर संग्रह 15.4% बढ़कर ₹12.10 लाख करोड़ हो गया। इसमें ₹5.10 लाख करोड़ का कॉर्पोरेट कर और ₹6.61 लाख करोड़ का गैर-कॉर्पोरेट कर शामिल है।

खुलासा : शादी करने वाले कैडर आंदोलन से मुंह मोड़ सकते हैं, नतीजतन, शादी करने वाले किसी भी कैडर के लिए नसबंदी अनिवार्य है

जगदलपुर छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में गृहमंत्री अमित शाह के साथ मिलने आए पूर्व नक्सलियों ने नक्सली नेताओं के बारे में कई खुलासे किए हैं. उनका कहना है कि यदि कोई नक्सल कैडर शादी करना चाहता है, तो उसे पहले नसबंदी करवानी पड़ती है. माओवादी शब्दावली में नसबंदी एक बहुत ही आम शब्द है. शादी से वरिष्ठ सीपीआई (माओवादी) नेताओं के निर्देश पर इस प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है. तेलंगाना के एक पूर्व नक्सली को शादी से पहले नसबंदी की प्रक्रिया से गुजरने का निर्देश दिया गया था. कई साल बाद जब उसने सरेंडर किया, तो प्रक्रिया को उलटने के लिए दूसरी सर्जरी करवाई. इसके बाद एक लड़के का पिता बन पाया. ज्यादातर नक्सली सरेंडर के बाद इसी तरह परिवार शुरू करने के लिए प्रक्रिया को चुनते हैं.  केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को इसके प्रभाव से अवगत कराया गया. पूर्व नक्सली ने बताया, “जब मैं सीपीआई (माओवादी) का सदस्य था, तो मुझे शादी से पहले नसबंदी करवानी पड़ी. लेकिन जब मैं सरेंडर के बाद मुख्यधारा में शामिल हो गया, तो मैंने एक ऑपरेशन करवाया ताकि मैं पिता बन सकूं. दूसरे ऑपरेशन के बाद, मैं एक बच्चे का पिता बन गया.” दरअसल, नक्सल नेताओं के बीच ये धारणा है कि बच्चे पैदा होने के बाद उनके कैडर के लोग परिवार के मोह में पड़ जाएंगे. इस वजह से नक्सल आंदोलन को नुकसान पहुंचेगा. इस बात की भी आशंका है कि शादी करने वाले कैडर आंदोलन से मुंह मोड़ सकते हैं. नतीजतन, शादी करने वाले किसी भी कैडर के लिए नसबंदी अनिवार्य है. छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली मरकम दुला ने कहा कि नक्सली नेता नहीं चाहते कि कोई भी सदस्य भावनात्मक रूप से अपनी संतान से जुड़े, इसलिए ‘नसबंदी’ करवा दी जाती है. ओडिशा के मलकानगिरी के एक पूर्व माओवादी ने भी ऐसी ही कहानी साझा की है. सुकांति मारी ने कहा, “मेरे साथी कैडर से शादी करने से पहले उसे ‘नसबंदी’ करवानी पड़ी.” उसके पति को पुलिस मुठभेड़ में मार दिया गया. इसके बाद में उसने अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया. इस बातचीत के दौरान अमित शाह ने कहा कि वो इस बात से बेहद संतुष्ट हैं कि युवा हिंसा का रास्ता छोड़कर हथियार डाल रहे हैं. उन्होंने नक्सलियों से हथियार छोड़ने और मुख्यधारा में शामिल होने की अपील करते हुए कहा कि उनका पुनर्वास सरकार की जिम्मेदारी है. उन्होंने कहा, “मैं नक्सलियों से अपील करता हूं कि कृपया आगे आएं. हथियार छोड़ दें, आत्मसमर्पण करें और मुख्यधारा में शामिल हों. आपका पुनर्वास हमारी जिम्मेदारी है.” केंद्र ने आत्मसमर्पण करने वाले उग्रवादियों और नक्सलियों के लिए पुनर्वास नीति बनाई है.  

फ्रांस में चक्रवात आने से 1000 लोगों के मरने की आशंका, हर तरफ तबाही

पेरिस फ्रांस के मायोट क्षेत्र में चक्रवात ‘चिडो’ के कारण सैकड़ों लोगों की मौत हो गई है। कई इलाकों पर तबाही का ऐसा मंजर पसरा हुआ है, मानो परमाणु हमले के बाद की तबाही हो। स्थानीय लोगों का हाल इतना बुरा है कि कई दिनों से पीने को पानी नहीं है, खाने को भोजन नहीं और कइयों के तो घर तूफान में उड़ गए। अधिकारियों का कहना है कि मरने वालों की संख्या हजारों में भी जा सकती है। चक्रवात चिडो के कारण मायोट इलाके में 225 किमी/घंटा (140 मील प्रति घंटे) से अधिक की गति से हवाएं चलीं। इससे वे क्षेत्र नष्ट हो गए जहां बेसहारा लोग टिन की छत वाली झुग्गियों में रह रहे थे। इलाके के एक स्थानीय ममूदज़ौ ने बीबीसी से बातचीत में कहा, “हमें तीन दिनों से पानी नहीं मिला है।” एक अन्य ने कहा, “मेरे कुछ पड़ोसी भूखे और प्यासे हैं।” मलबे से शवों को निकालने में लगेंगे कई दिन बचावकर्मी मलबे में जीवित बचे लोगों की तलाश कर रहे हैं। बचाव कर्मियों का कहना है कि इलाके में तबाही इतनी ज्यादा है कि मलबे से शवों को निकालने में ही कई दिन लग सकते हैं। उन्होंने कहा कि मरने वालों की संख्या हज़ारों तक पहुंच सकती है। चक्रवात के कारण हवाई अड्डे सहित सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है, इलाके तबाह हो गए हैं और बिजली आपूर्ति ठप हो गई है। फ्रांस ने 90 साल बाद देखी ऐसी तबाही फ्रांस के एक टीवी चैनल मायोट लाएरे की रिपोर्ट के मुताबिक, यह 90 वर्षों में आया अब तक का सबसे भयंकर तूफान है। इस तबाही में सैकड़ों लोग मारे गए हैं, शायद संख्या लगभग एक हजार के करीब हो सकती है या फिर हजारों में भी पहुंच सकती है।” फ्रांस के गृह मंत्रालय ने सोमवार को कम से कम 11 लोगों की मौत और 250 से अधिक लोगों के घायल होने की पुष्टि की थी लेकिन कहा कि यह संख्या काफी बढ़ने की आशंका है। अफ्रीका के तट से दूर दक्षिण-पूर्वी हिंद महासागर में स्थित मायोट, फ्रांस का सबसे गरीब द्वीप क्षेत्र और यूरोपीय संघ का सबसे गरीब क्षेत्र है।

PMML का राहुल को लेटर- नेहरू के डॉक्यूमेंट्स लौटाएं, 2008 में सोनिया ने म्यूजियम से मंगवाए थे

नई दिल्ली भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के पत्र लौटाने के लिए सांसद राहुल गांधी को पत्र लिखा गया है। यह पत्र PMML यानी प्रधानमंत्री संग्रहालय और पुस्तकालय की ओर से लिखा गया है। हालांकि, अब तक इसे लेकर कांग्रेस की ओर से आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। खबर है कि कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी के पास इन पत्रों को करीब 16 साल पहले पहुंचाया गया था। 10 दिसंबर को PMML के सदस्य रिजवान कादरी की ओर से कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को पत्र भेजा गया है। इसमें उनसे अपील की गई है कि सोनिया गांधी की तरफ से वापस बुलाए गए ओरिजिनल लेटर लौटाएं या उनकी फोटोकॉपी या डिजिटल कॉपी दाखिल करें। खास बात है कि सितंबर में भी सोनिया गांधी से पत्र लौटाने का अनुरोध किया गया था। साल 1971 में इन पत्रों को नेहरू मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी (अब PMML) में जमा कराए गए थे। रिपोर्ट के अनुसार, कथित तौर पर साल 2008 में 51 बॉक्स में ये लेटर वापस सोनिया गांधी को भेज दिए गए थे। खास बात है कि तब तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अगुवाई वाली UPA सरकार थी। पंडित नेहरू के पत्र इन पत्रों में नेहरू समेत इतिहास के कई बड़े नामों के बीच संवाद हैं। इनमें एडविना माउंटबेटन, एल्बर्ट आइंस्टीन, जयप्रकाश नारायण, पद्मजा नायडू, विजयलक्ष्मी पंडित, अरुणा आसिफ, बाबू जगजीवन राम, गोविंद वल्लभ पंत समेत कई लोग शामिल हैं। PMML की तरफ से भेजे गए पत्र में कहा गया है, ‘हम समझते हैं कि ये पत्र नेहरू परिवार के लिए निजी महत्व रख सकते हैं। हालांकि, PMML का मानना है कि ऐतिहासिक सामग्री तक… आसान पहुंच बनाना स्कॉलर्स और रिसर्चर्स की काफी मदद कर सकता है।’ रिजवान कादरी ने चिट्ठी में क्या लिखा? कादरी ने अपनी चिट्टी में आगे लिखा है,  2008 में तत्कालीन यूपीए की अध्यक्ष सोनिया गांधी के अनुरोध पर इन दस्तावेजों का एक संग्रह पीएमएमएल से वापस ले लिया गया था। हम समझते हैं कि ये दस्तावेज ‘नेहरू परिवार’ के लिए व्यक्तिगत महत्व रखते होंगे। मगर पीएमएमएल का मानना है कि ये ऐतिहासिक महत्व के दस्तावेज हैं और इन तक पहुंच आवश्यक है। सोनिया गांधी से भी की थी लेटर लौटाने की मांग कादरी ने  बातचीत में बताया कि सितंबर 2024 में भी मैंने सोनिया गांधी को पत्र लिखकर अनुरोध किया था कि 2008 में नेहरू स्मारक संग्रहालय एवं पुस्तकालय से वापस लिए गए 51 डिब्बों को लौटा दिए जाएं या हमें उन्हें देखने और स्कैन करने की अनुमति दी जाए या फिर उनकी एक प्रति हमें प्रदान की जाए ताकि हम उनका अध्ययन कर सकें। इस पर अब तक उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। तो मैंने विपक्ष के नेता और उनके बेटे राहुल गांधी से उन्हें वापस लाने में हमारी मदद करने का अनुरोध किया। हमें उम्मीद है कि विपक्ष के नेता के रूप में वे इस पर गौर करेंगे और इसे शोधकर्ताओं के लिए उपलब्ध कराएंगे।” नेहरू ने किसके नाम लिखी थी चिट्ठी बता दें कि नेहरू ने ये चिट्टी अपने शासनकाल में जयप्रकाश नारायण, बाबू जगजीवन राम, एडविना माउंटबेट, पद्मजा नायडू, विजया लक्ष्मी पंडित, अरुणा आसफ और गोविंद बल्लभ समेत अन्य भारतीय इतिहास से संबंधित लोगों के कई महत्वपूर्ण पत्र वहां थे। रिजवान कादरी ने बताया कि ये लेटर जवाहरलाल नेहरु मेमोरियल ने 1971 में नेहरु मेमोरियल म्यूज़ियम एंड लाइब्रेरी (अब पीएमएमएल) को दिए थे। बता दें कि15 जून, 2023 नेहरू मेमोरियल म्यूजियम और लाइब्रेरी का नाम बदलकर ‘प्रधानमंत्री म्यूजियम और लाइब्रेरी सोसाइटी’ रखने का फैसला किया गया था।  

बांग्लादेश : मोहम्मद युनुस ने कहा है 2025 के आखिरी या फिर 2026 की शुरुआत में आम चुनाव कराए जा सकते

ढाका बांग्लादेश में अंतरिम सरकार के मुखिया नोबल विजेता मोहम्मद युनुस ने कहा है कि 2025 के आखिरी या फिर 2026 की शुरुआत में आम चुनाव कराए जा सकते हैं। तब तक अंतरिम सरकार ही देश की सरकार चलाएगी। शेख हसीना को हटाने के बाद मोहम्मद यूनुस को अंतरिम सरकार का मुख्य सलाहकार बनाया गया है। वहीं बांग्लादेश में कट्टरपंथियों के हौसले बुलंद हैं और वे लगातार अल्पसंख्यकों को टारगेट कर रहे हैं। यूनुस ने सोमवार को एक टीवी चैनल को बताया कि चुनाव आखिरी 2025 या फिर 2026 की शुरुआत में ही होंगे। बांग्लादेश में युनुस पर आम चुनाव को लेकर अब दबाव बढ़ रहा है। वहीं तख्तापलट के बाद शेख हसीना भारत आ गई थीं। युनुस ने कहा कि चुनाव कराने से पहले बहुत सारे सुधार करने की जरूरत है। वोटर लिस्ट में सुधार केसाथ ही चुनावी प्रक्रिया को भी सुधारना है। इससे पहले 7 जनवरी 2024 को ही बांग्लादेश में आम चुनाव करवाए गए थे। लागातर चौथी बार शेख हसीना की आवामी लीग ने जीत दर्ज की थी। विजय दिवस के मौके पर मोहम्मद युनुसन ने चुनाव को लेकर प्लान सामने रखा है। वहीं शेख हसीना ने रविवार को देश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस पर एक और तीखा हमला किया तथा उन पर एक ऐसे ‘अलोकतांत्रिक समू’’ का नेतृत्व करने का आरोप लगाया, जिसकी लोगों के प्रति कोई जवाबदेही नहीं है। ‘विजय दिवस’ की पूर्व संध्या पर एक बयान में हसीना ने यूनुस को ‘फासीवादी’ कहा और आरोप लगाया कि उनके नेतृत्व वाली सरकार का मुख्य उद्देश्य मुक्ति संग्राम और मुक्ति समर्थक ताकतों की भावना को दबाना है। बांग्लादेश 16 दिसंबर को विजय दिवस के रूप में मनाता है। 16 दिसंबर 1971 को पाकिस्तानी सेना के तत्कालीन प्रमुख जनरल अमीर अब्दुल्ला खान नियाजी ने 93,000 सैनिकों के साथ 13 दिन के युद्ध के बाद भारतीय सेना और ‘मुक्ति वाहिनी’ की संयुक्त सेना के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया, जिसके बाद पूर्वी पाकिस्तान बांग्लादेश बन गया। हसीना ने अपने बयान में कहा कि ‘राष्ट्र विरोधी समूहों’ ने असंवैधानिक तरीके से सत्ता पर कब्जा कर लिया है। उन्होंने कहा, ‘फासीवादी यूनुस के नेतृत्व वाले इस अलोकतांत्रिक समूह की जनता के प्रति कोई जवाबदेही नहीं है।’ उन्होंने कहा, ‘वे सत्ता पर कब्जा कर रहे हैं और सभी जन कल्याण कार्यों में बाधा डाल रहे हैं।’ हसीना ने यूनुस सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि बांग्लादेश के लोग बढ़ती कीमतों के बोझ तले दबे हुए हैं। उन्होंने कहा, ‘चूंकि यह सरकार लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई नहीं है, इसलिए लोगों के प्रति उनकी कोई जवाबदेही नहीं है। उनका मुख्य उद्देश्य मुक्ति संग्राम और मुक्ति समर्थक ताकतों की भावना और उनकी आवाज को दबाना है।’

राज्य देश का तकनीकी केंद्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा :मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

भोपाल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ अभियान में मध्यप्रदेश ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल्स पार्क ने वंदे भारत ट्रेन के लिए बीएचईएल द्वारा सौंपे गए उच्च गुणवत्ता वाले बियरिंग पार्ट्स का सफलतापूर्वक निर्माण कर यह साबित कर दिया है कि राज्य देश का तकनीकी केंद्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कुशल नेतृत्व और कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम टेटवाल के मार्गदर्शन में ग्लोबल स्किल्स पार्क ने बियरिंग पार्टस निर्माण के प्रोजेक्ट को समय पर पूरा करते हुए अपनी तकनीकी क्षमता को सिद्ध किया है। बियरिंग पार्टस निर्माण की इस परियोजना में अत्याधुनिक 3-एक्सिस और 5-एक्सिस सीएनसी मिलिंग और टर्निंग तकनीकों का उपयोग किया गया है। ग्लोबल स्किल्स पार्क के प्रशिक्षित विशेषज्ञों और युवाओं ने पूरी दक्षता के साथ बियरिंग पार्ट्स का निर्माण उच्च गुणवत्ता के साथ किया। यह केवल एक तकनीकी उपलब्धि नहीं है, बल्कि आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम भी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस उपलब्धि पर गर्व जताते हुए कहा कि यह मध्यप्रदेश के तकनीकी नवाचार और कौशल विकास के बढ़ते कदमों का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि ग्लोबल स्किल्स पार्क ने यह साबित कर दिया है कि मध्यप्रदेश न केवल तकनीकी हब बनने की ओर अग्रसर है, बल्कि यह मेक इन इंडिया अभियान को मजबूती देने वाला एक मजबूत स्तंभ भी बन रहा है। कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) टेटवाल ने कहा कि यह सफलता दर्शाती है कि हमारे युवा विश्वस्तरीय औद्योगिक मानकों को पूरा करने और वैश्विक प्रतिस्पर्धा का सामना करने में पूरी तरह सक्षम हैं। ग्लोबल स्किल्स पार्क ने तकनीकी नवाचार और प्रशिक्षण में एक अनूठी मिसाल पेश की है। तकनीकी शिक्षा और नवाचार का केंद्र ग्लोबल स्किल्स पार्क, कौशल विकास और तकनीकी शिक्षा के समन्वय का बेहतरीन उदाहरण है। संस्था ने साबित किया है कि भारत में उन्नत तकनीकों का विकास और उन्हें विश्वस्तरीय उत्पादों में बदलना संभव है। ग्लोबल स्किल्स पार्क न केवल युवाओं को आधुनिक तकनीकी कौशल सिखा रहा है, बल्कि उन्हें रोजगार के नए अवसर भी प्रदान कर रहा है। ग्लोबल स्किल्स पार्क की यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि राज्य के प्रशिक्षित युवा वैश्विक औद्योगिक चुनौतियों का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। ग्लोबल स्किल्स पार्क : आत्मनिर्भरता और प्रगति का प्रतीक ग्लोबल स्किल्स पार्क की यह उपलब्धि ‘मेक इन इंडिया’ अभियान की सफलता को मजबूत आधार प्रदान करती है। यह परियोजना बताती है कि उन्नत तकनीकों का उपयोग और स्थानीय प्रतिभा का सही मार्गदर्शन देश को वैश्विक औद्योगिक मानचित्र पर स्थापित कर सकता है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में चल रहे इस अभियान के तहत, भारत ने तकनीकी और औद्योगिक क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत की है। ग्लोबल स्किल्स पार्क भोपाल जैसे संस्थान न केवल स्थानीय स्तर पर विकास की कहानी लिख रहे हैं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर आत्मनिर्भरता और तकनीकी उत्कृष्टता के उदाहरण भी पेश कर रहे हैं।  

स्थानीय बुनकरों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से अपने उत्पाद बेचने के लिए किया जा रहा है प्रशिक्षित – मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को सशक्त बनाने की दिशा में 16 दिसंबर से दिल्ली स्थित भारत मंडपम में होने वाला ‘फ्लेवर्स ऑफ इंडिया कार्यक्रम’ एक अद्भुत पहल है। उन्होंने कहा कि हमारे देश की समृद्ध विरासत में निहित स्थानीय खानपान, शिल्पकला और वस्त्र उद्योग की पहचान को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाने की यह एक अनूठी कोशिश है। इसमें भारतीय मूल अनाजों, विशेष रूप से मिलेट्स – जिन्हें ‘अन्न’ के रूप में भी जाना जाता है,  पोषण लाभों और उनकी महत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। यह कदम आने वाली पीढ़ियों को हमारे पारंपरिक खानपान की ओर प्रेरित करेगा और स्वास्थ्य के प्रति एक नई जागरूकता लाएगा। केन्द्रीय खाद्य प्र-संस्करण मंत्रालय द्वारा दिल्ली के भारत मंडपम में 16 दिसम्बर को “फ्लेवर्स ऑफ इंडिया-2024” का आयोजन केन्द्रीय वस्त्र मंत्रालय, नीति आयोग, सर्व रिथु सेवा फाउंडेशन के सहयोग से किया जा रहा है। भारतीय खान-पान और परंपरागत परिधानों की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करने की दिशा में यह एक प्रयास है। राज्य सरकार कर रही है वोकल फॉर लोकल में प्रदेश के हर जिले की विशेषताओं को प्रोत्साहित मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने वोकल फॉर लोकल के तहत अपने स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। खान-पान क्षेत्र में, प्रदेश के हर जिले की विशेषताओं को प्रोत्साहित करने के लिए स्थानीय व्यंजन महोत्सव आयोजित किए हैं। चंदेरी, भोपाल, और मालवा क्षेत्रों के खास व्यंजनों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए उन्हें फूड फेस्टिवल्स और अन्तर्राष्ट्रीय मंचों पर प्रदर्शित किया गया है। मुख्यमंत्री ने स्थानीय उत्पादों और परंपराओं को प्रोत्साहित करने का किया आव्हान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वस्त्र उद्योग में, चंदेरी और महेश्वरी जैसे पारंपरिक वस्त्रों को बढ़ावा देने के लिए हस्तशिल्प विकास योजनाएं शुरू की गई हैं। स्थानीय बुनकरों को डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से अपने उत्पाद बेचने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है, जिससे वे सीधे अपने ग्राहकों से जुड़ सकें। हमने लोकल-टू-ग्लोबल के दृष्टिकोण के साथ इंटरनेशनल टेक्सटाइल एक्सपो भी आयोजित किए हैं। फ्लेवर्स ऑफ इंडिया जैसे आयोजनों के माध्यम से, स्थानीय कारीगरों, किसानों और बुनकरों की कला और परिश्रम को राष्ट्रीय और वैश्विक पहचान दिलाने में मदद मिलती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी आयोजकों को इस प्रयास के लिए बधाई देते हुए कहा कि यह पहल भारतीय खानपान और वस्त्र उद्योग को एक नई ऊंचाई पर ले जाने में मदद करेगी और वोकल फॉर लोकल को एक सशक्त दिशा प्रदान करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी को इस पहल में शामिल होकर अपने स्थानीय उत्पादों और परंपराओं को प्रोत्साहित करने का आहवान किया।  

राज्यपाल पटेल ने कहा टी.बी. को हराने और देश को जिताने के लिए भरपूर जोश और शक्ति के साथ कार्य करना होगा

टी.बी. को हराने और देश को जिताने में लगाए पूरी शक्ति और जोश : राज्यपाल पटेल जनता के प्राणों की रक्षा के उद्देश्य के भाव के साथ टी.बी. सील अभियान में सहयोग करें : राज्यपाल पटेल राज्यपाल पटेल ने कहा टी.बी. को हराने और देश को जिताने के लिए भरपूर जोश और शक्ति के साथ कार्य करना होगा राज्यपाल द्वारा 75वें टी.बी. सील का विमोचन भोपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि टी.बी. को हराने और देश को जिताने के लिए भरपूर जोश और शक्ति के साथ कार्य करना होगा। उन्होंने टी.बी. उन्मूलन अभियान में योगदान के लिए नागरिकों से अपील की है। उन्होंने कहा है कि निक्षय मित्र योजनाओं में पांच सौ, हजार रुपए का योगदान किसी के प्राणों की रक्षा कर सकता है। जनता के प्राणों की रक्षा के उद्देश्य के भाव के साथ टी.बी. सील अभियान में सहयोग करें। राज्यपाल पटेल आज क्षय भवन में आयोजित 75वें टी.बी. सील विमोचन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर 75वीं टी.बी. सील का विमोचन किया। प्रतीकात्मक रुप से टी.बी. के 5 रोगियों को फूड-बास्केट प्रदान की। टी.बी. चैम्पियन और दो नि:क्षय मित्रों का सम्मान किया। राज्यपाल का कार्यक्रम में शॉल और स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया गया। विमोचन कार्यक्रम में मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष मनोहर ममतानी भी उपस्थित थे। राज्यपाल पटेल ने कहा कि टी.बी. के बारे में जानकारियों का प्रसार रोग उन्मूलन की प्राथमिक आवश्यकता है। उन्होंने सूदूर अंचलों और वंचित क्षेत्रों में टी.बी. रोग के बारे में जन जागरण के प्रयासों पर बल दिया है। कहा है कि सामुदायिक स्तर पर संवाद कायम किया जाए। रोग के लक्षणों से हर घर को परिचित कराए। बताए कि रोग को छिपाना जानलेवा होगा। रोग की शीघ्र जांच, नियमित दवाइयों का सेवन और विटामिन युक्त पोषण आहार से गम्भीर से गम्भीर टी.बी. रोगी स्वस्थ हो सकता है। उन्होंने कहा कि टी.बी. रोगियों के साथ ही रोग बचाव के संबंध में परिजनों और परिचारकों को भी सूचित किया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि रोग उपचार के साथ रोग बचाव पर भी ध्यान केन्द्रित करने की जरुरत है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि उज्ज्वला गैस योजना मोदी के जनजातीय क्षेत्रों के भ्रमण के अनुभवों से टी.बी. रोग उन्मूलन की पहल है। उन्होंने बताया कि एक समय के भोजन के लिए रसोई के चूल्हें से निकलने वाला धुआँ 60 सिगरेटों के धुंए के बराबर घातक होता। इस धुंए से माताओं, बहनों को बचाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने उज्ज्वला योजना की परिकल्पना की थी। कार्यक्रम में अध्यक्ष, नगर निगम भोपाल किशन सूर्यवंशी ने अध्यक्ष निधि से टी.बी. चिकित्सालय के पेवलिंग का कार्य कराने आश्वासन दिया। एसोसिएशन को 1 लाख रुपए के अनुदान दिलाने की बात भी कहीं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के पहले शिक्षा और स्वास्थ्य बातों का विषय होते थे। केन्द्र सरकार ने आयुष्मान कार्ड बनाकर, इसे सरकार का काम बना दिया है। आज सरकार समाज के वरिष्ठ नागरिकों को शारीरिक, मानसिक रुप से स्वस्थ एवं खुशहाल रखने के लिए 70 वर्ष की आयु से अधिक के सभी बुजुर्गों को आयुष्मान कार्ड दे रही है। टी.बी. एसोसिएशन के अध्यक्ष जयपाल सचदेव ने बताया कि एसोसिएशन राष्ट्रीय संगठन की इकाई है। संस्था चिकित्सकों के माध्यम से स्कूली बच्चों, नागरिकों को टी.बी. के लक्षण, उपचार सेवाओं, सुविधाओं के संबंध में जन जागरण का कार्य करती है। एसोसिएशन के मानसेवी सचिव डॉ. मनोज वर्मा ने संस्था का प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। बताया कि संस्था पूर्णत: जन सहयोग से संचालित है। संस्था ने शासन से किसी भी प्रकार का अनुदान नहीं प्राप्त किया है। एसोसिएशन के मानसेवी कोषाध्यक्ष डॉ. अभिजीत देशमुख ने सभी उपस्थित अतिथियों का आभार ज्ञापित किया। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की संवेदनशीलता और दूरदर्शिता का आभार माना।  

मध्यप्रदेश में सामंती, पूंजीपतियों का नहीं अब गरीबों का दौर आयेगा, कमलनाथ लगभग भाजपा में चले ही गए थे- असलम शेर खान

बैतूल पूर्व केंद्रीय मंत्री और बैतूल में कांग्रेस के सांसद रहे असलम शेर खान ने प्रदेश में कांग्रेस की दुर्दशा के लिए कमलनाथ, दिग्विजय सिंह और सुरेश पचौरी जैसे नेताओं को जिम्मेदार ठहराया है। बैतूल में एक निजी कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंचे पूर्व मंत्री ने चर्चा में कहा कि मध्यप्रदेश में सामंती और पूंजीपतियों वाला दौर खत्म हो गया है। 2023 और 2024 में साफ हो गया कि मध्यप्रदेश में सामंती, पूंजीपतियों का नहीं अब गरीबों का दौर आयेगा। कमलनाथ लगभग भाजपा में चले ही गए थे- असलम शेर खान पूर्व केंद्रीय असलम शेर खान ने कहा कि मध्यप्रदेश में दो-तीन लोग तो कांग्रेस चला ही रहे थे। दो तो जाते-जाते रुक गए, एक भाजपा में चले गए, एक बुरी तरह हार गए, अब उनका रोल थोड़ी चलेगा। राहुल गांधी ने मध्यप्रदेश इन्हीं लोगों पर छोड़ा हुआ था। इन्हीं को टिकट बांटना और संगठन चलाना था। कमलनाथ लगभग भाजपा में चले ही गए थे। उन्होंने कांग्रेस की पूरी विचारधारा को ही बदलकर उसको भगवा रंग दे दिया। यहां तक कह दिया कि हम भी हिन्दू राष्ट्र के समर्थक हैं। असलम शेर खान ने कमलनाथ की इस रणनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि आप इस प्लेटफार्म पर भाजपा का मुकाबला कर सकेंगे क्या। उनका स्ट्रांग विकेट है वो। ये हिंदुओं का देश है मेजोरिटी का देश है। आप उनके पीछे-पीछे चले गए। उन्होंने गठरी बांध कर फेंक दिया। ये देश नेहरू, गांधी का था असलम शेर खान ने कहा कि ये देश नेहरू का था गांधी का था। ये सेकुलर देश था। राहुल गांधी इसी लाइन पर काम कर रहे हैं, सही दिशा में काम कर रहे है, लेकिन उसे राज्यों में संभालने वाला कोई नहीं। मक्कार नीचे रहेंगे तो उसके सब मंसूबे फैल हो जाएंगे। मौजूदा संगठन पर असलम शेर खान ने कोई भी टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा कि वे खुद को स्थापित करें। अपनी प्रतिभा बताएं, कर पाएंगे। बगैर किसी कोशिश के कांग्रेस को 40 प्रतिशत लोग वोट दे रहे हैं पूर्व केंद्रीय मंत्री असलम शेर खान ने कहा कि आज मैं देखता हूं हमारी टीम कहां कमजोर पड़ रही। कहां से हम हार रहे हैं। विधानसभा चुनाव में सिर्फ दो परसेंट वोट डिफरेंस था, जबकि उन्होंने मध्यप्रदेश को थाली में परोस कर दे दिया। असलम शेर खान ने कहा कि आज भी कांग्रेस को 40 परसेंट लोग वोट कर रहे बगैर किसी कोशिश के कोई संगठन नहीं, सही टिकट नहीं। 40 परसेंट लोग वोट दे रहे। उसी को तरतीब देने की जरूरत है। उन्होंने दावा किया कि साल 2028 में यह सरकार नहीं रहेगी। यह भी बोले पूर्व मंत्री हमें सीधे मतदाता के पास जाना चाहिए। अगर आप इस मुल्क को समझने की कोशिश करे तो मोदी, अमित शाह ने 2024 का इलेक्शन पूरा इस बुनियाद पर लड़ा था कि यहां हिन्दू राष्ट्र बनाना है। उनकी पूरी कोशिश थी कि इस इलेक्शन को पोलराइज करना है, जिस तरह के वो भाषण दे रहे थे कि आपने कांग्रेस को मौका दिया तो ये बहनों के मंगलसूत्र छीन लेंगे, गाय खोलकर ले जाएंगे। हर तरह का जोर लगा दिया कि यह देश हिंदू राष्ट्र की शक्ल में उनको पावर दे दे, ताकि वो संविधान बदलकर इसका नाम भी बदलते, ये उनका लक्ष्य था। लेकिन धन्य है इस देश की जनता उन्होंने इसको नकार दिया। उनको 350 के बहुमत से उतार कर 240 पर ला दिया। असलम शेर खान ने कहा कि ये देश की जनता को बड़ा संदेश है। हमारे जैसे कार्यकर्ताओं को कि ये देश क्या चाहता है। कांग्रेस खुद भूल गई कि उसकी विचारधारा क्या थी। कांग्रेस खुदगर्जो की पार्टी बन गई।

अनुपालक बीड़ी निर्माताओं को प्रोत्साहित करने संबंधी विषयों पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रतिनिधि मंडल की चर्चा

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मध्यप्रदेश बीड़ी उद्योग संघ के प्रतिनिधि मंडल ने भेंट कर बीड़ी उद्योग में रोजगार के अवसरों और अनुपालक बीड़ी निर्माताओं को प्रोत्साहित करने संबंधी विषयों पर चर्चा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को विधानसभा स्थित मुख्यमंत्री कक्ष में बीड़ी उद्योग संघ के सचिव अर्जुन खन्ना के नेतृत्व में मिले प्रतिनिधि मंडल ने बताया कि बीड़ी निर्माण एक ऐसा पूर्णत: श्रम आधारित कुटीर ग्रामोद्योग है, जिसमें न्यूनतम पूंजी या बुनियादी ढांचे की आवश्यकता होती है। संघ ने प्रदेश के उच्च गुणवत्ता और श्रेणी के तेंदूपत्ते से बीड़ी उत्पादन की मात्रा और गुणवत्ता को बढ़ाने संबंधी सुझाव रखते हुए प्रति मानक बोरी तेंदूपत्ता पर सब्सिड़ी बढ़ाने का अनुरोध किया। संघ के प्रतिनिधियों ने कहा कि उत्पादन आधारित प्रोत्साहन के माध्यम से प्रदेश को संगठित और विनियमित बीड़ी उत्पादन के केन्द्र के रूप में सुदृढ़ किया जा सकता है। इससे रोजगार के अधिक अवसर सृजित करने में भी मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार मध्यप्रदेश बीड़ी उद्योग संघ के सुझावों को क्रियान्वित करने का हरसंभव प्रयास करेगी।  

बर्फीली हवाओं से ठिठुरा प्रदेश, सीजन में पहली बार पहुंचा 1 डिग्री तापमान, इंदौर, कई जिलों में कोल्ड वेव का अलर्ट

भोपाल  मध्य प्रदेश में शीतलहर का कहर कायम है। इसी बीच मौसम विभाग ने इंदौर, जबलपुर समेत 37 जिलों में शीतलहर का अलर्ट जारी किया है। बर्फीली हवाओं के चलते मध्यप्रदेश का तापमान लगातार लुढ़कता जा रहा है। सीजन में पहली बार हिल स्टेशन पचमढ़ी और शहडोल के कल्याणपुर में पारा 1 डिग्री पर पहुंचा। इधर बैतूल में ठंड से अब लोग परेशान हो रहे हैं। सोमवार सुबह फसलों पर ओस की बूंदें जम गई। इसका वीडियो भी सामने आया है। मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर भारत की ओर से आ रही बर्फीली हवाओें के चलते प्रदेश में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। बीते 24 घंटे के दौरान सबसे कम तापमान हिल स्टेशन पचमढ़ी और शहडोल के कल्याणपुर में 1 डिग्री दर्ज किया गया। इसके साथ राजधानी भोपाल में न्यूनतम तापमान 4.2 डिग्री सेल्सियस पर रहा। जबलपुर में 4, ग्वालियर में 5.2, इंदौर में 9.4 उज्जैन में 6.8 डिग्री न्यूनतम तापमान दर्ज किया गया। प्रदेश के सबसे कम तापमान वाले शहरों में शहडोल के कल्याणपुर और पचमढ़ी की रात सबसे ठंडी रही। इसके साथ ही उमरिया में 2.3 डिग्री, मंडला में 2.5 डिग्री, शाजापुर में 2.8 डिग्री और अमरकंटक में 3.2 डिग्री रिकॉर्ड किया गया। बैतूल में ठंड का कहर देखने को मिल रहा है। यहां फसलों पर ओस की बूँदें जम गई। जिसका वीडियो भी सामने आया है। जिसमें गन्ने की पत्तियों पर ओस जमी हुई दिखाई दे रही है। ऐसे में खेतों में सिंचाई करना मुश्किल हो रहा है। मौसम विभाग के अनुसार वर्ष 2021 के बाद इस वर्ष तापमान में रिकार्ड गिरावट दर्ज की गई है। शीतलहर का अलर्ट जारी गिरते हुए तापमान के साथ बर्फीली हवाओं ने मौसम को ज्यादा ठंडा बना दिया है। मौसम विभाग द्वारा 30 से ज्यादा जिलों में शीतलहर का अलर्ट जारी किया गया है। जबलपुर, रतलाम, उमरिया, भोपाल, मंडला, गुना, सिवनी, नीमच, शाजापुर, शहडोल, बड़वानी, नर्मदापुरम, पचमढ़ी, सागर जैसे जिलों में शीतलहर का प्रकोप देखने को मिलेगा। यहां रात के साथ दिन के समय भी ठंड का एहसास होने वाला है। कोल्ड वेव की चेतावनी मौसम विभाग ने दिसंबर के अंत से जनवरी के शुरुआती 20 से 22 दिन घना कोहरा और सर्द हवा चलने की चेतावनी जारी की है। इंदौर, उज्जैन, खंडवा, अलीराजपुर, ग्वालियर, भोपाल, बुरहानपुर, मंदसौर, झाबुआ, शिवपुरी, अशोक नगर, देवास, शिवपुर कला, दतिया, शिवपुरी, भिंड, डिंडोरी, सिंगरौली, पन्ना, टीकमगढ़, सागर, बालाघाट, सतना में कोल्ड वेव का असर दिखाई देगा। उमरिया, राजगढ़, और शाजापुर जैसे जिलों में पाला पड़ने की संभावना भी जताई गई है। मौसम विभाग ने अगले 48 घंटे तक शीतलहर चलने की चेतावनी जारी की है। शाजापुर, आगर-मालवा, राजगढ़, सीहोर, रायसेन, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर और मंडला में ऑरेंज और यलो अलर्ट जारी किया है। वहीं भोपाल, जबलपुर में भी शीतलहर का ऑरेंज अलर्ट है। नीमच, मंदसौर, झाबुआ, अलीराजपुर, बड़वानी, बुरहानपुर, खंडवा, देवास, शिवपुरी, मुरैना, भिंड, छतरपुर, पन्ना, सतना, सिंगरौली, कटनी, डिंडौरी, पांढुर्णा, सिवनी और बालाघाट में शीतलहर का यलो अलर्ट जारी है। इसके साथ ही उमरिया, मंडला, शाजापुर का गिरवर, अनूपपुर का अमरकंटक, रायसेन, राजगढ़, बालाघाट के मलाजखंड में भी पारा 5 डिग्री से नीचे रहा। नौगांव, मलाजखंड, रीवा, खजुराहो, सतना, टीकमगढ़ में तापमान 6 डिग्री के नीचे दर्ज किया गया। अगले 24 घंटे कड़ाके की सर्दी पड़ेगी सागर में सर्द हवाओं के कारण इन दिनों शहर में लोग शाम 6 बजे ही घर में दुबक जाते हैं और सुबह 10 बजे के बाद घर से निकला उचित समझते हैं। रविवार को भी दिनभर सर्द हवाओं ने ठिठुरा दिया। अधिकतम तापमान 26.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं न्यूनतम तापमान सामान्य से 4 डिग्री कम 8.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। हालांकि हवा की रफ्तार कम होने से दिन और रात के पारे में हल्की बढ़ोतरी हुई है। मौसम विभाग की मानें तो उत्तर भारत से आ रही सर्द हवाओं के असर से आगामी 24 घंटे में कड़ाके की ठंड का दौर जारी रहेगा। 48 घंटों के बाद हल्की राहत मिलने की संभावना है।

संभल में 48 साल बाद खुले मंदिर के कुएं की खुदाई में तीन मूर्तियां निकली

संभल यूपी के संभल में 48 साल बाद खुले मंदिर के पास स्थित कुएं की खुदाई के दौरान एक के बाद एक तीन मूर्तियां निकली हैं.  करीब 15 से 20 फीट तक मंदिर की खुदाई हो चुकी है. इस दौरान कुएं में से खंडित हो चुकी ये मूर्तियां निकली हैं. जो कि 7 से 8 इंच लंबी है. देखने से ये मूर्ति माता-पार्वती जी, गणेश जी और लक्ष्मी जी की प्रतीत हो रही हैं. फिलहाल, जांच-पड़ताल जारी है और मौके पर भारी पुलिस बल मौजूद है. दरअसल, संभल के दीपसराय से सटे खग्गू सराय में करीब 4 दशक साल से बंद पड़े पुराने शिव मंदिर को प्रशासन ने शनिवार को फ‍िर से खुलवाया. मंदिर के खुलते ही यहां पुलिस प्रशासन और लोगों की भीड़ लग गई. पूजा-अर्चना भी शुरू हो गई. वहीं, प्रशासन की ओर से मंदिर के बिल्‍कुल पास पाट दिए गए एक कुएं की भी खुदाई करवाई गई. जब इसकी 15 फीट तक खुदाई हुई तो इसमें एक-एक कर देवी-देवताओं की मूर्तियां निकलने लगीं. संभल के मंदिर पर खुदाई के दौरान कुएं से तीन मूर्तियां निकालने के बाद एडिशनल एसपी श्रीशचंद्र और सीओ अनुज चौधरी मौके पर पहुंचे हैं. उन्होंने खुदाई में निकली मूर्तियां देखीं और मीडिया से बात की. उन्होंने कहा कि इन्हें जांच के लिए भेजा जाएगा. गौरतलब हो कि संभल जिले में बिजली चोरी चेकिंग के दौरान मिले प्राचीन हिंदू मंदिर से अब पुराने अवशेष मिल रहे हैं. आज मंदिर के पास मौजूद कुएं की खुदाई के दौरान और खंडित मूर्तियां मिली हैं. फिलहाल, इसे प्रशासन को सौंप दिया गया है. अब इसकी जांच की जाएगी. इन सबके बीच संभल में मुस्लिम बहुल इलाके में बंद मिले 46 साल पुराने मंदिर की कार्बन डेटिंग कराने की तैयारी चल रही है. संभल के जिला प्रशासन ने भस्म शंकर मंदिर, शिवलिंग और वहां मिले कुएं की कार्बन डेटिंग कराने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को पत्र लिखा है. इस जांच के जरिए प्रशासन पता करना चाहता है कि मंदिर और इसकी मूर्ति आखिर कितनी पुरानी है. आपको बता दें कि बता दें कि बिजली चोरी रोकने पहुंची पुलिस और प्रशासन की टीम ने बीते शनिवार को 1978 से बंद पड़े इस मंदिर को ढूंढा था. इसके बाद 15 सितंबर को इस मंदिर में विधि-विधान और मंत्रोचारण के साथ पूजा आरती की गई. जिला मजिस्ट्रेट राजेंद्र पेंसिया के मुताबिक यह कार्तिक महादेव का मंदिर है. यहां एक कुआं मिला है, जो अमृत कूप है. मंदिर मिलने के बाद यहां 24 घंटे सुरक्षा के लिए टीम तैनात की गई है. सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं. यहां जो अतिक्रमण है, उसे हटाया जा रहा है. स्थानीय लोगों का दावा है कि सांप्रदायिक दंगों और हिंदू आबादी के विस्थापन के कारण ये मंदिर 1978 से बंद पड़ा था. नगर हिंदू महासभा के संरक्षक विष्णु शंकर रस्तोगी (82) ने बाताया कि वह मैं जन्म से ही खग्गू सराय में रहते आए हैं. 1978 के दंगों के बाद हिंदू समुदाय को इस इलाके से पलायन करना पड़ा था. तब से ही हमारे कुलगुरु को समर्पित यह मंदिर बंद था. 46 सालों से बंद पड़ा ये मंदिर सपा सांसद जियाउररहमान बर्क के घर से 200 मीटर की दूरी पर मिला है. मंदिर के अंदर हनुमान जी की प्रतिमा, शिवलिंग और नंदी स्थापित हैं. फिलहाल यहां डीएम और एसपी ने सुरक्षा के चाक-चौबंद व्यवस्था की है.  

शहूर तबला वादक उस्ताद जाकिर हुसैन का निधन, अमेरिका में चल रहा था इलाज

 सैन फ्रांसिस्को दुनियाभर में शास्त्रीय संगीत में भारत को अलग पहचान दिलाने वाले उस्ताद और मशहूर तबला वादक जाकिर हुसैन अब हमारे बीच नहीं रहे। 73 साल की उम्र में जाकिर हुसैन का निधन हो गया। जाकिर हुसैन ने अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में आखिरी सांस ली। जाकिर हुसैन फेफड़ों से जुड़ी एक गंभीर बीमारी और हाई ब्लड प्रेशर के मरीज थे। जिसके चलते उन्हें दिल से जुड़ी समस्याएं पैदा हुईं। उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां हार्ट से जुड़ी समस्याओं के कारण उनकी मौत हो गई।  रिपोर्ट की मानें को जाकिर हुसैन के परिवार ने एक बयान में कहा कि उन्हें ‘इडियोपैथिक पल्मोनरी फाइब्रोसिस’ नामक एक दुर्लभ फेफड़ों की बीमारी थी, जिसकी वजह से कॉम्प्लिकेशन आने लगे थे। इडियोपैथिक पल्मोनरी फाइब्रोसिस (IPF) क्या है? इडियोपैथिक पल्मोनरी फाइब्रोसिस फेफड़ों से जुड़ी एक गंभीर बीमारी है। आप सांस लेते हैं तो ऑक्सीजन हमारे फेफड़ों में छोटी-छोटी हवा की थैलियों से होते हुए खून में जाता है और फिर यहां से शरीर के सभी अंगों को मिलता है। लेकिन आईपीएफ होने पर फेफड़ों के भीतर निशान ऊतक बढ़ने लगते हैं। जिससे सांस लेना मुश्किल होने लगता है। उम्र के साथ ये समस्या और भी खराब होने लगती है। इससे फेफड़ों के जरिए खून में ऑक्सीजन की कमी होने लगती है। जिससे आपके शरीर के दूसरे अंग ठीक से काम नहीं कर पाते हैं। इडियोपैथिक पल्मोनरी फाइब्रोसिस के लक्षण और इलाज आपको बता दें इडियोपैथिक पल्मोनरी फाइब्रोसिस का कोई इलाज नहीं है इस सिर्फ कंट्रोल किया जा सकता है। स्थिति गंभीर होने पर लंग ट्र्रांसप्लांट का विकल्प होता है। धीरे धीरे फेफड़ों में ऊतक बढ़ने लगते हैं और फेफड़ों में जख्म जैसे हो जाके हैं। जिसकी वजह से आपको सीने में दर्द या जकड़न, पैर में सूजन, भूख में कमी, गले में खराश, खांसी, थकान महसूस होना, जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द, वजन घटना और सांस लेने में तकलीफ हो सकती है। अगर आप किसी दूसरी बीमारी से पीड़ित हैं तो मुश्किलें और बढ़ने लगती हैं।

जीवाजी विश्वविद्यालय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नक्षत्र की तरह उभरता संस्थान है : केन्द्रीय मंत्री सिंधिया

जीवाजी राव ने जो शिक्षा का सपना देखा था वह आज हो रहा है साकार : उप राष्ट्रपति धनखड़ जीवाजी राव ने शिक्षा, स्वास्थ्य के क्षेत्र में अभूतपूर्व योगदान दिया : मुख्यमंत्री डॉ. यादव जीवाजी विश्वविद्यालय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नक्षत्र की तरह उभरता संस्थान है : केन्द्रीय मंत्री सिंधिया उप राष्ट्रपति ने जीवाजी राव सिंधिया की प्रतिमा का किया अनावरण ग्वालियर उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा है कि सिंधिया परिवार का शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान रहा है। मैंने आज उन महापुरूष की मूर्ति का अनावरण किया है, जिन्होंने स्वतंत्र भारत में शिक्षा सहित अनेक क्षेत्र में अपने कीर्तिमान स्थापित किए हैं। साथ ही शिक्षा को गति देने का कार्य भी किया है। शिक्षा से ही व्यक्ति के अंदर भाव आता है और मानव का निर्माण होता है। उप राष्ट्रपति ने कहा कि परिवर्तनशील दुनिया है, बदलाव होते रहेंगे लेकिन शिक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण है। उप राष्ट्रपति धनखड़ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू की। तकनीक में हमारा देश काफी आगे निकल चुका है। जीवाजी विश्वविद्यालय संस्थान भी नई-नई तकनीकों को लायेगा, ऐसी उम्मीद है। उप राष्ट्रपति धनखड़ ने जीवाजी विश्वविद्यालय परिसर में जीवाजी राव सिंधिया की प्रतिमा अनावरण के बाद आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में यह बात कही। अध्यक्षता राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने की। विशेष अतिथि के रूप में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केन्द्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर, उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार, जिले के प्रभारी एवं जल संसाधन मंत्री तुलसराम सिलावट, नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला और उप राष्ट्रपति की धर्मपत्नी श्रीमती सुदेश धनखड़ उपस्थित थीं। उप राष्ट्रपति धनखड़ ने कहा कि सिंधिया परिवार का संसद में हमेशा योगदान रहा है। स्व. माधवराव सिंधिया ने अनेक क्षेत्रों में सराहनीय कार्य किया है। उन्हें जो भी मंत्रालय मिला है, उसमें उन्होंने अपना श्रेष्ठ कार्य किया है। उप राष्ट्रपति ने कहा जीवाजी राव ने जो शिक्षा का सपना देखा था वह आज साकार हो रहा है। ग्वालियर के लिये आज का दिन रहेगा यादगार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ग्वालियर के लिये आज का दिन यादगार रहेगा। आज ग्वालियर में दो बड़े कार्यों का शुभारंभ हुआ है। जियो साइंस म्यूजियम के माध्यम से पृत्वी की उत्पत्ति, उसकी रचना, भू-गर्भिक घटनाओं की जानकारी का संकलन प्राप्त होगा। साथ ही ज्ञान, विज्ञान के समावेश से युवाओं नई जानकारियां प्राप्त होंगीं। इसके साथ ही शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले जीवाजी राव सिंधिया की मूर्ति का अनावरण भी किया गया है। जीवाजी विश्वविद्यालय ने न केवल मध्यप्रदेश में बल्कि सम्पूर्ण देश में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। विश्वविद्यालय निरंतर प्रगति करते हुए देश के युवाओं को शिक्षा के क्षेत्र में और सशक्त बनाने का कार्य करती रहेगी। उन्होंने कहा जीवाजी राव ने शिक्षा, स्वास्थ्य के क्षेत्र में अभूतपूर्व योगदान दिया। केन्द्रीय मंत्री सिंधिया ने कहा कि ग्वालियर शहर संगीत, शिक्षा और अपनी ऐतिहासिकता के लिये जाना जाता है। उन्होंने कहा कि ज्ञान से ही विनम्रता प्राप्त होती है और विनम्रता से ही पात्रता प्राप्त होती है। जीवाजी विश्वविद्यालय 250 एकड़ में स्थापित है, जिसे मेरी दादी माँ और तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन द्वारा प्रारंभ किया गया था। जीवाजी विश्वविद्यालय अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नक्षत्र की तरह उभरता संस्थान है। उन्होंने कहा कि मेरे परिवार ने जो बीज बोया था वह आज वट वृक्ष की तरह खड़ा हो गया है। जीवाजी विश्वविद्यालय संस्थान आधुनिकता की ओर अग्रसर है। उप राष्ट्रपति धनखड़ ने इस मौके पर जीवाजी विश्वविद्यालय द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। केन्द्रीय मंत्री सिंधिया ने प्रदर्शनी में दर्शाए गए जीवाजी विश्वविद्यालय के इतिहास व उपलब्धियों के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। उप राष्ट्रपति धनखड़ एवं अतिथियों ने इस अवसर पर “एक पेड़ माँ के नाम” पौधरोपण भी किया।  

BCCI ने सीरीज के बीच यश दयाल, मुकेश और नवदीप को रिलीज करने का लिया फैसला

ब्रिसबेन. भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच गाबा में जारी बॉर्डर गावस्कर ट्रॉफी के तीसरे टेस्ट की बीच एक बड़ी खबर सामने आ रही है। भारतीय टीम ने अपने तीन प्लेयर्स को वापस स्वदेश भेजने का फैसला लिया है। आपको जानकर हैरानी होगी कि जिन तीन खिलाड़ियों को वापस भेजा जा रहा है, वो सारे तेज गेंदबाज हैं। चलिए अब आपको सीधा उन प्लेयर्स का नाम बताते हैं और ये जानते हैं कि आखिर उन्हें क्यों सीरीज के बीच में वापस भेजा जा रहा है। किन तीन प्लेयर्स की रिलीज किया गया? भारतीय क्रिकेट टीम ने ट्रेवल रिजर्व यश दयाल, मुकेश कुमार और नवदीप सैनी को रिलीज करने का फैसला किया है और इन तीनों के 21 दिसंबर से शुरू होने वाली विजय हजारे ट्रॉफी में शामिल होने की संभावना है। तीनों तेज गेंदबाज बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी शुरू होने के पहले से ही टीम के साथ हैं। मगर टीम मैनेजमेंट ने महसूस किया कि उनके लिए ऑस्ट्रेलिया में मैदान से बाहर बैठकर सीट गर्म करने से बेहतर उन्हें भारत में जाकर क्रिकेट खेलना बेहतर होगा। क्योंकि ब्रिसबेन मैच के बाद केवल दो टेस्ट बचे हैं। घरेलू क्रिकेट में हिस्सा लेंगे प्लेयर्स लंबी गर्मियों के बाद स्वदेश लौटने से पहले भारत अपना अगला मैच मेलबर्न और फिर आखिरी मैच तीन जनवरी से सिडनी में खेलेगा। नवदीप सैनी और मुकेश कुमार को अजीत अगरकर की अगुवाई वाली सीनियर मेंस सिलेक्श कमिटी ने बतौर रिजर्व प्लेयर शामिल किया था। बाद में यश दयाल को खलील अहमद के रिप्लेसमेंट के तौर पर भेजा गया था, जो पर्थ में खेले गए पहले टेस्ट के दौरान नेट्स में इंजर्ड हो गए थे। मुकेश लंबे समय से ऑस्ट्रेलिया में हैं, क्योंकि वह बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी से पहले भारत ए के दो प्रैक्टिस मैच का भी हिस्सा थे। माना जा रहा है कि वह बंगाल के लिए विजय हजारे ट्रॉफी में खेलने के लिए तैयार हैं, जो एक सप्ताह में शुरू होगी। नवदीप सैनी और यश दयाल का भी यही प्लान है।

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