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WhatsApp में होंगे बदलाव, 3 प्रमुख फीचर्स के लिए चुकानी पड़ेगी फीस

 नई दिल्ली  WhatsApp पेड सब्सक्रिप्शन मॉडल लेकर आ रहा है और अब इसको लेकर ऐप में एक नोटिफिकेशन भी नजर आने लगा है. मैसेजिंग ऐप वॉट्सऐप के अपकमिंग फीचर को ट्रैक करने वाली वेबसाइट WaBetainfo ने शेयर की है. पेड सब्सक्रिप्शन एक ऑप्शनल फीचर होगा |  अब मैसेजिंग ऐप ने इसको लेकर एक नोटिफिकेशन्स जारी करना शुरू कर दिया है, जिसमें पेड सब्सक्रिप्शन की उपलब्धता को दिखाया है. प्रीमियम सब्सक्रिप्शन प्लान के तहत यूजर्स को नए फीचर्स एक्सेस मिलेंगे |  प्ले स्टोर पर आया नया अपडेट  WaBetainfo के मुताबिक, प्ले स्टोर पर WhatsApp beta के लेटेस्ट वर्जन Android 2.26.9.6 में नजर फीचर स्पॉट किया गया है.यूजर्स को न्यू प्लान के लिए waitlist को जॉइन कर सकेंगे |  WaBetainfo का पोस्ट  रिपोर्ट्स में न्यू फीचर को लेकर स्क्रीनशॉट्स शेयर किया गया है,जिसमें न्यू अपडेट को लेकर दिखाया गया है. स्क्रीनशॉट्स में बताया है कि प्रीमियम सब्सक्रिप्शन के तहत यूजर्स नए फीचर्स भी मिलेंगे |  प्रीमियम सब्सक्रिप्शन के तहत मिलने वाले नए फीचर्स      एक्सक्लूसिव स्टिकर मिलेंगे.     एक्स्ट्रा पिन चैट करने को मिलेगा.      शेड्यूल मैसेज का भी फीचर इसमें शामिल होगा.  वेटलिस्ट देने के पीछे का मकसद WhatsApp प्लस के शुरुआती स्टेज में शामिल यूजर्स वेटलिस्ट के लिए साइन अप कर सकते हैं. वेटलिस्ट में साइन-अप करने का यह मतलब बिलकुल भी नहीं है कि जब WhatsApp का सब्सक्रिप्शन प्लान अवेलेबल होगा तो उन्हें अपने आप उसमें शामिल होना पड़ेगा |   WhatsApp यूजर्स को बताना जरूरी  मैसेजिंग ऐप ने न्यू फीचर को सिर्फ इसलिए तैयार किया है ताकि WhatsApp यूजर्स को पता चल सके कि उनका अकाउंट प्लान के लिए एलिजिबल है. प्लान एक बार उपलब्ध होने के बाद सब्सक्रिप्सन के लिए अलग से प्रोसेस कंप्लीट करना होगा |   

सफाई रखने से आती है सकारात्मक ऊर्जा, घर के मंदिर में रखते हैं 5 मूर्तियां

हिंदू धर्म में रोजाना पूजा-पाठ करने का विशेष महत्व माना गया है। लोग मंदिर जाकर मत्था टेकते हैं और अपने घर के मंदिर में भी श्रद्धा भाव से पूजा करते हैं। घर का ये पवित्र कोना पॉजिटिव एनर्जी और मानसिक शांति का केंद्र माना जाता है। ऐसे में इसे हमेशा साफ-सुथरा और व्यवस्थित रखना चाहिए। मंदिर में टूटे-फूटे सामान या बेकार की चीजें नहीं रखनी चाहिए। पूजा स्थान से जुड़े कुछ नियम भी होते हैं जिनका पालन करना जरूरी होता है। अक्सर लोग एक बात को लेकर असमंजस में रहते हैं कि घर के मंदिर में कितनी मूर्तियां होनी चाहिए? आज जानेंगे इस बारे में विस्तार से। साथ ही जानेंगे कि आखिर कौन सी मूर्तियों को हमें घर के पूजा स्थल पर नहीं रखना चाहिए? मूर्तियों को लेकर सही तरीका क्या होना चाहिए। पूजा घर में रखें सिर्फ इतनी मूर्तियां वास्तुशास्त्र और हिंदू धर्म मान्यता के अनुसार घर के मंदिर में सादगी रहें तो ये अच्छा माना जाता है। वास्तु शास्त्र के नियम के हिसाब से घर के मंदिर में बहुत ज्यादा मूर्तियां नहीं रखनी चाहिए। अगर सीमित संख्या में यहां मूर्तियां रखी जाए तो मन एकाग्र रहता है और ध्यान लगाकर पूजा करना भी आसान हो जाता है। आम तौर पर यहां पर 2 से 5 मूर्तियां रखना ही सही होता है। इससे मंदिर में सकारात्मक ऊर्जा भी बनी रहती है और ऐसे में आसानी से साफ-सफाई भी की जा सकती है। पूजा घर में गलती से भी ना रखें ये मूर्तियां घर के मंदिर में शांत और सौम्य रूप वाली मूर्तियां रखना ही शुभ माना जाता है। मंदिर कुछ देवताओं के उग्र या क्रोधित रूप घर में रखने की सलाह नहीं दी जाती है। घर के मंदिर में नटराज, शनि देव या फिर राहु-केतु उग्र या फिर क्रोधित रूप वाली मूर्तियां, मां काली की मूर्ति या फिर काल भैरव के उग्र स्वरूप को मंदिर में नहीं रखना चाहिए। ऐसी मूर्तियां शक्ति और तप का प्रतीक मानी जाती है। ऐसे में इन्हें घर के मंदिर में रखना सही नहीं होता है। घर में आम तौर पर शांत और सौम्य रूप वाली मूर्तियां ही रखनी चाहिए। इन मूर्तियों की एनर्जी से घर का वातावरण शांति रहता है और घर में पॉजिटिविटी बनी रहती है। रखें इन बातों का ध्यान घर के मंदिर से जुड़े कुछ और भी नियम हैं, जिनका ध्यान जरूर रखना चाहिए। सबसे पहले तो ये सुनिश्चित कर लें कि मंदिर घर के ईशान कोण में ही हो। बता दें कि वास्तु शास्त्र में ईशान कोण उत्तर-पूर्व दिशा को कहा जाता है। इस दिशा को एनर्जी का सबसे बड़ा सोर्स माना जाता है। ऐसे में यहां पर मंदिर बनाना फलदायी होता है। साथ ही ऐसी भी मान्यता है कि इसी दिशा में सभी देवी-देवता का वास होता है। इसके अलावा ये जरूर देख लें कि मंदिर में मौजूद मूर्तियों के बीच कम से कम 1-2 इंच की दूरी जरूर हो। इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि मंदिर कभी भी बेडरूम या फिर वॉशरूम के आसपास ना हो। नियम के अनुसार घर का मंदिर सीढ़ियों के ठीक नीचे भी नहीं होना चाहिए क्योंकि इसे अशुभ माना जाता है। डिस्क्लेमर- इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए वास्तुशास्त्र विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

स्वदेशी AI डिवाइस से कैंसर पहचान अब आसान, सिर्फ आधे घंटे में होगा टेस्ट

नई दिल्ली हेल्थ सेक्टर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का असर तेजी से दिख रहा है. दिल्ली के भारत मंडपम में चल रहे एआई समिट में एक खास डिवाइस लोगों का ध्यान खींच रहा है. दावा किया गया है कि यह नया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस डिवाइस पेट से जुड़ी बीमारियों और खासतौर पर कैंसर का पता आसानी से और समय रहते लगा सकता है, जिससे मरीज को बीमारी के गंभीर होने से पहले इलाज मिल सकेगा. विप्रो की चीफ टेक्निकल ऑफिसर संध्या अरुण के मुताबिक, यह डिवाइस शुरुआती स्टेज में ही कैंसर का पता लगा लेता है. इससे मरीज को समय पर इलाज मिल सकता है और कई मामलों में सर्जरी की जरूरत ही नहीं पड़ेगी.उनका कहना है कि जल्दी पहचान ही सबसे बड़ा फायदा है, क्योंकि बीमारी जितनी जल्दी पकड़ में आ जाएगी, इलाज उतना आसान और असरदार होगा. आइए व‍िस्‍तार से जानते हैं इस ड‍िवाइस के बारे में… कैसे काम करती है मशीन? यह एआई आर्म रोबोटिक एमआरआई मशीन सबसे पहले मरीज के पेट का स्कैन करती है. स्कैन का रिजल्ट रियल-टाइम स्क्रीन पर दिखाई देता है, जिससे डॉक्टर तुरंत समझ सकते हैं कि अंदर क्या समस्या है. कैंसर का कैसे लगाएगी पता स्कैन में अगर ट्यूमर या कैंसर से जुड़ी कोई असामान्यता दिखती है, तो एआई तुरंत उसका विश्लेषण करता है और बताता है कि तस्वीर में दिख रही चीज क्या है. कंपनी का कहना है कि 30–45 मिनट में पूरा स्कैन और रिपोर्ट तैयार हो जाती है. मशीन में क्या है, क्या सिर्फ पेट होगा स्कैन? विप्रो की ओर से बताया गया कि इस एआई मशीन में चार अलग-अलग आर्म लगी हुई हैं और इनसे पूरा शरीर स्कैन हो सकेगा. एक आर्म मिड-बॉडी स्कैन के लिए है और बाकी अलग-अलग हिस्सों के लिए हैं. इससे पूरे शरीर की जांच आसानी से की जा सकती है. और क्या फायदे हैं इस मशीन के दावा किया गया कि इस मशीन से समय और लागत दोनों की बचत होगी. साथ ही यह भारत में बनी पहली AI-संचालित MRI मशीन है, जो स्कैन समय में करीब 37 फीसदी की कमी लाती है. 75 फीसदी तक हीलियम की खपत घटाती है. यानि जांच होगी तेज़, सटीक और सस्ती होगी और मरीज को जल्दी इलाज मिल सकेगा. बता दें क‍ि नई AI तकनीक से मेडिकल जांच का तरीका लगातार बदल रहा है और भविष्य में कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का पता लगाना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो सकता है.

जनगणना 2027 अपडेट: घर बैठे भरें डिटेल, एक गणनाकर्मी करेगा 800 लोगों का सर्वे

भोपाल Census 2027: जिला जनगणना समन्वय समिति की दो दिवसीय ट्रेनिंग और बैठक गुरुवार को खत्म हो गई। बैठक में जनगणना 2027 को पूरी तरह डिजिटल मोड में करने से जुड़े बिंदुओं पर चर्चा हुई। स्पष्ट किया गया कि एक कर्मचारी 800 नागरिकों की डिटेल मोबाइल ऐप से जमा कराएगा। लोग खुद भी अपने परिवार की डिटेल भर सकेंगे। 16 अप्रेल से इसके लिए मोबाइल ऐप समेत विभिन्न माध्यमों से डिटेल जमा करने का अवसर मिलेगा। एक मई से हाउसहोल्ड सर्वे शुरू होगा। जनगणना का काम फरवरी 2027 में होगा। बैठक में अपर कलेक्टर प्रकाश नायक, पीसी शाक्य, जिला जनगणना अधिकारी भुवन गुह्रश्वता, एसडीएम, संयुक्त कलेक्टर, डिप्टी कलेक्टर सहित समिति के सदस्यगण एवं विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे। जनगणना कार्य निदेशालय संयुक्त निदेशक नामित यादव, सहायक निदेशक ऐन्सी रेजी ने प्रशिक्षण दिया। 10 लाख घरों की होगी मैपिंग 01 मई से शुरू हो रही जनगणना के लिए जिला प्रशासन ने तैयारी पूरी कर ली है। इस बार नागरिक डिजिटल तरीके से अपनी जानकारी सरकार तक पहुंचा सकेंगे। कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने बताया, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जानकारी देने नागरिकों को इंडियन सेंसस डाटा कलेक्शन पोर्टल पर लॉग-इन करना होगा।   यहां नागरिकों से 33 तरह के प्रश्नों का जवाब मांगा जाएगा। यही जवाब मांगने ‘डोर टू डोर’ सर्वे भी होगा। जनगणना के लिए 8000 कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने का काम शुरू कर दिया गया है। अभियान के तहत 10 लाख घरों की मैपिंग करने का टारगेट तय किया गया है। घरों की जियो टैगिंग से मैपिंग करने के बाद कर्मियों को रवाना किया जाएगा।  

अखिलेश की PDA बनाम बीजेपी का मास्टर प्लान, 2027 में किसकी बनेगी सरकार?

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर अब सरगर्मी बढ़ने लगी है। भारतीय जनता पार्टी ने वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर रणनीति तैयार की है। इसके तहत 15 दलित महापुरुषों का कैलेंडर तैयार कराया गया है। इनकी जयंती-पूण्यतिथि के बहाने इस समाज के लोगों से सालों भर मुलाकात का कार्यक्रम तैयार किया गया है। इनमें कांशीराम से लेकर संत रविदास तक शामिल हैं। पहले ही भाजपा ने मायावती पर सीधे हमले से परहेज किया है। पार्टी किसी भी दलित महापुरुष और नेता से सीधे उलझती नहीं दिख रही है। यह संदेश जमीन तक पहुंचाने की तैयारी की जा रही है। दरअसल, अखिलेश यादव की पिछड़ा दलित अल्पसंख्यक यानी पीडीए पॉलिटिक्स की काट के तौर पर रणनीति को तैयार किया जा रहा है। योगी आदित्यनाथ सरकार भी समाज के हर वर्ग तक सरकार की योजनाओं के पहुंचाए जाने की जानकारी पहुंचाने की रणनीति में जुटी है। दलित वोट बैंक है जरूरी यूपी की राजनीति में सत्ता की सीढ़ी चढ़ने के लिए दलित वोट बैंक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक तरफ अखिलेश यादव यादव, गैर यादव पिछड़ा यानी पीडीए पॉलिटिक्स के जरिए प्रदेश की सत्ता में एक बार फिर वापसी की कोशिशों में जुटे हुए हैं। दूसरी तरफ, भारतीय जनता पार्टी लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी का प्रयास कर रही है। इसको लेकर पार्टी की ओर से रणनीति को तैयार किया जा रहा है। इसमें दलित वोट बैंक को अहम माना जा रहा है।हाल के वर्षों में दलित वोट बैंक में बिखराव होता दिखा है। वर्ष 2014 से 2019 तक के चुनावों में प्रदेश में मोदी लहर और भाजपा के उफान के बाद भी बहुजन समाज पार्टी दलित वोट बैंक पर कब्जा जमाती दिखी थी। करीब 20 फीसदी के वोट बैंक पर मायावती का कब्जा दिखता रहा था। हालांकि, यूपी चुनाव 2022 के बाद से दलित वोट बैंक छिटकना शुरू हुआ। लोकसभा चुनाव 2024 में मायावती का वोट प्रतिशत प्रदेश में 10 फीसदी के आसपास सिमटता दिखा है। यूपी चुनाव 2022 में योगी-मोदी सरकार की नीतियों, कोरोना काल में अन्न योजना के प्रभाव ने दलित वोट बैंक के एक बड़े हिस्से को भाजपा से जोड़ा। ऐसे में सॉलिड गैर-यादव ओबीसी वोट बैंक में भटकाव से अधिक असर पार्टी को नहीं हुआ। हालांकि, लोकसभा चुनाव में संविधान बदलने के मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाकर और पीडीए पॉलिटिक्स के जरिए बसपा से छिटकने वाले दलित वोट के एक बड़े हिस्से को पार्टी के साथ जोड़ने में अखिलेश यादव कामयाब रहे। 2027 के लिए डी पॉलिटिक्स यूपी चुनाव 2027 के लिए भाजपा ने अब दलित पॉलिटिक्स पर जोर देना शुरू कर दिया है। लोकसभा चुनाव में छिटके दलित वोटरों को साधने की रणनीति तैयार की जा रही है। भाजपा ने इसके लिए नए सिरे से सोशल इंजीनियरिंग शुरू कर दी है। पार्टी की रणनीति के केंद्र में दलित महापुरुष, उनकी विरासत और समाज के लोगों से लगातार संवाद है। इस संवाद के जरिए समाज के निचले हिस्से तक पार्टी अपने संदेश और कार्यों को पहुंचाने की तैयारी में है। बीजेपी ने इसके लिए कांशीराम, संत रविदास, संत गाडगे, डॉ. भीमराव अंबेडकर, ज्योतिबा फुले, सावित्रीबाई फुले, उदा देवी, झलकारी बाई, वीरा पासी, लखन पासी, रमाबाई अंबेडकर और अहिल्याबाई होल्कर जैसी करीब 15 दलित और वंचित समाज के महापुरुषों का एक वार्षिक कैलेंडर तैयार किया है। इन महापुरुषों की जयंती और पुण्यतिथि पर प्रदेश भर में कार्यक्रमों की श्रृंखला तैयार की गई है। लगातार संपर्क पर जोर बीजेपी नेताओं का कहना है कि समाज के लोगों से लगातार संपर्क पर जोर दिया जा रहा है। अगर हमारे कार्यकर्ता समाज के लोगों से मिलेंगे। उनकी सुख-दुख सुनेंगे। उसको लेकर काम करेंगे तो निश्चित तौर पर स्थिति को फिर से बहाल किया जा सकेगा। भाजपा इन वोटरों के दरवाजे पर बार- बार दस्तक देकर इन्हें फिर से भाजपा के पाले में लाने की कवायद में जुट गई है। लोकसभा चुनाव 2024 में भाजपा 2017 के 62 सीटों के आंकड़े से घटकर 33 पर आ गई थी। रिजर्व सीटों पर पार्टी का प्रदर्शन खराब हुआ। इसके बाद रणनीति में बदलाव होता दिख रहा है।

PM राहत योजना से सड़क दुर्घटनाओं में मिलेगा डेढ़ लाख तक का मुफ्त इलाज, जबलपुर के 92 अस्पतालों को मिली मंजूरी

जबलपुर  सड़क दुर्घटना में घायल लोगों को अब सरकारी और निजी अस्पतालों में तुरंत और मुफ्त इलाज मिलेगा. एक्सीडेंट के बाद तुरंत अस्पताल पहुंचने पर शुरुआती डेढ़ लाख का खर्चा सरकार वहन करेगी. यह खर्च प्रधानमंत्री राहत योजना के तहत दिया जाएगा. इलाज सरकार के द्वारा सूचीबद्ध अस्पतालों में ही होगा. जबलपुर में 92 अस्पतालों को इम्पैनल किया गया |  मरीज की जान बचाना पहली प्राथमिकता एक्सीडेंट होने के बाद शुरुआती समय किसी भी मरीज को बचाने में सबसे महत्वपूर्ण होता है. यदि एक्सीडेंट के तुरंत बाद इलाज शुरू हो जाए तो मरीज को बचाया जा सकता है. लेकिन ऐसा नहीं हो पता क्योंकि निजी अस्पताल इस बात से डरते हैं कि यदि उन्होंने इलाज शुरू कर दिया तो इसका बिल कौन देगा. कई बार मरीज की कोई जानकारी नहीं होती तो वहीं दूसरी समस्या पुलिस की ओर से होती है कि जब तक पुलिस जांच ना कर ले तब तक इलाज शुरू नहीं हो पाता. लेकिन अब ऐसा नहीं होगा |  एक्सीडेंट में घायल व्यक्तियों के लिए पीएम राहत योजना जबलपुर कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने बताया कि “इन्हीं समस्याओं को खत्म करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से पीएम राहत योजना शुरू की गई है. इसके तहत एक्सीडेंट के तुरंत बाद जब एंबुलेंस से कोई मरीज किसी अस्पताल पहुंचेगा तो इसी शुरुआती गोल्डन ऑवर में अस्पताल को मरीज को इलाज देना होगा. एक्सीडेंट के मामले में शुरुआती डेढ़ लाख का खर्चा सरकार उठाएगी. इलाज कैशलेस होगा |  जबलपुर के 92 अस्पताल शामिल इस योजना में सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों को भी शामिल किया गया है. जबलपुर में ऐसे 92 अस्पतालों को इम्पैनल किया गया है, जहां एक्सीडेंट के तुरंत बाद घायल का इलाज शुरू हो जाएगा. इसमें किसी को भी इस बात की चिंता नहीं करनी होगी कि इसका पैसा कौन देगा. कलेक्टर राघवेंद्र सिंह का कहना है कि “भले ही घायल आयुष्मान कार्ड धारी है या नहीं है, इसका भी इस योजना पर कोई असर नहीं पड़ेगा और यह पैसा पीएम राहत के माध्यम से भुगतान करवाया जाएगा |  पूरी प्रक्रिया होगी ऑनलाइन कलेक्टर राघवेंद्र सिंह का कहना है कि “यह पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी ताकि पुलिस को भी इस मामले की जानकारी हो और यदि पुलिस को कोई कार्रवाई करनी है तो वह भी साथ में होती रहे लेकिन किसी भी स्थिति में घायल का इलाज नहीं रुकेगा |  कलेक्टर राघवेंद्र सिंह का कहना है कि “रोड एक्सीडेंट के मामले में वाहनों का इंश्योरेंस होता है और शासन जो पैसा खर्च करेगा वह पैसा इंश्योरेंस के माध्यम से वसूला जाएगा. वहीं कुछ ऐसे वाहन जिनका बीमा नहीं होता है और यदि वे एक्सीडेंट करते हैं तो इलाज का खर्च राज्य सरकार उठाएगी लेकिन इसकी वसूली का काम शासन का होगा |  घायलों के लिए अच्छा कदम जबलपुर कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने बताया कि “यह बहुत ही अच्छा कदम है आम आदमी को यदि इसकी जानकारी होगी तो बहुत सारे घायलों को बचाया जा सकता है. क्योंकि एक्सीडेंट के मामले में अक्सर लोग मरीजों की मदद करने में डरते हैं कई बार पुलिस परेशान करती है तो कई बार लोगों के पास मदद करने लायक पैसा नहीं होता यदि यह दोनों ही सहूलियत हो जाए तो सड़क पर मरने वालों की संख्या घट सकती है |     

सड़क दुर्घटना में इलाज की चिंता खत्म, PM RAHAT स्कीम से 7 दिन मुफ्त उपचार

नई दिल्ली PM RAHAT Scheme: सड़क हादसे भारत में हर साल हजारों परिवारों की जिंदगी बदल देते हैं. कई बार हादसा जानलेवा इसलिए बन जाता है, क्योंकि घायल को समय पर अस्पताल नहीं मिल पाता या इलाज से पहले पैसों की बात आ जाती है. इसी बड़ी समस्या को देखते हुए केंद्र सरकार ने PM RAHAT योजना को मंजूरी दे दी है. इस योजना का मकसद साफ है, सड़क हादसे के शिकार लोगों को बिना किसी देरी और बिना पैसे की चिंता के सही और उचित समय पर इलाज मिल सके.  क्या है PM RAHAT योजना PM RAHAT यानी रोड एक्सीडेंट विक्टिम हॉस्पिटलाइजेशन एंड एश्योर्ड ट्रीटमेंट स्कीम. इसके तहत सड़क हादसे में घायल व्यक्ति को दुर्घटना की तारीख से 7 दिन तक कैशलेस इलाज (Cashless Treatment) की सुविधा मिलेगी. इलाज पर अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक का खर्च सरकार की तरफ से कवर किया जाएगा. मरीज की जेब से एक रुपया भी नहीं लिया जाएगा. स्वास्थ्य आंकड़े बताते हैं कि, अगर घायल को पहले एक घंटे के भीतर अस्पताल पहुंचा दिया जाए तो सड़क हादसों में होने वाली करीब आधी मौतों पर लगाम लगाई जा सकती हैं. इस समय को गोल्डन आवर कहा जाता है. अक्सर अस्पताल में भर्ती होने में देरी इसलिए होती है, क्योंकि पैसे और पेमेंट को लेकर असमंजस रहता है. PM RAHAT योजना इसी समस्या को खत्म करने की कोशिश है. योजना में एक और बड़ी दिक्कत को माना गया है. हादसे के बाद आसपास मौजूद लोग कानूनी झंझट के डर से मदद करने से कतराते हैं. PM RAHAT में ऐसे मददगारों को राहवीर या गुड समैरिटन कहा गया है. इसका मतलब है कि जो व्यक्ति घायल की मदद करेगा, उसे कानूनी परेशानियों से डरने की जरूरत नहीं होगी. न उसे किसी कानूनी पचड़े में पड़ना होगा और न ही उसके जेब से पैसे खर्च होंगे. 112 पर कॉल, सीधे मदद हादसे के समय पीड़ित खुद, कोई राहगीर या मौके पर मौजूद कोई भी व्यक्ति 112 नंबर पर कॉल कर सकता है. इस कॉल के जरिए नजदीकी तय अस्पताल की जानकारी मिलेगी और एंबुलेंस बुलाई जा सकेगी. यह पूरा सिस्टम इमरजेंसी रिस्पॉन्स सपोर्ट सिस्टम से जुड़ा है, जिससे पुलिस, एंबुलेंस और अस्पताल आपस में तालमेल से काम कर सकें. योजना के तहत सभी तरह की सड़कों पर हादसे में घायल लोग कवर होंगे. चाहे वो किसी भी शहर की कोई भी सड़क होग. अगर चोट गंभीर नहीं है, तो 24 घंटे तक का स्टेबलाइजेशन इलाज मिलेगा. अगर जान को खतरा है, तो यह समय 48 घंटे तक बढ़ जाएगा. दोनों ही हालात में 7 दिन तक का पूरा इलाज कवर रहेगा. पुलिस की पुष्टि तय समय सीमा में डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए जरूरी होगी. डिजिटल सिस्टम से होगा पूरा काम PM RAHAT योजना दो मौजूदा सरकारी डिजिटल सिस्टम पर बेस्ड है. एक सिस्टम हादसे की पूरी जानकारी दर्ज करता है और दूसरा इलाज और भुगतान से जुड़ा काम संभालता है. पहला है इलेक्ट्रॉनिक डिटेल्ड एक्सीडेंट रिपोर्ट यानी eDAR, जिसे केंद्रीय सड़क परिवहन राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ऑपरेट करता है और दूसरा सिस्टम है ट्रांजैक्शन मैनेजमेंट सिस्टम TMS 2.0, जिसकी जिम्मेदारी नेशनल हेल्थ अथॉरिटी के पास है. इन दोनों सिस्टम का मकसद यह है कि एक्सीडेंट की सूचना मिलते ही पूरी जानकारी एक ही लाइन में आगे बढ़े.  हादसे की रिपोर्ट, अस्पताल में भर्ती, इलाज, क्लेम डालना और फिर अस्पताल को पेमेंट, सब कुछ इसी डिजिटल सिस्टम के जरिए किया जाए, ताकि इलाज में देरी न हो और किसी को बार बार दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें. अस्पतालों को इलाज का पैसा मोटर व्हीकल एक्सीडेंट फंड से मिलेगा. अगर हादसे में शामिल वाहन का बीमा है, तो पेमेंट बीमा कंपनियों के फंड से होगा. हिट एंड रन या बिना बीमा वाले मामलों में केंद्र सरकार बजट से पैसा देगी. क्लेम मंजूर होने के बाद 10 दिन के भीतर अस्पताल को भुगतान करने का वादा किया गया है. अगर योजना से जुड़ी कोई शिकायत होती है, तो उसका निपटारा जिला सड़क सुरक्षा समिति के तहत किया जाएगा. इसकी जिम्मेदारी जिला कलेक्टर या जिला मजिस्ट्रेट के स्तर पर होगी. इससे लोगों को अलग से किसी दफ्तर के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे. PM RAHAT योजना में परिवहन, स्वास्थ्य, बीमा और पुलिस विभाग को एक साथ लाया गया है. इसका असली असर इस बात पर निर्भर करेगा कि अस्पताल कितनी संख्या में जुड़ते हैं, 112 नंबर कितनी तेजी से काम करता है और पुलिस के कन्फर्मेशन में इलाज में देरी तो नहीं होती. जिला स्तर पर ये प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ती है और इसे कैसे लागू किया जाता है. आने वाले समय में साफ हो जाएगा कि यह योजना सड़क हादसों में जान बचाने में कितनी कारगर साबित होती है.

महाराष्ट्र में राज्यसभा चुनाव का ऐलान: नामांकन से लेकर मतदान तक की पूरी जानकारी एक जगह

 मुंबई महाराष्ट्र में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है, क्योंकि राज्य से सात राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव की अधिसूचना बुधवार को जारी कर दी गई है। सदस्यों के चुनाव के लिए 16 मार्च को होगा। इस बात की जानकारी रिटर्निंग ऑफिसर विलास अठवाले ने दी। उन्होंने बताया कि नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 5 मार्च है। इसके बाद 6 मार्च को नामांकनों की जांच (स्क्रूटनी) होगी और 9 मार्च तक उम्मीदवार अपना नाम वापस ले सकते हैं। बता दें कि महाराष्ट्र विधानसभा के सदस्य इस चुनाव में मतदान करेंगे। राज्य से सात राज्यसभा सांसदों की अवधि अप्रैल में समाप्त हो रही है, जिसमें एनसीपी प्रमुख शरद पवार भी शामिल हैं। अभी तक पवार ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि वे पुनः उम्मीदवार होंगे या नहीं। ऐसे में यदि आवश्यकता हुई, तो 16 मार्च को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक विधान भवन में मतदान होगा और उसके बाद मतगणना की जाएगी। राज्यसभा का चुनाव कैसे होता है? राज्यसभा के सदस्य का चुनाव उस राज्य की विधानसभा के चुने हुए विधायक करते हैं, जिस राज्य से वह उम्मीदवार है। राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया लोकसभा और विधानसभा चुनाव से काफी अलग है, क्योंकि इस सदन के लिए मतदान सीधे जनता नहीं करती, बल्कि जनता के द्वारा चुने हुए प्रतिनिधि करते हैं। राज्यसभा के सदस्यों का कार्यकाल छह साल का होता है। राज्यसभा चुनावों के नतीजों के लिए एक फॉर्मूला भी तय किया गया है। जीतने के लिए कितने वोट की जरूरत? गौरतलब है कि महाराष्ट्र के फॉर्मूला के हिसाब से यहां किसी उम्मीदवार को जिताने के लिए कम से कम 37 विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी। विधानसभा के मौजूदा संख्याबल के मुताबिक सत्ताधारी गठबंधन सात में छह सीटों  पर आसानी से जीत दर्ज कर सकता है। विपक्ष एकजुट नहीं होता तो सातवें उम्मीदवार के लिए मुकाबला रोचक हो सकता है।   राष्ट्रीय गोलमेज सम्मेलन में मिलकर काम करने का संकल्प लिया भारत निर्वाचन आयोग और राज्य चुनाव आयोगों का राष्ट्रीय गोलमेज सम्मेलन मंगलवार 24 फरवरी 2026 को भारत मंडपम, नई दिल्ली में संपन्न हुआ। यह सम्मेलन 27 वर्षों के बाद आयोजित किया गया था और इसमें 30 राज्यों के राज्य चुनाव आयोगों ने भाग लिया। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की अध्यक्षता में हुए इस सम्मेलन में चुनाव आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी भी उपस्थित रहे। सम्मेलन में राज्य चुनाव आयुक्तों ने इस आयोजन की सराहना की और इसे सफल बताया। सभी ने हर साल ऐसे राष्ट्रीय गोलमेज सम्मेलन आयोजित करने का संकल्प लिया। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में सभी ने राष्ट्रीय घोषणा 2026 को अपनाया। घोषणा में जोर दिया गया कि शुद्ध मतदाता सूची तैयार करना लोकतंत्र की मजबूत नींव है और चुनावों का पारदर्शी तथा सुचारू संचालन लोकतांत्रिक संस्थाओं को और मजबूत बनाता है।

मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ा, क्या इंश्योरेंस कंपनियों से क्लेम मिलेगा? जानें पॉलिसी शर्तें और नियम

नई दिल्ली इजराइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध ने दुनिया भर के लोगों को चिंता में डाल दिया है. खासकर भारतीय यात्रियों, विदेश में काम करने वालों और व्यापार करने वाली कंपनियों की मुश्किल बढ़ गई है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि इंश्योरेंस कंपनियां क्या कवर देती हैं? क्या आपकी सामान्य यात्रा बीमा या स्वास्थ्य बीमा इस युद्ध जैसी स्थिति में नुकसान की भरपाई करेगी? या बिजनेस के लिए कोई अलग सुरक्षा है? इस समय कई भारतीय परिवार और व्यापारी इसी उलझन में हैं क्योंकि मिडिल ईस्ट भारत का बड़ा व्यापारिक पार्टनर है और वहां लाखों भारतीय काम करते हैं. सामान्य तौर पर ज्यादातर यात्रा और स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी में युद्ध, सिविल अनरेस्ट या आतंकवाद से होने वाले नुकसान को पूरी तरह बाहर रखा जाता है. यह पॉलिसी के एक्सक्लूजन क्लॉज में साफ लिखा होता है. अगर कोई इलाका बाद में अनसेफ घोषित हो जाए तो वहां जाने वाले लोगों को खुद सावधानी बरतनी पड़ती है. यानी अगर फ्लाइट कैंसल हो, होटल खर्च बढ़े या स्वास्थ्य समस्या युद्ध की वजह से आए तो बीमा कंपनी पैसे नहीं देगी. सिर्फ सामान्य स्वास्थ्य समस्या जैसे दिल का दौरा पड़ना, जो युद्ध से जुड़ा न हो, तो कुछ कंपनियां मदद कर सकती हैं. लेकिन युद्ध का सीधा असर हो तो कवर नहीं मिलता. एक्सक्लूजन क्लॉज में होता है वॉर या सिविल अनरेस्ट PlusCash के फाउंडर और CEO प्रणव कुमार के मुताबिक, जब किसी देश या क्षेत्र में युद्ध, दंगे या आतंकी घटनाएं होती हैं, तो ज्यादातर ट्रैवल और हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसियां ऐसे हालात में होने वाले नुकसान को कवर नहीं करती हैं. इन पॉलिसियों में पहले से ही “वॉर या सिविल अनरेस्ट” को एक्सक्लूजन क्लॉज में रखा जाता है. इसलिए अगर कोई व्यक्ति ऐसे इलाकों में यात्रा की योजना बना रहा है, जिन्हें बाद में असुरक्षित घोषित कर दिया जाता है, तो उसे पहले अपनी इंश्योरेंस पॉलिसी की शर्तें ध्यान से पढ़ लेनी चाहिए और पूरी सावधानी बरतनी चाहिए. क्या महंगे प्लान में सब कवर होता है? भारत में भी इंश्योरेंस रेगुलेटर आईआरडीएआई के नियमों के तहत यही प्रैक्टिस है. अगर आप मिडिल ईस्ट घूमने या काम पर जा रहे हैं तो अपनी पॉलिसी अच्छे से पढ़ लें. कई बार लोग सोचते हैं कि महंगा प्लान ले लिया तो सब कवर हो जाएगा, लेकिन युद्ध जैसी बड़ी घटना में यह गलतफहमी महंगी पड़ सकती है. खासकर शिपिंग, ऑयल और एक्सपोर्ट बिजनेस करने वालों के लिए तो स्थिति और गंभीर है. होर्मुज स्ट्रेट जैसे इलाकों में शिपिंग रूट प्रभावित हो रहे हैं, इसलिए सामान्य मरीन इंश्योरेंस भी पर्याप्त नहीं रहता. ऐसे में बिजनेस वाले लोगों को अलग तरह के स्पेशल बीमा प्रोडक्ट्स की जरूरत पड़ती है. जैसे पॉलिटिकल रिस्क इंश्योरेंस, वॉर रिस्क इंश्योरेंस और मरीन वॉर रिस्क कवर. ये प्रोडक्ट्स खासतौर पर बनाए गए हैं ताकि संपत्ति को नुकसान, बिजनेस रुकने या सरकार द्वारा संपत्ति छीनने जैसे खतरे से बचाया जा सके. लेकिन इनकी कीमत भी ज्यादा होती है और हर कोई आसानी से नहीं ले पाता. कंपनियों को मिलता है कवर? Vibhvangal Anukulakara Private Limited के फाउंडर और मैनेजिंग डायरेक्टर सिद्धार्थ मौर्य के अनुसार, जो कंपनियां राजनीतिक रूप से संवेदनशील इलाकों में काम करती हैं, उनके लिए खास तरह के इंश्योरेंस कवर बेहद जरूरी हो जाते हैं. इनमें पॉलिटिकल रिस्क इंश्योरेंस, वॉर रिस्क इंश्योरेंस और मरीन वॉर रिस्क कवर शामिल हैं. ये पॉलिसियां संपत्ति को नुकसान, बिजनेस रुकने (बिजनेस इंटरप्शन) और जबरन अधिग्रहण जैसे जोखिमों से सुरक्षा देने के लिए बनाई गई हैं. हालांकि, ऐसे कवर लेने की कीमत भी ज्यादा होती है. भारतीय कंपनियां जो मिडिल ईस्ट से तेल, गैस या दूसरे सामान का आयात-निर्यात करती हैं, उन्हें अब इन स्पेशल कवर की तलाश करनी पड़ रही है. कुछ इंटरनेशनल इंश्योरेंस ग्रुप्स ने पर्सियन गल्फ में वॉर रिस्क कवर रोक भी दिया है, जिससे शिपिंग कंपनियों की मुश्किल बढ़ गई है. कुछ कंपनियां टेररिज्म के लिए अलग ‘टेररिज्म राइडर’ या ऐड-ऑन कवर प्रदान करती हैं, लेकिन युद्ध के लिए बहुत कम ऑप्शन हैं. इस समय जब कच्चे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं और सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है, भारतीय व्यापारियों को अपनी पॉलिसी अपडेट करानी चाहिए. घरेलू स्वास्थ्य बीमा या लाइफ इंश्योरेंस में भी युद्ध से जुड़े नुकसान बाहर रहते हैं. एक्सपर्ट्स के अनुसार, पॉलिसी खरीदते समय सिर्फ प्रीमियम नहीं, बल्कि एक्सक्लूजन क्लॉज को ध्यान से पढ़ना बेहद जरूरी है.

5-0 के रिकॉर्ड के साथ T20 वर्ल्ड कप में दबदबा, क्या सेमीफाइनल में बनेगा नया इतिहास?

 कोलकाता T20 वर्ल्ड कप 2026 का पहला सेमीफाइनल कोलकाता के ईडन गार्डन्स (Eden Gardens) में बुधवार (4 मार्च) को है, जहां साउथ अफ्रीका और न्यूजीलैंड आमने-सामने होंगे | मुकाबला सिर्फ फाइनल के टिकट का नहीं, बल्कि कीवी टीम के लिए इतिहास बदलने का भी है. वहीं दूसरा सेमीफाइनल गुरुवार (5 मार्च) को मुंबई के वानखेड़े स्टेड‍ियम में भारत और इंग्लैंड के बीच होना है |  साउथ अफ्रीकी टीम इस टूर्नामेंट में अब तक अजेय रही है. वहीं न्यूजीलैंड ने सुपर 8 में नेट रन रेट के आधार पर पाकिस्तान को पछाड़कर सेमीफाइनल में जगह बनाई | कीवी टीम के कप्तान म‍िचेल सेंटनर के सामने बड़ी चुनौती है, और यह चुनौती है इत‍िहास बदलने की. क्योंकि टी20 वर्ल्ड कप इतिहास में न्यूजीलैंड टीम  कभी भी साउथ अफ्रीका को नहीं हरा पाई है । यह हारों का सिलसिला इतना लंबा है कि न्यूजीलैंड के लिए यह सेमीफाइनल सिर्फ मैच नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक बदला लेने का मौका बन गया है. ब्लैक कैप्स के पास अनुभवी खिलाड़ी हैं, जो इस बार चोक का टैग तोड़ने की कोशिश करेंगे. लेकिन साउथ अफ्रीका की टीम इस टूर्नामेंट में मजबूत फॉर्म में दिख रही है. वह लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं और न्यूजीलैंड के खिलाफ उनका रिकॉर्ड उन्हें फेवरेट बनाता है. प्रोटियाज इस एडिशन में एक भी मैच ना हारने वाली इकलौती टीम भी है। 2007 से 2026 तक, हर बार मिली जीत साउथ अफ्रीका और न्यूजीलैंड के बीच टी20 वर्ल्ड कप में पहली भिड़ंत साल 2007 में हुई थी. उस मैच में साउथ अफ्रीका ने 6 विकेट से बाजी मारी थी. इसके बाद दोनों टीमें 2009 टी20 वर्ल्ड कप में आमने-सामने आईं थीं, तब साउथ अफ्रीका सिर्फ 1 रन से जीता था. 2010 में भी कीवी टीम को 13 रनों से हार मिली थी. इसके बाद 2014 टी20 वर्ल्ड कप में खेले गए मैच को भी साउथ अफ्रीका ने 2 रन से अपने नाम किया था. वहीं, 2026 टी20 वर्ल्ड कप के ग्रुप स्टेज में भी ये टीमें टकराई थीं. इस बार भी अफ्रीका ने 7 विकेट से मैच जीता. अब सेमीफाइनल में ये टीमें भिड़ने के लिए तैयार हैं। टी20 वर्ल्ड कप में 5 बार SA vs NZ का आमना-सामना 2007 से 2026 तक दोनों टीमों के बीच टी20 वर्ल्ड कप में पांच मुकाबले खेले गए हैं और हर बार जीत साउथ अफ्रीका को मिली है |      2007: साउथ अफ्रीका ने 6 विकेट से जीत दर्ज की.     2009: कीवी टीम 1 रन से हार गई.     2010: प्रोटियाज ने 13 रन से मुकाबला जीता.     2014: 2 रन से रोमांचक जीत साउथ अफ्रीका के नाम रही.     2026 (ग्रुप मैच, चेन्नई): 176 रन का लक्ष्य साउथ अफ्रीका ने 17.1 ओवर में 7 विकेट से हासिल कर लिया |  चेन्नई में खेले गए इस मुकाबले ने साफ कर दिया कि मौजूदा टूर्नामेंट में भी साउथ अफ्रीका का आत्मविश्वास चरम पर है|  SA vs NZ ओवरऑल टी20I हेड टू हेड टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट में दोनों टीमों के बीच कुल 19 मुकाबले हुए हैं. इनमें से 12 मैच साउथ अफ्रीका ने जीते हैं, जबकि 7 मुकाबले न्यूजीलैंड के खाते में गए हैं. आंकड़े बताते हैं कि अफ्रीकी टीम पलड़ा साफ तौर पर भारी रहा है|  एडेन मार्करम की कप्तानी में साउथ अफ्रीका पिछले टी20 वर्ल्ड कप से ही शानदार प्रदर्शन कर रहा है. 2024 में टीम फाइनल तक पहुंची थी और इस बार फिर से खिताब से सिर्फ एक जीत दूर है.वहीं मिचेल सेंटनर की अगुवाई में न्यूजीलैंड को फाइनल में जगह बनाने के लिए 19 साल का सिलसिला तोड़ना होगा. अब देखना दिलचस्प होगा कि ईडन गार्डन्स की पिच पर आंकड़े हावी रहते हैं या कीवी टीम नया इतिहास रचती है | यह सेमीफाइनल मुकाबला 4 मार्च को कोलकाता के ईडन गार्डन्स में खेला जाएगा। भारतीय समय के अनुसार मैच शाम 7:00 बजे से शुरू होगा। इस मुकाबले का सीधा प्रसारण स्टार स्पोर्ट्स नेटवर्क और डीडी स्पोर्ट्स पर किया जाएगा, जबकि जियोहॉटस्टार पर इसकी लाइव स्ट्रीमिंग अलग-अलग भाषाओं में उपलब्ध होगी। सेमीफाइनल-1: साउथ अफ्रीका बनाम न्यूजीलैंड (4 मार्च, कोलकाता) ऑन-फील्ड अंपायर: रिचर्ड इलिंगवर्थ और एलेक्स व्हार्फ थर्ड अंपायर: नितिन मेनन फोर्थ अंपायर: रॉड टकर मैच रेफरी: जवागल श्रीनाथ मुंबई में होने वाला दूसरा सेमीफाइनल भारत और इंग्लैंड के बीच खेला जाएगा, जिसे लेकर फैंस में जबरदस्त उत्साह है। इस मैच में न्यूजीलैंड के क्रिस गैफनी और साउथ अफ्रीका के अल्लाउद्दीन पलेकर फील्ड अंपायर होंगे। क्रिस गैफनी इससे पहले भी बड़े ICC मुकाबलों में अंपायरिंग कर चुके हैं। पलेकर ने भी मौजूदा टूर्नामेंट में इंग्लैंड और भारत के मैचों में जिम्मेदारी निभाई है। एंडी पाइक्रॉफ्ट मैच रेफरी की भूमिका में होंगे। सेमीफाइनल-2: भारत बनाम इंग्लैंड (5 मार्च, मुंबई)     ऑन-फील्ड अंपायर: क्रिस गैफनी और अल्लाउद्दीन पलेकर     थर्ड अंपायर: एड्रियन होल्डस्टॉक     फोर्थ अंपायर: पॉल रिेफेल     मैच रेफरी: एंडी पाइक्रॉफ्ट सेमीफाइनल में दिखेगा जबरदस्त रोमांच T20 वर्ल्ड कप जैसे बड़े मंच पर अंपायरों और रेफरी की भूमिका बेहद अहम होती है। नॉकआउट मुकाबलों में हर फैसला मैच का रुख बदल सकता है। ऐसे में ICC ने अनुभवी अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी है, ताकि मुकाबले निष्पक्ष और सुचारू रूप से संपन्न हो सकें। अब फैंस की नजरें सेमीफाइनल मुकाबलों पर टिकी हैं। मुंबई और कोलकाता में होने वाले इन हाई-वोल्टेज मुकाबलों के बाद ही तय होगा कि फाइनल में कौन सी दो टीमें भिड़ेंगी।    

मिडल ईस्ट युद्ध से तेल की कीमतों में उबाल, लेकिन भारत बेफिक्र

नई दिल्‍ली मिडिल ईस्‍ट में जंग छिड़ी हुई है. ईरान लगातार दुबई, सऊदी और अन्‍य देशों पर मिसाइलें दाग रहा है. वहीं अमेरिका-इजरायल ईरान पर लगातार हमले कर रहे हैं. कुछ अन्‍य देशों ने भी ईरान पर हमले की चेतावनी दी है. ऐसे में इस जंग के शांत होने के आसार फिलहाल दिखाई नहीं दे रहे हैं. ऐसे में सबसे बड़ी चिंता कच्‍चे तेल को लेकर है, जिसके दाम में रिकॉर्ड तेजी आने की संभावना जताई जा रही है |  सोमवार को कच्‍चे तेल की कीमतों में 13 फीसदी तक की उछाल देखी गई और आगे 100 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है. अगर ऐसा होता है तो दुनियाभर में महंगाई चरम पर आ सकती है, जो ग्‍लोबल इकोनॉमी के लिए भी खतरा है |  तेल की कीमतों में इतनी बड़ी तेजी आने की वजह ईरान के कंट्रोल में ‘स्‍ट्रेट ऑफ होमुर्ज’ गलियारा है, जहां से दुनियाभर के लिए 40 फीसदी तेल आयात होता है. इसी रास्‍ते 20 फीसदी अन्‍य गैस या एनर्जी का भी आयात किया जाता है. अकेले भारत 50 फीसदी कच्‍चे तेल का आयात करता है. इस एरिए के चोक होने की खबर है, जिसके बाद तेल की कीमतों में इजाफा हुआ है |  भारत पर नहीं कच्‍चे तेल का संकट हालांकि भारत को इससे डरने की जरूरत नहीं, क्‍योंकि भारत के पास रिजर्व में बहुत ज्‍यादा कच्‍चा तेल पड़ा हुआ है, जिससे भारत की जरूरतें बिना रुकावट पूरी हो सकती हैं. सरकारी अधिकारियों का कहना है कि भारत के पास फिलहाल अल्पकालिक व्यवधानों से निपटने के लिए पर्याप्त बफर भंडार मौजूद हैं |  45 दिनों का भंडार  रणनीतिक भंडार LPG और एलएनजी की मांग को लगभग 15 दिनों तक पूरा कर सकते हैं, जबकि कच्चे तेल के भंडार आपूर्ति में व्यवधान की स्थिति में 45 दिनों तक चलने का अनुमान है. भारत के लिए यह  तैयारी ऐसे समय में की गई है, जब होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर वैश्विक स्तर पर चिंताएं बढ़ रही हैं |  बढ़ते तनाव के बावजूद, अधिकारियों का कहना है कि जलडमरूमध्य में लंबे समय तक व्यवधान या बंद होने की स्थिति में भी भारत घरेलू मांग को पूरा करने के लिए वैकल्पिक बाजारों से ऊर्जा प्राप्त करने की अपनी क्षमता को बरकरार रखेगा. हालांकि निकट भविष्य में भौतिक आपूर्ति में व्यवधान की संभावना कम ही दिखती है. अभी कच्‍चे तेल के दाम इंटरनेशनल मार्केट में 80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच चुका है |  कितना खास है ये मार्ग?  गौरतलब है कि होर्मुज जलडमरूमध्य विश्व के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा परिवहन मार्गों में से एक है, जिससे वैश्विक कच्‍चे तेल का लगभग  40% और एलएनजी शिपमेंट का लगभग 20 फीसदी हिस्सा गुजरता है. इसलिए, इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार की दीर्घकालिक बाधा वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर व्यापक प्रभाव डाल सकती है |  यूरोपियन गैस की कीमतों में 22% की तेजी यूरोपियन नैचुरल गैस की कीमतों में लगभग 22% की तेज़ी से बढ़ोतरी हुई है. मिडिल ईस्ट में बढ़ते जियोपॉलिटिकल तनाव के कारण, खासकर ईरान पर हाल ही में US और इजराइली मिलिट्री हमलों और होर्मुज़ स्ट्रेट के ज़रिए सप्लाई में रुकावट के डर के बाद, एनर्जी कीमतों में उछाल आई है |  2022 के गैस मार्केट में उथल-पुथल के बाद यह सबसे बड़ी बढ़ोतरी है. डर है कि इस युद्ध से LNG (लिक्विफाइड नैचुरल गैस) और दूसरे एनर्जी शिपमेंट का फ्लो रुक सकता है या झगड़े बढ़ने पर उनका रूट बदला जा सकता है | 

कैंसर का बढ़ता कहर: 2040 तक संकट गहराएगा, हर दो मिनट में एक व्यक्ति चपेट में

कैंसर के मामले वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य के लिए सबसे गंभीर चुनौती बने हुए हैं। हर साल इस बीमारी के कारण लाखों लोगों की जान जा रही है। बुजुर्ग और युवा तो छोड़िए, बच्चे भी तेजी से इसका शिकार होते जा रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, जिस गति से ये बीमारी बढ़ती जा रही है, ऐसे में अनुमान है कि आने वाले वर्षों में कैंसर के कारण हालात और भी गंभीर हो सकते हैं। इस जानलेवा रोग के जोखिमों को देखते हुए सभी लोगों को इससे बचाव के लिए निरंतर प्रयास करते रहने की जरूरत है। आने वाले दो दशकों में कैंसर और कितना खतरनाक रूप लेने वाला है? इससे संबंधित रिपोर्ट में जो बातें सामने आई हैं, वो निश्चित ही काफी डराने वाली हैं। ब्रिटेन की एक जानी-मानी चैरिटी ने चेतावनी दी है कि साल 2040 तक कैंसर के मामले रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच सकते हैं। हालात इतने बिगड़ सकते हैं कि हर दो मिनट में एक व्यक्ति में इस बीमारी का निदान होने की आशंका है। वैसे तो ये रिपोर्ट केवल ब्रिटिश नागरिकों में कैंसर के बढ़ते जोखिमों को लेकर है, पर विशेषज्ञ इसे दुनियाभर के लिए बड़ी चेतावनी मान रहे हैं। बच्चे भी कैंसर की चपेट में आ रहे हैं जिसके कारण एक पूरी पीढ़ी पर कैंसर का गहरा साया देखा जा रहा है। अगले दो दशकों में और बिगड़ सकते हैं हालात ‘वन कैंसर वॉइस’ नाम के 60 कैंसर संस्थानों वाले ग्रुप ने ये चौंकाने वाला अनुमान जारी किया है, जिसमें अगले दो दशकों में अकेले ब्रिटेन में कैंसर के 63 लाख नए मामलों का अनुमान लगाया गया है। विशेषज्ञों ने शोध के दौरान पाया है कि ब्रेस्ट, प्रोस्टेट और लंग्स कैंसर के मामले बहुत तेजी से बढ़ने वाले हैं। इसके कारण स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त बोझ बढ़ने की आशंका जताई गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया कि कैंसर के बढ़ते खतरे के लिए वैसे तो कई कारण जिम्मेदार पाए गए हैं। हालांकि मोटापे की बढ़ती दर, खराब डाइट, कुछ प्रकार के कैंसर को रोकने वाली वैक्सीन लगवाने में कमी और लोगों में बढ़ती धूम्रपान की आदत इसके लिए मुख्यरूप से जिम्मेदार है। क्या कहती हैं विशेषज्ञ? कैंसर रिसर्च यूके की चीफ एग्जीक्यूटिव मिशेल मिशेल ने चेतावनी दी है कि हममें से लगभग दो में से एक को अपनी जिंदगी में कैंसर का खतरा हो सकता है। इस बीमारी का असर हर किसी पर पड़ेगा, चाहे उन्हें खुद इस बीमारी का पता चले या उनके किसी दोस्त-परिवार के सदस्य या प्रियजन को ये समस्या हो। उन्होंने आगे कहा कि अगर अभी से कैंसर की रोकथाम के लिए कदम नहीं उठाए गए तो इंग्लैंड में इस रोग के मामले दुनिया के कई देशों को पीछे छोड़ सकते हैं।       यूके में कैंसर और इसके कारण होने वाली समय से पहले मौत का सबसे बड़ा कारण तंबाकू है।     कैंसर का खतरा उम्र से भी जुड़ा हुआ है, क्योंकि समय के साथ बीमारी को ट्रिगर करने वाले सेल्स में डैमेज का जोखिम भी काफी बढ़ सकता है। कौन से कैंसर बढ़ा रहे खतरा? कैंसर को लेकर किए गए अध्ययनों से पता चलता है कि ब्रिटेन में जिन कैंसर का जोखिम सबसे ज्यादा बढ़ता जा रहा है उनमें प्रोस्टेट, ब्रेस्ट, लंग्स, बाउल और मेलेनोमा स्किन कैंसर शीर्ष पांच पर हैं। ये सिर्फ ब्रिटेन ही नहीं दुनिया के अन्य देशों के लिए भी अलर्ट है। कैंसर रोग विशेषज्ञों ने बताया कि हमारी रोजाना की गड़बड़ आदतें भी कैंसर के खतरे को बढ़ाती जा रही हैं। अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट में हमने बताया था कि किस तरह से डियोड्रेंट और परफ्यूम के इस्तेमाल के कारण भी कैंसर का जोखिम बढ़ सकता है। इसके अलावा जिन लोगों को इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज की दिक्कत होती है, ऐसे लोगों में आगे चलकर बाउल कैंसर का खतरा 600 प्रतिशत तक ज्यादा हो सकता है। बाउल कैंसर को कोलन कैंसर या कोलोरेक्टल कैंसर के नाम से भी जाना जाता है।  

पन्नू हत्याकांड मामले की प्रगति: निखिल गुप्ता की सजा 40 साल तक हो सकती है, तारीख तय

वॉशिंगटन   न्यूयॉर्क में सिख अलगाववादी गुरपतवंत सिंह पन्नू की कथित तौर से हत्या की साजिश के मामले में निखिल गुप्ता को अमेरिकी संघीय कोर्ट में औपचारिक रूप से दोषी ठहराया गया है। इस मामले में अगली सुनवाई के दौरान 29 मई को निखिल की सजा तय की जाएगी। कोर्ट के जज ने सिख अलगाववादी की हत्या की साजिश में निखिल की गलती मान ली है। निखिल को इस मामले में ज्यादा से ज्यादा 40 साल की जेल हो सकती है। अमेरिकी जिला जज विक्टर मारेरो ने 17 फरवरी को मजिस्ट्रेट जज सारा नेटबर्न के सामने गुप्ता की बातचीत की ट्रांसक्रिप्ट देखने के बाद दोषी ठहराने का आदेश जारी किया। पिछले हफ्ते 54 साल के निखिल गुप्ता ने कोर्ट में अपनी गलती स्वीकार की थी। उन्होंने माना था कि अमेरिका में 2023 में पन्नू की हत्या करवाने के लिए हामी भरी थी। उन्होंने ये भी बताया कि इसके लिए किसी दूसरे व्यक्ति को 15,000 डॉलर कैश दिए थे। पूछताछ के दौरान, उन्होंने माना कि उन्हें पता था कि जिस पर हमला होना था, वह न्यूयॉर्क में था और जिसे पेमेंट दिया गया, वह मैनहट्टन में मौजूद था। निखिल ने भाड़े पर हत्या करने और मनी लॉन्ड्रिंग करने की साजिश का गुनाह कबूल किया। जिला कोर्ट के आदेश के अनुसार, गुप्ता की सजा आधिकारिक हो गई है और केस सीधे सजा सुनाने के फेज में चला गया है। फेडरल कानून के तहत, गुप्ता को भाड़े पर मर्डर करने की साजिश के लिए 10-10 साल तक की सजा हो सकती है और मनी लॉन्ड्रिंग की साजिश के लिए 20 साल तक की सजा हो सकती है। यानी कानूनी तौर पर ज्यादा से ज्यादा 40 साल की सजा होगी। हालांकि, संघीय सजा सिर्फ कानूनी तौर पर ज्यादा से ज्यादा सजा के बजाय एडवाइजरी सेंटेंसिंग गाइडलाइंस से तय होती है। अर्जी से पहले दाखिल किए गए पिमेंटेल लेटर में गुप्ता की एडवाइजरी सजा की रेंज 235 से 293 महीने जेल आंकी गई थी। याचिका की सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने साफ किया कि गाइडलाइंस एडवाइजरी हैं और आखिरी सजा सिर्फ जज मारेरो जांच रिपोर्ट देखने के बाद तय करेंगे। अब इस मामले में निखिल को 29 मई को सुबह 10 बजे सजा सुनाई जाएगी। गुप्ता ने कोर्ट में पुष्टि की है कि वह भारत के नागरिक हैं और उन्हें मालूम है कि दोषी मानने पर उन्हें अमेरिका से निकाल दिया जाएगा। सरकार की सजा से जुड़ी जानकारी में कहा गया है कि ऐसे अपराधों के लिए दोषी पाए गए गैर-नागरिकों को देश से हटाना जरूरी है।

खाड़ी देशों में बमबारी, तेल के लिए संघर्ष की संभावना; भारत ने रूस के रास्ते पर तैयारियां कीं

नई दिल्ली पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के साथ आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। सोमवार को वायदा कारोबार में कच्चे तेल की कीमत 504 रुपए उछलकर 6,596 रुपए प्रति बैरल के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गई। वहीं, फारस की खाड़ी के संकरे प्रवेश मार्ग होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे जहाजों पर हमले से आपूर्ति को लेकर भी चिंताएं बढ़ गई। ऐसे में भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए रूस से कच्चे तेल का आयात बढ़ाने की संभावनाएं तलाश रहा है। भारत के कच्चे तेल आयात का करीब 50 फीसदी और एपीजी का हिस्सा हर दिन होर्मुज स्ट्रेट से गुजरता है। इसमें ज्यादातर इराक, सऊदी अरब, यूएई और कुवैत का कच्चा तेल होता है। क्षेत्र में तनाव ने चिंताएं बढ़ा दी हैं। जानकार मानते हैं कि भारत रूस और दूसरे देशों से आयात बढ़ाकर कच्चे तेल की आपूर्ति को बरकरार रख सकता है। पश्चिम एशिया में तनाव ज्यादा दिन बरकरार रहता है, तो इसका असर हमारी गैस आपूर्ति पर भी पड़ सकता है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सरकार दूसरी संभावनाएं भी तलाश रही है। बढ़ सकती है रूस से कच्चे तेल की आपूर्ति पेट्रोलियम मंत्रालय का केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर स्थिति का जायजा लिया है। मंत्रालय स्थिति पर नजर बनाए हुए है। इसके साथ सरकार वैकल्पिक संभावनाओं को भी खंगाल रही है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कच्चे तेल की आपूर्ति के लिए सुरक्षित मार्ग को तरजीह दे सकती है। ऐसे में रूस से कच्चे तेल की आपूर्ति बढ़ सकती है। अमेरिका से समझौते के बाद रूस से तेल आयात में मई 2022 के बाद भारत के तेल आयात में रूस का हिस्सा 20 फीसदी से कम हो गया है। इसके साथ भारत के पास करीब 74 दिन का कच्चे तेल का रणनीतिक भंडार है। ऐसे में सरकार के लिए शुरुआती तौर पर तो कोई चिंता नहीं है, पर तनाव लंबा होता है, तो रणनीतिक भंडार पर दबाव आ सकता है। इसलिए, सरकार एहतियाती तौर पर कुछ कदम उठा सकती है। ताकि, ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति को बरकरार रखा जाए। गैस आपूर्ति बरकरार रखने पर जोर दरअसल, जनवरी 2026 से भारत से खाड़ी देशों और अमेरिका से कच्चे तेल का आयात बढ़ा दिया था। इसका सीधा असर रूस से कच्चे तेल के आयात पर पड़ा। रूस से आयात कम हो गया। इसी तरह खाड़ी देशों से एलपीजी आयात भी बढ़ गया। फरवरी 2026 में 2.03 मिलियन टन एलपीजी आयात की, इसमें से 1.66 मिलियन टन गैस खाड़ी देशों से ली गई थी। विशेषज्ञों का कहना है कि गैस आपूर्ति को बरकरार रखने के लिए भी सुरक्षित मार्ग से गैस आपूर्ति की संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है। ऊर्जा सुरक्षा के लिए कच्चे तेल की आपूर्ति सुनिश्चित करने के साथ कीमत भी बड़ा मुद्दा है। ईरान ने कुवैत और सऊदी अरब की कई बड़ी कंपनियों पर हमला किया है। ऐसी खबर है कि सऊदी की अरामको पर हमला किया है। इससे रिफाइनरी का कामकाज प्रभावित हो सकता है। वहीं, ईरान प्रतिदिन लगभग 16 लाख बैरल तेल का निर्यात करता है, जिसका अधिकांश हिस्सा चीन को जाता है। ईरान का यह निर्यात बाधित होता है तो चीन को वैकल्पिक आपूर्ति स्रोत तलाशने पड़ सकते हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा कीमतों पर और दबाव बढ़ सकता है। करीब 40 देशों से कच्चा तेल खरीदता है भारत भारत अपनी जरूरत का करीब 85 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में कीमतों में उछाल से जहां आयात बिल बढ़ेगा, वहीं ईंधन महंगाई पर दबाव पड़ेगा। इस बीच, आठ पेट्रोलियम निर्यातक देशों के समूह ओपेक प्लस ने अप्रैल में अपना उत्पादन 2.06 लाख बैरल प्रतिदिन बढ़ाने का फैसला किया है। पश्चिम एशिया में स्थिति सामान्य नहीं होती है, तो इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। भारत इस वक्त करीब 40 देशों से कच्चा तेल खरीदता है। वर्ष 2022 से पहले भारत सिर्फ 27 देशों से कच्चा तेल खरीदता था। क्या है होर्मुज स्ट्रेट फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच एक महत्वपूर्ण संकरा समुद्री मार्ग है। यह ईरान, ओमान और यूएई स्थित वैश्विक तेल आपूर्ति का प्रमुख मार्ग है। खाड़ी देशों से तेल व गैस से जाने वाले ज्यादातर टैंकर इसी मार्ग से गुजरते हैं।

चुनावी सरगर्मी तेज: भाजपा ने घोषित किए 9 प्रत्याशी, लक्ष्मी वर्मा को छत्तीसगढ़ से मौका

रायपुर  भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आगामी राज्यसभा चुनावों के लिए अपने उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है। पार्टी ने रणनीतिक बदलाव करते हुए बिहार, असम, छत्तीसगढ़, हरियाणा, ओडिशा और पश्चिम बंगाल से कुल नौ चेहरों पर दांव लगाया है। इस सूची में अनुभवी संगठनकर्ताओं और क्षेत्रीय क्षत्रपों को प्राथमिकता दी गई है। नितिन नवीन और शिवेश कुमार पर भरोसा बिहार की खाली हो रही पांच सीटों में से भाजपा ने दो उम्मीदवारों के नाम तय किए हैं। पार्टी ने अपने वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष और पटना की बांकीपुर सीट से पांच बार के विधायक नितिन नवीन को राज्यसभा भेजने का निर्णय लिया है। उनके साथ ही युवा नेता शिवेश कुमार को भी उम्मीदवार बनाया गया है। नितिन नवीन की स्वच्छ छवि और सांगठनिक पकड़ को देखते हुए यह फैसला अहम माना जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति ने विभिन्न प्रदेशों में होने वाले राज्यसभा के द्विवार्षिक चुनाव हेतु निम्नलिखित नामों पर अपनी स्वीकृति प्रदान की है। pic.twitter.com/38I3mo5KMb — BJP (@BJP4India) March 3, 2026 अनुभवी चेहरों को तरजीह     हरियाणा: भाजपा ने यहां से संजय भाटिया को अपना प्रत्याशी बनाया है। प्रशासनिक अनुभव रखने वाले भाटिया की गिनती मुख्यमंत्री के करीबियों और पार्टी के रणनीतिकारों में होती है। छत्तीसगढ़: महिला मोर्चा की सक्रिय नेता लक्ष्मी वर्मा को उम्मीदवार बनाया गया है। राज्य में भाजपा सरकार होने के कारण लक्ष्मी वर्मा की जीत लगभग तय मानी जा रही है। असम,ओडिशा और बंगाल का समीकरण भाजपा ने पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए इन नामों पर मुहर लगाई है: असम: राज्य सरकार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके तेराश गोवाला और जोगेन मोहन को टिकट दिया गया है। असम की तीन खाली सीटों पर भाजपा अपनी बढ़त बनाए रखना चाहती है।      ओडिशा: वरिष्ठ नेता मनमोहन समल और सुजीत कुमार को मैदान में उतारा गया है। राज्य की सत्ता में होने के कारण भाजपा के लिए यहाँ की राह आसान है।      पश्चिम बंगाल: पार्टी के कद्दावर नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राहुल सिन्हा को उम्मीदवार बनाया गया है। बंगाल में संगठन को धार देने के लिए सिन्हा को उच्च सदन भेजा जा रहा है। जीत का गणित और आगामी चुनौती राज्यसभा में देशभर की कुल 37 खाली सीटों के लिए होने वाले इस चुनाव में भाजपा ने अपने कोर वोट बैंक और जातीय समीकरणों को साधने की कोशिश की है। छत्तीसगढ़, ओडिशा और हरियाणा जैसे राज्यों में भाजपा की अपनी सरकारें हैं, जिससे पार्टी के उम्मीदवारों का उच्च सदन पहुंचना तय माना जा रहा है।  

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