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राजस्थान में प्रदूषण के कारण स्कूलों में छु्ट्टी, 300 के पार पहुंचा AQI; जानिए आदेश

जयपुर राजस्थान में प्रदूषण अब एक बड़ा खतरा बनता जा रहा है. राजस्थान के इतिहास में पहली बार प्रदूषण के कारण सरकार को स्कूल बंद करने का फैसला लेना पड़ा है. राजस्थान के खैरथल-तिजारा जिले में प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्तर तक पहुंचने के कारण, जिला प्रशासन ने स्कूलों में 20 से 23 नवंबर तक छुट्टी घोषित की है. यह आदेश राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के बाद लिया गया है. ख़तरनाक AQI के कारण स्कूलों में अवकाश जिला कलक्टर किशोर कुमार ने आदेश जारी कर बताया कि खैरथल-तिजारा में स्थित सभी राजकीय और गैर-राजकीय विद्यालयों में 20 से 23 नवंबर तक पांचवीं कक्षा तक के बच्चों के लिए अवकाश घोषित किया गया है. उन्होंने यह भी बताया कि शिक्षकों को बच्चों की पढ़ाई में किसी भी प्रकार की बाधा न हो, इसके लिए ऑनलाइन कक्षाओं का आयोजन करना होगा. इस दौरान स्कूलों में शिक्षकों की छुट्टी नहीं होगी और वे स्कूल आकर बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाएंगे. यह आदेश सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में बढ़ते प्रदूषण के कारण लिया गया है. ग़ौरतलब है कि राजस्थान में सर्दी बढ़ने के साथ ही करीब 25 से ज्यादा जिलों में एक्यूआई ख़तरनाक स्तर पर पहुंच चुका है. यहां कि कई जिले खतरनाक स्तर पर प्रदूषित हो चुके हैं. राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जारी की गई रिपोर्ट के अनुसार, इस समय राजस्थान के कई प्रमुख जिले जैसे झुंझुनूं, भिवाड़ी, करौली और बीकानेर में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 300 से भी ज्यादा दर्ज किया गया है. झुंझुनूं का AQI 432, बहरोड़ का 350, भिवाड़ी का 348 और अलवर का 175 तक पहुंच चुका है, जो एक गंभीर स्थिति को दर्शाता है. राजस्थान-दिल्ली में आरोप प्रत्यारोप दिल्ली के मुख्यमंत्री आतिशी ने दिल्ली के बढ़ते प्रदूषण के लिए राजस्थान को भी दोषी ठहराया था मगर राजस्थान सरकार का कहना है कि राजस्थान की आबो हवा दूसरे राज्यों की वजह से ख़राब हुई है. राजस्थान में न तो पराली जलाई जाती है और न ही इतनी फैक्ट्रियां हैं जिनकी वजह से प्रदूषण हो. इस बीच, सरकार ने लोगों से प्रदूषण को लेकर सतर्क रहने और मास्क पहनने जैसी सावधानियां बरतने की अपील की है, ताकि प्रदूषण से होने वाली समस्याओं से बचा जा सके. जानें आदेश में क्या? कलक्टर की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश व दिल्ली-एनसीआर में एक्यूआई 450 पार जाने के बाद राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने प्रारंभिक शिक्षा निदेशक, बीकानेर को आदेश जारी किए थे। उसी के अनुसरण में खैरथल-तिजारा में स्थित सभी राजकीय और गैर राजकीय विद्यालयों में प्राथमिक कक्षाओं के लिए 20 नवंबर से 23 नवंबर तक भौतिक अवकाश घोषित किया जाता है। इस दौरान शिक्षक विद्यार्थियों के लिए ऑनलाइन क्लास संचालित करने की व्यवस्था करेंगे। यह आदेश केवल विद्यार्थियों के लिए ही लागू होगा।  

IndiGo अगले महीने से इंदौर से प्रयागराज रूट पर फ्लाइट संचालन शुरू करने की तैयारी

इंदौर   जनवरी 2025 में प्रयागराज में आयोजित होने वाले कुंभ मेले से पहले, इंदौर से प्रयागराज के लिए सीधी फ्लाइट शुरू होने की संभावना है। एयरपोर्ट सूत्रों के अनुसार, निजी एयरलाइंस कंपनी इंडिगो ने प्रयागराज एयरपोर्ट की पुरानी टर्मिनल बिल्डिंग के विस्तार के बाद सीधी उड़ान। सूत्रों के मुताबिक, कंपनी अगले महीने से ही इस रूट पर फ्लाइट संचालन शुरू करने की तैयारी कर रही है। कुंभ मेले के लिए फ्लाइट की तैयारी ट्रेवल एजेंट्स का कहना है कि जनवरी से फरवरी तक चलने वाले प्रयागराज कुंभ मेले में देश-विदेश से लाखों लोग शामिल होंगे। एयरलाइंस कंपनियां भी इसी को ध्यान में रखते हुए अपनी सेवाओं में नए रूट जोड़ रही हैं। इंदौर के ट्रेवल एजेंट्स ने बताया कि इंडिगो एयरलाइंस ने इस रूट पर फ्लाइट शुरू करने को लेकर उनसे संपर्क किया है। पूछताछ के बीच उन्होंने इंडिगो को बताया कि पहले भी इस रूट पर फ्लाइट का संचालन सफल रहा था, लेकिन बाद में इसे बंद कर दिया गया। फ्लाइट शुरू होने पर यात्रियों को काफी लाभ होगा। वहीं इंदौर से प्रयागराज फ्लाइट के शुरू होने को लेकर ट्रैवल एजेंट्स ऑफ़ इंडिया के मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ चैप्टर के अध्यक्ष हेमेंद्र सिंह जादौन का कहना है कि अभी ऑफिशियल जानकारी हमारे पास नहीं आई है। इसलिए यह फ्लाइट शुरू होगी या नहीं या कब से शुरू होगी, इस बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता है। इंदौर से यूपी के लिए सिर्फ एक फ्लाइट ट्रेवल एजेंट्स ने बताया कि अगर कुंभ के पहले अगर यह फ्लाइट शुरू होती है तो इसका फायदा इंदौर से प्रयागराज और साथ ही इंदौर से वाराणसी जाने वाले यात्रियों को भी होगा फिलहाल इंदौर से उत्तर प्रदेश के लिए केवल एक ही फ्लाइट चल रही है, जो इंदौर-लखनऊ रूट पर है। हाल ही में इंदौर-वाराणसी फ्लाइट को बंद कर दिया गया। अगर इंदौर-प्रयागराज फ्लाइट शुरू होती है, तो इससे काफी फायदा होगा। दरअसल, प्रयागराज और काशी की सड़क मार्ग से दूरी महज दो घंटे में तय हो जाती है। ऐसे में वाराणसी जाने वाले लोगों को भी आसानी हो जाएगी। दिसंबर में शुरू हो रही इंदौर से दो नई सीधी फ्लाइट इंदौर एयरपोर्ट से दिसंबर में दो नई सीधी फ्लाइट्स शुरू हो रही हैं। इंडिगो 10 दिसंबर से इंदौर-कोलकाता रूट पर अपनी दूसरी सीधी फ्लाइट शुरू करेगी, जिसकी बुकिंग पहले ही शुरू हो चुकी है। एयर इंडिया एक्सप्रेस भी 15 दिसंबर से इंदौर-कोलकाता रूट पर अपनी पहली नॉन-स्टॉप फ्लाइट शुरू करेगी। इन दोनों फ्लाइट्स के शुरू होने के बाद इंदौर से कोलकाता के लिए कुल तीन फ्लाइट्स उपलब्ध होंगी। इधर, दिल्ली से इंदौर की फ्लाइट कैंसिल इंदौर एयरपोर्ट पर मंगलवार को 3 से ज्यादा फ्लाइट अपने तय समय से देरी से इंदौर पहुंची। इसका कारण उत्तर भारत में मौसम का खराब होना बताया जा रहा है। एयरपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार     बुधवार को बेंगलुरु से आने वाली फ्लाइट IX2511 अपने निर्धारित समय से 1 घंटे 17 मिनट देरी से पहुंची।     दिल्ली से आने वाली फ्लाइट IX2513 दो घंटे लेट थी।     इंडिगो की फ्लाइट 6E902 भी 1 घंटे से अधिक देरी से पहुंची। वहीं एयर इंडिया की दिल्ली से इंदौर आने वाली फ्लाइट AI2913 को एयरलाइंस कंपनी ने ऑपरेशनल कारणों से निरस्त कर दिया, जिससे यात्री काफी परेशान हुए।​​​​​​ इंदौर से जाने वाली फ्लाइट भी देरी से रवाना हुई मंगलवार को इंदौर से रवाना होने वाली फ्लाइट्स भी समय पर उड़ान नहीं भर सकीं।     एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट IX2511 दो घंटे लेट हुई।     एयर इंडिया की AI635 दिल्ली के लिए 1 घंटे देरी से रवाना हुई।     इंडिगो की 6E7726 अहमदाबाद फ्लाइट 1 घंटे लेट रवाना हुई।     बेंगलुरु के लिए IX2513 फ्लाइट 3 घंटे की देरी से चली।     हैदराबाद के लिए इंडिगो की 6E6916 भी 1 घंटे से ज्यादा देरी से रवाना हुई। एयरपोर्ट सूत्रों ने बताया कि अधिकतर फ्लाइट्स में देरी का कारण उत्तर भारत में खराब मौसम था।  

उड्डयन मंत्री नायडू से नई दिल्ली स्थित राजीव गांधी भवन सीएम साय ने की मुलाक़ात

नई दिल्ली छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज नई दिल्ली स्थित राजीव गांधी भवन में केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू से मुलाक़ात की। बैठक में राज्य की हवाई कनेक्टिविटी को मजबूत करने और क्षेत्रीय हवाई अड्डों के विकास को लेकर चर्चा की गयी। इस दौरान मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत एवं नई दिल्ली में पदस्थ छत्तीसगढ़ की इन्वेस्टमेंट कमिश्नर ऋतु सेन भी साथ थीं।

CM यादव और कैबिनेट मंत्री आज भोपाल में देखेंगे ‘द साबरमती रिपोर्ट’

भोपाल आज 20 नवंबर दिन बुधवार है. मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव आज मंत्रियों के साथ फिल्म द साबरमती रिपोर्ट देखेंगे. सीएम ने सभी मंत्रियों को शाम 7 बजे फिल्म देखने के लिए आमंत्रित किया है. साथ ही सीएम गुजरात में एक स्थानीय कार्यक्रम में भी शामिल होंगे. गुजरात में हुए गोधरा कांड पर बेस्ड इस फिल्म में विक्रांत मैसी, राशि खन्ना और रिद्धि डोगरा ने प्रमुख भूमिकाएं निभाई हैं। 15 नवंबर को रिलीज हुई यह फिल्म लगातार चर्चाओं में बनी हुई है। पीएम नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह भी इस फिल्म की तारीफ कर चुके हैं। सीएम डॉ. यादव राजधानी के अशोका लेक व्यू में अपने मंत्रिमंडल के सहयोगियों और विधायकों के साथ बॉलीवुड फिल्म ‘द साबरमती रिपोर्ट’ देखेंगे। शानदार अभिनय के लिए दी बधाई इससे पहले सुबह मुख्यमंत्री यादव ने फिल्म के मुख्य अभिनेता विक्रांत मैसी से वीडियो कॉल के जरिए बात की। उन्होंने मैसी को उनके शानदार अभिनय के लिए बधाई दी। मैसी ने इस दौरान मप्र में फिल्म को टैक्स फ्री किए जाने पर मुख्यमंत्री का आभार माना। सीएम डॉ. यादव इस समय गुजरात प्रवास पर हैं। वे आज अहमदाबाद से भोपाल लौटने के बाद कैबिनेट की बैठक लेंगे। इसके बाद वे शाम सात बजे से ‘द साबरमती रिपोर्ट’ फिल्म देखने जाएंगे।     ‘द साबरमती रिपोर्ट’ फ़िल्म के अभिनेता श्री विक्रांत मैसी जी से वीडियो कॉल के माध्यम से बात कर उनके उत्कृष्ट अभिनय के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।     मध्यप्रदेश में हमने इस फिल्म को टैक्स फ्री भी किया है। आज मैं अपने मंत्रीमंडल के सभी साथियों के साथ यह फ़िल्म देखने जा रहा हूँ।… pic.twitter.com/ZrRgVA6yU7 — Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) November 20, 2024 मप्र आने का निमंत्रण वीडियो कॉल पर संवाद के दौरान सीएम यादव ने विक्रांत मैसी को मप्र आने का न्यौता दिया। सीएम ने कहा कि फिल्मों की शूटिंग को बढ़ावा देने के लिए हम कई तरह की छूट दे रहे हैं। इस पर विक्रांत ने कहा कि मैं एमपी में चार फिल्में कर चुका हूं। एक फिल्म प्रकाश झा की थी, जिसकी शूटिंग के लिए भोपाल भी आया था। पिछले माह सीहोर में शूटिंग के लिए आया था, लेकिन आपसे मुलाकात नहीं कर सका। अगले साल कुछ फिल्मों की शूटिंग के लिए फिर से एमपी आऊंगा। मप्र में टैक्स-फ्री दिखाई जा रही फिल्म यहां पर यह बता दें कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एक दिन पहले ही इस फिल्म को मप्र में टैक्स-फ्री करने की घोषणा की थी। सीएम ने कहा था कि हम इस फिल्म को टैक्स-फ्री कर रहे हैं, ताकि अधिक से अधिक लोग फिल्म देख सकें। अतीत के काल में ऐसा काला अध्याय है, जो इस फिल्म के माध्यम से दिखाया गया है। दूध का दूध और पानी का पानी इस पिक्चर को देखने में समझ में आता है। राजनीति अपनी जगह है, लेकिन वोटों की राजनीति के लिए इतना गंदा खेल खेलना खराब बात थी।  

छत्तीसगढ़ राज्य में मत्स्य पालन के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर एक बार फिर से गौरवपूर्ण उपलब्धि हासिल की

रायपुर छत्तीसगढ़ राज्य में मत्स्य पालन के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर एक बार फिर से गौरवपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले को मत्स्य पालन के क्षेत्र में देश में बेस्ट इनलैंड डिस्ट्रिक्ट अवार्ड के लिए चुना गया है। कांकेर जिले को यह राष्ट्रीय अवार्ड 21 नवंबर विश्व मात्स्यिकीय दिवस के अवसर पर मिलेगा। केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन, डेयरी एवं पंचायतीराज मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह नई दिल्ली के चाणक्यपुरी स्थित सुषमा स्वराज भवन में आयोजित कार्यक्रम यह सम्मान प्रदान करेंगे। कार्यक्रम में केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन, डेयरी एवं पंचायतीराज राज्य मंत्री प्रोफेसर एस.पी. सिंह बघेल एवं जॉर्ज कुरियन भी उपस्थित होंगे। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कांकेर को देश का बेस्ट इनलैंड डिस्ट्रिक्ट अवार्ड के लिए चयन होने पर प्रसन्नता जताई है। उन्होंने इस गौरवपूर्ण उपलब्धि के लिए कांकेर सहित राज्य के सभी मत्स्य कृषकों एवं मछलीपालन विभाग के अधिकारियों को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री ने कहा है कि छत्तीसगढ़ लैंड लॉक प्रदेश होने के बावजूद भी मत्स्य पालन के क्षेत्र में देश में अग्रणी स्थान पर है। मछली बीज उत्पादन में छत्तीसगढ़ देश में छठवें स्थान पर हैं। यह उपलब्धि हमारे राज्य के मत्स्य कृषकों की मेहनत का परिणाम है। छत्तीसगढ़ मछली बीज उत्पादन के मामले में न सिर्फ पूरी तरह से आत्मनिर्भर है, बल्कि पड़ोसी राज्यों को भी मछली बीज निर्यात कर रहा है। गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में कुल 1,29,039 जल स्त्रोत उपलब्ध है, जिसका जल क्षेत्र 2.032 लाख हेक्टेयर है, जिनमें 96 प्रतिशत में किसी न किसी रूप में मत्स्य पालन हो रहा है। 3571 कि.मी का नदीय जलक्षेत्र भी उपलब्ध है। सघन मत्स्य पालन हेतु अतिरिक्त जलक्षेत्र निर्मित किया जा रहा है. अब तक कुल 6783 हेक्टर जलक्षेत्र निर्मित हो चुका है। एक समय था जब छत्तीसगढ़ मत्स्य बीज के लिए पश्चिम बंगाल राज्य पर निर्भर था। कुल 82 नवीन हैचरी निर्मित कर 115 हैचरियों के माध्यम से 546 करोड़ मत्स्य बीज का प्रति वर्ष उत्पादन होने से राज्य न सिर्फ आत्मनिर्भर हुआ अपितु अन्य राज्यों को भी मत्स्य बीज निर्यात कर रहा है। छत्तीसगढ़ में वर्तमान में प्रति वर्ष 7.30 लाख टन मत्स्य उत्पादन हो रहा है। राज्य अन्तर्देशीय मत्स्य उत्पादन में देश में 8 वें स्थान पर है। राज्य में अतिरिक्त मत्स्य उत्पादन हेतु जलाशयों एवं बंद खदानों में अब तक 9551 केज, 415 बायोफ्लॉक, 06 आर.ए.एस. एवं 253 बॉयोफलॉक पॉण्ड स्थापित किए गए हैं। रायपुर, दुर्ग बिलासपुर एवं जांजगीर में थोक मत्स्य बाजार की स्थापना की गई। प्रदेश के मत्स्य पालकों का एन.एफ.डी.पी. योजना अंतर्गत पंजीयन किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ राज्य के मत्स्य पालकों को किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से बैंक से ऋण की सुविधा प्रदान की जा रही है। पात्रतानुसार मत्स्य कृषकों को एक प्रतिशत से लेकर तीन प्रतिशत ब्याज पर अल्प अवधि ऋण भी दिया जा रहा है।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा- एक बार फिर से शुरू होगी कैलाश मोनसरोवर यात्रा, भारत से मिलेगी सीधी उड़ान

नई दिल्ली भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा पर सामान्य स्थिति की बहाली के बाद दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानें और अगले वर्ष से कैलाश मानसरोवर यात्रा शुरू करने पर सैद्धांतिक सहमति बनी है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) के राजनीतिक ब्यूरो के सदस्य तथा विदेश मंत्री वांग यी के बीच G20 शिखर सम्मेलन के मौके पर ब्राजील के रियो डि जनेरियो शहर में मुलाकात के दौरान दोनों देशों के बीच संबंध सामान्य बनाने के लिए विभिन्न मुद्दों पर सार्थक चर्चा हुई। विदेश मंत्रालय के अनुसार,‘‘दोनों मंत्रियों ने माना कि हमारे सीमावर्ती क्षेत्रों में सैनिकों की वापसी ने शांति और स्थिरता बनाए रखने में योगदान दिया है। चर्चा भारत-चीन संबंधों में अगले कदमों पर केंद्रित रही। इस बात पर सहमति हुई कि विशेष प्रतिनिधियों और विदेश सचिव-उप मंत्री तंत्र की एक बैठक जल्द ही होगी।” दोनों पक्षों के बीच जिन कदमों को उठाने के बारे में चर्चा हुई उनमें कैलाश मानसरोवर यात्रा तीर्थयात्रा को फिर से शुरू करना, सीमा पार नदियों पर डेटा साझा करना, भारत और चीन के बीच सीधी उड़ानें और मीडिया आदान-प्रदान शामिल थे। विदेश मंत्रालय के अनुसार,‘‘वैश्विक स्थिति और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर, विदेश मंत्री ने कहा कि भारत और चीन के बीच मतभेद और समानताएं दोनों हैं। हमने ब्रिक्स और एससीओ ढांचे में रचनात्मक रूप से काम किया है। G20 में भी हमारा सहयोग स्पष्ट रहा है।” विदेश मंत्री ने कहा,‘‘हम बहुध्रुवीय एशिया सहित बहुध्रुवीय दुनिया के लिए द्दढ़ता से प्रतिबद्ध हैं। जहां तक?? भारत का सवाल है, इसकी विदेश नीति सैद्धांतिक और सुसंगत रही है, जो स्वतंत्र विचार और कारर्वाई से चिह्नित है। हम प्रभुत्व स्थापित करने के एकतरफा द्दष्टिकोण के खिलाफ हैं। भारत अपने रिश्तों को दूसरे देशों के चश्मे से नहीं देखता।” चीन के विदेश मंत्री ने डॉ. जयशंकर से सहमति व्यक्त की कि भारत-चीन संबंधों का विश्व राजनीति में विशेष महत्व है। उन्होंने कहा,‘‘हमारे नेता आगे बढ़ने के रास्ते पर कज़ान में सहमत हुए थे। दोनों मंत्रियों ने महसूस किया कि यह जरूरी है कि ध्यान संबंधों को स्थिर करने, मतभेदों को प्रबंधित करने और अगला कदम उठाने पर होना चाहिए।”

मुख्यमंत्री यादव 24 से 30 नवंबर तक यूके और जर्मनी प्रवास पर रहेंगे

भोपाल मध्य प्रदेश में निवेश के साथ रोजगार के अवसर बढ़ाने के राज्य सरकार के प्रयास जारी हैं। पहले राज्य में रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव और फिर देश के अन्य हिस्सों में निवेशकों से संवाद के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव यूके व जर्मनी की यात्रा करने वाले हैं। इस दौरान वह निवेशकों से संवाद करेंगे और प्रदेश में निवेश के लिए आमंत्रित भी करेंगे। ज्ञात हो कि अगले साल फरवरी में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट होने वाली है। इसकी तैयारियां जोरों पर हैं। इसी क्रम में मुख्यमंत्री यादव 24 से 30 नवंबर तक यूके और जर्मनी प्रवास पर रहेंगे। इस छह दिवसीय विदेश यात्रा में यूके के लंदन, बर्मिंघम तथा जर्मनी के म्यूनिख और स्टटगार्ट का दौरा करेंगे। मुख्यमंत्री यादव 24 नवम्बर को भोपाल से मुम्बई होते हुए लंदन के लिये प्रस्थान करेंगे। 25 नवम्बर को वेस्टमिंस्टर स्थित ब्रिटिश संसद का दौरा करेंगे। किंग्स क्रॉस और पुनर्विकास स्थलों दौरा करेंगे। लंदन में “फ्रेंड्स ऑफ मध्यप्रदेश’’ प्रवासी भारतीयों द्वारा आयोजित रात्रि-भोज कार्यक्रम में शामिल होंगे। इसमे 400 से अधिक प्रवासी भारतीय सम्मिलित होंगे। मुख्यमंत्री मोहन यादव 26 नवम्बर को ब्रेकफास्ट पर उद्योगपतियों एवं भारत के उच्चायुक्त श्री विक्रम के दोरईस्वामी से संवाद करेंगे। इन्वेस्टमेंट अपॉर्चुनिटीज इन मध्यप्रदेश, इंटरैक्टिव सेशन में लगभग 120 प्रतिभागियों से चर्चा करेंगे। राउण्ड टेबल मीटिंग में इलेक्ट्रिक व्हीकल एवं ऑटो, एजुकेशन, रिन्यूएबल एनर्जी और फूड प्रोसेसिंग सेक्टर्स में निवेश पर चर्चा करेंगे। 27 नवंबर को वारविक यूनिवर्सिटी का भ्रमण करेंगे और वारविक मैन्युफैक्चरिंग ग्रुप के डीन, फैकल्टी मेंबर्स और शोधार्थियों से संवाद करेंगे। सीएम यादव तीन दिवसीय यूके के दौरे के बाद 28 और 29 नवंबर को जर्मनी प्रवास पर रहेंगे। 28 नवंबर को बवेरिया राज्य सरकार के नेताओं और म्यूनिख में कौंसुल जनरल ऑफ इंडिया से चर्चा करेंगे। एसएफसी एनर्जी का भ्रमण करेंगे। बेयरलोचर ग्रुप द्वारा आयोजित लंच में शामिल होने के साथ इन्वेस्टमेंट अपॉर्चुनिटीज इन मध्यप्रदेश, इंटरैक्टिव सेशन में शामिल होंगे। ‘फ्रेंड्स ऑफ एमपी‘ के प्रतिनिधियों के साथ बैठक करेंगे, जिसमे लगभग 100 प्रतिनिधि शामिल होंगे। इस प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री स्टटगार्ट स्थित एलएएपीपी ग्रुप की फैक्ट्री का दौरा करेंगे और अधिकारियों से निवेश संबंधी चर्चा करेंगे। स्टटगार्ट के स्टेट म्यूजियम ऑफ नेचुरल हिस्ट्री का भ्रमण भी करेंगे। राज्य में निवेशकों को लुभाने के लिए उज्जैन, जबलपुर, ग्वालियर, सागर और रीवा में आयोजित रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव के साथ मुंबई, बेंगलुरु, कोयंबटूर और कोलकाता में चार रोड-शो हो चुके हैं। अब सीएम मोहन यादव का विदेश प्रवास है।  

MP वालों के लिए वाराणसी-अयोध्या तीर्थ दर्शन का मौका, आवेदन की तिथि आगे बढ़ी

भोपाल मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना (Mukhyamantri Teerth Darshan Yojana) का लाभ पाने के लिए अब 22 नवंबर तक आवेदन कर सकते हैं। प्रदेश के वरिष्ठ नागरिकों को राज्य के बाहर निर्धारित तीर्थस्थल की निःशुल्क यात्रा कराई जाती है। मुख्यमंत्री तीर्थ-दर्शन योजना के तहत जिले वरिष्ठ नागरिकों को 13 नवंबर को रामेश्वर धार्मिक स्थल की यात्रा निर्धारित की गई हैं। 13 नवंबर को भोपाल से रामेश्वरम के लिए रवाना होने वाली ट्रेन में भोपाल के 300 यात्री, सीहोर से 200 और नर्मदापुरम से 279 तीर्थ यात्री रवाना होंगे, यह ट्रेन 18 नवम्बर को वापस लौटेगी। इसके अलावा नवंबर और दिसंबर में एक के बाद एक कई तीर्थ दर्शन ट्रेनें हैं जो अलग-अलग जिलों से चलेंगी। इसमें हजारों यात्रियों को फ्री में यात्रा का मौका मिलेगा। आवेदन करने की अंतिम तिथि 19 नवम्बर निर्धारित की गई थी अपर कलेक्टर शैलेन्द्र सिंह ने बताया कि वाराणसी (काशी) एवं अयोध्या की तीर्थ यात्रा के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि 19 नवम्बर निर्धारित की गई थी। परिवार की वार्षिक आय 1 लाख 80 हजार रुपये से कम हो जो वरिष्‍ठजन 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के हैं और परिवार की वार्षिक आय 1 लाख 80 हजार रुपये से कम है, उन्‍हें योजना का लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के महत्वपूर्ण दिशा निर्देश     आवेदक को आवेदन पत्र को हिंदी में ही भरा जाना है।     आवेदन में एक रंगीन पासपोर्ट साइज फोटो लगानी है।     आपात स्थिति के लिए मोबाइल नंबर अंकित करना होगा।     आवेदन करते समय निवास का पता देना अनिवार्य है।     यात्रा के दौरान वरिष्‍ठजन को अच्छा आचरण रखना होगा। यात्रा का सारा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी इस योजना के तहत 60 वर्ष से अधिक आयु के सदस्यों को अयोध्या, वाराणसी और अन्य पवित्र स्थानों की तीर्थयात्रा के लिए ले जाया जाएगा। उनकी यात्रा का सारा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी। तीर्थ दर्शन के तहत यात्रा व डयूटी है …     मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन के तहत यात्रा 29 नवम्बर 2024 को प्रारंभ होगी।     इच्छुक वरिष्ठ नागरिकों से शहरी आवेदन नगरीय निकायों में जमा होंगे     ग्रामीण क्षेत्रों के आवेदन जनपद पंचायत कार्यालय में लिए जा सकेंगे। मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन के लिए लगाई गई डयूटी मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन के लिए नगर पालिका परिषद मैहर के बालेन्द्र पाण्डेय, जनपद पंचायत के रामलाल रावत, नगर परिषद अमरपाटन के रामबाबू चौरसिया, जनपद पंचायत के मथुरा पटेल, नगर परिषद रामनगर के रामचन्द्र जायसवाल एवं जनपद पंचायत रामनगर के दिलीप सोनी की डयूटी लगाई गई है। योजना की मुख्य विशेषताएं : सरकार द्वारा पूर्ण वित्त पोषित यात्रा का अवसर जिसमें सभी आवश्यक खर्चे शामिल हैं। पात्रता: मध्य प्रदेश के 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के नागरिक इस योजना के लिए आवेदन कर सकते हैं। यात्रा सुविधाएं: सरकार परिवहन, भोजन, आवास और यहां तक कि गाइड सेवाओं जैसी सभी आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था करती है। आवेदन प्रक्रिया: इच्छुक नागरिकों को योजना के लिए औपचारिक आवेदन करना होगा। विस्तृत प्रक्रिया के लिए सरकारी वेबसाइट या नजदीकी कार्यालय से संपर्क करें। लाभ: यह योजना न केवल आध्यात्मिक संतुष्टि प्रदान करती है, बल्कि वरिष्ठ नागरिकों को नए अनुभव और सामाजिक संपर्क का अवसर भी देती है। तीर्थ स्थल का चयन: लाभार्थी देश में उपलब्ध किसी भी एक तीर्थ स्थल की यात्रा कर सकते हैं। सहायक की अनुमति: 65 वर्ष से अधिक आयु के या 65% से ज्यादा विकलांग व्यक्ति अपने साथ एक सहायक ले जा सकते हैं। यात्रा के नियम: यात्रा के दौरान ज्वलनशील पदार्थ, मादक द्रव्य या बहुमूल्य आभूषण ले जाने पर प्रतिबंध है। योजना का संचालन: इस योजना का संचालन धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग द्वारा इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कारपोरेशन के माध्यम से किया जाएगा।

अब रतलाम-चंदेरिया, नागदा-भोपाल सेक्शन में कवच लगने से नीमच, मंदसौर, उज्जैन, भोपाल तक ट्रेनों की स्पीड बढ़ जाएगी

रतलाम  ट्रेनों की स्पीड बढ़ाने के साथ ही सुरक्षा को लेकर रेलवे संसाधन मजबूत कर रहा है। दिल्ली-मुंबई रेल मार्ग के साथ ही रतलाम रेल मंडल में रतलाम से चंदेरिया और नागदा से भोपाल तक का सेक्शन भी कवच युक्त होगा। इसके लिए रेल मंडल से टेंडर जारी हो गए हैं। काम पूरा करने के लिए दो साल की समय सीमा रखी गई है। इससे नीमच, मंदसौर के साथ ही उज्जैन, भोपाल तक ट्रेनों की स्पीड बढ़ाई जा सकेगी। रतलाम-चंदेरिया और नागदा-भोपाल सेक्शन पर कवच संस्करण 4.0 का प्रावधान किया जाएगा। इसमें 120.72 करोड़ रुपये की लागत आएगी। रतलाम रेल मंडल के 427.83 किलोमीटर के पूर्ण ब्लाक सेक्शन में यह प्रणाली लगाई जाएगी। चार दिसंबर तक टेंडर भरे जा सकेंगे। मुंबई-दिल्ली रेल मार्ग के 789 किमी में से 503 में ट्रायल पूरा     इधर मुंबई-दिल्ली रेल मार्ग पर ट्रेनों की स्पीड 160 किमी प्रति घंटा करने के लिए मिशन रफ्तार में ब्रिजों के मरम्मत, ओएचई का रख-रखाव, सिगनलिंग सिस्टम में सुधार, कर्व का री-अलाइनमेंट, एचबीम स्लीपर लगाए गए हैं।     वर्तमान में वडोदरा-अहमदाबाद खंड सहित मुंबई सेंट्रल-नागदा खंड पर 90 लोको के साथ 789 किलोमीटर पर कवच का काम चल रहा है। इसमें से 503 किलोमीटर तक लोको परीक्षण हो चुका है।     90 में से 73 लोकोमोटिव पहले ही कवच प्रणाली से लैस किया जा चुका है। वडोदरा-रतलाम-नागदा सेक्शन के 303 किलोमीटर में 173 पर लोको ट्रायल पूरा हो चुका है। मार्च 2025 तक काम पूरा होने की संभावना है। क्या है कवच स्वचालित ट्रेन सुरक्षा तकनीक ‘कवच’ ट्रेन सुरक्षा और परिचालन दक्षता को बढ़ाती है। इसमें इंजन पर लगे सेंसर, जीपीएस सिस्टम से एक ही ट्रैक पर दो ट्रेनों के आमने-सामने आने पर स्वचालित ब्रेक लग जाते हैं। आरडीएसओ द्वारा विकसित कवच को ट्रेन टकरावों को रोकने, खतरे में सिगनल पासिंग से बचने में लोको पायलटों को सहायता मिलती है। इससे 200 किमी प्रति घंटे तक की गति को समायोजित किया जा सकता है। ट्रेनें तय गति सीमा के भीतर चले और इसकी रियल टाइम निगरानी भी होगी। यह काम भी किए ट्रैक पर पशु आदि न आए, इसके लिए नागदा-गोधरा खंड में लगभग 56 करोड़ की लागत से रेलवे ट्रैक के दोनों ओर कुल 160 किलोमीटर बाउंड्रीवाल का निर्माण होना है। करीब 100 किमी की बाउंड्रीवाल बनाई जा चुकी है।

चीन ने HLACM 4 हजार किलोमीटर तक 6100 km/hr की तेज गति से हमला करने वाली मिसाइल

बीजिंग 17 नवंबर 2024 को सिर्फ भारत ने ही हाइपरसोनिक मिसाइल का परीक्षण नहीं किया. बल्कि चीन ने अपनी सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल DF-100 यानी डॉन्गफेंग-100 का भी रेंज बढ़ा लिया. यह मिसाइल कहने को तो सुपरसोनिक है, लेकिन चीन चाहे तो इसे हाइपरसोनिक लैंड अटैक क्रूज मिसाइल – HLACM बना सकती है. HLACM यानी 4 हजार किलोमीटर तक 6100 km/hr की तेज गति से हमला करने वाली मिसाइल. इसकी सटीकता ही इसे सबसे ज्यादा घातक बनाती है. इसकी एक्यूरेसी 1 मीटर है. यानी टारगेट से सिर्फ एक मीटर ही इधर-उधर होगी. इससे ज्यादा नहीं. इसकी लॉन्चिंग के लिए चीन अपने H-6K बॉम्बर का इस्तेमाल भी करता है. पहले चीन के इस मिसाइल की रेंज 2 से 3 हजार किलोमीटर थी. जिसे अभी चीन ने बढ़ाकर 4 हजार कर दिया है. इसे लॉन्च करने के लिए 10×10 ट्रांसपोर्टर इरेक्टर लॉन्चर का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन बमवर्षक से भी लॉन्च की जा सकती है. अब यह मिसाइल 4700 km/hr की स्पीड से उड़ान भरते हुए 4 हजार किलोमीटर तक जा सकती है. सबसे आधुनिक गाइडेंस सिस्टम से लैस यह मिसाइल लॉन्च होने के बाद 30 किलोमीटर की ऊंचाई तक जाती है, उसके बाद यह टारगेट की तरफ घूम जाती है. इसके उड़ान की ऊंचाई ऐसी रखी गई है ताकि इसे एटमॉस्फियरिक दबाव कम झेलना पड़े. साथ ही राडार की पकड़ में न आए. इसके गाइडेंस सिस्टम में इनर्शियल नेविगेशन है. टरेन मैचिंग, सीन मैचिंग और सैटेलाइट पोजिशनिंग जैसी सुविधा है. यानी दुश्मन टारगेट के बचने का कोई चांस ही नहीं. सटीकता और हथियार ही बनाता है इसे खास 9 मीटर लंबी यह मिसाइल अपने साथ 0.7 से 1 मीटर व्यास और 500 किलोग्राम वजन वाले हथियार को ले जा सकती है. इस मिसाइल में रैमजेट इंजन लगा है, जो इसे 6100 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार देता है. जैसे ही मिसाइल का वेपन ग्लाइड फेज में आता है ये तेज गति में भी दिशा और दशा बदल सकती है. इसकी वजह से इसे एयर डिफेंस सिस्टम इंटरसेप्ट नहीं कर पाते. यह चलते-फिरते टारगेट पर भी हमला कर सकती है. अमेरिका-जापान के सैन्य अड्डे निशाने पर पहले इसकी रेंज सिर्फ ताइवान, दक्षिण कोरिया, जापान, फिलिपींस जैसी जगहों तक ही थी. लेकिन रेंज बढ़ने के बाद अब यह गुआम में मौजूद अमेरिकी सैन्य बेस पर भी हमला कर सकती है. यानी अमेरिका और जापान के दूसरे सैन्य अड्डों को भी इस मिसाइल से खतरा है. यह मिसाइल रुके हुए और चलते हुए किसी भी जहाज पर भी हमला कर सकती है. ऐसे में पश्चिमी प्रशांत महासागर में इस मिसाइल का खतरा बना रहेगा.  

आंध्र प्रदेश में पैदा कर सकेंगे 2 से ज्यादा बच्चे, 30 साल बाद सरकार ने वापस लिया ये आदेश

 हैदराबाद आंध्र प्रदेश सरकार ने बच्चे पैदा करने को लेकर एक बड़ा फैसला किया है. सरकार ने यह नियम खत्म कर दिया है कि दो से ज्यादा बच्चे पैदा करने वाले उम्मीदवार स्थानीय निकाय चुनाव नहीं लड़ सकते हैं. आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने कहा है कि है कि अब ज्यादा बच्चे पैदा करने की जरूरत है. सरकार ने एपी पंचायत राज (संशोधन) विधेयक, 2024 और एपी नगरपालिका कानून (संशोधन) विधेयक, 2024 पारित करते हुए यह फैसला पास किया. 1994 में लागू हुई थी व्यवस्था ख्याल रहे कि तीस साल पहले, मई 1994 में, तत्कालीन आंध्र प्रदेश विधानसभा ने एक संशोधन विधेयक पारित किया था, जिसके तहत ग्राम पंचायतों, मंडल प्रजा परिषदों और जिला परिषदों के चुनाव लड़ने वालों के लिए 2 बच्चों का मानदंड अनिवार्य कर दिया गया था. दो से ज्यादा बच्चों वाले उम्मीदवारों को स्थानीय निकाय चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य या अयोग्य माना जाता था. इसका मकसद जनसंख्या पर नियंत्रण रखना था. चंद्रबाबू का बयान आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू इस बात की वकालत कर रहे हैं कि परिवार नियोजन के पिछले सफल क्रियान्वयन के बाद अब वक्त आ गया है कि महिलाओं और परिवारों को अधिक बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए. नायडू ने तर्क दिया है कि यह एक आर्थिक अनिवार्यता है. विधेयक में क्या है? विधेयकों के अनुसार, “चूंकि प्रजनन दर में गिरावट, जनसंख्या स्थिरीकरण और बदलती सामाजिक-आर्थिक स्थितियां पुरानी और प्रतिकूल साबित हुईं, इसलिए सरकार ने महसूस किया कि जनसंख्या को नियंत्रित करने के उद्देश्य से बनाए गए प्रावधानों को निरस्त करने से समावेशी शासन को बढ़ावा मिलेगा.”

वर्षवार भर्ती कैलेंडर जारी, युवाओं को मिलेंगे शासकीय सेवा में नौकरियों के अवसर

भोपाल राज्य शासन अगले 5 वर्षों में 2 लाख 50 हजार सरकारी नौकरियां उपलब्ध कराने प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय श्रेणी के सीधी भर्ती के रिक्त पदों की पूर्ति करने के आदेश जारी कर दिए हैं। रिक्त पदों पर भर्ती के लिए हर साल सरकारी परीक्षा कैलेंडर जारी किया जायेगा। पदों की गणना करने के दिशा-निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार ने संकल्प पत्र 2024 के बिन्दु “रोजगार के अवसर” में युवाओं को सरकारी नौकरियों में सेवा का अवसर देने संकल्प दोहराया है। इस संकल्प को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ते हुए सरकारी नौकरियों में भर्ती की सभी औपरिकताएं पूरी की जा रही हैं और जल्दी ही भर्ती की प्रक्रिया भी शुरू की जायेगी। उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने सभी विभागों को भर्ती की प्रक्रिया संबंधी औपचाकिताएं पूरी करने के निर्देश दिये हैं, जिससे वर्षवार भर्ती की प्रक्रिया बिना रूकावट पूरी की जा सके। राज्य शासन के इस निर्णय से सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा पहले जारी निर्देश एवं आदेश निष्प्रभावी होंगे। लेकिन पहले जारी आदेशों, परिपत्रों के आधार पर ऐसे रिक्त पदों पर, जिन पर विभागों द्वारा दिनांक 30 अक्टूबर, 2024 तक भर्ती की कार्यवाही कर दी गई है, वह निरस्त नहीं मानी जायेगी। इनमें सीधी भर्ती के रिक्त पदों पर भर्ती के लिए कार्यवाही कर्मचारी चयन मण्डल, म.प्र. लोक सेवा आयोग/ अन्य संस्था को प्रेषित किये गये हैं। इसके अलावा नियुक्ति की जा चुकी है परंतु कार्यभार ग्रहण किया जाना शेष है या परीक्षा परिणाम के आधार पर नियुक्ति पत्र जारी किया जाना शेष है। मुख्य रूप से संवर्ग में स्वीकृत पदों के आधार पर 5% पदों की ही सीधी भर्ती से पदपूर्ति करने के लिए प्रशासकीय विभाग को अधिकृत किया गया है। यह परिपत्र वर्ष 2028-29 तक के लिये स्थगित किया जाता है। राज्य शासन द्वारा प्रथम श्रेणी, द्वितीय श्रेणी एवं तृतीय श्रेणी के सीधी भर्ती के रिक्त पदों की पूर्ति गणना के संबंध में मार्गदर्शन दिया गया है। इसके अनुसार सर्वप्रथम प्रत्येक संवर्ग में 1 अप्रैल 2024 की स्थिति में सीधी भर्ती के रिक्त पदों की गणना की जायेगी। इनमें ऐसे पद जिनके संबंध में कार्यवाही कर्मचारी चयन मंडल/ एमपीपीएससी या अन्य संस्थाओं में प्रचलन में है, रिक्त पदों की गणना में शामिल नहीं किए जायेंगे। ऐसे 13% पद जो पिछड़ा वर्ग के लिए अंतिम परीक्षा परिणाम के बाद रोके गए हैं, इनको भी रिक्त पदों की गणना में नहीं लिया जायेगा। ऐसे संवर्ग जिनमें रिक्त पदों की संख्या 1 से 50 तक है, की पद पूर्ति दो चरणों में की जायेगी (अर्थात 50% पद वित्तीय वर्ष 2024-25 में एवं शेष 50% पद वित्तीय वर्ष 2025-26 में भरे जायेंगे)। ऐसे संवर्ग जिनमें रिक्त पदों की संख्या 51 से 200 तक है, उनमें पद पूर्ति तीन चरणो में आधार पर की जायेगी। यदि 33% से कम है, तो एक बार में रिक्त पदों की पूर्ति, यदि 33% अथवा अधिक है पर 66% से कम है तो वर्षवार पदपूर्ति होगी। प्रथम वर्ष 2024-25 में 8% द्वितीय वर्ष 2025-26 में 46% और तृतीय वर्ष 2026-27 में 46% की पदपूर्ति होगी। यदि रिक्त पदों की संख्या यदि 66% अथवा अधिक है तो वर्षवार पदपूर्ति में, प्रथम वर्ष 2024-25 में 8%, द्वितीय वर्ष 2025-26 में 31%, तृतीय वर्ष 2026-27 में 31%, चतुर्थ वर्ष 2027-28 में 30% भर्ती होगी। ऐसे संवर्ग जिनमें रिक्त पदों की संख्या 200 से अधिक है वहां पदपूर्ति के संबंध में निम्न सिद्धांत अपनाए जायेंगे। सीधी भर्ती के रिक्त पदों की संख्या यदि 25% से कम है, तो एक बार में रिक्त पदों की पूर्ति होगी। यदि 25% अथवा अधिक है, पर 50% से सीधी भर्ती के रिक्त पद कम है तो वर्षवार पदपूर्ति होगी। इसमें प्रथम वर्ष 2024-25 में 8%, दूसरे साल 2025-26 में 46% और तीसरे साल 2026-27 में 46% पदों की पूर्ति होगी। रिक्त पद यदि 50% या उससे अधिक या 75% से कम है, तो प्रथम वर्ष 2024-25 में 8%, दूसरे साल 2025-26 में 31%, तीसरे साल 2026-27 में 31% और चौथे साल 2027-28 में 30% पदों की पूर्ति होगी। इसी प्रकार यदि रिक्त पर 75% या उससे ज्यादा है, तो प्रथम वर्ष 2024-25 में 8%, सीधी भर्ती के कुल पद द्वितीय वर्ष 2025-26 में 23% तृतीय वर्ष 2026-27 में 23%, चतुर्थ वर्ष 2027-28 में 23%, और वर्ष 2028-29 में 23% पदों पर भर्ती होगी। डाईंग संवर्गों में भर्ती नहीं राज्य शासन द्वारा डाईंग संवर्ग घोषित किये जा चुके संवर्गों में किसी भी प्रकार से कोई भर्ती नहीं की जायेगी। अनुबंधित वाहन के लिए वाहन चालको के पद पर सीधी भर्ती आवश्यक नहीं है। जिन विभागों के पास स्वयं के वाहन है, वे भी वाहन चालक के कार्य हेतु सेवायें आउटसोर्स के माध्यम से प्राप्त करने पर विचार करें। विशिष्ट विभाग जहाँ वाहन चालकों के रिक्त पदों पर सीधी भर्ती अतिआवश्यक है, वे वित्त विभाग को तथ्यों सहित प्रस्ताव प्रस्तुत करते हुये स्वीकृति प्राप्त करें। राज्य शासन के विभिन्न कार्यालयों में चतुर्थ श्रेणी के पदों के विरूद्ध कार्य करने के लिये व्यक्तियों की पूर्ति आउटसोर्स पर करने के लिए चतुर्थ श्रेणी के कार्मिकों की सेवायें प्राप्त करने संबंधी नीति-निर्देश के अनुसार कार्यवाही की जायेगी। विशिष्ट विभाग जहाँ चतुर्थ श्रेणी के रिक्त पदों पर सीधी भर्ती अतिआवश्यक है, वे वित्त विभाग को तथ्यों सहित प्रस्ताव प्रेषित करते हुये स्वीकृति प्राप्त करेंगे। इस बात का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिये गये हैं कि रिक्त पदों की पूर्ति के समय कैडर मेनेजमेंट प्रभावित न हो।  

महाराष्ट्र और झारखंड में अगली सरकार किसकी बनेगी, आज जनता कर रही मताधिकार का इस्तेमाल

नई दिल्ली  महाराष्ट्र और झारखंड में चुनाव प्रचार का शोर थम चुका है।आज  20 नवंबर यानी बुधवार को हो रही वोटिंग । इसी के साथ लोगों को चुनाव नतीजों का इंतजार रहेगा। हर कोई ये जानना चाहता है कि आखिर महाराष्ट्र और झारखंड में अगली सरकार किसकी बनेगी। आखिर दोनों ही राज्यों की जनता के मन में क्या है? क्या दोनों राज्यों में मौजूदा सरकार की वापसी होगी या फिर आवाम बदलाव को लेकर वोट करेगी? इन सभी सवालों के जवाब 23 नवंबर को मिल जाएंगे। जी हां… 23 नवंबर, यही वो दिन है जब दोनों राज्यों की जनता का फैसला सबके सामने आएगा। आज 20 को वोटिंग, 23 नवंबर को नतीजे 288 विधानसभा सीटों वाले महाराष्ट्र और 81 सीटों वाले झारखंड राज्य में बाकी बची 38 विधानसभा सीटों के लिए बुधवार को मतदान है। सोमवार को दोनों राज्यों के साथ ही उपचुनाव के लिए भी चुनाव प्रचार थम गया। अब कोई भी उम्मीदवार, पार्टी या नेता कोई चुनावी रैली या किसी भी तरह से प्रचार नहीं कर सकता। दोनों राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव और 15 राज्यों की 48 विधानसभा और दो लोकसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव के लिए भी वोटों की गिनती 23 नवंबर को की जाएगी। महाराष्ट्र-झारखंड में कौन बनाएगा सरकार? महाराष्ट्र और झारखंड में नई सरकार किसकी बनेगी ये 23 नवंबर यानी शनिवार को फाइनल हो जाएगा। इसी के साथ करीब महीनेभर से ज्यादा समय से जारी चुनावी घमासान थम जाएगा। जनता का फैसला इस बार किसके हक में जाएगा, चुनाव परिणाम में कौन बाजी मारेगा ये सब कुछ 23 नवंबर को सुबह 8 बजे वोटों की गिनती शुरू होने के साथ ही साफ हो जाएगा। दोपहर तक कौन नई सरकार बनाएगा ये भी स्पष्ट हो जाएगा। क्या है जनता का मूड, 23 नवंबर को हो जाएगा साफ महाराष्ट्र की बात करें तो यहां बीजेपी के नेतृत्व वाली महायुति गठबंधन की सरकार है। इसमें भारतीय जनता पार्टी, शिवसेना (शिंदे गुट) और एनसीपी (पवार गुट) शामिल हैं। इस चुनाव में भी महायुति गठबंधन एक साथ चुनावी रण में उतरी है। उनका सीधा मुकाबला कांग्रेस, शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट), एनसीपी (शरद पवार गुट) के महा विकास अघाड़ी गठबंधन से हैं। वहीं झारखंड में हेमंत सोरेन के नेतृत्व में जेएमएम, कांग्रेस, आरजेडी गठबंधन की सरकार चल रही। इस चुनाव में प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टी बीजेपी का सीधा मुकाबला इंडिया गठबंधन यानी कांग्रेस-जेएमएम-आरजेडी गठबंधन से है। देखना होगा कि दोनों राज्यों की जनता किसके पक्ष में अपना फैसला सुनाती है। बस करिए 23 नवंबर का इंतजार।

मुख्यमंत्री के समक्ष सरकारी आवास पर उच्चस्तरीय बैठक में नाइट सफारी पार्क एवं जू का प्रस्तुतिकरण किया गया

लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि दिसंबर 2026 में उत्तर प्रदेश देश को पहली नाइट सफारी का उपहार देगा। राजधानी लखनऊ में बनने जा रही यह नाइट सफारी देश और दुनिया के प्रकृति प्रेमियों के लिए एक नया गंतव्य होगा। यह दुनिया की पांचवीं नाइट सफारी होगी। मुख्यमंत्री के समक्ष मंगलवार को उनके सरकारी आवास पर उच्चस्तरीय बैठक में प्रस्तावित कुकरैल नाइट सफारी पार्क एवं जू का प्रस्तुतिकरण किया गया। सीएम योगी ने कहा कि निर्माण कार्य हर हाल में जून 2026 तक पूरा कर लिया जाए। नाइट सफारी और जू के लिए वन्य जीवों के लाने की समुचित व्यवस्था प्रारंभ कर दी जाए। नाइट सफारी और जू की इकोनॉमी के लिए सस्टेनेबल मॉडल विकसित किया जाए। 72 फीसदी एरिया में ग्रीनरी विकसित की जाए और यहां सौर ऊर्जा प्रकल्पों को भी स्थान दिया जाए। सीएम योगी ने कहा कि नाइट सफारी प्रोजेक्ट राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना है, इसके निर्माण के लिए केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण, नई दिल्ली से अनुमति प्राप्त हो गई है। देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में दिसंबर 2026 में देश को पहली नाइट सफारी का उपहार मिल जाएगा। नाइट और डे सफारी का निर्माण चरणबद्ध रूप से होगा। लखनऊ में यह लगभग 900 एकड़ से अधिक में फैली होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि कुकरैल नाइट सफारी का निर्माण हो जाने के पश्चात यह परियोजना अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर आ जाने के फलस्वरूप विदेशी पर्यटकों को भी आकर्षित करेगी। कुकरैल नाइट सफारी परियोजना को लखनऊ स्थित अन्य पर्यटन स्थलों से भी जोड़ा जाएगा। नाइट सफारी के 72 फीसदी एरिया को ग्रीनरी में विकसित किया जाए। सीएम योगी ने कहा कि जानवरों को चिह्नित करने, यहां लाने व क्वारंटीन की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी जाए। कुकरैल नाइट सफारी परियोजना के अंतर्गत ईको टूरिज्म जोन भी विकसित किया जाएगा। सौर ऊर्जा के प्रकल्पों को स्थान दिया जाए। उन्होंने निर्देश दिया कि यहां क्वारंटीन सेंटर, वेटनरी हॉस्पिटल, पोस्ट ऑपरेशन व ऑपरेशन थियेटर की भी समुचित व्यवस्था हो। यहां कैफेटेरिया, 7 डी थियेटर, ऑडिटोरियम, पार्किंग आदि की भी सुविधा हो। एडवेंचर जोन के तहत सुपरमैन जिपलाइन, आर्चरी, जिप लाइन, बुरमा ब्रिज, पैडल बोट, स्काई रोलर, फाउंटेन, किड्स एक्टिविटी के लिए जंगल एनिमल थीम, स्काई साइकिल आदि विकसित किया जाए। डे सफारी का विस्तार दूसरे चरण में होगा। बैठक में प्रदेश सरकार के वन मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. अरुण कुमार सक्सेना, शासन व वन विभाग के अधिकारी मौजूद रहे। नाइट-डे सफारी की विशेषता :- नाइट सफारी क्षेत्र में इंडियन वॉकिंग ट्रे, इंडियन फुटहिल, इंडियन वेटलैंड, एरिड इंडिया व अफ्रीकन वेटलैंट की थीम पर विकसित किए जाने वाले क्षेत्र मुख्य आकर्षण होंगे। पर्यटकों द्वारा नाइट सफारी पार्क के अवलोकन हेतु 5.5 किमी. ट्रामवे तथा 1.92 किमी. का पाथवे माध्यम से किया जाएगा। नाइट सफारी में मुख्यत: एशियाटिक लॉयन, घड़ियाल, बंगाल टाइगर, उड़न गिलहरी, तेंदुआ, हॉयना आदि मुख्य आकर्षण होंगे। कुकरैल नााइट सफारी परियोजना के अंतर्गत विश्व स्तरीय वन्य जीव चिकित्सालय व रेस्क्यू सेंटर का निर्माण भी प्रस्तावित है। कुकरैल वन क्षेत्र में स्थापित होने वाले जू में कुल 63 इनक्लोजर बनाए जाएंगे। जू में सारस क्रेन, स्वांप डियर, हिमालयन भालू, साउथ अफ्रीकन जिराफ, अफ्रीकन लॉयन व चिंपाजी मुख्य आकर्षण होंगे। जू को अफ्रीकन सवाना, इनक्रेडिबल इंडिया, इंजीनियर्ड वेटलैंड नामक थीम क्षेत्रों पर विकसित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश प्राकृतिक संसाधनों और संपदा से संपन्न राज्य है

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश प्राकृतिक संसाधनों और संपदा से संपन्न राज्य है। प्रदेश की हर काल और युग में विशेष सांस्कृतिक पहचान रही है। आधुनिक काल में औद्योगिक समृद्धि के आधार पर देश का नंबर वन राज्य बनाने के संकल्प के साथ प्रदेश में रोजगारपरक उद्योगों को बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रदेश की समृद्ध प्राचीन संस्कृति और कलात्मक धरोहर को संजोए रखते हुए जन-कल्याणकारी नीतियों के माध्यम से उद्योग अनुकूल वातावरण तैयार कर प्रदेश में व्यापार, उद्योग और सेवा क्षेत्रों का वृहद विकास हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को दिल्ली स्थित भारत मंडपम में चल रहे 43वें भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले में मध्यप्रदेश दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में दो ज्योतिर्लिंग स्थित है। यह नदियों का मायका है, जहां पावन नर्मदा और शिप्रा नदियां बहती हैं। प्रदेश वन्य-जीव से संपन्न एकमात्र टाइगर स्टेट, तेंदुआ स्टेट और चीता स्टेट राज्य है। प्रदेश में खनिज संपदा भी प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है और यह एकमात्र हीरा उत्पादक राज्य है। इसके अलावा प्रदेश की सदियों से कला, संस्कृति और सभ्यता की विशेष पहचान रही है। इसका 5 हजार साल पुराना समृद्ध इतिहास रहा है और यह भगवान श्रीकृष्ण और भगवान श्रीराम की कर्मभूमि और तपोभूमि रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ऐतिहासिक काल से ही प्रदेश की व्यापार और व्यावसायिक समृद्धि की भी विशेष पहचान रही है। इसी क्रम में वर्तमान में मध्यप्रदेश सरकार संभागीय स्तर पर रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव और औद्योगिक केंद्रों में रोड-शो कर प्रदेश में उद्योगपतियों को निवेश के लिए आमंत्रित कर रहा है। प्रदेश में ‘एक जिला-एक उत्पाद’ योजना के अंतर्गत महिला स्व-सहायता समूह को भी प्रोत्साहित किया जा रही है। प्रदेश में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के साथ भारी उद्योगों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रदेश को सबसे तेज गति से बढ़ने वाला राज्य बनाने के उद्देश्य से वर्ष 2025 को उद्योग वर्ष के रूप में मनाया जाएगा। मध्यप्रदेश की सकल घरेलू उत्पाद को अगले 5 साल में दोगुना करने के लिए प्रदेश सरकार संकल्पित है। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री श्री चैतन्य कुमार काश्यप ने कहा कि विकसित भारत की प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की परिकल्पना और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की तत्परता के परिणामस्वरुप मध्यप्रदेश औद्योगीकीकरण के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू रहा है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री की परिकल्पना से रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव के आयोजन के माध्यम से हर जिले में युवा उद्यमी आगे बढ़ रहे है। प्रमुख उद्योगपतियों को आमंत्रित करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री डॉ. यादव विदेश यात्रा पर भी जाने वाले हैं। विकसित मध्यप्रदेश बनाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री ने वर्ष 2025 को उद्योग वर्ष के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मेले में मध्यप्रदेश मंडप का दीप प्रज्ज्वलित कर उद्घाटन किया। उन्होंने मध्यप्रदेश मंडप में लगे विभिन्न स्टॉल का अवलोकन भी किया और शिल्पकारों का मनोबल बढ़ाया। मंडप को ‘विकसित भारत@2047’ की थीम पर विकसित किया गया है, जिसमें प्रदेश की धरोहर के साथ स्टार्ट-अप्स और उद्यमों का कलात्मक प्रदर्शन किया गया है। मंडप में युवा, गरीब, नारी और किसान कल्याण के मिशन को प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए पुरस्कार भी वितरित किए। मध्यप्रदेश मंडप में बेस्ट स्टॉल डिस्प्ले के लिए पर्यटन विभाग और हस्तकला के लिए मध्यप्रदेश माटीकला बोर्ड को पुरस्कृत किया गया। मंडप में सर्वश्रेष्ठ सजीव कला प्रदर्शन के लिए श्री मोहम्मद यूसुफ खत्री को सम्मानित किया गया। साथ ही मध्यप्रदेश मंडप के अन्य प्रतिभागियों को भी श्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया। मध्यप्रदेश दिवस समारोह में प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक कार्यक्रम की झलक देखने को मिली। डॉ. शिप्रा सुल्लेरे के संगीत निर्देशन और श्री दविंदर सिंह ग्रोवर के संयोजन में जबलपुर के श्री जानकी बैंड की प्रस्तुति दी गई। सुश्री पूजा श्रीवास्तव के निर्देशन में बुंदेलखंड के अखाड़ा लोक नृत्य की भी मनमोहक प्रस्तुति हुई। कार्यक्रम में केंद्रीय महिला बाल विकास राज्यमंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर, प्रदेश की नगरीय विकास एवं आवास राज्यमंत्री श्रीमती प्रतिमा बागरी और मध्यप्रदेश लघु उद्योग निगम के प्रबंध संचालक श्री दिलीप कुमार भी उपस्थित थे।  

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