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साइबर सुरक्षा के लिए मध्यप्रदेश कम्प्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम बनी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मध्यप्रदेश बनेगा आईटी और साइंस का नया हब: मुख्यमंत्री डॉ. यादव देश की टेक्नोलॉजी में मध्यप्रदेश दे रहा है महत्वपूर्ण योगदान : मुख्यमंत्री डॉ. यादव साइबर सुरक्षा के लिए मध्यप्रदेश कम्प्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम बनी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव शासकीय विभागों में हुआ 105 मुख्य सूचना अधिकारियों का पंजीकरण भारत भी अंतरिक्ष विज्ञान क्षेत्र में बन रहा है महाशक्ति मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महाकौशल विज्ञान मेले को किया वर्चुअली संबोधित भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश आने वाले समय में विज्ञान प्रौद्योगिकी, सूचना प्रौद्योगिकी और इन क्षेत्रों से जुड़ी सेवाओं का नया हब बनकर देश में उभरेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में फार्मिंग से लेकर फायनेंस तक, मैन्यूफैक्चरिंग से लेकर मेडिसिन तक, एजुकेशन से लेकर कम्यूनिकेशन तक विज्ञान का उपयोग किया जा रहा है। देश की टेक्नोलॉजी में मध्यप्रदेश महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। सुशासन के माध्यम से जन-कल्याण पर जोर दिया जा रहा है इसके लिए राज्य सरकार के विभागों में डिजिटलाइज्ड प्रणाली संचालित है। अनेक नवाचार भी हुए हैं। मध्यप्रदेश में आईटी और आईटीईएस क्षेत्र में निवेश भी बढ़ रहा है। मध्यप्रदेश विज्ञान परिषद विद्यार्थियों को स्टार्टअप और इनोवेशन के लिए मंच प्रदान कर रही है। सेटैलाइट इमेजरी एवं भौगोलिक सूचना प्रणाली के उपयोग से जन-कल्याण के कई कार्य हो रहे हैं। किसानों के खसरे, नामांकन, बटांकन आदि के कार्य और दस्तावेज पंजीयन साइबर तहसील के माध्यम से हो रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को जबलपुर में चार दिवसीय महाकौशल विज्ञान मेला और आरोग्य एक्सपो-2024 के समापन समारोह को वर्चुअली संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महाराष्ट्र भ्रमण पर रहते हुए जबलपुर के आयोजन के लिए शुभकामनाएँ दीं। डिजीटल नवाचार, सुशासन और जन-कल्याण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में साइबर सुरक्षा को प्रभावी बनाने के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत मध्यप्रदेश कम्प्यूटर एमरजेंसी रिस्पांस टीम(MP-CERT) का गठन किया गया है। सभी शासकीय विभाग मुख्य सूचना सुरक्षा अधिकारी का पंजीकरण करवा चुके हैं। इस तरह के 105 अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में जहां जबलपुर में 17 करोड़ से अधिक लागत से साइंस सेंटर की पहल हुई है वहीं उज्जैन में 230 करोड़ लागत से साइंस सिटी का निर्माण हो रहा है। आईआईटी जैसी संस्थाओं के विशेषज्ञ मार्गदर्शन देंगे। वर्ष 2013 में प्रथम तारामंडल प्रारंभ हुआ था जिसे अपग्रेड किया गया है। अत्याधुनिक थ्रीडी 4K तकनीक से विकसित नई व्यवस्था में इस वर्ष 400 सफल शो किए जा चुके हैं। इसी तरह अत्याधुनिक प्लेटोरियम, स्पेस टेक्नोलॉजी, ड्रोन के उपयोग और नल-जल योजनाओं से लेकर सम्पत्ति की प्रक्रिया में नई प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल हो रहा है। उज्जैन के डोंगला स्थित अंतर्राष्ट्रीय स्तर की वेधशाला के निर्माण से एस्ट्रोनामी के क्षेत्र में मध्यप्रदेश को नई पहचान मिली है। भारत बन रहा महाशक्ति मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत साइकिल और बैलगाड़ी से प्रारंभ हुई अपनी अंतरिक्ष यात्रा को चंद्रमा, मंगल और सूर्य की तरफ बढ़ा चुका है। प्रधानमंत्री मोदी जैसे सक्षम नेता वैज्ञानिकों का हौसला बढ़ाने में साथ हों तो सफलता मिल ही जाती है। प्रधानमंत्री ने अनुसंधान के मार्ग को प्रशस्त किया है। आज इसरो ने भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र की प्रगति से दुनिया को परिचित करवा दिया है। एक महाशक्ति के रूप में भारत अपनी पहचान बना रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री स्व. लाल बहादुर शास्त्री ने जय-जवान- जय किसान का नारा दिया। भारत रत्न स्व. अटल बिहारी वाजपेयी ने जय विज्ञान का नारा दिया। वर्तमान प्रधानमंत्री मोदी जी ने जय अनुसंधान के मूल मंत्र पर जोर दिया है। एक समय था जब अनुसंधान को महत्वपूर्ण नहीं माना जाता था। प्रत्येक अनुसंधान कार्य सफल हो, यह आवश्यक नहीं लेकिन हमारे प्रधानमंत्री मोदी ने वैज्ञानिकों के मनोबल को बढ़ाया है। डोंगला की वेधशाला अब अंतर्राष्ट्रीय मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा वर्तमान में समय की गणना ग्रीनविच से हो रही है। डोंगला स्थित वेधशाला से शुद्ध समय की गणना संभव होगी। उज्जैन में वैदिक घड़ी की स्थापना की गई है। आने वाले समय में इस तरह के कई टास्क मध्यप्रदेश द्वारा लिए जाएंगे। प्रदेश में नव वैज्ञानिकों के सम्मेलन भी किए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जबलपुर की धरती नवाचारों के लिए जानी जाती है। यहाँ वीरांगना दुर्गावती की स्मृतियां भी जुड़ी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जबलपुर में विज्ञान प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में महाकौशल विज्ञान मेले के माध्यम से इस सार्थक आयोजन से जुड़े सभी व्यक्तियों को बधाई दी और उनका अभिवादन किया। समापन समारोह में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, सांसद आशीष दुबे, महापौर जगत बहादुर सिंह, मध्यप्रदेश विज्ञान प्रौद्योगिकी परिषद के अध्यक्ष अनिल कोठारी, महाकौशल विज्ञान परिषद के अध्यक्ष एस.पी. गौतम सहित परिषद के पदाधिकारीगण उपस्थित रहे। एक्सपो स्थल पर विज्ञान एवं नवाचारों संबंधी प्रदर्शनी में विभिन्न स्टाल लगाए गये। अतिथियों द्वारा उन्हें पुरस्कृत किया गया।  

15 हजार करोड़ में बनेगा मध्य प्रदेश -छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस-वे, 300 KM लंबा हाईवे रायपुर से बालाघाट, लखनादौन तक आएगा.

बालाघाट/रायपुर मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के लोगों के लिए एक और खुशखबरी है. क्योंकि रायपुर से लखनादौन के बीच 6 लेन ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे ग्रीन सिग्नल मिल गया है. बताया जा रहा है कि इस नए एक्सप्रेस-वे के निर्माण के लिए 15 हजार करोड़ रुपए की लागत लगेगी. इसका सर्वे भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की तरफ से पूरा हो चुका है. करीब 300 किलोमीटर लंबा यह हाईवे रायपुर से बालाघाट होते हुए सिवनी जिले के लखनादौन तक आएगा. इस हाईवे के निर्माण से दोनों राज्यों के बीच आने जाने में और फायदा होगा. मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ में बढ़ेगी कनेक्टिविटी नए हाईवे के निर्माण से मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के बीच कनेक्टिविटी बढ़ेगी. 300 किलोमीटर लंबा बनने वाला यह एक्सप्रेस-वे लखनादौन, छबारा, सिवनी, बालाघाट होते हुए रजेगांव तक निकला जाएगा. नव निर्माण योजना की रिपोर्ट दिल्ली भेजी जाएगी. इसमें छोटे से छोटे रूट को प्राथमिकता मिलेगी. इसे बनाने में लगभग पांच साल का वक्त लग सकता हैं. दिल्ली से लखनादौन और रायपुर तक बनने वाला एक्सप्रेस-वे विशाखापट्टनम एक्सप्रेस-वे से भी जुड़ेंगे. इसके अलावा भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHI) ऐसा मार्ग चुनते हैं, जहां जंगल कम होते है और जहां पर सरकारी जमीन ज्यादा हो, निजी घर आदि ज्यादा न तोड़ने पड़ें. किसी की निजी जमीन का ज्यादा अधिग्रहण नहीं करना पड़े. ऐसी जगह का ज्यादा चयन किया जाता है. लखनादौन और रायपुर आना-जाना होगा आसान लखनादौन से रायपुर तक बनने वाला एक्सप्रेस-वे जबलपुर के लोगों के लिए फायदेमंद होने वाला हैं. जबलपुर के लोगों के लिए एक्सप्रेस-वे निर्माण से जबलपुर से मंडला तक एक नई सड़क निकलेगी. जिससे रायपुर के लोगों का आवाजाही आसान हो जाएगी. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के व्यापारियों का व्यवसाय बढ़ेगा. नए एक्सप्रेस-वे के बन जाने के बाद समय की बचत होगी. जहां 8 घंटे लगते थे वहीं 5 घंटे में सफर पूरा हो जाएगा. लखनादौन से रायपुर से NHI का सर्वे छत्तीसगढ़ के रीजनल आफिसर ने जानकारी देते हुए कहा कि लखनादौन से रायपुर तक नए एक्सप्रेस-वे बनाया जाएगा. 15 हजार करोड़ के बजट को  सहमति मिली गई है. लखनादौन से रायपुर के बीच 6 लेन ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे का सर्वे का काम चल रहा है. सर्वे रिपोर्ट हेडक्वार्टर भेजी जाएगी.    इंदौर से सीधा और महाराष्ट्र और हैदराबाद कनेक्ट होंगे मध्यप्रदेश में रोड इंफ्रास्ट्रक्चर दिनों-दिन अच्छा होता जा रहा है। केंद्र सरकार के द्वारा चलाए जा रहे बड़े-बड़े एक्सप्रेस-वे, ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे, इकोनॉमिक कॉरिडोर और हाईवे प्रोजेक्ट तैयार किए जा रहे हैं। ऐसे में बड़े शहरों की कनेक्टिविटी एमपी से हो रही है। इधर, इंदौर अगले साल तक देश की हाईटेक सिटी हैदराबाद से एक्सप्रेस-वे (Indore-Hyderabad Expressway) के जरिए जुड़ जाएगा। इंदौर-हैदराबाद एक्सप्रेस-वे का 70 फीसदी काम पूरा इंदौर-हैदराबाद एक्सप्रेस-वे के शुरू से इंदौर और हैदराबाद की दूरी 150 किलोमीटर कम हो जाएगी। इस 713 किलोमीटर प्रोजेक्ट का काम 70 फीसदी पूरा हो चुका है। इसे पूरा करने का लक्ष्य 2025 रखा गया है। इस प्रोजेक्ट के बनते ही एमपी एक बड़े लॉजिस्टिक हब के रूप में सामने आएगा। इतने रूपए में तैयार हो रहा इंदौर-हैदराबाद एक्सप्रेस-वे इंदौर-हैदराबाद एक्सप्रेस-वे के निर्माण कार्य अगले साल तक पूरा होने की संभावना है। सरकार की ओर से 713 किलोमीटर लंबे इंदौर-हैदराबाद एक्सप्रेस वे के निर्माण में 15 हजार करोड़ रूपए खर्च कर रही है। महाराष्ट्र और हैदराबाद से सीधा कनेक्ट होगा एमपी इंदौर-हैदराबाद एक्सप्रेस-वे इंदौर को तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद से जोड़ने का काम करेगा। जिससे इंदौर और हैदराबाद की दूरी 150 किलोमीटर कम हो जाएगी। इस एक्सप्रेस-वे को इच्छापुर, मुक्ताईनगर, जलगांव और अकोला जाने की जरूरत नहीं पडेगी। यह सीधा बुरहानपुर, जलगांव और नांदेड़ होते हुए हैदराबाद को कनेक्ट करेगा।

करोड़ों बहनों के खाते में 20 वीं किस्त के 1250 रु कब होंगे जारी, अब दिसंबर में अगली किस्त, जानें अपडेट्स

भोपाल मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना मध्य प्रदेश की महिलाओं के लिए चलाई जा रही बड़ी योजनाओं में से एक है। इसे पिछली शिवराज सिंह चौहान सरकार द्वारा मई 2023 में शुरू किया गया था, पहले 1000 रुपए दिए जाते है लेकिन अबवर्तमान में इस योजना के तहत 1250 रुपए महीना के हिसाब से महिलाओं को सालाना 15,000 रुपये मिलते हैं। जून 2023 से नवंबर 2024 तक मासिक आर्थिक सहायता राशि की कुल 18 किश्तों का अंतरण किया गया है।अब योजना की 19वीं किस्त 10 दिसंबर को आएगी।चुंकी आमतौर पर हर महीने की 10 तारीख को योजना की किस्त जारी की जाती है, हालांकि त्यौहारों को देखते हुए समय से पहले भी किस्त जारी कर दी जाती है।इधर, सीएम के राशि बढ़ाने के संकेत के बाद संभावना जताई जा रही है नए साल 2025 में योजना की राशि में इजाफा किया जा सकता है।हालांकि अधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।     दरअसल, हाल ही में इंदौर और श्योपुर की विजयपुर विधानसभा में अपने भाषण के दौरान सीएम डॉ. मोहन यादव ने लाड़ली बहना योजना की राशि बढ़ाने के संकेत दिए थे। इंदौर में अपने संबोधन में सीएम ने कहा था कि योजना की शुरूआत में पात्र लाड़ली बहनों को 1000 रूपये दिये गये। इसके बाद यह राशि बढ़ाकर 1250 रूपये की गई। इस राशि में आगे और भी वृद्धि की जायेगी।     इसके अलावा उपचुनाव की वोटिंग से पहले भी विजयपुर में सीएम ने कहा था कि अभी सरकार 1,250 रुपये जमा कर रही है, इसे (मासिक सहायता) तीन हजार रुपये से बढ़ाकर 5 हजार रुपये भी किया जाएगा,यह सरकार की नीति है। इससे पहले अक्टूबर में विजयपुर विधानसभा में सीएम ने कहा था कि हमने 1000/- रुपये महीना लाड़ली बहना को देना शुरू किये, फिर इसे बढ़ाकर 1250/- कर दिए। आने वाले समय में हम इसे 3000/-रुपये महीना तक लेकर जायेंगे, ये हमारा संकल्प है। मई 2023 में शुरू हुई थी     लाड़ली बहना योजना पिछली शिवराज सिंह चौहान सरकार द्वारा मई 2023 में शुरू की गई थी।     इसमें 21 से 60 वर्ष की विवाहित महिलाओं को 1000 रुपए देने का फैसला किया गया था और फिर इसकी पहली किस्त 10 जून को जारी की गई थी।     इसके बाद रक्षाबंधन 2023 पर राशि को बढ़ाकर 1250 रुपए कर दिया गया था।     अब इस योजना के तहत 1250 रुपए महीना के हिसाब से महिलाओं को सालाना 15,000 रुपये मिलते हैं।     लाड़ली बहनों को जून 2023 से अक्टूबर 2024 तक मासिक आर्थिक सहायता राशि की कुल 17 किश्तों का अंतरण किया गया है।     इसके अतिरिक्त माह अगस्त 2023 एवं 2024 में (कुल 2 बार) लाभार्थी महिलाओं को 250 रुपये की राशि की विशेष आर्थिक सहायता का भी अंतरण किया गया। किसे मिलता है लाड़ली बहना योजना का लाभ     इस योजना में 1 जनवरी 1963 के बाद लेकिन 1 जनवरी 2000 तक जन्मी मध्यप्रदेश की स्थानीय निवासी समस्त विवाहित महिलाएं (विधवा, तलाकशुदा एवं परित्यक्ता समेत) वर्ष 2023 में आवेदन के लिए पात्र मानी जाती है।     महिलाएं, खुद या उनके परिवार में कोई टैक्सपेयर नहीं होना चाहिए ।परिवार की सालाना आय 2.5 लाख रुपये होना चाहिए।     अगर संयुक्त परिवार है तो 5 एकड़ से ज्यादा जमीन न हो, परिवार में कोई भी व्यक्ति सरकारी नौकरी न करता हो।घर पर ट्रैक्टर, चारपहिया वाहन न हो।     यदि कोई महिला 60 वर्ष से कम उम्र की है और किसी अन्य सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के तहत पहले से ही प्रति माह 1250 रुपये से कम प्राप्त कर रही है, तो उस महिला को भी 1250 रुपये तक की राशि दी जाएगी।     विवाहित महिलाओं में विधवा, और तलाकशुदा महिलाएं भी शामिल हैं। जिस साल आवेदन किया जाए, उस साल 1 जनवरी को आवेदक की उम्र 21 वर्ष पूरी हो चुकी होनी चाहिए और अधिकतम उम्र 60 वर्ष से कम होनी चाहिए। कैसे चेक करें लिस्ट में अपना नाम     लाड़ली बहना की आधिकारिक वेबसाइट https://cmladlibahna.mp.gov.in/ पर जाएं।     वेबसाइट के मुख्य पृष्ठ पर “आवेदन एवं भुगतान की स्थिति” वाले विकल्प पर     क्लिक करें।     दूसरे पृष्ठ पर पहुंचने के बाद, अपना आवेदन नंबर या सदस्य समग्र क्रमांक दर्ज करें।     कैप्चा कोड सबमिट करने के बाद, मोबाइल पर एक ओटीपी भेजा जाएगा।     मोबाइल नंबर पर प्राप्त ओटीपी दर्ज करें और वेरिफाई करें।     ओटीपी वेरिफाई करने के बाद “सर्च” विकल्प पर क्लिक करें और आपका भुगतान स्थिति खुल जाएगी।

सिकल सेल एनीमिया रोग के जड़ से उन्मूलन के लिए 2 केंद्र की मिली केंद्र’ की मंजूरी

भोपाल भारतीय संविधान के अनुच्छेद-275(1) के अंतर्गत केन्द्र सरकार द्वारा जनजातीय क्षेत्रों के प्रशासन के तहत विशेष विकास परियोजनाओं को क्रियान्वित करने के लिये शत-प्रतिशत राशि अनुदान के रूप में दी जाती है। यह राशि केन्द्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय के जरिये राज्य सरकारों को सीधे आवंटित की जाती है। सिकल सेल एनीमिया रोग के जड़ से उन्मूलन (Root Out) के लिये केन्द्र सरकार द्वारा अनुच्छेद 275(1) के तहत प्रदेश में 2 उच्च स्तरीय देखभाल केंद्र (Centre Of Competence For Sickle Cell Disease) या कहें ‘सिकल सेल रोग के लिए सक्षमता केंद्र’ को मंजूरी दी गई है। भोपाल में सिकल सेल रोग के लिये पहला सक्षमता केन्द्र आईसीएमआर के भोपाल स्मारक अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र, भोपाल में जनजातीय अनुसंधान संस्थान के सहयोग से स्थापित यह केंद्र ‘राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन’ में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 2047 तक सिकल सेल उन्मूलन के दूरदर्शी लक्ष्य के साथ स्थापित यह अत्याधुनिक सुविधा, सिकल सेल के रोगियों को आधुनिक निदान, उन्नत उपचार और समग्र पुनर्वास सेवाओं सहित व्यापक देखभाल प्रदान करती है। यहां विशेषज्ञों की एक समर्पित टीम के साथ यह केंद्र न केवल रोग के प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करता है, बल्कि प्रभावित व्यक्तियों, विशेष रूप से जनजातीय समुदायों के भीतर जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए सुरक्षित पुनर्वास पर भी जोर देता है। इस केन्द्र के जरिये सभी सिकल सेल मरीजों के लिए एक स्वस्थ, उज्जवल भविष्य सुनिश्चित करने की लक्ष्यपूर्ति के मिशन को बल मिलेगा। केन्द्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय ने इसके लिये करीब 2 करोड़ रूपये मंजूर किये हैं। दूसरा इंदौर में स्थापित हो रहा है महात्मा गांधी स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय, इंदौर के ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग एवं अत्याधुनिक मॉडल ब्लड सेंटर को सिकल सेल उन्मूलन मिशन- 2047 के तहत उच्च स्तरीय देखभाल केंद्र (सक्षमता केंद्र) के रूप में मंजूरी मिली है। इसकी घोषणा प्रधानमंत्री मोदी द्वारा की गई है। इस परियोजना के तहत यहां गुणवत्तापूर्ण इलाज किया जायेगा। इस सेंटर में चिन्हित किए गए रोगियों में आधुनिक मशीनों से पुनः रोग की पुष्टि करना (फाइनल डायग्नोसिस बनाना), रोग की गंभीरता एवं प्रकार का पता लगाने के अलावा सिकल सेल रोग के रोगियों की उच्च स्तरीय एवं आधुनिक उपचार एक ही छत के नीचे प्रदान की जायेंगी। इसी प्रकार सिकल सेल एनीमिया के पेशेंट को विश्वस्तरीय, लुकोरिड्यूस्ड नेट टेस्टेड, रेडिएट रक्त एवं उसके घटक प्रदान करना। डे केयर सेंटर्स को सुसज्जित करना ताकि जिन रोगियों को ब्लड ट्रांसफ्यूजन होना है उन्हें सुरक्षित एवं सरल तरीके से रक्त और उसके घटक प्रदान किया जा सके। स्वैच्छिक रक्तदान शिवरों का आयोजन करना जिससे रक्त और इसके घटकों की आपूर्ति बनी रहे। जीवन रक्षक पद्धति के रूप में बहुत गंभीर मरीजों में एफरेंस तकनीकी से रेड सेल एक्सचेंज करना। प्रसवपूर्व मामले में कोरियोनिक विलस सैंपलिंग (सीवीएस) की मदद से गर्भवती महिलाओं के गर्भ में पल रहे बच्चे में सिकल सेल रोग का पता लगाना, मॉलिक्यूलर प्रयोगशाला की स्थापना, नवजात शिशु में सिकल सेल का शीघ्र पता लगाना, सिकल सेल रोग के बारे में जनसाधारण, खासकर जनजातीय क्षेत्रों में जन जागरूकता अभियान चलाना, सिकल सेल से पीड़ित रोगियों में बोनमैरो ट्रांसप्लांट एवं जीन थेरेपी की संभावनाओं का पता लगाना एवं उन्हें इस हेतु तैयारियां करना सहित सिकल सेल के क्षेत्र में अनुसंधान और प्रशिक्षण भी दिये जायेंगे। इस केन्द्र से इंदौर के समीपस्थ अलीराजपुर, धार, झाबुआ, खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर, उज्जैन, देवास आदि जिलों के मरीजों को सर्वाधिक लाभ मिलेगा। जनजातीय कार्य मंत्रालय ने इस परियोजना के लिए 1 करोड़ 91 लाख रुपये राशि आवंटित की है। यहां के ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग के परिसर में पहले से ही बुनियादी ढांचा मौजूद है, जिसमें नवीनीकरण और अन्य आवश्यक कार्य पूर्ण हो चुके हैं। अन्य आवश्यक उपकरणों के लिए शॉर्ट टेंडर जारी किया गया है। टेक्नीशियन और चिकित्सा कर्मचारियों के लिए ओरिएंटेशन का पहला भाग पूरा हो चुका है। यहां सिकल सेल कंसोर्टियम की स्थापना भी कर ली गई है और सभी विभागों से सम्पर्क स्थापित कर सिकल सेल रोग के रोगियों का उच्च स्तरीय इलाज देना भी शुरू कर दिया है। 100 होम-स्टे को मिली मंजूरी अनुच्छेद-275(1) के तहत ही केन्द्र सरकार द्वारा राज्य सरकार को जनजातियों के आजीविका विकास से जुड़ी विशेष परियोजनाओं के लिये सहायता दी जाती है। इसके तहत प्रदेश में 100 जनजातीय ग्रामों में होम स्टे विकास के लिये केन्द्र सरकार द्वारा राशि आवंटित की गई है। इन 100 जनजातीय ग्रामों में प्रत्येक ग्राम में 5 लाख रूपये की लागत से होम-स्टे निर्माण के लिये जरूरी राशि जनजातीय कार्य विभाग को प्राप्त हो गई है। होम-स्टे के लिये शत-प्रतिशत राशि केन्द्र सरकार द्वारा वहन की जा रही है। 8 वन्या रेडियो स्टेशन के विकास के लिये मिली राशि केन्द्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा 275(1) के तहत प्रदेश में 8 वन्या रेडियो स्टेशन्स के सुदृढ़ीकरण के लिये भी विकास राशि प्रदान की गई है। इससे प्रदेश की सभी जनजातीयों की क्षेत्रीय बोली (Local Dialect) के विकास एवं संवर्द्धन में मदद मिलेगी। ये वन्या रेडियो स्टेशन जनजातियों की क्षेत्रीय बोली में ही संचालित किये जायेंगे। “वन्या संस्थान” जनजातीय कार्य विभाग के अधीन एक प्रकाशन प्रतिष्ठान है। इसका मुख्य उद्देश्य मध्यप्रदेश के जनजाति समुदायों की संस्कृति, जीवनशैली और कलाओं का विभिन्न माध्यमों से अभिलेखीकरण, प्रकाशन और प्रसारण करना है। इसी श्रृंखला में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की संकल्पना के पालन में जनजातीय क्षेत्रों में सामुदायिक रेडियो केन्द्रों का संचालन किया जायेगा। इससे विभिन्न जनजातीय समुदाय को अपने-अपने जिलों में चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी उनकी ही बोली में प्रदान की जायेगी। वन्या संस्थान द्वारा 8 सामुदायिक रेडियो केन्द्रों नालछा जिला-धार, भाबरा जिला-अलीराजपुर, मेघनगर जिला झाबुआ, बिजौरी जिला-छिन्दवाड़ा, चांड़ा जिला डिण्डौरी, खालवा जिला-खण्डवा, चिचौली जिला-बैतूल एवं सेसईपुरा जिला श्योपुर कला में लगभग 13 वर्षों से संचालित किये जा रहे हैं। इन केन्द्रों में विभिन्न विभागों से प्राप्त विज्ञापन, जनजातीय कार्य विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं का समुचित प्रचार-प्रसार, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं कृषि संबंधी विभिन्न जन-उपयोगी कार्यक्रमों का प्रसारण स्थानीय बोलियों गोंडी. भीली, बैगानी, कोरकू एवं सहरिया में स्थानीय जनजातीय कलाकारों को आमंत्रित कर कार्यक्रम तैयार किये जाते हैं, जिससे भाग लेने वाले जनजातीय कलाकारों को मानदेय/पारिश्रमिक भी दिया जाता है। इन वन्या रेडियो केन्द्रों का अब सुदृढ़ीकरण किया जा रहा है। शासकीय भवन होने के कारण इनकी मरम्मत … Read more

बाइडेन ने जाते-जाते कर डाला तीसरे विश्वयुद्ध का इंतजाम ? यूक्रेन को रूस के हथियार चलाने की मंजूरी

न्यूयॉर्क अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने जाते-जाते यूक्रेन को लेकर बड़ा ऐलान कर दिया है। उन्होंने रूस में अंदर तक मार करने के लिए अमेरिका द्वारा सप्लाई की जाने वाली लॉन्ग रेंज मिसाइलों के इस्तेमाल को मंजूरी दे दी है। अमेरिकी अधइकारियों का कहना है कि युद्ध को और उलझाने से बचाने के लिए अमेरिका ने यह कदम उठाया है। बता दें कि उत्तर कोरिया ने रूस की तरफ से युद्ध करने के लिए अपने हाजरों सैनिक भेज दिए हैं। इसके अलावा उत्तर कोरिया हथियार भेजकर भी रूस की मदद करने में लगा है। इसको लेकर यूक्रेन कई बार आपत्ति जता चुका है। वहीं बताया जा रहा है कि जो बाइडेन प्रशासन ने उत्तर कोरिया के दखल को देखते हुए ही यह फैसला किया है। वहीं नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि वह राष्ट्रपति बनने के बाद रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध को खत्म करवा देंगे। अमेरिका से मंजूरी के बाद अब यूक्रेन आर्मी टैक्टिकल मिसाइल सिस्टम का इस्तेमाल रूस के खिलाफ कर पाएगा। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की और उनके पश्चिमी देशों के सहयोगी कई महीने से जो बाइडेन प्रशासन पर दबाव डाल रहे थे कि लॉन्ग रेंज मिसाइलों के इस्तेमाल की इजाजत दे दी जाए ताकि रूस में अंदर तक प्रहार किया जा सके। कहा जा रहा था कि अमेरिका के प्रतिबंध की वजह से ही यूक्रेन अपने शहरों और इलेक्ट्रिकल ग्रिड को रूसी हमले से बचा नहीं पा रहा था। यह भी खबर है कि इस मंजूरी से NATO के सभी देश सहमत नहीं हैं। यह भी दबाव है कि अमेरिका और नाटो सदस्य इस युद्ध में सीधे तौर पर शामिल ना हों। लेकिन उत्तर कोरिया ने युद्ध को बढ़ाने का पूरा प्लान तैयार कर लिया है। वहीं डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत यह दिया था कि वह यूक्रेन को कुछ जमीन छोड़ने के लिए राजी करेंगे और इसके बाद युद्ध को खत्म करने का दबाव बनाएंगे। जानकारी के मुताबिक उत्तर कोरिया से 12 हजार सैनिक रूस पहुंचे हैं। इसके अलावा उत्तर कोरिया ने रूस को घातक हथियार भी दिए हैं। डोनाल्ड ट्रंप यूक्रेन की मदद को लेकर बाइडेन प्रशासन की आलोचना करते रहे हैं। ऐसे में डोनाल्ड ट्रंप की जीत के बाद यूक्रेन चिंतित है। उन्हें लगता है कि डोनाल्ड ट्रंप के आने से ब्लादिमीर पुतिन को फायदा होगा और यू्क्रेन पर शर्त मनवाने का दबाव बनाया जाएगा। इस युद्ध में अमेरिका ही यूक्रेन के सबसे महत्वपूर्ण सहयोगी था। अमेरिका यूक्रेन को 56 अरब डॉलर से ज्यादा की मदद दे चुका है।

सरकार की औद्योगिक नीति में सरेंडर कर चुके नक्सलियों के लिए खास सहूलियतों का ऐलान

रायपुर छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या के समाधान के लिए सरकार हर मोर्चे पर काम कर रही है. एक ओर जहां सुरक्षा बल के जवान लगातार एंटी नक्सल ऑपरेशन चला रहे हैं. वहीं दूसरी ओर नक्सल संगठन (Naxal organization) में शामिल लोगों को मुख्यधारा में जोड़ने के लिए सरकार अलग-अलग नीतियों पर काम कर रही है. नक्सल हिंसा से प्रभावितों के लिए भी सरकार योजनाएं ला रही है. छत्तीसगढ़ में 1 नवंबर से लागू नई औद्योगिक विकास नीति 2024-30 (New Industrial Development Policy 2024-30) में भी नक्सल समस्या के समाधान को लेकर विशेष प्रावधान किया गया है. इसके तहत सरेंडर नक्सलियों व नक्सल प्रभावितों को उद्योग संचालन में विशेष मदद करने की योजना है. औद्योगिक विकास नीति 2024-30 की रणनीति के प्रस्तावना के रणनीति पैराग्राफ  में इस बात का साफ-साफ जिक्र है कि सरेंडर कर चुके नक्सली व नक्सल प्रभावितों की सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए अधिक प्रोत्साहन दिया जाएगा. ताकि इनका आर्थिक उत्थान भी हो सके. नई औद्योगिक नीति के प्रस्तावना के औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन हेतु प्रावधान के बिंदु क्रमांक-12.4 में उल्लेख है कि नक्सलवाद से प्रभावित, व्यक्ति व उनके परिवारजनों को सामान्य सेक्टर के उद्यमों को उपलब्ध कराए जा रहे मान्य अनुदान से 10 प्रतिशत अधिक अनुदान दिया जाएगा. इसकी अधिकतम सीमा भी 10 प्रतिशत अधिक रहेगी. यानि कि यदि किसी उद्योग को स्थापित करने के लिए सरकार सामान्यत: 25 प्रतिशत का अनुदान दे रही है तो नक्सलवाद से प्रभावितों के लिए यह अनुदान 35 प्रतिशत का होगा. जानकारों की मानें तो सरेंडर कर चुके नक्सलियों, नक्सलवाद से प्रभावितों के साथ ही सरकार एक तरह से नक्सल संगठन से जुड़ें लोगों को भी यह संकेत दे रही है कि आप नक्सल संगठन को छोड़ मुख्यधारा में जुड़िये. सरकार योजना के तहत तमाम सुविधाओं के साथ ही अब उन्हें उद्योगपति बनने में भी मदद करेगी. साल 2000 में नक्सल संगठन को छोड़ मुख्यधारा में जुड़ने वाले रमेश पोरियाम ऊर्फ बदरन्ना कहते हैं कि सरकार अब हर तरह से नक्सल समस्या को खत्म करना चाह रही है. इसलिए हर मोर्चे पर कोशिश की जा रही है. हालांकि नक्सल संगठन में हिड़मा जैसे टॉप लीडर को भर्ती करने वाले बदरन्ना कहते हैं कि यदि इस तरह की कोशिश शुरुआती समय से की जाती तो समस्या इतनी विकराल रूप नहीं लेती. नक्सल संगठन भी हर स्तर पर आम जनता की सहभागित स्थापित करने के उद्देश्य से काम करने की बात कहता है. ऐसे में यदि आम जनता को इस तरह के मौके मिले तो अच्छी बात है. इनको भी मिलेगी छूट नई औद्योगिक विकास नीति के तहत नक्सलवाद से प्रभावितों, सरेंडर नक्सलियों के अलावा सेवानिवृत्त सैनिक, सेवानिवृत्त अग्निवीरों, तृतीय लिंग वर्ग, नि:शक्तजनों के लिए भी विशेष प्रावधान किया गया है. सामान्य की तुलना में इन्हें भी 10 प्रतिशत अधिक का अनुदान सरकार द्वारा दिया जाएगा. ताकि इन वर्गों का भी आर्थिक विकास तेजी से हो सके.

प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 के तहत केंद्र ने बड़े स्तर पर शहरी क्षेत्र के पात्र लोगों को आवास उपलब्ध कराने की शुरुआत

भोपाल प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत महंगी कॉलोनियों में पात्र हितग्राही सस्ते मकान खरीद सकेंगे। इसके लिए केंद्र सरकार ने रिडीमेबल हाउसिंग वाउचर का विकल्प दिया है। इसके तहत राज्य को संबंधित हितग्राही के बदले की राशि बिल्डर को चुकानी होगी। शेष राशि का भुगतान हितग्राही को करना होगा। इस तरह महंगी कॉलोनी में सस्ते मकान के लिए पात्र हो जाएंगे।  असल में केंद्र और राज्य के बीच मेमोरेंडम एग्रीमेंट (एमओए) साइन हुए हैं। जिसमें एमपी ने केंद्र की उक्त रिफार्म शर्त को मानने की सहमति दे दी है। इसके अलावा केंद्र द्वारा बताए कई और सुधारों को मध्य प्रदेश ने मानने की सहमति दे दी है, जिसके आधार पर भोपाल, इंदौर समेत अन्य शहरों में शहरी प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 गति पकड़ेगी। असल में शहरी प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 के तहत केंद्र ने बड़े स्तर पर शहरी क्षेत्र के पात्र लोगों को आवास उपलब्ध कराने की शुरुआत की है। राज्यों से कहा है कि यदि वे अपने राज्य की जनता को रियायती आवास उपलब्ध कराना चाहते हैं तो जरूरी सुधार का पालन करना होगा। जिसमें सबसे बड़ी शर्त मास्टर प्लान के दायरे में रहकर उक्त आवास बनाने की शर्त शामिल है। केंद्र ने शहरों को झुग्गी मुक्त बनाकर उन्हें व्यवस्थित विकास के दायरे में लाया जा सके। इसके लिए राज्य को शहरों में अलग-अलग जोन चिह्नित करने होंगे, वहां उक्त योजना के तहत काम होंगे और हितग्राहियों को आवास उपलब्ध कराए जाएंगे। इन पर सहमति परियोजनाओं को मास्टर प्लान में शामिल करना होगा। पात्र हितग्राहियों को वैधानिक शुल्क में अधिकतम छूट देनी होगी। स्टाम्प शुल्क, पंजीकरण शुल्क में छूट को जारी रखना होगा। परियोजनाओं में हरित क्षेत्र के दायरे को बढ़ाना होगा। निर्माण संबंधी अनुमतियां आवेदन के 60 दिन में। 5 प्रतिशत आवास ईडब्ल्यूएस, एलआइजी बनाने की शर्तों का पालन। आवास खरीदने, निर्माण करने वाले भूमिहीन हितग्राहियों को पट्टा भूमि के दस्तावेज देने होंगे।

पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री सनातन बोर्ड बनाने और वक्फ बोर्ड की जांच की मांग

छतरपुर  बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पं. धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री 21 नवंबर से 29 नवंबर तक 165 किलोमीटर लंबी पदयात्रा के लिए निकल रहे हैं। सनातन हिन्दू एकता पदयात्रा बागेश्वर धाम से रामराजा सरकार की नगरी ओरछा तक जाएगी। इस दौरान बाबा बागेश्वर अपने चिर-परिचित अंदाज में बातें करते नजर आए। उन्होंने हिंदुओं को एक करने की बात कही। मंदिरों ने हर समाज का पुजारी होने, सनातन बोर्ड गठित करने जैसी बातें भी कही। उन्होंने यात्रा के दौरान फूलमाला और खड़ाऊ नहीं पहनने का संकल्प भी लिया। गौरतलब है कि शहर के पन्ना रोड पर स्थित निजी होटल में पत्रकारों से चर्चा करते हुए महाराजश्री ने कहा कि विभिन्न पंथों में बटे सनातन हिन्दुओं को कट्टर हिन्दू बनाने के लिए यह एकता यात्रा निकाली जा रही है। उन्होंने कहा कि हम मिशन और विजन लेकर चल रहे हैं। सब हिन्दू जात-पात का भेद खत्म करें यही हमारा यात्रा का मुख्य लक्ष्य है। उन्होंने बताया कि राष्ट्र ध्वज और धर्मध्वज दोनों का बराबर सम्मान है। उन्होंने राष्ट्रगान के साथ पदयात्रा शुरू करने की बात कही। बाबा की खरी-खरी पत्रकारों से चर्चा करते हुए बाबा धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि इस सनातन यात्रा सब धर्मों के लोग हो शामिल हो सकते हैं। इसके लिए हम किसी को न्यौता देने नहीं जा रहे। क्योंकि जब धर्मयुद्ध होता है तो बुलाया नहीं जाता, जिसका जमीर जिंदा होता है, वो खुद आता है। दूसरे धर्मों के लोगों के शामिल होने की बात पर शास्त्री ने कहा कि उनको लगता है कि हम कार्य अच्छा कर रहे हैं तो उनको भी भागीदारी करना चाहिए, क्योंकि देश तो उनका भी है। क्योंकि इस देश में रहने वाले इस्लामी और ईसाई समाज के लोग पहले हिंदू ही थे, बाद में वह कन्वर्ट हो गए। किसी भी धर्म के लोगों को यात्रा के लिए पीले चावल नहीं देंगे। बाबा ने अपने अंदाज में कहा कि आओ तो वेलकम, जाओ तो भीड़ कम…। सनातन बोर्ड बने बागेश्वर बाबा ने कहा कि हम भारत का हाल बांग्लादेश जैसा नहीं होने देंगे। हम हिंदुओं को जगाएंगे। शास्त्री ने वक्फ बोर्ड पर भी बयान दिया। उन्होंने कहा कि 2005 तक तक बोर्ड के पास महज कुछ हजार एकड़ जमीन थी, आज साढ़े आठ लाख एकड़ जमीन हो गई। फिर भी हिंदू चुप बैठा है, हिंदू कायर बना बैठा है। सोया हुआ हिंदू है। कौन सोया हुआ हिंदू है, जो 500 सालों से रामजी के मंदिर के लिए कोर्ट में लड़ रहा था। वो भी वोट देते हैं, हम भी वोट देते हैं। या तो सनातन बोर्ड बनाइए या वक्फ बोर्फ हटाइए। पदयात्रा में नहीं पहनेंगे फूलमाला पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने मीडिया के माध्यम से आम जनमानस को अवगत कराना चाहा है कि किसी भी पदयात्रा में फूलमाला का इस्तेमाल नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि हम अपनी हिंदुओं को जगाने की यात्रा निकाल रहे हैं न कि कोई शोभायात्रा, अगर फूलमाला में ढंक जाएंगे तो हमारी बात कौन सुनेगा। उन्होंने कहा कि सभी सनातनप्रेमी फूलमाला में पैसे खर्च करने के बजाय अन्य संसाधनों में लगाएं। जितनी भी उनकी यात्राएं होंगी उन सभी में फूलमाला का त्याग रहेगा। छोटे बच्चे, वृद्ध और बीमार लोगों को यात्रा से दूर रहने का आग्रह किया गया। महाराजश्री ने कहा कि हमें स्वागत नहीं हमें सभी हिन्दुओं को एकजुट करने की भिक्षा दें। सभी यात्रियों से थाली, लोटा और एक गर्म लोयी साथ लेकर चलने का भी उन्होंने आग्रह किया। रामराजा सरकार को ध्वज चढ़ाकर होगा यात्रा का विराम महाराजश्री ने कहा कि यह पदयात्रा 29 नवंबर को रामराजा सरकार के चरणों में पहुंचेगी और यहीं यात्रा का विराम होगा। रामराजा सरकार को यात्रा के माध्यम से पहुंचकर ध्वज समर्पित करना है ताकि यह धर्मध्वजा लहराती रहे। उन्होंने बताया कि जगद्गुरु तुलसी पीठाधीश्वर रामभद्राचार्य जी भगवां ध्वज दिखाकर यात्रा प्रारंभ करेंगे। इस यात्रा में मलूक पीठाधीश्वर पूज्य राजेन्द्र दास महाराज, जगद्गुरु रामभद्राचार्य महाराज, हनुमानगढ़ी के महंत राजूदास महाराज, इन्द्रेश जी महाराज, सुदामा कुटी के सुतीक्ष्ण दास जी, संजीव कृष्ण ठाकुर, अनुरुद्धाचार्य महाराज, जगतगुरु बल्लभाचार्य महाराज, गोरीलाल कुंज के महंत पूज्य किशोर दास महाराज शामिल होंगे। वहीं फिल्म, संगीत सहित अन्य  क्षेत्रों से भी लोगों के शामिल होने की सूचनाएं हैं।

झाबुआ जिले के 80 से अधिक शिक्षक मन की बात और प्रमुख भाषणों का कर रहे हैं भीली बोली में अनुवाद

भोपाल केन्द्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा ‘एआई बेस्ड ट्रांसलेशन टूल’ तैयार किया जा रहा है। इसका उद्देश्य जनजातीय बोलियों में द्वि-भाषी शब्दकोश और त्रि-भाषी प्रवीणता मॉड्यूल तैयार कर नई शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप बहुभाषी शिक्षा (एमएलई) लक्ष्य के तहत कक्षा 1, 2 और 3 के विद्यार्थियों के लिए जनजातीय भाषाओं व बोलियों में प्राइमर तैयार करना है। जनजातीय लोक परम्पराओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए विभिन्न जनजातियों की लोककथाओं और इनका दस्तावेजीकरण करना भी इस नवाचार का प्रमुख लक्ष्य है। इस दिशा में प्रदेश के झाबुआ जिले में अत्यंत ही सराहनीय कार्य हो रहा है। यहां जिले के 80 से अधिक शिक्षक-शिक्षिकाओं द्वारा विभिन्न प्रमुख गतिविधियों एवं संभाषणों का लगातार भीली बोली में अनुवाद का कार्य किया जा रहा है। इस कार्य में अब तक इन शिक्षक-‍शिक्षिकाओं द्वारा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मन की बात कार्यक्रम के 62 एपिसोड का भीली बोली में अनुवाद किया जा चुका है। इनके द्वारा राष्ट्रपति के पिछले 12 वर्ष के संभाषणों एवं प्रधानमंत्री के गत 10 वर्ष के संभाषणों का अनुवाद किया जा चुका है। इसके अलावा कक्षा 1 से 5 तक की हिंदी विषय की पाठ्य पुस्तकों, कक्षा 3 से 5 तक पर्यावरण विषय की किताबों और आईआईटी, नई दिल्ली से प्राप्त 60 हजार से अधिक वाक्यों का भीली बोली में अनुवाद किया जा चुका है। यह कार्य निरंतर जारी है। राष्ट्रीय जनजातीय गौरव दिवस पर अनुवादकों का हुआ सम्मान गत 15 नवम्बर को राष्ट्रीय जनजातीय गौरव दिवस (भगवान बिरसा मुंडा जयंती) के पावन अवसर पर झाबुआ जिला मुख्यालय में आयोजित जिला स्तरीय मुख्य समारोह में भीली बोली में अनुवाद में संलग्न सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं का सम्मान किया गया। महिला एवं बाल विकास मंत्री सुनिर्मला भूरिया और कलेक्टर झाबुआ सुनेहा मीना द्वारा भीली बोली में अनुवादकों का आत्मीय सम्मान कर इनकी कार्य की मुक्त कंठ से सराहना की गई। मंत्री सुभूरिया ने कहा कि इन अनुवादकों के सहयोग से हमारे प्रमुख दस्तावेज और भाषण अब हमेशा के लिये भीली बोली में उपलब्ध हो गये हैं। हमारे बच्चे और शिक्षक अध्ययन-अध्यापन कार्य में इस स्थानीय बोली में उपलब्ध साहित्य का उपयोग कर बेहतर तरीके से विषय को समझ सकेंगे और आगे बढ़ सकेंगे।

प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और सुधार के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएँ: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और सुधार के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएँ। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रदेश को उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए अंतर्विभागीय समन्वय आवश्यक है। ताकि तेज गति से स्वास्थ्य सेवाओं को विस्तारित किया जा सके। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने मंत्रालय में स्वास्थ्य विभाग के महत्वपूर्ण कार्यों और अंतर्विभागीय समन्वय विषयों की समीक्षा की। अपर मुख्य सचिव सामान्य प्रशासन विभाग संजय दुबे, प्रमुख सचिव वित्त मनीष रस्तोगी, प्रमुख सचिव स्वास्थ्य संदीप यादव और आयुक्त स्वास्थ्य तरुण राठी उपस्थित थे। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने संजीवनी क्लीनिक में रिक्त पदों पर जल्द से जल्द नियुक्तियाँ करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्राथमिक चिकित्सा सेवाओं को सशक्त करने के लिए प्रक्रिया को तेज गति से पूर्ण किया जाए। नवीन गठित ज़िलों में जिला चिकित्सालयों के लिए चिकित्सकीय और पैरामेडिकल पदों की पूर्ति की प्रक्रिया की अद्यतन स्थिति की समीक्षा की । उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने निर्देश दिए कि सभी आवश्यक प्रस्ताव मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग को शीघ्र भेजे जाएँ, ताकि रिक्त पद जल्द भरे जा सकें और चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार हो। शासकीय मेडिकल कॉलेजों में पे-प्रोटेक्शन के विषय पर आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिये। बैठक में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने और आईपीएचएस मानक अनुसार रिक्त पदों की शीघ्र पूर्ति के लिए विभिन्न मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई।  

राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा अधिकारी की संवेदनशीलता, प्रशासन की सफलता का आधार होती

भोपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि अधिकारी की संवेदनशीलता, प्रशासन की सफलता का आधार होती है। संवेदनशील अधिकारी, समाज और राष्ट्र के सच्चें सेवक होते है। वे अपने कार्यों से समाज और राष्ट्र को बहुत कुछ दे सकते है। इसीलिए अपने कार्य व्यवहार में अधिकारियों को संवेदनशीलता के भाव को सदैव सर्वोपरि रखना चाहिए। राज्यपाल पटेल भारतीय पुलिस सेवा के परिवीक्षाधीन अधिकारियों को संबोधित कर रहे थे। राजभवन में आयोजित कार्यक्रम में निदेशक, मध्यप्रदेश पुलिस अकादमी श्रीमती सोनाली मिश्रा मौजूद थी। राज्यपाल पटेल ने अधिकारियों से कहा कि इस पद तक पहुँचाने में आपके माता-पिता और गुरुजनों की विशेष भूमिका है। समाज के हर व्यक्ति का भी प्रत्यक्ष और परोक्ष योगदान है। उन सबके प्रति कृतज्ञता के भाव को जीवन में हमेशा याद रखे। राज्यपाल पटेल ने कहा कि आप सभी युवा अधिकारी, विकसित भारत निर्माण के लिए संकल्पित अमृत पीढ़ी के प्रतिनिधि है। विकसित भारत के लिए ऐसी कार्य संस्कृति बनाने की पहल करे, जिसमें जनता कानून लागू करने वालों से नहीं डरे, बल्कि कानून का सम्मान करे। राज्यपाल पटेल ने कहा कि आम आदमी आई.पी.एस. अधिकारियों को कानून व्यवस्था के संरक्षक और न्याय दिलाने में मदद करने वाले अधिकारी मानते है। उनके विश्वास पर खरा उतरना ही आपके कार्य की सफलता की कसौटी होगी। अपनी शक्तियों का उपयोग, समाज के अंतिम पंक्ति और कमजोर व्यक्ति को सशक्त बनाने में करे। साइबर क्राइम के बदलते स्वरूपों के लिए जागरूकता जरूरी राज्यपाल पटेल ने कहा कि पुलिस बल की संवेदनशील और पेशेवर पहचान बनाने में आपकी मेधा और ज्ञान महत्वपूर्ण है। बिना भय, विलम्ब और पक्षपात के कार्य कर स्वयं के उदाहरण से पुलिस बल को प्रेरित करे। राज्यपाल पटेल ने कहा कि वर्तमान समय की बड़ी चुनौती, साइबर क्राईम और इसके बदलते स्वरूपों के प्रति जागरूकता और नवाचार बहुत जरुरी है। आमजनों और विशेष कर वंचित वर्गों को नवीनतम साईबर खतरों जैसे- डिजिटल अरेस्ट आदि विषयों के प्रति जागरूक करने के लिए नवाचारों के साथ प्रयास करे। राज्यपाल पटेल का स्वागत, प्रशिक्षु अधिकारी सुउर्वशी ने किया। राज्यपाल पटेल का मध्यप्रदेश पुलिस अकादमी की निदेशक, श्रीमती मिश्रा ने स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया और स्वागत उद्बोधन दिया। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम में वर्ष 2022 और 2023 बैच के मध्यप्रदेश कैडर के कुल 11 प्रशिक्षु अधिकारी शामिल है। आभार प्रदर्शन अकादमी के उपनिदेशक मलय जैन ने माना। कार्यक्रम में राज्यपाल के अपर सचिव उमाशंकर भार्गव, राजभवन के अन्य अधिकारी और संबंधित उपस्थित थे।  

मणिपुर में स्कूल-कॉलेज बंद, 5000 से अधिक सुरक्षाकर्मी तैनात, भेजी जाएंगी CAPF की 50 और कंपनियां

इंफाल  भारत का उत्तर-पूर्वी राज्य मणिपुर एक बार फिर हिंसा की आग में सुलग रहा है। केंद्र ने पूर्वोत्तर राज्य में सुरक्षा और कानून व्यवस्था की स्थिति के मद्देनजर 5,000 से ज्यादा कर्मियों वाली सीएपीएफ की 50 कंपनियां भेजने का फैसला किया है। इनमें से 35 यूनिट केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) से और बाकी बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) से होंगी। सीआरपीएफ के डायरेक्टर जनरल ए.डी. सिंह और अन्य केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) के वरिष्ठ अधिकारी भी राज्य में मौजूद हैं। इसी बीच, मणिपुर के सीएम एन बीरेन सिंह ने सोमवार को 6 बजे एनडीए के मंत्रियों और विधायकों की एक मीटिंग बुलाई है। अधिकारियों ने कहा कि यह मीटिंग इसलिए बुलाई गई है ताकि कानून-व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा की जा सके। यह पूरा का पूरा घटनाक्रम ऐसे टाइम में हो रहा है जब एनपीपी के सात विधायकों ने बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार से समर्थन वापस ले लिया है। एनपीपी ने दावा किया कि राज्य की बीरेन सिंह सरकार पूर्वोत्तर राज्य में समस्या को हल करने में पूरी तरह से नाकामयाब साबित हुई है। एनपीपी के बीजपी से समर्थन वापस लेने से भी बीजेपी पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। बीजेपी के पास अपने 32 विधायकों के साथ बहुमत हासिल है। एन बीरेन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार को नगा पीपुल्स फ्रंट के पांच विधायकों और जेडीयू के छह विधायकों का भी समर्थन हासिल है। इस बीच, मुख्यमंत्री के सचिव निंगथौजम ज्योफ्रे ने मणिपुर अखंडता पर समन्वय समिति को लिखे पत्र में इंफाल घाटी में शक्तिशाली निकाय से आग्रह किया कि वह इस जरूरी मोड़ पर किसी भी तरह के हिंसक आंदोलन से बचे। COCOMI ने सरकारी ऑफिस बंद रखने का किया था आह्वान COCOMI ने पहले कहा था कि कुकी-हमार उग्रवादियों द्वारा हमलों और हत्याओं से लोगों की जिंदगी और संपत्तियों की सुरक्षा करने में केंद्र विफल रहा है और इसके विरोध में सभी सरकारी ऑफिस को बंद रखेंगे। इस बीच, पुलिस ने कहा कि जिरीबाम जिले में संपत्ति को नुकसान पहुंचा रही भीड़ और सुरक्षा बलों के बीच झड़प के दौरान गोलीबारी में एक प्रदर्शनकारी की मौत हो गई। पुलिस ने पुष्टि की कि गोलीबारी में एक व्यक्ति की मौत हो गई, लेकिन कहा कि यह तुरंत साफ नहीं है कि किसने गोली चलाई, जबकि चश्मदीदों ने दावा किया कि गोलीबारी सुरक्षा बलों की दिशा से हुई थी। यह घटना रविवार देर रात हुई जब उग्रवादियों द्वारा अगवा की गई महिलाओं और बच्चों की हत्या के विरोध में आंदोलनकारी जिरीबाम पुलिस स्टेशन क्षेत्र के बाबूपारा में संपत्तियों को नुकसान पहुंचा रहे थे। एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि गोलीबारी में एक शख्स की मौत हो गई है। यह तुरंत साफ नहीं है कि किसने गोली चलाई। उन्होंने कहा कि मरने वाले की पहचान के अथौबा के तौर पर हुई है। यह करीब 20 साल का था। कांग्रेस और बीजेपी के ऑफिस और जिरीबाम के निर्दलीय विधायक के घर में प्रदर्शनकारियों के एक ग्रुप ने तोड़फोड़ की। अधिकारियों ने कहा कि वह संपत्तियों से फर्नीचर, कागज और अन्य चीजें बाहर ले आए और इमारत के सामने उनमें आग लगा दी। पांच लोगों के शवों का हुआ पोस्टमार्टम समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, एक सूत्र ने कहा कि असम के सिलचर कस्बे में एक सरकारी अस्पताल में जिरीबाम जिले से लापता हुए पांच लोगों के शवों का पोस्टमार्टम पूरा हो गया है। 11 नवंबर को सुरक्षा बलों और कुकी-जो उग्रवादियों के बीच मुठभेड़ के बाद जिरीबाम से लापता हुए छह लोगों में से पांच के शव पिछले कुछ दिनों में असम के कछार में जिरी नदी और बराक नदी में पाए गए और उन्हें सिलचर मेडिकल कॉलेज लाया गया। इतना ही नहीं एक सूत्र ने पीटीआई को बताया कि एसएमसीएच में सभी पांच शवों का पोस्टमार्टम किया गया है। संबंधित डॉक्टर रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया में हैं। इस बीच, भारतीय जनता पार्टी मणिपुर प्रदेश एससी मोर्चा के उपाध्यक्ष के ऋषिकांत ने व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए इस्तीफा दे दिया है। 15 नवंबर को बीजेपी के जिरीबाम मंडल के पदाधिकारियों और कार्यकारी सदस्यों ने भी जिरीबाम और पूरे मणिपुर में की अशांति का हवाला देते हुए राज्य अध्यक्ष को अपना इस्तीफा सौंप दिया था। क्या है मणिपुर विधानसभा की तस्वीर 60 सदस्यीय मणिपुर विधानसभा में भाजपा के पास 37 सीटें हैं। एनपीपी, जिसके सात विधायक हैं, ने पहले बीरेन सिंह सरकार को बाहरी समर्थन दिया था क्योंकि वह एनडीए का हिस्सा है। गौरतलब है कि एनपीपी के समर्थन वापस लेने से एन बीरेन सिंह सरकार को फिलहाल कोई खतरा नहीं है।   इंफाल में स्कूल-कॉलेज बंद   इंफाल पश्चिम और इंफाल पूर्व में कर्फ्यू लगाए जाने के बीच, मणिपुर सरकार ने कई जिलों में राज्य विश्वविद्यालयों सहित संस्थानों, कॉलेजों को बंद करने की घोषणा की । इंफाल में सभी स्कूल, कॉलेज 19 नवंबर तक बंद रहेंगे। 

राज्यपाल का यूनिट साइटेशन पुरस्कार सेना की 97 फील्ड रेजिमेंट को मिला

भोपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने मध्यप्रदेश के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत, बचाव के वीरतापूर्ण साहसी प्रयासों के लिए सेना की 97 फील्ड रेजिमेंट को यूनिट साइटेशन पुरस्कार प्रदान किया। राज्यपाल पटेल ने राजभवन में आयोजित गरिमामय समारोह में “सेवा परमो धर्म” के आदर्श वाक्य के प्रति सेना की प्रतिबद्धता को स्थापित करने में 97 फील्ड रेजिमेंट के योगदान की सराहना की। इकाई के कमान अधिकारी कर्नल देवमाल्या मुखर्जी और सूबेदार मेजर देवेन्द्र कुमार को प्रशस्ति-पत्र प्रदान किया। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने 97 फील्ड रेजिमेंट की यूनिट के दतिया और ग्वालियर जिलों में बाढ़ राहत और बचाव कार्यों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए “राज्यपाल का प्रशस्ति पत्र” प्रदान किया है। उल्लेखनीय है कि प्रदेश के दतिया और ग्वालियर जिलों में बाढ़ राहत कार्यों में 97 फील्ड रेजीमेन्ट ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया था। रेजिमेंट ने नदी की तेज़ धाराओं को पार करते हुए साहसिक रात्रि ऑपरेशन किए। काली सिंध, पार्वती और नौन नदियों में डूबे घरों में फंसे नागरिकों को बचाने के लिए अभियान चलाया। इस दौरान 70 से अधिक नागरिकों को सुरक्षित रूप से बचाया। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों सहित 100 नागरिकों को स्थानांतरित किया। बचाव दल ने तीन दिनों की अवधि के दौरान, संसाधनों के कुशल आवंटन और अथक कार्यों से नुन्हारी, इंदरगढ़ और पवाया गांवों के ग्रामीणों को बचाने में सफलता प्राप्त की। इसी तरह झील के टूटने और पानी के उफान पर होने के बावजूद,  संकट ग्रस्त दतिया की अमन कॉलोनी के निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। सेना की 97 फील्ड रेजिमेंट यूनिट के जवानों ने लोगों की जान बचाने के साथ ही आपदा से तबाह हुए लोगों में उम्मीद की किरण भी जगाई। यूनिट की सफलता ने आपदा राहत कार्यों में सेना की महत्वपूर्ण भूमिका की एक शक्तिशाली मिसाल बनाई है।  

वक्फ बोर्ड ने जुम्मे की नमाज को लेकर नया फरमान जारी, तकरीर से पहले बोर्ड से लेनी होगी इजाजत

रायपुर  छत्तीसगढ़ की मस्जिदों में जुमे यानी शुक्रवार की नमाज के बाद होने वाली तकरीर के लिए वक्फ बोर्ड से मंजूरी लेनी होगी। तकरीर किस विषय पर है, इसकी जानकारी लिखित में देनी होगी। यह आदेश छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष व भाजपा नेता डॉ. सलीम राज ने प्रदेशभर की मस्जिदों के मुतवल्ली को पत्र लिखकर भेजा है। उन्होंने कहा कि मंजूरी के बाद ही तकरीर की जा सकेगी। आदेश 22 नवंबर से लागू हो जाएगा। आदेश नहीं मानने पर दर्ज होगा केस डॉ. सलीम ने बताया कि प्रदेशभर की मस्जिदों के मुतवल्लियों को जानकारी देने के लिए व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया है। इस ग्रुप में मुतवल्ली तकरीर के विषय की जानकारी देंगे। बोर्ड से नियुक्त अधिकारी विषय को परखेंगे और अनुमति देंगे। आदेश नहीं मानने पर मुतवल्लियों पर एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि हमने जो पत्र लिखा है, वह मुतवल्लियों के लिए है, मौलानाओं के लिए कोई निर्देश नहीं दिया है। वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष ने किया विरोध इमामों को सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए कहा गया है, जो अल्पसंख्यकों के लिए है। मुतवल्लियों को धार्मिक उपदेशों तक ही सीमित रहना चाहिए, राजनीति नहीं करनी चाहिए। मुतवल्लियों का व्हाट्सग्रुप वक्फ बोर्ड अध्यक्ष ने बताया कि प्रदेशभर की मस्जिदों के मुतवल्लियों को जानकारी देने के लिए व्हाट्सअप ग्रुप बनाया गया है। इस ग्रुप में मुतवल्ली तकरीर के विषय की जानकारी देंगे। वक्फ बोर्ड से नियुक्त अधिकारी विषय को परखकर फिर अनुमति देंगे। उसी विषय पर ही तकरीर कर सकेंगे। आदेश नहीं मानने पर मुतवल्लियों पर एफआइआर दर्ज कराई जाएगी। पूर्व अध्यक्ष के खिलाफ लाया था अविश्वास प्रस्ताव गौरतलब है कि पिछले महीने ही बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष, पूर्व जस्टिस मिन्हाजुद्दीन के खिलाफ अविश्वास पत्र लाकर उन्हें हटाया गया था। इसके बाद भाजपा के नेता डा.सलीमराज को नया अध्यक्ष चुना गया था। ओवैसी ने एक्स पर लिखा आल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के नेता असदुद्दीन ओवैसी ने एक्स पर प्रतिक्रिया व्यक्त की है। ओवैसी ने एक्स पर पोस्ट में लिखा कि अब भाजपाई हमें बताएंगे कि दीन क्या है? क्या हमें अपने दीन पर चलने के लिए अब इनसे इजाजत लेनी होगी? वक्फ बोर्ड के पास ऐसी कोई क़ानूनी ताकत नहीं है। यदि ऐसा होता भी तो यह संविधान के अनुच्छेद 25 के खिलाफ होता। देशभर में लागू करने की मांग छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड अध्यक्ष डॉ सलीम राज ने जी मीडिया से बातचीत में कहा- फैसले के बाद हमें धमकी मिल रही है, मैं शहीद होने के लिए तैयार हूं. इस मामले में गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात कर देशभर में इसे लागू करने की मांग करूंगा. वहीं, डॉ सलीम राज ने सांसद असदुद्दीन ओवैसी पर पलटवार करते हुए कहा- ओवैशी को इस्लाम की समझ नहीं है. व्हाट्सऐप ग्रुप से होगी मॉनिटरिंग छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड के सदस्यों के मुताबिक, इसकी मॉनिटरिंग व्हाट्सऐप ग्रुप के जरिए की जाएगी. इस ग्रुप के में छत्तीसगढ़ की की मस्जिदों के मुतवल्लियों को जोड़ा जाएगा. जुम्मे की नमाज के बाद होने वाले तकरीर में किन मुद्दों पर चर्चा होगी, इसकी जानकारी मुतवल्ली ग्रुप में देंगे. इस जानकारी को को वक्फ बोर्ड के सदस्य पढ़ेगे और जो मुद्दे उन्हें विवादित लगेंगे, उनमें संसोधन करके दोबारा संबंधित मस्जिद के मुतवल्ली को वो भेजा जाएगा. जिसके बाद संसोधित मुद्दे पर ही तकरीर होगी. जो मुतवल्ली नियम का पालन नहीं करेंगे,  उन पर तुरंत एक्शन भी लिया जाएगा.

AAP से इस्तीफा देकर BJP में शामिल हुए कैलाश गहलोत, बोले- ED-CBI के दबाव में नहीं बदली है पार्टी

नई दिल्ली आम आदमी पार्टी से इस्तीफा दे चुके कैलाश गहलोत आज बीजेपी में शामिल हो गए हैं. उन्होंने बीजेपी हेडक्वार्टर में आधिकारिक रूप से बीजेपी की सदस्यता ली. कैलाश गहलोत ने बीजेपी नेता मनोहर लाल खट्टर, दुष्यंत गौतम और हर्ष मल्होत्रा की मौजूदगी में बीजेपी की सदस्यता ली. बीजेपी में शामिल होने के बाद गहलोत ने कहा कि आम आदमी पार्टी छोड़ना आसान नहीं था. यह फैसला मैंने एक रात में नहीं लिया. गहलोत ने कहा कि जो लोग ये नैरेटिव बना रहे हैं कि मैंने किसी के दबाव में आकर यह फैसला लिया है तो यह गलत है. मैंने आज तक किसी के भी दबाव में कोई काम नहीं किया. 2015 से मेरे राजनीतिक जीवन में मैंने कभी किसी के दबाव में कुछ काम नहीं किया. ये गलतफहमी है. कैलाश गहलोत ने कहा कि ये जो नैरेटिव बनाया जा रहा है कि मैंने ईडी या सीबीआई के दबाव में आम आदमी पार्टी छोड़ी है तो ये गलत है. मैं पेशे से वकील हूं. मैं वकालत छोड़कर आम आदमी पार्टी से जुड़ा था क्योंकि हमें एक पार्टी में एक व्यक्ति में उम्मीद नजर आई थी. मेरा मकसद सिर्फ लोगों की सेवा करना था. उन्होंने एक दिन पहले ही आम आदमी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दिया था. इस बीच आम आदमी पार्टी के संयोजक ने गहलोत के बीजेपी में शामिल होने के सवाल पर कहा है कि यह उनकी (गहलोत) मर्जी है, वह जहां भी जाएं. गहलोत ने आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल को चिट्ठी लिखकर कहा था कि नया बंगला जैसे कई शर्मनाक और अजीबोगरीब विवाद हैं, जो अब सभी को संदेह में डाल रहे हैं कि क्या हम अभी भी आम आदमी होने में विश्वास करते हैं…अब यह स्पष्ट है कि अगर दिल्ली सरकार अपना अधिकांश समय केंद्र से लड़ने में बिताती है तो दिल्ली के लिए वास्तविक प्रगति नहीं हो सकती. मेरे पास AAP से अलग होने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है और इसलिए मैं आम आदमी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे रहा हूं. बता दें कि कैलाश गहलोत ने AAP पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा था कि एक और दर्दनाक बात यह है कि लोगों के अधिकारों के लिए लड़ने के बजाय हम केवल अपने राजनीतिक एजेंडे के लिए लड़ रहे हैं, इससे दिल्ली के लोगों को बुनियादी सेवाएं प्रदान करने में भी कठिनाई हो रही है… मैंने अपनी राजनीतिक यात्रा दिल्ली के लोगों की सेवा करने की प्रतिबद्धता के साथ शुरू की थी और मैं ऐसा करना जारी रखना चाहता हूं, यही कारण है कि मेरे पास किसी भी पार्टी से अलग होने का कोई विकल्प नहीं बचा है और मैं आम आदमी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे रहा हूं. बता दें कि नजफगढ़ से विधायक गहलोत ने रविवार को तत्काल प्रभाव से मंत्रिपरिषद से इस्तीफा दे दिया था. वह गृह, प्रशासनिक सुधार, आईटी और महिला एवं बाल विकास विभागों के प्रभारी थे. यह घटनाक्रम दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले हुआ है, जो फरवरी में होने हैं.  

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