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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 21 नवंबर को उज्जैन में शासकीय मेडिकल कॉलेज निर्माण के लिए पूजन करेंगे

उज्जैन मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में लंबे समय से शासकीय मेडिकल कॉलेज की मांग उठ रही थी, लेकिन यह इंतजार अब खत्म होने वाला है. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 21 नवंबर को उज्जैन में शासकीय मेडिकल कॉलेज निर्माण के लिए पूजन करेंगे. यह कॉलेज सिंहस्थ के पहले शुरू हो जाएगा. उज्जैन कलेक्टर नीरज कुमार सिंह ने बताया कि भूमि पूजन कार्यक्रम में शहर की जनता, युवा, विद्यार्थी और विभिन्न वर्गों को सम्मिलित करने के प्रयास किए जा रहे है. सभी स्वास्थ्य संस्थाओं को कार्यक्रम के निमंत्रण पत्र भेजे गए हैं. साथ ही शहर के प्रमुख स्थानों पर एलईडी स्क्रीन के माध्यम से संदेश का प्रसारण करवाया जाएगा. हो रही हैं ये तैयारियां इसके अलावा भूमि पूजन कार्यक्रम के पहले विभिन्न संगोष्ठियां आयोजित की जाएंगी. साथ ही नर्सिंग महाविद्यालय और स्कूल शिक्षा विभाग के द्वारा रैलियों का आयोजन भी किया जाएगा. आगामी 20 नंवबर को बाइक रैली के आयोजन की भी तैयारी की जा रही है. बता दें मेडिकल कॉलेज खोले जाने को लेकर उज्जैन को लंबे समय से आश्वासन मिल रहा था, लेकिन मेडिकल कॉलेज की सौगात नहीं मिल पा रही थी.मेडिकल कॉलेज की घोषणा होने के बाद भूमि को लेकर प्रश्न चिन्ह लग गया था. ऐसे में अब मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने स्पष्ट कहा है कि सिंहस्थ 2028 के पहले मेडिकल कॉलेज शुरू हो जाएगा. वर्तमान में उज्जैन में एक निजी मेडिकल कॉलेज है. मिलेंगी ये सुविधाएं इस प्रोजेक्ट के लिए सरकार की ओर से 592.33 करोड़ रूपए दिए गए हैं. इसमें 600 बेड की आधुनिक बिल्डिंग जिसमें जी 13 मंजिल होंगी. यह सभी मॉडर्न उपकरणों से लैस होगी. मेडिकल से संबंधित सभी आवश्यक सुविधाएं और विशेषज्ञ चिकित्सकों के द्वारा रोगियों का इलाज किया जाएगा. इसमें टेली मेडिसिन की सुविधा से अंतर्राष्ट्रीय डॉक्टरों की सुविधा भी मिल सकेगी. आपात स्थिति में भी विशेष स्वास्थ्य सुविधाएं 24 घंटे उपलब्ध रहेगी. शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय का निर्माण जिला चिकित्सालय परिसर और राजे परिसर के पुराने भवनों को तोड़कर किया जाए‌गा. महाविद्यालय में 150 सीटों का 9 मंजिला कॉलेज भवन, 605 बिस्तरों का 10 मंजिला चिकित्सालय भवन के साथ संख्या राजे परिसर में बालक और बालिका छात्रावास, नर्स छात्रावास और रेसिडेंट डॉक्टर्स के लिए छात्रावास और तीन 13 मंजिला भवन और दो 10 मंजिला भवन का निर्माण किया जाना है.

मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ और व्यापक बनाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता: डॉ. मोहन यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ और व्यापक बनाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का मानना है कि आत्मनिर्भर और सशक्त भारत की नींव स्वस्थ नागरिकों से ही सुदृढ़ होगी। प्रधानमंत्री श्री मोदी के विचार को साकार करने के लिए राज्य सरकार हर नागरिक को सुलभ और उन्नत चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। इस दिशा में 21 नवंबर को एक और इतिहास रचने की ओर प्रदेश अग्रसर है जब मुख्यमंत्री डॉ. यादव उज्जैन मेडिकल कॉलेज का भूमिपूजन करेंगे, जो प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को नए आयाम प्रदान करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंहस्थ-2028 की आवश्यकताओं को दृष्टिगत रखते हुए प्रोजेक्ट को प्राथमिकता से पूर्ण किया जायेगा। इससे उज्जैन और आसपास के जिलों के मरीजों को उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी । मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्ष 2003 तक प्रदेश में केवल 5 शासकीय मेडिकल कॉलेज थे, जो अब बढ़कर 17 हो चुके हैं। प्रदेश में एम.बी.बी.एस. सीटें भी 720 से बढ़कर 2,575 हो गई हैं। श्योपुर, सिंगरौली, मंडला और राजगढ़ में निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेजों के साथ-साथ छतरपुर, दमोह और बुधनी में स्ववित्तीय अनुदान से मेडिकल कॉलेज स्थापित किए जा रहे हैं। साथ ही 12 अन्य जिलों में सार्वजनिक जनभागीदारी नीति के तहत मेडिकल कॉलेज खोलने की प्रक्रिया जारी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि 20 नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना से एम.बी.बी.एस. सीटों में 2,000 से अधिक की वृद्धि होगी। भोपाल और ग्वालियर में अस्पताल की बेड कैपेसिटी को 2,500 तक बढ़ाने के साथ-साथ इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और रीवा में सुपरस्पेशलिटी अस्पताल संचालित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि जबलपुर में स्कूल ऑफ एक्सीलेंस इन पल्मोनरी मेडिसिन और इंदौर में स्कूल ऑफ एक्सीलेंस फॉर आई जैसी योजनाएं प्रदेश को चिकित्सा क्षेत्र में अग्रणी बना रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नर्सिंग और पैरामेडिकल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए 14 मेडिकल कॉलेजों में नर्सिंग कॉलेज स्थापित किए जा रहे हैं। वर्तमान में 24 शासकीय नर्सिंग कॉलेज संचालित हो रहे हैं, जो जल्द ही 37 हो जाएंगे। प्रदेश में 250 पैरामेडिकल कॉलेजों में लगभग 25,000 छात्र शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। इसके साथ ही, मध्यप्रदेश देश का एकमात्र राज्य है, जहां मेडिकल की पढ़ाई हिंदी में प्रारंभ की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को उन्नत चिकित्सा सुविधाओं से सुसज्जित किया जा रहा है, ताकि ये जिला अस्पतालों के समान उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर सकें। इसके साथ ही इंडियन पब्लिक हेल्थ स्टैंडर्ड (IPHS) के मानकों के अनुरूप 30,000 से अधिक चिकित्सकीय और सहायक चिकित्सकीय पदों पर भर्ती की जाएगी। उन्होंने कहा कि स्वस्थ नागरिकों से ही आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश का निर्माण संभव है। 592 करोड़ रुपये की लागत से होगा मेडिकल कॉलेज का निर्माण उज्जैन मेडिकल कॉलेज 14.97 एकड़ भूमि पर निर्मित किया जाएगा। निर्माण क्षेत्र 1 लाख 42 हज़ार 34 वर्ग मीटर प्रावधानित है। इसकी कुल लागत 592.3 करोड़ रुपए है। इसमें फायर सेफ्टी के लिए आधुनिक तकनीकों, ऊर्जा दक्षता के लिए एलईडी लाइटिंग, सौर ऊर्जा और ऊर्जा-कुशल एचवीएसी सिस्टम का उपयोग किया गया है। वर्षा जल संग्रहण और अपशिष्ट जल के पुन: उपयोग के साथ सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का भी प्रावधान किया गया है। मेडिकल कॉलेज में फुट ओवर ब्रिज, ग्रंथालय भवन, सर्विस ब्लॉक, एमजीपीएस ब्लॉक और ईएसएस ब्लॉक की सुविधा शामिल हैं। 550 बिस्तरों वाला आधुनिक शिक्षण अस्पताल उज्जैन मेडिकल कॉलेज शिक्षण अस्पताल की क्षमता 550 बेड की है। अस्पताल में 24×7 आपातकालीन सेवाओं, फार्मेसी, रेडियोलॉजी (CT, MRI, X-RAY, फ्लोरोस्कोपी, अल्ट्रासाउंड), जनरल एवं सुपर स्पेशलिटी ओपीडी जैसी सेवाओं से सुसज्जित है। अस्पताल में 550 आई.पी.डी. बिस्तर, ICU और CCU के लिए 70 बिस्तर, 11 मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर, 1 कैथ लैब और 2 एंडोस्कोपी यूनिट उपलब्ध हैं। इसके अलावा, परमाणु चिकित्सा विभाग और 2 रेडियोथेरेपी बंकर (ब्रैकीथेरेपी और सीटी सिम्युलेटर) जैसी उन्नत सुविधाएं भी प्रदान की गई हैं। डॉक्टरों, स्टाफ और जनता के लिए कैफेटेरिया की व्यवस्था भी है। निर्माण कार्य मध्यप्रदेश भवन विकास निगम द्वारा किया जायेगा। 100 एम.बी.बी.एस. सीट की प्रवेश क्षमता उज्जैन मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस छात्रों की प्रवेश क्षमता 100 प्रावधानित है। मेडिकल कॉलेज में 4 अत्याधुनिक लेक्चर थियेटर (प्रत्येक की क्षमता 180) और 2 परीक्षा हॉल (प्रत्येक की क्षमता 250) रहेगी। सेंट्रल लाइब्रेरी, शिक्षण और फैकल्टी क्षेत्र, प्रयोगशाला और कौशल प्रशिक्षण केंद्र के साथ प्रशासनिक भवन, सामान्य कक्ष और मनोरंजन सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी। 380 नर्सिंग विद्यार्थियों के लिए छात्रावास सुविधा का प्रावधान है। इसमें स्टिल्ट पार्किंग, सामान्य कक्ष, मनोरंजन क्षेत्र, डायनिंग हॉल और किचन की सुविधाएं उपलब्ध हैं। यूजी और इंटर्न छात्र एवं छात्राओं के लिए छात्रावास उज्जैन मेडिकल कॉलेज में छात्रों के लिए 329 यूजी और 70 इंटर्न तथा छात्राओं के लिए 286 अंडरग्रेजुएट और 58 इंटर्न की क्षमता वाला छात्रावास रहेगा। इनमें स्टिल्ट पार्किंग, सामान्य कक्ष, मनोरंजन क्षेत्र और डायनिंग सुविधाएं रहेंगी। 145 विद्यार्थियों की क्षमता वाला आरडीएच छात्रावास जिम, डायनिंग हॉल और स्टिल्ट पार्किंग जैसी सुविधाओं से युक्त रहेगा।  

मॉक ऑक्शन में ऋषभ पंत को बेस प्राइस से कई गुना ज्यादा दाम मिला, पंजाब ने ऋषभ पंत को 29 करोड़ में खरीदा

नई दिल्ली आईपीएल 2025 का मेगा ऑक्शन जेद्दा में 24 और 25 नवंबर को होगा. इससे ठीक पहले कई मॉक ऑक्शन हो रहे हैं. टीम इंडिया के पूर्व खिलाड़ी कृष्णम्माचारी श्रीकांत ने भी एक मॉक ऑक्शन करवाया. इसमें ऋषभ पंत को बेस प्राइस से कई गुना ज्यादा दाम मिला. पंत को पंजाब किंग्स ने 29 करोड़ रुपए में खरीदा. वहीं राजस्थान रॉयल्स के पूर्व खिलाड़ी जोस बटलर पर कोलकाता नाइट राइडर्स ने बड़ा दांव लगाया. अर्शदीप सिंह को भी मोटी रकम मिली. दरअसल श्रीकांत ने अपने यूट्यूब चैनल पर एक मॉक ऑक्शन करवाया. इसमें पंत सबसे महंगे बिगे. उन्हें पंजाब ने खरीदा. ऋषभ पंत को दिल्ली कैपिटल्स ने रिलीज कर दिया था. जोस बटलर की बात करें तो उन्हें राजस्थान ने रिटेन नहीं किया. बटलर और पंत को मेगा ऑक्शन में मोटी रकम मिल सकती है. हालांकि ये कहना मुश्किल कि उन्हें कौनसी टीम खरीदने में कामयाब होगी. लेकिन ये दोनों ही खिलाड़ी मॉक ऑक्शन में काफी महंगे बिके. बटलर को 15.50 करोड़ में खरीदा गया. शमी से महंगे बिगे अर्शदीप सिंह – मॉक ऑक्शन में तेज गेंदबाज अर्शदीप सिंह, शमी से ज्यादा महंगे बिके. अर्शदीप सिंह को चेन्नई सुपर किंग्स ने 13 करोड़ रुपए में खरीदा. जबकि शमी को गुजरात टाइटंस ने 11 करोड़ रुपए में खरीदा. गुजरात ने शमी को इस बार के लिए रिटेन नहीं किया है. शमी इंजरी की वजह से बाहर चल रहे थे. लेकिन अब वे मैदान पर वापसी कर चुके हैं. उन्होंने हाल ही में एक घरेलू मैच में घातक गेंदबाजी की. अय्यर-राहुल को भी मिली मोटी रकम – श्रीकांत के मॉक ऑक्शन में श्रेयस अय्यर को दिल्ली कैपिटल्स ने खरीदा. उन्हें 16 करोड़ रुपए मिले. वहीं राहुल पर रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर ने दांव लगाया. केएल राहुल को आरसीबी ने 20 करोड़ रुपए में खरीदा. श्रीकांत के मॉक ऑक्शन में किसे-कितना मिला दाम –     ऋषभ पंत – पंजाब किंग्स – 29 करोड़ रुपए     केएल राहुल – रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर – 20 करोड़ रुपए     श्रेयस अय्यर – दिल्ली कैपिटल्स – 16 करोड़ रुपए     जोस बटलर – कोलकाता नाइट राइडर्स – 15.50 करोड़ रुपए     अर्शदीप सिंह – चेन्नई सुपर किंग्स – 13 करोड़ रुपए     मोहम्मद शमी – गुजरात टाइटंस – 11 करोड़ रुपए  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नई दिल्ली से वर्चुअली देवास में किया सिंथेटिक एथेलेटिक ट्रैक का भूमि-पूजन

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में खेल अधोसंरचना का निरंतर विकास हो रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में इस दिशा में जिस प्रकार कार्य जारी है, उससे प्रदेश के खिलाड़ी विक्रम अवार्ड प्राप्त करने के साथ-साथ एशियाड और ओलंपिक में अवार्ड प्राप्त करने की ओर भी अग्रसर हो रहे हैं। देवास में कुशाभाऊ ठाकरे स्टेडियम और श्रीमंत तुकोजीराव पवार स्टेडियम से कई प्रतिभावान खिलाड़ी प्रदेश व देश को मिले हैं। श्रीमंत तुकोजीराव पवार की जयंती पर देवास को मिल रही सिंथेटिक एथलेटिक ट्रैक की सौगात से खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा निखारने के अधिक अवसर प्राप्त होंगे। देवास में खेल सुविधाओं के विस्तार के लिए निरंतर प्रयास जारी रहेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव कुशाभाऊ ठाकरे स्टेडियम देवास में सिंथेटिक एथलेटिक ट्रैक के भूमि पूजन कार्यक्रम को नई दिल्ली से वर्चुअली संबोधित कर रहे थे। विविध विशेषताओं से समृद्ध है मालवा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देवास, उज्जैन धार और इंदौर को जोड़ते हुए क्षेत्र को वृहद महानगर के रूप में विकसित किया जा रहा है। औद्योगीकरण की दिशा में राज्य सरकार तेज गति से कार्य कर रही है। बदलते दौर में इस क्षेत्र की देश में विशिष्ट पहचान होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देवास में मां तुलजा भवानी और चामुंडा माता दो देवियों का वास है साथ ही क्षेत्र को कैला देवी का भी आशीर्वाद प्राप्त है। अपनी विविध विशेषताओं से समृद्ध मालवा, छत्रपति महाराज शिवाजी के बाद होलकर-पवार-सिंधिया और बाजीराव जी महाराज के माध्यम से हिंदवी सेना द्वारा साम्राज्य पुनर्स्थापित करने के समय से ही स्वाधीन हो गया था। इससे मालवा क्षेत्र के देव-स्थानों की आभा भी बढ़ी। पं. कुमार गंधर्व की उपस्थिति और बैंक नोट प्रेस ने देवास को विशेष महत्व प्रदान किया है। प्रदेश में 114 खेल अधोसंरचना निर्मित, 30 निर्माणाधीन उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश में खेल और युवा कल्याण विभाग द्वारा 114 खेल अधोसंरचना (स्टेडियम/खेल परिसर/इंडोर हॉल) निर्मित किये गये है, 30 खेल अधोसंरचना निर्माणाधीन है। प्रदेश मंव कुल 8 सिंथेटिक एथेलेटिक ट्रैक निर्मित किये गये है। देवास में 9वॉ सिंथेटिक एथेलेटिक ट्रैक कुशाभाऊ ठाकरे स्टेडियम में स्थापित किया जा रहा है। इसके अलावा 3 और एथेलेटिक ट्रैक – इंदौर, रतलाम और छतरपुर में भी स्वीकृत किये गये है। प्रदेश में खेल और युवा कल्याण विभाग द्वारा 12 सिंथेटिक हॉकी टर्फ की स्थापना की गई है तथा 6 सिंथेटिक हॉकी टर्फ निर्माणाधीन है। राज्य सरकार द्वारा “वन डिस्ट्रिक्ट-वन स्पोर्टस काम्पलेक्स” अन्तर्गत सभी जिलों में खेल स्टेडियम का निर्माण किया जावेगा और मुख्यमंत्री खेल अधोसंरचना योजना के तहत सभी विकासखंडो में खेल स्टेडियम बनाने की योजना है। देवास में 9 करोड़ 18 लाख की लागत बनेगा सिंथेटिक एथेलेटिक ट्रैक देवास का कुशाभाऊ ठाकरे स्टेडियम 10.00 एकड़ भूमि में स्थित है। स्टेडियम में बैडमिंटन के 4 सिंथेटिक कोर्ट, बास्केटबॉल के 2 कोर्ट, 25 मीटर स्वीमिंग पुल, ओपन जिम, साफ्टबॉल और शतरंग खेल के अतिरिक्त महिला आत्मरक्षा के लिए कराते प्रशिक्षण संचालित है। स्टेडियम में एथेलेटिक खिलाड़ियों के लिए खेल और युवा कल्याण विभाग द्वारा सिंथेटिक एथेलेटिक ट्रैक की स्थापना 9 करोड़ 18 लाख रुपए की लागत से की जा रही है, जिसमें 400 मीटर सिंथेटिक एथेलेटिक ट्रेक 8 लेन की सुविधा उपलब्ध रहेंगी। खिलाड़ियों के फिटनेस के लिए 26 लाख रुपए के जिम उपकरण भी उपलब्ध कराये जायेंगे। कार्यक्रम से उप मुख्यमंत्री तथा देवास जिले के प्रभारी श्री जगदीश देवड़ा, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री विश्वास सारंग वर्चुअली जुड़े। देवास में हुए कार्यक्रम में देवास सांसद श्री महेन्द्र सिंह सोलंकी, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती लीला अटारिया, विधायक श्रीमती गायत्रीराजे पवार, महापौर श्रीमती गीता दुर्गेश अग्रवाल तथा अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।  

अंबिकापुर में पारा 10 डिग्री, राजधानी में तापमान में 2 से 3 डिग्री की गिरावट आने की संभावना

रायपुर छत्तीसगढ़ में दिवाली के बाद तेजी से पारा गिरता जा रहा है. छत्तीसगढ़ के शिमला कहे जाने वाले अंबिकापुर में पारा 10 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया है. वातावरण में नमी की मात्रा घटने तथा उत्तर से आने वाली शुष्क हवाओं के कारण अगले तीन दिनों में राजधानी में तापमान में 2 से 3 डिग्री की गिरावट आने की संभावना है.   फिलहाल, रायपुर, जगदलपुर में अन्य संभागों से न्यूनतम तापमान अधिक है. राजधानी में दिवाली के बाद ठंड का अहसास हो रहा है, लेकिन मध्य और दक्षिण छत्तीसगढ़ में अभी तक अच्छी ठंड नहीं पड़ रही है. उत्तर छत्तीसगढ़ में रात में अब ठिठुराने वाली ठंड पड़ रही है. अम्बिकापुर में पारा 10 डिग्री तक गिर गया है. मौसम विभाग की माने तो छत्तीसगढ़ में न्यूनतम तापमान में अगले तीन दिनों में 2 से 3 डिग्री की गिरावट आ सकती है. राजधानी रायपुर में भी आने वाले दिनों में पारा गिरने की संभावना है. पश्चिमी विक्षोभ के नहीं गुजरने से फिलहाल, सप्ताहभर बदली- बारिश की संभावना भी कम है. सुबह कोहरा छाने की संभावना मौसम विभाग का कहना है कि वातावरण में नमी होने की वजह से सुबह के समय कोहरा छाने की संभावना है. विजिबिलिटी हजार मीटर से पंद्रह सौ मीटर तक बनी रह सकती है. अधिकतम एवं न्यूनतम तापमान- रायपुर में अधिकतम तापमान 31.6 डिग्री सेल्सियस, बिलासपुर में 29.8 डिग्री सेल्सियस, पेंड्रारोड में 28.4 डिग्री सेल्सियस, अम्बिकापुर में 27.5 डिग्री सेल्सियस, जगदलपुर में 30.2 डिग्री सेल्सियस, दुर्ग में 31.8 डिग्री सेल्सियस एवं राजनांदगांव में 30.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. रायपुर में न्यूनतम तापमान 17.1 डिग्री सेल्सियस, बिलासपुर में 15.9 डिग्री सेल्सियस, पेंड्रारोड में 12 डिग्री सेल्सियस, अम्बिकापुर में 10.1 डिग्री सेल्सियस, जगदलपुर में 17.6 डिग्री सेल्सियस और दुर्ग में 14 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया.

दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले अरविंद केजरीवाल को बड़ा झटका, कैलाश गहलोत का AAP से इस्तीफा

नई दिल्ली दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले पार्टियों में फेर-बदल और जोड़-तोड़ तेज हो गई है। इसी बीच आम आदमी पार्टी को तगड़ा झटका लगा है। आप के नेता कैलाश गहलोत ने पार्टी से इस्तीफा देने के लिए केजरीवाल और दिल्ली की सीएम आतिशी के नाम चिट्ठी लिखी है। गहलोत के पास दिल्ली सरकार में परिवहन मंत्री की जिम्मेदारी थी। गहलोत ने यमुना की सफाई, बीजेपी द्वारा लगाए जा रहे शीशमहल जैसे आरोप और केंद्र सरकार से बढ़ते गतिरोध जैसे मुद्दों पर चिट्ठी में अपनी बात कही है। आइए जानते हैं कि उन्होंने केजरीवाल को क्या लिखा है… यमुना की सफाई करने में रहे असफल केजरीवाल को लिखी चिट्ठी में उन्होंने कहा कि मुझे लोगों की सेवा करने का मौका और मंत्री एवं विधायक का पद मिला, इसके लिए शुक्रिया। इसके अलावा उन्होंने कहा कि आज पार्टी अंदर और बाहर कई तरह की चुनौतियां झेल रही है। उन्होंने एक-एक कर इन्हें गिनाया। उदाहरण के लिए यमुना की सफाई की बात कही। यमुना की सफाई का मुद्दा उठाते हुए कहा कि हमने यमुना साफ करने का वादा किया था, लेकिन हम इसे पूरा नहीं कर पाए। अब यमुना शायद पहले से और ज्यादा प्रदूषित हो गई है। लोगों के अधिकारों के लिए नहीं लड़ पा रहे उन्होंने कहा कि अब शीशमहल जैसे कई शर्मनाक और अजीबोगरीब विवाद सामने निकलकर आ रहे हैं। इनके बाहर आने से सभी लोगों में संदेह पैदा हो रहा है कि क्या हम अब भी आम आदमी होने में विश्वास रखते हैं। मंत्री ने कहा कि एक और दुखद बात है कि आज हम लोगों के अधिकारों के लिए लड़ने के बजाय अपने राजनीतिक एजेंडे के लिए लड़ रहे हैं। इससे दिल्ली के लोगों को बुनियादी जरूरतें देने के हमारी क्षमता को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। आज यह साफ तौर पर दिख रहा है कि हम अपना ज्यादातर समय केंद्र सरकार से लड़ने में बिताते हैं। इससे दिल्ली की वास्तविक प्रगति नहीं हो सकती। आप की प्राथमिक सदस्यता से दिया इस्तीफा गहलोत ने कहा कि मैंने अपनी राजनीतिक पारी की शुरूआत दिल्ली के लोगों की सेवा करने के वायदे से की थी और मैं इसे आगे भी जारी रखना चाहता हूं। यही कारण है कि मेरे पास आम आदमी पार्टी से अलग होने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है। इसलिए मैं आप की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देता हूं। अंत में उन्होंने पूर्व सीएम केजरीवाल के स्वास्थ्य की कामना करते हुए पार्टी के सभी सहयोगियों और शुभचिंतकों को धन्यवाद कहा।

सिर्फ महारानी एलिजाबेथ को हासिल है ये गौरव, पीएम मोदी को नाइजीरिया सरकार ने सम्मान में दी अबुजा शहर की चाबी भेंट

अबुजा. नाइजीरिया सरकार के मंत्री ने पीएम मोदी को सम्मान स्वरूप अबुजा शहर की चाबी भेंट की। दरअसल यह चाबी नाइजीरिया के लोगों द्वारा प्रधानमंत्री मोदी के प्रति दिखाए गए सम्मान और विश्वास का प्रतीक है। नाइजीरिया की सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने शीर्ष सम्मान द ग्रांड कमांडर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द नाइजर से सम्मानित करने का एलान किया है। पीएम मोदी से पहले सिर्फ ब्रिटेन की पूर्व महारानी क्वीन एलिजाबेथ को ही इस सम्मान से सम्मानित किया गया था। वहीं नाइजीरिया 17वां देश है, जो अपने शीर्ष सम्मान से पीएम मोदी को सम्मानित कर रहा है। चीन और नीदरलैंड के बाद नाइजीरिया, भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार देश है। नाइजीरिया में कई गुजराती और सिंधी परिवार बसे हुए हैं। भारत के लिए अहम क्यों है नाइजीरिया नाइजीरिया में तेल और गैस के विशाल भंडार हैं, इस वजह से नाइजीरिया अफ्रीका के अहम देशों में से एक है। भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिहाज से भी नाइजीरिया अहम है। भारत ने नाइजीरिया के ऊर्जा, खनन, फार्मास्यूटिकल्स और सूचना प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में निवेश किया हुआ है और भारत की करीब 150 कंपनियां काम कर रही हैं, जिनका नाइजीरिया में करीब 27 अरब डॉलर का निवेश है। अपनी यात्रा के तीसरे और अंतिम चरण में, मोदी राष्ट्रपति मोहम्मद इरफान अली के निमंत्रण पर 19 से 21 नवंबर तक गुयाना का दौरा करेंगे। यह 50 वर्षों से अधिक समय में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली गुयाना यात्रा होगी। प्रधानमंत्री मोदी की यह पश्चिम अफ्रीकी देश नाइजीरिया की पहली यात्रा है। वे नाइजीरिया, ब्राजील और गुयाना की पांच दिवसीय यात्रा पर हैं। नाइजीरिया से वे ब्राजील जाएंगे। ब्राजील में, वे ट्रोइका सदस्य के रूप में 19वें जी20 शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। प्रधानमंत्री मोदी के साथ ही चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन 18-19 नवंबर को रियो डी जेनेरियो में जी20 शिखर सम्मेलन में भाग लेने वाले नेताओं में शामिल होंगे। एक अन्य पोस्ट में प्रधानमंत्री ने लिखा कि, ‘नाइजीरिया में मराठी समुदाय ने मराठी को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिए जाने पर खुशी जताई। यह वास्तव में सराहनीय है कि वे अपनी संस्कृति और जड़ों से जुड़े हुए हैं।’ गौरतलब है कि पिछले महीने केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा मराठी को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिए जाने वाली कई भाषाओं में से एक थी। नाइजीरिया के राष्ट्रपति टीनूबू ने सोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में लिखा कि वह भारतीय प्रधानमंत्री का स्वागत करने के लिए उत्सुक हैं। हमारी द्विपक्षीय चर्चा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी का विस्तार करना और अहम क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना है। प्रधानमंत्री मोदी, नाइजीरिया में आपका स्वागत है। नाइजीरिया के राष्ट्रपति के सोशल मीडिया पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रधानमंत्री ने लिखा कि ‘धन्यवाद, राष्ट्रपति टीनूबू। थोड़ी देर पहले नाइजीरिया पहुंचा हूं। गर्मजोशी से भरे स्वागत के लिए आभारी हूं। मेरी कामना है कि यह यात्रा हमारे देशों के बीच द्विपक्षीय मित्रता को और गहरा बनाए।’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी तीन देशों की यात्रा के पहले चरण में रविवार को अफ्रीकी देश नाइजीरिया पहुंचे। प्रधानमंत्री मोदी के विमान ने नाइजीरिया के अबुजा में लैंडिंग की, जहां नाइजीरिया सरकार के मंत्री न्येसोम एजेनवो वाइक ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। नाइजीरिया सरकार के मंत्री ने पीएम मोदी को सम्मान स्वरूप अबुजा शहर की चाबी भेंट की। दरअसल यह चाबी नाइजीरिया के लोगों द्वारा प्रधानमंत्री मोदी के प्रति दिखाए गए सम्मान और विश्वास का प्रतीक है। “”In Nigeria, the Marathi community expressed joy at Marathi being conferred the status of a Classical Language. It is truly commendable how they remain connected to their culture and roots. pic.twitter.com/hVDVykAGi2     — Narendra Modi (@narendramodi) November 16, 2024″”

डीआरएम व अधिकारीयों के सहयोग से समय पर हुई शादी, गुवाहाटी में बारात के लिए रेलवे ने रोकी ट्रेन

गुवाहाटी. रेलवे अधिकारियों की मदद से एक नवविवाहित जोड़े की जिंदगी का सबसे बड़ा दिन फीका होने से बच गया। दरअसल रेलवे अधिकारियों की वजह से शादी के लिए मुंबई से गुवाहाटी जा रही बारात समय पर शादी स्थल पर पहुंच सकी। रेलवे अधिकारियों ने बारात को समय पर पहुंचाने के लिए एक ट्रेन को कुछ देर रोक लिया। रेलवे के इस कदम की तारीफ हो रही है। वहीं बारातियों ने भी रेलवे अधिकारियों को धन्यवाद दिया। दरअसल मुंबई से 34 बारातियों को लेकर आ रही मुंबई-हावड़ा गीतांजलि एक्सप्रेस देरी से चल रही थी। इसके चलते बारातियों की कनेक्टिंग ट्रेन हावड़ा-गुवाहाटी सरायघाट एक्सप्रेस के छूटने की स्थिति बन गई। अगर ऐसा होता तो दूल्हे समेत सभी बाराती समय पर शादी स्थल पर नहीं पहुंच पाते। ऐसे में जैसे-जैसे समय बीतता जा रहा था बारातियों का उत्साह, चिंता में बदलता जा रहा था। एक बाराती की समझदारी से हरकत में आया रेलवे स्थिति को देखते हुए बारातियों में शामिल चंद्रशेखर वाघ ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर रेलवे अधिकारियों से मदद की गुहार लगाई। वाघ ने बताया कि गीतांजलि एक्सप्रेस को 1.05 बजे हावड़ा पहुंचना था, जहां से उन्हें शाम चार बजे हावड़ा-गुवाहाटी सरायघाट एक्सप्रेस में सवार होना था, लेकिन गीतांजलि एक्सप्रेस को देरी हो गई और वह चार बजे के बाद ही हावड़ा स्टेशन पहुंच पाई। ट्वीट पर रेलवे के उच्च अधिकारियों ने तुरंत नोटिस लेते हुए हावड़ा के डीआरएम को बारातियों की मदद करने का निर्देश दिया। निर्देश मिलते ही डीआरएम ने तुरंत हावड़ा-गुवाहाटी सरायघाट एक्सप्रेस को थोड़ी देर रोकने के निर्देश दिए और जैसे ही मुंबई-हावड़ा गीतांजलि एक्सप्रेस हावड़ा स्टेशन पहुंची तो सभी बारातियों को बैटरी से चलने वाले वाहन पर सवार कर सरायघाट एक्सप्रेस में बिठाया गया। इसके बाद बाराती समय पर शादी स्थल पर पहुंचे। रेलवे अधिकारियों ने घटना को लेकर कहा कि यह उनकी नैतिक जिम्मेदारी थी। वहीं बारातियों ने भी रेलवे और इसके अधिकारियों की मदद के लिए धन्यवाद दिया।

भारत ने लॉन्ग रेंज हाइपरसोनिक मिसाइल का टेस्ट कर रचा इतिहास, दुनिया को दिखाई अपनी ताकत!

नई दिल्ली रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को कहा कि भारत ने ओडिशा के तट से दूर डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से लंबी दूरी की मारक क्षमता वाली हाइपरसोनिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया है। अधिकारियों के अनुसार, हाइपरसोनिक मिसाइल का शनिवार को परीक्षण किया गया। सिंह ने इस मिसाइल के परीक्षण को एक ऐतिहासिक पल करार दिया और कहा कि इससे भारत उन चुनिंदा देशों के समूह में शामिल हो गया है, जिनके पास ऐसी महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों को विकसित करने की क्षमता है। रक्षा मंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘भारत ने ओडिशा के तट पर डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से लंबी दूरी की मारक क्षमता वाली हाइपरसोनिक मिसाइल का सफल परीक्षण करके एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है।’ उन्होंने कहा, ‘यह एक ऐतिहासिक पल है और इस महत्वपूर्ण उपलब्धि ने हमारे देश को उन चुनिंदा देशों के समूह में शामिल कर दिया है जिनके पास ऐसी महत्वपूर्ण और उन्नत सैन्य प्रौद्योगिकियों की क्षमता है।’ सिंह ने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ), सशस्त्र बलों और उद्योग को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी। क्या है खासियत बता दें कि हाइपरसोनिक मिसाइल को इस हिसाब से डिजाइन किया गया है कि यह 1500 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तक पेलोड को ले जा सके। इसकी खासियत है कि यह लगभग 6174 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से वार करती है। ऐसे में इसका पता लगाना भी मुश्किल हो जाता है। इसे आधुनिक सैन्य प्रौद्योगिकी, प्रतिरोधक झमता और मारक क्षमता से लैस किया गया है।

छत्तीसगढ़ सरकार ने दी संपत्ति खरीद पर मध्यम वर्ग को मिली राहत, अब 15 लाख के सौदे में रजिस्ट्री शुल्क 40 हजार

रायपुर छत्‍तीसगढ़ सरकार ने संपत्ति खरीदी में मध्यम वर्ग को बड़ी राहत दी है। इसके तहत अब किसी भी प्रापर्टी की खरीदी-बिक्री गाइड लाइन दर के अनुसार ही होगी। अगर आप 15 लाख की प्रापर्टी खरीदते है तो भी रजिस्ट्री शुल्क 10 लाख के अनुसार चार प्रतिशत यानि 40 हजार रुपये लगेगा। यानि प्रापर्टी खरीद-बिक्री की सौदे की राशि अधिक भी है तो भी रजिस्ट्री शुल्क गाइडलाइन दर के अनुसार होगी। इससे बैंक लोन पर निर्भर मध्यम वर्गीय परिवार को वास्तविक मूल्य के आधार पर ऋण मिल सकेगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में पिछले दिनों कैबिनेट की बैठक में लिए गए इस फैसले से उन नागरिकों को लाभ होगा, जो बैंक लोन लेकर संपत्ति खरीदते हैं। वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने बताया कि इस संशोधन से मध्यम वर्गीय परिवारों को वास्तविक मूल्य के आधार पर अधिक बैंक लोन लेने में सहूलियत होगी। साथ ही यह निर्णय संपत्ति बाजार में पारदर्शिता व स्पष्टता को बढ़ाने में भी सहायक होगा और इससे वास्तविक मूल्य दर्शाने की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिलेगा। मध्यप्रदेश में भी है छूट देश के अन्य राज्यों में जमीन की गाइडलाइन कीमत या सौदा मूल्य दोनों में से जो ज्यादा हो उस पर पंजीयन शुल्क लगता है। मध्य प्रदेश में गाइडलाइन कीमत से अधिक सौदा मूल्य दर्शाने पर उसमें पंजीयन शुल्क में छूट दी गई है। इसके कारण वहां लोगों में वास्तविक सौदा मूल्य को रजिस्ट्री पेपर में लिखने की प्रवृत्ति में बढ़ोतरी हुई है।   अब तक ऐसा था वर्तमान में किसी संपत्ति का गाइड लाइन मूल्य 10 लाख रुपये है और उसका सौदा 15 लाख रुपये में हुआ। इस पर रजिस्ट्री शुल्क 15 लाख का चार प्रतिशत यानि 60 हजार रुपये लगते थे। अब राज्य सरकार के इस फैसले के बाद 20 हजार रुपये की बचत होगी। यह होगा फायदा, अब नहीं डालेंगे गलत कीमत वर्तमान में किसी संपत्ति का सौदा मूल्य गाइडलाइन मूल्य से बहुत ज्यादा होता है। लेकिन लोग गाइडलाइन मूल्य या इसके आसपास का ही सौदा मूल्य अंकित करते हैं। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि अगर वास्तविक सौदा राशि अंकित कर देंगे, तो पंजीयन शुल्क गाइडलाइन मूल्य या वास्तविक सौदा राशि दोनों में से जो ज्यादा हो उस पर लगेगा। अधिक पंजीयन शुल्क से बचने के लिए लोग गाइडलाइन कीमत या इसके आसपास पूर्णांकित करते हुए सौदा मूल्य डाल देते हैं।अब नियम बदलने के बाद ऐसा नहीं होगा।कम सौदा कीमत दिखाएं जाने से बैंक लोन भी कम मिलता है। इस नीति से आमजनों को न्यायिक प्रकरणों में भी संपत्ति का वास्तविक मूल्य प्राप्त होगा। यदि कभी संपत्ति में कुछ धोखाधड़ी पाई गई तो व्यक्ति विक्रेता से वही मुआवजा पाने का हकदार होता है, जो रजिस्ट्री पेपर में लिखा हुआ।

SDM लिखी स्कॉर्पियो ने ईको कार को टक्कर मार दी, जिससे कार में सवार 2 लोगों की मौत, 5 घायल

खरगोन रविवार सुबह मध्य प्रदेश के खरगोन में भीषण सड़क दुर्घटना हो गई। SDM लिखी स्कॉर्पियो ने ईको कार को टक्कर मार दी, जिससे कार में सवार 2 लोगों की मौत हो गई। 5 लोग घायल हैं, जिनमें स्कॉर्पियो का ड्राइवर भी शामिल है। हादसा रविवार सुबह 6.40 बजे हुआ। मृतकों की पहचान रामलाल और शोभाराम के रूप में हुई है। कार डालकी से बुरहानपुर जा रही थी। कार एक बारात का हिस्सा थी। स्कॉर्पियो गाड़ी बड़वानी जिले के सेंधवा एसडीएम की बताई जा रही है। घायल ड्राइवर का भी इलाज जारी है। हादसा पीडब्ल्यूडी ऑफिस के सामने जवाहर मार्ग के मोड पर हुआ। घायलों को जिला अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। खरगोन कोतवाली पुलिस जांच में जुटी है। पुलिस के अनुसार, खरगोन में डायवर्सन रोड पर SDM लिखी स्कॉर्पियो (MP46T-0923) और ईको वाहन (MP09WD-4439) में तेज टक्कर हुई। दर्दनाक हादसे में जिले के टांडाबरूढ थाने के डालकी निवासी 50 वर्षीय रामलाल मांगीलाल और 49 वर्षीय शोभाराम नत्थू प्रजापत की मौके पर मौत हो गई। परिजनों का रो रो कर बुरा हाल है। कोतवाली थाने के उपनिरीक्षक श्रीराम भूरिया ने बताया कि बारात की कार टांडा बरूड थाने डालकी से बुरहानपुर जा रही थी। इस दौरान डायवर्शन रोड पर पीडब्लूडी कार्यालय के सामने ईको कार और स्कार्पियो कार में भिड़ंत हो गई। एसडीएम लिखी कार को लेकर कोतवाली पुलिस का कहना है कि जांच के बाद ही पता चलेगा कि स्कॉर्पियो कार किसकी थी। कोतवाली थाने में मर्ग कायम कर जांच की जा रही है। बताया जा रहा है की डायवर्सन रोड पर पीडब्ल्यूडी ऑफिस के सामने तेज गति से सेंधवा की ओर जा रही एसडीएम के वाहन ने जवाहर मार्ग के मोड रही ईको कार सीधे टक्कर मारी। 5 घायलों का जिला अस्पताल में उपचार जारी है। सभी खतरे से बाहर बताए जा रहे है। दोनो वाहनों को पुलिस ने मौके से ताबड़तोड़ हटवा दिया है।

प्रदेश में खूब बिक रहा गेहूं का बिजवारा, अब तक हो चुकी 50 फीसदी बोवनी, लोकवन पूर्णा, 513 जैसी किस्म का जोर

उज्जैन  इस वर्ष मालवा की माटी में गेहूं की बंपर पैदावार होने की संभावना है। करीब 4.5 लाख हेक्टेयर में बोवनी की जा रही है। चने की बोवनी का रकबा कम बताया जा रहा है। किसान तेजस, पोषक, 322 किस्म के गेहूं का बीज ज्यादा पसंद कर रहे हैं। बीते तीन वर्षों से किसानों को सोयाबीन भाव ठीक नहीं मिल रहे हैं, जबकि गेहूं के भाव काफी अच्छे मिल रहे हैं। यही कारण है कि किसानों का रुझान चने की बनिस्बत गेहूं की बोवनी पर अधिक है। अब तक हो चुकी 50 फीसदी बोवनी     कृषि विभाग के अनुसार, इस वर्ष 4.50 लाख हेक्टेयर में गेहूं की बोवनी की जा रही है। अब तक 50 फीसद बोवनी हो चुकी है। किसान अधिक उत्पादन के किस्म का गेहूं अधिक बो रहे हैं।     व्यापारी अखिलेश जैन के अनुसार, किसानों ने पोषक, तेजस, 322 किस्म का बिजवारा अधिक खरीदा। इस किस्म के गेहूं का उत्पादन काफी अच्छा बताया जा रहा है।     बीज कंपनी से लेकर व्यापारिक क्षेत्र में यह गेहूं 3300 से 4500 रुपया क्विंटल तक बिक गया। इसके बाद किसानों ने पर्याप्त पानी के चलते लोकवन पूर्णा, 513 जैसी किस्म को बोया है। इनके भाव भी ऊंचे में 4000 रुपया क्विंटल तक रहे। देशावर में खूब बिक रहा गेहूं का बिजवारा इस वर्ष देशावर में गेहूं के बीज की आपूर्ति मालवा क्षेत्र से हो रही है। 322, लोकवन, पूर्णा, पोषक गेहूं के बीजवारे की मांग महाराष्ट्र, पंजाब, बिहार में काफी चल रही है। इस कारण गेहूं के भाव भी ऊंचे हैं। शरबती की बोवनी नगण्य किसी समय में मालवा की माटी का शरबती की मिठास देश के महानगरों में काफी पसंद की जाती थी। मुंबई में इस गेहूं की कीमत 5 से 8 हजार रुपये क्विंटल तक होती थी, लेकिन जिले के सभी क्षेत्र में पानी पर्याप्त मात्रा में होने से किसानों ने शरबती गेहूं की बोवनी से किनारा कर लिया। बता दें इस किस्म का गेहूं काफी कम पानी की पैदावार है। उत्पादन भी अन्य गेहूं की बनिस्बत कम है। अब अधिक उत्पादन पर किसान ध्यान देता है।

जनकपुर-अयोध्या के ऐतिहासिक संबंधों का साक्षी बनेगा श्रीराम का तिलकोत्सव

अयोध्या अयोध्या में भगवान श्रीराम का तिलकोत्सव 18 नवंबर सोमवार को रामसेवकपुरम में भव्य आयोजन के साथ सम्पन्न होगा। यह आयोजन प्रभु श्रीराम और जनकपुर के ऐतिहासिक संबंधों को पवित्रता को पुनः जीवंत करने का एक विशेष अवसर का साक्षी बनने जा रहा है। आयोजनकर्ता ने बताया कि सोमवार दोपहर दो बजे विधि विधान पूर्वक प्रारम्भ होने वाले इस धार्मिक अनुष्ठान में जनकपुर से आए लगभग 300 से अधिक तिलकहरू (शुभचिंतक) और विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति रहेगी। यह आयोजन न केवल धार्मिक परंपराओं को सजीव करेगा, बल्कि भारत और नेपाल के बीच सांस्कृतिक संबंधों को भी मजबूती प्रदान करेगा। इसकी तैयारियां जोरों पर हैं। रामसेवक पुरम परिसर को इस विशेष अवसर के लिए भव्य रूप से सजाया गया है। परंपरागत रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक धरोहर को ध्यान में रखते हुए सभी व्यवस्थाएं की जा रही हैं। जनकपुर से तिलकहरुओं का आगमन 16 नवंबर से ही प्रारंभ हो गया है। उनकी आवभगत और ठहरने की व्यवस्था कारसेवकपुरम, अभयदाता हनुमान आश्रम, विवेक सृष्टि, माता सरस्वती देवी मंदिर और तीर्थ क्षेत्र भवन में की गई है। रामसेवक पुरम के मंच पर 18 वर्षीय युवक को प्रभु श्रीराम के स्वरूप में सज्जित किया जाएगा। श्रीराम स्वरूप को आटे से बने चौक या सिंहासन पर विराजमान किया जाएगा। जनकपुर से आए तिलकहरू परंपरागत वस्तुएं जैसे कांसे के बर्तन, पीली धोती, गमछा, करधनी, हल्दी, चंदन, धान, दूब, पान, इलायची, सुपारी, जनेऊ और चांदी के सिक्के लेकर आएंगे और इन्हें तिलक समारोह के दौरान प्रभु श्रीराम के स्वरूप को भेंट करेंगे। तिलक समारोह में सीता जी के छोटे भाई के रूप में तिलक चढ़ाने की भूमिका जानकी मंदिर, जनकपुर के छोटे महंत रामरोशन दास जी निभाएंगे। वे वेदज्ञ आचार्यों के मंत्रोच्चार के बीच प्रभु श्रीराम के स्वरूप को तिलक अर्पित करेंगे। इस भव्य आयोजन में जनकपुर, मधेश प्रदेश के मुख्यमंत्री सतीश कुमार सिंह अपने आधा दर्जन मंत्रियों के साथ उपस्थित रहेंगे। जनकपुर के महापौर मनोज कुमार शाह और नेपाल के अन्य तीन महापौर भी इस धार्मिक आयोजन के साक्षी बनेंगे। तिलकोत्सव के दौरान अयोध्या की महिलाओं की टोली अवध क्षेत्र के परंपरागत मांगलिक लोकगीत गाएगी, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाएगा। तिलकहरुओं के स्वागत में विशेष भोज का आयोजन किया जाएगा। इसमें स्वादिष्ट आलू टिक्की, पापड़ी चाट, छोला, चावल, पूड़ी, मिक्स सब्जी, रायता, पापड़ और हलवा जैसे व्यंजन परोसे जाएंगे।

दिल्ली LG ने पुलिस को दिए अवैध प्रवासियों की पहचान के आदेश, एक महीने तक स्पेशल ड्राइव चलाने के निर्देश

 नई दिल्ली राजधानी दिल्ली में अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्या और बांग्लादेशियों पर अब जल्द ही कोई बड़ा ऐक्शन हो सकता है। दिल्ली के उपराज्यपाल (एलजी) वी.के. सक्सेना ने दिल्ली पुलिस को राजधानी में अवैध अप्रवासियों की पहचान करने को कहा है। एलजी ने इसके लिए पुलिस को एक महीने तक स्पेशल ड्राइव चलाने का भी निर्देश दिया है। जानकारी के अनुसार, उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने दिल्ली में अवैध अप्रवासियों की संख्या में इजाफा होने की खबरों का संज्ञान लेकर पुलिस को अतिरिक्त सतर्कता बरतने और उनकी पहचान के लिए एक महीने तक अभियान चलाने के निर्देश जारी किए हैं। एलजी ने शुक्रवार को दिल्ली पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिए कि वे राजधानी में अवैध प्रवासियों की पहचान कर केंद्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय कर उन पर कार्रवाई करें। एलजी ऑफिस द्वारा दिल्ली के मुख्य सचिव, पुलिस कमिश्नर, एमसीडी कमिश्नर और एनडीएमसी अध्यक्ष को पत्र लिखकर इस मुद्दे पर चिंता जताते हुए अलर्ट रहने का निर्देश दिया है। पत्र में कहा गया है कि ऐसी खबरें हैं कि अवैध अप्रवासियों के पहचान दस्तावेज जैसे आधार कार्ड, वोटर आईडी कार्ड आदि को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर तैयार करने और हेरफेर करने की प्रक्रिया अपनाने के प्रयास चल रहे हैं। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब दिल्ली में अगले साल फरवरी में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) पर राजधानी में अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्या और बांग्लादेशियों को संरक्षण देने का आरोप लगा रहे हैं। ‘आप’ ने भाजपा पर बोला हमला अवैध प्रवासियों पर उपराज्यपाल की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए दिल्ली की ‘आप’ सरकार ने कहा, “भाजपा केवल राजनीतिक लाभ के लिए अवैध प्रवासियों के मुद्दे का इस्तेमाल करती है। इस बात की गहन जांच होनी चाहिए कि अवैध प्रवासी हमारे देश में कैसे प्रवेश कर रहे हैं। इसके लिए सीधे तौर पर अमित शाह और केंद्रीय गृह मंत्रालय जिम्मेदार हैं।” ‘आप’ ने एक बयान में कहा, “यदि अवैध अप्रवासी हैं, तो कितने हैं? यह एक बड़ी विफलता है तथा ऐसे लोगों पर कार्रवाई ना करना, इसे और अधिक स्पष्ट रूप से उजागर करता है।” ‘आप’ ने कहा, “एक तरफ भाजपा अवैध प्रवासियों को नागरिकता दे रही है और दूसरी तरफ जांच का दिखावा कर रही है। भाजपा को यह पाखंड बंद करना चाहिए और अपनी गंदी राजनीति खत्म करनी चाहिए।” एलजी के पत्र में कहा गया है कि सोशल मीडिया और अन्य विश्वसनीय स्रोतों से प्राप्त कुछ रिपोर्ट बताती हैं कि दिल्ली में अवैध प्रवासियों की संख्या में अचानक वृद्धि हुई है। पत्र में कहा गया है, “ऐसे लोगों द्वारा सार्वजनिक सड़कों, फुटपाथों और पार्कों पर अतिक्रमण भी बढ़ा है। ऐसी खबरें हैं कि उनके पहचान पत्र जैसे आधार कार्ड, चुनाव पहचान पत्र आदि बनाने के लिए फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल और धोखाधड़ी की प्रक्रिया अपनाई जा रही है।” सक्सेना ने कहा, “यदि अवैध प्रवासियों को चुनाव पहचान पत्र जारी किया जाता है तो इससे उन्हें लोकतंत्र का सबसे शक्तिशाली अधिकार अर्थात हमारे देश में वोट देने का अधिकार प्राप्त होगा। अवैध प्रवासियों को ऐसे अधिकार देना किसी भी भारतीय नागरिक द्वारा स्वीकार नहीं किया जाएगा। इस तरह के कदम राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी हानिकारक हो सकते हैं।” सत्यापन में अतिरिक्त सतर्कता बरतें उन्होंने कहा कि मुख्य सचिव संभागीय आयुक्तों के माध्यम से जिलाधिकारियों को पहचान दस्तावेजों के लिए आवेदन करने वाले लोगों के सत्यापन में अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश जारी करें। पत्र में कहा गया है कि पुलिस कमिश्नर क्षेत्रीय स्तर के अधिकारियों को विशेष रूप से सड़क किनारे तथा खाली सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा करके बसे लोगों का निरीक्षण करते समय अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दें। सक्सेना ने कहा कि दिल्ली पुलिस अवैध प्रवासियों की पहचान के लिए एक महीने तक स्पेशल अभियान चलाएगी और केंद्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय करके आगे की कार्रवाई करेगी। उन्होंने कहा कि सभी सरकारी एजेंसियों को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार राजधानी में कहीं भी सार्वजनिक स्थानों पर अनाधिकृत कब्जा न हो।

इंटेलिजेंस रिपोर्ट :बालाघाट, मंडला और डिंडौरी में दाखिल होते हुए नक्सलियों ने माड़ा के जंगल को सेफ जोन बनाया

बालाघाट छत्तीसगढ़ से नक्सलियों को जड़ से उखाड़ने के लिए लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। इस अभियान की वजह से माओवादियों की कमर टूटती नजर आ रही है। नक्सलियों पर हमले की वजह से उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ा है। कार्रवाई की वजह से नक्सली अब मध्य प्रदेश को अपना ठिकाना बना रहे हैं, जिसका खुलासा इंटेलिजेंस की रिपोर्ट में हुआ है। अब इसे ध्यान में रखते हुए मध्य प्रदेश सरकार सतर्क हो गई है। इन तीन जिलों में नक्सली     इंटेलिजेंस रिपोर्ट के मुताबिक, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी में नक्सलियों का नया कैडर तैयार हो रहा है। नक्सली दलम-2 के नाम से इसका विस्तार कर रहे हैं। इसे देखते हुए सीएम मोहन यादव ने केंद्र से सीआरपीएफ (केंद्रीय रिजर्व बल) की 2 बटालियन की मांग की है। बटालियनों को बालाघाट, मंडला और डिंडौरी के घोर नक्सल प्रभावित इलाकों में तैनात किया जाएगा।     जानकारी के मुताबिक, सीआरपीएफ बटालियन के साथ ही इन तीनों जिलों में 220 नई सड़कें बनाने की भी मांग की गई है। तीनों जिलों के नक्सल मूवमेंट वाले इलाकों में आरसीपी (रिगिड कंक्रीट पेवमेंट) से 220 नई सड़कें बनाई जाएंगी। गौरतलब है कि इससे पहले नक्सली कान्हा के रास्ते बालाघाट, मंडला और डिंडौरी में प्रवेश करते रहे हैं। अब सवाल यह उठता है कि नक्सलियों ने माड़ा के जंगल को सेफ जोन क्यों बनाया है, इससे निपटने के लिए सुरक्षा बल क्या रणनीति बना रहे हैं? आइए आपको बताते हैं। बचने के लिए सुरक्षित ठिकाने की तलाश दरअसल, 4 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ के नारायणपुर-दंतेवाड़ा में सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुई थी। इस मुठभेड़ में 31 नक्सली मारे गए थे। इसके चलते छत्तीसगढ़ के पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया था। आपको बता दें कि जब भी सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ होती है तो वे अपने सुरक्षित ठिकाने की तलाश करते हैं ताकि वे सरकार की कार्रवाई से बच सकें। डिंडोरी जिले को क्यों चुनते हैं नक्सली? नक्सल ऑपरेशन से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक एमपी के बालाघाट, मंडला और डिंडोरी जिले को नक्सली अपने सुरक्षित ठिकाने के तौर पर इस्तेमाल करते हैं। इस संबंध में बालाघाट जोन के आईजी संजय कुमार का कहना है कि नक्सलियों ने साल 2015-16 में महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ (एमएमसी) एरिया इसलिए बनाया था क्योंकि यह छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव, खैरागढ़, कवर्धा से लेकर मनेंद्रगढ़ और कोरिया जिले तक फैला हुआ है। संजय कुमार की मानें तो महाराष्ट्र का गोंदिया, छत्तीसगढ़ का राजनांदगांव और एमपी का बालाघाट (जीआरबी) नक्सलियों के एमसीसी एरिया का हिस्सा है, जिसके चलते नक्सली इसे चुनते हैं। केंद्र से मांग इसके अलावा नक्सलियों ने मंडला के कान्हा टाइगर रिजर्व और छत्तीसगढ़ के भोरमदेव अभ्यारण्य को विकसित कर लिया है, जिसे केबी कहते हैं। गौरतलब है कि यह इंटेलिजेंस ब्यूरो के एक अधिकारी की रिपोर्ट का हिस्सा है, जो पिछले दिनों केंद्र सरकार को दी गई थी। इसी रिपोर्ट के आधार पर एमपी सरकार ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ हाल ही में हुई बैठक में सीआरपीएफ की दो बटालियन की मांग की है।

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