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अफ्रीकी देश डोमिनिका PM मोदी को देगा अपना सर्वोच्च राष्ट्रीय पुरस्कार, अवार्ड देने के पीछे की वजह जान लीजिए

 नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अफ्रीका यात्रा से पहले अफ्रीकी देश डोमिनिका ने पीएम मोदी को देश का सबसे बड़ा सम्मान देने की घोषणा की है। कोविड-19 महामारी के दौरान डोमिनिका में उनके योगदान और भारत और डोमिनिका के बीच साझेदारी को मजबूत करने के लिए उनके समर्पण के सम्मान में डोमिनिका पीएम मोदी को अपना सर्वोच्च राष्ट्रीय पुरस्कार ‘डोमिनिका अवार्ड ऑफ ऑनर’ प्रदान करेगा। गुरुवार को एक विज्ञप्ति जारी कर यह ऐलान किया गया है कि डोमिनिका के राष्ट्रमंडल की अध्यक्ष सिल्वेनी बर्टन आगामी भारत-कैरिकॉम शिखर सम्मेलन के दौरान यह पुरस्कार प्रदान करेंगी। यह सम्मेलन 19 से 21 नवंबर तक गुयाना के जॉर्जटाउन में होने वाला है। गौरतलब है कि पीएम मोदी 16 से 21 नवंबर तक के लिए अफ्रीकी देशों के दौरे पर जा रहे हैं। डोमिनिका के प्रधानमंत्री स्केरिट ने पीएम मोदी की जमकर तारीफ भी की है। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी डोमिनिका के सच्चे साथी रहे हैं। खासकर वैश्विक स्वास्थ्य संकट के बीच हमारी जरूरत के समय में। उनके समर्थन के लिए हमारी कृतज्ञता के प्रतीक के रूप में और हमारे देशों के बीच मजबूत संबंधों के प्रतिबिंब के रूप में उन्हें डोमिनिका का सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान प्रदान करना सम्मान की बात है। हम इस साझेदारी को आगे बढ़ाने और अपने साझा दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने के लिए तत्पर हैं।” भारत नें भिजवाईं थी वैक्सीन की 70,000 खुराकें कोरोना महामारी के दौरान फरवरी 2021 में भारत ने डोमिनिका को एस्ट्राजेनेका कोविड-19 वैक्सीन की 70,000 खुराकें भिजवाईं थी। डोमिनिका ने कहा है कि इससे उन्हें अपने साथ साथ पड़ोसी कैरेबियाई देशों की मदद का भी अवसर मिला। विज्ञप्ति में यह भी कहा गया है कि यह पुरस्कार प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में शिक्षा और सूचना प्रौद्योगिकी में डोमिनिका के लिए सतत विकास को बढ़ावा देने में उनकी भूमिका को भी मान्यता देता है। क्या है ये अवार्ड जानिए कॉमनवेल्थ ऑफ डोमिनिका ने अपने लिखे पत्र में कहा कि डोमिनिका का राष्ट्रमंडल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना सर्वोच्च राष्ट्रीय पुरस्कार, डोमिनिका अवार्ड ऑफ ऑनर प्रदान करेगा। यह पुरस्कार कोविड-19 महामारी के दौरान डोमिनिका में उनके योगदान और भारत और डोमिनिका के बीच साझेदारी को मजबूत करने के लिए उनके समर्पण को मान्यता देता है। यह पुरस्कार गुयाना में आगामी भारत-कैरिकॉम शिखर सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति सिल्वानी बर्टन की ओर से प्रदान किया जाएगा। भारत ने दी थी वैक्सीन पत्र में आगे कहा बताया गया कि फरवरी 2021 में, भारत ने उदारतापूर्वक डोमिनिका को एस्ट्राजेनेका कोविड-19 वैक्सीन की 70,000 खुराक दी थी, जिससे डोमिनिका अपने कैरेबियाई पड़ोसियों को समर्थन देने में सक्षम हुआ था। यह पुरस्कार प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, सूचना प्रौद्योगिकी और जलवायु लचीलापन-निर्माण पहल(Climate Resilience Building) में डोमिनिका के लिए भारत के समर्थन को भी स्वीकार करता है। कॉमनवेल्थ ऑफ डोमिनिका के पीएम ने जताया आभार प्रधानमंत्री स्केरिट ने वैश्विक स्वास्थ्य संकट के दौरान प्रधानमंत्री मोदी के महत्वपूर्ण समर्थन पर प्रकाश डालते हुए उनकी एकजुटता के लिए डोमिनिका का आभार व्यक्त किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह पुरस्कार दोनों देशों के बीच मजबूत संबंधों और इस साझेदारी को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। भारत-कैरिकॉम शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे पीएम पुरस्कार की पेशकश को स्वीकार करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने जलवायु परिवर्तन और भू-राजनीतिक संघर्षों जैसी वैश्विक चुनौतियों से निपटने में सहयोग के महत्व पर जोर दिया है। उन्होंने इन मुद्दों को हल करने में डोमिनिका और कैरिबियन देशों के साथ मिलकर काम करने की भारत की प्रतिबद्धता की बात को दोहराया भी है। पीएम मोदी डोमिनिका के प्रधानमंत्री रूजवेल्ट स्केरिट के साथ भारत-कैरिकॉम शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे जो भारत और कैरिकॉम सदस्य देशों के बीच सहयोग के लिए एक मंच है। प्रधानमंत्री मोदी ने पुरस्कार स्वीकार करते हुए जलवायु परिवर्तन और भू-राजनीतिक संघर्ष जैसी वैश्विक चुनौतियों से निपटने में सहयोग के महत्व को रेखांकित किया है। उन्होंने इन मुद्दों से निपटने में डोमिनिका और कैरेबियाई देशों के साथ मिलकर काम करने की भारत की प्रतिबद्धता की पुष्टि की। राष्ट्रपति सिल्वानी बर्टन और प्रधानमंत्री रूजवेल्ट स्केरिट दोनों साझा प्राथमिकताओं पर चर्चा करने और भारत और कैरिकॉम के सदस्य देशों के बीच सहयोग के नए रास्ते तलाशने के लिए भारत-कैरिकॉम शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे।

कांग्रेस के शहजादे विदेश में जाकर खुलेआम बयान देते हैं कि वो आरक्षण को खत्म कर देंगे: पीएम मोदी

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज महाराष्ट्र के दौरे पर हैं। उन्होंने छत्रपति संभाजी नगर में एक सार्वजनिक बैठक को संबोधित करते हुए कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी पर जमकर निशाना साधा। पीएम मोदी ने कहा, “पिछले 10 वर्षों से OBC समाज का प्रधानमंत्री इन्हें बर्दाश्त ही नहीं हो रहा है। कांग्रेस के शहजादे विदेश में जाकर खुलेआम बयान देते हैं कि वो आरक्षण को खत्म कर देंगे।” विकास पर नहीं बटवारे पर भरोसा करती है कांग्रेस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “कांग्रेस पार्टी सरकार बनाने के लिए विकास पर नहीं बटवारे पर भरोसा करती है। कांग्रेस दलितों, पिछड़ों और आदिवासियों को आगे बढ़ने से रोकती है ताकि सत्ता पर पीढ़ी दर पीढ़ी इनका कब्जा बना रहा है इसलिए कांग्रेस शुरू से ही आरक्षण के खिलाफ रही है।” सूखे के खिलाफ ठोस प्रयास शुरू की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “महाविकास अघाड़ी वालों ने महाराष्ट्र के परेशानियों को बढ़ाने के अलावा कोई काम नहीं किया है। मराठवाड़ा में लंबे समय से पानी का संकट रहा है लेकिन कांग्रेस और अघाड़ी वाले हमेशा हाथ पर हाथ धरे रहें। हमारी सरकार में पहली बार सूखे के खिलाफ ठोस प्रयास शुरू की।” 20 नवंबर को होंगे महाराष्ट्र में चुनाव महाराष्ट्र की 288 विधानसभा सीटों के लिए चुनाव प्रचार तेज हो गया है और सत्तारूढ़ महायुति और विपक्षी महा विकास अघाड़ी (एमवीए) दोनों ही मतदाताओं को लुभाने के प्रयास कर रहे हैं। मतदान 20 नवंबर को होना है और मतगणना 23 नवंबर को होगी। 2019 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 105 सीटें जीतीं, शिवसेना ने 56 और कांग्रेस ने 44 सीटें जीतीं। 2024 के लोकसभा चुनाव में एमवीए ने 48 में से 30 सीटें जीतकर मजबूत प्रदर्शन किया, जबकि महायुति केवल 17 सीटें जीत सकी।

शहडोल में बिरसा मुंडा जंयती पर जनजातीय कार्यक्रम की तैयारी पूर्ण, PM वर्चुअली संबोधित करेंगे

शहडोल भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर शुक्रवार 15 नवंबर को आयोजित कार्यक्रम शहडोल के बाणगंगा मेला मैदान में होना है। इस कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, उपमुख्यमंत्री और जिले के प्रभारी मंत्री राजेंद्र शुक्ला प्रमुख रूप से शिरकत करेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कार्यक्रम को वर्चुअली संबोधित करेंगे। इसमें 50 हजार लोगों के पहुंचने की उम्मीद है, जिसके लिए कार्यक्रम स्थल पर टेंट और कुर्सियों की व्यापक व्यवस्था की गई है। बाणगंगा मेला मैदान में कार्यक्रम की तैयारियों का जायजा कलेक्टर डॉ. केदार सिंह ने लिया। उन्होंने अलग-अलग विभागों के अधिकारियों को बुलाकर स्थल का निरीक्षण किया और व्यवस्थाओं पर चर्चा की। इस दौरान पुलिस अधीक्षक कुमार प्रतीक भी मौजूद थे और उन्होंने पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ स्थल का निरीक्षण किया। भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर आयोजित इस कार्यक्रम में राज्यपाल मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सुरक्षा व्यवस्था के लिए 700 से अधिक सुरक्षा बलों की तैनाती की जाएगी। जिले में मौजूद 250 बलों के अलावा अन्य जिलों से 336 पुलिसकर्मी बुलाए गए हैं। इसके साथ ही दो कंपनियों और अनूपपुर एवं उमरिया जिलों से 40-40 बलों की व्यवस्था की गई है। बाहरी जिलों से एक अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक और चार डीएसपी स्तर के अधिकारी भी मौजूद रहेंगे। सुरक्षा बल हैलीपैड से लेकर पूरे मार्ग और मंच तक हर जगह तैनात रहेंगे। कार्यक्रम के दौरान यातायात को डायवर्ट कर दिया गया है। डीएसपी यातायात मुकेश दीक्षित ने बताया कि कटनी और अनूपपुर की ओर आने-जाने वाले वाहनों को बाहरी रास्ते से जाना पड़ेगा। वीआईपी कार्यक्रम के चलते शहर के वाहनों को भी बाहरी मार्ग से निकालने की व्यवस्था की गई है। वीआईपी आगमन के लिए चार स्थानों पर पार्किंग की व्यवस्था की गई है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 15 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस मनाने के लिए बिहार के जमुई का दौरा करेंगे. प्रधानमंत्री सुबह करीब 11 बजे भगवान बिरसा मुंडा के सम्मान में एक स्मारक सिक्का और डाक टिकट का अनावरण करेंगे. पीएम इस दौरान 6,640 करोड़ रुपये से अधिक की कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी करेंगे. प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान के तहत बने 11,000 आवास के गृह प्रवेश समारोह में भाग लेंगे. पीएम आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य देखभाल की पहुंच बढ़ाने के लिए पीएम-जनमन के तहत शुरू की गई 23 मोबाइल मेडिकल यूनिट और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत अतिरिक्त 30 एमएमयू का भी उद्घाटन करेंगे. 10 एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों का उद्घाटन इसके अलावा प्रधानमंत्री आदिवासी उद्यमशीलता को बढ़ावा देने और आजीविका में मदद के लिए 300 वन धन विकास केंद्रों का उद्घाटन करेंगे. साथ ही आदिवासी छात्रों के लिए करीब 450 करोड़ रुपये की लागत से 10 एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों का उद्घाटन करेंगे. वे मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा और जबलपुर में दो आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालयों और श्रीनगर, जम्मू और कश्मीर और गंगटोक, सिक्किम में दो आदिवासी शोध संस्थानों का भी उद्घाटन करेंगे, ताकि आदिवासी समुदायों के समृद्ध इतिहास और विरासत का दस्तावेजीकरण और संरक्षण किया जा सके. नई सड़कों और सामुदायिक केंद्रों का शिलान्यास प्रधानमंत्री मोदी जनजातीय क्षेत्रों में कनेक्टिविटी सुधारने के लिए 500 किलोमीटर नई सड़कों और सामुदायिक केंद्रों के रूप में काम करने वाले 100 बहुउद्देश्यीय केंद्रों की आधारशिला रखेंगे. वे जनजातीय बच्चों की शिक्षा के लिए 1,110 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाले 25 अतिरिक्त एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों की आधारशिला भी रखेंगे.

खाद्य मंत्री राजपूत ने प्रस्तावित मिलर्स नीति के संबंध में मिलर्स से की चर्चा

भोपाल अच्छी एवं समय पर मिलिंग करने वाले‍मिलर्स को प्रोत्साहित किया जायेगा, साथ ही गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जायेगा। गुणवत्ता के लिये जहां जरूरी होगा, वहां सख्ती भी की जायेगी। मिलर्स नीति के संबंध में आपके द्वारा दिये गये सुझावों पर सकारात्मक रूप से विचार करेंगे। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत ने यह बात खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 की प्रस्तावित मिलिंग नीति के संबंध में मिलर्स से चर्चा के दौरान कही। मंत्री राजपूत ने कहा कि मिलर्स की सुविधा के लिये वेयर हाउस, नॉन एवं खाद्य संचालनालय में नोडल अधिकारी बनाये जायेंगे। हमारी पूरी टीम आपका पूरा सहयोग करेगी। मिलर्स साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दें। खाद्य मंत्री राजपूत ने बताया कि इस वर्ष उपार्जन का कार्य नोडल एजेंसी नागरिक आपूर्ति निगम के साथ-साथ एनसीसीएफ एवं केन्‍द्रीय भण्‍डारण के द्वारा भी किया जाएगा। किसानों की सुविधा एवं अन्‍य समस्‍याओं के निराकरण के लिए तथा समन्‍वय के लिए मिलिंग नीति 2024-25 का प्रारूप खाद्य आयुक्त के देखरेख में तैयार किया जाएगा। इसके अलावा खाद्य आयुक्‍त समय सीमा में मिलिंग कार्य कराने की समस्‍त कार्रवाई अपनी निगरानी में पूर्ण करायेगें। उपार्जन केन्द्र में रखा जायेगा मॉयश्चर मीटर खाद्य मंत्री राजपूत ने कहा कि उपार्जन केन्द्रों में धान की नमी चेक करने के लिये मॉयश्चर मीटर रखा जायेगा। नमी चेक करने के बाद ही एफएक्यू के आधार पर धान की खरीदी की जायेगी। उन्होंने कहा कि मिलर्स उपार्जन केन्द्र से सीधे धान उठायें। इससे परिवहन एवं भण्डारण व्यय में कमी आयेगी। मिलर्स के लंबित भुगतान एवं अपग्रेडेशन राशि के संबंध में जल्द काईवाई की जायेगी। बैठक में खाद्य आयुक्‍त सिबी चक्रवर्ती ने बताया कि इस वर्ष गत वर्षो से दोगुनी मात्रा से अधिक मात्रा में चावल का परिदान भारतीय खाद्य निगम को किया जाना है। भारतीय खाद्य निगम को नियत समय सीमा में चावल का परिदान के लिये विभाग के पोर्टल पर पंजी‍कृत मिलर्स को उनकी मिलिंग क्षमता के अनुसार चावल परिदान की जानकारी दर्ज करनी होगी। इस आधार पर ही मिलर्स के लिये भारतीय खाद्य निगम में चावल परिदान की कार्य योजना तैयार की जाऐगी। एमडी नागरिक एवं आपूर्ति निगम पी.एन. यादव ने प्रस्तावित नीति 2024-25 के प्रावधानों के बारे में जानकारी दी। प्रस्तावित नीति के संबंध में मिलर्स ने महत्वपूर्ण सुझाव दिये। इस दौरान प्रमुख सचिव खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण श्रीमती रश्मि अरूण शमी, अन्य अधिकारी तथा मिलर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधि उपस्थित थे।  

बीएमएचआरसी का एम्स में नहीं होगा विलय, हाई कोर्ट के निर्देश के बाद केंद्र ने दी जानकारी

भोपाल /जबलपुर  भोपाल गैस त्रासदी के संबंध में दायर याचिकाओं की सुनवाई करते हुए केन्द्र सरकार ने हाईकोर्ट के जस्टिस संजीव सचदेवा तथा जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ को बताया कि डिजिटाइजेशन के लिए टेंडर आमंत्रित किये गये थे. लेकिन सिर्फ एक कंपनी द्वारा निविदा प्रस्तुत किये जाने के कारण इसे रद्द कर दिया गया है. सरकार शीघ्र ही दूसरा टेंडर जारी करेगी. युगलपीठ ने याचिका पर अगली सुनवाई 9 दिसम्बर को निर्धारित की है. गैस पीड़ितों के उपचार व पुनर्वास के संबंध में 20 निर्देश गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने साल 2012 में भोपाल गैस पीड़ित महिला उद्योग संगठन की ओर से दायर याचिका की सुनवाई करते हुए भोपाल गैस पीड़ितों के उपचार व पुनर्वास के संबंध में 20 निर्देश जारी किए थे. इनका क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए मॉनिटरिंग कमेटी का गठन किया गया. कोर्ट के निर्देश थे कि मॉनिटरिंग कमेटी प्रत्येक 3 माह में अपनी रिपोर्ट हाईकोर्ट के समक्ष पेश करेगी. इसके बाद पेश रिपोर्ट के आधार पर हाईकोर्ट द्वारा केन्द्र व राज्य सरकार को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे. इसी मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई जारी है. बीएमएचआरसी में कितने मेडिकल स्टाफ की नियुक्ति इसी के साथ याचिका के लंबित रहने के दौरान मॉनिटरिंग कमेटी की अनुशंसाओं का परिपालन नहीं किए जाने के खिलाफ भी अवमानना याचिका 2015 में दायर की गई. याचिका पर पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से बताया गया था कि बीएचएमआरसी में डॉक्टरों व पैरामेडिकल स्टाफ के निर्धारित पदों में 70 प्रतिशत से अधिक की नियुक्ति कर दी गयी है. बीएमएचआरसी को एम्स में मर्ज करने का मामला इसी दौरान याचिकाकर्ता की तरफ से मांग की गई कि बीएचएमआरसी को एम्स में मर्ज नहीं किया जाए. मर्ज की मांग को संसदीय बोर्ड में चर्चा के बाद उसे केन्द्र लोक स्वास्थ्य एव परिवार कल्याण विभाग को भेजा गया. केन्द्र लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने पूर्व में ही मर्ज नहीं किये जाने के संबंध में निर्णय लिया है. युगलपीठ ने बीएचएमआरसी को एम्स में मर्ज नहीं किये जाने के संबंध में लिखित जवाब पेश करने के निर्देश जारी किए हैं. सरकार की तरफ से अधिवक्ता विक्रम सिंह ने पैरवी की. हर तीन माह में रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट ने 2012 में भोपाल गैस पीड़ित महिला उद्योग संगठन सहित अन्य की ओर से दायर याचिका की सुनवाई करते हुए गैस पीड़ितों के उपचार व पुनर्वास के संबंध में 20 दिशा-निर्देश दिए थे। इनका क्रियान्वयन सुनिश्चित करने कमेटी भी गठित की थी। कोर्ट ने कमेटी को हर तीन माह में रिपोर्ट हाई कोर्ट में पेश करने कहा था।  दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने साल 2012 में भोपाल गैस पीड़ित महिला उद्योग संगठन सहित अन्य की ओर से प्रस्तुत जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए भोपाल गैस पीड़ितों के उपचार व पुनर्वास के संबंध में 20 दिशा निर्देश जारी किए थे। इन बिंदुओं का क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए निगरानी समिति भी गठित की थी। कोर्ट ने निर्देश दिए थे कि निगरानी समिति प्रत्येक तीन माह में अपनी रिपोर्ट हाई कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करेगी। पेश रिपोर्ट के आधार पर हाई कोर्ट द्वारा केंद्र व राज्य सरकार को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। इस मामले के लंबित रहने के दौरान निगरानी समिति की अनुशंसाओं का परिपालन न किए जाने के विरुद्ध अवमानना याचिका 2015 में दायर की गई थी। पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से बताया गया था कि बीएचएमआरसी में डॉक्टरों व पैरामेडिकल स्टाफ के निर्धारित पदों में 70 प्रतिशत से अधिक की नियुक्ति कर दी गई है। एक याचिकाकर्ता की ओर से आवेदन दायर करते हुए मांग की गई थी कि बीएचएमआरसी को एम्स में विलय नहीं किया जाए।  

केंद्र सरकार का मणिपुर में हिंसा पर बड़ा फैसला, जिरीबाम समेत 6 पुलिस थाना क्षेत्रों में फिर लगा AFSPA

इंफाल केंद्र सरकार ने मणिपुर में हिंसा को लेकर बड़ा कदम उठाया है. हिंसा प्रभावित जिरीबाम समेत छह पुलिस थाना क्षेत्रों में केंद्र सरकार ने सशस्त्र बल (विशेष शक्तियां) अधिनियम (AFSPA) को फिर से लागू कर दिया है. इस अधिनियम के तहत किसी क्षेत्र को अशांत घोषित किया जाता है और सुरक्षा बलों को विशेष सुविधाएं प्रदान की जाती हैं. केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से गुरुवार को अधिसूचना जारी की गई है. इस अधिसूचना में कहा गया है कि जातीय हिंसा के कारण वहां लगातार अस्थिर स्थिति है. केंद्र सरकार की ओर से इंफाल पश्चिम जिले में सेकमाई और लामसांग, इंफाल पूर्व जिले में लामलाई, जिरीबाम जिले में जिरीबाम, कांगपोकपी में लेइमाखोंग और बिष्णुपुर में मोइरांग के पुलिस थाना क्षेत्रों में AFSPA को फिर से लागू किया गया है. गृह मंत्रालय ने मणिपुर के पांच जिलों (इंफाल पश्चिम, इंफाल पूर्व, जिरीबाम, कांगपोकपी और बिष्णुपुर) के छह पुलिस स्टेशनों में सशस्त्र बल (विशेष शक्तियां) अधिनियम, 1958 को तत्काल प्रभाव से 31 मार्च, 2025 तक बढ़ा दिया है. नया आदेश मणिपुर सरकार के फैसले के बाद आया है. राज्य सरकार ने 1 अक्टूबर को पूरे राज्य में AFSPA लागू किया था. उसके अनुसार इन छह सहित 19 पुलिस थाना क्षेत्रों को छोड़कर बाकी सभी शामिल हैं. एक अक्टूबर को मणिपुर सरकार ने जारी किया था आदेश मणिपुर सरकार के 1 अक्टूबर के AFSPA लगाने के आदेश से बाहर रखे गए पुलिस स्टेशन इम्फाल, नाम्बोल, मोइरंग, काकचिंग, लाम्फाल, सिटी, सिंगजामेई, लामलाई, इरिलबंग, सेकमाई, लामसांग, पटसोई, वांगोई, पोरोमपत, हेइंगंग, लेइमाखोंग, थौबल, बिष्णुपुर और जिरीबाम आदि शामिल हैं. मणिपुर के जिरीबाम जिले में एक पुलिस स्टेशन और एक निकटवर्ती सीआरपीएफ शिविर पर छद्म वर्दी पहने और अत्याधुनिक हथियारों से लैस उग्रवादियों द्वारा अंधाधुंध गोलीबारी करने के बाद सोमवार को सुरक्षा बलों के साथ भीषण मुठभेड़ में ग्यारह संदिग्ध उग्रवादी मारे गए थे. एक दिन बाद, उसी जिले से सशस्त्र उग्रवादियों ने महिलाओं और बच्चों सहित छह नागरिकों का अपहरण कर लिया था. इसके बाद सशस्त्र उग्रवादियों ने दो लोगों को जलाकर मार डाला था. मणिपुर हिंसा में 200 से अधिक लोगों की हुई है मौत एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी का कहना है कि जिन लोगों का अपहरण किया गया है, उनमें 13 मैतेई समुदाय से थे, और जून में अपने घरों से विस्थापित हो गए थे और अपनी सुरक्षा के लिए मुठभेड़ स्थल जकुरधोर और बोरोबेक्रा पुलिस स्टेशन में सीआरपीएफ कैंप के आसपास रह रहे थे. बता दें कि मई में पिछले साल मई से इम्फाल घाटी स्थित मैतेईस और आसपास के पहाड़ी इलाकों में रहने वाले कुकी-जो समूहों के बीच जातीय हिंसा में 200 से अधिक लोग मारे गए हैं और हजारों लोग बेघर हो गए हैं. जातीय रूप से विविधतापूर्ण जिरीबाम, जो इम्फाल घाटी और आसपास की पहाड़ियों में संघर्षों से काफी हद तक अछूता रहा है, इस साल जून में एक खेत में एक किसान का क्षत-विक्षत शव मिलने के बाद इस इलाके में भी हिंसा भड़क उठी है.

प्रधानमंत्री मोदी प्रदेश के 2 जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालयों का करेंगे लोकार्पण : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

राष्ट्रीय जनजातीय गौरव दिवस भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 15 नवम्बर को बिहार के जमुई में राष्ट्रीय जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल होंगे। प्रधानमंत्री मोदी कार्यक्रम में मध्यप्रदेश के 2 जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालयों का वर्चुअली लोकार्पण करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी छिंदवाड़ा के बादल भोई जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय एवं जबलपुर के राजा शंकर शाह और रघुनाथ शाह स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय को राष्ट्र को समर्पित करेंगे। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री मोदी ने 15 अगस्त 2016 को देश के विभिन्न प्रदेशों में जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को समर्पित संग्रहालय के निर्माण की घोषणा की गई थी। बादल भोई जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय, छिंदवाड़ा छिंदवाड़ा शहर में स्थित बादल भोई जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय भवन का निर्माण 40 करोड़ 69 लाख रूपये की लागत से लोक निर्माण विभाग द्वारा किया गया है। यहां क्यूरेशन का कार्य जनजातीय कार्य विभाग के अधीन वन्या संस्थान द्वारा किया गया है। इसका निर्माण पुराने जनजातीय संग्रहालय की उपलब्ध भूमि पर ही किया गया है। यह स्थल पेंच-पचमढ़ी मार्ग पर स्थित है। संग्रहालय के आस-पास कई दर्शनीय तथा जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम से संबंधित महत्वपूर्ण स्थल भी हैं। नवीन जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय भवन में 6 गैलरी, एक कार्यशाला कक्ष तथा एक लाइब्रेरी के अलावा कार्यालय के लिये समुचित स्थान भी उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त 800 दर्शकों की क्षमता वाले ओपन एयर थिएटर, शिल्प बाजार (शिल्पग्राम) एवं ट्राइबल कैफेटेरिया का निर्माण भी यहां किया गया है। इसी परिसर में स्थित पुराने जनजातीय संग्रहालय का नवीनीकरण भी किया गया है, जिसमें जनजातीय संस्कृति से संबंधित विभिन्न प्रादर्श रखे हुए हैं। नवीन जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय में प्रदेश के 9 मुख्य जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम तथा 16 जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का वर्णन एवं जीवंत चित्रण किया गया है। प्रथम गैलरी रानी दुर्गावती को समर्पित की गई है, जिसमें रानी दुर्गावती के जीवन, उनके शासन और उनके बाहरी आक्रमणकारियों से संघर्ष को प्रदर्शित किया गया है। ब्रिटिश शासन काल में अंग्रेज सरकार द्वारा गोंड राज्यों को अपने अधीन लेने के खिलाफ गोंड राजाओं द्वारा किये गये संघर्ष का चित्रण गैलरी-2 में किया गया है। ब्रिटिश सरकार द्वारा वर्ष 1927 में इंडियन फारेस्ट एक्ट लागू किया गया था, जिसके विरोध में जनजाति समाज द्वारा किये गये संघर्ष का चित्रण गैलरी-3 में “जंगल सत्याग्रह” के रूप में प्रदर्शित किया गया है। चौथी गैलरी में भील-भिलाला जनजाति, जो गोरिल्ला युद्ध में बेहद पारंगत थी उनका ब्रिटिश सरकार के विरूद्ध किया गया संघर्ष चित्रित किया गया है। इस गैलरी में भीमा नायक, खाज्या नायक और टंट्या भील जैसे वीरों का संघर्ष चित्रित है। गैलरी-5 एवं 6 समय-समय पर पेंटिंग एवं फोटो एग्जीबिशन के लिए आरक्षित की गई हैं। राजा शंकर शाह और रघुनाथ शाह स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय, जबलपुर अद्वितीय वीरता और अदम्य साहस के प्रतीक राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह के सम्मान में राज्य सरकार और केन्द्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय के सहयोग से वर्ष 2021 में जबलपुर में संग्रहालय का निर्माण किया गया। इसका नामकरण राजा शंकर शाह और रघुनाथ शाह स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय किया गया है। एक एकड भूमि पर निर्मित इस संग्रहालय में 14 करोड़ 26 लाख रूपये की लागत से भारतीय सांस्कृतिक निधि (इनटेक, नई दिल्ली) द्वारा संग्रहालय भवन का जीर्णोद्वार एवं क्यूरेशन का कार्य किया गया है। यह संग्रहालय परिसर ऐतिहासिक महत्व रखता है, क्योंकि यहीं पर राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह को उनके बलिदान से चार दिन पहले कैद करके रखा गया था। इस ऐतिहासिक महत्व की इमारत को पारम्परिक संरक्षण विधि से उसके मूल स्वरूप में पुन: र्निमित किया गया है, ताकि राजा शंकर शाह एवं कुंवर रघुनाथ शाह के बलिदान का प्रतीक यह स्थल भावी पीढियों के लिए प्रेरणा और गर्व का स्थायी स्रोत बना रहे। संग्रहालय की पहली दीर्घा में गोंड जनजातीय संस्कृति को प्रदर्शित किया गया है। दूसरी दीर्घा 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने वाले मध्यप्रदेश के जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के बलिदान को समर्पित है। तीसरी दीर्घा को राजा शंकरशाह के दरबार हाल के रूप में प्रदर्शित किया गया है, जिसमें राजा शंकरशाह और कुंवर रघुनाथ शाह के बलिदान की कहानी को फिल्म के जरिये प्रदर्शित किया गया है। राजा एवं कुंवर के बलिदान के बाद उनकी रानियों के एवं 52वीं रेजीमेंट के विद्रोह को अगली गैलरी में प्रदर्शित किया गया है। अंतिम गैलरी में थ्री-डी होलोग्राम के माध्यम से राजा एवं कुंवर को श्रृद्धांजलि दी गयी है। जिस परिसर में राजा एवं कुंवर को कैद करके रखा गया था, उस जेल भवन में उनकी प्रतिमाएं भी स्थापित की गई हैं। जनजातीय समुदाय के लोग इस स्थल को पवित्र मानते हैं और नियमित रूप से यहां श्रृद्धांजलि अर्पित करने आते हैं।  

ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने रात्रि में लगाई चौपाल और किया रात्रि विश्राम

ग्वालियर ग्वालियर उप नगर के बरा गांव में नगर निगम के कचरा संग्रहण केन्द्र में लगी आग से फैले प्रदूषण से लोगों को सांस लेने में आ रही परेशानी की शिकायत मिलने के बाद ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने रात्रि 12 बजे ही ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर अग्नि शमन वाहन पर चढ़कर आग पर काबू किया। उन्होंने प्रशासन और नगर निगम के अधिकारियों को निर्देशित किया कि भविष्य में इस तरह की घटना की पुनरावृत्ति न हो। इसके पुख्ता इंतजाम किए जाएं। उल्लेखनीय है कि ग्वालियर उप नगर के वार्ड क्रमांक-1 के बरा गांव के समीप खदान के गड्ढे को नगर निगम द्वारा कचरा संग्रहण के रुप में उपयोग किया जा रहा था। इसके कचरे में आग लगने से बरा गांव सहित आस-पास के किशन बाग, जाटव पुरा,तिरउआ पुरा, लक्ष्मीपुरम, न्यू किशन बाग तथा पादरी मोहल्ले में प्रदूषण फैलने लगा और यहां के रहवासियों को सांस लेने में परेशानी होने लगी। यह जानकारी जैसे ही ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर को लगी। उन्होंने बिना समय गंवाए प्रशासन और नगर निगम अधिकारियों को आग पर नियंत्रण के निर्देश दिए और अधिकारियों के पहुंचने से पहले स्वयं मौके पर पहुंचकर अग्निशमन वाहन पर चढ़कर आग बुझाने का प्रयास किया। ऊर्जा मंत्री तोमर ने इस दौरान आसपास के हर घर में दस्तक देकर उनकी समस्याएं सुनी और उनका समाधान भी किया। उन्होंने हालात की गंभीरता को देखते हुए रात्रि विश्राम लक्ष्मीपुरम में ही करने का निर्णय लिया। इस दौरान उन्होंने सड़क किनारे ही टेंट लगाकर अपनी चौपाल लगाई तथा लोगों की समस्याओं को सुना और जन-सेवा के संकल्प को निभाते हुए, तत्काल समाधान के लिए जिला प्रशासन और नगर निगम के अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। रात्रि विश्राम के बाद गुरुवार सुबह ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने जाटव पुरा स्थित बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर की प्रतिमा पर पहुंचकर पुष्पांजलि अर्पित की। तदोपरांत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सेवा ही संकल्प स्वच्छता अभियान के तहत जाटव पुरा में झाड़ू लगाकर सफाई की। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि साफ -सफाई हमारे जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है, इसलिए अपने क्षेत्र को साफ रखें और निरोगी जीवन का आनंद ले। इसके बाद श्रीमती नर्मदा शाक्य के घर जाकर सुबह के नाश्ते में पूड़ी सब्जी खाई। आज भी बरा गांव में चौपाल लगाएंगे ऊर्जा मंत्री ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर बुधवार को बरा गांव खदान गड्ढा पर घटित अग्नि की घटना से उत्पन्न प्रदूषण के हालात के चलते गुरुवार की रात्रि भी बरा गांव खदान गड्ढा के पास चौपाल लगाकर जनसुनवाई करेंगे। इस दौरान जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन, नगर निगम सहित अन्य विभागों के अधिकारी मौजूद रहेंगे।  

सरकार ने बढ़ाया गेहूं का समर्थन मूल्य, पोर्टल पर अभी रजिस्ट्रेशन कराएं किसान

भोपाल  भारत सरकार ने इस साल गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य 2425 रुपए क्विंटल निर्धारित किया है, जिससे किसानों को बीते साल की तुलना में इस साल प्रति क्विंटल गेंहू पर 150 रुपए अतिरिक्त मिलेंगे. बता दें, साल 2025-26 के लिए भारत सरकार ने गेंहू का न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी 2425 रुपए निर्धािरत किया है. भारत सरकार ने साल 2025-26 के लिए रबी फसल गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2425 रुपए घोषित किया है, जिससे बीते साल की तुलना में इस साल से 150 रुपए अधिक में गेहूं की खरीदी होगी. नए समर्थन मूल्य पर गेंहू खरीदी के लिए सरकार ने तैयारी भी शुरू कर दी है. गेंहू खरीदी के लिए प्रदेश में स्थापित किए जाएंगे गेंहू उपार्जन केंद्र रिपोर्ट के मुताबिक रबी विपणन वर्ष 2025-26 के लिए अब किसानों से समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीदी के लिए बारदाना, भंडारण, परिवहन की व्यवस्था की जा रही है. गेंहू खरीदी के लिए प्रदेश में गेंहू उपार्जन केंद्र भी स्थापित किए जाएंगे. वहीं, गेहूं की गुणवत्ता की जांच के लिए सर्वेयर को प्रशिक्षण दिया जाएगा. साल 2024-25 में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर भारत सरकार ने समिति स्तर पर स्थापित कुल 1495 उपार्जन केन्द्रों के जरिए 48 लाख 38 हजार मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी की थी और किसानों के आधार लिंक बैंक खाते में समर्थन मूल्य राशि के सीधे भुगतान की व्यवस्था की गई थी. पिछले वर्ष हुई थी 48 लाख 38 हजार मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी गौरतलब है पिछले साल 6 लाख 16 हजार किसानों से 48 लाख 38 हजार मीट्रिक टन गेहूं का विक्रय समर्थन मूल्य पर किया गया था, गेहूं उपार्जन के लिए किसानों की सुविधानुसार कुल 3694 उपार्जन केन्द्र स्थापित किए गए थे. उपार्जित गेहूं के परिवहन, हैण्डलिंग व किसानों के पेमेंट के लिए 2199 उपार्जन केन्द्र गोदाम स्तर पर स्थापित किए गए थे.    भारत सरकार ने इस साल गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य 2425 रुपए क्विंटल निर्धारित किया है, जिससे किसानों को बीते साल की तुलना में इस साल प्रति क्विंटल गेंहू पर 150 रुपए अतिरिक्त मिलेंगे. बता दें, साल 2025-26 के लिए भारत सरकार ने गेंहू का न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी 2425 रुपए निर्धािरत किया है. भारत सरकार ने साल 2025-26 के लिए रबी फसल गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2425 रुपए घोषित किया है, जिससे बीते साल की तुलना में इस साल से 150 रुपए अधिक में गेहूं की खरीदी होगी. नए समर्थन मूल्य पर गेंहू खरीदी के लिए सरकार ने तैयारी भी शुरू कर दी है. गेंहू खरीदी के लिए प्रदेश में स्थापित किए जाएंगे गेंहू उपार्जन केंद्र रिपोर्ट के मुताबिक रबी विपणन वर्ष 2025-26 के लिए अब किसानों से समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीदी के लिए बारदाना, भंडारण, परिवहन की व्यवस्था की जा रही है. गेंहू खरीदी के लिए प्रदेश में गेंहू उपार्जन केंद्र भी स्थापित किए जाएंगे. वहीं, गेहूं की गुणवत्ता की जांच के लिए सर्वेयर को प्रशिक्षण दिया जाएगा. साल 2024-25 में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर भारत सरकार ने समिति स्तर पर स्थापित कुल 1495 उपार्जन केन्द्रों के जरिए 48 लाख 38 हजार मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी की थी और किसानों के आधार लिंक बैंक खाते में समर्थन मूल्य राशि के सीधे भुगतान की व्यवस्था की गई थी. इतना बढ़ा MSP बता दें कि सरकार किसानों से 2275 रुपए प्रति क्विंटल की दर से गेहूं खरीदती है। लेकिन आगामी समय में एमएसपी(MSP) बढ़ जाने से सरकार 2,425 रुपए प्रति क्विंटल की दर से किसानों से गेहूं की फसल खरीदेगी। पहले के मुकाबले 150 रूपए का अधिक फायदा किसानों को मिलेगा। जानकारी के मुताबिक आगामी विधानसभा चुनावों के तहत किसानों को खुश करने के लिए यह फैसला लिया गया है। गेहूं उपार्जन केन्दों की होगी स्थापना नए सत्र के दौरान गेहूं की खरीदी(Wheat MSP) के लिए अभी से ही तैयारियां शुरू कर दी गई है। भण्डारण और परिवहन की व्यवस्था की जा रही है। साथ ही प्रदेश में कई जगहों पर गेहूं उपार्जन केंद्रों की स्थापना की जाएगी। इसके आलावा गेहूं की गुणवत्ता की जांच के लिए सर्वेयर को प्रशिक्षण दिया जाएगा। पिछले वर्ष हुई थी 48 लाख 38 हजार मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी गौरतलब है पिछले साल 6 लाख 16 हजार किसानों से 48 लाख 38 हजार मीट्रिक टन गेहूं का विक्रय समर्थन मूल्य पर किया गया था, गेहूं उपार्जन के लिए किसानों की सुविधानुसार कुल 3694 उपार्जन केन्द्र स्थापित किए गए थे. उपार्जित गेहूं के परिवहन, हैण्डलिंग व किसानों के पेमेंट के लिए 2199 उपार्जन केन्द्र गोदाम स्तर पर स्थापित किए गए थे.  

शीतकालीन सत्र में लोक निर्माण, जल संसाधन समेत अन्य विभागों को अतिरिक्त राशि आवंटित की जाएगी ,अनुपूरक बजट में नई योजना का प्रावधान नहीं.

भोपाल  मध्य प्रदेश विधानसभा का शीतकालीन सत्र आगामी 16 दिसंबर में शुरू हो रहा है. 5 दिवसीय शीतकालीन सत्र में मोहन सरकार अपना पहला अनुपूरक बजट पेश करेगी. एक अनुमान के मुताबिक मोहन सरकार का अनुपूरक बजट संभवतः 10 हजार करोड़ रुपए हो सकता है. माना जा रहा है कि सरकार अनुपूरक बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के कामों के लिए निर्माण विभागों को अतिरिक्त राशि आवंटित की जा सकती है. वित्त विभाग ने मोहन सरकार के पहले अनुपूरक बजट को लेकर सभी विभागों से प्रस्ताव मांगे हैं. 5 दिवसीय शीतकालीन सत्र में लोक निर्माण, जल संसाधन समेत अन्य विभागों को अतिरिक्त राशि आवंटित की जा सकती है. अनुपूरक बजट में किसी नई योजना का प्रावधान नहीं होगा. अनुपूरक बजट में किसी नई योजना का प्रावधान नहीं रिपोर्ट के मुताबिक कुल पांच दिन चलने वाले मध्य प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र में पेश होने वाले अनुपूरक बजट 10 हजार करोड़ रुपए का हो सकता है, लेकिन पूरी संभावना है कि बजट में किसी नई योजना का प्रावधान नहीं होगा.वहीं फिजूल खर्ची को रोक लगाने की कोशिश होगी, इसलिए वाहन खरीदारी के लिए भी कोई राशि आवंटित नहीं की जाएगी. मोहन सरकार 16 दिसंबर से शुरू हो रहे पांच दिवसीय शीतकालीन सत्र में अनुपूरक बजट पेश करेगी. पूरी संभावना है कि फरवरी में होने वाले ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के लिए उद्योग सहित अन्य विभागों के लिए राशि का प्रावधान होगा. अनुपूरक बजट के लिए सभी विभागों से मांगे गए प्रस्ताव गौरतलब है मध्य प्रदेश का वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए सरकार का बजट 3.65 लाख करोड रुपए से अधिक का है.जीएसटी समेत अन्य करों के संग्रहण में अच्छी स्थिति होने के चलते सरकार की आय वृद्धि की संभावना है. इन्हें देखते हुए वित्त विभाग ने मोहन सरकार पहले अनुपूरक बजट की तैयारी कर रहा है और सभी विभागों से प्रस्ताव मांगें है.  

प्रयागराज : छात्रों के प्रदर्शन के आगे UP सरकार नतमस्तक, एक दिन में होगा PCS एग्जाम, RO-ARO परीक्षा स्थगित

 प्रयागराज  प्रयागराज में छात्र समुदाय की एक बड़ी जीत हुई है। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) ने छात्रों की प्रमुख मांगों को स्वीकार करते हुए महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। सोमवार से लगातार धरना-प्रदर्शन कर रहे छात्रों के संघर्ष के बाद, UPPSC ने PSC (राज्य लोक सेवा आयोग) और RO/ARO (रिवाइजिंग ऑफिसर/ASSISTANT REVIEW OFFICER) की परीक्षाएं स्थगित कर दी हैं। इस फैसले ने छात्रों को एक बड़ी राहत दी है और उनके आंदोलन को सफलता की दिशा में एक कदम और बढ़ा दिया। PCS परीक्षा अब एक ही शिफ्ट में होगी प्रदर्शनकारियों के मुख्य मुद्दों में से एक था कि UPPSC की परीक्षा दो शिफ्टों में होती थी, जिससे समय की कमी और कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। UPPSC ने छात्रों की इस मांग को स्वीकार करते हुए फैसला लिया है कि पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा 2024 अब एक ही शिफ्ट में आयोजित की जाएगी। यह निर्णय छात्रों की समस्याओं का समाधान करेगा और परीक्षा की प्रक्रिया को आसान बनाएगा। RO/ARO परीक्षा स्थगित इसके अलावा, UPPSC ने RO (रिवाइजिंग ऑफिसर) और ARO (ASSISTANT REVIEW OFFICER) की परीक्षा को स्थगित करने का फैसला भी किया है। यह कदम छात्रों की लगातार मांगों के बाद उठाया गया है, जो इन परीक्षाओं को एक साथ आयोजित करने के विरोध में थे। इस फैसले से छात्रों को अपनी तैयारी में पर्याप्त समय मिलेगा और उन्हें मानसिक शांति मिलेगी। CM योगी आदित्यनाथ का पहल इस बदलाव के पीछे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल मानी जा रही है। मुख्यमंत्री ने छात्रों के आंदोलन और उनकी समस्याओं को गंभीरता से लिया और आयोग को निर्देशित किया कि वे छात्रों के साथ संवाद करें और उनके मुद्दों पर समन्वय बनाएं। मुख्यमंत्री योगी ने कहा था कि UPPSC को छात्रों के हित में सही और आवश्यक निर्णय लेने चाहिए, ताकि उनकी कठिनाइयां दूर हो सकें।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आयोग से कहा था कि वह छात्रों के साथ नियमित संवाद बनाए रखें और उनके विचारों और मांगों का सम्मान करें। उनके समन्वय से यह निर्णय लिया गया कि परीक्षाओं के आयोजन की प्रक्रिया को छात्रों की जरूरतों के अनुसार ढाला जाए। महत्वपूर्ण बिंदु     परीक्षा पैटर्न तय करने के लिए कमेटी बनाने की बात कही है, प्रदर्शनकारी छात्र आयोग के फैसले से संतुष्ट नहीं हैं।     छात्रों ने आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया है, छात्र इसे डिवाइड एंड रुल बता रहे हैं और हजारों की संख्या में छात्र जमा हैं।  

राष्ट्र रक्षा के लिये भगवान बिरसा मुंडा द्वारा किये गये बलिदान का प्रकटीकरण हो और इससे समाज अवगत हो : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

जनजातीय गौरव दिवस भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि “अबुआ दिशोम-अबुआ राज”… अपना देश और अपनी माटी के महत्व का उद्घोष करने वाले और उलगुलान क्रांति से स्वत्व, स्वाभिमान और स्वराज की चेतना जगाने वाले भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर आज हम सब उनको सादर नमन करते है। भगवान बिरसा मुंडा ने जनजातीय संस्कृति, स्वाभिमान और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए लंबा संघर्ष किया और जनजातीय गौरव का प्रतीक बन गये। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उनके अभूतपूर्व योगदान को स्मरण करने के लिए भगवान बिरसा मुंडा की जयंती 15 नवंबर पर प्रति वर्ष “जनजातीय गौरव दिवस” के आयोजन की परंपरा आरंभ की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल, जंगल, जमीन के रक्षक बिरसा मुंडा ने वर्ष 1893-94 में अंग्रेजों द्वारा वन अधिनियम बनाकर जंगलों पर कब्जा करने का विरोध किया, शोषण के खिलाफ आवाज उठाई और स्वतंत्रता के लिये उलगुलान क्रांति शुरू की। उन्होंने जनजातियों के स्वाभिमान को जगाया और उन्हें यह विश्वास दिलाया कि यह हमारी धरती है और हम ही इसके रक्षक हैं। अपनी धरती और माटी की रक्षा के लिये जनजातियों ने बिरसा मुंडा के नेतृत्व में अंग्रेजों के खिलाफ मोर्चा खोला। यह क्रांति इतनी प्रभावी थी कि आखिरकार अंग्रेजों ने छोटा नागपुर टेनेंसी कानून पारित किया और जनजातियों को उनका अधिकार प्राप्त हुआ। गौरवमयी अतीत का प्रकटीकरण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जनजातीय गौरव दिवस के आयोजन का मुख्य उद्देश्य जनजातीय समाज का गौरवमयी अतीत समाज के सामने लाना और उनकी संस्कृति तथा परंपराओं का संरक्षण है। राष्ट्र रक्षा के लिये उनके द्वारा किये गये बलिदान का प्रकटीकरण हो और इससे समाज अवगत हो, वे अपनी संस्कृति और परंपराओं का महत्व समझें तथा उनमें स्वत्व का बोध हो। समाज, संस्कृति और राष्ट्र को समर्पित भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर आज शहडोल और धार जिले में राज्यस्तरीय कार्यक्रम का आयोजन हो रहा है। मुझे प्रसन्नता है कि इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी वर्चुअली जुड़कर हमारा मार्गदर्शन करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने जनजातीय गौरव दिवस के आयोजन की शुरुआत के साथ जनजातियों के गौरव की पुनर्स्थापना की नींव रखी है। उनका लक्ष्य है अंतिम पंक्ति के अंतिम व्यक्ति का विकास करना तथा विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना। जनजातीय समाज के कल्याण के लिये संकल्पित प्रधानमंत्री मोदी के संकल्प की सिद्धि के लिये मध्यप्रदेश सरकार विभिन्न स्तरों पर कार्य कर रही है। जनजातीय वर्ग का समग्र विकास ध्येय मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गत वर्ष प्रधानमंत्री मोदी ने जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर जनजाति न्याय महाअभियान (पीएम जन-मन) योजना की शुरुआत की। इस योजना का उद्देश्य जनजातीय समुदायों को आत्मनिर्भर बनाना और उनका शैक्षणिक, आर्थिक, स्वस्थ और सामाजिक विकास करना है। मुझे इस बात की प्रसन्नता है कि इस योजना के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश की विशेष उपलब्धि रही है। पीएम जन-मन योजना में प्रदेश के 24 जिलों के 118 गांवों में निवासरत बैगा, भारिया एवं सहरिया विशेष पिछड़ी जनजातीय समूह के 11 लाख 35 हजार से अधिक भाई-बहनों को सहायता, रोज़गार और कौशल प्रशिक्षण देकर इन्हें विकास की नई राह से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है। इसमें 7 हजार 300 करोड़ रुपये की लागत से नये स्वास्थ्य केंद्र, छात्रावास, बहुउद्देशीय केंद्र, सड़क, पुल और आवास सहित अन्य निर्माण कार्य किये जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उदाहरण देते हुए कहा कि पीएम जन-मन योजना में सिवनी जिले का झिंजरई गांव एक आदर्श ग्राम के रूप में विकसित हो चुका है। इस गांव में राज्य सरकार की जन-कल्याणकारी योजनाओं का क्रियान्वयन शत-प्रतिशत हुआ। यही नहीं, छिंदवाड़ा और डिंडौरी जिले में 7 और कटनी में 6 विशेष पिछ़ड़े जनजातीय बहुल गांव आदर्श ग्राम के रूप में विकसित किए जा रहे हैं। शौर्य और पराक्रम जनजातियों का मौलिक स्वभाव है। उनकी इस विशेषता को देखते हुए प्रदेश के विशेष पिछड़ी जनजातीय समूह के लिये शौर्य संकल्प योजना के अंतर्गत पीवीटीजी बटालियन गठित की जायेगी। जनजातीय विद्यार्थियों की शिक्षा और भविष्य निर्माण के लिये उन्हें प्री-मैट्रिक, पोस्ट मैट्रिक, विदेश अध्ययन के लिए छात्रवृत्ति, सिविल सेवा प्रोत्साहन योजना और परीक्षा पूर्व प्रशिक्षण का लाभ दिया जा रहा है। बजट वृद्धि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जनजातीय वर्ग के समग्र विकास और कल्याण के लिये हमने इस वित्त वर्ष में 40 हजार 804 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जो पिछले बजट की तुलना में 23.4 प्रतिशत अधिक है। तेंदूपत्ता संग्राहकों का मानदेय 3 हजार रुपये प्रति मानक बोरा से बढ़ाकर 4 हजार रुपये किया गया। इससे 35 लाख संग्राहक लाभान्वित हुए हैं। प्रदेश में जनजातीय विकास की अधोसंरचनाओं के निर्माण के लिये विशेष तकनीकी समूह तैयार करने का निर्णय लिया गया। रानी दुर्गावती श्रीअन्न प्रोत्साहन योजना में अधिकतम 3900 रुपये प्रति हेक्टेयर की अतिरिक्त सहायता राशि स्वीकृत की गई। प्रदेश में जनजातियों को जल, जंगल, जमीन और श्रमिकों के अधिकारों की जानकारी तथा इनके संरक्षण और सांस्कृतिक परंपराओं की सुरक्षा के लिये पेसा अधिनियम लागू किया गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जनजातीय समुदाय के समग्र विकास और उनके जीवन स्तर को सुधारने की दिशा में विशेष पहल करते हुए 2 अक्टूबर, 2024 को धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान आरंभ किया। इस अभियान का उद्देश्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों में जनजातीय आबादी के लिए समान अवसरों का सृजन, सामाजिक-आर्थिक स्तर का विकास, बुनियादी ढांचे का सुधार और स्वास्थ्य, शिक्षा तथा आजीविका के क्षेत्र में ठोस प्रगति करना है। हमारा लक्ष्य प्रदेश के 267 विकासखंडों में स्थित 11 हजार 377 जनजातीय बहुल गांव का सर्वांगीण विकास करना है। यही नहीं, इस योजना में केंद्र सरकार द्वारा देशभर में 100 जनजातीय ग्रामीण हाट बाजार तैयार करने की योजना है। प्रदेश के 19 जिलों में जनजातीय ग्रामीण हाट बाजार की स्थापना का लक्ष्य रखा गया है। इसमें जनजातियों की पुरातन कला, संस्कृति के प्रतीक, शिल्पकारी, चित्रकारी, खिलौने, मिट्टी व बांस से तैयार उत्पाद आदि का प्रदर्शन किया जायेगा। इससे पारंपरिक कला संस्कृति समृद्ध होने के साथ जनजातीय वर्ग का आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण होगा। मध्यप्रदेश, मोदी जी के संकल्प को करेगा साकार मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मुझे इस बात से संतोष है कि भगवान बिरसा मुंडा ने जनजातीय समाज के स्वाभिमान और उत्थान के लिये जो स्वप्न देखा था, वह आज प्रधानमंत्री … Read more

तख्तापलट के बाद बांग्लादेश की सत्ता संभाल रही अंतरिम सरकार लगातार कट्टरपंथ की ओर झुकाव

ढाका शेख हसीना के तख्तापलट के बाद बांग्लादेश की सत्ता संभाल रही अंतरिम सरकार लगातार कट्टरपंथ की ओर झुकाव दिखा रही है। देश की स्थापना करने वाले शेख मुजीबुर रहमान के अपमान से लेकर बंगाली राष्ट्रवाद तक से अब किनारा किया जा रहा है और पाकिस्तान की विचारधारा की तरफ झुकाव बढ़ा है। इस बीच बांग्लादेश सरकार ने कहा है कि देश में सेकुलरिज्म की ही कोई जरूरत नहीं है। बांग्लादेश के अटॉर्नी जनरल मोहम्मद असदुज्जमां ने ऐसा कहा है। बांग्लादेशी अखबार Prothom Alo के अनुसार हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान असदुज्जमां ने यह बात कही। उन्होंने हाई कोर्ट में देश के संविधान में 15वें संशोधन के खिलाफ दायर अर्जी पर सुनवाई के दौरान ऐसा कहा। यह संविधान संशोधन शेख हसीना सरकार के दौर में 3 जुलाई, 2011 को हुआ था। इसी संशोधन के तहत देश को सेकुलर घोषित किया गया था और शेख मुजीबुर रहमान को राष्ट्रपिता माना गया था। महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाने को भी इसके तहत मंजूरी मिली थी। एक तरह से उस संविधान संशोधन को बांग्लादेश की राजनीति में बड़े बदलाव के तौर पर देखा जाता है। अब उसे ही हटाने की तैयारी है। बांग्लादेश के अटॉर्नी जनरल ने अदालत में कहा कि यहां तो 90 फीसदी आबादी मुसलमानों की है। फिर सेकुलरिज्म जैसी चीज की यहां क्या जरूरत है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति संविधान के अनुच्छेद VIII में सेकुलरिज्म को रखना ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि पहले तो अल्लाह पर भरोसा रखने की बात कही जाती थी। अटॉर्नी जनरल ने मोहम्मद यूनुस सरकार से अपील की है कि इस संविधान संशोधन को खत्म किया जाए और पहले वाले नियम ही लागू किए जाएं। केस की सुनवाई के दौरान बांग्लादेश के अटॉर्नी जनरल ने कहा कि हमारे देश का आधिकारिक धर्म तो इस्लाम ही है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यदि देश में हिंदू समेत तमाम अल्पसंख्यक रहते हैं तो उन्हें भी अधिकार है कि वे अपने तरीके से धर्म का पालन कर सकें और पूजा-पाठ करें। हालात यह हैं कि नई सरकार अब संविधान में बंगाली राष्ट्रवाद को भी हटाने की बात कर रही है। बांग्लादेश के अटॉर्नी जनरल ने इसे लेकर कहा कि संविधान के आर्टिकल 9 में बंगाली राष्ट्रवाद की बात कही गई है, लेकिन यह गलत है। ऐसा करना तो उन दूसरी भाषाओं के लोगों का अपमान है, जिन्होंने स्वतंत्रता के संघर्ष में हिस्सा लिया था। इसलिए इसे हटा देना चाहिए। माना जा रहा है कि बंगाली राष्ट्रवाद की बजाय इस्लाम के आधार पर राष्ट्र की अवधारणा की ओर जाने का विचार बांग्लादेश की नई सरकार का है।

आयुष्मान भारत योजना गरीबों और वंचितों के लिए गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित कर रही है: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि आयुष्मान भारत योजना स्वास्थ्य क्षेत्र में क्रांति है, जो गरीबों और वंचितों के लिए गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित कर रही है। इस योजना से आम नागरिकों को स्वास्थ्य सुरक्षा मिल रही है, साथ ही राज्य के स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत बनाने में भी योजना सहायक सिद्ध हो रही है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना ने गरीब परिवारों को उनकी बीमारी के इलाज के लिए एक नया संबल प्रदान किया है। इससे स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार हो रहा है और राज्य में स्वास्थ्य के क्षेत्र में बुनियादी ढांचे का विस्तार हो रहा है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समग्र स्वास्थ्य के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को गंभीर बीमारियों का निःशुल्क उपचार मिल रहा है। इस योजना के तहत गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक का निःशुल्क उपचार प्रदान किया जा रहा है, जिससे उनके जीवन में स्वास्थ्य और सुरक्षा का संचार हो रहा है। कैंसर से लड़ाई में मिला आयुष्मान योजना का साथ उमरिया ज़िले के करकेली जनपद पंचायत के ग्राम बड़ागांव निवासी सुरानी कोल को कैंसर बीमारी से लड़ने में आयुष्मान भारत योजना ने संबल प्रदान किया। रानी कोल को जब कैंसर का पता चला, तो उनका परिवार इलाज के लिए परेशान हो गया। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण इलाज कराना उनके लिए असंभव सा लग रहा था। आयुष्मान योजना से रानी कोल का सफल इलाज हुआ और आज वे पूरी तरह स्वस्थ हैं। उनके परिवार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस योजना के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि आयुष्मान भारत योजना उनके जैसे लाखों गरीब परिवारों के लिए वरदान साबित हो रही है। सड़क हादसे में आयुष्मान योजना बनी जीवनरक्षक उमरिया के ग्राम बिजौरी के मनोज बैगा के लिए भी आयुष्मान योजना जीवनदायक साबित हुई। एक सड़क हादसे में मनोज बैगा को गंभीर चोटें आई थीं। आशा कार्यकर्ता और रोजगार सहायक ने उन्हें आयुष्मान योजना की जानकारी दी, जिसके बाद उन्होंने अपना आयुष्मान कार्ड बनवाया। योजनान्तर्गत शहडोल के मेडिकल कॉलेज में उनका उपचार हुआ। आज मनोज बैगा और उनका परिवार प्रधानमंत्री मोदी जी का आभार व्यक्त करता है। उमरिया जिले में पिछले डेढ़ साल में 3 हज़ार 490 से गरीब और मध्यम वर्गीय लाभार्थियों को आयुष्मान योजना के तहत निःशुल्क उपचार की सुविधा प्रदान की गई है। इस दौरान 57 लाख 83 हजार 900 रुपये की राशि का अनुदान प्रदान किया गया। हितग्राहियों ने इस योजना के माध्यम से सर्जरी, ऑर्थो सर्जरी, हार्निया सर्जरी, डायलिसिस, यूरिनरी ट्रैक्ट, सामान्य चिकित्सा और सामान्य प्रसव जैसी चिकित्सा सेवाओं का लाभ लिया है।

प्रदेश में 4 पायलट प्रोजेक्ट से शुरुआत, दिसंबर तक सभी 41 ई-चेकगेट होंगे चालू, सात हजार खदानें जियो टैग

भोपाल अवैध परिवहन पर रोक लगाने के लिए मध्य प्रदेश की मोहन सरकार इन दिनों एक्शन में है. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में अवैध परिवहन रोकने के लिए AI आधारित 41 E-चेकगेट को स्थापना किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि इन E-चेकगेटों पर वेरीफोकल कैमरा, आरएफआईडी लीडर, ऑटोमेटिक नम्बर प्लेट रीडर की मदद ली जाएगी. इन यंत्रों के माध्यम से वाहनों की जांच की जाएगी. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बताया कि परियोजना को सफल बनाने के लिए पहले पायलेट प्रोजेक्ट लाया जा रहा है. खनिज परिवहन के लिए खास मार्ग के 4 स्थानों पर E-चेकगेट स्थापित कर काम शुरू कर दिया गया है. 4 पायलट प्रोजेक्ट से शुरुआत, दिसंबर तक सभी 41 ई-चेकगेट होंगे चालू अवैध परिवहन पर नजर रखने के लिए भोपाल में एक राज्यस्तरीय कमांड और कंट्रोल सेंटर स्थापित किया गया है, जबकि भोपाल और रायसेन में जिला स्तर के सेंटर भी बनाए गए हैं। दिसंबर 2024 तक सभी 41 ई-चेकगेट स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। वर्तमान में, 4 महत्वपूर्ण मार्गों पर पायलट प्रोजेक्ट के रूप में ई-चेकगेट लगाए जा चुके हैं, जो अवैध खनिज परिवहन को रोकने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। दिसंबर E-चेकगेट स्थापित कने का लक्ष्य वहीं प्रदेश में अवैध परिवहन की निगरानी के लिए राज्य स्तर पर भोपाल में कमांड एवं कंट्रोल सेंटर और जिला भोपाल एवं रायसेन में जिला कमांड सेंटर स्थापित किए गए हैं. दिसंबर 2024 तक सभी 41 E-चेकगेट को स्थापित कर लेने का लक्ष्य है. खनन पर रोक के लिए उपग्रह-ड्रोन प्रोजेक्ट मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में अवैध खनन की रोकथाम के लिए उपग्रह और ड्रोन आधारित परियोजना भी प्रारंभ की गई है. इसके जरिए प्रदेश की सभी 7 हजार खदानों की जियो टैग कर खदान क्षेत्र का सीमांकन किया गया है. यह परियोजना पूर्ण रूप से लागू होने पर अवैध खनन को चिन्हित कर प्रभावी तौर पर रोकथाम की जा सकेगी. परियोजना के लागू होने पर स्वीकृत खदान के अंदर 3-D इमेजिंग एवं वॉल्यूमेट्रिक एनालिसिस कर उत्खनित खनिज की मात्रा का सटीक आंकलन किया जा सकेगा. ड्रोन और सैटलाइट से खदानों पर नजर, थ्री-डी इमेजिंग के जरिए सटीकता प्रदेश में खनिज संपदा का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए सैटलाइट और ड्रोन आधारित निगरानी प्रणाली भी शुरू की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि इस पहल के तहत प्रदेश की 7,000 से अधिक खदानों को जियो-टैग कर उनकी सीमाओं का निर्धारण किया गया है। इस परियोजना के पूर्ण रूप से लागू होने पर अवैध खनन की घटनाओं पर नजर रखी जा सकेगी, और स्वीकृत खदानों में खनिज उत्खनन का सटीक आंकलन थ्री-डी इमेजिंग और वॉल्यूमेट्रिक एनालिसिस के जरिए किया जा सकेगा। मई में कलेक्टरों को जारी हुए थे निर्देश इस तरह की व्यवस्था लागू करने का फैसला सरकार ने मई में लिया था। इसके बाद प्रमुख सचिव, खनिज साधन ने सभी कलेक्टरों को पत्र लिखा था। इसमें कहा गया था कि सूचना प्रौद्योगिकी का प्रयोग कर खनिजों के अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण पर प्रभावी नियंत्रण के लिए कार्यवाही की जा रही है। इस व्यवस्था को लागू करने में जिला स्तर पर Artificial Intelligence आधारित मानव रहित चेकगेट लगाए जाएंगे। कलेक्टरों से कहा गया था कि प्रदेश के 40 ऐसे स्थानों को चिन्हित किया गया है जहां से खनिजों का सर्वाधिक परिवहन होता है। इन सभी स्थलों पर आगामी 10 माह के भीतर चेकगेट व्यवस्था लागू कर दी जाएगी। राज्य स्तर पर स्टेट कमांड सेंटर और जिला स्तर पर जिला कमांड सेंटर के माध्यम से अवैध परिवहन करने वाले वाहनों की निगरानी की जाएगी। चेकगेट के सॉफ़्टवेयर को ई-टीपी जारी करने वाले पोर्टल के साथ इंटीग्रेट कर बिना रॉयल्टी चुकाए परिवहन करने वाले वाहन मालिकों के विरुद्ध अवैध परिवहन का प्रकरण दर्ज किया जाएगा। साथ ही खनिज परिवहन करने वाले वाहनों में आरएफ टैग लगाया जाएगा, जिसकी सहायता से वाहनों की वैधता की जांच की जा सकेगी।  

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