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महाराष्ट्र में CM Mohan Yadav ने सरकार बनाने जनमत साधने की अपील की

भोपाल मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव महाराष्ट्र चुनाव में जमकर प्रचार कर रहे हैं। बुधवार को नागपुर में उन्होंने चार विधानसभा क्षेत्रों में जनसभाओं को संबोधित किया और केंद्र सरकार के कामकाज और उपलब्धियों का बखान किया। साथ ही उन्होंने महाराष्ट्र में सरकार बनाने जनमत साधने की अपील भी की। सीएम मोहन यादव आज 14 नवंबर को भी महाराष्ट्र में चुनाव प्रचार करेंगे। इस दौरान वो अमरावती और चंद्रपुर जिलों में जनसभाओं को संबोधित करेंगे। सीएम मोहन का चुनाव प्रचार कार्यक्रम महाराष्ट्र चुनाव के प्रचार प्रसार में सीएम मोहन आज 14 नवंबर को विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होंगे। महाराष्ट्र की मेलघाट और अचलपुर विधानसभा में करेंगे पार्टी प्रत्याशियों के समर्थन जनसभा करेंगे। इसके बाद 11.45 बजे भोपाल से चिखलदरा जिला अमरावती महाराष्ट्र रवाना होंगे। दोपहर 12.45 बजे अमरावती जिले की मेलघाट विधानसभा के चिखलदरा में पार्टी प्रत्याशी के समर्थन में जनसभा को संबोधित करेंगे। दोपहर 1.00 बजे – चुर्नी, चिखलदरा, जिला अमरावती में सार्वजनिक बैठक में शामिल होकर जनमत को साधेंगे। इसके बाद दोपहर 2.00 बजे चंदूरबाजार, अचलापुर में जनसभा संबोधित करेंगे। फिर शाम 5.15 बजे भोपाल आगमन शाम 6.30 बजे समत्व भवन में वृहद परियोजना नियंत्रण मंडल की 125 वीं बैठक में शामिल होंगे। महायुति सरकार के लिए कही बड़ी बात नागपुर में अपनी रैलियों में सीएम मोहन यादव ने कहा कि महाराष्ट्र की महायुति सरकार छत्रपति शिवाजी महाराज के सपनों को पूरा कर रही है। साथ ही सनातन धर्म को आगे बढ़ा रही है। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि महाराष्ट्र में विकास की गति लगातार बढ़ती रहे इसके लिए महायुति गठबंधन को भारी बहुमत से समर्थन देने का करें। कांग्रेस पर साधा निशाना इस दौरान उन्होंने कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगियों को भगवान राम और कृष्ण से दिक्कत है। इसलिए कांग्रेस एवं उसके सहयोगी दल भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल खड़े करते हैं। बहुमत से विजयी बनाने की अपील सीएम मोहन यादव ने जनता से अपील की कि वो भारतीय जनता पार्टी और उसके सहयोगी दलों के उम्मीदवारों को भारी बहुमत से विजयी बनाएं। उनके दमदार भाषणों से महाराष्ट्र की सियासत भी गरमाने लगी है।

14 नवंबर 2024 से 31 जनवरी 2025 के दौरान किसान कर सकेंगे धान का समर्थन मूल्य पर विक्रय

चालू खरीफ विपणन वर्ष के लिए धान खरीदी आज 14 नवंबर से शुरू मुख्यमंत्री के निर्देश पर धान खरीदी की सभी आवश्यक तैयारी पूर्ण, 2739 उपार्जन केन्द्रों पर समर्थन मूल्य पर धान खरीदी 14 नवंबर 2024 से 31 जनवरी 2025 के दौरान किसान कर सकेंगे धान का समर्थन मूल्य पर विक्रय राज्य में 2739 उपार्जन केन्द्रों में किसानों से समर्थन मूल्य पर होगी धान खरीदी राज्य के सीमावर्ती क्षेत्रों में अवैध धान परिवहन पर रखी जाएगी कड़ी निगरानी रायपुर राज्य में समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी 14 नवंबर से प्रारंभ होने जा रही है। प्रदेश के किसानों से धान खरीदी की योजना सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता में हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के दिशानिर्देश पर प्रदेश के सभी 2739 उपार्जन केन्द्रों में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी हेतु आवश्यक तैयारियां पूर्ण कर ली गई है। इस खरीफ सीजन के लिए प्रदेश में पंजीकृत कुषकों की संख्या 27 लाख 1 हजार 109 है। इस वर्ष 1 लाख 35 हजार 891 नये किसान पंजीकृत हुए हैं और 1 लाख 36 हजार 263 हेक्टेयर नवीन रकबों का पंजीयन किया गया है। सभी उपार्जन केन्द्रों में बायोमैट्रिक डिवाईस के माध्यम से उपार्जन की व्यवस्था की गई है। छोटे, सीमांत और बडे़ कृषकों के द्वारा उपजाये गए धान को निर्धारित समर्थन मूल्य में खरीदा जाएगा। इसके लिए 7 नवंबर से ही टोकन आवेदन की व्यवस्था आरंभ कर दी गई है। खरीदी सीजन में लघु एवं सीमांत कृषकों को अधिकतम 2 टोकन एवं बडे़ कृषकों को 3 टोकन की पात्रता होगी। धान खरीदी अवधि 14 नवंबर 2024 से 31 जनवरी 2025 के दौरान किसान अपना धान खरीदी केन्द्रों में लाकर समर्थन मूल्य पर विक्रय कर सकते है। खरीदी केंद्रों में तौल हेतु इलेक्ट्रानिक कांटा-बांट की व्यवस्था की गई है। खरीदी केंद्रों से धान का उठाव मिलर एवं परिवहनकर्ता के माध्यम से समयानुसार कराने के निर्देश दिये गये है। सभी खरीदी केन्द्रों में पर्याप्त बारदाने की व्यवस्था से लेकर छांव, पानी आदि की व्यवस्था सुनिश्चित कर ली गई है। धान उपार्जन केन्द्रों में शिकायत एवं निवारण के लिये हेल्प लाइन नंबर भी चस्पा कर दिये गये हैं। विपणन संघ मुख्यालय स्तर पर शिकायत निवारण हेतु कंट्रोल रूम की स्थापना भी की गई है जिसका नं. 0771-2425463 है। धान बेचने वाले किसानों को समय पर भुगतान हेतु मार्कफेड द्वारा राशि की व्यवस्था कर ली गई है। समितियों में राशि आहरण हेतु ‘‘माइक्रो एटीएम’’ की व्यवस्था भी दी जा रही है, जिससे कि किसानों को सुविधा हो। किसानों द्वारा समिति में धान विक्रय के 72 घंटे के भीतर राशि किसानों के बैंक खाते में अंतरित कर दी जायेगी। खाद्य मंत्री बघेल के निर्देश पर धान रिसाइकलिंग बोगस खरीदी पर नियंत्रित करने के लिए अपर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय टीम द्वारा राज्य के अलग अलग संभागों में विशेष कार्ययोजना बनाई गई है। राज्य के सीमावर्ती क्षेत्र में विशेष निगरानी की व्यवस्था की गई है एवं चेक पोस्ट की स्थापना की गई है। मंडी विभाग द्वारा मंडी अधिनियम के तहत जिलों में अधिकृत व्यापारियों की सूची जिला प्रशासन के साथ साझा किया गया है। एनआईसी द्वारा तैयार मोबाइल एप्प के माध्यम से गिरदावरी के खसरों का पुनः सत्यापन लगातार जारी है। मार्कफेड द्वारा राज्य स्तर पर एकीकृत कंट्रोल कमांड सेंटर स्थापित कर राईस मिल एवं उपार्जन केन्द्रों पर रियल टाइम निगरानी रखी जाएगी। राज्य स्तर पर अलग अलग जिलों के लिए राज्य स्तरीय वरिष्ठ अधिकारियों की जांच टीम बनाई गई है, जो लगातार जिले में हो रही धान खरीदी की मानिटरिंग करेंगे। विभागीय मंत्री द्वारा निर्देशित किया गया है कि राज्य स्तरीय दल आबंटित जिलों में खरीदी के दौरान कम से कम तीन बार भ्रमण करेंगे। प्राप्त शिकायतों पर संबंधित अधिकारियों द्वारा त्वरित कार्यवाही की जाएगी और की गई कार्यवाही के संबंध में अवगत भी कराया जाएगा।

पहले दिन अनुश्रुति वृंद, विदुषी सुलेखा भट्ट और पं. संजू सहाय की प्रस्तुति

आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का माध्यम है संगीत – राज्य मंत्री लोधी दो दिवसीय पं. नन्दकिशोर शर्मा स्मृति समारोह का किया शुभारंभ पहले दिन अनुश्रुति वृंद, विदुषी सुलेखा भट्ट और पं. संजू सहाय की प्रस्तुति भोपाल संस्कृति, पर्यटन और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी ने कहा है कि दार्शनिक और आध्यात्मिक परम्परा में संगीत का बहुत महत्व है। संगीत हमारी परम्परा का अभिन्न अंग है। यह आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का माध्यम है। संगीत की उत्पत्ति ब्रह्म जी ने की थी। उन्होंने इसका ज्ञान शिव जी को, शिव जी ने सरस्वती जी को, सरस्वती जी ने नारद जी को और फिर गंधर्व और अप्सराओं को संगीत का ज्ञान प्राप्त हुआ। राज्य मंत्री लोधी भारत भवन के अंतरंग सभागार में पं. नन्द किशोर शर्मा स्मृति समारोह के शुभारंभ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) लोधी ने कहा कि वेद हमारी संस्कृति और परम्परा के आधार हैं, जिसमें सामवेद संगीत को समर्पित है। ईश्वर की उपासना का सबसे सरल माध्यम संगीत है। संगीत के सातों स्वर वैज्ञानिक पद्धति पर आधारित हैं। प. नंदकिशोर शर्मा का नाम अनहद के आकाश में प्रकाश की तरह है, जो कई पीढ़ियों को प्रकाशवान करेगा। वे संगीत के सच्चे साधक थे, जिन्होंने संपूर्ण जीवन संगीत को समर्पित कर दिया। राज्य मंत्री लोधी ने संगीत को समर्पित महान विभूति नन्द किशोर शर्मा को नमन किया। मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग के लिए उस्ताद अलाउद्दीन खाँ संगीत एवं कला अकादमी, मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद्, भोपाल द्वारा सुप्रसिद्ध संगीतकार पं. नन्दकिशोर शर्मा की स्मृति में दो दिवसीय भारतीय शास्त्रीय गायन, वादन और नृत्य पर केन्द्रित कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम में संचालक संस्कृति एन.पी. नामदेव और अकादमी की निदेशक सुवंदना पाण्डेय भी विशेष रूप से उपस्थित रही। कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप प्रज्ज्वलन कर पारम्परिक तरीके से किया गया। इस अवसर पर पं. नंदकिशोर शर्मा के भाई गौरीशंकर शर्मा का विशेष रूप से स्वागत व सम्मान किया गया। कार्यक्रम की पहली प्रस्तुति परम्परागत रूप से अनूप शर्मा के निर्देशन में अनुश्रुति वृन्द के कलाकारों द्वारा वंदना प्रस्तुत कर की गई, जिसकी रचना पं. नन्दकिशोर शर्मा ने की थी। सर्वप्रथम सरस्वती वंदना ”मां शारदे वर दे हमें तेरे चरण का प्यार दे” थी और इसके बाद गुरु वंदना ”गुरु देव शत-शत करूं चरण वंदन” प्रस्तुत कर श्रोताओं को आत्मविभोर कर दिया। इस प्रस्तुति में विपिन पौराणिक, सोपान अंबाकेलकर, सत्यम शर्मा, अजीम अहमद, रविन्दर, सुवंदना दुबे, सुविनीता चौहान, सुवारूणी शर्मा, सुअंतरा वरनेनकर और सुसुहानी सिंह ने गायन किया। वहीं, शशांक मिश्रा ने तबले पर एवं अनूप शर्मा ने हारमोनियम पर संगत की।   पं. नन्दकिशोर शर्मा स्मृति समारोह की पहली शाम की दूसरी सभा एकल तबला वादन की रही। मंच पर नमूदार थे बनारस तबला घराने के सुप्रसिद्ध तबला वादक पण्डित संजू सहाय। अपने परिवार की छठवीं पीढ़ी के अव्वल दर्जे के तबला वादक संजू सहाय देश ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के संगीतज्ञों के साथ मंच साझा कर चुके हैं। इस समारोह में भारत भवन के मंच पर वे भोपाल के अपने चाहने वालों से चेहरे पर मुस्कुराहट और शब्दों में प्रेम लिए मिले। पं. संजू सहाय ने प्रस्तुति के लिए तीन ताल को चुना। बनारस घराने की पारम्परिक बंदिशों को अपनी उंगलियों के जादू से कुछ इस तरह पेश किया कि सुनने वालों ने अपनी आत्मा में सदियों पुरानी थाप, सुखद अनुभव और सुदीर्घ साधना को महसूस किया। उनके साथ सुविख्यात संगीतज्ञ पं. धर्मनाथ मिश्रा ने हारमोनियम पर संगत की। अंतिम प्रस्तुति भोपाल की सुप्रसिद्ध गायिका विदुषी सुलेखा भट्ट एवं साथी कलाकारों के गायन की रही। उन्होंने अपनी प्रस्तुति की शुरुआत के लिए राग नंद का चयन किया। मधुरता और सौंदर्यता से भरपूर इस राग में सुलेखा भट्ट ने मध्य लय रूपक ताल की बंदिश ”ढूंढू बारे सैंया” प्रस्तुत की। इसके बाद विदुषी सुलेखा भट्ट ने जब तीन ताल में द्रुत बंदिश ”पायल मोरी बाजे” खनकती आवाज में पेश की, तो रसिक श्रोता राग के अनुराग में डूब गए। अंत में उन्होंने कबीर भजन ”सुनता है गुरुज्ञानी” प्रस्तुत करते हुए अपनी प्रस्तुति को विराम दिया। विदुषी सुलेखा भट्ट के साथ तबले पर डॉ. अशेष उपाध्याय, हारमोनियम पर पुणे के उपेंद्र सहस्त्रबुद्धे और सुकौशिका सक्सेना एवं सुरितु पटेल ने तानपुरे पर संगत की। समारोह में आज समारोह में 14 नवम्बर, 2024 को कविता शाजी एवं साथी, भोपाल द्वारा मोहिनीअट्टम समूह नृत्य की प्रस्तुति दी जायेगी। इसके बाद डॉ. अविनाश कुमार, दिल्ली की गायन एवं शाहिद परवेज खान, पुणे सितार वादन की प्रस्तुति देंगे। कार्यक्रम के द्वितीय दिवस संगत कलाकार के रूप में तबला पर हितेन्द्र दीक्षित, हाफिज अहमद अलवी एवं हारमोनियम पर दीपक खसरावल रहेंगे। कार्यक्रम में प्रवेश नि:शुल्क रहेगा।  

जनजातीय गौरव दिवस: प्रधानमंत्री मोदी वर्चुअली होंगे शामिल मुख्यमंत्री साय होंगे कार्यक्रम के मुख्य अतिथि

रायपुर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भगवान बिरसा मुंडा की जयंती-जनजातीय गौरव दिवस पर राजधानी रायपुर स्थित साइंस कॉलेज मैदान में 14 और 15 नवंबर को दो दिवसीय राज्य स्तरीय भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया जायेगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस मौके पर जमुई बिहार से छत्तीसगढ़ के कार्यक्रम में वर्चुअली रूप से जुड़ेगे। श्री मोदी इस इस दौरान  पीएम जनमन योजना के तहत् लाभान्वित हितग्राहीयों कि चर्चा भी करेंगे। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय 15 नवंबर को दोपहर 10.30 बजे से शुरू हो रहे कार्यक्रम के मुख्य अतिथि होंगे। आदिमजाति तथा अनुसूचित जाति विकास मंत्री श्री रामविचार नेताम कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे। विशिष्ट अतिथि के रूप में नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत विधायकगण सर्व श्री राजेश मूणत, पुरन्दर मिश्रा, मोतीलाल साहू, अनुज शर्मा, और इन्द्रकुमार साहू सहित सभी सांसदगण, विधायकगण, निगम मण्डल एवं आयोग तथा जिला पंचायत के अध्यक्ष शामिल होंगे।  

नवाज शरीफ ने भारत से आग्रह किया है कि वह अपनी क्रिकेट टीम पाकिस्तान भेजें

इस्लामाबाद  पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने एक बार फिर भारत से रिश्ते सुधारने की अपील की है। नवाज शरीफ ने भारत से आग्रह किया है कि वह अपनी क्रिकेट टीम पाकिस्तान भेजें। एक्सप्रेस न्यूज की रिपोर्ट में  कहा गया कि शरीफ ने कहा कि अगर तनाव जारी रहता है तो इस तरह की पहल द्विपक्षी संबंधों को बेहतर बनाने में मदद दे सकती है। नवाज शरीफ लंदन में बोल रहे थे। उनके साथ उनकी बेटी और पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज भी थीं। दरअसल ICC चैंपियंस ट्रॉफी 2025 की मेजबानी पाकिस्तान के पास है। भारत ने सुरक्षा कारणों से अपनी टीम को पाकिस्तान न भेजने का फैसला लिया है। नवाज शरीफ ने भारत के इसी फैसले जिक्र करते हुए कहा कि भारत को मैचों के लिए पाकिस्तान का दौरा करना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘अगर रिश्ते तनावपूर्ण हैं तो उन्हें सुधारने की जरूरत है। लोग भारतीय क्रिकेट टीम को पाकिस्तान में खेलते हुए देखना चाहते हैं।’ अमेरिका से संबंधों पर दिया जोर नवाज शरीफ ने आगे अन्य पड़ोसी देशों के साथ अच्छे संबंध रखने पर भी जोर दिया। पाकिस्तान और अमेरिका के बीच संबंधों की वर्तमान स्थिति पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि दोनों देशों को अपने संबंधों को मजबूत करने के लिए काम करना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘पाकिस्तान और अमेरिका के बीच अच्छे संबंध होने चाहिए। अतीत में हमारे संबंध मजबूत थे, लेकिन इसमें और सुधार की जरूरत है।’ बम धमाके ने उठाए सुरक्षा पर सवाल भारतीय टीम ने सुरक्षा कारणों से पाकिस्तान में न जाने का फैसला किया है। पिछले सप्ताह एक बम धमाके ने पाकिस्तान के सुरक्षा की पोल खोल दी और भारतीय क्रिकेट टीम के फैसले को सही साबित कर दिया। पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में एक रेलवे स्टेशन पर शनिवार को धमाका हुआ, जिसमें 26 लोग मारे गए। इन धमाकों में सैनिक और रेलवे कर्मी भी मारे गए। पाकिस्तानी रेलवे ने एक बयान जारी कर सुरक्षा कारणों से चार दिनों के लिए रेल सेवा स्थगित कर दी है।

स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा देने सरकार 50 ऐतिहासिक स्थलों को चिह्नित करेगा जो पर्यटकों के लिए नया आकर्षण साबित हो

भोपाल  देशी-विदेशी पर्यटकों को देश के हृदय मध्य प्रदेश में कुछ अनदेखा दिखाने की तैयारी हो रही है। मध्य प्रदेश पर्यटन मंडल ने 50 ऐसे ऐतिहासिक और प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर स्थलों को चिह्नित किया है जो पर्यटकों के लिए नया आकर्षण साबित हो सकते हैं। इन स्थलों को अब विकसित किया जा रहा है। पर्यटन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जो अपारंपरिक पर्यटन स्थल विकसित किए जाने हैं, उनमें से अधिकतर प्रमुख पर्यटन स्थलों के आसपास ही हैं। हालांकि सुविधाओं की कमी और जानकारी नहीं होने के कारण पर्यटक उस ओर नहीं जाते। जिन नए स्थलों को चिह्नित किया गया है, उनमें खजुराहो के पास रनेह वाटरफाल, भोजपुर के पास आशापुरी मंदिर समूह, पचमढ़ी के पास तामिया और देवगढ़, गांधी सागर के पास चतुर्भुज नाला प्रमुख हैं। घरेलू पर्यटकों के बढ़ने की उम्मीद पर्यटकों को कुछ नया अनुभव देने के लिए प्रदेश के बड़े शहरों के आसपास भी ऐसे स्थलों का चयन किया गया है। भोपाल में खारीगांव, केकड़िया, जगदीशपुर, जबलपुर में मदन महल और नर्मदा के किनारे के स्थलों, ग्वालियर में मितावली- पड़ावली के मंदिर, चौंसठ योगिनी मंदिर और दमोह में सिंग्रामपुर (रानी दुर्गावती व गोंड राजाओं का शासन केंद्र) में पर्यटकों के लिए सुविधाएं बढ़ाई जानी हैं। बता दें, मध्य प्रदेश में हर वर्ष ढाई से तीन करोड़ पर्यटक आते हैं। नया आकर्षण जुड़ जाने से घरेलू पर्यटकों के बढ़ने की उम्मीद की जा रही है। ये स्थल भी किए जा रहे विकसित लांझी का किला- बालाघाट, सिंधिया की छतरियां- शिवपुरी, काला ताजमहल, असीरगढ़ का किला और बुरहानपुर का किला- बुरहानपुर, मितावली, पड़ावली, तेली का मंदिर, सहस्त्रबाहु मंदिर- ग्वालियर, ककनमठ मंदिर- मुरैना, पशुपतिनाथ व धर्मराजेश्वर मंदिर- मंदसौर, पातालकोट और तामिया (प्राकृतिक स्थल)- छिंदवाड़ा, सोनागिरी जैन मंदिर और दतिया का किला- दतिया, मोतीमहल- मंडला, मदन महल- जबलपुर, बहुति झरना, क्योटी जलप्रपात, भीमकुंड- रीवा, जटाशंकर, नजारा व्यू प्लाइंट, निदान कुंड और सद्भावना शिखर- दमोह। होम स्टे बनाए जा रहे हैं     50 अपारंपरिक पर्यटन स्थल चिह्नित किए गए हैं, जहां मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड अपनी गतिविधियां चला रहा है। महिला पर्यटकों की सुरक्षा के लिए स्थानीय महिलाओं को प्रशिक्षित किया जा रहा है। ग्रामीण होम स्टे बनाए जा रहे हैं। हेरिटेज वाक और सांस्कृतिक गतिविधियां भी आयोजित की जा रही हैं। जल्द ही ये स्थल प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों की श्रेणी में आ जाएंगे। – बिदिशा मुखर्जी, अतिरिक्त प्रबंध संचालक, मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड  

ICMR ने कहा है भारत में कैंसर के मामले और मौतें 2022 से 2045 के बीच बढ़ने का अनुमान

नई दिल्ली भारत में कैंसर तेजी से फैल रहा है. यह एक ऐसी बीमारी है जिसका सही समय पर पता न चले तो इलाज मुश्किल हो जाता है. 2023 में ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में पब्लिश हुई एक स्टडी में कहा गया था कि भारत में ब्रेस्ट कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर जैसे कैंसर के मामले तेजी बढ़ रहे हैं. कुछ दिन पहले भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) ने कहा है कि भारत में कैंसर के मामले और मौतें 2022 से 2045 के बीच बढ़ने का अनुमान है. ब्रिक्स देश यानी ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका में कैंसर के मामले, उनसे होने वाली मौतों और उनका रोजमर्रा की लाइफ पर प्रभाव दिखाने वाली स्टडी में इस बात का खुलासा हुआ है कि भारत में मुंह और ब्रेस्ट कैंसर के बढ़ने का जोखिम है. आईसीएमआर-नेशनल सेंटर फॉर डिजीज इन्फॉर्मेटिक्स एंड रिसर्च की रिसर्च के मुताबिक, पुरुषों में होंठ और मुंह के कैंसर के मामले सबसे अधिक पाए गए हैं जबकि महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के मामले सबसे अधिक पाए गए. क्या कहती है रिसर्च कैंसर एपिडेमियोलॉजी में पब्लिश स्टडी के मुताबिक, दुनिया भर में कैंसर से होने वाली कुल मौतों में से 20 प्रतिशत मौतें ब्रिक्स देशों में होती हैं. स्टडी के राइटर्स का कहना है, ‘हमारा विश्लेषण भारत और दक्षिण अफ्रीका में 2022 और 2045 के बीच कैंसर के मामलों और मौतों में तेजी से वृद्धि होगी. स्टडी के राइटर सतीशकुमार ने बताया कि 2020 की तुलना में 2025 में भारत में कैंसर के मामलों में 12.8 प्रतिशत की वृद्धि होगी और कैंसर की घटनाओं में तेजी लगातार जारी रहेगी.’ निष्कर्ष क्या निकला स्टडी के निष्कर्ष में इस बारे में जानकारी दी गई है कि कैंसर कितना कॉमन है, इससे कितनी मौतें होती हैं और इससे आम इंसान की लाइफ पर कितना प्रभाव होता है. रिसर्च के मुताबिक, रूस में पुरुषों और महिलाओं में नए प्रकार के कैंसर के मामलों की दर सबसे अधिक थी. रूस में पुरुषों में सबसे आम प्रकार का कैंसर प्रोस्टेट, लंग्स और कोलोरेक्टल थे. अधिकांश ब्रिक्स देशों में महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर प्रमुख था. हालांकि, भारत में होंठ और मुंह के कैंसर का ट्रीटमेंट पुरुषों में सबसे अधिक बार किया गया. दक्षिण अफ्रीका में पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए कैंसर से होने वाली मृत्यु दर सबसे अधिक थी. अगर रूस में सिर्फ पुरुषों की मौत सबसे अधिक कैंसर से हुई ती और महिलाओं की दक्षिण अफ्रीका में कैंसर से मौत सबसे अधिक हुई थी. स्टडी में यह भी बताया गया है कि भारत को छोड़कर सभी ब्रिक्स देशों में लंग्स कैंसर मौतों का सबसे बढ़ा कारण था. भारत में बढ़ सकता है मौतों का आंकड़ा रिसर्चर्स के अनुसार, आने वाले सालों में दक्षिण अफ्रीका और भारत में कैंसर के नए मामलों और कैंसर से संबंधित मौतों में सबसे अधिक वृद्धि होने की संभावना है. हालांकि ब्रिक्स देशों के पास कैंसर को कंट्रोल करने के तरीके हैं लेकिन फिर भी कैंसर के जोखिम और कैंसर की घटनाओं को प्रभावित करने वाले हेल्थ सिस्टम की जांच करनी काफी जरूरी है.  

प्रदेश में अगली आरआईसी आगामी 7 दिसम्बर को नर्मदापुरम में हो रही : मुख्यमंत्री यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव प्रदेश के संतुलित विकास के लिये निरंतर सभी अंचलों में रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव का आयोजन कर रहे हैं। अगली आरआईसी आगामी 7 दिसम्बर को नर्मदापुरम में हो रही है। नर्मदापुरम् क्षेत्र में मुख्य रूप से कृषि आधारित उद्योग, खाद्य प्र-संस्करण इकाइयां और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग बहुतायत में हैं। नर्मदापुरम्, हरदा, और होशंगाबाद में पहले से स्थापित उद्योगों के साथ-साथ कृषि प्र-संस्करण, सोयाबीन तेल, मसाला उत्पादन और दुग्ध प्र-संस्करण जैसे उद्योग यहाँ की आर्थिक गतिविधियों का मुख्य आधार हैं। इसके अतिरिक्त, क्षेत्र की खनिज संपदा का उपयोग कर निर्माण और अन्य उद्योगों से भी स्थानीय विकास को गति देने के प्रयास किए जा रहे हैं। छठवीं आईआईसी का आयोजन 7 दिसंबर 2024 को नर्मदापुरम् के डिवीजनल आईटीआई में किया जाएगा। पिछली पांच रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव के अनुभवों से प्रेरित होकर, इस कॉन्क्लेव का नर्मदापुरम् क्षेत्र में आयोजन उद्योगों की वृद्धि, निवेश की संभावनाओं और रोजगार सृजन के अवसरों को बढ़ाने के लिये किया जा रहा है। नर्मदापुरम आरआईसी में कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, खनिज, MSME और पर्यटन क्षेत्रों में निवेश के अवसरों पर चर्चा की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रयासों से प्रदेश में एक उद्योग-हितैषी वातावरण बना है, जिससे प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों में प्रगति हो रही है। नर्मदापुरम् और इसके आसपास के क्षेत्र जैसे होशंगाबाद, हरदा में एमएसएमई, कृषि आधारित उद्योग, और पर्यटन के क्षेत्र में कई संभावनाएं हैं, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करेंगे। कॉन्क्लेव का उद्देश्य सभी क्षेत्रों का संतुलित और समन्वित आर्थिक विकास करना है। इस कॉन्क्लेव से नर्मदापुरम् और इसके आस-पास के क्षेत्रों में निवेश के नए रास्ते खुलेंगे जिससे रोजगार के नए अवसर उत्पन्न होंगे और आर्थिक विकास को गति मिलेगी। यह आरआईसी नर्मदापुरम् और आसपास के क्षेत्रों के लिए खास महत्व रखता है, क्योंकि यहाँ की प्राकृतिक खूबसूरती और सांस्कृतिक धरोहर को उद्योगों के साथ जोड़ा जाएगा। पचमढ़ी, जो न केवल एक प्रमुख पर्यटन स्थल है बल्कि यहाँ की अनूठी जैव विविधता और प्राकृतिक संसाधन, अब निवेशकों के लिये नया आकर्षण बनेंगा। साथ ही नर्मदा नदी तट पर औद्योगिक और पर्यटन दोनों क्षेत्रों में विकास की अपार संभावनाएँ हैं। इस कॉन्क्लेव में कृषि, MSME, खाद्य प्रसंस्करण, पर्यटन और खनिज जैसे क्षेत्रों में निवेश के नए रास्ते खुलेंगे, जिससे रोजगार और आर्थिक विकास के अवसरों को बढ़ावा मिलेगा। नर्मदापुरम् और पचमढ़ी, जो पहले से ही प्राकृतिक सौंदर्य और पर्यटन के लिए प्रसिद्ध हैं, अब औद्योगिक दृष्टिकोण से भी नई ऊँचाइयों को छुएंगे। इस कॉन्क्लेव से औद्योगिक, पर्यटन और सामाजिक विकास के बीच एक सामंजस्यपूर्ण संतुलन स्थापित होगा।  

2000 के करीब 2% नोट अभी भी रिजर्व बैंक को वापस नहीं आए, 7000 करोड़ रुपये की वैल्यू

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने नवंबर 2016 में ₹500 और ₹1000 के नोट बंद कर दिए थे। उनकी जगह ₹2000 का नोट लाया गया था। 19 मई 2023 को RBI ने पहली बार ₹2000 के नोट वापस लेने की घोषणा की। उस समय चलन में ₹3.56 लाख करोड़ मूल्य के ₹2000 के नोट थे। RBI ने इन्हें बैंकों और डाकघरों में बदलने की सलाह दी। RBI की घोषणा के बाद लोग अपने ₹2000 के नोट बदलने लगे। अब तक लगभग 98.04% ₹2000 के नोट वापस आ चुके हैं। ₹2000 के नोट वापस लेने पर भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने हाल ही में एक और महत्वपूर्ण घोषणा की है। बताया जा रहा है कि अभी भी लगभग ₹6,970 करोड़ मूल्य के नोट चलन में हैं। इन्हें भी वापस लेने के लिए RBI ने एक और मौका दिया है। जिन लोगों के पास अभी भी ₹2000 के नोट हैं, वे उन्हें RBI कार्यालयों में बदल सकते हैं। इसके अलावा, इन्हें डाकघर के माध्यम से RBI के क्षेत्रीय कार्यालयों में भेजकर भी बदला जा सकता है।  साल 2016 में नोटबंदी के बाद रिजर्व बैंक ने 2000 रुपये के नोट जारी किए थे। लेकिन पिछले साल रिजर्व बैंक ने इस नोट को चलन से बाहर कर दिया था। बैंक ने कहा था कि जिनके भी पास ये नोट हैं, उन्हें बदल लें। रिजर्व बैंक ने  इन नोटों को लेकर डेटा जारी किया। इस डेटा के मुताबिक 19 मई 2023 तक प्रचलन में रहे 2000 रुपये के नोटों में से करीब 98 फीसदी नोट अब वापस आ चुके हैं। वहीं करीब 2 फीसदी नोट अब भी प्रचलन में हैं। 19 मई 2023 को कारोबार बंद होने पर जब 2000 रुपये के नोटों को वापस लेने की घोषणा की गई थी, तब प्रचलन में इन नोटों का कुल मूल्य 3.56 लाख करोड़ रुपये था। करीब जो दो फीसदी नोट अभी भी प्रचलन में हैं, उनकी वैल्यू करीब 7 हजार करोड़ रुपये है। यानी से नोट अभी भी लोगों के पास हो सकते हैं।बैंकों के मर्जर की तैयारी, 43 से घटकर रह जाएंगे 28, जानिए क्या है सरकार का प्लान क्या बेकार हो गए हैं 2000 के नोट? रिजर्व बैंक अब 2000 के नोटों को प्रचलन से बाहर कर चुका है। रिजर्व बैंक ने 19 मई 2023 को घोषणा की थी कि 2000 रुपये के नोट अब प्रचलन में नहीं रहेंगे। लेकिन जिनके पास भी ये नोट हैं, वे 7 अक्टूबर 2023 तक किसी भी बैंक में जाकर अपने अकाउंट में जमा कर सकते हैं। ऐसे में लोगों के दिमाग में सवाल है कि जिनके पास अभी भी ये नोट हैं, क्या वे अब बेकार हो गए हैं। दरअसल, ये नोट अब बाजार में चलन में नहीं हैं। लेकिन जिन लोगों के पास अभी भी ये नोट बचे हैं, वे रिजर्व बैंक जाकर अपने बैंक अकाउंट में जमा करवा सकते हैं। नोटबंदी के समय हुई थी शुरुआत 2000 के नोट रिजर्व बैंक ने नोटबंदी के समय शुरू किए थे। दरअसल, नोटबंदी के दौरान 500 और 1000 के नोट को बंद कर दिया गया था। ऐसे में लोगों की पैसों की जरूरत को पूरा करने के लिए रिजर्व बैंक ने 2000 के नोट जारी किए थे। हालांकि स्थिति सामान्य होने के बाद रिजर्व बैंक ने साल 2018-19 में इन नोटों की छपाई बंद कर दी थी। बाद में इनकाे प्रचलन से बाहर कर दिया। कैसे बदलें 2000 के नोट? अगर अभी भी आपके पास 2000 के नोट हैं तो उन्हें दिल्ली स्थित रिजर्व बैंक में जाकर बदला जा सकता है। इस दौरान ओरिजिनल आधार कार्ड और इसकी फोटो कॉपी ले जाना न भूलें। वहीं अगर कुल रकम 50 हजार रुपये से ज्यादा है तो ओरिजिनल पैन कार्ड और इसकी फोटो कॉपी भी जरूर लेकर जाएं।

क्लाइमेट चेंज का असर खस के तेल की कीमतें बढ़कर 80,000 रुपये प्रति किलो पहुंची

कानपुर  क्लाइमेट चेंज का असर सिर्फ आम लोगों की सेहत या अनाज उत्पादन तक सीमित नहीं रह गया है। जबर्दस्त गर्मी और अनिश्चित मौसम ने खस को भी झटका दिया है। खस की घास से असेंशियल ऑइल का उत्पादन घटने लगा है। 2023 में हाथरस बेल्ट खस के तेल के उत्पादन में 20% तक गिरावट दर्ज हुई है। कन्नौज में तो खस की घास से निकलने वाले तेल की मात्रा में एक तिहाई तक कम हो गई। कन्नौज के सुगंध एवं सुरस विकास केंद्र (एफएफडीसी) के डायरेक्टर शक्ति विनय शुक्ला का कहना है कि क्लाइमेट चेंज के कारण खस और पचौली के पौधों से निकलने वाला तेल कम हुआ। इस वजह से इनसे बनने वाले इत्र, परफ्यूम व अन्य उत्पादों की कीमत बढ़ने लगी है। देश में खस घास की 4-5 किस्में मिलती हैं। यूं तो खस जंगलों और नदी के किनारे उगती है, पर खस की खास प्रजातियों की खेती भी की जाती है। अलग-अलग क्षेत्रों में दिवाली के बाद से मार्च तक खस की घास से तेल निकाला जाता है। 2022 तक तो खस के तेल का उत्पादन ठीक था, लेकिन 2023 में झटका लगा। हाथरस के इत्र कारोबारी लव शर्मा के अनुसार, 2022 में एक क्विंटल घास से 100 ग्राम तेल निकलता था, 2023 में यह घटकर 80 ग्राम रह गया। इस बार भी गर्मी का असर देखने लायक होगा। हाथरस में 2-3 दिन में खस का डिस्टिलेशन शुरू हो जाएगा। ज्यादा फसल लेने की चाह भी है वजह कन्नौज के इत्र एक्सपोर्टर प्रांजुल कपूर ने बताया कि मौसम ने निश्चित तौर पर इत्र/परफ्यूम के कारोबार पर असर डाला है। उत्पादकता घटी है, लेकिन इसके कई अन्य कारण भी हैं। पहले माना जाता था कि खस की बढ़िया उपज लेने के लिए घास की जड़ एक बार तोड़ने के बाद तीन साल तक उसे नहीं तोड़ना चाहिए। इस अंतराल में जड़ ज्यादा परिपक्व होती है और डिस्टिलेशन में तेल भी बढ़िया निकलता है, लेकिन बढ़ती मांग के कारण अब कोई रुकने को तैयार नहीं है। कन्नौज में पैदा होने वाला गुलाब और बेला के फूलों से भी कम तेल निकल रहा है। रु. 28 हजार तक बढ़ गए दाम प्रांजुल बताते है कि पहले दुनिया में खस के तेल का बड़ा स्रोत हैती और डॉमिनिकन रिपब्लिक था, लेकिन वहां से इसकी सप्लाई बंद हो चुकी है। इस वजह से दुनिया अब खस की आपूर्ति के लिए भारत की तरफ देख रही है। एक साल पहले तक 62 हजार रुपये/किलो बिकने वाली ‘रूह खस’ ऑइल अब 80 हजार रुपये/किलो बिक रहा है। साधारण खस का ऑइल 14-15 हजार रुपये/किलो से बढ़कर 23 हजार रुपये तक पहुंच गया है। खस के दाम पर उसकी किस्म, डिस्टिलेशन और जगह का भी असर होता है। पचौली की फसल खराब, कीमत बढ़ी भारत में पचौली के तेल का भी इत्र और परफ्यूम में खूब इस्तेमाल होता है। पचौली के फूल और पत्तियां इंडोनेशिया से आते हैं। क्लाइमेट चेंज के कारण वहां भी फसल खराब हुई है। पचौली ऑइल के बढ़कर 16-19 हजार रुपये/किलो तक चल रहे हैं, जबकि 2 साल पहले दाम 3500-4000 रुपये/किलो की रेंज में होते थे। भारत में पूर्वोत्तर में पचौली का थोड़ा उत्पादन होता है।

हाईकोर्ट ने CPS कानून को किया निरस्त, सरकार को झटका, 6 मुख्य संसदीय सचिव हटाए गए

शिमला हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा बनाए मुख्य संसदीय सचिव अब नहीं रहेंगे। हाईकोर्ट ने सरकार के इन सभी संसदीय सचिवों को तुरंत प्रभाव से पद से हटाने के आदेश दिए हैं। इस फैसले के बाद वर्तमान सरकार में कार्य कर रहे छह मुख्य संसदीय सचिवों को अपना पद व सुविधाएं छोड़नी होंगी। जस्टिस विवेक ठाकुर और बीसी नेगी की हाईकोर्ट की खंडपीठ ने यह भी निर्देश दिया कि इन सीपीएस की सभी सुविधाएं और विशेषाधिकार तत्काल प्रभाव से वापस ले लिए जाएं। कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश संसदीय सचिव (नियुक्ति, वेतन, भत्ता, शक्तियां, विशेषाधिकार और संशोधन) अधिनियम, 2006 को शून्य घोषित कर दिया। सार्वजनिक संपत्ति पर किया कब्जा जस्टिस बिपिन चंद्र नेगी ने फैसला सुनाते हुए कहा कि ये पद सार्वजनिक संपत्ति पर कब्जा करते हैं और सभी सुविधाएं तत्काल प्रभाव से वापस ली जानी चाहिए।मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने 8 जनवरी, 2023 को कैबिनेट विस्तार से पहले छह सीपीएस-अर्की विधानसभा से संजय अवस्थी, कुल्लू से सुंदर सिंह, दून से राम कुमार, रोहड़ू से मोहन लाल बराकटा, पालमपुर से आशीष बुटेल और बैजनाथ से किशोरी लाल को नियुक्त किया था। ये भर्ती 2006 के अधिनियम के अनुसार की गई: बीजेपी एडवोकेट मुख्य संसदीय सचिवों की भर्ती पर हाईकोर्ट के आदेश पर भाजपा के वकील एडवोकेट वीरबहादुर वर्मा ने कहा कि सतपाल सती के नेतृत्व में 10 भाजपा विधायकों ने सीपीएस की भर्ती को कोर्ट में चुनौती दी थी। यह भर्ती 2006 के अधिनियम के अनुसार की गई थी। कोर्ट ने माना है कि 2006 का अधिनियम असंवैधानिक था। हाईकोर्ट ने सीपीएस सुविधाओं को तुरंत वापस लेने का भी आदेश दिया है। अगर दूसरा पक्ष सुप्रीम कोर्ट जाने का फैसला करता है, तो उन्हें वहां भी कोई राहत नहीं मिलेगी, अधिनियम निरस्त कर दिया गया है। जयराम ठाकुर ने दी प्रतिक्रिया सीपीएस के फैसले पर नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। भारतीय जनता पार्टी पहले दिन से ही सीपीएस बनाने के फैसले के खिलाफ थी क्योंकि यह असंवैधानिक था और यह संविधान के विरुद्ध निर्णय था। उन्होंने कहा कि जब 2017 में हम सरकार में थे तो हमारे समय भी यह प्रश्न आया था। तो हमने इसे पूर्णतया असंवैधानिक बताते हुए सीपीएस की नियुक्ति नहीं की थी। आज हाईकोर्ट द्वारा फिर से सरकार के तानाशाही पूर्ण और असंवैधानिक फैसले को खारिज कर दिया। हम मांग करते हैं कि इस पद का लाभ लेने वाले सभी विधायकों की सदस्यता भी समाप्त हो।

54 लाख टन से अधिक मसालों के उत्पादन के साथ मध्य प्रदेश ने देश में पहला स्थान प्राप्त किया

भोपाल मध्यप्रदेश के किसानों ने मसाला फसलों के उत्पादन में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। 2023-24 में रिकॉर्ड 54 लाख टन से अधिक मसालों के उत्पादन के साथ प्रदेश ने देश में पहला स्थान प्राप्त किया है। उद्यानिकी एवं खाद्य प्र-संस्करण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने इस उपलब्धि पर प्रदेश के किसानों को बधाई दी है। उन्होंने इस सफलता का श्रेय किसानों की मेहनत और लगन को दिया गया है। कृषि को लाभकारी बनाने के उपाय प्रदेश के किसानों ने पिछले 4 सालों में 2 लाख 16 हजार मिट्रिक टन मसाला फसलों के उत्पादन में वृद्धि की है। मिर्च के उत्पादन में दूसरा स्थान मिला है। मंत्री कुशवाह ने कहा कि किसानों के लिए यह आवश्यक है कि वे पारंपरिक कृषि फसलों के साथ-साथ कैश क्रॉप्स जैसे धनिया, हल्दी, मिर्च, अदरक, लहसुन और जीरा भी उगाएं। इन मसाला फसलों का उत्पादन अल्प समय में किया जा सकता है और बाजार में अच्छे दाम भी मिलते हैं। यह फसलें किसानों के लिए अतिरिक्त आय का स्रोत बन सकती हैं। फ्लोरीकल्चर और फलोद्यान अपनाने की सलाह मंत्री ने किसानों को मसाला फसलों के साथ-साथ फलोद्यान और फ्लोरीकल्चर (फूलों की खेती) को भी अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में भी किसानों को राज्य और केंद्र सरकार द्वारा अनुदान और अन्य सुविधाएं मिल रही हैं। इसके अलावा, शासकीय नर्सरियों से उत्तम गुणवत्ता के बीज और पौधे उपलब्ध कराए जा रहे हैं। फसलों के संरक्षण के लिए योजनाएं कुशवाह ने खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में भी किसानों को मदद देने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि कोल्ड स्टोरेज, वेयरहाउस और भंडारण सुविधाओं के लिए विभिन्न योजनाएं बनाई गई हैं। इन योजनाओं के तहत किसानों को अनुदान, प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता प्रदान की जा रही है, जिससे वे फसलों के संरक्षण और भंडारण में सक्षम हो सकें।

झामुमो, कांग्रेस, राजद वाले केंद्र की ओर से झारखंड के गरीबों के पक्के आवास के लिए भेजी राशि हड़प ली

गोड्डा पीएम नरेंद्र मोदी ने बुधवार को झारखंड के गोड्डा में चुनावी सभा को संबोधित करते हुए भ्रष्टाचार के मुद्दे पर राज्य की झामुमो, कांग्रेस और राजद सरकार पर जोरदार जुबानी हमला किया। उन्होंने कहा कि इन लोगों ने केंद्र की ओर से झारखंड के गरीबों के पक्के आवास के लिए भेजी राशि हड़प ली। हर घर नल से जल योजना का पैसा खा गए। यहां तक कि गरीबों की थाली से उनके लिए भेजा गया मुफ्त अनाज भी चुरा लिया। उन्होंने कहा कि पक्का मकान के लिए केंद्र से भेजी गई राशि का उपयोग करने के बजाय झारखंड की सरकार ने अपनी कोई स्कीम शुरू की, ताकि उन्हें कट कमीशन मिलता रहे। यहां के लोगों को बालू नहीं मिलती, गिट्टी नहीं मिलती। ये सब कुछ बेचकर खा जाते हैं। यही पैसा इनके नेताओं के घरों से नोटों के पहाड़ के रूप में निकल रहा है। टीवी पर नोटों का पहाड़ दिखा, लेकिन जेएमएम-कांग्रेस को इसपर कोई शर्म नहीं आती। उन्हें जरा भी पछतावा नहीं होता। पीएम मोदी ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जेल गए कांग्रेस के मंत्री आलमगीर आलम का नाम लिए बगैर उन पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने हद तो यह कर दी कि नोटों के पहाड़ वाला जो नेता जेल गया, उसके परिवार के सदस्य को ही टिकट दे दिया। इससे पता चलता है कि इन्हें अपनी लूट-खसोट पर कोई शर्म नहीं आती। यह आपके घाव पर नमक छिड़कने का काम है। उन्होंने कांग्रेस को आरक्षण विरोधी करार देते हुए कहा कि नेहरू से लेकर राजीव गांधी तक ने हमेशा आरक्षण का विरोध किया। अब ये लोग एक जाति को दूसरी जाति से लड़ाने में लगे हैं। इनका मकसद संथाल को पहाड़िया से, मुंडा को खरवार से, उरांव को पातर जाति से लड़ाना है। इसमें जेएमएम भी कांग्रेस का साथ दे रही है। जनता इन्हें चुनावी सजा देने के मूड में है। पीएम मोदी ने झारखंड के लिए अपनी सरकार के कामकाज का जिक्र करते हुए कहा कि गोड्डा में आजादी के 75 साल तक रेल नहीं पहुंची थी। रेल तब पहुंची, जब आपने मोदी पर भरोसा किया। दर्जन भर से ज्यादा ट्रेनें यहां से चलती हैं। ट्रेन सेवाओं का इस तरह विस्तार हुआ है कि अब आप देवघर में बाबा बैद्यनाथ के दर्शन कर सीधे बाबा विश्वनाथ के दर्शन करने वाराणसी जा सकते हैं। भाजपा, एनडीए सरकार झारखंड में उद्योगों को बढ़ावा दे रही है। बिजली और सीमेंट के कारखाने लगे हैं। साहिबगंज में मल्टी टर्मिनल बना है। उन्होंने सवाल उठाया कि झारखंड में जेएमएम, कांग्रेस, राजद ने लंबे समय तक राज किया है, लेकिन पलायन, गरीबी, बेरोजगारी के सिवाय दिया क्या है? यहां तक कि सीएम के क्षेत्र से भी लोग रोजगार की तलाश में पलायन कर रहे हैं। दूसरी तरफ हमारा प्रयास है कि झारखंड की पहचान पलायन से नहीं, पर्यटन से हो। पीएम मोदी ने कहा कि सिदो कान्हू, चांद भैरव, फूलो झानो जैसे शहीदों की धरती को नमन करते हुए उन्हें गर्व हो रहा है। दो दिन बाद 15 नवंबर से केंद्र सरकार पूरे देश में धरती आबा बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती धूमधाम से मनाने जा रही है। पूरे देश में झारखंड के आदिवासी महापुरुषों के भव्य स्मारक बनाए जाएंगे। उन्हें खुशी है कि वीर शहीद सिदो-कान्हू के वंशज मंडल मुर्मू भी हमारे साथ हैं। मुझे आज उन्हें सम्मानित करने का अवसर मिला।

देश में लागू हुई ‘मासिक धर्म स्वच्छता नीति’, लड़कियों को पीरियड्स के दौरान मिलेगी राहत

नई दिल्ली केंद्र ने  सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा अनुमोदित “स्कूल जाने वाली लड़कियों के लिए मासिक धर्म स्वच्छता नीति” अब लागू हो गई है। स्कूली लड़कियों की मासिक धर्म स्वच्छता में सुधार पर केंद्रित नीति को 10 अप्रैल, 2023 के न्यायालय के आदेश के जवाब में 2 नवंबर, 2024 को मंजूरी दी गई थी। नीति का उद्देश्य और मुख्य बिंदु इस नीति का मुख्य उद्देश्य स्कूल जाने वाली लड़कियों में मासिक धर्म के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। क्योंकि मासिक धर्म अक्सर उनकी गतिविधियों और शिक्षा में भागीदारी को प्रभावित करता है। इस योजना के तहत सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में लड़कियों को मासिक धर्म से संबंधित स्वच्छता सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। जिससे उन्हें सुरक्षित और स्वच्छ मासिक धर्म साधनों तक पहुंच मिलेगी। इसके साथ ही यह नीति मासिक धर्म अपशिष्ट के पर्यावरण-friendly तरीके से निपटान को भी बढ़ावा देगी। कांग्रेस नेता की मुफ्त सैनिटरी पैड वितरण की मांग यह नीति उस जनहित याचिका (PIL) के संदर्भ में है। जिसे कांग्रेस नेता जया ठाकुर ने दाखिल किया था। याचिका में कक्षा 6 से 12 तक की छात्राओं के लिए मुफ्त सैनिटरी पैड वितरण की मांग की गई है। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई 12 अक्टूबर को होगी। केंद्र सरकार की जानकारी: शौचालय और स्वच्छता किट वितरण केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि देश के 97.5% स्कूलों में लड़कियों के लिए अलग शौचालय उपलब्ध हैं, और दिल्ली, गोवा, और पुडुचेरी जैसे राज्य 100% अनुपालन में हैं। इसके अलावा, सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर मासिक धर्म स्वच्छता किट का वितरण भी शुरू किया है, ताकि छात्राओं के बीच मासिक धर्म स्वच्छता के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण को बढ़ावा दिया जा सके। मासिक धर्म स्वच्छता नीति से क्या होगा फायदा? कार्यक्रम का उद्देश्य मासिक धर्म के बारे में कम जागरूकता को दूर करना है, जो अक्सर स्कूली लड़कियों की गतिशीलता और दैनिक गतिविधियों में भागीदारी को बाधित करता है। यह सुनिश्चित करने के उपायों की रूपरेखा तैयार करता है कि सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में छात्राओं को मासिक धर्म से जुड़ी स्वच्छता सुविधाओं तक पहुंच हो। केंद्र का उद्देश्य सुरक्षित मासिक धर्म प्रथाओं और मासिक धर्म अपशिष्ट के पर्यावरण के अनुकूल उपयोग को बढ़ावा देना है। कांग्रेस नेता ने उठाई थी मुफ्त सैनिटरी पैड वितरित करने की मांग सुप्रीम कोर्ट कांग्रेस नेता जया ठाकुर द्वारा दायर एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई कर रहा है, जिसमें सभी सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और आवासीय स्कूलों में कक्षा 6 से 12 तक की लड़कियों को मुफ्त सैनिटरी पैड वितरित करने की मांग की गई है। न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति पंकज मिथल की पीठ 12 अक्टूबर को मामले की सुनवाई करेगी। इस नीति का उद्देश्य स्कूली छात्राओं के बीच ज्ञान, दृष्टिकोण और व्यवहार में बदलाव लाने के लिए सरकार की स्कूली प्रणाली के भीतर मासिक धर्म स्वच्छता को मुख्यधारा में लाना है, ताकि कम जागरूकता की बाधाओं को दूर किया जा सके जो अक्सर उनकी स्वतंत्रता, गतिशीलता और दैनिक गतिविधियों में भागीदारी को प्रतिबंधित करती हैं,” लंबित मामले में दायर हलफनामे में कहा गया है। देश के 97.5% स्कूलों में लड़कियों के लिए अलग शौचालय केंद्र ने पहले अदालत को बताया था कि भारत में 97.5% स्कूल छात्राओं के लिए अलग शौचालय प्रदान करते हैं, जिसमें दिल्ली, गोवा और पुडुचेरी जैसे राज्य 100 प्रतिशत अनुपालन करते हैं। संस्थान ने घोषणा की कि छात्राओं को मासिक धर्म स्वच्छता किट के वितरण पर एक राष्ट्रीय पहल चल रही है।

जनजातीय संस्कृति का गौरव गान ही सनातन संस्कृति का गौरव गान है : मुख्यमंत्री साय

रायपुर केन्द्रीय मंत्री एवं मुख्यमंत्री ने माटी के वीर पदयात्रा का किया भव्य शुभारंभ केन्द्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में आज छत्तीसगढ़ के जशपुर नगर में जनजातीय गौरव दिवस के उपलक्ष्य में माटी के वीर पदयात्रा का भव्य आयोजन हुआ। पदयात्रा के शुभारंभ कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए केन्द्रीय मंत्री डॉ. मंडाविया ने देश की आजादी और कोरोना काल में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा के जीवन से हमें प्रेरणा लेना चाहिए, जिन्होंने 25 वर्ष की आयु में मातृ भूमि को आजाद कराने के लिए लड़ाई लड़ी और अपना बलिदान दिया। उन्होंने कहा कि देश की आजादी की लड़ाई में 6 लाख युवाओं ने अपना बलिदान दिया। उन्होंने युवाओं से विकसित भारत के सपने को पूरा करने का संकल्प लेने तथा सामाजिक सरोकार को बढ़ावा देने के लिए आगे आने का आव्हान किया। डॉ. मंडाविया ने इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के आग्रह पर जशपुर नगर में सर्वसुविधायुक्त स्पोर्ट्स स्टेडियम का निर्माण कराए जाने की घोषणा की। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने माटी के वीर पदयात्रा के शुभारंभ कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि यह छत्तीसगढ़ और जशपुर के लिए सौभाग्य की बात है कि भगवान बिरसा मुंडा की 150 वीं जयंती के उपलक्ष्य में यह कार्यक्रम आयोजित हो रहा है। उन्होंने इस मौके पर भगवान बिरसा मुंडा की जयंती 15 नवम्बर को देश में जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाए जाने की घोषणा के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के प्रति आभार प्रकट किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी ने जनजातियों को गौरव करने का एक और बड़ा अवसर प्रदान किया है। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि जब-जब संस्कृति पर हमला हुआ है, जनजातीय समाज ने इसका तीव्र प्रतिकार किया है। जनजातीय संस्कृति प्रकृति से प्रेम करने की संस्कृति है। यह संस्कृति सौहार्द्र, शांति और सद्भाव की संस्कृति है। कलाओं से प्रेम करने वाली यह संस्कृति हमारी जनजातीय सनातन संस्कृति का उद्गम है। जनजातीय संस्कृति को बचाने की चिंता सनातन संस्कृति को बचाने की चिंता ही है। जनजातीय संस्कृति का गौरवगान सनातन संस्कृति का गौरवगान ही है। केन्द्रीय मंत्री एवं मुख्यमंत्री ने माटी के वीर पदयात्रा का किया भव्य शुभारंभमुख्यमंत्री ने कहा कि धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान और पीएम जनमन अभियान जनजातीय समुदायों के कल्याण के लिए संचालित की जा रही है। प्रधानमंत्री श्री मोदी जी ने जनजातीय समुदायों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए एकलव्य विद्यालयों तथा आय में बढ़ोतरी के लिए वन-धन योजना प्रारंभ किया। आयुष्मान भारत योजना में जनजातीय समुदायों के लिए मुफ्त इलाज की सुविधा शुरू की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज छत्तीसगढ़ में डबल इंजन की सरकार है। हमने जनजातीय क्षेत्रों के विकास की रणनीति तय की है। हमारी सरकार जनजातीय समाज के प्राचीन गौरव और वैभव को वापस पाने के लिए काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद अब अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है। लोकतंत्र की जड़ें दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंच रही हैं। अंदरूनी गांवों में भी नियद नेल्ला नार योजना के तहत सड़क, पेयजल, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार जैसी मूलभूत अधोसंरचनाएं पहुंच रही हैं। हमने विकसित भारत के निर्माण के लिए विकसित छत्तीसगढ़़ निर्माण का संकल्प लिया है। सभी की सहभागिता से इस लक्ष्य को हासिल किया जाएगा। जनजातीय समुदायों की अधिक से अधिक सहभागिता इस कार्य में सुनिश्चित की जाएगी। माटी के वीर पदयात्रा के शुभारंभ कार्यक्रम में धरती के आबा भगवान बिरसा मुंडा के जीवन वृत्त पर आधारित वीडियो फिल्म का प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम में खेलकूद सहित अन्य क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करने वाले जनजातीय युवाओं तथा माई भारत से जुड़े वॉलेंटियर को सम्मानित किया गया। मुंडा समाज के अध्यक्ष श्री शंकर राम बारला ने भी कार्यक्रम को सम्बोधित किया। माटी के वीर पदयात्रा कार्यक्रम के शुभारंभ स्थल पुरना नगर मैदान में जनजातीय नायकों के जीवन गाथा, जनजातीय संस्कृति एवं परंपराओं पर आधारित भव्य प्रदर्शनी लगाई गई। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री श्री अरूण साव, आदिम जाति कल्याण मंत्री श्री रामविचार नेताम, वित्त मंत्री एवं जशपुर जिले के प्रभारी मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री टंक राम वर्मा, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, सांसद श्री राधेश्याम राठिया एवं श्री चिंतामणी महराज, विधायक श्रीमती गोमती साय, श्रीमती रायमुनि भगत, श्री राम कुमार टोप्पो, श्री सुशांत शुक्ला, राज्य महिला आयोग की सदस्य श्रीमती  प्रियम्बदा सिंह जूदेव सहित श्री प्रबल प्रताप सिंह जूदेव, श्री रणविजय सिंह जूदेव सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण एवं बड़ी संख्या में युवा और नागरिकगण उपस्थित थे।

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