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नवागत आयुक्त जनसंपर्क श्री मनीष सिंह ने कार्यभार ग्रहण किया

भोपाल भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारी श्री मनीष सिंह ने गुरुवार को आयुक्त जनसंपर्क एवं प्रबंध संचालक, म.प्र. माध्यम के पद पर कार्यभार ग्रहण कर लिया है। वे परिवहन सचिव का अतिरिक्त प्रभार भी संभालेंगे। आयुक्त जनसंपर्क और प्रबंध संचालक माध्यम ने कहा कि शासन की प्राथमिकताओं और जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी आम नागरिकों तक प्रभावी रूप से पहुँचाना विभाग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। इस दिशा में समन्वित प्रयास सुनिश्चित किए जाएंगे। आयुक्त जनसंपर्क और प्रबंध संचालक माध्यम श्री सिंह ने कार्यभार ग्रहण करने के बाद विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने विभागीय योजनाओं एवं गतिविधियों की समीक्षा करते हुए जनहित के कार्यक्रमों के प्रभावी प्रचार-प्रसार और समयबद्ध क्रियान्वयन पर बल दिया।  

बुरहानपुर में बनेगा मिनी एयरपोर्ट, शाहपुर को बनाएंगे नगर पालिका,

भोपाल. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश का चहुंमुखी विकास ही सरकार का एकमात्र लक्ष्य है। आत्मनिर्भर और विकसित मध्यप्रदेश के निर्माण में हर नागरिक की सहभागिता सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने कहा कि सबको साथ और विश्वास में लेकर हम ऐसे नये मध्यप्रदेश का निर्माण करेंगे, जहां विकास केवल अवसर नहीं, यहां के हरेक नागरिक का अधिकार होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को बुरहानपुर में विकास कार्यों के लोकार्पण एवं भूमिपूजन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिंगल क्लिक से 696 करोड़ 37 लाख रुपये लागत के 80 विकास कार्यों का भूमिपूजन और लोकार्पण कर बुरहानपुर जिले के समग्र विकास को नई गति दी। उन्होंने कहा कि आज जिन कार्यों की सौगातें मिली हैं, ये जिले को आधुनिक, विकसित और आत्मनिर्भर बनाने में बड़ी भूमिका निभाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुरहानपुर में नर्मदेश्वर अखंड शिवलिंग की पूजा-अर्चना की। हमारा प्रण, विकास का प्रकाश पहुंचे प्रदेश के हर कोने तक मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश को हर क्षेत्र में अग्रणी बनाने के लिए हमारी सरकार पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। विकास का प्रकाश प्रदेश के हर कोने, हर गली-मोहल्ले तक पहुंचे, इसी मूल संकल्प के साथ हमारी सरकार सबको साथ और विश्वास में लेकर आगे बढ़ रही है। सरकार अधोसंरचनात्मक और जनकल्याणकारी कार्यों को प्राथमिकता देकर प्रदेश के विकास की गति में निरंतर तेज़ी ला रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बुरहानपुर का विकास हमारी प्राथमिकता में है। हमने इस जिले को विकसित और समृद्ध बनाने का संकल्प लिया है, जिले की जनता की भागीदारी से हम इसे सिद्ध करेंगे, आने वाला समय इसका साक्षी बनेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुरहानपुर के नेहरू स्टेडियम में दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने कृषि, उद्यानिकी एवं अन्य विभागों की 2 वर्ष की उपलब्धियों और भावी विकास योजनाओं पर आधारित विकास प्रदर्शनी का शुभारंभ कर विभिन्न स्टॉल्स का अवलोकन भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की प्रमुख घोषणाएं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुरहानपुर में मिनी एयरपोर्ट बनाने की घोषणा की। उन्होंने बुरहानपुर में केला उत्पादक किसानों के हित में वैल्यू एडिशन, भण्डारण एवं प्रसंस्करण के लिए इकाई स्थापित करने, बुरहानपुर में कृषि आधारित रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव कराने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में नगर परिषद शाहपुर को परीक्षण उपरांत नगर पालिका का दर्जा दिया जाएगा। बुरहानपुर में वारकरी समुदाय का कीर्तन केंद्र बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हॉर्टीकल्चर सब्जेक्ट अब प्रदेश के सभी महाविद्यालयों में पढ़ाया जाएगा। उन्होंने खामनी से दही हांडी तक खामनी से रायगांव एवं शाहपुर से सुखपुरी तक सड़क बनाने की घोषणा भी की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बुरहानपुर में युवाओं के लिए कौशल आधारित प्रशिक्षण प्रारंभ किए जाएंगे। राज्य सरकार बुरहानपुर सहकारी सूत मिल श्रमिकों के बकाया भुगतान कराएगी और यहां नए उद्योग-धंधे भी स्थापित करेगी। ‘बुनकरों का शहर’ है बुरहानपुर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हम आज ही लाड़ली बहना योजना की 33वीं किश्त प्रदेश की सवा करोड़ से अधिक बहनों के खाते में अंतरित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कृषि से लेकर कपड़ा निर्माण तक, दवा से लेकर फर्नीचर उद्योग तक, पाइप निर्माण से लेकर कृषि उपकरण निर्माण तक बुरहानपुर का जवाब नहीं। यह जिला पावरलूम उद्योग का प्रमुख केन्द्र है और कपड़ा उत्पादन के कारण ‘बुनकरों के शहर’ के रूप में बुरहानपुर के नाम से विख्यात है। उन्होंने कहा कि कपड़ा उद्योग की बढ़ती मांग के कारण यहां कपास की खेती भी बड़े पैमाने पर की जाती है। यह खेती किसानों की आय बढ़ाने के साथ उद्योगों को भी मजबूती देती है। यहां का केला उत्पादन, फसल विविधता और परिश्रमी किसान, यही हमारे कृषक कल्याण वर्ष की असली ताकत हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केला और कपास जैसे प्रमुख उत्पादों के लिए प्रोसेसिंग, भंडारण और निर्यात सुविधाओं का और अधिक विस्तार किया जाएगा। ताप्ती ग्राउंड वॉटर मेगा रिचार्ज परियोजना से लहलहाएगी बुरहानपुर की धरती मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मां ताप्ती और नर्मदा मैया के आशीर्वाद से मालवा-निमाड़ का पूरा क्षेत्र आनंदित है। प्रदेश में सरदार सरोवर जैसे बांध बनाने की श्रृंखला शुरू हुई है। हमारे किसान ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन रहे हैं। मध्यप्रदेश के किसान नदी जोड़ो अभियान से लाभान्वित हो रहे हैं। प्रदेश में सिंचाई सुविधाओं का निरन्तर विस्तार हो रहा है। ताप्ती ग्राउंड वॉटर मेगा रिचार्ज परियोजना पूरी होने के बाद बुरहानपुर की धरती और भी लहलहाएगी। उन्होंने कहा कि धार में देश का पहला “पीएम मित्र पार्क” निर्मित हो रहा है, इससे कपास उत्पादक किसानों को लाभ मिलेगा। बुरहानपुर में कपास और केला फसल आधारित प्रसंस्करण उद्योग स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के बेटे-बेटियों के उज्जवल भविष्य के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। उन्होंने प्रदेशवासियों से सामूहिक विवाह को प्रोत्साहन देने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि उन्होंने स्वयं अपने पुत्र का विवाह सामूहिक विवाह समारोह में किया। जल संसाधन एवं बुरहानपुर जिले के प्रभारी मंत्री  तुलसीराम सिलावट ने कहा कि प्रदेश के समग्र विकास और विकसित भारत के संकल्प की पूर्ति के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष घोषित किया है। इसकी सौगातों की शुरुआत बुरहानपुर से हो रही है। यहां 922.51 करोड़ रुपए की बड़ी सिंचाई परियोजना से 17700 हेक्टेयर में सिंचाई सुविधा मिलेगी। नावथा सिंचाई परियोजना में 1673 करोड़ रुपए से अधिक लागत से निर्मित सिंचाई सुविधाओं का लाभ 22 हजार किसान परिवारों को मिलेगा। पिछले 2 वर्षों के प्रयासों से बुरहानपुर में कुल 85133 हेक्टेयर रकबे में सिंचाई की सुविधा बढ़ेगी। खण्डवा सांसद  ज्ञानेश्वर पाटिल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ऐसे मुख्यमंत्री है, जो धरातल पर कार्य करने में विश्वास करते हैं। विकास कार्यों की सिर्फ घोषणा नहीं करते, उन्हें जमीन पर उतारते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुरहानपुर के विकास में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। बुरहानपुर में 15 हजार हितग्राहियों को प्रधानमंत्री आवास मिले हैं। जिले के सभी पात्र हितग्राहियों को नल से जल, नि:शुल्क राशन और आवास की सुविधा मिल रही है। विधायक बुरहानपुर एवं पूर्व मंत्री  अर्चना चिटनीस ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में बुरहानपुर हर क्षेत्र में विकास के पथ पर अग्रसर है। बुरहानपुर … Read more

कोतमा विधानसभा के 25 से ज्यादा पंचायतों में 25-25 लाख के मंगल भवन स्वीकृत

अनूपपुर  मध्य प्रदेश शासन के कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  दिलीप जायसवाल ने कहा है कि राज्य सरकार विकास के प्रति पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा अनुपपुर जिले को अनेक विकासात्मक सौगातें प्रदान की गई हैं, जिससे जिले में निरंतर प्रगति का मार्ग प्रशस्त हो रहा है। राज्य मंत्री  जायसवाल ने कहा कि जिले में नए उद्योगों की स्थापना की जा रही है, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे तथा क्षेत्र की अर्थव्यवस्था सुदृढ़ होगी। राज्यमंत्री  जायसवाल शुक्रवार को कोतमा में आयोजित पालिका बाजार शॉपिंग कॉम्प्लेक्स के लोकार्पण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। राज्य मंत्री  दिलीप जायसवाल ने कहा कि राज्य सरकार स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार तथा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ठोस एवं प्रभावी प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि जरूरतमंद मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने हेतु एयर एम्बुलेंस सेवा प्रारंभ की गई है तथा सभी जिलों में मेडिकल कॉलेज एवं चिकित्सालय खोले जा रहे हैं। साथ ही स्वास्थ्य सुविधाओं का निरंतर विस्तार किया जा रहा है। शिक्षा के क्षेत्र में सांदीपनि विद्यालय स्थापित किए जा रहे हैं, जहां विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ संस्कारयुक्त वातावरण भी प्रदान किया जा रहा है।  राज्य मंत्री जयसवाल ने कहा कि महिलाओं को आत्मनिर्भर एवं सशक्त बनाने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा  लाडली बहना योजना, लाडली लक्ष्मी योजना , प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना सहित विभिन्न कल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इन योजनाओं के माध्यम से महिलाएं आर्थिक एवं सामाजिक रूप से सशक्त होकर समृद्धि की ओर अग्रसर हो रही हैं। उन्होंने कहा कि आगामी लोकसभा एवं विधानसभा चुनावों में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान कर उन्हें जनप्रतिनिधित्व का अवसर दिया जा रहा है, जिससे समाज के विकास में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित होगी। राज्य मंत्री  जायसवाल ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी तथा प्रदेश के मुख्यमंत्री  डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सरकार विकास के नए आयाम स्थापित कर रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुरूप जिले के 125 ग्रामों में लगभग 46 हजार हेक्टेयर भूमि को सिंचित करने हेतु कार्ययोजना तैयार की जा रही है। इससे किसानों को समुचित सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी तथा वे विविध फसलों का उत्पादन कर अधिक लाभ अर्जित कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा किसानों को निःशुल्क सौर पंप उपलब्ध कराने की योजना भी संचालित की जा रही है, जिससे प्रत्येक खेत तक जल उपलब्ध कराया जा सके। इससे किसान अपनी उपज को बाजार में विक्रय कर सकेंगे, व्यापारिक गतिविधियों में वृद्धि होगी तथा स्थानीय अर्थव्यवस्था को नया प्रोत्साहन प्राप्त होगा। राज्य मंत्री  जायसवाल ने कहा कि विधानसभा क्षेत्र कोतमा के अंतर्गत 25 से अधिक ग्राम पंचायतों में 25-25 लाख रुपये की लागत से मंगल भवन स्वीकृत किए गए हैं। इनमें से लगभग 14 मंगल भवनों का भूमिपूजन संपन्न हो चुका है तथा शेष मंगल भवनों का भूमिपूजन आगामी दिनों में किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रत्येक वर्ग की आवश्यकता एवं मांग के आधार पर चरणबद्ध रूप से मंगल भवनों का निर्माण कराया जा रहा है। राज्य मंत्री  जायसवाल ने विधानसभा क्षेत्र कोतमा में संचालित विभिन्न विकास कार्यों एवं योजनाओं के संबंध में उपस्थित नागरिकों को विस्तारपूर्वक जानकारी भी प्रदान की। इस दौरान कार्यक्रम को  अध्यक्ष नगर पालिका कोतमा  अजय सराफ, उपाध्यक्ष नगर पालिका कोतमा मती वैशाली बद्री ताम्रकार, जनपद पंचायत पुष्पराजगढ़ के पूर्व अध्यक्ष  हीरा सिंह श्याम ने भी संबोधित किया। इस दौरान राज्य मंत्री  जायसवाल ने नगर पालिका कोतमा के द्वारा 103.09 लाख रुपए की लागत से नवनिर्मित पालिका बाजार शॉपिंग कंपलेक्स का फीता काटकर वैदिक मंत्र उच्चारण के साथ लोकार्पण किया। इस दौरान राज्य मंत्री द्वारा नगर पालिका द्वारा नवनिर्मित पालिका बाजार शॉपिंग कांप्लेक्स के आवंटित दुकानदारों को प्रतीक स्वरूप दुकानों की चाबी प्रदान की गई। कार्यक्रम में नगर पालिका अध्यक्ष डूमर कछार  सुनील चौरसिया, वरिष्ठ समाजसेवी  रामावतार अग्रवाल,  मदन त्रिपाठी,  जितेंद्र भट्ट,  विनोद केवट,  हनुमान गर्ग सहित अन्य जनप्रतिनिधि अधिकारी नगर पालिका कोतमा के पार्षद सहित बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।  

महिला स्व-सहायता समूहों को मिलेगा संबल, आधुनिक डेयरियों के भ्रमण पर पहुंचे डिप्टी सीएम

रायपुर. गुजरात के बनासकांठा की डेयरी क्रांति से सीख लेने पहुँचा छत्तीसगढ़ का दल छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा एवं वन एवं पर्यावरण मंत्री  केदार कश्यप ने गुजरात के मेहसाणा जिले के बनासकांठा स्थित प्रसिद्ध दूधसागर डेयरी, बनास डेयरी एवं अमूल डेयरी का पशुपालकों एवं बिहान दीदियों के साथ शैक्षणिक भ्रमण किया। इस दौरान दोनों मंत्रियों ने डेयरी की आधुनिक कार्यप्रणाली, तकनीकी नवाचारों और सहकारी मॉडल का विस्तृत अवलोकन किया।        इस दौरान प्रतिनिधिमंडल को डेयरी के अधिकारियों द्वारा संपूर्ण उत्पादन प्रक्रिया की जानकारी दी गई। उपमुख्यमंत्री एवं वन मंत्री ने डेयरी प्लांट, बायो-सीएनजी प्लांट, खाद्य तेल इकाई, आटा प्लांट तथा शेरपुरा डेयरी कोऑपरेटिव सोसायटी का निरीक्षण किया और वहां की व्यवस्थाओं को करीब से समझा।     इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री  शर्मा ने कहा कि यह भ्रमण केवल अवलोकन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे सीखकर छत्तीसगढ़ में लागू करने का अवसर है। उन्होंने प्रतिभागियों से सफल डेयरी मॉडल, दुग्ध संकलन प्रणाली, गुणवत्ता नियंत्रण, प्रसंस्करण तकनीक और विपणन व्यवस्था का गहन अध्ययन करने को कहा।         उन्होंने बताया कि इस शैक्षणिक भ्रमण से प्रतिभागियों को संतुलित चारा विकास, उन्नत पशुपालन तकनीक, दुग्ध प्रसंस्करण, डेयरी उत्पाद निर्माण तथा विपणन की व्यवहारिक जानकारी प्राप्त होगी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ग्रामीण महिलाओं और पशुपालकों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सतत प्रयासरत है। बिहान समूहों के माध्यम से महिलाओं को संगठित कर आर्थिक गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है, वहीं पशुपालन विभाग द्वारा दुग्ध उत्पादन बढ़ाने और आय संवर्धन के लिए विभिन्न योजनाएँ संचालित की जा रही हैं।        वन, पर्यावरण एवं सहकारिता मंत्री  केदार कश्यप ने कहा कि डेयरी सहकारी मॉडल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने का सशक्त माध्यम है। यदि इस मॉडल को छत्तीसगढ़ में प्रभावी ढंग से अपनाया जाए तो पशुपालकों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।    उल्लेखनीय है कि इस शैक्षणिक भ्रमण में 50 सदस्यीय दल ने उन्नत पशुपालन एवं डेयरी प्रबंधन सीखने के लिए भाग लिया है। जिसमें 25 पशुपालक एवं 25 बिहान (एनआरएलएम) समूह की दीदियाँ शामिल है। उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा एवं वन एवं पर्यावरण मंत्री  केदार कश्यप भी प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन करने के साथ पूरे शैक्षणिक भ्रमण में उनके साथ शामिल हो रहे हैं।

चुनी हुई सरकार की कार्यप्रणाली पर सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख, हाईकोर्ट को दी चेतावनी

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने और सर्दियों के मौसम में दुर्गम क्षेत्रों में लॉजिस्टिक्स की समस्याओं पर विचार करते हुए चुनावों को 31 मई तक पूरा करने का निर्देश दिया है। चुनी हुई सरकार को काम नहीं करने दे रहा है हाईकोर्ट; सुप्रीम कोर्ट नाराज, चेतावनी भी दी हिमाचल प्रदेश में स्थानीय निकायों के चुनावों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने राज्य सरकार को राहत देते हुए चुनावों के लिए समय सीमा को एक महीने के लिए बढ़ा दिया है। अब यह चुनाव 31 मई, 2026 तक आयोजित किए जाएंगे। इसके साथ ही हाईकोर्ट की दखलअंदाजी पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी भी जताई। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा राज्य सरकार के फैसलों में बार-बार किए जा रहे हस्तक्षेप पर नाराजगी जताई। मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत हो रहा है कि हाईकोर्ट निर्वाचित सरकार को काम नहीं करने दे रहा है। सर्वोच्च अदालत ने चेतावनी दी कि भविष्य में इस तरह के हस्तक्षेप को गंभीरता से लिया जाएगा। क्या कहा कोर्ट ने? सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट की कार्यशैली पर नाराजगी जाहिर की, लेकिन उसने हाईकोर्ट के उस फैसले का समर्थन किया जिसमें उसने सीमांकन प्रक्रिया का हवाला देकर चुनावों को टालने के हिमाचल सरकार के अनुरोध को खारिज कर दिया था। पीठ ने स्पष्ट करते हुए कहा, ”सीमांकन अभ्यास का लंबित होना चुनावों को स्थगित करने का आधार नहीं हो सकता।” इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि संवैधानिक रूप से शहरी स्थानीय निकायों, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों के लिए समय पर चुनाव कराना अनिवार्य है। चुनाव का नया कार्यक्रम और समय सीमा हिमाचल प्रदेश में लगभग 3,500 ग्राम पंचायतें, 90 पंचायत समितियां, 11 जिला परिषद और 71 शहरी स्थानीय निकाय हैं, जिनमें से अधिकांश के चुनाव इस वर्ष होने हैं। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट की 30 अप्रैल की समय सीमा को बढ़ाकर 31 मई कर दिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने नई समय सीमा निर्धारित की है। कोर्ट के आदेश के मुताबिक, सभी प्रारंभिक कार्य जैसे कि सीमांकन, आरक्षण आदि 31 मार्च तक पूरे किए जाने चाहिए। पहले यह समय सीमा 28 फरवरी थी। चुनाव इसके बाद आठ सप्ताह के भीतर, यानी निश्चित रूप से 31 मई तक आयोजित किए जाने चाहिए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि समय विस्तार के लिए कोई और आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा। सर्दियों की चुनौतियां याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह ने बताया कि हाईकोर्ट ने 28 फरवरी की समय सीमा निर्धारित करते समय इस बात का ध्यान रखा था कि देशव्यापी जनगणना का काम 1 मई से शुरू हो जाएगा। दूसरी ओर, राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता वी. गिरि ने कहा कि हाईकोर्ट को चुनाव की समय सीमा निर्धारित करते समय सर्दियों में दूरदराज के क्षेत्रों में पहुंचने की तार्किक कठिनाइयों को ध्यान में रखना चाहिए था। सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने और सर्दियों के मौसम में दुर्गम क्षेत्रों में लॉजिस्टिक्स की समस्याओं पर विचार करते हुए चुनावों को 31 मई तक पूरा करने का निर्देश दिया है।

असम रैली में पीएम मोदी का बयान, कांग्रेस पर बोला तीखा प्रहार

गुवाहाटी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम में कांग्रेस पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है. उन्होंने कांग्रेस की तुलना ‘जहर’ से करते हुए कहा कि सत्ता से 10 साल दूर रहने के कारण यह पार्टी और भी ज्यादा खतरनाक हो गई है. उन्होंने जनता को आगाह किया कि कांग्रेस असम की शांति और संस्कृति के लिए सबसे बड़ा खतरा है. वह शनिवार को गुवाहाटी में कई परियोजनाओं का शुभारंभ करने के बाद एक जनसभा में बोल रहे थे. पीएम मोदी ने कांग्रेस की नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह पार्टी असम को फिर से पुराने दौर में ले जाना चाहती है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस असम को फिर से अशांति और अराजकता में झोंकना चाहती है. पीएम मोदी ने सीधा आरोप लगाया कि कांग्रेस तुष्टिकरण के लिए असम को ‘घुसपैठियों के हवाले’ करना चाहती है. उन्होंने चेतावनी दी कि कांग्रेस का एजेंडा असम की असली पहचान और संस्कृति को मिटाना है. पीएम मोदी ने कांग्रेस की मानसिकता पर प्रहार करते हुए कहा, “10 वर्ष सत्ता से बाहर रहने की वजह से कांग्रेस और ज्यादा जहरीली हो गई है.” उनका इशारा था कि सत्ता पाने के लिए कांग्रेस किसी भी हद तक जा सकती है, चाहे इसके लिए राज्य की सुरक्षा से समझौता ही क्यों न करना पड़े. ‘कांग्रेस कभी भारत का भला नहीं कर सकती’ कांग्रेस पर हमला करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “जो कांग्रेस भारत को राष्ट्र मानने से भी इनकार करती हो… जो सवाल करते हैं कि मां भारती क्या होती है, जो मां भारती के नाम तक से परहेज करती हो, जो मां भारती के प्रति जरा सा सम्मान तक नहीं दिखाते, वो कांग्रेस कभी भारत का भला नहीं कर सकती. आज की कांग्रेस हर उस विचार… हर उस आतंकी को कंधे पर बिठाती है… जो देश का बुरा सोचता है. जो लोग देश के टुकड़े-टुकड़े करने का सपना देखते हैं… जो लोग, नॉर्थईस्ट को भारत से अलग करने के नारे लगाते हैं… वो कांग्रेस के लिए पूजनीय बन चुके हैं.” बजट में रखा गया नॉर्थ-ईस्ट का ध्यान पीएम मोदी ने कहा, कांग्रेस के समय असम को टैक्स के हिस्से के रूप में सिर्फ 10 हजार करोड़ रुपये मिलते थे. अब भाजपा सरकार में असम को कांग्रेस सरकार के मुकाबले 5 गुना ज्यादा रुपये मिल रहे हैं. अगर पिछले 11 वर्ष की बात करें तो असम को तमाम विकास परियोजनाओं के लिए केंद्र सरकार से 5.50 लाख करोड़ रुपये से अधिक मिले हैं. बजट में बहुत अधिक फोकस नॉर्थ-ईस्ट को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने पर है. इस बार असम को टैक्स की हिस्सेदारी के रूप में लगभग 50 हजार करोड़ रुपये मिलने वाले हैं. कांग्रेस के समय असम को कैसे पाई-पाई के लिए तरसा कर रखा जाता था. वो आपको भलीभांति याद होगा.” अगले 5 साल गेम-चेंजर: पीएम मोदी विपक्ष पर हमले के बाद पीएम मोदी ने असम के विकास का रोडमैप भी रखा. उन्होंने कहा कि आने वाले 5 साल असम के भविष्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं. इस दौरान कई बड़े प्रोजेक्ट्स पूरे होने वाले हैं, जो असम की ग्रोथ को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे. पीएम ने जनता से अपील की कि विकास की इस रफ्तार को बनाए रखने के लिए यहां ‘डबल इंजन’ (केंद्र और राज्य में भाजपा) की सरकार फिर एक बार बहुत जरूरी है. ‘नॉर्थ ईस्ट हमारे लिए अष्ठलक्ष्मी की तरह’ पीएम मोदी ने आगे कहा, “अभी कुछ दिन पहले ही देश का बजट आया है. बजट के बाद असम का और नार्थईस्ट का मेरा ये पहला दौरा है. जिस नार्थईस्ट को कांग्रेस ने हमेशा नजरअंदाज किया, हम उस नार्थईस्ट की भक्तिभाव से सेवा कर रहे हैं. नॉर्थ ईस्ट हमारे लिए अष्ठलक्ष्मी है. इस वर्ष का बजट… अष्टलक्ष्मी के लिए BJP-NDA के vision को और मजबूती देने वाला है.” भाजपा कार्यकर्ताओं की तारीफ भाजपा के कार्यकर्ताओं की प्रशंसा करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “आज भाजपा जहां पहुंची है, उसका श्रेय अगर किसी को मिलता है, तो वो सिर्फ और सिर्फ भाजपा के कार्यकर्ताओं को जाता है. हमारा विश्वास संगठन में है. हम राष्ट्रजीवन में परिवर्तन का आधार संगठन की शक्ति मानते हैं. इसलिए, इतनी बड़ी तादाद में जमीन की जड़ों से जुड़े हुए कार्यकर्ताओं के दर्शन करना बहुत बड़ा सौभाग्य है. हम लोग एक ही मंत्र को लेकर जिए हैं, हम लोग एक ही मंत्र को साकार करने के लिए अपने आप को खपा रहे हैं.”

सिहोर महोत्सव: स्पेशल ट्रेनें और ट्रैफिक डायवर्ट, प्रशासन और रेलवे ने संभाली व्यवस्था

सिहोर सीहोर स्थित कुबेरेश्वर धाम में आयोजित रुद्राक्ष महोत्सव के मद्देनजर देवास, सीहोर प्रशासन ने ट्रैफिक व्यवस्था में बदलाव किया है। इसके अलावा रेलवे ने भी शुक्रवार से स्पेशल ट्रेनों का संचालन शुरू कर दिया है। बढ़ते ट्रैफिक को देखते हुए इंदौर से भोपाल जाने वाले यात्रियों ने भी सड़क मार्ग के बजाए रेलमार्ग को ज्यादा सुविधाजनक समझा है। इस कारण इंदौर से भोपाल जाने वाली ट्रेनों में भी आम दिनों की तुलना में ज्यादा भीड़ नजर आ रही है।   पश्चिम रेलवे रतलाम मंडल ने 14 से 20 फरवरी तक चलने वाले इस आयोजन को ध्यान में रखते हुए 21 जोड़ी ट्रेनों का सिहोर में अस्थायी ठहराव शुरू किया है। इसके अलावा उज्जैन से सीहोर व भोपाल के बीच तीन जोड़ी स्पेशल ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है। यदि भीड़ बढ़ती है तो अतिरिक्त ट्रेनों का संचालन किया जा सकता है। इसके अलावा भोपाल की ओर जाने वाली सभी ट्रेनें इंदौर के प्लेटफार्म नंबर दो से संचालित होंगी। उज्जैन की ओर जाने वाली सभी ट्रेनें प्लेटफार्म संख्या एक से संचालित होंगी। भीड़ नियंत्रण के लिए ‘क्राउड होल्डिंग एरिया’ और नए प्रवेश नियम लागू सीहोर स्थित कुबेरेश्वर धाम में 14 से 20 फरवरी 2026 तक आयोजित होने वाले भव्य रुद्राक्ष महोत्सव को लेकर पश्चिम रेलवे के रतलाम मंडल ने अभूतपूर्व तैयारियां की हैं। संभावित भारी भीड़ को देखते हुए सीहोर रेलवे स्टेशन पर पैदल ऊपरी पुल (FOB) को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। यात्रियों को ट्रेन आने तक स्टेशन परिसर में बनाए गए विशेष ‘क्राउड होल्डिंग एरिया’ में रोका जाएगा। इसके अलावा, प्लेटफॉर्म व्यवस्था में बदलाव करते हुए भोपाल की ओर जाने वाली ट्रेनों के लिए प्लेटफॉर्म नंबर 2 और उज्जैन की ओर जाने वाली ट्रेनों के लिए प्लेटफॉर्म नंबर 1 निर्धारित किया गया है, ताकि यात्रियों का आवागमन सुव्यवस्थित रहे। 21 जोड़ी ट्रेनों का ठहराव और स्पेशल रेल सेवाओं का संचालन श्रद्धालुओं की सुगम यात्रा सुनिश्चित करने के लिए रेलवे ने 13 से 22 फरवरी तक सीहोर स्टेशन पर 21 जोड़ी ट्रेनों का अस्थायी ठहराव दिया है। साथ ही उज्जैन और सीहोर/भोपाल के बीच 3 जोड़ी स्पेशल ट्रेनें चलाई जा रही हैं। मंडल रेल प्रबंधक (DRM) अश्वनी कुमार ने स्वयं स्टेशन का निरीक्षण कर सुरक्षा और सुविधाओं का जायजा लिया है। यात्रियों की सहायता के लिए अतिरिक्त टिकट काउंटर खोले गए हैं और वाणिज्य विभाग का विशेष दस्ता तैनात किया गया है, ताकि टिकट खिड़कियों पर लंबी कतारों से बचा जा सके। सुरक्षा और यात्री सुविधाओं पर रेलवे का विशेष ध्यान अभेद सुरक्षा घेरा: RPF, GRP और सीसीटीवी से पैनी नजर महोत्सव के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने के लिए RPF और GRP के अतिरिक्त जवानों के साथ-साथ सिविल डिफेंस टीम को भी तैनात किया गया है। पूरे स्टेशन परिसर की सीसीटीवी कैमरों के जरिए मंडल कार्यालय से सीधी मॉनिटरिंग की जा रही है। चिकित्सा आपात स्थिति के लिए डॉक्टरों की टीम और दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। इसके अतिरिक्त, यात्रियों के लिए स्वच्छ पेयजल, प्रकाश व्यवस्था और पर्याप्त शौचालयों का प्रबंध किया गया है। मेला क्षेत्र से लेकर स्टेशन तक दिशा-सूचक बैनर लगाए गए हैं ताकि बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को रास्ते खोजने में कोई असुविधा न हो। स्टेशन परिसर में विशेष ‘क्राउड होल्डिंग एरिया’ बनाया गया है, जहां यात्रियों को ट्रेन आगमन से पूर्व रोका जाएगा तथा ट्रेन आने पर ही प्लेटफार्म पर प्रवेश दिया जाएगा, जिससे प्लेटफार्म पर अनावश्यक भीड़ एकत्रित न हो। प्लेटफार्म एवं स्टेशन परिसर में व्यापक बैरिकेडिंग की गई है। आने और जाने के लिए अलग-अलग मार्ग निर्धारित किए गए हैं। स्टेशन के गेटों पर सुरक्षा कर्मी नियुक्त किए गए हैं। स्टेशन परिसर में सीसीटीवी कैमरों के जरिए भी निगरानी की जा रही है। आपको बता दें कि तीन साल पहले सीहोर में शिवरात्रि के दौरान हुए महोत्सव में लाखों की संख्या में लोग जुटे थे। इस कारण इंदौर-भोपाल रोड पर लंबा जाम लगा था। हालांकि इस बार रुद्राक्ष नहीं बांटे जा रहे हैं।  भारी वाहनों के लिए रूट     भोपाल से आने वाले भारी वाहन: थाना परवलिया के मुबारकपुर जोड़ एवं थाना खजूरी के तुमड़ा जोड़ से होते हुए श्यामपुर-कुरावर-ब्यावरा-शाजापुर-मक्सी मार्ग से देवास और इंदौर जा सकेंगे.     देवास-इंदौर से भोपाल जाने वाले भारी वाहन: देवास से मक्सी-शाजापुर-ब्यावरा-कुरावर-श्यामपुर मार्ग से होकर भोपाल पहुंचेंगे. छोटे और सवारी वाहनों के लिए रूट     भोपाल से आष्टा-देवास-उज्जैन-इंदौर जाने वाले छोटे वाहन: सीहोर न्यू क्रिसेंट चौराहा से भाऊखेड़ी जोड़-अमलाहा होते हुए आष्टा, देवास, उज्जैन और इंदौर जा सकेंगे.     इंदौर-उज्जैन-देवास से भोपाल जाने वाले छोटे वाहन: आष्टा-अमलाहा-भाऊखेड़ी जोड़-न्यू क्रिसेंट चौराहा मार्ग से भोपाल पहुंचेंगे. कुबेरेश्वर धाम आने वाले वाहनों को नहीं रहेगा डायवर्जन भोपाल, इंदौर, देवास और उज्जैन से सीधे कुबेरेश्वर धाम कथा स्थल पर आने वाले वाहनों को किसी डायवर्जन का सामना नहीं करना पड़ेगा. वे नियमित हाईवे मार्ग से सीधे धाम तक पहुंच सकेंगे. धाम परिसर में बनाई गई विभिन्न पार्किंग में वाहन व्यवस्थित रूप से पार्क किए जाएंगे. आईजी और डीआईजी ने की समन्वय बैठक रूद्राक्ष महोत्सव के सुरक्षित और सफल आयोजन को लेकर पुलिस कंट्रोल रूम सीहोर में अहम बैठक आयोजित की गई. बैठक में आईजी देहात जोन भोपाल संजय तिवारी, डीआईजी देहात रेंज भोपाल राजेश सिंह चंदेल और एसपी सीहोर दीपक कुमार शुक्ला सहित सीहोर, भोपाल देहात, भोपाल शहर, रेलवे और देवास जिले के अधिकारी मौजूद रहे. बैठक में दिए गए प्रमुख निर्देश     सभी डायवर्जन पॉइंट्स पर बैरिकेडिंग, टेंट, टेबल-कुर्सी, पीए सिस्टम, पेयजल और प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित की जाए.     डायवर्जन मार्गों पर नियमित पेट्रोलिंग की जाए.     आपात स्थिति के लिए बड़ी क्रेन, गैस कटर/वेल्डिंग कटर और मैकेनिक उपलब्ध रहें.     सभी प्रमुख स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं.     सीमावर्ती जिलों के अधिकारियों का व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर सूचनाओं का त्वरित आदान-प्रदान किया जाए.     रेलवे स्टेशन के प्रवेश और निकास मार्गों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं.     ट्रेनों के आगमन और प्रस्थान समय पर विशेष निगरानी रखी जाए.     श्रद्धालुओं के लिए अस्थायी होल्डिंग एरिया बनाए जाएं, जहां पानी, प्रकाश और शौचालय की व्यवस्था हो.     रेलवे बल और आरपीएफ आपसी समन्वय से पूर्व निर्धारित योजना के अनुसार कार्य करें.

‘शक्तिमान’ योजना 1.6 लाख करोड़ की, चार राज्यों में रेलवे नेटवर्क का विस्तार, मोदी सरकार का ऐतिहासिक कदम

नई दिल्ली  देश में तेज विकास और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर को गति देने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. कैबिनेट बैठक में रेलवे, स्टार्टअप और डेवलपमेट से जुड़े कई बड़े फैसले लिए गए हैं. इन योजनाओं पर करीब 1.6 लाख करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे. सरकार का कहना है कि इन फैसलों से देश के परिवहन नेटवर्क को मजबूती मिलेगी और आर्थिक गतिविधियों को नई रफ्तार मिलेगी. यह फैसला देश के विकास मॉडल को आगे बढ़ाने की दिशा में अहम माना जा रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में ये फैसले लिए गए. आज शनिवार को केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी दी है. अश्विनी वैष्णव ने बताया कि सरकार का फोकस रेलवे नेटवर्क के विस्तार, स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने और शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाने पर है. उन्होंने कहा कि इन योजनाओं से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और व्यापारिक गतिविधियों को गति मिलेगी. सरकार का मानना है कि इन फैसलों से देश की लॉजिस्टिक लागत कम होगी और औद्योगिक विकास को नया बल मिलेगा. कैबिनेट के 1.6 लाख करोड़ के फैसलों में क्या-क्या शामिल है? सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर, रेलवे विस्तार, अर्बन चैलेंज फंड और स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड 2.0 जैसी बड़ी योजनाओं को मंजूरी दी है. इन योजनाओं का उद्देश्य देश के विकास को गति देना है. रेलवे विस्तार से माल और यात्री परिवहन आसान होगा, जबकि स्टार्टअप फंड से युवाओं को नए व्यवसाय शुरू करने में मदद मिलेगी. रेलवे प्रोजेक्ट्स में कौन-कौन से प्रमुख काम होंगे? कैबिनेट ने तीन बड़े रेलवे प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है. इसमें अंबाला से दिल्ली, कसारा से मनमाड और होसपेट से बल्लारी रेल मार्ग पर तीसरी और चौथी लाइन बनाई जाएगी. खास तौर पर 131 किलोमीटर लंबे कसारा-मनमाड सेक्शन पर करीब 10,154 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे. यह कॉरिडोर मुंबई को उत्तर और पूर्व भारत से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. स्टार्टअप इंडिया फंड 2.0 का क्या उद्देश्य है? सरकार का लक्ष्य स्टार्टअप सेक्टर को मजबूत करना और नवाचार को बढ़ावा देना है. इस फंड के जरिए नए व्यवसायों को वित्तीय सहायता मिलेगी. इससे युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे और देश में टेक्नोलॉजी आधारित उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा. इन फैसलों से आम लोगों को क्या फायदा होगा? रेलवे और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं से यात्रा आसान होगी और माल परिवहन तेज होगा. इससे व्यापार और उद्योग को फायदा मिलेगा. साथ ही स्टार्टअप योजनाओं से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और आर्थिक विकास को गति मिलेगी. विकास को नई दिशा देने वाला मास्टरप्लान     सरकार का कहना है कि इन फैसलों से देश के परिवहन और लॉजिस्टिक सेक्टर में बड़ा बदलाव आएगा. रेलवे लाइन विस्तार से ट्रेनों की क्षमता बढ़ेगी और ट्रैफिक जाम कम होगा. इससे उद्योग और व्यापार को भी सीधा फायदा मिलेगा. सरकार का लक्ष्य देश को तेज रफ्तार विकास के रास्ते पर आगे बढ़ाना है.     इन परियोजनाओं से क्षेत्रीय विकास को भी बढ़ावा मिलेगा. खासकर औद्योगिक और शहरी क्षेत्रों में निवेश बढ़ेगा. इससे देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है. इंफ्रास्ट्रक्चर और रोजगार पर सरकार का फोकस     अश्विनी वैष्णव ने स्पष्ट किया है कि इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और औद्योगिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी. रेलवे विस्तार और शहरी विकास परियोजनाएं देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएंगी.     केंद्रीय कैबिनेट ब्रीफिंग में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि यह सिर्फ स्थान परिवर्तन नहीं है, बल्कि इतिहास से जुड़ा एक अहम बदलाव है. उन्होंने कहा कि साउथ ब्लॉक के कमरों ने देश के कई महत्वपूर्ण फैसले देखे हैं, जहां जवाहरलाल नेहरू से लेकर नरेंद्र मोदी तक के कार्यकाल के निशान मौजूद हैं. उन्होंने आगे बताया कि इन कमरों ने टाइपराइटर से डिजिटल युग तक का सफर देखा और यहीं कई अहम फैसले, जैसे सर्जिकल स्ट्राइक, लिए गए. करीब 95 साल बाद इन भवनों को खाली किया जा रहा है और यहां ‘युगे-युगीन भारत संग्रहालय’ बनाया जाएगा.     कैबिनेट ने तीन मल्टी-ट्रैकिंग रेल परियोजनाओं को भी मंजूरी दी है, जो 12 जिलों और दिल्ली, हरियाणा, महाराष्ट्र व कर्नाटक सहित चार राज्यों को कवर करेंगी. इन परियोजनाओं से भारतीय रेल के नेटवर्क में करीब 389 किलोमीटर की बढ़ोतरी होगी, जिससे रेल क्षमता बढ़ेगी, भीड़ कम होगी और माल एवं यात्री परिवहन तेज और सुगम होगा. इसके अलावा असम में ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे 33.7 किलोमीटर लंबी अंडरवॉटर टनल परियोजना को मंजूरी दी गई है. इसे ट्विन-ट्यूब टनल बोरिंग मशीन डिजाइन से बनाया जाएगा. इसमें दोनों ट्यूब में दो-दो लेन सड़क होगी और एक ट्यूब में रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर की भी व्यवस्था की जाएगी, जिससे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और विकास को बढ़ावा मिलेगा.  

कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ की दिशा में पहल, मुख्यमंत्री बाल संदर्भ योजना बनी बच्चों का सहारा

रायपुर. कुपोषण उन्मूलन की सशक्त पहल: मुख्यमंत्री बाल संदर्भ योजना एवं ‘वजन त्यौहार’ से बच्चों को मिला स्वास्थ्य संबल प्रदेश सरकार की जनकल्याणकारी पहल के अंतर्गत कुपोषण उन्मूलन की दिशा में ठोस एवं परिणाममुखी कार्य किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री बाल संदर्भ योजना तथा महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आयोजित “वजन त्यौहार” अभियान के माध्यम से बच्चों और गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य की सतत निगरानी कर उन्हें समुचित उपचार एवं पोषण परामर्श उपलब्ध कराया जा रहा है। महासमुंद जिले में नयापारा शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में आयोजित विशेष स्वास्थ्य शिविर में 0 से 5 वर्ष आयु वर्ग के कुल 80 बच्चों का विस्तृत स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। परीक्षण के दौरान 29 बच्चे कुपोषित एवं अति कुपोषित श्रेणी में पाए गए, जिन्हें तत्काल आवश्यक दवाइयां, चिकित्सकीय परामर्श तथा पोषण संबंधी उपचार उपलब्ध कराया गया। गंभीर रूप से प्रभावित बच्चों को नियमित फॉलोअप एवं आवश्यकता पड़ने पर पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती की जानकारी दी गई। महासमुंद जिले में इसी क्रम में 9 से 18 फरवरी तक आयोजित “वजन त्यौहार” के अंतर्गत शहरी परियोजना क्षेत्र के डॉ. सुशील सैमुअल वार्ड (सेक्टर-01) में विशेष शिविर आयोजित कर बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं का वजन एवं ऊंचाई मापी गई। प्राप्त आंकड़ों के आधार पर कुपोषित एवं अत्यंत कुपोषित बच्चों की पहचान कर उन्हें विशेष पोषण आहार, चिकित्सा सुविधा एवं निरंतर निगरानी से जोड़ा गया। गर्भवती महिलाओं को आयरन, कैल्शियम एवं आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्वों के नियमित सेवन तथा संतुलित आहार अपनाने की सलाह दी गई। पोषण, स्वच्छता और टीकाकरण पर विशेष जोर चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य दल द्वारा पालकों को संतुलित आहार की उपयोगिता, नियमित टीकाकरण, स्वच्छता, कृमिनाशक दवा सेवन, साफ पेयजल के उपयोग तथा दस्त-उल्टी जैसी स्थिति में त्वरित उपचार के महत्व से अवगत कराया गया। बच्चों के भोजन में दाल, हरी सब्जियां, दूध, अंडा, फल एवं मौसमी खाद्य पदार्थ शामिल करने की सलाह दी गई।पालकों को यह भी बताया गया कि जीवन के प्रारंभिक छह वर्ष बच्चे के शारीरिक, मानसिक एवं बौद्धिक विकास की आधारशिला होते हैं। नियमित वजन-ऊंचाई मापन और पोषण प्रबंधन से एनीमिया एवं कुपोषण जैसी समस्याओं की प्रभावी रोकथाम संभव है। सामाजिक जागरूकता के साथ शिक्षा से जोड़ने की पहल अभियान के दौरान केवल स्वास्थ्य ही नहीं, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण पहल की गई। देवार जाति की चार शाला त्यागी किशोरियों को पुनः विद्यालय में प्रवेश दिलाने हेतु समझाइश दी गई, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए। यह प्रयास बालिका शिक्षा को प्रोत्साहन देने तथा सामाजिक समावेशन को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री बाल संदर्भ योजना के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों में पंजीकृत बच्चों की नियमित स्वास्थ्य जांच, पोषण स्तर का मूल्यांकन, आवश्यक दवा वितरण, परामर्श तथा गंभीर मामलों को उच्च स्वास्थ्य संस्थानों में रेफर कर उपचार सुनिश्चित किया जा रहा है। महासमुंद जिले में योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से कुपोषण उन्मूलन की दिशा में जनसहभागिता आधारित सशक्त वातावरण निर्मित हो रहा है।

मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के प्रयास रंग लाए: वनांचल के सुदूर टोलों में पहुंचेगी बिजली

रायपुर.  जंगलों के बीच बसे जिन टोलों ने पीढ़ियों तक अंधेरे को अपनी नियति मान लिया था, वहां अब उजाले की पहली किरण पहुंचने जा रही है।सूरजपुर जिले के ओड़गी विकासखंड के तीन सुदूर ग्रामों में आज़ादी के दशकों बाद पहली बार नियमित बिजली पहुंचाने के लिए 3 करोड़ 6 लाख 92 हजार 670 रुपये की बड़ी स्वीकृति जारी की गई है। यह महत्वपूर्ण पहल महिला एवं बाल विकास मंत्री तथा भटगांव विधायक  लक्ष्मी राजवाड़े के विशेष प्रयासों से संभव हो पाई है। सूरजपुर जिले के भटगांव विधानसभा क्षेत्र के ग्राम मसंकी, बांक और असुरा के कई मजरा-टोले अब तक मुख्य विद्युत लाइन से कटे हुए थे। रात ढलते ही यहां घना अंधेरा छा जाता था और ग्रामीण ढिबरी या सीमित सोलर लाइट के सहारे जीवन यापन करने को विवश थे। बच्चों की पढ़ाई, किसानों का कार्य और सामान्य जनजीवन अंधेरे की मार झेल रहा था। क्षेत्रीय भ्रमण के दौरान ग्रामीणों की समस्या को गंभीरता से लेते हुए मंत्री  लक्ष्मी राजवाड़े ने ऊर्जा विभाग और राज्य स्तर पर पहल कर इन टोलों के विद्युतीकरण का प्रस्ताव आगे बढ़ाया। ‘मुख्यमंत्री मजराटोला विद्युतीकरण योजना’ के तहत स्वीकृत इस राशि से ग्राम मसंकी के लुकभुकिया और पतेरीपारा, ग्राम बांक के खासपारा और स्कूलपारा तथा ग्राम असुरा के खासपारा, पण्डोपारा और असुरा-1 में विद्युत विस्तार कार्य किया जाएगा। करोड़ों की लागत से होने वाला यह कार्य न केवल घरों को रोशन करेगा, बल्कि शिक्षा, कृषि और स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित करेगा। सबसे बड़ी चुनौती वन भूमि की अनुमति थी। चूंकि संबंधित टोले घने जंगलों के बीच स्थित हैं, इसलिए विशेष स्वीकृति आवश्यक थी। मंत्री  लक्ष्मी राजवाड़े की पहल पर विभागीय स्तर पर आवश्यक अनापत्ति प्रमाण-पत्र प्राप्त कर लिया गया है और अब शीघ्र ही जमीनी स्तर पर कार्य प्रारंभ किया जाएगा। मंत्री  लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा है कि राज्य सरकार की प्राथमिकता है कि प्रदेश का कोई भी घर अंधेरे में न रहे। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि विद्युत सुविधा उपलब्ध होने से बच्चों को अध्ययन में सुविधा मिलेगी, किसानों को कृषि कार्यों में सहूलियत होगी तथा स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार और लघु उद्यमों को प्रोत्साहन मिलेगा। यह पहल वनांचल क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगी।

नीलकंठेश्वर धाम में भव्य प्राण-प्रतिष्ठा, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की गरिमामयी उपस्थिति

रायपुर. नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय हुए शामिल मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय आज जशपुर प्रवास के दौरान दुलदुला विकास खंड के ग्राम सिरीमकेला स्थित  नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर के पावन प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में सम्मिलित हुए। उन्होंने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर देवाधिदेव महादेव से समस्त छत्तीसगढ़वासियों के सुख, समृद्धि और कल्याण की मंगलकामना की। महाशिवरात्रि के पावन पर्व के एक दिन पूर्व आयोजित इस आध्यात्मिक आयोजन को उन्होंने श्रद्धा, आस्था और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बताया।  मुख्यमंत्री  साय ने ग्राम सिरीमकेला में सामुदायिक भवन निर्माण की घोषणा करते हुए कहा कि इससे स्थानीय नागरिकों को सामाजिक, सांस्कृतिक एवं पारिवारिक आयोजनों के लिए सुदृढ़ आधार मिलेगा। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि कल हम सब महाशिवरात्रि का पावन पर्व मनाएंगे और इस अवसर पर आप सभी को हार्दिक बधाई देता हूं। उन्होंने कहा कि सिरीमकेला में भक्तों और अपने परिवारजनों के बीच आकर उन्हें आध्यात्मिक शांति और आनंद की अनुभूति हो रही है। भक्ति और श्रद्धा के इस अनूठे आयोजन में उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सनातन परंपरा को पुनर्स्थापित करते हुए अयोध्या धाम दर्शन योजना एवं मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के माध्यम से हजारों श्रद्धालुओं को धार्मिक यात्राएँ करा रही है। श्रवण कुमार के पदचिन्हों पर चलने का प्रयास करते हुए अब तक प्रदेश के 42 हजार से अधिक तीर्थ यात्रियों को रामलला के दर्शन कराए जा चुके हैं।  उन्होंने कहा कि 500 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद अयोध्या धाम में  रामलला का भव्य मंदिर बनकर तैयार हुआ है और हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में राम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर आज ध्वज लहरा रहा है। प्रत्येक राम भक्त की आस्था 500 वर्षों तक प्रज्वलित रही — यह एक ऐसा यज्ञ था जिसकी लौ कभी नहीं डगमगाई। हम सब निमित्त मात्र हैं, जो अपने भांचा राम के दर्शन उनके भव्य मंदिर में कर रहे हैं और श्रद्धालुओं को करा पा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज नीलकंठेश्वर महादेव का दर्शन पाकर वे स्वयं को अत्यंत सौभाग्यशाली महसूस कर रहे हैं। दशहरा पर्व के दिन नीलकंठ के दर्शन को अत्यंत शुभ माना जाता है और आज प्राण-प्रतिष्ठा के उपरांत यहाँ निरंतर दर्शन लाभ मिलना हम सबके लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि जशपुर में मधेश्वर महादेव स्थित हैं, जिसे लोक मान्यता के अनुसार एशिया का सबसे बड़ा प्राकृतिक शिवलिंग कहा जाता है। सनातन परंपरा में भक्ति का विशेष महत्व है और राज्य सरकार भक्तों का सम्मान करती है। सावन माह में भोरमदेव मंदिर में कांवड़ियों पर पुष्पवर्षा कर हर वर्ष आस्था प्रकट की जाती है। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि छत्तीसगढ़ का प्रयाग कहे जाने वाले राजिम त्रिवेणी संगम में इन दिनों राजिम कुंभ कल्प का भव्य आयोजन हो रहा है, जहाँ आस्था और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर भगवान कुलेश्वरनाथ महादेव के दर्शन अवश्य करें। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत के संरक्षण के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रयासरत है। राजिम कुंभ कल्प की प्रतिष्ठा को पुनर्स्थापित किया गया है, ऐतिहासिक बस्तर दशहरा की पहचान देश-विदेश तक है तथा छत्तीसगढ़ के पाँच शक्ति पीठों के विकास के लिए कार्य योजना बनाकर सतत कार्य किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने मंदिर परिसर में पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन का संदेश भी दिया। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिकता और प्रकृति संरक्षण एक-दूसरे के पूरक हैं।  कार्यक्रम के समापन अवसर पर उन्होंने कहा कि महाशिवरात्रि के इस पावन कालखंड में नीलकंठेश्वर महादेव की कृपा हम सभी पर बनी रहे, प्रदेश में सुख-शांति, समृद्धि और विकास की नई धाराएँ प्रवाहित हों तथा छत्तीसगढ़ आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक वैभव के साथ निरंतर प्रगति पथ पर अग्रसर रहे — यही उनकी हार्दिक कामना है। इस अवसर पर सरगुजा आदिवासी विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष एवं पत्थलगांव विधायक मती गोमती साय, महासमुंद विधायक  योगेश्वर राजू सिन्हा, पूर्व राज्यसभा सांसद  रणविजय सिंह जुदेव, जिला पंचायत उपाध्यक्ष  शौर्य प्रताप सिंह जुदेव, नगर पालिका उपाध्यक्ष  यश प्रताप सिंह जुदेव, जनपद पंचायत अध्यक्ष मती सुशीला साय,  कृष्णा राय,  पवन साय,  भरत सिंह,  अरविन्द प्रसाद साय,  कपिल देव साय, सरगुजा आईजी  दीपक कुमार झा, कलेक्टर  रोहित व्यास, एसएसपी डॉ. लाल उमेद सिंह, वनमंडलाधिकारी  शशि कुमार तथा महादेव मंदिर समिति के सदस्यगण बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

लखनऊ से DU तक सुलगते छात्र विरोध: UGC के इक्विटी कार्ड ने पैदा किया हंगामा

नई दिल्ली यूजीसी के ‘Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026’ ने उच्च शिक्षा जगत को 2 हिस्सों में बांट दिया है. इन दिनों दिल्ली, लखनऊ, पटना और इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में जो चल रहा है, उससे पता चलता है कि यह विवाद अब जमीनी संघर्ष बन चुका है. एक तरफ नियमों को ‘ऐतिहासिक’ मानकर समर्थन में मार्च निकाले जा रहे हैं तो दूसरी तरफ इसे ‘पूर्वाग्रह से ग्रसित’ बताकर इसके खिलाफ अदालतों और सड़कों पर मोर्चा खोला गया है. प्रशासनिक स्तर पर यूजीसी का तर्क है कि कैंपस में बढ़ते मानसिक उत्पीड़न और जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए अब तक के मौजूद तंत्र (जैसे एंटी-रैगिंग सेल) नाकाफी साबित हुए हैं. दिल्ली यूनिवर्सिटी में विरोध कर रहे संगठनों का मानना है कि इन नियमों की आड़ में एक खास वर्ग को लक्षित किया जा रहा है. लखनऊ विश्वविद्यालय में समर्थन में उतरे छात्रों पर हुई पुलिसिया सख्ती ने इस पूरे मामले को और भी संवेदनशील बना दिया है. इस विवाद की हर परत को यहां विस्तार से समझिए. समर्थन का पक्ष: क्यों जरूरी हैं यूजीसी के नियम? नियमों का समर्थन कर रहे छात्र संगठनों (जैसे AISA, SFI, NSUI और अन्य दलित-पिछड़ा वर्ग संगठन) का तर्क है कि ‘संस्थागत हत्याओं’ (Institutional Murders) को रोकने के लिए सख्त कानूनों की जरूरत है.     बढ़ती शिकायतों का सच: यूजीसी के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले 5 वर्षों में उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव और प्रताड़ना की शिकायतों में 118% की वृद्धि दर्ज की गई है.     स्वतंत्र जांच तंत्र: समर्थकों का कहना है कि वर्तमान में भेदभाव की जांच वही प्रशासन करता है जिस पर आरोप होता है. नए नियम बाहरी निगरानी की वकालत करते हैं, जो निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करेगा.     लखनऊ का ‘समता संवर्धन मार्च’: लखनऊ विश्वविद्यालय में छात्रों ने मांग की कि ‘उच्च शिक्षा सामाजिक न्याय आयोग’ का गठन हो, जिससे फेलोशिप में देरी और पक्षपातपूर्ण मूल्यांकन (Biased Evaluation) जैसे मुद्दों पर कानूनी जवाबदेही तय की जा सके. विरोध का पक्ष: क्या हैं आशंकाएं? सवर्ण समाज समन्वय समिति (Coordination Committee) और कई ‘सामान्य श्रेणी’ के छात्र संगठनों ने इसे ‘काला कानून’ करार दिया है. उनके विरोध के मुख्य बिंदु नीचे लिखे हैं:     सुरक्षात्मक प्रावधानों का अभाव: विरोधियों का आरोप है कि 2025 के शुरुआती ड्राफ्ट में ‘झूठी शिकायत’ करने वालों पर दंड का प्रावधान था, जिसे आखिरी नोटिफिकेशन से हटा दिया गया है. इससे निर्दोष छात्रों और शिक्षकों को फंसाए जाने का डर है.     प्राकृतिक न्याय का उल्लंघन: नए नियमों में ‘सबूत का भार’ (Burden of Proof) आरोपी पर डाल दिया गया है. यानी, अगर किसी पर भेदभाव का आरोप लगता है तो उसे खुद को निर्दोष साबित करना होगा, जो भारतीय दंड संहिता के मूल सिद्धांतों के खिलाफ माना जा रहा है.     भेदभाव की ‘अस्पष्ट’ परिभाषा: विरोधियों का तर्क है कि ‘अपमानजनक व्यवहार’ की परिभाषा इतनी व्यापक और अस्पष्ट रखी गई है कि सामान्य शैक्षणिक चर्चाओं को भी इसके दायरे में लाकर किसी का करियर बर्बाद किया जा सकता है. कैंपस की मौजूदा स्थिति: लखनऊ से दिल्ली यूनिवर्सिटी तक का हाल हालिया घटनाक्रमों ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है. लखनऊ विश्वविद्यालय में समर्थन में उतरे छात्रों को जिस तरह पुलिस ने घसीटकर हिरासत में लिया, उसने समर्थकों का आक्रोश बढ़ा दिया है. वहीं दिल्ली विश्वविद्यालय में सवर्ण संगठनों ने यूजीसी मुख्यालय का घेराव कर चेतावनी दी है कि अगर इन नियमों को वापस नहीं लिया गया तो देशव्यापी आंदोलन होगा. कई प्रोफेसर ने भी अपनी पहचान गुप्त रखते हुए कहा है कि ये नियम कैंपस में ‘मुक्त संवाद’ (Free Speech) का माहौल खत्म कर सकते हैं. यूजीसी विवाद: इन 5 धाराओं ने कैंपस को ‘अखाड़ा’ बना दिया यूजीसी इक्विटी कार्ड विवाद समझने के लिए आपको वो 5 धाराएं भी पता होनी चाहिए, जिनकी वजह से विभिन्न यूनिवर्सिटी में माहौल गर्माया हुआ है.     धारा 4.2: ‘भेदभाव’ की विस्तृत और अस्पष्ट परिभाषा- इस धारा के तहत ‘जातिगत भेदभाव’ की परिभाषा को इतना व्यापक बना दिया गया है कि इसमें किसी छात्र की शैक्षणिक आलोचना, उपहास या उसे किसी समूह से बाहर रखना भी शामिल है. विवाद की वजह: विशेषज्ञों का मानना है कि ‘उपहास’ या ‘भेदभावपूर्ण व्यवहार’ व्यक्तिपरक (Subjective) हो सकते हैं. विरोधियों को डर है कि सामान्य शैक्षणिक चर्चाओं या चुटकुलों को भी इस धारा के तहत ‘अपराध’ की श्रेणी में लाकर प्रोफेसरों और छात्रों को लक्षित किया जा सकता है.     धारा 6.1 (ख):आरोपी पर ‘सबूत का भार’- आमतौर पर किसी भी कानून में शिकायतकर्ता को आरोप साबित करना होता है, लेकिन इस क्लॉज ने इसे पलट दिया है. विवाद की वजह: अगर किसी छात्र ने भेदभाव का आरोप लगाया है तो आरोपी छात्र या शिक्षक को साबित करना होगा कि उसने ऐसा नहीं किया. इसे ‘प्राकृतिक न्याय’ (Natural Justice) के खिलाफ माना जा रहा है.. क्योंकि यह आरोपी को तब तक दोषी मानता है, जब तक वह अपनी बेगुनाही साबित न कर दे.     धारा 8.4: झूठी शिकायत पर दंड के प्रावधान का हटना- प्रारंभिक ड्राफ्ट (2025) में प्रावधान था कि अगर कोई दुर्भावनापूर्ण तरीके से झूठी शिकायत दर्ज कराता है तो उस पर कार्रवाई होगी. लेकिन 2026 की अंतिम अधिसूचना में यह सुरक्षा कवच हटा दिया गया है. विवाद की वजह: विरोध कर रहे छात्र संगठनों का तर्क है कि इस क्लॉज के हटने से व्यक्तिगत रंजिश निकालने के लिए झूठी शिकायतों की बाढ़ आ सकती है और आरोपी के पास इससे बचने का कोई कानूनी रास्ता नहीं बचेगा.     धारा 10.2: स्वतंत्र ‘लोकपाल’ (Ombudsman) और बाहरी हस्तक्षेप- यह धारा हर विश्वविद्यालय क स्वतंत्र ‘समान अवसर सेल’ और एक बाहरी लोकपाल नियुक्त करने का निर्देश देती है, जो संस्थान के प्रशासन का हिस्सा नहीं होगा. विवाद की वजह: समर्थकों (जैसे लखनऊ के प्रदर्शनकारी छात्र) के लिए यह सबसे मजबूत बिंदु है क्योंकि यह निष्पक्षता सुनिश्चित करता है. लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन इसे अपनी ‘स्वायत्तता’ (Autonomy) पर हमला मान रहा है क्योंकि अब आंतरिक मामलों का फैसला बाहरी व्यक्ति करेगा.     धारा 12.1: फंड में कटौती और ‘डी-रिकग्निशन’ की शक्ति- यह धारा यूजीसी को अधिकार देती है कि अगर कोई संस्थान इन नियमों को सख्ती से लागू नहीं करता … Read more

कांग्रेस ने हवाई यात्रा का किया इंतजाम, कहा- पीएम मोदी, बस उड़ान भरिए, लोग आपका इंतजार कर रहे

  नई दिल्ली असम के दौरे पर पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कांग्रेस ने तीखा हमला बोला है. कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक बेहद व्यंग्यात्मक पोस्ट साझा करते हुए प्रधानमंत्री से हिंसा प्रभावित मणिपुर जाने की अपील की है.  X पर एक पोस्ट में, खेड़ा ने तंज कसते हुए कहा, “चुनाव वाले राज्य हमेशा आपकी सर्वोच्च प्राथमिकता होते हैं, लेकिन मणिपुर को “छोड़ा नहीं जाना चाहिए. राज्य 2023 से जल रहा है, और अब फिर से जल रहा है.” खेड़ा ने दोनों राज्यों के बीच कम दूरी की तरफ इशारा करते हुए लिखा, “आप आज असम में हैं. मणिपुर यहां से सिर्फ एक घंटे की दूरी पर है. कृपया वहां भी जाइए. प्रधानमंत्री की उपस्थिति मणिपुर के लोगों को आश्वस्त करने में बहुत मददगार साबित हो सकती है.”  ‘मेरे पास आपका नंबर नहीं था…’: कांग्रेस नेता ने फ्लाइट टिकट की फोटो साझा करते हुए लिखा, “आपकी आसानी के लिए हमने गुवाहाटी से इम्फाल का टिकट बुक कर दिया है, आपको बस विमान में सवार होना है. चूंकि मेरे पास आपका नंबर नहीं था, इसलिए मैं टिकट यहीं साझा कर रहा हूं.” उन्होंने केंद्र के ‘PM CARES’ फंड पर कटाक्ष करते हुए संदेश दिया कि प्रधानमंत्री वहां जाकर दिखाएं कि वह वाकई मणिपुर की परवाह करते हैं. मणिपुर में 2023 से जारी हिंसा और बीच-बीच में भड़कती घटनाओं को लेकर विपक्ष केंद्र सरकार पर सवाल उठाता रहा है. वहीं सरकार का कहना है कि शांति बहाली के प्रयास जारी हैं. प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से इस बयान पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई. इस अनूठे राजनीतिक विरोध ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है. जहां कांग्रेस समर्थक इसे मणिपुर की अनदेखी का मुद्दा बना रहे हैं, वहीं आलोचक इसे राजनीतिक नौटंकी करार दे रहे हैं.

कृतज्ञता ज्ञापित करना भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग: सीएम योगी

नौकरी की गारंटी होगी प्रदेश के वानिकी विश्वविद्यालय की डिग्री: मुख्यमंत्री जंगल कौड़िया ब्लॉक में पुनर्निर्मित बीडीओ कार्यालय का सीएम योगी ने किया उद्घाटन कृतज्ञता ज्ञापित करना भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग: सीएम योगी यूपी में विकास के साथ दमघोंटू वातावरण से मुक्ति: सीएम योगी गोरखपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि कैम्पियरगंज में बनने जा रहे प्रदेश के पहले वानिकी एवं उद्यान विज्ञान विश्वविद्यालय (फॉरेस्ट्री एंड हॉर्टिकल्चर यूनिवर्सिटी) की डिग्री नौजवानों के लिए नौकरी की गारंटी होगी। इस विश्वविद्यालय से डिग्री और डिप्लोमा लेकर निकलने वाले युवाओं के लिए देश और दुनिया में रोजगार के व्यापक अवसर होंगे। साथ ही यह विश्वविद्यालय अन्नदाता किसानों की आमदनी बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। सीएम योगी शनिवार को जंगल कौड़िया ब्लॉक में पुनर्निर्मित बीडीओ कार्यालय का उद्घाटन करने के बाद उपस्थित जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कैम्पियरगंज में बने गिद्धराज जटायु संरक्षण केंद्र का उल्लेख करते हुए कहा कि कृतज्ञता ज्ञापित करना हमारी भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग है। हमारे लिए किसी ने कुछ किया तो उसके प्रति कृतज्ञ होना हमारी जीवनशैली का हिस्सा है। गिद्धराज जटायु की मानव जाति पर बड़ी कृपा रही। माता सीता का हरण कर ले जा रहे रावण का पहला प्रतिकार गिद्धराज जटायु ने किया था। वह सृष्टि के पालनकर्ता भगवान विष्णु की सवारी भी हैं। आज केमिकल और पेस्टिसाइड्स के इस्तेमाल के चलते गिद्धराज की संख्या कम होती जा रही, वे मर रहे हैं। ऐसे में गिद्धराज के प्रति कृतज्ञता जताने और उनको संरक्षण देने के लिए कैम्पियरगंज में संरक्षण केंद्र बनाया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब कैम्पियरगंज में प्रदेश का पहला वानिकी एवं उद्यान विज्ञान विश्वविद्यालय बनाया जाएगा। यहां युवाओं को जो डिप्लोमा व डिग्री मिलेगी, वह देश-दुनिया में नौकरी की गारंटी वाली होगी। आज दुनिया के सामने सबसे बड़ी चुनौती पर्यावरण प्रदूषण की है। वायु प्रदूषण से फेफड़े खराब होंगे और धीरे-धीरे पूरा शरीर खराब हो जाएगा। जब प्रदूषण नहीं होगा तो बीमारी भी नहीं होगी। उन्होंने वायु प्रदूषण को लेकर दिल्ली की चर्चा करते हुए कहा कि वहां डॉक्टर दमा रोगियों, बुजुर्गों और बच्चों को घर से बाहर न निकलने की सलाह देते हैं। यह स्थिति पर्यावरण के साथ खिलवाड़ से बनती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में विकास भी है और दमघोंटू वातावरण से मुक्ति भी। इसी क्रम में कैम्पियरगंज में बनने जा रहा वानिकी विश्वविद्यालय पर्यावरण की चुनौतियों से निपटने में और कारगर सिद्ध होगा। यह वनाच्छादन बढ़ाने और किसानों की आमदनी में वृद्धि का भी नया प्रयास होगा।  नीयत साफ हो तो परिणाम अपने आप आ जाते हैं मुख्यमंत्री ने वर्ष 2017 के बाद प्रदेश और गोरखपुर के विकास की चर्चा करते हुए कहा कि जब नीयत साफ हो तो परिणाम अपने आप आ जाते हैं। अच्छी दिशा में किए गए प्रयास से आज गोरखपुर में खाद कारखाना चालू हो चुका है। गोरखपुर में एम्स सेवाएं दे रहा है, बीआरडी मेडिकल कॉलेज चिकित्सा का उत्कृष्ट केंद्र बन चुका है। पिपराइच में चीनी मिल दोबारा चालू हो गई है। धुरियापार में कम्प्रेस्ड बायो गैस का प्लांट लग चुका है। गीडा में उद्योग ही उद्योग नजर आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि गोरखपुर और प्रदेश में विकास के बहुत बड़े-बड़े कार्य हो रहे हैं। विकास की सोच ही वर्तमान और भावी पीढ़ी के भविष्य को उज्ज्वल बनाने में सहायक होगी।  जंगल कौड़िया के हर गांव से जुड़ाव अपने संबोधन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जंगल कौड़िया ब्लॉक के हर गांव से जुड़ाव का जिक्र किया। कहा कि वह यहां एक-एक गांव गए हैं। हर गांव की समस्या जानते हैं, समस्या समाधान के लिए संघर्ष किया है। बाढ़ की स्थिति में पानी में घुसकर लोगों तक पहुंचे हैं। समस्याओं की तस्वीर पहले से सामने थी तो लखनऊ से उन सभी समस्याओं का समाधान भी करा दिया है।  जंगल कौड़िया, कैम्पियरगंज का विकास कल्पनाओं से भी परे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जंगल कौड़िया ब्लॉक व कैम्पियरगंज विधानसभा क्षेत्र में आज विकास की जो स्थिति है, वह लोगों की कल्पनाओं से भी परे है। यहां कालेसर-जंगल कौड़िया बाईपास बन जाने से लोग सीधे लखनऊ पहुंच जाते हैं, वह भी सिर्फ तीन-साढ़े तीन घंटे में। चिउटहा से कुशीनगर जाने में सिर्फ आधा घंटा लगता है। क्षेत्र की हर प्रमुख सड़क फोरलेन हो गई है। बाढ़ की समस्या का स्थायी समाधान हो रहा है। जंगल कौड़िया में पूज्य ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की स्मृति में डिग्री कॉलेज बन गया है। यहां 2 हजार से अधिक विद्यार्थियों को शिक्षा मिल रही है। स्टेडियम बन गया है। कुश्ती के प्रशिक्षण और अभ्यास की सुविधा से क्षेत्र के पहलवानों को आगे बढ़ने का अवसर मिल रहा है। विकास के साथ ही गरीबों के कल्याण के कार्य हुए हैं। आवास, शौचालय, राशन, आयुष्मान भारत, पेंशन का लाभ हर पात्र को उपलब्ध हुआ है। यह सब विकास के प्रति भाव रखने का ही परिणाम है।  पूर्व प्रमुख रामपति यादव को याद किया सीएम ने इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने जंगल कौड़िया के पूर्व ब्लॉक प्रमुख स्वर्गीय रामपति यादव को भी श्रद्धापूर्वक याद किया। कहा कि 1952 से आजीवन गोरक्षपीठ से जुड़े रहे रामपति यादव 1962 में जंगल कौड़िया के प्रमुख बने और तभी इस ब्लॉक मुख्यालय की स्थापना हुई थी। उन्होंने शालीनता और सहजता के साथ लंबे समय तक लोगों की सेवा की।  वर्तमान प्रमुख के कार्यों की सराहना की मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री ने जंगल कौड़िया के वर्तमान ब्लॉक प्रमुख बृजेश यादव के कार्यों की सराहना की। कहा कि उन्होंने सवा करोड़ रुपये की ब्लॉक निधि और विकसित भारत जीरामजी योजना का बेहतर उपयोग किया है। ब्लॉक भवन में वातानुकूलित सभागार बनवाया है, साथ में सोलर पैनल की भी व्यवस्था की है। विकास के पैसे का ऐसा ही इस्तेमाल हो तो हर ब्लॉक चमकता दिखेगा। सीएम योगी ने भरोहिया ब्लॉक के विकास की तारीफ की। उन्होंने कहा कि जंगल कौड़िया के लोगों के साथ वह हमेशा खड़े हैं। विकास की हर मांग को वह पूरा करने के लिए तैयार हैं। सीएम योगी ने सभी लोगों को महाशिवरात्रि पर्व की शुभकामनाएं दीं और कहा कि यह पर्व शुभता का प्रतीक है।  सीएम की प्रेरणा से कैम्पियरगंज में बनेगी एशिया की सबसे बड़ी फॉरेस्ट्री यूनिवर्सिटी : फतेह बहादुर सिंह … Read more

कालिंजर महोत्सव 2026:तृप्ति शाक्या एंड ग्रुप, साधो द बैंड और ममता शर्मा सजाएंगी सुरमयी शाम

कालिंजर महोत्सव 2026:तृप्ति शाक्या एंड ग्रुप, साधो द बैंड और ममता शर्मा सजाएंगी सुरमयी शाम   ‘इतिहास की गूंज, संस्कृति की आत्मा’ थीम के साथ होगा सांस्कृतिक महासंगम 15 से 17 फरवरी तक होंगी रंगारंग प्रस्तुतियां, ‘आज की शाम कालिंजर के नाम’ और ‘बांदा गॉट टैलेंट’ होंगे मुख्य आकर्षण  खेल महोत्सव में होगा खो-खो, कबड्डी एवं दंगल  लखनऊ बुंदेलखंड के बांदा जनपद की ऐतिहासिक धरती पर 15 से 17 फरवरी तक तीन दिवसीय कालिंजर महोत्सव 2026 का आयोजन होगा। ‘इतिहास की गूंज, संस्कृति की आत्मा’ थीम पर आधारित यह महोत्सव उत्तर प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोक परंपराओं और कलात्मक उत्कृष्टता का अद्भुत उत्सव होगा। महोत्सव का आयोजन जिला पर्यटन-संस्कृति परिषद तथा जिला प्रशासन के संयुक्त प्रयास से कटरा कालिंजर मेला ग्राउंड में किया जाएगा। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि कालिंजर महोत्सव में बुंदेली लोकनृत्य, आल्हा गायन, भजन और लोकगीतों सहित विविध प्रस्तुतियां होंगी, जो क्षेत्र की समृद्ध परंपराओं को मंच प्रदान करेंगी।  हर विधा के कलाकार संग परंपरा और नवाचार  तीन दिवसीय महोत्सव में जहां एक ओर रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों की छटा बिखरेगी, वहीं खेल महोत्सव से युवाओं की ऊर्जा और प्रतिस्पर्धात्मक भावना को मंच मिलेगा। ‘बांदा गॉट टैलेंट’ के जरिए स्थानीय प्रतिभाओं को कला प्रदर्शित करने का सुनहरा अवसर मिलेगा, तो ‘आज की शाम कालिंजर के नाम’ के अंतर्गत विभिन्न विधाओं के खिलाड़ी, कलाकार, गायक अपनी प्रतिभा से दर्शकों को मंत्रमुग्ध करेंगे। महोत्सव स्थानीय सांस्कृतिक धरोहर की झलक के साथ परंपरा और नवाचार का उत्सव बनकर उभरेगा। महोत्सव के तहत मंडलीय सरस मेले में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़े महिला स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों की प्रदर्शनी व विभागीय स्टॉल लगाए जाएंगे। मेले में सम्मेलन एवं गोष्ठी भी होगी।  खेल महोत्सव और ‘बांदा गॉट टैलेंट’ खेल महोत्सव प्रतिदिन प्रातः आठ से अपराह्न चार बजे तक होगा, इसमें 15 फरवरी को खो-खो, 16 फरवरी को कबड्डी तथा 17 फरवरी को दंगल होगा। ‘बांदा गॉट टैलेंट’ प्रतिदिन अपराह्न एक बजे से तीन बजे तक किया जाएगा। इसके अंतर्गत 15 फरवरी को विद्यालय स्तरीय, 16 फरवरी को महाविद्यालय स्तरीय तथा 17 फरवरी को सांस्कृतिक उत्सव 2025-26 के जनपद स्तरीय विजेता विशेष सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देंगे।  ‘आज की शाम कालिंजर के नाम’ से सजेगा मंच  कालिंजर महोत्सव में 15, 16 व 17 फरवरी को अपराह्न चार बजे से सायं छह बजे तक ‘स्थानीय सांस्कृतिक धरोहर’ के अंतर्गत बुंदेली लोक संस्कृति की प्रस्तुतियां होंगी। इनमें  बुंदेली लोकनृत्य,  बुंदेली लोक गायन, वीर रस से ओत-प्रोत आल्हा गायन, भजन एवं लोक गीतों के माध्यम से क्षेत्र की समृद्ध परंपरा की झलक देखने को मिलेगी। ‘आज की शाम कालिंजर के नाम’ के अंतर्गत महोत्सव में प्रतिदिन शाम छह बजे से रात्रि 10 बजे तक सांस्कृतिक संध्या होगी। 15 फरवरी को तृप्ति शाक्या एंड ग्रुप अपनी प्रस्तुति से माहौल को सुरमयी बनाएगा। 16 फरवरी को साधो द बैंड एंड ग्रुप तथा राधा श्रीवास्तव एंड ग्रुप दर्शकों का मनोरंजन करेंगे। 17 फरवरी को ममता शर्मा एवं राजा रेन्चो अपनी प्रस्तुति से शाम को यादगार बनाएंगे। अपर मुख्य सचिव पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग अमृत अभिजात ने बताया कि ‘कालिंजर महोत्सव-2026 बुंदेलखंड की ऐतिहासिक चेतना और जनभागीदारी का सशक्त उत्सव है। प्रदेश सरकार ने गणतंत्र दिवस की झांकी में भी कालिंजर किला को प्रमुखता से प्रदर्शित कर उसकी वैश्विक पहचान को नई ऊंचाई दी थी। पर्यटन विभाग का प्रयास है कि बुंदेलखंड के चर्चित एवं विरासत स्थलों को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर सशक्त रूप से स्थापित किया जाय। यह आयोजन पर्यटन संवर्धन, स्थानीय अर्थव्यवस्था के सशक्तीकरण और सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।’

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