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उमंग सिंघार को मंत्री गोविंद राजपूत ने भेजा 20 करोड़ का मानहानि का नोटिस, नेता प्रतिपक्ष बोले-डरेंगे नहीं

minister govind rajput sent defamation notice of rs 20 crore to umang singhar case related to saurab मध्य प्रदेश के परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा को लेकर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मंत्री गोविंद सिंह राजपूत पर गंभीर आरोप लगाए थे। अब इस मामले में मंत्री गोविंद राजपूत ने नेता प्रतिपक्ष को मानहानि का नोटिस भेजा है। बता दें नेता प्रतिपक्ष ने गोविंद सिंह राजपूत पर परिवहन मंत्री रहने के दौरान भ्रष्टाचार करने और करीब 1500 करोड़ रुपए की जमीन खरीदने के आरोप लगाए थे। अब इस मामले में मंत्री गोविंद राजपूत ने उमंग सिंघार केपर उनकी छवि धूमिल करने का आरोप लगा कर जवाब देने 15 दिन का समय दिया है। वहीं, नोटिस पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी प्रतिक्रिया दी है। न डरें है न डरेंगे, नोटिस का जवाब देंगे वहीं, नोटिस पर प्रतिक्रिया देते हुए उमंग सिंघार ने कहा कि नोटिस का जवाब भी देंगे और कोर्ट भी जाएंगे। न डरे हैं, न डरेंगे। बता दें नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने फरवरी माह में मंत्री गोविंद सिंह राजपूत पर परिवहन विभाग के घोटाले को लेकर गंभीर आरोप लगाए थे, उन्होंने कहा कि इस घोटाले से हर माह राजपूत को 150 करोड़ रुपए पहुंचे। उन्होंने दस्तावेज दिखाते हुए गोविंद राजपूत पर अपने परिचितों और रिश्तेदारों के नाम से भ्रष्टाचार के पैसों से जमीन खरीदने के आरोप लगाए थे। नेता प्रतिपक्ष ने बताया कि परिवहन विभाग के घोटाले में एक पूरा रैकेट काम कर रहा था। उन्होंने 1500 करोड़ रुपए का लेखा जोखा होने की बात कही थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि मंत्री ने परिवहन मंत्री रहते मध्य प्रदेश समेत के कई शहरों समेत दिल्ली के पॉश इलाके में बिल्डिंग में थर्ड फ्लोर और टैरिस अपने परिचितों के नाम से खरीदने का आरोप लगाया था। आरटीओ आरक्षक सौरभ से जुड़ा है पूरा मामला मध्य प्रदेश परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा के ठिकानों से करोड़ों रुपए की नगदी, सोना-चांदी और संपत्ति के दस्तावेज मिले है। शर्मा के करीबी के नाम पर रजिस्टर्ड एक कार में 52 किलो सोना और 10 करोड़ रुपए नगद मिले थे। इस दौरान आरोप है कि सौरभ परिवहन विभाग की चौकियां से वसूली करता था, जिसको मंत्री गोविंद सिंह के इशारे पर किया जा रहा था। इस मामले में लोकायुक्त, ईडी से लेकर आयकर विभाग की टीमें जांच कर रही है। फिलहाल उनको कोई खास जानकारी नहीं मिलने की बात कहीं जा रही है। सौरभ शर्मा और उसके करीबी चेतन सिंह गौर और शरद जयसवाल फिलहाल न्यायिक हिरासत में है।

ऊर्जा मंत्री नहीं पहनेंगे प्रेस किए कपड़े, क्यों लिया प्रण? कांग्रेस बोली- ये नौटंकी वेब सीरीज का भाग

Energy Minister will not wear ironed clothes, why did he take the vow? Congress said- this drama is part of a web series मध्य प्रदेश में अपने अनोखे बयानों और अंदाज के लिए सुर्खियों में रहने वाले ऊर्जा मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर एक बार फिर चर्चाओं में हैं। इस बार उन्होंने ऐसा अनोखा प्रण लिया है, जिसकी चर्चा हर कोई कर रहा है। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने प्रण लिया है कि वे 1 साल तक बिना प्रेस किए हुए कपड़े पहनेंगे। उनके इस बयान को लेकर अब सियासत गरमा गई है। कांग्रेस इसे मंत्री की नौटंकी वेब सीरीज का अगला भाग बताया है। ऊर्जा मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर ने कहा कि वे एक साल तक बिना प्रेस किए हुए कपड़े पहनेंगे, जिससे रोज आधा यूनिट बिजली बचेगी। उन्होंने कहा कि अब वे बेटी की शादी के दिन ही प्रेस किए हुए कपड़े पहनेंगे। ऊर्जा मंत्री ने कहा कि आने वाली पीढ़ी को पीठ पर सिलेंडर न लादना पड़े, इसलिए यह निर्णय लिया। कांग्रेस ने बताया नौटंकीऊर्जा मंत्री के इस बयान पर सियासी बयानबाजी भी तेज हो गई है। कांग्रेस ने इसे मंत्री की नौटंकी करार दिया है। कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष आरपी सिंह ने कहा कि ऊर्जा मंत्री हमेशा सुर्खियों में रहने के लिए नौटंकी करते हैं और यह उनकी वेब सीरीज का अगला पार्ट है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर मंत्री जी को बिजली बचाने की इतनी चिंता है, तो वे अपनी 10-10 गाड़ियों को छोड़कर साइकिल से चलना शुरू करें, जिससे वायु प्रदूषण भी कम होगा। क्या वास्तव में बिजली बचेगी?ऊर्जा मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर के इस फैसले से मध्य प्रदेश में कितनी बिजली बचेगी, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। लेकिन फिलहाल यह बयान उन्हें एक बार फिर सुर्खियों में ले आया है।

सीएम डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता की कैबिनेट बैठक आज, कई अहम प्रस्तावों पर होगी चर्चा

Cabinet meeting chaired by CM Dr. Mohan Yadav today, many important proposals will be discussed मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में सुबह 11 बजे कैबिनेट की बैठक होगी। इस बैठक में कई अहम प्रस्ताव पर चर्चा होगी। बैठक में नई लोक परिवहन नीति के प्रस्ताव पर भी विचार हो सकता है। किसानों को दूध खरीदी पर प्रोत्साहन देने के प्रस्ताव पर भी चर्चा की जाएगी। इसके साथ ही, जनजातीय देवलोक के जीर्णोद्धार को लेकर प्रस्ताव और नगर एवं ग्राम निवेश की धारा 66 में बदलाव का प्रस्ताव भी आ सकता है। विशेष क्षेत्रों में निर्माण गतिविधियों को लेकर कुछ मैदानी अड़चनों को दूर करने के लिए प्रमुख नियमों में बदलाव की चर्चा की जाएगी, ताकि इन क्षेत्रों का तेजी से विकास हो सके। इसके अलावा बैठक में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआईएस) से प्राप्त निवेश प्रस्तावों के क्रियान्वयन पर चर्चा होगी। राज्य में निवेश को बढ़ावा देने और मौजूदा उद्योगों को सहयोग प्रदान करने के उपायों पर भी विचार किया जाएगा। साथ ही बैठक में आगामी विधानसभा सत्र की तैयारियों और राज्य के बजट पर विस्तृत चर्चा की संभावना है। प्रदेश का द्वितीय अनुपूरक बजट लगभग चार से पांच हजार करोड़ रुपये के आसपास हो सकता है। इसके अलावा, विभिन्न विभागों द्वारा विधानसभा में पेश किए जाने वाले विधेयकों पर भी मंथन किया जाएगा।

Tikamgarh News: इलेक्ट्रॉनिक दुकान में लगी आग से सामान जलकर हुआ राख, तीन फायर ब्रिगेड ने पाया काबू

Goods burnt to ashes in a fire that broke out in an electronic shop; three fire brigades brought it under control टीकमगढ़ ! नगर पलेरा में स्थित एक इलेक्ट्रॉनिक दुकान में मंगलवार सुबह अचानक आग लगने का मामला सामने आया है। इससे लगभग 30 से 40 लाख रुपये का सामान जलकर राख हो गया। करीब दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद तीन फायर ब्रिगेड की मदद से आग पर काबू पाया गया। घटना नगर पलेरा के गोल मार्केट में सुबह करीब 6:00 बजे हुई। एक दुकानदार जब अपनी दुकान खोलने पहुंचा तो उसने वहां से धुआं उठते देखा और तुरंत इसकी सूचना दुकान संचालक को दी। जब तक दुकान संचालक मौके पर पहुंचता, तब तक आग पूरे दुकान में फैल चुकी थी। संचालक ने तुरंत नगर परिषद और स्थानीय प्रशासन को इसकी जानकारी दी। नगर पंचायत पलेरा की दो फायर ब्रिगेड घटनास्थल पर पहुंची, लेकिन आग की लपटें तेजी से बढ़ती जा रही थीं। स्थिति बिगड़ती देख नजदीकी नगर परिषद जतारा से एक और फायर ब्रिगेड बुलाया गया। इसके बाद करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया गया, लेकिन तब तक दुकान में रखा सारा इलेक्ट्रॉनिक सामान जलकर खाक हो गया। इसमें फ्रिज, टीवी, वाशिंग मशीन, एलईडी और मोबाइल शामिल थे। दुकान संचालक के अनुसार, कुल मिलाकर लगभग 40 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। आग लगने के कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है, लेकिन प्रारंभिक अनुमान के अनुसार यह आग शॉर्ट सर्किट के कारण लगी हो सकती है। घटना की सूचना पलेरा पुलिस थाने को दी गई, जिसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। कैसे लगी आग? सुबह 6:00 बजे गोल मार्केट के सामने स्थित एक दुकानदार ने धुआं उठते देखा और तुरंत नगर परिषद को इसकी सूचना दी। इसके बाद दुकान मालिक को भी जानकारी दी गई। जब तक नगर परिषद और दुकान मालिक मौके पर पहुंचे, तब तक आग विकराल रूप ले चुकी थी और पूरी दुकान जलने लगी थी। फिलहाल, आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया है और प्रशासन इस घटना के कारणों की जांच कर रहा है।

छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई पहाड़गढ़ जनपद पंचायत CO रामपाल करजरे को बचाने के लिए

Action taken against junior employees to save Pahargarh District Panchayat CO Rampal Karjare मुरैना ! कल दिनांक 2 मार्च को जिला पंचायत सीईओ ने पहाड़गढ़ जनपद के 3 पंचायत के सहायक  सचिवों को निलंबित किया गया है यह कार्रवाई पहाड़गढ़ को रामपाल करजारे को बचाने के लिए की गई है रामपाल करजरे द्वारा पंचायत सहायक सचिवों एवं सचिव सरपंचों से कोरे कागजों पर दस्तखत करवाए गए हैं कई पंचायत के सील  व दस्तावेज अपने पास रखे गए हैं ऐसे ही नरेगा के मजदूरों की एटीएम कार्ड बैंक पासबुक भी रामपाल करजारे के कई लोगों के पास पहले ही जमा है मेरे द्वारा रामपाल करजारे के खिलाफ कई बार शिकायत की गई परंतु  प्रशासन द्वारा उसे लगातार बचाया जा रहा है रामपाल करजारे ने कई तालाब कागजों पर बनाए और कागजों पर ही भुगतान कर दिया असल स्थान पर कई तालाब नहीं बनाए गए ।ऐसे ही FTO के अनुसार भुगतान होना चाहिए जो नहीं होता जिन लोगों के पहले बिल लगे हुए हैं उनके कई कई महीनो तक भुगतान नहीं हुई परंतु जो सरपंच 40 से 50% कमीशन देता है उसका भुगतान तुरंत किया जाता है हमने FTO के अनुसार ही पेमेंट करने की कई बार शिकायत करी परंतु आज दिनांक तक कोई कार्रवाई नहीं की गई या निश्चित रूप से शीर्ष अधिकारियों के द्वारा जनपद पंचायत पहाड़गढ़ सीईओ रामपाल करजारे को बचाया जा रहा है।छोटे कर्मचारियों को पंचायत सचिवों सहायक सचिवों को शिकार ना बनाया जाए

नौकरशाही में सुलेमान पर चर्चा : क्या वीआरएस या ‘वी फोर्स्ड रिटायरमेंट’?

Debate on Suleman in bureaucracy: Is it VRS or ‘We are Forced Retirement’? भोपाल। मध्यप्रदेश की नौकरशाही में इन दिनों सुगबुगाहट तेज है। आईएएस मोहम्मद सुलेमान ने अपने सेवा जीवन के आखिरी मोड़ पर ऐसा मोड़ लिया कि सरकारी गलियारों में कानाफूसी शुरू हो गई। सुलेमान, जिन्हें नौकरशाही के ‘चाणक्य’ का दर्जा प्राप्त था, ने अपनी सेवानिवृत्ति से महज पांच माह पहले ही वीआरएस ले लिया। अब सवाल यह उठता है कि आखिरकार ऐसा क्या हुआ कि एक ‘पावरफुल’ अधिकारी को समय से पहले ही ‘विश्राम’ लेना पड़ा?कहने को तो इसे स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति कहा जा रहा है, लेकिन सरकार के गलियारों में इसे ‘स्वैच्छिक से अधिक विवश सेवानिवृत्ति’ कहा जा रहा है। शिवराज सरकार में सुलेमान का दबदबा ऐसा था कि विभागों के सचिव भी उनके आगे ब्रीफकेस उठाने को तैयार रहते थे। 15 साल तक सत्ता के गलियारों में उनकी गूंज थी, लेकिन जैसे ही सत्ता बदली, उनकी गूंज कम और उनके ट्रांसफर ज्यादा होने लगे। पहले उन्हें अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य से हटाकर कृषि विभाग भेजा गया, फिर कर्मचारी चयन मंडल की कुर्सी थमा दी गई। यह संकेत काफी था कि ‘अब आपको अपना भविष्य खुद देखना होगा’। मुख्य सचिव की कुर्सी से दूरी बनी ‘दूरी’ का कारण? मोहम्मद सुलेमान की नजर प्रदेश के मुख्य सचिव की कुर्सी पर थी, लेकिन किस्मत ने कुछ और ही तय कर रखा था। उनके बैचमेट अनुराग जैन को मुख्य सचिव बना दिया गया और सुलेमान को किनारे कर दिया गया। बस, यहीं से शुरू हुआ सुलेमान का ‘प्लान बी’। सूत्रों के मुताबिक, मुख्य सचिव की रेस में पिछड़ने के बाद उन्होंने ही सोचा कि अब सरकारी सेवा में समय बर्बाद करने से अच्छा है कि कुछ नया किया जाए। अब नौकरशाही से ‘फ्री’, लेकिन जिंदगी में ‘बिजी’! सुलेमान ने वीआरएस के बाद की योजना भी बना रखी है। वे दिल्ली स्थित ‘द एनर्जी एंड रिसोर्स इंस्टीट्यूट’ से पीएचडी करने जा रहे हैं। अब सवाल यह उठता है कि इतने वर्षों तक सरकारी फाइलों में मग्न रहने के बाद अचानक ‘अकादमिक’ दुनिया में जाने का ख्याल क्यों आया? दरअसल, यह भी ‘ट्रांजिशन प्लान’ का हिस्सा हो सकता है। जैसे ही सरकारी कूलिंग-ऑफ पीरियड खत्म होगा, सुलेमान किसी बहुराष्ट्रीय कंपनी में मोटे पैकेज पर नज़र आ सकते हैं। ‘पावर’ में थे, पर ‘पावर’ चला गया! शिवराज सरकार में सुलेमान की पावर का आलम यह था कि बड़े-बड़े मंत्री भी उनकी ‘कृपा’ के लिए लाइन लगाए खड़े रहते थे। लेकिन सत्ता परिवर्तन होते ही उनकी यह ‘कृपा’ कम होने लगी। मोहन यादव सरकार के आते ही उनका मंत्रालय से बाहर होना यह साफ संकेत था कि अब वे ‘विशेषाधिकारी’ नहीं, बल्कि ‘सामान्य अधिकारी’ रह गए हैं। शायद यही बात उन्हें सबसे ज्यादा चुभ गई और उन्होंने फाइलों के ढेर से निकलकर ‘स्वतंत्रता’ का रास्ता चुना। वीआरएस: एक ट्रेंड या मजबूरी? मध्यप्रदेश की नौकरशाही में यह पहला मामला नहीं है, जब किसी वरिष्ठ अधिकारी ने समय से पहले वीआरएस लिया हो। पहले भी कई बड़े अधिकारी जब ‘दरबार’ से दूर कर दिए गए, तो उन्होंने समय से पहले ही ‘दरवाजे’ से बाहर निकलना बेहतर समझा। मोहम्मद सुलेमान का मामला भी कुछ ऐसा ही है।अब देखना यह होगा कि सुलेमान की यह ‘नई पारी’ कितनी लंबी चलती है और वे किस बहुराष्ट्रीय कंपनी में अपनी सेवाएं देते हैं। फिलहाल, नौकरशाही में यह चर्चा जोरों पर है कि ‘जो कल तक सरकार के ‘रणनीतिकार’ थे, आज वे नई रणनीति बनाने में जुट गए हैं!’

भोपाल कलेक्टर ने हाईकोर्ट के आदेश का नहीं किया पालन: हाईकोर्ट ने कहा- याचिका पर 10 दिन में जवाब दें, नहीं तो व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हों

Bhopal Collector did not follow the order of the High Court: High Court said- respond to the petition in 10 days, otherwise appear in person जबलपुर ! भोपाल कलेक्टर ने रेरा से जुड़े मामले में समय पर आरआरसी का निष्पादन नहीं किया, जिसके चलते मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि अगर 10 दिनों में यह कार्य पूरा नहीं होता है तो उन्हें व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होकर जवाब देना होगा। यह दूसरी बार है जब भोपाल कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह के खिलाफ अवमानना याचिका पर सुनवाई हुई, जिस पर कोर्ट ने नाराजगी जाहिर की है।जस्टिस ए.के. सिंह की अदालत में भोपाल कलेक्टर कौशलेन्द्र विक्रम सिंह के खिलाफ दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई हुई। मामले की अगली सुनवाई अब 12 मार्च को होगी। दो अलग-अलग मामलों में अवमानना याचिकाएं दरअसल, एक बिल्डर के खिलाफ दो लोगों ने भोपाल कलेक्टर को शिकायत दी थी, जो रेरा से संबंधित थी। इस मामले में रेरा ने 2020 में भोपाल कलेक्टर को आदेश दिया था कि वह आरआरसी (राजस्व वसूली प्रमाण पत्र) के तहत इस केस का जल्द से जल्द निष्पादन करें, लेकिन कलेक्टर ने कोई कार्रवाई नहीं की। इस देरी के चलते शिकायतकर्ता अरविंद वर्मा ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की थी, जिस पर हाईकोर्ट ने भोपाल कलेक्टर को 60 दिनों में आरआरसी निष्पादित करने का निर्देश दिया था, लेकिन उन्होंने फिर भी कोई कार्रवाई नहीं की। इसी तरह, भोपाल निवासी भानु प्रताप ने भी बिल्डर के खिलाफ रेरा में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें भोपाल कलेक्टर को कार्रवाई करने का आदेश दिया गया था, परंतु यहां भी कोई कदम नहीं उठाया गया। कलेक्टर ने की कोर्ट की अवमानना याचिकाकर्ता के अधिवक्ता कपिल दुग्गल ने बताया कि बिल्डर हिमांशु इन्फ्रास्ट्रक्चर के खिलाफ दो शिकायतें दर्ज करवाई गई थीं। अरविंद वर्मा और भानु प्रताप ने शिकायत में बताया कि बिल्डर के पास उनका लगभग 50 लाख रुपये फंसा हुआ है। रेरा ने इस शिकायत पर भोपाल कलेक्टर को आरआरसी के माध्यम से निष्पादन करने का आदेश दिया था। जब आदेश का पालन नहीं हुआ, तो दोनों याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की। हाईकोर्ट ने कलेक्टर को समय पर मामला निपटाने का आदेश दिया था, लेकिन उन्होंने इसका पालन नहीं किया। कोर्ट ने दिया 10 दिन का समय जब कलेक्टर कौशलेन्द्र विक्रम सिंह ने बिल्डर के खिलाफ समय पर कोई कार्रवाई नहीं की, तो दोनों याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर कर दी। पहली याचिका भानु प्रताप सिंह की थी, जिस पर 25 फरवरी को सुनवाई हुई। इसमें पाया गया कि भोपाल कलेक्टर ने कोर्ट के समक्ष अनुपालन रिपोर्ट पेश नहीं की थी, जिससे नाराज होकर हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ जमानती वारंट जारी किया और 12 मार्च को उपस्थित होने का आदेश दिया।दूसरी याचिका अरविंद वर्मा की थी, जिसमें हाईकोर्ट ने भोपाल कलेक्टर को 10 दिन के भीतर मामले का निपटारा करने का निर्देश दिया है। यदि वे ऐसा नहीं करते हैं, तो उन्हें व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होना पड़ेगा।

वन विहार के वाइल्ड कैफ़े के विवादित टेंडर पर डायरेक्टर अवधेश मीना पर गाज गिरने की संभावना

Director Awadhesh Meena is likely to face action over the controversial tender of Wild Cafe of Van Vihar भोपाल। वन विहार राष्ट्रीय उद्यान के डायरेक्टर अवधेश मीना अपनी पहली ही पोस्टिंग में विवादों से घिर गए हैं। यही नहीं, अब उन पर कार्यवाही की गाज भी गिरने की संभावना है। पीसीसीएफ वाइल्डलाइफ शुभरंजन सेन ने वन विहार राष्ट्रीय उद्यान डायरेक्टर के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा करते हुए फाइल पीसीसीएफ प्रशासन-एक के विवेक जैन को भेज दी है। जैन के यहां फाइल लंबित है। वैसे वाइल्डलाइफ कैफे के संचालन से संबंधित विवाद हाईकोर्ट भी पहुंच गया है। हाई कोर्ट ने पीसीसीएफ वाइल्डलाइफ कार्यालय से 7 दिनों के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए है।  वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में वाइल्ड कैफे चलाने के लिए निविदाएं आमंत्रित करने के लिए एक विज्ञापन जारी किया गया था। शीर्ष अधिकारियों के दबाव में वन विहार डायरेक्टर मीना ने  विज्ञापन में एक शर्त ऐसी जोड़ी थी कि जिसमें उल्लेख था कि मौजूदा वाइल्ड कैफे संचालक यदि एल-1 फर्म के बराबर बोली की रकम अदा करता है, तो उसे पुनः संचालन का अधिकार दिया जा सकता है। कैफे के लिए जारी विज्ञापन में वर्तमान वाइल्ड कैफे के संचालक अश्वनी कुमार रिछारिया  समेत चार फर्म मैसर्स प्रज्ञा एसोसिएट्स छतरपुर, दौलत राम इंजीनियरिंग सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड ओबेदुल्लागंज और श्रुति जैन शिव शक्ति दाल मिल कृषि उपज मंडी भोपाल ने हिस्सा लिया। निविदा समिति ने दो फर्म मैसर्स प्रज्ञा एसोसिएट्स छतरपुर और दौलत राम इंजीनियरिंग सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड ओबेदुल्लागंज को दस्तावेज में कमी बताते हुए दौड़ से बाहर कर दिया। श्रुति जैन शिव शक्ति दाल मिल कृषि उपज मंडी भोपाल ने वाइल्ड कैफे के संचालन के लिए सबसे अधिक बोली 21 लाख एक रूपये की लगाई। यानि एल-1 श्रुति जैन शिव शक्ति दाल मिल कृषि उपज मंडी भोपाल को कैफे के संचालन के वर्क ऑर्डर भी वन विहार डायरेक्टर अवधेश मीना ने जारी कर दिए। श्रुति जैन शिव शक्ति दाल मिल कृषि उपज मंडी भोपाल को कैफे के संचालन कि सच के अनुसार 21 लाख ₹1 का बैंक ड्राफ्ट भी जमा कर दिया। इस दौरान शीर्ष अधिकारियों के दबाव में डायरेक्टर मीना ने एल -1 का टेंडर निरस्त करते हुए वर्तमान में संचालित कर रहे फर्म को ही कैफे संचालक के आदेश जारी कर दिए। बस यहीं से विवाद शुरू हो गया।  दोनों ही पार्टी पहुंची हाई कोर्ट  संचालन को लेकर दो पार्टियों में जंग शुरू हो गई। पहले एल-1 फर्म शक्ति दाल मिल हाई कोर्ट में वन विहार डायरेक्टर पर अनुबंध तोड़ने का आरोप लगाते हुए याचिका दाखिल की। याचिकाकर्ता श्रुति जैन की ओर से अधिवक्ता ने तर्क रखा कि भोपाल के वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में वाइल्ड कैफे चलाने के लिए निविदाएं आमंत्रित करने के लिए एक विज्ञापन जारी किया गया था। याचिकाकर्ता ने भाग लिया और सफल घोषित किया गया। सभी अधिकार और अधिकार वन विहार राष्ट्रीय उद्यान के निदेशक में निहित हैं, लेकिन मनमाने ढंग से प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) के कार्यालय ने मनमाने ढंग से और अवैध तरीके से निविदा को रद्द दिया। याचिका की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने निर्देश दिया कि पीसीसीएफ वाइल्डलाइफ कार्यालय 7 दिनों के भीतर जवाब दाखिल कर सकता है। शीर्ष अफसर कर रहें है प्रताड़ित  श्रुति जैन, शिव शक्ति दाल मिल ने मुख्य सचिव अनुराग जैन को पत्र लिखकर वन विभाग के एसीएस अशोक वर्णवाल और कुछ सरकारी अधिकारियों द्वारा उत्पीड़न और अधिकार के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है। मुख्य सचिव को लिखिए पत्र में उल्लेख है कि 28 जनवरी 25 को हमने वन विहार के साथ पांच वर्षों के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए और उस पर वन विहार के निदेशक द्वारा मुहर और हस्ताक्षर किए गए। 31 जनवरी को हमें पता चला कि वन विहार के निदेशक पर इस टेंडर को रद्द करने का दबाव डाला है। इस मामले में एसीएस वर्णवाल सहित फारेस्ट के शीर्ष अधिकारी शामिल हैं, जो इस टेंडर को रद्द करने पर जोर दे रहे हैं ताकि किसी अन्य पार्टी को फायदा पहुंचाया जा सके। सत्ता का दुरुपयोग न केवल पीड़ितों को नुकसान पहुंचाता है बल्कि प्रशासन और कानून के शासन में जनता का विश्वास भी कम करता है। इनका कहना  वाइल्डलाइफ कैफे के संचालन को लेकर विवाद हाईकोर्ट में लंबित है। मैं मानता हूं कि डायरेक्टर ने गलत शर्त जोड़ी है। इस वजह से उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है और मैंने प्रस्ताव पीसीसीएफ प्रशासन-एक विवेक जैन को भेज दिया है।   शुभ रंजन सेन, पीसीसीएफ वाइल्डलाइफ

ग्रहों की अनुकूलता का सरल माध्यम गौसेवा है:स्वामी रामस्वरूपाचार्य जी ।

The simplest means of achieving the favourable position of the planets is cow service: Swami Ram Swarupacharya. हरिप्रसाद गोहेआमला। जनसहयोग से निर्मित और संचालित श्री महावीर हनुमान गौशाला के लिए आज विशिष्ट दिन रहा क्योंकि आज महान कथा वाचक और संत का आगमन गौशाला में हुआ।कथाचार्य अनंत श्री श्री विभूषित जगतगुरु रामानंदाचार्य कामदगिरि पीठाधीश्वर स्वामी रामस्वरूपाचार्य जी महाराज चित्रकूट धाम आज गौशाला पधारे।गौशाला के कार्यों को देखकर स्वामी जी प्रसन्न हुए और गौशाला के कार्यों की प्रशंसा की सर्वप्रथम गौशाला परिवार द्वारा महाराज जी का चरण पखार कर अभिनंदन किया।स्वयं महाराज जी ने गौशाला में गौपूजन किया गौमाता को गुण मिष्ठान खिलाया।इस अवसर पर आशीर्वाद स्वरूप अपनी बात कहते हुए कहा कि एक मात्र गाय की सेवा करने से ही मन, वाणी, कर्म और शरीर की पवित्रता संभव है। और तो और गौ सेवा से व्यक्ति अपने सम्पूर्ण कुल की रक्षा कर सकता है, सम्पूर्ण सृष्टि की सुरक्षा केवल गौमाता की रक्षा से ही संभव है। समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अपने समय एवं सामर्थ्य के अनुसार गाय की सेवा करनी चाहिए । इस अवसर पर उन्होंने गौशाला को इक्कावन सौ रुपए की राशि भेंट की।यह क्षण गौशाला परिवार के लिए गौरव का क्षण था क्योंकि देश के इतने बड़े संत और जगत गुरु का गौशाला में आगमन हुआ और उनके द्वारा आशीर्वाद स्वरूप सहयोग राशि भेंट करना अद्वितीय था।जगतगुरु महाराज जी विश्व प्रसिद्ध कथा वाचक है श्री राम मंदिर अयोध्या में मंदिर निर्माण के बाद पहली कथा इनके ही मुखार बिंद से प्रवाहित हुई थी । उल्लेखनीय है कि ससाबड़ के प्रतिष्ठित पुंडे परिवार द्वारा रामकथा करवाई जा रही जिसके निमित्त महाराज जी का आगमन हुआ है और आज वे गौशाला पहुंचे।महाराज जी ने कहा कि गौशाला का कार्य उत्तम है निराश्रित बीमार और घायल गौवंश के आश्रय के रूप में ये गौशाला का कार्य श्रेष्ठतम है।उन्होंने सभी से आग्रह किया कि गौशाला में सभी सहयोग करे तन मन और धन से जिससे जो संभव हो सहयोग करे।गौ सेवा करके अपने जीवन को धन्य करे। इस अवसर पर प्रमुख रूप से सूर्यवंशी ढोलेवार कुंबी समाज के युवा प्रमुख अजय गंगारे,नरेंद्र आसोले सहित सुखदेव नारे समेत गौशाला परिवार के समस्त सदस्य उपस्थित थे ।

41 साल की सेवा के बाद एसडीओ पुरिया सेवानिवृत्त

SDO Puria retired after 41 years of service भोपाल। पर्यावरण वानिकी वन मंडल में सहायक वन संरक्षक के पद पर कार्यरत दिलीप सिंह पुरिय 41 साल की सेवा के बाद सेवानिवृत्त हो गए। इस अवसर पर वन मंडल कार्यालय में विदाई समारोह का आयोजन किया गया। कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने पुरिया के कार्यकाल के दौरान वन संरक्षण और पर्यावरण के क्षेत्र में किए गए उल्लेखनीय कार्यों की सराहना की गई। साथी कर्मचारियों ने उनके साथ के अनुभवों को साझा किया और उनके सेवानिवृत्त जीवन के लिए शुभकामनाएं दीं। पुरिया ने भी अपने कार्यकाल के यादगार पलों को साझा किया और सभी सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।

EOW की बड़ी कार्रवाई: निगम अधिकारी के ठिकानों पर छापा, करोड़ों की संपत्ति जब्त

EOW’s big action: Raid on corporation officer’s premises, property worth crores seized इंदौर ! नगर निगम राजस्व अधिकारी राजेश परमार के घर और कार्यालय समेत कई ठिकानों पर आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने शुक्रवार सुबह छापेमारी की। प्रारंभिक जांच में करोड़ों की अवैध संपत्ति के दस्तावेज बरामद हुए हैं। बताया जा रहा है कि परमार ने नौकरी के दौरान अपने और परिवार के नाम पर कई महंगी संपत्तियां खरीदीं। मामले की जांच जारी है और आगे और भी खुलासे होने की संभावना है। घर और ऑफिस पर छापा, संपत्ति के दस्तावेज जब्त सूत्रों के अनुसार, इंदौर के बिजलपुर स्थित आवास कॉलोनी में EOW की टीम ने स्थानीय पुलिस की मदद से सर्चिंग अभियान चलाया। टीम को परमार के घर से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज मिले हैं। साथ ही, परमार के कार्यालय पर भी छापा मारा गया, लेकिन वह बंद मिला। टीम ने श्रीजी वैली, बिचौली मर्दाना स्थित अन्य संपत्तियों पर भी कार्रवाई की। EOW डीएसपी मधुर रीना गौड़ ने बताया कि परमार के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति की शिकायत मिलने के बाद यह कार्रवाई की गई है। अब तक की जांच में कुछ संपत्तियों के दस्तावेज सामने आए हैं, लेकिन उनकी सटीक कीमत का निर्धारण अभी बाकी है। प्रारंभिक आकलन के अनुसार, यह संपत्तियां करोड़ों रुपये की हो सकती हैं। पहले ही हो चुका है निलंबन राजेश परमार को हाल ही में नगर निगम आयुक्त द्वारा अनियमितताओं के आरोप में निलंबित किया गया था। बताया जा रहा है कि परमार की भर्ती पहले बेलदार के पद पर हुई थी, लेकिन बाद में वह प्रमोशन पाकर सहायक राजस्व अधिकारी बन गया। नौकरी के दौरान, उसने अपने और परिवार के नाम पर कई महंगी संपत्तियां खरीदीं। परमार के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायत कांग्रेस पार्षद रुबिना खान ने 20 अक्टूबर 2024 को नगर निगम आयुक्त से की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि परमार दरोगा के पद पर रहते हुए प्रभारी एआरओ बन गया और जोन-19 में बेटरमेंट शुल्क की कम वसूली कर भ्रष्टाचार कर रहा था। इसके अलावा, बिना अनुमति विदेश यात्रा करने के भी आरोप हैं। रुबिना खान ने महापौर, आयुक्त, राजस्व समिति प्रभारी सहित अन्य अधिकारियों को प्रमाणों के साथ शिकायत सौंपी थी। उन्होंने मांग की थी कि परमार को तत्काल बर्खास्त किया जाए और उसके पूरे कार्यकाल की जांच की जाए। जांच जारी, और खुलासों की संभावना EOW की कार्रवाई अभी जारी है और आगे और भी संपत्तियों के दस्तावेज मिलने की संभावना जताई जा रही है। इस पूरे मामले में निगम के अन्य अधिकारियों की संलिप्तता की भी जांच की जा सकती है। इस छापेमारी के बाद नगर निगम के अन्य अधिकारियों में हड़कंप मच गया है। अब देखना यह होगा कि इस पूरे मामले में आगे और क्या खुलासे होते हैं और राजेश परमार पर क्या कार्रवाई की जाती है।

एक्सप्रेस ई कनेक्ट और MANIT भोपाल ने नवाचार और अनुसंधान में सहयोग के लिए समझौता किया

Express E Connect and MANIT Bhopal sign MoU for collaboration in innovation and research भोपाल ! नवाचार और अनुसंधान को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की दिशा में एक्सप्रेस ई कनेक्ट और मौलाना आज़ाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (MANIT) भोपाल ने एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह साझेदारी स्वास्थ्य, कृषि, जैव-ऊर्जा, नैनो टेक्नोलॉजी और सूक्ष्मजीवों जैसे क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव लाने की क्षमता रखती है। नवाचार और अनुसंधान को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, उदित नारायण द्वारा स्थापित एक्सप्रेस ई कनेक्ट ने मौलाना आज़ाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (मैनिट) भोपाल के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं।उदित नारायण और मैनिट भोपाल में संस्थागत विकास और अंतर्राष्ट्रीय संबंध के डीन डॉ. एस.पी.एस. राजपूत ने स्वास्थ्य, कृषि, जैव ऊर्जा, नैनो प्रौद्योगिकी और सूक्ष्मजीवों में प्रमुख चुनौतियों को हल करने के लिए संयुक्त रूप से काम करने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।इस रणनीतिक साझेदारी की शुरुआत बीएसबीई विभाग की छात्रा शिवालिका दुबे ने मैनिट में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. कृषाली पांडे के नेतृत्व में एक्सप्रेस ई कनेक्ट के संस्थापक उदित नारायण के औद्योगिक दौरे के दौरान की।जिसमें एलसीबी फर्टिलाइजर्स के सीईओ अक्षय श्रीवास्तव और एलसीबी फर्टिलाइजर्स के सीएमओ मुकेश सिंह भी शामिल थे। एक्सप्रेस ई कनेक्ट का पहले से ही एलसीबी फर्टिलाइजर्स के साथ एक स्थापित सहयोग है, जो आईआईटी कानपुर से जुड़ा एक संगठन है, जो स्थिरता और उन्नत प्रौद्योगिकी समाधानों पर ध्यान केंद्रित करता है। इस नए समझौता ज्ञापन के साथ, एक्सप्रेस ई कनेक्ट और मैनिट भोपाल का लक्ष्य प्रभावशाली अनुसंधान और तकनीकी प्रगति को आगे बढ़ाना है। मध्य प्रदेश में एक अच्छी तरह से जुड़े और प्रभावशाली व्यक्ति उदित नारायण नवाचार और स्थायी समाधानों को आगे बढ़ाने के लिए सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों के साथ सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। दूसरी ओर, प्रतिष्ठित केंद्रीय सरकारी संस्थान मैनिट भोपाल के पास अनुसंधान और विकास में उत्कृष्टता की एक मजबूत विरासत है। इस सहयोग से विभिन्न क्षेत्रों में सफल समाधानों में तेजी आने की उम्मीद है, जिससे उद्योगों और समाज को बड़े पैमाने पर लाभ होगा।है, जिससे न केवल उद्योगों को बल्कि समाज को भी दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।

निर्माण कार्य अपूर्ण, राशि का आहरण कर दिया भुगतान , जानकारी मांगने पर गोल, मोल जवाब दे रहा ग्राम पंचायत सचिव ।

Construction work is incomplete, amount has been withdrawn and paid, on asking for information the village panchayat secretary is giving evasive answers. हरिप्रसाद गोहेआमला। ग्रामों में युवा उभरती प्रतिभाओं के खेलों को निखारने एवं उनके खेलों को प्रोत्साहन देने क्षेत्र के जन प्रतिनिधि प्रतिबद्ध है। समय समय पर खिलाड़ियों की मांग अनुसार खेल मैदान विस्तार के लिए निधि से राशि भी स्वीकृत की जा रही है। जनप्रतिनिधियो की मंशा है की अंचल के ग्रामों से खिलाड़ी निकलकर आमला एवं देश प्रदेश का नाम रोशन कर सके लेकिन खिलाड़ियों की मंशा पर खरे नहीं उतर रहे ग्राम पंचायत सचिव वा सरपंच एवं उनकी कार्यप्रणाली जिस कारण ग्राम पंचायत नांदपुर के युवा खिलाड़ियों में गहरा आक्रोश है कारण ग्राम पंचायत नांदपुर में विधायक निधि से स्वीकृत लाखों रुपए की राशि से निर्माण किए जाने वाले वॉलीबाल खेल मैदान में सरपंच सचिव की मिलीभगत से भ्रष्टाचार किया जाना बताया जा रहा है वहीं खिलाड़ियों द्वारा किए गए निर्माण कार्य की जानकारी मांगने पर सचिव द्वारा अभद्र अभद्र व्यवहार किए जाने का मामला जनपद पंचायत आमला अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत नांदपुर में प्रकाश में आया है । खिलाड़ियों ने सौपा ज्ञापन एन वाय के वॉलीबॉल स्पोर्ट्स क्लब नांदपुर के खिलाड़ियों द्वारा ग्राउंड निर्माण कार्य पूर्ण किए बिना निर्माण कार्य हेतु स्वीकृत राशि का भुगतान करने को लेकर खिलाड़ियों द्वारा सचिव से जानकारी हेतु चर्चा के लिए ग्राम पंचायत पहुंचे तो सचिव द्वारा खिलाड़ियों के साथ जानकारी उपलब्ध कराने के संबंध में गोल-मोल जवाब दिया गया एवं खिलाड़ियों द्वारा पूछने पर खिलाड़ियों के साथ सचिव महोदय द्वारा अभद्रता पूर्ण व्यवहार किया गया जिसको लेकर खिलाड़ियों द्वारा बी.पी.ओ. संजय सावारकर को मुख्य कार्यपालिका अधिकारी बैतूल के नाम एवं अनुविभागीय अधिकारी शैलेंद्र बडोनिया को जिला कलेक्टर के नाम लिखित रूप से ज्ञापन सौंप सचिव द्वारा अभद्र व्यवहार एवं वॉलीबॉल ग्राउंड में हुए भ्रष्टाचार की जांच के संबंध में सचिव पर कार्यवाही की मांग को लेकर खिलाड़ियों ने ज्ञापन सौपा गया । वहीं खिलाड़ियों द्वारा वॉलीबॉल ग्राउंड निर्माण कार्य पूर्ण किए बिना राशि के भुगतान संबंधित समस्त दस्तावेज महोदय को ज्ञापन के साथ प्रस्तुत किया गया ।ज्ञापन सौपते समय शिव प्रसाद चौहान, दीपांशु राठौर, प्रिंस चौहान, तुषार डाडारिया, शुभम राठौर, विदित सोनपुरे, रौनक चौहान, हिमांशु राठौर, प्रवीण दुर्गेश राठौर गुलशन रहड़वे, गुलशन पटवारी रितेश चौहान कृष्ण सोनपुरे, गोविन्द चौधरी आदि मौजूद रहे। इन्होंने क्या कहाग्राम पंचायत नांदपुर का शिकायती ज्ञापन मिला है जांच करवाई जाएंगी ।संजीत श्रीवास्तव मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत आमला । वॉलीबाल निर्माण कार्य वर्तमान समय में प्रगतिरत है ।सुमेरसिह बघेल सचिव ग्राम पंचायत नांदपुर

Indore BRTS: इंदौर में भी टूटेगा बीआरटीएस… HC के आदेश पर बोले महापौर भार्गव- कल से ही कर देंगे काम शुरू

Indore BRTS: BRTS will be demolished in Indore too… Mayor Bhargava said on HC’s order – will start the work from tomorrow itself इंदौर। मध्य प्रदेश में भोपाल के बाद अब इंदौर में भी बीआरटीएस (इंदौर बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम) को हटाने का रास्ता साफ हो गया है। हाई कोर्ट ने गुरुवार को इसकी अनुमति दे दी। हाई कोर्ट का आदेश आने के बाद महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि सरकार खुद ही इसे हटाना चाहती थी, ताकि यातायात सुगम हो सके। अब हाई कोर्ट का आदेश भी आ गया है तो कल से ही हटाने का काम शुरू कर दिया जाएगा। मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद हाई कोर्ट ने भी लगाई मुहरइस तरह 12 साल पुराने इंदौर बीआरटीएस को तोड़ने का रास्ता साफ हो गया। बीआरटीएस को लेकर हाई कोर्ट में चल रही दो जनहित याचिकाओं में गुरुवार को सुनवाई हुई।वर्तमान परिस्थितियों में बीआरटीएस की उपयोगिता और व्यावहारिकता जांचने के लिए बनाई गई पांच सदस्यीय समिति ने अपनी रिपोर्ट कोर्ट के समक्ष रखी। इसमें कहा कि इंदौर का बीआरटीएस वर्तमान परिस्थिति में अपनी उपयोगिता खो चुका है।इसकी वजह से अक्सर जाम की स्थिति बनती है। मुख्यमंत्री खुद इसे तोड़ने की घोषणा कर चुके हैं। याचिका में भी बीआरटीएस को तोड़ने की मांग है। सभी पक्षों को सुनने के बाद हाई कोर्ट की युगलपीठ ने बीआरटीएस तोड़ने के सरकार के फैसले पर मुहर लगा दी।

पीथमपुर में ही जलेगा यूनियन कार्बाइड का जहरीला कचरा, SC का रोक से इनकार… आज खोले जाएंगे कंटेनर

Union Carbide’s toxic waste will be burnt in Pithampur itself, SC refuses to stop it… containers will be opened today 1200 डिग्री रखा जाएगा इंसीनरेटर का तापमान इंदौर ! यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे को जलाने का रास्ता साफ हो गया है। भोपाल से यह कचरा पीथमपुर लाया जा चुका है। सामाजिक कार्यकर्ता चिन्मय मिश्र ने इस पर रोक लगाने की मांग की थी, जिसे सर्वोच्च अदालत ने खारिज कर दिया। गुरुवार सुबह मामले को लेकर हुई सुनवाई में कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता चाहें तो इस संबंध में हाई कोर्ट के समक्ष आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। कोर्ट ने शासन के उस जवाब को भी रिकॉर्ड पर ले लिया है, जिसमें कहा है कि कचरा जलाने के दौरान सभी नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा। पिछली सुनवाई में सरकार से मांगा था जवाबपिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार से पूछा था कि धार जिले के पीथमपुर में भोपाल की यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री का कचरा जलाने के दौरान कोई घटना होगी, तो उससे निपटने के लिए उसके पास क्या इंतजाम हैं। गुरुवार को सरकार ने जवाब दाखिर कर दिया। याचिका में आरोप था कि कचरा जलाने के दौरान अकस्मात आपदा होने की स्थिति में आपदा प्रबंधन के लिए कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं। आज खुलेंगे चार से पांच कंटेनर, 12 घंटे चलेगा ड्राई रन, शुक्रवार से कचरा जलाने का काम होगा शुरूपीथमपुर में रि-सस्टेनेबिलिटी कंपनी के परिसर में पिछले दो माह से रखे यूनियन कार्बाइड के 337 टन कचरे के 12 कंटेनर में चार से पांच कंटेनर को गुरुवार को खोला जाएगा। कंटेनर से कचरे को निकालकर उसमें मौजूद हानिकारक तत्वों पर नियंत्रण के लिए सोडियम सल्फाइड जैसे रसायन मिलाए जाएंगे। गुरुवार को इंसीनरेटर में ड्राई रन शुरू किया जाएगा और 12 घंटे तक इंसीनरेटर को चालू कर इसके प्रथम चेम्बर में 850 से 900 डिग्री सेल्सियस व दूसरे चेम्बर में 1100 से 1200 डिग्री सेल्सियस तक तापमान पहुंचाया जाएगा। इसके बाद यूनियन कार्बाइड के कचरे को इंसीनरेटर में डालकर जलाने की प्रक्रिया शुरू होगी। संभागायुक्त दीपक सिंह ने कहा कि कोर्ट के निर्देश के अनुसार गुरुवार से कचरे को जलाने की प्रक्रिया शुरू करेंगे। याचिकाकर्ता की आपत्तियां खारिजयाचिकाकर्ता सामाजिक कार्यकर्ता चिन्मय मिश्र ने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में कहा था कि पर्यावरण और स्वास्थ्य नियमों का पालन किए बगैर यूनियन कार्बाइड का जहरीला कचरा जलाने की तैयारी की गई है। याचिकाकर्ता का आरोप था कि जिस जगह कचरा जलाया जाना है, वहां से 250 मीटर दूर एक गांव है। एक किमी के दायरे में तीन अन्य गांव हैं, लेकिन स्थानीय नागरिकों को वैकल्पिक स्थान तक उपलब्ध नहीं करवाया गया। कचरा जलाने के दौरान कोई हादसा होता है तो पीथमपुर में अस्पताल भी नहीं है। हाई कोर्ट के आदेश पर जलाया जा रहा कचराउल्लेखनीय है कि भोपाल गैस त्रासदी के 40 साल बाद मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के आदेश पर राज्य सरकार यूनियन कार्बाइड के कचरे का निस्तारण करा रही है। इसके लिए जनवरी में 337 टन कचरे को भोपाल से धार जिले के पीथमपुर स्थित संयंत्र में लाकर उसे जलाने की तैयारी कर ली गई थी, लेकिन स्थानीय लोगों ने कचरे के जलने से उसकी जहरीले तत्वों का जलवायु पर दुष्प्रभाव होने की आशंका जताते हुए विरोध कर दिया था।

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