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नागरिकता विवाद में राहुल गांधी को राहत: हाईकोर्ट ने याचिका खारिज की, केंद्र पर उठाए सवाल

Relief to Rahul Gandhi in citizenship dispute: High Court dismisses petition, raises questions on Centre लखनऊ। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की नागरिकता को चुनौती देने वाली याचिका को लखनऊ हाईकोर्ट ने सोमवार को खारिज कर दिया। कोर्ट ने केंद्र सरकार की ओर से अस्पष्ट जवाब दिए जाने पर नाराजगी जताई और कहा कि जब तक केंद्र कोई स्पष्ट स्थिति नहीं रखता, तब तक याचिका को लंबित रखने का कोई औचित्य नहीं है। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता को अन्य कानूनी रास्ते अपनाने की स्वतंत्रता दी है। यह मामला पिछले कुछ वर्षों से सुर्खियों में बना हुआ था, जिसमें राहुल गांधी पर ब्रिटेन की एक कंपनी के डायरेक्टर पद पर रहते हुए खुद को “ब्रिटिश नागरिक” बताने का आरोप लगाया गया था। याचिकाकर्ता एस विग्नेश शिशिर, जो कर्नाटक के निवासी और भाजपा से जुड़े हैं, ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में याचिका दाखिल की थी। याचिका में कहा गया कि यदि राहुल गांधी ने स्वयं को ब्रिटिश नागरिक बताया है, तो भारतीय नागरिकता कानून 1955 के अनुसार उनकी नागरिकता रद्द की जानी चाहिए और वे जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत चुनाव लड़ने के अयोग्य घोषित किए जाएं। हाईकोर्ट की टिप्पणी और केंद्र की भूमिका कोर्ट की खंडपीठ जिसमें न्यायमूर्ति एआर मसूदी और न्यायमूर्ति राजीव सिंह शामिल थे, ने कहा कि केंद्र सरकार याचिकाकर्ता की शिकायत के निपटारे के लिए कोई समयसीमा नहीं दे पा रही है। ऐसे में याचिका पर विचार जारी रखना व्यर्थ होगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता इस मामले में अन्य वैकल्पिक विधिक उपायों के लिए स्वतंत्र है। इससे पहले 21 अप्रैल को हुई सुनवाई में कोर्ट ने केंद्र सरकार को फटकार लगाते हुए कहा था कि यह मामला राष्ट्रीय महत्व का है, और इसमें देरी नहीं की जा सकती। कोर्ट ने केंद्र से पूछा था कि क्या राहुल गांधी भारतीय नागरिक हैं या नहीं—और 10 दिन के भीतर स्थिति स्पष्ट करने को कहा था। लेकिन 10 दिन की समयसीमा बीतने के बाद भी सरकार की ओर से ठोस जवाब नहीं आया। एडिशनल सॉलिसिटर जनरल सूर्यभान पांडेय ने कोर्ट में केंद्र की ओर से स्थिति रिपोर्ट पेश की थी, जिसे कोर्ट ने अपर्याप्त” बताया था। इसके बाद कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि केंद्र सरकार ही मामले की गंभीरता को नहीं समझ रही, तो कोर्ट के पास याचिका खारिज करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता। याचिकाकर्ता के आरोप क्या थे? याचिकाकर्ता एस विग्नेश शिशिर ने दावा किया था कि राहुल गांधी ने वर्ष 2005-2006 में ब्रिटेन की एक कंपनी, ‘BackOps Limited’ में डायरेक्टर के रूप में खुद को “British citizen” बताया था। उन्होंने ब्रिटिश सरकार के 2022 के एक गोपनीय मेल का भी हवाला दिया और कहा कि राहुल गांधी की नागरिकता संदिग्ध है। याचिका में यह भी कहा गया कि यदि राहुल गांधी वास्तव में ब्रिटिश नागरिक रहे हैं या दोहरी नागरिकता रखते हैं, तो भारतीय कानून के अनुसार उन्हें संसद सदस्य बने रहने और चुनाव लड़ने का अधिकार नहीं है। भारतीय नागरिकता अधिनियम की धारा 9(2) के तहत याचिकाकर्ता ने राहुल गांधी की नागरिकता को समाप्त करने की मांग की थी। Read More: मध्यप्रदेश में मंजूरी के 4 दिन बाद तबादला नीति जारी: आधी रात के बाद आदेश; जिनकी परफॉर्मेंस खराब, उनको पहले बदलेंगे पिछली सुनवाइयों का विवरण Rahul Gandhi in citizenship dispute मामले की सुनवाई कई चरणों में हुई। 24 मार्च को कोर्ट ने राज्य सरकार को चार सप्ताह में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा था, लेकिन सरकार ने आठ सप्ताह का समय मांगा। 19 दिसंबर 2024 को जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की बेंच ने केंद्र सरकार को यूके सरकार से संपर्क कर स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया था। इसके बाद गृह मंत्रालय ने कोर्ट को सूचित किया कि उन्होंने ब्रिटिश सरकार को पत्र लिखा है और जांच जारी है। राहुल गांधी की ओर से चुप्पी Rahul Gandhi in citizenship dispute इस पूरे मामले के दौरान कोर्ट में राहुल गांधी की ओर से कोई अधिवक्ता उपस्थित नहीं हुआ, जिससे कई सवाल खड़े हुए। हालांकि, कांग्रेस पार्टी या राहुल गांधी की ओर से सार्वजनिक रूप से इस याचिका पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। इससे मामले की संवेदनशीलता और राजनीतिक प्रकृति और भी गहरी हो जाती है। क्या आगे की कार्रवाई होगी? हालांकि हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी है, लेकिन यह मामला यहीं खत्म नहीं हुआ है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि याचिकाकर्ता अन्य वैधानिक विकल्पों के लिए स्वतंत्र हैं। इसका अर्थ यह है कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट या किसी अन्य मंच पर चुनौती के रूप में फिर से उठाया जा सकता है। राहुल गांधी की नागरिकता को लेकर उठे सवाल और कोर्ट की टिप्पणी दोनों ही भारतीय राजनीति में संवेदनशील और अहम हैं। हाईकोर्ट ने फिलहाल याचिका खारिज कर एक स्पष्ट संकेत दिया है कि जब तक केंद्र खुद ठोस जानकारी नहीं देता, तब तक न्यायपालिका इस पर कोई अंतिम निर्णय नहीं दे सकती। अब देखना होगा कि क्या याचिकाकर्ता इस मामले को सुप्रीम कोर्ट लेकर जाते हैं या केंद्र सरकार इस पर कोई नई स्थिति स्पष्ट करती है।

मध्यप्रदेश में मंजूरी के 4 दिन बाद तबादला नीति जारी: आधी रात के बाद आदेश; जिनकी परफॉर्मेंस खराब, उनको पहले बदलेंगे

Transfer policy issued in Madhya Pradesh 4 days after approval: Order after midnight; Those with poor performance will be replaced first 29 अप्रैल को मध्यप्रदेश कैबिनेट ने तबादला नीति को मंजूरी दे दी थी, लेकिन आदेश जारी नहीं किए गए थे। भोपाल। मध्यप्रदेश में कैबिनेट की मंजूरी के चार दिन बाद आधी रात को सरकार ने तबादला नीति जारी कर दी है। एक अप्रैल 2024 से 30 अप्रैल 2025 के बीच जिन अधिकारियों-कर्मचारियों का तबादला किया है, उनका ट्रांसफर मुख्यमंत्री की अनुमति के बिना नहीं किया जाएगा। मंगलवार 29 अप्रैल को मोहन कैबिनेट ने तबादला नीति को मंजूरी दे दी थी, लेकिन सामान्य प्रशासन विभाग ने इसके आदेश जारी नहीं किए थे। शनिवार और रविवार की रात 12.05 बजे राज्य सरकार ने तबादला नीति जारी कर दी है। इसमें राज्य एवं जिला स्तर पर तबादले के लिए सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा नीति जारी की गई है. जिसका पालन सभी विभागों को करना होगा। प्रदेश में 6 लाख 6 हजार नियमित कर्मचारी हैं। नई तबादला नीति में 10% का तबादला होना तय माना जा रहा है। ऐसे में 30 मई तक 60 हजार से अधिक अधिकारी-कर्मचारियों के तबादले हो सकते हैं। तबादला नीति की 3 बड़ी बातें… विभाग अपने लिए अलग से तबादला नीति बना सकेंगे, लेकिन जीएडी के प्रावधानों का पालन करना जरूरी होगा। जीएडी की नीति से हटकर किए जाने वाले तबादलों में मुख्यमंत्री के समन्वय में आदेश प्राप्त करने होंगे। जिला संवर्ग के कर्मचारी का और राज्य संवर्ग के तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों का जिले के भीतर तबादला कलेक्टर के माध्यम से प्रभारी मंत्री के अनुमोदन के बाद किया जाएगा। पुलिस तबादला बोर्ड के फैसले पर जिलों में पोस्टिंग तबादला नीति में कहा गया है कि गृह विभाग के अंतर्गत उप पुलिस अधीक्षक से नीचे के पुलिस अधिकारियों, कर्मचारियों के तबादले गृह विभाग द्वारा गठित पुलिस स्थापना बोर्ड ‌के आधार पर होंगे। तबादला बोर्ड द्वारा जिले में पदस्थापना का निर्णय लिया जाएगा। पुलिस अधीक्षक ‌द्वारा प्रभारी मंत्री के परामर्श के बाद पदस्थापना की जाएगी। उप पुलिस अधीक्षक और उससे वरिष्ठ अधिकारियों के स्थानांतरण पुलिस स्थापना बोर्ड के दिशा-निर्देशों के अनुरूप विभागीय मंत्री के अनुमोदन बाद सीएम समन्वय में मुख्यमंत्री के अनुमोदन पर किए जाएंगे। कमजोर परफार्मेंस वालों को पहले हटाएंगे तबादला नीति में प्रावधान किया है कि प्रशासनिक आधार पर किए जाने वाले तबादलों में उन शासकीय सेवकों को पहले बदला जा सकेगा, जिन्होंने पिछले वित्तीय वर्ष के लिए निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त नहीं किया है। यानी उनका परफार्मेंस कमजोर रहा हो। यह अनिवार्य नहीं है कि 3 साल पूर्ण होने पर ही तबादला किया जाए। खुद के खर्च पर ऐसे होंगे ट्रांसफर जो कर्मचारी-अधिकारी खुद के खर्च पर ट्रांसफर करवाना चाहते हैं या परस्पर ट्रांसफर चाहते हैं, उनके आवेदन ऑनलाइन या कार्यालय प्रमुख ‌द्वारा सत्यापित आवेदन के रूप में पेश किए जाएंगे। स्वयं के व्यय पर रिक्त परस्पर किए गए स्थानांतरण तथा प्रशासनिक कारणों से किए गए स्थानांतरण संबंधी आदेश अलग-अलग जारी किए जाएंगे। स्वेच्छा से स्थानांतरण संबंधी आवेदन में उन शासकीय सेवकों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिन्होंने पिछले वित्तीय वर्ष के लिए निर्धारित लक्ष्यों को पूर्ण किया गया हो। तबादला नीति में ये प्रावधान भी खास हैं… जो अधिकारी या कर्मचारी एक साल या उससे कम समय में रिटायर हो रहे हैं, उनका ट्रांसफर नहीं किया जाएगा। पति-पत्नी एक साथ ट्रांसफर का आवेदन देते हैं तो उनका ट्रांसफर किया जा सकेगा। लेकिन नियुक्ति की जगह प्रशासनिक जरूरत के आधार पर तय होगी। ऐसे कर्मचारी जिन्हें गंभीर बीमारी जैसे कैंसर, किडनी खराब होने के कारण डायलिसिस या हार्ट सर्जरी की वजह से रेगुलर जांच कराना जरूरी है, उनका जहां ट्रांसफर होता है वहां ये सुविधा नहीं है तो मेडिकल बोर्ड की अनुशंसा पर उनकी चाही गई जगह पर ट्रांसफर हो सकेगा। जो कर्मचारी 40% या इससे अधिक दिव्यांग कैटेगरी में हैं, उनके ट्रांसफर नहीं होंगे। वे चाहें तो खुद से ट्रांसफर ले सकेंगे। सभी तरह के अटैचमेंट खत्म होंगे ट्रांसफर पॉलिसी में कहा है कि सभी प्रकार के अटैचमेंट खत्म किए जाना है। साथ ही तबादले से रिक्त होने वाले पद की भरपाई उसी पद या समकक्ष अधिकारी की पदस्थापना से की जाएगी। नियमित अधिकारी या कर्मचारी का तबादला कर उस पद का चार्ज जूनियर अधिकारी कर्मचारी को नहीं दिया जाएगा। जितने भी तबादले होंगे उसकी जानकारी विभाग प्रमुखों को जीएडी को देना अनिवार्य होगी। जिसका तबादला हो जाएगा, उस शासकीय सेवक का अवकाश नई पदस्थापना वाले कार्यालय में जॉइन करने के बाद ही स्वीकृत किया जाएगा। सभी तबादला आदेश ऑनलाइन अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सचिव, विभागाध्यक्ष के ई-ऑफिस माड्यूल से ही किए जाएंगे। 30 मई के बाद की गई एंट्री को शून्य माना जाएगा। ऐसे आदेशों का पालन नहीं होगा। कर्मचारी संगठन पदाधिकारियों को इस आधार पर मिलेगी छूट शासन से पत्राचार करने की मान्यता प्राप्त कर्मचारी संगठनों की प्रदेश, संभाग, जिला, तहसील, विकासखंड शाखा के पदाधिकारियों जैसे अध्यक्ष, सचिव, कोषाध्यक्ष को पद पर नियुक्ति के बाद स्थानांतरण से दो पदावधि के लिए यानी 4 साल तक के लिए छूट रहेगी। यह सुविधा उसके पूरे सेवाकाल में दो पदावधि के लिए मिलेगी। चार साल से अधिक समय होने पर प्रशासकीय आवश्यकता के आधार पर ऐसे पदाधिकारियों को भी स्थानांतरित किया जा सकेगा। संगठन के पदों में नियुक्ति की पूर्व सूचना के संबंध में सक्षम अधिकारी से संतुष्टि का आधार लिया जाएगा। काॅलेज से अतिशेष शिक्षकों को हटाएंगे तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास, उच्च शिक्षा विभाग के जिन संस्थाओं, विद्यालयों, महाविद्यालयों में विषयवार तय संख्या से अधिक शिक्षक काम कर रहे हैं, वहां से अतिशेष शिक्षकों को दूसरी जगह पदस्थ किया जाएगा। ऐसा करने से जूनियर टीचर को अतिशेष कर्मचारी होने की स्थिति में सबसे पहले स्थानांतरित किया जाएगा। मानवीय दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए 40 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांग शिक्षकों और जिनका रिटायरमेंट एक साल के कम है, उन्हें स्थानांतरित नहीं किया जाएगा। स्कूल शिक्षा में 6 से 16 मई तक लेंगे आवेदन उधर, स्कूल शिक्षा विभाग की तबादलों के लिए जारी गाइडलाइन में कहा है कि स्वैच्छिक तबादले के लिए ऑनलाइन आवेदन 6 मई से 16 मई तक किए जा सकेंगे। इस पर आदेश जनरेट करने का काम 20 मई तक होगा। ऐसे अतिशेष शिक्षक जिन्होंने स्वैच्छिक स्थानांतरण का … Read more

उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति मध्यप्रदेश जबलपुर के सौजन्य से मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय मुख्य पीठ जबलपुर के क्षेत्रांतर्गत आने वाली समस्त जेल में बृहद स्वास्थ्य शिविर का आयोजन

A massive health camp was organized in all the jails falling under the jurisdiction of the Madhya Pradesh High Court Chief Bench, Jabalpur, courtesy of the High Court Legal Services Committee, Madhya Pradesh, Jabalpur. जितेन्द्र श्रीवास्तवजबलपुर ! न्यायमूर्ति सुरेश कुमार कैत, मुख्य न्यायाधिपति, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय जबलपुर के मार्गदर्शन में एवं मान्नीय न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा प्रशासनिक न्यायाधीश मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय जबलपुर तथा मान्नीय न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय जबलपुर तथा न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल अध्यक्ष म.प्र.उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति की गरिमामयी उपस्थिति में आज दिनांक 03.05.2025 को केन्द्रीय जेल जबलपुर से मान्नीय उच्च न्यायालय मुख्यपीठ जबलपुर के क्षेत्राधिकार की समस्त जेलों में विशेष मेडिकल कैम्प का आयोजन किया गया। सर्वप्रथम न्यायमूर्तिगण का पुष्पगुच्छ से स्वागत किया गया तथा मान्नीयों का गार्ड ऑफ आनर के साथ स्वागत किया गया। मान्नीय न्यायमूर्तिगण द्वारा सुभाष कक्ष में नेताजी सुभाषचन्द्र बोस की शयिका पर पुष्पांजली अर्पित कर वार्ड का अवलोकन किया गया। जेल अधीक्षक अखिलेश तोमर द्वारा कार्यक्रम का परिचय दिया गया। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय मुख्यपीठ जबलपुर के क्षेत्रान्तर्गत केन्द्रीय जेल जबलपुर का भौतिक रूप से तथा अन्य जेलों में आयोजित स्वास्थ्य शिविरो का वीडियों कान्फ्रेसिंग के माध्यम से अवलोकन किया जाकर शिविर के संबंध में चर्चा की गई। साथ ही मान्नीय न्यायमूर्तिगण द्वारा बंदियों को सम्बोधित भी किया गया तथा शिक्षा एवं विधिक सहायता तथा प्रशिक्षण व पुनर्वास पर जोर दिया गया। कार्यक्रम में जेल बंदियों द्वारा मनमोहक गायन की भी प्रस्तुतियॉं दी गई।मान्नीय न्यायमूर्तिगण द्वारा जेल में बंदियों द्वारा निर्मित सामग्रियों का भी अवलोकन किया गया तदोपरांत जेल पाकशाला, बंदी योगा एवं जेल अस्पताल तथा जेल बंदी बैरिक तथा जेल वीडियों कॉन्फ्रेंसिंग का भी अवलोकन किया गया है।मुख्य न्यायमूर्ति द्वारा पेन्टिंग स्कैच बनाने वाले बंदी, जेल आर्केस्ट्रा के बंदियों तथा योगा टीम के बंदियों को उनके खाते में 1000/- रूपये प्रोत्साहन स्वरूप विधिक सहायता के माध्यम से प्रदान किये जाने के निर्देश दिये गये तथा जेल बंदी आर्केस्ट्रा टीम को जेल के बाहर भी कार्यक्रम करने की अनुमति संबंधी नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही के निर्देश भी दिये गये तथा जेल में बंदियों द्वारा निर्मित समोसे तथा अन्य व्यंजनों के विक्रय हेतु प्रोत्साहन के निर्देश दिये गये। कार्यक्रम के अंत में मान्नीय न्यायमूर्तिगण को जेल बंदियों द्वारा बनाई गई पेन्टिंग एवं चरखा भेंट की गई। इस अवसर पर न्यायिक पदाधिकारीगण में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश जबलपुर आलोक अवस्थी, सदस्य-सचिव मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर प्रदीप मित्तल, रजिस्ट्रार जनरल म.प्र.उच्च न्यायालय जबलपुर धरमिन्दर सिंह, रजिस्ट्रार/सचिव मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति जबलपुर श्रीमती अर्चना सिंह, रजिस्ट्रार न्यायिक वंदन मेहता, अतिरिक्त-सचिव अरविन्द कुमार श्रीवास्तव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर श्रीमती शक्ति वर्मा, एवं अन्य न्यायिक पदाधिकारीगण तथा सिविल सर्जन जबलपुर एवं जिला विधिक सहायता अधिकारी प्रदीप सिंह, दिग्विजय सिंह, श्रीमती शक्ति रावत विशेष स्वास्थ्य शिविर में उपस्थित रहें। अधिष्ठाता, नेताजी सुभाषचन्द्र बोस मेडिकल कॉलेज जबलपुर के आदेशानुसार जेल में पुरूष महिला बंदियों का विशेष स्वास्थ्य परीक्षण किये जाने हेतु कैम्प में जनरल मेडिसिन, जनरल सर्जरी, अस्थि रोग, स्किन एण्ड व्ही.डी., गायनिक, डेन्टल, न्यूरोलॉजी, मनोरोग, नेत्र, शिशु, कैसर, नेफ्रोलॉजी, ई.एन.टी. विभाग के 17 चिकित्सकों के द्वारा 410 पुरूष बंदी, 52 महिला बंदी तथा 06 बच्चों सहित कुल 468 का चैकप किया गया है।इस अवसर पर जेल में बंदियों के हितार्थ विधिक साक्षरता शिविर का भी आयोजन हुआ। विधिक सहायता शिविर में विशेष रूप से चीफ लीगल एड डिफेन्स काऊंसिल अशोक पटेल, डिप्टी चीफ राजेश तिवारी, वीरेन्द्र सिंह, अभिषेक तिवारी, असिस्टेन्ट गौरव पाठक, वेदांत पटेल तथा जेल पैरालीगल वॉलेंटियर्स द्वारा सहयोग किया गया तथा लगभग 75 बंदियों को उनके विधिक अधिकारों के संबंध में बतलाया गया तथा 06 बंदियों को विधिक सहायता के माध्यम से निःशुल्क अधिवक्ता दिलाये जाने की कार्यवाही की गई।इस अवसर पर जेल चिकित्सक डॉ. लक्ष्मण शाह, उप जेल अधीक्षक श्रीमती रूपाली शर्मा, गणेश सिंह, सहायक जेल अधीक्षक प्रशांत चौहान, कुलदीप सिंह, श्रीमती अंजू मिश्रा, जेल लेखापाल राहुल चौरसिया, प्रमुख मुख्य प्रहरी तीर्थेन्द्र सिंह बघेल, वरिष्ठ प्रहरी ओमप्रकाश दुबे, सुभाष चन्द्र यादव, पिनांकपाणि मिश्रा, विवेकानन्द शर्मा, आशीष हिडाउ एवं अन्य स्टाफ उपस्थित रहा। आभार प्रदर्शन जेल उप अधीक्षक मदन कमलेश द्वारा एवं मंच संचालन सहायक जेल अधीक्षक हिमांशु तिवारी द्वारा किया गया।

उपभोक्ता की जीत: सॉफ्ट ड्रिंक पर अतिरिक्त 1 रुपये जीएसटी वसूलने पर रेस्तरां को ₹6,000 भुगतान का आदेश

Consumers win: Restaurant ordered to pay ₹6,000 for charging extra Rs 1 GST on soft drinks भोपाल, संवाददाता। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में अधिवक्ता अर्चित दीक्षित द्वारा अनिरुद्ध वाधवानी Vs हॉन्ग कॉन्ग चाइनीज केस में जीत हासिल की है। जिला उपभोक्ता आयोग ने उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा में एक अहम निर्णय में रेस्तरां को आदेश दिया है कि वह सॉफ्ट ड्रिंक पर अतिरिक्त ₹1 जीएसटी वसूलने के चलते उपभोक्ता को ₹6,000 का भुगतान करे। मामले के अनुसार, शिकायतकर्ता ने भोपाल में एम. पी. नगर जोन-2 स्थित हॉन्ग कॉन्ग चाइनीज रेस्तरां में भोजन करते समय एक सॉफ्ट ड्रिंक का ऑर्डर दिया था। बिल में उत्पाद के अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) के ऊपर अतिरिक्त ₹1 जीएसटी के रूप में वसूला गया। आपत्ति दर्ज कराने के बावजूद, रेस्तरां प्रबंधन ने संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दिया, जिसके पश्चात द्वारा उपभोक्ता ने जिला उपभोक्ता फोरम में शिकायत दायर की। सुनवाई के दौरान फोरम ने स्पष्ट किया कि किसी भी उत्पाद के MRP में कर सम्मिलित होते हैं और उपभोक्ता से MRP से अधिक राशि वसूलना अनुचित व्यापार व्यवहार की श्रेणी में आता है। आयोग ने इसे उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन मानते हुए रेस्तरां को आदेशित किया कि वह शिकायतकर्ता को मानसिक कष्ट और उत्पीड़न के मद में ₹5,000 तथा ₹1,000 मुकदमेबाजी व्यय के रूप में अदा करे।

सरकार बेच रही गली गली शराब, अवैध दुकानों की भरमार :पंकज उपाध्याय

The government is selling liquor in every street, there are many illegal shops: Pankaj Upadhyay आज जौरा विधायक पंकज उपाध्याय ने सरकार एवं मुरैना प्रशासन पर बड़ा हमला करते हुए कहा कि जब से शासन ने नए ठेके दिए हैं तब से शराब की बिक्री लगभग चौगुनी हो गई है प्रत्येक गांव के हर नुक्कड़ चौराहे पर एक शराब का ठेला रख दिया गया है गली-गली में शराब बिक रही है जौरा क्षेत्र के कई स्वयंसेवी संस्थाओं स्कूल के बच्चों युवाओं एवं माता बहनों ने बार-बार आकर कहा है कि हमारी गली मोहल्ले में शराब की बिक्री बहुत ज्यादा  बढ़ गई है अवैध दुकानों की अंबार आ गया है ग्राम परसोटा में एक धार्मिक आयोजन में ग्राम वासियों ने पंकज उपाध्याय से शिकायत की की जैन तीर्थ टिकटोली दमदार के मुख्य मार्ग पर शराब ठेकेदारों ने शराब की दुकान खोल रखी है जिससे जैन श्रद्धालु आसपास के महिलाएं बच्चे बहुत परेशान होते हैं शराबी बीच रोड पर शराब पीते हैं शराब की दुकान के सामने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र आंगनबाड़ी पंचायत भवन जैसी संस्थाएं हैं तब भी शासन प्रशासन की नजर इस गोरख धंधे पर नहीं पड़ रही विधायक ने चेतावनी देते हुए प्रशासन से कहा कि अगर 8 दिन में अवैध शराब की दुकान एवं धार्मिक स्थलों बस स्टैंड और मुख्य मार्गो से शराब की दुकान नहीं हटाई गई तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा जिसकी समस्त जवाबदारी शासन प्रशासन की रहेगी

Bandhavgarh Tiger Reserve: रेस्क्यू टीम ने घायल बाघिन को किया पिंजरे में कैद, इनक्लोजर में होगा उपचार

उमरिया जिले के विश्वप्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व (BTR) के पतौर कोर परिक्षेत्र में पिछले एक महीने से दहशत फैलाने वाली एक बाघिन को अंततः पार्क प्रबंधन ने शुक्रवार सुबह सफलतापूर्वक पकड़ लिया। यह बाघिन कोठिया और कुशमहा गांवों में दो बार घुसपैठ कर एक वनकर्मी सहित तीन लोगों को घायल कर चुकी थी। ग्रामीणों में डर का माहौल बना हुआ था, जिसे देखते हुए पार्क प्रबंधन ने तत्काल रेस्क्यू अभियान चलाया। प्रबंधन द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, यह रेस्क्यू ऑपरेशन पतौर कोर परिक्षेत्र की बीट पनपथा, रेंज पतौर के RF 428 में चलाया गया। विभागीय हाथियों सूर्या, लक्ष्मण और गणेश की सहायता से विशेषज्ञ रेस्क्यू टीम ने बाघिन को पिंजरे में कैद किया। बाघिन की शारीरिक जांच में पाया गया कि उसके शरीर पर कई जगह चोट के निशान हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वह पिछले कुछ समय से शारीरिक रूप से अस्वस्थ थी। रेस्क्यू के बाद बाघिन को बहरहा स्थित इनक्लोजर में शिफ्ट किया गया है, जहां उसका नियमित स्वास्थ्य परीक्षण और उपचार किया जाएगा। साथ ही उसके स्वभाव और व्यवहार का गहन अध्ययन कर आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। पार्क प्रबंधन का कहना है कि बाघिन की गतिविधियों में यदि सुधार होता है, तो उसे पुनः जंगल में छोड़ा जा सकता है, अन्यथा उसकी सुरक्षा और देखभाल इनक्लोजर में ही की जाएगी। रेस्क्यू कार्य में क्षेत्र संचालक बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व, सहायक संचालक पनपथा, वन्यप्राणी स्वास्थ्य अधिकारी बांधवगढ़ एवं संजय टाइगर रिजर्व, रेंजर पतौर और पनपथा कोर, रेस्क्यू टीम तथा अन्य फील्ड स्टाफ की सक्रिय भूमिका रही। सभी ने मिलकर सतर्कता और संयम के साथ इस ऑपरेशन को सफल बनाया। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व देशभर में अपनी बाघों की सघन संख्या और जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध है। ऐसी घटनाएं जहां मानव और वन्यजीवों का आमना-सामना होता है, उनके समाधान के लिए सजग और वैज्ञानिक उपाय किए जा रहे हैं। बाघिन के सफल रेस्क्यू से न केवल गांवों में राहत की सांस ली गई है, बल्कि यह वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों की भी एक महत्वपूर्ण सफलता है।

एमएफपी पार्क में आदिवासी समितियों को दरकिनार कर व्यापारिक सिंडिकेट से हो रही खरीदी

Purchases are being made from commercial syndicates in MFP Park bypassing the tribal committees पूर्व विधायक उरेती ने की उच्च स्तरीय जांच की मांग भोपाल। मध्यप्रदेश में लघु वनोपज प्रसंस्करण केंद्र (एमएफपी पार्क) एक बार फिर विवादों में घिर गया है। आदिवासी हितों की अनदेखी और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के बीच भाजपा के पूर्व आदिवासी विधायक दुलीचंद उरेती ने राज्यपाल और मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर उच्च स्तरीय गैर विभागीय जांच की मांग की है। उरेती का आरोप है कि सहकारी संस्थान के नाम पर एमएफपी पार्क व्यापारिक सिंडिकेट को फायदा पहुंचा रहा है, जबकि आदिवासी समितियों और वनधन केंद्रों को खरीदी प्रक्रिया से बाहर रखा जा रहा है।पूर्व विधायक उरेती ने आरोप लगाया कि एमएफपी पार्क द्वारा रॉ मटेरियल की खरीदी में सहकारी समितियों के बजाय पसंदीदा निजी फर्मों से टेंडर के माध्यम से सामग्री खरीदी जा रही है। उन्होंने दावा किया कि यह पूरी प्रक्रिया भ्रष्टाचार से भरी हुई है। कई बार टेंडर की शर्तें ऐसी रखी जाती हैं कि केवल बड़ी व्यापारिक कंपनियां ही हिस्सा ले सकें। इस कारण से असली हितग्राही—आदिवासी संग्राहक और समितियां—प्रक्रिया से बाहर हो जाते हैं। गूग्गल खरीदी में घोटाले का आरोप उरेती ने हाल ही में गूग्गल खरीदी में हुई अनियमितताओं की ओर इशारा करते हुए कहा कि इसमें नियमों को ताक पर रखकर एमओयू के माध्यम से एक निजी व्यापारी से ऊंचे दामों पर खरीदी की गई, जिससे संस्था को लाखों का नुकसान हुआ। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जांच में एक एसडीओ को बचा लिया गया जबकि एसीएफ की रिपोर्ट में कई वरिष्ठ अधिकारी दोषी पाए गए। आठ वर्षों में 100 करोड़ से अधिक की खरीदी शिकायती पत्र में बताया गया कि बीते आठ वर्षों में एमएफपी पार्क ने करीब 100 करोड़ रुपये की लघु वनोपज खरीदी की है। यह खरीदी बिना संचालक मंडल की स्वीकृति या वनोपज संघ से अनुमति लिए बिना की गई। परफॉर्मेंस गारंटी जैसी शर्तों का उल्लंघन कर फर्मों को लाभ पहुंचाया गया।टेंडर प्रक्रिया आदिवासियों के खिलाफ उरेती ने कहा कि निविदा शर्तों में ऐसा प्रावधान कर दिया गया है कि जिन फर्मों का टर्नओवर एक करोड़ रुपये हो और जिनके पास मान्यता प्राप्त लैब रिपोर्ट हो, वही हिस्सा ले सकती हैं। इससे आदिवासी समितियां और छोटे व्यापारी पूरी तरह से बाहर हो जाते हैं। यहां तक कि प्रदेश में उपलब्ध वनोपज जैसे आंवला, हर्र, बहेड़ा, शहद, महुआ आदि को भी निजी फर्मों से ऊंचे दामों पर खरीदा जा रहा है। गैर विभागीय जांच समिति की मांग पूर्व विधायक उरेती ने मांग की है कि वनोपज खरीदी के लिए जारी मौजूदा टेंडर को तत्काल निरस्त किया जाए और एक निष्पक्ष, गैर विभागीय उच्च स्तरीय जांच समिति गठित की जाए। साथ ही विगत दस वर्षों के एमओयू, खरीदी गई सामग्री, संबंधित फर्मों और भुगतान की गहन जांच की जाए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आदिवासी संग्राहकों, वन समितियों और वनधन केंद्रों के माध्यम से खरीदी सुनिश्चित की जाए।एमएफपी पार्क में हो रही अनियमितताएं एक बार फिर इस सवाल को जन्म देती हैं कि आदिवासी कल्याण के नाम पर चलाई जा रही योजनाओं का असली लाभ किसे मिल रहा है। यदि आरोप सही हैं, तो यह आदिवासियों के अधिकारों और संसाधनों की खुली लूट है, जिसकी निष्पक्ष जांच अत्यंत आवश्यक है।

पेंच नेशनल पार्क में सनसनीखेज घटना: बाघिन पीएन-42 की रहस्यमयी तरीके से मौत, पंजे और दांत गायब

Sensational incident in Pench National Park: Tigress PN-42 died mysteriously, claws and teeth missing पेंच नेशनल पार्क के रुखड़ बफर क्षेत्र में शनिवार को एक चौंकाने वाली घटना सामने आई, जिसने वन विभाग को हिला कर रख दिया। रुखड़ बीट के मासूरनाला इलाके में गश्त कर रहे दल को तेज दुर्गंध ने सतर्क किया। जांच करने पर नाले की रेत में आंशिक रूप से दबा हुआ एक बाघिन का शव बरामद हुआ। टाइगर रिजर्व के फोटो डेटाबेस से उसकी पहचान बाघिन पीएन-42 के रूप में हुई, जो 2016 में पहली बार कैमरा ट्रैप में कैद हुई थी। उस समय उसकी उम्र करीब 2-3 वर्ष थी और अब वह लगभग 12 साल की हो चुकी थी। प्राकृतिक मौत या कोई साजिश? वरिष्ठ वन्यजीव चिकित्सक डॉ. अखिलेश मिश्रा के नेतृत्व में एनटीसीए प्रोटोकॉल के तहत शव का पोस्टमार्टम किया गया। प्रारंभिक जांच में बाघिन के शरीर पर न तो जहर, करंट और न ही गोली लगने के कोई निशान मिले। इससे उसकी प्राकृतिक मौत का अनुमान लगाया जा रहा है। हालांकि, मामला यहीं खत्म नहीं होता। पोस्टमार्टम के दौरान चौंकाने वाला खुलासा हुआ। बाघिन के चारों पंजे कुल्हाड़ी या किसी धारदार हथियार से काटे गए थे और तीन कैनाइन दांत भी गायब थे। इस हरकत से वन्यजीव अपराध की आशंका गहरा गई है। 10 हजार रुपये का इनामपेंच टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक देवप्रसाद ने इस अपराध के पीछे जिम्मेदार लोगों को पकड़वाने में मददगार सूचना देने पर 10 हजार रुपये के इनाम की घोषणा की है। वन विभाग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच तेज कर दी है और हर पहलू से पड़ताल जारी है। सवालों के घेरे में सुरक्षा व्यवस्थायह घटना न केवल पेंच नेशनल पार्क की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि वन्यजीव संरक्षण के लिए भी गंभीर चेतावनी है। आखिर कौन हैं वे लोग, जिन्होंने मृत बाघिन के साथ ऐसी क्रूरता की? क्या यह किसी तस्करी गिरोह की करतूत है? इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे। पेंच टाइगर रिजर्व, जो बाघों के संरक्षण के लिए विश्व प्रसिद्ध है, अब इस सनसनीखेज मामले के चलते सुर्खियों में है। वन्यजीव प्रेमी और स्थानीय लोग दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। हमारी नजर इस जांच पर बनी हुई है।

BHEL में भीषण आग, एक के बाद एक हो रहे धमाके, कई किलोमीटर दूर दिख से रहा धुआं

Huge fire in BHEL, explosions happening one after another, smoke visible several kilometers away Huge Fire in BHEL : मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से बड़ी खबर सामने आई है। शहर के पिपलानी थाना क्षेत्र में स्थित हिंदुस्तान के 9 रत्नों में से एक भारत हेवी इलेक्ट्रिकल लिमिटेड ( BHEL ) में गुरुवार की दोपहर भीषण आग लग गई। बताया गया कि आग भेल के 9 नंबर गेट के पास कॉमर्शियल ग्रीन बेल्ट एरिया में लगी थी, जिसपर अब और अपडेट सामने आया है।जानकारी के अनुसार, संबंधित क्षेत्र में स्थापित ऑयल की टंकियों में ब्लास्ट हुआ है। आग इतनी भयावह है कि कई किलोमीटर दूर से उसका काला धुआं देखा जा सकता है। आग बुझाने के लिए दमकल की 8 फायर गाडियां और 4 टैंकर मौके पर भेजे जा चुके हैं। अबतक की गई कार्रवाई के अनुसार, तेज गर्मी के चलते आग तेजी से फैली है। आग लगने से बीएचईएल के साथ-साथ आसपास के इलाकों में अफरा-तफरी मच गई है। घटना के बाद एक तरफ तो बीएचईएल का अपना अग्निशमन यंत्र सक्रीय कर आग बुझाने का प्रयास किया गया, लेकिन आग तेजी से फैलने के कारण दमकल विभाग को सूचना दी गई। जानकारी लगते ही दमकल की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचकर आग बुझाने में जुट गई हैं। फिलहाल, खबर लिखे जाने के दौरान आग पर काबू पाने का प्रयास जारी है। इधर, भेल परिसर में स्थित जिस कारखाने के नजदीक आग लगी है, विशेष रूप से उसके अधिकारी-कर्मचारियों को परिसर से बाहर सुरक्षित स्थान पर कर दिया गया है, ताकि किसी अप्रीय घटना से बचा जा सके।चुनौती साबित हो रहा आग पर काबू पाना प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो आग लगने के कुछ देर में ही धुए का बड़ा गुबार आसमान पर छा गया, जिसने विशेष रूप से स्थानीय लोगों को दहशत में डाल दिया। लोगों में असमंजस की स्थिति बन गई। बेल परिसर के बाहर सड़क पर स्थित कुछ लोग तो एहतियाद के तौर पर अपनी दुकानें भी बंद कर चुके हैं, ताकि समय रहते किसी अनहोनी से बच सकें। फिलहाल, आग पर काबू पाने की कोशिश जारी है। दमकल दल की मानें तो गर्म हवाओं के कारण आग पर काबू पाना काफी चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। प्रशासन ने दिए जांच के आदेशफिलहाल, आग लगने के कारणों का अबतक कोई पता नहीं चल सका है। हालांकि, प्रारंभिक तौर पर शॉर्ट सर्किट से आगजनी की आशंका जताई जा रही है। प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं, साथ लोगों से घटनास्थल के आसपास तक न जाने की अपील की है।

लाइफ कॅरियर सीनियर सेकेंडरी सी.बी.एस.ई. स्कूल में मेडिकल (नीट )एवं इंजीनियरिंग (आई.आई.टी,जे.ई.ई) परीक्षा की तैयारी के लिए सेमिनार का आयोजन किया गया।

Life Career Senior Secondary CBSE School organized a seminar for preparation of Medical (NEET) and Engineering (IIT, JEE) exams. हरिप्रसाद गोहेआमला । लाइफ कॅरियर सीनियर सेकेंडरी सी.बी.एस.ई. स्कूल एवं यूनिवर्सल इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल के संयुक्त तत्वाधान में सेमिनार बड़े ही हर्षोल्लास से आयोजित किया गया इस सेमिनार के मुख्य अतिथि जीन थॉमस जॉन, विशिष्ट अतिथि मनीष विश्वकर्मा ,निलेश पाटणकर , संकेत बंजारे , संचालक शाहिद बेग ,यूनिवर्सल इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल की प्राचार्या श्रीमती रश्मि सोनी एवं शिक्षक शिक्षिकाएँ उपस्थित थे। मुख्य अतिथि जीन थॉमस जॉन ने बताया कि नीट, इंजीनियरिंग की कोचिंग क्लासेस अब आमला में भी संचालित की जाएगी। मेडिकल (नीट) एवं इंजीनियरिंग (आई.आई.टी .,जे. ई.ई. )के लिए राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होने वाली प्रवेश परीक्षाओं के लिए बड़े शहरों में भटकना नहीं पड़ेगा गौरतलब है कि उक्त परीक्षाओं की तैयारी के लिए विद्यार्थियों को कोटा भोपाल इंदौर नागपुर आदि शहरों मैं जाना पड़ता था इसमें अत्यधिक आर्थिक वय भी होता है इस अवसर पर भारत वर्ष में संचालित आकाश कोचिंग इंस्टीट्यूट के करियर काउंसलर एवं मोटीवेटर जीन थॉमस जॉन ने विद्यार्थियों को संबोधित कर सफलता के सूत्र बताए एवं पालको से वार्तालाप कर विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण में पालकों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला ।ज्ञात हो कि आकाश कोचिंग इंस्टीट्यूट द्वारा अब आमला में भी कक्षा 8वीं से लेकर कक्षा 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए ऑनलाइन एवं ऑफ लाइन मेडिकल तथा इंजीनियरिंग के लिए होने वाली प्रवेश परीक्षा की कोचिंग दी जाएगी ।जिसमें आमला तहसील के सभी स्कूलों के विद्यार्थी प्रवेश ले सकते हैं।कार्यक्रम का कुशल संचालन श्रीमती सोनिका जोशी ने किया तथा स्कूल के संचालक शाहिद बेग ने सभी उपस्थित अतिथियों एवं शिक्षक शिक्षिकाओं का आभार व्यक्त किया।

रेल यात्रियों की प्यास बुझाने, आमला स्टेशन पर शीतल पेयजल सेवा का हुआ भव्य शुभारंभ ।

To quench the thirst of railway passengers, cold drinking water service was inaugurated at Amla station हरिप्रसाद गोहेआमला । “भीषण गर्मी के इस मौसम में प्यासे” कंठो को तर करने आसानी से शीतल पेय जल अगर उपलब्ध करा दिया जाए तो इससे बड़ा पुनीत कार्य जीवन में और कोई नहीं है ।ऐसे ही पुनीत कार्य का बीड़ा रेल प्रशासन के मार्गदर्शन में नगर के विभिन्न सेवाभावी संगठनों ने उठाकर आमला रेलवे स्टेशन पर रेल यात्रियों के लिए भीषण गर्मी में पेयजल सेवा प्रारंभ की जो सराहनीय पहल है । मिली जानकारी अनुसार भीषण गर्मी के मद्देनजर,रेल यात्रियों को शीतल पेयजल मिल सके इस हेतु वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक अमन मित्तल मध्य रेल आमला के प्रेरणादायक मार्गदर्शन में आज आमला रेलवे स्टेशन पर ‘स्वच्छ शीतल पेयजल सेवा’ का शुभारंभ किया गया। इस पुनीत कार्य में गायत्री परिवार आमला, प्रगतिशील व्यापारी संघ आमला, लायंस क्लब आमला सार्थक ,रिटायर्ड रेलवे पेंशनर एसोशिएशन आमला एवं अन्य सामाजिक संगठनों के सेवाभावी कार्यकर्ता शामिल हुए, यह पहल सामान्य श्रेणी के यात्रियों को शुद्ध एवं ठंडा जल सुलभ कराने की दिशा में एक सराहनीय कदम है। उल्लेखनीय है कि सुनील पंत कमर्शियल इंस्पेक्टर रेलवे के कुशल संयोजन में इस पुनीत कार्य की शुरुवात हुई।भीषण गर्मी को देखते हुए ये संगठन बारी बारी से ट्रेनों में सामान्य श्रेणी सहित जरूरतमंद को शीतल जल उपलब्ध करवाएगा। प्रतिवर्ष इस प्रकार के सेवा कार्यों के माध्यम से लोगों को शीतल जल उपलब्ध करवाया जाता है। सेवाभावी कार्यकर्ता यात्रियों को शीतल जल उपलब्ध करवाते है।इस पुनीत कार्य में महिला मंडल भी सेवा कार्य में सहयोग देने के लिए इच्छुक है।इस पुनीत कार्य के शुभारंभ के अवसर पर एस के गुप्ता स्टेशन प्रबंधक रेलवे आमला,शिवराम सिंह सब इंस्पेक्टर आर पी एफ रेलवे आमला तथा सुनील पंत कमर्शियल इंस्पेक्टर, नितिन सोनेला वर्मा सहायक कमर्शियल इंस्पेक्टर उपस्थि थे सेवाभावी संगठनों के ठाकुरदास पवार ट्रस्टी गायत्री परिवार आमला नीलेश मालवीय,अनिल पटेल सोनी अध्यक्ष प्रगतिशील व्यापारी संघ आमला,हेमंत गुगनानी सचिव व्यापारी संघ आमला,प्रकाश डाफ़ने अध्यक्ष रेलवे पेंशनर एसोशिएशन आमला, मनोज विश्वकर्मा सचिव लायंस क्लब आमला सार्थक अखिल विश्‍व गायत्री परिवार से कैलाश वर्मा अरूण बर्डे, राजेश मालवी, रामदास रघुवंशी, जी आर खादीपुरे सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे।

29 करोड़ के वाहन खरीदी में गड़बड़झाला होने की चर्चा, बिना वाहन प्राप्त किए ही कर दिया पूरा भुगतान

There is talk of irregularities in the purchase of vehicles worth Rs 29 crores, full payment was made without receiving the vehicles भोपाल । 29 करोड़ के वाहनों की खरीदी में नियम-प्रक्रिया और पारदर्शिता का पालन नहीं होने पर गड़बड़झाला की आशंका को बल मिल रहा है। वह भी तब जब वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव गिनती बिरादरी में ईमानदार अफसर की है। अब वाहनों की खरीदी पर शिकवे-शिकायतों का दौर शुरू हो गया है और मांग की जा रही है कि एक उच्च स्तरीय कमेटी गठित कर जांच कराई जाए। भंडार क्रय नियम की अनदेखी कर वाहन प्राप्त किए बिना ही पूरा भुगतान कर दिया।वन विभाग ने 29 करोड़ में गाडियों की खरीदी की गई। जिसमें लगभग 108 बुलोरों नियों, 27 बुलेरों, 65 स्कार्पियों, 4 सियाज, 10 ट्रक की खरीदी की गई। खरीदी की नियत पर शंका इसलिए पैदा हो रही है, क्योंकि खरीदी Gem से हुई है, परन्तु बिना निविदा बुलाए। यदि नियत ठीक थी तो निविदा क्यों नहीं आमंत्रित किया गया। बिना संचालक के आए बैठक संपन्न कर ली गई। इसके पहले लघु वनोपज संघ में एमडी रहे सेवानिवृत वन बल प्रमुख जव्वाद हसन और पुष्कर सिंह के कार्यकाल में क्रमशः 145 करोड़ और 200 करोड़ की कीमत के जूते-चप्पल, छाते और पानी बोतल की खरीदी हुई पर भंडार क्रय नियमों और गुणवत्ता का पूरा ध्यान रखा गया। यही वजह रही कि खरीदी पर कभी सवाल नहीं उठे। जबकि पूर्व विभाग प्रमुख स्वर्गीय आरडी शर्मा के कार्यकाल में वायरलेस की खरीदी हुई जिस पर खूब बवाल मचा। विधानसभा में प्रश्नों की झड़ी लग गई। वैसे तो स्वर्गीय शर्मा की ईमानदारी पर शक नहीं किया जा रहा था किंतु उनके स्टेनों की कलाकारी से विवाद शुरू हुआ। यहां भी कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। न तो एक्सपर्ट कमेटी की राय ली गई और न ही शाखा प्रमुखों से उनकी रिटायरमेंट पूछी गई। शाखा प्रमुखों के लिए खरीदी गए वहां में जो एसेसरी चाहिए थी वह भी नहीं उपलब्ध कराए गए। मोटर साइकिल, कार जिप्सी के बदले में luxury वाहन खरीदेवन विभाग के विजिलेंस शाखा में आईटीआई कार्यकर्ता पुनीत टंडन ने शिकायत दर्ज कराई है कि वाहनों की खरीदी में गड़बड़ी की गई है। अपनी शिकायत में ठंडन ने कहा है कि अपलिखित वाहनों के बदले क्रय की स्वीकृति मिली हैं। इसमें 50 वाहनों 15 वर्ष पुराने हैं तथा 60 अपलिखित होकर नीलाम हुऐ हैं, तो स्वीकृति 110 वाहन की मिलनी थी। यह भी ज्ञात हुआ है कि चालू गाडियों को नीलाम बताकर अधिक गाडियों की खरीदी की है। शिकायत के प्रमुख बिन्दू

एमपी में 1 मई से होंगे कर्मचारियों के तबादले: अगले हफ्ते आएगी ट्रांसफर नीति

Employees will be transferred in MP from May 1: Transfer policy will come next week भोपाल । मध्यप्रदेश में करीब ढाई साल बाद 1 से 31 मई तक कर्मचारियों के तबादले होंगे। मंगलवार को डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने कैबिनेट बैठक की ब्रीफिंग के दौरान यह जानकारी दी। बैठक शुरू होने से पहले एक न्यूज एजेंसी से चर्चा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी तबादलों से रोक हटाने के संकेत दिए थे। सीएम ने कहा, हमारी कोशिश रहेगी कि तबादला नीति अगली कैबिनेट बैठक तक आ जाए। से चर्चा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी तबादलों से रोक हटाने के संकेत दिए थे। सीएम ने कहा, हमारी कोशिश रहेगी कि तबादला नीति अगली कैबिनेट बैठक तक आ जाए। बता दें, मध्यप्रदेश के कर्मचारी लंबे समय से तबादलों का इंतजार कर रहे हैं। पिछले साल के अंत में कुछ विशेष मामलों में तबादलों की छूट दी गई थी, लेकिन इससे कई कर्मचारी वंचित रह गए थे। सीएम चाहते थे शैक्षणिक सत्र के बाद हों तबादलेएक वरिष्ठ मंत्री ने बताया कि पिछले साल मुख्यमंत्री की यह मंशा थी कि शैक्षणिक सत्र के बीच में तबादले न हों। इसकी दो वजह भी बताईं… सत्र के बीच किसी शिक्षक का तबादला होता है, तो उस स्कूल के छात्रों का कोर्स प्रभावित होता है। शिक्षक को भी नई संस्था में जाने के बाद रुटीन में आने में समय लगता है। दूसरे विभागों के कर्मचारियों के बीच में तबादले होते हैं, तो उनके बच्चों को स्कूल शिफ्ट करने में परेशानी होती है। कर्मचारी और परिवार सत्र खत्म होने तक दूर-दूर रहते हैं। आखिरी बार अक्टूबर 2022 में हुए थे तबादलेबता दें, एमपी में 2022 के बाद अब तबादले हाेंगे। तब जून 2021 की तबादला नीति के आधार पर तबादले हुए थे। प्रदेश में 7.50 लाख कर्मचारी हैं। इनमें से डेढ़ से दो लाख कर्मचारी तबादलों से प्रभावित होते हैं। जनवरी 2025 में सरकार ने गंभीर बीमारी या कारण वाले मामलों में तबादले में छूट दी थी। ये तबादले प्रभारी मंत्री की सहमति से किए गए थे।

लगातार दुसरी बार चैंपियन बनी सन्नी इलेवन,फाइनल मुकाबले में नितेश फैंस क्लब बोरी को हरा,जीता खिताब ।

Sunny Eleven became champion for the second consecutive time, defeated Nitesh Fans Club Bori in the final match and won the title. आमला, हरिप्रसाद गोहे ! नगर के हवाई पट्टी क्षेत्र स्थित रेलवे खेल मैदान पर बीते एक सप्ताह से आयोजित रात्रि कालीन टैनिस बाल क्रिकेट प्रतियोगिता का शनिवार देर रात समापन हो गया । प्रतियोगिता के फाइनल मुकाबले में खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करने पूर्व कैबिनेट मंत्री सुखदेव पांसे आमला पहुंचे थे। उन्होंने अपने संक्षिप्त उद्बोधन में प्रतियोगिता के सफल आयोजन पर समिति एवं खिलाड़ियों का धन्यवाग ज्ञापित कर उन्हें बधाई प्रेषित की । प्रतियोगिता के आयोजक नितिन गाडरे, सतीश मीणा ने बताया प्रतियोगिता का फाइनल एवं सेमी फाइनल मुकाबला सनिवार शाम खेला गया। पहले सेमी फाइनल में सन्नीइलेवन ने साईं आराधना को हराकर फाइनल में जगह बनाई वहीं दूसरे सेमी फाइनल में महाकाल बोरी ने नितिन गाडरे फैंस क्लब को 5 रनों से हराकर फाइनल में जगह बनाईं गोरतलब हो की फाइनल मुकाबले में महाकाल बोरी ने पहले बैटिंग करते हुए 7 विकेट खोकर 8 ओवर में 79 रन बनाए लक्ष्य का पीछा करने उतरी सन्नी 11 ने 8 ओवर में 4 विकेट खोकर यह मैच जीत लिया रोमांचकारी फाइनल मुकाबले में सोहिल पटेल ओपन बल्लेबाजी करने उतरे उन्होंने 20 गेंदों में 38 रन बनाए और 6 मार कर नाबाद रहे ओर अपनी टीम को जीत दिलाई जिन्हे प्लेयर ऑफ द मैच से नवाजा गया । आपको बतादे सन्नी इलेवन की टीम ने आनर सन्नी भूभारकर, टीम के कप्तान शिवम् बचले के मार्गदर्शन में स्थानीय रेलवे खेल मैदान पर लगातार दूसरी बार खिताब जीतकर आमला का नाम रोशन किया है। वहीं सन्नी इलेवन के धाकड़ बल्लेबाज सोहेल पटेल, शिवम बचले, और आयरन चिमटे ने मौजूदा दर्शको का भरपूर मनोरंजन किया जिन्हे आयोजन समिति द्वारा आकर्षक पुरस्कार दे सम्मान्नित किय । इस अवसर पर अयोजन समिति द्वारा प्रतियोगिता की फाइनल विजेता रही सनी इलेवन टीम को मुख्य अतिथि नगर पालिका अध्यक्ष आमला नितिन गाडरे के हस्ते 51000 हजार रूपए नगद राशि वहीं उप विजेता नितेश यादव फैंस क्लब बोरी को 25000 हजार रूपए राशि एवं ट्राफी देकर सम्मानित किया गया । सन्नी इलेवन के आनर सन्नी भम्बरकर ने कैप्टन शिवम् बचले,आर्यन चिमटे,सोहेल खान ,विनय घोघरे ,अल्ताफ खान, कुणाल पाल,रोहित , नारू, ओम,अंकित मानकर,अंकित झारबड़े, बंटी,अविनाश झरबडे ,हुसैन, टिंकू, अंकित,रघु मासाब, चिंटू , विकाश को जीत के लिए बधाई प्रेषित की ।

बोर्ड ऑफिस चौराहा पर खड़ी मोटरसाइकिल में अचानक लगी आग, जलकर हुई खाक – पुलिस और दमकल नहीं पहुंचे समय पर

A motorcycle parked at Board Office crossing suddenly caught fire and was burnt to ashes – police and fire brigade did not reach on time भोपाल। शहर के व्यस्ततम बोर्ड ऑफिस चौराहा पर सोमवार दोपहर उस समय अफरा-तफरी मच गई जब सड़क किनारे खड़ी एक मोटरसाइकिल में अचानक आग लग गई। देखते ही देखते बाइक आग की लपटों में घिर गई और पूरी तरह जलकर खाक हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, मोटरसाइकिल में अचानक धुआं निकलने लगा और फिर आग भड़क गई। राहगीरों ने तुरंत पुलिस और दमकल विभाग को सूचना दी, लेकिन अफसोसजनक बात यह रही कि दोनों ही समय पर मौके पर नहीं पहुंच सके। जब तक दमकल या पुलिस पहुंचती, तब तक बाइक पूरी तरह जल चुकी थी। घटना के दौरान मौके पर मौजूद लोगों ने काफी प्रयास किए लेकिन आग इतनी तेज थी कि कोई कुछ नहीं कर सका। सौभाग्य से इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन स्थानीय लोगों में प्रशासन की लापरवाही को लेकर नाराजगी देखी गई। आग लगने के कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है। आशंका जताई जा रही है कि घटना तकनीकी खराबी या शॉर्ट सर्किट के कारण हुई हो सकती है।

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