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15 लोगों ने मिलकर एक को चाकूओं से किया छलनी, युवक की मौत से मातम

15 people together stabbed a man with knives, mourning over the death of the young man जबलपुर ! मध्य प्रदेश के जबलपुर में दिनेश झारिया नाम के एक शख्स की चाकू मारकर हत्या कर दी गई। घटना गढ़ा थाना क्षेत्र की है। बताया जा रहा है कि दिनेश का कुछ लोगों से झगड़ा हुआ था, जिसके बाद 10-15 लोगों ने मिलकर उस पर हमला कर दिया। हमला इतना इतना भयानक था कि इससे दिनेश की मौत हो गई। उसके पेट में कई गहरे घाव मिले हैं। मृतक छुई खदान क्षेत्र का रहने वाला बताया जा रहा है। दिनेश का कुछ लोगों से मामूली विवाद हो गया था। विवाद इतना बढ़ गया कि 10 से 15 लोगों ने मिलकर दिनेश पर चाकू से हमला कर दिया। घटनास्थल पर पहुंची प्रशासन की टीमघटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और आला अधिकारी मौके पर पहुंच गए। गंभीर रूप से घायल दिनेश को तुरंत जिला अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। 15 से ज्यादा लोगों ने किया हमलाइस घटना को अंजाम देने के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, 15 से ज्यादा लोग थे जिन्होंने दिनेश पर हमला किया था। हत्या के कारणों का खुलासा नहीं हुआसीएसपी डीपीएस चौहान ने बताया कि दिनेश झारिया नाम के युवक की चाकुओं से गोदकर हत्या कर दी गई है। फिलहाल हत्या किस वजह से हुई है, इसकी जानकारी नहीं लग पाई है। बताया जा रहा है कि मामूली विवाद में हत्या की गई है। इन आरोपियों के खिलाफ मामला हुआ दर्जउन्होंने आगे बताया कि हत्या का आरोप निहाल केवट, राजू सेन, भुज्जी सेन पर है। पुलिस की कई टीमें आरोपियों को पकड़ने के लिए लगी हुई हैं। जल्द ही हम आरोपियों को गिरफ्तार कर लेंगे। इस घटना से इलाके में दहशत का माहौल है। लोगों का कहना है कि अगर दिनेश को सही समय पर अस्पताल ले जाया जाता तो शायद उसकी जान बच सकती थी।

सीएम मोहन यादव: कांग्रेस के लोग झूठ बोलकर सरकार बनाते हैं

CM Mohan Yadav: Congress people form government by telling lies मोहन यादव ने कहा कि कांग्रेस के सभी नेताओं को माफी मांगना चाहिए, आमजनता से जिनसे झूठ बोलकर उन्होंने हिमाचल की सरकार बनवाई, कर्नाटक की सरकार बनवाई। झूठ के पहाड़ से आज नहीं तो कल उनका सामना होता ही है, जनता परेशान होती है। मैं उम्मीद करूंगा कि जिस प्रकार के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार काम कर रही है, उससे इस बदलते दौर में महाराष्ट और झारखंड दोनों ही राज्यों में भी भाजपा की सरकारें बनेंगी। तोमर बोले- वन नेशन वन इलेक्शन आदर्श स्थिति मीडिया से चर्चा में विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि वन नेशन वन इलेक्शन इससे ज्यादा आदर्श स्थिति लोकतंत्र के लिए और कोई नहीं हो सकती है। नरेंद्र मोदी देश के ऐसे नेता हैं, जिन्होंने तमाम सारे अवरोधों के बाद भी हिंदुस्तान, श्रेष्ठ हिंदुस्तान बने इसके लिए प्रयासरत हैं। जहां तक प्रतिपक्ष का सवाल है, प्रतिपक्ष पूरी तरह दिवालिया हो चुका है, बिना आधार के इस प्रकार की बातें करके सिर्फ विरोध करता है। गोरस आए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मीडिया से संक्षिप्त चर्चा में कांग्रेस पर निशाना साधा और कहा कि कांग्रेस के लोग झूठ बोलकर सरकार बनाते हैं, मल्लिकार्जुन खरगे ने खुद ने स्वीकार किया है। ऐसे झूठ बोल-बोल के सरकार बनाना उनके लिए भी शर्म की बात है। ये वही बात थी, जो चुनाव के पहले भाजपा कहती रही है कि चुनाव के पहले कांग्रेस जितने गलत काम कर सकती है वह सब करती है।

सीधी जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की लापरवाही: एंबुलेंस के अभाव में नवजात की मौत

Negligence of health services in Sidhi district: Newborn dies due to lack of ambulance सीधी ! जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था लगातार संकट में है, विशेष रूप से एंबुलेंस सेवाओं के संदर्भ में। हाल के एक मामले में, एक महिला उर्मिला रजक को प्रसव पीड़ा के दौरान एंबुलेंस की आवश्यकता थी, लेकिन जब परिजनों ने मदद के लिए कॉल किया, तो एंबुलेंस समय पर नहीं पहुंची। इस स्थिति में, उर्मिला के पति ने उसे अपने रिक्शे पर अस्पताल ले जाने का निर्णय लिया। हालांकि, रास्ते में ही उर्मिला ने ठेले पर बच्चे को जन्म दिया, लेकिन दुखद रूप से नवजात की 10 मिनट बाद ही मौत हो गई। इस घटना के बाद, सिविल सर्जन दीपा रानी इसरानी ने पुष्टि की कि महिला अपने मृत नवजात शिशु के साथ अस्पताल आई थी। परिजनों का आरोप है कि एंबुलेंस न मिलने के कारण नवजात की जान गई। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए, जांच शुरू कर दी गई है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि नवजात की मृत्यु किन परिस्थितियों में हुई और क्या एंबुलेंस सेवा में कोई कमी थी। स्वास्थ्य विभाग के लिए यह एक चेतावनी है कि एंबुलेंस सेवाओं की विश्वसनीयता सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं से बचा जा सके। अस्पताल प्रबंधन इस मामले की जांच कर रहा है, और इसके परिणामों का सभी को इंतजार है।

गोवर्धन पूजन पर केंद्रीय जेल जबलपुर की गोकुलधाम गौशाला में पूजन का आयोजन

On the occasion of Govardhan Puja, Puja was organized in Gokuldham Gaushala of Central Jail Jabalpur जितेन्द्र श्रीवास्तव (विशेष संवाददाता)जबलपुर ! आज केंद्रीय जेल जबलपुर स्थित गोकुलधाम गौशाला में गोवर्धन पूजन का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर जेल अधीक्षक श्री अखिलेश तोमर एवं अन्य अधिकारियों ने गौशाला में विधिवत पूजन किया। गोकुलधाम गौशाला में वर्तमान में लगभग 155 गायें हैं, जिनमें से करीब 40 गायें दूध देने वाली हैं। इनसे लगभग 70 लीटर दूध प्रतिदिन प्राप्त होता है, जिसका उपयोग विशेष रूप से जेल में बीमार, वृद्ध बंदियों और महिला बंदियों के बच्चों की देखभाल के लिए किया जाता है। इस आयोजन में उपस्थित जेल अधिकारियों ने गौसेवा और पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर बल दिया और बताया कि गोकुलधाम गौशाला का उद्देश्य बंदियों को गौसेवा और प्राकृतिक जीवन के करीब लाना है। गोवर्धन पूजा के इस अवसर पर, सभी ने गौमाता की सेवा एवं उनके संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जाहिर की। गौशाला में गोवंश की देखभाल और उनके लिए स्वास्थ्य सेवाओं का नियमित प्रबंधन किया जा रहा है, जिससे उनके स्वास्थ्य एवं उत्पादकता में वृद्धि होती है। इस विशेष आयोजन से जेल प्रशासन द्वारा गौसेवा और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता का संदेश देने का प्रयास किया गया, जिससे जेल में बंदियों को नैतिक और सामाजिक दृष्टिकोण से प्रेरणा मिल सके।

डिंडोरी अस्पताल में अमानवीयता की हद: पति की मृत्यु के बाद गर्भवती पत्नी से कराया बेड साफ़, प्रशासन पर उठे सवाल

The height of inhumanity in Dindori Hospital: After the death of the husband, the pregnant wife was made to clean the bed, questions raised on the administration मध्यप्रदेश के डिंडोरी जिले के सरकारी अस्पताल में एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसमें एक व्यक्ति की मृत्यु के तुरंत बाद उसकी पाँच महीने की गर्भवती पत्नी को बेड की सफाई करने के लिए मजबूर किया गया। जिस महिला ने अभी-अभी अपने पति को खोया था और दुःख में डूबी हुई थी, उसे प्रशासन द्वारा इस तरह का काम सौंपा गया, जो मानवीय संवेदनाओं की पूरी तरह अनदेखी को दर्शाता है। घटना ने उठाए प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल यह घटना प्रशासनिक संवेदनहीनता की ओर इशारा करती है। सवाल उठ रहा है कि क्या सरकारी अस्पताल में सफाई व्यवस्था इतनी लचर है कि एक शोकाकुल गर्भवती महिला से ही सफाई कराई जाए। अस्पताल प्रशासन के इस रवैये को लेकर आम जनता में आक्रोश है। इस घटना ने सरकारी अस्पतालों की लापरवाही और गरीब मरीजों के प्रति संवेदनहीनता की पोल खोल दी है। मुख्यमंत्री से कार्रवाई की माँग घटना के सामने आने के बाद प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की जा रही है। ऐसे अमानवीय कृत्यों के प्रति शासन की अनदेखी से लोगों में आक्रोश बढ़ रहा है। कई लोगों ने यह भी सवाल उठाया है कि क्या गरीब तबके के लोगों के प्रति सरकारी अस्पतालों में मानवीय व्यवहार की उम्मीद नहीं की जा सकती? स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार की आवश्यकता यह घटना इस बात को दर्शाती है कि प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में केवल चिकित्सा सुविधाओं में ही नहीं, बल्कि कर्मचारियों के संवेदनशीलता और प्रशिक्षण पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है। आम जनता यह आशा करती है कि शासन ऐसी घटनाओं से सबक ले और अस्पतालों में मानवीयता और संवेदनशीलता को सर्वोपरि रखा जाए। अस्पताल प्रशासन की ऐसी घटनाएँ स्वास्थ्य सेवाओं पर प्रश्न चिह्न लगाती हैं और गरीब परिवारों के प्रति संवेदनशीलता की कमी को उजागर करती हैं। मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य विभाग से उम्मीद है कि वे इस मामले में गंभीरता से कदम उठाएँगे, ताकि भविष्य में कोई गरीब परिवार ऐसी अमानवीयता का शिकार न हो।

जमीन विवाद में खूनी संघर्ष, गोलीबारी और हमले में एक की मौत, कई घायल

Bloody conflict due to land dispute: One dead, many injured in firing and attack with sharp weapons मुरैना में जमीन विवाद को लेकर गोलिया चल गईं। एक पक्ष ने दूसरे पक्ष पर फरसे और कुल्हाड़ी से हमला कर दिया। विवाद में तीन लोगों को गोलियां लगी हैं, एक बुजुर्ग की मौके हो गई, अन्य अस्पताल में भर्ती हैं। मुरैना। नूराबाद थाना क्षेत्र के बित्तौली पुरा गांव में शुक्रवार की सुबह खेत जोतने गए एक ही परिवार के पांच लोगों पर लभनपुरा गांव के दूसरे पक्ष ने ताबड़तोड़ फायर की, इसके बाद कुल्हाड़ी फरसों से हमला कर दिया। इस हमले में तीन लोगों गोली लगी, वहीं दो कुल्हाड़ी-फरसे के हमले में घायल हो गए।गोली लगने से एक बुजुर्ग की मौके पर ही मौत हो गई, अन्य घायलों को इलाज के लिए ग्वालियर अस्पताल ले जाया गया है। विवाद के पीछे बित्तौलीपुरा व लभनपुरा गांव के बीच में स्थित पांच बीघा जमीन है। जिसको लेकर दोनों पक्षों में पूर्व से कहासुनी चली आ रही थी। पुलिस अब आरोपितों की तलाश में जुट गई है। जमीन को लेकर चल रहा था विवाद जानकारी के मुताबिक बित्तौलीपुरा निवासी श्रीकृष्णा गुर्जर के परिवार का लभनपुरा के पूर्व सरपंच बुलाखी गुर्जर के परिवार से दोनों गांव के बीच स्थित पांच बीघा जमीन को लेकर विवाद चला आ रहा था। अब बोवनी का समय है, तो फिर से यह विवाद गर्मा गया और दो दिन से कहासुनी भी हो रही थी। खेत जोतने के दौरान हुआ हमला शुक्रवार की सुबह आठ बजे श्रीकृष्णा गुर्जर उसके परिवार के देशराज गुर्जर , करतार सिंह , अंकुर, विशंभर सिंह इस खेत को जोतने के लिए गए थे। इसी बीच वहां बुलाखी गुर्जर अपने परिजनों के साथ लाठी फरसे और बंदूकों से लैस होकर मौके पर पहुंच गए। श्रीकृष्णा गुर्जर व उसके स्वजन को खेत जोतता देख बुलाखी व उसके स्वजन ने ताबड़ताेड़ फायरिंग कर दीं। तीन को गोली लगी, दो फरसे से घायल गोलीबारी में एक गोली श्रीकृष्णा गुर्जर के सीने में लगी, देशराम के बांये कंधे पर लगी और अंकुर गुर्जर की पीठ में गोली लगी। वहीं करतार व विशंभर फरसों के हमले में गंभीर रूप से घायल हो गए। गोली लगने से श्रीकृष्णा गुर्जर ने मौके पर दम तोड़ दिया। बाकी घायलों को सीधे ही ग्वालियर अस्पताल में भर्ती कराया गया। वारदात की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और छानबीन में जुट गई। पुलिस अभी इस मामले में आरोपितों पर मामला दर्ज कर रही है। धारदार हथियारों से किया हमला, चार हुए घायल बागचीनी थाना क्षेत्र के घुर्रा गांव में गुरूवार की शाम को विवाद के चलते एक पक्ष ने दूसरे पक्ष पर धारदार हथियारों से हमला कर दिया। इस हमले में चार लोग घायल हुए। जिन्हें इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। जानकारी के मुताबिक घुर्रा गांव निवासी शाहरूख खान का गांव के ही जफर खान से किसी बात को लेकर कहासुनी हो गई। इसी कहासुनी पर जफर व उसके स्वजन ने शाहरूख पर हमला कर दिया। बचाव में शाहरूख के स्वजन इंतो खां, साबिर व उम्मेद खान आए तो उन पर भी आरोपितों ने धारदार हथियार से हमला कर घायल कर दिया। पुलिस ने इस मामले में शाहरूख की फरियाद पर आरोपित जफर खान, हनीफ, पप्पन व सागीर खान के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

बांधवगढ़ में हाथियों की मौत पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने लिया सरकार को लिया आड़े-हाथ

Leader of Opposition Umang Singhar took the government to task over the death of elephants in Bandhavgarh. Umang Singhar News: मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ में 10 हाथियों की मौत के मामले को लेकर विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा है कि सरकार इस घटना पर चुप क्यों है. मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ में 10 हाथियों की मौत के मामले को लेकर विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने निशाना साधा है. उन्होंने एमपी सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार इस घटना पर चुप क्यों है, जबकि हम हाथियों की भगवान गणेश के रूप में पूजा करते हैं. सरकार को इस मामले में तत्काल संज्ञान लेना चाहिए. उमंग सिंघार ने कहा कि एक तरफ हम हाथियों की यानी गणेशजी की पूजा कर रहे हैं और दूसरी तरफ सरकार हाथियों की सुरक्षा नहीं कर पा रहे हैं और वहीं वन मंत्री वोट मांग रहे हैं. नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि वन्य प्राणियों के साथ में आदिवासियों का गहरा नाता और ताना-बना है. इस घटना में आदिवासियों का कोई दोष नहीं है. जल जंगल जमीन आदिवासियों का अधिकार है और सरकार को आदिवासियों की सुरक्षा के साथ-साथ वन्य प्राणियों की भी सुरक्षा करनी चाहिए. करीब 4 साल से हाथी झारखंड और कर्नाटक से आते रहे हैं. इस बीच में क्या सरकार ने उन वन समितियां से कोई चर्चा की या उन आदिवासियों से चर्चा की या उनके साथ कोई बैठक की या हाथियों के विस्थापन की बात कही. हाथियों का किस तरह से विस्थापन करना है. उनकी सुरक्षा को लेकर सरकार ने किसी भी तरह की कोई प्लान नहीं बनाया. नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकार को तत्काल इस मामले में संज्ञान लेते हुए वन्य समितियों के साथ और आदिवासियों के साथ चर्चा करनी चाहिए. नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इल्जाम लगाते हुए कहा कि सरकार वन्य प्राणी और आदिवासी विरोधी सरकार है. सरकार को संज्ञान लेते हुए उन लोगों पर कार्रवाई करनी चाहिए फिर चाहे वह अधिकारी हो या उसका कुप्रबंध हो. इस मामले में आदिवासियों की कोई जिम्मेदार नहीं है. सामाजिक कार्यकर्ता अजय दुबे ने भी हाथियों की मौत पर सवाल खड़े किए हैं.उमरिया-बांधवगढ टाइगर रिजर्व के खितौली परिक्षेत्र के सलखनियां के जंगल में 10 हाथियों की मौत हुई है. 10 हाथियों की मौत के बाद बांधवगढ पार्क प्रबंधन अपनी इस गलती को छिपाने में जुटा है. किसानों की कोदो की फसल को मौत का जिम्मेदार मानते हुए फसल को नष्ट कराया. NTCA दिल्ली की टीम पूरे मामले की जांच कर रही है. हाथियों के पीएम रिपोर्ट आने के बाद खुलासा होगा.

10 हाथियों की मौत से पार्क प्रबंधन पर उठे कई सवाल खड़े…?

Death of 10 elephants raises many questions on park management…? भोपाल। बांधवगाढ़ टाइगर रिज़र्व में 10 जंगली हथियो की मौत ने देश में हड़कंप मचा दिया पर प्रदेश सरकार गंभीर नहीं दिखाई नहीं देती नजर आ रही है। अपर मुख्य सचिव की अपने-पराए के आधार पर पोस्टिंग से लेकर वन सुरक्षा और इको समितिओं की निष्क्रिता पर सवाल उठने लगे हैं। अगर वन विभाग ने 26 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ में हुई हाथियों की मौत की घटना को गंभीरता से ले लिया होता तो शायद हाथियों को बचाया जा सकता था। हाथियों की मौत को लेकर सेवा निवृत मुख्य वन संरक्षक डॉ एसपीएस तिवारी पार्क प्रबंधन की कार्य शैली पर सवाल उठाते हुए लिखा है कि बान्धवगढ़ में जंगली हाथी झारखंड के पलामू के जंगलों से कुसमी होते हुए संजय टाइगर रिज़र्व जो सीधी, सिंगरौली और छत्तीश गाढ़ में फैला है, बान्धवगढ़ में आये है और अनुकूल परिस्थियाँ पाकार स्थायी रूप से यहाँ स्थापित हो गए। वास्तव में पलामू से बान्धवगढ़ तक ग्रीन कॉरिडोर भी है। आज के स्थिति में 80 से 90 जंगली हाथी बांधव गढ़ में रह रहे है। बांधव गढ़ के पनपथा बफर जोन अंतर्गत ग्राम बकेली सलखनिया गांव के पास हाथियों की मौत के कारण का पता लगाने में पार्क प्रबंधन और वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट एवं डॉक्टर्स की टीम व्यस्त है। कारण जो भी हो, 10 जंगली हथियो की मौत ने पार्क प्रबंधन पर कई सवाल खड़े कर रहें है। डॉ तिवारी ने लिखा है कि मैं 1990 से 1995 तक उपवनमंडलाधिकारी मानपुर के हैसियत से पदस्थ था। तब पनपथा रेंज क्षेत्रीय रेंज था। तब भी यहां बाघों की अच्छी संख्या थी। पातौर ताला से मात्र 7 किमी की दूरी पर है। सलखनिया पातौर से लगा हुआ आदिवासी बाहुल्य गांव है , जहां मुख्यतया बैगा आदिवासी निवास करते है। पातौर और सलखनिया में वनसुरक्षा समिति गठित थी, जो बहुत ही सक्रिय थी और वन और वन्यप्राणी अपराधों को रोकने में सक्रिय भूमिका अदा करती थी । कोई छोटे-मोटे वन अपराध होने पर, गांव के लोग समिति की मीटिंग बुलाकर मावज़ा और अपराधी को सामाजिक रूप से बहिष्कृत भी करते थे। बैगा आदिवासी बहुत अंतर्मुखी होते है और वो तभी बाहरी व्यक्ति से खुल कर बात करते है जब वो समझ जाते है की ये अपने वाले है और हमारी भलाई के लिए है। अब यह सारा क्षेत्र अब बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व में आ गया है अतः अब ये समितिया ईको समिति के रूप में परिवर्तित हो गई है। पातौर वन समिति तो वन सुरक्षा में इतनी सक्रिय थी कि तत्कालीन कलेक्टर शहडोल एसपीएस परिहार स्वयं कई बार समिति की मीटिंग में आये और बहुत सरे ग्राम विकास के कार्य भी करवाये। आख़िर ऐसा क्या हुआ कि 10 जंगली हाथी की मौत हो गई और पार्क प्रबंधन को पूर्व से हथियों के एक्टिविटी के बारे में जानकारी नहीं हो सकी। मौत का कारण तो अभी निश्चित नहीं हो पाया है परंतु यह बात प्रारंभिक रूप से मालूम हो रही है कि ज़हरीला पदार्थ खाने से मृत्यु हुई है। ऐसी भी आशंका जतायी जा रही है कि धान की फसल मी माहुर रोग लग गया था, उसके बचाव हेतु धान फसल में रसायन का छिड़काव किया गाया था, जिसे खाने से मृत्यु हुई होगी। अन्यथा जहर खुरानी की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता है। सवाल यह है कि क्या इकोसमितिया निष्क्रिय हो गई..? क्या अधिकारी और कर्मचारी वहां के स्थानीय लोगों से संपर्क तोड़ चुके है। यदि इको समितियां सक्रिय होती तो गांव के लोग लोकल बीटगार्ड को ज़रूर बतलाते कि हाथी बीमार दिख रहे है। और शायद समय रहते इनका उपचार होता और 10 हाथी नहीं मरते। मुखबिर तंत्र का ह्रास एवं वन समितियों का निष्क्रिय होना ही इस असामयिक मृत्यु का मुख्य कारण समझ में आ रहा है। जनता को प्रबंधन से नहीं जोड़ा गयाप्रदेश में लगभग 15608 वन समितियों का गठन संयुक्त वन प्रबंधन के तहत हुआ है। 1051 इकोसमितियाँ है। इन समितियों की निरंतर बैठक एवं विकास तथा सुरक्षा राशि का इनके खाते में डाल कर स्थानीय जनता को रोज़गार देने का प्रावधान भी है परंतु कालांतर में इस विषय को ज़्यादा ध्यान नहीं दिया गया है। अज प्रदेश में 8 जंगली हथियो के मरने से वन एवं वन्य प्राणी प्रबंधन पर सवालिया निशान खड़ा होता है। ज़रूरत है, मृत्यु के कारण के तह तक जा कर इसे उजागर करे और भविष्य के लिए सीख ले। ताकि ऐसी घटना दोबारा ना घटे। जंगलों में जनता की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए संयुक्त वन प्रबंधन को मज़बूत कर वनसमितियों को सक्रिय करे।डॉ एस पी एस तिवारी आईएफ़एससेवा निवृत मुख्य वन संरक्षक एमपी भोपाल

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में 10वें हाथी की मौत, दिनभर जांच करती रही टीमें; जांच एजेंसियों ने डेरा जमाया

10 elephants arrived one by one in bandhavgarh Tiger Reserve उमरिया । बांधवगढ़ नेशनल पार्क में गुरुवार को दो और हाथियों ने दम तोड़ दिया। दोपहर में 9वें हाथी और शाम को दसवें हाथी की मौत हुई। मामले में एसटीएफ ने डॉग स्क्वॉड की मदद से 7 खेतों और 7 घरों की तलाशी ली है। उमरिया जिले का बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में मंगलवार को चार हाथियों की मौत हो गई। बुधवार को सुबह खबर आई कि तीन और हाथियों ने दम तोड़ दिया है, फिर बुधवार रात को एक गुरुवार को सुबह एक और शाम को एक और हाथी ने दम तोड़ दिया। इस तरह से मरने वाले हाथियों की संख्या कुल 10 हो चुकी है। कई स्तर पर जांच जारी, हाथियों के शवों का किया जा रहा परीक्षण हाथियों की मौत के बाद राज्य से लेकर केंद्र तक हड़कंप मचा हुआ है। हर कोई सकते में है कि आखिर अचानक इतने हाथियों की मौत कैसे हो गई। ऐसा क्या हुआ जिससे एक-एक करके दस हाथियों ने दम तोड़ दिया। मौत की जांच के लिए केंद्र और राज्य की वाइल्डलाइफ एजेंसी की टीम भी बुधवार को बांधवगढ़ पहुंची है। मौत की सही वजह का पता लगाने के लिए हाथियों के शवों का परीक्षण किया जा रहा है।

जनगणना 2025: नई चुनौतियाँ और राजनीतिक रणनीतियाँ

Census 2025: New challenges and political strategies केंद्र सरकार ने देश में जनगणना कराने की पूरी तैयारी कर ली है। यह प्रक्रिया अगले साल से शुरू होकर एक साल में पूरी होगी और 2026 में इसके आंकड़े सार्वजनिक किए जाएंगे। इस जनगणना में एक महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि इस बार सर्वे में सम्प्रदाय की जानकारी भी पूछी जाएगी, जिससे देश के विभिन्न सम्प्रदायों की जनसंख्या के आधार पर योजनाएं बनाई जा सकेंगी। जनगणना में कुल 30 सवाल शामिल होंगे, जो पिछली 2011 की जनगणना में पूछे गए 29 सवालों से एक अधिक है। देरी के कारण और नई समय-सीमायह जनगणना 2021 में ही होनी थी, लेकिन कोरोना महामारी के चलते इसे स्थगित करना पड़ा। इसके बाद लोकसभा चुनावों के चलते इसे और आगे बढ़ाया गया। अब सरकार ने इस पर तेजी से कदम बढ़ा दिए हैं, क्योंकि जनगणना के आंकड़ों के आधार पर ही लोकसभा और विधानसभा सीटों का परिसीमन किया जाएगा, जो 50 वर्षों से रुका हुआ है। संप्रदाय आधारित सवालों का राजनीतिक महत्वइस बार जनगणना में शामिल किए गए सम्प्रदाय आधारित सवाल विशेष चर्चा का विषय हैं। जनगणना में कबीरपंथी, रविदासी, दलित बौद्ध और अन्य सम्प्रदायों के बारे में पूछा जाएगा। इसके पीछे उद्देश्य केवल आंकड़े इकट्ठा करना नहीं है, बल्कि इन आंकड़ों के आधार पर सरकारी योजनाओं को बेहतर बनाना और समाज में राजनीतिक समीकरणों को समझना है। विशेषज्ञों का मानना है कि सम्प्रदाय आधारित आंकड़े राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं, क्योंकि यह राजनीतिक दलों को इन सम्प्रदायों के आधार पर नीतियां बनाने और समर्थन प्राप्त करने में सहायता कर सकते हैं। परिसीमन और महिला आरक्षण2029 में लोकसभा सीटों में वृद्धि और महिला आरक्षण की संभावनाओं के चलते यह जनगणना और भी महत्वपूर्ण हो गई है। परिसीमन के आधार पर सीटों के पुनर्गठन से भारत के जनसांख्यिकीय बदलावों का सीधा असर चुनावी सीटों पर पड़ेगा, जो विभिन्न राज्यों के राजनीतिक परिदृश्य को भी प्रभावित करेगा। जाति जनगणना पर चुप्पीहालांकि जाति जनगणना पर अभी भी स्थिति स्पष्ट नहीं है, लेकिन सूत्रों के अनुसार सम्प्रदाय की जानकारी पूछे जाने की तैयारी चल रही है। इससे राजनीतिक लाभ के साथ-साथ योजनाओं के क्रियान्वयन में भी सहयोग मिलेगा। जनगणना के आंकड़ों के आधार पर समाज के विभिन्न वर्गों की आवश्यकताओं और उनकी जनसंख्या के अनुपात को समझने में सहायता मिलेगी, जिससे विकास कार्यों में पारदर्शिता आएगी। आगामी जनगणना न केवल देश की जनसांख्यिकी को समझने का एक साधन होगी, बल्कि इसके माध्यम से राजनीतिक दलों को नई योजनाएं और विकास की दिशा तय करने का आधार मिलेगा। इस बार जनगणना के व्यापक परिणाम, भारतीय राजनीति और समाज दोनों पर गहरे असर डाल सकते हैं। इस बार जानकारी में लोगों से उनका संप्रदाय भी पूछा जाएगा। कबीरपंथी, रविदासी, दलित बौद्ध समेत देश के अलग-अलग राज्यों में कई संप्रदाय हैं। ऐसे में संप्रदाय भी राजनीति का एक बड़ा आधार हो सकता है। इस तरह 30 सवाल जनगणना में पूछे जाएंगे। ये हैं वो सवाल जिनका जवाब हर घर से लिया जाएगा व्यक्ति का नाम।परिवार के मुखिया से संबंध?लिंग?जन्मतिथि और आयु?मौजूदा वैवाहिक स्थिति?शादी के वक्त उम्र?धर्म?संप्रदाय?अनुसूचित जाति या जनजाति?दिव्यांगता (यदि हो तो)मातृभाषा कौनसी?कौन-कौन सी भाषाओं का ज्ञान?साक्षरता की स्थिति क्या?मौजूदा शैक्षणिक स्थितिउच्चतम शिक्षा कितनी?बीते साल का रोजगार?आर्थिक गतिविधि की श्रेणी?रोजगार?उद्योग की प्रकृति, रोजगार एवं सेवाएं?वर्कर्स की क्लास?गैर-आर्थिक गतिविधि ?कैसे रोजगार की चाह?काम पर जाने का माध्यम? (i) एक तरफ से दूरी।(ii) यात्रा का माध्यम। जन्म मूल स्थान पर ही हुआ या फिर कहीं और (दूसरे देश में हुआ हो तो उसका नाम)मूल स्थान पर हैं या पलायन किया? (a) क्या भारत में ही पलायन किया?(b) किस समय पलायन किया? मूल स्थान से पलायन का कारण?कितनी संतान? (a) बेटे कितने ?(b) बेटियां कितनी? जन्म लेने वाले कितने बच्चे जीवित? (a) बेटे कितने ?(b) बेटियां कितनी? बीते एक साल में पैदा बच्चों की संख्या?पलायन के बाद कितने साल से नए स्थान पर ?पलायन से पूर्व का मूल स्थान?

पिता की पुण्य तिथि पर बेले परिवार करेगा सामाग्री भेट,जन सेवा कल्याण समिति के सेवाभावी कार्यों को दृष्टिगत रख लिया निर्णय ।

The Belle family will donate material on the death anniversary of their father, the decision was taken keeping in mind the service-oriented work of the Jan Seva Kalyan Samiti. हरिप्रसाद गोहेआमला। जनसेवा कल्याण समिति आमला द्वारा बीते लंबे समय से विभिन्न क्षेत्रों में सेवाभावी सराहनीय किए गए उल्लेखनीय कार्यों के चलते बेले परिवार द्वारा समिति को आज सामाग्री भेट की जाएंगी । बेले परिवार प्रमुख रामानंद बेले ने बताया आमला नगर सहित जिले एवं जिले के बाहर भी मानव सेवा,गौ सेवा के क्षेत्र में सतत कार्यशील ‘जनसेवा कल्याण समिति आमला एक बड़ा नाम है।समिति की सेवाभावी कार्यशैली को देखते हुए मैं रामानन्द बेले’राजन”अपने पूज्य पिताजी एवं समाजसेवी स्वर्गीय श्री पंछीलाल जी बेले(बड़गांव) की छटवीं पुण्यतिथि पर दिनाँक 30 ऑक्टोबर दिन बुधबार को एक व्हीलचेयर एवं दो नग ऑक्सीजन किट सप्रेम भेंट कर रहा हूँ।अतः आपसे सादर आग्रह सहित निवेदन करता हूँ कि इस कार्यक्रम मे अपनी गरिमामयी उपस्थिति देकर हमें अनुग्रहित करेंगे ऐसी अपेक्षा करता हूँ। कार्यक्रम स्थलबिरसा मुंडा सांस्कृतिक भवन,शासकीय अस्पताल के सामनेआमला, जिला-बैतूलसमय-शाम 6 बजेनिवेदकरामानन्द बेले”राजनशिक्षक(कवि)एवं बेले परिवार आमला

कांग्रेस का विजयपुर उपचुनाव में रिटर्निंग ऑफिसर के खिलाफ मोर्चा, हटाने की मांग

Congress protests in Vijaypur by-election, demands removal of returning officer भोपाल। मध्य प्रदेश की दो विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होना है। इससे पहले कांग्रेस ने विजयपुर के रिटर्निंग ऑफिसर के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उपनेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे ने रिटर्निंग अधिकारी पर गंभीर आरोप लगाए है। साथ ही उन्होंने अफसर को हटाने की भी मांग की है। उपनेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे ने रिटर्निंग अधिकारी उदय सिंह सिकरवार को लेकर चुनाव आयोग से शिकायत की है। उन्होंने कहा कि एसडीएम सिकरवार पहले भी बीजेपी के लिए काम करते है। 2017-18 में हुए उपचुनाव में भी सिकरवार ने रिटरिंग ऑफिस रहते हुए भी इनकी शिकायत की थी। शिकायत के आधार पर इन्हे हटाया गया था। रिटर्निंग ऑफिसर को हटाने की मांगहेमंत काटरे ने कहा कि अब एक बार फिर उदय सिंह सिकरवार को ही विजयपुर उपचुनाव कराने की जिम्मेदारी दी गई। आखिर क्यों हर बार इन्हे ही रिटर्निंग ऑफिसर बनाया जाता है। हम निर्वाचन आयोग से मांग करते है की उदय सिंह को चुनावी प्रक्रिया से हटाया जाए। जब एक बार चुनावी प्रक्रिया से इन्हे हटाया गया था, तो दोबारा क्यों चुनाव अधिकारी बनाया गया। कुल इतने प्रत्याशी मैदान मेंनामांकन संवीक्षा में विजयपुर में 12 और बुधनी में 23 अभ्यर्थियों के नाम निर्देशन-पत्र विधिमान्य पाए गये। वहीं विजयपुर में 3 और बुधनी में 2 अभ्यर्थियों के नाम-निर्देशन पत्र विधिमान्य नहीं पाये गये। जिसके चलते उनके नामांकन खारिज कर दिए गए हैं। 13 नवंबर को होगा उपचुनावमध्य प्रदेश में 18 अक्टूबर से नामांकन की प्रक्रिया शुरू हुई। 25 अक्टूबर तक निर्देशन पत्र जमा किए गए। 28 अक्टूबर को स्क्रूटनी की गई। अभ्यर्थी 30 अक्टूबर तक अपना नाम वापस ले सकेंगे। 13 नवंबर को चुनाव होगा। वहीं 23 नवंबर को मतगणना होगी।

आज से एकादशी तक छोटे व्यापारियों और ठेले वालों से नहीं ली जाएगी मार्केट फीस’, CM मोहन यादव का निर्देश

‘Market fees will not be taken from small traders and street vendors from today till Ekadashi’, instructions from CM Mohan Yadav CM Mohan Yadav Directed Departments: दीपावली पर्व को ध्यान में रखते हुए धनतेरस से देवउठनी एकादशी तक सभी शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष व्यवस्था करने के लिए संबंधित विभागों को सीएम साय ने निर्देश दिया। प्रदेश में वोकल फॉर लोकल को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा है कि दीपावली पर्व पर स्थानीय विक्रेताओं से सामग्री की खरीदी को प्रोत्साहित किया जाये। धनतेरस से एकादशी तक सभी शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे व्यापारियों और हाथ ठेला वालों से बाजार शुल्क न लिया जाए। सभी नगरीय निकाय स्थानीय स्तर पर साफ-सफाई की व्यवस्था सुनिश्चित करने विशेष अभियान चलायें। साथ ही प्रदेश में रोशनी के पर्व दीपावली पर विद्युत की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करें। मुख्यमंत्री यादव मंत्रालय में समाधान ऑनलाइन कार्यक्रम के पहले प्रदेशवासियों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने दीपावली और मध्य प्रदेश के स्थापना दिवस पर सभी को शुभकामनाएं दी।

उज्जैन में बिजली खंभा लगाने के नाम पर रिश्वत: लाइनमैन रंगे हाथ पकड़ा गया

Bribe in the name of installing electric pole in Ujjain: Lineman caught red handed उज्जैन। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के गृह जिले उज्जैन में बिजली विभाग के एक कर्मचारी द्वारा खंभा लगाने के लिए आठ हजार रुपये रिश्वत मांगने का मामला सामने आया है। पवन सागित्रा नामक किसान ने खाचरोद तहसील के घिनौदा चौपाटी में खंभा लगाने के लिए लाइनमैन रामचंद्र धाकड़ को चार हजार रुपये रिश्वत देने के बाद लोकायुक्त पुलिस से शिकायत की, जिसके आधार पर लोकायुक्त पुलिस ने उसे रंगे हाथों पकड़ा। लोकायुक्त डीएसपी बसंत श्रीवास्तव के अनुसार, रामचंद्र धाकड़, जो विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड में लाइनमैन के पद पर कार्यरत हैं, को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया है। किसान ने आरोप लगाया कि उनके खेत में ट्रैक्टर चलाते समय गलती से खंभे से टकराकर खंभा गिर गया था। इसे दोबारा खड़ा करने के लिए लाइनमैन ने पुलिस में शिकायत न करने और खंभा लगाने के नाम पर आठ हजार रुपये की रिश्वत मांगी। पहला मामला, सफाई में बताया बिजली बिल लाइनमैन ने अपनी सफाई में कहा कि उसने पैसे बिजली का बिल भरने के नाम पर लिए थे। हालांकि, लोकायुक्त पुलिस ने इसे रिश्वतखोरी का मामला मानते हुए तुरंत कार्रवाई की। विद्युत पोल लगाने के नाम पर रिश्वत लेने का यह पहला मामला बताया जा रहा है, जिसमें शिकायत के बाद पुलिस ने जांच कर कार्रवाई की।

भोपाल में बजरंग दल का पोस्टर विवाद: दिवाली पर ‘हिन्दू दुकानदारों’ से खरीदारी की अपील, कांग्रेस ने जताई आपत्ति

Controversy over Bajrang Dal poster in Bhopal: Appeal to do Diwali shopping from ‘Hindu shopkeepers’, Congress expressed displeasure भोपाल। दीपावली के बीच भोपाल में बजरंग दल के एक पोस्टर ने विवाद खड़ा कर दिया है। बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने शहर में पोस्टर लगाए हैं, जिनमें लोगों से दिवाली की खरीदारी केवल हिन्दू दुकानदारों से करने की अपील की गई है और अन्य धर्म के व्यापारियों से सामान न खरीदने का अनुरोध किया गया है। इन पोस्टरों पर लिखा गया है, “अपना त्योहार, अपनों से व्यवहार। दीपावली की खरीदी उनसे करें, जो आपकी खरीदी से दीपावली मना सकें।” विश्व हिंदू परिषद का समर्थन विश्व हिंदू परिषद (VHP) के प्रांत प्रचार-प्रसार प्रमुख जितेंद्र सिंह चौहान ने इस अपील का समर्थन करते हुए कहा कि दीपावली सनातनियों का बड़ा त्योहार है और लोगों को अपने ही समुदाय से खरीदारी करनी चाहिए ताकि हर हिन्दू परिवार भी इस पर्व को मना सके। उनका मानना है कि यह त्योहार श्रीराम के अयोध्या आगमन की खुशी में मनाया जाता है और इसे समुदायिक स्तर पर समर्थन मिलना चाहिए। बीजेपी की प्रतिक्रिया इस मामले पर बीजेपी प्रवक्ता अजय सिंह यादव ने भी प्रतिक्रिया दी। उनका कहना है कि कुछ मामलों में सनातन धर्म की भावनाओं को आहत करने की कोशिश की जाती रही है, और ऐसे में धार्मिक संगठनों द्वारा इस तरह की अपील स्वाभाविक है। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह सनातन धर्म का विरोध करने वालों के साथ खड़ी रहती है और कहा कि देश में स्वदेशी को बढ़ावा देना जरूरी है। कांग्रेस की कड़ी आलोचना दूसरी ओर, कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता अवनीश बुंदेला ने बजरंग दल की इस अपील को शर्मनाक बताते हुए इसकी निंदा की है। उन्होंने इसे विभाजनकारी राजनीति करार दिया और कहा कि फूलों और सब्जियों का कारोबार करने वाले अधिकतर लोग दूसरे धर्म के हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इस सोच के तहत भगवान को फूल चढ़ाना भी बंद कर देना चाहिए। कांग्रेस ने इसे ‘घटिया सोच’ का परिणाम बताते हुए मुख्यमंत्री से बजरंग दल के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। भोपाल में लगे इन पोस्टरों ने फिर से धार्मिक भावनाओं और सामाजिक एकता पर सवाल खड़े किए हैं।

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