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प्रधानमंत्री के आनंदपुर धाम दौरे से पहले सुरक्षा सख्त, 1930 से सक्रिय ट्रस्ट बना सामाजिक सरोकारों का केंद्र

भोपाल /अशोकनगर प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी 11 अप्रैल को उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जाएंगे।  मोदी वाराणसी में सवेरे 11 बजे 3,880 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे। प्रधानमंत्री एक जनसभा को भी संबोधित करेंगे। इसके अलावा, केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी 10 अप्रैल को धार जिले के बदनावर से प्रदेश की राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे  मोदी इसके बाद मध्य प्रदेश जाएंगे और लगभग 3:15 बजे, ईसागढ़ में गुरु जी महाराज मंदिर में दर्शन और पूजा अर्चना करेंगे। प्रधानमंत्री इसके अलावा, लगभग 4:15 बजे, आनंदपुर धाम में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में सम्मिलित होंगे।  मोदी इस अवसर पर एक जनसभा को भी संबोधित करेंगे। प्रधानमंत्री के उत्तर प्रदेश में कार्यक्रम प्रधानमंत्री वाराणसी में 3,880 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे। श्री मोदी अवसंरचना के विकास, विशेष रूप से वाराणसी में सड़क संपर्क बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता के अनुरूप इस क्षेत्र में विभिन्न सड़क परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे। प्रधानमंत्री इसके अलावा वाराणसी रिंग रोड और सारनाथ के बीच एक सड़क पुल, भिखारीपुर और मंडुआडीह क्रॉसिंग पर फ्लाईओवर और वाराणसी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एनएच -31 पर 980 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से एक राजमार्ग अंडरपास सड़क सुरंग की आधारशिला भी रखेंगे। प्रधानमंत्री विद्युत अवसंरचना को प्रोत्साहन देते हुए, वाराणसी मंडल के जौनपुर, चंदौली और गाजीपुर जिलों के दो 400 केवी और एक 220 केवी पारेषण उपकेंद्र और संबंधित पारेषण लाइनों का उद्घाटन करेंगे। इनकी लागत 1,045 करोड़ रुपये से अधिक है। श्री मोदी वाराणसी के चौकाघाट में 220 केवी पारेषण उपकेंद्र, गाजीपुर में 132 केवी पारेषण उपकेंद्र और वाराणसी नगर विद्युत वितरण प्रणाली की आधारशिला भी रखेंगे। इनकी लागत लगभग 775 करोड़ रुपये से अधिक है। प्रधानमंत्री सुरक्षा कर्मियों के लिए सुविधाओं में सुधार के लिए पुलिस लाइन में ट्रांजिट हॉस्टल और पीएसी रामनगर परिसर में बैरकों का उद्घाटन करेंगे। श्री मोदी पुलिस लाइन में विभिन्न पुलिस थानों में नए प्रशासनिक भवनों और एक आवासीय छात्रावास की आधारशिला भी रखेंगे। प्रधानमंत्री सभी के लिए शिक्षा सुनिश्चित करने के अपने दृष्टिकोण के अनुरूप, पिंडरा में एक सरकारी पॉलिटेक्निक कॉलेज, बड़की गांव में सरदार वल्लभभाई पटेल सरकारी कॉलेज, 356 ग्रामीण पुस्तकालयों और 100 आंगनवाड़ी केंद्रों सहित विभिन्न परियोजनाओं का भी उद्घाटन करेंगे। श्री मोदी स्मार्ट सिटी मिशन के अंतर्गत 77 प्राथमिक स्कूल भवनों के नवीनीकरण और वाराणसी के चोलापुर में कस्तूरबा गांधी स्कूल के लिए एक नए भवन के निर्माण की आधारशिला भी रखेंगे। प्रधानमंत्री शहर में खेल अवसंरचना को प्रोत्साहन देने के लिए उदय प्रताप कॉलेज में फ्लडलाइट और दर्शक दीर्घा के साथ सिंथेटिक हॉकी टर्फ तथा शिवपुर में एक मिनी स्टेडियम की आधारशिला रखेंगे। प्रधानमंत्री गंगा नदी में सामने घाट और शास्त्री घाट के पुनर्विकास, 345 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से जल जीवन मिशन के अंतर्गत 130 ग्रामीण पेयजल योजनाओं, वाराणसी के छह नगरपालिका वार्डों के सुधार और वाराणसी के विभिन्न स्थलों पर भूनिर्माण और मूर्तिकला प्रतिष्ठानों का भी उद्घाटन करेंगे। प्रधानमंत्री वाराणसी में कारीगरों के लिए एमएसएमई यूनिटी मॉल, मोहनसराय में ट्रांसपोर्ट नगर योजना के अवसंरचना विकास कार्यों, डब्ल्यूटीपी भेलूपुर में 1 मेगावाट का सौर ऊर्जा संयंत्र, 40 ग्राम पंचायतों में सामुदायिक हॉल और विभिन्न पार्कों के सौंदर्यीकरण की आधारशिला भी रखेंगे। प्रधानमंत्री मोदी 70 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों को पहली बार आयुष्मान वय वंदना कार्ड भी वितरित करेंगे। श्री मोदी तबला, पेंटिंग, ठंडाई, तिरंगा बर्फी सहित विभिन्न स्थानीय वस्तुओं और उत्पादों को भौगोलिक संकेत (जीआई) प्रमाण पत्र प्रदान करेंगे। प्रधानमंत्री बनास डेयरी से जुड़े उत्तर प्रदेश के दुग्ध आपूर्तिकर्ताओं को 105 करोड़ रुपये से अधिक का बोनस भी हस्तांतरित करेंगे। 1930 में की गई थी धाम की स्थापना आनंदपुर धाम की स्थापना 1930 में की गई। इसके बाद 1954 में श्री आनंदपुर ट्रस्ट की स्थापना की गई। आनंदपुर धाम पिछले कुछ वर्षों में अपने सामाजिक और सार्वजनिक कल्याण कार्यों के लिए चर्चा में रहा है। यह सामाजिक कार्यों का केंद्र बन चुका है। ट्रस्ट कृषि, अस्पताल, स्कूल, प्रिंटिंग प्रेस और गौशाला का संचालन करने में सक्रिय है। ट्रस्ट की संपत्तियां ग्वालियर, इंदौर समेत कई प्रमुख शहरों में है, जो ट्रस्ट ने खरीदी है। आनंदपुर धाम से जुड़े श्रद्धालु पंजाबी और सिंधी समुदाय के अनेक लोग हैं, जो यहां के धार्मिक और सामाजिक कार्यों से जुड़े हुए हैं। नो फ्लाइंग जोन और रेड जोन घोषित प्रधानमंत्री के दौरे के मद्देनजर आनंदपुर धाम में सुरक्षा के सख्त इंतजाम किए गए हैं। अशोकनगर और अन्य जिलों से पुलिस बल के साथ एनएसजी और एसपीजी के जवान तैनात किए गए हैं। इंटेलिजेंस अधिकारियों ने भी सुरक्षा व्यवस्था का निरीक्षण किया है। जिला प्रशासन ने आनंदपुर धाम को नो फ्लाइंग जोन और रेड जोन घोषित किया है। आनंदपुर धाम के 10 किलोमीटर के दायरे में ड्रोन उड़ानें और संदिग्ध व्यक्तियों के प्रवेश पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी गई है। आश्रम प्रबंधन ने 11 अप्रैल को केवल आधार कार्डधारकों को प्रवेश देने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही, जिनके पास ऑनलाइन पास होंगे, उन्हें भी एंट्री दी जाएगी। प्रधानमंत्री के मध्य प्रदेश में कार्यक्रम प्रधानमंत्री भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को आगे बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता के अनुरूप मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले में ईसागढ़ तहसील के आनंदपुर धाम जाएंगे। श्री मोदी गुरु जी महाराज मंदिर में दर्शन और पूजा अर्चना करेंगे। प्रधानमंत्री आनंदपुर धाम स्थित मंदिर परिसर का भ्रमण भी करेंगे। आनंदपुर धाम की स्थापना आध्यात्मिक और परोपकारी उद्देश्यों के लिए की गई है। 315 हेक्टेयर में फैले इस क्षेत्र में 500 से अधिक गायों के साथ एक आधुनिक गौशाला है और श्री आनंदपुर ट्रस्ट परिसर के अंतर्गत कृषि गतिविधियां संचालित की जाती हैं। ट्रस्ट सुखपुर गांव में चैरिटेबल अस्पताल, सुखपुर और आनंदपुर में स्कूल और देश भर में विभिन्न सत्संग केंद्रों का संचालन कर रहा है। PM मोदी आनंद सरोवर में पुष्प करेंगे अर्पित, लंगर भी चखेंगे प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार 11 अप्रैल को प्रधानमंत्री  मोदी श्री आनंदपुर धाम परिसर स्थित आनंद सरोवर में पुष्प अर्पित करेंगे. मोदी को इस धाम में होने वाली भक्ति और ज्ञान से जुड़ी गतिविधियों के साथ ही संचालित सेवा कार्यों की भी जानकारी दी जाएगी. निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार पीएम मोदी श्री आनंदपुर सत्संग आश्रम परिसर … Read more

हाउस ऑफ पुचका रायपुर की संस्थापक ईशा पटेल ने पीएम मोदी को बताई अपनी बिजनेस जर्नी

रायपुर पीएम नरेंद्र मोदी ने रायपुर की युवा उद्यमी से बातचीत की है। इसका वीडियो सीएम विष्णुदेव साय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म  X पर पोस्ट किया है। सीएम ने लिखा कि आसमान की कोई सीमा नहीं होती है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजधानी रायपुर की एक युवा उद्यमी और हाउस ऑफ पुचका की संस्थापक से बातचीत की। इन्होंने घर पर खाना पकाने से लेकर एक सफल कैफे व्यवसाय स्थापित करने तक की अपनी प्रेरक यात्रा साझा की। ईशा का रायपुर में गोलगप्पे (गुपचुप) का कैफे है। हाउस ऑफ पुचका नाम का ये स्टार्टअप हाल ही में ईशा ने शुरू किया है। बैचलर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन कर चुकीं ईशा मुंबई की एक कंपनी में 6 लाख रुपए सालाना के पैकेज पर काम कर रही थीं। कॉर्पोरेट कंपनी में काम से उब चुकीं 23 साल की ईशा ने, अपना बिजनेस शुरू करने का सोचा। दोस्तों और परिवार के लोगों से मिले सपोर्ट के बाद उन्होंने इसे शुरू किया। 6 लाख रुपए का मुद्रा लोन लिया। फंडिंग एजेंसियों ने शुरू में नहीं जताया भरोसा ईशा बताती हैं जब मैंने फंडिंग के बारे सोचा तो लोन चाहिए था। तब मेरी उम्र 22 थी, इस उम्र में बैंक लोन दें और ये पैसे कैसे वापस बैंक को हम लौटाएंगे, इसे लेकर फंडिंग एजेंसी भरोसा नहीं जता पा रही थीं। ऐसे में मैंने रिसर्च किया तो सरकारी योजना के बारे पता चला और हमें मदद मिली। हर महीने की 50 हजार की सैलरी छोड़ना रिस्क था PM नरेंद्र मोदी ने ईशा से मुलाकात में कहा कि आपने इतना रिस्क लिया। आपके दोस्त इसपर क्या सोचते हैं, ईशा ने जवाब में बताया कि प्रॉपर रिसर्च के साथ काम करें तो रिजल्ट मिलते हैं। दैनिक भास्कर से चर्चा में ईशा ने कहा कि अच्छी सैलरी छोड़ कर आना रिस्क तो था ही मगर काम करने के दौरान कुछ सेविंग की और कैफे बिजनेस के बारे में लगातार दोस्तों से बात की। स्टडी किया तो समझ आया कि कैसे प्रॉफिट जनरेट किया जाए। इसके बाद काम शुरू किया, आज रिस्पॉन्स अच्छा है। अहमदाबाद से ली मशीन ईशा ने बताया कि हम 5 तरह के चटपटे पानी के साथ गोलगप्पे सर्व करते हैं। कोलकाता वाला पानी खूब पसंद किया जाता है। इसलिए हमनें अपने स्टार्टअप का नाम हाउस ऑफ पुचकास रखा। इसके लिए हमनें अहमदाबाद से मशीनें मंगवाई हैं, जो हाइजीन के साथ गोलगप्पे तैयार करती है। ईशा ने बताया कि उनका परिवार रायपुर के खमतराई में रहता है। पिता नवीन पटेल बिजनेसमैन और मां रश्मि होममेकर हैं। PM Mudra Yojana: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय (CM Vishnu Deo Sai) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एंटरप्रेन्योर ईशा पटेल की बातचीत का वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया। पीएम मोदी (PM Narendra Modi) और हाउस ऑफ पुचका की संस्थापक ईशा पटेल के बीच बातचीत इस प्रकार है… लाभार्थी ईशा पटेल– सपने वो नहीं जो हम सोते वक्त देखते हैं, सपने वो होते हैं जो हमें सोने नहीं देते हैं। मुसीबतें होंगी और मुश्किलें भी आएंगी, जो संघर्ष करेगा, वही सफलता पाएगा। ईशा पटेल– I am the founder of हाउस ऑफ़पुचका. घर पर खाना-वाना बनाते थे तो हाथों में टेस्ट अच्छा था, तो सबने सजेस्ट किया कि आप कैफे फील्ड में जाओ। फिर उसमें रिसर्च करके पता चला कि प्रॉफिट मार्जिन वगैरा भी अच्छा है, तो फूड कॉस्ट वगैरा मैनेज करेंगे, तो आप एक सक्सेसफुल बिजनेस रन कर सकते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी– एक यूथ, एक जनरेशन है, कुछ पढ़ाई की तो उनको लगता है कि नहीं-नहीं मैं तो कहीं नौकरी करके सेटल हो जाऊंगा, रिस्क नहीं लूंगा। आप में रिस्क टेकिंग कैपेसिटी है। ईशा पटेल– जी। प्रधानमंत्री मोदी– तो आपके रायपुर के भी दोस्त होंगे और corporate वर्ल्ड के दोस्त होंगे, स्टूडेंट दोस्त भी होंगे। उन सब में इसकी क्या चर्चा है? क्या सवाल पूछते हैं? उनको क्या लगता है? ऐसा कर सकते हैं? करना चाहिए, उनको भी आगे आने का मन करता है? ईशा पटेल– सर, मैं जैसे कि अभी मेरी ऐज 23 ईयर्स है, तो मेरे पास अभी रिस्क टेकिंग एबिलिटी भी है, और टाइम भी है, तो यही समय होता है, मैं ना यूथ को लगता है कि हमारे पास फंडिंग नहीं है, बट वह गवर्नमेंट स्कीम्स के बारे में अवेयर नहीं है, तो मैं अपनी साइड से यहीं उन्हें सजेशन देना चाहूंगी, आप थोड़ा रिसर्च करो, जैसे मुद्रा लोन भी है, वैसे पीएम ईजीपी लोन भी है, कई लोन जो आपको विदाउट mortgage मिल रहे हैं, तो अगर आप में पोटेंशियल है तो आप जब ड्रॉप करो, क्योंकि sky has no limits for you, तो आप बिजनेस करिए और जितना चाहे उतना grow कर सकते हैं। PM मोदी ने किया स्टार्टअप के लिए इंस्पायर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मुद्रा योजना के 10 साल पूरे होने पर ये मिट-अप किया। प्रधानमंत्री ने यूथ को स्टार्टअप के लिए इंस्पायर करते हुए बताया कि मुद्रा लोन से वो ये काम कर सकते हैं। शुरुआत में 50,000 रुपए से लेकर 5 लाख रुपए तक के लोन का दायरा था। अब इसे बढ़ाकर अब 20 लाख रुपए कर दिया गया है। इस योजना के तहत 52 करोड़ का लोन अब तक दिया गया है। आप भी ले सकते हैं लोन और शुरू करें स्टार्टअप 2015 में शुरू हुई इस योजना का उद्देश्य रेहड़ी-पटरी वाले से लेकर छोटे कारोबार को बिना किसी जमानत के लोन मुहैया कराना है। इस योजना के तहत कोई भी व्यक्ति अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए लोन ले सकता है।     इस योजना की सबसे अच्छी बात ये है कि इसके तहत बिना गारंटी के लोन मिलता है। इसके अलावा लोन के लिए कोई प्रोसेसिंग चार्ज भी नहीं लिया जाता है।     लोन लेने वाले को एक मुद्रा कार्ड मिलता है, जिसकी मदद से कारोबारी जरूरत पर आने वाले खर्चों का पेमेंट उससे कर सकता है।     ये लोन वाणिज्यिक (कमर्शियल) बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों, छोटे फाइनेंस बैंकों, सहकारी बैंकों, माइक्रो-फाइनेंस संस्थानों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों में आवेदन देकर पाया जा सकता है।

पीएम मोदी ने वक्फ बोर्ड ऐक्ट बनने को लेकर कहा कि इससे पसमांदा मुस्लिमों, महिलाओं और गरीबों के हित में काम होगा

नई दिल्ली पीएम नरेंद्र मोदी ने वक्फ बोर्ड ऐक्ट बनने को लेकर कहा कि इससे पसमांदा मुस्लिमों, महिलाओं और गरीबों के हित में काम होगा। उन्होंने कहा कि देश अब तक तुष्टिकरण की राजनीति से चलाया आया और उसका हमें खामियाजा भी भुगतना पड़ा। पीएम मोदी ने कहा कि तुष्टिकरण की राजनीति कोई नहीं है। इसका बीज स्वतंत्रता संग्राम के समय ही बो दिया गया था। उन्होंने न्यूज 18 के राइजिंग भारत समिट में हिस्सा लेते हुए कहा, ‘भारत कई देशों के साथ ही आजाद हुआ था, लेकिन किसकी स्वतंत्रता की शर्त विभाजन थी। भारत के साथ ही ऐसा क्यों हुआ। ऐसा इसलिए क्योंकि उस समय राष्ट्र हित से ऊपर सत्ता का मोह हो गया। विभाजन सभी मुस्लिमों का काम नहीं था बल्कि कांग्रेस समर्थित कट्टरपंथियों का काम था।’ उन्होंने कहा कि इसी तुष्टिकरण की राजनीति का शिकार तो पसमांदा मुस्लिम हुए और महिलाएं भी हैं। कांग्रेस ने इसे वोटबैंक की राजनीति का हथियार बना लिया। 2013 में वक्फ बोर्ड में किया गया संशोधन कट्टरपंथियों और भूमाफियाओं को खुश करने का कानून था। वक्फ कानून ने संविधान को भी कमतर कर दिया। हाल यह हो गया कि भूमाफियाओं के हौसले बुलंद हो गए। केरल में ईसाई समुदाय के लोगों की जमीनों पर दावा, हरियाणा में गुरुद्वारों की जमीन पर विवाद हो गया। इसके अलावा उन्होंने कर्नाटक का भी एक मामला बताया। मंदिर, चर्च, गुरुद्वारा, खेत और सरकारी जमीन हो, किसी को यह भरोसा नहीं रह गया था कि उनकी जमीन उनकी ही रहेगी। बस एक नोटिस आता था और लोग अपने ही घर के कागज ढूंढने लग जाते थे। आखिर यह कैसा कानून था, जिसने डर पैदा किया था। अब एक शानदार कानून बना है। यह देश और मुस्लिम समाज के हित में है। इससे वक्फ की पवित्र भावना की भी रक्षा होगी। इसके अलावा गरीब, पसमांदा मुस्लिम और उनके बच्चों के हित सुरक्षित रहेंगे। वक्फ पर हुई डिबेट दूसरी सबसे लंबी बहस थी। इसे सदन में दोबारा लाने से पहले जेपीसी की 38 बैठकें हुई थीं। यह दिखाता है कि भारत में लोकतंत्र कितना प्रभावी है। पीएम मोदी ने कहा कि वक्फ बोर्ड की ताकत इतनी थी कि हर कोई डरा रहता था कि कब नोटिस न आ जाए। नोटिस आया नहीं कि लोग कानूनी लड़ाई में उलझ जाते थे। वह भी उस जमीन के लिए जो उनकी अपनी हुआ करती थी। उन्होंने कहा कि हमने वक्फ बोर्ड ऐक्ट लाकर न्याय किया है और इससे सारी विसंगतियां दूर हो जाएंगी।

प्रधानमंत्री संतगण से करेंगे भेंट, आनंद सरोवर में करेंगे पुष्प अर्पित: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

प्रधानमंत्री मोदी के आगमन से वैशाखी का वार्षिक मेला बनेगा अविस्मरणीय : मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रधानमंत्री बनेंगे आनंदपुर धाम के सेवा कार्यों के साक्षी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रधानमंत्री संतगण से करेंगे भेंट, आनंद सरोवर में करेंगे पुष्प अर्पित: मुख्यमंत्री डॉ. यादव आनंदपुर धाम जैसा केन्द्र, एक बार जरूर देखना चाहिए मुख्यमंत्री ने की प्रधानमंत्री की मध्यप्रदेश यात्रा की तैयारियों की समीक्षा भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंगलवार को वीडियो कान्फ्रेन्स द्वारा ग्वालियर संभाग के कमिश्नर, आईजी सहित वरिष्ठ अधिकारियों और कलेक्टर, एसपी अशोक नगर से चर्चा कर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आगामी 11 अप्रैल को प्रस्तावित कार्यक्रम की व्यवस्थाओं की जानकारी प्राप्त की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आयोजन स्थल पर सभी आवश्यक व्यवस्थाएं गरिमामयपूर्वक सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव इसके पहले गत 4 अप्रैल को आनंदपुर धाम पहुंचकर प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा की तैयारियों को लेकर किये गये प्रबंधों का अवलोकन कर चुके हैं। प्रधानमंत्री मोदी आगामी 11 अप्रैल को मध्यप्रदेश आएंगे। प्रधानमंत्री मोदी अशोक नगर जिले के आनंदपुर धाम में आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। प्रधानमंत्री मोदी परमहंस अद्वैत मत के प्रमुख गुरू महाराज, महात्मा शब्द प्रेमानंद जी और अन्य संतगण से भेंट कर आनंदपुर धाम के सेवा प्रकल्पों की जानकारी लेंगे। धाम में वैशाखी मेले में लगभग 20 हजार श्रद्धालु भागीदारी करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बैठक में कार्यक्रम के स्वरूप और अन्य तैयारियों की विस्तार से जानकारी ली। अधिकारियों ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के लिए सभी जरूरी प्रबंध कर लिए गए हैं। बैठक में मुख्य सचिव अनुराग जैन, मुख्यमंत्री कार्यालय में अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देश के प्रमुख धार्मिक, आध्यात्मिक और सेवा संस्थानों में से एक अशोकनगर के आनंदपुर धाम में प्रतिवर्ष वैशाखी पर वार्षिक मेला लगता है। इस समागम में धाम से जुड़े हजारों देशी-विदेशी अनुयायी पधारते हैं। इस वर्ष प्रधानमंत्री मोदी के आगमन से यह मेला अविस्मरणीय बनने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आनंदपुर धाम जैसे स्थान आस्था के केंद्र होने के साथ ही धार्मिक, आध्यात्मिक पर्यटन के भी बड़े केंद्र हैं। इसे जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों को एक बार जरूर देखना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी आनंद सरोवर में पुष्प करेंगे अर्पित प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार 11 अप्रैल को प्रधानमंत्री मोदी आनंदपुर धाम परिसर स्थित आनंद सरोवर में पुष्प अर्पित करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी को इस धाम में होने वाली भक्ति और ज्ञान से जुड़ी गतिविधियों के साथ ही संचालित सेवा कार्यों की भी जानकारी दी जाएगी। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार प्रधानमंत्री मोदी आनंदपुर सत्संग आश्रम परिसर स्थित चारों मंदिरों को देखेंगे। वे विशाल सत्संग हॉल में मंचीय कार्यक्रम में वैशाखी के वार्षिक मेला आयोजन में नागरिकों और इस धाम से जुड़े देश-विदेश के अनुयायियों को संबोधित करेंगे। वे लंगर में प्रसाद भी ग्रहण करेंगे।  

एक दशक में दूसरी बार भारतीय प्रधानमंत्री ने यात्रा के लिए भारतीय वायुसेना के हेलिकॉप्‍टर का इस्‍तेमाल किया

नई दिल्ली  श्रीलंका की सफल यात्रा के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत लौट आए हैं। थाईलैंड के बाद श्रीलंका पहुंचे पीएम मोदी का जोरदार स्‍वागत किया गया। इस दौरान श्रीलंका के राष्‍ट्रपति अनूरा कुमार दशनायके ने शनिवार को पीएम मोदी को देश का सर्वोच्‍च नागर‍िक सम्‍मान ‘श्रीलंका मित्र व‍िभूषण’ दिया। पीएम मोदी ने बौद्ध धर्मस्‍थलों का भी दौरा किया जिनका भारत से करीबी नाता रहा है। पीएम मोदी की इस यात्रा के दौरान एक दुर्लभ घटना घटी। पीएम मोदी ने श्रीलंका में अनुराधापुरम की अपनी यात्रा के लिए भारतीय वायुसेना के बेहद शक्तिशाली हेलिकॉप्‍टर का इस्‍तेमाल किया। एक दशक में ऐसा दूसरी बार हुआ है जब भारतीय प्रधानमंत्री ने श्रीलंका के अंदर यात्रा के लिए भारतीय वायुसेना के हेलिकॉप्‍टर का इस्‍तेमाल किया। बताया जा रहा है कि कभी तमिल विद्रोही गुट लिट्टे का गढ़ रहे श्रीलंका में सुरक्षा कारणों से पीएम मोदी के लिए यह फैसला लिया गया। यही नहीं पिछले कुछ वर्षों में श्रीलंका के अंदर कई आतंकी हमले भी हो चुके हैं। इसी खतरे को देखते हुए पीएम मोदी के लिए भारतीय वायुसेना के हेलिकॉप्‍टर का इस्‍तेमाल किया गया। पीएम मोदी ने अनुराधापुरम में भारत के वित्‍तपोषण वाले कई रेलवे प्राजेक्‍ट का उद्घाटन किया। इसमें माहो- ओमानथाई लाइन और हाल ही में बनाया गया माहो- अनुराधापुरम खंड शामिल है। इसके अलावा माहो- अनुराधापुरम खंड के सिग्‍नल को भी दुरुस्‍त किया गया। पीएम मोदी ने क‍िया वायुसेना के हेलिकॉप्‍टर का इस्‍तेमाल वरिष्‍ठ पत्रकार येशी सेली ने अपनी रिपोर्ट में खुलासा किया कि सुरक्षा कारणों से भारतीय हेलिकॉप्‍टर इस्‍तेमाल करने का यह फैसला लिया गया था। एक सूत्र ने कहा, ‘यह किसी राष्‍ट्राध्‍यक्ष के लिए ऐसी जगहों पर जिन्‍हें सुरक्षित नहीं माना जाता है, वहां पर अपनी सेना के हेलिकॉप्‍टर या विमान का इस्‍तेमाल करने में कुछ भी असामान्‍य नहीं है। इसके लिए काफी पहले ही हवाई क्लियरेंस ले लिया जाता है।’ उन्‍होंने कहा कि निश्चित रूप से भारतीय प्रधानमंत्री के इस हेलिकॉप्‍टर के लिए पहले ही मंजूरी ले ली गई होगी। दुनियाभर में हाल के वर्षों में राष्‍ट्राध्‍यक्षों के साथ कई ऐसी घटनाएं हुई हैं। माना जा रहा है कि इसी वजह से भी पीएम मोदी को किसी खतरे से बचाने के लिए भारतीय वायुसेना के हेलिकॉप्‍टर का इस्‍तेमाल किया गया। प‍िछले साल 19 मई को ईरानी एयरफोर्स का एक हेलिकॉप्‍टर अजरबैजान की सीमा के पास क्रैश हो गया था और इसमें ईरान के तत्‍कालीन राष्‍ट्रपति इब्राहिम रईसी की मौत हो गई थी। सूत्र ने कहा, ‘श्रीलंका में हालांकि हालात सुधर गए हैं लेकिन फिर भी हम खतरा नहीं उठा सकते हैं।’ माना जा रहा है कि उनका इशारा श्रीलंका के गृहयुद्ध की ओर था जिसमें हजारों लोग मारे गए थे। पीएम मोदी ने एसपीजी के साथ अपनी लैंड रोवर में क‍िया सफर लिट्टे नेता प्रभाकरण की मौत के बाद तमिल हिंसक आंदोलन खत्‍म हो गया। लिट्टे के ही आत्‍मघाती हमले में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की मौत हो गई थी। इससे पहले साल 2015 में जब पीएम मोदी श्रीलंका के अनुराधापुरम, जाफना और तलाईमनार की यात्रा पर गए थे तब उन्‍होंने भारतीय वायुसेना के हेलिकॉप्‍टर का इस्‍तेमाल किया था। पीएम मोदी की यात्रा को देखते हुए श्रीलंका की सरकार ने कुछ समय के लिए अनुराधापुरम के एयरफोर्स बेस को रविवार को इंटरनैशनल एयरपोर्ट घोषित कर दिया था ताकि भारतीय प्रधानमंत्री यहां से आसानी से स्‍वदेश रवाना हो सकें। पीएम मोदी अपनी खास लैंडरोवर कार से इस एयरपोर्ट पर पहुंचे थे जिसे खासतौर पर श्रीलंका पहुंचाई गई थी। पूरी सुरक्षा का जिम्‍मा एसपीजी कमांडो के हवाले था। यह शक्तिशाली कार हर तरह के हमले झेल सकती है।

प्रधानमंत्री मोदी 11 अप्रैल को अशोक नगर जिले के आनंदपुर धाम आयेंगे

PM Modi will visit Anandpur Dham in Ashok Nagar district on April 11 केंद्रीय मंत्री अमित शाह इस माह दो बार आएंगे मध्यप्रदेशकेंद्रीय मंत्री गडकरी 10 अप्रैल को प्रदेश की राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का बदनावर (धार) से करेंगे लोकार्पण और भूमि-पूजननई दिल्ली में 12-13-14 अप्रैल को होगी सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य की प्रस्तुतिकेन्द्र सरकार ने ग्वालियर पश्चिमी बायपास और सागर बायपास सहित प्रदेश की 4 सड़क परियोजनाओं को दी स्वीकृतिकेंद्रीय सड़क और परिवहन मंत्रालय ने दी 4 हजार 303 करोड़ रुपए की सौगातप्रदेश में समर्थन मूल्य पर फसलों का उपार्जन जारीमुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रिपरिषद की बैठक के पहले मंत्रीगण को किया संबोधित भोपाल ! मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंत्रि-परिषद की बैठक से पहले अपने संबोधन में बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 11 अप्रैल को अशोकनगर जिले की ईसागढ़ तहसील स्थित श्री आनंदपुर धाम पधार रहे हैं। केंद्रीय गृह तथा सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह का भोपाल में 13 अप्रैल को और 17 अप्रैल को नीमच में आगमन हो रहा है। उनकी उपस्थिति में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड और दुग्ध संघ के बीच रवीन्द्र भवन में अनुबंध पर हस्ताक्षर होंगे, साथ ही प्रदेश में जारी सहकारिता गतिविधियों की समीक्षा भी की जाएगी। इसी प्रकार 17 अप्रैल को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का नीमच दौरा भी प्रस्तावित है। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी धार जिले के बदनावर से 10 अप्रैल को प्रदेश की विभिन्न राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का लोकार्पण और भूमि-पूजन करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि 12-13-14 अप्रैल को दिल्ली के लाल किला प्रांगण में आयोजित विक्रमोत्सव के अंतर्गत सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य की प्रस्तुति होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मंत्रि-परिषद के साथी इस कार्यक्रम में सहभागिता कर आयोजन की गरिमा बढ़ाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंत्रि-परिषद की बैठक से पहले मंत्रीगण को संबोधित कर रहे थे। राष्ट्रीय राजमार्ग स्वीकृत मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि केंद्रीय सड़क और परिवहन मंत्रालय द्वारा प्रदेश को 4 हजार 303 करोड़ से अधिक की सौगातें मिली हैं। राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण के अंतर्गत 4 कार्यों की स्वीकृति प्रदान की गई है। इसमें 1227 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाला 28.5 किलोमीटर लंबा ग्वालियर पश्चिमी बायपास, 1426 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाला संदलपुर- नसरूल्लागंज बायपास, 330 करोड़ रुपए लागत का राहतगढ़ बरखेड़ी बायपास और 688 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाला सागर बायपास शामिल है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि मंदसौर, दमोह, मुरैना और नरसिंहपुर में इस वर्ष एग्रोविजन का आयोजन किया जाएगा। इसमें कृषि, कृषि अभियांत्रिकी, उद्यानिकी एवं खाद्य प्र-संस्करण, कृषि विश्वविद्यालय, दुग्ध महासंघ, सहकारिता, पशुपालन और पंचयत एवं ग्रामीण विभाग सहभागिता करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों को उनके उपार्जन का सही दाम दिलवाने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। चना, मसूर, सरसों, तुअर और गेहूं का उपार्जन आरंभ कर दिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रदेश में न्यूनतम समर्थन मूल्य व बोनस मिलाकर 2600 रूपए प्रति क्विंटल की दर पर गेहूं उपार्जित किया जा रहा है। अब तक 21.36 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन हो चुका है और 2 लाख 49 हजार किसानों को 4 हजार 12 करोड़ रुपए का भुगतान किया जा चुका है। गेहूं का उपार्जन 5 मई तक चलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मसूर, सरसों, तुअर उपार्जन के लिए जारी गतिविधियों की भी जानकारी दी।

PM मोदी और गृह मंत्री अमित शाह सप्ताहभर में करेंगे प्रदेश दौरा, सियासी सरगर्मी तेज

भोपाल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह मध्य प्रदेश के दौरे पर आ रहे हैं. इस दौरे से मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी सौगात मिलने जा रही है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 11 अप्रेल को मध्य प्रदेश के ग्वालियर और अशोक नगर पहुंचेंगे. वहीं गृह मंत्री अमित शाह 13 अप्रैल को आएंगे. प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के मध्य प्रदेश के दौरे को लेकर प्रशासन तैयारियों में जुटा है. मुख्य सचिव अनुराग जैन ने पीएम की विजिट को लेकर ग्वालियर के अधिकारियों को तैयारियों को लेकर निर्देश दिए हैं. 11 अप्रेल को अशोकनगर पहुंचेंगे पीएम मोदी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 11 अप्रैल को ग्वालियर विमानतल पर उतरेंगे. यहां वे कुछ समय रुकने के बाद अशोकनगर के लिए रवाना होंगे. पीएम मोदी अशोकनगर के ईसागढ़ में स्थित आनंदपुर ट्रस्ट में होने जा रहे कार्यक्रम में शामिल होंगे. पीएम मोदी आनंदपुर धाम में परमहंस अद्वैत मत श्री आनंत शांति कुंज, श्री आनंद शांति भवन और श्री आनंद सरोवर के दर्शन करेंगे. बैसाखी पर आनंदपुर धाम में हर साल मेला भी लगता है. पीएम मोदी की यात्रा के पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहदन यादव यहां का दौरा कर तैयारियों का जायजा ले चुके हैं. 13 अप्रैल को गृह मंत्री अमित शाह भोपाल में पीएम मोदी की यात्रा को लेकर प्रशासन तैयारियों में जुटा है. आनंदपुर धाम ईसागढ़ के दस किलोमीटर के दायरे को नो फ्लाइंग जोन बना दिया गया है. यहां बुधवार 9 अप्रैल से लेकर 11 अप्रैल की रात तक कोई ड्रोन भी नहीं उड़ा सकेगा. उधर, 13 अप्रैल को गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह भोपाल पहुंचने वाले हैं. वे भोपाल के रवीन्द्र भवन में होने वाले राज्य स्तरीय दुग्ध उत्पादक गोपाल सम्मेलन में बतौर मुख्य अतिथि शामिल होंगे. इस सम्मेलन में गृह मंत्री अमित शाह के सामने मध्यप्रदेश के सांची दुग्ध संघों और राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड, एमपी स्टेट को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन के बीच कोलेबोरेशन एग्रीमेंट होगा. दुग्ध उत्पादकों को 5 रुपये प्रति लीटर बोनस इसके साथ ही मध्य प्रदेश के दुग्ध उत्पादक किसानों को दूध पर 5 रुपए प्रति लीटर का बोनस का लाभ देना शुरू होगा. हालांकि किसानों को इसका लाभ उठाने के लिए राज्य सरकार द्वारा पंजीकृत दूध उत्पादक संघ से जुड़ना होगा. योजना का लाभ उन्हीं किसानों को मिलेगा, जो संगठित दुग्ध सहकारी समितियों से जरिए बूध बेचते हैं.

मुद्रा योजना के10 साल, लाभार्थियों में 68% महिलाएं, मोदी बोले- योजना ने लोगों के सपनों को हकीकत बनाया

नई दिल्ली मुद्रा योजना के 10 साल पूरा होने के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को मुद्रा योजना के लाभार्थियों से बातचीत की. इस दौरान कुछ ऐसे मौके भी आए, जब पीएम मोदी ने मजाकिया अंदाज में लोगों से बात की. प्रधानमंत्री आवास पर आयोजित कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कहा कि यह योजना मोदी के लिए नहीं है. यह जरूरतमंदों के लिए है. भारत के लोगों के लिए कुछ भी असंभव नहीं है. लाभार्थियों की यात्रा प्रेरणा देने वाली है. मुद्रा योजना देश के नौजवानों के लिए है. नौजवानों को उनके पैरों पर खड़ा करने के लिए है. इस दौरान पीएम मोदी ने एक लाभार्थी से पूछा कि फिलहाल आपकी आय कितनी है? इस पर उस शख्स की झिझक देखते हुए पीएम मोदी ने कहा कि वित्त मंत्री मेरे बगल में बैठे हैं, उन्हें बोल दूंगा इनकम टैक्स वाले नहीं आएंगे. इस पर सभी ठहाका लगाकर हंसने लगे.. ‘मुद्रा योजना ने कई सपनों को हकीकत में बदला’ पीएम मोदी ने लिखा, ‘आज, जब हम मुद्रा योजना के 10 साल पूरे कर रहे हैं, मैं उन सभी को बधाई देना चाहता हूं, जिनके जीवन में इस योजना की बदौलत बदलाव आया है। इस दशक में मुद्रा योजना ने कई सपनों को हकीकत में बदला है। ऐसे लोगों को सशक्त बनाया है, जिन्हें पहले वित्तीय सहायता से वंचित रखा गया था। यह दर्शाता है कि भारत के लोगों के लिए कुछ भी असंभव नहीं है!’ पीएम ने आगे कहा, भारत के लोगों के लिए कुछ भी असंभव नहीं है, 33 लाख करोड़ देश के लोगों को बिना गारंटी दिए गए, इससे जीवन बदला है, सबसे ज्यादा महिलाएं आगे आई हैं। क लाभार्थी ने बताया कि मुद्रा लोन से अपना बिजनेस सेट-अप करके घर भी खरीदा है। उन्होंने बताया कि जहां पहले उनका सालाना टर्नओवर 12 लाख था, वो अब 50 लाख हो चुका है। उन्होंने पीएम मोदी को इसके लिए थैंक्यू कहा। एक ने कहा मुद्रा योजना से पहले वो 20 हजार रुपए महीना कमाता था, आज उसकी इनकम दोगुनी हो गई है। पहली बार फ्लाइट में बैठी महिला एक लाभार्थी ने बताया कि वह बहुत गरीबी में थीं। उन्होंने बताया कि वह पहली बार दिल्ली आईं और पहली बार ही फ्लाइट में बैठीं। उन्होंने बताया कि उन्हें लोन कैसे मिला। उन्होंने बताया कि वे एक महीने का 60 हजार रुपये इनकम कर रही हैं। पीएम मोदी ने लाभार्थी की सराहना की और उन्हें बधाई दी। नहीं आएंगे इनकम टैक्स वाले इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक लाभार्थी से पूछा कि आपकी आय कितनी है? पीएम मोदी के इस सवाल से लाभार्थी झिझक गया। इस पर पीएम मोदी ने कहा कि वित्त मंत्री मेरे बगल में बैठे हैं, उन्हें बोल दूंगा इनकम टैक्स वाले नहीं आएंगे। पीएम मोदी का इस तरह तंज कसने पर सभी लाभार्थी हंस पड़े।  ये योजना मोदी की तारीफ के लिए नहीं, लाभार्थियों से बोले पीएम लाभार्थियों से बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि मुद्रा योजना मोदी की तारीफी के लिए नहीं है। यह योजना मेरे देश के युवाओं को अपने पैरों पर खड़े होने का साहस देने के लिए है। पीएम मोदी से बात करते हुए मध्य प्रदेश के भोपाल के लाभार्थी लवकुश मेहरा ने कहा, ‘पहले मैं किसी के यहां काम करता था, नौकर था, लेकिन आपने मुद्रा लोन के ज़रिए हमारी गारंटी ली और आज हम मालिक बन गए हैं।’ 50 लाख से ज्यादा का हुआ टर्नओवर इसके साथ ही लवकुश ने कहा, ‘मैंने 2021 में अपना व्यवसाय शुरू किया और मैंने बैंक से संपर्क किया, उन्होंने मुझे 5 लाख रुपये की लोन लिमिट दी। मुझे डर था कि मैं पहली बार इतना बड़ा लोन ले रहा हूं। मैं इसे चुका पाऊंगा या नहीं। आज मेरा मुद्रा लोन 5 लाख रुपये से बढ़कर 9.5 लाख रुपये हो गया है। मेरा पहले साल का टर्नओवर 12 लाख रुपये था, जो अब 50 लाख रुपये से ज्यादा हो गया है।’ क्या है मुद्रा योजना? मालूम हो कि प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, पीएम मोदी की प्रमुख योजना है। इसका उद्देश्य वित्तपोषित सूक्ष्म उद्यमों और छोटे व्यवसायों को वित्तपोषित करना है। पिछले 10 सालों में 50 करोड़ ऋण खातों को मंजूरी दी है। इस योजना में 68 प्रतिशत महिला लाभार्थी प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के 10 साल पूरे होने पर वित्तीय सेवा विभाग के सचिव एमनागराजू ने कहा, ‘प्रधानमंत्री ने उन लोगों के लिए यह व्यवसाय योजना शुरू की है जो बिना किसी गारंटी के ऋण चाहते हैं। हमने पिछले 10 सालों में 50 करोड़ ऋण खातों को मंजूरी दी है और कुल 33 लाख करोड़ रुपये का ऋण दिया है। इनमें से 68 प्रतिशत महिला लाभार्थी हैं, और 50 प्रतिशत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़े समुदायों से हैं। लाभार्थी ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से ऋण के लिए आवेदन कर सकते हैं।’ ‘देश के नौजवानों के लिए है योजना’ पीएम मोदी ने कहा कि मुद्रा योजना मोदी के लिए नहीं है, बल्कि देश के नौजवानों के लिए है।  पीएम मोदी ने कहा- हमारे देश में बहुत कम लोग हैं, जिन्हें पता है साइलेंटली कैसे रिवॉल्योशन हो रहा है। ‘सालाना टर्नओवर 12 से 50 लाख पहुंचा’ पीएम मोदी को लोगों ने अपने अनुभव बताया, एक ने कहा मुद्रा लोन के बाद हमने पेट को लेकर सुविधा शुरू की। अब मुझे इसे बहुत फायदा हो रहा है। पीएम मोदी ने एक लाभार्थी से पूछा कि फिलहाल आपकी आय कितनी है? इस पर उस शख्स की झिझक देखते हुए पीएम मोदी ने कहा कि वित्त मंत्री मेरे बगल में बैठे हैं, उन्हें बोल दूंगा इनकम टैक्स वाले नहीं आएंगे। बता दें कि मुद्रा योजना की शुरुआत आठ अप्रैल 2015 को हुई थी. इससे हर साल मुद्रा योजना 5.14 करोड़ रोजगार का सृजन हुआ है. इस योजना के तहत सरकार ने दस साल में 53 लाख करोड़ का लोन दिया है. पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पोस्ट कर बताया कि मुद्रा योजना के 10 साल पूरा होने के मौके पर मैंने देशभर से मुद्रा लाभार्थियों को अपने निवास पर आमंत्रित किया था. लाभार्थियों ने हमें बताया कि किस तरह यह योजना उनके जीवन में बदलाव लेकर आई है.

तमिलनाडु को रामनवमी पर मिलेगी बड़ी सौगात! PM Modi करेंगे नए पंबन रेल पुल का उद्घाटन

 रामेश्वरम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 6 अप्रैल, रामनवमी को तमिलनाडु के दौरे पर जा रहे हैं. रामनवमी के अवसर पर दोपहर करीब 12 बजे वे भारत के पहले वर्टिकल लिफ्ट समुद्री पुल – नए पंबन रेल पुल का उद्घाटन करेंगे और सड़क पुल से एक ट्रेन और एक जहाज को रवाना करेंगे तथा पुल के संचालन को देखेंगे. इसके बाद दोपहर करीब 12:45 बजे वे रामेश्वरम में रामनाथस्वामी मंदिर में दर्शन और पूजा करेंगे. रामेश्वरम में दोपहर करीब 1:30 बजे वे तमिलनाडु में 8,300 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली विभिन्न रेल और सड़क परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे और उन्हें राष्ट्र को समर्पित करेंगे. इस अवसर पर वे उपस्थित जनसमूह को भी संबोधित करेंगे. प्रधानमंत्री नए पंबन रेल पुल का उद्घाटन करेंगे और रामेश्वरम-तांबरम (चेन्नई) नई ट्रेन सेवा को हरी झंडी दिखाएंगे. रामायण में वर्णित अख्यान के अनुसार रामेश्वरम के पास राम सेतु का निर्माण धनुषकोडी से शुरू हुआ था. वर्टिकल लिफ्ट समुद्री पुल का पीएम करेंगे उद्घाटन रामेश्वरम को मुख्य भूमि से जोड़ने वाला यह पुल वैश्विक मंच पर भारतीय इंजीनियरिंग की एक उल्लेखनीय उपलब्धि के रूप में खड़ा है. इसे 700 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बनाया गया है. इसकी लंबाई 2.08 किमी है, इसमें 99 स्पैन और 72.5 मीटर का वर्टिकल लिफ्ट स्पैन है जो 17 मीटर की ऊंचाई तक उठता है. स्टेनलेस स्टील सुदृढीकरण, उच्च श्रेणी के सुरक्षात्मक पेंट और पूरी तरह से वेल्डेड जोड़ों के साथ निर्मित, पुल में अधिक स्थायित्व और कम रखरखाव की आवश्यकता है. भविष्य की मांगों को पूरा करने के लिए इसे दोहरी रेल पटरियों के लिए डिज़ाइन किया गया है. एक विशेष पॉलीसिलोक्सेन कोटिंग इसे जंग से बचाती है, जिससे कठोर समुद्री वातावरण में दीर्घायु सुनिश्चित होती है. 8300 करोड़ की परियोजना की देंगे सौगात प्रधानमंत्री तमिलनाडु दौरे के दौरान राज्य में 8,300 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली विभिन्न सड़क और रेल परियोजनाओं की आधारशिला रखेंग. इन परियोजनाओं में एनएच-332 के 29 किलोमीटर लंबे विलुप्पुरम-पुडुचेरी खंड को चार लेन का बनाने का काम, एनएच-40 के 28 किलोमीटर लंबे वालाजापेट-रानीपेट खंड को चार लेन का बनाने का शिलान्यास और एनएच-32 के 57 किलोमीटर लंबे पूंडियनकुप्पम-सत्तनाथपुरम खंड और एनएच-36 के 48 किलोमीटर लंबे चोलापुरम-तंजावुर खंड को राष्ट्र को समर्पित करना शामिल है. ये राजमार्ग कई तीर्थस्थलों और पर्यटन स्थलों को जोड़ेंगे, शहरों के बीच की दूरी कम करेंगे और मेडिकल कॉलेज और अस्पताल, बंदरगाहों तक तेजी से पहुंच को सक्षम करेंगे, इसके अलावा स्थानीय किसानों को कृषि उत्पादों को नजदीकी बाजारों तक पहुंचाने और स्थानीय चमड़ा और लघु उद्योगों की आर्थिक गतिविधि को बढ़ावा देने में सशक्त बनाएंगे. पहला वर्टिकल लिफ्ट रेल पुल है पंबन यह नया पुल 2,078 मीटर लंबा और पुराने पुल की तुलना में कहीं अधिक आधुनिक और मजबूत बनाया गया है. यह देश का पहला वर्टिकल लिफ्ट रेल पुल है, जो समुद्री यातायात को सुगम बनाने के लिए ऊपर उठ सकता है. इसका निर्माण बेहतर सुरक्षा और अधिक भार सहन क्षमता को ध्यान में रखते हुए किया गया है, जिससे यह भविष्य में तेज रफ्तार ट्रेनों को भी सुचारू रूप से संचालित करने में सक्षम होगा. 1914 में बना था पुराना पंबन पुल इससे पहले केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा था, “1914 में निर्मित पुराने पंबन रेल पुल ने 105 वर्षों तक मुख्य भूमि को रामेश्वरम से जोड़ा. दिसंबर 2022 में जंग लगने के कारण इसे बंद कर दिया गया, जिसने आधुनिक नए पंबन पुल के लिए मार्ग प्रशस्त किया, जो कनेक्टिविटी के एक नए युग की शुरुआत करेगा!” इस पुल के चालू होने से रामेश्वरम आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बड़ी सुविधा मिलेगी. साथ ही, यह पुल दक्षिण भारत के रेलवे नेटवर्क को और अधिक मजबूत करेगा. इस ऐतिहासिक परियोजना का उद्घाटन राम नवमी जैसे शुभ दिन पर किया जाना इसे और भी खास बना देता है.

पीएम मोदी श्रीलंका के प्रतिष्ठित मित्र विभूषण पदक से किया सम्मानित, पूरी दुनिया में बज रहा भारत का डंका

कोलंबो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने और दोनों देशों की साझा सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को बढ़ावा देने के उनके असाधारण प्रयासों के सम्मान में श्रीलंका सरकार द्वारा प्रतिष्ठित मिथ्रा विभूषण पदक प्रदान किया गया। यह किसी विदेशी राष्ट्र द्वारा प्रधानमंत्री मोदी को प्रदान किया गया 22वां अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार है। असाधारण वैश्विक मित्रता को मान्यता देने के लिए विशेष रूप से स्थापित यह पदक भारत-श्रीलंका संबंधों की गहराई और गर्मजोशी को दर्शाता है। आज शनिवार को पीएम मोदी ने कोलंबो में श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा दिसानायके के साथ जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस को करते हुए कहा, राष्ट्रपति दिसानायके द्वारा श्रीलंका मित्र विभूषण से सम्मानित किया जाना मेरे लिए गौरव की बात है. पीएम मोदी को किसी विदेशी राष्ट्र द्वारा प्रदान किया गया 22वां अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार है प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह सम्मान केवल मेरा सम्मान नहीं, बल्कि यह 140 करोड़ भारतीयों का सम्मान है. यह भी कहा कि यह भारत और श्रीलंका के बीच ऐतिहासिक संबंधों और गहरी मित्रता का सम्मान है. हमने एक सच्चे पड़ोसी मित्र का कर्तव्य निभाया है. 2019 का आतंकी हमला, कोविड महामारी, श्रीलंका आर्थिक संकट का जिक्र करते हुए कहा, भारत हर कठिन परिस्थिति में श्रीलंका के लोगों के साथ खड़ा रहा है. बता दें कि पीएम मोदी को किसी विदेशी राष्ट्र द्वारा प्रदान किया गया 22वां अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार है. असाधारण वैश्विक मित्रता को मान्यता देने के लिए विशेष रूप से स्थापित यह पदक भारत-श्रीलंका संबंधों की गहराई और गर्मजोशी को दर्शाता है. प्रधानमंत्री मोदी ने कोलंबो में श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा दिसानायके के साथ एक जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया. उन्होंने कहा, ‘आज राष्ट्रपति दिसानायके द्वारा श्रीलंका मित्र विभूषण से सम्मानित किया जाना मेरे लिए गौरव की बात है. ये सम्मान केवल मेरा सम्मान नहीं, बल्कि यह 140 करोड़ भारतीयों का सम्मान है. यह भारत और श्रीलंका के बीच ऐतिहासिक संबंधों और गहरी मित्रता का सम्मान है. भारत के लिए यह गर्व का विषय है कि हमने एक सच्चे पड़ोसी मित्र के रूप में अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया है. चाहे 2019 का आतंकी हमला हो, कोविड महामारी हो, या हाल में आया आर्थिक संकट, भारत हर कठिन परिस्थिति में श्रीलंका के लोगों के साथ खड़ा रहा है.’ भारत और श्रीलंका के बीच सदियों पुराने संबंध: PM मोदी पीएम मोदी ने कहा- हमारी ‘नेबरहुड फर्स्ट पॉलिसी’ और विजन ‘महासागर’, दोनों में श्रीलंका का विशेष स्थान है. भारत ने ‘सबका साथ सबका विकास’ के विजन को अपनाया है. हम अपने पार्टनर देशों की प्राथमिकताओं को भी महत्व देते हैं. पिछले 6 महीनों में ही हमने 100 मिलियन डॉलर से अधिक राशि के लोन को ग्रांट में बदला है. हमारे ऋण पुनर्गठन समझौते से श्रीलंका के लोगों को तत्काल राहत मिलेगी और हमने ब्याज दरों को कम करने का भी फैसला किया है. यह दर्शाता है कि आज भी भारत श्रीलंका के साथ मजबूती से खड़ा है. उन्होंने कहा कि भारत और श्रीलंका के बीच सदियों पुराने आध्यात्मिक और आत्मीयता भरे संबंध हैं. मुझे यह बताते हुए अत्यन्त खुशी है कि 1960 में गुजरात के अरावली में मिले भगवान बुद्ध के अवशेष को श्रीलंका में दर्शन के लिए भेजा जा रहा है. त्रिंकोमाली के थिरुकोनेश्वरम मंदिर के जीर्णोद्धार में भारत सहयोग देगा. अनुराधापुरा महाबोधी मंदिर परिसर में पवित्र शहर, और नुरेलिया में ‘सीता एलिया’ मंदिर के निर्माण में भी भारत सहयोग करेगा. भारत-श्रीलंका के सुरक्षा हित एक दूसरे से जुड़े हैं: PM मोदी प्रधानमंत्री मोदी ने श्रीलंकाई राष्ट्रपति के साथ बैठक में हुई चर्चा का जिक्र करते हुए कहा कि हमने मछुआरों की आजीविका से जुड़े मुद्दों पर भी बात की. हम सहमत हैं कि हमें इस मामले में एक मानवीय अप्रोच के साथ आगे बढ़ना चाहिए. हमने मछुआरों को तुरंत रिहा किये जाने और उनकी बोट्स को वापस भेजने पर भी बल दिया. भारत और श्रीलंका का संबंध आपसी विश्वास और सद्भावना पर आधारित है. श्रीलंका में भारतीय मूल के तमिल समुदाय के लिए 10,000 घरों का निर्माण जल्द ही पूरा हो जाएगा. इसके अलावा, 700 श्रीलंकाई कर्मचारियों को भारत में प्रशिक्षित किया जाएगा, जिनमें सांसद, उद्यमी और युवा नेता शामिल हैं. भारत का मानना ​​है कि दोनों देशों के सुरक्षा हित एक दूसरे से जुड़े हुए हैं. हमारी सुरक्षा एक दूसरे पर निर्भर है. श्रीलंका में भी आधार जैसा प्रोजेक्ट, भारत ने दिए 300 करोड़ श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने कहा, ‘मैंने प्रधानमंत्री मोदी से श्रीलंका के इस रुख की पुष्टि की कि वह अपने क्षेत्र का उपयोग भारत की सुरक्षा के साथ-साथ क्षेत्रीय स्थिरता के लिए किसी भी तरह से हानिकारक तरीके से नहीं होने देगा. श्रीलंका विकास, नवाचार और दक्षता को बढ़ावा देने के लिए एक डिजिटल अर्थव्यवस्था विकसित करने के महत्व को पहचानता है. इस नीतिगत पहल को आगे बढ़ाते हुए, प्रधानमंत्री मोदी और मैंने कई क्षेत्रों में डिजिटलीकरण में संभावित सहयोग पर चर्चा की. मैं श्रीलंका की यूनिक डिजिटल आइडेंटिटी प्रोजेक्ट को लागू करने के लिए 300 करोड़ रुपये के वित्तीय अनुदान के लिए भारत सरकार को धन्यवाद देता हूं.’ बौद्ध धर्म भारत से मिला सबसे अनमोल उपहार: दिसानायके श्रीलंकाई राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने कहा, ‘बौद्ध धर्म हमें भारत से मिला सबसे अनमोल उपहार है…मैं इस बात पर ज़ोर देना चाहूंगा कि भारत का समर्थन निश्चित रूप से हमारे लिए महत्वपूर्ण रहा है. प्रधानमंत्री मोदी की सबका साथ सबका विकास की अवधारणा समय की महत्ता की अवधारणा है. उन्होंने हमेशा श्रीलंका और देश के लोगों की ओर दोस्ती का हाथ बढ़ाया है. हमें आज श्रीलंका और भारत के बीच ऊर्जा, रक्षा सहयोग, स्वास्थ्य क्षेत्र, बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और ऋण पुनर्गठन के क्षेत्रों से संबंधित द्विपक्षीय समझौते के आदान-प्रदान से प्रसन्नता हो रही है.’ मोदी शुक्रवार शाम थाईलैंड की दो दिन की यात्रा पूरी कर श्रीलंका पहुंचे जान लें कि प्रधानमंत्री मोदी कल शुक्रवार शाम थाईलैंड की दो दिन की यात्रा पूरी कर श्रीलंका पहुंचे. कोलंबो के भंडारनायके हवाई अड्डे पर श्रीलंका के विदेश मंत्री विजिता हेराथ, स्वास्थ्य मंत्री नलिंदा जयतिसा, मत्स्य पालन मंत्री रामलिंगम चंद्रशेखर और दो अन्य ने उनका भव्य स्वागत किया. बता दें कि पीएम मोदी यह 2019 के बाद पहली श्रीलंका यात्रा है. कोलंबो के इंडिपेंडेंस स्क्वायर में उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया. उन्होंने यहां राष्ट्रपति अनुरा … Read more

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 अप्रैल को वाराणसी आ रहे, यह उनका 11 वर्षों में सबसे छोटा दौरा होगा

 काशी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 अप्रैल को करीब ढाई घंटे तक काशी में रहेंगे। 2600 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण करेंगे। साथ ही रैली के जरिये काशी की जनता से संवाद करेंगे। प्रधानमंत्री के आगमन को देखते हुए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने तैयारी तेज कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि अब तक मिली मौखिक जानकारी के अनुसार प्रधानमंत्री बाबतपुर एयरपोर्ट से सीधे मेंहदीगंज जाएंगे। वहीं से विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण करेंगे। साथ ही रैली को संबोधित करेंगे। फिलहाल शहर में किसी अन्य आयोजन में उनके शामिल होने की संभावना नहीं है। अभी तक पीएमओ से आधिकारिक ब्योरा भी नहीं आया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक बार तैयारियों की समीक्षा कर चुके हैं। 11 से पहले मुख्यमंत्री एक बार और आ सकते हैं। इस बार काशीवासियों को सड़कों और बिजली से जुड़ी परियोजनाओं की सौगात ज्यादा मिलनी है। 9 हेक्टेयर भूमि पर पीएम मोदी का कार्यक्रम प्रशासन से मिली जानकारी के मुताबिक पीएम मोदी का कार्यक्रम करीब 9 हेक्टेयर भूमि पर होगा। इसके लिए 26 काश्तकारों की भूमि ली गई है। जिलाधिकारी एस राजलिंगम ने बताया कि रैली के लिए भूमि आम सहमति से ली गई है। पीएम कर सकते हैं लालपुर स्टेडियम के छात्रावास और दर्शक दीर्घा का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लालपुर के डॉ. भीमराव आंबेडकर स्टेडियम में नवनिर्मित छात्रावास और दर्शक दीर्घा का उद्घाटन कर सकते हैं। यहां निर्माणाधीन कार्यों को पूरा किया जा रहा है। बालक-बालिका वर्ग के खिलाड़ियों के लिए 100-100 बेड का छात्रावास और दर्शक दीघा बनकर तैयार है। सीडीओ हिमांशु नागपाल ने बताया कि यहां सभी काम पूरे हो चुके हैं, केवल टर्फ का काम चल रहा है। छात्रावास के अलावा पीएम मोदी हॉकी टर्फ भी खिलाड़ियों को सौंप सकते हैं। 2013 में बिछाया टर्फ सात वर्ष देरी से बिछाया जा रहा है। एक टर्फ की आयु सीमा पांच वर्ष होती है। यहां नीले रंग के टर्फ को बिछाने का काम अंतिम चरण में हैं। वहीं, करीब 12 करोड़ की लागत से बालक-बालिका का अलग-अलग 100-100 बेड का छात्रावास बनकर तैयार है। इस छात्रावास में फिलहाल एथलेटिक्स, हॉकी और फुटबॉल के खिलाड़ी रहेंगे। पुराने छात्रावास का प्रयोग मैच ऑफिशियल और बाहर से यहां खेलने आने वाली टीमों को ठहराने में होगा। छात्रावास खुल जाने के बाद दूसरे मंडलों से आने वाली टीमों को स्टेडियम के बाहर नहीं ठहराया जाएगा। 15 ब्लॉक में बैठेंगे 30 हजार से ज्यादा लोग मेंहदीगंज में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनसभा के लिए जर्मन हैंगर पंडाल लगाए जा रहे हैं। 15 बीघा के खेत की गेहूं की फसल कटने के बाद शुक्रवार को जमीन के समतलीकरण का काम किया गया। प्रधानमंत्री का संबोधन सुनने के लिए पंडाल के 15 ब्लॉक में 30 हजार से ज्यादा लोग मौजूद रहेंगे। जनसभा स्थल पर निगरानी और सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस तैनात कर दी गई है। मेंहदीगंज में जनसभा स्थल पर पंडाल, मंच, सेफ हाउस सहित अन्य निर्माण कार्य के लिए मुजफ्फरनगर से दीपक जैन अपनी टीम के साथ आए हैं। उन्होंने बताया कि पंडाल में प्रधानमंत्री का मंच 64 गुणा 32 फीट का रहेगा। मंच के सामने डी एरिया के बाद आमजन के बैठने के लिए 15 ब्लॉक बनाए जाएंगे। जनसभा में 30 हजार से ज्यादा लोगों के आने की उम्मीद है। उसी के आधार पर पंडाल का स्वरूप तैयार किया जाएगा। पंडाल में गर्मी से बचाव के लिए कूलर और पंखे की व्यवस्था रहेगी। वहीं, पंडाल के पूर्वी छोर पर पीडब्ल्यूडी द्वारा तीन हेलिपैड के लिए भी निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है। इसके साथ ही जनसभा स्थल और उसके इर्द-गिर्द सफाई कर्मियों ने साफ-सफाई का काम शुरू कर दिया है। जनसभा में आने वालों के लिए पीने के पानी और मोबाइल टॉयलेट की भी व्यवस्था रहेगी।    

मोहम्मद यूनुस से पीएम मोदी ने की बेमन से मुलाकात? तस्वीरों और वीडियो में दिखी तल्‍खी, पहले किया था मिलने से मना

बैंकॉक  बैंकॉक में भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस के बीच मुलाकात हुई है। पहले संभावना जताई गई थी मुलाकात नहीं हो सकती है, लेकिन बांग्लादेश ने बार बार इस द्विपक्षीय बैठक के लिए आग्रह किया था। रिपोर्ट के मुताबिक इस दौरान दोनों नेताओं के बीच शेख हसीना, चिकन नेक, चीन से दोस्‍ती को लेकर बातचीत की गई है। ये मुलाकात करीब 45 मिनट तक चली है। दोनों नेताओं की मुलाकात उस वक्त हुई है जब बांग्लादेश और भारत के बीच के संबंध तनावपूर्ण हो चुके हैं। वहीं मोहम्मद यूनुस ने हाल ही में चीन का दौरा किया था, जहां बीजिंग में उन्होंने बांग्लादेश को ‘समंदर का गार्जियन’ बताया था। जिसका जवाब देते हुए भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा था कि बंगाल की खाड़ी में सबसे ज्यादा तटरेखा भारत की है। बैंकॉक में छठे बिम्सटेक शिखर सम्मेलन के दौरान यह बैठक काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही थी। क्योंकि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर होने वाले लगातार हमलों और शेख हसीना के भारत में रहने को लेकर ढाका और दिल्ली के बीच महीनों से तनाव बना हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेश के अनुरोध पर प्रधानमंत्री मोदी, मोहम्मद यूनुस से मिलने के लिए तैयार हुए थे। इससे पहले मोहम्मद यूनुस ने पिछले साल दिसंबर में नई दिल्ली आने के लिए अनुरोध भेजा था, लेकिन भारत की तरफ से सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं दी गई थी। प्रधानमंत्री मोदी और मोहम्मद यूनुस में मुलाकात बीजिंग की यात्रा के दौरान मोहम्मद यूनुस ने भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र और भूटान, नेपाल और बांग्लादेश में “चीनी अर्थव्यवस्था के विस्तार” की बात की थी, जिसने दिल्ली को आक्रोश में भर दिया है। नई दिल्ली को बांग्लादेश के एंटी इंडिया रूख से चिंता है और भारत को मोहम्मद यूनुस के रवैये पर गहरा शक है। इस मुलाकात के दौरान आई तस्वीरों और वीडियो से पता चलता है कि द्विपक्षीय वार्ता के लिए बैठने से पहले दोनों नेताओं ने एक दूसरे से हाथ मिलाया। गुरुवार रात बिम्सटेक नेताओं के रात्रिभोज में भी मोदी और यूनुस एक दूसरे के बगल में बैठे देखे गए थे, जिससे दोनों नेताओं के बीच होने वाली मुलाकात को लेकर चर्चाएं तेज हो गई थी। इस मुलाकात को भारत और बांग्लादेश संबंधों में मौजूदा तनावपूर्ण दौर के बीच एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक कदम माना जा रहा है. इससे पहले दोनों नेताओं को थाईलैंड की प्रधानमंत्री पैतोंगतार्न शिनवात्रा की ओर से आयोजित डिनर में एक-साथ देखा गया था. दोनों नेताओं की यह मुलाकात ऐसे समय पर हुई है, जब मोहम्मद यूनुस अपने चीन दौरे के दौरान राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ वार्ता को लेकर विवादों में रहे हैं. चीन दौरे पर गए बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने चीन की धरती पर कहा था कि इस क्षेत्र के समंदर का एक मात्र गार्जियन ढाका है. चीन को अपने देश में निवेश करने का न्योता देते हुए यूनुस ने कथित तौर पर भारत की मजबूरियां गिनाई थी और चीन को लुभाते हुए कहा था कि उसके पास बांग्लादेश में बिजनेस का बड़ा मौका है. मोहम्मद यूनुस ने भारत के पूर्वोत्तर राज्यों का जिक्र करते हुए कहा था कि भारत के पूर्वोत्तर राज्यों, जिन्हें सेवन सिस्टर्स कहा जाता है. वे चारों ओर से भूमि से घिरे हुए देश हैं, भारत का लैंड लॉक्ड क्षेत्र हैं. उनके पास समुद्र तक पहुंचने का कोई रास्ता नहीं है. इस पूरे क्षेत्र में जो समंदर है उसका एक मात्र गार्जियन बांग्लादेश है. हालांकि, पीएम मोदी और मोहम्मद यूनुस के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता को लेकर दोनों ही देशों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक ब्योरा जारी नहीं किया गया है. अगस्त 2024 में शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद बांग्लादेश में हिंसा की घटनाएं बढ़ी हैं, जिसका असर द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ा. भारत ने बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों पर हमलों को लेकर बार-बार चिंता जताई है. बता दें कि दोनों नेताओं की यह मुलाकात  पिछले साल पांच अगस्त को बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार के तख्तापलट के बाद पहली बार हुई है. बांग्लादेश में तख्तापलट के बाद शेख हसीना तभी से भारत में रह रही हैं.

सौगात ए मोदी–सौजन्य सौहार्द सद्भाव का संदेश

 नीरज मनजीत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस बार ईद के मुबारक मौके पर 32 हजार मस्जिदों में 32 लाख ग़रीब पसमांदा मुस्लिम परिवारों को “सौगात-ए-मोदी” की किट भेजी है। इस किट में खाने-पीने की चीज़ों के अलावा कपड़े, ख़जूर, ड्राई फ्रूट्स, दूध और चीनी रखी गई थी। महिलाओं के लिए सूट का कपड़ा और पुरुषों के लिए कुर्ता-पायजामा रखा गया था। भारतीय जनता पार्टी के अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जमाल सिद्दीक़ी के मुताबिक़ “रमज़ान का पाक महीना चल रहा था और हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ईद के पवित्र त्यौहार पर “सौगात-ए-मोदी” का मीठा उपहार देकर देश के तमाम मुसलमानों को प्यार का संदेश दिया है कि वे भारत के समूचे 140 करोड़ वासियों के प्रधानमंत्री हैं। जमाल सिद्दीक़ी ने आगे और बताया कि ईद के बाद इस योजना के तहत सिख और ईसाई समुदाय के त्यौहारों के मौके पर भी जरूरतमंद लोगों तक सौगात की ऐसी किट भिजवाई जाएगी। प्रधानमंत्री मोदी के इस कदम पर मिली-जुली प्रतिक्रिया सामने आई है। विपक्ष के बहुत से नेताओं ने इसे नेगेटिव नज़रिए से देखते हुए छलावा बताकर अपने-अपने तरीक़े से मोदी की काफी आलोचना की है। विपक्ष के हिमायती और मोदी के अंध विरोधी इकोसिस्टम के कुछ लोगों ने तो यहाँ तक कह दिया था कि मुसलमानों को यह किट लेनी ही नहीं चाहिए। ये वही लोग हैं, जो कुछ भड़काऊ मजहबी नेताओं के साथ मिलकर मुसलमानों का ब्रेनवॉश करते रहते हैं और उन्हें भारत की मुख्यधारा से दूर रखने की तमाम कोशिशें करते रहते हैं। इन्हें मुसलमानों की दशा सुधारने, उन्हें आगे ले जाने, उन्हें तरक़्क़ी के रास्ते पर डालने में कोई रूचि नहीं है। वे केवल यही चाहते हैं कि मुसलमान हर क़ीमत पर भारतीय जनता पार्टी की ख़िलाफ़त करते रहें और मोदी के विरुद्ध विपक्षी पार्टियों को वोट देते रहें। ये वही इकोसिस्टम है, जिसने सीएए के ख़िलाफ़ मुस्लिम समुदाय को भड़काकर यह असत्य नैरेटिव खड़ा कर दिया था कि इस कानून के लागू हो जाने के बाद मुसलमानों की नागरिकता छीन ली जाएगी। नतीजा यह निकला था कि शाहीन बाग में कई महीनों तक प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली वासियों को सांसत में डालकर रखा था। आज हम अच्छी तरह देख रहे हैं कि सीएए के बाद किसी भी मुसलमान की नागरिकता नहीं छीनी गई है। यही लोग ख़ुद को  मुसलमानों का हितैषी बताकर औरंगज़ेब जैसे क्रूर शख़्स को अकबर से भी बड़ा और महान बादशाह बता देते हैं। तुष्टीकरण की घातक नीति पर चलकर मुस्लिम वोटबैंक का चैंपियन बनने की होड़ इस क़दर जारी है कि विपक्ष के कुछ नेता तो सारी हदें पार करके अपने ही पुरखों और अपने ही सनातन धर्म को गालियाँ देने लगते हैं। ऐसे नेताओं के प्रति मुसलमानों के दिल में कितनी इज़्ज़त होगी, इसका अंदाज़ा आसानी से लगाया जा सकता है। ऐसे नेताओं और दलों को समझना होगा कि आज़ादी के बाद, जब न्याय और समानता की जरूरत थी, तुष्टीकरण की भयावह नीति ने देश और देश के बहुसंख्यक समुदाय का कितना नुक़सान किया है। इस नीति ने मुस्लिम समुदाय का भी भला नहीं किया है। ये वही इकोसिस्टम है जो आज वक़्फ़ संशोधन बिल को लेकर मुस्लिम समुदाय को भड़काकर सड़क पर उतारना चाहता है। असदुद्दीन ओवैसी जैसे कुछ नेता इनके साथ मिलकर यह नैरेटिव सेट कर रहे हैं कि वक़्फ़ बिल के पास होने के बाद मुस्लिम समुदाय से उनकी मस्जिदें, मजारें और कब्रिस्तान छिन जाएँगे। यह नैरेटिव भी पूरी तरह असत्य की बुनियाद पर खड़ा किया गया है। कितनी बड़ी विडंबना है कि ओवैसी और विपक्ष के नेता इस संशोधन बिल को असंवैधानिक बता रहे हैं। जबकि सच तो यह है कि वक़्फ़ बोर्ड को जिस तरह से असीमित अधिकार दे दिए गए हैं, वे ही अपने-आप में संविधान की मूल भावना के ख़िलाफ़ है। कोई भी संस्था जिसे सुप्रीम कोर्ट से भी ज़्यादा अधिकार दे दिए गए हों, जो सेक्युलरिज्म की मूल अवधारणा के विरुद्ध असमानता की बुनियाद पर खड़ी हो, उसे संवैधानिक कैसे माना जा सकता है? ओवैसी और विपक्ष के कुछ नेता इस बिल की पेशकदमी को भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन एनडीए में विभाजन का एक अवसर भी मान रहे थे। वे लगातार नीतीश कुमार और चन्द्रबाबू नायडू पर दबाव डाल रहे थे कि वक़्फ़ बिल के ख़िलाफ़ उनकी पार्टियों–जनता दल यूनाइटेड और तेलुगू देशम पार्टी–को भाजपा से समर्थन वापस ले लेना चाहिए। मगर नीतीश और चन्द्रबाबू ने भाजपा और मोदी के साथ पूरी दृढ़ता से खड़े होकर ओवैसी और विपक्ष की उम्मीदों पर पूरी तरह पानी फेर दिया है। सच कहा जाए तो नीतीश और चन्द्रबाबू ने दूरदर्शिता का परिचय देते हुए विपक्ष के छद्म धर्म निरपेक्षता के तंत्र को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है। इसके अलावा यह भी साफ़ हो गया है कि  प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में एनडीए की सरकार अपना पाँच साल का कार्यकाल अवश्यमेव पूरा करेगी। दरअसल वक़्फ़ बिल की ख़िलाफ़त करते हुए कुछ मुस्लिम नेताओं और मौलानाओं ने बड़ा ही आक्रामक रवैया अपनाकर पूरे देश में मुस्लिम समुदाय को सड़कों पर उतारने की पूरी कोशिश की थी। शुक्र है कि मुसलमानों का एक बहुत बड़ा तबका और बहुत से मौलाना इस बिल के पक्ष में खड़े हैं। लगता है कि मुस्लिम समुदाय को धीरे-धीरे समझ में आने लगा है कि कौन उनका वास्तविक हितैषी है और कौन उन्हें सिर्फ़ एक हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने समन्वय और सौजन्य की नीति पर चलते हुए “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” के मूलमंत्र को धरातल पर उतारा है। मोदी सरकार की सभी कल्याणकारी योजनाओं का फ़ायदा समान रूप से हर समुदाय के हितग्राही तक पहुंच रहा है। प्रधानमंत्री मोदी इससे पहले भी सामाजिक समरसता बढ़ाने के उद्देश्य से पसमांदा मुसलमानों के सम्मेलन में शामिल हो चुके हैं। “सौगात-ए-मोदी” इसी दिशा में सद्भाव सौजन्य समन्वय सौहार्द कायम रखने का एक छोटा सा प्रयास है।

पीएम मोदी थाईलैंड और श्रीलंका की यात्रा करेंगे, बैंकॉक में बिम्सटेक शिखर सम्मेलन में करेंगे शिरकत

नई दिल्ली बंगाल इनिशिएटिव फॉर सेक्टोरल टेक्निकल एंड इकॉनोमिक कोऑपरेशन (BIMSTEC) का छठा शिखर सम्मेलन 4 अप्रैल को बैंकॉक में आयोजित होने जा रहा है. इस सम्मेलन से पहले दो अप्रैल को वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक और 3 अप्रैल को विदेश मंत्रियों की बैठक होगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी सम्मेलन में शामिल होने के लिए गुरुवार को बैंकॉक के लिए रवाना होंगे. बैंकॉक में छठा शिखर सम्मेलन कोलंबो में हुए पिछले शिखर सम्मेलन (30 मार्च, 2022) के तीन साल बाद आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम का विषय ‘समृद्ध, लचीला और खुला बिम्सटेक’ तय किया गया है, जो क्षेत्रीय एकीकरण और आर्थिक सहयोग के लिए इस मंच की प्रतिबद्धता को दर्शाता है. एक व्यापक एजेंडे के साथ, शिखर सम्मेलन का मसकद साझा सुरक्षा और विकास संबंधी चुनौतियों को हल करके सात सदस्य देशों, यानी बांग्लादेश, भूटान, भारत, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका और थाईलैंड के बीच सहयोग को मजबूत करना है. शिखर सम्मेलन की मुख्य विशेषताओं में 6वें बिम्सटेक शिखर सम्मेलन घोषणापत्र को अपनाना शामिल है, जो नेताओं के दृष्टिकोण और निर्देशों को हाईलाइट करेगा. साथ ही ऐतिहासिक बैंकॉक विजन 2030, भविष्य के सहयोग को बढ़ाने के लिए पहला रणनीतिक रोडमैप होगा. क्षेत्रीय संपर्क की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में सभी देशों के नेता समुद्री परिवहन सहयोग समझौते पर भी हस्ताक्षर करेंगे, जिसका उद्देश्य बंगाल की खाड़ी में व्यापार और यात्रा का विस्तार करना है. बिम्सटेक का क्या मकसद बढ़ती भू-राजनीतिक और आर्थिक अनिश्चितताओं के दौर में 6वें बिम्सटेक शिखर सम्मेलन से बंगाल की खाड़ी में सहयोग के लिए प्राथमिक क्षेत्रीय मंच के तौर पर संगठन की भूमिका को मजबूत करने की उम्मीद है. पांच दक्षिण एशियाई और दो दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ, बिम्सटेक क्षेत्रीय मामलों में एक अधिक गतिशील और प्रभावशाली खिलाड़ी बनने के लिए तैयार है. साल 1997 में अपनी स्थापना के बाद से बिम्सटेक ने पांच शिखर सम्मेलन आयोजित किए हैं. बैंकॉक (2004), नई दिल्ली (2008), नेपीडॉ (2014), काठमांडू (2018) और कोलंबो (2022). संगठन सात प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करता है जिनमें कृषि और खाद्य सुरक्षा, कनेक्टिविटी, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन, लोगों से लोगों का संपर्क, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, सुरक्षा, व्यापार और निवेश, साथ ही आठ उप-क्षेत्र, जिनमें ब्लू इकोनॉमी, आपदा प्रबंधन और स्वास्थ्य शामिल हैं. भारत सबसे प्रभावशाली सदस्य विशेषज्ञों का मानना है कि बिम्सटेक का यह शिखर सम्मेलन इसकी रणनीतिक दिशा को आकार देने में मददगार साबित होगा. साथ ही यह सुनिश्चित करेगा कि यह बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में आर्थिक विकास, सुरक्षा सहयोग और सतत विकास के लिए एक यह मंच महत्वपूर्ण ताकत बना रहे. भारत, बिम्सटेक के चार संस्थापक सदस्यों में से एक है, जो सुरक्षा, ऊर्जा और आपदा प्रबंधन में क्षेत्रीय सहयोग का नेतृत्व करता है. बिम्सटेक सचिवालय के बजट में सबसे बड़ा योगदानकर्ता (32 प्रतिशत) होने के नाते, भारत दो बिम्सटेक केंद्रों की मेजबानी करता है. नोएडा, उत्तर प्रदेश में बिम्सटेक मौसम और जलवायु केंद्र और बेंगलुरु में बिम्सटेक ऊर्जा केंद्र. साथ ही कृषि, आपदा प्रबंधन और समुद्री परिवहन में उत्कृष्टता के तीन और नए केंद्रों का प्रस्ताव दिया गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिम्सटेक के पीछे सबसे बड़ी प्रेरक शक्ति रहे हैं, उन्होंने गोवा में बिम्सटेक नेताओं की रिट्रीट (2016) की मेज़बानी की और संस्थागत क्षमता को मज़बूत करने के लिए 5वें बिम्सटेक शिखर सम्मेलन में एक मिलियन डॉलर के वित्तीय अनुदान की घोषणा की थी. भारत ने जुलाई 2024 में दूसरे बिम्सटेक विदेश मंत्रियों की रिट्रीट की मेज़बानी की, जिसमें नए केंद्रों, अंतरिक्ष सहयोग और लोगों के बीच आदान-प्रदान को लेकर पहल की गई थी. साथ ही भारत ने न्यूयॉर्क में 79वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा में बिम्सटेक विदेश मंत्रियों की अनौपचारिक बैठक की अध्यक्षता भी की. चीन को चुनौती देने की तैयारी नेबरहुड फर्स्ट पॉलिसी, एक्ट ईस्ट पॉलिसी और सागर (क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास) विजन, बिम्सटेक देशों के साथ भारत के मजबूत द्विपक्षीय संबंधों को दर्शाते हैं. बंगाल की खाड़ी क्षेत्र एक चौराहे पर खड़ा है, भारत की प्रतिबद्धता यह सुनिश्चित करती है कि बिम्सटेक एक एक्टिव फोरम के तौर पर विकसित हो, जो साझा-समृद्ध भविष्य के लिए संस्कृतियों और अर्थव्यवस्थाओं के बीच सामंजस्य स्थापित कर सके. भारत ने सार्क को पीछे छोड़ते हुए अब अपना फोकस बिम्सटेक की तरफ मोड़ लिया है. सार्क सदस्यों में पाकिस्तान के शामिल होने की वजह से लगातार बाधाएं पैदा होती थीं और साल 2016 में उरी हमले के बाद सार्क का कोई भी सम्मेलन आयोजित नहीं हुआ है. ऐसे में अब सार्क को एक तरह से निष्क्रिय मंच माना जा रहा है. उधर, बंगाल की खाड़ी से सटे देशों पर चीन का प्रभुत्व खत्म करने और उसके विस्तारवाद को चुनौती देने के मकसद से भी भारत बिम्सटेक को प्राथमिकता दे रहा है. अगर भारत इस मंच का नेतृत्व अच्छी तरह से करता है तो सदस्य देशों को चीन का साथ देने में मुश्किल होगी और ऐसे में भारत न सिर्फ बिम्सटेक बल्कि एशिया का नेतृत्व करने की क्षमता रखता है. सदस्य देशों के साथ मजबूत संबंध भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और बिम्सटेक में सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति है. ऐसे में बिम्सटेक के मंच का इस्तेमाल करके सदस्य देशों के बीच आपसी सहयोग बढ़ाने से भारत अपनी पूर्वी सीमा से सटे इन देशों के साथ मजबूत संबंध स्थापित कर सकता है जिससे चीन को कड़ी चुनौती मिलेगी. अगर इन देशों के साथ भारत के संबंध मजबूत होंगे तो ये सदस्य देश भी भारत के हितों को चीन से ऊपर रखेंगे और वहां ड्रैगन के किसी प्रोजेक्ट को मंजूरी देने से पहले अपने रिश्तों के बारे में जरूर विचार करेंगे. 2015 के बाद से मोदी की द्वीप राष्ट्र की चौथी यात्रा 2015 के बाद से यह प्रधानमंत्री मोदी की द्वीप राष्ट्र की चौथी यात्रा होगी। इससे पहले पीएम मोदी ने 2015, 2017 और 2019 में श्रीलंका का दौरा किया था। यह यात्रा ऐसे वक्त हो रही है, जब भारत और श्रींलका के बीच मछुआरों की गिरफ्तारी का मुद्दा गरम है। इस कारण से दोनों देशों के बीच तनातनी चल रही है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन कई बार विदेश मत्री एस. जयशंकर को पत्र लिखकर मुद्दे के स्थायी हल निकालने के लिए काम करने को कह चुके हैं। इस साल करीब 150 से … Read more

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