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चुनाव प्रचार के दौरान नेताओं की सभा में नहीं जुट पा रही भीड़,

मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव (Madhya Pradesh Assembly Elections)में प्रचार के दौरान प्रत्याशियों (candidates)को खासी मुसीबत (Trouble)का सामना करना पड़ रहा है. ग्रामीण इलाकों (localities)में राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों (candidates)को सुनने के लिए लोग इकट्ठा नहीं हो पा रहे हैं. सभाओं में खाली कुर्सियां नेताओं के लिए बड़ी मुसीबत बनी हुई हैं. राघोगढ़ के भाजपा प्रत्याशी हीरेंद्र सिंह के एक कार्यकर्ता सम्मेलन में ग्रामीण इकट्ठा नहीं हो पाए. नतीजतन कुर्सियां खाली पड़ी रहीं. धरनावदा में आयोजित अपनी सभा में खाली कुर्सियों को देखकर बीजेपी प्रत्याशी हीरेंद्र सिंह ने मंच से कहा, मैं 100 टंच किसान हूं. पार्टी ने मुझे टिकट दिया इसलिए कुर्ता पजामा पहनकर घूम रहा हूं. फसल कटाई चल रही है, इसलिए लोग खेतीबाड़ी में व्यस्त हैं. युवा वर्ग भी काम पर निकल जाता है इसलिए लोग नहीं आ पाए. मैं किसानों की परेशानी समझता हूं. कार्यकर्ता सम्मेलन में भाजपा प्रत्याशी ने खुद को कट्टर सनातनी बताते हुए कहा कि चुनाव तो हम जीत चुके हैं. विपक्षियों की बौखलाहट दिखाई दे रही है. कांग्रेस के ठेकेदार डराने धमकाने का काम कर रहे हैं. भाजपा में कोई ठेकेदार नहीं है बल्कि संगठन सर्वोपरी है. हीरेन्द्र सिंह ने कांग्रेसी नेता वीरेंद्र रघुवंशी का भी जिक्र किया. कहा कि वीरेंद्र भैया के साथ बहुत बुरा हुआ. पार्टी में वापस लौटेंगे तो मान सम्मान के साथ उनका स्वागत किया जाएगा. हीरेन्द्र सिंह ने दिग्विजय सिंह पर कटाक्ष करते हुए कहा कि कमलनाथ उनके कपड़े फाड़ने की बात कर रहे हैं. बड़े लोगों की बड़ी बातें होती हैं. बीजेपी प्रत्याशी ने कार्यकर्ताओं को नसीहत देते हुए कहा कि अब बैठकों का दौर खत्म हो चुका है. समय कम है. चुनाव में जुट जाएं. चुनाव बेटी की शादी की तरह होता है. डेढ़ महीने पहले से जुटना पड़ता है . वहीं, राघोगढ़ से कांग्रेस के प्रत्याशी विधायक जयवर्धन सिंह भी विधानसभा क्षेत्र में प्रचार प्रसार करने में जुटे हैं. जयवर्धन ने मंच से बयान देते हुए कहा बीजेपी के राज में किसान बदहाल है. सहकारी बैंकों में करोड़ों के घोटाले हो रहे हैं. 2003 से पहले जब कांग्रेस सरकार थी तो हर पांच साल में कृषि मंडी, सहकारी बैंक और सोसाइटी में चुनाव होते थे. लेकिन अब भाजपा के दलाल इन संस्थाओं में बैठ गए हैं. हाल ही में दिग्विजय सिंह के विधायक पुत्र का वीडियो भी वायरल हुआ था, जिसमें वे एक मासूम बच्चे को गोद में लेकर भाषण देते दिखाई दिए थे. बता दें कि मध्य प्रदेश की 230 सदस्यीय विधानसभा के आगामी चुनाव के लिए 17 नवंबर को मतदान होगा और मतों की गिनती 3 दिसंबर को होगी.

पूर्व मंत्री इमरती देवी की सिंधिया से मांग, बोलीं-डबरा को जिला बनवा दें, मैं राजनीति छोड़ दूंगी

संतोष सिंह तोमर,ग्‍वालियर । डबरा विधानसभा से भाजपा प्रत्याशी और पूर्व मंत्री इमरती देवी (Imarti Devi) का एक वीडियो सामने आया है जिसमें उन्होंने डबरा (Dabra) को जिला बनाने की मांग उठाई है। उन्होंने एक कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) के सामने ऐलान कर दिया कि इस बार डबरा को जिला बनवा दीजिए। भले ही आगे मुझे टिकट मत देना, लेकिन डबरा को जिला बनवा दें। मैं अपनी राजनीति खत्म कर दूंगी। पूर्व मंत्री इमरती देवी भाजपा के बूथ कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित कर रही थीं। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया भी शामिल हुए। मध्य प्रदेश की राजनीति में अपने बयानों में हमेशा में हमेशा चर्चा में रहने वाली पूर्व मंत्री और भाजपा नेता इमरती देवी में आज डबरा तहसील को जिला बनाने की मांग की। बीजेपी के बूथ कार्यकर्ता सम्मेलन में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से उन्होंने मंच से मांग उठाई कि महाराज डबरा को जिला बनवा दीजिए मुझे अब कोई और काम नहीं चाहिए। यदि मैं मर गई तो डबरा के लोग कहेंगे कि डबरा को जिला ज्योतिरादित्य सिंधिया और इमरती देवी ने बनवाया था। इमरती देवी ने कहा- महाराज इस बार डबरा को जिला बनवा दीजिए भले ही आगे मुझे टिकट देना या ना देना, जिला बनते ही मैं अपनी राजनीति खत्म कर दूंगी। भाजपा ने डबरा विधानसभा से पूर्व मंत्री इमरती देवी को अपना प्रत्याशी बनाया है। वहीं कांग्रेस ने मौजूदा विधायक सुरेश राजे को फिर से मैदान में उतारा है। डबरा विधानसभा में समधि और समधन के बीच कड़ी टक्कर मानी जा रही है। पिछले 2020 के उपचुनाव में उनके समधी सुरेश राजे ने इमरती देवी को शिकस्त दी थी।

अस्पताल की व्यवस्था देखकर नाराज हुआ केन्द्रीय दल

आदित्य शर्मा,उज्जैन। तीन दिन पहले चरक तथा जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं जांचने के लिए एनक्यूए अर्थात् नेशनल क्वालिटी असिसमेंट का दो सदस्यीय दल रायसेन से आया था। दल को चरक अस्पताल में तो व्यवस्थाएं ठीक नजर आई, लेकिन जिला अस्पताल में व्यवस्थाओं और मरीजों की हालत देखकर दल के सदस्य नाखुश थे। जिला अस्पताल प्रबंधन से जुड़े सूत्रों ने बताया कि तीन दिन पहले एनक्यूए के दल ने नागपुर से दो डॉक्टर्स की टीम आई थी। टीम दो दिन शहर में रूकी थी। पहले दिन दल द्वारा मातृ शिशु चरक अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं जांची गई थी। इनमें दल ने चरक अस्पताल की सेंट्रल लैब, वार्डों में मरीज के बेड और अन्य सुविधाएं से लेकर स्टॉफ आदि के बारे में विस्तार से जानकारी ली थी। सूत्र बताते है कि यहां की व्यवस्थाओं को एनक्यूए का जांच दल संतुष्ट था, लेकिन अगले दिन जब टीम ने जिला अस्पताल का दौरा किया तो यहां पर करीब हर वार्ड में मरीजों के पलंग पर बिछे हुए गद्दे पुराने और फटे हुए थे। चादर और कंबल भी पलंगों पर पर्याप्त नहीं थे। इसके अलावा वार्डों के दरवाजों में लगे शीशे भी ज्यादातर टूट हुए थे। सूत्रों का कहना है जिला अस्पताल के यह हाल देखकर दल के सदस्य नाराज हुए थे और यहां से नाखुश होकर लौटे हैं। उल्लेखनीय है एनक्यूए दल की रिपोर्ट के आधार पर ही स्वास्थ्य विभाग सरकारी अस्पतालों को लाखों का अनुदान जारी करता है।

कांग्रेस नेता सिद्धार्थ तिवारी एवं पन्ना जिले से पूर्व विधायक फुंदर लाल चौधरी ने भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की.

Siddhart Tiwari; Shivraj Singh Chouhaan; VD Sharma; BJP; MPCongress;

Congress leader Siddharth Tiwari and former MLA from Panna district, Fundar Lal Choudhary, have joined the Bharatiya Janata Party as members.

MP : मैंने पॉलिटिक्स नहीं छोड़ी, अभी प्रचंड राजनीति करनी है : उमा भारती ने

रायसेन. मध्य प्रदेश में विधानसभा के उपचुनाव में 3 नवंबर को वोटिंग होनी है. इससे पहले सभी राजनीतिक दल अपनी पूरी ताकत चुनाव प्रचार में झोंक दिए हैं. इसके तहत ही पूर्व केन्द्रीय मंत्री व बीजेपी की वरिष्ठ नेता उमा भारती रायसेन में सांची विधानसभा सीट से प्रत्याशी प्रभुराम चौधरी के समर्थन में सभा करने पहुंची. यहां उमा भारती ने आमसभा को संबोधित किया. इस दौरान उमा भारती ने खुद की पॉलिटिकल करियर को लेकर भी बयान दिया. रायसेन में उमा भारती ने कहा कि मुझे आप गरीब लोगों की इज्जत से मतलब रहता है. देश के सम्मान स्वाभिमान से मतलब रहता है. इसलिए भाजापा में वापसी हुई. केन्द में मंत्री बनाया गया. मैंने कहा दो तीन साल चुनाव नहीं लड़ना है. मैंने राजनीति नहीं छोड़ी. अभी प्रचंड राजनीति करनी है. अभी तो 2024 का लोकसभा का चुनाव लड़ना है. 2 से 3 साल गंगा के कार्य के लिए लगाना है. वो कार्य राजनीति से नहीं हो सकता है. गंगा ऐसा विषय है, जिसमें सारे राजनीतिक दल एक हैं. कोई भी व्यक्ति राजनीति में राह कर गंगा का काम ठीक से नहीं कर पाएगा. बीजेपी का मंत्र बूथ जीता तो चुनाव जीता बीजेपी उपचुनाव में ‘बूथ जीता तो चुनाव जीता’ के मंत्र के साथ चुनावी रण में जुटी है. इसी के तहत 26 अक्टूबर विजयादशमी से 1 नवम्बर तक विजय जनसंपर्क अभियान चलाया जा रहा है. इस अभियान में मुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष, पार्टी के राष्ट्रीय पदाधिकारी, केंद्रीय मंत्री एवं वरिष्ठ नेतागण कार्यकर्ताओं के साथ बूथ स्तर तक पहुंचकर विजय संपर्क अभियान में शामिल होंगे. बीजेपी इससे पहले मंडल सम्मेलन और बूथ सम्मेलन के ज़रिए भी अपनी चुनावी रणनीति को धार दे चुकी है.

MP : उपचुनाव में संभावित करारी हार से बीजेपी में हड़कंप, सरकार कैसे बचे ? इस पर बन रही रणनीति

भोपाल। मध्य प्रदेश की 28 विधानसभा सीटों पर चल रहे उपचुनाव को लेकर बीजेपी खेमे में हड़कंप की स्थति है. जनता के मूड को देखते हुए बीजेपी नेताओं ने उपचुनाव के बाद के हालातों पर चिंतन शुरू कर दिया है. यही कारण है कि बीजेपी ने निर्दलीयों को मनाना शुरू कर दिया है। कमलनाथ बार-बार दोहरा रहे हैं कि यह चुनाव मध्यप्रदेश के भविष्य का चुनाव है। वहीं गृह मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा का कहना है कि मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार को उपचुनाव से कोई खतरा नहीं है। यदि एक भी सीट जीत गए तो सरकार हमारी बनी रहेगी। गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने बयान दिया है कि भाजपा को जोड़-तोड़ की जरूरत नहीं है। हमारे पास 114 विधायक पहले से हैं, एक और जीतेंगे तो 115 हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि हम ओवरलोड नहीं होना चाहते हैं, संपर्क में तो और भी बहुत विधायक हैं। राजनीति के पंडित नए गुणा भाग में लग गए हैं। वह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि नरोत्तम मिश्रा ने जो 114 का आंकड़ा बताया है, वह किस तरह से पूरा होता है। वर्तमान में मध्य प्रदेश की 230 सीटों में से भाजपा के पास 107 विधायक हैं, दो निर्दलीय विधायकों का भी समर्थन हासिल है। ऐसे में 109 सीटें हो जाती हैं। नरोत्तम मिश्रा के अनुसार भाजपा- 107, बसपा-2, सपा 1 और निर्दलीय-4 मिलाकर 114 विधायक। कमलनाथ सरकार के दौरान कांग्रेस के पास 114 सीटें थीं, उसके बाद बसपा-2, सपा 1 और निर्दलीय-4 मिलाकर कुल 221 सीटें हो रही थीं। राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं कि नरोत्तम मिश्रा, जिन बाकी 7 विधायकों की बात कर रहे हैं, दरअसल उन्होंने पार्टी ज्वाइन नहीं की है। वह तो जिधर दम, उधर हम वाली बात पर चलते हैं। इसके पहले कांग्रेस सरकार को समर्थन दे रहे थे। उपचुनाव के बाद अगर कांग्रेस की स्थिति ठीक रही तो ये फिर से पाला बदल सकते हैं और निर्दलीय विधायकों पर दलबदल कानून भी लागू नहीं होता है। एक निर्दलीय विधायक के साथ मंत्री का प्रेस कॉन्फ्रेंस करना बताता है कि सब कुछ भाजपा के फेवर में नहीं है। उन्हें भी इस बात की आशंका है कि उप चुनाव के बाद स्थितियां अगर गड़बड़ाएगी तो उसके लिए पहले से ही निर्दलीयों को साध कर रखा जाएगा।

MP : सिलावट और राजपूत को मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ेगा, जानें क्यों ?

भोपाल। मध्य प्रदेश की सत्ता का भविष्य तय करने वाले 28 विधानसभा सीटों के उपचुनाव की तारीखों का ऐलान हो गया है। ऐसा पहली बार होगा, जब 14 मंत्री उपचुनाव लड़ेंगे। लेकिन इसमें दो मंत्री तुलसीराम सिलावट और गोविंद सिंह राजपूत को मंत्री पद गंवाना पड़ेगा, क्योंकि उनका कार्यकाल 20 अक्टूबर को समाप्त हो जाएगा। इसलिए मतदान के दिन यानि 3 नवंबर को ये दोनों बगैर मंत्री पद के मैदान में होंगे। दोनों ने कांग्रेस और विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने के बाद 21 अप्रैल को भाजपा की सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली थी। नियमों के अनुसार, कोई भी ऐसा व्यक्ति 6 माह से ज्यादा समय के लिए मंत्री नहीं रह सकता है, जो विधानसभा का सदस्य न हो। इस हिसाब से 21 अक्टूबर को दोनों मंत्रियों की यह समय-सीमा समाप्त हो जाएगी। इस समय-सीमा में उपचुनाव की प्रक्रिया भी पूरी नहीं होगी। गोविंद सिंह राजपूत सुरखी और तुलसी सिलावट सांवेर से अपनी परंपरागत सीटों से उप चुनाव लड़ रहे हैं। सिंधिया के समर्थन में 10 मार्च को 22 विधायकों ने इस्तीफा दे दिया था, जिसके कारण कमलनाथ सरकार गिर गई थी और चौथी बार शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। शिवराज ने 28 दिन बाद 21 अप्रैल को मंत्रिमंडल का गठन किया था, इसमें सिंधिया खेमे के तुलसीराम सिलावट और गोविंद सिंह राजपूत को कैबिनेट मंत्री के तौर पर शपथ दिलाई गई थी। शिवराज सरकार के इन 14 मंत्रियों की प्रतिष्ठा दांव पर कांग्रेस के 25 पूर्व विधायकों के इस्तीफे से सरकार अल्पमत में आ गई थी और कमलनाथ सरकार गिर गई। बाद में ये सभी भाजपा में शामिल हो गए, तब इनमें से भाजपा ने 14 को मंत्री पद से नवाजा। इन उप चुनावों में इन बगैर विधायकी के मंत्री बने मंत्रियों की प्रतिष्ठा दाव पर लगी है। इसमें खास ये है कि 20 अक्टूबर को मंत्री गोविंद सिंह राजपूत और तुलसी सिलावट का मंत्रिपद खत्म हो जाएगा। 3 नवंबर के ये दोनों बगैर मंत्री रहे मैदान में होंगे। इन 14 मंत्रियों में इमरती देवी, प्रद्युम्न सिंह तोमर, महेंद्र सिंह सिसोदिया, गोविंद सिंह राजपूत, तुलसी सिलावट, प्रभुराम चौधरी, हरदीप सिंह डंग, राजवर्धन सिंह दत्तीगांव, बिसाहूलाल सिंह, एदल सिंह कंसाना, बृजेंद्र सिंह यादव, सुरेश धाकड़, ओपीएस भदौरिया और गिर्राज दंडोतिया शामिल हैं। विधानसभा के प्रमुख सचिव एपी सिंह का कहना है कि प्रावधान यही है कि 6 माह तक ऐसे व्यक्ति को मंत्रिमंडल का सदस्य रखा जा सकता है, जो विधानसभा का सदस्य नहीं है। इस अवधि में उसका विधानसभा का सदस्य निर्वाचित होना जरूरी है। अगर ऐसा नहीं हुआ तो निर्धारित अवधि के बाद संबंधित व्यक्ति अपने आप ही मंत्री पद से हट जाता है। 21 अक्टूबर को सिलावट और राजपूत को मंत्री बने 6 माह हो जाएंगे। आदर्श आचार संहिता प्रभावी हो चुकी है और अब मंत्रिमंडल का विस्तार भी नहीं हो सकता है। इसलिए दोनों नेताओं को मंत्री पद से हटना पड़ेगा।

कमलनाथ ने शिवराज को नालायक कहा.. शिवराज का जवाब- लायक कौन, जनता तय करेगी

भोपाल. पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के बीच उपचुनाव से पहले तल्ख बयानबाजी शुरू हो गई है। शनिवार को ग्वालियर में कमलनाथ ने शिवराज को नालायक तक कह डाला। इसके जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि कमलनाथ को आरोपों की कीचड़ ही अच्छी लग रही है तो मुझे कोई आपत्ति नहीं है। कौन लायक है, कौन नालायक, यह तो जनता तय करती है। अब कमलनाथ खुद इस पर विचार करें। 28 सीटों पर होने वाले उपचुनाव के पहले मध्य प्रदेश में सियासी घमासान बढ़ता जा रहा है। इसके पहले शुक्रवार को कमलनाथ ने भोपाल में कहा था- मुझे शर्म आती है, जब मैं दिल्ली जाता हूं और लोग पूछते हैं कि आपके प्रदेश की छवि बिकाऊ वाली बन गई। इस पर शिवराज ने जवाब देते हुए कहा था- ऐसा कहना प्रदेश की 8 करोड़ जनता का अपमान है। कमलनाथ को जनता से माफी मांगनी चाहिए। ग्वालियर दौरे पर थे कमलनाथ कमलनाथ ग्वालियर के दो दिन के दौरे पर पहुंचे थे। आखिरी दिन प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कमलनाथ ने कहा- मैंने अपने कार्यकाल में 26 लाख किसानों के कर्ज माफ किए। अब शिवराज इतने नालायक तो हैं नहीं कि वह समझ न सकें कि ये कैसे किया गया है। हमने दो लाख तक के सभी किसानों के कर्ज माफ करके मदद की। जबकि, शिवराज के 15 साल के कार्यकाल में किसानों को आत्महत्या तक पर मजबूर होना पड़ा। शिवराज का पलटवार कमलनाथ के बयान पर शिवराज ने कहा- जो सभी को एक भाव से देखे, गरीबों का सम्मान करे, किसान के कल्याण की योजना बनाए, वो लायक है या नालायक, यह फैसला जनता को करना है। 15 महीने कमलनाथ की सरकार थी। उन्होंने क्या किया? यह बड़ी लायकी की बात थी कि वल्लभ भवन को दलालों के अड्डा बना दिया। पूरे प्रदेश के विकास को ठप कर दिया? आपको जवाब देना पड़ेगा कि 10 दिन में 2 लाख तक का कर्ज आपने क्यों माफ नहीं किया। कर्ज माफी के झूठे सर्टिफिकेट पकड़ाकर आपने सहकारी बैंकों तक को पूरा पैसा नहीं दिया। क्या यह बैंकों के साथ धोखा नहीं है? आपको जवाब देना पड़ेगा कि किसान सम्मान निधि का पैसा जो प्रधानमंत्री सीधे किसानों को देते हैं आपने उसे क्यों अटकाया? शराब माफिया कौन, रेत माफिया कौन, क्या यह बयान आपको याद नहीं हैं। क्या यह भी भूल गए कमलनाथ कि ग्वालियर-चंबल संभाग से एक मंत्री जो आज नदी बचाने का नाटक कर रहे थे। वो जनता से कह रहे थे कि हमें माफ कर दो, हम रेत का अवैध खनन नहीं रोक पाए। क्या किसानों से झूठ बोलना, बेरोजगारों से छल करना, बेटियों को ठगना लायकी है? कमलनाथ कौन सी लायकी और नालायकी की बात कर रहे हैं? ‘कितने भोले हैं आप कमलनाथ, क्या ये जनता मान लेगी?’ मुझे कोई नालायक कहे मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता, मैं तो वैसे भी जनता का सेवक हूं। 15 महीनों में 5 मिनट के लिए भी आप ग्वालियर नहीं गए। आज आप कह दो कि मैंने तो किसी और के भरोसे छोड़ दिया था या लायकी है, वह भी तब जब चुनाव में उनका उपयोग करना था। मुख्यमंत्री जब भारत के संविधान की शपथ लेता है तब समान भाव की शपथ लेता है, लेकिन अब आप कह रहे हो कि मैंने तो ग्वालियर छोड़ दिया था। कितने भोले हैं कमलनाथ आप, क्या जनता इस भोलेपन को मान लेगी? ‘चंबल एक्सप्रेसवे को ठंडे बस्ते में क्यों डाला?’ लायक पूर्व मुख्यमंत्री जी बताएं कि जरारोग्य अस्पताल के निर्माण को आपने क्यों रोका? जरारोग्य अस्पताल को बाईपास सर्जरी के पैसे क्यों नहीं दिए गए? आप को बताना पड़ेगा कि ग्वालियर और चंबल से जो हमारी पानी लाने की योजना थी उसे क्यों रोका? चंबल एक्सप्रेस वे के निर्माण को आपने ठंडे बस्ते में क्यों डाला? आपके पास ग्वालियर संभाग और चंबल संभाग के जनप्रतिनिधियों के लिए 1 मिनट का टाइम क्यों नहीं था?

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