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ईरान के शाहेद ड्रोन से अधिक खतरनाक और एडवांस हथियार बना चुका है भारत

 नई दिल्ली ईरान के सस्ते शाहेद-136 ड्रोन और अमेरिका के नए LUCAS ड्रोन ने युद्ध में कम कीमत पर बहुत बड़ा नुकसान पहुंचाया है. इन ड्रोनों से दुश्मन की महंगी एयर डिफेंस को भारी संख्या में हमला करके चकमा दिया जा सकता है. इसी तरह भारत भी अपना जवाब तैयार कर चुका है। बेंगलुरु की कंपनी न्यूस्पेस रिसर्च टेक्नोलॉजीज (NRT) ने शेषनाग-150 नाम का लंबी दूरी का स्वार्म अटैक ड्रोन बनाया है. यह ड्रोन पूरी तरह स्वदेशी है. विकास परीक्षण में तेजी से आगे बढ़ रहा है. यह ड्रोन पहली बार करीब एक साल पहले उड़ा था. अब ऑपरेशन सिंदूर जैसी हाल की घटनाओं के बाद इसकी जरूरत और ज्यादा तेज हो गई है। शेषनाग-150 ड्रोन क्या है और इसकी खासियतें शेषनाग-150 एक लंबी दूरी का लॉयटरिंग मुनिशन है, यानी यह लक्ष्य के ऊपर घूम सकता है. निगरानी कर सकता है. फिर हमला कर सकता है. इसकी रेंज 1000 किलोमीटर से ज्यादा है. यह 5 घंटे से अधिक समय तक हवा में रह सकता है. इसमें 25 से 40 किलोग्राम का वॉरहेड लगाया जा सकता है, जो इमारतों, वाहनों, रडार या सैनिकों को भारी नुकसान पहुंचा सकता है. यह ड्रोन स्वार्म अटैक कर सकता है, यानी कई ड्रोन साथ मिलकर हमला करते हैं। इससे दुश्मन की एयर डिफेंस सिस्टम को ओवरलोड करके तोड़ा जा सकता है. ड्रोन खुद लक्ष्य ढूंढता है, ट्रैक करता है और हमला करता है. यह GPS बंद होने पर भी काम कर सकता है क्योंकि इसमें विजुअल नेविगेशन सिस्टम है, जो कैमरे से रास्ता देखता है। स्वार्म टेक्नोलॉजी और मदर-कोड की ताकत शेषनाग-150 का असली राज उसका स्वदेशी मदर-कोड है. यह एक खास सॉफ्टवेयर है जो कई ड्रोनों को एक साथ कंट्रोल करता है. ड्रोन आपस में बात करते हैं, खुद प्लान बनाते हैं और हमला करते हैं. अगर एक ड्रोन खराब हो जाए तो बाकी काम जारी रखते हैं. यह कोड ड्रोन को बहुत स्मार्ट बनाता है।  दुनिया में ऐसे स्वार्म ड्रोन कम हैं. भारत का यह सिस्टम ईरान के शाहेद से आगे है क्योंकि इसमें ज्यादा एडवांस्ड स्वार्म और GPS-डिनाइड नेविगेशन है. कंपनी ने इसे मॉड्यूलर बनाया है, यानी भविष्य में आसानी से बदलाव किए जा सकते हैं। क्यों अब यह ड्रोन इतना जरूरी हो गया पिछले कुछ सालों में यूक्रेन युद्ध, मध्य पूर्व में संघर्ष और हाल ही में भारत-पाकिस्तान के बीच ऑपरेशन सिंदूर ने दिखाया कि सस्ते ड्रोन कितने खतरनाक हैं. पाकिस्तान ने सैकड़ों सस्ते ड्रोन से भारत की एयर डिफेंस को थका देने की कोशिश की. लेकिन भारत ने कम लेकिन ज्यादा प्रभावी ड्रोन और लॉयटरिंग मुनिशन से पाकिस्तान के रडार और एयर डिफेंस को निशाना बनाया। ऑपरेशन सिंदूर में NRT की कंपनी ने अपनी अन्य ड्रोन क्षमताएं दीं, जिससे शेषनाग-150 पर फोकस बढ़ गया. अब भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना के लिए यह ड्रोन बहुत महत्वपूर्ण है. यह सस्ता, ज्यादा संख्या में बनाया जा सकता है. दुश्मन के महंगे सिस्टम को आसानी से नष्ट कर सकता है। भविष्य में क्या होगा शेषनाग-150 अभी विकास और परीक्षण के दौर में है. हाल में वर्ल्ड डिफेंस शो में इसका मॉडल दिखाया गया. कंपनी इसे सेना को पेश कर रही है. अगर यह सफल हुआ तो भारत की ड्रोन युद्ध क्षमता बहुत मजबूत हो जाएगी।

बड़े तालाब में अतिक्रमण के खिलाफ बड़ा एक्शन, IAS बंगला और 200 अवैध निर्माण चिन्हित

भोपाल  राजधानी भोपाल की लाइफलाइन कहे जाने वाले बड़े तालाब को अतिक्रमण से मुक्त कराने की कार्रवाई तेज हो गई है. प्रशासन ने सर्वे के बाद बड़ा तालाब के एफटीएल (फुल टैंक लेवल) और 50 मीटर दायरे में बने करीब 200 अवैध निर्माणों को चिन्हित कर लिया है, जिनमें एक आईएएस के बंगले के साथ 150 से अधिक झुग्गियां भी शामिल हैं। अलग से एडिशनल कलेक्टर तैनात करने की मांग बड़े तालाब के सीमांकन के बीच भोपाल सांसद आलोक शर्मा ने साफ कहा है कि “तालाब क्षेत्र में बने किसी भी अवैध निर्माण को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह धार्मिक स्थल ही क्यों न हो. उन्होंने तालाब संरक्षण और अतिक्रमण हटाने के लिए अलग से एडिशनल कलेक्टर तैनात करने की मांग भी की है। ‘प्रभावशाली लोगों के खिलाफ भी होगी कार्रवाई’ सांसद आलोक शर्मा ने कहा कि “भोपाल का बड़ा तालाब इस शहर की जीवनरेखा है. करीब 1100 वर्ष पहले राजा भोज ने इसका निर्माण कराया था और आज भी शहर की आधी से ज्यादा आबादी इसी तालाब के पानी पर निर्भर है. तालाब के एफटीएल क्षेत्र और आसपास किसी भी तरह का अतिक्रमण स्वीकार नहीं किया जाएगा. यदि किसी प्रभावशाली व्यक्ति ने भी नियमों का उल्लंघन किया है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए। ‘बड़े तालाब को लेकर मुख्यमंत्री से करेंगे चर्चा’ सांसद आलोक शर्मा ने बताया कि “इस मुद्दे को लेकर वे जल्द ही मुख्यमंत्री से भी चर्चा करेंगे. साथ ही समय-समय पर समीक्षा बैठक कर तालाब संरक्षण की कार्रवाई को तेज किया जाएगा.” उन्होंने कलेक्टर भोपाल से कहा है कि “प्रशासनिक कार्यों के बढ़ते दबाव को देखते हुए तालाब संरक्षण के लिए अलग से एक एडिशनल कलेक्टर की जिम्मेदारी तय की जाए और अतिक्रमण हटाने के लिए अलग दस्ता बनाया जाए। सीमांकन में सामने आए 200 अवैध निर्माण बड़े तालाब की सीमांकन प्रक्रिया इन दिनों लगातार जारी है. संत हिरदाराम नगर तहसील के राजस्व अमले ने गुरुवार को ग्राम लाउखेड़ी, बोरवन और बेहटा में एफटीएल और 50 मीटर दायरे का सीमांकन किया. इस दौरान करीब 150 से अधिक झुग्गियां चिन्हित की गईं, जिन पर अमले ने लाल निशान लगाए. सीमांकन के दौरान कुछ रहवासियों ने विरोध भी किया, लेकिन अधिकारियों ने टीएंडसीपी के नक्शे और एनजीटी व सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए कार्रवाई पूरी कराई। कई क्षेत्रों में हुई कार्रवाई जानकारी के अनुसार बड़े तालाब के सीमांकन की प्रक्रिया एक सप्ताह पहले वीआइपी रोड क्षेत्र से शुरू हुई थी. होली के अवकाश के कारण इसे बीच में रोका गया था, जिसे अब दोबारा शुरू किया गया है. गुरुवार को राजस्व, वन विभाग और नगर निगम की संयुक्त टीम ने टीएंडसीपी के नक्शे के अनुसार एफटीएल और 50 मीटर दायरे का सीमांकन किया. अमले ने ग्राम बोरवन में करीब 100 झुग्गियों पर लाल निशान लगाए, जबकि ग्राम बेहटा के ओल्ड डेयरी फार्म क्षेत्र में 60 से 70 झुग्गियां चिन्हित की गईं. इसके अलावा वीआइपी रोड, खानूगांव और हलालपुर क्षेत्र में भी कई निर्माण इस दायरे में पाए गए हैं। वीआईपी रोड से गांवों तक अतिक्रमण राजस्व अमले ने वीआईपी रोड, खानूगांव, हलालपुर, लाउखेड़ी, बोरवन और बेहटा में सीमांकन करते हुए करीब 200 निर्माण चिन्हित किए हैं. इनमें केके हाउस, सुपर बिल्डर, कोचिंग सेंटर, शासकीय बंगला, गुलबाग लॉन, एक आईएएस का बंगला, चादर शेड और बड़ी संख्या में झुग्गियां शामिल हैं। संत हिरदाराम नगर एसडीएम रविशंकर राय ने बताया कि “बड़े तालाब की सीमाएं चिन्हित करने की कार्रवाई लगातार जारी है. जिन निर्माणों पर लाल निशान लगाए गए हैं, उन पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

MP में जमीन विवादों के समाधान के लिए नई प्रणाली, संपदा पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत, रजिस्ट्री से पहले आपत्ति की जानकारी

भोपाल मध्य प्रदेश में जमीन से जुड़े विवादों के लिए अब आपत्ति दर्ज करवाना आसान हो गया है। राज्य सरकार ने संपदा पोर्टल पर ऑनलाइन सुविधा शुरू कर दी है। जिसके तहत कोई भी किसी भी जिले से जमीन पर आनलाइन आपत्ति दर्ज करवा सकेगा। इसका फायदा यह होगा कि लोगों को पंजीयन कार्यालय में नहीं जाना पड़ेगा। ऑनलाइन आपत्ति दर्ज होते ही उसका रिकार्ड सब-रजिस्ट्रार के पास उपलब्ध होगा। भविष्य में यदि उस जमीन की रजिस्ट्री कराने कोई उप-पंजीयक कार्यालय पहुंचेगा, तो सिस्टम में दर्ज आपत्ति दिखाई देगी। इसकी सूचना तत्काल संबंधित पक्षों को दी जाएगी। आपत्ति दर्ज करवाने के लिए यह जरूरी आपत्ति दर्ज कराने के लिए जमीन की यूनीक ID या रजिस्ट्री नंबर देना अनिवार्य होगा। केवल स्थान, कालोनी या जमीन का सामान्य विवरण देने पर शिकायत दर्ज नहीं होगी। पंजीयन विभाग के अनुसार जमीन का सटीक रिकॉर्ड यूनीक आईडी या रजिस्ट्री नंबर से ही खोजा जा सकता है। सब रजिस्ट्रार का निर्णय होगा अंतिम आपत्ति के साथ लगाए गए दस्तावेजों की वैधता पर अंतिम निर्णय सब-रजिस्ट्रार करेंगे। वे संबंधित अधिनियम के तहत तय करेंगे कि मामले में क्या कार्रवाई की जाए। अधिकारियों के अनुसार पहले कुछ लोग फर्जी कोर्ट आदेश लगाकर आपत्तियां दर्ज करा देते थे। अब पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन और रिकॉर्डेड होने से ऐसी गड़बड़ियों पर रोक लगेगी। इनका कहना है     संपदा पोर्टल पर 250 रुपये शुल्क और दस्तावेजों के साथ आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। संपत्ति के घरेलू मामलों में यह महत्वपूर्ण रहेगा, एक पक्ष समझौते के विपरीत जमीन बेचने की कोशिश करता है, तो दूसरा पक्ष पोर्टल पर आपत्ति दर्ज कर सकता है।     -स्वप्नेश शर्मा, वरिष्ठ जिला पंजीयक, भोपाल  

SIR विवाद पर भड़कीं ममता बनर्जी, बोलीं- जिंदा वोटर्स को मृत बताकर नाम काटे जा रहे

कोलकाता पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया (ईसीआई) पर स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) एक्सरसाइज में कई जिंदा वोटर्स को मरा हुआ दिखाने का आरोप लगाया। मुख्यमंत्री ने अनिश्चितकालीन एसआईआर विरोधी धरने पर कहा, “इनमें से कुछ वोटर आज हमारे साथ यहां हैं। कमीशन को शर्म आनी चाहिए कि उसने एसआईआर में उन वोटरों को मरा हुआ मार्क कर दिया जो जिंदा हैं। लेकिन, आज वे यह साबित करने के लिए यहां हैं कि वे अभी भी जिंदा हैं। चुनाव आयोग भाजपा के एजेंट के तौर पर काम कर रही है, जो खुद एक बेशर्म पॉलिटिकल ताकत है।” मुख्यमंत्री ने आगे कहा, “याद रखें हम काम कर रहे हैं। हमने उन सभी 22 वोटरों को ट्रैक किया है जिन्हें मरा हुआ बताया गया है। मैं मीडिया से भी रिक्वेस्ट करूंगी कि वे ऐसे वोटरों के बारे में पूरी कवरेज दें, जो अभी जिंदा हैं लेकिन कमीशन के रिकॉर्ड के मुताबिक मर चुके हैं।” उन्होंने कहा कि इस साल के आखिर में पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव एक मजाक होंगे, जब तक कि असली वोटर उस चुनाव में अपना वोट नहीं डाल पाते। तृणमूल कांग्रेस के बड़े नेताओं के अलावा, तृणमूल कांग्रेस से जुड़े बूथ लेवल ऑफिसर्स (बीएलओ) के एसोसिएशन के सदस्य भी धरना-प्रदर्शन की जगह पर मौजूद थे। इत्तेफाक से मुख्यमंत्री के धरना-प्रदर्शन की जगह पश्चिम बंगाल के चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर (सीईओ) के ऑफिस से मुश्किल से 1.5 किलोमीटर दूर है। मुख्यमंत्री का अनिश्चितकालीन प्रदर्शन ठीक उससे पहले शुरू हुआ है जब चीफ इलेक्शन कमिश्नर (सीईसी) ज्ञानेश कुमार की लीडरशिप में ईसीआई की पूरी बेंच 8 मार्च को कोलकाता आ रही है, जिसका अगले दो दिनों का शेड्यूल काफी बिजी है। तृणमूल कांग्रेस लीडरशिप ने इस बात का कोई इशारा नहीं दिया कि प्रदर्शन कब तक चलेगा, लेकिन स्टेज के आकार और वहां मौजूद सुविधाओं से ऐसा लगता है कि प्रदर्शन काफी लंबा चलने वाला है।

विदेश नीति को लेकर राहुल गांधी का हमला, कहा- प्रधानमंत्री समझौतावादी रुख अपना रहे

नई दिल्ली लोकसभा नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने एक बार फिर विदेश नीति को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सवाल उठाते हुए टिप्पणी की है। राहुल गांधी के आधिकारिक सोशल मीडिया एक्स अकाउंट पर 11 फरवरी को लोकसभा में दिए गए भाषण का वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा गया है, “भारत की विदेश नीति हमारे लोगों की सामूहिक इच्छा से उत्पन्न होती है। यह हमारे इतिहास, हमारी भौगोलिक स्थिति और सत्य एवं अहिंसा पर आधारित हमारी आध्यात्मिक विचारधारा में निहित होनी चाहिए। आज हम जो देख रहे हैं, वह नीति नहीं है। यह एक भ्रष्ट व्यक्ति के शोषण का परिणाम है।” राहुल गांधी ने जो वीडियो पोस्ट किया है, उस पर लिखा है, “11 फरवरी 2026 को लोकसभा में विपक्ष के नेता ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा के खतरे में होने की चेतावनी दी। अमेरिका ही तय करेगा कि हम किससे तेल खरीद सकते हैं और किससे नहीं। चाहे रूस से खरीदना हो या ईरान से, अमेरिका ही फैसला करेगा। लेकिन हमारे प्रधानमंत्री फैसला नहीं करेंगे।” एक दिन पहले 5 मार्च को भी राहुल गांधी ने कहा था, “विश्व एक अस्थिर दौर में प्रवेश कर चुका है। आगे भयंकर संकट मंडरा रहा है। भारत की तेल आपूर्ति खतरे में है, क्योंकि हमारे आयात का 40 फीसदी से अधिक हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। एलपीजी और एलएनजी के लिए स्थिति और भी बदतर है। संघर्ष हमारे पड़ोस तक पहुंच गया है, हिंद महासागर में एक ईरानी युद्धपोत डूब गया है। फिर भी प्रधानमंत्री ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है। ऐसे समय में हमें एक स्थिर नेतृत्व की आवश्यकता है। इसके विपरीत भारत के पास एक ऐसे प्रधानमंत्री हैं, जो समझौतावादी हैं और रणनीतिक स्वायत्तता को त्याग दिया है।” हालांकि पिछले सप्ताह इजरायल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष के बाद कच्चे तेल की कीमतों में 15 प्रतिशत से अधिक उछाल देखा गया था, लेकिन शुक्रवार सुबह तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। इसकी मुख्य वजह यह रही कि अमेरिका ने भारतीय रिफाइनरियों को समुद्र में फंसे रूसी कच्चे तेल को खरीदने के लिए 30 दिन की अस्थायी छूट देने का फैसला किया है।

ईरान-इजरायल टकराव के चलते CBSE का निर्णय, पश्चिम एशिया के कई देशों में 10वीं परीक्षा रद्द

नई दिल्ली केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने पश्चिम एशिया के कई देशों में कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षाएं स्थगित कर दी हैं। यह फैसला क्षेत्र में ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच लिया गया है। मस्कट में भारतीय दूतावास ने शुक्रवार को इसकी पुष्टि की। मस्कट में भारतीय दूतावास ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर सीबीएसई का सर्कुलर शेयर किया, जिसमें छात्रों और अभिभावकों को खाड़ी देशों में परीक्षा कार्यक्रम में हुए बदलाव की जानकारी दी गई। सर्कुलर के अनुसार, यह फैसला बहरीन, ईरान, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और यूनाइटेड अरब अमीरात (यूएई) में सीबीएसई से जुड़े स्कूलों पर असर डालेगा। कक्षा 10 की परीक्षाएं 7 मार्च से 11 मार्च के बीच होनी थीं। 2 मार्च, 5 मार्च और 6 मार्च को होने वाली परीक्षाओं को पहले ही रद्द किया जा चुका है। सीबीएसई ने कहा कि पश्चिमी एशिया में कक्षा 10 के छात्रों के परिणाम कैसे घोषित किए जाएंगे, इसकी जानकारी बाद में अलग से दी जाएगी। इसी बीच, शनिवार को होने वाली कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षा भी टाल दी गई है। टाली गई परीक्षा की नई तारीखें बाद में बताई जाएंगी। बोर्ड ने आगे कहा कि वह 7 मार्च को मौजूदा हालात की समीक्षा करेगा और 9 मार्च से होने वाली परीक्षाओं के बारे में आगे के निर्देश जारी करेगा। सीबीएसई ने कक्षा 12 के सभी छात्रों को सलाह दी है कि वे अपने-अपने स्कूलों के साथ लगातार संपर्क में रहें और आगे के अपडेट के लिए आधिकारिक घोषणाओं को ध्यान से फॉलो करें। छात्रों से यह भी कहा गया है कि वे अपने स्कूलों के साथ लगातार संपर्क में रहें, सिर्फ आधिकारिक सीबीएसई नोटिफिकेशन पर ही भरोसा करें। कोई भी परीक्षाओं के बारे में जानकारी के लिए अनौपचारिक स्रोतों या अफवाहों पर निर्भर न रहें। बता दें कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने तेहरान में कई ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से कई हमले किए, जिसमें शहर के सेंटर में मौजूद ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई भी मारे गए। इसके बाद ईरान ने तेल अवीव और इजरायल में दूसरी जगहों के साथ-साथ पश्चिमी एशिया में अमेरिकी मिलिट्री बेस और डिप्लोमैटिक मिशन को निशाना बनाकर जवाबी हमले किए। ईरानी हमलों ने पड़ोसी देशों में आम नागरिकों और एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को भी नुकसान पहुंचाया, जिसमें सऊदी अरब में एक ऑयल रिफाइनरी और दुबई में एक लग्जरी होटल शामिल हैं। इन हमलों से एक बड़े क्षेत्रीय संघर्ष का डर बढ़ गया है, जिसमें और भी पश्चिमी एशियाई देश शामिल हो सकते हैं।

ओडिशा में CISF का 57वां स्थापना दिवस मनाया गया, मुख्य अतिथि बने गृह मंत्री अमित शाह

कटक गृह मंत्री अमित शाह शुक्रवार को कटक में आयोजित सीआईएसएफ के 57वें स्थापना दिवस समारोह में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने कहा कि आज 56 वर्ष पूरे करने के बाद सीआईएसएफ ने यह मुकाम हासिल किया है। 57 मात्र एक संख्या नहीं है बल्कि यह समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा की एक यात्रा का प्रतीक है, जो औद्योगिक सुरक्षा के क्षेत्र में शून्य से शिखर तक के दृढ़ प्रयास को दर्शाती है। देश के अर्थतंत्र की मजबूती की कल्पना और इस देश को दुनिया का सबसे बड़ा अर्थतंत्र बनाने की संपल्पना औद्योगिक विकास के बिना नहीं हो सकती। औद्योगिक विकास को सुरक्षित वातावरण देने के लिए जरूरी है, राष्ट्रीय स्तर पर एक इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स की और मुझे खुशी है कि इन 56 सालों में सीआईएसएफ ने अपनी स्थापना के उद्देश्यों को सिद्ध किया है। साथ ही, हर प्रकार की चुनौतियों से सीखते हुए समय के साथ अपने को बदलने का प्रयास भी किया है। उन्होंने आधुनिकता को भी अपनाया है और परंपराओं को भी जीवित रखा है। उन्होंने कहा कि मुझे बेहद खुशी है कि सुरक्षा बलों का अपना सम्मेलन आयोजित किया जाता है। देश की सीमाओं की रक्षा करने वालों को ऐसा अवसर मिलना चाहिए और देश के भीतर नागरिक क्षेत्रों में विभिन्न सुरक्षा भूमिकाओं में कार्यरत लोगों को भी ऐसा मंच मिलना चाहिए। मैं सीआईएसएफ की इस पहल को बधाई देना चाहता हूं। भारत के औद्योगिक विकास की संपल्पना सीआईएसएफ के बिना नहीं हो सकती। चाहे हवाई अड्डे हों, चाहे बंदरगाह हों या फिर बड़ी औद्योगिक इकाइयां हों, सीआईएसएफ हमेशा राष्ट्र की ढाल बनकर मजबूती से खड़ा है। गृह मंत्री ने कहा कि भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने एक निर्णय किया है कि सभी बंदरगाहों की सुरक्षा भी सीआईएसएफ को सौंपकर हम इस मामले में भी निश्चिंत होना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने देश की जनता के सामने दो महत्वपूर्ण संकल्प रखे हैं। 2047 तक पूर्ण विकसित राष्ट्र बनना, दुनिया में नंबर एक पर पहुंचना और 2027 तक तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनना। इस लक्ष्य को पाने के लिए सीआईएसएफ अहम भूमिका निभा रही है।

पीएम मोदी का बड़ा बयान: भारतीय कृषि को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने की जरूरत

नई दिल्ली   प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को किसानों से भारत की विविध जलवायु परिस्थितियों का लाभ उठाने और उच्च मूल्य वाली फसलों की पैदावार बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करने को कहा। उन्होंने कहा कि ऐसा करने पर देश के कृषि उत्पाद वैश्विक बाजारों में प्रभावी ढंग से प्रतिस्पर्धा कर सकेंगे। ‘कृषि और ग्रामीण परिवर्तन’ पर बजट के बाद आयोजित एक वेब गोष्ठी को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि भारतीय कृषि उत्पादों की गुणवत्ता, ब्रांडिंग और मानकों के सभी पहलुओं पर काम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कृषि विशेषज्ञों, उद्योग और किसानों को एक साथ आना होगा। प्रधानमंत्री ने बजट के बाद अपनी तीसरी वेब गोष्ठी में कहा, ”आज दुनिया के बाजार खुल रहे हैं और वैश्विक मांग बदल रही है हमारी कृषि को निर्यात-उन्मुख बनाने पर अधिक चर्चा करना आवश्यक है। हमारे पास विविध जलवायु है और हमें इसका पूरा लाभ उठाना चाहिए। हम कृषि-जलवायु क्षेत्रों के मामले में समृद्ध हैं।” मोदी ने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में काजू, कोको और चंदन सहित उच्च मूल्य वाली कृषि पर भी ध्यान केंद्रित किया गया है। उन्होंने कहा कि खाद्य तेल और दलहन पर राष्ट्रीय मिशन और प्राकृतिक खेती पर राष्ट्रीय मिशन सभी कृषि क्षेत्र को मजबूत कर रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा, ”यदि हम उच्च मूल्य वाले कृषि क्षेत्र को बड़े पैमाने पर बढ़ाते हैं, तभी हम अपने कृषि क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी क्षेत्र में बदल सकते हैं।” प्रधानमंत्री ने कहा कि आज दुनिया स्वास्थ्य के प्रति अधिक जागरूक हो रही है और समग्र स्वास्थ्य सेवा तथा जैविक भोजन पर उनका विशेष ध्यान है। उन्होंने कहा, ”हमें रसायन मुक्त और प्राकृतिक खेती पर अधिक जोर देना चाहिए। प्राकृतिक खेती दुनिया भर के बाजारों तक पहुंचने का रास्ता बनाती है।” मोदी ने कहा कि कृषि भारत की दीर्घकालिक विकास यात्रा का एक रणनीतिक स्तंभ है, और सरकार ने कृषि क्षेत्र को लगातार मजबूत किया है। उन्होंने आगे कहा, ”लगभग 10 करोड़ किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के माध्यम से चार लाख करोड़ रुपये से अधिक मिले हैं।”  

सियासी समीकरण बदलने के संकेत! राज्यसभा चुनाव के बाद MP के नेताओं को राष्ट्रीय टीम में मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी

भोपाल राज्यसभा चुनावों के बाद भारतीय जनता पार्टी के संगठन में बड़े बदलाव की संभावना जताई जा रही है। माना जा रहा है कि 16 मार्च के बाद भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम का ऐलान हो सकता है, जिसमें मध्य प्रदेश के कई नेताओं को अहम जिम्मेदारी मिल सकती है। पार्टी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के कार्यभार संभालने के बाद से ही नई टीम को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। राज्यसभा चुनाव के बाद होगा बड़ा फैसला सूत्रों के अनुसार बिहार, छत्तीसगढ़ समेत करीब दस राज्यों में होने वाले राज्यसभा चुनाव के बाद भाजपा संगठन में फेरबदल पर अंतिम निर्णय लिया जा सकता है। इसके लिए केंद्रीय स्तर पर मंथन भी शुरू हो गया है। माना जा रहा है कि संगठन को 2029 के लोकसभा चुनाव के लिए मजबूत बनाने के उद्देश्य से अनुभवी नेताओं के साथ-साथ युवा और महिला चेहरों को भी टीम में जगह दी जा सकती है। राष्ट्रीय संगठन में पहले से मजबूत है मध्य प्रदेश भाजपा के राष्ट्रीय संगठन में मध्य प्रदेश को पहले से ही खास महत्व मिलता रहा है। वर्तमान में प्रदेश से कई नेता राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इनमें सत्यनारायण जटिया संसदीय बोर्ड के सदस्य हैं, जबकि ओमप्रकाश धुर्वे राष्ट्रीय सचिव के रूप में कार्य कर रहे हैं। इसके अलावा अनुसूचित जाति मोर्चा में भी प्रदेश के नेताओं की भूमिका अहम मानी जाती है। यही वजह है कि नई टीम में भी मध्य प्रदेश की मजबूत भागीदारी की संभावना जताई जा रही है। नड्डा की टीम में भी था प्रदेश का प्रभाव पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा की टीम में भी मध्य प्रदेश के चार नेताओं को जगह मिली थी। उस समय कैलाश विजयवर्गीय राष्ट्रीय महासचिव के पद पर थे। बाद में वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने उन्हें टिकट दिया और जीत के बाद उन्हें राज्य सरकार में मंत्री बनाया गया। इससे पहले भी भाजपा के राष्ट्रीय संगठन में एक ही समय में मध्य प्रदेश से दो-दो महासचिव—बावरचंद गहलोत और नरेंद्र सिंह तोमर—रह चुके हैं।   चार से पांच नेताओं को मिल सकती है जिम्मेदारी भाजपा सूत्रों का कहना है कि नई राष्ट्रीय टीम में मध्य प्रदेश से चार से पांच नेताओं को जगह मिल सकती है। इनमें एक-दो वरिष्ठ नेताओं के साथ युवा चेहरों को भी अवसर मिलने की संभावना है। कुछ नेताओं को विभिन्न मोर्चों और प्रकोष्ठों में भी जिम्मेदारी दी जा सकती है। दरअसल, मध्य प्रदेश को भाजपा के लिए लंबे समय से एक मजबूत संगठनात्मक आधार माना जाता है। संघ और जनसंघ की जड़ों से जुड़ा यह प्रदेश पार्टी के लिए प्रयोगशाला की तरह रहा है। मजबूत संगठन और अनुभवी कार्यकर्ताओं के कारण यहां के नेताओं को राष्ट्रीय स्तर पर भी लगातार अवसर मिलता रहा है। ऐसे में नई टीम में मध्य प्रदेश की भूमिका फिर अहम रहने की संभावना है।

राजनाथ सिंह बोले—मिडल ईस्ट में जो हो रहा वो खतरनाक संकेत, ईरान युद्ध का असर वैश्विक होगा

नई दिल्ली    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इसे अत्यधिक असामान्य करार दिया है। कोलकाता में आयोजित ‘सागर संकल्प’ (Sagar Sankalp) मैरीटाइम कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए उन्होंने चेतावनी दी कि इस तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा और व्यापार सप्लाई चेन पूरी तरह से बाधित हो रही है। ऊर्जा सुरक्षा के लिए ‘होर्मुज’ का महत्व रक्षा मंत्री ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण Strait of Hormuz और फारस की खाड़ी का जिक्र करते हुए कहा, “यह क्षेत्र दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद अहम है। जब यहाँ हलचल होती है, तो इसका सीधा असर तेल और गैस की आपूर्ति पर पड़ता है। वर्तमान में हम न केवल ऊर्जा, बल्कि अन्य क्षेत्रों में भी सप्लाई चेन के टूटने के गवाह बन रहे हैं, जिसका सीधा प्रहार वैश्विक अर्थव्यवस्था पर हो रहा है।” असामान्यता ही अब नया सामान्य है बदलते भू-राजनीतिक परिवेश पर बोलते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि विभिन्न देशों के बीच रणनीतिक प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा, “राष्ट्र आज जमीन, हवा, पानी और यहाँ तक कि अंतरिक्ष में भी एक-दूसरे से टकरा रहे हैं। यह एक चिंताजनक स्थिति है, और सबसे ज्यादा डराने वाली बात यह है कि यह असामान्यता अब ‘न्यू नॉर्मल’ (New Normal) बनती जा रही है।”   ‘आत्मनिर्भरता’ ही एकमात्र समाधान अनिश्चितता के इस दौर से निपटने के लिए रक्षा मंत्री ने ‘आत्मनिर्भरता’ पर जोर दिया। उन्होंने कहा:     सप्लाई चेन की बाधाओं से बचने का एकमात्र तरीका खुद पर निर्भर होना है।     रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (DPSUs) हमारी इस दृष्टि के प्रमुख स्तंभ हैं।     एक प्रमुख समुद्री राष्ट्र होने के नाते, भारत की जिम्मेदारी है कि वह आत्मविश्वास और स्पष्ट दृष्टि के साथ नेतृत्व प्रदान करे। 2047 के लिए बड़ा लक्ष्य शिपबिल्डिंग (जहाज निर्माण) क्षेत्र में भारत की स्थिति मजबूत करने के लिए रक्षा मंत्री ने उद्योग जगत को स्पष्ट लक्ष्य दिए:     2030 तक: भारत दुनिया के टॉप-10 जहाज निर्माण देशों में शामिल हो।     2047 तक: भारत को टॉप-5 देशों की सूची में पहुंचाना। उन्होंने कहा कि यह सपना बड़ा जरूर है, लेकिन असंभव नहीं। इसके लिए सरकार, उद्योग और कार्यबल को मिलकर जिम्मेदारी निभानी होगी।

अमेरिका से टकराने का जज्बा कहां से लाता है ईरान? जानें कितनी मजबूत है उसकी सेना

वाशिंगटन अमेरिका के मुकाबले ईरान सैन्य ताकत, आबादी और क्षेत्रफल समेत सभी पैमानों पर कमजोर दिखता है। इसके बाद भी बीते एक सप्ताह से वह अमेरिका और इजरायल के खिलाफ संयुक्त जंग में लड़ रहा है। यही नहीं ईरान का कहना है कि अमेरिका और इजरायल ने रेड लाइन पार कर दी है और उन्हें इसका खामियाजा भुगतना होगा। ऐसी स्थिति में यह सवाल उठता है कि आखिर 9 करोड़ की आबादी वाले ईरान के पास इतनी ताकत कहां से आती है। इस सवाल का जवाब ईरान की सेना है। ईरान की आबादी भले ही 9 करोड़ है, लेकिन उसके सैनिकों की संख्या बड़े-बड़े देशों से कहीं अधिक है। ईरान की सेना की बात करें तो वह मुख्य रूप से दो हिस्सों में विभाजित है। पहली है नियमित सेना, जिसे Artesh कहा जाता है। दूसरी है IRGC यानी इस्लामिक रिवॉलूशनरी गार्ड कॉर्प्स। इसे स्पेशल फोर्सेज भी कहा जाता है। ईरान की रेग्युलर आर्मी में थल सेना, नेवी और एयर फोर्स आते हैं। इसके अलावा ईरान एयर डिफेंस फोर्स भी है। अब संख्या की बात करें तो ईरान की थल सेना में 3 लाख 50 हजार सैनिक हैं। नेवी में 18 हजार हैं और वायुसेना में 37 हजार सैनिक शामिल हैं। इसी तरह एयर डिफेंस फोर्स में 15000 सैनिक शामिल हैं। अब बात करते हैं ईरान की रिवॉलूशनरी गार्ड कॉर्प्स की। इसमें 1 लाख 50 हजार जमीनी सैनिक हैं। नेवी में 20 हजार जवान हैं और एयरोस्पेस 15,000 हैं। इसी तरह कुद्स फोर्स में 5 हजार सैनिक हैं। इसके बाद नंबर आता है रिजर्व फोर्स का, जिसमें 4 लाख 50 हजार सैनिक शामिल हैं। इस तरह सब मिलाकर ईरान की सैन्य संख्या 10 लाख 60 हजार हो जाती है। यह एक बड़ा आंकड़ा है। 25 करोड़ की आबादी वाले पाकिस्तान की सैन्य संख्या भी 6 लाख 50 हजार ही है। सबसे बड़ी फौज चीन की मानी जाती है, जिसमें करीब 20 लाख सैनिक हैं। इसके बाद दूसरे नंबर और तीसरे नंबर पर अमेरिका और भारत हैं। दोनों मुल्कों की संख्या 13 लाख से अधिक है। ईरान की ताकत की यह भी एक वजह है कि वह अमेरिका और इजरायल से मुकाबले में पीछे हटने के लिए तैयार नहीं है। यही नहीं एक्सपर्ट मान रहे हैं कि अब ईरान तो खुद ही चाहता है कि यह जंग थोड़ी लंबी खिंचे। ऐसा होने पर अमेरिका को ही निकलने का बहाना खोजना पड़ेगा। ईरान की लीडरशिप नहीं चाहती कि वह किसी भी हाल में अमेरिका या इजरायल से समझौता करती दिखे। बता दें कि लंबे युद्धों में अकसर अमेरिका को ही परेशानी का सामना करना पड़ा है। अमेरिका को वियतनाम, इराक और अफगानिस्तान से बीच में ही निकलना पड़ा था।  

खिताबी मुकाबले से पहले आंकड़े डराने वाले, T20 वर्ल्ड कप में न्यूजीलैंड पर भारत का जीत का इंतजार

नई दिल्ली टी20 विश्व कप 2026 का फाइनल भारत और न्यूजीलैंड के बीच 8 मार्च को नरेंद्र मोदी स्टेडियम, अहमदाबाद, में होना है। मैच शाम 7 बजे से खेला जाएगा। सेमीफाइनल में भारत ने इंग्लैंड को और न्यूजीलैंड ने दक्षिण अफ्रीका को हराकर फाइनल में जगह बनाई है। भारत के लिए फाइनल में न्यूजीलैंड के खिलाफ होने वाला मुकाबला बेहद मुश्किल है। इसकी वजह टी20 विश्व कप का इतिहास है, जो न्यूजीलैंड के पक्ष में है। भारतीय टीम टी20 विश्व कप में न्यूजीलैंड के खिलाफ कभी नहीं जीती है। दोनों देशों के बीच अब तक 3 मैच खेले गए हैं और तीनों ही मैचों में न्यूजीलैंड को जीत मिली है। दोनों देशों के बीच पहला मुकाबला टी20 विश्व कप 2007 के दौरान खेला गया था। पहले बल्लेबाजी करते हुए न्यूजीलैंड ने सभी विकेट खोकर 190 रन बनाए थे। भारतीय टीम 180 रन बना सकी थी और 10 रन से मैच हार गई। दूसरा मैच टी20 विश्व कप 2016 में खेला गया था। न्यूजीलैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 7 विकेट पर 126 रन बनाए थे। भारतीय टीम 79 रन पर सिमट गई और 47 रन से मैच हार गई। दोनों टीमों की टी20 विश्व कप की तीसरी और आखिरी मुलाकात 2021 विश्व कप के दौरान हुई थी। भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 7 विकेट पर 110 रन बनाए थे। न्यूजीलैंड ने 2 विकेट के नुकसान पर 111 रन बनाकर मैच 8 विकेट से जीत लिया था। इस तरह टी20 विश्व कप में भारतीय टीम को न्यूजीलैंड के खिलाफ पहली जीत का इंतजार है। ओवरऑल आंकड़े पर गौर करें तो टी20 में भारतीय टीम का न्यूजीलैंड के खिलाफ पलड़ा भारी है। दोनों देशों के बीच अब तक 30 मैच खेले गए हैं। भारतीय टीम ने 18 मैच जीते हैं, जबकि न्यूजीलैंड को 11 मैचों में सफलता मिली है। 1 मैच टाई रहा है। विश्व कप से पहले भी न्यूजीलैंड और भारत के बीच 5 मैचों की द्विपक्षीय टी20 सीरीज खेली गई थी। भारतीय टीम ने अपने घर में हुई इस सीरीज में न्यूजीलैंड को 4-1 से मात दी थी। टीम इंडिया के पास न्यूजीलैंड को 8 मार्च को हराकर जीत का इंतजार समाप्त करने और बैक-टू-बैक टी20 विश्व कप का खिताब जीतने वाली पहली टीम बनने का अवसर है।

भारत घूमने आए ईरानी नाविकों का दर्दनाक अंत, ताजमहल की यादें भी साथ न ले जा सके

विशाखापट्टनम ईरानी युद्धपोत ‘देना’ के चालक दल के कई सदस्यों को शायद इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि विशाखापत्तनम में बिताई गई उनकी खूबसूरत यादें उनकी जिंदगी की आखिरी यादें बन जाएंगी। चाहे रुशिकोंडा बीच पर लंबी सैर हो या फिर मनोहारी कैलासगिरी पर्वत की यात्रा, ईरानी चालक दल ने भारत में अपने समय का भरपूर लुत्फ उठाया था। लेकिन बहुराष्ट्रीय नौसैन्य अभ्यास ‘मिलन 2026’ में हिस्सा लेने भारत आए इन ईरानी नौसैनिकों का सफर एक बेहद खौफनाक त्रासदी में तब्दील हो गया, जब वापसी के दौरान एक अमेरिकी पनडुब्बी ने उनके युद्धपोत को हमेशा के लिए समंदर की गहराइयों में दफन कर दिया। ये नाविक अभ्यास ‘मिलान 2026’ के दौरान विशाखापत्तनम में 15 से 25 फरवरी के बीच रहे। इस दौरान उन्होंने स्थानीय लोगों से बातचीत की और तटीय शहर के कई प्रसिद्ध स्थलों का भ्रमण किया। अपने प्रवास के दौरान नाविकों ने ‘अतुल्य भारत’ कार्यक्रम के तहत आयोजित सांस्कृतिक दौरों में भी भाग लिया। उनमें से कुछ नाविक आगरा भी गए, जहां उन्होंने विश्व के सात अचंभों में शामिल ताज महल और अन्य ऐतिहासिक स्थलों का दौरा किया और भारत की समृद्ध विरासत का अनुभव किया। सोशल मीडिया पर नाविकों के मुस्कुराते हुए, समुद्र तटों पर टहलते हुए और शहर के लोगों से बातचीत करते हुए कई वीडियो और तस्वीरें साझा की गईं। उनसे बातचीत करने वाले एक स्थानीय निवासी सोहन हतंगड़ी ने याद करते हुए कहा, ‘वे (ईरानी) दोस्ताना स्वभाव के युवा नाविक थे, जो स्थानीय लोगों के साथ सेल्फी ले रहे थे और विशाखापत्तनम की मेहमाननवाजी का आनंद ले रहे थे।’ नाविकों ने यहां स्थित युद्ध स्मारक, पनडुब्बी संग्रहालय और अन्य स्थानों का भी दौरा किया। कुछ ईरानी नाविक शहर के बाहरी इलाके में स्थित संकल्प आर्ट विलेज भी गए और मिलान मंडप में नौसैनिक कर्मियों और आगंतुकों के साथ चाय-नाश्ते का आनंद लेते हुए बातचीत करते देखे गए। कई नाविकों को पारंपरिक भारतीय वस्त्रों की खरीदारी करते भी देखा गया। युद्धपोत ‘आईआरआईएस देना’ पर चालक दल के लगभग 180 सदस्य सवार थे। एक रक्षा अधिकारी के अनुसार, ईरानी नौसैनिक प्रतिनिधिमंडल में ईरान की नौसेना के कमांडर रियर एडमिरल शहरम ईरानी और आईआरआईएस देना के कमांडिंग ऑफिसर अबुजार जर्री भी शामिल थे। अधिकारी ने बताया, ‘मिलान 2026 अभ्यास के दौरान एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने भाग लेने वाली नौसेनाओं के बीच संवाद के तहत रियर एडमिरल शहरम ईरानी से मुलाकात की।’ अधिकारी ने बताया कि मिलान 2026 अभ्यास में बंगाल की खाड़ी में दुनिया भर की कई नौसेनाओं ने पेशेवर सहयोग और समुद्री सुरक्षा अभ्यास के लिए भाग लिया था। हालांकि, ईरानी नाविकों की वापसी की यात्रा त्रासदी में बदल गई। अभ्यास में भाग लेने के बाद लौटते समय बुधवार को अमेरिका की एक पनडुब्बी ने श्रीलंका के तट के पास अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में ईरानी युद्धपोत पर टॉरपीडो से हमला कर उसे डुबो दिया, जिसमें कई नाविकों की समुद्र में ही मौत हो गई।

भारत में ईरानी मंत्री ने ट्रंप को घेरा, बोले- ‘न्यूयॉर्क का मेयर तक तय नहीं कर सकते’

नई दिल्ली भारत की राजधानी दिल्ली में आयोजित प्रतिष्ठित ‘रायसीना डायलॉग 2026’ के वैश्विक मंच से ईरान ने अमेरिका और विशेष रूप से डोनाल्ड ट्रंप पर तीखा और व्यंग्यात्मक प्रहार किया है। ईरान के उप विदेश मंत्री डॉ. सईद खतीबजादेह ने ट्रंप पर तंज कसते हुए कहा कि जो लोग न्यूयॉर्क का मेयर तक चुन नहीं सकते, वे ईरान के अगले सुप्रीम लीडर का फैसला करेंगे? ईरानी मंत्री का ये बयान तब आया है जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के अगले सर्वोच्चा नेता के चयन की प्रक्रिया में उन्हें शामिल किया जाना चाहिए। ट्रंप ने कहा कि ईरान पर हमलों में मारे गए अयातुल्ला अली खामेनेई के स्थान पर उनके बेटे मोजतबा खामेनेई का सर्वोच्च नेता के तौर पर चयन ‘अस्वीकार्य’ होगा। इसके जवाब में ईरान के डिप्टी विदेश मंत्री सईद खतीबजादेह ने कहा- राष्ट्रपति ट्रंप ईरान में लीडरशिप (सुप्रीम लीडर) बदलने की मांग कर रहे हैं, जबकि वह खुद न्यूयॉर्क के मेयर तक को अपॉइंट नहीं कर सकते…क्या आप इस कॉलोनियल अप्रोच की कल्पना कर सकते हैं? वह अपने देश में डेमोक्रेसी देखना चाहते हैं, लेकिन ईरान के डेमोक्रेटिक तरीके से चुने गए प्रेसिडेंट को हटाना चाहते हैं।’ खतीबजादेह ने अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध पर बेहद आक्रामक और स्पष्ट बयान दिए हैं। उन्होंने अमेरिका और इजरायल के हमलों को ‘कोरा झूठ’ और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन बताते हुए फारस की खाड़ी से अमेरिकी मौजूदगी को खत्म करने की खुली चेतावनी दी है। हमलों का आधार ‘कोरे झूठ’ और ‘ग्रेटर इजरायल’ का भ्रम ईरान ने अमेरिका और इजरायल के हमलों के पीछे की असली वजहों को उजागर करते हुए उनके दावों को सिरे से खारिज कर दिया। डॉ. खतीबजादेह ने कहा- मेरे देश पर उन कोरे झूठों के आधार पर हमला किया जा रहा है कि ईरान कोई खतरा पैदा कर रहा था। उन्होंने सवाल उठाया कि अमेरिका और इजरायल ने आक्रामकता क्यों शुरू की? उनका दावा है कि इसके पीछे सिर्फ ‘सत्ता की राजनीति’ और ‘ग्रेटर इजरायल’ बनाने का भ्रम है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर यही सवाल अमेरिकी प्रशासन से पूछा जाए, तो अलग-अलग दर्शकों और बाजारों के हिसाब से उनके जवाब भी अलग-अलग होंगे। डॉ. खतीबज़ादेह ने स्पष्ट किया कि वर्तमान संघर्ष ईरान को खत्म करने की एक साजिश है और ईरान इसका माकूल जवाब देगा। उन्होंने कहा- अमेरिका ने ईरान के अस्तित्व को खत्म करने का फैसला किया है। ‘ग्रेटर इजरायल’ के अपने भ्रम के कारण इजरायल कई दशकों से इसका वादा कर रहा है। एक बेहद सख्त चेतावनी देते हुए उन्होंने कहा- हमारे पास फारस की खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी उपस्थिति के अस्तित्व को खत्म करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। उन्होंने इस लड़ाई को ‘वीरतापूर्ण और राष्ट्रवादी युद्ध’ बताते हुए साफ किया कि जहां से भी अमेरिकी हमलों की शुरुआत होगी, ईरान सीधे उन ठिकानों पर पलटवार करेगा। ईरानी मंत्री ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि हमने युद्ध की शुरुआत नहीं की है। उप विदेश मंत्री ने कहा- आज अमेरिका और इजरायल द्वारा जो कुछ भी किया जा रहा है, वह पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय कानून और मानदंडों के खिलाफ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पूरे विवाद में ईरान की ओर से कोई उकसावा नहीं था। मोसाद के ‘फॉल्स-फ्लैग’ ऑपरेशंस और क्षेत्रीय विस्तार का डर ईरान ने युद्ध को अन्य क्षेत्रों में फैलने से रोकने की अपनी मंशा जाहिर की, लेकिन इजरायल पर साजिश रचने का आरोप लगाया। डॉ. खतीबजादेह ने दावा किया कि इजरायली खुफिया एजेंसी ‘मोसाद’ रिफाइनरियों या यहां तक कि साइप्रस में भी ‘फॉल्स-फ्लैग’ (धोखे से किए गए) ऑपरेशन कर रही है ताकि ईरान को बदनाम किया जा सके। उन्होंने टकर कार्लसन के बयानों का हवाला देते हुए कहा कि सऊदी अरब और कतर में मोसाद के कई समूह ऐसे ही ‘फॉल्स-फ्लैग’ ऑपरेशन करते हुए पकड़े गए हैं। उन्होंने अन्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों की हत्या को अभूतपूर्व और एक बेहद खतरनाक नई परंपरा बताया। डोनाल्ड ट्रंप पर तीखा और व्यंग्यात्मक हमला उन्होंने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ‘औपनिवेशिक मानसिकता’ की कड़ी आलोचना की। ट्रंप द्वारा ईरान में नेतृत्व परिवर्तन की मांग पर पलटवार करते हुए डॉ. खतीबज़ादेह ने कहा- वह (ट्रंप) ईरान में सत्ता परिवर्तन की मांग कर रहे हैं, जबकि वह न्यूयॉर्क का एक मेयर तक नियुक्त नहीं कर सकते। उन्होंने इसे ‘औपनिवेशिक दृष्टिकोण’ बताते हुए कहा कि ट्रंप अपने देश में तो लोकतंत्र देखना चाहते हैं, लेकिन ईरान के लोकतांत्रिक रूप से चुने गए राष्ट्रपति को सत्ता से बेदखल करना चाहते हैं। कूटनीति ही एकमात्र विकल्प अंत में, ईरान के उप विदेश मंत्री ने गेंद को वापस अमेरिका और इजरायल के पाले में डालते हुए कूटनीति की वकालत की। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर हमलावर आज अपनी आक्रामकता रोक देते हैं, तो ईरान भी रुक जाएगा क्योंकि वे सिर्फ अपना बचाव कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कूटनीति ही हर देश के पास एकमात्र विकल्प है, लेकिन उन्हें इस बात पर गहरा संदेह है कि क्या वर्तमान अमेरिकी प्रशासन वास्तव में कूटनीति और संवाद के सार को समझता है।  

यूरोपियन टी20 प्रीमियर लीग में भारतीय दखल बढ़ा, द्रविड़-अश्विन फ्रेंचाइजी खरीदने की तैयारी में

नई दिल्ली दिग्गज खिलाड़ी राहुल द्रविड़ और रविचंद्रन अश्विन उस भारतीय समूह का हिस्सा हैं जो यूरोपीय टी20 प्रीमियर लीग (ईटीपीएल) में एक फ्रेंचाइजी खरीदने जा रहा है। गर्मियों में होने वाले छह टीमों के टूर्नामेंट में ग्लासगो स्थित फ्रेंचाइजी को खरीदने के लिए इस समूह ने एक समझौते पर सहमति जताई है। दिग्गज खिलाड़ी राहुल द्रविड़ और रविचंद्रन अश्विन उस भारतीय समूह का हिस्सा हैं जो यूरोपीय टी20 प्रीमियर लीग (ईटीपीएल) में एक फ्रेंचाइजी खरीदने जा रहा है।  रिपोर्ट के अनुसार गर्मियों में होने वाले छह टीमों के टूर्नामेंट में ग्लासगो स्थित फ्रेंचाइजी को खरीदने के लिए इस समूह ने एक समझौते पर सहमति जताई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ईटीपीएल नीदरलैंड के रॉटरडैम स्थित अपनी फ्रेंचाइजी को भी दक्षिण अफ्रीका के निवेशकों के एक समूह को बेचने की तैयारी में है। इस समूह में दक्षिण अफ्रीका के पूर्व खिलाड़ी फाफ डुप्लेसी, हेनरिक क्लासेन और जोंटी रोड्स भी शामिल हैं। संभावना है कि इस महीने के आखिर में एक कार्यक्रम में दोनों फ्रेंचाइजी की आधिकारिक घोषणा की जाएगी। एम्स्टर्डम, बेलफास्ट और एडिनबर्ग में स्थित ईटीपीएल फ्रेंचाइजी को जनवरी में ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के निवेशकों को बेच दिया गया था। अभी यह पता नहीं चल पाया है कि अश्विन ईटीपीएल में खेलेंगे या नहीं। इस 39 वर्षीय खिलाड़ी ने दिसंबर 2024 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट और पिछले साल इंडियन प्रीमियर लीग से संन्यास ले लिया था। अब वह वैश्विक फ्रेंचाइजी लीग में खेलने के लिए स्वतंत्र हैं। रिपोर्ट में कहा गया है, ‘अश्विन की भागीदारी बेहद दिलचस्प है। इससे उनके ईटीपीएल में खेलने की संभावना बन गई है, जो आयोजकों के लिए बड़ी उपलब्धि होगी।’ अश्विन ने भारत के लिए 106 टेस्ट, 116 वनडे और 65 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले और कुल 765 विकेट लिए। द्रविड़ पूर्व में स्कॉटलैंड की क्रिकेट से जुड़े रहे हैं और माना जा रहा है कि यही कारण है कि उन्होंने ग्लासगो स्थित फ्रेंचाइजी के साथ जुड़ने का फैसला किया। स्कॉटलैंड जब इंग्लिश काउंटी क्रिकेट में भाग लेता था तब द्रविड़ 2003 में उसके लिए खेले थे। भारत के दिग्गज बल्लेबाज द्रविड़ ने नेशनल क्रिकेट लीग में 11 मैच खेले, जिसमें उन्होंने तीन शतकों सहित 600 रन बनाए। द्रविड़ ने भारत के लिए 164 टेस्ट और 344 वनडे मैच खेले। उन्होंने इनमें 48 शतकों सहित 24,000 से अधिक रन बनाए। वह नवंबर 2021 से जून 2024 तक भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम के मुख्य कोच भी रहे।  

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