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अमीरों की संख्या में उछाल: हुरुन रिपोर्ट में भारत के 308 अरबपति, दुनिया में तीसरी पोजिशन

नई दिल्ली भारत में अरबपतियों की संख्या बढ़कर 308 हो गई है, जो पिछले साल के मुकाबले 24 ज्यादा है। यह जानकारी हुरुन रिसर्च इंस्टीट्यूट की ‘हुरुन ग्लोबल रिच लिस्ट 2026’ में सामने आई है। इस बढ़ोतरी के साथ भारत अरबपतियों की संख्या के मामले में दुनिया में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है। इस लिस्ट में अमेरिका और चीन क्रमशः पहले और दूसरे स्थान पर हैं। रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय अरबपतियों की कुल संपत्ति में सालाना आधार पर 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है और यह बढ़कर 112.6 लाख करोड़ रुपए हो गई है। इनमें से 199 अरबपतियों की संपत्ति में वृद्धि दर्ज की गई है। हालांकि 109 अरबपतियों की संपत्ति में गिरावट आई या उनकी संपत्ति स्थिर रही। रिपोर्ट के अनुसार, भारत के अरबपतियों में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 7 प्रतिशत है। हुरुन रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में अरबपतियों की संख्या अब पारंपरिक उद्योगों से आगे बढ़कर कई नए क्षेत्रों में भी बढ़ रही है। इससे यह संकेत मिलता है कि देश में आर्थिक विकास कई अलग-अलग सेक्टरों में हो रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, हेल्थकेयर सेक्टर से सबसे ज्यादा 53 नए अरबपति सामने आए। इसके बाद इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट्स सेक्टर से 36 और कंज्यूमर गुड्स सेक्टर से 31 नए अरबपति जुड़े। हालांकि नए अरबपतियों की संख्या कम होने के बावजूद ऊर्जा सेक्टर के पास सबसे ज्यादा संपत्ति है। इस सेक्टर के सिर्फ 8 अरबपतियों के पास कुल 18.3 लाख करोड़ रुपए की संपत्ति है, जो भारत के कुल अरबपतियों की संपत्ति का लगभग 16 प्रतिशत है। भारत में मुंबई अब भी अरबपतियों का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है, जहां 95 अरबपति रहते हैं। हालांकि एशिया में अरबपतियों की राजधानी का दर्जा अब चीन के शेन्जेन को मिल गया है, जहां 133 अरबपति हैं। मुंबई में इस साल 15 नए अरबपति जुड़े, जो न्यूयॉर्क (14) और लंदन (9) से भी ज्यादा हैं। वैश्विक स्तर पर न्यूयॉर्क अरबपतियों के शहरों की सूची में पहले स्थान पर है, जहां 146 अरबपति रहते हैं। इसके बाद शंघाई (120), बीजिंग (107) और लंदन (102) का स्थान है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भारतीय अरबपतियों की औसत उम्र 67 वर्ष है, जो वैश्विक औसत 65 वर्ष से थोड़ी ज्यादा है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत की 23 महिला अरबपतियों के पास कुल मिलाकर 9.8 लाख करोड़ रुपए की संपत्ति है।

लखनऊ में Keshav Prasad Maurya के हेलीकॉप्टर में तकनीकी समस्या, समय पर हुई इमरजेंसी लैंडिंग

लखनऊ उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के हेलीकॉप्टर में धूआं भर गया। वे लखनऊ से कौशांबी जा रहे थे। वहां बाबू सिंह डिग्री कॉलेज मैदान, सयारा में दो दिवसीय सरस महोत्सव का उद्घाटन करना था। यह कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका और महिलाओं के सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए आयोजित किया गया है। हेलीकॉप्टर लखनऊ के ला मार्टिनियर ग्राउंड (ला मार्ट्स) से उड़ान भरा। उड़ान भरने के कुछ ही मिनट बाद तकनीकी खराबी आ गई। सबसे पहले हेलीकॉप्टर का डिस्प्ले बंद हो गया। फिर अचानक केबिन में धुआं उठने लगा। धुआं इतनी तेजी से फैला कि पूरा केबिन धुंए से भर गया। स्थिति बहुत गंभीर हो गई थी। पायलट ने तुरंत समझदारी दिखाई और हेलीकॉप्टर को लखनऊ के अमौसी एयरपोर्ट (चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा) पर इमरजेंसी लैंडिंग करा दी।   कितने लोग थे सवार ला मार्टिनियर ग्राउंड से अमौसी एयरपोर्ट की हवाई दूरी सिर्फ 11-12 किलोमीटर है। इसलिए हेलीकॉप्टर ज्यादा दूर नहीं जा पाया था। इमरजेंसी लैंडिंग सफल रही। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, उनके साथ मौजूद सभी सुरक्षाकर्मी और क्रू सदस्य पूरी तरह सुरक्षित हैं। किसी को कोई चोट नहीं आई।   उपमुख्यमंत्री के कार्यालय ने इस घटना की पुष्टि की है। अब वे कौशांबी अपने कार्यक्रम में शामिल होने के लिए सड़क मार्ग से जा रहे हैं। हेलीकॉप्टर की तकनीकी जांच की जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी कोई समस्या न आए। पायलट की सूझबूझ से बड़ा हादसा टल गया। सबकी सुरक्षा में कोई कमी नहीं आई। अब दूसरे हेलिकाप्टर से कौशाम्बी जायेंगे जानकारी के अनुसार, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य अब कौशाम्बी जाने के लिए अपने पहले हेलिकॉप्टर की बजाय दूसरे हेलिकॉप्टर का इस्तेमाल करेंगे। केशव मौर्य अब दूसरे हेलीकॉप्टर से कौशांबी के लिए रवाना हो गए हैं। उनके यात्रा कार्यक्रम में यह बदलाव किया गया है।

प्रधानमंत्री मोदी ने की ओम बिरला की प्रशंसा, कहा— दलगत राजनीति से ऊपर उठकर निभा रहे जिम्मेदारी

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला की कार्यशैली और व्यक्तित्व की सराहना करते हुए कहा कि वे जितने शानदार सांसद हैं, उतने ही बेहतरीन लोकसभा स्पीकर भी हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने ओम बिरला को संविधान के प्रति समर्पित बताते हुए कहा कि उनमें संसदीय परंपराओं व प्रणालियों के प्रति स्पष्ट रूप से निष्ठा दिखाई देती है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि लोकसभा स्पीकर के रूप में ओम बिरला किसी एक पक्ष के सदस्य नहीं रहते, बल्कि वे पक्ष और प्रतिपक्ष दोनों से ऊपर उठकर सदन का संचालन करते हैं। उन्होंने कहा कि जब भी वे सदन में ओम बिरला को देखते हैं तो उन्हें यह एहसास होता है कि यह शायद शिक्षा की नगरी से आने का प्रभाव है कि वे इतनी संतुलित और संयमित भूमिका निभाते हैं। लोकसभा स्पीकर के तौर पर ओम बिरला सदन के एक ऐसे मुखिया की तरह काम करते हैं जो सभी को साथ लेकर चलने में विश्वास रखते हैं। सदन में मौजूद सभी सांसदों को वे अच्छे से संभालते हैं और उनकी भावनाओं तथा आग्रहों का पूरा सम्मान करते हैं। मोदी ने कहा कि बिरला का स्वभाव ऐसा है कि वे सांसदों का सबसे अधिक सम्मान करने वाले स्पीकरों में से एक हैं। उन्होंने कहा कि कई बार सदन में कुछ ऐसे सदस्य भी आ जाते हैं जो बड़े घरानों से आते हैं और अहंकारी या उत्पाती व्यवहार कर बैठते हैं, लेकिन तब भी ओम बिरला एक जिम्मेदार मुखिया की तरह पूरे सदन को संयम के साथ संभाल लेते हैं। वे किसी को भी अपमानित नहीं करते और सभी की तीखी व कड़वी बातें भी धैर्यपूर्वक सुनते हैं। पीएम मोदी ने आगे कहा कि ओम बिरला की एक खास बात यह भी है कि वे हर समय मुस्कुराते रहते हैं। उनके चेहरे पर हमेशा एक मीठी मुस्कान रहती है, जो उनके व्यक्तित्व को और भी सहज बनाती है। शायद यही कारण है कि सदन में वे सभी सांसदों के बीच बेहद प्रिय हैं। लोकतांत्रिक व्यवस्था में लोकसभा स्पीकर की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है और ओम बिरला इस जिम्मेदारी को पूरी गरिमा, संयम और संतुलन के साथ निभा रहे हैं।

एलपीजी दाम बढ़ने पर सड़कों पर उतरेगी TMC, ममता बनर्जी ने कोलकाता में मार्च का किया ऐलान

कोलकाता पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एलपीजी सिलेंडरों की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी के खिलाफ विरोध जताया और कोलकाता में रविवार को बड़े पैमाने पर विरोध मार्च निकालने का आह्वान किया है। सीएम ममता बनर्जी ने लोगों से अपील की है कि वे रसोई के बर्तन और घरेलू सामान लेकर इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हों। उन्होंने कहा कि बढ़ती गैस कीमतों का सबसे अधिक असर आम परिवारों, खासकर महिलाओं पर पड़ रहा है, इसलिए अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर माताओं और बहनों को सड़कों पर उतरकर विरोध दर्ज कराना चाहिए। कोलकाता के एस्प्लेनेड इलाके में धरने पर बैठीं सीएम ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी आम जनता के लिए बड़ी समस्या बन गई है। उन्होंने बताया कि शुक्रवार मध्य रात्रि से घरेलू उपयोग वाले गैस सिलेंडर की कीमत में 60 रुपए की बढ़ोतरी की गई है। तीन दिन पहले ही कमर्शियल गैस सिलेंडर के दामों में 49 रुपए का इजाफा किया गया था। उन्होंने कहा कि बड़े सिलेंडर की कीमत करीब 2,100 रुपए तक पहुंच गई है, जबकि छोटे सिलेंडर की कीमत लगभग 1,000 रुपए हो गई है। मुख्यमंत्री ने गैस बुकिंग से जुड़े नियमों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अब एलपीजी सिलेंडर 21 दिन पहले बुक करना होगा। उन्होंने सवाल करते हुए कहा कि अगर किसी घर में गैस खत्म हो जाए तो क्या वह परिवार 21 दिन तक बिना खाना बनाए रह सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसी नीतियां बनाते समय सरकार को यह भी सोचना चाहिए कि आम लोग क्या खाएंगे और उनकी रोजमर्रा की जरूरतें कैसे पूरी होंगी। धरने के मंच से सीएम ममता बनर्जी ने कहा कि रविवार को निकाले जाने वाले जुलूस में लोग बर्तन, कटोरी, चम्मच और रसोई के अन्य सामान लेकर आएं, ताकि यह दिखाया जा सके कि गैस के बिना घरों में खाना बनाना संभव नहीं है। उन्होंने लोगों से अपील की कि अगर संभव हो तो गैस स्टोव भी साथ लेकर आएं और टोकरी में कच्चा अनाज लेकर विरोध जताएं। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़े तो महिलाएं काली साड़ी पहनकर भी इस विरोध में शामिल हो सकती हैं। मुख्यमंत्री ने इसे मानवता की रक्षा का आंदोलन बताते हुए महिलाओं से बड़ी संख्या में सड़कों पर उतरने का आह्वान किया। इस बीच, मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान संघर्ष के खतरे के बीच, केंद्र सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल किया है। सरकार ने भारतीय रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने का निर्देश दिया है और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि अतिरिक्त खरीदी गई एलपीजी मुख्य रूप से घरेलू उपभोक्ताओं को ही उपलब्ध कराई जाए। केंद्र सरकार के फैसले के तहत 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत में 60 रुपए की बढ़ोतरी की गई है। इसके बाद पहले 879 रुपए में मिलने वाला सिलेंडर अब 939 रुपए में मिलेगा। नई कीमतें शनिवार से लागू हो गई हैं। वहीं, कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत में भी प्रति सिलेंडर 50 रुपए का इजाफा किया गया है, जिससे इसकी कीमत बढ़कर लगभग 1,990 रुपए तक पहुंच गई है। गैस की कीमतों में इस बढ़ोतरी का असर रेस्तरां और होटल उद्योग पर भी पड़ने की संभावना जताई जा रही है, जिससे बाहर खाना खाने का खर्च बढ़ सकता है। इसी दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य सरकार की नई योजना ‘बांग्लार युवा साथी’ को लेकर भी घोषणा की। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत लाभार्थियों को शनिवार से ही वित्तीय सहायता मिलनी शुरू हो जाएगी। योजना के तहत राज्य के ऐसे छात्र जिन्होंने माध्यमिक परीक्षा पास कर ली है, लेकिन अभी तक उन्हें नौकरी नहीं मिली है, उन्हें प्रति माह 1,500 रुपए का भत्ता दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले इस योजना की राशि 1 अप्रैल से देने की बात कही गई थी, लेकिन अब इसे पहले ही लागू कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अपने वादों को निभाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी बताया कि ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना के तहत महिलाओं को मिलने वाला अनुदान फरवरी से ही दिया जा रहा है। ममता बनर्जी ने कहा, “हम जो कहते हैं, वो करते हैं।”

रूस से तेल खरीद पर दबाव! 30 दिन की छूट देने वाले अमेरिका को भारत का कड़ा संदेश

नई दिल्ली भारत को रूस से तेल आयात करने की छूट देने वाले अमेरिकी दावे पर भारत ने कड़ा पलटवार किया है। शनिवार को भारत सरकार ने साफ कहा है कि रूसी तेल खरीदने के लिए किसी की इजाजत की जरूरत नहीं है। भारत ने कहा कि वह रूस से तेल का आयात जारी रखेगा। ईरान के खिलाफ अमेरिकी और इजरायली हमलों ने दुनिया के एनर्जी सेक्टर को उलट-पुलट कर रख दिया है। इससे दुनियाभर में तेल की कीमतों में तेजी आई है। ईरान के स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से जहाजों को न निकलने देने की धमकी के बाद कच्चे तेल पर असर पड़ा है। भारत सरकार के प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो ने एक बयान में कहा कि नई दिल्ली ऐसी खरीद के लिए शॉर्ट-टर्म छूट पर निर्भर नहीं है। बयान में कहा गया, “भारत रूसी तेल खरीदने के लिए कभी भी किसी देश की इजाजत पर निर्भर नहीं रहा है।” बयान में आगे कहा गया, ”भारत फरवरी 2026 में भी रूसी तेल इंपोर्ट कर रहा है, और रूस अभी भी भारत का सबसे बड़ा क्रूड ऑयल सप्लायर है।” वॉशिंगटन ने फरवरी में एक अंतरिम ट्रेड डील के तहत भारतीय एक्सपोर्ट पर 25 फीसदी ड्यूटी वापस ले ली थी, जिसे उसने रूसी तेल खरीदना बंद करने के नई दिल्ली के ‘कमिटमेंट’ के तौर पर बताया था। बयान में कहा गया है कि भारत के पास शॉर्ट टर्म रुकावटों से निपटने के लिए 250 मिलियन बैरल से ज्यादा क्रूड और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स का अच्छा स्टॉक है। हालांकि, भारत ने शनिवार को खाना पकाने के लिए इस्तेमाल होने वाले घरेलू लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) सिलेंडर की कीमत 60 रुपये बढ़ा दी। इसके साथ ही, कमर्शियल सिलेंडरों के दाम में भी इजाफा हुआ है। दुनिया भर में, शुक्रवार को क्रूड 8.5 फीसदी बढ़ गया और प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप के यह कहने के बाद कि सिर्फ ईरान का बिना शर्त सरेंडर ही मिडिल ईस्ट युद्ध को खत्म करेगा, इस हफ्ते यह लगभग 30 परसेंट बढ़ गया। वहीं, रूस ने शुक्रवार को कहा कि वह भारत को किए जाने वाले कच्चे तेल निर्यात के आंकड़े सार्वजनिक नहीं करेगा और इसे ‘बहुत से बुरा चाहने वालों’ से छिपाकर रखेगा। रूसी राष्ट्रपति कार्यालय ‘क्रेमलिन’ के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने यह टिप्पणी अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के उस बयान के बाद की जिसमें पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच भारतीय रिफाइनरियों को रूसी तेल खरीदने के लिए 30 दिनों की अस्थायी छूट देने की बात कही गई है। पेसकोव ने भारत को दिए गए तेल के बारे में पूछे जाने पर कहा, ”नहीं, हम साफ वजहों से मात्रा का कोई आंकड़ा नहीं देने जा रहे हैं। यह पहली बात है। बुरा चाहने वाले बहुत लोग हैं।”  

डिजिटल पंजीयन में मध्यप्रदेश ने रचा इतिहास : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

प्रदेश का पहला पूर्ण पेपरलैस ई-रजिस्ट्रेशन सिस्टम संपदा 2.0 और सायबर पंजीयन कार्यालय से कहीं से भी होगा दस्तावेजों का फेसलैस पंजीयन हर साल 11 हजार करोड़ से अधिक राजस्व भोपाल मध्यप्रदेश में पंजीयन प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए राज्य सरकार ने संपदा 2.0 प्रणाली से दस्तावेजों का पूर्णतः पेपरलेस ई-पंजीयन शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि अत्याधुनिक तकनीक पर आधारित यह व्यवस्था नागरिकों को त्वरित सेवाएं देने के साथ-साथ प्रशासन में पारदर्शिता और सुगमता सुनिश्चित करेगी। पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग राज्य के प्रमुख राजस्व अर्जित करने वाले विभागों में शामिल है। प्रदेश में प्रतिवर्ष लगभग 16 लाख दस्तावेजों का पंजीयन किया जाता है, जिससे 11 हजार करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त होता है। विभाग की वेब आधारित संपदा प्रणाली के माध्यम से ई-पंजीयन और ई-स्टाम्पिंग की सुविधा प्रदान कर पूरी प्रक्रिया को एंड-टू-एंड इलेक्ट्रॉनिक बनाया गया है। पेपरलैस और डिजिटल पंजीयन में मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य संपदा 2.0 के माध्यम से दस्तावेजों का पूर्णतः पेपरलेस और डिजिटल पंजीयन संभव हुआ है और यह व्यवस्था लागू करने वाला मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है। इस प्रणाली में कोई भी व्यक्ति कहीं से भी ई-स्टाम्प तैयार कर सकता है। साथ ही संपत्ति की पहचान भू-अभिलेख और नगरीय प्रशासन के डेटाबेस से की जाती है तथा संपत्ति की जियो-टैगिंग भी की जाती है, जिससे संपत्ति संबंधी विवादों में कमी आएगी। कृषि भूमि के पूर्ण अंतरण के बाद सायबर तहसील के माध्यम से स्वतः नामांतरण की सुविधा भी शुरू की गई है, वहीं कलेक्टर ऑफ स्टाम्प न्यायालय की प्रक्रिया को भी पूरी तरह ऑनलाइन कर दिया गया है। ई-गवर्नेंस को और मजबूत बनाने के लिए भोपाल स्थित महानिरीक्षक पंजीयन कार्यालय में सायबर पंजीयन कार्यालय स्थापित किया गया है। इसके माध्यम से लगभग 75 प्रकार के दस्तावेजों का फेसलेस पंजीयन किया जा सकेगा। सायबर सब-रजिस्ट्रार राज्य के किसी भी जिले के दस्तावेजों का ऑनलाइन पंजीयन कर सकेंगे।        फेसलेस पंजीयन प्रक्रिया में पक्षकारों के लिए आधार आधारित वीडियो KYC करना अनिवार्य होगा। दस्तावेजों के डिजिटल निष्पादन के बाद उन्हें ऑनलाइन सायबर उप-पंजीयक के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। इससे नागरिकों को उप पंजीयक कार्यालय आने की आवश्यकता नहीं रहेगी। नई व्यवस्था के तहत लीज, मॉर्टगेज, डी-मॉर्टगेज, संपत्ति में पत्नी या बेटी का नाम जोड़ने और मुख्तियारनामा जैसे दस्तावेज अब कहीं से भी ऑनलाइन तैयार कर पंजीकृत किए जा सकते हैं। डिजिटल तकनीक के उपयोग से मध्यप्रदेश ने ई-गवर्नेंस के क्षेत्र में नई मिसाल कायम की है और आने वाले समय में यह व्यवस्था नागरिक सेवाओं को और अधिक सरल, पारदर्शी तथा भरोसेमंद बनाएगी।

तनाव के बीच ईरान का बयान: राष्ट्रपति पेजेशकियन ने पड़ोसी देशों से माफी मांगते हुए हमले रोकने का ऐलान

तेहरान पेजेशकियन ने कहा कि सैन्य बलों को एक आदेश दिया गया है। अब से, पड़ोसी देशों पर तब तक हमला न करें जब तक कि उन पर पहले हमला न हो। जो लोग इस मौके का फायदा उठाकर ईरान पर हमला करने की सोच रहे हैं, उन्हें साम्राज्यवाद की कठपुतली नहीं बनना चाहिए। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने पड़ोसी देशों से माफी मांगते हुए कहा है कि अब ईरान उन देशों पर हमला नहीं करेगा। पेजेशकियान ने ईरान के सरकारी टेलीविजन पर प्रसारित एक वीडियो संदेश में कहा, “मुझे लगता है कि उन पड़ोसी देशों से माफी मांगना जरूरी है जिन पर हमला हुआ है।” उन्होंने कहा, “हमारा पड़ोसी देशों पर हमला करने का कोई इरादा नहीं है। हम शांति और सुकून कायम करने के लिए इलाके में सहयोग की अपील करते हैं।” पेजेशकियन ने कहा, “सैन्य बलों को एक आदेश दिया गया है। अब से, पड़ोसी देशों पर तब तक हमला न करें जब तक कि उन पर पहले हमला न हो।” उन्होंने कहा, “जो लोग इस मौके का फायदा उठाकर ईरान पर हमला करने की सोच रहे हैं, उन्हें साम्राज्यवाद की कठपुतली नहीं बनना चाहिए।” उन्होंने कहा कि इजरायल या अमेरिका का समर्थन करना इज्जत और आजादी का रास्ता नहीं है। सऊदी अरब ने दी थी ईरान को चेतावनी इससे पहले, सऊदी अरब के रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान ने देश के सैन्य ठिकानों और तेल केंद्रों पर हुए सिलसिलेवार मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद ईरान को ‘गलतफहमी और गलत आकलन’ से बचने की कड़ी चेतावनी दी थी। सऊदी रक्षा मंत्रालय ने शनिवार को बयान जारी कर बताया कि अमेरिकी सैन्य कर्मियों की मौजूदगी वाले एक एयर बेस और एक प्रमुख तेल क्षेत्र को निशाना बनाकर किये गये हमलों को सफलतापूर्वक नाकाम कर दिया गया है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, राजधानी रियाद के दक्षिण-पूर्व स्थित प्रिंस सुल्तान एयर बेस की ओर दागी गयी एक बैलिस्टिक मिसाइल को बीच में ही रोककर नष्ट कर दिया गया। सऊदी प्रेस एजेंसी ने मंत्रालय के प्रवक्ता के हवाले से पुष्टि की है कि इसी एयर बेस पर एक और मिसाइल हमला हुआ, जिसे भी विफल कर दिया गया। इसके अलावा, संयुक्त अरब अमीरात की सीमा के पास स्थित शयबाह तेल क्षेत्र को निशाना बनाकर किए गए कई ड्रोन हमलों और रियाद के पूर्व में एक अन्य ड्रोन हमले को भी सेना ने नाकाम कर दिया है।  

CM योगी का मथुरा दौरा: श्रीकृष्ण जन्मभूमि में दर्शन कर प्रदेश की शांति-समृद्धि के लिए मांगी दुआ

मथुरा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को कान्हा की नगरी मथुरा का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर पहुंचकर भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन किए और विधिवत पूजन-अर्चन कर श्रद्धा निवेदित की। ब्रज की पावन धरा से प्रदेशवासियों के लिए सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। दर्शन के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि ब्रज भूमि का कण-कण ऊर्जा और भक्ति से भरा है। प्रभु श्रीकृष्ण के चरणों में शीश नवाकर मन को असीम शांति की अनुभूति होती है। उन्होंने प्रार्थना की कि भगवान का आशीर्वाद प्रदेश के प्रत्येक नागरिक पर बना रहे। उत्तर प्रदेश निरंतर विकास की नई ऊंचाइयों को छुए।

ईंधन कीमतों पर राहत! होर्मुज जलडमरूमध्य से पहली खेप रवाना, नहीं बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम

नई दिल्ली शनिवार को सरकारी सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं होगी। सूत्रों ने बताया कि भारत की ऊर्जा भंडार स्थिति लगातार बेहतर हो रही है और हालात पहले की तुलना में ज्यादा स्थिर हो रहे हैं। सरकारी सूत्रों के अनुसार, ऊर्जा भंडार की स्थिति में सुधार होने से सरकार को ईंधन आपूर्ति को संभालने में ज्यादा भरोसा मिला है। उन्होंने बताया कि भारत ने कच्चे तेल के आयात को विविध बनाने के लिए कदम उठाए हैं ताकि संवेदनशील समुद्री मार्गों पर निर्भरता कम हो सके। सूत्रों ने कहा कि पहले भारत के कुल कच्चे तेल आयात का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य के बाहर के स्रोतों से आता था, लेकिन अब यह हिस्सा बढ़कर करीब 70 प्रतिशत हो गया है। उन्होंने यह भी बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य से पहली तेल खेप रवाना हो चुकी है, जिससे संकेत मिलता है कि तेल की आपूर्ति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है। सरकार की यह सफाई उस समय आई जब विपक्षी राजनीतिक दलों ने आरोप लगाया था कि ईंधन की कीमतें बढ़ सकती हैं। इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए सरकारी सूत्रों ने कहा कि यह पूरी तरह बेबुनियाद आरोप हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पहले दिया गया आश्वासन सिर्फ पेट्रोल और डीजल की कीमतों से संबंधित था, यह एलपीजी के बारे में नहीं था। सूत्रों ने फिर से दोहराया कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं होगी। उन्होंने कहा, “यह बात सिर्फ पेट्रोल और डीजल के लिए कही गई थी। इसका संबंध एलपीजी से नहीं था। आज हम फिर से भरोसा दिलाते हैं कि पेट्रोल और डीजल की कीमतें नहीं बढ़ेंगी।” रसोई गैस के मुद्दे पर सूत्रों ने कहा कि सरकार फिलहाल एलपीजी उत्पादन को प्राथमिकता देने की दिशा में काम कर रही है, ताकि इसकी पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने यह भी बताया कि पिछले 12 वर्षों में एलपीजी सिलेंडर की कीमत लगभग 110 रुपए बढ़ी है। सूत्रों के अनुसार, सरकार ऊर्जा क्षेत्र की स्थिति पर करीबी नजर रख रही है और ईंधन की आपूर्ति और कीमतों को स्थिर बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठा रही है।

महिला हॉकी विश्व कप 2026 के लिए भारतीय टीम तैयार, क्वालिफिकेशन में झोंकेगी पूरी ताकत

हैदराबाद.  भारत की महिला नेशनल फील्ड हॉकी टीम रविवार से हैदराबाद, तेलंगाना में शुरू हो रहे एफआईएच हॉकी वर्ल्ड कप क्वालिफायर 2026 में महिला हॉकी वर्ल्ड कप 2026 में अपनी जगह पक्की करने के लक्ष्य के साथ उतरेगी। इस टूर्नामेंट में मेजबान भारत के अलावा इंग्लैंड, स्कॉटलैंड, कोरिया, इटली, उरुग्वे, वेल्स और ऑस्ट्रिया शामिल हैं। सभी 8 टीमों को 4-4 के दो ग्रुप में बांटा गया है। ग्रुप ए में इंग्लैंड, कोरिया, इटली और ऑस्ट्रिया हैं, जबकि ग्रुप बी में भारत, स्कॉटलैंड, उरुग्वे और वेल्स हैं। प्रत्येक ग्रुप से 2-2 टीमें सेमीफाइनल में जाएंगी। फाइनल के अलावा एक कांस्य पदक मैच होगा। टूर्नामेंट में पहला, दूसरा और तीसरा स्थान हासिल करने वाली टीमें विश्व कप 2026 के लिए सीधा क्वालिफिकेशन हासिल करेंगी। इसके अलावा, हैदराबाद में चौथे स्थान पर रहने वाली दुनिया की सबसे ऊंची रैंक वाली टीम को भी टूर्नामेंट में जगह मिलेगी। आने वाले वर्ल्ड कप में पुरुषों और महिलाओं दोनों के कॉम्पिटिशन में 16 टीमें होंगी, जिसमें हर कैटेगरी में नौ टीमें पहले ही क्वालिफिकेशन हासिल कर चुकी हैं। भारत हैदराबाद में शानदार प्रदर्शन के लिए मजबूत घरेलू समर्थन पर भरोसा करेगा। टीम हाल ही में नियुक्त मुख्य कोच शोर्ड मारिन के नेतृत्व में खेलेगी। भारत अभी दुनिया में नौवें स्थान पर है और इंग्लैंड के बाद टूर्नामेंट में दूसरी सबसे ऊंची रैंक वाली टीम है, जो दुनिया भर में सातवें स्थान पर है। भारत टूर्नामेंट में विश्व कप में जगह बनाने के इरादे से उतरेगी। इंडियन टीम अपने कैंपेन की शुरुआत 8 मार्च को उरुग्वे के खिलाफ करेगी। 9 मार्च और 11 मार्च को स्कॉटलैंड और वेल्स के खिलाफ मैच होंगे। भारतीय महिला हॉकी टीम अब तक वर्ल्ड कप के आठ एडिशन खेल चुकी है। सबसे अच्छा प्रदर्शन 1974 में रहा था, जब टीम चौथे स्थान पर रही थीं। टूर्नामेंट से पहले, “भारतीय कप्तान सलीमा टेटे ने कहा, “हम अपने फैन्स के सामने अपने घर पर क्वालिफायर खेलने के लिए बहुत उत्साहित हैं। टीम इस टूर्नामेंट के लिए बहुत मेहनत कर रही है क्योंकि हम जानते हैं कि क्या दांव पर लगा है। यहां हर टीम विश्व कप में जगह बनाने के लिए मुकाबला कर रही है। हमें शुरू से ही मुश्किल मैचों की उम्मीद है।” उन्होंने कहा, “हैदराबाद में खेलना हमारे लिए बहुत खास होगा। घरेलू दर्शकों का हमेशा प्रेरणा देता है। हमारा फोकस एक बार में एक ही मैच पर रहने और अपना श्रेष्ठ देने पर होगा ताकि हम अच्छा प्रदर्शन कर सकें और विश्व कप में अपनी जगह पक्की कर सकें।”

देवजी के बाद बड़ा झटका: 124 माओवादी करेंगे सरेंडर, संगठन की सैन्य इकाई लगभग ध्वस्त

जगदलपुर.  तेलंगाना में शनिवार को होने जा रहा 124 माओवादियों का सामूहिक समर्पण वाम उग्रवाद के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। माओवादी सैन्य प्रमुख थिप्पिरी तिरुपति उर्फ देवजी और दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के प्रभारी मल्लाजी रेड्डी के नेतृत्व में यह समर्पण शाम चार बजे मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के सामने होगा। पुलिस सूत्रों के मुताबिक समर्पण करने वालों में पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) से जुड़े कई सक्रिय कैडर शामिल हैं। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि इस समर्पण के साथ ही माओवादी संगठन की सैन्य इकाई लगभग पूरी तरह ध्वस्त हो गई है। दरअसल माओवादियों की सक्रिय और संगठित सैन्य संरचना अब केवल दंडकारण्य क्षेत्र तक सीमित रह गई थी। देवा भी समर्पण कर चुका है सूत्रों के अनुसार माओवादियों की इकलौती सक्रिय बटालियन भी इसी इलाके में संचालित हो रही थी, जिसका प्रभारी हाल ही में मारा गया कुख्यात कमांडर माड़वी हिड़मा और कमांडर बा देवा था। इस बटालियन को संगठन की सबसे ताकतवर सैन्य इकाई माना जाता था। यह छत्तीसगढ़, तेलंगाना और महाराष्ट्र की सीमा से लगे जंगलों में सक्रिय रहती थी। बड़ी संख्या में कैडरों के समर्पण के बाद इस बटालियन की संरचना भी लगभग समाप्त मानी जा रही है। हिड़मा के मारे जाने के बाद देवा भी समर्पण कर चुका है। हाल के महीनों में संगठन के शीर्ष नेता देवजी और दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के प्रभारी मल्ला राजी रेड्डी और तेलंगाना के प्रभारी दामोदर के आत्मसमर्पण की प्रक्रिया शुरू होने के बाद कैडरों में भी संगठन छोड़ने की प्रवृत्ति बढ़ी है। माओवादी संगठन का ढांचा तेजी से कमजोर पड़ रहा सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि लगातार सुरक्षा अभियानों, मजबूत खुफिया नेटवर्क और पुनर्वास नीति के कारण माओवादी संगठन का ढांचा तेजी से कमजोर पड़ रहा है। अधिकारियों का कहना है कि यह सामूहिक समर्पण दंडकारण्य क्षेत्र में माओवादी संगठन के घटते प्रभाव का संकेत है। आने वाले समय में और भी कैडरों के मुख्यधारा में लौटने की संभावना जताई जा रही है।

खाड़ी युद्ध से महंगाई का खतरा, SBI रिपोर्ट में दावा— भारत की अर्थव्यवस्था पर असर रहेगा सीमित

नई दिल्ली. खाड़ी क्षेत्र में चल रहा संघर्ष, जिसमें इजरायल, ईरान और अमेरिका से जुड़े सैन्य ठिकाने शामिल हैं, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर डाल सकता है। शनिवार को जारी एसबीआई रिसर्च की एक रिपोर्ट के अनुसार, यदि यह संघर्ष लंबा चलता है तो इससे वैश्विक मंदी का दबाव, महंगाई में वृद्धि और वित्तीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ सकती है। हालांकि रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के घरेलू वित्तीय बाजारों को फिलहाल भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के कदमों से सपोर्ट मिला है। आरबीआई ने सरकारी बॉन्ड (जी-सेक) यील्ड को संतुलित रखने और रुपए की अस्थिरता को नियंत्रित करने के लिए हस्तक्षेप किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, अगर यह संघर्ष लंबे समय तक जारी रहता है तो इससे भारत के मैक्रो-इकोनॉमिक संकेतकों पर भी दबाव पड़ सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि आरबीआई ने स्पॉट मार्केट में हस्तक्षेप करके रुपए की अधिक अस्थिरता को कम किया है और इसे 92 के स्तर से नीचे रखने में सफलता हासिल की है। रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा अनिश्चितता के बीच यह कदम काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से वैश्विक ऊर्जा बाजार पर असर पड़ा है। दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल का व्यापार इसी मार्ग से होता है, इसलिए यहां बाधा आने से तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है। फिलहाल ब्रेंट क्रूड की कीमत 91.84 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई 89.62 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच चुकी है। एसबीआई रिसर्च के अनुसार, अगर कच्चे तेल की कीमत में प्रति बैरल 10 डॉलर की बढ़ोतरी होती है, तो वित्त वर्ष 2027 में चालू खाते का घाटा (सीएडी) करीब 36 बेसिस प्वाइंट तक बढ़ सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि तेल की कीमत 130 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच जाती है, तो भारत की जीडीपी वृद्धि दर घटकर लगभग 6 प्रतिशत तक आ सकती है। एसबीआई रिसर्च ने ऐतिहासिक दृष्टिकोण से भी इस संघर्ष का विश्लेषण किया है। रिपोर्ट के अनुसार, यह युद्ध कोंड्राटिएफ वेव के अंतिम चरण के दौरान हो रहा है, जो लंबे समय तक चलने वाले आर्थिक चक्र का सिद्धांत है। इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संरचनात्मक प्रभाव पड़ सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इस संघर्ष में कुछ देशों को फायदा भी हो सकता है। उदाहरण के लिए, अमेरिका को तेल और गैस की कीमतें बढ़ने से लाभ मिल सकता है। साथ ही, यूरोप की रूसी ऊर्जा पर निर्भरता कम होने से अमेरिका के लिए नए अवसर बन सकते हैं। वहीं, दुनिया के अधिकांश अन्य क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों पर दबाव बढ़ सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बाजार में बढ़ती अस्थिरता के बीच कई केंद्रीय बैंक सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने का भंडार बढ़ा रहे हैं। भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में फिलहाल लगभग 17.6 प्रतिशत हिस्सा सोने का है। रिपोर्ट के अनुसार, इस संघर्ष का असर भारत पर कई तरीकों से पड़ सकता है। इसमें खाड़ी देशों से आने वाली रेमिटेंस, कच्चे तेल का आयात और पश्चिम एशियाई देशों के साथ व्यापार शामिल हैं। हालांकि रूसी कच्चे तेल की खरीद और फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट्स जैसे कदमों के कारण आपूर्ति से जुड़े जोखिम कुछ हद तक कम हो सकते हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारतीय बैंक और निजी कंपनियां भी उन क्षेत्रों से जुड़ी हैं जो इस संघर्ष से प्रभावित हो सकते हैं। रिपोर्ट में यह निष्कर्ष निकाला गया कि खाड़ी क्षेत्र में बढ़ती अनिश्चितता तेल की कीमतों, महंगाई की उम्मीदों और निवेशकों के भरोसे को आने वाले समय में प्रभावित करती रहेगी। इसलिए नीति निर्माताओं और निवेशकों को इस स्थिति पर करीबी नजर बनाए रखने की जरूरत है।

LPG सिलेंडर के बढ़े दाम पर खड़गे का वार, बोले— पर्याप्त तेल-गैस मुहैया कराने में सरकार लाचार

नई दिल्ली.  कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमतों में इजाफा होने के बाद केंद्र सरकार का निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पर्याप्त तेल-गैस और उर्वरक मुहैया कराने में लाचार है। मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “घरेलू एलपीजी सिलेंडर में 60 रुपए का इजाफा और कमर्शियल एलपीजी में 115 रुपए का मुनाफा कमाया। पहले कम अंतर्राष्ट्रीय दामों का लाभ जनता से छीना और अब महंगाई के बोझ से जनता का पसीना निकाला। जंग होने पर ‘सब चंगा सी’ वाली दावेबाज मोदी सरकार, पर्याप्त तेल-गैस और उर्वरक मुहैया कराने में लाचार है।” इससे पहले, कांग्रेस ने आधिकारिक ‘एक्स’ अकाउंट से पोस्ट किया, “सरकार ने जनता को झटका दिया है। सरकार ने घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम सीधे 60 रुपए बढ़ा दिए हैं। वहीं, कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के लिए अब आपको 115 रुपए ज्यादा चुकाने होंगे। पिछले 3 महीने में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम 307 रुपए बढ़ गए हैं। सरकार लगातार जनता पर महंगाई का हंटर चला रही है।” आम आदमी पार्टी ने भी एलपीजी सिलेंडर के दाम बढ़ने पर सरकार को घेरा। पार्टी ने ‘एक्स’ पोस्ट पर लिखा, “सरकार ने जनता को होली गिफ्ट दिया है। देश की जनता बढ़ती महंगाई से पहले ही त्रस्त है और उसके ऊपर से सरकार ने एक और बम फोड़ा है। सरकार ने घरों में इस्तेमाल होने वाले एलपीजी गैस सिलेंडर के दाम 60 रुपए और बढ़ा दिए हैं।” बता दें कि तेल कंपनियों ने शनिवार को घरेलू और कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में इजाफा किया। घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत में 60 रुपए और कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में 114.5 रुपए की बढ़ोतरी की गई है। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के अनुसार, नई दिल्ली में 14.2 किलो के बिना सब्सिडी वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 913 रुपए कर दी गई है, जो पहले 853 रुपए थी। घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में एक साल से भी कम समय में यह दूसरी बार बढ़ोतरी हुई है। कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में भी प्रति यूनिट 114.5 रुपए की बढ़ोतरी हुई है।

धार के लाल पक्षाल सेक्रेटरी ने UPSC में 8वीं रैंक के साथ देश में किया नाम रोशन

धार   धार जिले के छोटे कस्बे बाग के लिए गर्व की बात है कि यहां के होनहार युवा पक्षाल सेक्रेटरी ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 8 हासिल कर क्षेत्र का नाम पूरे देश में रोशन किया है। उनकी इस उपलब्धि से परिवार सहित पूरे नगर में खुशी और गर्व का माहौल है। लोगों ने मिठाई बांटकर और आतिशबाजी कर खुशियां मनाईं। माता-पिता का आशीर्वाद पक्षाल सेक्रेटरी का कहना है कि माता-पिता का आशीर्वाद और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पण ही उनकी सबसे बड़ी प्रेरणा रही। उनके पिता निलेश जैन कपड़ा व्यवसायी हैं, जबकि माता दीप्ति जैन गृहिणी हैं। परिवार के अनुसार प्रक्षाल बचपन से ही पढ़ाई में मेधावी रहे हैं और उन्होंने कड़ी मेहनत व लगन से यह मुकाम हासिल किया। पक्षाल की प्रारंभिक पढ़ाई बाग के महेश मेमोरियल स्कूल में हुई। आगे की पढ़ाई के लिए वे इंदौर चले गए और बाद में उन्होंने आईआईटी कानपुर से फाइनेंस में पढ़ाई की। आईआईटी से पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने कॉर्पोरेट क्षेत्र में जाने के बजाय देश सेवा का रास्ता चुना और सिविल सेवा की तैयारी शुरू कर दी। दिल्ली में रहकर तैयारी पक्षाल वर्ष 2022-23 के आसपास दिल्ली चले गए और वहीं रहकर यूपीएससी की तैयारी की। उनकी छोटी बहन क्रिया जैन ने बताया कि तैयारी के दौरान उन्होंने बेहद कठिन परिस्थितियों का सामना किया। कई बार ऐसा समय भी आया जब वे रोजाना केवल 3 से 4 घंटे ही सोते थे और दिनभर लाइब्रेरी में पढ़ाई करते थे। प्रयास जारी रहा पहले प्रयास में उन्हें भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) मिलने की संभावना थी, लेकिन उनका लक्ष्य आईएएस बनना था, इसलिए उन्होंने तैयारी जारी रखी। दूसरे प्रयास में वे प्रीलिम्स में ही रह गए, लेकिन तीसरे प्रयास में उन्होंने शानदार सफलता हासिल करते हुए ऑल इंडिया रैंक 8 प्राप्त की। तैयारी के दौरान कई चुनौतियां भी सामने आईं। एक बार इंटरव्यू से एक दिन पहले उनका पैर मुड़ गया था, फिर भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। पक्षाल जैन की इस सफलता से बाग सहित पूरे क्षेत्र के युवाओं को प्रेरणा मिली है कि छोटे कस्बों से भी बड़े सपने पूरे किए जा सकते हैं।

22वीं किस्त के लिए इंतजार खत्म! पीएम किसान योजना की घोषणा असम दौरे से हो सकती है

भोपाल   प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की अगली किस्त को लेकर किसानों के बीच उत्सुकता बढ़ गई है। ऐसी संभावना जताई जा रही है कि पीएम मोदी असम दौरे के दौरान पीएम किसान सम्मान निधि की 22वीं किस्त किसानों के बैंक खातों में ट्रांसफर कर सकते हैं। बता दें कि पीएम किसान योजना के तहत किसानों को हर साल 6 हजार रुपये की सहायता तीन किस्तों में दी जाती है। असम दौरे पर रहेंगे प्रधानमंत्री जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 मार्च को असम के कोकराझार दौरे पर जाएंगे। यहां वे बोडोलैंड टेरिटोरियल एरियाज डिस्ट्रिक्ट में आयोजित कई सरकारी कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। इस दौरान प्रधानमंत्री विभिन्न विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे तथा एक बड़ी जनसभा को भी संबोधित करेंगे। रैली में हो सकती है किस्त जारी करने की घोषणा राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा है कि कोकराझार में होने वाली इस रैली के दौरान प्रधानमंत्री पीएम किसान सम्मान निधि की 22वीं किस्त जारी करने की घोषणा कर सकते हैं। हालांकि अभी इसे लेकर केवल कयास लगाए जा रहे हैं और आधिकारिक पुष्टि का इंतजार किया जा रहा है। पहले कब जारी हुई थीं किस्तें पीएम किसान योजना के तहत किसानों को हर साल 6 हजार रुपये की सहायता तीन किस्तों में दी जाती है।     20वीं किस्त 2 अगस्त 2025 को वाराणसी से जारी की गई थी।     21वीं किस्त नवंबर 2025 में तमिलनाडु के कोयंबटूर से जारी हुई थी। मध्यप्रदेश के 81 लाख से ज्यादा किसान लाभार्थी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, मध्यप्रदेश में करीब 81 लाख 81 हजार 751 किसान इस योजना का लाभ ले रहे हैं। लेकिन सरकार अपात्र लाभार्थियों की पहचान को लेकर सख्त हो गई है। फरवरी 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में प्रदेश के करीब 1.66 लाख किसानों के नाम पात्रता सूची से हटाए जा चुके हैं। किसानों के लिए कई योजनाएं लागू सरकार के अनुसार अब तक करीब 10 करोड़ किसानों को इस योजना के तहत 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि दी जा चुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुताबिक कृषि क्षेत्र में कई सुधार किए गए हैं     एमएसपी सुधारों से किसानों को लागत का डेढ़ गुना तक लाभ मिल रहा है।     इंस्टीट्यूशनल क्रेडिट कवरेज 75 प्रतिशत से अधिक हो चुका है।     प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत लगभग 2 लाख करोड़ रुपये के दावे निपटाए गए हैं। प्रधानमंत्री ने कहा है कि इन प्रयासों से किसानों का जोखिम काफी कम हुआ है और उन्हें आर्थिक सुरक्षा का एक मजबूत आधार मिला है।

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