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MP कर्मचारियों के लिए बड़ा फैसला, ट्रेनिंग अनिवार्य; नियम तोड़ने पर देना होगा ₹5000 जुर्माना

भोपाल एमपी में कर्मचारियों के लिए तीन माह के ट्रेनिंग कार्यक्रम की घोषणा की गई है। प्रदेश के लिपिक वर्गीय कर्मचारियों के लिए यह ट्रेनिंग होगी। लेखा प्रशिक्षण-सत्र 1 अप्रैल से प्रारंभ होगा और 30 जून तक चलेगा। स्थानीय निकायों और अर्धशासकीय संस्थाओं के जिन लिपिक वर्गीय कर्मचारियाों की परिवीक्षा अवधि पूर्ण हो चुकी है वे भी लेखा प्रशिक्षण के लिए पात्र होंगे। वित्त विभाग के निर्देशानुसार ऐसे कर्मचारियों को ट्रेनिंग के लिए 5 हजार रुपए का चालान भरना होगा। यह ट्रेनिंग लेने के इच्छुक लिपिक वर्गीय कर्मचारियों को अपने आवेदन-पत्र 16 मार्च तक जमा कराने को कहा गया है। नियमित लेखा प्रशिक्षण सत्र लेखा प्रशिक्षण शाला भोपाल में संचालित होगा। भोपाल और नर्मदापुरम संभाग के अंतर्गत सभी जिलों के लिपिकवर्गीय कर्मचारियों को आवेदन कार्यालय प्रमुख से अभिप्रमाणित कराकर ही जमा कराने के लिए निर्देशित किया गया है। आवेदन लेखा प्रशिक्षण शाला में तीन मूल प्रतियों में जमा कराने होंगे। वित्त विभाग के अनुसार वही लिपिकवर्गीय शासकीय कर्मचारी प्रशिक्षण के पात्र होंगे जिनकी परिवीक्षा अवधि पूर्ण हो चुकी है तथा जिन्होंने सीपीसीटी परीक्षा पास की हो या फिर उन्हें नियमानुसार छूट प्राप्त हो। लेखा प्रशिक्षण शाला के प्राचार्य ने बताया कि आवेदन-पत्र के साथ शैक्षणिक योग्यता प्रमाण-पत्र की कापी अनिवार्य रूप से देना होगी। आवेदन-पत्र पर कर्मचारी को पासपोर्ट साइज फोटो लगाना होगा। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के कर्मचारियों को जाति प्रमाण-पत्र भी संलग्न करना होगा। वित्त विभाग के निर्देशानुसार ये प्रमाणपत्र कार्यालय प्रमुख से सत्यापित कराने होंगे। 5 हजार रूपए का चालान जमा कराना होगा प्रदेश के स्थानीय निकाय और अर्धशासकीय संस्थाओं के ऐसे लिपिकवर्गीय कर्मचारी भी ट्रेनिंग ले सकेंगे जिनकी परिवीक्षा अवधि पूर्ण हो चुकी है। ऐसे कर्मचारियों को प्रशिक्षण शुल्क के रूप में 5 हजार रूपए का चालान जमा कराना होगा। सत्र में प्रवेश के समय यह चालाना देना होगा।

IND vs ENG: करो या मरो की जंग में टीम इंडिया के 5 मैच विनर, अंग्रेजों को चटा सकते हैं धूल

नई दिल्ली सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में टीम इंडिया इंग्लैंड को हराकर फाइनल का टिकट कटाना चाहेगी। भारत और इंग्लैंड के बीच टी20 वर्ल्ड कप में ये लगातार तीसरा सेमीफाइनल होने वाला है। 2022 में इंग्लैंड ने बाजी मारी, तो 2024 में टीम इंडिया ने जीत हासिल की थी। अब मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में दोनों टीमें टकराने वाली हैं। इस मुकाबले में भारत के 5 ऐसे खिलाड़ी हैं, जो अकेले अपने दम पर टीम को मैच में जीत दिला सकते हैं। इसमें संजू सैमसन से लेकर तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह तक का नाम शामिल है। भारत को अपने दम पर जीत दिला सकते हैं ये खिलाड़ी- 1. जसप्रीत बुमराह भारत के दिग्गज तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह इंग्लैंड के लिए बड़ा सिरदर्द हो सकते हैं। बुमराह नई और पुरानी गेंद के साथ बेहतरीन गेंदबाजी करते हैं। वे बहुत ही कंजूसी के साथ रन भी खर्च करते हैं। बुमराह ने टी20 वर्ल्ड कप 2026 में 6 मैच खेले हैं और 9 विकेट अपने नाम किए हैं। उन्होंने मात्र 6.30 की इकोनॉमी से रन दिए हैं, जिससे बुमराह अपने दम पर मैच में जीत दिला सकते हैं। 2. संजू सैमसन विकेटकीपर बल्लेबाज संजू सैमसन फॉर्म में वापसी कर चुके हैं। उन्होंने वेस्टइंडीज के खिलाफ अहम मुकाबले में नाबाद 97 रनों की पारी खेली और टीम को जीत दिलाई। सैमसन ऐसे खिलाड़ी हैं, जो अगर पिच पर टिक गए, तो इंग्लिश गेंदबाजों की खैर नहीं होगी। वे अपने दम पर भारत को मैच जिता सकते हैं और इसका ताजा उदाहरण विंडीज के खिलाफ खेला गया मैच है। 3. वरुण चक्रवर्ती वरुण चक्रवर्ती पिछले कुछ मैचों में अपनी लय में नहीं दिखे हैं। उनके खिलाफ बल्लेबाजों ने रन बनाए हैं लेकिन चक्रवर्ती अपनी गेंदबाजी से इंग्लिश बल्लेबाजों को परेशान कर सकते हैं। वे टी20 की रैंकिंग में दुनिया के नंबर-1 गेंदबाज हैं और भारत को मुश्किल समय में विकेट दिलाते रहे हैं। ऐसे में मुंबई में होने वाले सेमीफाइनल मैच में भी वे भारत के लिए अहम खिलाड़ी साबित हो सकते हैं। 4. ईशान किशन ईशान किशन का पिछले दो मैचों में बल्ला नहीं चला है लेकिन वे शानदर फॉर्म में चल रहे हैं। किशन ने पाकिस्तान के खिलाफ मुश्किल पिच पर मैच विनिंग पारी खेली थी। वे आईपीएल में मुंबई इंडियंस के लिए खेल चुके हैं। ऐसे में वानखेड़े स्टेडियम का उन्हें अच्छे से अंदाजा है। किशन अपने दम पर मैच का रुख बदलने की क्षमता रखते हैं और इंग्लैंड के खिलाफ भारत के लिए अहम खिलाड़ी साबित हो सकते हैं। 5. हार्दिक पांड्या हार्दिक पांड्या बल्ले के साथ टी20 वर्ल्ड कप 2026 में शानदार फॉर्म में चल रहे हैं। पांड्या अब तक दो फिफ्टी लगा चुके हैं। वे बल्ले से अंत के ओवरों में तेजी से रन बनाते हैं और मैच का रुख कुछ ही गेंदों में बदल देते हैं। इसके अलावा गेंदबाजी से भी पांड्या टीम इंडिया को सफलता दिलाते हैं। ऐसे में वे इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल मुकाबले में ट्रंप कार्ड साबित हो सकते हैं।  

हनुमान चालीसा पाठ का सही समय क्या है? गलती पड़ सकती है भारी

नई दिल्ली हनुमान चालीसा हिंदू धर्म में सबसे प्रभावशाली और फलदायी स्तोत्रों में से एक है। नियमित पाठ से भय, रोग, शत्रुता, आर्थिक संकट और ग्रह पीड़ा दूर होती है। बजरंगबली की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। लेकिन शास्त्रों में इसके पाठ से जुड़े कुछ सख्त नियम भी बताए गए हैं। कुछ विशेष समय और अवस्थाओं में हनुमान चालीसा का पाठ करने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। आइए जानते हैं उन समयों के बारे में, जब हनुमान चालीसा का पाठ गलती से भी नहीं करना चाहिए। दोपहर के समय हनुमान चालीसा का पाठ क्यों नहीं करना चाहिए हनुमान चालीसा का पाठ दोपहर के समय वर्जित माना जाता है। मान्यता है कि दोपहर में हनुमान जी विभीषण को दिए गए वचन के अनुसार, लंका चले जाते हैं। इस समय उनकी उपस्थिति नहीं रहती है। इसलिए दोपहर में पाठ करने से इच्छित फल नहीं मिलता, बल्कि विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। ब्रह्म मुहूर्त, सूर्योदय या संध्या काल में हनुमान चालीसा का पाठ सबसे श्रेष्ठ माना गया है। इन समयों में पाठ करने से मनोकामनाएं जल्दी पूरी होती हैं। मासिक धर्म के समय पाठ से बचें महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान हनुमान चालीसा का पाठ नहीं करना चाहिए। शास्त्रों में इस अवस्था को शारीरिक और मानसिक विश्राम का समय बताया गया है। इस दौरान पूजा-पाठ और मंत्र जप से दूर रहने की सलाह दी जाती है। ऐसा करने से महिला के शरीर और मन को आराम मिलता है। इस अवधि में पाठ करने से ऊर्जा का संतुलन बिगड़ सकता है और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बढ़ सकती हैं। मासिक धर्म समाप्त होने के बाद शुद्ध होकर पाठ शुरू करें। मृत्यु के समय हनुमान चालीसा का पाठ ना करें घर में किसी की मृत्यु होने पर हनुमान चालीसा का पाठ नहीं करना चाहिए। मृत्यु के बाद परिवार पर शोक और अशौच की स्थिति होती है। इस समय धार्मिक ग्रंथों के अनुसार पूजा-पाठ को कुछ समय के लिए बंद कर दिया जाता है। शोक काल समाप्त होने और शुद्धि संस्कार के बाद ही पाठ शुरू करना चाहिए। मृत्यु के समय पाठ करने से आत्मा की शांति में बाधा आ सकती है और परिवार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। बच्चे के जन्म के समय पाठ से दूर रहें जब घर में किसी बच्चे का जन्म होता है, तो हनुमान चालीसा का पाठ नहीं करना चाहिए। जन्म के बाद कुछ दिनों तक परिवार पर सूतक माना जाता है। यह समय नवजात और माता की देखभाल के लिए होता है। इस अवधि में पूजा-पाठ को कुछ समय के लिए बंद कर देना चाहिए। सूतक समाप्त होने और शुद्ध होने के बाद ही पाठ शुरू करें। ऐसा करने से नवजात का स्वास्थ्य और परिवार की शांति बनी रहती है। हनुमान चालीसा का सही समय और लाभ हनुमान चालीसा का पाठ मंगलवार और शनिवार को ब्रह्म मुहूर्त या संध्या काल में करना विशेष रूप से फलदायी होता है। इन समयों में पाठ करने से भय, रोग, शत्रुता और ग्रह पीड़ा दूर होती है। नियमों का पालन करने से हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। नियमित पाठ से आत्मविश्वास, साहस और सफलता मिलती है। गलत समय में पाठ करने से विपरीत प्रभाव पड़ सकता है, इसलिए समय का विशेष ध्यान रखें। हनुमान चालीसा का पाठ श्रद्धा और नियमों के साथ करें। सही समय पर पाठ करने से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है।

इंडियन ओपन स्क्वैश 2026: 18 मार्च से शुरू होंगे मुकाबले, ब्रेबोर्न स्टेडियम तैयार

मुंबई इंडियन ओपन 18 से 22 मार्च के बीच सीसीआई ब्रेबोर्न स्टेडियम में खेला जाएगा। यह एक पीएसए कॉपर इवेंट है, जिसकी टिकट अब लाइव हैं। प्रोफेशनल स्क्वैश एसोसिएशन (पीएसए) से मान्यता प्राप्त, यह टूर्नामेंट अपने 2025 एडिशन की सफलता को आगे बढ़ा रहा है, जिसे साल के टॉप 10 आइकॉनिक पीएसए इवेंट्स में से एक चुना गया था। 2026 एडिशन में डिफेंडिंग महिला चैंपियन अनाहत सिंह इवेंट में नजर आएंगी। लाइनअप में भारत के टॉप खिलाड़ी भी शामिल हैं, जैसे रमित टंडन, अभय सिंह, वीर चोटरानी, ​​वेलावन सेंथिलकुमार और जोशना चिनप्पा। इनके साथ याह्या एलनवासनी, हाना मोआताज और माजेन हेशाम जैसे इंटरनेशनल कंटेंडर भी शामिल हैं। इस प्रतियोगिता के साथ वर्ल्ड-क्लास स्क्वैश का एक बहुत प्रतिस्पर्धी हफ्ता शुरू होगा। टूर्नामेंट में पुरुषों और महिलाओं दोनों के इवेंट्स के लिए 44,500 यूएस डॉलर प्राइज मनी होगी। स्क्वैश रैकेट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के सेक्रेटरी जनरल साइरस पोंचा ने कहा, “इंडियन ओपन तेजी से पीएसए कैलेंडर का एक अहम पड़ाव बन गया है, जिससे भारतीय खिलाड़ियों को वर्ल्ड-क्लास कॉम्पिटिशन का अनुभव मिलता है और साथ ही स्क्वैश की प्रोफाइल देश भर में बढ़ती है। 2026 के लिए, हम टूर्नामेंट की इंटरनेशनल अहमियत को बढ़ाते रहने और फैंस को हाई-लेवल मैच लाइव देखने के लिए उत्साहित हैं, जिससे भारत में इस खेल के लंबे समय के विकास में मदद मिलेगी।” इस प्रतियोगिता के क्वार्टरफाइनल, सेमीफाइनल और फाइनल ग्लास कोर्ट पर होंगे, जिससे एक एरीना-स्टाइल स्क्वैश वेन्यू बनेगा जो एनर्जेटिक, क्लोज-अप व्यूइंग के लिए ऑप्टिमाइज किया गया है। एक बड़े स्टेज पर समान प्राइज मनी और टॉप इंडियन और इंटरनेशनल प्लेयर्स के लाइनअप के साथ, 2026 इंडियन ओपन ग्लोबल स्क्वैश में भारत की जगह को मजबूत करेगा।

वर्ल्ड कप क्वालीफायर से पहले इंग्लैंड महिला हॉकी टीम ने हैदराबाद में डाला डेरा

हैदराबाद इंग्लैंड की महिला टीम एफआईएच हॉकी वर्ल्ड कप 2026 क्वालीफायर के लिए हैदराबाद पहुंच गई है। यह प्रतिष्ठित टूर्नामेंट 8 से 14 मार्च तक तेलंगाना की राजधानी में आयोजित किया जाएगा, जहां आठ देशों की टीमें विश्व कप में जगह बनाने के लिए प्रतिस्पर्धा करेंगी। इंग्लैंड की टीम समृद्ध इतिहास के साथ इस प्रतियोगिता में उतर रही है। टीम अब तक 11 एफआईएच वर्ल्ड कप में हिस्सा ले चुकी है और इस बार उसका लक्ष्य बेल्जियम और नीदरलैंड्स में होने वाले विश्व कप के लिए टिकट हासिल करना है। इंग्लैंड का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 2010 संस्करण में रहा था, जब टीम ने कांस्य पदक जीता था। इस बार टीम उस उपलब्धि से आगे बढ़ने की कोशिश करेगी। टीम की कप्तान फ्लोरा पील ने हैदराबाद पहुंचने के बाद आत्मविश्वास जताया। उन्होंने कहा कि इंग्लैंड में उनका प्रशिक्षण शिविर काफी सफल रहा और उससे पहले चीन में प्रो लीग के दौरान टीम ने कई प्रतिस्पर्धी मुकाबले खेले। उनके अनुसार टीम फिलहाल शानदार लय में है और टूर्नामेंट की शुरुआत का बेसब्री से इंतजार कर रही है। भारतीय परिस्थितियों को लेकर भी टीम उत्साहित नजर आई। खिलाड़ी लिली वॉकर ने कहा कि टीम के कई सदस्य पहले भारत आ चुके हैं और यहां के दर्शकों और माहौल को लेकर उत्साह है। गर्म मौसम से तालमेल बिठाने के लिए टीम ने विशेष तैयारी की है, जिसमें सॉना सेशन शामिल हैं, ताकि खिलाड़ी यहां की जलवायु के लिए पूरी तरह तैयार रह सकें। इंग्लैंड को विश्व कप के तीन उपलब्ध स्थानों में से एक हासिल करने के लिए पूल-ए में मजबूत प्रदर्शन करना होगा। टीम अपने अभियान की शुरुआत 8 मार्च को इटली के खिलाफ करेगी, 9 मार्च को कोरिया गणराज्य से भिड़ेगी और 11 मार्च को ऑस्ट्रिया के खिलाफ ग्रुप चरण का अंतिम मुकाबला खेलेगी।  

हैरान कर देगा ये देश: 24 घंटे में सिर्फ 40 मिनट की रात, बाकी समय दिन ही दिन

नई दिल्ली प्राकृतिक का मतलब किसी के लिए सुंदरता है, तो किसी के लिए एक रहस्यमयी दुनिया है। कुछ लोग प्रकृति को एक रहस्यमयी दुनिया इसलिए भी मानते हैं, क्योंकि दुनिया में ऐसी कई अजीबो-गरीब चीजें हैं, जो इंसान को सोचने पर मजबूर कर देती है। जी हां, दुनिया में एक ऐसा अनोखा देश भी है जहां महज 40 मिनट के लिए ही रात होती है। इस देश में रात 12 बजकर 43 मिनट पर सूरज डूब जाता है और 40 मिनट के बाद पूरी जगमगाहट के साथ सूरज उग भी जाता है। यही नहीं इस देश में 76 दिनों तक रात नहीं होती है। अब आपके मन में यकीनन यह सवाल आ रहा होगा कि आखिर इस अनोखे देश का नाम क्या है और यहां एक लंबे दिन के बावजूद भी रात क्यों नहीं होती है। अगर हां, तो आज इस लेख के जरिये हम आपके इन्हीं सब सवालों के जवाब देंगे। साथ ही आपको एक ऐसे देश के बारे में भी बताएंगे जहां पूरे दो महीने तक सूरज नहीं उगता है और लोगों को अपनी दिनचर्या रात के अंधेरे से ही शुरू करनी पड़ती है।   नॉर्वे में होती है 40 मिनट की रात यूरोप में बसा नॉर्वे एक ऐसा अनोखा देश है, जहां दिन के उजाले के बाद रात महज 40 मिनट के लिए ही होती है। नॉर्वे के हेमरफेस्ट शहर में मई से जुलाई यानी 76 दिनों तक यहां केवल 40 मिनट के लिए ही सूरज ढलता है। बता दें, नॉर्वे के इस अद्भुत दृश्य को देखने के लिए देश के अलग-अलग कोने से पर्यटक आते हैं। यहां ज्यादा समय तक उजाला न होने की वजह से इस शहर को ‘Land of the Midnight Sun’ और ‘आधी रात का सूरज’ का सूरज भी कहा जाता है।   नॉर्वे में इस समय नहीं उगता सूरज अब तक हमने आपको बताया कि नॉर्वे में 76 दिनों तक केवल 40 मिनट के लिए ही सूरज निकलता है। लेकिन यह सिलसिला साल के बारह मास तक नहीं चलता है। नॉर्वे में नवंबर, दिसंबर और जनवरी के महीने में पूरी तरह से अंधेरा होता है और इन तीन महीनों के दौरान यहां सूरज नहीं निकलता है। क्यों होती है इतनी छोटी रात नॉर्वे में छोटी रात होने का मुख्य कारण यहां का भौगोलिक वातावरण है। दरअसल नॉर्वे आर्कटिक सर्किल के बेहद ही करीब है, जिसके कारण यहां गर्मियों के दिनों में सूरज की किरणें इस क्षेत्र पर सीधी पड़ती है। सूरज की किरणें इस क्षेत्र पर सीधी पड़ने के कारण यहां दिन लंबे और रात छोटी होती है। इसके अलावा, नॉर्वे में बोडो एंड साल्टेन, हेलजेलैंड, लोफोटेन कुछ ऐसे शहर भी है, जहां सूरज बिल्कुल भी नहीं ढलता है। अलास्का में दो महीने तक नहीं उगता सूरज धरती पर एक ऐसी जगह भी स्थित है, जहां पूरे दो महीनों तक सूरज नहीं निकलता है। जी हां, यह अनोखी जगह आर्कटिक सर्कल के भीतर अलास्का के उत्तरी हिस्से में है। बता दें, अलास्का में पूरे दो महीने तक सूरज नहीं निकलता है और यहां दिन छोटे व रातें लंबी होती है। अलास्का में इस भौगोलिक घटना को ‘पोलर नाइट’ के नाम से जाना जाता है। यहां रहने वाले लोग दिन के अंधेरे में ही अपने दिनचर्या की शुरुआत करते हैं और यहां बच्चे रात के अंधेरे में ही स्कूल पढ़ने के लिए जाते हैं।  

नई पहचान की ओर MP सरकार: सतपुड़ा-विंध्याचल भवन की जगह अरेरा हिल्स पर बनेगा स्मार्ट एडमिनिस्ट्रेटिव हब

भोपाल भोपाल के अरेरा हिल्स पर वल्लभ भवन के सामने 40 साल से ज्यादा पुराने सतपुड़ा और विंध्याचल भवन को तोड़ने  की प्लानिंग पूरी हो गई है। पुराने भवन को तोड़कर यहां कोर्टयार्ड एनेक्सी बिल्डिंग तैयार की जाएगी जो आपस में ट्विन टावर की तर्ज पर कनेक्ट होंगी। इस भवन में मल्टी लेवल पार्किंग और मल्टी लेवल फ्लोर एक साथ निर्मित किए जाएंगे। शुरुआत के चार से पांच फ्लोर तक आप अपने दो पहिया और चार पहिया वाहन में बैठकर ही संबंधित कार्यालय पहुंच सकेंगे। मल्टी लेवल पार्किंग मॉडल में अधिक चौड़ाई वाले घुमावदार रास्तों को इस प्रकार तैयार किया जाएगा जो संबंधित कार्यालय के फ्लोर पर जाकर लैंड होंगे। शहर में यह व्यवस्था फिलहाल प्राइवेट मॉल में मौजूद है। सरकारी खर्च कम से कम सरकार सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाते हुए जीरो फाइनेंस मॉडल लागू करने का प्रयास भी कर रही है। कंस्ट्रक्शन पर बगैर सरकारी खर्च के यह निर्माण हाउसिंग बोर्ड नोडल एजेंसी की निगरानी में ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में काम करने वाली बड़ी इंटरनेशनल कंपनियों के माध्यम से करवाया जा सकता है। मंत्रालय में अपर मुख्य सचिव संजय दुबे की अध्यक्षता में हुई बैठक में इन सभी मुद्दों पर जिला प्रशासन, हाउसिंग बोर्ड, नगर निगम के अधिकारियों के साथ चर्चा में ये बातें तय हुई हैं।   शहर का ब्यू पाइंट बनेगा अरेरा हिल्स पहाड़ी पर बनने वाने मिनी सेंट्रल विस्टा को दिल्ली के नए संसद भवन की तर्ज पर आकार दिया जाएगा। नागरिक यहां अपने परिजनों के साथ आकर व्यू पाइंट की सैर कर सकेंगे। सरकारी भवन की थीम की बजाए इसे व्यू पाइंट बनाया जाएगा।     तीन चरण में बनेगा प्रोजेक्ट     सतपुड़ा और विंध्याचल भवन को एक साथ नहीं तोड़ा जाएगा     सतपुड़ा भवन का एक हिस्सा टूटेगा। उतना फिर से बनाया जाएगा। उसके बाद बचा हुआ हिस्सा तोड़कर बनाएंगे     इसी तरह विंध्याचल भवन का भी निर्माण होगा।     दोनों के बीच ग्रीन पॉकेट कोर्टयाट के तर्ज पर विकसित होगा।     भवनों की डिजाइन इस तरह रखी जाएगी कि दीवारों से बंद हो और खुले आसमान के नीचे भी हो।     यहां इस तरह एक दूसरे को जोड़ा जाएगा कि गाड़ी के साथ ही लोग संबंधित भवन के संबंधित फ्लोर तक पहुंच जाएं।     दोनों भवनों के साथ ही कोर्टयार्ड से पूरी कनेक्टिविटी होगी। लिफ्ट की जरूरत नहीं होगी।

कॉलेज छात्रों के लिए झटका: जरूरी दस्तावेजों की फीस 3 गुना बढ़ी, बढ़ी परेशानी

सागर सागर के डॉ. हरिसिंह गौर यूनिवर्सिटी में शैक्षणिक सत्र-2025-26 के लिए डिग्री, टीसी (स्थानांतरण प्रमाण पत्र), माइग्रेशन सर्टिफिकेट समेत अन्य सुविधाओं के शुल्क में इजाफा किया गया है। बीते माह जारी हुए आदेश में उक्त तीनों प्रमुख प्रमाण पत्रों के शुल्क में तीन गुना तक का इजाफा किया गया है। अचानक फीस बढ़ने से विद्यार्थी परेशान है। एक साथ 50 से तीन गुना तक फीस बढ़ने से विद्यार्थियों पर अतिरिक्त खर्च बढ़ गया है। तीन गुना बढ़े दाम, छात्रों की बढ़ी परेशानी अब तक विश्वविद्यालय में डिग्री के लिए 250 रुपए ही शुल्क लिया जाता है, लेकिन अब वही डिग्री 500 रुपए में दी जा रही है। इसके साथ स्थानांतरण प्रमाण पत्र में 100 रुपए खर्च आता है, जो अब बढ़ाकर 300 रुपए कर दिया है। इसके अलावा डुप्लीकेट उपाधि, प्रमाण पत्र, डुप्लीकेट अंकसूची और नाम सुधार (अंकसूची एवं टीआर में सुधार) आदि में भी फीस वृद्धि की गई। इन सभी करीब 50 प्रतिशत ज्यादा फीस बढ़ाने से विद्यार्थियों की आर्थिक परेशानी बढ़ गई है।   विवि प्रशासन की ओर से दलील दी गई है कि पिछले 12 वर्षों से विद्यार्थियों से जुड़ी सेवाओं में किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं बढ़ाया गया था। विवि प्रशासन ने इसके लिए एक समिति का गठन किया था, जिसने देश के अन्य विश्वविद्यालयों की फीस स्ट्रक्बर का अध्ययन किया और फिर उसी आधार पर समिति ने अनुशंसा की थी। नहीं मिल रहीं सुविधाएं विद्यार्थियों का कहना है कि मार्कशीट, टीसी और अन्य दस्तावेजों में विभिन्न प्रकार की गलतियां मिलती हैं। परीक्षा समय पर आयोजित नहीं होती है। विश्वविद्यालय के हॉस्टल, लाइब्रेरी सहित विभिन्न विभागों में हमें सुविधाएं नहीं मिल रहीं हैं। लाइब्रेरी के कंप्यूटर बंद हैं। डिग्री और अंकसूची निकलवाने के लिए कई बार विभाग के चक्कर लगाने पड़ते हैं। ऐसे में विवि प्रशासन की ओर से फीस वृद्धि करने का निर्णय गलत है।   समिति की अनुशंसा पर निर्णय हुआ है में बढ़ोतरी के लिए समय-समय पर हर तरह के शुल्क आदि में उचित वृद्धि 12 वर्षों बाद इस तरह के शुल्क को रिवाइज करते हुए वृद्धि की गई है। केंद्र सरकार से लगातार दिशा-निर्देश प्राप्त होते हैं कि आंतरिक राजस्व की जानी चाहिए। इसी क्रम में सक्षम प्राधिकारी द्वारा गठित समिति ने देश के विभिन्न केंद्रीय विश्वविद्यालयों में लगने वाले इस तरह के शुल्क को दृष्टिगत रखते हुए अनुशंसा की, जिसके आधार पर सक्षम प्राधिकारी ने स्वीकृति के बाद शुल्क में वृद्धि की गई है। विवेक जायसवाल, मीडिया प्रभारी इनका भी बढ़ा शुल्क     डुप्लीकेट उपाधि (डिग्री) -1000 रुपए     डुप्लीकेट प्रवजन प्रमाण पत्र (माइग्रेशन सर्टिफिकेट)- 500 रुपए     डुप्लीकेट अंकसूची (मार्कशीट)- 500 रुपए     नाम सुधार (मार्कशीट एवं टीआर में)- 200 रुपए     प्रावधिक उपाधि प्रमाण पत्र (प्रोविशनल डिग्री सर्टिफिकेट)- 300 रुपए     नाम/सरनेम परिवर्तन शुल्क -750 रुपए     परीक्षा केंद्र परिवर्तन शुल्क – 1000 रुपए     नामांकन विलंब शुल्क- 150 रुपए

अब नहीं होगी परेशानी: AIIMS में QR Code बताएगा OPD का पूरा रास्ता तुरंत

भोपाल एम्स की भूलभुलैया से अब मरीजों और परिजनों को राहत मिलने वाली है। यहां मोबाइल ऐप और क्यूआर कोड आधारित स्मार्ट मार्गदर्शन प्रणाली शुरू होगी जिससे मरीजों को डॉक्टर के केबिन और पर्चा बनवाने के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। ऐप खोलते या क्यूआरकोड स्कैन करते ही मोबाइल के स्क्रीन पर मरीजों को सीधा विभाग और वार्ड तक पहुंचने का सही रास्ते दिखने लगेंगे। एम्स भोपाल ने आइआइटी इंदौर की दृष्टि टीम से मिलकर स्मार्ट मार्गदर्शन प्रणाली विकसित करने की पहल की है। यह प्रणाली तकनीक के जरिए अस्पताल परिसर की जटिलता को सरल बनाएगी। क्यूआर कोड स्कैन करते ही खुलेगा नक्शा स्मार्ट मार्गदर्शन प्रणाली का पहला स्वरूप वेब आधारित होगा। प्रमुख प्रवेश द्वारों और अहम स्थानों पर क्यूआर कोड लगेंगे। क्यूआर कोड स्कैन करते ही इंटरैक्टिव मानचित्र खुलेगा। यह मानचित्र चरण-दर- चरण सही दिशा बताएगा। मोबाइल ऐप से मिलेगा सटीक दिशा-निर्देशन दूसरा स्वरूप मोबाइल ऐप आधारित होगा। भवनों के बीच जाने के लिए जीपीएस तकनीक का उपयोग किया जाएगा। वहीं भवनों के अंदर, जहां जीपीएस कमजोर होता है, वहां लगभग हर 15 मीटर पर रिले उपकरण लगाए जाएंगे। इससे दिशा-निर्देशन और अधिक सटीक होगा। पहले पायलट, फिर पूरे परिसर में लागू एम्स प्रवक्ता डॉ. केतन मेहरा ने कहा कि आइआइटी इंदौर के साथ मिलकर सिस्टम को विकसित कर रहा है। इसे अप्रेल के अंत में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया जाएगा। बुजुर्गों, दिव्यांगों और गंभीर मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी। सबसे अहम बात, बड़े अस्पताल को लेकर जो झिझक होती है, वह कम होगी।

एमपी सरकार का बड़ा निर्णय: नई शराब दुकानों पर रोक, अहाते बंद रहेंगे

भोपाल मध्य प्रदेश में अब नई आबकारी नीति लागू हो गई है। प्रदेश सरकार ने साल 2026-27 के लिए आबकारी नीति में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए जारी की गई नई नीति के तहत कहा गया कि, प्रदेश में कोई भी नई शराब दुकान नहीं खुलेगी। अहाते पहले की तरह अब भी बंद ही रहेंगे। वहीं, एक समूह को पांच से ज्यादा दुकानें आवंटित नहीं की जाएंगी। वहीं, कोई भी पुरानी शराब दुकान का नवीनीकरण नहीं किया जाएगा। ये शर्तें माननी होंगी नर्मदा नदी के तट से 5 किलोमीटर की दूरी के प्रतिबंध यथावत रहेगा। -मदिरा दुकानों की दूरी: मदिरा दुकानों को नर्मदा के तट से 5 किलोमीटर की दूरी के प्रतिबंध के साथ यथावत रखा गया है -पवित्र नगरों में प्रतिबंध: पवित्र नगरों में मदिरा दुकानों के प्रबंधन को यथावत रखा गया है -नई दुकानें नहीं: कोई भी नवीन मदिरा दुकान नहीं खोले जाने का निर्णय लिया गया है -अहाते बंद: मदिरा दुकानों के अहाते नहीं खोले जाएंगे, उन्हें पूर्ववत बंद रखा जाएगा -नवीनीकरण बंद: मदिरा दुकानों के नवीनीकरण का विकल्प समाप्त कर दिया गया है -ई-टेंडर और ई-ऑक्शन: समस्त 3553 मदिरा दुकानों का निष्पादन ई-टेंडर और ई-ऑक्शन के माध्यम से किया जाएगा -आरक्षित मूल्य: ई-टेंडर और ई-ऑक्शन के लिए मदिरा दुकानों का आरक्षित मूल्य, वर्तमान वर्ष के मूल्य में 20 प्रतिशत की वृद्धि कर निर्धारित किया जाएगा -समूह बनाना: ई-टेंडर और ई-ऑक्शन के लिए मदिरा दुकानों के समूह बनाये जाएंगे। अधिकतम 5 मदिरा दुकानों का एक समूह बनाया जा सकेगा -वर्गीकरण: आरक्षित मूल्य के आधार पर, जिले के समूह को तीन-चार बैच में वर्गीकृत किया जाएगा। -बैच आधारित कार्यवाही: बैच के आधार पर तीन-चार चरण में ई-टेंडर और ई-ऑक्शन की कार्यवाही की जाएगी। -जालसाजी रोकथाम: जालसाजी की आशंकाओं को समाप्त करने के लिए प्रतिभूति राशि के रूप में सिर्फ ई-चालान/ई-बैंक गारंटी ही मान्य की जाएगी। साधारण बैंक गारंटी एवं सावधि जमा (FD) मान्य नहीं होगी।   दस्तावेज़ में निम्नलिखित मुख्य बिंदु हैं -मदिरा की ड्यूटी दरें: विनिर्माण इकाई, बार आदि की लाइसेंस फीस यथावत रखी गई है। -निर्यात प्रोत्साहन: ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस को दृष्टिगत रखते हुए निम्नानुसार प्रावधान किए गए हैं- मदिरा के विनिर्माताओं को अपने उत्पाद की कीमत के अनुमोदन की -आवश्यकता नहीं है; विनिर्माता पोर्टल पर निर्धारित व्यवस्था अनुसार अपने उत्पाद की कीमत घोषित कर सकेंगे। -देश के बाहर मदिरा के निर्यात को प्रोत्साहन देने के लिए फीस में संशोधन, लेबल पंजीयन में सरलीकरण आदि प्रावधानित किया गया है। -प्रदेश के आदिवासियों स्वसहायता समूहों द्वारा महुआ से निर्मित मदिरा को अन्य राज्यों में ड्यूटी मुक्त कराने के लिए उनके राज्यों की हेरिटेज अथवा विशेष मदिरा को प्रदेश में ड्यूटी फ्री करने के प्रावधान किया गया।

2026 का नवसंवत्सर रहेगा अनोखा: अधिक मास के कारण बनेगा 13 महीनों का साल

नई दिल्ली Adhik Maas 2026 : वर्ष 2026 आध्यात्मिक और खगोलीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण रहने वाला है। हिंदू पंचांग की गणना के अनुसार, इस वर्ष ज्येष्ठ का महीना दो बार आएगा, जिसके कारण साल में 12 के बजाय कुल 13 महीने होंगे। 17 मई से 15 जून 2026 तक की इस अतिरिक्त अवधि को अधिक मास या पुरुषोत्तम मास कहा जाएगा। खगोलीय विज्ञान और अधिक मास का आधार अधिक मास का सीधा संबंध सूरज और चंद्रमा की चाल के बीच के अंतर को पाटने से है। वैज्ञानिक रूप से देखें तो एक चंद्र वर्ष लगभग 354 दिनों का होता है, जबकि सौर वर्ष 365 दिनों का। हर साल इन दोनों के बीच करीब 11 दिनों का फासला रह जाता है। जब यह अंतर बढ़ते-बढ़ते 30 दिनों के बराबर हो जाता है, तब पंचांग में संतुलन बनाए रखने के लिए एक अतिरिक्त महीना जोड़ दिया जाता है। इसी गणितीय गणना के कारण 2026 में ज्येष्ठ का महीना दो बार पड़ रहा है।   पौराणिक कथा और पुरुषोत्तम नाम की महिमा पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब इस अतिरिक्त महीने का कोई स्वामी नहीं था, तब भगवान विष्णु ने इसे अपना नाम ‘पुरुषोत्तम’ देकर इसे अत्यंत पवित्र बना दिया। इसी मास का संबंध भगवान नरसिंह और हिरण्यकश्यप के वध से भी जोड़ा जाता है। चूंकि हिरण्यकश्यप को वरदान था कि उसे साल के 12 महीनों में से कोई नहीं मार पाएगा, इसलिए भगवान ने इस 13वें महीने का सृजन कर अधर्म का अंत किया। यह समय धर्म की स्थापना और नकारात्मकता के विनाश का प्रतीक माना जाता है। साधना और आत्मचिंतन का विशेष समय पंडितों और विद्वानों का मानना है कि अधिक मास कोई अशुभ समय नहीं है बल्कि यह ईश्वर की भक्ति के लिए रिजर्व रखा गया समय है। 17 मई से 15 जून के बीच अधिक मास महात्म्य का पाठ करना या कथा सुनना बहुत शुभ होता है। यह अवधि हमें भागदौड़ भरी जिंदगी से ब्रेक लेकर आत्म-मंथन करने और अपनी आध्यात्मिक ऊर्जा को बढ़ाने के लिए प्रेरित करती है।   वर्जित कार्य और विशेष सावधानी चूंकि यह समय पूरी तरह से ईश्वर की आराधना के लिए समर्पित है, इसलिए इस दौरान सांसारिक मांगलिक कार्यों पर रोक रहती है। अधिक मास में निम्नलिखित कार्य टाल देने चाहिए: विवाह और सगाई के कार्यक्रम। नया व्यापार या दुकान की शुरुआत। गृह प्रवेश और भूमि पूजन। मुंडन, जनेऊ या अन्य संस्कार। दान-पुण्य और लोकहित का महत्व इस महीने में किए गए सत्कर्मों का फल कई गुना बढ़ जाता है। गरीबों को भोजन कराना, जरूरतमंदों की आर्थिक सहायता करना, हवन और गीता का पाठ करना इस समय की मुख्य प्राथमिकता होनी चाहिए। यह महीना हमें सिखाता है कि सेवा और सकारात्मक सोच ही जीवन में वास्तविक सुख और शांति लाती है।

रेल कनेक्टिविटी बढ़ाने की तैयारी: एमपी में 108 गांवों का अधिग्रहण, 2030 तक लक्ष्य तय

इंदौर मध्य प्रदेश के इंदौर से बुदनी के बीच बन रही नई ब्रॉडगेज रेल लाइन रफ्तार नहीं पकड़ पा रही है। पहले से ही करीब पांच साल देरी का सामना कर रही इस महत्वाकांक्षी परियोजना की प्रगति जमीन अधिग्रहण की सुस्त प्रक्रिया के कारण थमी हुई है। कई गांवों में मुआवजा और सीमांकन संबंधी औपचारिकताएं पूरी नहीं हो पाने से निर्माण कार्य तय गति से आगे नहीं बढ़ पा रहा। हालात ऐसे हैं कि अब इस रेल लाइन को पूरा करने का लक्ष्य बढ़ाकर साल 2030 तक कर दिया गया है। जिससे क्षेत्रवासियों को सीधी रेल कनेक्टिविटी के लिए लंबा इंतजार करना पड़ेगा। परियोजना में खर्च हो चुके हैं 2 हजार करोड़ यह 205 किमी का सेक्शन 342 किमी लंबी इंदौर-जबलपुर नई विद्युत रेल लाइन परियोजना का अहम हिस्सा है, जिसे 2016-17 में मंजूरी मिली और 2018 में काम शुरू हुआ। शुरुआती लक्ष्य 2024-25 था, लेकिन फंड की कमी, जमीन अधिग्रहण और न्यायिक अड़चनों के कारण अब नई समयसीमा 2029-30 तय की गई है। करीब 7,400 करोड़ रुपए की इस परियोजना पर अब तक लगभग 2,000 करोड़ खर्च हो चुके हैं और प्रगति 30% दर्ज की गई है। निर्माण कार्य रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) द्वारा तीन पैकेज में किया जा रहा है-मांगलिया गांव से खेरी, खेरी से पीपलिया नानकर और पीपलिया नानकर से बुदनी का काम चल रहा है। 75 किमी कम होगा सफर नई लाइन बनने के बाद इंदौर से जबलपुर की दूरी करीब 75 किमी कम हो जाएगी। अभी यात्रियों को भोपाल होकर लंबा रास्ता तय करना पड़ता है। नई कनेक्टिविटी से समय की बचत होगी और ट्रेनों की अधिकतम रफ्तार 130 किमी प्रति घंटा तक हो सकेगी। इससे मालवा और महाकौशल क्षेत्र के यात्रियों को सीधा फायदा मिलेगा, साथ ही माल परिवहन और औद्योगिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी।   परियोजना में 80 सुरंगें परियोजना में 80 बड़े पुल और दो सुरंगें (1.24 किमी और 8.64 किमी) प्रस्तावित हैं। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस रूट पर कोई लेवल क्रॉसिंग नहीं होगी, अंडरपास और ओवरब्रिज बनाए जाएंगे। सुरंगों का डिजाइन वन्यजीव क्षेत्र को सुरक्षित रखते हुए तैयार किया गया है। योजना के अनुसार 2027-28 में बुदनी से सलकनपुर, 2028-29 में मांगलिया गांव से खेरी और 2029-30 तक पूरा ट्रैक तैयार करने का लक्ष्य है। 108 गांवों की जमीन अधिग्रहित कुल 205 किमी में से 186 किमी राजस्व और सरकारी भूमि का अधिग्रहण पूरा हो चुका है। शेष वन क्षेत्र की अनुमति मार्च 2025 में मिल गई। 108 गांवों में अधिग्रहण कर लगभग 721 करोड़ रुपए मुआवजा दिया जा चुका है।

सड़कों का विकास जो बदलेगा जिले का नक्शा: सरकार ने दी 225 करोड़ की हरी झंडी

विदिशा विदिशा जिले में गांव के टोला मजरा की 254 सड़कों की तस्वीर बदलेगी। जिला पंचायत की सामान्य सभा की बैठक में अनुमोदन मिलने के साथ ही बजट की स्वीकृति भी मिल गई है। मुख्यमंत्री मजरा-टोला योजना के तहत 218.89 किमी लंबी सड़कों का निर्माण किया जाएगा। इस पर 109.44 करोड़ रुपए का बजट खर्च होगा। जिला पंचायत अध्यक्ष गीता रघुवंशी के अनुसार सिरोंज में सबसे अधिक 64 बसाहटों के लिए 46.87 किमी लंबी सड़कों को मंजूरी दी गई है। इन सड़कों का निर्माण 23.43 करोड़ रुपए से होगा। इन क्षेत्रों में भी बनाई जाएंगी नई सड़कें इसी प्रकार लटेरी क्षेत्र में 55 बसाहटों के लिए 33.72 किमी लंबी सड़क बनाई जाएगी। नटेरन में 32 और ग्यारसपुर में 30 बसाहटों को मुख्य मार्गों से जोड़ा जाएगा। गंजबासौदा में 27 और कुरवाई की 25 बसाहटों के लिए सड़क निर्माण के प्रस्ताव पास किए गए है। विदिशा जिला मुख्यालय से जुड़े 21 बसाहटों में 34.91 किमी लंबी सडकों का जाल बिछेगा। जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि कैलाश रघुवंशी के अनुसार सड़कों के निर्माण को लेकर जल्द ही प्रक्रिया शुरू की जाएगी। शमशाबाद विधानसभा में 116 करोड़ से बनेंगी 9 सड़कें शमशाबाद विधानसभा क्षेत्र में 116 करोड़ की लागत से 9 सड़कों का निर्माण हो सकेगा। बजट में इन सडकों के लिए राशि घोषित कर दी गई है। विधायक सूर्य प्रकाश मीणा के अनुसार इन सभी सड़कों की लंबाई 77 किलोमीटर है। स्वीकृत सडकों के संबंध में बताया कि करारिया शमशाबाद मार्ग की लंबाई 34 किमी है। इस मार्ग की सड़क 75 करोड़ रुपए से तैयार होगी। इसी प्रकार खामखेड़ा कस्बा से बालाबरखेड़ा तक 10 किमी लंबी सड़क 15.22 करोड़ से बनेगी। ग्राम कागपुर से गढ़ला सुरई मूढरा से होते हुए ग्राम परस परसौरा तक 7 किमी लंबी सडक 5.40 करोड़ रुपए से तैयार की जाएगी। शमशाबाद रोड से कोटरा नामाखेड़ी कोठीचार कलां, सूखा सेमरा मार्ग सांकलखेड़ा, पुरेनिया से गंगरवाड़ा और सेमरा पहुंच मार्ग में 5.60 किमी लंबी सडक 4.50 करोड़ रुपए से बनेगी। सूखा नीमखेड़ा, परासी गूजर मार्ग की 5.50 किमी लंबी सडक 4.40 करोड़ रुपए से बनेगी। कोटी चार पहुंच मार्ग में 2.20 किमी लंबी सडक 1.76 करोड़ रुपए से बनेगी। खामखेड़ा, वामनखेड़ा, वांसखेड़ा मार्ग में 2 किमी लंबी सड़क के लिए 1.60 करोड़ रुपए स्वीकृत हुए हैं। खामखेड़ा लोधाखेड़ी से गंगरवाड़ा मार्ग में 3 किमी लंबी सडक के लिए 2.40 करोड़ रुपए और पौआनाला से चटुआ मार्ग में 7 किमी लंबी सड़क के लिए 5.60 करोड़ रुपए स्वीकृत हुए हैं। विधायक के अनुसार इन सडकों के निर्माण को लेकर प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी।

10वीं-12वीं के छात्रों को इंतजार, 90 लाख कॉपियों की जांच में देरी की बड़ी वजह आई सामने

भोपाल बोर्ड परीक्षा में शामिल स्टूडेंट के लिए रिजल्ट का इंतजार लंबा होगा। कॉपियों की जांच करने शिक्षकों की कमी हो रही है। शिक्षकों की ड्यूटी जनगणना में लगाई जा रही है। ऐसे में कॉपियों को जांचने अब शिक्षक नहीं मिल रहे हैं। प्रदेश में 16 लाख स्टूडेंट बोर्ड परीक्षा में शामिल हो रहे हैं। इनकी 90 लाख कॉपियां हैं। माध्यमिक शिक्षा मंडल से कक्षा बारहवीं की परीक्षा 10 फरवरी से शुरू हुई। 7 मार्च को परीक्षा खत्म होगी। इसी तरह दसवीं की परीक्षा 13 फरवरी से शुरू हुई। ये 6 मार्च तक जारी रहेगी। कॉपियों की जांच और रिजल्ट तैयार करने में डेढ़ से दो माह का समय लगता है। इसी के बीच ट्रेनिंग सहित शिक्षकों को दूसरे काम रहेंगे। ऐसे में प्राइवेट स्कूलों की मदद लेने का प्रस्ताव भी तैयार किया जा रहा है। जनगणना में शिक्षक ज्यादा जानकारी के अनुसार, जनगणना में सबसे ज्यादा शिक्षकों की ड्यूटी लगाई जाएगी। इनकी संख्या 25 से 30 हजार बताई जा रही है। इनमें से अधिकांश वैसे शिक्षक हैं, जिन्हें बोर्ड की कॉपियां जांचने की जिम्मेदारी दी जानी है। एक समय में दो काम होने के कारण यह परेशानी होगी।   देरी का गणित एक नजर में कुल परीक्षार्थी: 16 लाख (10वीं और 12वीं मिलाकर) कॉपियां: 90 लाख , रिजल्ट तैयार करने में दो माह का अनुमानित समय देरी हुई तो कॉलेज एडमिशन और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी पर असर।

मौत का हाईवे: 7 साल में 1397 हादसे, तेज रफ्तार पर अब तक क्यों नहीं लगाम?

भिंड नेशनल हाईवे 719 और 552 पर तेज गति सडक़ हादसों की वजह बन रही है। अकेले शहर के बायपास रोड पर ही एक माह में पांच लोग मौत के गाल में समा गए हैं। इन सभी हादसों के पीछे वाहनों की अनियंत्रित गति और चालकों की लापरवाही सामने आई है। हाइवे पर भले ही वाहनों की गति निर्धारित हो लेकिन चालक बेलगाम वाहनों को दौड़ा रहे हैं। इसके बावजूद इन पर कार्रवाई नहीं हो रही है। यातायात विभाग के पास इकलौता स्पीडोमीटर है उसका भी उपयोग नहीं किया जा रहा है। बता दें भिण्ड-ग्वालियर नेशनल हाईवे पर कार की अधिकतम स्पीड 80 किमी प्रति घंटा निर्धारित है। एमपीआरडीसी ने इसको लेकर बोर्ड भी लगाए है, लेकिन हाईवे पर कार 120 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से भी अधिक दौड़ती हैं। ट्रक, डंपर और हैवी वाहनों की स्पीड 60 किमी प्रति घंटा निर्धारित की गई है वह भी इससे अधिक दौड़ते हैं जो कि हादसे का कारण बनते हैं। इसी तरह भिण्ड-भांडेर रोड पर बड़े वाहनों की स्पीड 50 किमी प्रति घंटा निर्धारित है, मगर वाहन 70 से 80 किमी प्रति घंटा तक फर्राटे भरते हैं। कार की स्पीड 80 किमी है, वह भी नियंत्रित गति से अधिक तेज दौड़ती हैं। इस तरह चेक करते हैं स्पीड जिस वाहन की स्पीड चेक करनी होती है, उसके लिए पांच सौ मीटर की रैंज में टारगेट निर्धारित करके गाड़ी को लॉक किया जाता है। वाहन की पूरी जानकारी मशीन में लगे कैमरा में फीड हो जाती है। उसकी स्पीड और फोटो स्पीडो मीटर में पहुंच जाती है। निर्धारित गति से अधिक स्पीड में वाहन चलाने पर तीन हजार रुपए का जुर्माना का प्रावधान है।   एक साल में 347 चालान पिछले एक साल में यातायात पुलिस ने दोनों हाईवे पर 347 वाहनों पर चालानी कार्रवाई की है। यातायात पुलिस की मानें तो स्पीडोमीटर में वाहन का टारगेट तय करने में समस्या आती है। जिले में स्पीडोमीटर लावन मोड़, डिड़ी, दीनपुरा, लहार रोड पर मानपुरा के पास लगाया जाता है। वहीं सबसे बड़ी समस्या यह है कि बायपास रोड पर स्पीडोमीटर काम नहीं करता है। क्योंकि वाहनों की स्पीड के लिए 500 मीटर का सीधा मार्ग होना चाहिए। बायपास पर ट्रैफिक अधिक होने के कारण स्पीड चेक करने के लिए जब वाहन का टारगेट फिक्स किया जाता है तो पीछे से दूसरा वाहन क्रॉस करने पर संबंधित वाहन की स्पीड कैमरे में लॉक नहीं हो पाती है। साल हादसे मृतक घायल     2019 699 172 724     2020 656 160 700     2021 645 209 669     2022 714 198 803     2023 639 197 784     2024 687 219 754     2025 671 242 721

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