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भाजपा की बड़ी जीत के बाद सीएम पद की दौड़ शुरू, सबसे आगे चल रहे 3 बड़े नाम, अंतिम फैसला भाजपा आलाकमान करेगा

नई दिल्ली दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा की बड़ी जीत के बाद सीएम पद की दौड़ शुरू हो गई है। समर्थकों ने कयास लगाने शुरू कर दिए हैं, लेकिन अंतिम फैसला भाजपा आलाकमान करेगा। अलग अलग फैक्टर के हिसाब से भाजपा में सीएम पद के कई दावेदार हैं। अभी कोई भी खुलकर अपनी दावेदारी नहीं कर रहा है। सीएम चेहरा तय होने में कुछ समय लग सकता है। इस लिस्ट में परवेश वर्मा की दावेदारी सबसे पुख्ता मानी जा रही है। हालांकि, 2 ऐसे नाम भी दावेदारों में हैं, जो विधायक भी नहीं हैं। भाजपा ने दिल्ली विधानसभा चुनाव में कोई सीएम पद का चेहरा तय नहीं किया था। दिल्ली का चुनाव पीएम मोदी के नाम पर लड़ा गया। जीत के बाद अब सभी को सीएम पद के ऐलान का इंतजार है। भाजपा में अलग अलग फैक्टर के चलते कई सीएम पद के दावेदार हैं। पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल को हराकर बड़ा उलटफेर करने वाले प्रवेश वर्मा का नाम इस दौड़ में सबसे आगे है। प्रवेश दो बार सांसद रह चुके हैं। नई दिल्ली सीट जीतने के बाद प्रवेश ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात भी की। दिल्ली देहात में मिली बड़ी सफलता भी प्रवेश की दावेदारी को पुख्ता करती है। 2 सांसदों का भी चल रहा नाम भाजपा सूत्रों का कहना है कि सीएम पद का ऐलान विधायकों के बीच से ही होना है। इसके चलते किसी विधायक को ही इस पद पर चुना जाएगा। अगर विधायकों के बाहर सीएम चुना गया तो सांसद मनोज तिवारी और बांसुरी स्वराज भी भाजपा का सीएम फेस हो सकते हैं। सूत्रों का कहना है कि भाजपा बड़े बहुमत के साथ सत्ता में आई है। ऐसे में दिल्ली के विकास और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखकर सीएम चुना जाएगा। रोहिणी से चुनाव जीते नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता का नाम भी इस दौड़ में शामिल है। विजेंद्र भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके है। वह 2015 से 2020 तक नेता प्रतिपक्ष रहे। इसके बाद रामवीर सिंह बिधूड़ी नेता प्रतिपक्ष बने थे। बिधूड़ी के सांसद बनने के बाद विजेंद्र को दोबारा नेता प्रतिपक्ष बनाया गया है। संगठन से जुड़े सतीश उपाध्याय, जितेंद्र महाजन और अजय महावर का नाम भी इस सूची में शामिल है।

दिल्ली चुनाव में हार के बाद अब कांग्रेस की नजर पश्चिम बंगाल पर है, ममता बनर्जी की TMC से मुकाबला करने के लिए तैयार

नई दिल्ली कांग्रेस नेता राहुल गांधी अंततः अपनी राजनीति की राह पर चलने लगे हैं। दिल्ली चुनाव में हार के बाद अब कांग्रेस की नजर पश्चिम बंगाल पर है। पार्टी वहां ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) से मुकाबला करने के लिए तैयार है। राहुल गांधी ने 2004 में सक्रिय राजनीति में कदम रखा था और उन्हें युवाओं के मामलों का प्रभारी नियुक्त किया गया था। तब उन्होंने ‘एकला चलो रे’ के सिद्धांत पर विश्वास किया था, यानी पार्टी को अकेले ही खड़ा होना चाहिए। यह सिद्धांत सोनिया गांधी के नेतृत्व में बने संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) से बिल्कुल अलग था। हालांकि यह कांग्रेस के लिए गठबंधन राजनीति का एक प्रयोग था। राहुल का हमेशा मानना ​​था कि पार्टी तब ही बढ़ सकती है जब वह अकेले चुनाव लड़े। राहुल गांधी ने अपनी पार्टी के नेताओं से यह अक्सर कहा था कि अकेले खड़े होने से लंबी अवधि में फायदा होगा, भले ही चुनाव हार जाएं। लेकिन कई चुनावी विफलताओं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हराने की इच्छा ने उन्हें गठबंधन राजनीति को स्वीकार करने के लिए मजबूर किया। हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद राहुल गांधी को यह एहसास हुआ कि जहां INDIA गठबंधन के अन्य दल मजबूत हो रहे हैं, वहीं कांग्रेस पिछड़ती जा रही है। सीधे मुकाबले में बीजेपी के साथ कांग्रेस का जीतना अब संभव नहीं लग रहा था। हरियाणा और महाराष्ट्र में हार के बाद राहुल गांधी ने यह विचार किया कि अब कांग्रेस को अकेले ही चुनावी मैदान में उतरना होगा और अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाली AAP को चुनौती देने का इरादा बनाना पड़ा। दिल्ली विधानसभा चुनाव में AAP की हार के बाद और समाजवादी पार्टी तथा नेशनल कांफ्रेंस द्वारा कांग्रेस पर आरोप लगाए जाने के बाद कांग्रेस ने भी अपनी रणनीति में बदलाव किया है। अब पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) को चुनौती देने की योजना बनाई जा रही है। यहां ममता बनर्जी की पार्टी ने कांग्रेस को बार-बार नजरअंदाज किया है। सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी बंगाल में पार्टी कार्यकर्ताओं से मिलकर उन्हें यह विश्वास दिलाना चाहते हैं कि ममता बनर्जी के खिलाफ लड़ाई जारी रहेगी। कांग्रेस ने यह स्पष्ट किया है कि राज्य स्तर पर सहयोगियों के खिलाफ संघर्ष का मतलब राष्ट्रीय स्तर पर गठबंधन खत्म करना नहीं है, बल्कि यह सिर्फ पार्टी की महत्त्वाकांक्षाओं का हिस्सा है। इसे उसके अन्य सहयोगी आसानी से पचा नहीं पा रहे हैं। राहुल गांधी ने इस विचार को स्वीकार किया कि अगर कांग्रेस ने राज्य दर राज्य हार मान ली, तो इसका राष्ट्रीय स्तर पर असर पड़ेगा और बीजेपी के खिलाफ कांग्रेस एक ठोस विकल्प नहीं बन पाएगी। इस समय राहुल गांधी का मानना है कि कांग्रेस के सभी राज्य इकाइयों को एक नई दिशा की आवश्यकता है और यही उनके अगले कदम का उद्देश्य है।

आठ लेन में बनने वाले इस राजमार्ग का 50 फीसद काम पूरा हो चुका, राजमार्ग बनने से 16 गांवों को मिलेगा फायदा

इंदौर इंदौर-हरदा राजमार्ग का काम खत्म करने के लिए नई डेडलाइन जारी की गई है। इसके तहत दिसंबर तक एजेंसी को निर्माण कार्य पूरा करना होगा। समीक्षा करने के बाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के क्षेत्रीय अधिकारी एसके सिंह ने यह निर्देश दिए हैं। आठ लेन में बनने वाले इस राजमार्ग का 50 फीसद काम पूरा हो चुका है। अधिकारियों के मुताबिक राजमार्ग बनने से 16 गांवों को फायदा मिलेगा। सड़क किनारों की बजाए डिवाइडर के बीच खाली जमीन पर पौधे रोपेंगे, क्योंकि किनारों के आसपास गांवों के विस्तार के लिए जमीन छोड़ गई है। 27 किमी की सड़क पर इंदौर के गांवों की कनेक्टिविटी कनाड़िया से लेकर राघवगढ़ तक इंदौर-हरदा राजमार्ग का नया हिस्सा बनाया जा रहा है। 27 किमी की इस सड़क से इंदौर से लगे गांवों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी, जिसमें कनाड़िया, खुडैल, काजी पलासिया सहित अन्य गांव शामिल हैं। राजमार्ग में दुपहिया-कार सहित भारी वाहनों को ध्यान में रखकर सड़क बनाई जा रही है, जिसमें दो-दो सर्विस लेन और चार लेन मुख्य सड़क रहेगी। अभी तक आधा काम हुआ है। सर्विस लेन का काम अभी धीमा चल रहा है। एनएचएआई के अधिकारियों ने जून तक 85-90 फीसद जून तक काम पूरा करने की समयावधि रखी है। शेष दस फीसद कार्य और पौधारोपण काम के लिए दिसंबर तक का समय है। हर महीने होगी समीक्षा राजमार्ग पर रोजाना बीस से पच्चीस हजार वाहन निकलेंगे। इसके लिए इंदौर-हरदा राजमार्ग के निर्माण कार्यों की समीक्षा हर महीने होगी। अधिकारियों को निरीक्षण कर रिपोर्ट एनएचएआई के क्षेत्रीय कार्यालय को भेजनी होगी। पांच तालाब होंगे विकसित एनएचएआई के पास पर्याप्त जमीन नहीं है। इस वजह से हरियाली बढ़ाने के साथ ही जलस्रोतों को पुनर्जीवित किया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों के तालाबों को विकसित करने का काम एनएचएआई कर रही है। करीब पांच तालाबों के जीर्णोद्धार का काम शुरू कर दिया है, जो जुलाई-अगस्त तक खत्म करना होगा।

महाकुंभ के मेले में 48 घंटे का समय बिताने को है बावजूद इसके सीमा चाकघाट पर वाहनों का दबाव कम होने का नाम नहीं ले रहा

रीवा प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ के मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या कम होने का नाम नहीं ले रही है। 48 घंटे का समय बिताने को है बावजूद इसके सीमा चाकघाट पर वाहनों का दबाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है। 48 घंटे बाद भी जहां तकरीबन 28 किलोमीटर का लंबा जाम लगा हुआ है, वहीं जाम में फंसे लोगों का कहना है कि उन्होंने 8 घंटे में महज अब तक केवल 20 किलोमीटर की ही दूरी तय कर पाए हैं। रविवार की सुबह उत्तर प्रदेश के प्रयागराज सीमा में प्रवेश करने वालों को मेला क्षेत्र में पहुंचने के लिए 25 किलोमीटर का सफर तय करना है।

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी 10 फरवरी को देश के विद्यार्थियों के साथ परीक्षा पे चर्चा करेंगे

भोपाल प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी 10 फरवरी को देश के विद्यार्थियों के साथ परीक्षा पे चर्चा करेंगे। उल्‍लेखनीय है कि प्रधानमंत्री हर वर्ष परीक्षा के तनाव को दूर करने के लिए विद्यार्थियों से संवाद करते हैं। इस वर्ष यह कार्यक्रम सोमवार 10 फरवरी को प्रात: 11 बजे से नई दिल्‍ली में आयोजित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम का संचार माध्‍यमों पर सीधा प्रसारण किया जायेगा। दूरदर्शन, डीडी नेशनल, डीडी न्यूज, डीडी इंडिया एवं ऑल इंडिया रेडियो के सभी चैनल, पीएमओ वेबसाइट mygov.in, यूट्यूब, एमओई, फेसबुक लाइव, स्वयंप्रभा चैनल एमओई, दीक्षा चैनल एमओई से भी कार्यक्रम का प्रसारण होगा। कार्यकम का प्रसारण अन्य निजी चैनल भी करेगें। कार्यक्रम को ऑनलाइन देखे जाने के लिये यूट्यूब लिंक https://www.youtube.com/watch?v=G5UhdwmEEls भी जारी की गई है। कार्यक्रम में विद्यार्थी एवं शिक्षक तथा अभिभावक उक्त लिंक के माध्यम से सहभागिता कर सकेंगे। स्कूल शिक्षा मंत्री श्री सिंह कार्यक्रम में होंगे शामिल स्‍कूल शिक्षा मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह, सचिव स्‍कूल शिक्षा डॉ. संजय गोयल और स्कूल शिक्षा विभाग में अन्‍य वरिष्‍ट अधिकारी राजधानी भोपाल के सुभाष उत्‍कृष्‍ट विद्यालय से विद्यार्थियों के साथ कार्यक्रम में सहभागिता करेंगे। आयुक्‍त लोक शिक्षण श्रीमती शिल्‍पा गुप्‍ता ने बताया कि प्रदेश में भी राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद और सभी जिला शैक्षिक प्रशिक्षण संस्थानों में हाई और हायर सेकेण्डरी स्‍कूलों में विद्यार्थियों की लाइव प्रसारण में सहभागिता होगी। स्‍कूलों में टीवी प्रसारण के अलावा, इंटरनेट एक्सेस डिवाइस (कंप्यूटर लैपटॉप / मोबाइल इत्यादि) पर भी कार्यक्रम देखने की सुविधा दी जा रही है। प्रदेश के दूरदराज के क्षेत्रों में जहां टीवी देखने की व्यवस्था संभव नहीं होगी वहां रेडियो/ट्रांजिस्टर की व्यवस्था किये जाने के लिये निर्देश दिये गये है। समस्‍त जि़ला कलेक्‍टर्स एवं मैदानी अधिकारियों को परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम के लाइव प्रसारण में विद्यार्थी, अभिभावक एवं शिक्षकों की सामूहिक रूप से सहभागिता सुनिश्चित करने के लिये कहा गया है।  

दिल्‍ली सीएम की रेस में आगे प्रवेश वर्मा, दिल्ली चुनाव प्रचार में रही परिवार की सहभागिता, मध्यप्रदेश है गहरा रिस्ता

धार दिल्ली विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता प्रवेश वर्मा की जीत ने धार में खास उत्साह का माहौल बना दिया है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को हराने वाले प्रवेश वर्मा की जीत का जश्न धार में धूमधाम से मनाया जा रहा है। भाजपा के वरिष्ठ नेता विक्रम वर्मा और वर्तमान धार विधायक नीना वर्मा के प्रवेश वर्मा दामाद है। उनकी जीत ने परिवार और पार्टी को गर्व एक मौका दिया है। दिल्ली चुनाव प्रचार में रही परिवार की सहभागिता विक्रम वर्मा और नीना वर्मा दोनों ही अपने दामाद को दिल्ली चुनाव की सबसे चुनौती पूर्ण सीट पर जिताने के लिए मेहनत कर रहे थे। वह प्रचार-प्रसार में व्यस्त थे। विक्रम वर्मा हर साल 23 जनवरी को धार में अपने जन्मदिन के अवसर पर बड़े आयोजन करते हैं। इस बार वे दिल्ली में ही अपनी पार्टी और परिवार के समर्थन में लगे थे। नीना वर्मा धार से चुनाव लड़ती हैं, तब उनका पूरा परिवार चुनाव प्रचार में सक्रिय रूप से भाग लेता है। इस बार वह प्रवेश वर्मा की जीत को तय करने के लिए चुनाव प्रचार जुटी हुई थीं। परिवार उनकी सफलता के बाद खासे उत्साहित हैं। दिल्ली चुनाव में भाजपा की विजय नई दिल्ली सीट पर प्रवेश वर्मा ने अरविंद केजरीवाल को 4,089 वोटों से हरा दिया है। इस चुनाव में भाजपा ने कुल 48 सीटों पर जीत हासिल कर ली है। आम आदमी पार्टी (आप) केवल 22 सीटों तक सिमट गई। यह 2020 के उसके परिणाम से आधे से भी कम है। यह परिणाम भाजपा के लिए एक बड़ी विजय साबित हुई है, जिसका जश्न धार में भी मनाया जा रहा है।  

MP में स्‍टूडेट्स को नई सुविधा, अब बीयू विद्यार्थियों द्वारा दिए गए ई-मेल आईडी पर देगा डिजिटल डिग्री और मार्कशीट

भोपाल बरकतउल्ला विश्वविद्यालय (बीयू) ने विद्यार्थियों के प्रथम से तृतीय वर्ष के परीक्षा फार्म जमा कराना शुरू कर दिया है। इसमें विद्यार्थियों को अपना मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी देना अनिवार्य किया गया है। बीयू विद्यार्थियों द्वारा दिए गए ई-मेल आईडी पर डिग्री और अंकसूची भेजने की व्यवस्था कर रहा है। मोबाइल नंबर से विद्यार्थियों से संपर्क कर उन्हें बीयू की गतिविधियों से परिचित कराया जाएगा और उन्हें डिग्री ई-मेल पर भेजने की सूचना एसएमएस के माध्यम से भेजी जाएगी।     समय पर डिग्री नहीं मिलने पर कई बार नौकरी के लिए दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया से बाहर हो जाते हैं। इसके अलावा रिजल्ट जारी होने के बाद विद्यार्थियों को अपनी अंकसूची के लिए भटकना पड़ता है।     अब रिजल्ट जारी होने के बाद विद्यार्थियों के ई-मेल पर अंकूसूची पहुंच जाएगी।     यही नहीं अंतिम वर्ष में सफल होने के बाद विद्यार्थियों को डिग्री लेने के लिए आवेदन भी नहीं करना होगा।     इसके लिए उन्हें कोई शुल्क भी नहीं देना होगा। उनके द्वारा परीक्षा फार्म में दिए गए ई-मेल पर विवि की डिजिटल डिग्री भेज दी जाएगी।     परीक्षा फार्म में लिए गए मोबाइल नंबर पर विद्यार्थियों को एसएमएस भेजा जाएगा कि उसके ई-मेल पर डिग्री भेज दी गई है। कागज की खपत होगी कम अंकसूची और डिग्री के प्रकाशन में बीयू को करोड़ों रुपये का कागज खरीदकर उनका प्रकाशन करना होता है। ई-मेल पर डिग्री और मार्कशीट का आवंटन होने से कागज की खपत बहुत कम हो जाएगी।विद्यार्थियों द्वारा दिए गए ई-मेल और मोबाइल नंबर के लिए नैक के लिए सुरक्षित रखा जाएगा। इस दौरान नैक की टीम उनसे संपर्क कर फीडबैक भी ले जाएगी।

इंडिया वर्सेस इंग्लैंड तीन मैच की वनडे सीरीज का दूसरा मुकाबला आज, कटक के बाराबती स्टेडियम में खेला जाना

नई दिल्ली इंडिया वर्सेस इंग्लैंड तीन मैच की वनडे सीरीज का दूसरा मुकाबला आज यानी रविवार, 9 फरवरी को कटक के बाराबती स्टेडियम में खेला जाना है। सीरीज का पहला मुकाबला जीतने वाली टीम इंडिया की नजरें दूसरे मैच को भी अपने नाम कर सीरीज पर कब्जा जमाने पर होगी। वहीं मेहमान इंग्लैंड दूसरे मैच को जीतकर सीरीज में रोमांच का तड़का लगाना चाहेगा। IND vs ENG दूसरा वनडे भारतीय समयानुसार डेढ बजे शुरू होगा, जबकि टॉस के लिए दोनों कप्तान, रोहित शर्मा और जोस बटलर, आधा घंटा पहले मैदान पर उतरेंगे। भारतीय प्लेइंग XI पर आज हर किसी की नजरें रहेंगी क्योंकि विराट कोहली की प्लेइंग XI में वापसी हो सकती है। ऐसे में कौन बाहर होगा ये देखना दिलचस्प रहेगा।   इंडिया वर्सेस इंग्लैंड पिच रिपोर्ट- कटक का यह स्टेडियम वैसे तो ज्यादा हाईस्कोरिंग नहीं रहा है। 1982 से यहां 38 पारियों में सिर्फ 6 ही बार टीमें 300 रन का आंकड़ा पार करने में कामयाब रही है। हालांकि पिछले 8 सालों में यह कारनामा 4 बार हुआ है तो ऐसे में कहा जा सकता है कि यह पिच बल्लेबाजों के लिए बेहतर होती जा रही है। बाराबती स्टेडियम में स्पिनर्स से ज्यादा तेज गेंदबाजों का बोलबाला रहता है। अभी तक यहां तेज गेंदबाजों को 137 सफलताएं मिली है, वहीं स्पिनर्स ने 88 ही विकेट चटकाए हैं। इंडिया वर्सेस इंग्लैंड दूसरे ODI में टॉस अहम भूमिका निभा सकता है। शाम को ओस पड़ने के कारण बल्लेबाजी आसान हो जाती है तो टीमें टारगेट का पीछा करना ज्यादा पसंद करती है। यहां के रनचेज के रिकॉर्ड की बात करें तो 19 में से 12 बार टीमें जीत दर्ज करने में कामयाब रही है। बाराबती स्टेडियम रिकॉर्ड्स और आंकड़े पहले बल्लेबाजी करते हुए जीते गए मैच- 7 (33.33%) टारगेट का पीछा करते हुए जीते गए मैच- 12 (57.14%) टॉस जीतकर जीते गए मैच- 8 (38.10%) टॉस हारकर जीते गए मैच- 11 (52.38%) हाईएस्ट स्कोर इन चेज- 316/6 पहले बल्लेबाजी करते हुए औसत स्कोर- 226 इंडिया वर्सेस इंग्लैंड हेड टू हेड भारत और इंग्लैंड के बीच अभी तक 108 वनडे खेले गए हैं जिसमें टीम इंडिया 59 मैच जीतकर काफी आगे चल रही है, वहीं इंग्लिश टीम को भारत के खिलाफ 44 ही जीत मिली है।

श्रद्धालु पूर्णिमा तक हर हाल में संगम में डुबकी लगा लेना चाहते हैं, फिर बढ़ने लगी श्रद्धालुओं की भीड़, रोडवेज बसों की मांग बढ़ी

गोरखपुर वसंत पंचमी स्नान के बाद महाकुंभ जाने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ फिर बढ़ने लगी है। यह ऐसे श्रद्धालु हैं जो माघ पूर्णिमा तक हर हाल में संगम में डुबकी लगा लेना चाहते हैं। इन श्रद्धालुओं को भेजने के लिए परिवहन निगम ने दो दिन में ही गोरखपुर परिक्षेत्र से रोडवेज की 134 महाकुंभ स्पेशल बसें प्रयागराज भेज दी हैं, जिसमें गुरुवार को 56 और शुक्रवार को 78 बसें शामिल हैं। शनिवार को भी 150 बसें श्रद्धालुओं को लेकर भेजी जाएंगी। निगम ने बसों की तैयारी सुनिश्चित कर ली है। परिवहन निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक लव कुमार सिंह के अनुसार श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए गोरखपुर परिक्षेत्र से प्रयागराज के बीच पर्याप्त महाकुंभ स्पेशल बसें चलाई जा रही हैं। वसंत पंचमी स्नान के बाद गोरखपुर परिक्षेत्र से प्रयागराज के बीच दूसरे डिपो की चल रही रोडवेज की 1910 महाकुंभ स्पेशल बसें वापस भेज दी गई हैं। हालांकि, गोरखपुर परिक्षेत्र की 390 महाकुंभ स्पेशल बसें माघ पूर्णिमा और महाशिवरात्रि स्नान पर्व तक चलती रहेंगी। श्रद्धालुओं की भीड़ पर आवश्यकतानुसार अतिरिक्त बसें चलाई जाएंगी। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रयागराज के सीमावर्ती क्षेत्रों और झूसी में सैकड़ों बसें खड़ी हैं। गोरखपुर परिक्षेत्र से जाने वाली बसें झूसी तक चल रही हैं। दरअसल, वसंत पंचमी तक गोरखपुर परिक्षेत्र के 38 प्वाइंटों से होकर पौष पूर्णिमा से 2300 महाकुंभ स्पेशल बसें चलाई गई हैं। हालांकि, मौनी अमावस्या स्नान पर्व पर श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने पर करीब एक हजार बसें प्रयागराज में ही फंस गईं। बसों का संचालन बाधित होने से श्रद्धालु भी महाकुंभ से बाहर नहीं निकल पाए। श्रद्धालुओं को वापस लाने के लिए परिवहन निगम ने गोरखपुर और राप्तीनगर डिपो सहित गोरखपुर परिक्षेत्र से 180 अनुबंधित बसें प्रयागराज भेजी थीं। इसके पहले 26 से 28 जनवरी तक तीन दिन में गोरखपुर परिक्षेत्र से श्रद्धालुओं को प्रयागराज भेजने के लिए गोरखपुर और राप्तीनगर डिपो की लगभग सात सौ बसें महाकुंभ के लिए भेजी गईं। श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने पर परिवहन निगम प्रबंधन ने सोनौली, महराजगंज, बस्ती, लखनऊ और दिल्ली जाने वाली बसों को भी महाकुंभ के लिए रवाना कर दिया।   गोरखपुर से झूसी के बीच चल रही एक महाकुंभ स्पेशल ट्रेन श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पूर्वोत्तर रेलवे भी गोरखपुर से झूसी के बीच एक महाकुंभ आरक्षित स्पेशल ट्रेन संचालित कर रहा है। 05004/05003 नंबर की गोरखपुर-झूसी-गोरखपुर आरक्षित महाकुंभ स्पेशल 09, 10, 11 एवं 12 फरवरी को तथा झूसी से 08, 10, 11, 12 एवं 13 फरवरी को चलेगी। यह ट्रेन गोरखपुर से रात 09:30 बजे छूटकर दूसरे दिन सुबह 06:00 बजे झूसी पहुंचेगी।

द‍िल्‍ली व‍िधानसभा :16 सीटों पर कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी को ‘हरा’ दिया, जी हां! यकीन न हो तो आंकड़े देख लीजिए

नई द‍िल्‍ली  दिल्ली की जनता ने अपना फैसला सुना दिया है। पिछले 3 विधानसभा चुनावों (Delhi Assembly Election Result 2025 ) से दिल्लीवालों ने जिस पार्टी को अपने दिल में जगह दी थी, उसे आज सत्ता से बाहर कर दिया है। दिल्ली में आखिरकार ‘मोदी मैजिक’ चल ही गया। लेकिन ‘असली खेल’ किया फिर से 0 पर आउट होने वाली कांग्रेस ने। चुनाव आयोग के मुताबिक दिल्ली की 70 सीटों में से 48 पर बीजेपी आगे है या जीत चुकी है। जबकि आम आदमी पार्टी के खाते में महज 22 सीट ही रही। कांग्रेस को एक भी सीट नहीं मिली। मगर कम से कम 16 सीटें ऐसी रहीं, जिस पर कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी (AAP) को ‘हरा’ दिया। जी हां! यकीन न हो तो आंकड़े देख लीजिए। सबसे पहले बात वोट शेयर की साल 2020 में दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी को 53 फीसदी से ज्यादा वोट मिले थे। जबकि बीजेपी का वोट प्रतिशत 38.51% रहा। इस बार की बात करें तो ‘आप’ को 43.61% वोट मिले हैं जबकि बीजेपी 45.88% वोट शेयर पहले नंबर पर काबिज हो गई। कहने को यह अंतर महज 2.27 फीसदी का ही है, लेकिन दिल्ली के सिंहासन पर काबिज होने के लिए यह अंतर काफी बड़ा रहा। आखिर कैसे कांग्रेस ने पलटा गेम आखिर यह ढाई फीसदी वोट फिर कहां गए? जवाब साफ है-कांग्रेस। यूं तो इस बार भी कांग्रेस का वोट प्रतिशत 10 फीसदी से कम ही रहा, लेकिन खुद को ‘वोट कटवा’ पार्टी साबित करने में इस बार वह कामयाब रही। पिछली बार पहले और दूसरे नंबर की पार्टी के बीच अंतर बड़ा था। इसलिए कांग्रेस को कितने वोट मिले, इससे किसी को कोई फर्क नहीं पड़ा। मगर इस बार अलग थी। दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 में कांग्रेस को 6.39% वोट मिले और जीत-हार का अंतर 2.27%। इन सीटों पर भारी पड़ी कांग्रेस से ‘हाथ’ छुड़ाना   क्रम सीट बीजेपी को वोट म‍िले AAP को वोट म‍िले कांग्रेस को वोट जीत का अंतर 1 नई द‍िल्‍ली 30,028 25,999 4,568 4,089 2 जंगपुरा 38,859 38,184 7,350 675 3 त्र‍िलोकपुरी 58,217 57,824 6,147 392 4 ग्रेटर कैलाश 49,594 46,406 6,711 3,188 5 छतरपुर 80,469 74,230 6601 6239 6 मादीपुर 52,019 41,120 17,958 10,899 7 मालवीय नगर 39,564 37,433 6,770 2,131 8 नांगलोई जाट 75,272 49,021 32,028 26,251 9 राजेंद्र नगर 46,671 45,440 4,015 1,231 10 संगम विहार 54,049 53,705 15,863 344 11 तिमारपुर 53,551 52,290 8,101 1,261 12 बिजवासन 64,951 53,675 9,409 11,276 13 महरौली 48,349 46,567 9,338 1,782 केजरीवाल-सिसोदिया समेत बड़े नेताओं पर भारी पड़ी कांग्रेस अरविंद केजरीवाल 3 बार दिल्ली के मुख्यमंत्री बने। लगातार तीन बार नई दिल्ली सीट से जीते। मगर इस बार बीजेपी के प्रवेश साहिब सिंह ने 4000 वोटों से हरा दिया। रोचक बात है कि तीसरे नंबर पर रहने वाले पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के बेटे व पूर्व कांग्रेस सांसद संदीप दीक्षित 4500 से ज्यादा वोट मिले। इसी तरह ‘आप’ में नंबर-2 मनीष सिसोदिया जंगपुरा से 675 वोटों से हारे। तीसरे नंबर पर रहे कांग्रेस के फरहाद सूरी को 7000 से ज्यादा वोट मिले। सोमनाथ भारती की हार में भी कांग्रेस का ही हाथ रहा। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और EVM पर सवाल उठाने वाले सौरभ भारद्वाज 3100 वोटों से सीट गंवा बैठे। इनकी हार में भी एक चीज कॉमन रही-कांग्रेस। तीसरे नंबर पर रहे कांग्रेस के गर्वित सांघवी ने 6700 से ज्यादा वोट हासिल किए। ऐसी करीब 17 सीटें हैं, जहां कांग्रेस ने फर्क पैदा कर दिया। मतलब अगर दिल्ली में भी आम आदमी पार्टी और कांग्रेस का गठबंधन होता तो शायद तस्वीर कुछ और हो सकती थी।   तो मिल जाता ‘आप’ को बहुमत! इसी तरह द्वारका सीट पर बीजेपी को 8671 वोट मिले जबकि कांग्रेस ने यहां 6630 वोट काटे। हरी नगर सीट पर बीजेपी को 6632 वोटों से जीत मिली जबकि कांग्रेस यहां 4252 वोट के साथ तीसरे नंबर पर रही। रोचक बात यह रही कि निर्दलीय उम्मीदवार राजकुमारी ढिल्लों ने 3398 वोट हासिल किए। मुंडका सीट पर भी कांग्रेस ने जमकर वोट काटे।

आम आदमी पार्टी के ‘अजेय’ होने का दंभ बना हार का कारण, फ्रीबीज पॉलिटिक्स में बीजेपी ने केजरीवाल को दे दी पटखनी

नई दिल्ली दिल्ली विधानसभा चुनाव में बीजेपी की आंधी में आम आदमी पार्टी हवा हो गई। वो आम आदमी पार्टी जो लगातार दो चुनावों में प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाई थी। लेकिन इस बार बीजेपी की कुछ ऐसी हवा चली कि AAP के बड़े-बड़े शूरमा उखड़ गए। खुद अरविंद केजरीवाल चुनाव हार गए। मनीष सिसोदिया चुनाव हार गए। AAP के तमाम दिग्गज चुनाव हार गए। न फ्री का वादा काम आया, न मुफ्त की रेवड़ियां काम आईं और न ही ‘कट्टर ईमानदार’ अरविंद केजरीवाल का चेहरा काम आया। आखिर ऐसा क्या हुआ कि कभी 70 में से 67 और 62 सीटें जीतने वाली आम आदमी पार्टी को इस बार बुरी शिकस्त का सामना करना पड़ा? आइए देखते हैं AAP की हार के 7 बड़े कारण क्या रहे। 1- एंटी-इन्कंबेंसी आम आदमी पार्टी ने अपने जन्म के साथ ही दिल्ली के लोगों के दिल पर राज किया। 2013 के अपने पहले चुनाव में वह बीजेपी के बाद दूसरे नंबर पर रही थी लेकिन त्रिशंकु विधानसभा में वह उस कांग्रेस से हाथ मिला ली, जिसके कथित भ्रष्टाचार के विरोध से राजनीति शुरू की थी। खैर, कांग्रेस के साथ गठबंधन वाली आम आदमी पार्टी की वो सरकार 2 महीने भी नहीं टिकी। उसके बाद 2015 में 70 में से 67 और 2020 में 70 में से 62 सीटों पर जीत के साथ इतिहास रचा। पार्टी लगातार 10 सालों तक दिल्ली की सत्ता में रही। लगातार तीसरी बार जीत दर्ज करना वैसे भी बहुत आसान नहीं होता क्योंकि सत्ताविरोधी रुझान यानी एंटी-इन्कंबेंसी का खतरा बना रहता है। आम आदमी पार्टी को भी इस फैक्टर का नुकसान उठाना पड़ा। 2- करप्शन का दाग अब इसे विडंबना ही कहेंगे कि जिस पार्टी ने भ्रष्टाचार-विरोधी आंदोलन से जन्म लिया, सत्ता में आने पर वह भी अपने दामन को करप्शन की कालिख से नहीं बचा पाई। खुद को कट्टर ईमानदार कहने वाले अरविंद केजरीवाल को करप्शन का दाग भारी पड़ा। भ्रष्टाचार के आरोपों में उन्हें खुद जेल जाना पड़ा। मनीष सिसोदिया को जेल जाना पड़ा। सत्येंद्र जैन को जेल जाना पड़ा। केजरीवाल और आम आदमी पार्टी लगातार खुद के कट्टर ईमानदार होने की दुहाई देते रहे लेकिन दिल्ली की जनता ने उनको नकार दिया। अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के शिल्पी अरविंद केजरीवाल जब दिल्ली की सत्ता में आए तो एक नई तरह की साफ-सुथरी, ईमानदार और वैकल्पिक राजनीति का वादा किया था। लेकिन किया क्या? सीएजी की रिपोर्ट को विधानसभा की पटल तक पर नहीं रखा। कभी जिस दिल्ली के एक मुख्यमंत्री मदन लाल खुराना जैन हवाला कांड में अपना नाम लिए जाने पर ही पद से इस्तीफा दे दिया था, उसी दिल्ली में अरविंद केजरीवाल आरोप तो छोड़िए, जेल में जाने के बाद भी इस्तीफा नहीं दिया। लालू प्रसाद यादव से लेकर हेमंत सोरेन तक तमाम मुख्यमंत्रियों ने जेल जाने की नौबत आने पर नैतिकता के आधार पर पद से इस्तीफा दिया था। लेकिन ईमानदारी की राजनीति के कथित चैंपियन केजरीवाल ने तो जेल से सरकार चलाने की ऐसी जिद दिखाई जो भारत की राजनीति में कभी नहीं हुआ। जेल से बाहर आने के बाद उन्होंने इस्तीफा जरूर दिया लेकिन शायद तबतक बहुत देर हो चुकी थी। अगर जेल जाते ही इस्तीफा दिए होते तो 3- मुफ्त बिजली-पानी मॉडल से आगे नहीं बढ़ पाना अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी ने पहली बार सत्ता में आने के बाद मुफ्त-बिजली पानी वाला मॉडल पेश किया। सरकारी स्कूलों और अस्पतालों की दशा में भी सुधार का दावा किया। सुधार हुए भी, लेकिन उतने भी नहीं जितना आम आदमी पार्टी ढिंढोरा पीटती है। इस मॉडल की बदौलत दो बार सरकार भी बनाई लेकिन पार्टी इससे आगे नहीं बढ़ पाई। हर नाकामी का ठीकरा दूसरों पर फोड़ने का चलन चलाया। सड़कें बदहाल रहीं। जगह-जगह गंदगी का अंबार रहा। निगम चुनाव में जीत के बाद साफ-सफाई की जिम्मेदारी से भाग भी नहीं सकते थे। यमुना को साफ करने पर हजारों करोड़ रुपये खर्च किए गए लेकिन पानी आचमन तो छोड़िए नहाने लायक भी नहीं रहा। ये सब चीजें आम आदमी पार्टी के खिलाफ गईं। 4- फ्रीबीज पॉलिटिक्स में केजरीवाल को मिला तगड़ा कंपटिशन दूसरी तरफ, विरोधियों ने भी केजरीवाल के खिलाफ उसी हथियार का इस्तेमाल किया जो उनकी ताकत थी। ये हथियार था मुफ्त वाली योजनाओं का जिन्हें राजनीति में फ्रीबीज या मुफ्त की रेवड़ियां भी कहा जाता है। केजरीवाल की फ्रीबीज पॉलिटिक्स को मुफ्त की रेवड़ियां बताकर और देश के लिए घातक बताकर खारिज करने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी भी इसी होड़ में कूद गए। बीजेपी ने भी महिलाओं को हर महीने 2500 रुपये, त्योहारों पर मुफ्त सिलिंडर, बुजुर्गों के लिए बढ़ी हुई पेंशन, मुफ्त इलाज जैसे लोकलुभावन वादे किए। साथ में ये भी कि आम आदमी पार्टी की सरकार की तरफ से चलाई जा रहीं मुफ्त वाली योजनाओं को भी जारी रखेंगे। इस चुनाव से पहले तक बीजेपी दिल्ली में मुफ्त की रेवड़ियों का विरोध किया था लेकिन इस बार उसने केजरीवाल के ही हथियार से केजरीवाल को मात दे दी। ये बात दीगर है कि फ्रीबीज पॉलिटिक्स से दिल्ली की इकॉनमी का कचूमर निकलता है, सत्ता तो आ ही गई। 5- केंद्रीय बजट दिल्ली में आम आदमी पार्टी की हार के कारणों में केंद्रीय बजट को भी गिना ही जाएगा। चुनाव से ठीक पहले जिस तरह बजट में मध्यम वर्ग को बड़ी सौगात दी गई, 12 लाख रुपये तक की आमदनी और वेतनभोगियों के मामले में तो 12.75 लाख रुपये तक की सालाना आमदनी को इनकम टैक्स से मुक्त करने का जो ऐलान हुआ, उसका सीधा लाभ बीजेपी को दिल्ली चुनाव में मिला है। 6-अरविंद केजरीवाल की गैर-जिम्मेदार राजनीति अरविंद केजरीवाल ने सियासत में कदम रखते ही अलग तरह की राजनीति के नाम पर बिना किसी सबूत या आधार के बाकी सभी पार्टियों और उनके नेताओं को थोक के भाव में चोर-बेईमान का सर्टिफिकेट बांटना शुरू किया था। ये सिलसिला तब खत्म हुआ जब उन्हें नितिन गडकरी, कपिल सिब्बल, अवतार सिंह भड़ाना जैसे तमाम नेताओं से अदालतों में माफी मांगनी पड़ी। खैर इन सबका उन्हें राजनीतिक नुकसान नहीं उठाना पड़ा, बस ये फर्क पड़ा कि हर विरोधी नेता को चोर बताने की उनकी आदत छूट गई। लेकिन इस बार के दिल्ली … Read more

बेंगलुरु में पब और नाइटलाइफ क्षेत्र में अभूतपूर्व संकट, पिछले एक साल में 40 से अधिक पब बंद हो गए

बेंगलुरु  कर्नाटक का आईटी हब बेंगलुरु, जहां देशभर से आए सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स रहते हैं। यह वह शहर है जहां पांच दिन दफ्तरों पर भीड़ रहती है और वीकेंड्स पर बार और पब फुल रहते हैं। सुबह तक इतनी शराब पी जाती है कि बार-पब्स का पूरे हफ्ते की आमदनी दो दिनों में होती है। लेकिन अब यहां लग रहा है कि इंजीनियर्स में पार्टी का बुखार खत्म हो गया है। शहर का पब और नाइटलाइफ क्षेत्र एक अभूतपूर्व संकट से जूझ रहा है, क्योंकि पिछले एक साल में 40 से अधिक पब बंद हो गए हैं। उद्योग जगत के लिकर लीडर्स में अब टेंशन बढ़ गई है। उनका मानना है कि पब्स के बंद होने के पीछे बढ़ती संचालन लागत, फुट-फॉल में 0.20-25 प्रतिशत की गिरावट और सरकार के लगाए गए मूल्य वृद्धि है। बेंगलुरु में 2000 से ज्यादा पब पब मालिक तत्काल कर्नाटक राज्य सरकार से नीतिगत सुधारों, वित्तीय सहायता और सुव्यवस्थित प्रक्रियाओं के लिए आह्वान कर रहे हैं ताकि उनके व्यवसाय को बनाए रखने में मदद मिल सके। बेंगलुरु में 2000 से ज्यादा पब और शराब बनाने के कारखाने हैं। पिछले दिनों से कोरमंगला जैसे क्षेत्रों में कुछ सबसे गंभीर प्रभाव दिख रहे हैं। जहां पिछले साल कई पब बंद हो गए।  रिपोर्ट के अनुसार, नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एनआरएआई) बेंगलुरु चैप्टर के सचिव अनंत नारायण ने चेतावनी दी कि जब तक सरकार बहुत जरूरी राहत नहीं देती, तब तक बंद होने की दर बढ़ सकती है। पब के बजाय हो रहीं हाउस पार्टियां? पब्स में घटती भीड़ के पीछे कुछ लोग अन्य कारण भी बताते हैं। लोगों में सोशल बिहेवियर चेंज देखने को मिल रहा है। अब वे बाहर जाकर पार्टी करने की बजाए घर पर पार्टीज करना पसंद कर रहे हैं। यही कारण है कि पबों में कम ग्राहक आए हैं। इसके अतिरिक्त, कॉर्पोरेट खर्च में कमी और नौकरी की असुरक्षा ने रात्रि जीवन की घटती मांग में योगदान दिया है। यह क्षेत्र, जिसका मूल्य 600 करोड़ रुपये से 1,000 करोड़ रुपये के बीच है, भारी वित्तीय दबाव का सामना कर रहा है, जिसमें अचल संपत्ति और वेतन सहित परिचालन लागत सालाना लगभग 10 प्रतिशत बढ़ रही है, जबकि मुनाफे में गिरावट जारी है। बढ़ीं चुनौतियां चिन लंग रेस्टो बार चेन के मालिक प्रज्वल लोकेश ने जोर देकर कहा कि कर्मचारियों की चुनौतियों और भयंकर प्रतिस्पर्धा ने स्थिति को और बढ़ा दिया है। जबकि कर्मचारियों को कुशल बनाना और रुझानों के साथ बने रहना महत्वपूर्ण है। इस मार्केट में कभी छोटे प्रतिष्ठानों का वर्चस्व था, अब मुख्य रूप से छूट-उन्मुख मानसिकता से संचालित है, जिससे नए उद्यमों की सफलता की संभावना कम हो जाती है। जटिल है लाइसेंस की प्रक्रिया जटिल और बोझिल लाइसेंस प्रक्रिया एक और महत्वपूर्ण बाधा है। पब मालिकों को कानूनी रूप से संचालित करने के लिए कम से कम नौ अलग-अलग लाइसेंस प्राप्त करने होते हैं। यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें हाल ही में मूल्य वृद्धि की गई है। बीयर की कीमतों में वृद्धि ने, विशेष रूप से, अतिरिक्त तनाव पैदा कर दिया है, कुछ प्रतिष्ठान अतिरिक्त लागतों का प्रबंधन करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। कर्नाटक आबकारी आयुक्त आर. वेंकटेश कुमार ने बीयर और भारतीय निर्मित शराब (आईएमएल) पर हाल ही में शुल्क वृद्धि का बचाव किया। उन्होंने कहा, कि वृद्धि मामूली थी और मुख्य रूप से उच्च-स्तरीय उत्पादों को टारगेट किया गया था। उन्होंने कहा कि निचले स्तर के उत्पाद, जो उद्योग के लिए अधिकांश राजस्व उत्पन्न करते हैं, अप्रभावित रहे। यह स्वीकार करते हुए कि मुद्रास्फीति ने कुछ लागतों को बढ़ाया है, उन्होंने समग्र क्षेत्र पर शुल्क वृद्धि के प्रभाव को कम किया।

ग्रीस के खूबसूरत सेंटोरिनी द्वीप पर भूकंप का आना लगातार जारी, आपात स्थिति घोषित

एथेंस  ग्रीस के खूबसूरत सेंटोरिनी द्वीप पर भूकंप का आना लगातार जारी है। पर्यटकों की पंसदीदा इस जगह पर पिछले दो हफ्तों में 7,700 से ज्यादा बार भूकंप के झटके महसूस किए जा चुके हैं। इनमें कई दफा भूकंप की तीव्रता 5.0 के आसपास रही है। इस स्थिति को देखते हुए क्षेत्र में आपातकाल की घोषणा कर दी गई है। यहां आए सभी पर्यटकों को निकाल लिया गया है, जबकि कई इलाकों से स्थानीय लोगों को भी सुरक्षित जगहों पर भेजा गया है। भूकंपों का असर सेंटोरिनी के ज्वालामुखी पर भी पड़ा है। इस घटनाक्रम ने सेंटोरिनी के लोगों को 1956 के भयावह भूकंप की याद दिला दी है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सेंटोरिनी में भूकंप का दौर 26 जनवरी से शुरू हुआ। इसके बाद से लगातार भूकंप आ रहे हैं। सबसे ज्यादा झटके इस हफ्ते मंगलवार को आए, जब एक ही दिन में 1300 बार धरती हिली। इनमें से कुछ की तीव्रता 4.9 से 5.0 तक थी। इससे लोगों में दहशत फैली हुई है। ग्रीस के प्रधानमंत्री किरियाकोस मित्सोटाकिस ने सेंटोरिनी के हालात का जायजा लिया है। उन्होंने कहा है कि सरकार स्थिति पर नजर रखे हुए है, लोग शांति बनाए रखें। ज्वालमुखी का भी डर भूकंप का असर सेंटोरिनी के ज्वालामुखी पर भी देखा गया है। सैटेलाइट से मिले रडार डेटा के आधार पर थेसालोनिकी के एरिस्टोटल यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर माइकलिस फॉउमेलिस ने बताया है कि हमें ज्वालामुखी में कुछ बदलाव दिख रहे हैं। पहले यह शांत था लेकिन अब इसमें हलचल हुई है। हालांकि यह बदलाव बहुत ज्यादा नहीं हैं। आने वाले दिनों में पूरी तस्वीर साफ होगी। भूकंपों के झटके और ज्वालामुखी की आशंका को देखते हुए सरकार तैयारी कर रही है। एहतियातन 15,000 लोगों को द्वीप से निकाला जा चुका है। इनमें ज्यादातर महिलाएं और बच्चे हैं। पुरुष अपने घरों में ही रुके हुए हैं। एक महिला क्रिसा पप्पस ने कहा कि पुरुष फिलहाल घरों की देखभाल के लिए रुके हैं। हम सब बहुत डरे हुए हैं। हमारा द्वीप लगातार हिल रहा है और किसी को नहीं पता कि आगे क्या होगा। 1956 जैसे हालात होने का डर! ग्रीक भूकंपविज्ञानी अकिस त्सेलेपिस ने चेतावनी दी है कि 1956 के विनाशकारी भूकंप के लिए जिम्मेदार फॉल्ट लाइन फिर से सक्रिय हो गई है। 69 साल पहले आए इस भूकंप में 50 लोग मारे गए थे और सैकड़ों घायल हुए थे। उन्होंने कहा कि भूकंपीय गतिविधि कम नहीं हो रही है बल्कि यह गति पकड़ रही है। आशंका है कि हम फिर से उसी परिमाण का भूकंप देख सकते हैं।

ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट : स्वास्थ्य विभाग द्वारा व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश जारी

भोपाल भोपाल में 24 व 25 फरवरी को प्रस्तावित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट कार्यक्रम के दौरान चिकित्सा व्यवस्था के संबंध में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय भोपाल द्वारा सभी शासकीय और निजी चिकित्सा संस्थाओं को चिकित्सा सेवाओं की तैयारी करने हेतु कहा गया है। 24 एवं 25 फरवरी को आयोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री सहित वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री, अधिकारीगण, मल्टीनेशनल कंपनियों के प्रतिनिधि, उद्योगपति एवं गणमान्य नागरिक शामिल होंगे। तैयारी रखने के निर्देश समिट के दौरान 23 से 26 फरवरी के बीच पी एम श्री एयर एम्बुलेंस सर्विसेज को आकस्मिक स्थिति के लिए एयर एम्बुलेंस तैयार रखने हेतु कहा गया है। भोपाल जिले में संचालित सभी 108 एम्बुलेंस तथा उनके उपकरणों की कार्यशीलता सुनिश्चित की जा रही है। आवश्यक होने पर अन्य जिलों की 108 एम्बुलेंस को भी तैयारी रखने के निर्देश दिए गए हैं। अतिथियों के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रत्येक बिंदु पर समीक्षा कर व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं। सी एम एच ओ भोपाल डॉ प्रभाकर तिवारी द्वारा जारी निर्देशों में चिकित्सकों, पैरामेडिकल स्टाफ , सपोर्ट स्टाफ की उपलब्धता , आकस्मिक स्थिति हेतु पर्याप्त संख्या में बेड्स की व्यवस्था, ऑपरेशन थिएटर, विभिन्न समूह के रक्त की व्यवस्था, जीवन रक्षक उपकरणों, औषधियां, ऑक्सीजन, वेंटीलेटर, एचएफएनसी, सीपेप, एम्बुलेंस की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु कहा गया है। पहले से ही रिहर्सल कर मुस्तैद रहने के आदेश जारी सभी स्वास्थ्य संस्थाओं को चिकित्सा सेवाओं के साथ साथ उपकरणों, एम्बुलेंस, विद्युत व्यवस्था, जनरेटर इत्यादि की कार्यशीलता के परीक्षण हेतु कहा गया है। वी आई पी कारकेड हेतु अत्यधिक मेडिकल उपकरणों से युक्त एम्बुलेंस, विशेषज्ञ चिकित्सकीय दल, ब्लड ग्रुप के आधार पर डोनर्स की व्यवस्था , शासकीय एवं निजी स्वास्थ्य संस्थाओं में आईसीयू कक्ष आरक्षित किए जा रहे हैं। कार्यक्रम स्थल पर भी चिकित्सकों, पैरामेडिकल स्टाफ एवं एम्बुलेंस की व्यवस्था की जाएगी।

3 राशियों की 9 फरवरी से चमकेगी किस्मत! बन रहा है शनि-बुध का शक्तिशाली राजयोग

मेष राशि-मेष राशि वाले कोई भी फैसला बहुत सोच-समझकर लें। नौकरी की तलाश पूरी होगी। करियर से जुड़े शुभ समाचार मिलेंगे। आध्यात्मिक कार्यों में मन लगेगा। इस समय महत्वपूर्ण कार्य की शुरुआत करने से बचें। धन का लेन-देन न करें। पारिवारिक जीवन की दिक्कतों को समझदारी से सुलझाएं। वृषभ राशि-वृषभ राशि वालों के लिए सामान्य दिन है। ऑफिस में परफॉर्मेंस पहले से बेहतर होगी। नौकरी में प्रमोशन या अप्रेजल संभव है। भाई-बहन या करीबी दोस्त की आर्थिक मदद करनी पड़ सकती है। लव लाइफ में किसी तीसरे व्यक्ति के दखल से दिक्कतें बढ़ सकती हैं। कुछ जातक नई प्रॉपर्टी खरीद सकते हैं। मिथुन राशि-मिथुन राशि के जातकों को बहुत सतर्क रहने की जरूरत है। चुनौतियों का आत्मविश्वास के साथ सामना करें। ऑफिस में सहकर्मियों के सपोर्ट से कार्यों की बाधाओं को दूर कर लेंगे। रुके हुए कार्य सफल होंगे। कानूनी विवादों से दूर रहें। अपने डाइट पर ध्यान दें और स्वास्थ्य का ख्याल रखें। कर्क राशि-आर्थिक स्थिति अच्छी रहेगी, लेकिन धन का प्रबंधन होशियारी से करें। घर में मांगलिक कार्यों का आय़ोजन संभव है। वाहन चलाते समय सावधानी बरतें और ट्रैफिक के नियमों का पालन करें। नए बिजनेस की शुरुआत कर सकते हैं। आय के नए साधन से धन लाभ होगा। सिंह राशि-सिंह राशि वालों को ऑफिस के कार्यों में सावधानी बरतनी चाहिए। नया बजट बनाएं और खर्चों पर नियंत्रण रखें, वरना आर्थिक स्थिति बिगड़ सकती है। पार्टनर के साथ क्वालिटी टाइम स्पेंड करें और रिलेशनशिप की गलतफहमियों को दूर करें। यात्रा के योग बन सकते हैं। स्वास्थ्य में उतार-चढ़ाव संभव है। कन्या राशि-कन्या राशि वालों के मिलाजुला परिणाम देने वाला दिन रहेगा। कड़ी मेहनत के बाद सफलता हासिल होगी। कुछ जातकों को अच्छे पैकेज के साथ नई जॉब का ऑफर मिल सकता है। भौतिक सुख-सुविधाओं में जीवन व्यतीत करेंगे। सिंगल जातकों की किसी दिलचस्प से मुलाकात हो सकती है। तुला राशि-तुला राशि वालों के लिए सामान्य दिन रहेगा। वाणी पर संयम रखें। क्रोध से बचें। आप अचानक से ट्रिप का प्लान बना सकते हैं। आपके लंबे समय से रुके हुए कार्य पूरे होंगे। पारिवारिक जीवन में सुख-शांति बनी रहेगी। वृश्चिक राशि-वृश्चिक राशि वालों के लिए महत्वपूर्ण दिन है। ऑफिस में बॉस महत्वपूर्ण कार्यों की जिम्मेदारी दे सकते हैं। वैवाहिक जीवन में छोटी-मोटी दिक्कतें हो सकती हैं। बच्चों के स्वास्थ्य पर ध्यान दें। यात्रा के योग बनेंगे। सफलता प्राप्त करने के लिए किए गए प्रयास सार्थक साबित होंगे। धनु राशि-कार्यों में लापरवाही न बरतें। ऑफिस में दिए गए कार्यों को डेडलाइन तक पूरा करने का प्रयास करें। आर्थिक मामलों में जल्दबाजी में कोई फैसला न लें। रिलेशनशिप की दिक्कतों को बातचीत के जरिए सुलझाएं। स्टॉक मार्केट में सावधानी से निवेश करें। स्वास्थ्य से जुड़ी छोटी-मोटी दिक्कतें हो सकती हैं। मकर राशि-मकर राशि वालों को ऑफिस पॉलिटिक्स से बचना चाहिए। ऑफिस में कोई सहकर्मी आपकी इमेज खराब करने की कोशिश कर सकता है। लंबे समय के बाद पुराने दोस्तों से मुलाकात संभव है। नई प्रॉपर्टी या वाहन की खरीदारी संभव है। घर में धार्मिक कार्यों का आयोजन हो सकता है। कुंभ राशि-कुंभ राशि वालों को कार्यों के मनचाहे परिणाम मिलेंगे। कानूनी मामलों से दूरी बनाएं। बिजनेस में किसी पर आंख मूंदकर भरोसा न करें। घर में मेहमानों के आगमन से खुशियों का माहौल रहेगा। लाइफ पार्टनर के साथ कहीं घूमने का प्लान बना सकते हैं। आय के नवीन स्त्रोतों की तलाश करें और धन का प्रबंधन होशियारी से करें। मीन राशि- ऑफिस में महत्वपूर्ण कार्यों की जिम्मेदारी मिलेगी। प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों को सफलता प्राप्त होगी। कर्ज से मुक्ति मिलेगी। रिश्तों में सुधार आएगा। जीवनसाथी संग रिश्ते मधुर होंगे। परिजनों का सपोर्ट मिलेगा। मन प्रसन्न रहेगा। आनंददायक जीवन व्यतीत करेंगे।

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