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ब्रिक्स देशों को नई मुद्रा विकसित करने या ‘शक्तिशाली डॉलर’ की जगह पर कोई अन्य करेंसी अपनाने को लेकर कड़ी चेतावनी दी: ट्रंप

न्यूयॉर्क अमेरिका के नव-निर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ब्रिक्स देशों को नई मुद्रा विकसित करने या ‘शक्तिशाली डॉलर’ की जगह पर कोई अन्य करेंसी अपनाने को लेकर कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने धमकी दी है कि अगर ऐसा कोई कदम उठाया जाता है तो ब्रिक्स देशों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाया जाएगा और उन्हें अमेरिकी बाजारों से प्रभावी रूप से प्रतिबंधित किया जाएगा। ब्रिक्स में दुनिया की दो सबसे बड़ी उभरती शक्तियां चीन और भारत भी शामिल हैं। ट्रंप ने शनिवार को ट्रुथ सोशल पर लिखा, “इस बात की कोई संभावना नहीं है कि ब्रिक्स इंटरनेशनल ट्रेड में अमेरिकी डॉलर की जगह ले लेगा, और जो भी देश ऐसा करने की कोशिश करेगा, उसे अमेरिका को अलविदा कह देना चाहिए।” भारत और ब्रिक्स के अन्य आठ सदस्यों के लिए अमेरिकी बाजार को बंद करने की धमकी देते हुए उन्होंने कहा, “हमें इन देशों से यह प्रतिबद्धता चाहिए कि वे न तो नई ब्रिक्स मुद्रा बनाएंगे, न ही शक्तिशाली अमेरिकी डॉलर की जगह किसी अन्य मुद्रा का समर्थन करेंगे, अन्यथा उन्हें 100 प्रतिशत टैरिफ का सामना करना पड़ेगा और उन्हें अद्भुत अमेरिकी अर्थव्यवस्था में अपने उत्पाद बेचने को विदा कहना होगा।” चीन, मैक्सिको और कनाडा से आयात पर उच्च टैरिफ की धमकी देने के बाद ट्रंप ने अब ब्रिक्स को यह चेतावनी दी है। विदेश मंत्री (ईएएम) एस. जयशंकर पहले ही ब्रिक्स देशों की साझा मुद्रा के विचार को स्पष्ट रूप से खारिज कर चुके हैं। उन्होंने पिछले साल जोहान्सबर्ग में समूह के शिखर सम्मेलन से पहले कहा था, “ब्रिक्स देशों की मुद्रा जैसा कोई विचार नहीं है।” भारत ब्रिक्स देशों की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। हालांकि ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने फिर भी जोहान्सबर्ग शिखर सम्मेलन में एक आम मुद्रा का प्रस्ताव रखा, लेकिन इस पर कोई प्रगति नहीं हुई। अपने अभियान के दौरान, ट्रंप ने जोर देकर कहा कि दुनिया की प्रमुख व्यापारिक मुद्रा के रूप में डॉलर के भविष्य को ख़तरा है। उन्होंने दावा किया कि राष्ट्रपति जो बाइडेन इसे अनदेखा कर रहे हैं। उन्होंने ट्रुथ सोशल पोस्ट में कहा, “यह सोच कि ब्रिक्स देश डॉलर से दूर जाने की कोशिश कर रहे हैं और हम खड़े होकर देखते रहें, खत्म हो चुकी है।” ब्रिक्स देशों को दी गई ट्रंप की चेतावनी एक तरह से टेस्टिंग है। इसमें यह देखा जाएगा कि कौन से देश सार्वजनिक रूप से भारत जैसा रुख अपनाएंगे। यह बीजिंग के लिए एक पूर्व चेतावनी है। ब्रिक्स, अपने पहले सदस्यों – ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के नामों से बना एक संक्षिप्त नाम है। इस साल इसका विस्तार करके इसमें ईरान, मिस्र, इथियोपिया और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) को शामिल किया गया। कई अन्य देशों ने ब्रिक्स में शामिल होने के लिए आवेदन किया है।

देवास में ढाबा संचालक जांच करने का विरोध कर रहा था, ASI पर सरिया से किया हमला, हुए घायल

देवास ढाबे पर अवैध गतिविधियों की जांच करने पहुंचे एएसआई पर ढाबा संचालक व उसके साथियों ने हमला कर दिया। ढाबा संचालक जांच करने का विरोध कर रहा था। मामले में ढाबा संचालक सहित तीन आरोपितों पर शासकीय कार्य में बाधा व अन्य धाराओं में केस दर्ज किया गया है। ढाबे की जांच करने पहुंचे थे एएसआई पुलिस के अनुसार एएसआई जज सिंह अरोरा शासकीय कार्य से देवास गए थे। वापसी में थाने आते समय मोबाइल फोन पर सूचना मिली कि वरिष्ठ अधिकारी का आदेश हैं कि शराब दुकान एवं उसके आसपास चल रहे अवैध अहातों की जांच की जाए। इसके बाद अरोरा अपने वाहन चालक अंकित सोलंकी के साथ बायपास के पास शराब दुकान के सामने स्थित ढाबा पहुंचे। यहां ढाबा संचालक सुरेश बरगुंडा, उसके साथी सचिन बरगुंडा व राज बगानिया ने एएसआई से गालीगलौज करते हुए कहा कि “तू हमारे ढाबे में कैसे चेक करने आ गया।”   सरिया से हमला इसी दौरान ढाबे के अंदर से सुरेश सरिया निकालकर मारपीट करते हुए बोला, “पुलिस वाले बहुत परेशान कर रहे हैं, आज सरदार को बता दो फिर कोई पुलिस वाला इधर नहीं आयेगा” तीनों नेहमला कर दिया। सचिन ने एएसआई की पगडी खींचकर जमीन पर गिरा दी व उन्हें जमीन पर पटक दिया। कांच की बरनी भी मारी सचिन ने दुकान में रखी कांच की बरनी उठाकर एएसआई के ऊपर मारी जिससे वो बच गए। लात, घूंसों व लोहे के सरिये से मारपीट की गई। चालक सोलंकी बीचबचाव करने आया तो उसे भी आरोपित मारने दौड़े। हमले में एएसआई के दोनों पैर, पीठ में व चेहरे पर चोट आई है, जिला अस्पताल में उपचार चल रहा है।

सैयद शुजा नाम के शख्स ने दावा किया था कि ईवीएम की फ्रीक्वेंसी से छेड़छाड़ कर उसे हैक किया जा सकता है, बुरा फसा

नई दिल्ली मतदान में इस्तेमाल की जाने वाली इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) को हैक करने का दावा कर रहे शख्स पर पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है। सैयद शुजा नाम के शख्स ने दावा किया था कि ईवीएम की फ्रीक्वेंसी से छेड़छाड़ कर उसे हैक किया जा सकता है। निर्वाचन अधिकारियों ने उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज होने की जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने मामले में शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि आरोपी सैयद शुजा द्वारा किया गया दावा झूठा और निराधार है। अधिकारी ने बताया कि 30 नवंबर को दक्षिण मुंबई के साइबर थाने में बीएनएस और आईटी ऐक्ट के तहत ‘इस वीडियो में दिख रहे व्यक्ति के खिलाफ’ प्राथमिकी दर्ज की गई। सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने एक वीडियो साझा किया था, जिसमें एक व्यक्ति को यह दावा करते सुना जा सकता है कि वह महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में ईवीएम की ‘फ्रीक्वेंसी’ से छेड़छाड़ कर उसे (ईवीएम को) हैक कर सकता है, जिसके बाद निर्वाचन आयोग ने यह कार्रवाई की। निर्वाचन आयोग ने 2019 में भी इसी तरह का दावा करने के लिए शुजा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया था। महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘झूठे दावों से जुड़ी इसी तरह की एक घटना में आयोग के निर्देश पर 2019 में दिल्ली में इसी व्यक्ति (शुजा) के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी, जो किसी अन्य देश में छिपा हुआ है।’ आयोग के एक अधिकारी ने बताया कि दिल्ली और मुंबई पुलिस मामले की सक्रियता से जांच कर रही है तथा इस तरह की ‘दुर्भावनापूर्ण गतिविधियों’ में संलिप्त ऐसे व्यक्तियों के संपर्क में रहने वाले व्यक्ति की पहचान व गिरफ्तार करने के लिए आवश्यक कदम उठा रही है। अधिकारी ने बताया कि इस तरह की हरकतें एक गंभीर अपराध है और इसमें शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। आयोग ने कहा है कि ईवीएम ऐसी मशीन है जिसे ‘वाई-फाई’ या ‘ब्लूटूथ’ सहित किसी भी नेटवर्क से नहीं जोड़ा जा सकता। इसने इस बात पर भी जोर दिया है कि ईवीएम के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं की जा सकती। उच्चतम न्यायालय ने भी ईवीएम पर अपना भरोसा जताया है।

संभल हादसे का जिक्र कर महबूबा बोलीं- हमारी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के बजाय हर मस्जिद में मंदिर ढूंढने का प्रयास कर रहे हैं

श्रीनगर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने रविवार को संभल हिंसा को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यह लोग हमारी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के बजाय हर मस्जिद में मंदिर ढूंढने का प्रयास कर रहे हैं। संभल हादसे का जिक्र करते हुए महबूबा ने कहा, “जिन लोगों का इस मामले से कोई लेना देना नहीं था, उन्हें भी अपनी जान गंवानी पड़ी। यह लोग किसी से बात नहीं करना चाहते हैं। जो कोई भी इनसे बात करने की कोशिश करता है, उसे सलाखों के पीछे डाल दिया जाता है, जैसे उमर खालिद को जेल में डाल दिया गया। वो चार सालों जेल में है। आज कल कहीं पर जनता की बात नहीं सुनी जा रही है।” अजमेर शरीफ दरगाह को लेकर भी महबूबा मुफ्ती ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि यहां हिंदू-मुस्लिम सभी धर्मों के लोग जाते हैं। अजमेर शरीफ भाई चारा और गंगा जमुनी तहजीब की निशानी है। अगर किसी को भारत में गंगा जमुनी तहजीब की निशानी देखनी है, तो उसे अजमेर शरीफ जाना चाहिए, वहां उसे भाईचारे का प्रतीक देखने को मिलेगा। आपको वहां पर देखने को मिलेगा कि कैसे हमारी हिंदू-बहनें और मां अपना सिर झुकाती हैं और मन्नते मानती हैं। वहां पर आपको हिंदू, मुस्लिम और सिख सभी धर्मों के लोग देखने को मिलेंगे। लेकिन, अब यह लोग इसके पीछे भी पड़ चुके हैं। यह दावा कर रहे हैं कि अब इसे भी खोदो। क्या पता यहां भी मंदिर निकल आए। उन्होंने कहा, “मुझे यह समझ नहीं आ रहा है कि यह सब कब तक चलेगा। अब लोग जाग चुके हैं।” महबूबा ने चुनावी प्रणाली पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने इस बात पर आशंका जाहिर की कि चुनाव के दौरान भी विसंगति बरती जाती है, ताकि राजनीतिक माहौल को अपने पक्ष में किया जा सके। जानबूझकर किसी एक प्रदेश को विपक्ष के लिए छोड़ दिया जाता है, ताकि सवाल ना उठाया जा सके। इलेक्शन कमीशन इसे लेकर कोई जवाब नहीं देता है। अगर छह बजे वोटिंग बंद हुई, मतदान अगर 58 फीसद था, तो तीन घंटे बाद वो 68 कैसे हो गया? और काउंटिंग से पहले वो 70 फीसद कैसे हो गया। मुझे लगता है कि लोगों को जागना पड़ेगा। इस बीच, उन्होंने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे हमले का जिक्र कर कहा कि वहां हमारे हिंदू भाइयों के साथ ज्यादती हो रही है और यहां पर भी हम अल्पसंख्यकों के साथ अत्याचार कर रहे हैं, तो हममें और उनमें फर्क रहीं रह गया है। उन्होंने कहा कि अगर हम भारत में अल्पसंख्यकों को परेशान करेंगे। उनकी मस्जिदों में जाकर मंदिर ढूंढेंगे तो ऐसी स्थिति में बांग्लादेश और हमारे बीच में क्या फर्क रह जाएगा। बांग्लादेश में भी तो लगातार हिंदुओं को निशाना बनाया जा रहा है। उनके धार्मिक स्थलों पर हमला किया जा रहा है। बांग्लादेश में जिन लोगों ने हिंदुओं के साथ हो रहे अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाई, उन्हें वहां जेल में दिया गया, ठीक उसी प्रकार से यहां पर भी जो लोग अल्पसंख्यकों के साथ हो रहे अत्याचार के विरुद्ध बोलते हैं, उन्हें भी जेल में दिया जा रहा है।

मल्लिकार्जुन खड़गे ने महारैली को संबोधित करते हुए कहा- संविधान बचा तो हम सब लोग बचेंगे

नई दिल्ली कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने रविवार को दिल्ली के रामलीला मैदान में संविधान की रक्षा के लिए आयोजित महारैली को संबोधित किया। उन्होंने लोगों से एकजुट होकर संविधान को बचाने की बात कही है। मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपने संबोधन में कहा कि आज ऐतिहासिक समय है। जब हम लोगों को किसी चीज को हासिल करना है तो एकता होनी बहुत जरूरी है। जब तक एकता नहीं आएगी, तब तक आप लोग कुछ भी हासिल नहीं कर पाएंगे। उन्होंने आगे कहा कि मैं इसलिए कह रहा हूं कि अगर हम टुकड़े टुकड़ों में बाटेंगे और कन्याकुमारी से कश्मीर तक एक नहीं होंगे, तब तक हम कोई चीज हासिल नहीं कर सकते। आपका एक संगठन नहीं, देश के सभी संगठन चाहते हैं कि इस देश में संविधान को बचाना चाहिए। संविधान बचा तो हम सब लोग बचेंगे। इसलिए हमको एक रहकर इस संविधान को बचाना होगा और हर पार्टी के लोग अपने-अपने हिसाब से काम कर रहे हैं। उसके साथ ही हमको लोकतंत्र को भी बचाना है। लोकतंत्र नहीं बचेगा तो आपकी हिस्सेदारी नहीं बढ़ेगी। संविधान बाबा साहेब अंबेडकर की देन है। पंडित जवाहरलाल नेहरू ने 1922 में एक कांग्रेस के अधिवेशन में रेज्युलेशन पास किया था। उन्होंने आजादी के बाद हम सभी लोगों को वयस्क मताधिकार देंगे, उस वक्त ब्रिटिश के जमाने में सिर्फ चंद लोग वोटर्स थे।

न्यायिक आयोग की टीम ने कड़ी सुरक्षा के बीच मस्जिद के पास कोट गर्वी इलाके में हिंसा प्रभावित इलाकों का किया दौरा

संभल उत्तर प्रदेश के संभल में पिछले महीने शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान हुई हिंसा की जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय न्यायिक आयोग के दो सदस्यों ने रविवार को मस्जिद सहित शहर के हिंसा प्रभावित इलाकों का दौरा किया। आयोग के प्रमुख एवं इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश देवेंद्र कुमार अरोड़ा और सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी अरविंद कुमार जैन ने कड़ी सुरक्षा के बीच मस्जिद के पास कोट गर्वी इलाके में हिंसा प्रभावित इलाकों का दौरा किया। आयोग के तीसरे सदस्य, पूर्व आईएएस अधिकारी अमित मोहन प्रसाद रविवार के दौरे के दौरान मौजूद नहीं थे। 24 नवंबर को हुई थी हिंसा आयोग के सदस्यों ने हालांकि सुबह के दौरे के दौरान मीडिया के किसी भी सवाल का जवाब नहीं दिया। उनके साथ मुरादाबाद के मंडलायुक्त आंजनेय कुमार सिंह, पुलिस उपमहानिरीक्षक मुनिराज, संभल के जिलाधिकारी राजेंद्र पेंसिया और पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार भी थे। मंडलायुक्त ने शनिवार को बताया था कि अरोड़ा और जैन एक दिन पहले ही मुरादाबाद पहुंच गए थे, जबकि प्रसाद के संभल में उनके साथ शामिल होने की उम्मीद थी। संभल में 24 नवंबर को अदालत के आदेश पर मुगलकालीन शाही जामा मस्जिद के सर्वेक्षण के दौरान हिंसा भड़क गई थी। इस दौरान चार लोगों की मौत हो गई थी और अनेक अन्य घायल हो गए थे। सर्वेक्षण का आदेश एक याचिका पर दिया गया था, जिसमें दावा किया गया था कि मस्जिद स्थल पर कभी हरिहर मंदिर हुआ करता था। ‘जांच पूरी तरह से घटनाओं की तह तक पहुंचेगी’ आयोग को दो महीने के भीतर अपनी जांच पूरी करने का निर्देश दिया गया है। इस समय सीमा को बढ़ाने के लिए सरकार की मंजूरी की जरूरत होगी। आयोग इस बात की जांच करेगा कि क्या पिछली 24 नवंबर को हुई हिंसक झड़पें स्वतःस्फूर्त थी या किसी सुनियोजित आपराधिक साजिश का हिस्सा थीं। साथ ही स्थिति को संभालने में पुलिस और प्रशासन की तैयारियों की भी जांच होगी। आयोग हिंसा के लिए जिम्मेदार परिस्थितियों का भी विश्लेषण करेगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के उपायों की सिफारिश करेगा। आयोग के सदस्य जैन ने कहा कि यह जांच पूरी तरह से घटनाओं की तह तक पहुंचेगी। 

कम-ज्ञात पर्यटन स्थलों को प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए 800 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी

नई दिल्ली भारत सरकार ने भीड़-भाड़ और अति-पर्यटन को नियंत्रित करने के लिए पूर्वोत्तर भारत के छह राज्यों में आठ कम-ज्ञात पर्यटन स्थलों को प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने का फैसला लिया है। इसके लिए करीब 800 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। ये परियोजनाएं मेघालय, असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, सिक्किम और त्रिपुरा में फैली हुई हैं। परियोजनाओं की मंजूरी और धनराशि इन परियोजनाओं को वित्तीय विभाग (डीओई) द्वारा मंजूरी दी गई है। विभाग ने पहली किस्त के तौर पर 66% धनराशि जारी की है जो संबंधित राज्यों को सीधे मिलेगी। अधिकारियों के मुताबिक पर्यटन मंत्रालय इन परियोजनाओं की प्रगति की निगरानी करेगा। राज्यों को मार्च 2026 तक इन परियोजनाओं को पूरा करने के लिए समय दिया गया है। इन परियोजनाओं में कुछ प्रमुख स्थानों का नाम इस प्रकार है: – सिक्किम: नाथुला सीमा अनुभव (97.37 करोड़ रुपये) – त्रिपुरा: गोमती में 51 शक्ति पीठ पार्क (97.7 करोड़ रुपये) – मणिपुर: लोकटक झील का अनुभव (89.48 करोड़ रुपये) – मेघालय: शिलांग में उमियाम झील (99.27 करोड़ रुपये) – असम: गुवाहाटी में असम राज्य चिड़ियाघर (97.12 करोड़ रुपये) – अरुणाचल प्रदेश: पासीघाट में सियांग इको-रिट्रीट (46.48 करोड़ रुपये) केंद्रीय पर्यटन मंत्री की टिप्पणी केंद्रीय पर्यटन और संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि ये परियोजनाएं भारत भर में पर्यटकों के संतुलित वितरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की जा रही हैं। इन परियोजनाओं का कुल खर्च करीब 3,295 करोड़ रुपये होगा और ये देश के 23 राज्यों में फैली हुई हैं। द्वितीयक और स्थायी पर्यटन विकास पर्यटन मंत्रालय ने इन परियोजनाओं के लिए विशेष एसएएससीआई (विशेष सहायता पूंजी निवेश) दिशानिर्देश जारी किए हैं जिससे राज्यों को स्थायी और प्रभावशाली पर्यटन स्थलों को विकसित करने का मार्गदर्शन मिलेगा। मंत्रालय का उद्देश्य कम-ज्ञात स्थलों को बढ़ावा देना है ताकि इन स्थानों की ब्रांडिंग और मार्केटिंग के माध्यम से इनकी पर्यटन संभावनाओं को बढ़ाया जा सके। नए निवेश और रोजगार के अवसर मंत्रालय ने राज्य सरकारों को सार्वजनिक-निजी निवेश के अवसर तलाशने के लिए भी प्रेरित किया है जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा। भूमि संबंधित परियोजनाओं के लिए राज्य सरकारों द्वारा प्रदान की जाएगी। इस प्रकार इन परियोजनाओं से स्थानीय विकास, नौकरी के अवसर और सतत पर्यटन की दिशा में मदद मिलेगी। अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री की टिप्पणी अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने हाल ही में आईटीएम (इंटरनेशनल टूरिज़म मार्ट) में कहा कि राज्य में पिछले दशक में पर्यटकों की संख्या में 205% की वृद्धि देखी गई है। उन्होंने बताया कि तिब्बत की सीमा से लगे गांवों में पर्यटकों की संख्या बढ़ी है और इसके लिए राज्य सरकार, केंद्र सरकार और सेना मिलकर काम कर रही है।

केंद्रीय मंत्री श्री नड्डा और मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सपत्नीक श्रीमहाकालेश्वर भगवान के दर्शन किए

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जे.पी. नड्डा ने अपने उज्जैन प्रवास के दौरान दोपहर श्रीमहाकालेश्वर मंदिर पहुंचकर सपत्नीक दर्शन कर पूजन-अभिषेक किया। पूजन अभिषेक पं.श्री राजेश पुजारी, श्री राम पुजारी और श्री आकाश पुजारी द्वारा सम्पन्न कराया गया। केंद्रीय मंत्री श्री नड्डा और मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सपत्नीक दर्शन-पूजन के बाद नंदीमंडपम् में ध्यान एवं पूजन किया। श्रीमहाकालेश्वर मंदिर की ओर से मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केंद्रीय मंत्री श्री नड्डा को स्मृति-चिन्ह, दुपट्टा और प्रसाद भेटकर सम्मान किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव एवं सांसद श्री वी.डी. शर्मा को मंदिर समिति की ओर से कलेक्टर श्री नीरज कुमार सिंह ने स्मृति-चिन्ह, दुपट्टा और प्रसाद भेंटकर सम्मान किया। इस अवसर पर उज्जैन जिले के प्रभारी मंत्री श्री गौतम टेटवाल, राज्यसभा सांसद श्री बालयोगी उमेशनाथ जी महाराज, सांसद श्री अनिल फिरोजिया, विधायक श्री अनिल जैन कालूहेड़ा, श्री सतीश मालवीय, डॉ. चिंतामणि मालवीय, महापौर श्री मुकेश टटवाल, नगर निगम सभापति श्रीमती कलावती यादव, संभागायुक्त श्री संजय गुप्ता, कलेक्टर श्री नीरज कुमार सिंह, पुलिस अधीक्षक श्री प्रदीप शर्मा, प्रशासक श्री गणेश कुमार धाकड़ सहित जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।  

सिवनी में दर्दनाक हादसा, पलटी एंबुलेंस, चार लोगों की मौत, पांच लोग घायल

सिवनी मध्य प्रदेश के सिवनी जिले में बड़ा हादसा हुआ है। यहां एंबुलेंस पलटने से चार लोगों की मौत हो गई और पांच लोग घायल हैं। हादसे के बाद से घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई। हादसा धूमा पुलिस थाना क्षेत्र में जबलपुर-नागपुर राजमार्ग पर हुआ है। एंबुलेंस आंध्र प्रदेश के कुरनूल से बिहार के पश्चिमी चंपारण जा रही थी। एक पैदल यात्री को टक्कर मारने के बाद एंबुलेंस खंभे से टकराकर पलट गई। इन लोगों ने गंवाई अपनी जान एसडीओपी अपूर्व भलावी ने बताया कि, “एंबुलेंस आंध्र प्रदेश के कुरनूल से अनीश शाह (18) नाम के एक घायल व्यक्ति को बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले में स्थित उसके पैतृक गांव ले जा रही थी। एंबुलेंस में दो चालक और उसके छह रिश्तेदार सवार थे। रास्ते में एंबुलेंस ने पैदल यात्री रंगलाल कुलस्ते को टक्कर मार दी। इसके बाद अनियंत्रित होकर एक खंभे से टकराकर पलट गई। हादसे में प्रतिमा शाह (35), प्रिंस शाह (4), मुकेश शाह (36) और सुनील शाह (40) की जान गई है।  

सरकार ने वीजा नियमों में किया बड़ा बदलाव- सऊदी सरकार ने वीजा नियमों में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव किए

दुबई सऊदी सरकार ने वीजा नियमों में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं, जिनका असर खासकर उन लोगों पर पड़ेगा जो दुबई में अपने परिवार या दोस्तों के साथ रुकने की योजना बनाते हैं। नए नियम 8 दिसंबर से लागू होंगे और क्रिसमस व नए साल के मौके पर दुबई की यात्रा करने वाले हजारों भारतीयों को प्रभावित करेंगे। इन नियमों के चलतेअब भारतीयों के लिए दुबई की यात्रा करना  आसान नहीं रहेगा।  यह नियम 8 दिसंबर से 14 जनवरी तक लागू रहेगा, जब दुबई में शॉपिंग फेस्टिवल और छुट्टियों का मौसम होता है।   पर्यटकों की बढ़ेंगी मुश्किलें और खर्च इन नियमों के कारण जो यात्री अपने परिचितों या दोस्तों के घर पर रुकना चाहते हैं लेकिन जरूरी दस्तावेज नहीं जुटा पाते, उन्हें मजबूरन होटल में रुकना पड़ेगा। दुबई में होटल का खर्च प्रति रात ₹20,000 से ₹1,00,000 तक हो सकता है। दस्तावेज़ न जुटा पाने के कारण कई लोग अपनी यात्रा रद्द करने पर मजबूर हो सकते हैं। बता दें कि  8 दिसंबर से शुरू होने वाले दुबई शॉपिंग फेस्टिवल में बड़ी संख्या में भारतीय पर्यटक शामिल होते हैं। लेकिन इन कड़े नियमों के कारण इस बार पर्यटकों की संख्या में गिरावट की संभावना है।  जबकि दुबई प्रशासन का कहना है कि यह कदम सुरक्षा को मजबूत करने और अनधिकृत प्रवास को रोकने के लिए उठाया गया है। हालांकि, इसके कारण भारतीयों समेत अन्य देशों के पर्यटकों और निवासियों को असुविधा का सामना करना पड़ेगा। 

अजमेर जिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लिमिटेड की 33वीं आमसभा हुई आयोजित, इस बार नहीं होंगे भाव काम

अजमेर डेयरी अध्यक्ष रामचंद्र चौधरी ने बताया कि इस आमसभा में सबसे महत्वपूर्ण निर्णय यह था कि इस सहकारी वर्ष के अंत तक दूध का भाव कम नहीं किया जाएगा और भाव 54.47 रुपए प्रति लीटर ही रहेगा। अजमेर जिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लिमिटेड की 33वीं आमसभा आयोजित की गई, जिसमें डेयरी अध्यक्ष रामचंद्र चौधरी ने सभी को संबोधित किया और दुग्ध पालकों व उनके मवेशियों के हित में वार्ता की। यह कार्यक्रम पुष्कर की जात विश्रामस्थली में हुआ। आमसभा में सरस डेरी को सर्वश्रेष्ठ बनाने पर भी विस्तृत चर्चा की गई।   डेयरी अध्यक्ष रामचंद्र चौधरी ने बताया कि इस आमसभा में सबसे महत्वपूर्ण निर्णय यह था कि इस सहकारी वर्ष के अंत तक दूध का भाव कम नहीं किया जाएगा और भाव 54.47 रुपए प्रति लीटर ही रहेगा। उन्होंने कहा कि सर्दियों में आमतौर पर दूध के भाव गिरते हैं, लेकिन इस बार दूध के भाव में कोई गिरावट नहीं होगी। आगामी वित्तीय बजट में 1677 करोड़ का बजट रखा गया है, जिसके तहत अगले साल 1 अप्रैल से दूध का भाव 60 रुपए प्रति लीटर हो जाएगा और पशुपालकों की आय दोगुनी हो जाएगी। पशुपालकों को एक वर्ष के अंतर्गत 1017 करोड़ रुपए का भुगतान प्रतिवर्ष किया जाएगा। डेयरी अध्यक्ष ने बताया कि पशुपालकों से अनुरोध किया गया है कि वे अपना दूध सरस डेरी को दें, ताकि उन्हें अधिक लाभ प्राप्त हो सके। आने वाले सहकारी वर्ष के अंतर्गत दूध की मात्रा को 3 लाख लीटर से बढ़ाकर 5 लाख लीटर करने का प्रयास किया जाएगा। साथ ही, एक संकल्प के तहत अजमेर डेयरी के अंदर जो भी अधूरे काम हैं, उन्हें पूरा करने का प्रयास किया जाएगा। अजमेर डेयरी के अंदर व्याप्त रिक्त पदों को भी भरा जाएगा, और अजमेर डेयरी को डेनमार्क की तरह विकसित करने की हमारी कोशिश रहेगी। अजमेर शहर छोटे क्षेत्रफल वाला शहर है, जिसके कारण गरीब तबके के पशुपालकों के लिए जल्द से जल्द लोन की व्यवस्था की जाएगी।

भारत के संत श्री नारायण गुरु की सराहना करते हुए संदेश को पूरी दुनिया के लिए प्रासंगिक बताया: पोप फ्रांसिस

तिरुअनंतपुरम दुनिया के शीर्ष ईसाई धर्मगुरु पोप फ्रांसिस ने भारत के संत श्री नारायण गुरु की सराहना की है और उनके संदेश को पूरी दुनिया के लिए प्रासंगिक बताया है। पोप फ्रांसिस ने कहा कि नारायण गुरु का समाज सुधारक का संदेश ‘आज की हमारी दुनिया के लिए प्रासंगिक है, जहां हमें लोगों और देशों के बीच असहिष्णुता तथा नफरत बढ़ने के उदाहरण देखने को मिल रहे हैं।’ एर्नाकुलम जिले के अलुवा में श्री नारायण गुरु के सर्व-धर्म सम्मेलन के शताब्दी समारोह के अवसर पर शनिवार को वेटिकन में जुटे धर्मगुरुओं और प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए पोप ने यह बात कही। पोप ने कहा कि आज दुनिया में जो अशांति का माहौल है उसके लिए धर्मों की शिक्षाओं को न अपनाना भी कहीं न कहीं जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि गुरु ने अपने संदेश के माध्यम से सामाजिक और धार्मिक जागृति को बढ़ावा देने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। पोप ने कहा कि गुरु ने अपने संदेश में कहा था कि सभी मनुष्य, चाहे उनकी जाति, धर्म और सांस्कृतिक परंपराएं कोई भी हों, एक ही मानव परिवार के सदस्य हैं। पोप ने कहा, ‘उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी तरह से और किसी भी स्तर पर किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए।’ उन्होंने कहा, ‘दुख की बात है कि कई समुदायों और लोगों को नस्ल, रंग, भाषा और धर्म के आधार पर रोजाना भेदभाव तथा तिरस्कार झेलना पड़ रहा है और हिंसा का सामना करना पड़ रहा है। खासकर ऐसा उन लोगों और समुदाय के साथ हो रहा है जो गरीब और कमजोर तबके के हैं।’ पोप ने कहा, ‘धर्मों की महान शिक्षाओं को नहीं अपनाना दुनिया में अशांति के लिए जिम्मेदार कारणों में से एक है।’ नारायण गुरु को भारत के उन महान संतों में शुमार किया जाता है, जिन्होंने समानता का संदेश दिया। आज भी बहुजन राजनीति और सामाजिक वर्ग के लोगों के लिए वह एक नायक की तरह हैं। 22 अगस्त, 1956 को केरल के तिरुअनंतपुरम के पास एक गांव चेमपजंथी में मदन असन और कुट्टियम्मा के घर हुआ था। उनका परिवार एझावा जाति से संबंध रखता था और उस समय के सामाजिक मान्यताओं के अनुसार इसे ‘अवर्ण’ माना जाता था। छोटी उम्र से ही उनका आकर्षण तप की ओर था जिसके चलते वे संन्यासी के रूप में आठ वर्षों तक जंगल में रहे थे। उनको वेद, उपनिषद, साहित्य, हठ योग और अन्य दर्शनों का ज्ञान था। उन्होंने समानता का संदेश देते हुए ‘एक जाति, एक धर्म, एक ईश्वर’ (ओरु जति, ओरु माथम, ओरु दैवम, मानुष्यानु) का प्रसिद्ध नारा दिया। उन्होंने वर्ष 1888 में अरुविप्पुरम में भगवान शिव को समर्पित एक मंदिर बनाया, जो उस समय के जाति-आधारित प्रतिबंधों के खिलाफ था। उन्होंने एक मंदिर कलावन्कोड में अभिषेक किया और मंदिरों में मूर्तियों की जगह दर्पण रखा। यह उनके इस संदेश का प्रतीक था कि परमात्मा प्रत्येक व्यक्ति के भीतर है। मंदिर प्रवेश आंदोलन के वह अग्रदूत थे।

बस मार्शल्स की नियुक्ति को लेकर CM आतिशी ने LG को लिखी चिट्ठी, कहा, अभी तक नहीं मिली आपकी मंजूरी

नई दिल्ली दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी ने बस मार्शलों की नियुक्ति के मुद्दे पर उपराज्यपाल वीके सक्सेना को पत्र लिखा है। आतिशी ने पत्र में लिखा है कि दिल्ली सरकार ने 13 नवंबर को मार्शलों की फिर से नियुक्ति का प्रस्ताव आपके पास भेजा था, लेकिन अब तक उस प्रस्ताव को आपकी मंजूरी नहीं मिली है। मैं आपसे हाथ जोड़कर विनती करती हूं कि इस प्रस्ताव को मंजूरी दें। सरकार, मार्शल और पूरी दिल्ली की महिलाएं आपकी मंजूरी का इंतजार कर रही हैं। आतिशी ने पत्र में लिखा कि पूरी दिल्ली कभी नहीं भूल सकती वो दिन जब हमारी माताएं बहनें और बेटियां बसों में असुरक्षित महसूस करती थीं। छेड़खानी और गलत नजरों का शिकार होना जैसे उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गया था। बच्चियों का स्कूल और कॉलेज जाना किसी चुनौती से कम नहीं था और महिलाएं काम पर जाने से पहले सौ बार सोचती थीं कि क्या वे सुरक्षित लौट पाएंगी। ये दर्द हर घर में महसूस किया जाता था। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए बसों में 10,000 से ज्यादा मार्शल तैनात किए इन मार्शल ने ईमानदारी से अपना काम करते हुए बहुत से उपद्रवियों को पकड़ा था। उसके बाद से ही हर महिला ने पहली बार बसों में खुद को सुरक्षित महसूस किया था। बसों में तैनात हमारे मार्शल हर उस मां-बहन, बेटी के लिए उम्मीद थे जो रोज अपने घर से निकलती हैं। इन मार्शलों ने न सिर्फ महिलाओं को सुरक्षा दी बल्कि उन्हें आत्मविश्वास भी दिया। उनमें ये भरोसा भी जगाया कि अब कोई भी असामाजिक तत्व उनको तंग नहीं करेगा। लेकिन फिर केंद्र सरकार के इशारों पर दिल्ली सरकार में बैठे कुछ अफसरों ने एक सजिश के तहत पहले तो इन सभी मार्शलों की तनख्वाह रोकी और फिर 31 अक्टूबर 2023 को इन बस मार्शलों को उनकी नौकरी से भी हटा दिया गया। हमारी सरकार ने आपसे तब भी गुजारिश की थी कि ऐसे अफसरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, लेकिन दुर्भाग्यवश उन पर कार्रवाई करने की बजाय उन्हें तरक्की देकर और भी बड़े पदों पर बैठा दिया गया। आतिशी ने आगे लिखा कि इन गरीब मार्शलों की नौकरी छीनने से न केवल उनके परिवारों का सहारा छिन गया, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा का वह कवच भी कमजोर हो गया जो हर दिन लाखों महिलाओं को निडर होकर बसों में सफर करने की ताकत देता था। इन सभी मार्शलों को दोबारा नियुक्ति देकर इन्हें वापस नौकरी पर रखने के लिए 13 नवम्बर 2024 को हमारे सभी मंत्रियों ने एक प्रस्ताव पास करके आपके पास आपके कार्यालय में भेजा। अब लगभग दो हफ्ते से ज्यादा का समय बीत जाने के बाद भी इस प्रस्ताव पर आपकी ओर से कोई फैसला नहीं लिया गया है। मुझे समझ नहीं आ रहा कि ये देरी क्यों हो रही है। आपसे हाथ जोड़कर विनती करती हूं कि इस प्रस्ताव पर जल्द से जल्द अपनी स्वीकृति दें ताकि उन 10,000 परिवारों में फिर से रौशनी लौट आए और महिलाओं की सुरक्षा के लिए बसों में मार्शल तैनात हो सकें। आपकी स्वीकृति का इंतजार केवल इन मार्शलों को ही नहीं बल्कि मुझे और हमारी पूरी सरकार इन मार्शलों के परिवार और दिल्ली की सभी महिलाओं को है। हम सब आपकी सहमति का इंतजार कर रहे हैं।

इंडिगो की एक फ्लाइट को लैंडिंग के कारण काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, पायलट की सूझ-बूझ से टला हादसा

चेन्नई चक्रवात फेंगल के बीच चेन्नई एयरपोर्ट पर एक बड़ा विमान हादसा टल गया। रविवार को इंडिगो की एक फ्लाइट को लैंडिंग के कारण काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। हालांकि पायलट की सूझ-बूझ से एक बड़ा हादसा टल दिया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। वीडियो में आप देख सकते हैं कि विमान रनवे पर छूने के तुरंत बाद फिर से हवा में ऊपर उठ गया। ऐसी संभावना है कि तेज हवाओं और रनवे पर पानी जमा होने के कारण पाइलट को अचानक लैंडिंग के फैसले को कुछ समय के लिए टालना पड़ा। आपको बता दें कि एयरलाइंस की भाषा में इसे गो-अराउंड कहा जाता है। यह स्थिति तब अपनाई जाती है जब लैंडिंग सुरक्षित रूप से पूरी नहीं की जा सकती। इस घटना ने पायलट की और सही निर्णय लेने की क्षमता को दर्शाया है। चक्रवात फेंगल का प्रभाव पुदुचेरी के पास लैंडफॉल करने वाले चक्रवात फेंगल ने भारी बारिश और तेज हवाओं के साथ मौसम की स्थिति को विकराल कर दी है। चेन्नई में इसका विशेष असर हुआ है। इसके कारण हवाई अड्डे पर परिचालन को अस्थायी रूप से रोकना पड़ा। इससे कई उड़ानें प्रभावित हुईं। अधिकारियों ने यात्रियों की सुरक्षा के लिए एहतियातन कदम उठाए और यात्रियों से अनुरोध किया कि वे अपनी उड़ानों की स्थिति के बारे में जानकारी प्राप्त करके ही यात्रा के लिए निकलें।

हिंदू पक्ष ने बदायूं की जामा मस्जिद को लेकर दावा किया है कि यहां पहले नीलकंठ महादेव मंदिर था, कोर्ट पंहुचा मामला

संभल यूपी में संभल जामा मस्जिद के हरिहर मंदिर होने के दावे के बाद सर्वे के दौरान हुआ विवाद अभी सुर्खियों में है। इस बीच बदायूं में नीलकंठ महादेव मंदिर बनाम जामा मस्जिद विवाद भी कोर्ट में पहुंच गया है। यहां हिंदू पक्ष ने बदायूं की जामा मस्जिद को लेकर दावा किया है कि यहां पहले नीलकंठ महादेव मंदिर था। यह मामला फिलहाल फास्‍ट ट्रैक कोर्ट में चल रहा है जहां तीन दिसम्‍बर को सुनवाई होनी है। बदायूं के सिविल जज (सीनियर डिवीजन) अमित कुमार की अदालत ने इस मामले में 30 नवंबर को मस्जिद इंतजामिया कमेटी के अधिवक्‍ता की बहस सुनी। कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए तीन दिसम्‍बर की तारीख दी है। क्‍या है दावा? यह मामला सबसे पहले 2022 में चर्चा में आया था। तब अखिल भारत हिंदू महासभा के प्रदेश संयोजक मुकेश पटेल ने दावा किया था कि वर्तमान में जिस जगह पर बदायूं की जामा मस्जिद है वहां पहले नीलकंठ महादेव का मंदिर था। उन्होंने वहां पूजा-अर्चना की इजाजत के लिए अदालत में याचिका दायर की थी। जबकि मुस्लिम पक्ष बदायूं जामा मस्जिद के 850 साल पुरानी होने का दावा करता है। जामा मस्जिद पक्ष का कहना है कि इस मामले में हिंदू महासभा को ऐसी याचिका दायर करने का कोई अधिकार ही नहीं है। यहां पूजा-अर्चना की इजाजत देने का कोई सवाल ही नहीं उठता। शनिवार को न्यायालय में मस्जिद पक्ष की इंतजामिया कमेटी ने अपनी बहस शुरू की। इंतजामिया कमेटी के अधिवक्ता अनवर आलम ने बहस की, जो आगे भी जारी रहेगी। सरकार की ओर से पूरी हो चुकी है बहस इस मामले में सरकारी पक्ष और पुरातत्‍व विभाग की रिपोर्ट के आधार पर सरकार की ओर से बहस पूरी हो चुकी है। पुरातत्‍व विभाग की रिपोर्ट भी कोर्ट में पूरी हो चुकी है। मामले में शाही मस्जिद कमेटी की तरफ से भी बहस पूरी कर ली गई है। कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए तीन दिसम्‍बर की तारीख तय की है।

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