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पहली बार PM PM के सुरक्षा घेरे में दिखी महिला SPG कमांडर, वायरल हो रही तस्वीर

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में कथित तौर पर शामिल एक महिला एसपीजी (स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप) कमांडो की तस्वीर इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है। इस तस्वीर ने ऑनलाइन बहस को जन्म दे दिया है। जहां कुछ लोगों ने दावा किया कि यह पहली बार है जब किसी महिला कमांडो को प्रधानमंत्री की सुरक्षा में देखा गया है। वहीं, अन्य ने बताया कि यह महिला कमांडो पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की सुरक्षा में भी देखी जा चुकी हैं। तस्वीर शेयर कर रहे भाजपा सांसद कई भाजपा सांसद इस तस्वीर को शेयर कर रहे हैं। मंडी से सांसद कंगना रनौत ने भी इसे अपने इंस्टाग्राम स्टोरी पर शेयर किया है।केंद्रीय मंत्री रवनीत बिट्टू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रधानमंत्री की सुरक्षा में तैनात महिला SPG कमांडो की तस्वीर शेयर करते हुए उनकी बहादुरी और प्रतिबद्धता की सराहना की। उन्होंने लिखा, “भारत की शान, नारी शक्ति की पहचान! SPG में ड्यूटी पर तैनात हमारी साहसी महिला सुरक्षा अधिकारी देश की सेवा और सुरक्षा में नया मानदंड स्थापित कर रही हैं। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में नारी शक्ति हर क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रही है। यह नया भारत है, जहां महिलाएं आत्मनिर्भरता और ताकत की मिसाल बन रही हैं।” चिक्काबल्लापुरा से भाजपा के लोकसभा सांसद डॉक्टर के सुधाकर ने भी यही तस्वीर शेयर की है। उन्होंने लिखा, “प्रधानमंत्री की एसपीजी में महिला कमांडो! अग्निवीर से लेकर लड़ाकू पायलट तक, लड़ाकू पदों से लेकर प्रधानमंत्री की एसपीजी में कमांडो तक, सशस्त्र बलों में महिलाओं की भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और महिलाएं आगे बढ़कर नेतृत्व कर रही हैं। महिलाओं को और अधिक शक्ति मिले। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को धन्यवाद।” पहले भी देखी जा चुकी हैं महिला SPG कमांडो इसके अलावा, कई अन्य लोगों ने भी सोशल मीडिया पर इस तस्वीर को शेयर करते हुए दावा किया है कि ऐसा पहली बार है जब पीएम की सुरक्षा में कोई महिला SPG कमांडो तैनात है। ऐसा ही दावा सात साल पहले भी किया गया था जब एक वीडियो में प्रधानमंत्री मोदी की सुरक्षा में एक महिला कमांडो को देखा गया था। यानी ये साफ है कि महिला SPG कमांडे पहले भी पीएम मोदी के सुरक्षा घेरे में देखी जा चुकी हैं। जानकारी के अनुसार, एसपीजी ने 2013 से महिला कमांडो को अपने दस्ते में शामिल करना शुरू किया था, जिससे महिलाओं को प्रधानमंत्री की सुरक्षा में भागीदारी का अवसर मिला। कथित तौर पर यह तस्वीर संसद की है, जहां महिला एसपीजी कमांडो तैनात हैं। इन कमांडो को आम तौर पर महिला विजिटर्स की तलाशी लेने के लिए गेट पर तैनात किया जाता है और वे परिसर में प्रवेश करने या बाहर निकलने वाले लोगों की निगरानी करने में भी शामिल होती हैं। इसके अलावा, जब कोई महिला अतिथि प्रधानमंत्री से मिलती है, तो महिला एसपीजी अधिकारी ही सुरक्षा जांच, एस्कॉर्टिंग और प्रधानमंत्री तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार होती हैं। हालांकि जो तस्वीर वायरल हो रही है उसमें दिख रही महिला अधिकारी PM मोदी की सुरक्षा में नहीं राष्ट्रपति मुर्मू की सुरक्षा में तैनता थीं। बताया जा रहा है कि यह फोटो 26 नवंबर को उस वक्त की है जब राष्ट्रपति मुर्मू संसद को संबोधित करने जा रही थीं। 2015 से, महिलाओं को एसपीजी की क्लोज प्रोटेक्शन टीम (CPT) में भी शामिल किया गया है। यानी अब पीएम के सबसे करीबी सुरक्षा घेरे में भी महिला कमांडो तैनात होती हैं। प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं के दौरान, महिला एसपीजी कमांडो सुरक्षा दल का हिस्सा होती हैं। वर्तमान में, एसपीजी में कथित तौर पर करीब 100 महिला कमांडो हैं। पहली बार 2013 में महिला एसपीजी कमांडो को किसी उच्च-स्तरीय हस्ती की सुरक्षा में तैनात किया गया था। उस समय दो महिला कमांडो को तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की पत्नी गुरशरण कौर की सुरक्षा करते देखा गया था। महिला कमांडो की उपस्थिति प्रधानमंत्री की सुरक्षा के प्रति एसपीजी की व्यापक सोच और समावेशी दृष्टिकोण को दर्शाती है। यह कदम न केवल महिलाओं को समान अवसर प्रदान करता है, बल्कि सुरक्षा क्षेत्र में उनकी बढ़ती भागीदारी को भी दर्शाता करता है। स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप क्या है? स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (SPG) भारत का एक बेहद खास और एलीट सुरक्षा बल है, जिसे देश के सर्वोच्च नेतृत्व की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए गठित किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य प्रधानमंत्री, उनके निकट परिजन, और पूर्व प्रधानमंत्रियों को संभावित खतरों से सुरक्षित रखना है। एसपीजी की स्थापना 1985 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद की गई थी। इसे संसद द्वारा 1988 में पारित एसपीजी अधिनियम के तहत कानूनी मान्यता दी गई। इस अधिनियम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि प्रधानमंत्री और उनके परिवार को किसी भी आतंकी, विदेशी या अन्य खतरों से अत्यंत सुरक्षित वातावरण प्रदान किया जाए। एसपीजी के जवान भारतीय पुलिस सेवा (IPS), सशस्त्र बलों, और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) से चुने जाते हैं। चयनित कर्मियों को कठोर ट्रेनिंग और हाई फिजिकल एवं मानसिक फिटनेस के मानदंडों को पूरा करना होता है। एसपीजी कर्मियों को हथियार संचालन, मार्शल आर्ट्स, भीड़ नियंत्रण, ड्राइविंग, और खुफिया जानकारी जुटाने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है। एसपीजी अत्याधुनिक हथियारों और संचार तकनीकों से लैस होता है। इसके अलावा, यह टीम बुलेटप्रूफ गाड़ियां, जैमर, और अन्य आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल करती है। एसपीजी की कार्यप्रणाली अत्यंत गोपनीय होती है। इसके अभियान और रणनीतियां सार्वजनिक नहीं की जातीं। 2019 में, केंद्र सरकार ने एसपीजी अधिनियम में संशोधन किया, जिसके तहत एसपीजी सुरक्षा अब केवल मौजूदा प्रधानमंत्री और उनके परिवार तक सीमित कर दी गई। पूर्व प्रधानमंत्रियों और उनके परिवार को यह सुरक्षा केवल पांच साल तक दी जाती है, वह भी विशेष परिस्थितियों में। सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं तस्वीर वायरल होने के बाद लोगों ने इसे लेकर अपनी राय व्यक्त की। कुछ ने इसे “नारी शक्ति” का उदाहरण बताया, तो कुछ ने महिलाओं की भागीदारी को देश के सुरक्षा तंत्र की प्रगतिशीलता का प्रतीक कहा। एसपीजी, जो प्रधानमंत्री और उनके परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करती है, देश के सबसे प्रतिष्ठित सुरक्षा दस्तों में से एक मानी जाती है। महिला कमांडो का इसमें योगदान भारत के सुरक्षा तंत्र में महिलाओं की भूमिका को और सशक्त करता है।

एयरलाइन फ्लाइट को शाम 5:20 बजे दिल्ली से इंदौर लाने और 5:50 बजे बेंगलुरु भेजने की तैयारी

भोपाल इंदौर एयरपोर्ट से बेंगलुरु जाने वाली एयर इंडिया एक्सप्रेस फ्लाइट के समय में बदलाव किया जाएगा। दरअसल, यह फ्लाइट शुरू होने के बाद से लगातार अपने शेड्यूल से देरी से उड़ान भर रही है। फ्लाइट के रोजाना लेट होने से यात्री परेशान हो रहे हैं। इस समस्या को देखते हुए एयरलाइन ने समय बदलने का निर्णय लिया है। एयरपोर्ट प्रबंधन से मिली जानकारी के अनुसार अब इस फ्लाइट का संचालन दोपहर के बजाय शाम को किया जाएगा। ट्रेवल एजेंट्स के मुताबिक, इंदौर से शारजाह के बीच अंतरराष्ट्रीय उड़ान का संचालन करने वाली एयर इंडिया एक्सप्रेस ने 28 अक्टूबर से इंदौर से दो नई घरेलू उड़ानें शुरू की थीं। इनमें से एक, IX2513, दोपहर 3:20 बजे दिल्ली से इंदौर आकर 3:50 बजे बेंगलुरु जाती है। लेकिन यह फ्लाइट शुरुआत से ही 2-3 घंटे की देरी से उड़ान भर रही है। गुरुवार को यह फ्लाइट 6:05 बजे रवाना हुई, जबकि मंगलवार और बुधवार को भी 1 से 1.5 घंटे की देरी हुई। एयरपोर्ट सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार एयरलाइन ने इस फ्लाइट को शाम 5:20 बजे दिल्ली से इंदौर लाने और 5:50 बजे बेंगलुरु भेजने की तैयारी की है। हालांकि, यह बदलाव कब से लागू होगा, इसकी अभी जानकारी नहीं है। समर शेड्यूल में बदल पाएगा फ्लाइट का समय एयरपोर्ट अधिकारियों कहना है कि विंटर शेड्यूल में इस फ्लाइट का समय बदलना मुश्किल है। यह बदलाव समर शेड्यूल में ही संभव हो पाएगा। बता दें इस फ्लाइट की देरी से सबसे अधिक परेशानी उन यात्रियों को हो रही है, जिनकी बेंगलुरु से आगे कनेक्टिंग फ्लाइट्स हैं। गुरुवार को 5 फ्लाइट्स लेट हुईं     गुरुवार को इंदौर एयरपोर्ट से 5 फ्लाइट्स देरी से रवाना हुईं। इनमें खराब मौसम को कारण बताया गया।     एयर इंडिया एक्सप्रेस (IX2511): दिल्ली के लिए 7:50 बजे की फ्लाइट 8:52 पर रवाना हुई।     इंडिगो (6E7154): नाशिक के लिए 1:10 बजे की फ्लाइट 2:04 पर रवाना हुई।     एयर इंडिया एक्सप्रेस (IX2513): बेंगलुरु के लिए 2 घंटे की देरी से रवाना हुई।     इंडिगो (6E7109): जयपुर के लिए 4:10 बजे की फ्लाइट 5:42 पर रवाना हुई।     एयर इंडिया (AI2912): दिल्ली के लिए 8:50 बजे की फ्लाइट 10:00 बजे रवाना हुई।  

अक्टूबर में हुए एक सर्वे में 103 सीटों को कवर किया गया, उसमें एमवीए केवल 44 सीटों पर आगे चल रही थी

मुंबई महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनावों में मिली हार के बाद कांग्रेस नेतृत्व द्वारा ईवीएम पर सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, पार्टी में ही इसको लेकर मतभेद की स्थिति है। महाराष्ट्र की हार इसलिए भी करारी थी क्योंकि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस, शरद पवार की एनसीपी और उद्धव ठाकरे की शिवसेना ने शानदार प्रदर्शन किया था। चुनाव से पहले कांग्रेस के द्वारा कराए गए गए आंतरिक सर्वे में ही हार के संकेत मिल गए थे। रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर में हुए एक सर्वे में 103 सीटों को कवर किया गया था। उसमें एमवीए केवल 44 सीटों पर आगे चल रही थी। वहीं, लोकसभा चुनावों में यह आंकड़ा 54 था। महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की ‘लड़की बहिन योजना’ ने चुनाव परिणामों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कांग्रेस के एक आंतरिक सर्वेक्षण के अनुसार, 88% लोगों को इस योजना के बारे में जानकारी थी। 17% ने स्वीकार किया कि इस योजना के कारण उनके मतदान की प्राथमिकता बदल गई। एमवीए की रणनीति में इस योजना का प्रभाव समझने में देरी हुई। कांग्रेस के एक नेता ने कहा कि एक बैठक में रणनीतिकारों ने एमवीए को महिलाओं को 3000 रुपये की मासिक सहायता देने का सुझाव दिया था। लेकिन महायुति ने पहले ही योजना के तहत 2100 मासिक सहायता की घोषणा कर दी थी, जिससे उन्हें महिलाओं के बीच व्यापक समर्थन मिला। हार के बाद ईवीएम पर सवाल हार के बाद कांग्रेस नेतृत्व ने ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने का निर्णय लिया। हालांकि पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि यह रणनीति महाराष्ट्र और केंद्रीय नेतृत्व का चेहरा बचाने की एक कोशिश है। आपक बता दे कि कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) शुक्रवार को विधानसभा चुनाव परिणामों की समीक्षा करेगी। संभावना है कि समिति ईवीएम के खिलाफ अभियान तेज करने और मतपत्र (पेपर बैलट) की वापसी की मांग करने का प्रस्ताव पारित कर सकती है।

मुख्यमंत्री ने जनजातीय अस्मिता, अस्तित्व और विकास विषय पर आयोजित संगोष्ठी को किया संबोधित

रायपुर मुख्यमंत्री ने जनजातीय अस्मिता, अस्तित्व और विकास विषय पर आयोजित संगोष्ठी को किया संबोधित जनजातीय समाज का इतिहास धरती पर मनुष्य के पहले पदचाप के साथ जुड़ा हुआ है। जनजातीय संस्कृति ने भगवान श्रीराम को अपने हृदय में बसा रखा है। भगवान राम ने छत्तीसगढ़ में ही वनवास बिताया, यहीं पर उन्होंने माता शबरी के जूठे बेर खाए। जनजातीय अस्मिता का प्रश्न भारत की सनातन परंपरा की अस्मिता से जुड़ा हुआ प्रश्न है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में जनजातीय अस्मिता, अस्तित्व और विकास विषय पर आयोजित एक दिवसीय संगोष्ठी को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि यह हमारे लिए गर्व की बात है कि आज हमें जनजातीय समुदायों की अस्मिता और विरासत के प्रति संवेदनशील यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी का नेतृत्व मिला है। आज जनजातीय समुदाय की हमारी बहन श्रीमती द्रौपदी मुर्मु भारत के सर्वाेच्च पद पर आसीन हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जनजाति समाज सांस्कृतिक रूप से समृद्ध समाज है। यह समाज कुप्रथाओं का मुखर विरोध करता है। भारत की संस्कृति और देश की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए जनजातीय जननायकों के योगदान को याद करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर पूरे देश में 13 से 15 नवम्बर तक जनजातीय गौरव दिवस मनाया गया। मुख्यमंत्री ने जनजातीय समाज की परंपराओं, संस्कृति रीति-रिवाज, तीज-त्यौहार और शासन द्वारा जनजातीय उत्थान के लिए शासन द्वारा चलाई जा रही योजनाओं से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि 13 नवंबर को जशपुर जिले में आयोजित पदयात्रा इतनी सफल रही कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसकी खुलकर तारीफ की और ऐसे आयोजनों को जनजातीय समाज के विकास और उत्थान में महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर हुए राष्ट्रीय आयोजन ने अन्य प्रांतों से आए आदिवासी समुदाय को एक दूसरे की संस्कृति को जानने-समझने का सुंदर अवसर दिया। साय ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल जी ने अपने कार्यकाल के दौरान सबसे पहले पृथक जनजातीय कल्याण मंत्रालय बनाया और आदिवासियों के विकास के लिए एक मजबूत नींव रखी। उन्होंने कहा कि हम मैदानी और जनजातीय क्षेत्रों में अवसरों की समानता स्थापित करने के लिए अपनी योजनाएं और नीतियां बना रहे हैं ताकि छत्तीसगढ़ के प्रत्येक समुदाय के पास विकास के समान अवसर हों और जनजातीय समाज अपनी प्राकृतिक और भौगोलिक जटिलताओं पर जीत हासिल करते हुए समग्र भारत के विकास की मुख्य धारा में शामिल हो सकें। जब हम जनजातीय समुदायों की अस्मिता की रक्षा करेंगे, उनकी संस्कृति का संरक्षण और संवर्धन करेंगे, उनके इतिहास और उनके नायकों का गौरवगान करेंगे तो निश्चित रूप से मां भारती का यश बढ़ेगा, उसका गौरव गान होगा। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि भारत के जनजातीय समुदायों के समग्र विकास के लिए मोदी जी पीएम जनमन योजना और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान जैसी योजनाएं चला रहे हैं। ये योजनाएं जनजातीय समुदायों के जीवन में परिवर्तन लाने के लिए क्रांतिकारी योजनाएं साबित हो रही है। इसके अलावा प्रधानमंत्री आवास योजना, प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना जैसी अनेक योजनाओं से जनजातीय समुदायों को बड़ा संबल मिला है। पिछले 11 महीने में छत्तीसगढ़ सरकार ने बस्तर अंचल में शांति स्थापित करने के लिए तेजी से अपने कदम बढ़ाए हैं। नियद नेल्ला नार योजना के माध्यम से शासन की योजनाओं को दूरस्थ अंचलों तक पहुंचाने की अनूठी पहल की गई है। बस्तर अंचल में सुरक्षाबलों के 34 नए कैंप खोले गए हैं और लगभग 96 गांवों में शासकीय योजनाओं का लाभ ग्रामीणों को मिल रहा है। वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि जनजातीय महानायकों के गौरवशाली इतिहास की जानकारी आने वाली पीढ़ी को हो इसलिए ऐसे आयोजन आवश्यक हैं। यह हमारी जिम्मेदारी है कि उनके मूल्यों को अगली पीढ़ी तक ले जाएं। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज ने सदैव प्रकृति के संरक्षण की दिशा में कार्य किया है। संगोष्ठी के मुख्य वक्ता अतुल जोग ने कहा कि बिना स्वार्थ के जनजातीय समाज ने मानव सेवा का काम किया है। इसका सुंदर उदाहरण पद्म पुरस्कारों की घोषणाओं में भी देखने को भी मिला, जिसमें बड़ी संख्या में जनजातीय समुदाय के लोग शामिल रहे हैं। संगोष्ठी को पवन साय और अनुराग जैन ने भी संबोधित किया। उच्च शिक्षा विभाग के सचिव प्रसन्ना आर. ने इस अवसर पर छत्तीसगढ़ शासन द्वारा जनजातीय समुदाय के विद्यार्थियों के लिए चलाई जा रही योजनाओं के बारे में जानकारी दी।

चित्रोत्पला फिल्म सिटी से छत्तीसगढ़ी फिल्मों, नाटकों के साथ पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

छत्तीसगढ़ में 147 करोड़ रूपए की लागत से बनेगी चित्रोत्पला फिल्म सिटी : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय छत्तीसगढ़ी राजभाषा दिवस पर प्रदेशवासियों को बड़ी सौगात चित्रोत्पला फिल्म सिटी से छत्तीसगढ़ी फिल्मों, नाटकों के साथ पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा पद्मविभूतियों की सम्मान राशि प्रतिमाह 5 हजार रूपए से बढ़ाकर 10 हजार रुपए करने की घोषणा रायपुर छत्तीसगढ़ में 147 करोड़ रूपए की लागत से  चित्रोत्पला फिल्म सिटी बनेगी। इसके लिए भारत सरकार ने 147 करोड़ रूपए की स्वीकृति दी है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज छत्तीसगढ़ी राजभाषा दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ी भाषा में दिए गए अपने सम्बोधन में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के प्रस्ताव पर केन्द्र सरकार द्वारा फिल्म सिटी के निर्माण की स्वीकृति प्रदान करते हुए राशि की स्वीकृति दी गई है। उन्होंने कहा कि चित्रोत्पला फिल्म सिटी के निर्माण से छत्तीसगढ़ी फिल्मों, छत्तीसगढ़ी नाटकों को प्रोत्साहन तो मिलेगा ही, साथ ही पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।     मुख्यमंत्री साय ने कार्यक्रम में पद्मसम्मान से विभूषित छत्तीसगढ़ की विभूतियों को दी जाने वाली सम्मान राशि प्रतिमाह 5 हजार रूपए से बढ़ाकर 10 हजार रूपए करने की घोषणा की।     मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार छत्तीसगढ़ी भाषा के विकास के लिए लगातार काम कर रही है। छत्तीसगढ़ी गुरतुर भाषा है, जो हमें आपस में दिल से जोड़ती है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ी फिल्में काफी लोकप्रिय हैं। छत्तीसगढ़ी भाषा को बढ़ावा देने में छत्तीसगढ़ी फिल्मों का भी बड़ा योगदान है।     मुख्यमंत्री ने साहित्य परिषद में छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के विलय की समाप्ति की घोषणा करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग राजभाषा छत्तीसगढ़ी को बढ़ावा देने का कार्य करता रहेगा। उल्लेखनीय है कि पूर्व में छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग का साहित्य परिषद में विलय कर दिया गया था।     मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ी भाषा को समृद्ध करने वाले छह साहित्यकारों को शॉल-श्रीफल और स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया। उन्होंने छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग द्वारा प्रकाशित छत्तीसगढ़ी भाषा में लिखित 12 पुस्तकों का विमोचन भी किया।     कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ी भाषा को लोकप्रिय बनाने और राजभाषा का सम्मान देने के लिए यह जरूरी है कि हम छत्तीसगढ़ी भाषा में बातचीत करें और नई पीढ़ी को भी छत्तीसगढ़ी बोलना सिखाए। उन्होंने साहित्यकारों से छत्तीसगढ़ी भाषा में उपन्यास, कविता और इतिहास का लेखन करने का आव्हान किया। उन्होंने कहा कि विधानसभा में सदस्य छत्तीसगढ़ी में अपना सम्बोधन दे सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सांसद के रूप में वे छत्तीसगढ़ी को संविधान की आठवें अनुसूची में शामिल कराने का प्रयास करेंगे।     कार्यक्रम में पद्डॉ. सुरेन्द्र दुबे और डॉ. रमेन्द्रनाथ मिश्र विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित थे। कार्यक्रम में संस्कृति विभाग के सचिव अन्बलगन पी., संचालक संस्कृति एवं राजभाषा विवेक आचार्य ने छत्तीसगढ़ी राजभाषा में सम्बोधन दिया। राजभाषा आयोग की सचिव डॉ. अभिलाषा बेहार ने बताया कि आयोग द्वारा छत्तीसगढ़ी में 2700 से अधिक अधिकारियों-कर्मचारियों को प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। आयोग द्वारा अब तक छत्तीसगढ़ी भाषा की 1400 पुस्तकों का प्रकाशन किया जा चुका है।

“छत्तीसगढ़ी भाखा के मान अऊ सम्मान के दिशा म एक नवा पहल”

छत्तीसगढ़ राजभाषा दिवस पर विशेष लेखः  “छत्तीसगढ़ी भाखा के मान अऊ सम्मान के दिशा म एक नवा पहल”  “छत्तीसगढ़ी भाखा ल संजोय म मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के महत्वपूर्ण योगदान” महेन्द्र सिंह मरपच्ची मनेन्द्रगढ़/एमसीबी जय जोहार जय छत्तीसगढ़ ! आप सब मन भलीभाती जानथव कि छत्तीसगढ़ी अपन समृद्ध भाखा, संस्कृति अउ परंपरा खातिर पूरा देश म अपन अलग पहिचान बना लिहिस हे। इहा के माटी, तिहार, लोककला अउ संस्कृति जीवन जिये के तरीका म एक अलग ही मिठास झलकथे। हमर छत्तीसगढ़ के आत्मा हर जम्मों छत्तीसगढ़ियां मन के बोली अउर भाखा में बसे हे। इ भाखा म केवल बात करे के साधन नइ हे, बल्के हमर छत्तीसगढ़ियां भाई बहिनि के परंपरा, रीति-रिवाज अउ हमर संस्कृति के अमूल्य धरोहर हर झलकत हे। छत्तीसगढ़ी भाखा के सम्मान अउ प्रचार-प्रसार के खातिर हमर तत्कालिन सरकार हर 28 नवंबर के दिन ल “छत्तीसगढ़ राजभाषा दिवस” बनाये के घोषणा करे रहिस। एही दिन हमर भाखा के महत्त्व ल पहिचान करे बर, अउ ओला संजोय बर, अउ नई पीढ़ी ला छत्तीसगढ़ के जम्मों इतिहास से जोड़य के अवसर आय हे। छत्तीसगढ़ राजभाषा दिवस के शुरुआत हर 28 नवंबर 2007 के होइस, जब छत्तीसगढ़ी भाषा ल आधिकारिक रूप म राज्य के राजभाषा के दर्जा मिलिस। ये ऐतिहासिक फैसला ल डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व म पूर्ववर्ती सरकार हर अपनाये रहिस ये निर्णय हर केवल भाषा के प्रचार-प्रसार के माध्यम नइ बने रहिस, बल्कि ये छत्तीसगढ़वासियन के खातिर एक गौरव के विषय बन गईस। एकर बाद छत्तीसगढ़ी भाखा ल सरकारी दफ्तर, स्कूल अउ कॉलेज म भी बढ़ाये के काम ल शुरू करे गइस । छत्तीसगढ़ी भाखा के इतिहास, भाषा, संस्कृति अउ प्राकृत भाषा ले उभरिस हे। छत्तीसगढ़ी म लोकगीत, कहानी, कहावत अउ जनवला जइसन साहित्यिक धरोहर समेटे हावे। ये भाखा हर हमर लोकजीवन, परंपरा अउ रीति-रिवाज के सच्चा प्रतिबिंब आय। छत्तीसगढ़ी लोकगीत अउ कथा ये छत्तीसगढ़ी भाखा ल अउ जियादा सुघ्घर अउ जीवंत बनावत हे। छत्तीसगढ़ राजभाषा दिवस केवल तिहार नइ, बल्कि हमर भाखा अउ संस्कृति के जीवित रखे अउ ओकर नई ऊँचाई म पहुंचाय के संकल्प के प्रतीक आय। ये दिन पूरा छत्तीसगढ़ म अलग-अलग सांस्कृतिक अउ शैक्षणिक कार्यक्रम होथे। संगोष्ठी, निबंध लेखन, कविता पाठ, लोकगीत अउ नाटक के आयोजन घलो होथे। ये कार्यक्रम मन केवल भाषा अउ संस्कृति के प्रति जागरूकता नइ फैलाथे, बल्कि लोगन ल अपन जड़ से भी जोड़थे। आज के समय म छत्तीसगढ़ी भाखा अउ संस्कृति ल नई दिशा देहे में हमर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के बहुत बडे  योगदान हे। ओकर मानना हे कि छत्तीसगढ़ी भाखा केवल संवाद के माध्यम नइ हे, बल्कि हमर छत्तीसगढ़ के आत्मा अउ पहचान आय। हमर मुख्यमंत्री के दूरदर्शी सोच अउ नीति के कारण छत्तीसगढ़ी भाषा अउ संस्कृति के संरक्षण अउ विकास के खातिर नवा जोश आइस हे। शिक्षा म छत्तीसगढ़ी भाखा ल बढ़ावा देय बर स्कूल अउ कॉलेज के पाठ्यक्रम म छत्तीसगढ़ी साहित्य अउ संस्कृति ल सामिल करे गय हे। सरकारी दफ्तर म छत्तीसगढ़ी भाखा के उपयोग ल बढ़ाय खातिर भी जरूरी नीति लागू करे गय हे, ऐकर ले हमर राजभाषा हर छत्तीसगढ़ी म अउ मजबूत बने हे। हमर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व म छत्तीसगढ़ी साहित्य, लोकगीत अउ नाट्यकला के संरक्षण अउ विकास के खातिर विशेष योजना बनाये जाथ हे। हमर लोक कलाकार अउ साहित्यकार मन ल प्रोत्साहित देहे के खातिर कई ठन आर्थिक सहायता कार्यक्रम ल चलावत हे। छत्तीसगढ़ी साहित्य अकादमी के स्थापना, साहित्यिक मेला अउ डिजिटल प्लेटफॉर्म में छत्तीसगढ़ी भाखा के प्रोत्साहन, ल आगे बढ़ाये के प्रयास करत हे। राजभाषा दिवस के कार्यक्रम मन लोगन ल अपन भाषा अउ संस्कृति के महत्त्व ल समझावत हे। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय मानथें कि हमर भाषा अउ संस्कृति हमर राज्य के एकता अउ पहचान ल मजबूत करथे। छत्तीसगढ़ राजभाषा दिवस हर हम सबला ये बात के याद दिलाथे कि भाषा अउ संस्कृति कोनो भी समाज के आत्मा होथे। जऊन समाज अपन भाखा अउ संस्कृति ल जिंदा रखथे, वही समाज हर अपन पहचान ल बनाय राखथे। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व म छत्तीसगढ़ी भाखा अउ संस्कृति ल नई ऊँचाई मे पहुंचाय के प्रयास हे छत्तीसगढ़िया बर गौरव के बात आय कि आज ये अवसर म हम सबला ये संकल्प लेना चाही कि अपन भाखा अउ संस्कृति ल केवल संरक्षित करबो, बल्कि हमर बोली भाखा ल अगली पीढ़ी तक पहुंचाय के जिम्मेदारी ला भी निभाबो। छत्तीसगढ़ी भाखा हमर राज्य के आत्मा अउ सांस्कृतिक गौरव के प्रतीक आय। ऐला सहेजे अउ सम्मान करे बर हमर हर छत्तीसगढ़ियां के जिम्मेदारी हर आय। हम सब मिलके अपन-अपन प्रयास से अपन  धरोहर ल अउ मजबूत बनाय बर काम करबो।

रायपुर में भाजपा ने निकाय चुनाव की तैयारियां तेज की, जातीय संतुलन पर दिया जोर

रायपुर रायपुर दक्षिण विधानसभा उपचुनाव में शानदार जीत दर्ज करने के बाद भाजपा ने अपनी पूरी ताकत अब निकाय और पंचायत चुनावों में झोंकने की तैयारी कर ली है। प्रदेश भाजपा संगठन में चुनाव प्रक्रिया शुरू होने वाली है, जिसके तहत पहले चरण में बूथ कमेटियों का गठन किया जाएगा। इसके बाद मंडल और जिला अध्यक्षों का चुनाव होगा, जिसमें जातीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए रणनीति बनाई जाएगी। 405 मंडलों में होंगे चुनाव, नाराज कार्यकर्ताओं को मनाने की कवायद एक से 15 दिसंबर के बीच प्रदेश के 405 मंडलों में मंडल अध्यक्षों का चुनाव होगा, जबकि 15 से 30 दिसंबर के बीच जिला अध्यक्षों का चयन किया जाएगा। संगठन से जुड़े वरिष्ठ नेताओं ने बताया कि इस प्रक्रिया में न केवल अध्यक्ष बल्कि प्रतिनिधियों का भी चुनाव किया जाएगा। खासतौर पर नाराज कार्यकर्ताओं को फिर से पार्टी के साथ जोड़ने और उनकी समस्याओं का समाधान करने पर जोर दिया जाएगा। जातीय समीकरणों पर फोकस रहेगा ताकि विभिन्न समुदायों के बीच संतुलन कायम किया जा सके और निकाय चुनावों में किसी भी प्रकार की असंतोष की स्थिति से बचा जा सके। भाजपा की रणनीति स्पष्ट है: निकाय और पंचायत चुनावों में भी जीत का परचम लहराना है। सदस्यता अभियान में रिकॉर्ड वृद्धि भाजपा ने अपने हालिया सदस्यता अभियान में 53 लाख नए सदस्य जोड़ने का दावा किया है। अब 30 नवंबर तक बूथ कमेटियों का चुनाव पूरा करने की तैयारी है। पार्टी नेताओं ने वरिष्ठ नेताओं से मुलाकातें तेज कर दी हैं, ताकि चुनावी तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा सके। कांग्रेस भी बदलाव की तैयारी में रायपुर दक्षिण उपचुनाव में हार के बाद कांग्रेस में भी हलचल तेज हो गई है। पार्टी अब समीक्षा से आगे बढ़कर बड़े बदलावों की तैयारी कर रही है। दिल्ली से आने वाली सूची का इंतजार है, जिसमें संगठनात्मक फेरबदल के संकेत मिल रहे हैं। उपचुनाव में हार ने कांग्रेस को मजबूर कर दिया है कि वह जमीनी स्तर पर रणनीति को नए सिरे से तैयार करे। भाजपा-कांग्रेस में सीधा मुकाबला निकाय और पंचायत चुनावों में दोनों दलों के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिलेगा। जहां भाजपा जीत के लिए जातीय संतुलन और संगठनात्मक मजबूती पर फोकस कर रही है, वहीं कांग्रेस अपनी हार से सबक लेकर रणनीति में बदलाव लाने की कोशिश कर रही है। आने वाले चुनावी नतीजे यह तय करेंगे कि जनता का भरोसा किस दल पर कायम रहता है।

ग्राम पंचायत का आरोप है कि इस भूमि पर उनका अधिकार है और वक्फ बोर्ड का दावा गलत, सुप्रीम कोर्ट में करेगी अपील

जालंधर पंजाब के कपूरथला जिले के बुधो पुंदेर गांव की वक्फ बोर्ड जमीन मामले में ग्राम पंचायत ने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने का निर्णय लिया है। ग्राम पंचायत का आरोप है कि इस भूमि पर उनका अधिकार है और वक्फ बोर्ड का दावा गलत है। अब ग्राम पंचायत इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी कर रही है। इस मामले ने उस समय तूल पकड़ा जब उच्च न्यायालय ने वक्फ बोर्ड के दावे को सही ठहराया, जिसमें कहा गया था कि यह भूमि मस्जिद, कब्रिस्तान और टाकिया (मुसलमानों के सामान्य उपयोग के लिए भूमि) के लिए दान की गई थी, और बाद में 1971 में वक्फ बोर्ड को सौंप दी गई थी। न्यायालय ने इस भूमि को वक्फ संपत्ति के रूप में वर्गीकृत किया और ग्राम पंचायत की दलीलों को खारिज कर दिया। ग्राम पंचायत के सदस्य रेशम सिंह ने कहा कि इस भूमि पर पिछले 40-50 सालों से गांव के लोग खेती कर रहे हैं और उन्होंने इस भूमि पर कब्जा नहीं किया है, बल्कि इसे जमींदारों ने वक्फ बोर्ड से छुड़वाया था। रेशम सिंह ने यह भी कहा कि वक्फ बोर्ड की संपत्ति और मस्जिद मुसलमानों की है, लेकिन भूमि पर जो कब्जा है, वह जमींदारों ने जानबूझकर किया हुआ है। इस पर उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत अब इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अपील करेगी। ग्राम पंचायत के सरपंच कुलवंत सिंह ने भी इस फैसले पर असहमति जताई है। उन्होंने कहा कि गांव में स्थित मस्जिद और गुरुद्वारा दोनों ही खुले हैं, लेकिन मस्जिद में आज तक कोई व्यक्ति नहीं आया है। वहीं, गुरुद्वारे में संगत दर्शन के लिए आती है। सरपंच ने बताया कि यह भूमि करीब 16 से 17 एकड़ में फैली हुई है, और इस पर पिछले 15-20 सालों से मुकदमा चल रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि यह जमीन नगर पंचायत की है और उसी की रहेगी। सरपंच ने बताया कि मस्जिद 1947 से पहले बनी हुई थी, जबकि गुरुद्वारा मस्जिद की जगह पर नहीं, बल्कि उससे अलग एक एकड़ में बनाया गया है। इस मामले में न्यायमूर्ति सुरेश्वर ठाकुर और न्यायमूर्ति सुदीप्ति शर्मा की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई की। ग्राम पंचायत ने वक्फ अधिनियम, 1995 के तहत गठित न्यायाधिकरण के फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें वक्फ बोर्ड के पक्ष में फैसला सुनाया गया था। पंचायत ने तर्क दिया था कि पंजाब अधिनियम, 1953 के तहत इस संपत्ति पर उनका अधिकार बनता है, जो वक्फ अधिनियम, 1995 से प्राथमिकता रखता है। हालांकि, न्यायालय ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और माना कि यह मामला भूमि के वर्गीकरण का है, न कि विभिन्न कानूनों की प्राथमिकता का। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि आधिकारिक अभिलेखों में इस भूमि को वक्फ संपत्ति के रूप में वर्गीकृत किया गया है, और इसे मस्जिद, कब्रिस्तान और टाकिया के रूप में पहचान दी गई है। खंडपीठ ने वक्फ अधिनियम के तहत इस भूमि के स्वामित्व का निर्धारण किया और कहा कि यह भूमि धार्मिक उद्देश्यों के लिए है, न कि निजी इस्तेमाल के लिए। न्यायालय ने यह भी कहा कि पंजाब अधिनियम, 1953 की संवैधानिक सुरक्षा, वक्फ अधिनियम के प्रावधानों पर प्रभाव नहीं डालती है।  

स्वास्थ्य विभाग और दमकल विभाग ने जिला अस्पताल का निरीक्षण किया, फायर एनओसी नहीं, सिलेंडर के भरोसे चल रहा अस्पताल

इटावा उत्तर प्रदेश के झांसी जिले के महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में एक दर्जन नवजात बच्चों की मौत के बाद प्रदेश का स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर है। सभी जिलों में फायर डिपार्टमेंट को स्वास्थ्य विभाग से जुड़े सरकारी और गैर सरकारी संस्थान में निरीक्षण व जांच करने के भी निर्देश मिले हैं। इटावा के डॉक्टर भीमराव अंबेडकर संयुक्त जिला चिकित्सालय में अग्निशमन के नाम पर महज फायर एक्सटिंगविशर (सिलेंडर) के सहारे सारी व्यवस्था चल रही है। इस घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग और दमकल विभाग ने जिला अस्पताल का निरीक्षण भी किया था। जिला अस्पताल में फायर संबंधित उपकरण लगाने के लिए पहले ही शासन से तीन करोड़ के बजट की स्वीकृति मिल चुकी है। इसमें करीब सवा करोड़ की राशि स्वीकृत भी हो गई है। लेकिन कार्यदायी संस्था इसका काम कब शुरू करेगी, इसको लेकर फिलहाल कोई जानकारी नहीं है। करीब 29 वर्षों से संचालित डॉक्टर भीमराव अंबेडकर संयुक्त जिला चिकित्सालय के पास फायर एनओसी नहीं हैं, जबकि यहां प्रतिदिन तीन से पांच हजार मरीजों का आना जाना रहता है। झांसी में हुए अस्पताल में हादसे के बावजूद जिला अस्पताल में मानक के तहत अग्निशमन यंत्र नहीं लगे हैं। आग से सुरक्षित रहने के लिए जिला चिकित्सालय सिर्फ फायर एक्सटिंगविशर (सिलेंडर) पर ही निर्भर है। जिला अस्पताल में मानक के तहत अग्निशमन यंत्र लगाने और फायर एनओसी लेने के लिए शासन से करीब तीन करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत हुआ है। इसमें से 124 लाख रुपये कार्यदायी संस्था को स्थानांतरित भी कर दिए गए हैं। लेकिन कार्यदायी साथ यूपीसीएल ने अब तक कोई कार्य शुरू नहीं किया है। जिला अस्पताल में वाटर टैंक, हाइड्रेंट प्वाइंट, ऑटोमेटिक मशीन, अलार्म सिस्टम, स्मोक सिस्टम आदि मशीन लगवाई जानी है। संयुक्त जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एमएम आर्या ने बताया कि अस्पताल में फायर सिस्टम के लिए शासन ने यूपीसीएल को कार्य दिया है। इस कार्य के लिए करीब तीन करोड़ का बजट स्वीकृत हुआ है। सीएमएस ने बताया कि झांसी की घटना से एक सप्ताह पहले ही शासन ने कार्यदायी संस्था को 124 लाख का बजट स्थानांतरित कर दिया है। अग्निशमन यंत्र लगाए जाने के लिए कार्यदाई संस्था को पत्र भी लिखा जा चुका हैं। फिलहाल हमारे अस्पताल में जितने फायर एक्सटिंगविशर (सिलेंडर) होना चाहिए, उससे अधिक मात्रा में लगे हुए है। उन्होंने बताया एसएनसीयू वार्ड के अलावा जिला अस्पताल में संवेदनशील वार्ड और जरूरत वाले स्थानों पर 15 नए अग्निशामन यंत्रों को लगाया गया है। आने वाले समय में इन अग्निशामक यंत्रों को और लगवाया जाएगा।  

देश में भाजपा के नेतृत्व में एनडीए की जीत से तेजी से बढ़ेंगे आर्थिक सुधार!

मुंबई हाल के विधानसभा चुनावों में जीत से भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए की स्थिति और मजबूत हुई है। इससे स्थिरता के साथ देश में आर्थिक सुधारों में तेजी आएगी। यह जानकारी गुरुवार को जारी हुई एक रिपोर्ट में दी गई। पीएल कैपिटल – प्रभुदास लीलाधर की रिपोर्ट में कहा गया है कि महाराष्ट्र, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और बिहार में हाल के विधानसभा चुनावों और उपचुनावों के नतीजों ने सत्तारूढ़ एनडीए की स्थिति को मजबूत किया है। इससे देश में सभी क्षेत्रों में प्रमुख सुधारों की दिशा में नीतिगत निरंतरता में मदद मिलेगी। महाराष्ट्र में भाजपा के नेतृत्व वाली महायुति की भारी जीत के साथ 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य तक पहुंचने की राज्य की महत्वाकांक्षा को एक बड़ा बल मिला है। इस साल अगस्त में 500 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था का आंकड़ा पार करने वाला महाराष्ट्र का पहला राज्य था, जो दिखाता है कि राज्य तेजी से आर्थिक प्रगति कर रहा है और एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की तरफ तेजी से बढ़ रहा है। वित्त मंत्रालय की मासिक आर्थिक समीक्षा में बताया गया कि भारत में आने वाले समय में खाद्य महंगाई दर में गिरावट आएगी। इसके साथ ही अच्छे मानसून, न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ने और इनपुट की पर्याप्त आपूर्ति का फायदा कृषि क्षेत्र को मिल सकता है। मांग की परिस्थितियां मिश्रित बनी हुई हैं। हालांकि, कम बेस और अच्छे मानसून के कारण ग्रामीण मांग में उछाल देखने को मिल रहा है। अब सारी उम्मीदें त्योहारी और शादियों के सीजन में होने वाली मांग में बढ़ोतरी पर टिकी हुई हैं। रिपोर्ट में आगे कहा गया कि डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में वैश्विक स्तर पर युद्धों में कमी आने की उम्मीद है। कच्चे तेल की कीमत स्थिर रहेंगी और यह भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए शुभ संकेत हैं। आगे कहा गया कि सरकार का पूंजीगत खर्च आने वाले समय में बढ़ने की उम्मीद है, क्योंकि दूसरी तिमाही में पूंजीगत खर्च सकारात्मक रहा था।

प्रयागराज में 5000 थाली और 5000 थैले भेजेगा संघ, महाकुंभ में कम से कम कचरा इक्कठा हो

 खंडवा महाकुंभ प्रयागराज में 2025 में खंडवा से 5000 थाली और 5 हजार थैले जाएगी. संघ द्वारा चलाए जा रहे है. एकत्रीकरण एक थाली और थैला अभियान पर्यावरण संरक्षण को देखते हुए. यह कदम उठाए जा रहा है. जिसके लिए खंडवा वासी आगे आ रहे. विमल खंडेलवाल ने बताया कि एक थाली एक थैला की शुरुवात 8 तारीख से शुरू की गई थी. इसके तहत प्रति व्यक्ति से एक थाली और थैला संग्रहित करने का अनुरोध कर रहे हैं. 13 जनवरी 2025 को दुनिया के सबसे बड़े मेले यानी प्रयागराज महाकुंभ की शुरुआत हो जाएगी. 5 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का बजट है. 40 करोड़ से ज्यादा लोगों के आने का अनुमान है. ऐसे में वहां 40 टन कचरा इकठ्ठा होने का अनुमान है. इसी को देखते हुए अभियान की शुरुआत की गई है. इस अभियान में धार्मिक संस्था समाजिक संस्था स्वयंसेवी संस्था से अनुरोध किया गया है. वह इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लें. 40 करोड़ से ज्यादा लोगों के आने का अनुमान इसी को दृष्टिगत रखते हुए. हम प्रयागराज में 5000 थाली और 5000 थैले भेजने वाले है. वहां कम से कम कचरा इक्कठा हो. 13 जनवरी 2025 को दुनिया के सबसे बड़े मेले यानी प्रयागराज महाकुंभ की शुरुआत हो जाएगी. 5 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का बजट है. 40 करोड़ से ज्यादा लोगों के आने का अनुमान है. 10 से ज्यादा देशों के राष्ट्राध्यक्ष आएंगे। देश के राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री से लेकर हर मंत्री इस महाकुंभ में शामिल होंगे. यहां 13 अखाड़ों के प्रमुख धर्मगुरु दो महीने तक मौजूद रहेंगे. दुनियाभर की मीडिया की इस पर नजर होगी. देशभर में हर जिले को राष्ट्रीय स्वयंसेवक सघ ने कहा है कि इसे हरित कुंभ बनाना है. इसलिए यह गतिविधि पर्यावरण संरक्षण गतिविधि चलाई जा रही है. हमारा यह प्रयास है. यह महाकुंभ पर्यावरण अनुकूल बने.

मध्यप्रदेश में सरकार ने Public Safety Act लागू करने की तैयारी, संचालकों को सीसीटीवी कैमरों की रिकार्डिंग दो माह तक सुरक्षित रखना अनिवार्य होगा.

भोपाल मध्यप्रदेश में सरकार ने लोक सुरक्षा कानून (Public Safety Act) लागू करने की तैयारी कर ली है. इस कानून के तहत रैली-जुलूस, धार्मिक कार्यक्रमों में अब सीसीटीवी (CCTV) जरूरी होगा, यही नहीं दो महीने तक सभी वीडियो फुटेज (CCTV Footage) संभाल कर रखना होगा. सीसीटीवी लगाने का खर्च संबंधित प्रतिष्ठान या कार्यक्रम के आयोजकों को उठाना पड़ेगा. जो लोग ऐसा नहीं करेंगे, उन्हें जुर्माना भरना पड़ेगा. गृह विभाग (Home Department) ने लोक सुरक्षा कानून का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है. ड्राफ्ट के मुताबिक, शादी चाहे मैरिज गार्डन में हो या निजी स्थान पर, इसकी भी वीडियो रिकॉर्डिंग जरूरी होगी. किसी जगह 100 से एक हजार तक या उससे ज्यादा लोग इकट्ठा होते हैं, वहां सीसीटीवी कैमरा लगाना जरूरी होगा. यह जिम्मेदारी आयोजकों की होगी. ऐसा होने से संगठित अपराध पर से पर्दा उठेगा, वहीं पुलिस (Police) जांच में सहूलियत होगी. तीन महीने पहले शुरू हुआ था पायलट प्रोजेक्ट मध्य प्रदेश सरकार ने इंदौर में इस सिस्टम का पायलट प्रोजेक्ट तीन महीने पहले शुरू किया था, जिसे सफल माना जा रहा है. नए कानून के ड्राफ्ट को परीक्षण के लिए लॉ डिपार्टमेंट को भेजा गया है. मध्यप्रदेश में हर दस साल में 20 फीसदी की दर से आबादी बढ़ रही है. बढ़ती आबादी और शहरीकरण के चलते सर्विलांस की जरूरत महसूस की जा रही है. 2012 में हुए निर्भया कांड के बाद देश में महिला सुरक्षा को बढ़ाने के लिए कई उपाय सुझाए गए थे. इनमें से एक सुझाव सार्वजनिक स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाना भी था. एमपी में लोक सुरक्षा कानून बनाने की तैयारी साल 2020 से चल रही है. उस समय गृह विभाग ने ड्राफ्ट भी तैयार कर लिया था, लेकिन तब ये लागू नहीं हो सका. वहीं अब मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने संभागीय समीक्षा के दौरान हाल ही में इस काम में तेजी लाने के निर्देश दिए थे. एमपी सरकार ने लोक सुरक्षा कानून को लागू करने से पहले इंदौर में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर 12 सितंबर 2024 को इसकी शुरुआत की थी. इसे लागू करने के लिए नगर पालिका निगम एक्ट 1956 में बायलॉज जोड़े गए थे. इंदौर में सामुदायिक निगरानी प्रणाली को जनभागीदारी से लागू करवाया गया, इसके तहत शहर में हजारों नए सीसीटीवी लगाए गए हैं.

नर्स को 120 दिन की चाइल्ड केयर लीव देने का आदेश दिया, स्तनपान एक मानव अधिकार है- कर्नाटक उच्च न्यायालय

बेंगलुरु कर्नाटक हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य और तंत्रिका विज्ञान संस्थान (NIMHANS) को अनिता जोसेफ नाम की नर्स को 120 दिन का चाइल्ड केयर लीव (CCL) देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि स्तनपान बच्चों और माताओं के लिए एक मानवाधिकार है। इसे दोनों के लाभ के लिए संरक्षित और प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। कोर्ट के इस फैसले से पहले CAT ने पहले ही NIMHANS को चाइल्ड केयर लीव देने का निर्देश दिया था, जिसके खिलाफ NIMHANS ने हाईकोर्ट में अपील की थी। कोर्ट ने अपने इस फैसले में कार्यरत माताओं और उनके बच्चों के अधिकारों को मान्यता देने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। कोर्ट ने कही ये बात कोर्ट ने कहा कि बच्चों को स्तनपान कराने और उनके साथ पर्याप्त समय बिताने का अधिकार माताओं को है। NIMHANS ने तर्क दिया कि ICU नर्स को छुट्टी देने से आवश्यक सेवाएं बाधित होंगी। न्यायालय ने इस तर्क को खारिज कर दिया और कहा कि एक नर्स की अनुपस्थिति से अत्यधिक कठिनाई कैसे होगी, यह समझ से परे है। ये है मामला जानकारी के अनुसार, अनिता जोसेफ ICU में नर्स हैं। उसने अपने बच्चे की देखभाल के लिए जनवरी 2023 से मई 2023 तक सीसीएल के लिए आवेदन किया था। NIMHANS ने यह कहते हुए उनके अनुरोध को अस्वीकार कर दिया कि ICU नर्स को 120 दिन की छुट्टी देने से आवश्यक सेवाएं बाधित होंगी। जोसेफ ने CAT का दरवाजा खटखटाया, जिसने उनके पक्ष में फैसला सुनाया। CAT ने बच्चे के शुरुआती वर्षों में स्तनपान और देखभाल के महत्व को स्वीकार किया। इस फैसले से असंतुष्ट NIMHANS ने ट्रिब्यूनल के आदेश को रद्द करने के लिए हाईकोर्ट का रुख किया। हाईकोर्ट ने दिया इस बात का हवाला हाईकोर्ट ने बाल अधिकारों पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन, 1989 का हवाला दिया। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि बच्चे का सर्वोत्तम हित प्राथमिक विचार होना चाहिए। समाज का दायित्व है कि वह इस लक्ष्य को आगे बढ़ाने के लिए स्तनपान को बढ़ावा दे। कोर्ट ने कहा कि NIMHANS, संविधान के अनुच्छेद 12 के तहत राज्य का एक साधन होने के नाते, एक आदर्श नियोक्ता के रूप में कार्य करना चाहिए। मातृत्व और बाल देखभाल अवकाश के दावों पर उचित विचार किया जाना चाहिए। हाईखोर्ट ने टिप्पणी की, कैजुअल लीव एक नियमित बात है, जबकि मातृत्व अवकाश एक गंभीर मामला है। इसी तरह, मेडिकल लीव बीमारी की प्रकृति पर निर्भर करती है। चाइल्ड केयर लीव के महत्व को भी कम नहीं आंका जा सकता।

29 नवंबर शुक्रवार को इन राशियों में दिखेगा लाभ

मेष राशि- रोजाना मेडिटेशन करना आपके लिए अच्छा रहेगा। कुछ लोगों के वेतन या पॉकेट मनी में बढ़ोतरी मिलने के संकेत हैं। ऑफिस में जरूरी टास्क आज के आज ही पूरा कर लें। वृषभ राशि- आप किसी करीबी की शादी या फंक्शन में भी शामिल होने की योजना बना सकते हैं। आज आपको पढ़ाई या जरूरी प्रोजेक्ट को प्राथमिकता देने की सलह दी जाती है। मिथुन राशि-अलगाव के बाद कुछ लोगों की लव लाइफ में अच्छे दिन आने वाले हैं। वजन घटाने के लिए डाइट पर फोकस करें। निवेश का कोई लाभदायक अवसर आपके सामने आ सकता है। कर्क राशि-सोच समझकर और सलह के साथ ही आगे बढ़ें। अपने बजट पर टिके रहें। स्टूडेंट्स आज सकारात्मक मानसिकता में रहेंगे। आपका साथी कोई पुराना मुद्दा उठा सकता है, जिससे जीवन में परेशानी बढ़ सकती है। सिंह राशि-हेल्दी खाने से सेहत पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। पैसों की सिचूऐशन मजबूत रहने वाली है। ऑफिस में थोड़ी उथल-पुथल हो सकती है, लेकिन चीजें आपके पक्ष में काम करेंगी। कन्या राशि-किसी शुभ समाचार से परिवार में खुशियां आएंगी। टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में काम कर रहे लोगों के लिए बेहतरीन अवसर नजर आ रहे हैं। वर्क फ्रॉम होम वालों का दिन भी अच्छा रहने वाला है। तुला राशि- मौसम का लुत्फ उठाने के लिए अप लॉन्ग ड्राइव पर भी जा सकते हैं। आज अपने पार्टनर के साथ कुछ बेहतरीन पल बिताएं। मौज-मस्ती भरी छुट्टियों पर कुछ जातकों का पैसा खर्च हो सकता है। वृश्चिक राशि- पढ़ाई के लिए विदेश जाने का मौका कुछ लोगों को मिल सकता है। जिसे आप पसंद करते हैं, उससे बात करने की आपकी कोशिश आज पूरी हो सकती है। पैसों के मामले में किसी चुनौती को आप अच्छे से संभाल लेंगे। धनु राशि- पैसों की प्रॉब्लम होने पर कोई दोस्त आपकी आर्थिक सहायता कर सकता है। आज आपका काम समय पर पूरा हो जाएगा। मम्मी पापा के लिए कोई खास प्लान बनाने से उनका मूड खुश रहेगा। मकर राशि-आज आपका कोई नया क्रश सामने आ सकता है। किसी शादी या महत्वपूर्ण इवेंट में शामिल होने के लिए विदेश यात्रा का योग बन रहा है। स्टूडेंट्स के लिए अच्छी तैयारी करना आसान हो जाएगा। कुंभ राशि-पुराने निवेश से लाभ मिल सकता है। ऑफिस के दौरान सभी जरूरी रूल्स का पालन करें। हेल्दी रहने के लिए रोजाना एक्सरसाइज करें। आज दिन बच्चों और परिवार के साथ समय बिताने का है। मीन राशि-कुछ लोगों के लिए ट्रिप पर जाने के योग हैं। सही प्रैक्टिस से आप अपने टीचर को खुश कर सकते हैं। अपने आस-पास के लोगों से तारीफ पाना आपके लिए सबसे खुशी की बात रहेगी।

पलूशन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में फिर सुनवाई, ग्रैप-4 की पाबंदियां 2 दिसंबर तक लागू रहेंगी

नई दिल्ली दिल्ली-एनसीआर में पलूशन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को फिर सुनवाई हुई। इस दौरान अदालत ने कहा कि ग्रैप-4 की पाबंदियां 2 दिसंबर तक लागू रहेंगी और उस दिन सुनवाई में फैसला लिया जाएगा, इसे आगे बढ़ाया जाए या फिर नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई जारी रखने की बात कही है और कहा कि यह गंभीर मसला है। इसलिए हम इस पर सुनवाई करते रहेंगे। यही नहीं बेंच ने पंजाब सरकार को भी फटकार लगाई और कहा कि एक मीडिया रिपोर्ट कहती है कि राज्य के अधिकारी किसानों को कह रहे हैं कि वे शाम को 4 बजे के बाद पराली जलाएं। ऐसा करने से वे सैटेलाइट की नजर में नहीं आएंगे। बेंच ने कहा कि ऐसा करना गलत है और अदालत के आदेश की अवमानना है। अदालत ने कहा कि हमें पलूशन से निपटने के लिए कोई स्थायी समाधान ही निकालना होगा। बेंच ने कहा, ‘पंजाब सरकार अपने अधिकारियों को आदेश दे कि वे किसानों को ऐसी सलाह न दें कि 4 बजे के बाद पराली जलाई जा सकती है। ऐसा करना आदेश का उल्लंघन है। अधिकारियों से अपेक्षा की जाती है कि वे आदेश का पालन करें। इसकी बजाय यदि वे पराली जलाने के लिए किसानों को दिमाग दे रहे हैं तो यह गलत बात है।’ कोर्ट ने कहा कि अगली सुनवाई में हम पराली जलाने, ट्रकों की एंट्री और पटाखों पर बैन को लेकर विचार करेंगे। अदालत ने कहा, ‘हमारे पास एक ऐसी मशीनरी होनी चाहिए, जिससे यह डेटा मिल सके कि कौन कब पराली जला रहा है। यह मॉनिटरिंग 24 घंटे की होनी चाहिए। यह एक गंभीर समस्या है और इसी के चलते पलूशन बढ़ता जा रहा है। पंजाब समेत संबंधित राज्य इस पर रोक लगाने में बहुत धीरे ऐक्शन ले रहे हैं।’ अदालत ने एक मीडिया रिपोर्ट का जिक्र किया, जिसमें दावा किया गया था कि अफसर सलाह देते हैं कि 4 बजे के बाद किसान पराली जला सकते हैं। इससे वे सैटेलाइट से भी बच सकेंगे। बेंच ने कहा कि ऐसा करना तो अदालत की ही अवमानना है। सरकार तुरंत इस पर ऐक्शन ले।

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