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प्रशासन ने टिटोड़ी में पांच करोड़ की शासकीय भूमि अतिक्रमण से मुक्त करवाई

उज्जैन मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव के शहर उज्जैन में जिला प्रशासन ने पांच करोड़ रुपये की सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाया. उज्जैन कलेक्टर नीरज कुमार सिंह ने बताया कि यह अभियान आगे भी जारी रहेगा. इस अभियान के तहत जिले में अभी और भी सरकारी जमीन पर अतिक्रमण की शिकायत मिल रही है. कलेक्टर नीरज कुमार सिंह ने कहा कि सरकारी जमीन पर अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही लगातार जारी है. इसी क्रम में बुधवार (3 जुलाई) को तहसील तराना के ग्राम टिटोडी में तहसीलदार तराना रामलाल मुनिया के नेतृत्व में राजस्व, पुलिस और ग्रामीण विकास विभाग की संयुक्त टीम की ओर से अवैध अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई की गई. एसडीएम तराना राजेश बोरासी ने बताया कि प्रशासन द्वारा 5.38 हेक्टयर सरकारी जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया गया हैं. इसकी बाजार कीमत लगभग पांच करोड़ रुपये है. राजेश बोरासी ने कहा कि जमीन पर ग्राम टिटोडी के इस्माइल पिता पीर खां, नौशाद पिता इस्माइल खां और अकरम पिता इस्माइल खां की तरफ से अतिक्रमण किया गया था. अब उस जमीन से अतिक्रमण हटवाकर सरकारी जमीन का बोर्ड लगाया. उन्होंने बताया कि जमीन पर बड़े स्तर पर पौधारोपण किया जाएगा, पौधरोपण के लिए गड्डे भी खुदवाए गए हैं. ग्रामीणों ने की थी शिकायत कलेक्टर नीरज कुमार सिंह ने बताया कि ग्रामीण ग्रामीणों की ओर से सरकारी जमीन पर अतिक्रमण की शिकायत की गई थी. इसी शिकायत की पहले जांच की गई, फिर जांच में शिकायत सही पाई जाने पर जिला प्रशासन ने रणनीति बनाकर अतिक्रमण हटाया. माफियाओं के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में पिछले तीन साल में उज्जैन जिले में एक हजार करोड़ से ज्यादा की अचल संपत्ति माफिया के कब्जे से मुक्त कराई जा चुकी है. फिलहाल अभी भी यह अभियान जारी है. ये कार्रवाई तराना के तहसीलदार रामलाल मुनिया के नेतृत्व में संयुक्त टीम ने की। तराना एसडीएम राजेश बोरासी ने बताया कि 5.38 हेक्टेयर भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया है। इसका बाजार मूल्य करीब 5 करोड़ रुपए है। भूमि पर ग्राम टिटोडी के इस्माइल पिता पीर खां, नौशाद पिता इस्माइल खां एवं अकरम पिता इस्माइल खां द्वारा अतिक्रमण किया गया था। उक्त भूमि से अतिक्रमण हटवाकर शासन की भूमि होने के बोर्ड लगाए गए हैं। भूमि पर वृहद स्तर पर पौधारोपण किया जाएगा, इसके लिए गड्ढे भी खुदवाए गए हैं।

वेतन-भत्तों में अंतर समझिए, नियमित सैनिकों से कितना अलग है अग्निवीरों का मुआवजा?

लुधियाना लुधियाना जिले में स्थित रामगढ़ सरदारन गांव के मृतक अग्निवीर अजय सिंह (23) के परिवार ने दावा किया है कि उनके बेटे की मौत के छह महीने बाद भी उन्हें केंद्र या सेना से कोई अनुग्रह राशि नहीं मिली है। इस मुद्दे को लेकर खूब राजनीतिक बयानबाजी भी हो रही है। इस सप्ताह की शुरुआत में, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि जनवरी में बारूदी सुरंग विस्फोट में मारे गए अग्निवीर अजय कुमार के परिवार को सरकार से वित्तीय सहायता नहीं मिली। इसके जवाब में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संसद में बताया कि ड्यूटी के दौरान मारे गए अग्निवीर को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा मिलता है। हालांकि राहुल ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके राजनाथ सिंह पर सदन से झूठ बोलने का आरोप लगाया। अब खुद सेना ने इस तरह के दावों को खारिज किया है। भारतीय सेना ने कहा कि परिवार को देय राशि में से 98.39 लाख रुपये का भुगतान पहले ही किया जा चुका है। इसने स्पष्टीकरण में कहा कि कुल राशि लगभग 1.65 करोड़ रुपये होगी। सरकारी सूत्रों ने बताया कि 1.65 करोड़ रुपये में केंद्र सरकार से 48 लाख रुपये और वित्तीय संस्थानों से सहमति पत्र के तहत बीमा के रूप में 50 लाख रुपये शामिल हैं। इसमें 39,000 रुपये की अतिरिक्त राशि; अनुग्रह राशि के रूप में 44 लाख रुपये; सेना कल्याण कोष से 8 लाख रुपये; कार्यकाल पूरा होने तक वेतन शेष के रूप में 13 लाख रुपये; और सेवा निधि के रूप में 2.3 लाख रुपये शामिल हैं। सेना ने कहा कि शहीद अग्निवीर के परिवार को पहले ही 98.39 लाख रुपये का भुगतान किया जा चुका है। बीमा और अनुग्रह राशि मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, अग्निवीरों और नियमित सैनिकों के बीच युद्ध में हताहतों के लिए मुआवजे की व्यवस्था अलग तरह से काम करती है। नियमित सैनिकों की मृत्यु को पांच श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है – A से E – जबकि अग्निवीरों की मृत्यु को तीन श्रेणियों में रखा जाता है – X, Y और Z. श्रेणी ए (नियमित सैनिकों के लिए) और श्रेणी एक्स (अग्निवीरों के लिए) की मौतें सैन्य कारणों में नहीं आती हैं। यानी वे मौतें जो सैन्य कारणों से नहीं हुई हैं उन्हें श्रेणी ए और श्रेणी एक्स में रखा जाता है। श्रेणी बी और सी में रखी गई मौतें सैन्य सेवा के कारण होती हैं और इसमें ड्यूटी पर दुर्घटनाएं शामिल हैं। अग्निवीरों के लिए, इन मौतों को श्रेणी वाई (Y) में रखा गया है। नियमित सैनिकों की श्रेणी D और E व अग्निवीरों की श्रेणी Z की मौतों को हिंसा, प्राकृतिक आपदाओं, दुश्मन की कार्रवाई, सीमा पर झड़पों और युद्ध जैसी स्थितियों में रखा जाता है। यानी अगर कोई नियमित सैनिक हिंसा, प्राकृतिक आपदाओं, दुश्मन की कार्रवाई, सीमा पर झड़पों और युद्ध जैसी स्थितियों में शहीद होता है तो उसे श्रेणी D और E रखा जाएगा वहीं इसी स्थिति में अग्निवीर को श्रेणी Z में रखा जाएगा। बीमा सभी नियमित सैनिक सेना समूह बीमा कोष में हर महीने 5,000 रुपये का योगदान करते हैं, जिससे उन्हें 50 लाख रुपये का बीमा मिलता है। अग्निवीरों का बीमा 48 लाख रुपये का है, लेकिन वे इस बीमा के प्रीमियम के लिए अपने वेतन से कोई योगदान नहीं देते हैं। बीमा राशि सभी सैनिकों और अग्निवीरों को दी जाती है, चाहे उनकी मृत्यु का कारण कुछ भी हो। तीनों सेनाओं ने बैंकों के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत अग्निवीरों सहित सभी रक्षा कर्मियों के वेतन को रक्षा वेतन पैकेज के तहत जमा किया जाता है। इन कर्मियों का बैंकों द्वारा उनकी नीतियों के अनुसार विभिन्न राशियों के लिए बीमा किया जाता है। अनुग्रह राशि जिन अग्निवीरों की मृत्यु सैन्य सेवा के कारण हुई हो या ऑपरेशन के दौरान हुई हो उनके लिए 44 लाख रुपये की अनुग्रह राशि निर्धारित की गई है। वहीं नियमित सैनिक के लिए अनुग्रह राशि 25 लाख रुपये, 35 लाख रुपये या 45 लाख रुपये हो सकती है, जो हताहत की प्रकृति पर निर्भर करता है। अग्निवीरों या नियमित सैनिकों की मृत्यु अगर सैन्य सेवा के कारण नहीं हुई है तो वे किसी भी अनुग्रह राशि के लिए पात्र नहीं है। हालांकि राज्य सरकारों की ओर से दी जाने वाली अनुग्रह राशि राज्य के आधार पर शून्य से लेकर 1 करोड़ रुपये तक होती है। यह उन अग्निवीरों और नियमित सैनिकों दोनों पर लागू होती है जो या तो ड्यूटी पर मारे जाते हैं या विकलांग हो जाते हैं। इसके अलावा भी, अग्निवीरों और नियमित सैनिकों को ऑपरेशन के दौरान मृत्यु होने पर 8 लाख रुपये और किसी अन्य कारण से मृत्यु होने पर 2.5 लाख रुपये दिए जाते हैं। अग्निवीरों के लिए सेवा निधि सेवा निधि एक अंशदायी योजना है जो केवल अग्निवीरों के लिए लागू है। जिन लोगों की मृत्यु सैन्य सेवा के कारण नहीं हुई है उन्हें मृत्यु की तिथि तक जमा की गई राशि, सरकार के अंशदान और ब्याज के साथ मिलती है। ड्यूटी या ऑपरेशन के दौरान मरने वाले अग्निवीरों को सेवा निधि घटक सहित चार वर्ष तक की असेवा अवधि के लिए पूरा वेतन मिलता है। केवल नियमित सैनिकों के लिए कुछ लाभ केवल नियमित सैनिकों के लिए हैं। ग्रेच्युटी और मासिक पारिवारिक पेंशन केवल नियमित सैनिकों को ही उपलब्ध है। ग्रेच्युटी अधिकतम 25 लाख रुपये तक सीमित है। सैनिकों के परिवार को साधारण पारिवारिक पेंशन मिलती है, जो 10 साल तक के लिए अंतिम वेतन का 50% और उसके बाद 30% है। सैन्य सेवा के कारण होने वाली मौतों के मामले में, एक विशेष पारिवारिक पेंशन लागू होती है, जो सैनिक के अंतिम वेतन का 60% होती है। ऑपरेशन में मारे गए सैनिकों के लिए, एक उदार पारिवारिक पेंशन (Liberalised Family Pension) होती है, जो अंतिम वेतन का 100% होती है और परिवार को दी जाती है।

बेबसी : गुना में लगातार बारिश के लकड़ी लगाकर तिरपाल लगाई फिर महिला की चिता को अग्नि दी गई

 गुना मध्य प्रदेश के गुना जिले में महिला का अंतिम संस्कार तिरपाल लगाकर करना पड़ा है। लगातार बारिश से परिजनों ने लकड़ी लगाकर तिरपाल लगाई फिर महिला की चिता को अग्नि दी गई। ये तस्वीर विकास के दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। मामला राजधानी भोपाल जाने वाले रास्ते पर स्थित बुढ़ाना ग्राम पंचायत के भरेड नदी का है। जानकारी के मुताबिक बुढ़ाना निवासी धर्मेन्द्र भील की पत्नी सीमा भील (22) का निधन हो गया था। सीमा भील का 8 दिन पहले प्रसव हुआ था, जिसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ती गई और अंतत: गुरुवार को सीमा ने दम तोड़ दिया। सीमा के परिजन शव का अंतिम संस्कार करने के लिए भरेड नदी के पास ग्राम पंचायत द्वारा बनाए गए मुक्तिधाम पर पहुंचे थे, यहां अचानक बारिश होने लगी। मुक्तिधाम पर दीवार और टीनशेड नहीं होने की वजह से लोगों ने एक तिरपाल को चिता के ऊपर लकड़ियों के सहारे लगाया। तब जाकर शव का अंतिम संस्कार किया जा सका। कुछ ग्रामीणों ने बारिश के बीच तिरपाल का सहारा लेकर किए गए अंतिम संस्कार का वीडियो बनाया और उसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। वीडियो सामने आने के बाद गांवों में किए जा रहे चहुंमुखी विकास के दावों की जमकर आलोचना की जा रही है। बहरहाल बुढ़ाना के ग्रामीणों ने बताया कि ग्राम पंचायत के मुक्तिधाम पर टीनशेड नहीं लगा पाई है, जिसकी वजह से हर साल बारिश में इस तरह के दृश्य यहां देखने को मिल जाते हैं।

रक्षा उत्पादों का 2023-24 में हुआ रिकॉर्ड प्रोडक्शन, जानें डिफेंस मिनिस्टर राजनाथ सिंह ने क्या कहा

नई दिल्ली भारत का वार्षिक रक्षा उत्पादन वर्ष 2023.. 24 में 1 . 27 लाख करोड रुपए के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है।रक्षा मंत्रालय के अनुसार रक्षा उत्पादन में पिछले वर्ष की तुलना में 16.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और यह वर्ष 2019-20 की तुलना में 60 प्रतिशत की वृद्धि है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में इस उपलब्धि पर कहा है कि सरकार भारत को अग्रणी वैश्विक रक्षा विनिर्माण केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि रक्षा क्षेत्र के सभी सार्वजनिक उपक्रमों , रक्षा वस्तुओं का निर्माण करने वाले अन्य सार्वजनिक उपक्रमों और निजी कंपनियों से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, देश में रक्षा उत्पादन का मूल्य रिकॉर्ड-उच्च आंकड़े यानी 1,26,887 करोड़ रुपये तक बढ़ गया है, जो पिछले वित्तीय वर्ष के रक्षा उत्पादन की तुलना में 16.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। वित्त वर्ष 2022-23 में रक्षा उत्पादन का मूल्य 1,08,684 करोड़ रुपये था।   प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रक्षा मंत्री द्वारा दी गई इस जानकारी पर खुशी जाहिर की है। उन्होंने राजनाथ सिंह के पोस्ट को रिपोस्ट करते हुए लिखा, ”बहुत उत्साहजनक विकास। इस उपलब्धि में योगदान देने वाले सभी लोगों को बधाई। हम अपनी क्षमताओं को और बढ़ाने और भारत को एक अग्रणी वैश्विक रक्षा विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए एक बेहतरीन वातावरण तैयार करने के साथ इसको समग्र प्रयास के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। यह हमारे सुरक्षा तंत्र को मजबूत करेगा और हमें आत्मनिर्भर बनाएगा।” स्वदेशी रक्षा उत्पादन में अब तक की सबसे अधिक वृद्धि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने पोस्ट में लिखा कि रक्षा मंत्रालय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार की नीतियों और पहलों के सफल कार्यान्वयन के आधार पर वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान मूल्य के संदर्भ में स्वदेशी रक्षा उत्पादन में अब तक की सबसे अधिक वृद्धि हासिल की है, जिसका उद्देश्य ‘आत्मनिर्भरता’ हासिल करना है। रक्षा क्षेत्र के सभी सार्वजनिक उपक्रमों (डीपीएसयू), रक्षा सामानों का निर्माण करने वाले दूसरे सार्वजनिक उपक्रमों और निजी कंपनियों से हासिल आंकड़ों के मुताबिक, देश में रक्षा उत्पादन का मूल्य 1,26,887 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यह पिछले वित्तीय वर्ष के रक्षा उत्पादन की तुलना में 16.7% की वृद्धि को दर्शाता है। वित्त वर्ष 2022-23 में रक्षा उत्पादन का मूल्य 1,08,684 करोड़ रुपये था। श्री सिंह ने कहा कि ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम साल-दर-साल नए मील के पत्थर पार कर रहा है। उन्होंने भारत को एक अग्रणी वैश्विक रक्षा विनिर्माण केंद्र के रूप में विकसित करने के सरकार के अटूट संकल्प को दोहराया। वर्ष 2023-24 में उत्पादन के कुल मूल्य में, लगभग 79.2 प्रतिशत का योगदान सरकारी और 20.8 प्रतिशत निजी क्षेत्र द्वारा किया गया है। आंकड़ों से पता चलता है कि पूर्ण मूल्य के संदर्भ में सरकारी और निजी क्षेत्र दोनों ने रक्षा उत्पादन में लगातार वृद्धि दर्ज की है। उन्होंने रक्षा उत्पादन को सर्वकालिक उच्चतम स्तर पर ले जाने के लिए रक्षा वस्तुओं का निर्माण करने वाले सार्वजनिक उपक्रमों और निजी उद्योग सहित उद्योग को बधाई दी। रक्षा मंत्रालय के अनुसार आत्मनिर्भरता पर ध्यान देने के साथ पिछले 10 वर्षों में सरकार द्वारा लाए गए नीतिगत सुधारों/पहलों और व्यापार करने में आसानी के कारण यह उपलब्धि हासिल की गई है। स्वदेशीकरण के प्रयासों को निरंतर आधार पर आक्रामक तरीके से आगे बढ़ाया गया है।

पं.धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ बयानबाजी पंडोखर सरकार को पड़ेगी भारी ..

जबलपुर बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की जब प्रसिद्धि बढ़ रही थी। पंडोखर धाम के गुरुशरण शर्मा ने कुछ टिप्पणी की थी। वह कथित रूप से बागेश्वर सरकार पंडित धीरेंद्र कृष्णा शास्त्री की बखिया उधेड़ रहे थे। इसे लेकर सोशल मीडिया पर भी खूब वाद विवाद हुआ था। इसके बाद गोटेगांव के याचिकाकर्ता अमीश तिवारी ने सात मई को पुलिस में शिकायत की थी। अपनी शिकायत में कहा था कि दतिया निवासी धर्मगुरु गुरुशरण शर्मा (पंडोखर सरकार) तमाम संतों के खिलाफ गलत टिप्पणी करते हैं। बागेश्वर सरकार पर गलत टिप्पणी का आरोप शिकायतकर्ता ने कहा था कि पंडोखर सरकार गुरुशरण महाराज धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री और उनके परिवार के खिलाफ गलत टिप्पणी करते हैं। वह हमेशा गलत बात करते हैं। अमीश तिवारी की शिकायत पर कोई मामला दर्ज नहीं हुए तो शिकायतकर्ता हाईकोर्ट की शरण में पहुंचा। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील पंकज दुबे ने कहा कि शिकायत मिलने के 14 दिन के अंदर तक पुलिस को जांच करनी होती है। पुलिस को जांच करने के निर्देश दिए पुलिस ने ऐसा नहीं किया तो हाईकोर्ट में याचिका लगाई। हाईकोर्ट में याचिका लगाने के बाद इस मामले में सुनवाई हुई है। सुनवाई के बाद कोर्ट ने नए कानून के तहत आदेश जारी कर दिए हैं। मामले में जस्टिस विशाल धगट ने सुनवाई करते हुए कहा कि पुलिस मामले की जांच करे और संज्ञेय अपराध नहीं बनता है तो जानकारी शिकायतकर्ता को दें ताकि वह उचित फोरम में जा सके। गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री और पंडोखर महराज गुरुशरण शर्मा का अलग-अलग धाम है। दोनों अपने-अपने धामों पर पर्चा निकालते हैं। पर्चा के जरिए लोगों का अतीत बताते हैं। साथ ही भविष्य को लेकर सलाह देते हैं। बागेश्वर की प्रसिद्धि जब पंडोखर महाराज से ज्यादा बढ़ने लगी तो उन्होंने कई बार विवादित टिप्पणी की थी। यह उस समय काफी तूल पकड़ा था।

दिल्ली जल बोर्ड में भ्रष्टाचार का मामला, ED ने चार शहरों में छापेमारी कर 41 लाख रुपये जब्त किए

 नई दिल्ली प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) से जुड़े सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) भ्रष्टाचार मामले के संबंध में दिल्ली, अहमदाबाद, मुंबई और हैदराबाद में कई स्थानों पर छापेमारी की है. भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी), जीएनसीटीडी, नई दिल्ली द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के आधार पर ईडी की जांच में दिल्ली में 10 एसटीपी के अपग्रेडेशन में 1943 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप लगाया गया है. एफआईआर में यूरोटेक एनवायरनमेंटल प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी और अन्य पर बढ़ी हुई दरों पर टेंडर हासिल करने के लिए मिलीभगत करने का आरोप लगाया गया है, जिससे सरकारी खजाने को काफी नुकसान हुआ है. क्या है मामला इस छापेमारी में 41 लाख रुपये की नकदी, आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य मिले हैं. ईडी ने आगे की जांच के लिए इन सामग्रियों को जब्त कर लिया है. इस मामले में चार टेंडर शामिल हैं, जिनकी कीमत 1943 करोड़ रुपये हैं, जो अक्टूबर 2022 में तीन संयुक्त उद्यम संस्थाओं को दिए गए. ईडी ने पाया है कि निविदाएं बढ़ी हुई दरों पर दी गई थीं, और डीजेबी द्वारा अपनाई गई लागतें कम थीं, जबकि अपग्रेडेशन की लागत वृद्धि से कम थी. कंपनियों ने टेंडर लेकर दूसरी कंपनी को दिया ठेका जांच से पता चला है कि तीनों संयुक्त उद्यमों ने निविदाएं हासिल करने के लिए ताइवान की एक परियोजना से जारी एक ही अनुभव प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया. इसके अलावा, तीनों संयुक्त उद्यमों ने हैदराबाद की मैसर्स यूरोटेक एनवायरनमेंट प्राइवेट लिमिटेड को काम का उप-ठेका दिया. ईडी कथित घोटाले में डीजेबी अधिकारियों, संयुक्त उद्यमों और मैसर्स यूरोटेक एनवायरनमेंट प्राइवेट लिमिटेड की भूमिका की जांच कर रहा है. तलाशी अभियान डीजेबी की एसटीपी परियोजनाओं में भ्रष्टाचार के आरोपों के पीछे की सच्चाई को उजागर करने में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.  

विराट कोहली अपने बचपन के कोच से मिलते ही हुए भावुक, तस्वीरें सोशल मीडिया पर आई

नई दिल्ली अमेरिका और वेस्टइंडीज में खेले गए टी20 विश्व कप 2024 का खिताब जीतने वाली भारतीय क्रिकेट गुरुवार को ट्रॉफी के साथ वतन लौट आई है। बारबाडोस में आए तूफान के कारण खिलाड़ियों को भारत आने में देरी हुई। 4 जून को सुबह भारतीय खिलाड़ी दिल्ली उतरे और फिर पीएम मोदी से मुलाकात के बाद मरीन ड्राइव से लेकर वानखेड़े स्टेडियम तक विक्ट्री परेड में हिस्सा लिया। जिसके बाद खिलाड़ियों को सम्मानित किया गया। इस बीच विराट कोहली अपने बचपन के कोच राजकुमार शर्मा से मिले, जिसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर आई हैं। भारतीय टीम के स्टार बल्लेबाज विराट कोहली आईसीसी टी20 विश्व कप जीत का जश्न मनाने के लिए भारतीय टीम की भव्य विजय परेड के बाद अपने बचपन के कोच राजकुमार शर्मा से मिले। राजकुमार ने कहा कि विराट के साथ पहली बार क्रिकेट प्रैक्टिस करने से लेकर खुद को खेल के सबसे बड़े सितारों में से एक के रूप में स्थापित करने तक, विराट ने उन्हें हमेशा गौरवान्वित किया है। टी20 विश्व कप 2024 में भारतीय टीम के पूर्व कप्तान विराट कोहली रन बनाने के लिए संघर्ष करते हुए नजर आए थे। हालांकि साउथ अफ्रीका के खिलाफ खिताबी मुकाबले में उन्होंने अपने करियर की सबसे यादगार पारी में से एक खेली और टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाने में मदद की। विराट कोहली ने फाइनल में 59 गेंद में 6 चौके और दो छक्के की मदद से 76 रन बनाए थे। उन्होंने टूर्नामेंट के दौरान सात पारियों में सिर्फ 75 रन बनाए थे। इस बल्लेबाज ने टी20 विश्व कप में आठ पारियों में 18.87 की औसत और 112.68 की स्ट्राइक रेट से एक अर्धशतक सहित 151 रन बनाए। उन्होंने फाइनल जीतने के बाद अंतरराष्ट्रीय टी20 से संन्यास की भी घोषणा की।  

जम्मू-कश्मीर में अमरनाथ यात्रा के बाद चुनावों का ऐलान, शाह ने BJP नेताओं दिए हैं निर्देश

नई दिल्ली जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 30 की समाप्ति के बाद से ही लोगों को वहां विधानसभा चुनाव का इंतजार है। इसके साथ ही नई सरकार का इंतजार भी खत्म हो जाएगा। अब जो खबर सामने आ रही है उसके मुताबिक, अमरनाथ यात्रा 19 अगस्त को समाप्त हो रही है। इसके बाद जम्मू-कश्मीर में विधानसभा के चुनाव कराए जा सकते हैं। सूत्रों से मिल रही जानकारी के मुताबिक, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बीजेपी नेताओं को चुनाव की तैयारी करने के निर्देश भी दिए हैं। गुरुवार को देर रात हुई बैठक में अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने जम्मू-कश्मीर भाजपा के कई नेताओं के साथ विधानसभा चुनाव को लेकर बैठक की है। उन्होंने प्रदेश के नेताओं को बताया है कि भाजपा राज्य की सभी 90 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। आपको बता दें कि अगस्त 2019 में राज्य के विशेष दर्जे को खत्म करने से पहले नवंबर 2018 में जम्मू-कश्मीर की विधानसभा भंग कर दी गई थी। राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित किया गया था। भाजपा नेतृत्व ने राज्य के नेताओं को यह भी बताया है कि भाजपा राज्य में किसी भी पार्टी के साथ चुनाव पूर्व गठबंधन नहीं करेगी। हालांकि, सूत्रों ने कहा कि सीटों का समायोजन और समान विचारधारा वाले दलों के साथ चुनावी समझौता हो सकता है। इसके अलावा, विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी किसी भी मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार को पेश नहीं करेगी। आने वाले दिनों में प्रमुख केंद्रीय मंत्रियों और भाजपा के राष्ट्रीय नेताओं के राज्य का दौरा करने की उम्मीद है। पार्टी राज्य में लोगों के साथ एक जनसंपर्क कार्यक्रम भी शुरू करेगी। सूत्रों के अनुसार, भाजपा राज्य के नेतृत्व और संगठन में फिलहाल कोई बदलाव नहीं करेगी। आपको बता दें कि रविंदर रैना प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। देर रात करीब दो घंटे तक चली बैठक में रविंद्र रैना, जम्मू-कश्मीर से भाजपा सांसद जितेंद्र सिंह और जुगल किशोर शर्मा के अलावा और भी कई बड़े नेता शामिल हुए। सूत्रों ने यह भी कहा कि जम्मू-कश्मीर, झारखंड, महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनावों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।  

हाथरस कांड के मुख्य आरोपी देवप्रकाश मधुकर की नौकरी गई, 20 पंचायत में मनरेगा देखता था

हाथरस हाथरस भगदड़ के मुख्य आरोपी और भोले बाबा के मुख्य सेवादार देव प्रकाश मधुकर को एटा जिले के शीतलपुर ब्लॉक में तकनीकी सहायक के पद से हटा दिया गया है। यहां वह 2010 से अनुबंध पर 20 पंचायतों में मनरेगा के काम की देखरेख कर रहे थे। खंड विकास अधिकारी (शीतलपुर) दिनेश शर्मा ने खुलासा किया कि मधुकर का नाम एफआईआर में मुख्य आरोपी के रूप में सामने आने के बाद प्रक्रिया हुई। हाथरस पुलिस ने भी उस पर 1 लाख रुपये का इनाम घोषित किया है। इसी के बाद उसे हटाने और उसकी संविदा समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी। घटना के बाद से मधुकर फरार है। इसी कारण उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) भी निकाला गया है। पुलिस महानिरीक्षक, अलीगढ़ रेंज, शलभ माथुर ने गुरुवार को हाथरस पुलिस लाइन में मीडिया से बात करते हुए कहा कि समागम (सत्संग) के प्रभारी देव प्रकाश मधुकर (इंजीनियर) के नाम पर सत्संग के लिए अनुमति मांगी गई थी। हाथरस पुलिस द्वारा एफआईआर में नाम आने के बाद से वो फरार है। उसकी गिरफ्तारी पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया है और एनबीडब्ल्यू जारी किया गया है। टीमें उसकी तलाश कर रही हैं। बताया जा रहा है कि शीतलपुर ब्लॉक में मनरेगा के तहत कराए गए विकास कार्यों के निरीक्षण के बाद मधुकर को बिल और वाउचर तैयार करने का काम सौंपा गया था। उसकी पत्नी पंचायत सहायक हैं और दोनों हाथरस के सिकंदरा राऊ कस्बे में रहते हैं। मधुकर अपने पैतृक गांव के निवासियों को भोले बाबा की संस्था से जोड़ने में सक्रिय था। मधुकर ने ग्राम प्रधान का चुनाव लड़ा था लेकिन हार गया। मधुकर के गांव से करीब 30 लोग हाथरस में सत्संग में शामिल होने गए थे लेकिन सुरक्षित लौट आए।  

World Bank में IAS निकुंज श्रीवास्तव‌ नियुक्त, 3 साल के लिए वर्ल्ड बैंक में ED के सीनियर एडवाइजर बने

नईदिल्ली सीनियर IAS अधिकारी निकुंज श्रीवास्तव से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है. 1998 बैच के MP कैडर के IAS अधिकारी निकुंज श्रीवास्तव को वाशिंगटन डीसी में विश्व बैंक के मुख्यालय में कार्यकारी निदेशक (Executive Director) के वरिष्ठ सलाहकार (Senior Advisor) के रूप में नियुक्त किया गया है.  वह तीन वर्ष के कार्यकाल के लिए इस पद पर रहेंगे. बता दें कि केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DOPT) ने बुधवार को नियुक्ति आदेश (appointment order) जारी किया. वर्तमान में मध्य प्रदेश में राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव के रूप में कार्यरत श्रीवास्तव ने भोपाल और ग्वालियर के कलेक्टर और नगरीय प्रशासन विभाग (Urban Administration Department) में आयुक्त जैसे अहम पदों पर कार्य किया है. उन्हें उनके सख्त और स्मार्ट प्रशासनिक दृष्टिकोण (smart administrative approach) के लिए जाना जाता है. कौन हैं निकुंज श्रीवास्तव वरिष्ठ IAS निकुंज कुमार श्रीवास्तव इस समय मध्य प्रदेश शासन के राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव (PS) हैं. वे पूर्व में भोपाल के कलेक्टर भी रहे हैं. पूर्व में नगरीय प्रशासन विभाग में कमिशनर भी रह चुके हैं. इसके पहले वे ग्वालियर जिले के भी कलेक्टर रह चुके हैं. वे एक सख्त और स्मार्ट अधिकारी के तौर पर पहचाने जाते हैं. इन्हें भी मिली जिम्मेदारी आदेश में त्रिपुरा कैडर के 1995 बैच के IAS आशुतोष जिंदल को वॉशिंगटन डीसी में इकॉनमिक विंग भारत एंबेसी में मिनिस्टर इकॉनमी नियुक्त किया गया है. उनकी यह नियुक्ति केंद्र सरकार में एडिशनल सेक्रेटरी स्तर पर की गई है. इसके साथ ही मणिपुर कैडर के 2008 बैच के IAS ऋषिकेश अरविंद मोडक को वॉशिंगटन डीसी वर्ल्ड बैंक में एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर नियुक्त किया गया है. अंशिका अरोड़ा IES 2010 बैच को वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन जिनेवा में काउंसलर नियुक्त किया गया है. आशुतोष सलिल महाराष्ट्र कैडर IAS 2010 बैच को ब्रुसेल्स में भारत सरकार के एंबेसी में एडवाइजर और प्रशांत चंद्रन IES 2007 बैच को ढाका में मल्टी सेक्टरल टेक्निकल एंड इकोनामिक कोऑपरेशन सेक्रेटेरिएट में डायरेक्टर नियुक्त किया गया है.

उषा ठाकुर ने कहा जम्मू कश्मीर में मदरसों की गतिविधियों को देखकर लगता है कि मध्य प्रदेश में भी मदरसों को बंद किया जाना चाहिए

भोपाल शुक्रवार को मध्य प्रदेश विधानसभा के मॉनसून सत्र की कार्यवाही के लिए मध्य प्रदेश विधानसभा की कार्यसूची में अशासकीय संकल्प को शामिल किया गया है। इसके अंतर्गत अनुच्छेद 30 को खत्म करने के लिए बीजेपी विधायक अभिलाष पांडेय द्वारा अशासकीय संकल्प लाया जाएगा। यह अशासकीय संकल्प अल्पसंख्यकों को धार्मिक या भाषाई आधार पर शैक्षणिक संस्थाओं की स्थापना और प्रबंधन का अधिकार समाप्त करने के लिए लाया जाएगा। इस मामले पर बीजेपी विधायक उषा ठाकुर ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि मदरसों को बंद करना ही ठीक है। रामेश्वर शर्मा ने भी इसका समर्थन किया है। वहीं नेता प्रतिपक्ष ने इस बारे में कहा कि वो ऐसे विषयों पर चर्चा नहीं करना चाहते जो जनता के मुद्दों को भटका दें। अभिलाष पांडेय ने कहा- सबको मिले समान शिक्षा अनुच्छेद 30 को खत्म करने के लिए बीजेपी विधायक अभिलाष पांडेय द्वारा अशासकीय संकल्प लाया जा रहा है। इसे लेकर अभिलाष पांडेय ने कहा कि ‘मैंने कई जगह पढ़ा सुना है कि जो भी बच्चे मदरसों में पढ़ते हैं उन्हें उच्च शिक्षा के लिए 10वीं-12वीं में ओपन स्कूल से पढ़ाई करनी पड़ती है। हम राष्ट्रीय शिक्षा नीति की बात करते हैं, समान शिक्षा की बात करते हैं। मैं चाहता हूँ कि अल्पसंख्यक बच्चे भी समान शिक्षा नीति के साथ पढ़ाई करें। साथ ही उनका भविष्य उज्जवल बने। उनको अच्छी शिक्षा मिले, इस दिशा में मेरा ये कदम हैं।’ मदरसों को बंद किया जाए- उषा ठाकुर विधानसभा में अनुच्छेद 30 को खत्म करने के लिए बीजेपी विधायक अभिलाष पांडेय के अशासकीय संकल्प पर सियासत छिड़ गई है। इसे लेकर बीजेपी विधायक उषा ठाकुर ने कहा है कि ‘आयोग ने मदरसों का निरीक्षण करने पर पाया कि छोटे छोटे कमरे में कई बच्चे रहते हैं। कई मदरसे मदरसा बोर्ड और शिक्षा विभाग की अनुमति के बिना चल रहे हैं। बिना अनुमति के बच्चे पाए, तो मानव तस्करी और बँधुआ मज़दूरी का संकेत मिलता है। बच्चे राष्ट्र की धरोहर हैं। उनका जीवन सुरक्षित हो उन्हें राष्ट्रवादिता से जोड़ा जाए ये किसी भी सरकार की पहली शर्त है और उसी दिशा में ये कदम है।’ उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर, असम में मदरसों की गतिविधियों को देखकर लगता है कि मध्य प्रदेश में भी मदरसों को बंद किया जाना चाहिए। यहाँ कई देश विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाता है और इनका बंद किया जाना अनिवार्य है। वहीं बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा ने इस मुद्दे पर कहा कि मदरसे हों या कोई भी स्थान हो, शिक्षा देना मना नहीं है। लेकिन भारत की शिक्षा पद्धति में भारत का सम्मान, बाबा साहब अंबेडकर का संविधान, सेना के प्रति सम्मान, भारत माता की जय जयकार, राष्ट्रगान ये सब करना चाहिए। नेता प्रतिपक्ष ने इस मुद्दे पर कुछ भी कहने से इनकार किया हालांकि इस मुद्दे पर जब नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार से सवाल किया गया तो उन्होंने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि ‘मैं ऐसे विषयों पर चर्चा नहीं करना चाहता हूँ, जो जनता के मुद्दे हैं, उनसे भटककर बात होती है। मैं विश्वास नहीं करता हूँ कि इन बातों का जवाब दूँ।’ इस तरह उन्होंने फ़िलहाल इस मुद्दे पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।

इस विधानसभा सत्र की खास बात यह है कि 18 साल तक सत्र में नजर आने वाले शिवराज सिंह चौहान इस सत्र में नजर नहीं आ रहे हैं

भोपाल मध्य प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र 1 जुलाई से जारी है. इस विधानसभा सत्र की खास बात यह है कि 18 साल तक सत्र में नजर आने वाले तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) इस सत्र में नजर नहीं आ रहे हैं. शिवराज सिंह चौहान ने विदिशा संसदीय सीट से चुनाव जीतने के बाद 18 जून को विधायकी पद से इस्तीफा दे दिया है. शिवराज सिंह चौहान अब केंद्र में कृषि मंत्री हैं. कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान सांसद रहते वर्ष 2005 में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री बन गए थे. उनके सीएम बनने के बाद वर्ष 2006 में सीहोर जिले की बुदनी विधानसभा सीट से उपचुनाव लड़कर विधायक बने थे. वर्ष 2006 के बाद से ही लगातार शिवराज सिंह चौहान बुदनी विधानसभा सीट से विधायक चुनते आ रहे थे. इस दौरान वह विधानसभा सत्र की कार्यवाही में मौजूद रहते थे, लेकिन अब शिवराज सिंह चौहान ने 18 जून को विधायक पद से इस्तीफा दे दिया है, नतीजतन 18 साल बाद अब विधानसभा में शिवराज सिंह चौहान नजर नहीं आ रहे हैं. विदिशा सीट से चुने गए सांसद शिवराज सिंह मालूम हो कि 6 महीने पहले संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी को बंपर जीत मिली और 163 सीटों पर काबिज हुई. हालांकि चुनाव बाद प्रदेश में सीएम का चेहरा बदल गया. शिवराज सिंह चौहान के स्थान पर डॉ. मोहन यादव को सीएम बनाया गया. इधर हाल ही में संपन्न हुए लोकसभा चुनाव में शिवराज सिंह चौहान को विदिशा संसदीय सीट से प्रत्याशी बनाया. शिवराज सिंह चौहान ने विदिशा से रिकार्ड 8 लाख मतों से जीत दर्ज की. शिवराज सिंह चौहान को केंद्र में कृषि मंत्री बनाया गया है. सांसद बनने के बाद शिवराज सिंह चौहान ने 18 जून को विधायकी पद से इस्तीफा दे दिया है. जारी है विधानसभा का मानसून सत्र मध्य प्रदेश विधानसभा सत्र में विधायकों ने 4287 सवाल पूछे हैं. विधानसभा के मानसून सत्र में तारांकित प्रश्न 2108 पूछे गए हैं, जबकि अतारंकित प्रश्न 2179. इस तरह कुल 4287 प्रश्न पूछे गए हैं. इनमें 2386 ऑनलाइन और 1901 ऑफलाइन प्रश्न पूछे गए हैं. यह विधानसभा सत्र काफी हंगामेदार हो रहा है. विपक्षी पार्षद नर्सिंग घोटाले को लेकर सवाल जवाब कर रहे हैं.

हताश लड़की ने पहले टेका महाकाल में मत्था, फिर लगा दी शिप्रा में छलांग, इसलिए उठाया कदम

उज्जैन  दिल्ली की एक युवती ने भगवान महाकाल के दर्शन करने के बाद शिप्रा नदी में डूबकर आत्महत्या (Delhi girl attempt suicide in Ujjain) करने का प्रयास किया है। युवती को मौके पर मौजूद गार्ड ने बचा लिया। युवती दिल्ली से नौकरी के लिए उज्जैन आई थी। नौकरी के लिए आई थी उज्जैन पुलिस के अनुसार युवती दिल्ली निवासी है। वह किसी नौकरी के लिए साक्षात्कार देने उज्जैन आई थी। बार-बार साक्षात्कार देने के बावजूद चयन न होने पर वो परेशान हो गई थी, जिसके चलते उसने ये कदम उठाया। कई साक्षात्कार के बाद भी नहीं मिली नौकरी इसके पहले भी वह कई बार नौकरी के लिए साक्षात्कार दे चुकी है, लेकिन कहीं भी उसका चयन नहीं हुआ। उज्जैन में भी इंटरव्यू के बाद नौकरी के लिए युवती का चयन नहीं होने पर उसने आत्महत्या का प्रयास किया। जानकारी के अनुसार, युवती ने पहले महाकाल मंदिर जाकर दर्शन किए। शिप्रा नदी में जान देने की कोशिश इसके बाद शिप्रा नदी जाकर अपनी जान देने का प्रयास किया। वहां उपस्थित गार्ड ने जब युवती को डूबते हुए देखा तो तुरंत उसे बचा लिया। बाद में युवती को पुलिस को सौंप दिया गया। पुलिस ने उसे भोजन करवाकर उसकी काउंसलिंग करवाई जहां उसने अपनी स्थिति बताई। इसके बाद उसे दिल्ली रवाना किया गया। वी केयर फॉर यू के जरिए पुलिस ने युवती की काउंसलिंग करवाई। इस दौरान युवती ने अपने बारे में विस्‍तार से बताया। इसके बाद युवती को अच्‍छी तरह से समझाइश दी गई। टीम ने उसे रेल का टिकट भी मुहैया करवाया। महाकाल पुलिस थाने के एसआई चंद्रभान सिंह खुद अपने वाहन पर उसे रेलवे स्‍टेशन ले गए और दिल्‍ली जाने वाली रेल में बैठाया।

MP हाईकोर्ट के नए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा बनाए गए, जस्टिस शील नागू की जगह संभालेंगे पदभार

जबलपुर  मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति शील नागू को पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। न्यायमूर्ति नागू के स्थानांतरण के बाद, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्यभार संभालेंगे। जस्टिस संजीव सचदेवा को हाल ही में दिल्ली से मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में स्थानांतरित किया गया था। इससे पहले, मुख्य न्यायाधीश रवि मलिमथ की सेवानिवृत्ति के बाद न्यायमूर्ति शील नागू को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय का कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा पहले ही पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के लिए न्यायमूर्ति नागू के नाम की सिफारिश की गई थी। राष्ट्रपति की सहमति मिलने के बाद, गुरुवार को उन्हें इस पद पर नियुक्त करने का आदेश जारी कर दिया गया। न्यायमूर्ति नागू के नेतृत्व में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए थे और अब वह अपनी नई भूमिका में पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में न्यायिक प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाएंगे। न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा की नियुक्ति से मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में न्यायिक प्रक्रिया की निरंतरता बनी रहेगी, और उनके अनुभव का लाभ न्यायालय को मिलेगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा- चकाचौंध में खोना नहीं, दबाव लिये बिना खेलना

नई दिल्ली पेरिस ओलंपिक जा रहे भारतीय खिलाड़ियों को जीत हार का दबाव नहीं लेते हुए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने की सलाह देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि उन्हें ओलंपिक की चकाचौंध में खोये बगैर अपना फोकस बनाये रखना है। प्रधानमंत्री मोदी ने पेरिस ओलंपिक जा रहे खिलाड़ियों से शुक्रवार को व्यक्तिगत और आनलाइन बातचीत में कहा, ‘‘मेरी कोशिश रहती है कि खेल जगत से जुड़े देश के सितारों से मिलता रहूं, नई चीजें जानता रहूं और उनके प्रयासों को समझता रहूं। सरकार के नाते व्यवस्था में कुछ बदलाव लाने हैं तो काम करता रहूं। मेरी कोशिश सभी से सीधे बात करने की होती है।’’ उन्होंने कहा कि ओलंपिक की चकाचौंध में खोना नहीं है क्योंकि इससे फोकस हटता है और ना ही विरोधी को देखकर विचलित होना है। उन्होंने कहा,‘‘यह कद काठी का खेल नहीं है बल्कि कौशल का खेल है। विरोधी खिलाड़ी की कद काठी से विचलित हुए बिना अपनी प्रतिभा पर फोकस रखें और वही परिणाम दिलायेगा।’’ उन्होंने कहा,‘‘बहुत से लोग सब कुछ जानते हुए भी परीक्षा में गड़बड़ कर देते हैं और उसका मूल कारण है कि परीक्षा पर ध्यान कम होता है और वह अच्छे अंक लाने के दबाव में रहते है। आप जीत हार की चिंता मत कीजिये, पदक आते हैं और नहीं भी आते। इसका दबाव मत लीजिये लेकिन अपना शत प्रतिशत दीजिये।’’ प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि भारतीय खिलाड़ी पेरिस में पुराने तमाम रिकॉर्ड तोड़कर देश के लिये गौरव लेकर आयेंगे। उन्होंने कहा, ‘‘आप अपनी तपस्या से इस स्थान तक पहुंचे हैं। अब देश को खेल के मैदान पर कुछ देने का मौका है। खेल के मैदान में अपना सर्वश्रेष्ठ देने वाला देश के लिये गौरव लेकर आता है। मुझे विश्वास है कि इस बार पुराने सारे रिकॉर्ड तोडकर हमारे खिलाड़ी आयेंगे।’’ उन्होंने कहा कि वह ओलंपिक से लौटने के बाद खिलाड़ियों के स्वागत का इंतजार करेंगे। मोदी ने कहा, ‘‘मैं आपका फिर से इंतजार करूंगा जब आप 11 अगस्त को ओलंपिक खत्म होने के बाद लौटेंगे। मैं कोशिश करूंगा कि 15 अगस्त को लालकिले पर होने वाले स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में आप मौजूद रहें ताकि देश आपको देख सके क्योंकि जीत हार तो अलग लेकिन ओलंपिक खेलने जाना ही बहुत बड़ी बात है।’’ उन्होंने खिलाड़ियों से अपनी नींद का पूरा ध्यान रखने के लिये भी कहा। उन्होंने कहा, ‘‘खेल जगत में अभ्यास और निरंतरता का जितना महत्व है उतना ही नींद का है।आप सोचोगे कि प्रधानमंत्री आपको सोने के लिये कह रहे हैं। मैं आपसे आग्रह करता हूं कि अच्छी नींद बहुत जरूरी है। शरीर की मेहनत वाली नींद एक बात है और सभी चिंताओं से मुक्त होकर सोना अलग है।’’ प्रधानमंत्री मोदी ने खिलाड़ियों से ओलंपिक के दौरान सीखने का भी आग्रह किया। उन्होंने कहा,‘‘खिलाड़ी नाकाम होने पर भी कभी परिस्थिति को दोष नहीं देता। हम अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिये जा रहे हैं लेकिन ओलंपिक सीखने का भी बहुत बड़ा मैदान होता है। अपने खेल के अलावा बाकी खेलों को भी देखने का मौका होता है ताकि नया सीख सकें।’’ उन्होंने कहा, ‘‘सीखने की आदत से काम करने वाले के लिये सीखने के बहुत अवसर होते हैं। यूं तो दुनिया के समृद्ध और उत्तम सुविधाओं के साथ आये हुए देश के लोग भी शिकायत करते नजर आयेंगे लेकिन हमारे खिलाड़ी कठिनाइयों को, असुविधाओं को हाशिये पर रखकर मिशन के लिये लग जाता है क्योंकि उसके मन में तिरंगा, अपना देश होता है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हम खिलाड़ियों को पहले इसलिये भेजते हैं कि वहां के अनुकूल ढल सकें। खिलाड़ियों की सुविधा के लिये इस बार भी कुछ नया करने का प्रयास किया है। वहां के भारतीय समुदाय को भी हम सक्रिय करते हैं जो वह रखते हैं।’’ प्रधानमंत्री के साथ बातचीत में हॉकी कप्तान हरमनप्रीत सिंह, गोलकीपर पी आर श्रीजेश, तीरंदाज दीपिका कुमारी, पहलवान अंतिम पंघाल, निशानेबाज मनु भाकर, रमिता जिंदल, चौदह वर्ष की तैराक धिनिधि देसिंघु के अलावा आनलाइन जुड़ने वालों में ओलंपिक और विश्व चैम्पियन भालाफेंक खिलाड़ी नीरज चोपड़ा, दो बार की ओलंपिक पदक विजेता बैडमिंटन खिलाड़ी पी वी सिंधु और मुक्केबाज निकहत जरीन समेत लगभग 90 खिलाड़ी शामिल थे। पेरिस ओलंपिक 26 जुलाई से 11 अगस्त के बीच खेले जायेंगे। भारत का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन तोक्यो ओलंपिक में रहा है जिसमें भालाफेंक में नीरज चोपड़ा के ऐतिहासिक स्वर्ण समेत सात पदक जीते। भारत के 100 से अधिक खिलाड़ियों ने ओलंपिक के लिये क्वालीफाई किया है।  

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