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सुप्रीम कोर्ट ने भिंड के दो पत्रकारों की याचिका पर मध्य प्रदेश सरकार से जवाब मांगा

भिंड सुप्रीम कोर्ट ने भिंड के दो पत्रकारों की याचिका पर मध्य प्रदेश सरकार से जवाब मांगा है. इन पत्रकारों ने आरोप लगाया है कि रेत माफिया पर रिपोर्टिंग करने के कारण पुलिस थाने में उनके साथ मारपीट की गई. जस्टिस संजय करोल और सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने पत्रकार शशिकांत गोयल और अमरकांत सिंह चौहान की याचिका पर सुनवाई करने की सहमति दी और मध्य प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा. याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील ने अदालत से अनुरोध किया कि याचिकाकर्ताओं को गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण प्रदान किया जाए. इस पर अदालत ने कहा, “दूसरे पक्ष को जवाब देने का अवसर दिया जाए. राज्य को भी तथ्य प्रस्तुत करने दें.” कोर्ट ने याचिका पर नोटिस जारी किया है. अब 9 जून को मामले में सुनवाई होगी. बीती 28 मई को दिल्ली हाईकोर्ट ने अमरकांत सिंह चौहान को सुरक्षा प्रदान की थी. पत्रकार चौहान ने दावा किया था कि भिंड के पुलिस अधीक्षक (SP) के कार्यालय में उनकी पिटाई की गई और अब उनकी जान को खतरा है. हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस को मध्य प्रदेश निवासी और एक समाचार चैनल के भिंड ब्यूरो प्रमुख अमरकांत सिंह चौहान को दो महीने के लिए सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया था. बता दें कि पिछले महीने भिंड जिले के तीन पत्रकारों ने आरोप लगाया था कि बीती 1 मई को पुलिस अधीक्षक के कार्यालय में उनके साथ मारपीट या दुर्व्यवहार किया गया. हालांकि, एसपी असित यादव ने इन आरोपों का खंडन किया है. यूट्यूब चैनल संचालक प्रीतम सिंह राजावत, न्यूज पोर्टल संचालक शशिकांत गोयल और न्यूज चैनल के लिए कार्यरत अमरकांत सिंह चौहान ने जिला कलेक्टर को दी गई शिकायत में कहा कि 1 मई को उनके साथ मारपीट की गई. दलित पत्रकार को जातिसूचक गालियाँ, चप्पलों से पीटा पीड़ित पत्रकार शशिकांत गोयल ने बताया कि उन्हें 1 मई को एसपी डॉ. असित यादव के कार्यालय बुलाया गया था। वहां पहुंचते ही एसआई गिरीश शर्मा और सत्यबीर सिंह ने उनका नाम पूछा। जब उन्होंने अपना नाम “शशिकांत गोयल जाटव” बताया, तो दोनों पुलिसकर्मियों ने गाल पर चप्पलों से मारना शुरू कर दिया। “मैंने पूछा कि क्यों मार रहे हो, मेरी गलती क्या है? तो जवाब मिला – तू बहुत लिखने लगा है पुलिस के खिलाफ।” — शशिकांत ने कहा शशिकांत ने बताया कि उन्हें जबरन “जी सर” कहने को कहा गया। जब उन्होंने सवाल किया कि “सर जी” और “जी सर” में क्या फर्क है, तो उन्हें फिर पीटा गया और जातिसूचक गालियाँ दी गईं। पूरी घटना एसपी असित यादव की मौजूदगी में हुई। आठ पत्रकारों को बनाया गया निशाना मामले से जुड़ी जानकारी के अनुसार, करीब आठ पत्रकारों को पुलिसकर्मियों ने एसपी ऑफिस में बुलाकर पीटा था। इन सभी का ‘अपराध’ सिर्फ इतना था कि वे जिले में सक्रिय रेत माफिया और पुलिस की मिलीभगत पर लगातार रिपोर्टिंग कर रहे थे। दूसरे पीड़ित पत्रकार अमरकांत चौहान ने भी पुलिसकर्मियों की बर्बरता की पुष्टि की है। दोनों पत्रकारों ने कहा कि अब वे अपनी जान बचाने के लिए दिल्ली भागकर सुप्रीम कोर्ट पहुँचे हैं। प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने की निंदा प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने इस घटना की कड़ी निंदा की है और पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। याचिकाकर्ताओं के वकील ने कोर्ट को बताया कि पीड़ित पत्रकार बेहद सीमित संसाधनों में काम कर रहे हैं और अब उन्हें न्याय की आस सिर्फ सुप्रीम कोर्ट से है। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा ने अहम टिप्पणी करते हुए कहा– “क्या हमें देशभर के अग्रिम जमानत के मामलों पर सिर्फ इसलिए विचार करना चाहिए क्योंकि इसमें एक पत्रकार शामिल है?” वहीं याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि यह मामला एक आम अग्रिम जमानत याचिका से कहीं ज्यादा गंभीर है। इसमें राज्य की मशीनरी द्वारा लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को दबाने की कोशिश की जा रही है।  

कुर्बान ने रोहित बना पहचान छिपाकर बनाए संबंध, मां बनी युवती यौन शोषण करने की शिकायत दर्ज कराई

उज्जैन मध्य प्रदेश के उज्जैन में हिन्दू युवती ने मुस्लिम युवक के खिलाफ शादी का झांसा देकर साल 2016 से यौन शोषण करने की शिकायत दर्ज कराई है। यहां रोहित उर्फ टल्ला नामक युवक पर हिन्दू युवती ने जबरन निकाह पढ़ने और बुर्का पहनने का आरोप भी लगाया है। युवती द्वारा मना करने पर आरोपी युवक ने उसके साथ मारपीट और गाली-गलौज भी की गई। युवती द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर में बताया गया कि युवक का असली नाम रोहित ना होकर कुर्बान शाह है। पीड़िता उज्जैन में जयसिंहपुरा, कलाली की रहने वाली है। पीड़िता ने पति का असली नाम कुर्वान शाह दर्ज कराया है। पीड़िता ने शिकायत में बताया- मैं खाना बनाने का काम करती हूं और रोहित उर्फ टल्ला का घर मेरे सामने ही था। वह अपनी नानी के घर के सामने बैठा रहता था। साल 2016 में रोहित ने मुझे प्रपोज किया। इसके बाद मैं उसके साथ उसके साथ रहने लगी। करीब साल भर तक साथ-साथ रहने के बाद हम रोहित के घर जयसिंहपुरा आ गए, जहां उसके माता-पिता और भाई भी साथ रहते थे। सब लोग हिन्दुओं की तरह ही रहते थे। इस बीच युवती को बेटी भी हो गई। जिसकी उम्र चार साल बताई है। सब ठीक चल रहा था, लेकिन फिर अचानक साल 2021 की नवंबर में रोहित के घर मुसलमानों की आवाजाही बढ़ने लगी। इसका कारण पूछने पर उसने बताया कि वह मुसलमान है और अपना असली नाम कुर्बान शाह बताया। पीड़िता ने आरोप लगाया कि कुर्बान ने उसे निकाह पढ़ने और बुर्का पहनने के लिए कहा। मना करने पर उसने जबरदस्ती की और गंदी-गंदी गालियां देते हुए मारपीट की। 28 मई को झगड़ा अधिक हुआ तो वह घर छोड़कर चली आई और उसने महाकाल थाने जाकर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने भारतीय न्याय सहिंता की धारा 115(2), 296, 351(2) के तहत मामला दर्ज कर लिया है। इसके अलावा मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम, 2021 की धारा 3 और 5 के तहत भी मामला दर्ज हुआ है।

आईपीएल 2025 कई मायनों में बहुत खास रहा, 18वां सीजन, बने 18 रिकॉर्ड, रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु बनी चैंपियन

नई दिल्ली आईपीएल 2025 कई मायनों में बहुत खास रहा। पहली बार रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु चैंपियन बनी। उसने फाइनल में पंजाब किंग्स को 6 रन से हराया। पहली बार किसी ऐसे बल्लेबाज ने 700 से ज्यादा रन बनाए जो ओपनर नहीं है। पहली बार किसी खिलाड़ी ने दो-दो आईपीएल फाइनल में प्लेयर ऑफ द मैच जीता। आइए देखते हैं 18वें सीजन में हुए वे 18 खास कारनामे जो आईपीएल इतिहास में अब तक नहीं हुए थे। खास बात ये है कि 18 विराट कोहली का लकी नंबर है। ये उनकी जर्सी का नंबर है और आईपीएल के 18वें सीजन में ही आरसीबी ने खिताबी जीत का सूखा खत्म किया। 1- पहली बार आरसीबी ने जीता आईपीएल खिताब रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने पहली बार आईपीएल का खिताब अपने नाम किया। इससे पहले भी वह 3 बार फाइनल में पहुंची थी लेकिन तीनों ही बार उसे हार का सामना करना पड़ा था। 2- आईपीएल इतिहास का सबसे युवा खिलाड़ी मिला इस सीजन में आईपीएल इतिहास का सबसे युवा खिलाड़ी भी मिला। 14 वर्ष 23 दिन की उम्र में वैभव सूर्यवंशी ने 19 अप्रैल 2025 को राजस्थान रॉयल्स की तरफ से लखनऊ सुपर जॉइंट्स के खिलाफ आईपीएल डेब्यू किया। वह आईपीएल डेब्यू करने वाले अब तक के सबसे युवा खिलाड़ी हैं। वह अब तक के ऐसे इकलौते खिलाड़ी हैं जो 2008 में आईपीएल शुरू होने के बाद पैदा हुए और दुनिया की सबसे बड़ी क्रिकेट लीग में खेल भी रहे हैं। 3- पहली बार किसी खिलाड़ी ने आईपीएल में जड़े 1000 बाउंड्री इस सीजन के दौरान विराट कोहली आईपीएल इतिहास के पहले ऐसे बल्लेबाज बने जिसने 1000 से ज्यादा बाउंड्री लगाए। उनके नाम सबसे ज्यादा चौके लगाने का रिकॉर्ड है। 4- एक सीजन में सबसे ज्यादा अर्धशतक आईपीएल 2025 के दौरान कुल 63 अर्धशतक लगे। आईपीएल के इतिहास में पहली बार किसी एक सीजन में इतने ज्यादा अर्धशतक बने। इतना ही नहीं, बल्लेबाजों ने 71 बार 50+ का स्कोर बनाया। यह भी एक रिकॉर्ड है। 5- सबसे युवा शतकवीर वैभव सूर्यवंशी न सिर्फ सबसे युवा खिलाड़ी हैं, वह आईपीएल में शतक जड़ने वाले सबसे कम उम्र के बल्लेबाज भी हैं। उन्होंने 14 वर्ष 31 दिन की उम्र में गुजरात टाइटंस के खिलाफ 35 गेंद में शतक जड़ा था। उसके बाद वह क्रिकेट की नई सनसनी बनकर उभरे। पहली बार इतने कम उम्र में किसी ने आईपीएल शतक जड़ा है। 6- किसी भी भारतीय का सबसे तेज आईपीएल सेंचुरी वैभव सूर्यवंशी ने सिर्फ 35 गेंद में शतक ठोककर आईपीएल में किसी भी भारतीय की तरफ से सबसे तेज शतक का रिकॉर्ड भी बनाया। पहली बार 15 वर्ष से कम उम्र के किसी बल्लेबाज ने आईपीएल में शतक जड़ा और पहली बार 36 से भी कम गेंद में किसी भारतीय ने आईपीएल में सेंचुरी ठोकी। 7- पहली बार नॉन-ओपनर ने जड़े 700+ रन मुंबई इंडियंस के सूर्यकुमार यादव ने इस सीजन के दौरान 16 मैच में 717 रन बनाए। आईपीएल इतिहास में पहली बार किसी ऐसे बल्लेबाज ने किसी एक सीजन में 700 से ज्यादा रन बनाए जो ओपनिंग नहीं करता है। 8- पहली बार सीएसके दसवें पायदान पर रही आईपीएल इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ जब चेन्नई सुपर किंग्स पॉइंट्स टेबल में 10वें नंबर पर सबसे फिसड्डी रही। 5 बार की आईपीएल चैंपियन टीम के लिए ये सीजन किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा। 9- किसी भी भारतीय का किसी मैच में सबसे बड़ा स्कोर सनराइजर्स हैदराबाद के अभिषेक शर्मा ने 12 अप्रैल को पंजाब किंग्स के खिलाफ 55 गेंदों में 141 रन की तूफानी शतकीय पारी खेली। यह आईपीएल इतिहास में किसी भी भारतीय खिलाड़ी का सर्वोच्च स्कोर है। 10- ऑरेंज कैप जीतने वाला सबसे युवा बल्लेबाज मिला आईपीएल 2025 में टूर्नामेंट के इतिहास का सबसे युवा ऑरेंज कैप विजेता मिला है। 23 वर्ष, 7 महीने और 19 दिन की उम्र में साई सुदर्शन ने ऑरेंज कैप जीता। उन्होंने गुजरात टाइटंस के लिए 15 मैच में 759 रन बनाए। 11- क्रुणाल पांड्या को दूसरे आईपीएल फाइनल में प्लेयर ऑफ द मैच आईपीएल इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी खिलाड़ी को एक से ज्यादा फाइनल में प्लेयर ऑफ द मैच का अवॉर्ड मिला। पंजाब किंग्स के खिलाफ मंगलवार को आरसीबी की खिताबी जीत में क्रुणाल पांड्या ने सिर्फ 17 रन देकर 2 विकेट लिए। इससे पहले वह 2017 में मुंबई इंडियंस की तरफ से खेलते हुए फाइनल में राइजिंग पुणे सुपर जॉइंट्स के खिलाफ 38 गेंद में 47 रन बनाए थे और प्लेयर ऑफ द मैच रहे थे। 12- तीन अलग-अलग टीमों की कप्तानी करते हुए फाइनल पंजाब किंग्स के श्रेयस अय्यर आईपीएल इतिहास के पहले ऐसे खिलाड़ी बने जो अपनी कप्तानी में 3 अलग-अलग टीमों को फाइनल में पहुंचा चुके हैं। 13- बतौर कप्तान लगातार दूसरी बार आईपीएल फाइनल आईपीएल इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ जब कोई खिलाड़ी लगातार 2 फाइनल में कप्तानी करते दिखा। यह उपलब्धि भी पंजाब किंग्स के कप्तान श्रेयस अय्यर के नाम रही। पिछली बार उनकी ही कप्तानी में कोलकाता नाइट राइडर्स ने आईपीएल का खिताब जीता था। 14- किसी आईपीएल सीजन में किसी गेंदबाज को लगे सबसे ज्यादा छक्के आईपीएल 2025 में किसी एक सीजन में सबसे ज्यादा छक्के खाने का अनचाहा रिकॉर्ड भी बना। राशिद खान ने इस सीजन में 15 मैच खेले और उनकी गेंदों पर कुल 33 छक्के लगे। 15- तीन आईपीएल टीमों के लिए शतक लगाने वाला पहला बल्लेबाज आईपीएल 2025 के दौरान पहली बार ऐसा हुआ जब किसी खिलाड़ी ने 3 अलग-अलग टीमों के लिए शतक का रिकॉर्ड बनाया हो। केएल राहुल आईपीएल इतिहास के पहले ऐसे खिलाड़ी बने। उन्होंने पंजाब किंग्स और लखनऊ सुपर जॉइंट्स के 2-2 शतक लगाए थे। इस बार उन्होंने 18 मई को दिल्ली कैपिटल्स के लिए गुजरात टाइटंस के खिलाफ शतक जड़ा। 16- पहली बार होमग्राउंड से बाहर कोई टीम सभी मैच जीती आरसीबी ने इस सीजन में बेंगलुरु से बाहर हुए सभी 7 मैचों में जीत हासिल की। आईपीएल इतिहास में पहली बार किसी टीम ने होमग्राउंड से बाहर हुए सभी मैचों में जीती है। 17- मुंबई इंडियंस के खिलाफ पहली बार 200+ के लक्ष्य का सफल पीछा आईपीएल इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ जब किसी टीम ने मुंबई … Read more

जज कैश कांड:वकीलों ने सीजेआई को लिख चिट्ठी, जज यशवंत वर्मा के खिलाफ मुकदमा चलाने की मांग

नई दिल्ली दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग की कार्रवाई जल्दी ही शुरू करने की तैयारी है। इस कार्रवाई के लिए सरकार चाहती है कि विपक्ष को भी साध लिया जाए। सरकार चाहती है कि महाभियोग के लिए राजनीतिक सहमति बन जाए। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू सहमति बनाने की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। उनका कहना है कि यह राजनीतिक मामला नहीं है। ऐसे में किसी भी तरह के मतभेद की जरूरत नहीं है। न्यायपालिका से जुड़ा यह एक गंभीर मसला है, जिस पर सभी को एकजुट होकर फैसला करना चाहिए। दरअसल करीब एक महीने पहले ही पूर्व चीफ जस्टिस संजीव खन्ना ने जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ आई रिपोर्ट को सौंपा था। यह रिपोर्ट पीएम और राष्ट्रपति के पास भेजी गई थी। तीन जजों की एक टीम ने जांच की थी और उसमें जस्टिस वर्मा को दोषी पाया गया था। इसके आधार पर ही रिपोर्ट पीएम और राष्ट्रपति को भेजी गई है। 14 मार्च को जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास में आग लग गई थी। इस दौरान बड़े पैमाने पर नोट पाए गए थे और कुछ जल भी गए थे। कैश का इतना बड़ा भंडार मिलने पर सवाल उठे थे तो फिर चीफ जस्टिस ने उनके खिलाफ जांच कराई। इसके अलावा जस्टिस वर्मा का ट्रांसफर इलाहाबाद हाई कोर्ट कर दिया गया। इस मामले में ऐक्शन से पहले होम मिनिस्टर अमित शाह और कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने पीएम नरेंद्र मोदी से मंगलवार को मुलाकात की थी। इस मीटिंग में तय होना था कि आखिर कैसे महाभियोग की प्रक्रिया शुरू की जाए। इसके अलावा उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ से भी भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और अमित शाह ने मुलाकात की थी। इन बैठकों के बाद ही रिजिजू ने विपक्ष के नेताओं से बात की है। दरअसल राज्यसभा और लोकसभा में एनडीए का बहुमत है, लेकिन सरकार चाहती है कि इस मामले में सर्वसम्मति से ही फैसला किया जाए। बता दें कि सरकार मॉनसून सेशन में ही महाभियोग प्रस्ताव लाना चाहती है। मॉनसून सेशन जुलाई के तीसरे सप्ताह में शुरू हो सकता है। यही नहीं कुछ नेताओं की राय तो यह भी है कि विशेष सत्र बुलाया जाए। इस सत्र के दौरान ही महाभियोग प्रस्ताव पर चर्चा हो और वोटिंग करा ली जाए। लोकसभा में प्रस्ताव लाने के लिए कम से कम 100 सांसदों का समर्थन जरूरी है। इसके अलावा 50 राज्यसभा सांसदों का समर्थन होना चाहिए।  वकीलों ने सीजेआई को लिख चिट्ठी, जज यशवंत वर्मा के खिलाफ मुकदमा चलाने की मांग बॉम्बे लॉयर्स एसोसिएशन ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) बीआर गवई को एक पत्र लिखा है। इस पत्र में जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति मांगी गई है। आरोप है कि जब जस्टिस वर्मा दिल्ली हाई कोर्ट के जज थे, तब उनके सरकारी आवास से बहुत सारा कैश मिला था। इस विवाद के चलते उनका तबादला इलाहाबाद हाई कोर्ट में कर दिया गया। पहले तत्कालीन CJI संजीव खन्ना ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी पत्र लिखा था। उन्होंने जस्टिस वर्मा के खिलाफ लगे आरोपों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट की ओर से बनाई गई कमेटी की रिपोर्ट भी भेजी थी। साथ ही, जस्टिस वर्मा ने इस रिपोर्ट पर जो जवाब दिया था, उसे भी साझा किया था। जस्टिस वर्मा पर मुकदमा चलाने की अनुमति मांगी बॉम्बे लॉयर्स एसोसिएशन (BLA) ने 2 जून को लिखे अपने पत्र में जस्टिस वर्मा पर मुकदमा चलाने की अनुमति मांगी है। पत्र पर एसोसिएशन के अध्यक्ष अहमद एम अब्दी और सचिव एकनाथ आर ढोकले के हस्ताक्षर हैं। पत्र में यह भी बताया गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने 21 मई को इस मामले पर दायर एक जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने PIL को ‘समय से पहले’ बताते हुए खारिज कर दिया था। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से कहा था कि वे एफआईआर (FIR) दर्ज कराने के लिए उचित अधिकारियों से संपर्क करें। आपराधिक मुकदमा शुरू करने की अनुमति मांगी गई वकीलों के संगठन ने कहा, ‘यह ध्यान रखना जरूरी है कि मुकदमे लड़ने वाले और आम लोग कानूनी प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल होते हैं।’ एसोसिएशन ने आगे कहा, ‘आवेदक जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 और भारतीय न्याय संहिता, 2023 के तहत आपराधिक मुकदमा शुरू करने की अनुमति मांग रहा है। जस्टिस वर्मा इलाहाबाद हाई कोर्ट के मौजूदा जज हैं। उन पर आरोप है कि उनके सरकारी आवास से बेहिसाब कैश बरामद हुआ था।’ 1991 के वीरस्वामी फैसले का भी किया गया जिक्र पत्र में सुप्रीम कोर्ट के 1991 के के वीरस्वामी मामले के फैसले का भी जिक्र किया गया है। इस फैसले में कहा गया है कि हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के किसी भी मौजूदा जज के खिलाफ CJI की अनुमति के बिना कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं किया जा सकता है। पत्र में कहा गया है कि 1991 के फैसले में यह भी स्पष्ट किया गया है कि हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जज भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत ‘लोक सेवक’ हैं। इसलिए, उन पर आय से अधिक संपत्ति रखने जैसे अपराधों के लिए मुकदमा चलाया जा सकता है। फैसले में यह भी कहा गया है कि राष्ट्रपति भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा चलाने की अनुमति देने के लिए सक्षम प्राधिकारी हैं, लेकिन ऐसी अनुमति CJI की सलाह पर ही दी जानी चाहिए। इन-हाउस जांच कमेटी की रिपोर्ट की कॉपी भी मांगी पत्र में कहा गया है, ‘दिल्ली पुलिस कमिश्नर की ओर से साझा किए गए फोटो और वीडियो सबूतों से न्यायिक ईमानदारी और न्यायपालिका में जनता के विश्वास पर गंभीर सवाल उठते हैं। जांच कमेटी की रिपोर्ट के बावजूद FIR दर्ज नहीं करना कानून के समक्ष समानता और न्यायिक संस्था की विश्वसनीयता को कमजोर करने का जोखिम उठाता है।’ पत्र में जज के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति मांगने के साथ-साथ अधिकारियों को सभी प्रासंगिक सबूतों को सुरक्षित रखने का निर्देश देने की भी मांग की गई है। इसमें आंशिक रूप से जले हुए नोट, तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्डिंग शामिल हैं। बार बॉडी ने इन-हाउस जांच कमेटी की रिपोर्ट की कॉपी भी मांगी है, ताकि वह शिकायत दर्ज करा सके। घटना के वक्त दिल्ली … Read more

आज से शुरू ‘हज’ यात्रा…, ढाई लाख से ज्यादा हज यात्रियों को मक्का में नहीं मिली एंट्री, जानें महत्व, परंपरा और इससे जुड़े नियम

दुबई सऊदी अरब में आज से हज यात्रा शुरू होगी। इसके लिए रविवार तक 14 लाख रजिस्टर्ड तीर्थयात्री मक्का पहुंच चुके हैं, जबकि लाखों लोगों का आना बाकी है। यह यात्रा इस्लामी कैलेंडर के 12वें महीने जिल-हिज्जा की 8वीं से 12वीं तारीख (2025 में 4-9 जून) के बीच होती है। हज मुसलमानों का एक आध्यात्मिक और अनिवार्य धार्मिक कर्तव्य है। हर वो मुस्लिम जो शारीरिक, आर्थिक और मानसिक तौर पर सक्षम और स्वस्थ है, उसके लिए अपने जीवन में कम से कम एक बार हज करना अनिवार्य है। हज इस्लाम धर्म के पांच मूल स्तंभों में से एक है। हर साल दुनिया भर से लगभग 25 लाख मुस्लिम इस पवित्र यात्रा में शामिल होते हैं। इस साल भारत से लगभग 1.75 लाख लोग मक्का पहुंचेंगे। हज के दौरान मुस्लिम काबा (बैतुल्लाह) की परिक्रमा करते हैं और अल्लाह की इबादत में समय बिताते हैं। हज मुस्लिमों के लिए पापों से मुक्ति, आध्यात्मिक शुद्धि और अल्लाह के करीब आने का मौका है। पैगंबर इब्राहिम से शुरू होता है हज का इतिहास हज की शुरुआत पैगंबर इब्राहिम के समय से मानी जाती है। माना जाता है कि इब्राहिम और उनके बेटे इस्माइल ने अल्लाह के आदेश पर काबा का निर्माण किया था। 628 ईस्वी में पैगंबर मोहम्मद ने पहली इस्लामी हज की शुरुआत की। 632 ईस्वी में उन्होंने हज के आधुनिक स्वरूप को स्थापित किया, जो आज भी मुस्लिम मानते हैं। एक मुस्लिम अपने जीवन में कितनी भी बार हज कर सकता है। हालांकि, सऊदी अरब के हज मंत्रालय और कई देशों की सरकारों ने भीड़ को कंट्रोल करने के लिए नियम बनाया है कि एक इंसान पांच साल में सिर्फ एक बार हज कर सकता है। सऊदी अरब में रहने वाले लोगों पर 5 साल का नियम उतनी सख्ती से लागू नहीं होता है, लेकिन उन्हें भी हज के लिए आधिकारिक परमिशन लेनी होती है। 4 लाख हज यात्री पहुंचे हैं मक्का सरकार का मानना है कि पिछले साल की भीषण गर्मी के दौरान हुई मौतों में बड़ी संख्या उन लोगों की थी जो बिना अनुमति के हज करने आए थे। इस साल, आधिकारिक तौर पर लगभग 14 लाख मुसलमान पहले ही मक्का पहुंच चुके हैं और आने वाले दिनों में और भी अधिक लोगों के आने की उम्मीद है। किन लोगों को शहर में प्रवेश से रोका गया? मक्का में एक प्रेस वार्ता में अधिकारियों ने बताया कि उन्होंने 2,69,678 मुसलमानों को बिना अनुमति के शहर में प्रवेश करने से रोका है। नियमों के अनुसार, केवल वैध अनुमति वाले लोगों को ही हज यात्रा करने की अनुमति है, भले ही वे साल भर से शहर में रह रहे हों। बिना अनुमति हज करने का प्रयास करने वाले किसी भी व्यक्ति को गंभीर दंडात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है, जिसमें 5,000 अमेरिकी डॉलर तक का जुर्माना और निर्वासन शामिल है। अधिकारियों ने यह भी बताया कि उन्होंने हज नियमों का उल्लंघन करने के लिए 23,000 से अधिक सऊदी निवासियों पर जुर्माना लगाया है और हज यात्रा से जुड़ी 400 कंपनियों के लाइसेंस रद्द कर दिए हैं। पिछले साल 1,301 हज यात्रियों की हो गई थी मौत पिछले साल हज यात्रा के दौरान कम से कम 1,301 लोगों की मौत हुई थी। इनमें से अधिकांश मौतें अत्यधिक गर्मी के कारण हुईं, जब मक्का में तापमान 50 डिग्री सेल्सियस से भी अधिक पहुंच गया था। इन मौतों में से 83% से अधिक ऐसे तीर्थयात्री थे जिनके पास हज करने का आधिकारिक परमिट नहीं था। इन अनधिकृत तीर्थयात्रियों को आधिकारिक रूप से पंजीकृत हाजियों को मिलने वाली वातानुकूलित सुविधाओं और आश्रयों तक पहुंच नहीं मिल पाई थी, जिससे वे भीषण गर्मी की चपेट में आ गए। विभिन्न देशों से मरने वाले लोगों की संख्या भी रिपोर्ट की गई थी, जिनमें भारत के भी 98 नागरिक शामिल थे। बाद की रिपोर्टों में यह संख्या 201 तक भी बताई गई।

अब बिजली चोरी पकड़वाने पर कंपनी घर बैठे देगी 50 हजार रुपये तक का इनाम, गोपनीय रहेगी शिकायतकर्ता की पहचान

जबलपुर मध्य प्रदेश में बिजली चोरी करने वालों के बुरे दिन आने वाले है। जी हां, मप्र पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी बिजली चोरी पर प्रभावी नियंत्रण के लिए विद्युत मित्र एप लांच करने जा रही है। इस एप के जरिये आम लोग बिजली चोरी की सूचना दे सकते है और पुरस्कार स्वरूप उन्हें पचास हजार रुपये तक की धनराशि मिलेगी।   गोपनीय रहेगी शिकायतकर्ता की पहचान कंपनी ने यह भी दावा किया है कि जानकारी देने वाले व्यक्ति की पहचान गोपनीय रखी जाएगी। कंपनी ने बताया कि इनाम की राशि को लेकर शिकायतकर्ता को इधर-उधर भटकना नहीं होगा। कंपनी सीधे बैंक खाते में शिकायतकर्ता के इनाम की राशि भेजेगी। शिकायत झूठी निकली तो नंबर होगा ब्लाॅक कंपनी ने स्पष्ट किया है कि यदि शिकायत झूठी निकली तो शिकायतकर्ता को एप के जरिए दोबारा कभी शिकायत करने का अवसर नहीं मिलेगा। साथ ही कंपनी के एप में संबंधित फर्जी शिकायतकर्ता का मोबाइल नंबर ब्लाॅक हो जाएगा। जानकारी हो कि पूर्व क्षेत्र कंपनी के 22 जिलों में यह सेवा फिलहाल शुरू होगी।   शिकायत का अवलोकन भी अब होगा ऑनलाइन बताया गया कि शिकायत करने के बाद मामले की स्थिति का अवलोकन भी शिकायतकर्ता ऑनलाइन कर सकता है। शिकायत किस स्तर पर पहुंची है यह पता कर सकता है। अधीक्षण यंत्री संजय आरोरा ने बताया कि पहले बिजली चोरी की शिकायत के लिए दफ्तर में आकर जानकारी देनी होती थी। इनाम की राशि जुर्माना वसूली की प्रक्रिया के बाद मिलती थी। यह लंबी प्रक्रिया थी जिस वजह से इसमें प्रभावी रिस्पांस नहीं मिल पा रहा था। नई व्यवस्था में मोबाइल एप के जरिए आनलाइन शिकायत करनी है।

8वें वेतन आयोग में बड़ा धमाका, Basic Salary में जबरदस्त उछाल, जाने 8वें वेतन आयोग की भूमिका और महत्व

नई दिल्ली 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) की तरफ से केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए एक बड़ा बदलाव आने वाला है। इस बार सैलरी स्ट्रक्चर में लेवल-1 से लेकर लेवल-6 तक के वेतन स्तरों को मर्ज करने का प्रस्ताव सामने आया है। इसका मतलब है कि आपके वेतन और प्रमोशन के मौके दोनों में अच्छी बढ़ोतरी हो सकती है। अगर ये बदलाव लागू होते हैं, तो कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में बढ़ोतरी के साथ-साथ करियर ग्रोथ भी तेजी से होगी। यह नई व्यवस्था संभवतः 1 जनवरी 2026 से लागू हो सकती है, जिससे लाखों सरकारी कर्मचारियों को फायदा मिलेगा। 8वें वेतन आयोग की भूमिका और महत्व केंद्र सरकार हर दस साल में वेतन आयोग बनाती है, जो सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतनमान, भत्ते और पेंशन में संशोधन की सिफारिशें करती है। 8वें वेतन आयोग को जनवरी 2025 में केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी मिली है और इसके सुझाव 1 जनवरी 2026 से लागू होने की संभावना है। इससे देश भर के करीब 50 लाख कर्मचारियों और 65 लाख पेंशनभोगियों को फायदा होगा। लेवल मर्जर: क्या है ये क्रांतिकारी प्रस्ताव?   सरकार के समक्ष एक अहम सुझाव आया है जिसमें वेतन संरचना के शुरुआती छह स्तरों (लेवल 1 से लेवल 6) को घटाकर केवल तीन स्तर (A, B, C) बनाए जाने की बात कही गई है। इसका मकसद है कर्मचारियों के वेतनमान में बढ़ोतरी के साथ ही उनके करियर ग्रोथ को तेज करना। प्रस्ताव के अनुसार: नया लेवल A: लेवल 1 और लेवल 2 को मिलाकर बनाया जाएगा। नया लेवल B: लेवल 3 और लेवल 4 को मर्ज किया जाएगा। नया लेवल C: लेवल 5 और लेवल 6 को एक साथ लाया जाएगा। इससे कर्मचारियों को क्या लाभ होगा? बेसिक सैलरी में उछाल: मर्जर के बाद नए स्तर का बेसिक वेतन आमतौर पर मर्ज किए गए दो स्तरों में से उच्चतम स्तर के बराबर या उससे अधिक होगा। उदाहरण के तौर पर, लेवल 1 की बेसिक सैलरी करीब ₹18,000 से बढ़कर लगभग ₹34,000 तक पहुंच सकती है। प्रमोशन की प्रक्रिया में तेजी: चूंकि लेवल्स की संख्या कम होगी, कर्मचारी तेजी से अगले स्तर तक पहुंच सकेंगे, जिससे उनका करियर ग्रोथ और वेतन वृद्धि भी तेज होगी। वेतन असमानताओं में कमी: अलग-अलग लेकिन समीपवर्ती स्तरों के वेतन में विसंगतियों को खत्म करके सैलरी संरचना को और ज्यादा तार्किक बनाया जाएगा। प्रशासनिक सादगी: कम स्तर होने से पे-रोल मैनेजमेंट और प्रशासनिक प्रक्रियाएं आसान होंगी। किन कर्मचारियों को मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा? सबसे अधिक लाभ उन कर्मचारियों को होगा जो वर्तमान में लेवल-1, लेवल-3 और लेवल-5 पर हैं क्योंकि उनका वेतन सीधे उच्च स्तर के साथ मर्ज होगा और वेतनमान में तुरंत सुधार आएगा। वहीं, लेवल-2, 4 और 6 के कर्मचारियों को भी बेहतर प्रमोशन अवसर मिलेंगे। चुनौतियां और आगे का रास्ता हालांकि यह प्रस्ताव कर्मचारियों के लिए बेहद सकारात्मक है, इसे लागू करने में वित्तीय बोझ, वरिष्ठता निर्धारण और जिम्मेदारियों के आवंटन जैसी चुनौतियां भी हैं। सरकार और वेतन आयोग इन पहलुओं पर गंभीर चर्चा कर रहे हैं, और अंतिम सिफारिशें जल्द ही सामने आएंगी।

UPI सिस्टम में नए API नियम लागू करने जा रहा, जिनका सीधा असर ट्रांजैक्शन पर पड़ेगा, 31 जुलाई से बदलने जा रहे हैं ये नियम

नई दिल्ली अगर आप भी रोज़ाना यूपीआई ऐप्स जैसे Google Pay, PhonePe या Paytm से पेमेंट करते हैं, तो अब सतर्क हो जाइए। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) UPI सिस्टम में नए API नियम लागू करने जा रहा है, जिनका सीधा असर आपके रोज़मर्रा के ट्रांजैक्शन पर पड़ेगा। ये बदलाव न केवल आपकी सुविधा को सीमित करेंगे, बल्कि आपके बैलेंस चेक, ऑटोपे और ट्रांजैक्शन स्टेटस जैसे फीचर्स पर भी सीधी रोक लगाएंगे। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) का कहना है कि यह कदम सिस्टम पर बढ़ते लोड को कम करने और सेवाओं को सुचारू बनाए रखने के लिए जरूरी है। क्यों लाया गया ये नियम? NPCI का कहना है कि तेजी से बढ़ते डिजिटल ट्रांजैक्शन के कारण UPI सिस्टम पर जबरदस्त लोड पड़ रहा है, खासकर ‘पीक ऑवर्स’ यानी सबसे व्यस्त समय के दौरान। इस लोड को संतुलित करने और बेहतर सेवाएं सुनिश्चित करने के लिए कुछ सामान्य फीचर्स जैसे बैलेंस चेक, ऑटोपे और ट्रांजैक्शन स्टेटस चेक को सीमित किया जाएगा। जानिए क्या-क्या बदलेगा बैलेंस चेक पर लिमिट 31 जुलाई 2025 से कोई भी यूज़र एक दिन में एक ऐप के जरिए अधिकतम 50 बार ही अपना बैंक बैलेंस चेक कर सकेगा। इसके अलावा, पीक ऑवर्स (सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे और शाम 5 बजे से रात 9:30 बजे तक) में बैलेंस चेक की सुविधा सीमित या बंद की जा सकती है।  ट्रांजैक्शन स्टेटस चेक पर कंट्रोल यदि कोई ट्रांजैक्शन पेंडिंग या फेल हो जाता है, तो उसकी स्थिति को बार-बार जांचने पर भी रोक होगी। एक ट्रांजैक्शन के स्टेटस को दो घंटे में अधिकतम तीन बार ही चेक किया जा सकेगा।  ऑटोपे फीचर भी नॉन-पीक समय में ही जो यूज़र OTT सब्सक्रिप्शन, SIP या किसी अन्य सर्विस के लिए UPI ऑटोपे का इस्तेमाल करते हैं, उन्हें यह ध्यान रखना होगा कि ऑटोपे का ऑथराइजेशन और डेबिट प्रोसेसिंग केवल नॉन-पीक टाइम में ही होगी। हर ऑटोपे मैन्डेट के लिए अधिकतम तीन प्रयास (3 retries) की इजाजत होगी।  बैंक की जिम्मेदारी भी बढ़ी NPCI ने बैंकों को निर्देश दिए हैं कि हर सफल लेनदेन के बाद ग्राहकों को बैलेंस अलर्ट भेजा जाए, जिससे ग्राहक बार-बार बैलेंस चेक न करें। इसके अलावा, कुछ खास प्रकार की एरर की स्थिति में बैंक को ट्रांजैक्शन फेल मानकर सिस्टम से क्लियर करना होगा। क्यों जरूरी है ये बदलाव? इन नए निर्देशों का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि UPI जैसी अहम डिजिटल सुविधा सभी को फास्ट और भरोसेमंद ढंग से मिल सके। लगातार बढ़ती डिजिटल भीड़ और ट्रांजैक्शन की संख्या को ध्यान में रखते हुए, NPCI इस तरह की टेक्निकल सफाई ला रहा है ताकि नेटवर्क स्लोडाउन या फेल्योर जैसी समस्याओं से बचा जा सके।

भारत सरकार का बड़ा फैसला- 1 जून 2025 से देश के निर्यातकों को टैक्स में बड़ी राहत

नई दिल्ली निर्यात को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए भारत सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। 1 जून 2025 से देश के निर्यातकों को टैक्स में बड़ी राहत मिलने जा रही है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी। इस फैसले से विशेष आर्थिक क्षेत्रों (SEZ), निर्यात-उन्मुख इकाइयों (EOU) और एए धारकों को सीधा लाभ मिलेगा। निर्यातकों के लिए खुशखबरी – Tax छूट फिर से लागू वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा घोषित इस निर्णय के तहत, निर्यात उत्पादों पर मिलने वाली कर छूट की समयसीमा को आगे बढ़ा दिया गया है। इससे पहले यह लाभ 5 फरवरी 2025 तक सीमित था, लेकिन अब इसकी समयसीमा बढ़ाकर एक्सपोर्टर्स को राहत दी गई है। इस नीति के लागू होने से हर स्तर के निर्यातकों को बराबरी का मौका मिलेगा। RODTEP योजना फिर से बनी गेमचेंजर सरकार की RODTEP योजना, जो जनवरी 2021 में शुरू की गई थी, इस फैसले का आधार है। यह योजना खासतौर पर कोविड-19 के बाद व्यापारिक घाटों की भरपाई और एक्सपोर्ट को रफ्तार देने के लिए बनाई गई थी। RODTEP योजना WTO के दिशानिर्देशों के अनुरूप है और इसे डिजिटल प्लेटफॉर्म end-to-end system के जरिए पारदर्शी तरीके से लागू किया जा रहा है। 2025-26 के लिए ₹18,233 करोड़ का बजट आवंटन सरकार ने आने वाले वित्त वर्ष 2025-26 में इस योजना के लिए ₹18,233 करोड़ का बजट निर्धारित किया है। यह सहायता 10,780 घरेलू टैरिफ लाइनें और 10,795 स्पेशल कैटेगरी एचएस लाइनें कवर करेगी। इससे यह तय किया जा सकेगा कि विविध प्रकार के निर्यातकों को योजना का लाभ मिले। भारत के लिए निर्यात का सुनहरा मौका  एक रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक सप्लाई चेन नए सिरे से बन रही है, और भारत के पास इस समय निर्यात बढ़ाने का जबरदस्त अवसर है। भारत की “मिड-टेक”, “लेबर-इंटेंसिव” और “कंज्यूमर फोकस्ड” इंडस्ट्रीज इस प्रोत्साहन से सीधा लाभ उठा सकती हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत अब केवल घरेलू मांग पर आधारित नहीं, बल्कि एक तेज़ी से उभरती हुई वैश्विक प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्था बन चुका है।  

माहवारी स्वच्छता दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम, फ्री दी जाएगी ‘पीरियड किट’

भोपाल  भोपाल शहर में बालिकाओं एवं महिलाओं के बेहतर स्वास्थ्य और स्वच्छता के प्रति प्रेरित करने के लिए नया कदम उठाया जा रहा है। भोपाल के वार्ड क्रमांक 28 के अम्बेडकर नगर क्षेत्र में 28 मई को ‘विश्व महावारी स्वच्छता दिवस’ पर कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। सामाजिक संस्था हम लोग शिक्षा एवं समाज कल्याण समिति द्वारा ’प्रोजेक्ट पिंक’ का आरंभ किया जा रहा है। 28 मई को कोटरा सुल्तानाबाद स्थित आंबेडकर नगर में शिविर लगाकर इसकी शुरुआत होगी। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहियकाओं के साथ 30-30 बालिकाओं के समूह बनाकर उनके लिए यह कार्यशाला आयोजित की जाएगी। संस्था के नीतेश नेमा ने बताया कि ‘प्रोजेक्ट पिंक’ अभियान की शुरूआत महावारी स्वच्छता दिवस से की जा रही है। इसके अंतर्गत किशोर बालिकाओं एवं महिलाओं को ‘पीरियड किट’ प्रदान की जाएगी, जो उनके लिए मददगार बनेगी। इस किट में सेनेटरी नेपकिन के साथ फिटकरी और साबुन भी हैं जो उनके लिए मददगार साबित होगी। उन्होंने कहा कि जो बातें हमारे समाज में सामान्य रूप से नहीं समझाई जाती लेकिन लघु फिल्म के माध्यम से व विषय विशेषज्ञों की कार्यशाला आयोजित कर इस महत्वपूर्ण विषय पर आवश्यक जानकारी किशोर बालिकाओं को प्रदान की जाएगी। विषय विशेषज्ञ आयुषी पचौरी, श्रीमती शालू मजुमदार एवं श्रीमती नीलिमा ढोंके द्वारा किशोर बालिकाओं एवं महिलाओं को विषय की गंभीरता के बारे में समझाया जाएगा। लघु फिल्म के माध्यम से व कार्यशाला आयोजित कर इस महत्वपूर्ण विषय पर आवश्यक जानकारी दी जाएगी।

10 साल तक किया शारीरिक शोषण, युवती को गौ-मांस खिलाया, इस्लाम न अपनाने पर पीटा, पुलिस ने किया केस दर्ज

भिलाई छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के भिलाई नगर में एक दिल दहला देने वाला लव जिहाद का मामला सामने आया है। 26 वर्षीय एक हिंदू युवती ने बादशाह खान (28) पर शादी का झांसा देकर 10 साल तक दुष्कर्म, मारपीट, जबरन गर्भपात और धर्म परिवर्तन के लिए प्रताड़ित करने का गंभीर आरोप लगाया है। युवती ने कहा कि आरोपी ने उसे गौमांस खिलाकर, पूजा-पाठ से रोककर और बच्चे का खतना कराकर उस पर इस्लाम अपनाने का दबाव बनाया। भिलाई नगर पुलिस ने पीड़िता की शिकायत पर बादशाह खान को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। मामला कोर्ट में विचाराधीन है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ बलात्कार, पॉक्सो एक्ट और गर्भपात समेत कई धाराओं में केस दर्ज किया है।   शादी का झांसा देकर दुष्कर्म युवती ने पुलिस को बताया कि 2016 में उसकी मुलाकात भिलाई के हॉस्पिटल सेक्टर निवासी बादशाह खान से हुई थी, जब वह मात्र 17 साल की थी। बादशाह ने प्यार का वादा कर उसे अपने जाल में फंसाया। शादी का झांसा देकर उसने युवती के साथ शारीरिक संबंध बनाए। पीड़िता ने बताया कि 2016 में पहली बार बादशाह ने घर ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। उसके बाद फरवरी 2024 तक उसने लगातार शारीरिक शोषण किया। इस दौरान दो बार गर्भवती होने पर बादशाह ने जबरन गर्भपात कराया। तीसरी बार गर्भवती होने पर युवती ने बच्चा रखने की जिद की। बादशाह ने उर्दू में लिखे एक कागज पर हस्ताक्षर करवाकर दावा किया कि वे अब पति-पत्नी हैं। हालांकि, कोई औपचारिक शादी या निकाह नहीं हुआ।   धर्म परिवर्तन का दबाव और प्रताड़ना युवती ने बताया कि ससुराल पहुंचने पर बादशाह और उसके परिवार ने उस पर इस्लाम अपनाने का दबाव बनाना शुरू किया। उसे गौमांस खाने के लिए मजबूर किया गया, जिसे ससुराल वालों ने सुन्नत बताया। पूजा-पाठ और मंदिर जाने से रोकने के साथ-साथ उसे कलमा पढ़ने और नमाज अदा करने के लिए दबाव डाला गया। विरोध करने पर बादशाह और उसके परिवार ने उसे बेरहमी से पीटा। युवती ने कहा कि कई बार मारपीट इतनी गंभीर थी कि वह कई दिनों तक बिस्तर पर पड़ी रहती थी। इसके अलावा उसका बेटा पांच साल का हुआ, तो उसकी मर्जी के बिना बच्चे का खतना करा दिया, जिससे वह और आहत हुई। लड़कियों को फंसाने का गोरखधंधा युवती ने खुलासा किया कि बादशाह छत्तीसगढ़ स्टूडियो नाम से एक दुकान चलाता था, जहां वह लड़कियों को हिरोइन बनाने का लालच देकर उन्हें अपने जाल में फंसाता था। उसने युवती की तस्वीरें और मोबाइल नंबर फेसबुक पर “फुल नाइट एंजाय, बुक नाउ” लिखकर वायरल कर दिया। उसके बाद पीड़िता को रोजाना 15-20 अश्लील कॉल्स आने लगे, जिससे वह मानसिक रूप से टूट गई। बादशाह ने उसे दूसरों के साथ शारीरिक संबंध बनाने के लिए भी मजबूर किया। लगातार प्रताड़ित करता रहा। पीड़िता ने बताया कि उसने 10 साल तक यह सब सहा। वह सोचती थी कि शायद वह उससे शादी कर लेगा, लेकिन बादशाह ने दूसरी लड़की से संबंध बनाए। उसे और प्रताड़ित किया। पुलिस ने की तुरंत कार्रवाई पीड़िता की शिकायत पर भिलाई नगर पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए बादशाह खान को गिरफ्तार कर लिया। उसके खिलाफ आईपीसी की धारा 376(2)(एन), 313 (गर्भपात), पॉक्सो एक्ट, और अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। टीआई प्रशांत मिश्रा ने पुष्टि की कि आरोपी को जेल भेज दिया गया है। दुर्ग पुलिस प्रवक्ता पद्मश्री तंवर ने बताया कि अन्य आरोपों की जांच जारी है। सीएसपी सत्य प्रकाश तिवारी ने कहा कि पीड़िता के साथ 8-10 साल तक शोषण हुआ। आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। पीड़िता ने कोर्ट से फांसी की सजा की मांग की है, जिससे ऐसी घटनाएं भविष्य में न हों।

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बताया- BSNL ने वित्त वर्ष 2025 में पहली बार लगातार दो तिमाही में कमाया मुनाफा

नई दिल्ली भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) ने मंगलवार को जनवरी-मार्च तिमाही के लिए 280 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ दर्ज किया। दूरसंचार कंपनी 2024-25 की अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में पहली बार घाटे से बाहर निकली है। यह कंपनी के मुनाफे की लगातार दूसरी तिमाही रही।केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मीडिया से बात करते हुए भारत की दूरसंचार कंपनी बीएसएनएल के लिए इसे एक बहुत बड़ा दिन बताया। उन्होंने कहा, “बीएसएनएल ने पहली बार 18 वर्षों में दो तिमाहियों में नेट प्रॉफिट दर्ज किया है । कंपनी ने अक्टूबर-दिसंबर 2024 में 262 करोड़ रुपए का नेट प्रॉफिट बनाया और जनवरी-मार्च में 280 करोड़ रुपए का नेट प्रॉफिट बनाया।” बीएसएनएल को पिछले वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में 849 करोड़ रुपए का घाटा हुआ था। पूरे वित्त वर्ष 2025 के लिए कंपनी का घाटा अब 58 प्रतिशत घटकर 2,247 करोड़ रुपए रह गया है, जो वित्त वर्ष 2024 में 5,370 करोड़ रुपए था। सरकारी स्वामित्व वाली दूरसंचार कंपनी की कुल आय 2024-25 के दौरान 10 प्रतिशत बढ़कर 23,427 करोड़ रुपए हो गई, जो 2023-24 में 21,302 करोड़ रुपए थी। स्पेक्ट्रम आवंटन और पूंजी निवेश सहित रणनीतिक पहलों के माध्यम से सरकार के समर्थन ने कंपनी के संचालन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कंपनी ने 2024-25 में 5,396 करोड़ रुपये का ईबीआईटीडीए दर्ज किया, जो 2023-24 में 2,164 करोड़ रुपए था। कंपनी का मार्जिन वित्त वर्ष 2024 में 10.15 प्रतिशत से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में 23.01 प्रतिशत हो गया। बीएसएनएल ने वित्त वर्ष के दौरान व्यय लागत में 3 प्रतिशत की कटौती की है, जो कि 2023-24 में 26,673 करोड़ रुपए से घटकर 25,841 करोड़ रुपए हो गया है। कंपनी 4जी रोलआउट और फाइबर-ऑप्टिक इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड के साथ अपने नेटवर्क का तेजी से विस्तार कर रहा है। बीएसएनएल ने शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में कनेक्टिविटी को मजबूत किया है और नेटवर्क में निर्बाध इंटरनेट एक्सेस के लिए राष्ट्रीय वाईफाई रोमिंग के साथ ग्राहक-केंद्रित डिजिटल इनोवेशन की शुरुआत की है। बीएसएनएल के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक ए. रॉबर्ट जे. रवि ने कहा, “यह शानदार तेजी पेशेवर प्रबंधन, सरकारी समर्थन और शीर्ष और निचले स्तर पर निरंतर ध्यान केंद्रित करने का प्रमाण है। बीएसएनएल को न केवल पुनर्जीवित किया जा रहा है, बल्कि इसे फिर से परिभाषित किया जा रहा है।” उन्होंने आगे कहा, “अनुशासित लागत नियंत्रण और 4जी/5जी की स्थापना के साथ हम विकास की इस गति को बनाए रखेंगे। साथ ही हर भारतीय को सस्ती, उच्च गुणवत्ता वाली कनेक्टिविटी प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हमारा अंतिम लक्ष्य केवल मुनाफा कमाना तक सीमित नहीं रहेगा। हम सार्वजनिक सेवा में दूरसंचार उत्कृष्टता को फिर से परिभाषित करेंगे। जब हम लगातार सही चीजें करते हैं, उत्कृष्ट सेवा प्रदान करते हैं, वंचितों तक पहुंचते हैं, समावेशिता के लिए इनोवेशन करते हैं तो मुनाफा स्वाभाविक रूप से आएगा।”

अब भारत आतंकवाद के खात्मे को एक लक्ष्य मानता है, पाकिस्तान सेना मौजूदा समय में आईसीयू में है : तरुण चुघ

नई दिल्ली भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने मंगलवार को कहा कि पाकिस्तान सेना मौजूदा समय में आईसीयू में है। तरुण चुघ ने मीडिया से बातचीत में कहा कि गुजरात के गांधीनगर में प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन से यह साफ है कि अब भारत आतंकवाद के खात्मे को एक लक्ष्य मानता है। प्रधानमंत्री मोदी ने गुजरात के गांधीनगर में अपने संबोधन में पाकिस्तान के खिलाफ ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि हमने पाकिस्तान के 9 आतंकी ठिकानों को महज 20 मिनट में ध्वस्त कर दिया। इसे हमने वीडियो में भी कैद कर लिया, ताकि अगर कोई सबूत मांगे, तो उसे दिखा सकें। पाकिस्तान इस बात को जानता है कि वह हमसे जीत नहीं सकता, इसलिए वह सीमापार से आतंकवादी भेजकर यहां पर माहौल को अव्यवस्थित करना चाहता है, लेकिन हम ऐसा नहीं होने देंगे। भाजपा नेता तरुण चुघ ने प्रधानमंत्री के इस संबोधन को 140 करोड़ देशवासियों की आवाज बताया। कहा कि आज की तारीख में देशवासी नहीं चाहते हैं कि कोई भी आतंकवादी अपना फन उठाए। पाकिस्तान को हर हमले की कीमत चुकानी होगी। साथ ही, तरुण चुघ ने सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल को ‘बारात’ कहने पर शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि शिवसेना (यूबीटी) के नेता सेना की बहादुरी पर सवाल उठा रहे हैं और सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के संबंध में विवादित टिप्पणी कर रहे हैं, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता है। उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की तारीफ की। बोले, अगर बाला साहेब ठाकरे जिंदा होते, तो प्रधानमंत्री मोदी को गले लगाते। ऑपरेशन सिंदूर के जरिए भारतीय सेना ने पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद को मुंहतोड़ जवाब दिया। उन्होंने शिवसेना (यूबीटी) पर हिंदुत्व की विचारधारा से समझौता किए जाने की निंदा की। कहा कि पहले जो नेता हिंदुत्व की बातें किया करते थे, अब वह पार्टी हनुमान चालीसा पढ़ने वालों को जेल भेज रही है। अब इन लोगों को आपत्ति हो रही है कि आखिर कोई कैसे हनुमान चालीसा पढ़ सकता है। अब यह पार्टी मुस्लिम लीग की विचारधारा पर चल रही है, जिसे हिंदू और हिंदुत्व से कोई लेना-देना नहीं रह गया है। शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत ने ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के बारे में अलग-अलग देशों में पहुंचे सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल को ‘बारात’ कहा था। उन्होंने कहा था कि इस बारात को भेजने की कोई ज़रूरत नहीं थी। प्रधानमंत्री कमजोर हैं। भाजपा ने ऑपरेशन सिंदूर का राजनीतिकरण कर दिया है। उन्हें हर चीज में राजनीति करने की आदत है। इंडिया ब्लॉक को इस ‘बारात’ का बहिष्कार करना चाहिए। इसके अलावा, शिवसेना (यूबीटी) के संपादकीय में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर प्रधानमंत्री मोदी को आड़े हाथों लिए जाने पर तरुण चुघ ने कहा, “शिवसेना की विरासत मौजूदा समय में उन लोगों के हाथों में है, जो आतंकवाद के मारे जाने पर दुख जाहिर करते हैं और वीरगति को प्राप्त हुए सैनिकों की मौत पर तंज कसते हैं। यह ‘सामना’ नहीं, बल्कि शर्म का दस्तावेज है। उद्धव ठाकरे के लोग ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर भी राजनीति कर रहे हैं। यह शर्मनाक है। ऐसे लोगों से आत्मबल की अपेक्षा नहीं की जा सकती है।” इसके अलावा, भाजपा नेता तरुण चुघ ने झारखंड के पलामू में नक्सली कमांडर के मारे जाने पर कहा कि भारत के खिलाफ काम करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। भारत विरोधी गतिविधियों में संलिप्त लोगों को हम बिल्कुल भी नहीं बख्शेंगे। बता दें कि झारखंड के पलामू में सुरक्षाबलों ने नक्सल विरोध अभियान के तहत नक्सलियों के टॉप कमांडर तुलसी भुइयां को मार गिराया है।

लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर का शासन, न्याय और सुशासन का प्रतीक, सफाई अभियान में शामिल हुए प्रभारी मंत्री

भोपाल नगरीय विकास एवं आवास मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा है कि अयोध्या में भगवान श्रीराम लला मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के बाद सतना जिले के धार्मिक स्थल चित्रकूट में तीर्थ यात्रियों का आवागमन कई गुना बड़ा है। इस बात को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार चित्रकूट के समग्र विकास के लिये परियोजना कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा कि चित्रकूट को विकास के जरिए भारत के नक्शे पर पहचान दिलाई जाएगी। सतना जिले के प्रभारी मंत्री श्री विजयवर्गीय सोमवार को चित्रकूट में रामायण कुटी में साधु-संतों से भेंट कर कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मंत्री श्री विजयवर्गीय ने कहा कि चित्रकूट को हरा-भरा रखने के लिये मंदाकिनी नदी के आसपास 5 लाख पौधे लगाएं जाएंगे। उन्होंने इस कार्य के लिये जनभागीदारी पर जोर दिया। कार्यक्रम में नगरीय विकास एवं आवास राज्यमंत्री श्रीमती प्रतिमा बागरी, विधायक श्री सुरेन्द्र सिंह गहरवार, महापौर योगेश ताम्रकार, रामायण कुटी के संत रामहृदय दास और संतगण मौजूद थे। प्रभारी मंत्री श्री विजयवर्गीय का ग्रामोदय विश्वविद्यालय में व्याख्यान प्रभारी मंत्री श्री विजयवर्गीय ने ग्रामोदय विश्वविद्यालय के व्याख्यानमाला में अपने संबोधन में कहा कि लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर का शासन अनूठा उदाहरण है। माता अहिल्या कुशल प्रशासक और रणनीतिकार महिला शासक रहीं है। तत्कालीन समय में सारा देश युद्ध के वातावरण में था लेकिन उन्होंने अपने राज्य में कोई भी युद्ध नहीं होने दिया। मंत्री श्री विजयवर्गीय ने कहा कि 31 मई से पूरे देश में लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जयंती समारोह को जयंती वर्ष के रूप में में मनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर ने सनातन परंपरा को पल्लवित करने का काम किया है। उन्होंने देश भर में 250 मंदिर बनवाएं। लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर से जीवन से बहुत कुछ सीखा जा सकता है और हर वर्ग का व्यक्ति उनके जीवन का अनुसरण कर महान बन सकता है। मंत्री श्री विजयवर्गीय ने विश्वविद्यालय में आयोजित प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने लोकमाता अहिल्याबाई के जीवन चरित्र पर आधारित चित्र तैयार किये थे। मंदाकिनी नदी के सफाई अभियान में शामिल हुए प्रभारी मंत्री जल गंगा संवर्द्धन अभियान में प्रभारी मंत्री श्री विजयवर्गीय मंदाकिनी नदी के सफाई अभियान में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि पवित्र मंदाकिनी नदी की सफाई और गाद निकालने का कार्य साल भर चलेगा। मंत्री श्री विजयवर्गीय ने कहा कि नदी को स्वच्छ रखने के लिये उनके विभाग की तरफ से हर संभव सहायता की जाएगी।  

दाहोद स्थित रोलिंग स्टॉक वर्कशॉप में लोको निर्माण केंद्र परिवर्तन की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम

नई दिल्ली भारतीय रेल ने मालवाहन क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण छलांग लगा दी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 26 मई, 2025 को गुजरात के दाहोद स्थित रोलिंग स्टॉक वर्कशॉप में लोको निर्माण केंद्र का लोकार्पण किया जाना इस परिवर्तन की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। एक ऐसा कदम जो तेज गति, माल वाहन में वृद्धि और सतत विकास को गति देने की प्रतिबद्धता से परिपूर्ण होगा। इस अत्याधुनिक सुविधा में 9,000 हॉर्सपावर क्षमता वाले 1,200 अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक मालवाहक इंजनों का निर्माण किया जाएगा। इससे मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड को बढ़ावा मिलेगा। ये इंजन 4,500 से 5,000 टन तक के भारी माल को तीव्र चढ़ाई पर भी आसानी से ले जाने में सक्षम हैं। जिससे भारी मालवाहन परिवहन में क्रांतिकारी परिवर्तन आएगा। मेक इन इंडिया पहल के तहत निर्मित ये इंजन अत्याधुनिक IGBT-आधारित प्रणोदन तकनीक से सुसज्जित हैं, जो ऊर्जा दक्षता और संचालन प्रदर्शन को नई ऊंचाइयों पर ले जाते हैं। ये विशेषताएं भारतीय रेल को आधुनिक, विश्वसनीय और पर्यावरण अनुकूल मालवाहक लॉजिस्टिक्स के अग्रणी पथ पर ले जाती हैं। 9000 हॉर्सपावर की यह लोकोमोटिव भारतीय रेल द्वारा विकसित सबसे शक्तिशाली एकल-इकाई इलेक्ट्रिक इंजन है। अब तक मालवाहक इंजन आमतौर पर 4500 या 6000 हॉर्सपावर की क्षमता वाले चलते थे। जबकि 12,000 हॉर्सपावर के इंजन भी हैं, वे दो 6000 हॉर्सपावर इकाइयों को जोड़कर बनाए जाते हैं। इसके विपरीत, दाहोद में निर्मित यह इंजन एकीकृत उच्च-शक्ति समाधान प्रदान करता है, जो लंबे और भारी माल गाड़ियों को आसानी से खींच सकता है। इस बढ़ी हुई क्षमता का अर्थ है कम ट्रिप्स में अधिक माल परिवहन। जिससे समय की बचत, भीड़भाड़ में कमी और बेहतर लॉजिस्टिक्स दक्षता सुनिश्चित होती है। इससे रेल यातायात अनुकूलित होगा। जिससे व्यस्त मार्गों पर दबाव घटेगा। साथ ही, मानव संसाधन और ऊर्जा खपत में कमी आएगी। ये सभी लाभ उद्योगों के लिए लॉजिस्टिक्स लागत को घटाकर मूल्य प्रतिस्पर्धा और आपूर्ति श्रृंखला को बेहतर बनाएंगे। एक समय ऐसा भी था जब रेलवे कार्यों का प्रमुख केंद्र रहे दाहोद में गतिविधियां घट गई थीं। 2022 में प्रधानमंत्री मोदी ने इसे रेलवे निर्माण के एक नए केंद्र के रूप में पुनः स्थापित करने का दृष्टिकोण रखा। आज यह दृष्टिकोण साकार हो रहा है। लोको निर्माण केंद्र भारतीय रेल के लिए ब्रॉड गेज और निर्यात के लिए स्टैंडर्ड गेज दोनों प्रकार के इंजन बनाने में सक्षम है। यह दोहरी क्षमता भारत को वैश्विक रेल निर्माण बाजार में मजबूत स्थिति प्रदान करती है। इस परियोजना में 89% पुर्जे भारत में बनाए गए हैं, जिससे यह ‘मेक इन इंडिया’ और ‘मेक फॉर वर्ल्ड’ दोनों अभियानों के अनुरूप है। 9000 हॉर्सपावर इंजन की खासियत इसकी सततता में निहित है। इसका निर्माण हरित ऊर्जा से संचालित फैक्ट्री में होता है, जिसे ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग टैग मिला है। इसके अलावा, इसमें पुनर्योज्य ब्रेकिंग तकनीक भी है, जो ब्रेक लगने पर ऊर्जा को ग्रिड में वापस भेजती है। जिससे कार्बन फुटप्रिंट कम होता है। ये विशेषताएं भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं को सशक्त करती हैं। इस इंजन में ‘कवच’ प्रणाली (भारत की स्वदेशी टक्कर-रोधी प्रणाली), वातानुकूलित ड्राइवर केबिन, कम शोर और कंपन जैसी विशेषताएं हैं, जो सुरक्षा और सुविधा सुनिश्चित करती हैं। इंजन के सभी ओर लगे कैमरे निगरानी और सुरक्षा को और बेहतर बनाते हैं। इसके शौचालय में इलेक्ट्रॉनिक लॉक होते हैं जो केवल इंजन के स्थिर रहने पर खुलते हैं। जिससे संचालन अनुशासन सुनिश्चित होता है। दाहोद सुविधा की एक प्रमुख विशेषता कौशल विकास पर ज़ोर है। एक वर्चुअल डिजिटल मॉडल विकसित किया गया है, जो मैकेनिकों और ड्राइवरों को प्रशिक्षण देने में सहायता करता है। इस परियोजना से जुड़े अवसंरचना विकास के तहत 85% नौकरियां स्थानीय युवाओं को मिली हैं। कार्यबल की तकनीकी क्षमताओं को बढ़ाने के लिए विशेष प्रशिक्षण मॉड्यूल बनाए गए हैं। यह लोको निर्माण केंद्र न केवल रोजगार सृजित कर रहा है, बल्कि दाहोद क्षेत्र में उद्योगों और आधारभूत संरचना के विकास को भी गति दे रहा है। 9000 हॉर्सपावर इंजन मालवाहन परिवहन की एक नई प्रणाली का केंद्र बनने जा रहा है। इसकी शक्ति, दक्षता और डिजाइन भारतीय रेल को अधिक प्रतिस्पर्धी, अधिक टिकाऊ और भविष्य की आवश्यकताओं के लिए बेहतर सुसज्जित बनाएंगे। तकनीक, क्षेत्रीय विकास और वैश्विक दृष्टिकोण के संयोजन से दाहोद में बना यह इंजन न केवल भारत में बल्कि वैश्विक स्तर पर भी मालवाहन परिवहन की दिशा को नया आयाम देगा।

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