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भारत का तुर्किए पर कड़ा प्रहार: अब Celebi Airport सर्विसेज का सिक्योरिटी क्लियरेंस किया रद

नई दिल्ली भारत के खिलाफ सैन्य कार्रवाई में पाकिस्तान की मदद करने वाले तुर्किए के खिलाफ मोदी सरकार लगातार एक्शन ले रही है। शुक्रवार को नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो ने सेलेबी एयरपोर्ट सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की सुरक्षा मंजूरी  तत्काल प्रभाव से रद कर दी है। सरकार ने जानकारी दी कि राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में यह फैसला लिया गया है। सेलेबी एक तुर्किए की कंपनी है जो भारत में ग्राउंड हैंडलिंग सेवाएं देती है. यह कंपनी मुंबई, दिल्ली, हैदराबाद सहित कई प्रमुख हवाई अड्डों पर बैगेज हैंडलिंग, रैंप सर्विस, कार्गो हैंडलिंग जैसी सेवाएं देती रही है। एयरपोर्ट पर कई अहम जिम्मेदारी संभालते हैं सेलिबी के कर्मचारी सेलिबी एविएशन भारतीय एयरपोर्ट पर ग्राउंड हैंडलिंग, कार्गो प्रबंधन और एयरसाइड ऑपरेशन्स से जुड़े काम करती है। इस कंपनी से जुड़े कर्मचारी एयरसाइड जोन में काम करते हैं, जो एयरपोर्ट्स के हाई सिक्योरिटी वाले क्षेत्र हैं, जो विमाने से सीधे संपर्क में आते हैं। सेलिबी के कर्मचारी एयरपोर्ट पर कार्गो लॉजिस्टिक्स और पैसेंजर्स बैगेज भी संभालते हैं। भारत के खिलाफ पाकिस्तान ने दागे थे तुर्किए के बने ड्रोन भारतीय सेना ने जानकारी दी है कि तुर्किए ने पाकिस्तान को सैन्य ड्रोन मुहैय्या कराया है, जिसका इस्तेमाल भारत के खिलाफ किया गया था। वहीं, ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत पर ड्रोन हमले करने में तुर्की के सलाहकारों ने पाकिस्तानी सेना की मदद की थी।

जब तक पाकिस्तान आतंकवाद को पूरी तरह से खत्म नहीं करता है, तब तक सिंधु जल संधि पर रोक जारी रहेगी: जयशंकर

नई दिल्ली भारत और पाकिस्तान के बीच कई दिनों तक रहे तनाव पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा है कि इस दौरान हमें काफी अंतरराष्ट्रीय समर्थन मिला। भारत के पास यूएनएससी का प्रस्ताव था कि अपराधियों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए और सात मई को ऑपरेशन सिंदूर के जरिए से जवाबदेह ठहराया भी गया। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर पाकिस्तान के आतंकियों के खिलाफ चलाया गया था और इस दौरान पाकिस्तानी आर्मी के पास एक विकल्प था कि वह अलग खड़ी रहे और हस्तक्षेप न करे। विदेश मंत्री ने यह भी साफ कर दिया है कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद को पूरी तरह से खत्म नहीं करता है, तब तक सिंधु जल संधि पर रोक जारी रहेगी। तनाव में कुछ नरमी आने के बाद पाकिस्तान ने बीते दिन भारत को पत्र लिखकर जल संधि पर फिर से विचार करने की अपील की थी। होंडुरास दूतावास के उद्घाटन के अवसर पर विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने कहा कि हमारे लिए यह बहुत अच्छी बात है कि हमारे पास होंडुरास का नया दूतावास है। वे उन देशों में से एक हैं जिन्होंने पहलगाम आतंकवादी हमले के समय मजबूत एकजुटता व्यक्त की थी। विदेश मंत्री ने साफ किया कि भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध पूरी तरह से द्विपक्षीय ही रहेंगे। उन्होंने कहा कि यह सालों से राष्ट्रीय सहमति है और इसमें बिल्कुल भी बदलाव नहीं हुआ है। प्रधानमंत्री मोदी ने भी स्पष्ट कर दिया है कि पाकिस्तान के साथ बातचीत केवल आतंकवाद पर होगी। पाकिस्तान के पास आतंकवादियों की एक लिस्ट है, जिसे सौंपे जाने की जरूरत है, और उन्हें आतंकवादियों के बुनियादी ढांचे को बंद करना होगा। वे जानते हैं कि क्या करना है। हम उनके साथ आतंकवाद के बारे में चर्चा करने के लिए तैयार हैं। ये वे बातचीत हैं, जो संभव हैं। भारत और पाकिस्तान के बीच गोलीबारी और सैन्य कार्रवाई बंद करने पर विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने कहा, “हमने आतंकवादी ढांचे को नष्ट करके जो लक्ष्य निर्धारित किए थे, उन्हें हासिल कर लिया है। चूंकि प्रमुख लक्ष्य हासिल कर लिए गए थे, इसलिए मुझे लगता है कि हमने उचित रूप से यह रुख अपनाया, क्योंकि ऑपरेशन की शुरुआत में ही हमने पाकिस्तान को यह संदेश भेज दिया था कि हम आतंकवादी ढांचे पर हमला कर रहे हैं, न कि सेना पर और पाकिस्तानी सेना के पास यह विकल्प था कि वह अलग खड़ी रहे और हस्तक्षेप न करे। उन्होंने इस अच्छी सलाह को न मानने का फैसला किया। एक बार 10 मई की सुबह उन्हें बुरी तरह से नुकसान पहुंचा। सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि हमने कितना नुकसान किया और उन्होंने कितना कम नुकसान किया। यह स्पष्ट है कि गोलीबारी बंद करना कौन चाहता था।” सिंधु जल संधि पर अभी जारी रहेगी रोक पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए सिंधु जल संधि को रोकने समेत कई अहम फैसले किए थे। जयशंकर ने साफ किया है कि सिंधु जल संधि स्थगित है और यह तब तक स्थगित रहेगी जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को विश्वसनीय तरीके से रोकता नहीं है। उन्होंने कहा, ”कश्मीर पर चर्चा के लिए केवल एक ही बात बची है, वह है पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में अवैध रूप से कब्जाए गए भारतीय क्षेत्र को खाली करना, हम इस चर्चा के लिए तैयार हैं।” उल्लेखनीय है कि 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जवाब भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के जरिए से लिया था। पाकिस्तान और पीओके में आतंकी ठिकानों पर की गई एयर स्ट्राइक में जैश और लश्कर जैसे आतंकी संगठनों के 100 से ज्यादा आतंकवादी ढेर हो गए थे।

भाजपा नेता गुलफाम सिंह हत्याकांड में संभल प्रशासन की कार्रवाई, आरोपियों के अवैध कब्जों पर चलाया बुलडोज

संभल उत्तर प्रदेश के संभल में जिला प्रशासन ने भाजपा नेता गुलफाम सिंह हत्या मामले में गुरुवार को आरोपियों द्वारा किए गए अवैध कब्जे पर बुलडोजर चलाकर उसे ध्वस्त कर दिया। गुलफाम सिंह हत्याकांड में नामजद सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। हालांकि, अब प्रशासन आरोपियों के अवैध कब्जों पर कार्रवाई कर रहा है। इस मामले में मुख्य आरोपी धर्मवीर ने बदायूं कोर्ट में सरेंडर किया था, जिसके बाद पुलिस और प्रशासन ने आरोपियों के खिलाफ शिकंजा और कस दिया है। मुख्य आरोपी के सरेंडर करने के बाद पुलिस ने अवैध निर्माणों पर कार्रवाई तेज कर दी है। हत्या के इस मामले में ब्लॉक प्रमुख रवि और उसके पिता ग्राम प्रधान महेश को मुख्य साजिशकर्ता बताया गया था। उनके गांव मैढोली में तालाब पर किए गए अतिक्रमण सहित एक अन्य गांव में अवैध कब्जे को बुलडोजर चलाकर ध्वस्त कर दिया गया है। प्रशासन ने बताया कि इन दोनों पर जमीन कब्जाने के छह मामले दर्ज किए जा चुके हैं। इसके अलावा, कोतवाली गुन्नौर क्षेत्र के जगन्नाथपुर गांव में भी पुलिस ने बुलडोजर कार्रवाई कर अवैध निर्माणों को नेस्तनाबूद किया है। उल्लेखनीय है कि मार्च में संभल जिले में भाजपा नेता गुलफाम सिंह यादव की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। जांच में पता चला था कि जहरीला इंजेक्शन लगाकर उनकी हत्या की गई थी। पुलिस ने हत्या की साजिश के आरोप में ब्लॉक प्रमुख रवि यादव और उसके पिता ग्राम प्रधान महेश यादव को पहले ही गिरफ्तार कर लिया था। बाद में हत्यारोपी ने बुर्का पहनकर बदायूं कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया। इससे पहले, गुलफाम सिंह यादव के बेटे दिव्य प्रकाश यादव ने दावा किया था कि उनके पिता की हत्या पूर्व नियोजित साजिश के तहत की गई थी। उनका यह भी कहना था कि यदि पहले ही साजिश के बारे में जानकारी मिल गई होती, तो शायद इस घटना को रोका जा सकता था।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ में तबाह किए गए लश्कर-ए-तैयबा के अड्डों को अब दोबारा बसाने की जिम्मेदारी पाक सरकार ने ली

इस्लामाबाद पाकिस्तान ने एक बार फिर दुनिया के सामने अपनी असली सोच का खुला सबूत दे दिया है। भारत द्वारा चलाए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में तबाह किए गए आतंकवादी लश्कर-ए-तैयबा के अड्डों को अब दोबारा बसाने की जिम्मेदारी खुद पाकिस्तान सरकार ने ले ली है। ये एलान खुद शहबाज शरीफ के मंत्री राणा तनवीर हुसैन ने किया है। राणा तनवीर ने वहां सरेआम कहा कि सरकार इन ठिकानों को अपने खर्चे पर फिर से बनाएगी। इतना ही नहीं, उन्होंने ये भी बताया कि खुद प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ और पाकिस्तानी फौज के प्रमुख असीम मुनीर इन निर्माण कार्यों में व्यक्तिगत आर्थिक मदद देंगे। पाकिस्तान के मीडिया ने भी इस बयान को प्रमुखता से छापा है। ऑपरेशन सिंदूर में तबाह हुए थे लश्कर के ठिकाने गौरतलब है कि भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर के 9 अहम ठिकानों पर धावा बोलकर लश्कर-ए-तैयबा के कई अड्डों को तबाह कर दिया था। इन हमलों में 100 से ज्यादा आतंकियों को मौत के घाट उतार दिया गया था। इस अभियान के बाद दोनों देशों की सेनाओं के बीच तनाव काफी बढ़ गया था, लेकिन बाद में युद्धविराम पर सहमति बनी। दी जाती थी आतंकियों को ट्रेनिंग दरअसल मुरीदके लाहौर से करीब 33 किलोमीटर दूर है, वहां लश्कर-ए-तैयबा का मुख्यालय मरकज-ए-तैयबा नाम से स्थित है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 200 एकड़ में फैले इस परिसर में आतंकियों को ट्रेनिंग दी जाती थी, उनकी भर्ती की जाती थी और वहीं से भारत पर हमलों की साजिशें रची जाती थीं। यही वह जगह है जहां से 1980 में पाकिस्तान की आईएसआई की मदद से हाफिज सईद ने लश्कर-ए-तैयबा की नींव रखी थी। अब जब पाकिस्तान खुद इन तबाह हुए अड्डों को दोबारा खड़ा करने की बात कर रहा है, तो इससे साफ हो जाता है कि वो आतंक के खिलाफ लड़ाई का केवल नाटक करता है, असल में वह उसे पाल-पोस रहा है।

प्रदेश के हर गांव में उपलब्ध कराएंगे सिंचाई की सुविधा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि ये मध्यप्रदेश के विकास का दौर है। विकास के प्रकाश से प्रदेश का कोई कोना वंचित नहीं रहेगा। विकास के कामों में धन की कोई कमी नहीं आने दी जाएगी। प्रदेश में जल संरक्षण से जुड़ी गतिविधियों के साथ-साथ सिंचाई सुविधाओं का विकास भी हमारी सरकार कर रही है। प्रदेश के हर गांव में हमारी सरकार सिंचाई की स्थाई सुविधा उपलब्ध कराएगी। नदी जोड़ो अभियान में हम इसी दिशा में बढ़ रहे हैं। दो बड़ी नदी जोड़ो परियोजनाओं पर काम प्रारंभ हो चुका है। तीसरी नदी जोड़ो परियोजना के लिए हम महाराष्ट्र सरकार के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरुवार को रीवा जिले की सिरमौर विधानसभा क्षेत्र के दिव्यगवां में विकास कार्यों के लोकार्पण एवं भूमि-पूजन तथा जल गंगा संवर्धन अभियान में जनसंवाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दिव्यगवां में शासकीय बिरसा मुंडा महाविद्यालय (लागत करीब 6 करोड़ रुपये) सहित कुल 50.73 करोड़ रुपये की लागत वाले 5 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं 2 कार्यों का भूमि-पूजन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जल गंगा संवर्धन अभियान में रीवा जिले में करीब 7 करोड़ रूपए की लागत से निर्मित 501 नए खेत तालाबों का लोकार्पण भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह विकास यज्ञ है, रुकेगा नहीं, थमेगा नहीं। उन्होंने क्षेत्रीय ग्रामीणों से अपील की कि वे सभी विकास के कामों में सरकार का सहयोग करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बैकुंठपुर में नया कॉलेज भवन बनाने, चौखंडी में सांदीपनी विद्यालय बनाने, जनपद पंचायत जवां को नगर परिषद बनाए जाने, सिंचाई योजना के अंतर्गत जनपद पंचायत जवां के कुछ चयनित ग्राम समूहों को आपस में नहरों से जोड़ने और यहां स्टॉप डेम निर्माण के लिए राशि मंजूर करने की घोषणा के अलावा इसी जनपद क्षेत्र के प्रस्तावित 3 ग्राम समूहों की एक पृथक ग्राम पंचायत बनाने की घोषणा भी की। मुख्यमंत्री ने उस कॉलेज का किया‍लोकार्पण जिसे उच्च शिक्षा मंत्री के रूप में किया था स्वीकृत मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उच्च शिक्षा को और बेहतर एवं गुणवत्तापरक बनाने के लिए हमारी सरकार पूरी ताकत से काम कर रही है। उन्होंने हर्ष जताते हुए बताया कि उच्च शिक्षा मंत्री के रूप में उन्होंने दिव्यगवां में कॉलेज मंजूर किया था और आज उसी कॉलेज का वे बतौर मुख्यमंत्री लोकार्पण कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस कॉलेज में 3 हजार विद्यार्थी पढ़ रहे हैं, जिसमें 80 प्रतिशत बेटियां हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि बहनों और बेटियों के सर्वांगीण विकास के लिए सरकार कोई कसर नहीं रखेगी। इनकी पढ़ाई-लिखाई के लिए जितनी जरूरत, उतने विद्यालय और महाविद्यालय खोले जाएंगे। उन्होंने कहा कि बच्चों की पढ़ाई लिखाई, कॉपी किताबें, गणवेश, साईकल, लैपटॉप, स्कूटी देने के अलावा हमारी सरकार विद्यार्थियों की बेहतर कोचिंग की व्यवस्था भी कर रही है। 501 नए खेत तालाबों से रीवा जिले का बढ़ेगा सिंचाई रकबा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए संकल्पित है। मध्यप्रदेश देश का इकलौता राज्य है, जहां तीन बड़ी नदी परियोजना पार्वती-कालीसिंध-चंबल (पीकेसी), केन-बेतवा लिंक और तापी बेसिन मेगा रीचार्ज परियोजना पर काम हो रहा है। वर्षा जल के संरक्षण के लिए प्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत विकास कार्य हो रहे हैं। इसी अभियान में रीवा में लोकार्पित किये गये 501 नए खेत तालाबों से जिले का सिंचाई रकबा बढ़ेगा और फसलों की पैदावार बढ़ेगी। प्रदेश सरकार विकास के सभी संकल्पों को अक्षरश: पूरा कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में दुग्ध उत्पादन 9 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने लिए हमारी सरकार गौपालन को बढ़ावा दे रही है। डॉ. भीमराव अम्बेडकर कामधेनु योजना हम गौ पालकों को अनुदान देंगे। पशुपालकों को प्रोत्साहन देने के लिए अब गाय का दूध सरकार खरीदेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कामधेनु योजना में किसान 25 गाय से लेकर अधिकतम 200 गाय तक पाल सकते हैं। इसके लिए पात्र हितग्राहियों को 25 प्रतिशत तक का अनुदान भी सरकार देगी। राम वन गमन पथ और श्रीकृष्ण पाथेय विकसित कर बनायेंगे तीर्थ क्षेत्र मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार ने तय किया है कि प्रदेश में जहाँ-जहाँ भगवान श्रीराम के चरण पड़े हैं, वहाँ-वहाँ सरकार श्रीराम वन गमन पथ विकसित कर इन्हें तीर्थ क्षेत्र बनाएगी। इसी प्रकार जहाँ-जहाँ भगवान श्रीकृष्ण की लीलाएं हुईं, वहाँ-वहाँ श्रीकृष्ण पाथेय बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि चित्रकूट का भी विकास किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उपस्थित जनसमूह को विकास के लिए संकल्प दिलाते हुए कहा कि देश ने बीते दिनों में भारतीय सेनाओं का जो शौर्य और पराक्रम देखा है उससे पूरे देशवासी बेहद गौरवान्वित हैं। हमें हमारी सेनाओं और जवानों पर नाज है।  

एक बार फिर यूपी में जिम्मेदार अधिकारियों का तबादला, आईएएस शशांक चौधरी को बड़ी जिम्मेदारी मिली

लखनऊ उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में तबादलों का सिलसिला जारी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आईएएस से लेकर आईपीएस अधिकारियों को बड़ी-बड़ी जिम्मेदारी सौंप रहे हैं। इसी क्रम में एक बार फिर यूपी में जिम्मेदार अधिकारियों का तबादला कर दिया गया है। मिल रही जानकारी के मुताबिक, गुरुवार को तीन आईएएस अधिकारियों का तबादला कर दिया गया है। आईएएस देवयानी को बड़ी जिम्मेदारी सौंप दी गई है। तबादलों के क्रम में आईएएस शशांक चौधरी को बड़ी जिम्मेदारी सौंप दी गई है। आईएएस शशांक चौधरी को इन्वेस्ट यूपी का अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी बनाया गया है। आईएएस शशांक मौजूदा समय में मथुरा में नगर आयुक्त के पद पर तैनात थे। इसी तरह आईएएस जग प्रवेश का भी तबादला कर दिया गया है। आईएएस जग प्रवेश को मथुरा जिले का नगर आयुक्त नियुक्त किया गया है। आईएएस जग प्रवेश मौजूदा समय में बरेली जिले में मुख्य विकास अधिकारी के पद पर तैनात थे। इसके अलावा महिला आईएएस देवयानी को बरेली जिले का मुख्य विकास अधिकारी बनाया गया है। आईएएस देवयानी अभी तक झांसी जिले में संयुक्त मजिस्ट्रेट के पद की जिम्मेदारी संभाल रही थीं। बता दें कि यूपी की योगी सरकार में भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई जारी है। साथ ही ईमानदार और सरकार की मंशा के अनुरूप काम करने वाले अधिकारियों को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी जा रही है। पिछले समय में भी यूपी में आईएएस और आईपीएस अधिकारियों का तबादला किया जा चुका है।

लोगों की समस्या के निराकरण और विकास की योजना के बेहतर क्रियान्वयन के लिये निरंतर संवाद आवश्यक : उप मुख्यमंत्री देवड़ा

भोपाल उप मुख्यमंत्री एवं जबलपुर जिले के प्रभारी मंत्री श्री जगदीश देवड़ा ने कहा कि लोगों की समस्या के निराकरण और विकास की योजना के बेहतर क्रियान्वयन के लिये जन प्रतिनिधियों और सबंधित विभागों के अधिकारियों के बीच निरन्तर संवाद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आम जनता से जुड़ी समस्या का निराकरण तत्परता से किया जाएं। जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए मुद्दों का समय-सीमा तय कर समाधान करें। उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा गुरूवार को जबलपुर में जिला योजना समिति की बैठक को संबोधित कर रहे थे। उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने बैठक में जल जीवन मिशन एवं अमृत 2.0 सहित जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति के कार्यों की समीक्षा की तथा सिविल डिफेंस प्लान के क्रियान्वयन पर योजना समिति के सदस्यों के साथ विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि किसी भी मुद्दे का निराकरण अगर जिला स्तर पर संभव नहीं है, तो तत्काल उनके संज्ञान में लाया जाएं जिससे शासन स्तर पर उसे निराकृत करने का प्रयास किया जाएगा। बैठक में शहर की यातायात व्यवस्था, शहर में पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था में सुधार, यात्री बसों के शहर में प्रवेश पर लगे प्रतिबंध का कड़ाई से पालन कराने और अतिक्रमण जैसे मुद्दों पर भी बैठक में विचार विमर्श हुआ। इस के साथ ही नवनिर्मित राँझी में स्टेडियम का नामकरण पूर्व विधानसभा अध्यक्ष स्व. ईश्वरदास रोहाणी खेल परिसर के नाम पर करने तथा पनागर जनपद पंचायत के ग्राम खिरियाकला के शासकीय हाई स्कूल का नाम इस स्कूल के लिये जमीन दान करने वाली श्रीमती राधिका पटेल एवं श्रीमती लक्ष्मी पटेल के नाम करने के प्रस्ताव का अनुमोदन भी बैठक में किया गया। बैठक में राज्य सभा सदस्य श्रीमती सुमित्रा वाल्मीकि, सांसद श्री आशीष दुबे एवं विधायकगण मौजूद थे।  

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भारत-पाकिस्तान सीजफायर पर अपने बयान से पलट गए, कहा- ‘मैंने जंग नहीं रुकवाई

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप गुरुवार को भारत-पाकिस्तान सीजफायर पर अपने बयान से पलट गए। उन्होंने कहा कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता नहीं कराई। उन्होंने कहा कि मैंने दोनों देशों के बीच तनाव का समाधान निकालने में मदद की थी। कतर दौरे पर पहुंचे ट्रंप ने अल-उदीद एयर बेस पर अमेरिकी सैन्य कर्मियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा, ‘मैंने ये नहीं कहना चाहता कि मैने ऐसा किया। लेकिन मैंने पिछले सप्ताह पाकिस्तान और भारत के बीच समस्या को सुलझाने में मदद की, जो काफी तनावपूर्ण होती जा रही थी।’ कई बार ले चुके थे क्रेडिट ट्रंप ने मंगलवार को सऊदी अरब की यात्रा के दौरान दावा किया था कि उनके प्रशासन ने भारत और पाकिस्तान के बीच सफलतापूर्वक ऐतिहासिक संघर्ष विराम कराया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने गत शनिवार को दो बार यह दावा किया था कि भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम उन्होंने करवाया। इसके बाद सोमवार को तीसरी बार उन्होंने दावा किया कि भारत और पाकिस्तान के बीच परमाणु संघर्ष को रोकने में उनकी सरकार ने मध्यस्थता की और लाखों लोगों की जान बचाई। बता दें कि ट्रंप इस समय पश्चिम एशिया के चार दिवसीय दौरे पर हैं। भारत ने खारिज कर दिया था बयान भारत ने स्पष्ट तौर पर कह दिया था कि पाकिस्तान के डीजीएमओ ने फोन कर भारत से सीजफायर की गुजारिश की थी। इसमें कोई तीसरा पक्ष शामिल नहीं है। अमेरिकी सैनिकों को संबोधित करते हुए ट्रम्प ने फिर से दावा किया कि उन्होंने देशों से ट्रेड के बारे में बात की।

सरकार की बड़ी सौगात- जल्द ही डिलीवरी बॉय को भी मिलेगी पेंशन!, कंपनियां भी तैयार

नई दिल्ली जोमैटो, स्विगी, अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसी दिग्गज कंपनियों के साथ काम कर रहे लाखों डिलीवरी पार्टनर्स और कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स के लिए एक अहम खबर सामने आई है। जल्द ही इन गिग वर्कर्स को भी पेंशन जैसी सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिल सकता है। सूत्रों की मानें तो ओला, उबर और अमेजन सहित कई कंपनियों ने इस प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है और इसे अगली कैबिनेट बैठक में पेश किया जा सकता है। कौन हैं गिग वर्कर्स? गिग वर्कर्स वो श्रमिक होते हैं जो किसी स्थायी नौकरी की बजाय अस्थायी या अनुबंध आधारित कार्य करते हैं। इनमें फ्रीलांसर, डिलीवरी एजेंट, कैब ड्राइवर, कंटेंट क्रिएटर, और कई ऑनलाइन सर्विस प्रोवाइडर्स शामिल हैं। ये कर्मचारी “पे-पर-टास्क” मॉडल पर काम करते हैं और परंपरागत कर्मचारियों की तरह उन्हें पेंशन, मेडिकल या अन्य सुविधाएं नहीं मिलतीं। क्या है सरकार की योजना? सरकार की योजना के मुताबिक, इन अस्थायी कर्मचारियों के लिए एक पेंशन स्कीम लागू की जा सकती है, जिसमें कंपनियां EPFO (Employees’ Provident Fund Organisation) के माध्यम से एक तय राशि जमा करेंगी। गिग वर्कर्स के पास दो विकल्प होंगे—या तो वो खुद भी अंशदान करें या केवल कंपनी के अंशदान के आधार पर पेंशन प्राप्त करें। क्यों है यह जरूरी? देश में लंबे समय से यह मांग उठती रही है कि गिग वर्कर्स को भी पारंपरिक कर्मचारियों की तरह सामाजिक सुरक्षा दी जाए। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी इस साल के आम बजट में गिग वर्कर्स के लिए एक डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाने की घोषणा की थी, जिसका उद्देश्य उनके डेटा को संकलित करना और उन्हें स्वास्थ्य बीमा, बीमा कवर और अब पेंशन जैसी सुविधाएं देना है। आगे क्या? अब यह प्रस्ताव कैबिनेट के पास भेजा जाएगा और वहां से मंजूरी मिलने पर एक बड़ी श्रेणी के गिग वर्कर्स को पहली बार संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों की तरह सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिलने लगेगा। अगर यह स्कीम लागू हो जाती है, तो यह भारत के श्रम बाजार में एक ऐतिहासिक कदम माना जाएगा।  

सतना में गोवंश की हत्या, पेड़ से बांधकर कई अंग काटे, पुलिस के सामने ग्रामीणों ने आक्रोश जताया

सतना जिले के सिंहपुर थाना क्षेत्र में आने नौखड़ गांव में अज्ञात लोगों ने निर्ममता से पेड़ में बांधकर गौवंश का अंग-भंग कर हत्या कर दी। इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में भारी तनाव का माहौल है। सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस के सामने ग्रामीणों ने आक्रोश जताया है। सिंहपुर पुलिस ने गौवंश मालिक गोपाल की शिकायत पर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।   पेड़ से बांधकर की हत्या गौपालक छोटे अहिरवार ने बताया कि उन्होंने अपनी गाय को घर से कुछ दूरी पर बांध दिया था। बुधवार की रात से सुबह छह बजे के बीच कुछ लोग गाय को वहां से ले गए। उसे दूर पेड़ में बांधकर गौवंश की निर्ममता से अंग-भंग कर हत्या कर दी। उसका किसी भी कोई विवाद भी नहीं है। क्षेत्र में तनाव का माहौल गौवंश के साथ इस प्रकार का अमानवीय कृत्य सामने आने के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव की स्थिति बन चुकी है। जानकारी लगते ही ग्रामीणों ने गौवंश समाधि बनाने व आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग कर दी है। लोगों ने कहा कि पुलिस आरोपियों को जल्द पकड़े। अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज सिंहपुर थाना प्रभारी अजय कुमार ने बताया कि सूचना पर प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने कार्रवाई का आश्वासन दिया है। गौपालक की शिकायत पर अज्ञात लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर लिया है। रैगांव और सिंहपुर थाना पुलिस मिलकर मामले की जांच कर रही है। पशु चिकित्सक ने गौवंश का पीएम किया है।

आज सरकार की पहली मासिक डेटा सीरीज ने अप्रैल में बेरोजगारी दर 5.1 प्रतिशत रहने का लगाया अनुमान

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने गुरुवार को कहा कि अप्रैल के दौरान 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों के बीच श्रम बल भागीदारी दर (एलएफपीआर) 55.6 प्रतिशत थी। इसी आयु वर्ग के व्यक्तियों के लिए एलएफपीआर ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 58 प्रतिशत थी और शहरी क्षेत्रों में 50.7 प्रतिशत थी। एलएफपीआर एक महत्वपूर्ण संकेतक है, जो रोजगार की स्थिति को दर्शाता है। यह दर बताती है कि श्रम बल में कितने लोग सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं। सांख्यिकी मंत्रालय द्वारा जारी मासिक आंकड़ों पर आधारित नई सीरीज के अनुसार, डेटा में पहली बार ग्रामीण रोजगार के आंकड़े भी शामिल हैं, जो कवरेज को व्यापक बनाते हैं। अप्रैल में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों के बीच सीडब्ल्यूएस में बेरोजगारी दर (यूआर) 5.1 प्रतिशत थी, घरेलू स्तर पर पुरुष यूआर 5.2 प्रतिशत थी, जबकि महिला यूआर 5.0 प्रतिशत थी। तिमाही आधार पर संकलित पुरानी सीरीज के अक्टूबर-दिसंबर- 2024 के दौरान शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी दर (यूआर) 6.4 प्रतिशत थी। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के पुरुषों के लिए सीडब्ल्यूएस में एलएफपीआर क्रमशः 79 प्रतिशत और 75.3 प्रतिशत थी, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु की महिलाओं के बीच एलएफपीआर अप्रैल के दौरान 38.2 प्रतिशत थी। ग्रामीण क्षेत्रों में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों के बीच सीडब्ल्यूएस में श्रमिक जनसंख्या अनुपात (डब्ल्यूपीआर) 55.4 प्रतिशत था। आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल के दौरान समान आयु वर्ग के व्यक्तियों के बीच शहरी क्षेत्रों में डब्ल्यूपीआर 47.4 प्रतिशत था, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर समग्र डब्ल्यूपीआर 52.8 प्रतिशत रहा। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु की महिलाओं के लिए डब्ल्यूपीआर महीने के दौरान क्रमशः 36.8 प्रतिशत और 23.5 प्रतिशत थी और देश के स्तर पर समान आयु वर्ग की समग्र महिला डब्ल्यूपीआर 32.5 प्रतिशत देखी गई। बढ़ी हुई कवरेज के साथ उच्च आवृत्ति श्रम बल संकेतकों के निर्माण की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए, आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) की नमूना पद्धति को जनवरी 2025 से नया रूप दिया गया है। पुनर्निर्मित पीएलएफएस डिजाइन की परिकल्पना अखिल भारतीय स्तर पर सीडब्ल्यूएस में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिए मासिक आधार पर प्रमुख रोजगार और बेरोजगारी संकेतकों (श्रम बल भागीदारी दर, श्रमिक जनसंख्या अनुपात और बेरोजगारी दर) का अनुमान लगाने के लिए की गई है। मासिक परिणाम पीएलएफएस के मासिक बुलेटिन के रूप में जारी करने की योजना है। वर्तमान मासिक बुलेटिन अप्रैल 2025 महीने के लिए सीरीज में पहला है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के लिए पीएलएफएस में जनवरी 2025 से एक रोटेशनल पैनल सैंपलिंग डिजाइन अपनाया गया है। इस रोटेशनल पैनल योजना में, प्रत्येक चयनित घर का लगातार चार महीनों में चार बार दौरा किया जाता है।

सीएम योगी समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा- ‘सेना की वर्दी ‘जातिवादी चश्मे’ से नहीं देखी जाती

लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद रामगोपाल यादव को विंग कमांडर व्योमिका सिंह पर दिए गए विवादित बयान पर घेरते हुए कहा कि सेना की वर्दी ‘जातिवादी चश्मे’ से नहीं देखी जाती है। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव द्वारा एक वीरांगना बेटी को जाति की परिधि में बांधना न केवल उनकी पार्टी की संकुचित सोच का प्रदर्शन है, बल्कि सेना के शौर्य और देश की अस्मिता का भी घोर अपमान है। सीएम योगी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “सेना की वर्दी ‘जातिवादी चश्मे’ से नहीं देखी जाती है। भारतीय सेना का प्रत्येक सैनिक ‘राष्ट्रधर्म’ निभाता है, न कि किसी जाति या मजहब का प्रतिनिधि होता है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव द्वारा एक वीरांगना बेटी को जाति की परिधि में बांधना न केवल उनकी पार्टी की संकुचित सोच का प्रदर्शन है, बल्कि सेना के शौर्य और देश की अस्मिता का भी घोर अपमान है।” उन्होंने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा, “यह वही मानसिकता है, जो तुष्टिकरण और वोट बैंक की राजनीति में राष्ट्रभक्ति तक को बांटने का दुस्साहस करती है। इस विकृत जातिवादी सोच को जनता फिर जवाब देगी।” दूसरी तरफ, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने भी सपा महासचिव रामगोपाल पर वार करते हुए एक्स पोस्ट में लिखा, ”जाति व धर्म से परे होती है सेना। सेना का एक ही धर्म होता है ‘देश की रक्षा’। इसलिए सेना में जाति व धर्म देखना ‘ओछी मानसिकता’ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेना में भी महिला सशक्तीकरण पर खासा जोर दिया है। सबको उन पर भरोसा करना चाहिए।” दरअसल, मुरादाबाद में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सपा के राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बारे में नियमित रूप से ब्रीफिंग करने वाली वायु सेना की विंग कमांडर व्योमिका सिंह को लेकर जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया। इस दौरान उन्होंने सेना के अन्य अधिकारियों की जातियां भी बताईं। रामगोपाल यादव ने अपनी टिप्पणी में व्योमिका सिंह और कर्नल सोफिया कुरैशी सहित अन्य सैन्य अधिकारियों की जाति का जिक्र किया। उन्होंने कहा, “युद्ध एक मुसलमान, एक जाटव और एक यादव ने लड़ा। ये तीनों पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक (पीडीए) वर्ग से आते हैं। ऐसे में भाजपा इस अभियान का श्रेय कैसे ले सकती है।”

‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद केंद्र सरकार ने तुर्की की कंपनियों से जुड़े सभी समझौते और परियोजनाओं की समीक्षा शुरू कर दी

नई दिल्ली भारत और तुर्की के बीच वर्षों से चल रहे व्यापारिक और रणनीतिक संबंध अब एक नई दिशा की ओर बढ़ते दिख रहे हैं। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद केंद्र सरकार ने तुर्की की कंपनियों से जुड़े सभी समझौते और परियोजनाओं की समीक्षा शुरू कर दी है। भारत में निर्माण, मैन्युफैक्चरिंग, एविएशन, मेट्रो रेल और आईटी जैसे क्षेत्रों में सक्रिय तुर्की की कंपनियों की भूमिका को दोबारा परखा जा रहा है। यह कदम तुर्की के कश्मीर मुद्दे पर बार-बार टिप्पणी और पाकिस्तान के साथ उसकी बढ़ती निकटता के मद्देनजर उठाया गया है। भारत ब्रांड इक्विटी फाउंडेशन (IBEF) की फरवरी 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2023-24 में भारत-तुर्की के बीच द्विपक्षीय व्यापार 10.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया। वहीं, अप्रैल 2000 से सितंबर 2024 तक भारत में तुर्की से कुल 240.18 मिलियन अमेरिकी डॉलर का एफडीआई आया है, जिससे तुर्की एफडीआई इक्विटी फ्लो में 45वें स्थान पर रहा। इन निवेशों का विस्तार गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और दिल्ली जैसे राज्यों तक है। मेट्रो रेल, सुरंग निर्माण, और एयरपोर्ट सेवाओं से लेकर शिक्षा, मीडिया और सांस्कृतिक सहयोग जैसे क्षेत्रों में कई समझौते और साझेदारियां की गई थीं। उदाहरण के तौर पर, 2020 में अटल टनल के इलेक्ट्रोमैकेनिकल हिस्से का कार्य एक तुर्की कंपनी को सौंपा गया था, जबकि 2024 में रेलवे विकास निगम लिमिटेड (RVNL) ने मेट्रो परियोजना के लिए एक तुर्की कंपनी के साथ समझौता किया। तुर्की के ऑपरेटरों ने की पाकिस्तान की मदद लेकिन ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और उसके बाद की घटनाओं ने भारत सरकार को एक निर्णायक मोड़ पर ला खड़ा किया है। तुर्की ने न केवल पाकिस्तान को सैन्य ड्रोन उपलब्ध कराए, बल्कि यह भी सामने आया कि तुर्की के ऑपरेटरों ने पाकिस्तान की सैन्य कार्रवाइयों में सहायता की। यह प्रमुख वजह है कि अब सभी तुर्की कंपनियों से जुड़े प्रोजेक्ट्स की गहन समीक्षा की जा रही है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “सरकार सभी तुर्की परियोजनाओं और समझौतों को फिर से जांच रही है, भले ही वे समाप्त हो चुके हों। हर सौदे और परियोजना का पूरा डेटा इकट्ठा किया जा रहा है।” सरकार के इस कदम के पीछे एक बड़ा कारण तुर्की का लगातार कश्मीर मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बयानबाजी करना और पाकिस्तान के साथ उसकी बढ़ती नजदीकियां हैं। भले ही अब तक किसी भी परियोजना को औपचारिक रूप से रद्द नहीं किया गया है, लेकिन संकेत साफ हैं- भारत अपनी विदेश नीति में ‘जरूरी बदलाव’ की ओर बढ़ रहा है। वाणिज्य मंत्रालय से जुड़े एक वरिष्ठ विशेषज्ञ ने बताया, “कुछ दीर्घकालिक समझौते तत्काल प्रभाव से प्रभावित नहीं हो सकते, लेकिन ताजा परिस्थितियां और तुर्की का रवैया भविष्य के निवेश और साझेदारियों को प्रभावित कर सकता है।” कई परियोजनाओं में तुर्की की कंपनियां भागीदार भारत में तुर्की की मौजूदगी को केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रखा जा सकता। लखनऊ, पुणे और मुंबई जैसे शहरों में मेट्रो परियोजनाओं में तुर्की की कंपनियां भागीदार हैं। गुजरात में एक संयुक्त उद्यम के तहत मैन्युफैक्चरिंग यूनिट भी स्थापित की गई है। इसके अलावा, एक प्रमुख तुर्की विमानन कंपनी भारतीय हवाई अड्डों पर सेवाएं प्रदान कर रही है। तुर्की की कंपनी सलेबी एविएशन भारत के आठ प्रमुख हवाई अड्डों पर कार्गो हैंडलिंग जैसे हाई-सिक्योरिटी कार्यों में शामिल है। इनमें हवाई अड्डों में दिल्ली, मुंबई और चेन्नई शामिल हैं। इस लिहाज से पाकिस्तानी सैन्य कार्रवाई में तुर्की ऑपरेटरों के शामिल होने के खुलासे ने भारत में सुरक्षा चिंताएं बढ़ी दी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन संवेदनशील क्षेत्रों में तुर्की की भागीदारी को देखते हुए, भारत सरकार इन सौदों की गहन जांच कर सकती है ताकि राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। कम शोर, सख्त संदेश 2017 में तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोआन की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच मीडिया, शिक्षा और कूटनीतिक प्रशिक्षण जैसे क्षेत्रों में सहयोग के लिए कई समझौते हुए थे। लेकिन आठ साल बाद अब ये समझौते कागजों पर ही सिमटते नजर आ रहे हैं। सरकार की मौजूदा रणनीति कम शोर, सख्त संदेश वाली प्रतीत हो रही है। फिलहाल किसी परियोजना को आधिकारिक रूप से समाप्त नहीं किया गया है, लेकिन अंदरखाने एक ठोस बदलाव की तैयारी चल रही है। भारत अब अपने रणनीतिक हितों को सर्वोपरि रखते हुए ऐसे व्यापारिक रिश्तों पर पुनर्विचार कर रहा है जो देश की विदेश नीति और सुरक्षा नीतियों से मेल नहीं खाते। तुर्की का हर मोर्चे पर बहिष्कार जारी अखिल भारतीय सिने वर्कर्स एसोसिएशन (AICWA) ने फिल्म शूटिंग और सांस्कृतिक सहयोग के लिए तुर्की का “पूर्ण बहिष्कार” करने की घोषणा की है। AICWA ने X पर कहा, “तुर्की में तत्काल प्रभाव से कोई भी बॉलीवुड या भारतीय फिल्म प्रोजेक्ट शूट नहीं किया जाएगा। किसी भी भारतीय निर्माता, प्रोडक्शन हाउस, निर्देशक या फाइनेंसर को तुर्की में कोई भी फिल्म, टेलीविजन या डिजिटल कंटेंट प्रोजेक्ट ले जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।” 

यूपी सरकार ने गरीबों की थाली तक राशन पहुंचाने के लिए खोला खजाना, 179.42 करोड़ रुपए किये स्वीकृत

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार हर जरूरतमंद तक राशन पहुंचाने की व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने पर जोर दे रही है। योगी सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) के अंतर्गत उचित दर वितरण प्रणाली को मजबूत करने के लिए 179.42 करोड़ रुपए की बड़ी धनराशि स्वीकृत की है। यह धनराशि उठाई, धराई और अंतर्राज्यीय संचालन से लेकर उपभोक्ताओं तक राशन सामग्री के सुचारू वितरण के लिए स्वीकृत की गई है, जो खाद्य एवं रसद विभाग की कार्यक्षमता को नई गति देगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश के गरीबों की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) के तहत योगी सरकार एक-एक पात्र गरीब को चिन्हित कर राशन कार्ड जारी कर रही है। प्रदेश में अंत्योदय कार्ड लाभार्थियों की संख्या 1.29 करोड़ से अधिक है। अब तक प्रदेश में 3.16 करोड़ से अधिक परिवारों के पात्र गृहस्थी राशन कार्ड और 40.73 लाख से अधिक परिवारों के अंत्योदय राशन कार्ड बनाए जा चुके हैं। सरकार का लक्ष्य हर जरूरतमंद तक राशन पहुंचाना है और इसके लिए अभियान चलाकर पात्रता की पहचान की जा रही है। उपर्युक्त धनराशि वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए ली गई है, जिसके अंतर्गत केंद्रांश और राज्यांश का अनुपात 50-50 रखा गया है। इस योजना का उद्देश्य राज्य भर में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) को और अधिक पारदर्शी, सक्षम और व्यापक बनाना है, ताकि लाभार्थियों को समय पर और गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई जा सके। इसमें अंतर्राज्यीय परिवहन, भंडारण, सामग्री की लदान-उतरान, उचित दर दुकानों तक राशन की आपूर्ति और वितरण व्यवस्था शामिल है। यह राशि खाद्य भंडारण एवं आपूर्ति श्रृंखला की बुनियादी संरचना को मजबूत करने के लिए खर्च की जाएगी, जिससे किसी भी स्तर पर खाद्यान्न वितरण में बाधा न आए। इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी आयुक्त, खाद्य एवं रसद विभाग द्वारा की जाएगी, जिन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि योजना पारदर्शी तरीके से लागू हो और इसका लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचे। योगी सरकार ने निर्देश दिया है कि पूर्व में दी गई वित्तीय स्वीकृतियों और योजनाओं से कोई दोहराव न हो तथा हर तिमाही में आवश्यकतानुसार बजट का निर्धारण कर खर्च किया जाए। योगी सरकार गरीबों, जरूरतमंदों और अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक राशन और पोषण पहुंचाने को लेकर पूरी तरह गंभीर है। योगी सरकार ने राशन वितरण में किसी भी तरह का घपला नहीं हो, इसके लिए ई-केवाईसी और आधार सत्यापन प्रणाली लागू की है। इसके तहत राशन कार्डधारकों को अब देश के किसी भी उचित दर दुकान पर ई-केवाईसी कराने की सुविधा मिल रही है। राशन वितरण में ई-पॉस मशीनों के उपयोग ने पारदर्शिता को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है। इन मशीनों के जरिए अन्न का वितरण सीधे लाभार्थियों तक पहुंच रहा है। यह तकनीकी नवाचार न केवल समय पर राशन उपलब्धता सुनिश्चित कर रहा है, बल्कि गरीबों के लिए खाद्य सुरक्षा को भी मजबूत कर रहा है। पात्र कार्डधारकों को प्रति यूनिट 5 किलो गेहूं और चावल दिया जा रहा है। पात्र गृहस्थी कार्डधारकों को प्रति यूनिट 2 किलो गेहूं और 3 किलो चावल (कुल मिलाकर 5 किलो) फ्री में दिया जा रहा है। वहीं, अंत्योदय कार्ड धारक को एकमुश्त 14 किलो गेहूं और 21 किलो चावल (कुल 35 किलो) दिए जा रहे हैं।

नोएडा में अब तक 2 लाख फ्लैट खरीदारों को कब्जा दिया, लेकिन 18 हजार की ही रजिस्ट्री, DM ने बिल्डरों को भेजा नोटिस

नई नोएडा नोएडा के जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने नोएडा और ग्रेटर नोएडा में फ्लैट की रजिस्ट्री में देरी पर ऐक्शन की तैयारी में है। डीएम ने 95 बिल्डरों को नोटिस जारी करते हुए तलब किया है। इस मामले में जिला प्रशासन ने एक बैठक बुलाई है जिसमें फ्लैट की रजिस्ट्री न होने की शिकायत करने वाले खरीदारों को भी बुलाया गया है। मिली जानकारी के अनुसार, नोएडा और ग्रेटर नोएडा में अब तक 2 लाख फ्लैट खरीदारों को कब्जा तो दे दिया गया है, लेकिन रजिस्ट्री को लेकर अभी भी संशय बना हुआ है। कई फ्लैट मालिक तो पिछले 10 सालों से इसका इंतजार कर रहे हैं। आइए जानते हैं पूरा मामला क्या है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित अमिताभ कांत समिति की सिफारिशें लागू होने के बावजूद कई बिल्डर खरीदारों को उनके फ्लैट का कब्जा तो दे रहे हैं लेकिन फ्लैट की रजिस्ट्री नहीं हुई है। नोएडा और ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में लगभग दो लाख खरीदारों को फ्लैट का कब्जा मिल चुका है, लेकिन अब तक केवल 18 हजार फ्लैट की ही रजिस्ट्री हो पाई है। कई खरीदार करीब एक दशक से इंतजार कर रहे हैं और बिल्डरों के कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें केवल आश्वासन ही दिया जा रहा है। अब डीएम के नोटिस के बाद बिल्डरों पर ऐक्शन शुरू हो सकता है इस बारे में पूछे जाने पर सहायक पुलिस महानिदेशक बृजेश कुमार ने मीडिया को बताया कि लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि बिल्डर जानबूझकर रजिस्ट्री में देरी कर रहे हैं। इस संबंध में नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना विकास प्राधिकरण क्षेत्र के लगभग 95 बिल्डरों को नोटिस जारी किया गया हैं। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन द्वारा आयोजित बैठक में बिल्डरों को खरीदारों के सवालों का जवाब देना होगा। उनके अनुसार, अगर कोई बिल्डर बैठक में शामिल नहीं होता है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

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