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itel Alpha Pro स्मार्टवॉच: जानें फीचर्स और कीमत

आईटेल ने हाल ही में अपना नया स्मार्टवॉच अल्फा प्रो लॉन्च किया है, जो आकर्षक डिजाइन और दमदार स्पोर्ट्स मॉड्स के साथ ही बाजार में धूम मचा रही है। यह स्मार्टवॉच का लुक और फीचर्स इसे एक प्रीमियम श्रेणी के रूप में स्थापित किया गया है, और इसमें कई विशेष स्पोर्ट्स और हेल्थ-ट्रैकिंग फीचर्स हैं जो इसे प्रशंसकों के लिए आदर्श विकल्प बनाते हैं। आइए इस स्मार्टवॉच की कुछ प्रमुख तस्वीरें इस प्रकार हैं: 1. शानदार डिजाइन आईटेल अल्फा प्रो का डिजाइन शानदार और आधुनिक है। इसमें एक पतली और स्टाइलिश धातु की बॉडी बनाई गई है, जो प्रीमियम फील पेश करती है। इसका एचडी डिस्प्ले बड़ा और चमकीला है, जिससे चित्रों को देखने में हर फीचर और नोटिफिकेशन की सुविधा मिलती है। इसके चारों ओर सबसे पहले बेज़ल इसे और भी अधिक आकर्षक धमाके हैं। इसका डिज़ाइन भी नरम और आरामदायक है, जो लंबे समय तक के संस्करणों में किसी प्रकार की कमी नहीं देता है। 2. स्पोर्ट्स मॉड्स की वैरायटी आईटेल अल्फा प्रो में कई तरह के स्पोर्ट्स मॉड्स शामिल हैं, जो फिटनेस के शौकीन लोगों को अलग-अलग तरह के ट्रैक करने की सुविधा देते हैं। इसमें रनिंग, साइकलिंग, रेस्टॉरेंट, वॉकिंग और योग जैसे मोड शामिल हैं, जो आपकी हर एक्टिविटी को एनालिस्ट से मॉनिटर कर सकते हैं। अगर आप जिम में प्रोजेक्ट कर रहे हैं या फिर एडवेंचर्स का मजा ले रहे हैं तो यह स्मार्टवॉच हर एक्टिविटी के लिए उपयुक्त है। 3. स्वास्थ्य मॉनिटरिंग सुविधाएँ यह स्मार्टवॉच केवल स्पोर्ट्स एक्टिविटी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें उन्नत स्वास्थ्य मॉनिटरिंग सुविधाएँ भी शामिल हैं। हृदय गति मॉनिटर, ब्लड ऑक्सीजन (SpO2) मॉनिटर, और नींद की सुविधा जैसे फीचर्स मिलते हैं, जो आपको अपने स्वास्थ्य पर नज़र रखने में मदद करते हैं। यह आपके दिन भर की कनेक्टिविटी को ट्रैक कर आपको फिट और स्टेक लाइफ में सहायता प्रदान करता है। 4. लंबी बैटरी लाइफ आईटेल अल्फा प्रो की बैटरी लाइफ बेहद कम है। इस स्मार्टवॉच पर एक बार पूरी तरह से चार्ज करने में 7-10 दिन तक का समय लग सकता है। साथ ही, यह स्मार्टवॉच क्विक चार्ज हो जाता है, जिससे आपको बार-बार की चिंता नहीं करनी पड़ेगी। 5. इस स्मार्टवॉच को वॉटर-रेसिस्टेंट डिजाइन किया गया है, जिससे आप इसे पानी के बीच भी पहन सकते हैं। इसकी IP68 रेटिंग होने के कारण यह गंदगी और पानी से सुरक्षित है, जिससे यह कठिन परिस्थितियों का सामना करने के लिए एक उत्कृष्ट व्यावसायिक बन जाता है। 6. स्मार्ट नोटिफिकेशन और कॉल फीचर्स आईटेल अल्फा प्रो स्मार्टवॉच में आपको रियल-टाइम नोटिफिकेशन प्राप्त करने की सुविधा भी मिलती है। आप अपनी घड़ी पर कॉल, मैसेज, सोशल मीडिया नोटिफिकेशन देख सकते हैं। इसके साथ ही, इसमें म्यूजिक कंट्रोलर और कैमरा शटर कंट्रोलर जैसे फीचर्स भी दिए गए हैं, जिससे यह एक संपूर्ण स्मार्ट उपकरण बन जाता है। 7. वेलनेस फीचर्स इस स्मार्टवॉच में ब्रीडिंग गाइड और स्टेप काउंटर जैसे वेलनेस फीचर्स भी हैं, जो आपकी मानसिक और शारीरिक सेहत को संतुलित बनाए रखने में मदद करते हैं। ये विशेषताएं खासतौर पर लोगों के लिए उपयोगी होती हैं, जो तनाव प्रबंधन और मानसिक शांति बनाए रखना चाहती हैं। 8. कीमत और कीमत आईटेल अल्फा प्रो की कीमत बहुत बड़ी है, खासतौर पर उन सेल्स के लिए जो एक बजट-फ्रेंडली लेकिन फीचर्स से भरपूर स्मार्टवॉच की तलाश में हैं। आईटेल ने इस स्मार्टवॉच को हर वर्ग के ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया है, जिससे यह एक आकर्षक विकल्प के रूप में उभर कर सामने आया है। निष्कर्ष आईटेल अल्फा प्रो स्मार्टवॉच के सभी फीचर्स के लिए बेहतरीन विकल्प हैं, जो एक आकर्षक, स्मार्टवॉच और स्पोर्ट्स मॉड से लैस लैपटॉप की खोज कर रहे हैं। यह स्लिम और स्टाइलिश डिज़ाइन, हेल्थ मॉनिटरिंग फीचर्स और मजबूत बैटरी लाइफ के लिए आदर्श स्टॉक हैं।

लेटेस्ट लिविंग प्लैनेट रिपोर्ट अमेरिका, अर्जेंटीना और ऑस्ट्रेलिया का खाना पर्यावरण के लिए प्रतिकूल

 नई दिल्ली      लेटेस्ट लिविंग प्लैनेट रिपोर्ट की ओर से एक रिसर्च में यह बात सामने आई है कि भारत का खाद्य उपभोग पैटर्न दुनिया के सभी जी 20 देशों में सबसे ज्यादा स्थाई और पर्यावरण के अनुकूल है. रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर 2050 तक कई देश भारत की ही तरह खाद्य उत्पादन और उपभोग का समर्थन करते हैं, तो यह पृथ्वी और पृथ्वी के जलवायु के लिए सबसे कम नुकसानदायक होगा. वहीं, इंडोनेशिया और चीन जी 20 अर्थव्यवस्थाओं में दूसरे स्थान पर हैं,  जिनका डाइट पैटर्न पर्यावरण के मुताबिक है. रिपोर्ट में अमेरिका, अर्जेंटीना और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के डाइट पैटर्न को सबसे खराब रैंकिंग दी गई है.  इन देशों में अत्यधिक मात्रा में फैटी और शुगरी फूड्स का सेवन जरूरत से ज्यादा बढ़ने के कारण मोटापे की समस्या तेजी से बढ़ती जा रही है. रिपोर्ट में चेतावनी देते हुए बताया गया है कि तो इन देशों में लगभग ढाई अरब लोग ओवरवेट हैं. वहीं, 890 मिलियन लोग मोटापे के शिकार हैं. इस रिपोर्ट में भारत में मिलेट्स के प्रति लोगों को जिस प्रकार से जागरुक किया जा रहा है, उसका भी जिक्र किया गया. मिलेट्स का सेवन भारत में लंबे समय से किया जाता रहा है. मिलेट्स का सेवन करने के लिए भारत में कई कैंपेन भी चलाए जा रहे हैं जिसमें लोगों को इसके फायदों के बारे में बताया जा रहा है. इन  कैंपेन को भारत में मिलेट्स की खपत बढ़ाने के लिए डिजाइन किया गया है. यह सेहत के लिए फायदेमंद होने के साथ ही जलवायु के लिए भी अच्छे हैं. भारत मिलेट्स का दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक है, जो वैश्विक उत्पादन का लगभग 41% हिस्सा है . मिलेट्स की खपत को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से कई पहल की गई हैं, जिनमें राष्ट्रीय मिलेट अभियान, मिलेट मिशन, और ड्राउट मिटिगेशन प्रोजेक्ट शामिल हैं . भारतीय भोजन की बात करें तो यहां पर वेजिटेरियन और नॉन वेजिटेरियन खाने का मिक्सचर मिलता है. यहां पर नॉर्थ साइड पर दाल और गेहूं की रोटी के साथ ही मीट बेस्ड चीजें खाई जाती हैं. वहीं, अगर साउथ की बात करें तो यहां पर चावल और इससे संबंधित फर्मेंटेड फूड्स का सेवन ज्यादा किया जाता है जैसे इडली, डोसा और सांभर आदि. इसके अलावा यहां बहुत से लोग मछली और मीट का भी सेवन करते हैं. देश के पश्चिमी, पूर्वी और उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों में मौसमी उपलब्ध मछली को चावल के साथ मुख्य भोजन के रूप में खाया जाता है. वहीं लोग यहां मिलेट्स जैसे जौ, बाजरा, रागी, सोरघम, पर्ल मिलेट, बकव्हीट, चौलाई और दलिया या टूटे हुए गेहूं का भी सेवन करते हैं. इस रिपोर्ट में यह कहा गया है कि अगर 2050 तक दुनिया के सभी देश भारत की ही तरह डाइट पैटर्न को अपनाते हैं तो इससे जलवायु परिवर्तन में वृद्धि नहीं होगी, जैव विविधता की हानि नहीं होगी, प्राकृतिक संसाधनों में कमी नहीं आएगी और भोजन की सुरक्षा खतरे में नहीं पड़ेगी. रिपोर्ट में मुख्य रूप से इस बात पर फोकस किया गया है कि स्थानीय और मौसमी खाद्य पदार्थों का सेवन किया जाए. प्रोसेस्ड फूड्स का कम से कम सेवन किया जाए, शाकाहारी और वीगन डाइट ली जाए और खाने की बर्बादी कम से कम की जाए.

देश कैसे तय करते हैं कि युद्ध करना है या नहीं? क्या ये देश शुरू कर चुके हैं तीसरा World War?

नईदिल्ली इन दिनों इजरायल चौथरफा युद्ध लड़ रहा है वहीं रूस और यूक्रेन युद्ध भी खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है. ऐसे में कई लोग तीसरे विश्व युद्ध की संभावना जता रहे हैं, लेकिन इसे लेकर भी कई सवाल उठते हैं कि क्या सच में तीसरा विश्व युद्ध होना इतना आसान है? क्या विश्व युद्ध में कई देश आपस में लड़ते हैं तभी शुरु माना जाता है और विश्व युद्ध होने की परिस्थितियां क्या होती हैं. चलिए इन सवालों के जवाब जान लेते हैं. क्या होते हैं विश्व युद्ध के कारण? विश्व युद्ध कई कारणों से शुरू हो सकते हैं. जैसे राष्ट्रवाद यानी अपने देश के प्रति अत्यधिक लगाव और अन्य देशों के प्रति घृणा. जब राष्ट्रवाद चरम पर पहुंच जाता है तो युद्ध की स्थिति पैदा हो सकती है. या फिर एक शक्तिशाली देश दूसरे देशों पर अपना अधिकार जमाना चाहता है, तो इससे युद्ध की स्थिति पैदा हो सकती है. इसके अलावा देशों के बीच आर्थिक प्रतिस्पर्धा भी युद्ध का कारण बन सकती है. साथ ही धार्मिक मतभेद भी युद्ध का कारण बन सकते हैं और किसी देश में राजनीतिक अस्थिरता होने पर पड़ोसी देशों में भी अशांति फैल सकती है और युद्ध की स्थिति पैदा हो सकती है. क्या विश्व युद्ध में हर देश को भाग लेना होता है? नहीं, हर देश को विश्व युद्ध में भाग लेना जरूरी नहीं होता है. कई बार देश तटस्थ रहने का फैसला करते हैं, लेकिन अगर कोई देश किसी युद्ध में शामिल हो जाता है तो उसके पड़ोसी देशों पर भी युद्ध का असर पड़ सकता है. विश्व युद्ध के होते हैं ये भयानक परिणाम विश्व युद्ध के परिणाम बहुत ही विनाशकारी होते हैं. इसमें लाखों लोग अपनी जान गंवा देते हैं. युद्ध से देशों की अर्थव्यवस्था को भी नुकसान पहुंचता है. साथ ही युद्ध से समाज में अस्थिरता फैल जाती है और युद्ध के बाद देशों के राजनीतिक नक्शे में बदलाव आ सकता है.         अगर नाटो-यूक्रेन हमला करते हैं तो रूस क्या करेगा? तो रूस के पास क्या-क्या विकल्प हैं. – रूस मार्शल लॉ लगाकर अपने टारगेट्स को यूक्रेन तक पहुंचा दे. इसके बाद यूक्रेन के कई शहर गाजा की तरह दिखने लगेंगे. इसके लिए रूस टैक्टिकल न्यूक्लियर वेपन यानी परमाणु हथियारों का इस्तेमाल कर सकता है. – यमन के हूती और अन्य विद्रोही-आतंकी संगठनों को एडवांस हथियार देकर जंग में शामिल करे. इन लड़ाकों के जरिए रूस यूक्रेन और नाटो की सेना पर हमला करे. इससे यूक्रेन और नाटो के बीच Chaos पैदा होगा. – तीसरा रास्ता है रूस के ऊपर घूम रहे दुश्मन के सैटेलाइट्स को मार गिराया जाए. जिसमें अमेरिकी रईस एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स के स्टारलिंक सैटेलाइट्स भी हैं. – चौथा रास्ता है कि रूस नाटो के बाल्टिक और रोमानिया में मौजूद हथियार डिपो और लॉजिस्टिक्स पर हमला करके उसे बर्बाद कर दे. एक तरीका हो सकता है साइबरअटैक का. जिससे नाटो और यूक्रेन परेशान हो सकते हैं. परमाणु परीक्षण कर सकता है रूस ये भी सुनने में आ रहा है कि रूस इस समय एक परमाणु परीक्षण करने की तैयारी में है. ये परीक्षण उसकी अपनी जमीन पर होगा. लेकिन कहां और कब इसका खुलासा नहीं हुआ है. यह परीक्षण किसी भी समय हो सकता है. यह पश्चिमी देशों को अपनी ताकत दिखाने का एक तरीका है, ताकि जंग को रोका जा सके. अमेरिका में मौजूद रूस के एंबेसडर ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि ये दूसरा विश्व युद्ध नहीं है कि अमेरिकी पनडुब्बियां पानी के अंदर से आकर अचानक हमला कर देंगी. न उसमें छिप पाएंगी. हम हर जगह से नजर रखे हुए हैं. अगर अमेरिका या नाटो ने हमला किया तो हम परमाणु हथियारों का इस्तेमाल कर सकते हैं. रूस समंदर के अंदर खोज रहा है इंटरनेट केबल नाटो ने कहा है कि रूस इस समय समंदर के अंदर मौजूद इंटरनेट केबल्स को खोज रहा है. नाटो को लगता है कि रूस इन केबल्स पर हमला करना चाहता है. अगर रूस इन केबल्स को काटता है तो इसका असर पश्चिमी देशों समेत कई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा.     इजरायल और ईरान के बीच बढ़ता तनाव इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष ने मध्य पूर्व में तनाव बढ़ा दिया है. ईरान शांत बैठा है लेकिन वह अपने समर्थन वाले आतंकी समूहों से इजरायल पर ताकतवर हमला करवा रहा है.  ईरान और अमेरिका के तनाव ने मध्य पूर्व में शांति को खतरे में डाल दिया है. उत्तर कोरिया की बढ़ती गतिविधियां उत्तर कोरिया लगातार अपनी मिसाइलों की ताकत बढ़ा रहा है. उनके परीक्षण कर रहा है. उसे चीन और रूस का समर्थन हासिल है. वह भी यूक्रेन को हराने में रूस का साथ दे रहा है. साथ ही यह भी कहा है कि अगर जरूरत पड़ी तो वह सीधे तौर पर रूस के साथ खड़ा होगा. रूस के दुश्मन से जंग लड़ने को तैयार है. अक्सर ही तानाशाह किम जोंग उन अमेरिका तक मार करने वाली मिसाइलों की धमकी देता रहता है. चीन ताइवान पर घुसपैठ की तैयारी में लगा चीन ताइवान से सिर्फ 350 किलोमीटर दूर एक बड़े पैमाने का एंफिबियस ऑपरेशन कर रहा है. मकसद है ताइवान पर घुसपैठ. इसमें चीन की सेना, वायुसेना और नौसेना के जवान शामिल हैं. फाइटर जेट्स, ड्रोन्स, हेलिकॉप्टर्स, जंगी जहाज, टैंक्स, बख्तरबंद गाड़ियां और सिविलियन नावें भी शामिल की गई हैं. इस मिलिट्री एक्सरसाइज की वजह से इलाके में तनाव है.

कैबिनेट मंत्री के बेटे का पुलिस पर हमला, वीडियो वायरल होने से सियासी तूफान

Video of cabinet minister’s son clashing with police goes viral, politics started over this मध्य प्रदेश के जबलपुर में कैबिनेट मंत्री प्रहलाद पटेल के बेटे प्रबल पटेल का पुलिस से विवाद का एक वीडियो वायरल हो रहा है। जानकारी के मुताबिक मंत्री के बेटे की कार से बुजुर्ग दंपती को टक्कर लगी थी। इसके बाद सड़क पर हंगामा हो गया और पुलिस भी पहुंच गई। वहां मौजूद किसी ने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। जबलपुर। जबलपुर में कैबिनेट मंत्री प्रहलाद पटेल के बेटे प्रबल पटेल का पुलिस के साथ धक्का-मुक्की करते हुए एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। पुलिस समझाने का प्रयास कर रही थी, लेकिन वह आक्रामक रूप से धौंस दिखाता रहा। जानकारी के मुताबिक प्रबल की कार से बुजुर्ग दंपती को टक्कर लगी थी, जिसके बाद दोनों में विवाद हो गया। इस दौरान पुलिस भी वहां पहुंची थी। घटना के बाद मामले की पुलिस को कोई शिकायत नहीं मिली है। जबलपुर पुलिस अधीक्षक आदित्य प्रताप सिंह ने मामले की जानकारी नहीं होने की बात कही है। उन्होंने कहा कि हम वीडियो देखकर जांच करवाएंगे। टक्कर के बाद जमा हो गई भीड़ दरअसल यह पूरा मामला बीते बुधवार का बताया जा रहा है। घटना यादव कॉलोनी लेबर चौक की है, जहां प्रबल पटेल कार से जा रहा था, उसकी कार से बुजुर्ग दंतपी को टक्कर लगती है। लोगों की भीड़ जमा होती है, आसपास मौजूद पुलिस भी पहुंच जाती है। मौके पर पहुंच गए थे प्रबल के साथी दंपती के साथ प्रबल की कहासुनी होती है। पुलिस युवक को समझाती है और भीड़ भी युवक पर दवाब बनाने लगती है। जिसके बाद प्रबल के कुछ साथी मौके पर आते हैं। प्रबल पुलिस को धौंस देते नजर आता है। उसने खुद को मंत्री पुत्र बताते हुए पुलिस कर्मियों पर दवाब बनाया। बुजुर्ग दंपती ने नहीं की कोई शिकायतइस मामले में बुजुर्ग दंपती की तरफ से भी कोई शिकायत नहीं की गई है। सड़क पर हुए इस हंगामे का किसी ने वीडियो बनाकर वायरल कर दिया। पुलिस अधीक्षक आदित्य प्रताप सिंह ने कहा कि उन्हें इस मामले में अभी कोई जानकारी नहीं है लेकिन वे इसकी जांच करवाएंगे। वीडियो पर गर्माई सियासतमध्य प्रदेश कांग्रेस ने वीडियो को सोशल मीडिया एक्स पर शेयर कर सरकार पर सवाल उठाए हैं। पोस्ट में लिखा है- ‘प्रदेश सरकार के मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल के बेटे प्रबल ने जबलपुर में बुजुर्ग दंपती को टक्कर मारने के बाद पुलिस वालों को इस अंदाज में धमकाया।’

बोइंग ने अपने 10 फीसदी कर्मचारियों को नौकरी से निकालने का फैसला लिया

न्यूयॉर्क  हवाई जहाज बनाने वाली कंपनी बोइंग के कर्मचारियों के लिए बुरी खबर सामने आई है। बताया जा रहा कि कंपनी ने अपने 10 फीसदी कर्मचारियों को नौकरी से निकालने का फैसला लिया है। इसके पीछे का कारण कारोबार में लगातार जारी दबाव और कर्मचारियों की हड़ताल से बढ़ता नुकसान है। इन अधिकारियों को भी निकाला जा सकता है कंपनी के इस फैसले से लगभग 17 हजार कर्मचारियों को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ेगा। बोइंग के इस फैसले से उसके उत्पादन में भी देरी होगी। मुख्य कार्यकारी केली ऑर्टबर्ग ने ईमेल के जरिए कहा, वैश्विक स्तर पर होने वाली इस छंटनी में हर स्तर के कर्मचारी, जिसमें एग्जीक्यूटिव, मैनेजर और कर्मचारी सभी शामिल होंगे। यहां तक कि बोइंग ने अपने हथियार और सैन्य उपकरण बनाने वाले व्यापार में भी घाटे की चेतावनी दी है। साथ ही कंपनी ने अपने नए जहाज 777एक्स की डिलिवरी तारीखों को भी आगे बढ़ा दिया है। इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ मशीनिस्ट्स एंड एयरोस्पेस वर्कर्स के बोइंग कर्मचारियों ने अनुबंध प्रस्ताव को भारी बहुमत से अस्वीकार कर 13 सितंबर को काम छोड़ दिया। क्या है मामला? कंपनी फिलहाल करीब 33 हजार कर्मचारियों की हड़ताल से जूझ रही है जो बीते तीन हफ्ते से जारी है। इससे कामकाज पर बुरा असर पड़ा है। इस हड़ताल का असर कंपनी के सबसे ज्यादा बिकने वाले विमानों के उत्पादन पर भी देखने को मिला है। कर्मचारी की यूनियन 14 सितंबर से हड़ताल पर हैं। कंपनी और यूनियन के बीच बातचीत का भी कोई हल नहीं निकला है। स्थिति ये है कि पिछले महीने ही बोईंग नेशनल लेबर रिलेटेड बोर्ड के सामने यूनियन के खिलाफ अर्जी देकर शिकायत की है कि यूनियन हितों की अनदेखी करते हुए अड़ियल रवैया अपना रही है। प्रति शेयर 9.97 डॉलर का नुकसान बोइंग ने कहा कि हड़ताल के कारण तीसरी तिमाही में उसके वाणिज्यिक विमानन परिणामों पर पूर्व कर तीन अरब डॉलर का बोझ पड़ा, जो प्रति शेयर 9.97 डॉलर के अनुमानित नुकसान का एक हिस्सा है। हमारी कंपनी के भविष्य के लिए यह जरूरी: ऑर्टबर्ग ऑर्टबर्ग ने बताया, ‘जब हमारा कारोबार चुनौतियों का सामना कर रहा है, ऐसे में हम अपने भविष्य के लिए महत्वपूर्ण फैसले ले रहे हैं और हमारी कंपनी को फिर से खड़ा करने के लिए हमें जो काम करना चाहिए, उस पर यही विचार है। ये जरूरी कदम हमारे कारोबार में महत्वपूर्ण संरचनात्मक बदलावों के साथ लंबे समय तक प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए जरूरी हैं।’ 777एक्स की डिलीवरी भी आगे बढ़ी हड़ताल के कारण हुए नुकसान पर बोइंग ने कहा कि नए जहाज 777एक्स की डिलीवरी तारीखों को भी आगे बढ़ा दिया है। पहली डिलीवरी 2025 को होनी थी, मगर अब 2026 में की जाएगी। इसकी साथ ही कंपनी ने साल 2027 में 767 मालवाही का उत्पादन बंद करने की भी योजना बनाई है। उसका कहना है कि अपने सभी ऑर्डर को पूरा करने के बाद उत्पादन बंद किया जाएगा।  

रवि बिश्नोई ने रचा इतिहास, बुमराह-अर्शदीप को पछाड़ बने भारत के नंबर-1 गेंदबाज

नई दिल्ली बांग्लादेश के खिलाफ पहले दो टी20 में बेंच गर्म करने वाले रवि बिश्नोई को आखिरी मुकाबले में जैसे ही मौका मिला इस युवा गेंदबाज ने इतिहास रच दिया। हैदराबाद में खेले गए हाईस्कोरिंग मुकाबले में बिश्नोई ने 4 ओवर के कोटे में 30 रन खर्च कर सर्वाधिक 3 विकेट चटकाए, इस दौरान उन्होंने एक मेडन ओवर भी फेंका। बिश्नोई ने इस दौरान नजमुल हुसैन शान्तो के साथ लिटन दास और राशिद हुसैन का भी शिकार किया। इन तीन विकेटों के दम पर बिश्नोई ने अपने T20I करियर में 50 विकेट भी पूरे किए। इसी के साथ बिश्नोई अब भारत के 50 T20I विकेट लेने वाले सबसे युवा गेंदबाज बन गए हैं। इस लिस्ट में उन्होंने अर्शदीप सिंह और जसप्रीत बुमराह जैसे गेंदबाजों को पछाड़ा है। बिश्नोई ने यह कारनामा 24 साल और 37 दिन की उम्र में किया। इससे पहले यह रिकॉर्ड अर्शदीप सिंह के नाम था जिन्होंने 24 साल और 196 दिन की उम्र में 50 T20I विकेट लिए थे। भारत के लिए सबसे कम उम्र में 50 T20I विकेट 24 साल 37 दिन – रवि बिश्नोई 24 साल 196 दिन – अर्शदीप सिंह 25 साल 80 दिन – जसप्रीत बुमराह 28 साल 237 दिन – कुलदीप यादव 28 साल 295 दिन – हार्दिक पांड्या वहीं रवि बिश्नोई सबसे कम मैचों में 50 विकेट लेने वाले संयुक्त रूप से दूसरे भारतीय बने हैं। बिश्नोई ने अपने 33वें मैच में 50 टी20 विकेट लिए और अर्शदीप की बराबरी की। इस मामले में भारत के चाइनामैन गेंदबाज कुलदीप यादव टॉप पर हैं। कुलदीप के नाम 30 मैचों में 50 टी20 विकेट लेने का रिकॉर्ड है।

धर्म नगरी धाम में बदल गया जम्बाड़ा ग्राम पं मोहन पाठक शास्त्री के सानिध्य में संपन्न हो रहा पंच कुंडीय ज्ञानयज्ञ

Panch Kundiya Gyanayagya is being conducted under the guidance of Pt. Mohan Pathak Shastri, Jambara village has turned into Dharma Nagari Dham. हरिप्रसाद गोहेआमला । ग्राम जम्बाडा इन दिनों धर्म नगरी का रूप ले चुका है गांव में चारो ओर धर्म ध्वजा लहरा रही है।क्षेत्र के प्रसिद्ध शास्त्री पंडित मोहन पाठक शास्त्री जी के सानिध्य में पंच कुण्डी महायज्ञ संपन्न हो रहा है।इस महायज्ञ में प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में लोग पहुंचकर कथा वाचन कर यज्ञ शाला में पूजन अर्चन कर रहे है।आयोजन समिति से जुड़े दधी सिंह सिसोदिया और रामचंद्र देशमुख सरपंच ग्राम जम्बाडा ने बताया की पंडित मोहन पाठक शास्त्री जी के सानिध्य में विगत 25 वर्षो से यह महायज्ञ का आयोजन हो रहा है इस महायज्ञ में न केवल जम्बाड़ा बल्कि आसपास क्षेत्र के लोग सम्मिलित होते है। जम्बाड़ा क्षेत्र के परिजन जो बाहर रहते है नौकरी कर रहे है वे सभी छुट्टी लेकर 10 दिनों के लिए इस महायज्ञ में शामिल होने आते है यहां तक की विदेशो से भी लोग शामिल होने आते है। इस महायज्ञ से जुड़े लोगो का सम्मान श्री महावीर हनुमान गौशाला समिति आमला के लोगो ने किया और इस पुनीत कार्य के लिए साधुवाद दिया।उल्लेखनीय है की जम्बाड़ा के अतिरिक्त अन्य ग्रामों में भी यह महायज्ञ का आयोजन होता आया है।इस अवसर पर सभी ने पूजन किया।इस अवसर पर समिति की ओर से शाल श्रीफल और पगड़ी पहनाकर सम्मान किया गया।समिति की ओर से पंडित मोहन पाठक शास्त्री, पंडित विनोद शास्त्री जबलपुर,पंडित संतोष शास्त्री सिवनी,पंडित गणेश महाराज जबलपुर का सम्मान किया गया।वही आयोजन समिति से जुड़े दधीसिंह सिसोदिया,रामचंद्र देशमुख सरपंच, उकंडराव बारस्कर,सीताराम गौर लिखड़ी,गुणवंत सिंह चौहान खरपड़ा खेड़ी,किशन सिंह परमार उमरिया,बारीकराव ठाकरे तिरमहु,मारोती वागद्रे,तीरथ सिंह सूर्यवंशी रोहना छिंदवाड़ा,उदय सिंह पटेल,डोमा सिंह महाजन एवम सुनील सराटकर का सम्मान किया।इस अवसर पर प्रमुख रूप से शिवराम सिंह जी सब इंस्पेक्टर आर पी एफ आमला उपस्थित थे।गौशाला समिति के मनोज वाधवा,देवेंद्र राजपूत,अनिल सोनी,राजीव मदान,हेमंत गुगनानी,यशवंत चड़ोकार,दिलीप चौकीकर एवम मनोज विश्वकर्मा उपस्थित थे।इस अवसर पर अपने विचार रखते हुए पंडित मोहन पाठक ने कहा की यह आयोजन विश्वकल्याण और जनकल्याण के लिए होता है।गौमाता के बिना यज्ञ अधूरा है गौमाता की सेवा कर हम न केवल पुण्य अर्जित करते है बल्कि यह कार्य यज्ञ से भी बढ़कर है।हम सभी को गौमाता की सेवा में जुटना चाहिए। अंत में सभी महा आरती में सम्मिलित हुए।कार्यक्रम का मंच संचालन मनोज विश्वकर्मा ने किया और आभार प्रदर्शन दधी सिंह सिसोदिया ने व्यक्त किया।उल्लेखनीय है की 25 वर्षो से चली आ रही इस यज्ञ परंपरा को जम्बाडा के युवा आगे बढ़ा रहे है।कार्यक्रम को सफल बनाने में साहेबराव जी गीते,कृष्णराव वागद्रे,रमेश लोखंडे,नरसिंह वागद्रे,मोनू सोनी,उत्तम पारखे,रामराव देशमुख,रवि माथनकर,योगेश कोशे,नामूजी बारस्कर,रामनाथ वागद्रे,चंद्रभान कोसे आदि उपस्थित थे।

हिजुबल्ला ने इस्राइली नागरिकों से सेना के ठिकानों से दूर रहने की सलाह दी

बेरूत  लेबनान के उग्रवादी संगठन हिजबुल्ला ने इस्राइली नागरिकों को चेतावनी जारी की है। हिजुबल्ला ने इस्राइली नागरिकों से इस्राइली सेना के ठिकानों से दूर रहने की सलाह दी है। हिजबुल्ला ने आरोप लगाया है कि इस्राइली सेना उत्तरी सीमा पर रिहायशी इलाकों में अपने बेस बनाकर तैनात है। ऐसे में हिजबुल्ला ने इस्राइली नागरिकों को रिहायशी इलाकों में कथित तौर पर मौजूद फौजी ठिकानों से दूर रहने को कहा है ताकि वे सुरक्षित रहें। हिजबुल्ला ने अरबी और हिब्रू भाषा में जारी किए बयान में कहा कि ‘इस्राइली सेना घरों का इस्तेमाल कर रही है और उन्होंने हाइफा, टिबरिस और एक्रे जैसे बड़े शहरों के रिहायशी इलाकों में मिलिट्री बेस बनाए हुए हैं।’ हिजबुल्ला द्वारा इस्राइल पर मिसाइलों और रॉकेट से हमले किए जा रहे हैं। इस्राइल ने भी जारी की लेबनान के लोगों के लिए चेतावनी वहीं इस्राइली सेना ने भी लेबनान के लोगों को चेतावनी जारी की है। इस्राइली सेना ने दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्ला के ठिकानों पर हमला जारी रखते हुए लेबनानी नागरिकों को दक्षिणी क्षेत्र में अपने घरों की तरफ न लौटने की चेतावनी दी। गौरतलब है कि इस्राइली सेना द्वारा लगातार बेरूत और उसके आसपास के इलाकों में हिजबुल्ला के ठिकानों पर हमले किए जा रहे हैं। इस्राइली हमलों में अब तक लेबनान में 1200 लोगों की मौत हो चुकी है और लाखों लोग अपने घरों को छोड़कर विस्थापित जीवन जी रहे हैं। इस्राइली हमले में हिजबुल्ला के दो कमांडर्स ढेर इससे पहले शुक्रवार को इस्राइल ने हिजबुल्ला के ठिकानों पर हमला कर उसके दो कमांडर्स को ढेर कर दिया। जिन कमांडर्स को इस्राइल ने मारा, उनकी पहचान अहमद मुस्तफा और मोहम्मद अली हमदान के रूप में हुई है। हमदान हिजबुल्ला के एंटी टैंक का कमांडर था। इस्राइल ने लेबनान में अपने मिसाइल हमलों में बेरूत के दाहिया में हिजबुल्ला के कई हथियार डिपो भी तबाह कर दिए हैं। इस बीच नेतन्याहू ने लेबनान को चेतावनी देते हुए कहा है कि हिजबुल्ला को रोकें वरना गाजा जैसा हाल करेंगे।    

थरूर की “शिवलिंग पर बिच्छू” वाली टिप्पणी पर सुप्रीम कोर्ट सोमवार को सुनवाई करेगा

नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट सोमवार को कांग्रेस सांसद शशि थरूर की उस याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती दी गई है। उच्च न्यायालय ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को निशाना बनाकर की गई थरूर की कथित “शिवलिंग पर बिच्छू” वाली टिप्पणी के लिए उनके खिलाफ मानहानि की कार्यवाही रद्द करने से इनकार कर दिया था। थरूर की याचिका पर सुनवाई करते हुए 10 सितंबर को उच्चतम न्यायालय ने कांग्रेस सांसद के खिलाफ दायर मानहानि मामले में निचली अदालत में चल रही कार्यवाही पर रोक लगा दी थी। शीर्ष अदालत ने इस मामले में शिकायतकर्ता भाजपा नेता राजीव बब्बर और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर याचिका पर जवाब तलब किया था। न्यायालय की वेबसाइट पर 14 अक्टूबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध वाद सूची के अनुसार, न्यायमूर्ति ऋषिकेश रॉय और न्यायमूर्ति एसवीएन भट्टी की पीठ थरूर की याचिका पर सुनवाई करेगी। थरूर ने उच्च न्यायालय के 29 अगस्त के आदेश के खिलाफ शीर्ष अदालत का रुख किया है, जिसमें उनके खिलाफ मानहानि की कार्यवाही रद्द करने से इनकार कर दिया गया था।  थरूर के वकील ने 10 सितंबर को सुनवाई के दौरान उच्चतम न्यायालय से कहा कि शिकायतकर्ता को मामले में पीड़ित पक्ष नहीं कहा जा सकता और राजनीतिक दल के सदस्यों को भी पीड़ित पक्ष नहीं कहा जा सकता। वकील ने दलील दी थी कि थरूर की टिप्पणी मानहानि कानून के प्रतिरक्षा खंड के तहत संरक्षित है, जो यह निर्धारित करता है कि अच्छी सोच के साथ दिया गया बयान आपराधिक नहीं है। वकील ने कहा कि थरूर ने टिप्पणी करने से छह साल पहले कारवां पत्रिका में प्रकाशित एक लेख का संदर्भ दिया था। शीर्ष न्यायालय ने हैरानी जताई थी कि 2012 में उस वक्त यह बयान अपमानजनक नहीं था जब आलेख मूल रूप से प्रकाशित हुआ था। न्यायमूर्ति रॉय ने सुनवाई के दौरान कहा था, “आखिरकार यह एक रूपक है। मैंने समझने की कोशिश की है। यह संदर्भित व्यक्ति (मोदी) की अपराजेयता को दर्शाता है। मुझे नहीं पता कि यहां किसी ने आपत्ति क्यों जताई है।” थरूर के खिलाफ कार्यवाही को रद्द करने से इनकार करते हुए उच्च न्यायालय ने कहा था कि प्रथम दृष्टया, प्रधानमंत्री के खिलाफ “शिवलिंग पर बिच्छू” जैसे आरोप “घृणित एवं निंदनीय” हैं। दिल्ली उच्च न्यायालय ने मानहानि की शिकायत में तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद थरूर के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही पर 16 अक्टूबर 2020 को रोक लगा दी थी और पक्षकारों को 10 सितंबर को निचली अदालत में पेश होने का निर्देश दिया था। उसने कहा था कि प्रथम दृष्टया, टिप्पणी से प्रधानमंत्री, सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ-साथ इसके पदाधिकारियों और सदस्यों की मानहानि हुई है।    

अमेरिकी सेना को जल्द ही मिलेंगे अचूक ‘ड्रोन किलर’, मचाएंगे तबाही, बदलेगी जंग की सूरत

वॉशिंगटन  युद्ध में आज के समय ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा है। ड्रोन में हथियार भर कर उन्हें दुश्मनों के ठिकानों पर सटीक तरीके से गिराया जा रहा है। ऐसे में इनसे निपटना एक नई चुनौती है। इटली की कंपनी लियोनार्डो की अमेरिकी सब्सिडरी कंपनी लियोनार्डो DRS ने ड्रोन खतरों का मुकाबला करने के लिए 8X8 स्ट्राइकर हल्के बख्तरबंद वाहन के नए संस्करण का अनावरण किया है। यह वाहन लेजर के साथ-साथ, 70 एमएम एडवांस्ड लेजर गाइडेड रॉकेट, 30 एमएम ऑटोमैटिक तोप और एडांस्ड सेंसर सिस्टम से लैस है। अमेरिकी सेना के लिए शॉर्ट रेंज डिफेंस सिस्टम के लिए यह महत्वपूर्ण है। नए स्ट्राइकर प्रोटोटाइप पर ब्लूहेलो का 26 किलोवाट लेजर डायरेक्टेड हथियार लगा है। यह अलग-अलग आकार और प्रकार के ड्रोन को तबाह करने में सक्षम है। लियोनार्डो डीआरएस में बिजनेस डेवलपमेंट के वरिष्ठ निदेशक एड हाउस ने कहा, ‘यह एक डायरेक्ट एनर्जी क्षमता प्रदान करेगा।’ हथियार 600 किग्रा तक के वजन वाले, 18000 फीट की ऊंचाई पर उड़ान भरने वाले और 460 किमी प्रति घंटे की स्पीड वाले ड्रोन को तबाह कर सकता है। क्या है ताकत? लेजर हथियार दुश्मन को मारने की क्षमता बढ़ा देता है। पारंपरिक हथियारों की तुलना में इसे बार-बार लोड किए बिना फायर किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त वाहन में 70 मिमी लेजर गाइडेड रॉकेट के चार गोले लॉन्च करने की सुविधा है। यह स्ट्राइकर वाहन की ड्रोन को तबाह करने की क्षमता को और बढ़ा देते हैं। रॉकेट एडवांस्ड प्रिसिजन किल वेपन सिस्टम II (APKWS II) का हिस्सा हैं, जिन्हें खास तौर से ड्रोन को मारने के लिए बनाया गया है। नवंबर में भारत और अमेरिका ने साथ मिलकर एक ऐसा ही हथियार बनाने पर चर्चा की थी, जिसके जरिए सैनिकों को चीन की सीमा पर लाने ले जाने में मदद मिले। इसमें एंटी टैंक हथियार लगाया जाता। मशीनगन भी लगी है स्ट्राइकर पर 7.62 मिमी मशीन गन भी लगी है, ताकि हवाई और जमीनी दोनों खतरों को खत्म किया जा सके। एडवांस्ड हथियारों की मदद के लिए स्ट्राइकर नए अपडेट किए सेंसर से लैस है। इसमें ड्रोन का पता लगाने और ट्रैक करने वाले सेंसर हैं। साथ ही रडार लगा है। वाहन के सेंसर सूट में संभावित खतरों का पता लगाने और उन्हें वर्गीकृत करने के लिए हाई-डेफिनिशन कैमरे भी लगे हैं।

शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर उखीमठ पहुंचेगी, मद्महेश्वर मेला 23 नंवबर को होगा आयोजित

उखीमठ/मक्कूमठ पंचकेदार में प्रतिष्ठित द्वितीय केदार मद्महेश्वर मंदिर के कपाट 20 नवंबर को शुभ लग्नानुसार प्रात: काल और तृतीय केदार तुंगनाथ मंदिर के कपाट 04 नवंबर पूर्वाह्न 11 बजे तुला लग्न में बंद होंगे। कपाट बंद होने के बाद मद्महेश्वर भगवान की चल विग्रह उत्सव डोली विभिन्न पड़ावों से होकर शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर उखीमठ पहुंचेगी। मद्महेश्वर मेला 23 नवम्बर को आयोजित होगा। मद्महेश्वर मंदिर के कपाट बंद होने की तिथि पंचकेदार गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर उखीमठ और तृतीय केदार तुंगनाथ के कपाट बंद होने की तिथि शीतकालीन गद्दीस्थल मर्केटेश्वर मंदिर मक्कूमठ में आज दशहरे के शुभ अवसर पर पंचांग गणना पश्चात घोषित हुई। मद्महेश्वर मेला और देव डोलियों के शीतकालीन गद्दीस्थल पहुंचने का कार्यक्रम भी घोषित हो गया। बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति मीडिया प्रभारी डॉ हरीश गौड़ ने बताया कि मद्महेश्वर मंदिर के कपाट बंद होने के बाद भगवान मद्महेश्वर की चल विग्रह डोली 20 नवंबर को प्रथम पड़ाव गौडार गांव, 21 नवंबर को दूसरे पड़ाव रांसी, 22 नवंबर गिरिया और 23 नवम्बर को ओंकारेश्वर मंदिर उखीमठ पहुंचेगी। 23 नवंबर को मद्महेश्वर मेला संपन्न होगा। कपाट बंद होने की तिथि तय करने के अवसर पर पुजारी बागेश लिंग, वेदपाठी यशोधर मैठाणी, नवीन मैठाणी, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी डीएस भुजवाण, प्रशासनिक अधिकारी रमेश नेगी, देवानंद गैरोला, जेई सूरज मलासी, प्रेम सिंह रावत, वीरेश्वर भट्ट, नवीन शैव, वर्ध जमलोकी, सत्यप्रसाद सेमवाल, शंकर स्वामी, पंच गौंडार से मदन पंवार (भंडारी) ब्राह्मण खोली पंडितगण सहित पंचगाई हक हकूहकधारी आदि मौजूद थे। इसी तरह तृतीय केदार तुंगनाथ के कपाट तुला लग्न में सोमवार 04 नवंबर पूर्वाह्न 11 बजे को बंद होंगे। कपाट बंद होने की तिथि शीतकालीन गद्दीस्थल मर्केटेश्वर मंदिर मक्कूमठ में तय हुई।  इस अवसर पर मठापति रामप्रसाद मैठाणी, प्रबंधक बलबीर नेगी, पुजारी भारत मैठाणी, मुकेश मैठाणी, उमादत्त, विनोदमैठाणी, आचार्य रविंद्र मैठाणी, माहेश्वर प्रसाद, शांति प्रसाद, शेखर चंद्र, क्षेत्र पंचायत सदस्य जयबीर नेगी, दिलवर नेगी और हक-हकूकधारी आदि मौजूद रहे। लाखों तीर्थयात्रियों ने किए दर्शन ओंकारेश्वर मंदिर उखीमठ प्रभारी/प्रशासनिक अधिकारी रमेश नेगी और प्रबंधक बलबीर नेगी ने संयुक्त बयान में बताया कि इस यात्रा वर्ष 13372 श्रद्धालु द्वितीय केदार मद्महेश्वर पहुंचे और 140322 से अधिक तीर्थयात्रियों ने तृतीय केदार तुंगनाथ के दर्शन किये। कपाट बंद होने के बाद तृतीय केदार तुंगनाथ की चल विग्रह उत्सव डोली 4 नवंबर को प्रथम पड़ाव चोपता पहुंचेगी‌। इसके बाद पांच नवंबर को भनकुन गुफा, 06 नवंबर को भी भनकुन प्रवास करेगी और गुरुवार 07 नवंबर को शीतकाल गद्दीस्थल मर्केटेश्वर मंदिर मक्कूमठ मंदिर गर्भ गृह में शीतकाल के लिए विराजमान हो जाएगी।  

16 अक्टूबर को मनाई जाएगी शरद पूर्णिमा

शरद पूर्णिमा हर साल अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है. हिंदू कैलेंडर के अनुसार, पूरे साल भर में 12 पूर्णिमा तिथियां होती हैं, जिसमें शरद पूर्णिमा को विशेष माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा को रास पूर्णिमा और कोजागर पूर्णिमा के नाम से भी जानते हैं. शरद पूर्णिमा की रात भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों के संग महारास रचाया था, इसलिए इसे रास पूर्णिमा कहते हैं. वहीं शरद पूर्णिमा की रात माता लक्ष्मी पृथ्वी पर विचरण करती हैं, जिसे कोजागर पूर्णिमा के नाम से जानते हैं. शरद पूर्णिमा की रात में खुले आसमान के नीचे खीर रखते हैं. काशी के ज्योतिषाचार्य चक्रपाणि भट्ट से जानते हैं कि इस साल शरद पूर्णिमा कब है? शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की किरणों में खीर रखने का समय क्या है? शरद पूर्णिमा 2024 तारीख वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल शरद पूर्णिमा के लिए जरूरी अश्विन शुक्ल पूर्णिमा तिथि 16 अक्टूबर बुधवार की रात 8 बजकर 40 मिनट से शुरू होगी. यह तिथि अगले दिन 17 अक्टूबर को शाम 4 बजकर 55 मिनट तक मान्य रहेगी. ऐसे में शरद पूर्णिमा का पर्व 16 अक्टूबर बुधवार को मनाया जाएगा. रवि योग में है शरद पूर्णिमा 2024 इस साल शरद पूर्णिमा को रवि योग बन रहा है. शरद पूर्णिमा को रवि योग सुबह में 6 बजकर 23 मिनट से बनेगा, जो शाम को 7 बजकर 18 मिनट तक रहेगा. उस दिन ध्रुव योग प्रात:काल से लेकर सुबह 10:10 बजे तक रहेगा. उसके बाद व्याघात योग है. शरद पूर्णिमा वाले दिन उत्तर भाद्रपद नक्षत्र शाम को 07:18 बजे तक है, उसके बाद से रेवती नक्षत्र है. हालांकि शरद पूर्णिमा पर पूरे दिन पंचक भी रहेगा. शरद पूर्णिमा 2024 खीर रखने का समय 16 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा का चंद्रोदय शाम में 5 बजकर 5 मिनट पर होगा. शरद पूर्णिमा की रात खुले आसमान के नीचे चंद्रमा की किरणों में खीर रखते हैं. इस साल शरद पूर्णिमा पर खीर रखने का समय रात में 08 बजकर 40 मिनट से है. इस समय से शरद पूर्णिमा का चंद्रमा 16 कलाओं से युक्त होकर अपनी किरणों को पूरे संसार में फैलाएगा. शरद पूर्णिमा की रात क्यों रखते हैं खीर? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा 16 कलाओं से युक्त होता है और उस रात अमृत की वर्षा होती है. चंद्रमा की किरणें औषधीय गुणों वाली होती हैं, जो शीतलता भी प्रदान करती हैं. इस वजह से शरद पूर्णिमा की रात खीर बनाकर कुछ समय के लिए रखा जाता है, ताकि वह चंद्रमा की किरणों से औषधीय गुणों वाली हो जाए. उसे खाने से सेहत ठीक होती है.

अडानी ने केन्या के साथ किया एक और बड़ा समझौता, ₹62000000000 की डील, जानें क्या करेगी कंपनी

नई दिल्ली  गौतम अडानी दुनिया के कई देशों के साथ एक से बढ़कर एक डील कर रहे हैं। अब उन्होंने केन्या सरकार के साथ एक नई डील की है। हालांकि उनकी केन्या के एयरपोर्ट को लेकर हुई डील अभी भी फंसी हुई है। लेकिन नई डील को अडानी का मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है। यह डील 736 मिलियन डॉलर (करीब 6200 करोड़ रुपये) की है। नई डील के तहत अडानी ग्रुप की कंपनी अडानी एनर्जी केन्या में बिजली ट्रांसमिशन लाइनों का संचालन करेगी। इसके लिए अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड ने केन्या इलेक्ट्रिसिटी ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड (केट्राको) के साथ एक समझौते पर साइन किए हैं। यह डील 30 वर्षों के लिए हुई है। केन्या के ऊर्जा मामलों के कैबिनेट सचिव ओपियो वांडाई ने इसकी जानकारी दी। क्या होगा डील में? मौजूदा समय में केन्या बिजली के संकट से जूझ रहा है। इस डील के मुताबिक अडानी एनर्जी केन्या में प्रमुख ट्रांसमिशन लाइनों और सबस्टेशनों को विकसित करेगी। साथ ही कंपनी वित्तपोषण, निर्माण, संचालन और रखरखाव करेगी। इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य विश्वसनीय बिजली सुनिश्चित करने के लिए देश के ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करना है। केन्या सरकार खर्च नहीं करेगी चवन्नी भी केन्या सरकार इस प्रोजेक्ट पर कोई पैसा खर्च नहीं करेगी। पर कोई वित्तीय व्यय नहीं करेगी। ओपियो वांडाई के अनुसार इस इंफ्रास्ट्रक्चर को विकसित करने के लिए प्रोजेक्ट कंपनी (AESL) लोन और इक्विटी के माध्यम से फंडिंग जुटाएगी। इस रकम को 30 साल की अवधि में चुकाया जाएगा। प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के माध्यम से तय की जाएगी, जिसे केट्राको और AESL द्वारा संयुक्त रूप से संभाला जाएगा। AESL तीन ट्रांसमिशन लाइन और दो सबस्टेशन विकसित करेगी। अटका हुआ है एयरपोर्ट का संचालन अडानी ग्रुप का केन्या में यह दूसरा बड़ा प्रोजेक्ट है। इससे पहले यह ग्रुप केन्या के मुख्य एयरपोर्ट के संचालन के लिए डील कर चुका है। हालांकि स्थानीय लोगों के विरोध के बाद प्रस्ताव को रोक दिया गया है। बता दें कि केन्या सरकार ने देश के सबसे बड़े एयरपोर्ट जोमो केन्याटा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (JKIA) को अडानी ग्रुप को 30 साल के लिए लीड पर देने की घोषणा की थी। केन्या एविएशन वर्कर्स यूनियन (KAWU) अडानी की इस डील के खिलाफ हैं। इस यूनियन की मांग है कि इस डील को रद्द किया जाए।

Hyundai IPO के आने से पहले ही ग्रे मार्केट में खराब शुरुआत, जीएमपी में तगड़ी गिरावट

मुंबई अगले हफ्ते देश का सबसे बड़ा आईपीओ आ रहा है, जो LIC, पेटीएम और कोल इंडिया जैसे आईपीओ की रिकॉर्ड तोड़ देगा. यह आईपीओ 15 अक्‍टूबर को सब्‍सक्रिप्‍शन के लिए खुल रहा है और 17 अक्‍टूबर को बंद हो जाएगा. कंपनी ने इस IPO के तहत 1865-1960 रुपये प्रति शेयर के प्राइस बैंड (Hyundai IPO Price Band) का ऐलान किया है. Hyundai IPO के साइज की बात करें तो ये 27870.16 करोड़ रुपये का है, जो इसे देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी LIC के आईपीओ से भी बड़ा बनाता है, जो कि 21000 करोड़ रुपये का था. इस आईपीओ के तहत अलॉटमेंट प्रोसेस के लिए 18 अक्टूबर, तो रिफंड प्रोसेस के लिए कंपनी ने 21 अक्टूबर की तारीख तय है. इसके शेयरों की लिस्टिंग 22 अक्टूबर को होनी है. हुंडई आईपीओ जीएमपी में तगड़ी गिरावट Hyundai IPO के आने से पहले ही ग्रे मार्केट में इसकी खराब शुरुआत दिख रही है. ऑटो सेक्‍टर की इस कंपनी के जीएमपी में तगड़ी गिरावट देखी जा रही है. आईपीओ का साइज और प्राइस बैंड तय किए जाने के बाद से ही इसका ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) लगातार टूट रहा है और करीब 80 फीसदी टूट चुका है. सितंबर के आखिरी दिनों में 570 रुपये से गिरकर 12 अक्‍टूबर को इसका जीएमपी 75 रुपये पर आ चुका है. किसके लिए कितना रिजर्व? Hyundai का इश्यू 50 फीसदी हिस्सा क्वालिफाईड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB), 15 फीसदी नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) और 35 फीसदी खुदरा निवेशकों के लिए रिजर्व है. IPO के तहत शेयरों का अलॉटमेंट 18 अक्टूबर को फाइनल होगा. फिर BSE और NSE पर 22 अक्टूबर को एंट्री होगी.  इस आईपीओ के तहत 10 रुपये की फेस वैल्यू वाले 14,21,94,700 शेयर ऑफर फॉर सेल विंडो के तहत जारी होंगे और ये शेयर इसकी पैरैंट कंपनी बेचेगी. क्‍या करें निवेशक? हुंडई आईपीओ के जीएमपी में गिरावट को देखते हुए ज्‍यादातर लोगों के मन में यही सवाल है कि आखिरी अब क्‍या करना चाहिए? ऐसे में कुछ एक्‍सपर्ट्स का कहना है कि यह फाइनेंशियल तौर पर ज्‍यादा मजबूत दिखाई देता है. ऐसे में निवेश किया जा सकता है. हालांकि निवेशकों को अपने रिस्‍क और फंडामेंटल समेत सभी फैक्‍टर्स को अच्‍छी तरह से समझकर ही निवेश करना चाहिए. दो दशक बाद ऑटोमेकर कंपनी का IPO पैसेंजर व्हीकल सेल्स वॉल्यूम के आधार पर Hyundai Motors India कंपनी वित्त वर्ष 2024 में मारुति सुजूकी के बाद देश की दूसरी सबसे बड़ी कंपनी है. मारुति सुजूकी का मार्केट कैप 48 अरब डॉलर के करीब है. मारुति सुजुकी का आईपीओ 2003 में आया था. ऐसे में 20 साल बाद भारत में किसी ऑटो मेकर कंपनी का आईपीओ आ रहा है और इसका साइज देश में अब तक पेश किए गए सबसे बड़ी आईपीओ से भी ज्यादा है. वहीं आईपीओ के जरिए हुंडई मोटर इंडिया 18 से 20 अरब डॉलर के बीच वैल्यूएशन पाने का लक्ष्य लेकर चल रही है.

दिल्ली मेट्रो में बिना लिखित परीक्षा के नौकरी पाने का मौका, 96000 पाएं सैलरी

दिल्ली मेट्रो (Delhi Metro) में नौकरी (Sarkari Naukri) पाने का मन बना रहे लोगों के लिए एक अच्छा अवसर है. अगर आप भी इन पदों से संबंधित योग्यता रखते हैं, तो दिल्ली मेट्रो की आधिकारिक वेबसाइट delhimetrorail.com पर जाकर आवेदन कर सकते हैं. दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने मैनेजर और असिस्टेंट मैनेजर के पदों के लिए वैकेंसी निकाली है. इन पदों के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) के इस भर्ती के लिए जो कई भी आवेदन कर रहे हैं, वे 1 नबंवर तक या उससे पहले अप्लाई कर सकते हैं. अगर आप भी इन पदों पर काम करने की इच्छा रखते हैं, तो आवेदन करने से पहले दिए गए इन बातों को गौर से पढ़ें. दिल्ली मेट्रो में नौकरी पाने की क्या है योग्यता दिल्ली मेट्रो के इस भर्ती के लिए जो कोई भी आवेदन कर रहे हैं, उनके पास किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या संस्थान से बी.ई. (इलेक्ट्रिकल/मैकेनिकल) या समकक्ष डिग्री होनी चाहिए. दिल्ली मेट्रो में अप्लाई करने की क्या है आयु सीमा दिल्ली मेट्रो में नौकरी पाने की ख्वाहिश रखने वाले उम्मीदवारों की न्यूनतम आयुसीमा 55 वर्ष और अधिकतम आयुसीमा 62 वर्ष होनी चाहिए. दिल्ली मेट्रो में चयन होने पर मिलती है सैलरी मैनेजर (इंस्पेक्शन): 96,600 रुपये प्रतिमाह असिस्टेंट मैनेजर (इंस्पेक्शन): 75,100 प्रतिमाह दिल्ली मेट्रो में ऐसे होगा चयन जो कोई भी दिल्ली मेट्रो के इस भर्ती के लिए आवेदन कर रहे हैं, उनका चयन पर्सनल इंटरव्यू के माध्यम से किया जाएगा. उम्मीदवारों के नॉलेज, स्किल, फिजिकल फिटनेस और प्रासंगिक अनुभव का आकलन किया जाएगा. यहां देखें आवेदन लिंक और नोटिफिकेशन ऐसे करें आवेदन उम्मीदवारों को DMRC की आधिकारिक वेबसाइट से आवेदन फॉर्मेट डाउनलोड करना होगा. विधिवत भरा हुआ आवेदन पोस्ट के नाम के साथ लिफाफे पर स्पष्ट रूप से अंकित करके स्पीड पोस्ट या ईमेल के माध्यम से नीचे दिए गए पते पर भेजना होगा. कार्यकारी निदेशक (एचआर) दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड मेट्रो भवन, फायर ब्रिगेड लेन बाराखंभा रोड, नई दिल्ली

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