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बैग का जवाब बैग से दिया, प्रियंका गांधी ने अब उठाया बांग्लादेश के हिंदुओं के लिए झोला

नई दिल्ली कांग्रेस की वायनाड से सांसद प्रियंका गांधी सोमवार को संसद में फिलिस्तीन लिखा बैग लेकर पहुंची थीं। इसे लेकर उनकी भाजपा सांसदों ने आलोचना की थी और कहा था कि वह मुस्लिम तुष्टीकरण में जुटी हैं। लेकिन बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा को लेकर वह चुप रहती हैं। माना जा रहा था कि प्रियंका गांधी इस बैग से घिर सकती हैं और इसकी तारीफ पाकिस्तान तक में हुई तो भाजपा और हमलावर हुई थी। लेकिन अब प्रियंका गांधी ने खुद ही बैग का जवाब बैग से दिया है। आज वह एक ऐसा बैग लेकर संसद पहुंचीं, जिसमें लिखा था- ‘बांग्लादेश के हिंदुओं और ईसाइयों के साथ खड़े हों।’ इस बैग को लेकर माना जा रहा है कि प्रियंका गांधी और कांग्रेस ने भाजपा का जवाब देने की कोशिश की है। भाजपा लगातार आरोप लगाती रही है कि कांग्रेस मुस्लिम तुष्टीकरण करती है, जबकि हिंदुओं के खिलाफ अत्याचार पर वह चुप रहती है। विपक्ष के सांसदों ने परिसर के बाहर मंगलवार को प्रदर्शन किया। इन सांसदों ने सरकार से मांग की कि वे पड़ोसी मुल्क में हिंदुओं और ईसाइयों के खिलाफ किए जा रहे अत्याचारों को लेकर कदम उठाएं। इन लोगों ने बांग्लादेश के हिंदुओं का साथ दें लिखी तख्यियां हाथों में ले रखे थे और वह सरकार से ऐक्शन की मांग को लेकर नारे लगा रहे थे। प्रियंका गांधी के साथ कांग्रेस के सांसद प्रियंका गांधी के अलावा कांग्रेस कई सांसद ‘बांग्लादेश के हिंदुओं और ईसाइयों के साथ खड़े हों’ लिखे बैग लेकर आए थे। माना जा रहा है कि तुष्टीकरण के आरोप का जवाब देने के लिए प्रियंका गांधी और कांग्रेस ने यह सवाल उठाया है। खासतौर पर मुस्लिमों और फिलिस्तीन का ही मुद्दा उठाने पर उन्हें घेरा जा रहा था। ऐसी स्थिति में कांग्रेस का यह कदम संदेश देने के लिए है कि हम सभी के साथ हैं और कोई भेदभाव की राजनीति नहीं करते। यदि कांग्रेस फिलिस्तीन का मुद्दा उठाती है तो वह बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ अत्याचार का भी मुद्दा मसला उठाती है।

पार्वती, कालीसिंध, चंबल जोड़ो परियोजना का पीएम मोदी की मौजूदगी में हुआ MoU हुआ साइन, एमपी-राजस्थान में किसानों को होगा लाभ

भोपाल मध्यप्रदेश और राजस्थान को समृद्ध और किसानों को खुशहाल बनाने वाली पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना के लिए त्रि-स्तरीय अनुबंध हो गया है। यह कार्यक्रम राजस्थान के जयपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में हुआ। एक तरफ जयपुर में मुख्य कार्यक्रम चल रहा था, जो दूसरी ओर मध्य प्रदेश के योजना से लाभान्वित होने वाले जिलों में किसान सम्मान किया गया। देवास जिले में जिला स्तरीय किसान सम्मेलन टोंकखुर्द में मंडी मैदान में सुबह 10.30 बजे से आयोजित हुआ। जल संसाधन विभाग की 3612.90 करोड़ रुपये की पार्वती, कालीसिंध, चंबल नदी जोड़ो परियोजना का भूमि पूजन मंगलवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया। सीधा प्रसारण उज्जैन सहित प्रदेशभर के जिला मुख्यालयों पर किया गया। योजना के क्रियान्वयन से उज्जैन के 171 गांव के किसान लाभान्वित होंगे। इस जानकारी के साथ अन्य जानकारी साझा करने को सुबह 10 बजे इंदौर की चिमनगंज कृषि उपज मंडी प्रांगण में जिला स्तरीय किसान सम्मेलन रखा गया।

डिप्टी सीएम शुक्ल ने कांग्रेस के कटोरा लेकर प्रदर्शन पर कहा प्रदेश की तरक्की के लिए कर्ज लेना जरूरी

 भोपाल मध्य प्रदेश विधानसभा में शीतकालीन के दूसरे दिन की कार्यवाही जारी है, इस बीच डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने विधानसभा में गांधी प्रतिमा पर कांग्रेस के कटोरा लेकर प्रदर्शन पर कहा कि कांग्रेस के लोग गुमराह कर रहे हैं, उन्होंने कहा कि प्रदेश की तरक्की के लिए कर्ज लेना बेहद जरूरी है। एमपी में हमने जो कर्ज लिया है वो तीन फीसदी से कम लिया है। डिप्टी सीएम ने कहा कि कांग्रेस को जब मौका मिला था, उसने प्रदेश को बीमारू बनाया था। वन नेशन वन इलेक्शन पर डिप्टी सीएम ने दिया बड़ा बयान   उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने लोकसभा में वन नेशन वन इलेक्शन बिल पर चल रही कवायद के बीच कहा कि लंबे समय से देश की लोगों में यह भावना थी। 5 साल तक देश चुनाव में फंसा रहता है, लंबे समय की मांग पीएम मोदी ने पूरी की है। बता दें कि वन नेशन वन इलेक्शन बिल आज  लोकसभा में प्रस्तुत होगा। बढ़ते कर्ज को लेकर कांग्रेस ने किया प्रदर्शन नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और कांग्रेसी विधायक हाथों में तख्तियां और कटोरा लेकर आज विधानसभा पहुंचे और गांधी प्रतिमा के सामने प्रदेश के उपर बढ़ते कर्ज को लेकर सरकार के खिलाफ हाथ में तख्तियां और कटोरा लेकर प्रदर्शन कर जमकर नारेबाजी की। 

मुझे आठ दिन पहले राज्यसभा की सदस्यता की पेशकश की गई थी, जिसे मैंने अस्वीकार कर दिया: छगन भुजबल

मुंबई महाराष्ट्र में नई महायुति सरकार में शामिल नहीं किए जाने से निराश राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के वरिष्ठ नेता छगन भुजबल ने दावा किया है कि आठ दिन पहले उन्हें राज्यसभा की सदस्यता की पेशकश की गई थी, लेकिन उन्होंने इसे अस्वीकार कर दिया। नासिक जिले के येवला से विधायक भुजबल ने नागपुर में संवाददाताओं से कहा कि उन्होंने राज्यसभा सीट के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया क्योंकि यह उनके विधानसभा क्षेत्र के साथ विश्वासघात होगा, जहां से उन्होंने पिछले महीने राज्य के चुनाव में जीत हासिल की थी। राज्य के पूर्व मंत्री ने कहा, ‘जब मैं इस वर्ष की शुरुआत में राज्यसभा में जाना चाहता था, तो मुझसे कहा गया कि मुझे विधानसभा चुनाव लड़ना चाहिए। मुझे आठ दिन पहले राज्यसभा की सदस्यता की पेशकश की गई थी, जिसे मैंने अस्वीकार कर दिया। मैंने कहा कि मैं एक या दो साल बाद राज्यसभा के विकल्प पर विचार कर सकता हूं, लेकिन तुरंत नहीं।’ भुजबल ने कहा कि राज्य मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने के बाद उन्होंने राकांपा प्रमुख और उपमुख्यमंत्री अजित पवार से बात नहीं की है। प्रमुख ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) नेता भुजबल ने दावा किया कि उन्हें मंत्रिमंडल से इसलिए बाहर रखा गया क्योंकि उन्होंने सामाजिक कार्यकर्ता मनोज जरांगे का विरोध किया था, जो नौकरियों और शिक्षा में मराठा समुदाय के लिए आरक्षण की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘जब मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मराठा समुदाय को ओबीसी श्रेणी में शामिल करने की मांग कर रहे थे तो मैंने अन्य पिछड़ा वर्ग समुदाय के पक्ष में आवाज उठाई थी। लाडकी बहिन योजना और ओबीसी ने महायुति को चुनाव जीतने में मदद की।’ सोमवार को नागपुर में विधानसभा की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित होने के बाद नासिक के लिए रवाना हुए भुजबल से जब उनके भविष्य के कदम के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, ‘देखते हैं। जहां नहीं चैना, वहां नहीं रहना।’ पिछली महायुति सरकार में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री रहे भुजबल ने कहा कि नए मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किए जाने से वह निराश हैं। उन्होंने कहा, ‘मैं एक साधारण राजनीतिक कार्यकर्ता हूं। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि मुझे दरकिनार किया जाता है या पुरस्कृत किया जाता है।’ राकांपा नेता ने कहा, ‘मंत्रिपद आते-जाते रहते हैं, लेकिन मुझे मिटाया नहीं किया जा सकता।’ देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली सरकार के पहले मंत्रिमंडल विस्तार में रविवार को महायुति के सहयोगी दलों – भाजपा (भारतीय जनता पार्टी), शिवसेना और राकांपा के कुल 39 विधायकों ने शपथ ली। मंत्रिमंडल से 10 पूर्व मंत्रियों को हटा दिया गया और 16 नए चेहरे शामिल किए गए। पूर्व मंत्री राकांपा के भुजबल और दिलीप वाल्से पाटिल तथा भाजपा के सुधीर मुनगंटीवार एवं विजयकुमार गावित कुछ प्रमुख नेता हैं, जो मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किए गए।

दतिया में महाराष्ट्र पासिंग की बाइक अनियंत्रित होकर बिजली खंभे से टकराई, मृतकों की शिनाख्त में जुटी पुलिस

दतिया मध्यप्रदेश में रफ्तार का कहर थम नहीं रहा है। तेज रफ्तार वाहनों के अनियंत्रित होने के कारण आये दिन सड़क हादसे हो रहे हैं। सड़क हादसों में असमय लोगों की मौतें भी हो रही है। ताजा मामला दतिया जिले का है जहां बिजली खंभे में टकराने से बाइक सवार दो लोगों की मौत हो गई है। हादसे की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और जांच में जुट गई है। पुलिस मृतकों के शिनाख्ती के प्रयास में लगी है। दरअसल हादसा कोतवाली थाना के सीतासागर बाइपास का है, जहां तेज गति से जा रही बाइक अनियंत्रित होकर सड़क किनारे बिजली के खंभे से जा टकराई। इस हादसे में बाइक सवार दो लोगों की मौत हो गई है। मृतकों की शिनाख्त नहीं हो पाई है। यह भी पता नहीं कि मृतक कहां से आ-जा रहे थे और कहां के रहने वाले हैं। ऐसी आशंका जताई जा रही है कि दोनों मृतक शराब पिए हुए थे। बाइस महाराष्ट्र पासिंग की है। युवक मध्यप्रदेश के है या बाहर के यह भी पता नहीं चल पाया है। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मर्ग कायम कर शव की पीएम के लिए भिजवाकर जांच में जुट गई है।

पेंच टाइगर रिजर्व में चार से पांच दिन पुराना नर बाघ का मिला शव

सिवनी मध्य प्रदेश में सिवनी के पेंच टाइगर रिजर्व में 4 वर्ष आयु के नर बाघ का शव मिलने से वन विभाग में हड़कंप मच गया है। घटना के बाद पेंच प्रबंधन जांच में जुटा है। बताया जा रहा है कि, शव चार से पांच दिन पुराना है। शुरुआती जांच में बाघ से इलाके के लिए हुए संघर्ष में घायल होने के बाद बाघ की मौत होने की आशंका जताई जा रही है। पेंच टाइगर रिजर्व के कुरई परिक्षेत्र अंतर्गत पश्चिम खामरीट बीट के कक्ष क्रमांक 630 में 4 वर्ष के नर बाघ का शव गश्ती दल को मिला है। घटना की सूचना पर वन विभाग का अमला मौके पर पहुंचा और बाघ का अंतिम संस्कार किया। जानकारी के अनुसार, शव दो से तीन दिन पुराना है। वहीं टीम को बाघ के सभी अंग सुरक्षित मिले हैं। साथ ही बाघ के शरीर में घाव के निशान भी मिले हैं। जिसे देख ऐसा लगता है जैसे मानो अन्य बाघ से टेरिटरी के लिए हुए संघर्ष में घायल होने के बाद बाघ की मौत हुई हो। फिलहाल पेंच प्रबंधन ने बाघ के शव की पीएम रिपोर्ट के अनुसार जांच शुरू कर दी है। जांच के बाद भी सामने आएगा कि बाघ की मौके किस कारण से हुई।

जबलपुर रेलवे स्टेशन के बाहर यात्री और पैसेंजर गाड़ियों की धमाचौकड़ी से बचने के लिए लागू होगा ड्रॉप एंड गो नियम

जबलपुर मध्य प्रदेश के जबलपुर रेलवे स्टेशन के बाहर यात्री और पैसेंजर गाड़ियों की धमाचौकड़ी से बचने के लिए अब पश्चिम मध्य रेलवे ने एक नया प्लान लाया है। जी हां पश्चिम मध्य रेलवे ने गाड़ी के आकार रुकने और जाने के लिए ड्रॉप एंड गो का समय निर्धारित कर दिया है। जिसके तहत कार और अन्य गाड़ियों के लिए 6 मिनट का समय निर्धारित किया गया है। तो वहीं ऑटो वालों के लिए 10 मिनट का ड्रॉप एंड को समय तय किया गया है।   आपको बता दे की कर समेत अन्य निजी वाहनों से आने वाले लोगों को 6 मिनट के अंदर रेलवे स्टेशन के बाहर छोड़कर वहां से जाना होगा। वहीं ऑटो चालकों के लिए भी सवारी को लाकर छोड़ने और दूसरी सवारी ले जाने के लिए भी 10 मिनट का वक्त होगा। आपको बता दे कि रेलवे स्टेशन के बाहर ट्रैफिक व्यवस्था कंट्रोल करने के लिए यह कदम उठाया गया है, जिनको जल्दी मंजूरी मिलने के बाद लागू कर दिया जाएगा।

कोरोना संक्रमण से पैरोल, प्रदेशभर की जेलों से लापता हैं 70 बंदी

रायपुर रायपुर सेंट्रल जेल से सात ऐसे बंदी हैं, जो पैरोल पर छूटने के बाद वापस नहीं लौटे। एक बंदी दिसंबर 2002 से गायब हैं। इनमें अधिकतर बंदी हत्या के प्रकरण में जेल में बंद थे। जेल और पुलिस प्रशासन ने इन बंदियों की कई बार तलाश की, लेकिन अब तक उनका कोई पता नहीं चला। प्रदेशभर में ऐसे बंदियों की संख्या करीब 70 है। अब जेल प्रशासन इन बंदियों की वापसी की राह ताक रहा है। सूचना के अधिकार के तहत रायपुर जेल के वारंट अधिकारी ने सात बंदियों के पेरोल पर छोड़े जाने के बाद से नहीं लौटने की जानकारी दी है। इसके अनुसार हत्या के केस में बंद शिवकुमार उर्फ मुन्ना पांच दिसंबर 2002, गणेश देवांगन 23 जुलाई 2008, संजीत उर्फ सुजीत आठ सितंबर 2010, कृष्ण कुमार 31 अगस्त 2013, राजीव कुमार दो अप्रैल 2020, रूपेंद्र साहू 21 नवंबर 2022 और नरेंद्र श्रीवास 18 जनवरी 2024 से पेरोल पर जेल से छोड़े गए थे। हाई कोर्ट ने दिखाई सख्ती जेल मुख्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, पिछले महीने हाई कोर्ट में पैरोल पर गए कैदियों की वापसी न होने के मामले में मुख्य न्यायाधीश रमेश कुमार सिन्हा और न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद की डबल बेंच ने इस मुद्दे पर सख्ती दिखाई थी। मुख्य न्यायाधीश ने डीजीपी जेल से ताजा रिपोर्ट शपथ पत्र के जरिए पेश करने को कहा था। इसके बाद डीजी जेल की ओर से हाई कोर्ट को जानकारी दी गई कि प्रदेश के पांच सेंट्रल जेलों ने 83 कैदी पैरोल से नहीं लौटे थे, जिनमें 10 को गिरफ्तार कर लिया गया और तीन की मृत्यु हो गई थी। अभी भी प्रदेश भर के जेलों से करीब 70 बंदी पैरोल से छूटने के बाद वापस नहीं लौटे हैं। बिलासपुर जेल में भी 22 बंदी नहीं लौटे केंद्रीय जेल बिलासपुर से पैरोल पर गए 22 बंदी लौटे ही नहीं। उनके स्वजन को बार-बार सूचना देने के बाद भी जब बंदी नहीं लौटे, तो जेल प्रबंधन ने संबंधित थानों को फरार बंदियों की जानकारी दी है। प्रबंधन की मानें, तो थानों में उनके फरार होने की एफआईआर दर्ज कराई गई है। सजायाफ्ता बंदियों के वापस जेल नहीं पहुंचने पर जेल प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। बिलासपुर के जेल अधीक्षक खोमेश मंडावी ने बताया कि न्यायालय के निर्देश पर बंदियों को एक निर्धारित अवधि के बाद पैरोल के बाद वापस जेल लौटना होता है। अधिकांश बंदी लौट भी आते हैं। मगर, 22 बंदी ऐसे हैं जो जेल से बाहर तो निकले, लेकिन वापस लौटकर नहीं आए। कोरोना संक्रमण को देखते हुए दी गई पैरोल कोरोना महामारी के दौरान फैलते संक्रमण को देखते हुए जेल प्रशासन ने अच्छे चाल-चलन वाले बंदियों को पैरोल पर भेजा था। कोरोना के बढ़ते संक्रमण के दौरान पैरोल की अवधि कई बार बढ़ाई गई थी। नहीं लौटने वालों में इनकी ही संख्या अधिक है। छत्तीसगढ़ में कुल पांच सेंट्रल जेल रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, जगदलपुर और अंबिकापुर में हैं। इसके अलावा 12 जिला और 16 उप जेल हैं। केंद्रीय जेलों के अलावा इन जेलों में भी बंदियों को राहत दी गई थी। बंदियों को अंतरिम जमानत पर छोड़ा गया था। इनकी संख्या और वापसी की पुख्ता जानकारी नहीं है। जानकार बताते हैं कि अंतरिम जमानत पर जेल के बाहर गए ज्यादातर बंदियों ने कोर्ट से अपनी जमानत करवा ली है। ऐसे में इन बंदियों की निश्चित संख्या की जानकारी जेल प्रबंधन के पास भी नहीं है।

खुशहाल एक साल इवेंट आज 17 दिसंबर को मरीन ड्राइव में शाम 6.30 बजे से

रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार के एक वर्ष पूर्ण होने पर शासन की उपलब्धियों और जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रति नागरिकों को जागरूक करने जनसंपर्क विभाग द्वारा  मरीन ड्राइव, तेलीबांधा, रायपुर में 17 दिसंबर को खुशहाल एक साल कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है । यह कार्यक्रम शाम 6.30 बजे  से रात 9.30 बजे तक होगा जिसमें विभिन्न तरह की मनोरंजक गतिविधियों और गेम्स का आयोजन भी होगा। इसमें प्रत्येक आयु वर्ग के लोग भाग ले सकते हैं । कार्यक्रम के दौरान छत्तीसगढ़ राज्य और शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं के संबंध में पूछे गए रोचक प्रश्नों का सही उत्तर देने पर तत्काल गिफ्ट/गिफ्ट वाउचर मौक़े पर ही दिया जाएगा।

पूर्व सीएम भैरो सिंह शेखावत, वसुंधरा राजे का जिक्र, जयपुर पहुंचे मोदी ने दिया राजस्थान के विकास और राजनीति का दिया संदेश

जयपुर. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को राजस्थान के जयपुर में 46,300 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं की शुरुआत की, जो राज्य के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकती हैं। लेकिन इस कार्यक्रम के पीछे केवल विकास का ही संदेश नहीं था, बल्कि मोदी ने अपनी सरकार के राजनीतिक एजेंडे को भी प्रभावी तरीके से प्रस्तुत किया। उनकी ये परियोजनाएं केवल राजस्थान के विकास के लिए नहीं, बल्कि आगामी चुनावी मुकाबले में भाजपा की स्थिति को मजबूत करने के लिए भी रणनीतिक कदम प्रतीत होती हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जयपुर में अपनी स्पीच के दौरान पूर्व उपराष्ट्रपति और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री भैरोसिंह शेखावत, वसुंधरा राजे और जसवंत सिंह के किस्सों को याद किया, जो एक रणनीतिक कदम के रूप में देखा जा सकता है। मोदी का यह बयान न केवल राजस्थान की राजनीतिक पृष्ठभूमि को उजागर करता है, बल्कि उनके द्वारा इन नेताओं को सम्मानित करने का उद्देश्य भाजपा के पुराने नेताओं और उनके योगदान को जनता के बीच फिर से प्रस्तुत करना था। प्रधानमंत्री मोदी ने जिस भावनात्मक अंदाज में भैरोंसिंह शेखावत और जसवंत सिंह के किस्से सुनाए, उसमें उनके नेतृत्व की क्षमता और राजस्थान के लिए उनके समर्पण को विशेष रूप से रेखांकित किया गया। मोदी ने इन नेताओं की नर्मदा जल को लेकर भावनात्मक प्रतिक्रिया का उल्लेख किया, जिसमें शेखावत और सिंह ने गुजरात के नर्मदा पानी को राजस्थान को देने के मोदी के कदम को सराहा था। यह केवल विकास की बात नहीं थी, बल्कि यह कांग्रेस की विफलताओं और राजस्थान में जल संकट पर भाजपा के प्रयासों की ओर इशारा करता था। मोदी ने अपने भाषण में कहा, “उनकी आंखों में आंसू थे,” इस वाक्य के जरिए उन्होंने यह संदेश दिया कि भाजपा और उनके नेतृत्व में दिल से काम करने का एक भावुक पहलू है, जो कांग्रेस की राजनीति से अलग है। वसुंधरा राजे का उल्लेख भाजपा के महिला नेतृत्व को मजबूती देने की दिशा में एक राजनीतिक संकेत हो सकता है। राजे की राजनीति राजस्थान में भाजपा की मजबूत चेहरा रही हैं और उनका नाम लेकर मोदी ने महिला सशक्तिकरण के पक्ष में अपनी पार्टी का रुख साफ किया। यह कदम महिला वोटरों को ध्यान में रखते हुए उनकी भूमिका को न केवल पहचान दिलाता है, बल्कि इसे भाजपा के विकासात्मक दृष्टिकोण के साथ जोड़ता है। मोदी का यह प्रयास महिलाओं के बीच भाजपा का समर्थन बढ़ाने के लिए एक सूक्ष्म रणनीति हो सकती है। 1. विकास के साथ राजनीतिक संदेश मोदी का जयपुर दौरा सिर्फ एक सरकारी कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह एक सूक्ष्म राजनीतिक संदेश भी था। प्रधानमंत्री ने राजस्थान की भाजपा सरकार के एक वर्ष की उपलब्धियों की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की नेतृत्व क्षमता को प्रदर्शित किया। उन्होंने भाजपा सरकार की पारदर्शिता और विकास कार्यों की दिशा को उजागर किया, जो कांग्रेस सरकार के कार्यकाल की तुलना में एक stark contrast के रूप में प्रस्तुत किया गया। मोदी ने कांग्रेस को निशाने पर रखते हुए कहा कि राजस्थान में पेपर लीक और भर्तियों के मामले कांग्रेस के शासनकाल की छवि बने थे, जबकि भाजपा सरकार ने बम्पर भर्तियां निकाली और पारदर्शी परीक्षाएं करवाई। यह बयान एक राजनीतिक इशारा था, जिसका उद्देश्य भाजपा की सत्ता में लौटने की संभावनाओं को मजबूत करना था। 2. महिलाओं को सशक्त बनाने की रणनीति प्रधानमंत्री ने अपनी योजनाओं में महिलाओं के सशक्तिकरण को प्रमुखता दी, जो एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश है। “नमो ड्रोन दीजिए योजना” और “बीमा सखी स्कीम” जैसी योजनाओं का उद्देश्य महिलाओं को नए कौशल से लैस करना और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। इस कदम के जरिए मोदी ने उन महिला वोटरों को अपनी तरफ आकर्षित करने का प्रयास किया है, जो पारंपरिक रूप से भाजपा से दूर रही हैं। यह योजनाएं न केवल महिलाओं को रोजगार के नए अवसर प्रदान करती हैं, बल्कि उन्हें वित्तीय निर्णयों में भी सक्षम बनाती हैं। 3. जल संकट पर जोर और राजनीतिक तंज जल संकट और नदियों को जोड़ने की योजना पर मोदी ने जो बयान दिए, वे स्पष्ट रूप से कांग्रेस सरकार की नीतियों पर हमला करते हुए भाजपा के विकासात्मक दृष्टिकोण को प्रदर्शित करने का एक तरीका थे। उन्होंने अटल बिहारी वाजपेई के नदियों को जोड़ने के विजन का हवाला देते हुए यह दर्शाया कि कैसे भाजपा सरकार जल संकट के समाधान की दिशा में काम कर रही है, जबकि कांग्रेस ने कभी इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए। मोदी का यह बयान केवल कांग्रेस पर आरोप लगाने का तरीका नहीं था, बल्कि यह भाजपा की जल नीति को एक प्रभावी राजनीतिक तर्क के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास था, जिससे ग्रामीण और किसान समुदाय को भाजपा के पक्ष में खड़ा किया जा सके। 4. राजनीतिक एजेंडा और भाजपा की ‘विकासवादी’ छवि प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में भाजपा की विकासवादी छवि को और भी मजबूत किया, विशेष रूप से सौर ऊर्जा और बिजली क्षेत्र में किए गए समझौतों का जिक्र करते हुए। उन्होंने राजस्थान में किसानों को दिन में बिजली देने की योजना का उल्लेख किया, जो कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण है। इसके माध्यम से मोदी ने यह संदेश दिया कि भाजपा सरकार किसानों के लिए वास्तविक कदम उठा रही है, जबकि कांग्रेस ने केवल बयानबाजी की है। यह बयान भाजपा के ‘किसान समर्थक’ एजेंडे को प्रमोट करने का एक राजनीतिक प्रयास था, जो आगामी चुनावों में किसानों के वोट को अपनी तरफ खींचने के उद्देश्य से था। 5. भ्रष्टाचार और विवादों के खिलाफ भाजपा की ‘परदर्शिता’ मोदी ने कांग्रेस पर भ्रष्टाचार और नदियों के पानी के मुद्दे पर राजनीति करने का आरोप लगाया, जबकि भाजपा की सरकार को विकास और समाधान के पक्ष में बताया। उन्होंने पूर्व उपराष्ट्रपति और पूर्व मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत तथा जसवंत सिंह की चर्चा कर एक भावनात्मक एंगल भी जोड़ा, जो उनके समर्थकों को आकर्षित करने का एक तरीका था। उनका यह कदम कांग्रेस के खिलाफ एक ठोस राजनीतिक रणनीति के रूप में देखा जा सकता है, जिसमें विपक्ष की कमजोरियों को उजागर करने के साथ भाजपा के विकासात्मक और भ्रष्टाचार मुक्त शासन की छवि को प्रस्तुत किया गया। 6. विकास और सहयोग की राजनीति मोदी ने राज्य और केंद्र … Read more

थाना कोतवाली अनूपपुर परिसर में प्रायवेट SIS कंपनी द्वारा सुरक्षा कर्मियों के प्रशिक्षण एवं भर्ती के लिए कैम्प का आयोजन

अनूपपुर, थाना कोतवाली अनूपपुर परिसर में मंगलवार सुबह पुलिस अधीक्षक अनूपपुर श्री मोती उर रहमान के निर्देशन में सिक्योरिटी एंड इंटेलिजेंस सर्विसेज (इंडिया) लिमिटेड, परसवार अनूपपुर द्वारा युवाओं के लिए प्रायवेट सुरक्षा कर्मियों की भर्ती एवं प्रशिक्षण के लिए एक दिवसीय कैम्प का आयोजन किया गया। इस कैम्प में सिक्योरिटी एंड इंटेलिजेंस सर्विसेज (इंडिया) लिमिटेड के कमांडेंट श्री प्रकाश कुमार साकेत एवं भर्ती अधिकारी श्री अभिषेक मिश्रा ने थाना कोतवाली अनूपपुर के टी.आई. श्री अरविंद जैन की उपस्थिति में करीब 50 नवयुवकों के साक्षात्कार एवं दस्तावेजों की जांच की। प्रक्रिया के उपरांत 14 युवाओं को प्रशिक्षण हेतु चयनित किया गया। चयनित युवाओं को SIS के क्षेत्रीय प्रशिक्षण केंद्र, परसवार में एक माह का प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद इन युवाओं को विभिन्न औद्योगिक संस्थानों और शाखाओं में प्रायवेट सुरक्षा कर्मी के पद पर नियुक्ति दी जाएगी। इन पदों पर वेतन 14,000 से 23,000 तक होगा।  कर्मचारियों को दी जाने वाली सुविधाएं: कमांडेंट श्री प्रकाश कुमार साकेत ने बताया कि SIS संस्था के माध्यम से प्रशिक्षण और रोजगार पाने वाले युवाओं को निम्नलिखित सुविधाएं प्रदान की जाती हैं:  स्थाई नौकरी: 65 वर्ष की आयु तक।  वेतन वृद्धि एवं पदोन्नति: वार्षिक आधार पर।  सुविधाएं: बोनस, पेंशन, ग्रेच्युटी, ईएसआईसी और दुर्घटना बीमा।  सुरक्षा बीमा: असमय मृत्यु होने पर परिवार को 2 लाख या अधिक राशि 72 घंटे के भीतर प्रदान की जाती है।  लोन और शैक्षणिक सहयोग: कर्मचारियों को लोन की सुविधा एवं बच्चों की पढ़ाई के लिए सहायता। यह आयोजन युवाओं को रोजगार के साथ-साथ सुरक्षा सेवा क्षेत्र में एक उज्ज्वल भविष्य प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

मोटरसाइकिल से डिप्टी कलेक्टर की कार की जोरदार भिड़ंत , बाइक सवार युवक की मौत

बालोद जिले के डौंडी थाना क्षेत्र के मर्चुरी के पास डिप्टी कलेक्टर की कार से टकराकर बाइक सवार युवक की मौत हो गई। मृतक की पहचान 30 वर्षीय अलख राम के रूप में हुई, जो ग्राम बोगर, भानुप्रतापपुर का निवासी था। घटना की सूचना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने शव का पंचनामा किया और उसे पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मामले की जांच शुरू कर दी है। जानकारी के मुताबिक, डौंडी विकासखंड के रहने वाले डिप्टी कलेक्टर दिलीप उईके फिलहाल बीजापुर में नियुक्त हैं। डिप्टी कलेक्टर का ड्राइवर आज उनके माता-पिता को इलाज के लिए अस्पताल ले गया था, जहां से वापस लौटते वक्त विपरीत दिशा से आ रही मोटरसाइकिल से उनकी कार की जोरदार भिड़ंत हो गई। युवक की मौके पर हुई मौत इस हादसे की भयावहता का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि टक्कर के बाद बाइक गाड़ी के सामने इंजिन के पास जाकर फंस गई थी, जिससे उसके परखच्चे उड़ गए। वहीं बाइक सवार युवक ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। इस दौरान मौके पर राहगीरों और आसपास रहने वाले लोगों की भीड़ इकट्ठा हो गई थी। घटना की सूचना मिलते ही डौंडी पुलिस मौके पर पहुंची और शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस ने मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है।

वरिष्ठ नेता चौधरी वीरेंद्र सिंह ने दागे सवाल, हरियाणा कांग्रेस में इस्तीफे की मांग से गरमाया माहौल

चंडीगढ़। पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता चौधरी वीरेंद्र सिंह ने हरियाणा कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के इस्तीफे की मांग की है। चौधरी वीरेंद्र सिंह के बयान से हरियाणा में राजनितिक माहौल गरमा गया है। चौधरी वीरेंद्र सिंह ने कांग्रेस की हालिया हार पर तीखी टिप्पणी की और कहा कि इस हार के पीछे कई कारण हैं। उन्होंने सीधे तौर पर कहा, “हरियाणा में कांग्रेस का संगठन मजबूत नहीं है और यही कांग्रेस की हार का सबसे बड़ा कारण बना।” उन्होंने कांग्रेस में बड़े बदलाव की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि पार्टी को हरियाणा की जनता के और करीब लाने के लिए बड़े आंदोलन की जरूरत है। चौधरी वीरेंद्र सिंह ने किसी का नाम लिए बिना कहा, “हरियाणा में सब कुछ एक नेता के नाम पर केंद्रित था। यह गलत संदेश गया कि कांग्रेस की सरकार नहीं, बल्कि एक व्यक्ति की सरकार बन रही है। हार के बाद प्रदेश अध्यक्ष की नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि वह अपने पद से इस्तीफा दे। राजनीति में ऐसा हमेशा होता रहा है, लेकिन मुझे आश्चर्य है कि हरियाणा में अब तक ऐसा क्यों नहीं हुआ। भाजपा पर भी लगाए गंभीर आरोप वीरेंद्र सिंह ने भाजपा पर भी हमला बोला और कहा कि पार्टी ने बागी कांग्रेस नेताओं पर खूब पैसा खर्च किया और चुनाव में सत्ता, मशीनरी और वित्तीय संसाधनों का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि ईवीएम के अलावा हरियाणा में कई बाहरी ताकतों ने भी काम किया। जब धर्म कार्ड काम नहीं आया तो जातिगत ध्रुवीकरण का सहारा लिया गया।” “मेरा लक्ष्य हरियाणा को कांग्रेस की जनता की पार्टी बनाना है। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि मैं हरियाणा में बड़ा आंदोलन चलाऊंगा और कांग्रेस को फिर से हरियाणा की जनता की पार्टी बनाऊंगा। मेरा लक्ष्य है कि पार्टी हर वर्ग और हर समुदाय तक पहुंचे। चुनावी रणनीति पर सवाल वीरेंद्र सिंह ने कांग्रेस की रणनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी में संगठन की कमी और नेतृत्व की गलतियां हार का मुख्य कारण बनीं। उन्होंने कहा कि यह समय आत्ममंथन का है और अगर पार्टी में बदलाव नहीं हुआ तो जनता से जुड़ने का सपना अधूरा रह जाएगा। चौधरी वीरेंद्र सिंह के इस बयान से हरियाणा कांग्रेस में हलचल मच गई है। अब देखना यह है कि पार्टी नेतृत्व इस पर क्या कार्रवाई करता है और क्या प्रदेश अध्यक्ष अपने पद से इस्तीफा देंगे।

मध्य प्रदेश में शून्य से नीचे आया तापमान, अमरकंटक में मैदान में जमी बर्फ

अनूपपुर समुद्र तल से 1065 मीटर ऊंचाई पर विंध्य और सतपुड़ा मैकल पहाड़ी के केंद्र बिंदु पर स्थित नर्मदा उद्गम पवित्र नगरी अमरकंटक में वर्ष 2024 की सबसे अत्यधिक ठंड की सुबह 17 दिसंबर मंगलवार को दर्ज हुई। यहां तापमान 0 डिग्री से नीचे आ गया है। नर्मदा उद्गम स्थल से लेकर कपिलधारा तक पूरे अमरकंटक नगर में मंगलवार की सुबह जमाव भरी ठंड थी। रात में आई तापमान की गिरावट से घास पर ओस पूरी तरह से बर्फ का रूप ले ली थी। नर्मदा का जल भी पूरी तरह से ठहरा हुआ बर्फ के समान नजर आया। चारों तरफ हरी घास पूरी तरह से सफेद और कठोर हो चुकी थी। लोगों ने घास पर जमी बर्फ को उठाकर एहसास भी किया। स्थानीय लोगों और पर्यटकों ने लिया आनंद     वाहनों में बर्फ पूरी तरह से जमा नजर आई। अमरकंटक आए पर्यटक श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों ने कड़कड़ाती ठंड के बावजूद बाहर निकाल कर इस नजारे को नजदीक से देखने का आनंद उठाया।     गलन भरी ठंड अमरकंटक सहित पुष्पराजगढ़ के ग्रामीण अंचल में भी मंगलवार की सुबह थी। अनूपपुर जिले में भी भारी ठंड का वातावरण बना हुआ है। 12 दिसंबर से उत्तर भारत से चलने वाली बर्फीली हवाओं की वजह से लगातार अमरकंटक सहित समूचे जिले के तापमान में लगातार गिरावट आ रही थी।     जमीन पर ओस जमा होने लगी थी। पाला पड़ने लगा था। पेड़ पौधे, पशुओं मवेशियों सहित इंसानों पर ठंड का कहर बना हुआ था। पिछले वर्ष अमरकंटक में तापमान निचले स्तर पर नहीं आ पाया था। तीन वर्ष बाद कड़ाके की ठंड लौटी पिछले तीन वर्ष बाद यहां कड़ाके की ठंड लौट कर आई है। अमरकंटक में मौजूद पर्यटक और श्रद्धालु यहां के ठंड भरे मौसम का भरपूर आनंद उठा रहे हैं और मौसम भी शिमला, पचमढ़ी की तरह बर्फ जमने जैसे तस्वीरों का दीदार लगातार कर रहा है जिससे लोग भी अमरकंटक के वातावरण की जानकारी मिलने पर रोज बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं और सुबह जल्दी उठकर ठंड भरे नजारे का उठा रहे हैं। इस बीच, इंदौर से खबर है कि सोमवार को हवाओं का रुख उत्तर पूर्वी होने के कारण शहरवासियों को ठंड से राहत मिली और तापमान में इजाफा देखने को मिला। रविवार के मुकाबले सोमवार को दिन के तापमान में दो डिग्री का इजाफा देखने को मिला। मंगलवार को शहर में अधिकतम तापमान 28.6 डिग्री दर्ज किया गया जो सामान्य से दो डिग्री अधिक था। वहीं न्यूनतम तापमान 9.6 डिग्री दर्ज किया गया जो सामान्य से एक डिग्री कम रहा। दिन में उत्तर व उत्तरी पूर्वी हवाएं 10 से 12 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति से चली। भोपाल स्थित मौसम केंद्र के विज्ञानियों के मुताबिक बंगाल की खाड़ी में एक कम दबाव का क्षेत्र बना है जो तमिलनाडु की ओर बढ़ रहा है। इसके असर से अभी इंदौर में तापमान में इजाफा देखने को मिल रहा है। आगामी दिनों में हिमालय क्षेत्र में एक पश्चिम विक्षोभ भी सक्रिय होगा। इसकी वजह से इंदौर में 21 दिसंबर तक शहरवासियों को तेज ठंड से राहत मिलेगी और दिन व रात के तापमान में इजाफा भी देखने को मिलेगा। पश्चिम विक्षोभ के गुजरने के बाद ही शहर के तापमान में गिरावट देखने को मिलेगी।

बनेंगे 8 स्टेशन, इंदौर के लवकुश चौराहे से रवाना होकर उज्जैन के महाकाल लोक तक जाएगी मेट्रो

इंदौर। इंदौर से महाकाल मंदिर तक 47 किलोमीटर हिस्से में मेट्रो चलाने के लिए कवायद शुरू हो गई। इंदौर-उज्जैन के हाइब्रिड मोड पर मेट्रो का संचालन किया जाएगा। इस पर करीब 10 हजार करोड़ रुपये खर्च का आकलन किया गया है। इसका लाभ इंदौर व उज्जैन वासियों को सिंहस्थ के बाद ही मिल पाएगा। लवकुश चौराहे से महाकाल मंदिर तक मौजूदा फोर लेन सड़क के डिवाइडर पर पिलर खड़े कर वायडक्ट के माध्यम से मेट्रो का मार्ग तैयार किया जाएगा। दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) द्वारा सर्वे की प्रक्रिया पूर्ण कर रुट अलायमेंट तय कर लिया है। अब जल्द ही डीएमआरसी की टीम मप्र मेट्रो रेल कारपोरेशन के अफसरों के सामने इसका प्रेजेंटेशन देगी। इसके बाद इंदौर-उज्जैन आरआरटीएस की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट को अंतिम रूप दिया जाएगा। इंदौर शहर में निर्माणाधीन मेट्रो रूट पर मेट्रो मेट्रो 80 से 85 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति से चलेगी। दो शहरों के बीच रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) में 135 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति से मेट्रो चलती है। इंदौर व उज्जैन के बीच हाइब्रिड मोड में मेट्रो का संचालन किया जाएगा। यह 135 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति से चलेगी। वर्तमान में दिल्ली एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन में इस तरह हाइब्रिड मोड में मेट्रो का संचालन किया जा रहा है। पूर्व में सिंहस्थ के पहले इंदौर से उज्जैन के बीच मेट्रो चलाने की योजना बनाई जा रही थी लेकिन 10 हजार करोड़ रुपये का बजट जुटाना राज्य शासन के लिए आसान नहीं होगा। यही वजह है कि यह प्रोजेक्ट सिंहस्थ के पहले पूरा नहीं हो पाएगा। ऐसे में 2028 में उज्जैन में होने वाले महाकुंभ में इंदौर से जाने वालों को सिक्स लेन का सड़क मार्ग व रेलवे स्टेशन से अन्य ट्रेनों के अलावा वंदे मेट्रो ट्रेन का विकल्प रहेगा। रेल मंत्रालय द्वारा इंदौर से उज्जैन के बीच वंदे मेट्रो ट्रेन चलाने पर सहमति दी गई है। तालाब तक मेट्रो ले जाने की कोशिश जानकारों के मुताबिक पूर्व में उज्जैन की सघन बसाहट के कारण उज्जैन शहर के हिस्से में अंडरग्राउंड मेट्रो के विकल्प पर विचार किया जा रहा था। अब महाकाल महालोक के पास बने तालाब के पास पार्किंग वाले हिस्से तक ओवरहेड मेट्रो ले जाने की योजना है।

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