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IIT मद्रास के छात्रों से मिले rahul gandhi, शिक्षा प्रणाली पर उठाए सवाल, कहा- बेहतर भविष्य के…

rahul gandhi meets iit students said responsibility of the govt to provide quality education लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शनिवार को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मद्रास के छात्रों से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने कहा कि युवाओं के बेहतर भविष्य के लिए वर्तमान की शिक्षा प्रणाली पर फिर से विचार करने की जरूरत है। ‘शिक्षा पर अधिक पैसा हो खर्च’ उन्होंने आईआईटी मद्रास के छात्रों के एक समूह के साथ बातचीत में कहा कि बेहतर भविष्य और भारत को वैश्विक नेतृत्वकर्ता बनाने के लिए यह जरूरी है कि देश की मौजूदा शिक्षा प्रणाली पर पुनर्विचार किया जाए तथा शिक्षा पर अधिक पैसा खर्च किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि निजीकरण और वित्तीय प्रोत्साहन के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा हासिल नहीं की जा सकती। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने बातचीत का यह वीडियो अपने यूट्यूब चैनल पर साझा किया। सफलता का असली मतलब जानने की कोशिश की: राहुल गांधी उन्होंने कहा, ‘‘मुझे हाल ही में आईआईटी मद्रास के कुछ प्रतिभाशाली युवाओं से बात करने का सौभाग्य मिला। साथ में, हमने जानने की कोशिश की कि सफलता का असली मतलब क्या है। हमने भारत के भविष्य को आकार देने में अनुसंधान और शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका तथा एक ऐसे उत्पादन पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर चर्चा की जो निष्पक्षता, नवाचार और सभी के लिए अवसर को महत्व देता है।’ ‘शिक्षा प्रणआली पर विचार किया जाए’ उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अपने युवाओं को शिक्षित करने, बेहतर कल की कल्पना को साकार करने और भारत को वैश्विक नेतृत्वकर्ता में बदलने के लिए भारतीय शिक्षा प्रणाली को लेकर फिर से विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘वर्तमान में, हमारा शिक्षा ढांचा अक्सर युवाओं को कुछ करियर जैसे डॉक्टर, इंजीनियर, आईएएस, आईपीएस, या सशस्त्र बल तक सीमित कर देता है।’ भारत को विश्व मंच पर समानता… राहुल गांधी ने कहा कि यह विविध अवसरों को खोलने, छात्रों को अपनी आकांक्षा को पूरा करने और नवाचार एवं पसंद से प्रेरित भविष्य बनाने के लिए सशक्त बनाने का समय है। उन्होंने कहा, ‘यह बातचीत केवल विचारों के बारे में नहीं थी, यह समझने के बारे में भी थी कि हम भारत को विश्व मंच पर समानता और प्रगति की शक्ति के रूप में स्थापित करने के लिए कैसे मिलकर काम कर सकते हैं। उनके विचारशील प्रश्नों और ताज़ा दृष्टिकोण ने इसे वास्तव में प्रेरणादायक बातचीत बना दिया।’ उन्होंने यह वीडियो ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा, ‘मानना है कि अपने लोगों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की गारंटी देना किसी भी सरकार की सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में से एक है। इसे निजीकरण और वित्तीय प्रोत्साहन के माध्यम से हासिल नहीं किया जा सकता। हमें शिक्षा पर अधिक पैसा खर्च करने तथा सरकारी संस्थानों को मजबूत करने की जरूरत है।’

पत्रकार मुकेश चंद्राकर की हत्या कर, प्टिक टैंक में शव छुपा कर ऊपर बिछा दी कंक्रीट

बीजापुर छत्तीसगढ़ के बीजापुर में बीते 2 दिनों से लापता स्थानीय पत्रकार मुकेश चंद्राकर का शव पुलिस ने बरामद कर लिया है. मुकेश की हत्या कर दी गई और उसकी लाश स्थानीय ठेकेदार सुरेश चंद्राकर के यार्ड में मौजूद सैप्टिक टैंक से बरामद की गई है. मुकेश चंद्राकर मर्डर केस में 3 और गिरफ्तार, कुल 6 आरोपी हुए हैं अरेस्ट . आरोप है कि ठेकेदार के भाई रितेश चंद्राकर नए साल के पहले दिन सुनियोजित तरीके से मुकेश चंद्राकर को अपने साथ यार्ड ले गया. इसके बाद अन्य आरोपियों के साथ मिलकर पत्रकार मुकेश के सिर पर कुल्हाड़ी से वार किया और फिर शरीर पर धारदार हथियार से वार कर उसकी हत्या कर दी. मर्डर के बाद पत्रकार के शव को सेप्टिक टैंक में फेंक दिया गया. पत्रकारों के दबाव पर एक्शन में आई पुलिस स्थानीय पत्रकारों के दबाव के बाद आखिरकार पुलिस ने संदेह के आधार पर ठेकेदार सुरेश चंद्राकर के यार्ड में दबिश दी. इसके बाद कांक्रीट कर चुके सेप्टिक टैंक को तोड़कर मुकेश के शव को बाहर निकाला गया. फिलहाल शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है. शनिवार (4 जनवरी) को पत्रकार मुकेश चंद्राकर के शव का अंतिम संस्कार किया जाएगा. इस घटना के बाद छत्तीसगढ़ के पत्रकारों में काफी रोष है. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह, पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज समेत पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी इस घटना पर दुःख जताया है. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बीजापुर पुलिस को हत्या के आरोपियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं. हत्या के बाद शव सेप्टिक टेंक में डाला बीजापुर के स्थानीय पत्रकारों का कहना है कि मुकेश चंद्राकर की हत्या में ठेकेदार सुरेश चंद्राकर और उसके भाई रितेश चंद्राकर की अहम भूमिका है. इस  मामले में संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है, लेकिन आरोपी चंद्राकर भाइयों को पुलिस अभी तक गिरफ्तार नहीं कर सकी है. बीजापुर के पत्रकारों की बात मानें तो यह सुनियोजित हत्या है. मुकेश चंद्राकर ने 1 जनवरी को सभी पत्रकारों को सोशल मीडिया के माध्यम से नए साल की शुभकामनाएं दीं. उसी दिन ठेकेदार  रितेश चंद्राकर ने उसे फोन करके बुलाया और बस स्टैंड के पीछे चट्टानपारा में अपने यार्ड में ले गया. यहां पूरी बाउंड्री है. घटना स्थल पर ऐसा कोई सुराग नहीं जिसे देख कर लगे कि यहां हत्या हुई है. हत्यारों ने मुकेश चंद्राकर के माथे पर कुल्हाड़ी से वार किया. सिर पर चोट का गहरा निशान है. सिर के पीछे और सीने पर भी धारदार हथियार से वार हुआ है. इसके बाद सेप्टिक टैंक में शव को फेंका गया और टैंक पर मोटी कंक्रीट बिछा दी गई. पुलिस ने जेसीबी से टैंक तोड़ कर शव को बाहर निकाला है. एसपी ने कहा- जल्द होगी गिरफ्तारी बस्तर के पत्रकारों का कहना है कि ठेकेदार और इस हत्या से जुड़े सभी लोगों पर कड़ी कारवाई होनी चाहिए. साथ ही, उसके जो भी वैध-अवैध निर्माण हैं, उन पर बुलडोजर चलना चाहिए. एसपी जीतेंद्र यादव का कहना है कि इस प्रकरण में किसी को भी नहीं बख्शा जाएगा. कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी. हत्या में जो भी लोग शामिल हैं, उनको जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाएगा. क्या था मामला? बीजापुर के स्थानीय पत्रकार मुकेश चंद्राकर बीते 1 जनवरी को रात 8 बजे से लापता था और फोन भी स्विच ऑफ मिला. दूसरे दिन 2 जनवरी को मुकेश चंद्राकर के भाई यूकेश चंद्राकर ने अपने भाई की गुमशुदगी की रिपोर्ट बीजापुर कोतवाली में दर्ज कराई और 3 जनवरी को मुकेश की लाश पुलिस ने बरामद की. फिलहाल, आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद ही पता चल पाएगा कि आखिरकार रीतेश चंद्राकर के साथ अन्य आरोपियों ने मुकेश की हत्या क्यों की?

आसवनियों, बॉटलिंग इकाईयों, होटल, बार, क्लब की नियमित सघन जांच सुनिश्चित की जाए:मुख्यमंत्री

 अवैध मदिरा के विनिर्माण, परिवहन एवं विक्रय पर प्रभावी नियंत्रण के लिए करें कड़ी कार्रवाई: मुख्यमंत्री साय सीमावर्ती जिलों में स्थापित आबकारी चेक पोस्ट को रखें क्रियाशील-मुख्यमंत्री आसवनियों, बॉटलिंग इकाईयों, होटल, बार, क्लब की नियमित सघन जांच सुनिश्चित की जाए:मुख्यमंत्री महुआ संग्राहकों की आय में वृद्धि के उद्देश्य से अन्य राज्यों की महुआ नीति का अध्ययन करने के निर्देश मुख्यमंत्री ने आबकारी विभाग के कार्यों की समीक्षा की रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेश में अवैध मदिरा के विनिर्माण, धारण, परिवहन एवं विक्रय पर प्रभावी नियंत्रण के लिए पुलिस विभाग के समन्वय से कड़ी कार्यवाही करने के निर्देश आबकारी विभाग के अधिकारियों को दिए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य के सीमावर्ती जिलों में स्थापित आबकारी चेक पोस्ट को क्रियाशील रखें। राज्य में स्थित आसवनियों, बॉटलिंग इकाईयों, होटल, बार, क्लब की नियमित सघन जांच सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में आबकारी विभाग के कार्यों की समीक्षा बैठक के दौरान यह निर्देश दिए। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य में देशी मदिरा की नवीन बॉटलिंग इकाई हेतु प्राप्त आवेदनों पर नियमानुसार त्वरित कार्यवाही की जाए तथा छत्तीसगढ़ के बाहर निर्मित मदिरा की विनिर्माण इकाईयों को छत्तीसगढ़ में स्वयं के विनिर्माण संयंत्र लगाये जाने के लिये प्रोत्साहित किया जाए। इसके लिए उन्हें कार्य अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराया जाए, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार प्राप्त हो सके। मुख्यमंत्री ने आबकारी विभाग के रिक्त पदों पर भर्ती की कार्यवाही शीघ्र करने के निर्देश दिए। उन्होंने महुआ संग्राहक वनवासियों को आय के बेहतर साधन उपलब्ध हो सकें, इस उद्देश्य से अन्य राज्यों में प्रचलित महुआ नीति का अध्ययन करने के निर्देश दिये गये। विभाग द्वारा मदिरा दुकानों में कार्यरत कार्मिकों की उपस्थिति के संबंध में लागू आधार सक्षम बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली (AEBAS) की मुख्यमंत्री ने सराहना की।  इसी तरह देशी-विदेशी मदिरा के उपभोक्ताओं को उनकी पसंद अनुरूप मदिरा उपलब्धता की जानकारी प्राप्त करने हेतु प्रारंभ किये गये ‘मनपसंद ऐप’ में उपयोगकर्ता के डाटा की गोपनीयता बनाए रखने एवं ऐप में प्राप्त सुझाव एवं शिकायत पर त्वरित कार्यवाही के निर्देश बैठक में दिये गये। मदिरा दुकानों में आवश्यक साफ-सफाई रखने, मदिरा के ब्राण्ड-लेबल का समुचित प्रदर्शन किये जाने तथा निर्धारित पंजियों का अद्यतन संधारण सुनिश्चित किये जाने के निर्देश भी बैठक में दिये गये। बैठक में मुख्य सचिव अमिताभ जैन, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव मुकेश कुमार बसंल, राहुल भगत, पी. दयानंद और बसवराजू एस., सचिव सह आयुक्त आबकारी सुआर. संगीता, छत्तीसगढ़ स्टेट बेवरेजेस कार्पाेरेशन एवं छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कार्पाेरेशन लिमिटेड के प्रबंध संचालक श्याम लाल धावड़े, विशेष सचिव (आबकारी) देवेन्द्र सिंह भारद्वाज तथा  अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।

टेस्‍ट के बीच भारत को बड़ा झटका, चोटिल हुए बुमराह, इण्डिया का दूसरी पारी में स्कोर 50 रन

सिडनी  भारतीय गेंदबाजों ने सिडनी टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया की पहली पारी को 181 रनों पर सिमट दिया है। 39 के स्कोर पर 4 बल्लेबाजों के आउट होने के बाद ऑस्ट्रेलिया ने अच्छी वापसी की। एक समय लग रहा था कि वह भारत के स्कोर से आगे निकल जाएंगे। जसप्रीत बुमराह भी मैदान से बाहर थे। इसके बाद भी भारतीय गेंदबाजों ने जोरदार वापसी करते हुए पारी को समेट दिया। पहली पारी में 185 रन बनाने वाले टीम इंडिया को 4 रनों की बढ़त मिली। अब भारतीय टीम अपनी दूसरी पारी में बल्लेबाजी कर रही है. व‍िराट कोहली और शुभमन ग‍िल क्रीज पर हैं. भारत के 2 व‍िकेट ग‍िर चुके हैं. भारत का दूसरी पारी में स्कोर 50 रन के करीब है. भारत को पहली पारी में महज 4 रनों की बढ़त म‍िली. पर्थ में भारत ने पहला टेस्ट 295 रनों से मैच जीता. फ‍िर एड‍िलेड टेस्ट ऑस्ट्रेल‍िया ने 10 विकेट से जीता. इसके बाद ब्रिस्बेन टेस्ट ड्रॉ रहा. मेलबर्न में ऑस्ट्रेल‍िया ने 184 रनों से धांसू जीत दर्ज की. सिडनी टेस्ट के दूसरे दिन के खेल से जुड़ी अपडेट के लिए इस पेज को रिफ्रेश करते रहिए… भारत की दूसरी पारी भारत ने दूसरी पारी में ताबड़तोड़ शुरुआत की. यशस्वी जायसवाल ने दूसरी पारी में स्टार्क के पहले ही ओवर में 16 रन जड़ द‍िए. लेकिन भारतीय टीम को पहला झटका केएल राहुल के रूप में लगा, ज‍िन्हें स्कॉट बोलैंड ने बोल्ड कर द‍िया. पहले व‍िकेट के ल‍िए राहुल और यशस्वी के बीच 45 गेंदों पर 42 रनों की पार्टनरश‍िप हुई. राहुल के आउट होने के बाद यशस्वी (22) भी बोलैंड का श‍िकार बने.   भारत का स्कोरकार्ड, दूसरी पारी बल्लेबाज         विकेट                      रन केएल राहुल      बोल्ड बोलैंड              13 यशस्वी जायसवाल     बोल्ड बोलैंड       22 बुमराह हुए इंजर्ड, जानें क्या हुआ? जसप्रीत बुमराह इस मुकाबले में फ‍िलहाल मैदान से बाहर हैं. वह स्कैन करवाने के ल‍िए गए हैं. बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के पांचवें और अंतिम टेस्ट मैच में भारतीय कप्तान जसप्रीत बुमराह को शन‍िवार (4 जनवरी) को चोट का सामना करना पड़ा. उनकी जगह विराट कोहली ने कमान संभाली. ऑस्ट्रेल‍िया की पहली पारी 181 रनों पर ऑलआउट ऑस्ट्रेल‍िया  की पहली पारी भी 181 रनों पर स‍िमट गई. ऑस्ट्रेल‍िया की ओर से पहली पारी में ब्यू वेबस्टर ने ने सर्वाध‍िक 57 रनों की पारी खेली. पहली पारी में भारत की ओर से मोहम्मद स‍िराज और प्रस‍िद्ध कृष्णा को 3-3 विकेट म‍िले. वहीं कप्तान जसप्रीत बुमराह और नीतीश राणा ने 2-2 सफलताएं अर्ज‍ित कीं.    

घड़ियाल राज्य है मध्यप्रदेश, देश में घड़ियालों की संख्या 3044 है और उसमें से मध्यप्रदेश में 2456

भोपाल वन्य जीवन से समृद्ध मध्यप्रदेश बाघ प्रदेश, चीता प्रदेश, तेंदुआ प्रदेश के साथ अब घड़ियाल प्रदेश भी है। यहाँ गिद्धों का आदर्श रहवास है। देश में घड़ियालों की संख्या 3044 है और उसमें से मध्यप्रदेश में 2456 है। इस प्रकार देश में 80 प्रतिशत से अधिक घड़ियालों का घर है मध्यप्रदेश। यहाँ पर डॉल्फिन का भी रहवास है। मध्यप्रदेश में अथक प्रयासों से घड़ियालों के संरक्षण का कार्य किया गया। उनके प्राकृतिक रहवास को सुरक्षित बनाया गया और अवैध शिकार पर रोक लगायी गयी। साथ ही अवैज्ञानिक मछली पकड़ने के तौर-तरीकों को बंद किया गया। 435 किलोमीटर क्षेत्र को किया चंबल घड़ियाल अभयारण्य घोषित चंबल नदी के 435 किलोमीटर क्षेत्र को चंबल घड़ियाल अभयारण्य घोषित किया गया है। चंबल नदी मध्यप्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश की सीमा पर बहती है। नदी में घड़ियालों की वृद्धि की वजह देवरी ईको सेंटर है। इस सेंटर में घड़ियाल के अण्डे लाये जाते हैं और उनसे बच्चे निकलने के बाद उनका पालन किया जाता है। बच्चों की आयु 3 साल होने पर उन्हें नदी में छोड़ दिया जाता है। प्रतिवर्ष 200 घड़ियाल को “ग्रो-एण्ड-रिलीज’’ कार्यक्रम के तहत नदी में छोड़ा जाता है। स्वच्छ नदियों में रहना और नदियों को स्वच्छ रखना घड़ियालों की विशेषता है। इसी वजह से कई राज्यों से इसकी माँग की जाती है। चंबल नदी के घड़ियाल प्रदेश एवं देश की नदियों की शान बढ़ा रहे हैं। जलीय जीव घड़ियाल नदियों का ईको सिस्टम मजबूत करते हैं। देश में वर्ष 1950 और 1960 के दशक के बीच घड़ियालों की आबादी में 80 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आयी। भारत सरकार ने 1970 के दशक में इसे संरक्षण प्रदान किया। संरक्षण समूहों ने प्रजनन और पुन: प्रवेश कार्यक्रम शुरू किये। हालांकि, वर्ष 1997 और वर्ष 2006 के बीच घड़ियालों की आबादी में गिरावट आयी। घड़ियाल को गेवियलिस गैंगेटिकस, जिसे गेवियल या मछली खाने वाला मगरमच्छ भी कहा जाता है। वयस्क मादा घड़ियाल 2.6 से 4.5 मीटर (8 फीट 6 इंच से 14 फीट 6 इंच) लम्बी होती है और नर घड़ियाल 3 से 6 मीटर (9 फीट 10 इंच से 19 फीट 8 इंच) लम्बे होते हैं। वयस्क नर के थूथन के अंत में एक अलग सिरा होता है, जो घड़ा नामक मिट्टी के बर्तन जैसा दिखता है, इसलिये इसका नाम घड़ियाल पड़ा। घड़ियाल अपने लम्बी, संकरी थूथन और 110 आपस में जुड़े तीखे दाँतों की वजह से मछली पकड़ने में सहायक होते हैं। राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य की स्थापना के लिये 30 सितम्बर, 1978 में भारत सरकार की प्रशासनिक स्वीकृति मिली थी। घड़ियालों का कुनबा बढ़ाने के लिये मुरैना में चंबल घड़ियाल सेंक्चुरी के देवरी घड़ियाल सेंटर में हेचिंग सेंटर शुरू किये जायेंगे। इन नदियों के किनारे बसे 75 गाँव के लोगों को जागरूक किया गया है। गाँव के 1200 लोग घड़ियाल मित्र के रूप में वन विभाग के साथ काम कर रहे हैं। पंजाब में वर्ष 1960-70 के बाद से वहाँ की नदियों से घड़ियाल गायब हो गये थे। चंबल नदी के देवरी घड़ियाल सेंटर से वर्ष 2017 में घड़ियाल पंजाब भेजे गये थे। वर्ष 2018 में 25 घड़ियाल सतलुज नदी के लिये भेजे गये और वर्ष 2020 में व्यास नदी के लिये 25 घड़ियाल भेजे गये थे। राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य चंबल नदी के पारिस्थतिकी तंत्र को सुरक्षित रखने की दिशा में राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य बनाया गया था। तीन राज्यों में स्थित इस सेंचुरी का मुख्य आकर्षण घड़ियाल और दुर्लभ पक्षी ‘स्कीमर’ है। यह गंगेटिक में पायी जाने वाली डॉल्फिन, घड़ियाल, मगरमच्छ और साफ पानी के कछुओं के लिये प्रसिद्ध है। वर्ष 1979 में इसे राष्ट्रीय अभयारण्य घोषित किया गया था। यह तीन राज्यों मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश एवं राजस्थान में फैला हुआ है। अब तक प्रवासी एवं यहाँ रहने वाले पक्षियों की 290 से अधिक प्रजातियों की पहचान की जा चुकी है। इस अभयारण्य का मुख्य आकर्षण घड़ियाल और दुर्लभ पक्षी “इण्डियन स्मीकर’’ है। यह दुर्लभ पक्षी गर्मियों के मौसम में यहाँ अपना घरोंदा बनाते हैं। देश में अपनी कुल आबादी के करीब 80 फीसदी स्मीकर चंबल सेंचुरी में प्रवास करते हैं।  

नाबालिग दूल्हा ने बकरे पर सवार हो निभाई शादी की रस्म लोहिया परिवार का अनोखा रिवाज

टीकमगढ़  भारतीय संस्कृति में मानव जीवन 16 संस्कारों से जुड़ा है। जन्मपूर्व से लेकर जीवन पर्यन्त हर संस्कार का अपना अलग महत्व है, इन्हीं संस्कार में से एक कर्णछेदन संस्कार का सैकड़ों वर्ष पुराना रिवाज भी अनोखा है, जिसमें कर्णछेदन संस्कार होने बाले बालक को दूल्हा बनाकर बकरे पर सवार कर उसकी पांच स्थानों से बारात निकाली जाती है। अपनी बड़ी भाभी से कराई शादी टीकमगढ़ के प्रतिष्ठित ठेकेदार व लोहा कारोबारी प्रकाश अग्रवाल के परिवार में अनोखी शादी हुई, शादी से पहले बारात निकाली गई। यहां 12 साल के बच्चे की घोड़ी की जगह बकरे पर बैठाकर बारात निकाली गई, बारात में बैंड-बाजों पर परिजनों ने जमकर डांस किया। इस दौरान जमकर आतिशबाजी भी हुई, इसके बाद दूल्हे की उसकी बड़ी भाभी से शादी की रस्म निभाई गई। शादी असल में नहीं बल्कि एक रिवाज शहर के प्रतिष्ठित लोहिया परिवार के कैलाश अग्रवाल कहते हैं कि हमारे यहां अनेकों पीढ़ियों में सैकड़ों साल से चली आ रही यह एक अनोखी परंपरा है। जिसमें परिवार के बड़े बेटे का कर्णछेदन का संस्कार शादी समारोह की तरह धूमधाम से किया जाता है। जिसमें तीन दिन का आयोजन होता है। कर्ण छेदन संस्कार में बड़े बेटे को दूल्हा बनाकर उसकी बारात बकरे पर बैठाकर निकालने की परंपरा है। इस शादी में परिवार के अलावा रिश्तेदार और मोहल्ले के लोग शामिल होते हैं। इसके बाद विधि विधान से शादी की रस्में पूरी की जाती है। इस रिवाज की बजह अभी भी अज्ञात लोहिया परिवार के ही एक बुजुर्ग सदस्य का कहना है कि ये रिवाज कई पीढ़ियों से सैकड़ों वर्षों से चला आ रही है। आखिर बकरे पर बैठाकर नाबालिग की बारात और शादी की रस्म निभाने की परम्परा क्यों शुरू की गई होगी। इसका ठीक-ठीक कारण तो पता नहीं है, लेकिन परिवार में बड़े बेटे के कर्णछेदन संस्कार के समय इस तरह के आयोजन लोहिया परिवार में होते रहे हैं, जिसका हम सब पालन करते आ रहे हैं। ये हमारे परिवार के लिए शुभ है, जिस कारण हमारे परिवार इसको निभा रहे हैं।

12 से 26 फरवरी तक आयोजित होगा राजिम कुंभ कल्प, अध्यात्म और संस्कृति का भव्य आयोजन

रायपुर छत्तीसगढ़ के प्रयाग के रूप में प्रसिद्ध  राजिम में 12 फरवरी से 26 फरवरी 2025 तक कुंभ कल्प का भव्य आयोजन किया जाएगा। इस वर्ष यह अद्भुत धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन 52 एकड़ के नए प्रस्तावित मेला स्थल में संपन्न होगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मंत्रालय महानदी भवन स्थित बैठक कक्ष में आज राजिम कुंभ कल्प के तैयारियों के संबंध में उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक कर आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने शाही स्नान, गंगा आरती, संत समागम समेत कुंभ कल्प के प्रमुख आयोजनों और श्रद्धालुओं के लिए सुविधाजनक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने को कहा।       मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राजिम कुंभ कल्प 2025 धर्म, आस्था और संस्कृति का अद्भुत समागम होगा और यह छत्तीसगढ़ की समृद्ध परंपराओं और  संस्कृति को प्रदर्शित करने का भी सुंदर माध्यम है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि श्रद्धालुओं को यहां अविस्मरणीय अनुभव प्राप्त हो और यह आयोजन हमारी गौरवशाली विरासत को देश-दुनिया तक पहुंचाएं।          मुख्यमंत्री साय  ने राजिम कुंभ कल्प के आयोजन में शामिल समस्त विभागों और प्रशासनिक अमले को आपस में समन्वय स्थापित कर कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने श्रद्धालुओं के आवागमन की व्यवस्था, सुरक्षा संबंधी उपाय और स्वच्छता के लिए विशेष ध्यान देने को कहा। साय ने कहा कि “हम सबकी जिम्मेदारी है कि इस आयोजन को सफल बनाएं और  छत्तीसगढ़ की पहचान के रूप में इसे स्थापित करें। उन्होंने 12 फरवरी को आयोजित माघी पुन्नी स्नान, 21 फरवरी जानकी जयंती के अवसर पर संत समागम और 26 फरवरी को होने वाले शाही स्नान की तैयारी पर विशेष ध्यान देने को कहा।          मुख्यमंत्री साय को अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू ने राजिम कुंभ कल्प 2025 के आयोजन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने पीपीटी के माध्यम से आयोजन स्थल में विभिन्न गतिविधियों के लिए निर्धारित स्थानों के बारे में बताया। कुंभ कल्प में नागरिक सुविधाओं, साधु संतों के आवागमन, शाही स्नान और गंगा आरती को लेकर विभाग के तैयारियों के बारे में जानकारी दी।             उल्लेखनीय है कि 12 फरवरी को माघी पूर्णिमा के पावन अवसर पर राजिम कुंभ कल्प का शुभारंभ होगा और 26 फरवरी महाशिवरात्रि को इसका समापन होगा। राजिम कुंभ कल्प पैरी, महानदी और सोंढूर नदी के संगम पर आयोजित होगा। श्रद्धालु इन पवित्र नदियों में स्नान कर पुण्य लाभ प्राप्त करेंगे।             राजिम कुंभ कल्प के संपूर्ण आयोजन के लिए पर्यटन विभाग को नोडल बनाया गया है। 15 दिनों तक चलने वाले इस कुंभ कल्प में पिछले वर्ष की भांति इस वर्ष भी साधु संतों का विराट समागम होगा। माघी पुन्नी स्नान, शाही स्नान, जानकी जयंती के अवसर पर संत समागम विशेष रूप से आयोजित होगा। प्रतिदिन सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन, मेला, मड़ई, मीना बाजार और विभागीय प्रदर्शनी भी कुंभ कल्प का विशेष आकर्षण के रूप में शामिल हैं।           बैठक में विधायक रोहित साहू, मुख्य सचिव अमिताभ जैन, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, सचिव धर्मस्व अन्बलगन पी., संचालक संस्कृति विवेक आचार्य, आईजी रायपुर अमरेश मिश्रा, कलेक्टर गरियाबंद दीपक अग्रवाल सहित अन्य विभागीय अधिकारीगण उपस्थित थे।

Jammu Kashmir Army Vehicle Accident: बांदीपोरा में सेना का ट्रक खाई में गिरा… चार जवानों की मौत, दो घायल

Jammu Kashmir Army Vehicle Accident जम्मू-कश्मीर के बांदीपोरा जिले में बड़ा हादसा हुआ है। सेना का एक वाहन खाई में गिर गया। हादसे में चार सैनिकों की मौत हो गई। जबकि दो अन्य घायल हो गए। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मौके पर राहत एवं बचाव कार्य चल रहा है। जानकारी के अनुसार, जम्मू-कश्मीर के बांदीपोरा में शनिवार दोपहर यह हादसा हुआ। बताया जा रहा है कि फिसलन के कारण सेना का एक ट्रक पहाड़ी से नीचे खाई में गिर गया। इस हादसे में चार जवानों की मौत हो गई। जबकि दो घायल हो गए। इनकी हालत नाजुक बताई जा रही है। यह दुर्घटना बंदीपोरा के सदरकूट पाईन इलाके में हुई जहां सेना का ट्रक फिसलन के कारण खाई में जा गिरा। हादसे के बाद स्थानीय पुलिस और सेना के अन्य जवान राहत कार्य में जुट गए। इस घटना के कारणों की जांच की जा रही है।

5 जनवरी को राहगीरी के आनंदोत्सव में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव खुद शामिल होंगे, अपनी-अपनी कलाओं का प्रदर्शन

उज्जैन मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के शहर उज्जैन में राहगीरी का आयोजन किया जा रहा है. इस राहगीरी में 5 जनवरी को मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव खुद शामिल होंगे, इसलिए लेकर तैयारी शुरू हो रही है. राहगीरी का आयोजन कोरोना काल के पहले उज्जैन में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने ही शुरू किया था. यह आयोजन नगर निगम और जिला प्रशासन के सहयोग से होता है. उज्जैन कलेक्टर नीरज कुमार सिंह ने बताया कि लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने और सुबह जल्दी उठकर व्यायाम करने के उद्देश्य से राहगीरी को शुरू किया गया था.  राहगीरी के माध्यम से स्थानीय खेल को भी काफी बढ़ावा मिलता है.  यह आयोजन उज्जैन का अपना अलग ही आयोजन है. इसे नगर निगम, जिला प्रशासन, आनंद विभाग द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया जाता है. अभी नहीं आया है CM यादव का अधिकृत कार्यक्रम 5 जनवरी और 19 जनवरी को उज्जैन में कोठी मार्ग पर इसका आयोजन होगा, जिसकी तैयारियां की जा रही है. इस आयोजन में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की शामिल होंगे. अभी उनका अधिकृत कार्यक्रम नहीं आया है, लेकिन उन्होंने उज्जैन आगमन की स्वीकृति दी है. राहगीरी का आयोजन 1 किलोमीटर लंबे मार्ग पर होता है इस रविवार को ही आयोजित किया जाता है, ताकि सभी लोगों को शामिल होने का अवसर मिल सके. अपनी-अपनी कलाओं का प्रदर्शन राहगीरी कार्यक्रम में संगीत खेलकूद व्यायाम नृत्य सहित विद्यार्थियों से लेकर बड़ों तक अपनी कला का प्रदर्शन किया जाता है. म्यूजिकल ग्रुप के संयोजक वैभव यादव के मुताबिक आयोजन में लोग बढ़ चढकर हिस्सा लेते हैं. यह आयोजन पिछले कई सालों से उज्जैन में लगातार हो रहा है. इसका एक उद्देश्य कलाकारों को प्लेटफार्म भी उपलब्ध कराना है.

अब पेंशन और अवकाश नियम में होगा संशोधन, बदल जाएगा 1977 का ये रूल, रिटायर अधिकारी बनाएंगे नए नियम

भोपाल मध्य प्रदेश में कर्मचारियों के अवकाश और पेंशन के नियम लंबे समय बाद संशोधित किए जाएंगे। इन्हें केंद्र सरकार के नियमों के अनुरूप तैयार किया जाएगा। इसके लिए वित्त विभाग ने सामान्य प्रशासन और वित्त विभाग के सेवानिवृत्त अधिकारियों का समूह बनाया है, जो मार्च 2025 तक अनुशंसा देगा। पेंशन और अवकाश नियम में संशोधन इसके आधार पर नियम वित्तीय वर्ष के समाप्त होने से पहले नियम को अंतिम रूप देने का लक्ष्य रखा है। वित्त विभाग ने पेंशन और अवकाश नियम में संशोधन के लिए गठित समूह में वित्त सेवा के आरके जैन, सामान्य प्रशासन विभाग के एमके बातव को शामिल किया गया है। इसके साथ ही वित्त सेवा के दो अन्य अधिकारी भी इस काम को देखेंगे। इन नियमों में परिवर्तन उल्लेखनीय है कि भारत सरकार पेंशन नियमों में कई परिवर्तन कर चुकी हैं। इसमें 25 वर्ष से अधिक अविवाहित पुत्री, विधवा, परित्याक्ता को परिवार पेंशन देने का प्रविधान है। पेंशनरों की मांग को देखते हुए सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी जीपी सिंघल की अध्यक्षता वाले कर्मचारी आयोग ने पेंशन नियम का परीक्षण करके संशोधन संबंधी अपनी रिपोर्ट वित्त विभाग को तीन वर्ष पहले दी थीं। इस पर विभाग ने पेंशन संचालनालय से अभिमत भी मांगा था, जो दिया जा चुका है। सूत्रों का कहना है कि इसी रिपोर्ट के आधार पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। इसी तरह अवकाश संबंधी 1977 के नियम भी वर्तमान व्यवस्था को देखते हुए बदले जाएंगे।

ठंड का कहर जारी, दिल्‍ली में फिर बारिश के आसार, 4 और 5 जनवरी को बर्फबारी से देश में बढ़ सकती है ठंड

नई दिल्‍ली देश भर में इन दिनों ठंड का कहर जारी है। कई शहर शीतलहर की चपेट में हैं। उत्‍तर और मध्‍य भारत के कुछ शहरों में बीते सप्‍ताह बारिश भी हुई। इसके चलते ठिठुरन और बढ़ी है। अब मौसम विभाग का ताजा अनुमान बताता है कि अगले तीन से चार दिनों तक बारिश और सर्दी की संभावना है। उत्तर भारत के मौसम का अपडेट आईएमडी के वैज्ञानिक ने बताया कि सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ की जानकारी दी। उन्होंने अगले 4-5 दिनों में पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में हल्की से मध्यम बर्फबारी की भविष्यवाणी की। 4 और 5 जनवरी को जम्मू-कश्मीर में भारी बर्फबारी हो सकती है। उन्होंने कहा, “पश्चिमी हिमालय क्षेत्र में एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ है। अगले 4-5 दिनों में पश्चिमी हिमालय क्षेत्र में हल्की से मध्यम बर्फबारी होगी। 4 और 5 जनवरी को जम्मू-कश्मीर में भारी बर्फबारी की उम्मीद है। आस-पास के मैदानी इलाकों में भी हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। 6 जनवरी को दिल्ली में हल्की बारिश की उम्मीद है। दिल्ली का मौसम अपडेट दिल्ली में इस सप्ताह बारिश होने की उम्मीद है। आईएमडी के दिल्ली के मौसम अपडेट के अनुसार 6 जनवरी को राष्ट्रीय राजधानी में हल्की बारिश होने की उम्मीद है। दिल्ली में शुक्रवार को घने कोहरे की चादर छाने के बाद कुछ इलाकों में दृश्यता शून्य हो जाने से मौसम की स्थिति और खराब हो गई। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने कहा कि दिल्ली में न्यूनतम तापमान 7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। सोमवार से दिल्ली ठंड के दिनों से जूझ रही है और आज कोहरे ने हालात और खराब कर दिए हैं। शुक्रवार को दिल्ली में न्यूनतम तापमान 7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इस बीच, अधिकतम तापमान 17 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की उम्मीद है। दिल्ली में ठंडे दिन की स्थिति “ठंडा दिन” तब होता है जब न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से कम होता है और उच्चतम या निम्नतम तापमान किसी विशिष्ट अवधि के लिए सामान्य माने जाने वाले तापमान से कम से कम 4.5 डिग्री कम होता है।शुक्रवार को कुछ क्षेत्रों में दृश्यता शून्य हो गई। मौसम विभाग ने कहा कि दिल्ली के आईजीआई हवाई अड्डे पर बहुत घना कोहरा रहा, दृश्यता 0 मीटर दर्ज की गई। इसने कहा कि सभी रनवे CAT-III मानदंडों के तहत काम कर रहे हैं – एक नेविगेशन सिस्टम जो विमानों को कम दृश्यता के तहत उतरने में मदद करता है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव 132 करोड़ रूपये के विकास कार्यों का करेंगे भूमि-पूजन एवं लोकार्पण

विदिशा जिले को 4 जनवरी को मिलेगी विकास की अनेक सौगातें भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शनिवार 4 जनवरी को विदिशा के लटेरी में लगभग 132 करोड़ रूपये की लागत का भूमि-पूजन एवं लोकार्पण करेंगे। इसका लाभ विदिशा जिले के सिरोंज और लटेरी क्षेत्र की जनता को मिलेगा। लटेरी में आयोजित कार्यक्रम में हितग्राहियों को हितलाभ भी वितरित किये जायेंगे। विदिशा के सिरोंज और लटेरी अनुभाग क्षेत्र में जिन विभागों के करोड़ों की लागत से भूमि-पूजन और लोकार्पण होने जा रहे हैं, उनमें नगर पालिका परिषद के 20.6217 करोड़, जनपद पंचायत के 6.6352 करोड़, स्वास्थ्य विभाग के 9.4179 करोड़, पीएमजेएसवाय के 7.0311 करोड़, लोक निर्माण विभाग के 24.8112 करोड़, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग के 15.7288 करोड़, शिक्षा विभाग के 38.8000 करोड़, राजस्व विभाग के 7.3200 करोड़, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के 1.1604 करोड़ और महिला एवं बाल विकास विभाग के 0.4488 करोड़ की लागत के विकास कार्य शामिल हैं।  

अब दिल्ली विधानसभा चुनाव के तारीखों का ऐलान बहुत जल्द होने की संभावना, फरवरी में चुनाव होने की उम्मीद

नई दिल्ली दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर राजनीति गरमाती जा रही है। आम आदमी पार्टी (AAP), भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। इसके बीच ही चुनाव आयोग ने अपनी तैयारी पूरी कर ली है और अब दिल्ली विधानसभा चुनाव के तारीखों का ऐलान बहुत जल्द होने की संभावना है। सूत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार, केंद्रीय चुनाव आयोग 7 या 8 जनवरी को दिल्ली विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर सकता है। चुनावों की तिथि फरवरी के दूसरे हफ्ते में रखे जाने की संभावना जताई जा रही है। इसके बाद चुनाव परिणाम 15 या 16 फरवरी के आसपास घोषित होने की उम्मीद है। एक ही चरण में होंगे दिल्ली विधानसभा चुनाव केंद्र सरकार और चुनाव आयोग की ओर से तैयारियां अंतिम चरण में हैं। सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली विधानसभा चुनाव एक ही चरण में होंगे और मतदान 11 से लेकर 13 फरवरी के बीच हो सकते हैं। यदि यह तारीखें तय होती हैं, तो चुनाव परिणाम की घोषणा 15 या 16 फरवरी तक की जा सकती है। इसके साथ ही, 6 जनवरी तक चुनाव आयोग नई वोटर लिस्ट भी जारी करेगा, जिससे नए मतदाताओं के नाम और वोटरों की संख्या में होने वाले बदलाव का पता चलेगा। इस लिस्ट के आधार पर ही चुनावी प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जाएगा। नई वोटर लिस्ट जारी होने के बाद दिल्ली के चुनावी क्षेत्र में एक नई उम्मीद और उत्साह का माहौल बनेगा। यह लिस्ट दिल्ली की राजनीतिक दिशा को भी प्रभावित कर सकती है, क्योंकि नई वोटर लिस्ट में खासतौर पर युवा वोटरों और नए नागरिकों की संख्या बढ़ने की संभावना है। इससे पहले, 2015 और 2020 के चुनावों में भी युवा वोटर्स ने बड़ी भूमिका निभाई थी। फोकस  शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पानी और विकास के मुद्दों पर दिल्ली विधानसभा चुनावों को लेकर तीन प्रमुख दलों के बीच राजनीति और रणनीति का घमासान तेज हो गया है। आम आदमी पार्टी, जो पिछले कुछ वर्षों में दिल्ली में सत्तारूढ़ रही है, ने अपनी चुनावी तैयारियों को तेज कर दिया है। पार्टी का लक्ष्य 2020 की तरह एक बार फिर एकतरफा जीत हासिल करना है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पार्टी के वरिष्ठ नेता चुनावी मैदान में अपनी पूरी ताकत लगा रहे हैं। उनका फोकस मुख्य रूप से शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पानी और विकास के मुद्दों पर है। पार्टी का दावा है कि दिल्ली में पिछले 5 वर्षों में हुए विकास कार्यों के आधार पर जनता उनके साथ है। वहीं भारतीय जनता पार्टी (BJP), जो दिल्ली में पिछले 27 साल से सत्ता से बाहर है, इस बार हर संभव कोशिश कर रही है ताकि वह दिल्ली में अपना खोया हुआ प्रभाव फिर से बना सके। पार्टी के नेताओं का कहना है कि दिल्ली में विकास के नाम पर आम आदमी पार्टी ने केवल घोषणाएं की हैं और वास्तविक सुधारों की कमी है। बीजेपी इस चुनाव में नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता और केंद्रीय योजनाओं के माध्यम से दिल्ली की जनता को आकर्षित करने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस पार्टी, जो कभी दिल्ली में एक प्रमुख राजनीतिक शक्ति थी, अब अपनी खोई हुई जमीन को वापस पाने की कोशिश कर रही है। पिछले कुछ वर्षों में कांग्रेस का वोट बैंक लगातार घटता जा रहा है। हालांकि, कांग्रेस दिल्ली के पुराने वफादारों और उन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित कर रही है जहां उनका प्रभाव था। पार्टी के नेता यह दावा कर रहे हैं कि वे एक नई शुरुआत के साथ मैदान में हैं और आने वाले चुनावों में अपनी खोई हुई साख को पुनः हासिल करेंगे। जानिए दिल्ली के चुनावी का इतिहास दिल्ली विधानसभा चुनावों के इतिहास पर नजर डालें तो पिछले कुछ चुनावों में AAP ने अपनी मजबूत स्थिति कायम रखी है। 2020 के चुनाव में, AAP ने बीजेपी और कांग्रेस दोनों को मात देते हुए 70 सीटों में से 62 पर विजय प्राप्त की थी। AAP के उम्मीदवारों ने कई सीटों पर कम अंतर से जीत हासिल की थी, जो दर्शाता है कि दिल्ली के मतदाता इस बार भी सटीक चुनावी रणनीतियों को प्राथमिकता देंगे।दिल्ली विधानसभा में कुल 70 सीटें हैं, और इनमें से अधिकतर सीटें ऐसी हैं, जहां जीत का अंतर काफी कम होता है। इसलिए इस चुनाव में उम्मीदवारों के व्यक्तिगत प्रभाव और क्षेत्रीय समीकरणों का भी अहम योगदान हो सकता है। दिल्ली की सियासत में एक नई जनधारा का आना और विभिन्न क्षेत्रों में बदलते हुए मतदाता स्वरूप के कारण चुनावी परिणामों का पूर्वानुमान करना कठिन हो गया है। चुनाव में किसी भी मतदाता को समस्या न हो 6 जनवरी तक केंद्रीय चुनाव आयोग नई वोटर लिस्ट जारी करेगा, जिसमें नए वोटरों के नाम जोड़े जाएंगे और पुराने नामों में बदलाव किया जाएगा। दिल्ली में हर चुनाव से पहले इस लिस्ट का अपडेट किया जाता है ताकि चुनाव में किसी भी मतदाता को समस्या न हो। इस बार दिल्ली में बड़ी संख्या में युवा मतदाता हैं, जो पहली बार वोट डालने जा रहे हैं। इसके अलावा, कई प्रवासी नागरिक जो हाल ही में दिल्ली में आए हैं, उनके नाम भी वोटर लिस्ट में जोड़े जा सकते हैं। नई वोटर लिस्ट का प्रभाव यह भी हो सकता है कि दिल्ली के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में प्रत्याशियों की जीत-हार के अंतर में बदलाव आए। साथ ही, यह लिस्ट चुनावी प्रचार में एक नया मोड़ ला सकती है क्योंकि पार्टियों को अब नए वोटर्स तक पहुंचने के लिए अपनी रणनीतियों को फिर से डिजाइन करना होगा।  

प्रयागराज रेल मंडल महाकुंभ में पहली बार रेल कर्मियों की जैकेट से ‘डिजिटल रेल टिकट’ बनाने की सुविधा प्रदान करेगा

प्रयागराज महाकुंभ-2025 को ‘दिव्य-भव्य’ के साथ ‘डिजिटल’ बनाने का संकल्प डबल इंजन की सरकार ने लिया है। इस दिशा में भारतीय रेलवे एक अनूठी पहल करने जा रहा है। प्रयागराज रेल मंडल महाकुंभ में पहली बार रेल कर्मियों की जैकेट से ‘डिजिटल रेल टिकट’ बनाने की सुविधा प्रदान करेगा। इस पहल के कारण महाकुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं को टिकट की लंबी लाइनों में नहीं लगना पड़ेगा। साथ ही रेलवे प्रशासन को भी टिकट बनाने की प्रक्रिया में कुछ राहत मिलेगी। इसके अलावा भारतीय रेलवे ने पहले ही टोल फ्री नंबर, वेबसाइट और महाकुंभ मेला ऐप जारी कर ‘डिजिटल महाकुंभ’ को सफल बनाने में सार्थक प्रयास किए हैं। ‘महाकुंभ-2025’ को ध्यान में रखते हुए उत्तर मध्य रेलवे ने प्रयागराज आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्थाएं की हैं। उत्तर मध्य रेलवे के प्रयागराज मंडल ने डिजिटल तकनीक के उपयोग से टिकटिंग प्रक्रिया को सरल और सुगम बनाने के लिए एक अभिनव पहल शुरू की है। इस बारे में बताते हुए प्रयागराज रेल मंडल के सीनियर पीआरओ अमित मालवीय ने कहा, ”महाकुंभ के दौरान, रेलवे के वाणिज्य विभाग के कर्मचारी प्रयागराज जंक्शन पर हरे रंग की जैकेट पहनकर विशेष ड्यूटी पर तैनात रहेंगे। इन जैकेट्स के पीछे क्यूआर कोड अंकित होगा, जिसे श्रद्धालु अपने मोबाइल से स्कैन कर सीधे यूटीएस मोबाइल ऐप डाउनलोड कर सकते हैं। यह ऐप यात्रियों को बिना लाइन में खड़े अनारक्षित टिकट बुक करने की सुविधा प्रदान करेगा।” प्रयागराज रेल मंडल की इस पहल से श्रद्धालु रेलवे स्टेशन पर लंबी लाइनों से बचते हुए आसानी से टिकट प्राप्त कर सकेंगे। डिजिटल भुगतान के माध्यम से टिकट बुकिंग की यह प्रक्रिया न केवल समय की बचत करेगी, बल्कि महाकुंभ में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को टिकट लाइन की समस्या से भी दूर रखेगी। सीनियर पीआरओ ने बताया, ”रेलवे कर्मी क्यूआर कोड वाली जैकेट पहनकर रेलवे परिसर में विभिन्न महत्वपूर्ण स्थानों पर तैनात रहेंगे, जिससे श्रद्धालु आसानी से टिकट बुक कर सकें। साथ ही क्यूआर कोड के माध्यम से यात्री टिकट बुकिंग के साथ-साथ अन्य सुविधाओं का भी लाभ उठा सकेंगे।” उत्तर मध्य रेलवे की पहल डबल इंजन सरकार की ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘डिजिटल महाकुंभ’ की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो महाकुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं को भी अनोखा और सुखद अनुभव प्रदान करेगा।  

आदिगुरु शंकराचार्य ने सिर्फ 32 साल की उम्र में देश के चार कोनों में स्थापित किए चार मठ

प्रयागराज में 13 जनवरी से महाकुंभ की शुरुआत होने जा रही है. इसमें देश के 13 प्रमुख अखाड़े भी शामिल हो रहे हैं. सभी अखाड़ों में सर्वोच्च पद महामडंलेश्वर का होता, लेकिन एक अखाड़ा ऐसा भी है, जहां कोई महामडंलेश्वर नहीं है. हम जिस अखाड़े की बात कर रहे हैं, वो है श्रीशंभू पंचायती अटल अखाड़ा. शंकराचार्य के निर्देश पर हुई थी स्थापना इसके पीछे का करण अखाड़े में कड़ा अनुशासन और संन्यास देने की कठिन परिक्षा को माना जाता है. क्योंकि कठिन परीक्षा में ज्यादातर सफल नहीं हो पाते. इस अखाड़े की स्थापना गोंडवाना में 569 ईस्वी आदिगुरु शंकराचार्य के निर्देश पर हुई थी. आज हम आपको उन्हीं आदिगुरु शंकराचार्य के जीवन के बारे में बताने जा रहे हैं. कब हुआ था आदिगुरु शकंराचार्य का जन्म आदिगुरू शकंराचार्य केरल में जन्मे थे. आदि शकंराचार्य का जन्म केरल के कालड़ी गांव में 508-9 ईसा पूर्व हुआ माना जाता है. उनकी मां का नाम आर्याम्बा और पिता का नाम शिवगुरु था. उन्होंने जंगलों, पहाड़ों से होते हुए ओंकारेश्वर में ज्ञान प्राप्त किया. ओंकारेश्वर से वो वेदांत के प्रचार के लिए निकल पड़े. जब वो वेदांत के प्रचार के लिए निकले उस वक्त उनकी उम्र सिर्फ 12 साल थी. ओंकारेश्वर से ज्ञान प्राप्त कर वो काशी की ओर चल पड़े. धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, आदिगुरु शंकराचार्य ने सिर्फ 32 साल की उम्र में देश के चार कोनों में चार मठ स्थापित कर दिए थे. इनको ज्योतिष्पीठ बदरिकाश्रम, श्रृंगेरी पीठ, द्वारिका शारदा पीठ और पुरी गोवर्धन पीठ के नाम से जाना जाता है. आज के समय में ये चारों पीठ बहुत ही पवित्र माने जाते हैं. इन चारों पीठों पर जो संन्यासी आसीन हैं उन्हें शंकराचार्य कहा जाता है. आदिगुरु शंकराचार्य की ओर से स्थापित किए गए मठों का मकसद पूरे भारत को सांस्कृतिक रूप से जोड़ना था. आदिगुरु शंकराचार्य ने पूरे भारत को सांस्कृतिक रूप से जोड़ा. आदिगुरु शंकराचार्य ने सनातन धर्म को देश के कोने-कोने में पहुंचाया.

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