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छत्तीसगढ़ को मिली बड़ी सौगात: खरसिया-नया रायपुर- परमलकसा रेल परियोजना से खुलेगा विकास का नया द्वार

रायपुर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति ने भारतीय रेलवे की चार महत्वपूर्ण मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिनकी कुल लागत लगभग 18,658 करोड़ रुपये है। इन परियोजनाओं के माध्यम से छत्तीसगढ़ सहित महाराष्ट्र और ओडिशा के कुल 15 ज़िलों को जोड़ते हुए रेलवे नेटवर्क में 1247 किलोमीटर की महत्वपूर्ण वृद्धि होगी। छत्तीसगढ़ के लिए विशेष रूप से स्वीकृत ‘खरसिया-नया रायपुर- परमलकसा 5वीं एवं 6वीं लाइन’ परियोजना से राज्य के औद्योगिक नक्शे में ऐतिहासिक परिवर्तन की संभावनाएं बनेंगी। यह परियोजना बलौदा बाजार जैसे क्षेत्रों को सीधी रेलवे कनेक्टिविटी प्रदान करेगी, जिससे सीमेंट संयंत्रों, इस्पात इकाइयों और अन्य औद्योगिक निवेश के लिए आधारभूत संरचना तैयार होगी। यह मार्ग कृषि उत्पादों, उर्वरक, कोयला, लौह अयस्क, इस्पात, सीमेंट और चूना पत्थर जैसी सामग्रियों के परिवहन में क्रांतिकारी सुधार लाएगा। इससे माल ढुलाई की लागत घटेगी, संचालन की गति बढ़ेगी और उद्योगों को निर्बाध सप्लाई चेन मिलेगी। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ को मिली यह ऐतिहासिक रेल परियोजना आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की दिशा में एक ठोस कदम है। खरसिया-नया रायपुर- परमलकसा लाइन से बलौदा बाजार और आस-पास के क्षेत्रों को  रेलवे नेटवर्क से जोड़ा जा रहा है, जिससे यहाँ के युवाओं के लिए रोज़गार और स्वरोज़गार के नए द्वार खुलेंगे। यह परियोजना छत्तीसगढ़ में नया अध्याय लिखेगी, जिससे न केवल कोयला, सीमेंट और लौह अयस्क जैसे क्षेत्रों में उत्पादन और परिवहन को गति मिलेगी, बल्कि क्षेत्रीय आर्थिक सशक्तिकरण भी सुनिश्चित होगा। उन्होंने कहा कि हम प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के आभारी हैं कि उन्होंने छत्तीसगढ़ की आवश्यकता और क्षमता को पहचान कर रेल परियोजनाओं के माध्यम से राज्य को ‘विकास के फास्ट ट्रैक’ पर लाने का काम किया है। उल्लखेनीय है कि खरसिया से परमलकसा तक 5वीं और 6वीं नई रेल लाइन बिछाने के लिए ₹8,741 करोड़ की महत्वाकांक्षी परियोजना को स्वीकृति मिल गई है, जिससे छत्तीसगढ़ को लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक गतिविधियों के क्षेत्र में बड़ी बढ़त मिलेगी। मुख्य विशेषताएँ कुल लंबाई: 278 किमी लंबा रेलमार्ग, 615 किमी ट्रैक की लंबाई स्टेशनों की संख्या: 21 पुल और फ्लाईओवर: 48 बड़े पुल, 349 छोटे पुल, 14 आरओबी, 184 आरयूबी, 5 रेल फ्लाईओवर ट्रैफिक क्षमता: 21 से 38 मिलियन टन कार्गो, 8 मेल/एक्सप्रेस/सेमी हाई-स्पीड ट्रेनें ईंधन और पर्यावरण संरक्षण: 22 करोड़ लीटर डीजल की बचत प्रतिवर्ष 113 करोड़ किग्रा CO2 की कटौती – यह लगभग 4.5 करोड़ पेड़ों के लगाने के बराबर है। लॉजिस्टिक्स लागत में भारी कमी: सड़क परिवहन की तुलना में प्रतिवर्ष ₹2,520 करोड़ की बचत इन ज़िलों को मिलेगा प्रत्यक्ष लाभ:रायगढ़, जांजगीर-चांपा, सक्ती, बिलासपुर, बलौदा बाज़ार, रायपुर, दुर्ग और राजनांदगांव। राज्य की प्रगति का नया युग इस परियोजना से छत्तीसगढ़ में औद्योगिक और व्यापारिक गतिविधियों में तीव्र गति आएगी। यह पहल पर्यावरणीय स्थिरता और ट्रांसपोर्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर को नया आयाम देगी।

राज्य आनंद संस्थान द्वारा आनंद की ओर प्रशिक्षण का आयोजन 7 से 9 अप्रैल तक

भोपाल राज्य आनंद संस्थान द्वारा 7 से 9 अप्रैल 2025 तक आरसीपीवी नरोन्हा प्रशासन अकादमी भोपाल में आनंद की ओर सार्वभौमिक मानवीय मूल्यों के साथ प्रशिक्षण का आयोजन किया जाएगा। प्रशिक्षण में जन अभियान परिषद, शासकीय विभागों के अधिकारी और अशासकीय सदस्य भी शामिल होंगे। मुख्य कार्यपालन अधिकारी राज्य आनंद संस्थान श्री आशीष कुमार ने बताया कि प्रशिक्षण में प्रदेश के कुल 50 प्रतिभागी शामिल होंगे, जिन्होंने संस्थान की वेबसाइट पर पंजीयन कराया है। उन्होंने कहा कि धन, पद, ऐश्वर्य आदि के पीछे भागकर इसके माध्यम से आनंदित रहने की संभावना कम ही है। मानव में निरंतर आनंद में रहने के लिए भौतिक सुविधा के साथ संबंध एवं समझ का होना आवश्यक है। इन तीनों के होने पर व्यक्ति स्वयं, परिवार, समाज तथा शेष प्रकृति की व्यवस्था के संगत में आनंदित होकर जी सकता है। ‘आनंद की ओर’ कार्यक्रम में प्रदेश के नागरिकों को इस विषय वस्तु के बारे में जागरूक करने का प्रयास है। संस्थान द्वारा आनंदकों को इससे जोड़ा जा रहा है, जिससे उनका जीवन आनंदमयी हो और दूसरों को आनंदित रहने की दिशा में भी प्रेरित कर सकें।  

बुद्ध का संदेश : विदेश यात्राओं में पीएम मोदी का बौद्ध धर्म पर जोर, विशेष महत्व देते नजर आते हैं

बैंकॉक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और थाई पीएम पैतोंगतार्न शिनावात्रा ने शुक्रवार को थाईलैंड के प्रसिद्ध ऐतिहासिक बौद्ध मंदिर ‘वाट फो’ का दौरा किया। थाइलैंड के बाद पीएम मोदी श्रीलंका का दौरा करेंगे जहां वह अनुराधापुरा में महाबोधि मंदिर जाएंगे। अपनी विदेश यात्राओं में खासतौर से पीएम मोदी बौद्ध धर्म को विशेष महत्व देते नजर आते हैं। 2024 में भारत-आसियान शिखर सम्मेलन में, प्रधानमंत्री मोदी ने लाओस के राष्ट्रपति थोंगलाउन सिसोउलिथ को एक पुरानी पीतल की बुद्ध प्रतिमा भेंट की। उसी वर्ष, भारत ने भगवान बुद्ध और उनके शिष्यों के कई पवित्र अवशेष थाईलैंड भेजे। भगवान बुद्ध और उनके शिष्यों, अरहंत सारिपुत्त और अरहंत महा मोग्गलाना के अवशेषों को एक भारतीय प्रतिनिधिमंडल द्वारा बैंकॉक ले जाया गया और थाईलैंड के चार शहरों में 25 दिनों तक प्रदर्शित किया गया। 2023 में, प्रधानमंत्री मोदी और जापानी प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा ने दिल्ली के बुद्ध जयंती पार्क में बाल बोधि वृक्ष का दौरा किया, जिससे भारत और जापान के बीच गहरे बौद्ध संबंधों को मजबूती मिली। भारत ने पहले वैश्विक बौद्ध शिखर सम्मेलन की भी मेजबानी की, जिसमें बौद्ध दर्शन के माध्यम से समकालीन चुनौतियों पर चर्चा करने के लिए विद्वानों को एक साथ लाया गया। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि बुद्ध की शिक्षाएं वैश्विक मुद्दों का समाधान प्रदान करती हैं। 2022 में, पीएम मोदी ने बुद्ध पूर्णिमा पर लुम्बिनी, नेपाल का दौरा किया, भारत अंतरराष्ट्रीय बौद्ध संस्कृति और विरासत केंद्र की आधारशिला रखी। उसी वर्ष, भारत ने भगवान बुद्ध के चार पवित्र अवशेष, जिन्हें कपिलवस्तु अवशेष के नाम से जाना जाता है, मंगोलिया भेजे। वहां 11 दिनों तक मंगोलियाई बुद्ध पूर्णिमा समारोह के साथ उनका प्रदर्शन किया गया। 25 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल अवशेषों के साथ उलानबटार में गंडन मठ परिसर में बत्सागान मंदिर गया, जहां बौद्ध कूटनीति और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के प्रति भारत की प्रतिबद्धता पर प्रकाश डाला गया। 2019 में, पीएम मोदी और मंगोलिया के राष्ट्रपति महामहिम खल्टमागिन बटुल्गा ने संयुक्त रूप से उलानबटार में ऐतिहासिक गंदन तेगचेनलिंग मठ में स्थापित भगवान बुद्ध और उनके दो शिष्यों की एक प्रतिमा का अनावरण किया। 2018 में, पीएम मोदी ने सिंगापुर में बुद्ध टूथ रेलिक मंदिर का दौरा किया, जिससे सिंगापुर की बौद्ध विरासत के प्रति भारत का सम्मान प्रदर्शित हुआ और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूती मिली।2017 में श्रीलंका की अपनी यात्रा के दौरान पीएम मोदी कोलंबो में अंतरराष्ट्रीय वेसाक दिवस समारोह को संबोधित किया और गंगारामया बौद्ध मंदिर का दौरा किया, जिससे भारत-श्रीलंका के सांस्कृतिक और धार्मिक संबंध और गहरे हुए। 2016 में, वियतनाम की अपनी यात्रा के दौरान, पीएम मोदी ने हनोई में क्वान सु पैगोडा का दौरा किया, बौद्ध भिक्षुओं के साथ बातचीत की और दक्षिण पूर्व एशिया में बौद्ध कूटनीति के प्रति भारत की प्रतिबद्धता पर जोर दिया। 2015 में प्रधानमंत्री मोदी ने कई देशों के साथ भारत के बौद्ध संबंधों को मजबूत किया। उन्होंने चीन के शीआन में दा शिंगशान मंदिर और बिग वाइल्ड गूज पैगोडा का दौरा किया, जिससे भारत और चीन के बीच ऐतिहासिक बौद्ध आदान-प्रदान मजबूत हुआ। मंगोलिया में उन्होंने गंडन मठ का दौरा किया, जहां उन्होंने दोनों देशों की साझा आध्यात्मिक विरासत पर जोर दिया। श्रीलंका में उन्होंने अनुराधापुरा में श्री महाबोधि वृक्ष को श्रद्धांजलि अर्पित की, 2014 में, प्रधानमंत्री मोदी ने क्योटो, जापान का दौरा किया, जहाँ उन्होंने तोजी और किन्काकू-जी मंदिरों का भ्रमण किया, जिससे भारत-जापान बौद्ध संबंधों को मजबूती मिली। उन्होंने क्योटो बौद्ध संघ द्वारा आयोजित एक लंच में भी भाग लिया, जो वैश्विक स्तर पर बौद्ध नेताओं के साथ जुड़ने की उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। घरेलू स्तर पर, पीएम मोदी की सरकार ने बौद्ध विरासत को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। उनके नेतृत्व में विकसित बौद्ध सर्किट, भगवान बुद्ध के जीवन और शिक्षाओं से जुड़े महत्वपूर्ण स्थलों को दर्शाता है। इन पवित्र स्थानों पर यात्रा को सुविधाजनक बनाने के लिए, बौद्ध सर्किट पर्यटक ट्रेन (महापरिनिर्वाण एक्सप्रेस) शुरू की गई, जो भारत और नेपाल के सबसे प्रतिष्ठित बौद्ध स्थलों को कवर करते हुए एक विसर्जित तीर्थयात्रा अनुभव प्रदान करती है। इसके अलावा, कुशीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे ने तीर्थ स्थलों तक पहुंच में काफी सुधार किया है। नालंदा विश्वविद्यालय के पुनरुद्धार ने भारत को बौद्ध शिक्षा के वैश्विक केंद्र के रूप में फिर से स्थापित किया। सरकार ने बौद्ध साहित्य के संरक्षण को सुनिश्चित करते हुए पाली को एक शास्त्रीय भाषा के रूप में भी मान्यता दी। पीएम मोदी का बौद्ध धर्म पर जोर सांस्कृतिक और आध्यात्मिक नेतृत्व के प्रति भारत के समर्पण को दर्शाता है। बौद्ध विरासत के साथ उनका गहरा जुड़ाव शांति, सद्भाव और साझा सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। बौद्ध देशों के साथ संबंधों को गहरा करके और अपनी बौद्ध विरासत को पुनर्जीवित करके, भारत बौद्ध धर्म में बताए गए शांति और ज्ञान को बढ़ावा देने वाले वैश्विक केंद्र के रूप में अपनी भूमिका को मजबूत करना जारी रखता है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सुशासन तिहार आयोजन के संबंध में कलेक्टरों को दिए दिशा-निर्देश

रायपुर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने सभी जिला कलेक्टरों को पत्र जारी करते हुए “सुशासन तिहार-2025” के आयोजन के निर्देश दिए है। यह तिहार प्रदेश में सुशासन की सशक्त स्थापना, जनसमस्याओं के त्वरित समाधान, जनकल्याणकारी योजनाओं की समीक्षा और जन संवाद को सशक्त बनाने के उद्देश्य से तीन चरणों में आयोजित किया जाएगा। मुख्यमंत्री श्री साय ने स्पष्ट किया कि सरकार शासन के प्रत्येक स्तर पर पारदर्शिता, प्रभावशीलता और जन-हितैषी प्रशासन की स्थापना को लेकर कटिबद्ध है। इस तिहार के माध्यम से शासन-प्रशासन सीधे आम जनता से जुड़कर, उनकी समस्याओं को समयबद्ध ढंग से सुलझाने का कार्य करेगा। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि हमारी सरकार राज्य में सुशासन की स्थापना को लेकर लगातार काम कर रही है। शासन-प्रशासन के प्रत्येक स्तर पर शासकीय काम-काज में पारदर्शिता आए, शासकीय योजनाओं और कार्यक्रमों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो, इसका लाभ समाज के उन वर्गों को तत्परता से मिले, जिनके लिए योजनाएं संचालित की जा रही हैं, इसको लेकर शासन-प्रशासन स्तर पर प्रभावी पहल की जा रही है। मुख्यमंत्री श्री साय ने सभी जिला कलेक्टरों को पत्र लिखकर सुशासन तिहार-2025 के संचालन के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि “सुशासन तिहार-2025” के आयोजन के उद्देश्य आम जनता की समस्याओं का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित करना, शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा करना तथा विकास कार्यों में गति लाने के साथ ही आम जनता, जनप्रतिनिधियों और विभिन्न सामाजिक संगठनों से सीधा संवाद स्थापित करना है। सुशासन तिहार-2025 का आयोजन तीन चरणों में मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सुशासन तिहार-2025 का आयोजन तीन चरणों में होगा। पहले चरण में 08 अप्रैल से 11 अप्रैल 2025 तक आम जनता से आवेदन प्राप्त किए जाएंगे। दूसरे चरण में लगभग एक माह के भीतर प्राप्त आवेदनों का निराकरण किया जाएगा। तीसरे एवं अंतिम चरण में 05 मई से 31 मई 2025 के बीच समाधान शिविरों का आयोजन किया जाएगा। इस तिहार को सुव्यवस्थित और प्रभावी बनाने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जा रहे हैं एवं एक पोर्टल बनाया जा रहा है। प्रत्येक जिले की परंपराओं, आवश्यकताओं और परिस्थितियों के अनुसार नवाचार भी किए जा सकते हैं, जिससे यह तिहार अधिक जनोपयोगी और प्रभावशाली बने। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने सभी जिला कलेक्टरों को निर्देशित किया है कि आम जनता से उनकी समस्याओं के संबंध में 08 अप्रैल से 11 अप्रैल 2025 तक ग्राम पंचायत मुख्यालयों और नगरीय निकाय कार्यालयों में सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक आवेदन प्राप्त किए जाएंगे। इन स्थलों पर समाधान पेटी रखी जाएगी, ताकि लोग अपनी समस्याएं और शिकायतें निःसंकोच लिखकर उसमें डाल सकें। आवेदन प्राप्त करने के लिए समाधान पेटी की व्यवस्था जिला और विकासखण्ड मुख्यालय स्तर पर भी की जाए। आवश्यकतानुसार हाट बाजारों में भी आवेदन संग्रह किये जा सकते हैं। ऑनलाइन आवेदन प्राप्त करने की भी पोर्टल में व्यवस्था रहेगी। कॉमन सर्विस सेंटर का भी ऑनलाइन आवेदन लेने हेतु उपयोग किया जा सकता है। प्रत्येक आवेदन को एक कोड देने की जानकारी पोर्टल पर उपलब्ध रहेगी। निर्धारित प्रारूप में खाली आवेदन पत्र (ग्रामवार/नगरीय निकायवार कोड सहित) प्रिन्ट कराकर ग्रामीणों को उपलब्ध कराये जा सकते हैं। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रत्येक आवेदन को पोर्टल में पंजीकृत कर ऑनलाइन अपलोड किया जाएगा, साथ ही, आवेदनकर्ता को पावती दी जाएगी। जनता को आवेदन लिखने में सहायता प्रदान करने हेतु कलेक्टर आवश्यकतानुसार अधिकारियों/कर्मचारियों की ड्यूटी लगा सकते हैं। इन तिथियों का विभिन्न माध्यमों से व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। आवेदनों का निराकरण मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सभी प्राप्त आवेदनों को स्कैन कर सॉफ्टवेयर में अपलोड किया जाएगा और संबंधित जिला/जनपद/नगरीय निकाय के अधिकारियों को ऑनलाइन व भौतिक रूप से भेजा जाएगा। संबंधित विभाग/अधिकारी लगभग एक माह में इन आवेदनों का निराकरण सुनिश्चित करेंगे। मांग से संबंधित आवेदनों को बजट की उपलब्धता के आधार पर निराकृत किया जाएगा। इन आवेदनों के निराकरण की गुणवत्ता का विश्लेषण जिला और राज्य स्तर पर किया जाए। समाधान शिविर का आयोजन मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि 05 मई से 31 मई 2025 के दौरान प्रत्येक 08 से 15 पंचायतों के मध्य समाधान शिविर आयोजित किए जाएंगे, जिनमें आवेदकों को उनके आवेदनों की स्थिति की जानकारी दी जाएगी। नगरीय निकायों में भी आवश्यकतानुसार समाधान शिविर आयोजित होंगे। शिविरों के आयोजन की तिथि की जानकारी आवेदकों को एस.एम.एस. के माध्यम से तथा आवेदन की पावती के माध्यम से दी जाए, साथ ही इन तिथियों का व्यापक प्रचार-प्रसार भी किया जाए। इन शिविरों में प्राप्त आवेदनों की प्रविष्टि भी पोर्टल में की जाए तथा जिन आवेदनों का निराकरण शिविर में सम्भव हो, शिविर में किया जाए, शेष आवेदनों का समाधान एक माह में कर आवेदकों को सूचित किया जाए। शिविरों में विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी जाएगी और हितग्राहीमूलक योजनाओं के आवेदन पत्र/प्रपत्र उपलब्ध कराए जाएंगे। प्रत्येक शिविर के लिए एक खंडस्तरीय अधिकारी को प्रभारी बनाया जाए, जो शिविर के समुचित संचालन को सुनिश्चित करेंगे। समाधान शिविरों में विकासखंड एवं अनुभाग स्तर के सभी अधिकारी उपस्थित रहेंगे, जिला स्तर से भी कुछ अधिकारी उपस्थित रहेंगे। इसी तरह की व्यवस्था नगरीय निकायों के शिविरों में भी की जाए।  

सभी बिजली कंपनियों में स्वास्थ्य बीमा योजना लागू करने का निर्णय: ऊर्जा मंत्री तोमर

भोपाल सभी बिजली कंपनियों में कार्यरत अधिकारी-कर्मचारियों के लिये स्वास्थ्य बीमा योजना लागू की जायेगी। यह कार्यवाही समय-सीमा में पूरी करें। ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने यह निर्देश शुक्रवार को मंत्रालय में बिजली कंपनियों के कार्यों की समीक्षा के दौरान दिये। टारगेट ओरिएंटेड करें कार्य ऊर्जा मंत्री श्री तोमर ने कहा कि पूरे वर्ष का टारगेट तय करें और उसी अनुरूप कार्यवाही करें। उन्होंने कहा कि मैं त्रैमासिक समीक्षा करूंगा। मंत्री श्री तोमर ने कहा कि निर्धारित मापदंड के अनुसार कार्य करने वाले अधिकारियों को प्रोत्साहित किया जायेगा। साथ ही मापदंड अनुसार काम नहीं करने वाले अधिकारियों को दंडित किया जायेगा। इसी के आधार पर स्थानांतरण और पदोन्नति भी तय की जायेगी। जल्‍द पूरी करें भर्ती प्रक्रिया मंत्री श्री तोमर ने कहा कि जनरेशन कंपनी और ट्रांसमिशन कंपनी का नया ओ.एस. (संगठनात्मक संरचना) स्वीकृत हो चुका है। अत: भर्ती की प्रक्रिया जल्द पूरी करें। उन्होंने बिजली कंपनियों द्वारा गत वित्तीय वर्ष में किये गये उल्लेखनीय कार्यों के लिये बधाई भी दी। मंत्री श्री तोमर ने कहा कि सभी कंपनियों की भर्ती एवं सेवा की शर्तें एक समान होनी चाहिए। आउटसोर्स कर्मचारियों का भी ईपीएफ जमा होना चाहिए। ऐप के माध्यम से कर्मचारी ईपीएफ की जानकारी ले सकते हैं। पीएम जन-मन और धरती आबा में स्वीकृत कार्य समय-सीमा में पूरा करें मंत्री श्री तोमर ने कहा कि पीएम जन-मन और धरती आबा योजना में स्वीकृत कार्यों को समय-सीमा में पूरा करें। जन-मन योजना में 27 हजार 230 घरों में विद्युत कनेक्शन देने का लक्ष्य है। इसमें 17 हजार 739 घरों में विद्युत कनेक्शन दिये जा चुके हैं। तीनों विद्युत वितरण कंपनियां लॉइन लॉसेस कम करने के लिये सुनियोजित कार्ययोजना बनाएं। खराब ट्रांसफार्मर समय पर बदलें। न्यायालयीन प्रकरणों में सरकारी पक्ष मजबूती से रखें। विद्युत कटौती और मेंटेनेंस की जानकारी सोशल मीडिया में भी दें। उन्होंने आरडीएसएस योजना में स्वीकृत कार्यों की भी समीक्षा कर जरूरी निर्देश दिये। मंत्री श्री तोमर ने कहा कि हम सब अधिकारी-कर्मचारी होने के साथ ही एक नागरिक भी हैं। अत: हमारा सामाजिक दायित्व भी है। इसका निर्वहन निष्ठा के साथ होना चाहिए। उन्होंने कहा कि गत वर्ष एक लाख पौधे लगाये गये थे, इनकी सुरक्षा की चिंता करें। साथ ही आगामी बरसात में पौध-रोपण की कार्ययोजना भी बना लें। अपर मुख्य सचिव ऊर्जा श्री नीरज मंडलोई ने विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन की स्थिति से अवगत कराया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि 15 अप्रैल तक नये वित्तीय वर्ष की कार्ययोजना अनिवार्य रूप से बना लें। बैठक में एमडी पॉवर मैनेजमेंट कंपनी श्री अविनाश लवानिया, एमडी मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी श्री क्षितिज सिंघल, एमडी पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी श्री अनूप सिंह, एमडी जनरेशन कंपनी श्री मंजीत सिंह और एमडी ट्रांस्को श्री सुनील तिवारी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।  

कृषि मंत्री कंषाना ने किसानों के सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की

भोपाल किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री श्री एदल सिंह कंषाना ने श्यामला हिल्स स्थित अपने शासकीय निवास बी-3 पर नवरात्रि के सप्तमी पर्व पर पूजा-अर्चना आयोजित की। उन्होंने माँ दुर्गा से प्रदेश के किसानों एवं नागरिकों के सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। पूजा-अर्चना में मंत्री श्री कंषाना की धर्मपत्नी श्रीमती संजू कंषाना और निवास का स्टॉफ सम्मिलित हुआ। पंडित गोविंद चतुर्वेदी द्वारा हवन कराया गया।

लखनऊ सुपर जायंट्स ने 20 ओवर में 8 विकेट खोकर 203 रन बनाए, मुंबई को दिया 204 रनों का लक्ष्य

लखनऊ लखनऊ सुपर जायंट्स और मुंबई इंडियंस के बीच आईपीएल 2025 का 16वां मुकाबला शुक्रवार को भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेई इकाना क्रिकेट स्टेडियम में खेला जा रहा है। लखनऊ सुपर जायंट्स ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 8 विकेट खोकर 203 रन बनाए हैं। लखनऊ के लिए मिचेल मार्श ने सर्वाधिक 60 रन बनाए। मुंबई के लिए कप्तान हार्दिक पांड्या ने तीन विकेट लिए। पहले बल्लेबाजी करने उतरी लखनऊ सुपर जायंट्स को मिचेल मार्श और एडन मार्करन ने दमदार शुरुआत दिलाई। दोनों के बीच पहले विकेट के लिए 76 रन की साझेदारी हुई। मिचेल मार्श 31 गेंद में 60 रन बनाकर आउट हुए। पारी में उन्होंने दो छक्के और नौ चौके लगाए। निकोलस पूरन 6 गेंद में 12 रन ही बना सके। कप्तान ऋषभ पंत 6 गेंद में दो रन बनाकर आउट हुए। आयुष बडोनी 19 गेंद में 30 और एडन मार्करम 38 गेंद में 53 रन बनाकर पवेलियन लौटे। डेविड मिलर हुए आउट लखनऊ को डेविड मिलर के रूप में सातवां झटका लगा है। हार्दिक पांड्या ने मिलर को पवेलियन का रास्ता दिखाया। मिलर 13 गेंद में 27 रन बनाकर आउट हुए।  

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ को खनिज राजस्व में ऐतिहासिक सफलता

रायपुर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के दूरदर्शी नेतृत्व और खनिज साधन विभाग के सचिव श्री पी. दयानंद के निर्देशन में छत्तीसगढ़ ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में खनिज राजस्व प्राप्ति में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। प्रदेश में संचालित खनन संक्रियाओं से 14,195 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड खनिज राजस्व प्राप्त हुआ है, जो विगत वर्ष 2023-24 के 12,795 करोड़ रुपये की तुलना में लगभग 11% की वृद्धि (1400 करोड़ रुपये अधिक) दर्शाता है। प्रदेश में खनिज राजस्व प्राप्ति में दंतेवाड़ा अव्वल वित्तीय वर्ष 2024-25 में प्रदेश के खनिज राजस्व संग्रहण में जिला दंतेवाड़ा ने सर्वाधिक 6580 करोड़ रुपये का योगदान देकर शीर्ष स्थान प्राप्त किया है। इसके अलावा, कोरबा से 2148 करोड़, रायगढ़ से 2027 करोड़, बालोद से 1313 करोड़, सरगुजा से 585 करोड़, बलौदाबाजार से 354 करोड़, कांकेर से 328 करोड़, तथा सूरजपुर से 155 करोड़ रुपये की उल्लेखनीय राजस्व भागीदारी दर्ज की गई है। खनिज संसाधनों में राष्ट्रीय भागीदारी छत्तीसगढ़ खनिज संसाधनों की दृष्टि से देश में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। देश के कुल भौगोलिक क्षेत्र में मात्र 4% की हिस्सेदारी होते हुए भी छत्तीसगढ़ का  देश के कुल खनिज उत्पादन मूल्य में 16% से अधिक की भागीदारी है। यहां मुख्य रूप से लौह अयस्क, कोयला, चूनापत्थर और बाक्साइट के विशाल भंडार हैं, जो खनिज राजस्व के प्रमुख स्रोत हैं। इसके अलावा, राज्य में सामरिक महत्व के खनिजों सहित कुल 28 प्रकार के खनिज भंडार की पुष्टि हुई है। ई-नीलामी प्रणाली से अतिरिक्त राजस्व वर्ष 2015 से खनिज विभाग द्वारा खनिजों का ई-नीलामी के माध्यम से आबंटन की कार्यवाही की जा रही है, जिससे रॉयल्टी के अलावा प्रीमियम के रूप में अतिरिक्त राजस्व की प्राप्ति हो रही है। खनिज राजस्व में हो रही बढ़ोत्तरी में ई नीलामी के माध्यम से स्वीकृत खदानों का योगदान अब स्पष्ट रूप से परिलक्षित हो रहा है। खनिज विकास मद से अधोसंरचना को बल राज्य शासन द्वारा खनिज राजस्व की कुल प्राप्ति की 5% राशि “खनिज विकास मद” में अंतरित की जाती है। इससे प्रदेश के दूरस्थ अंचलों में खनिज संसाधनों के विकास और अधोसंरचना निर्माण का कार्य किया जा रहा है। आगामी वर्ष 2025-26 के लिए लगभग 200 करोड़ रुपये प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों में केवल रेल कॉरिडोर निर्माण हेतु प्रावधानित किए गए हैं। समग्र सामाजिक-आर्थिक विकास में योगदान प्रदेश की खनन संक्रिया केवल औद्योगिक संस्थानों को कच्चा माल प्रदान करने तक सीमित नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के सामाजिक और आर्थिक विकास का मजबूत स्तंभ बन चुकी है। “छत्तीसगढ़ की धरती केवल खनिज संपदा से नहीं, विकास की असीम संभावनाओं और जनकल्याण के संकल्प से भी समृद्ध है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में 14,195 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड खनिज राजस्व प्राप्त कर प्रदेश ने एक नई ऊँचाई को स्पर्श किया है। यह उपलब्धि हमारी दूरदर्शी नीतियों, पारदर्शी प्रशासन, और ईमानदार कार्यसंस्कृति का प्रतिफल है। ई-नीलामी प्रणाली, तकनीकी नवाचार और सुशासन के माध्यम से हम खनिज क्षेत्र को केवल राजस्व संग्रहण का माध्यम नहीं, बल्कि दूरस्थ अंचलों के लिए विकास के इंजन के रूप में परिवर्तित कर रहे हैं।”  

पीएम मोदी ने कहा- नांदेड़ में हुई दुर्घटना में लोगों की मृत्यु से दुःखी हूं, पीड़ित परिवारों को मदद का भी ऐलान

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को महाराष्ट्र के नांदेड़ में हुई दुर्घटना में लोगों की मृत्यु पर शोक व्यक्त किया। साथ ही घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य होने की कामना की। उन्होंने प्रत्येक मृतक के परिजनों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से 2 लाख और घायलों को 50,000 रुपए की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने पीएम मोदी की तरफ से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बयान जारी करते हुए लिखा, ”महाराष्ट्र के नांदेड़ में हुई दुर्घटना में लोगों की मृत्यु से दुःखी हूं। जिन लोगों ने अपने प्रियजनों को खोया है, उनके प्रति संवेदनाएं। घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं। स्थानीय प्रशासन प्रभावित लोगों की सहायता कर रहा है। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से प्रत्येक मृतक के परिजनों को 2 लाख रुपए की अनुग्रह राशि दी जाएगी और घायलों को 50,000 रुपए दिए जाएंगे।” इससे पहले महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नांदेड़ हादसे पर दुख जताया और मृतकों के परिजनों को मुख्यमंत्री राहत कोष से 5 लाख की आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया। सीएम फडणवीस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ”यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज सुबह नांदेड़ जिले के असेगांव में एक दुर्घटना में कुछ महिलाओं की मृत्यु हो गई, जब 11 महिला मजदूरों को ले जा रही एक ट्रैक्टर ट्रॉली एक कुएं में गिर गई। मैं उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। ये महिलाएं हिंगोली जिले के गुंजगांव की रहने वाली थीं और कृषि कार्य के लिए जा रही थीं। महिलाओं को कुएं से निकालने का काम युद्ध स्तर पर शुरू कर दिया गया है और स्थानीय उप-कलेक्टर और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सहित पूरी टीम मौके पर मौजूद है। तीन महिलाओं को सुरक्षित निकाल लिया गया है। हम हिंगोली और नांदेड़ प्रशासन दोनों के संपर्क में हैं। मृतकों के परिजनों को मुख्यमंत्री राहत कोष से 5 लाख रुपए की आर्थिक सहायता दी जाएगी।” बताया जा रहा है कि खेती के काम के लिए जा रही महिला मजदूरों का ट्रैक्टर कुएं में गिर गया। इस हादसे मे सात महिला मजदूरों की मौत हो गई, जबकि तीन को बचा लिया गया।

उप मुख्यमंत्री शुक्‍ल ने माँ चामुण्‍डा एवं माँ तुलजा भवानी के दर्शन कर पूजा अर्चना की

भोपाल उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने देवास में माताजी की टेकरी पहुंचकर माँ चामुण्‍डा एवं माँ तुलजा भवानी के दर्शन कर विधि-विधान से पूजा अर्चना की और प्रदेश की जनता की सुख-समृद्धि की कामना की। उन्होंने माताजी से सभी को सुखी और निरोगी रखने की प्रार्थना की। देवास में उप मुख्यमंत्री श्री शुक्‍ल का स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा माताजी की तस्‍वीर भेंट कर आत्मीय स्वागत किया। इस अवसर पर कलेक्‍टर श्री ऋतुराज सिंह, एएसपी श्री जयवीर सिंह भदौरिया, महापौर प्रतिनिधि श्री दुर्गेश अग ्रवाल, श्री रायसिंह सेंधव, श्री राजेश यादव सहित अन्‍य जनप्रतिनिधिगण एवं अधिकारीगण उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री यादव ने कहा- ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के विचार वाली भारतीय संस्कृति संपूर्ण विश्व को परिवार मानती है

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के विचार वाली भारतीय संस्कृति संपूर्ण विश्व को परिवार मानती है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में इस सिद्धांत पर चल रही राज्य सरकार सभी के हित और कल्याण के लिए समर्पित है। परिवारों का वातावरण खराब न हो, मेहनत से कमाए गए पैसे का उपयोग परिवार के हित में हो, यह सुनिश्चित करने के लिए ही शराबबंदी लागू की गई है। धार्मिक नगरों में पवित्र भाव की अनुभूति होती है, अत: प्रदेश में विद्यमान 19 देव-स्थानों की गरिमा को बनाए रखने के लिए ही इन स्थानों पर शराबबंदी लागू की गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव माँ पीताम्बरा की नगरी दतिया में शराबबंदी लागू करने के लिए आयोजित नागरिक अभिनंदन समारोह को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में जन-प्रतिनिधियों और नागरिकों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का दतिया में शराबबंदी के लिये नागरिक अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दतिया सहित प्रदेश में जहां-जहां देवी मां की कृपा है, वहां देवी लोक विकसित किए जाएंगे। चित्रकूट सहित भगवान श्रीराम से जुड़े प्रदेश के सभी स्थानों का श्रीराम वनपथ गमन मार्ग के अंतर्गत उन्नयन किया जा रहा है। इसी प्रकार भगवान श्रीकृष्ण की जहां-जहां भी लीलाएं हुईं, उन स्थानों को भी तीर्थ के रूप में विकसित करने के लिए बजट में प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सनातन संस्कृति के मूल भाव “सर्वे भवंतु सुखिनः सर्वे संतु निरामय:” के अनुरूप राज्य सरकार सबके कल्याण के लिए ही समर्पित भाव से काम कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था कृषि आधारित है। राज्य सरकार के लिए कृषकों का हित सर्वोपरि है, किसानों को उनकी मेहनत और उपज का सही दाम मिले, यह सुनिश्चित करने के लिए ही 2600 रुपये प्रति क्विंटल की दर पर गेहूं खरीदा जा रहा है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने प्रदेश के लिए ‘केन-बेतवा’ लिंक परियोजना और ‘चंबल-काली सिंध-पार्वती’ नदी जोड़ों परियोजना जैसी सौगात प्रदेश को दी है। साथ ही ताप्ती मेगा रिचार्ज परियोजना को भी स्वीकृति प्रदान की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों से जमीन नहीं बेचने का आहवान करते हुए कहा कि इन नदी जोड़ो परियोजनाओं से दतिया भी लाभान्वित होगा और किसान परिवारों का खुशहाल जीवन सुनिश्चित है। डबल इंजन की सरकार में जनता का हित सर्वोपरि है, प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में राज्य सरकार ने जो कहा वह करके दिखाया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अनावश्यक खर्चों से परहेज करने के लिए जनसामान्य को प्रेरित करते हुए कहा कि विवाह और मृत्यु भोज जैसे आयोजनों में अनावश्यक खर्च करना व्यर्थ है। अपने बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और उनके भविष्य निर्माण पर ध्यान देना ही परिवारों की सर्वोच्च प्राथमिकता होना चाहिए। हर गरीब को रहने के लिए पक्का मकान, हर जरूरतमंद के लिए भोजन की व्यवस्था जैसी गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में देश में संचालित सर्वांगीण विकास और जन-कल्याण की गतिविधियां राम राज्य के आदर्श के समान है। पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दतिया सहित प्रदेश के अनेक धार्मिक शहरों में शराबबंदी का जो निर्णय लिया है, उसकी जितनी प्रशंसा की जाए उतनी कम है। शराब की लत के कारण अनेक परिवार परेशानी झेलते हैं। डॉ. मिश्रा ने कहा कि प्रदेश में युवाओं को रोजगार उपलब्ध हों, इसके लिये मुख्यमंत्री द्वारा न केवल देश में बल्कि विदेशों में जाकर उद्योगपतियों से चर्चा कर प्रदेश में उद्योग स्थापित करने के सार्थक प्रयास किए हैं। उनके प्रयासों से ही अनेक उद्योगपतियों ने प्रदेश में आकर उद्योग धंधे स्थापित कर लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया है। विधायक सेवढ़ा श्री प्रदीप अग्रवाल ने कहा कि माँ पीताम्बरा की नगरी दतिया में शराबबंदी का जो ऐतिहासिक निर्णय मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लिया है, उसकी जितनी प्रशंसा की जाए उतनी कम है। इसके लिये दतिया के सभी निवासी मुख्यमंत्री के प्रति आभारी हैं। मुख्यमंत्री ने माँ पीताम्बरा के दर्शन कर पूजा-अर्चना की मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शुक्रवार को दतिया में माँ पीताम्बरा माई के दरबार में दर्शन कर पूजा-अर्चना की। उनके साथ पूर्व गृह मंत्री डॉ. मिश्रा सहित जन-प्रतिनिधि एवं प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे।

प्रदेश के सभी जिलों में अपार जन सहयोग से हो रहे है जल संरक्षण कार्य

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर प्रदेश में 30 मार्च से जल गंगा संवर्धन अभियान की राज्य स्तरीय शुरूआत की गई है। जन सहयोग के साथ-साथ प्रशासनिक अमला भी इस अभियान में बढ़ चढ़कर हिस्सा ले रहा है। ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्रों में जल संरक्षण और जल संवर्धन के कार्यों में अपार जन सहयोग मिल रहा है। जल संवाद एवं श्रमदान रीवा कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल के निर्देश पर जिले के इटौरा ग्राम की भेड़ौरा नदी के पुनर्जीवन के उद्देश्य से जल संवाद आयोजित किया गया। संवाद में जल संरक्षण के महत्व के बारे में ग्रामीणों को जानकारी दी गई। ग्रामीणों ने भेड़ौरा नदी को आदर्श नदी के रूप में विकसित करने का संकल्प लिया। अब नदी पर प्रतिदिन श्रमदान हो रहा है। नदी की सफाई और गहरीकरण के कार्य को पूरी लगन के साथ किया जा रहा है। तालाब के गहरीकरण के लिये हो रहा है श्रमदान मंदसौर जिले में तालाबों, नदी और पुरानी बावड़ी को चिन्हित किया गया है। जन अभियान परिषद के कार्यकर्ताओं ने ग्रामीणों को पानी चौपाल में जल के महत्व और दिन पर दिन बढ़ते जल संकट के बारे में जानकारी दी। ग्रामीणों को सघन पौध-रोपण के लिये अभी से तैयारी करने की समझाइश दी गई। ग्राम रोज्या में तालाब की सफाई और गहरीकरण के लिये ग्रामीणों ने श्रमदान किया। जल यात्रा निकालकर दिया महिलाओं ने जल संरक्षण का संदेश छिंदवाड़ा जिले मेंकलेक्टर श्री शीलेंद्र सिंह के मार्ग दर्शन में जल गंगा संवर्धन अभियान में नवदुर्गा महिला मंडल द्वारा जल कलश यात्रा निकाली गई। जल यात्रा में महिलाओं ने पानी के महत्व से जुड़े नारे लगाये और जल संरक्षण की शपथ ली। जिले के परासिया विकासखंड के पर्यटन स्थल देवरानी दाई की घटामाली नदी में श्रमदान कर कचरा एवं पॉलीथिन की सफाई की गई। महिलाओं ने सार्वजनिक मंदिर प्रांगण को भी साफ किया। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बादल भोई की जन्मस्थली डुगरिया तितरा में उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की गई। जिले में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता के लिये दीवार लेखन का कार्य भी पूरे उत्साह के साथ किया जा रहा है। बोरी बांध निर्माण धार जिले के विकासखंडा मनावर के ग्राम देवरा में जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिये सामुहिक श्रमदान किया गया। स्थानीय ग्रामीणों ने मिलकर 60 बोरियों का बोरी बांध बनाया। ग्राम देवरा के स्कूल फलिये के पास बहते पानी को रोकने के लिये 25 से अधिक ग्रामीणों ने श्रमदान किया। श्रमदान में नवांकुर संस्था के पदाधिकारी भी शामिल हुए। ग्रामीणों को बताया गया कि गांव में मौजूद कुएँ, बावड़ी, स्टॉप डेम और तालाब आदि की नियमित सफाई की और जल स्त्रोतों उसके महत्व के बारे में समझाइश दी गई। अमरावती नदी को संवारने के प्रयास जारी बुरहानपुर जिले मेंजल स्त्रोतों के संरक्षण एवं बारिश के पानी को सहेजने के लिये चल रहे जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत छोटे-छोटे प्रयासों से कार्यों को गति दी जा रही है। जिले में जल गंगा संवर्धन अभियान के संचालन के लिये कार्य योजना तैयार की गई है। शहर की अमरावती नदी पर जन भागीदारी से सफाई का कार्य शुरू हुआ। नदी के किनारे जमी हरी काई और झाड़ियों को हटाया गया। कचरे को ट्रैक्टर ट्रॉली के माध्यम से उचित स्थान पर पहुंचाया गया। शहरी क्षेत्र में मोहल्लों में पानी चौपाल लगाई गई। आर्दश ग्राम खजुरिया बीना में जल चौपाल देवास जिले में जल गंगा संवर्धन अभियान में जागरूकता के कार्यक्रम गांव-गांव में किये जा रहे है। मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद की चयनित नवांकुर संस्था ने खजुरिया बीना में जल चौपाल ग्रामीणों की उपस्थिति में लगायी। ग्रामीणों को जल संरचनाओं की सफाई और गहरीकरण के संबंध में जानकारी दी गई। समिति के सदस्यों ने खेतों में पहुँचकर स्वयं के खर्चें पर बनाये गये तालाबों का अवलोकन किया। ग्रामीणों को व्यापक पौध-रोपण की अभी से तैयारी करने की समझाइश दी गई। ग्रामीणों ने गांव में पानी की बर्बादी पर पूरी तरह से रोक लगाने की शपथ ली।  

दिल्ली सीएम ने कहा- वक्फ संशोधन विधेयक पर खुशी जताते हुए ‘न्याय और पारदर्शिता की नई शुरुआत तय’

नई दिल्ली लोकसभा के बाद राज्यसभा से भी वक्फ संशोधन विधेयक के पास होने पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने खुशी जताई। उन्होंने इसे ऐतिहासिक दिन बताते हुए कहा कि इस विधेयक को मंजूरी मिलने से अन्याय और भ्रष्टाचार को खत्म कर न्याय और पारदर्शिता की नई शुरुआत होगी। उन्होंने कहा कि 2013 में तुष्टिकरण के लिए रातों-रात वक्फ कानून को अतिवादी बना दिया गया, जिसके कारण दिल्ली के लुटियंस जोन की 123 वीवीआईपी संपत्तियां वक्फ को दे दी गईं। इस विधेयक के पारित होने से देश के विकास में एक नया अध्याय जुड़ रहा है, जो न्याय और समानता को सुनिश्चित करेगा। उन्होंने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक के बाद एक कई पोस्ट किए। सीएम रेखा गुप्ता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “आज का दिन ऐतिहासिक है। संसद ने ‘वक्फ (संशोधन) विधेयक – 2025’ को मंजूरी दे दी है, जो दशकों से चले आ रहे अन्याय और भ्रष्टाचार को खत्म कर न्याय और पारदर्शिता की नई शुरुआत करेगा। 2013 में तुष्टिकरण के लिए रातों-रात वक्फ कानून को अतिवादी बना दिया गया, जिसके कारण दिल्ली के लुटियंस जोन की 123 वीवीआईपी संपत्तियां वक्फ को दे दी गईं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इस ऐतिहासिक कदम से अब इसकी पारदर्शिता से निगरानी की जा सकेगी।” उन्होंने लिखा, “2013 में लाए गए संशोधन विधेयक पर दोनों सदनों में कुल साढ़े 5 घंटे चर्चा हुई थी, जबकि इस विधेयक पर दोनों सदनों में 16 घंटे से ज्यादा की चर्चा हुई। मोदी सरकार ने संयुक्त समिति बनाई, जिसमें 38 बैठकें हुईं, 113 घंटे चर्चा हुई और 284 हितधारकों को शामिल किया गया। ‘वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025’ को संसद के पटल पर लाने से पहले मोदी सरकार को देशभर से करीब एक करोड़ ऑनलाइन सुझाव मिले, जिनका विश्लेषण करने के बाद यह कानून बनाया गया, जो दर्शाता है कि जहां मोदी सरकार मुस्लिमों के साथ खड़ी है, वहीं विपक्ष केवल वोट बैंक की आड़ में गुमराह कर रहा है।” सीएम रेखा गुप्ता ने लिखा, “इस विधेयक के पारित होने से देश के विकास में एक नया अध्याय जुड़ रहा है, जो न्याय और समानता को सुनिश्चित करेगा। इसे समर्थन देने वाले सभी दलों और सांसदों का भी धन्यवाद। वक्फ बोर्ड को अधिक उत्तरदायी बनाना अनिवार्य था। यह विधेयक सुनिश्चित करेगा कि वक्फ संपत्तियों का दुरुपयोग न हो और इसका लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचे। यह पारदर्शिता और सुशासन की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होगा, जिससे करोड़ों लोगों को न्याय मिलेगा।”

जिला पंचायत महासमुंद की स्थायी समिति गठन हेतु पीठासीन अधिकारी नियुक्त

महासमुंद छत्तीसगढ़ जनपद पंचायत तथा जिला पंचायत स्थायी समितियाँ नियम 1994 के नियम 6 के अंतर्गत प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने जिला महासमुंद के लिए स्थायी समिति गठन हेतु पीठासीन अधिकारी की नियुक्ति की है। जिला पंचायत महासमुंद के लिए अपर कलेक्टर श्री रविराज ठाकुर को पीठासीन अधिकारी नियुक्त किया गया है। यह निर्वाचन (सम्मिलन) दिनांक 09 अप्रैल 2025 को प्रातः 11:00 बजे से जिला पंचायत महासमुंद के सभाकक्ष में संपन्न होगा। यह नियुक्ति स्थायी समिति गठन की प्रक्रिया को सुचारू रूप से संचालित करने के उद्देश्य से की गई है।

छत्तीसगढ़ को मिली 8741 करोड़ रुपए की बड़ी सौगात: खरसिया-नया रायपुर- परमलकसा रेल परियोजना से खुलेगा विकास का नया द्वार

रायपुर, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति ने भारतीय रेलवे की चार महत्वपूर्ण मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिनकी कुल लागत लगभग 18,658 करोड़ रुपये है। इन परियोजनाओं के माध्यम से छत्तीसगढ़ सहित महाराष्ट्र और ओडिशा के कुल 15 ज़िलों को जोड़ते हुए रेलवे नेटवर्क में 1247 किलोमीटर की महत्वपूर्ण वृद्धि होगी। छत्तीसगढ़ के लिए विशेष रूप से स्वीकृत ‘खरसिया-नया रायपुर- परमलकसा 5वीं एवं 6वीं लाइन’ परियोजना से राज्य के औद्योगिक नक्शे में ऐतिहासिक परिवर्तन की संभावनाएं बनेंगी। यह परियोजना बलौदा बाजार जैसे क्षेत्रों को सीधी रेलवे कनेक्टिविटी प्रदान करेगी, जिससे सीमेंट संयंत्रों, इस्पात इकाइयों और अन्य औद्योगिक निवेश के लिए आधारभूत संरचना तैयार होगी। यह मार्ग कृषि उत्पादों, उर्वरक, कोयला, लौह अयस्क, इस्पात, सीमेंट और चूना पत्थर जैसी सामग्रियों के परिवहन में क्रांतिकारी सुधार लाएगा। इससे माल ढुलाई की लागत घटेगी, संचालन की गति बढ़ेगी और उद्योगों को निर्बाध सप्लाई चेन मिलेगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ को मिली यह ऐतिहासिक रेल परियोजना आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की दिशा में एक ठोस कदम है। खरसिया-नया रायपुर- परमलकसा लाइन से बलौदा बाजार और आस-पास के क्षेत्रों को  रेलवे नेटवर्क से जोड़ा जा रहा है, जिससे यहाँ के युवाओं के लिए रोज़गार और स्वरोज़गार के नए द्वार खुलेंगे। यह परियोजना छत्तीसगढ़ में नया अध्याय लिखेगी, जिससे न केवल कोयला, सीमेंट और लौह अयस्क जैसे क्षेत्रों में उत्पादन और परिवहन को गति मिलेगी, बल्कि क्षेत्रीय आर्थिक सशक्तिकरण भी सुनिश्चित होगा। उन्होंने कहा कि हम प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के आभारी हैं कि उन्होंने छत्तीसगढ़ की आवश्यकता और क्षमता को पहचान कर रेल परियोजनाओं के माध्यम से राज्य को ‘विकास के फास्ट ट्रैक’ पर लाने का काम किया है। उल्लखेनीय है कि खरसिया से परमलकसा तक 5वीं और 6वीं नई रेल लाइन बिछाने के लिए ₹8,741 करोड़ की महत्वाकांक्षी परियोजना को स्वीकृति मिल गई है, जिससे छत्तीसगढ़ को लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक गतिविधियों के क्षेत्र में बड़ी बढ़त मिलेगी। मुख्य विशेषताएँ कुल लंबाई: 278 किमी लंबा रेलमार्ग, 615 किमी ट्रैक की लंबाई स्टेशनों की संख्या: 21 पुल और फ्लाईओवर: 48 बड़े पुल, 349 छोटे पुल, 14 आरओबी, 184 आरयूबी, 5 रेल फ्लाईओवर ट्रैफिक क्षमता: 21 से 38 मिलियन टन कार्गो, 8 मेल/एक्सप्रेस/सेमी हाई-स्पीड ट्रेनें ईंधन और पर्यावरण संरक्षण: 22 करोड़ लीटर डीजल की बचत प्रतिवर्ष 113 करोड़ किग्रा CO2 की कटौती – यह लगभग 4.5 करोड़ पेड़ों के लगाने के बराबर है। लॉजिस्टिक्स लागत में भारी कमी: सड़क परिवहन की तुलना में प्रतिवर्ष ₹2,520 करोड़ की बचत इन ज़िलों को मिलेगा प्रत्यक्ष लाभ:रायगढ़, जांजगीर-चांपा, सक्ती, बिलासपुर, बलौदा बाज़ार, रायपुर, दुर्ग और राजनांदगांव। राज्य की प्रगति का नया युग इस परियोजना से छत्तीसगढ़ में औद्योगिक और व्यापारिक गतिविधियों में तीव्र गति आएगी। यह पहल पर्यावरणीय स्थिरता और ट्रांसपोर्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर को नया आयाम देगी।

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