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उप-राज्यपाल ने तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए समय पर पहचाने गए कार्यों को पूरा करने के निर्देश दिए

श्रीनगर/जम्मू उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा ने राजभवन में अमरनाथ जी श्राइन बोर्ड (एस.ए.एस.बी.) की 49वीं बोर्ड बैठक की अध्यक्षता की। उप-राज्यपाल ने विभिन्न चल रही परियोजनाओं की प्रगति का मूल्यांकन किया और तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए समय पर पहचाने गए कार्यों को पूरा करने के निर्देश दिए। सिन्हा ने बोर्ड की बैठक में सभी संबंधित विभागों की तैयारियों की व्यापक समीक्षा की और श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं को और बेहतर बनाने के लिए विभिन्न उपायों और हस्तक्षेपों का प्रस्ताव रखा गया। बैठक में आपदा तैयारी और न्यूनीकरण उपायों, यात्रा से संबंधित सूचनाओं का प्रसार, यात्रियों और सेवा प्रदाताओं को बीमा कवर, यात्रा ट्रैक का उन्नयन, स्वच्छता जल, बिजली, परिवहन और चिकित्सा एवं स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं, दूरसंचार कनैक्टिविटी, मौसम पूर्वानुमान, सेवाओं को किराए पर लेने के लिए डिजिटल प्रीपेड प्रणाली, अग्निशमन और आपातकालीन सेवाएं और नागरिक आपूर्ति सहित यात्रा के मार्ग में आधार शिविरों और विभिन्न स्थानों पर व्यवस्थाओं और आवश्यक सुविधाओं पर चर्चा की गई।   उप-राज्यपाल ने कहा कि तीर्थयात्रियों की सुरक्षा और कल्याण हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। हम सभी तीर्थयात्रियों के लिए परेशानी मुक्त और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध अनुभव सुनिश्चित करने के लिए बेहतर सुविधाएं प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। बैठक में यात्रा मार्ग में विभिन्न स्थानों पर यात्री निवास और पारगमन शिविरों की स्थापना, ठहरने की क्षमता में वृद्धि, प्रसाद बिक्री काउंटरों का विस्तार, यात्री सुविधा केंद्रों का संचालन, बोर्ड द्वारा ऑनलाइन सेवाएं, आर.एफ.आई.डी. कार्ड जारी करना, तीर्थयात्रियों और सेवा प्रदाताओं का पंजीकरण और सत्यापन, लंगर और एन.जी.ओ. सेवाओं से संबंधित महत्वपूर्ण मामलों पर भी चर्चा की गई।   बैठक में श्राइन बोर्ड के सदस्य स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज, प्रो. कैलाश मेहरा साधु, के.के शर्मा, के.एन राय, मुकेश गर्ग, डॉ शैलेश रैना, डॉ. स्मृद्धि बिंदरू, सुरेश हवारे और प्रो. विश्वमूर्ति शास्त्री शामिल हुए। श्री अमरनाथ जी श्राइन बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. मंदीप के भंडारी ने यात्रा की व्यवस्थाओं के संबंध में विस्तृत प्रस्तुति दी। बताया गया कि इस वर्ष अब तक लगभग 3,31,000 श्रद्धालुओं ने पवित्र यात्रा के लिए पंजीकरण कराया है। इस वर्ष श्री अमरनाथ जी यात्रा 3 जुलाई को दोनों मार्गों- अनंतनाग जिले के पहलगाम ट्रैक और गांदरबल जिले के बालटाल से एक साथ शुरू होगी और इसका समापन 9 अगस्त, 2025 को रक्षा बंधन के दिन होगा। बैठक में अटल डुल्लू मुख्य सचिव, शालीन काबरा अतिरिक्त मुख्य सचिव जल शक्ति विभाग, नलिन प्रभात डी.जी.पी., चंद्राकर भारती प्रमुख सचिव गृह, आई.जी.पी., प्रशासनिक सचिव, डिवीजनल कमिश्नर जम्मू, डिवीजनल कमिश्नर कश्मीर, डिप्टी कमिश्नर (गांदरबल और अनंतनाग), अतिरिक्त सी.ई.ओ. एस.ए.एस.बी. और यूटी प्रशासन, पुलिस, श्राइन बोर्ड और बी.आर.ओ. के वरिष्ठ अधिकारी भी व्यक्तिगत रूप से और वर्चुअल मोड के माध्यम से शामिल हुए।

प्रदेश के 41 सीएमएचओ और सिविल सर्जन के पदों पर बदलाव किए, भोपाल और इंदौर में नए CMHO मिले

भोपाल  भोपाल सहित प्रदेश के 41 सीएमएचओ और सिविल सर्जन के पदों पर बदलाव किए हैं। डॉ. प्रभाकर तिवारी, जो 5 वर्षों से भोपाल के सीएमएचओ थे, को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में भेजा गया है। उनकी जगह डॉ. मनीष शर्मा को भोपाल का नया सीएमएचओ नियुक्त किया गया है। मध्य प्रदेश सरकार ने भोपाल सहित प्रदेश के 41 सीएमएचओ और सिविल सर्जन के पदों पर बदलाव किए हैं। डॉ. प्रभाकर तिवारी, जो 5 वर्षों से भोपाल के सीएमएचओ थे, को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में भेजा गया है। उनकी जगह डॉ. मनीष शर्मा को भोपाल का नया सीएमएचओ नियुक्त किया गया है, जो ग्वालियर में उप संचालक के रूप में पदस्थ थे। डॉ. मनोज हुरमाडे को भोपाल से बैतूल भेजा गया है, और डॉ. दिनेश खत्री को रायसेन से राजगढ़ भेजा गया है। अन्य जिलों में भी कई सीएमओ और सिविल सर्जन के तबादले हुए हैं, जिनमें इंदौर, सिवनी, धार, छतरपुर, शाजापुर, नरसिंहपुर और राजगढ़ शामिल हैं। भोपाल और इंदौर में नए CMHO मिले मध्य प्रदेश सरकार ने स्वास्थ्य विभाग में बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया है। पांच साल से जमे भोपाल CMHO डॉ. प्रभाकर तिवारी को हटाकर उन्हें राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में भेजा गया है। उनकी जगह डॉ. मनीष शर्मा को भोपाल का नया CMHO नियुक्त किया गया है। डॉ. शर्मा वर्तमान में ग्वालियर में उप संचालक के रूप में कार्यरत थे और क्षयरोग विशेषज्ञ हैं। इसी तरह इंदौर सहित अन्य जिलों में भी नए मुख्य चिकित्सा अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। इन अधिकारियों के हुए तबादले डॉ. राजेश कुमार अठ्या – CMHO दमोह डॉ. राज सिंह ठाकुर – CMHO कटनी डॉ. भरत कुमार खटीक – जिला स्वास्थ्य अधिकारी, कटनी डॉ. राजेश प्रसाद तिवारी – प्रभारी, CMHO पन्ना डॉ. मनोज कुमार हुरमाडे – प्रभारी, CMHO बैतूल डॉ. दिनेश खत्री – शल्यक्रिया विशेषज्ञ, जिला चिकित्सालय राजगढ़ डॉ. हरिनारायण मांड्रे – प्रभारी, CMHO रायसेन डॉ. बी. के. वर्मा – प्रभारी, CMHO दतिया डॉ. दर्पण टोके – प्रभारी, सिविल सर्जन, बुरहानपुर डॉ. प्रदीप मोजेश – मुख्य खंड चिकित्सा अधिकारी, बुरहानपुर डॉ. वी. एस. चंदेल – प्रभारी, CMHO उमरिया डॉ. शोभाराम रोशन – संयुक्त संचालक, कार्यालय क्षेत्रीय संचालक, सागर डॉ. धरित्री जे. मोहंती – CMHO मंडला डॉ. पवन जैन – प्रभारी संचालक, राज्य स्वास्थ्य प्रबंधन संस्थान, ग्वालियर डॉ. एम. के. जोशी – संयुक्त संचालक, कार्यालय क्षेत्रीय संचालक, उज्जैन डॉ. जितेन्द्र राजपूत – जिला स्वास्थ्य अधिकारी, उज्जैन डॉ. राजेश सिसोदिया – जिला चिकित्सालय, हरदा डॉ. किरण वाडिवा – वरिष्ठ संयुक्त संचालक, संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं, भोपाल डॉ. भूरे सिंह सैत्या – वरिष्ठ संयुक्त संचालक, कार्यालय क्षेत्रीय संचालक, ग्वालियर डॉ. पवन शर्मा – शिशु रोग विशेषज्ञ, जिला चिकित्सालय ग्वालियर डॉ. नीरज कुमार – शल्यक्रिया विशेषज्ञ, जिला चिकित्सालय भिंड डॉ. अलका त्रिवेदी – प्रभारी, CMHO अशोकनगर डॉ. के. सी. सरोत – वरिष्ठ संयुक्त संचालक, संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं भोपाल डॉ. माधव हसानी – प्रभारी, CMHO इंदौर डॉ. राष्ट्रेन्द्र कुमार खाड्योत – प्रभारी, CMHO नीमच डॉ. रामहित कुमार – जिला स्वास्थ्य अधिकारी, विदिशा डॉ. मनीष शर्मा – CMHO भोपाल डॉ. प्रभाकर तिवारी – वरिष्ठ संयुक्त संचालक, संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं भोपाल डॉ. दिनेश देहलवार – प्रभारी, CMHO मालवा डॉ. राजेश गुप्ता – जिला महामारी नियंत्रण अधिकारी, बड़वानी डॉ. मनोज कौरव – DHO, ग्वालियर डॉ. नरसिंह गेहलोत – CMHO नर्मदापुरम डॉ. सनेराम परस्ते – प्रभारी, सिविल सर्जन, अनूपपुर डॉ. अनिल झामनानी – प्रभारी, CMHO निवाड़ी डॉ. रामकुमार गुप्ता – CMHO ग्वालियर डॉ. प्रदीप कुमार जैन – शिशु रोग विशेषज्ञ, जिला चिकित्सालय ग्वालियर डॉ. यशपाल सिंह – प्रभारी, सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक, रायसेन डॉ. मुकेश जैन – शल्यक्रिया विशेषज्ञ, जिला चिकित्सालय दमोह डॉ. एस. के. त्रिपाठी – प्रभारी, CMHO पन्ना डॉ. राजेश परिहार – जिला परिवार कल्याण अधिकारी, बैतूल डॉ. सुशीला यादव – चिकित्सा अधिकारी, जिला चिकित्सालय सागर  

बच्चों में बौद्धिक क्षमताओं-भावनात्मक विकास और सामाजिक कौशल को विकसित करता स्कूल शिक्षा विभाग

भोपाल  स्कूली शिक्षा बच्चे के विकास में एक महत्वपूर्ण चरण है, जो उनके भविष्य को आकार देने वाली आधारभूत ज्ञान और कौशल प्रदान करती है। आमतौर पर गणित, विज्ञान, भाषा, कला और सामाजिक अध्ययन जैसे विभिन्न विषयों में औपचारिक निर्देश शामिल होते हैं। सिखाने के इस चरण का उद्देश्य बौद्धिक क्षमताओं, भावनात्मक विकास और सामाजिक कौशल को विकसित करना है। प्रदेश में इन्हीं उद्देश्यों को लेकर लगातार प्रयास किये जा रहे हैं। स्कूली शिक्षा अनुशासन, टीमवर्क और समस्या समाधान जैसे मूल्यों को भी बढ़ावा देती है, जिससे बच्चों को अकादमिक और वास्तविक दुनिया की चुनौतियों से निपटने में मदद मिलती है। प्रदेश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति वर्ष 2020 का क्रियान्वयन भी प्रभावी तरीके से किया जा रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश अग्रणी राज्यों की श्रेणी में आता है। प्रदेश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और स्कूल शिक्षा मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह के कुशल मार्गदर्शन में नवाचारों के साथ कई प्रभावी कदम उठाये गये हैं। इसका प्रभाव यह हुआ है कि प्रदेश के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण एवं सर्वांगीण शिक्षा प्रदान की जा रही है। शैक्षणिक सत्र 2024-25 में स्कूल शिक्षा विभाग ने महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। प्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग के 2023-24 में कुल बजट का 92.12 प्रतिशत उपयोग किया गया था, जबकि वर्ष 2024-25 में प्रावधान किये गये बजट का 95.12 प्रतिशत व्यय किया गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 3.48 प्रतिशत अधिक है। बजट में प्रावधान की गई राशि का उपयोग बच्चों की शिक्षा की बेहतरी के लिये किया गया। प्रदेश में माध्यमिक शिक्षा मंडल बोर्ड की कक्षा 10वीं बोर्ड परीक्षाओं में 76 प्रतिशत बच्चे उत्तीर्ण हुए, जो पिछले वर्ष के 58 प्रतिशत से 18 प्रतिशत अधिक है। यह वृद्धि बच्चों में बढ़ी शैक्षणिक योग्यता को दर्शाती है। इसी तरह 12वीं बोर्ड परीक्षा का परिणाम पिछले वर्ष में 64 प्रतिशत की तुलना में इस वर्ष 74 प्रतिशत आया है, जो 10 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। प्रदेश के 53 प्रतिशत बच्चों ने कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की है। प्रदेश में बोर्ड परीक्षाएं शून्य प्रतिशत पेपर लीक के साथ संपन्न हुई। प्रदेश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिये स्कूल शिक्षा मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय टास्क फोर्स का गठन किया गया है। नई शिक्षा नीति में विभिन्न समितियों का गठन भी किया गया है। इन समितियों की अनुशंसा के अनुसार मध्यप्रदेश में स्कूल शिक्षा के गुणात्मक सुधार के लिये लगातार प्रयास किये जा रहे हैं। भारतीय मूल्यों, संस्कृति आधारित शिक्षा के लिये स्कूल शिक्षा विभाग ने कई उल्लेखनीय कदम उठाये हैं। प्रदेश की शालाओं में गुरूओं को सम्मान प्रदान करने के लिये गुरू पूर्णिमा उत्सव का आयोजन, जन्माष्टमी पर्व, गीता महोत्सव और मकर संक्रांति पर्व विद्यालयों में आयोजित किये गये। कक्षा 11 और 12 में कला और संस्कृति पर आधारित प्रोजेक्ट जोड़े जा चुके हैं। स्थानीय भाषाओं गोंडी, सहरिया, बारेली, निमाड़ी, बुंदेली, बघेली में तैयार की गई त्रिभाषा पुस्तकें 21 जिलों में 89 जनजातीय विकासखंडों में उपलब्ध कराई गई हैं। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को उनकी शैक्षणिक गुणवत्ता सुधार के लिये अनेक योजनाओं का फायदा दिलाया जा रहा है। नि:शुल्क पाठ्यक्रम योजना में शासकीय विद्यालयों में अध्ययनरत करीब 82 लाख बच्चों को पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध कराई गई हैं। सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले कक्षा 1 से 8 तक के करीब 60 लाख बच्चों को डीबीटी के माध्यम से राशि प्रदान की गई। कक्षा 1 से 12वीं में अध्ययनरत एससी, एसटी, ओबीसी और बीपीएल के 66 लाख बच्चों को विगत वर्ष छात्रवृत्ति के रूप में 332 करोड़ रूपये की राशि उनके बैंक खातों में ट्रांसफर की गई है। नि:शुल्क साइकिल वितरण योजना में कक्षा 6 और 9 के करीब 4 लाख 75 हजार बच्चों को घर से स्कूल तक आने जाने के लिये साइकिल वितरित की गई हैं। प्रदेश में कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षा में 75 प्रतिशत से अधिक अंक अर्जित करने वाले 89 हजार 801 प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को करीब 224 करोड़ 25 लाख रूपये की राशि प्रोत्साहन स्वरूप टेबलेट क्रय करने के लिये उनके बैंक खातों में अंतरित की गई है। सरकारी स्कूलों में बच्चों को पूर्व प्राथमिक शिक्षा से जोड़ने के लिये 4 हजार 473 सरकारी स्कूलों में पूर्व प्राथमिक कक्षाएं शुरू की गई हैं। इन कक्षाओं में 3 वर्ष 6 वर्ष तक के आयुवर्ग के 96 हजार बच्चों को पिछले वर्ष दाखिला कराया गया था। इन कक्षाओं के बच्चों को पढ़ाने के लिये 117 मास्टर ट्रेनर्स और 4473 शासकीय शिक्षकों को प्रशिक्षण दिलाया गया। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कक्षा 1 एवं 2 के छात्रों को बुनियादी साक्षरता और संख्या ज्ञान प्रभावी तरीके से देने के लिये मिशन अंकुर संचालित किया जा रहा है। इस मिशन के अंतर्गत बच्चों को अभ्‍यास के लिये नि:शुल्क वर्कबुक का वितरण किया गया। अंकुर मिशन में अभिभावकों की भागीदारी सुनिश्चित करने और बच्चों के शारीरिक, मानसिक और भाषा विकास की क्षमताओं का आकलन करने के लिये सभी स्कूलों में फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमेरेसी (एफएलएन) मेलों का आयोजन किया गया। शिक्षकों को अपनी कक्षा अनुभवों, ज्ञान, कौशल एवं नवाचारों को अपने शिक्षक समुदाय से साझा करने के लिये कक्षा एक से 8 तक पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिये जन शिक्षा केन्द्र स्तर पर शैक्षिक संवादों का आयोजन किया गया।  

मद्रासी कैंप को हटाने का निर्णय न्यायालय का है, न कि राज्य सरकार का, ‘इसमें मैं कुछ नहीं कर सकती…’: CM रेखा गुप्ता

नई दिल्ली हाल ही में मद्रासी कैंप झुग्गी बस्ती को हटाए जाने को लेकर चल रही बहस के बीच दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि जिन झुग्गियों को हटाने के लिए अदालत ने आदेश दिया है, उसमें सरकार या प्रशासन कुछ नहीं कर सकता। बारापुला नाले के किनारे बनी इन झुग्गियों को हटाने की बात कोर्ट ने चार बार दोहराई है, ताकि नाले की सफाई के लिए मशीनें लगाई जा सकें। साथ ही उन्होंने चेताया कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो दिल्ली 2023 जैसी बाढ़ की स्थिति का दोबारा सामना कर सकती है। रेखा गुप्ता ने कहा कि सरकार दिल्लीवासियों की चिंता करती है और किसी भी हालात में लोगों की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने बताया कि नाले के किनारे बसे मद्रासी कैंप को हटाने का निर्णय न्यायालय का है, न कि राज्य सरकार का। अदालत के आदेश की अवहेलना करना किसी के लिए भी संभव नहीं है। बारापुला नाले पर अतिक्रमण के कारण इसकी चौड़ाई कम हो गई है, जिससे आस-पास के इलाकों में जलभराव की समस्या पैदा हो गई है। कोर्ट ने झुग्गी बस्तियों के लिए कुछ आदेश दिया है: रेखा गुप्ता उन्होंने कहा कि गाद निकालने के लिए यह कार्रवाई जरूरी थी। अगर कोर्ट ने झुग्गी बस्तियों के लिए कुछ आदेश दिया है, तो न तो सरकार और न ही प्रशासन कुछ कर सकता है। मद्रासी कैंप बारापुला नाले के किनारे बनाया गया था। उन्होंने यह भी साफ किया कि इस झुग्गी बस्ती के निवासियों को अन्य स्थानों पर शिफ्ट किया गया है और उन्हें घर भी आवंटित किए गए हैं। रेखा गुप्ता ने विपक्ष पर साधा निशाना रेखा गुप्ता ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि दिल्ली में आज 700 करोड़ रुपये की लागत से विकास कार्य हो रहे हैं, जो ना तो पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की सरकार ने किए और ना ही कांग्रेस की सरकार ने कभी इसकी पहल की। उन्होंने कहा कि जब तक किसी झुग्गीवासी को पक्का मकान नहीं मिलता, तब तक उसे वहां से हटाया नहीं जाएगा और सरकार उन्हें बेहतर सुविधाएं देने के लिए प्रतिबद्ध है। लेकिन कोर्ट के आदेशों की अनदेखी संभव नहीं है। मुख्यमंत्री ने कार्रवाई के राजनीतिकरण पर भी सवाल उठाए मुख्यमंत्री ने इस कार्रवाई के राजनीतिकरण पर भी सवाल उठाए और कहा कि कोर्ट जानता है कि उसे क्या करना है, और इसी कारण उसने नाले की सफाई और बाढ़ की आशंका को लेकर यह सख्त आदेश जारी किए हैं। दिल्ली सरकार अदालत के आदेशों का पालन करते हुए लोगों को सर्वोत्तम सुविधा देने के प्रयास में जुटी है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव 56 करोड़ के 67 कार्यों का लोकार्पण और 23 करोड़ 88 लाख रुपये के 68 कार्यों का भूमि-पूजन करेंगे

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कल नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा में एक भव्य आयोजन में 80 करोड़ 46 लाख रुपये की लागत के 135 निर्माण कार्यों का लोकार्पण और भूमि-पूजन करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव 56 करोड़ 58 लाख रुपये के 67 कार्यों का लोकार्पण और 23 करोड़ 88 लाख रुपये के 68 कार्यों का भूमि-पूजन करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव जल जीवन मिशन के अंतर्गत 396 लाख रुपये की लागत से देवरी से बनवारी पिपरिया तक 8.27 किमी सड़क, साईंखेड़ा में सीवरेज मलजल योजना तथा पुस्तकालय एवं प्रतीक्षालय जैसे शहरी विकास से जुड़े कार्यों का लोकार्पण और 23 करोड़ 88 लाख रुपये के निर्माण कार्यों का भूमि-पूजन करेंगे। जिले में सामुदायिक भवन, अमृत सरोवर 2.0, आंगनबाड़ी भवनों और अन्य बुनियादी संरचनात्मक सुविधाओं का निर्माण प्रस्तावित है। समाजसेवियों, उत्कृष्ट कार्य करने वाले नागरिकों, शिक्षकों और विद्याथियों का सम्मान मुख्यमंत्री डॉ. यादव नरसिंहपुर जिले में उत्कृष्ट कार्य करने वाले नागरिकों, जनप्रतिनिधियों, महिला स्व-सहायता समूहों, शिक्षकों और विकास कार्यों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले विभागीय कर्मचारियों और मेधावी विद्यार्थियों का सम्मान करेंगे।  

यूपी में स्थायी नियुक्ति की मांग पर डटे हजारों अभ्यर्थी, टीईटी पास शिक्षामित्रों का बड़ा आंदोलन

लखनऊ शिक्षक पात्रता परीक्षा (टेट) उत्तीर्ण शिक्षामित्र 27 मई से राजधानी के ईको गार्डन में शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे हैं। ‘शिक्षक, शिक्षामित्र उत्थान समिति उत्तर प्रदेश’ के बैनर तले प्रदेशभर से जुटे शिक्षामित्रों की मांग है कि उन्हें स्थायी शिक्षक नियुक्त किया जाए क्योंकि वे राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) के तय सभी शैक्षिक मानकों को पूरा करते हैं। प्रदेश में करीब 50 हजार ऐसे शिक्षामित्र हैं जिन्होंने टीईटी या सीटीईटी उत्तीर्ण कर रखा है। वे वर्षों से प्राथमिक स्कूलों में पढ़ा रहे हैं और बच्चों की आधारशिला मजबूत करने में उनकी अहम भूमिका रही है। इसके बावजूद उन्हें अब तक स्थायी नियुक्ति नहीं मिली है। उनका कहना है कि उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और अन्य राज्यों में टेट उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को स्थायी शिक्षक बनाया गया है, तो उत्तर प्रदेश में भी इसी नीति को लागू किया जाना चाहिए। उनकी मांग है कि जो शिक्षामित्र टेट उत्तीर्ण नहीं हैं, उन्हें भी उनकी शैक्षिक योग्यता और अनुभव के आधार पर स्थायीकरण का अवसर दिया जाए। अन्य प्रमुख मांगों में गरिमापूर्ण और उचित मानदेय के साथ 12 माह का वेतन शामिल है। इसके साथ ही महिला अभ्यर्थियों की विशेष मांग है कि उन्हें अंतरजनपदीय स्थानांतरण में प्राथमिकता दी जाए और उनकी नियुक्ति की प्रक्रिया को पारदर्शी और संवेदनशील बनाया जाए। प्रदेश अध्यक्ष गुड्डू सिंह का कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती, तब तक यह क्रम जारी रहेगा।

तेजस्वी यादव ने कहा-चुनाव आयोग जब चुनाव की तिथि घोषित करता है, उससे पहले भाजपा के आईटी सेल को पता होता है

पटना कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के फिर से नवंबर 2024 में महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव को लेकर सवाल उठाने पर सियासत गर्म हो गई है। उन्होंने एक लेख के जरिए भाजपा पर आरोप लगाया कि महाराष्ट्र चुनावों में ‘मैच फिक्सिंग’ की गई और अब कुछ ऐसा ही बिहार में दोहराया जाएगा। राहुल गांधी के इस लेख के प्रकाशित होने के बाद चुनाव आयोग ने इसे निराधार बताया। हालांकि राजद राहुल गांधी के साथ खड़ी नजर आ रही है। बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने रविवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उन्होंने बिल्कुल सही आशंका जताई है। शंका तो लोगों को होती ही है। 2014 से जितनी भी संवैधानिक संस्थाएं हैं, उन्हें हाईजैक कर रखा है। चुनाव आयोग जब चुनाव की तिथि घोषित करता है, उससे पहले भाजपा के आईटी सेल को पता होता है। उन्होंने यह भी कहा कि संवैधानिक संस्थाओं को ईमानदारी से चुनाव कराना चाहिए और अपने दायित्वों का निर्वहन करना चाहिए। जब ये संस्थाएं बर्बाद हो जाएंगी, तो लोगों को न्याय कहां मिलेगा। उन्होंने 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव की चर्चा करते हुए कहा कि उस समय तो हमलोग सरकार बना चुके थे। शाम में उन्होंने काउंटिंग को रुकवा दिया और रात के अंधेरे में काउंटिंग को शुरू किया और तीन-तीन बार प्रेस कांफ्रेंस करके अपनी सफाई दी। चुनाव आयोग भारतीय जनता पार्टी की सरकार के प्रकोष्ठ की तरह काम कर रहा है, तो सवाल उठाने जायज हैं। इधर, बिहार कांग्रेस के प्रभारी कृष्णा अल्लावारू के तेजस्वी यादव को महागठबंधन के सीएम फेस नहीं होने, बल्कि उन्हें सिर्फ को-ऑर्डिनेशन कमेटी का चेयरमैन बनाने के बयान पर खुद तेजस्वी यादव ने कहा कि किसी को इसके लिए परेशान होने की जरूरत नहीं है और न ही किसी को चिंता करने की कोई जरूरत है। हम सब लोग सरकार बनाने के लिए नया बिहार बनाएंगे। 

भारत के एयरबेस पर हमले का दावा कर रहे पाक की खुल गई पोल, मुंह दिखाने लायक नहीं रहे शरीफ

नई दिल्ली ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने पाकिस्तान के कई एयरबेस को निशाना बनाते हुए बड़ा नुकसान पहुंचाया। इससे झल्लाया पाकिस्तान अपनी जनता को खुश करने के लिए झूठे दावे करने लगा। उसने कहा कि पाकिस्तान ने भारत के आदमपुर एयरबेस पर हमला किया और वहां खड़े सुखोई विमान को भी नुकसान पहुंचाया। हालांकि, भारत ने पहले दिन से ही स्पष्ट रूप से इससे इनकार किया और खुद पीएम मोदी भारतीय सेना के जवानों से मिलने के लिए आदमपुर एयरबेस पहुंचे, जिससे पता चला कि एयरबेस को कोई नुकसान नहीं पहुंचा। अब एक बार फिर से पाकिस्तान की पोल खुल गई है और इस बार तो वह और उसके प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ मुंह दिखाने लायक नहीं बचे हैं। दरअसल, जियो पॉलिटिकल एक्सपर्ट डेमियन साइमन ने एक्स पर तस्वीरों के साथ पाक के दावे का ‘फैक्ट चेक’ किया है। उन्होंने लिखा, ‘’रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि पाकिस्तान ने पंजाब के आदमपुर एयरबेस पर हमला किया और सुखोई Su-30 MKI विमान को नुकसान पहुंचाया, लेकिन पाकिस्तान ने संघर्ष से दो महीने पहले मार्च 2025 में ली गई एक सैटेलाइट तस्वीर शेयर की है, जिसमें मिग-29 का रखरखाव चल रहा था और इंजन टेस्ट पैड के पास दिखाई देने वाली काली कालिख आम बात है। यह कोई संघर्ष में हुआ नुकसान नहीं है।” इस तरह डेमियन ने भी साफ कर दिया है कि भारत के आदमपुर एयरबेस बिल्कुल सही सलामत है और पाकिस्तान का दावा गलत है। भारत से तनाव के दौरान, पाकिस्तान ने दावा किया था कि चीन निर्मित जेएफ-17 लड़ाकू विमान से दागी गई उसकी मिसाइलों ने आदमपुर में रूस निर्मित एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम को नष्ट कर दिया। हालांकि, सच्चाई इससे बिल्कुल उलट थी। पाकिस्तान ने जम्मू से गुजरात तक अपने खास दोस्त तुर्की के ड्रोन के जरिए हमला किया था, लेकिन सबको हवा में ही विफल कर दिया गया था। इसके जवाब में भारत ने पाकिस्तान के कई अहम एयरबेस को निशाना बनाया और वहां खड़े जासूसी विमान AWACS समेत अन्य महत्वपूर्ण चीजों को तबाह कर दिया। भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर होने के बाद 13 मई को पीएम मोदी आदमपुर एयरबेस गए थे और जवानों से मुलाकात की थी। इस दौरान, सोशल मीडिया पर पोस्ट की गईं तस्वीरों में फाइटर जेट और रूस से खरीदा गया एयर डिफेंस सिस्टम एस-400 पूरी तरह से सही दिखाई दे रहे थे। देखा जा सकता था कि आदमपुर एयरबेस और भारत के लड़ाकू विमान व एयर डिफेंस सिस्टम को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। इस तरह पाक का यह दावा भी गलत निकला।  

संजय सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा, पत्र में दिल्ली में बुलडोजर ऐक्शन पर रोक लगाने की मांग की

नई दिल्ली आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। उन्होंने इस पत्र में दिल्ली में बुलडोजर ऐक्शन पर रोक लगाने की मांग की है। उन्होंने अपने पत्र में दिल्ली की बीजेपी सरकार पर झुग्गी बस्तियों को तोड़ने का आरोप लगाते हुए पीएम मोदी से इन्हें बचाने की गुहार लगाई है। उन्होंने अपने पत्र में लिखा है, बीते कुछ महीनों से दिल्ली की अनेक बस्तियों में, जिनमें मद्रासी कैंप, बस्ती निज़ामुद्दीन, बटला हाउस, आजादपुर मंडी और ओखला क्षेत्र की बस्तियाँ शामिल हैं, लगातार तोड़फोड़ की जा रही है, जिससे हजारों परिवारों का जीवन संकट में पड़ गया है। उन्होंने कहा, आपकी सरकार ने लोगों के पैरों से 2 गज ज़मीन और सिर से छत भी छीन ली। आज वही जमीन उन लोगों के पांवों तले खिसकती जा रही है। ‘बिना नोटिस हटाई जा रही झुग्गियां’ संजय सिंह ने अपने पत्र में कहा, दिल्ली वह शहर है जहां देश का हर कोना अपने भविष्य की तलाश में आता है। खासकर उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों से आए श्रमिकों ने इस शहर को अपने खून-पसीने से सींचा है। उन्होंने इसकी सड़कें बनाई,भवन खड़े किए, इसकी अर्थव्यवस्था को गति दी। और अब जब वही श्रमिक झुग्गीमें रहते हैं, तो उन्हें “अवैध” कहकर हटा दिया जाता है- बिना नोटिस, बिना पुनर्वास, बिना मानवीय सहानुभूति के। उन्होंने आगे कहा, निदा फ़ाज़ली की चंद पंक्तियाँ है कि “ज़िंदगी जब भी तेरी बज़्म में लाती है हमें, ये ज़र्मी चाँद से बेहतर नज़र आती है हमें, लेकिन, आपकी सरकार ने लोगों के पैरों से 2 गज ज़मीन और सिर से छत भी छीन ली। आज वही ज़मीन उन लोगों के पांवों तले खिसकती जा रही है। याद दिलाए भाजपा के वादे संजय सिंह ने आगे कहा, आपकी सरकार और भारतीय जनता पार्टी ने पिछले सालों में अनेक घोषणाएं की थीं जो इन बस्तीवासियों को आश्वस्त करती थीं। साल 2022 में दिल्ली नगर निगम चुनावों के दौरान भाजपा ने ‘जहां झुग्गी वहां मकान योजना के अंतर्गत 17,000 फ्लैट्स उपलब्ध कराने का वादा किया था। साल 2025 के विधानसभा चुनावों में पार्टी ने 3.5 लाख पक्के घर बनाने का वादा दोहराया, साथ ही 15 में भोजन (अटल कैंटीन), मुफ्त बिजली, सामुदायिक शौचालय, जल एटीएम,और महिला सहायता योजनाएं जारी रखने का आश्वासन भी दिया। ‘खुद अमित शाह ने किया था मकान का वादा’ आप सांसद ने कहा, केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी ने स्वयं “झुग्गी बस्ती प्रधान सम्मेलन” में यह वादा किया था किहर बस्तीवासी को मकान मिलेगा और कोई भी योजना रोकी नहीं जाएगी। लेकिन वर्तमान स्थिति इन वादों के विपरीत है। तथ्य यह है कि आज भी लाखों झुग्गीवासियों को मकान नहीं मिला है और 2025 तक केवल 4700 घर ही वितरित किए जा सके हैं। इससे साफ संजय सिंह ने कहा, ऐसा लगता हैं कि घोषित योजनाएं ज़मीन पर लागू नहीं हो पा रहीं, और उलटे बुलडोज़र की नीति अपनाई जा रही है। क्या यूपी-बिहार से आए वे श्रमिक इस देश के नागरिक नहीं हैं? क्या संविधान द्वारा प्रदत्त अनुच्छेद 21 – जीवन और गरिमा का अधिकार केवल नगरों के धनी नागरिकों के लिए है? महोदय, गरीबों की बस्तियों को तोड़ते समय यह ध्यान रहना चाहिए कि सपनों की दिल्ली में, अगर गरीब का ही सपना टूट जाए, तो दिल्ली शहर नहीं, सिर्फ इमारतों का जंगल रह जाता है। उन्होंने पीएम मोदी से कहा, दुनिया सबसे बड़ा धर्म है और देश की जनता की ओर से आपसे उम्मीद करते है कि आप इसी मानवता के धर्म को सबसे आगे रखेंगे। इन गरीबों की जिंदगियों को उजड़ने से रोकिए। इन झुग्गियों को बचाइए और जहां झुग्गियाँ हैं,वहीं लोगों को मकान बनाकर दिलाने की कृपा करें।  

बदरीनाथ यात्रा पर आई दो महिला श्रद्धालुओं की ह्रदय गति रुकने से मौत, अब तक 24 की गई जान

गोपेश्वर  बदरीनाथ यात्रा पर आई दो महिला श्रद्धालुओं की ह्रदय गति रुकने से मौत हो गई। महिला श्रद्धालुओं में से एक राजस्थान और एक मध्य प्रदेश की रहने वाली थी। कपाट खुलने से अब तक 24 श्रद्धालुओं की स्वास्थ्य कारणों से मौत हो चुकी है। इनमें हेमकुंड साहिब के यात्रा मार्ग पर एक श्रद्धालु की मौत भी शामिल है। बीते रोज निर्मला देवी (70 वर्ष) पत्नी चिरंजी लाल निवासी सुरक्षित नगर, लालसैट दौसा, राजस्थान को तबीयत बिगड़ने पर जिला चिकित्सालय लाया गया, लेकिन यहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। श्रद्धालु स्वजन के साथ बदरीनाथ धाम की यात्रा पर आई थी। वहीं रविवार को भगवती देवी (55 वर्ष) निवासी हरिदुवा, राजजा, मध्य प्रदेश को तबीयत बिगड़ने पर जिला चिकित्सालय लाया गया। यहां उपचार के दौरान भगवती देवी की मौत हो गई। अब तक बदरीनाथ धाम व हेमकुंड साहिब की यात्रा पर आए 24 श्रद्धालुओं में से अधिकांश की ह्रदय गति रुकने से मौत हुई है।

चीन-पाक की साजिशों के बावजूद भारत-फ्रांस ने किया बड़ा रक्षा सौदा, अफवाहों का दिया मुंहतोड़ जवाब: J-10C बनाम राफेल

नई दिल्ली  भारत और फ्रांस के बीच राफेल फाइटर जेट को लेकर चल रहे कथित विवाद पर चीन और पाकिस्तान ने एक नया नैरेटिव गढ़ने की कोशिश की है। मगर अब भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर की फ्रांस यात्रा इस गलत प्रचार की हवा निकालने का काम करेगी। अगले हफ्ते पेरिस में होने वाली यह यात्रा सिर्फ एक कूटनीतिक मुलाकात नहीं, बल्कि भारत की सैन्य प्रतिष्ठा और वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को मज़बूत करने की दिशा में अहम कदम होगी। फ्रांस सांसद के सवालों से विवाद की शुरुआत फ्रांस के सांसद मार्क चावेंट ने अपने विदेश मंत्री से पूछा कि क्या भारत का राफेल फाइटर जेट हालिया झड़पों में पाकिस्तान के J-10C द्वारा गिराया गया था। उन्होंने PL-15E मिसाइल और KLJ-10A AESA रडार का उल्लेख करते हुए पूछा कि अगर ये सच है तो इससे फ्रांस की एयरोस्पेस तकनीक और रणनीतिक नेतृत्व पर सवाल उठ सकते हैं। उन्होंने राफेल के स्पेक्ट्रा इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम की कार्यक्षमता पर भी सवाल उठाए। पाकिस्तान-चीन का प्रोपेगेंडा युद्ध चीन और पाकिस्तान की मीडिया ने दावा किया कि भारत और फ्रांस के बीच राफेल को लेकर विवाद हो गया है। उनके अनुसार फ्रांसीसी निरीक्षण टीम को भारत आने से रोक दिया गया। साथ ही प्रचारित किया गया कि पाकिस्तान के J-10C फाइटर ने राफेल को गिराया। भारत सरकार ने अब तक इस दावे की कोई पुष्टि नहीं की है। लेकिन चीन और पाकिस्तान का ये प्रोपेगेंडा सिर्फ भारत और फ्रांस की रणनीतिक साझेदारी को तोड़ने की कोशिश नहीं है, बल्कि राफेल की छवि को धूमिल कर दक्षिण-पूर्व एशिया और मिडिल ईस्ट जैसे हथियार बाजारों में चीनी J-10 को प्रमोट करने का प्रयास है। राफेल-टाटा की नई डील  इन तमाम अफवाहों के बीच भारत की टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड और फ्रांस की दसॉल्ट एविएशन ने एक नई डील पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके तहत हैदराबाद में एक अत्याधुनिक मैन्युफैक्चरिंग हब बनाया जाएगा जहाँ राफेल के मुख्य ढांचे का निर्माण होगा। यह साझेदारी भारतीय मल्टी रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) प्रोग्राम का हिस्सा है, जिसकी लागत $25 बिलियन से अधिक आंकी जा रही है। इसमें राफेल, F-21, F/A-18, ग्रिपेन-ई और SU-35 जैसे विकल्पों की प्रतिस्पर्धा है। फ्रांस की प्रतिक्रिया: सच्चाई की तलाश फ्रांस के रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि वे भी राफेल को लेकर फैलाई जा रही बातों की सच्चाई जानने में रुचि रखते हैं। प्रवक्ता ने कहा कि अगर वास्तव में राफेल युद्ध में गिरा है, तो यह पहला मौका होगा और इसकी पुष्टि आवश्यक है। फ्रांस ने भारत के साथ मिलकर तथ्यों की जांच करने की बात कही है। राफेल  को निशाना क्यों बना रहा चीन? चीन का मकसद स्पष्ट है साउथ ईस्ट एशिया में J-10 जैसे अपने विमान बेचने के लिए राफेल को कमजोर दिखाना। मलेशिया ने हाल ही में 42 राफेल खरीदने की डील की है और इंडोनेशिया ने $8 अरब की डील साइन की है। ऐसे में चीन नहीं चाहता कि फ्रांस इन क्षेत्रों में अपनी पकड़ मज़बूत करे। भारत और फ्रांस की साझेदारी अटूट राफेल को लेकर जो भी अफवाहें फैलाई जा रही हैं, उनका कोई ठोस आधार नहीं है। भारत और फ्रांस की साझेदारी पहले से अधिक मजबूत हो रही है। जयशंकर की यात्रा इस साझेदारी को और प्रगाढ़ करेगी और साथ ही चीन-पाकिस्तान के झूठे प्रचार को बेनकाब करेगी। भारत की सैन्य प्रतिष्ठा को लेकर कोई संदेह की गुंजाइश नहीं है, और यह दौरा इस विश्वास को वैश्विक मंच पर और भी सुदृढ़ करेगा।

जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत प्रदेश में 5 जून तक 2139 बावड़ियों और 4254 तालाबों की सफाई की गई

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशन में 30 मार्च को उज्जैन से शुरू हुए जल गंगा संवर्धन अभियान को दो माह से अधिक हो गए है। अभियान का समापन 30 जून को होगा। जन सहभागिता से आगे बढ़ रहे इस अभियान से जल संरक्षण के क्षेत्र में खंडवा जिले को देश में पहला स्थान मिला है, जबकि केन्द्रीय जल संसाधन विभाग की एजेंसी के आकलन में प्रदेश को राज्यों की श्रेणी में चौथा स्थान मिला है। अभियान के अंतर्गत रिकार्ड खेत तालाब और अमृत सरोवर बनाये गए हैं। प्रदेश में 5 जून तक 2139 बावड़ियों और 4254 तालाबों की सफाई की गई है। अभियान में 3468 नदी घाटों की सफाई की गई है, 15 913 जल संगोष्ठी, 1677 नुक्कड़ नाटक और 12878 दीवार लेखन के कार्य किये गए हैं। इस अवधि में अभियान में 36 लाख नागरिकों ने सहभागिता की है, इस तरह अभियान जनांदोलन बन गया है। आने वाली वर्षा ऋतु में अभियान के अंतर्गत बने खेत तालाबों, पुनरुद्धरित बावड़ियों और तालाबों में करोड़ों लीटर वर्षा जल सहेजा जा सकेगा। इससे भूजल स्तर में भी सुधार आयेगा और किसानों को फसल के लिए वर्ष भर पानी उपलब्ध रहेगा। जन सहभागिता से हुई कुओं, बावड़ियों की सफाई और सौंदर्यीकरण देवास में जल गंगा संवर्धन अभियान के माध्यम से जल संरचनाओं के निर्माण एवं गहरीकरण का कार्य किया जा रहा है। नदी, नालों, कुएं, बावड़ियों और कुंड की साफ-सफाई की जा रही है तथा उनमें से गदंगी और गाद बाहर निकाली जा रही है। इसके साथ ही खेत तालाबों का भी निर्माण किया जा रहा है। अभियान के तहत कुएं, बावड़ियों की साफ-सफाई कर उनका सौंदर्यीकरण भी किया जा रहा है। मप्र जन अभियान परिषद ने जिले के बागली विकासखंड के कमलापुर गांव की 450 वर्ष प्राचीन हाथी बावड़ी साफ-सफाई और सौंदर्यीकरण किया गया। इस प्राचीन बावड़ी में हाथी पानी पीते थे। सहभागिता करने वाले नागरिकों ने जल संरक्षण की शपथ भी ली। दीवारों पर पेंटिंग बना कर जल संरक्षण का संदेश ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के अंतर्गत बुरहानपुर जिले की नगर परिषद शाहपुर में अमरावती नदी किनारे स्थित अधो-संरचनाओं के आस-पास जल ही ‘जीवन की आस, इसे बचाने करो प्रयास’, ‘बोलेगी चिड़िया डाली-डाली, फैलाओ तो तुम हरियाली’, ‘दूषित नहीं करना जल, बर्बाद हो जायेगा कल’, ‘सांसें हो रही हैं कम, आओ पेड़ लगाएं हम’, ‘सबका हो एक ही नारा, वर्षा जल बचाओ सारा’, और ‘साफ सुथरा पानी, अच्छे स्वास्थ्य की निशानी, जैसे जल संरक्षण के संदेश लिखे गए। कलात्मकता का परिचय देते हुए पर्यावरण संरक्षण और जल बचाने का संदेश देती आकर्षक पेंटिंग्स भी बनाई गईं। जिले में ये प्रेरणादायक स्लोगन और आकर्षक पेंटिंग्स नागरिकों का ध्यान अपनी ओर खींच रही हैं। 300 वर्ष पुरानी बावड़ी की साफ-सफाई औऱ सौंदर्यीकरण जल संरक्षण के उद्देश्य से सीहोर जिले में चलाए जा रहे जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत जन अभियान परिषद के सदस्यों ने गांव लीलाखड़ी और आममाय में स्थित लगभग 300 वर्ष पुरानी बावड़ी पर श्रमदान कर साफ सफाई की गई और ‘बावड़ी उत्सव’ मनाया गया। प्राचीन जल स्त्रोंतों के संरक्षण का संदेश देने के उद्देश्य से बावड़ी पर 51 फिट लम्बी चुनरी ओढ़ाई गई और दीप प्रज्ज्वलन कर आकर्षक रंगोली से बावड़ी की साज सज्जा की गई। जन अभियान परिषद के सदस्यों औऱ ग्रामवासियों ने आरती की और पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से पौधारोपण भी किया। 

मिशन कर्मयोगी में नगरीय प्रशासन एवं विकास के 43 हजार से अधिक अधिकारी-कर्मचारी पंजीकृत

भोपाल  प्रदेश में राष्ट्रीय मिशन कर्मयोगी की अवधारणा और कार्य-प्रणाली को ध्यान में रखकर राज्य सरकार ने क्षमता निर्माण नीति तैयार की है। इस नीति में प्रत्येक विभाग के बजट में मिशन कर्मयोगी के लिये बजट का एक प्रतिशत आरक्षित किया गया है। इस व्यवस्था से कर्मचारियों और अधिकारियों के प्रशिक्षण और क्षमता विकास के लिये आवश्यक संसाधन सुनिश्चित हो रहे हैं। यह व्यवस्था संचालनालय नगरीय प्रशासन एवं विकास में भी लागू की गयी है। मिशन कर्मयोगी डिजिटल पोर्टल पर अब तक 43 हजार से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों को पंजीकृत किया जा चुका है। ये कुल कर्मचारियों का लगभग 70 प्रतिशत है। संचालनालय के 8816 प्रतिभागी पाठ्यक्रमों में पंजीकृत हैं, जिनमें से 6843 अधिकारी-कर्मचारियों द्वारा पाठ्यक्रमों में प्रशिक्षण प्राप्त किया जा चुका है। विभाग द्वारा विशेषज्ञों के माध्यम से 4 ई-लर्निंग मॉड्यूल निर्मित किये गये हैं। इनमें आश्रय-स्थल प्रबंधन, स्व-सहायता समूह गठन एवं प्रबंधन, राजस्व प्रबंधन, प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 शामिल हैं। प्रदेश की क्षमता निर्माण नीति मिशन कर्मयोगी के आदर्शों पर आधारित एक ठोस एवं दायित्वपूर्ण रणनीति है। इससे राज्य सरकार के अधिकारियों और कर्मचारियों की कौशल और नेतृत्व क्षमता लगातार बढ़ेगी। राज्य सरकार की यह पहल केन्द्र सरकार की नीति से मेल खाती है। प्रशिक्षित प्रशासन तंत्र से सक्षम उत्तरदायी सुशासन व्यवस्था को साकार किया जा रहा है।  

अब एक बार फिर नया संकट मंडरा रहा, इस बार कोरोना से भी बदतर, एक्सपर्ट की क्या चेतावनी

वाशिंगटन  साल 2020 के आखिर में दुनिया ने पहली बार कोरोना वायरस का प्रकोप झेला। चीन से शुरू हुआ यह वायरस कुछ ही दिनों में पूरी दुनिया में फैल चुका था। सबसे ज्यादा मौतें अमेरिका में हुईं। तब भी अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की सरकार थी। ट्रंप ने चीन के वुहान शहर स्थित खुफिया लैब को इसके पीछे जिम्मेदार ठहराया। ट्रंप कई मौकों पर कोरोना वायरस को चीनी वायरस की संज्ञा दे चुके हैं। अब एक बार फिर नया संकट मंडरा रहा है। चीन मामलों के शीर्ष अमेरिकी विशेषज्ञ गॉर्डन चांग ने चीन को लेकर एक गंभीर चेतावनी जारी की है। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका ने सावधानी नहीं बरती तो वह “कोविड से भी बड़े खतरे” का सामना कर सकता है। यह बयान उस घटना के बाद आया है जिसमें दो चीनी वैज्ञानिकों पर अमेरिका में जहरीले फंगस तस्करी के आरोप लगे हैं। एग्रो-आतंकवाद से जुड़ा मामला 33 वर्षीय यूनकिंग जियान और 34 वर्षीय उनके बॉयफ्रेंड जुनयोंग लियू पर आरोप है कि उन्होंने अमेरिका में ‘Fusarium graminearum’ नामक फंगस की तस्करी की साजिश रची। यह फंगस गेहूं, जौ, मक्का और चावल में “हेड ब्लाइट” नामक बीमारी फैलाता है और एग्रो-आतंकवाद का संभावित हथियार माना जाता है। यह इंसानों और पशुओं में उल्टी, लिवर डैमेज और प्रजनन क्षमता पर गंभीर असर डाल सकता है। एक्सपर्ट की क्या चेतावनी गॉर्डन चांग ने Fox News से बातचीत में कहा, यह फंगस तस्करी “अमेरिका के खिलाफ युद्ध” जैसा है। अगर अमेरिका ने चीन से रिश्ते नहीं तोड़े , तो उसे कोविड, फेंटानिल से भी भयानक हमला झेलना पड़ सकता है। उन्होंने 2020 की उस घटना की भी याद दिलाई, जब चीन से अनचाही बीजों की खेप अमेरिका के सभी 50 राज्यों में भेजी गई थी — जिसे उन्होंने जैविक हमले की कोशिश बताया। चांग ने आगे कहा, “हम चीन से हार सकते हैं, भले ही हम उनसे ताकतवर हों, क्योंकि हम अपनी रक्षा पूरी ताकत और संकल्प से नहीं कर रहे।” चांग का कहना है कि चीन का कम्युनिस्ट शासन अमेरिका को दुश्मन मानकर ‘जनयुद्ध’ की मानसिकता से काम कर रहा है और अमेरिका को अब कड़े कदम उठाने की जरूरत है। गौरतलब है कि गॉर्डन चांग ‘China Is Going to War’ जैसी चर्चित किताबों के लेखक हैं। वे करीब दो दशकों तक चीन और हांगकांग में रहे हैं और अमेरिकी कानूनी फर्मों में वरिष्ठ पदों पर कार्य कर चुके हैं।  

बिलावल भुट्टो के नेतृत्व में अमेरिका पहुंचे इस दल को तीखे सवालों का सामना करना पड़ा, US सांसद ने उठाया डॉ. अफरीदी का मुद्दा

नई दिल्ली  ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत ने सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडलों को विदेश भेजकर अपना पक्ष रखा था। इसकी नकल करते हुए पाकिस्तान ने भी अपने दल को विदेश में भेजा है, लेकिन अब विदेश में इस दल की फजीहत हो रही है। बिलावल भुट्टो के नेतृत्व में अमेरिका पहुंचे इस दल को तीखे सवालों का सामना करना पड़ा। एक अमेरिका सांसद ने पाकिस्तानी डेलीगेशन से लादेन को मारने में अमेरिका की मदद करने वाले डॉक्टर शकील अफरीदी को जेल से रिहा करने के लिए सरकार पर दवाब बनाने के लिए कहा है। वहीं वाशिंगटन में मौजूद शशि थरूर ने भी अमेरिकी सांसद के इस प्रस्ताव का समर्थन किया। सोशल मीडिया पर अपनी बात रखते हुए अमेरिकी सांसद शेरमैन ने कहा, “मैंने पाकिस्तानी डेलीगेशन से आग्रह किया है कि वह अपनी सरकार पर डॉक्टर शकील अफरीदी को रिहा करने का दबाव बनाए। क्योंकि पाकिस्तानी सरकार ने शकील को इस आरोप में जेल में बंद करके रखा है कि उसने संयुक्त राज्य अमेरिका को लादेन का ठिकाना बताया था। डॉक्टर अफरीदी को रिहा करना 9/11 के पीड़ितों को एक बड़ी श्रृद्धांजलि होगी।” अमेरिका सांसद के इस पोस्ट को रिट्वीट करते हुए भारतीय सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने वाले शशि थरूर ने भी पाकिस्तान को जमकर लताड़ लगाई। उन्होंने लिखा, “सांसद शैरमैन ने एक स्वागत योग्य जानकारी याद दिलाई है। पाकिस्तान वह देश है, जिसने न केवल आतंकवादी मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन को छिपा रखा था, बल्कि इस मुद्दे पर अमेरिकियों की मदद करने वाले एक बहादुर डॉक्टर को भी गिरफ्तार किया और उसे अभी तक जेल में डाल रखा है। पाकिस्तान में आपको आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए तो इनाम दिया जाता है लेकिन अगर आप उसके खिलाफ हैं तो आपको सजा दी जाती है।” आपको बता दें कि डॉक्टर शकील अफरीदी एक पाकिस्तानी डॉक्टर हैं, जिन्होंने अलकायदा चीफ कुख्यात ओसामा बिन लादेन की जानकारी अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए को दी थी। इसके बाद अमेरिकी सेना ने खुफिया मिशन चलाकर लादेन को मौत के घाट उतार दिया था।  

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