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एशियन कैनो स्प्रींट एवं पैरा कैनो चैम्पियनशिंप, थाईलैण्ड -2025

एशियन कैनो स्प्रींट एवं पैरा कैनो चैम्पियनशिंप, थाईलैण्ड -2025 अकादमी के खिलाड़ियों ने जीते 3 स्वर्ण, 2 रजत एवं 3 कांस्य सहित कुल 8 पदक मंत्री सारंग ने दी खिलाड़ियों को बधाई भोपाल  थाईलैण्ड के रेयॉन्ग (पट्टाया) में 12 से 15 जून तक आयोजित एशियन कैनो स्प्रींट एवं पैरा कैनो चैम्पियनशिप में अकादमी के खिलाड़ियों ने विभिन्न स्पर्धाओं में 3 स्वर्ण 2 रजत एवं 3 कांस्य सहित कुल 8 पदक अर्जित किये। खेल और युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने सभी पदक विजेता खिलाड़ियों को बधाई दी है। प्रतियोगिता में सबसे ज्यादा 3 स्वर्ण और 1 रजत पदक अर्जित करने वाली प्राची यादव की मंत्री सारंग ने मुक्तकंठ से सराहना करते हुए बधाई दी है। उन्होंने शानदार प्रदर्शन कर पदक अर्जित करने पर सभी खिलाड़ियों की प्रशंसा करते हुए बधाई दी है। एशियन कैनो स्प्रींट स्पर्धा में अकादमी के खिलाड़ी प्रिंस गोस्वामी और सुधीर कुमार की जोड़ी ने सी2-1000 मीटर की जूनियर स्पर्धा में कांस्य पदक अर्जित किया। बालिका वर्ग की सी2-500 मीटर स्पर्धा में अकादमी की खिलाड़ी दीपिका ढ़ीमर ने कांस्य पदक जीता। एशियन पैरा कैनो चैम्पियनशिप में अकादमी की खिलाड़ी प्राची यादव ने महिला वर्ग की केएल2-200 मीटर में स्वर्ण पदक, व्हीएल 2-200 मीटर में स्वर्ण पदक, केएल2-500 मीटर में स्वर्ण पदक एवं व्हीएल2-500 मीटर में रजत पदक अर्जित किये। पैरा कैनो पुरूष वर्ग में मनीष कौरव ने केएल3-200 मीटर स्पर्धा में रजत पदक एवं केएल3-500 मीटर में कांस्य पदक अर्जित किया।  

बिना विलंब शुल्क के ईग्नू में ऑनलाइन मोड में प्रवेश का सुनहरा मौका, अंतिम तिथि 15 जुलाई

रायपुर इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय, (इग्नू) नई दिल्ली द्वारा जुलाई 2025 के लिए ऑनलाइन मोड में प्रवेश के लिए नामांकन बिना विलंब शुल्क के साथ अंतिम तिथि 15 जुलाई 2025 है। नामांकन के लिए स्नातक-स्नातकोत्तर व पी.जी. डिप्लोमा सर्टिफिकेट कार्यक्रम एवं अवेयरनेस प्रोग्राम भी उपलब्ध है जिसके लिए निर्देशन वेबसाइट पर उपलब्ध है। इच्छुक शिक्षार्थी अध्ययन केंद्र में उपलब्धता के आधार पर विषय का चुनाव कर सकते हैं। विस्तृत जानकारी के लिए अध्ययन केंद्र-1509 शासकीय काकतीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, जगदलपुर से संपर्क कर सकते हैं। शिक्षार्थियों को मुद्रित सामाग्री न लेने पर कार्यक्रम शुल्क में 15 प्रतिशत की छूट दी गई है जो ऑनलाइन सामग्री के आधार पर पढ़ाई कर सकेंगे। अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति वर्ग के छात्रों के लिए बीए, बीकॉम और बीएससी (सभी सामान्य) में निःशुल्क नामांकन का प्रावधान है। इच्छुक आवेदक ऑनलाइन मोड में नए प्रवेश के लिए पोर्टल पर जा कर इग्नू के लिंक https://ignouadmission.samarth.edu.in/ पद पर प्रवेश के लिए नामांकन 15 जुलाई 2025 तक कर सकते हैं।

कभी सोचा नहीं था कि मेरी दुकान में चाय पीने.. आयेंगे मुख्यमंत्री

जबलपुर  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जबलपुर के बेलखेड़ा में सोमवार को राज्य स्तरीय लाड़ली बहना एवं महिला सम्मेलन में शामिल होने के बाद सड़क मार्ग से डुमना विमानतल के रास्ते में काफिला रूकवाकर अंध-मूक चौराहा स्थित शंकर चाट भंडार के स्टॉल पर चाय का आनंद लिया। इस अवसर पर सांसद आशीष दुबे, विधायक अशोक रोहाणी, जिला अध्यक्ष राजकुमार पटेल, नगर अध्यक्ष रत्नेश सोनकर एवं अखिलेश जैन भी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने दुकानदार ब्रजेश लोधी से कुशलक्षेम पूछीं और उनके परिवार और व्यवसाय के बारे में जानकारी ली। मुख्यमंत्री को अकस्मात् अपनी दुकान में पाकर ब्रजेश प्रफुल्लित हो उठे, उन्हें यकीन ही नहीं हो रहा था कि उसकी छोटी सी दुकान में स्वयं मुख्यमंत्री चाय पीने आए हैं। ब्रजेश ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव उसके जैसे छोटे दुकानदार से भी बड़ी ही आत्मीयता से मिले। ब्रजेश ने कहा कि मुख्यमंत्री से मिलकर बहुत खुशी हुई, हमारे मुख्यमंत्री बड़े सहज और सरल स्वभाव के हैं।।  

कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में 18 जून को बीजेपी विधायक दल की बैठक

रायपुर  भारतीय जनता पार्टी विधायक दल की एक महत्वपूर्ण बैठक आगामी 18 जून 2025 को दोपहर 12 बजे रायपुर स्थित कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में आयोजित की जाएगी। बैठक को लेकर सभी विधायकों को सूचना जारी कर अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है। इस बैठक में भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेता मौजूद रहेंगे। इनमें अखिल भारतीय सह संगठन मंत्री शिव प्रकाश, प्रदेश प्रभारी नितिन नबीन, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, प्रदेश अध्यक्ष किरण देव, क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल और प्रांत संगठन मंत्री पवन साय शामिल हैं। इस बैठक में आगामी मानसून सत्र की तैयारियों को लेकर भी चर्चा की जा सकती है। इसके साथ ही विधायकों के क्षेत्र में हो रहे कार्यों की समीक्षा की जा सकती है।

योगी सरकार में हुईं 218262 पदों पर सीधी भर्ती

लखनऊ  प्रदेश में सिपाही नागरिक पुलिस के 60244 पदों पर सीधी भर्ती ने सपा सरकार में हुई भर्तियों को पीछे छोड़ दिया। दरअसल, सपा सरकार के पांच वर्ष के कार्यकाल में 49965 पदों पर भर्तियां हुई थीं, जबकि भाजपा सरकार के आठ वर्ष में यह आंकड़ा 218262 तक पहुंच चुका है। इनमें 35247 महिलाएं हैं। यही नहीं सिपाही, उपनिरीक्षक और समकक्ष के 24 हजार पदों पर भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू होने वाली है। सपा सरकार के दौरान प्रदेश पुलिस में 49965 भर्तियों में 5262 अदालत के आदेश पर करनी पड़ी थीं। सीधी भर्ती के तहत 38315 सिपाही चुने गए थे। इसके अलावा 3784 उपनिरीक्षक, सात प्रोग्रामर, 2256 कंप्यूटर ऑपरेटर और 341 सिपाही के पदों पर मृतक आश्रित भर्ती हुए थे। भाजपा सरकार में 153811 सिपाही नागरिक पुलिस और पीएसी में भर्ती किए गए हैं। इसके अलावा 9534 उपनिरीक्षक और लेखा संवर्ग के 1329 उपनिरीक्षक, सहायक उपनिरीक्षक के पदों पर सीधी की गई है। पुलिस के अन्य संवर्गों में भी रिक्त पदों को तेजी से भरा गया है। अधूरा काम आगे बढ़ाया भाजपा सरकार ने पिछली बसपा और सपा सरकार में अटकी भर्ती प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई। वर्ष 2011 में उपनिरीक्षक, प्लाटून कमांडर व समकक्ष के 1003 पदों पर भर्ती के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अनुपालन कराया। हाईकोर्ट के आदेश पर वर्ष 2013 में सिपाही नागरिक पुलिस के 4098, सिपाही पीएसी के 615 और फायरमैन के 785 पदों पर भर्ती की गई। सिपाही नागरिक पुलिस व समकक्ष पदों पर सीधी भर्ती की परीक्षा का परिणाम घोषित कर 34716 और उपनिरीक्षक भर्ती 2016 के 2486 पदों पर भर्ती की। खिलाड़ी कोटे में भर्ती शुरू खिलाड़ी कोटे के तहत 491 सिपाहियों की भर्ती की गई है। इनमें 313 पुरुष और 178 महिलाएं हैं। मृतक आश्रित कोटे में उपनिरीक्षक से लेकर आरक्षी के पद पर कुल 3794 भर्तियां हुई हैं। इसके अलावा 5805 जेल वार्डर व घुड़सवार पुलिस की भर्ती की गई है।    

कुछ मिनटों में समझ सकेंगे गंभीर बीमारियों की जड़, कम टाइम में होंगे ऑपरेशन, एक बूंद खून से चुटकियों में पता चलेगी जानलेवा बिमारी

भोपाल जब शरीर में संक्रमण का स्तर बहुत ज्यादा हो जाता है, तो मरीज का इम्यून सिस्टम बहुत कमजोर हो जाता है. जब शरीर के सभी अंग प्रभावित होते हैं. तो मरीज की मौत भी हो सकती है. रोग की इसी स्थिति को सेप्सिस कहा जाता है. हालांकि इस दुर्लभ बीमारी सेप्सिस के दौरान मरीज के शरीर में स्थित संक्रमण का जल्द से जल्द पता लगाने की जरुरत होती है. जिससे मरीज की जान बचाई जा सके, लेकिन अब तक कोई ऐसी तकनीकी नहीं थी, जिससे 15 से 20 मिनट में संक्रमण का पता लगाया जा सके. जिससे इस बीमारी से पीड़ित अधिकतर मरीजों की मृत्यु हो जाती है. पहले टेस्ट रिपोर्ट आने में 3 दिन का लगता था समय बता दें कि ऑटोप्सी के दौरान पहले कल्चर रिपोर्ट आने में 3 से 4 दिन का समय लगता था, लेकिन अब प्रोकैल्सिटोनिन टेस्ट से 15 से 20 मिनट में डॉक्टर मरीज के शरीर में संक्रमण का पता लगा सकेंगे. इस शोध को अमेरिका के बाल्टीमोर में हाल में ही आयोजित 77वें अमेरिकन एकेडमी ऑफ फॉरेंसिक साइंसेज सम्मेलन में प्रस्तुत किया गया. इस शोध के जरिए जो टूल बनाया गया है, उससे मरीज के शरीर में संक्रमण के स्तर का पता बहुत ही कम समय में लगाया जा सकता है. एम्स भोपाल में पारिसिक मेडिसिन और टॉक्सिकोलॉजी विभाग की हेड डॉ. अरनीत अरोरा ने बताया कि “पॉइंट ऑफ केयर टूल मरीजों के इलाज में भी क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है. इस शोध में ऑटोप्सी के दौरान सेप्सिस का पता लगाने के लिए प्रोकैल्सिटोनिन (पीसीटी) बायोमार्कर का उपयोग किया गया है. यह टूल 15 से 30 मिनट में बता देता है संक्रमण बता दें कि यह टूल एक सरल विधि पर कार्य करता है, इसके लिए पोस्टमार्टम के दौरान मृतक के शरीर से केवल एक बूंद खून और अंग का नमूना लिया जाता है. प्रोकैल्सिटोनिन टेस्ट के जरिए 10 से 15 मिनट में परिणाम मिल जाते हैं. इसकी ग्रेडिंग होती है. जो 05 से 50 के पार तक होती है. यदि अंक 10 से ऊपर हैं, तो यह संकेत देता है कि मृतक के शरीर में संक्रमण का स्तर बहुत अधिक था. यह टेस्ट मरीज के जीवित रहते भी किया जा सकता है, जैसे कल्बर टेस्ट. यह 15 से 30 मिनट में बता देता है कि शरीर में संक्रमण किस स्तर तक फैल चुका है, इससे पहले कल्बर टेस्ट (जिसकी रिपोर्ट दिन में आती है) पर ही निर्भर रहना पड़ता था. भारत में अभी केवल एम्स भोपाल में हुआ शोध दरअसल, कल्चर टेस्ट की रिपोर्ट में 3 दिन लगते थे, जिससे इलाज में देरी होती थी. बॉयोकेमिस्ट्री की मशीनों से प्रोकैल्सिटोनिन टेस्ट में 3 घंटे लगते थे, जो ऑटोप्सी के लिए उपयुक्त नहीं था. भारत में अभी यह शोध केवल एम्स भोपाल में हुआ है. विदेशों में जर्मनी और फ्रांस जैसे कुछ देशों में ही सीमित संस्थान इसका उपयोग करते हैं. देश में ऐसी तकनीक अभी व्यापक रूप से उपलब्ध नहीं है. बैक्टीरिया, वायरस के संक्रमण से शुरू होता है सेप्सिस यह टूल मरीजों को तुरंत सही इलाज दिलाने में मदद करेगा. सेप्सिस की जल्द पहचान से जान बचाने की संभावना बढ़ेगी. अस्पताल में भर्ती मरीजों का समय पर यह टेस्ट हो गया तो, संक्रमण के स्तर का पता लगाकर जरूरी दवाएं समय पर देकर उसकी जान बचाई जा सकती है. सेप्सिस एक जानलेवा स्थिति है, जो शरीर में बैक्टीरिया, वायरस या फंगस के कारण होने वाले गंभीर संक्रमण से शुरू होती है. यह तब होता है, जब शरीर का इम्यून सिस्टम संक्रमण से लड़ते हुए खुद के ऊतकों और अंगों को नुकसान पहुंचाने लगता है. यह आमतौर पर फेफड़े, मूत्र मार्ग या पेट के रास्ते से शुरू हो सकता है. यदि समय पर इलाज न हो तो यह मल्टी-ऑर्गन फेलियर होने से मौत का कारण बन सकता है. अभी 1000 से 1300 रुपये में होती हैं जांच एम्स भोपाल के डायरेक्टर प्रो. अजय सिंह ने बताया कि “अभी तक डॉक्टरों को यह पता नहीं चल पाता था कि मरीज में संक्रमण कितना गंभीर है. प्रोकैल्सिटोनिन टेस्ट से नंबर के आधार पर तुरंत स्थिति स्पष्ट हो जाती है, जिससे सही समय पर सटीक इलाज शुरू हो सकता है. यह चिकित्सा क्षेत्र में तेज और प्रभावी निदान को दिशा में इनोवेशन ला सकता है. अभी तक 100 केस पर टेस्ट किए गए हैं, 300 और केस के बाद निष्कर्ष निकाले जाएंगे. यह टूल सेप्सिस की त्वरित पहचान कर इलाज को आसान बनाएगा. इसकी लागत करीब 1000 रुपए से 1300 तक प्रति टेस्ट है.”

‘अगर मां कमाती भी हो, बच्चे ही परवरिश के लिए पैसे देना पिता की ही जिम्मेदारी’, हाईकोर्ट का अहम फैसला

नई दिल्ली  दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई करते हुए महिलाओं और बच्चों के हक में एक बड़ा फैसला सुनाया है। इसके तहत दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि मां ज्यादा कमाती है तो क्या हुआ, बच्चे की देखभाल की पूरी जिम्मेदारी पिता पर होगी। पिता को पूरा खर्च देना होगा। दरअसल, एक तलाकशुदा व्यक्ति ने अदालत से गुहार लगाई थी कि उसकी पूर्व पत्नी हर महीने 75 से 80 हजार रुपये प्रति माह कमाती है, इसलिए अपने दो बच्चों की परवरिश का वित्तीय बोझ बराबर-बराबर बांटना चाहिए। पिता की मांग को हाईकोर्ट ने सिरे से खारिज कर दिया। फिर दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनाया अहम फैसला दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि भले ही पूर्व पत्नी नौकरीपेशा हो और प्रति माह 75 से 80 हजार रुपये कमाती हो लेकिन दो बच्चों के भरण-पोषण की पूरी वित्तीय जिम्मेदारी पिता पर होनी चाहिए, जो लगभग 1.75 लाख रुपये प्रति माह कमाता है। हाईकोर्ट ने केवल आय के आधार पर खर्च को 50:50 विभाजित करने की पिता की मांग को खारिज कर दिया। न्यायालय ने दोहराया कि भरण-पोषण में न केवल बुनियादी जरूरतें शामिल होनी चाहिए, बल्कि शिक्षा, सह-पाठयक्रम गतिविधियां और बच्चे की गरिमा बनाए रखना भी शामिल होना चाहिए। न्यायालय ने कहा कि बच्चे का भरण-पोषण मुख्य रूप से गैर-संरक्षक माता-पिता का कर्तव्य है, खासकर अगर वह माता-पिता आर्थिक रूप से मजबूत हो। मां दोहरी भूमिका निभाती है: हाईकोर्टन्यायालय ने मां की दोहरी भूमिका को व्यापक रूप से स्वीकार किया। एक कार्यरत पेशेवर और एकमात्र देखभालकर्ता के रूप में, वह भावनात्मक और तार्किक बोझ उठाती है जो उसे वित्तीय दायित्व से बचाने के लिए काफी है। उच्च न्यायालय ने कहा कि पत्नी को दो काम करने पड़ते हैं, एक कार्यालय के लिए और दूसरा कार्यालय के बाद बच्चे की देखभाल के लिए। इसे मौद्रिक शब्दों में नहीं आंका जा सकता।  

FATF ने पाकिस्तान को फिर से ग्रे लिस्ट में नहीं डाला, भारत की कोशिश हुई नाकाम !

इस्लामाबाद  मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फाइनेंसिंग पर नजर रखने वाली संस्था वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (FATF) ने पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में नहीं डाला है। इस फैसले पर पाकिस्तान में जश्न का माहौल है। पाकिस्तान का दावा है कि एफएटीएफ ने उसे ग्रे लिस्ट में डालने के भारत के प्रयासों को नजरअंदाज किया है। ऐसे में पाकिस्तान इसे खुद की जीत के तौर पर प्रस्तुत कर रहा है। पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने तो सार्वजनिक तौर पर इसे पाकिस्तान की जीत और भारत की हाल के रूप में प्रस्तुत किया है। पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान में तनाव बढ़ गया है। मई के शुरुआती हफ्तों में दोनों देशों के बीच सीमित संघर्ष भी देखने को मिला था। पाकिस्तान ने क्या दावा किया था पाकिस्तान ने दावा किया है कि भारत ने जून में हुए एफएटीएफ की बैठक के दौरान पाकिस्तान को फिर से अपनी ग्रे लिस्ट में डालने के लिए काफी दबाव डाला था। FATF की ग्रे लिस्ट में किसी देश को तब तक निगरानी में रखा जाता है, जब तक कि वह अपनी वित्तीय प्रणाली में पहचानी गई खामियों को ठीक नहीं कर लेता। पाकिस्तान को 2022 में FATF की ग्रे लिस्ट से हटा दिया गया था। हालांकि, इसके बावजूद पाकिस्तान ने कोई सुधार नहीं किया है और आतंकवादियों को न सिर्फ सुरक्षित पनाहगाह उपलब्ध करा रहा है,बल्कि टेरर फाइनेंसिंग जैसे आपराधिक कामों में भी शामिल है। रेडियो पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ उगला जहर पाकिस्तान के सरकारी प्रसारक रेडियो पाकिस्तान ने शनिवार को बताया, “वित्तीय कार्रवाई कार्य बल ने शनिवार को हुई अपनी बैठक में पाकिस्तान को ग्रे सूची में नहीं डालने का फैसला किया है।” उसने आगे यह भी कहा, “एफएटीएफ के फैसले के बाद, भारत अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने में पूरी तरह विफल रहा है, क्योंकि भारतीय राजनयिक प्रतिनिधिमंडल ने एफएटीएफ की बैठक में पाकिस्तान को एक बार फिर ग्रे सूची में शामिल कराने के लिए पुरजोर प्रयास किया।” भारत और एफएटीएफ ने नहीं दी प्रतिक्रिया एफएटीएफ या भारत सरकार ने अभी तक इस घटनाक्रम पर कोई टिप्पणी नहीं की है। यह निगरानी संस्था आमतौर पर प्रत्येक वर्ष अक्टूबर, फरवरी और जून में अपनी पूर्ण बैठकें आयोजित करती है। रेडियो पाकिस्तान ने बताया कि चीन ने एफएटीएफ की बैठक में इस्लामाबाद के पक्ष में “स्पष्ट रुख” अपनाया, जबकि तुर्की और जापान ने भी पाकिस्तान को ग्रे सूची में नहीं डालने के लिए “पूरी तरह से समर्थन” दिया। सरकारी प्रसारक ने इसे पाकिस्तान के राजनयिक मिशन की जीत बताते हुए कहा, “भारत इजरायल की मदद से पाकिस्तान के खिलाफ एफएटीएफ का इस्तेमाल करने की पूरी कोशिश कर रहा था।” ख्वाजा आसिफ ने बताया पाकिस्तान की जीत पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि भारत और इजरायल के ठोस प्रयासों के बावजूद वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (एफएटीएफ) द्वारा पाकिस्तान को फिर से अपनी “ग्रे लिस्ट” में न डालने का फैसला एक बड़ी जीत है। रविवार को एक्स पर एक पोस्ट में, आसिफ ने कहा कि एफएटीएफ ने एक दिन पहले अपने अंतर्राष्ट्रीय सहयोग समीक्षा समूह की बैठक के बाद पाकिस्तान को फिर से सूचीबद्ध न करने का फैसला किया है। उन्होंने लिखा, “यह पाकिस्तान के लिए एक बड़ी जीत है कि भारत और इजरायल की तमाम साजिशों के बावजूद पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में शामिल नहीं किया गया है।” उन्होंने इस फैसले का श्रेय प्रमुख सहयोगियों के मजबूत समर्थन को दिया। आसिफ ने कहा, “चीन ने स्पष्ट रुख अपनाया और पाकिस्तान को राहत देने का समर्थन किया, जबकि तुर्की ने चीन के रुख का समर्थन किया।” “जापान ने भी पाकिस्तान का पूरा समर्थन किया क्योंकि वह एशिया प्रशांत समूह (एपीजी) का सह-अध्यक्ष है।”

गर्मी में कूनो नेशनल पार्क में चीता शावकों के लिए एक नई जीवन रेखा मिली, लगाया सौर ऊर्जा से चलने वाला वाटर लिफ्ट सिस्टम

श्योपुर  इस गर्मी में कूनो नेशनल पार्क में चीता शावकों के लिए एक नई जीवन रेखा मिली है। यह है सौर ऊर्जा से चलने वाला वाटर लिफ्ट सिस्टम। इसने उन्हें भीषण गर्मी और कठोर परिस्थितियों से बचने में मदद की है। जून में उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चला गया था। इससे पानी के स्रोतों पर बहुत दबाव पड़ा। मई 2023 में, नामीबियाई चीता ज्वाला के तीन शावकों की अत्यधिक गर्मी के कारण राष्ट्रीय उद्यान, मध्य प्रदेश में मौत हो गई थी। उस अनुभव से सीख लेकर, अधिकारियों ने एक सौर ऊर्जा से चलने वाला सिस्टम लगाया है। यह सिस्टम कूनो नदी से पानी पंप करता है और इसे 8.6 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन के माध्यम से पार्क के अंदर 15 से अधिक स्थानों पर स्प्रिंकलर और पानी की तश्तरियों तक पहुंचाता है। कूनो नदी से पानी निकालकर जंगल में ला रहे अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक और चीता परियोजना निदेशक, उत्तम कुमार शर्मा ने X पर एक वीडियो पोस्ट किया। उन्होंने कहा कि कूनो नदी से पानी निकालकर, इसे किलोमीटर दूर ले जाकर, स्प्रिंकलर का उपयोग करके हरे-भरे स्थान बनाना, और पानी की उपलब्धता में सुधार करना, खासकर मां और नवजात शावकों के लिए, एक नियोजित तरीके से, काफी सफल रहा है। उन्होंने आगे कहा कि पानी का महत्व केवल इसकी अनुपस्थिति में महसूस होता है और यह कूनो में गर्मी के मौसम में सबसे ज्यादा महसूस होता है… ‘लू’ नामक गर्म हवाओं और 48 डिग्री सेल्सियस के आसपास के तापमान में, वन्यजीवों, विशेष रूप से युवाओं के लिए जीवन बहुत कठिन हो जाता है। 17 शावक हैं जीवित 2022-23 में, 20 अफ्रीकी चीतों को कूनो लाया गया था। तब से, भारत में 26 शावक पैदा हुए हैं। इनमें से 17 जीवित बचे हैं। दक्षिण अफ्रीकी चीता वीरा ने फरवरी 2025 में दो शावकों को जन्म दिया। एक अन्य दक्षिण अफ्रीकी चीता, निर्वा ने अप्रैल में पांच शावकों को जन्म दिया। निर्वा के दो शावकों की मौत हो गई, लेकिन अधिकारियों ने कहा कि बाकी ठीक हैं। उन्होंने कहा कि शावक पहली बार ऐसी कठोर परिस्थितियों का सामना कर रहे थे। मां और उनके बच्चे दोनों नियमित रूप से पानी के बिंदुओं का उपयोग कर रहे थे, जो इस पहल की सफलता का संकेत है। शावकों को गर्मी से राहत पहले, गर्मी के कारण शावकों की मौत हो जाती थी। इसलिए, इस बार अधिकारियों ने पहले से ही तैयारी कर ली थी। उन्होंने कूनो नदी से पानी निकालने के लिए सोलर पंप लगाए। फिर पाइपलाइन से पानी को जंगल में अलग-अलग जगहों पर पहुंचाया गया। इससे शावकों और उनकी मां को गर्मी से राहत मिली। उत्तम कुमार शर्मा ने कहा कि पानी की कमी होने पर ही इसका महत्व पता चलता है। कूनो में गर्मी के मौसम में यह बात सच साबित होती है। लू चलने और तापमान 48 डिग्री तक पहुंचने पर जानवरों के लिए जीना मुश्किल हो जाता है। खासकर छोटे शावकों के लिए। अधिकारियों ने बताया कि वीरा और निर्वा के शावक पहली बार इतनी गर्मी देख रहे हैं। लेकिन वे पानी के लिए बनाए गए पॉइंट्स पर जा रहे हैं। इससे पता चलता है कि यह योजना सफल हो रही है।

छिंदवाड़ा से सिवनी तक फोरलेन के लिए मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति के साथ प्रयासों की आवश्कता, किसान और उद्योगों को मिलेगा बढ़ावा

छिंदवाड़ा नेशनल हाइवे 347 को छिंदवाड़ा से सिवनी तक फोरलेन में तब्दील करने के लिए मांग उठने लगी है. एनएचएआई (National Highways Authority of India) के तय मानकों के अनुकूल टू लेन हाइवे को फोरलेन में अपग्रेड करने के लिए सभी खूबियां मौजूद हैं. सबसे ज्यादा जरूरी ट्रैफिक की स्थिति होती है. यहां पीसीयू (पैसेंजर कार यूनिट) का 10 हजार से अधिक का आंकलन किया गया है. एनएचएआई के मानकों के अनुकूल 10 हजार पीसीयू में फोरलेन का निर्माण किया जा सकता है. छिंदवाड़ा से सावनेर तक फोरलेन बनाने का गडकरी ने किया था वादा छिंदवाड़ा से सावनेर तक एनएच 547 को फोरलेन में तब्दील करने की मांग स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने जताई है. सौंसर के बजाज तिराहे से राजना जोड़ तक फोरलेन की मांग पर केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी पूर्व में आश्वासन दे चुके हैं. छिंदवाड़ा से सिवनी तक फोरलेन के लिए मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति के साथ प्रयासों की आवश्कता है. अभी छिंदवाड़ा-सिवनी 2 लेन हाइवे की ये स्थिति छिंदवाड़ा से सिवनी तक टू लेन हाइवे की लंबाई 70 किलोमीटर है. चौड़ाई 24 से 36 मीटर तक है. फोरलेन में 45 से 60 मीटर तक चौड़ाई की आवश्कता होगी. छिंदवाड़ा से सिवनी के बीच सिर्फ दो नदियां पड़ती हैं. पहली झिलमिली के पास पेंच नदी पर बड़ा पुल बना हुआ है. दूसरी लखनवाड़ा में बैनगंगा नदी, जहां नए सिरे से पुल निर्माण की आवश्कता होगी. किसान और उद्योगों को मिलेगा बढ़ावा चौरई विधायक सुजीत सिंह चौधरी ने बताया कि, ”जिला महानगरों की तर्ज पर विकसित हो रहा है. यहां वेस्टर्न कोल फील्ड्स की कोयला खदानें पहले से संचालित हैं. बड़ी औद्योगिक इकाइयां भी जिले में स्थापित हैं. कृषि आधारित उद्योग भी छिंदवाड़ा-पांढुर्ना में स्थापित किए जाने हैं. ढाई हजार करोड़ की पेंच व्यपवर्तन सिंचाई परियोजना लगभग पूरी हो गई है. कन्हान नदी पर 4 हजार करोड़ लागत वाले छिंदवाड़ा सिंचाई कॉम्प्लेक्स पर काम जारी है. फोरलेन बनने से इनको बढ़ावा मिलेगा.” सिवनी मंडी में सब्जी बेच सकेंगे किसान इस नेशनल हाईवे के बन जाने से किसानों को भी फायदा पहुंचेगा. क्योंकि छिंदवाड़ा जिले में सबसे ज्यादा सब्जी उत्पादक किसान हैं, जो सिवनी सब्जी मंडी से जुड़ जाएंगे. क्योंकि सिवनी की सब्जी मंडी में महाराष्ट्र के गोंदिया और छत्तीसगढ़ के रायपुर से व्यापारी पहुंचते हैं, ताकि किसानों को अपनी सब्जियों के अच्छे दाम मिल जाते हैं. इस नेशनल हाईवे के बन जाने से छिंदवाड़ा का किसान भी सिवनी सब्जी मंडी में अपनी फसल लेकर जा सकता है. हाइवे पर हादसों को रोकने में मिलेगी मदद यातायात विभाग द्वारा दिए गए आंकड़ों के अनुसार, टू लेन हाइवे को फोरलेन में बदलकर सड़क दुर्घटनाओं को भी कम किया जा सकेगा. जिले में हाइवे पर हादसों के आंकड़ों पर गौर करें तो वर्ष 2024 में 550 से ज्यादा दुर्घटनाएं हुई थीं, जिसमें 200 से ज्यादा जाने गई थीं. वहीं, इस साल जनवरी से 31 मई तक कुल 556 हादसे हुए हैं. जिनमें 718 घायल हुए, जबकि 218 की जान गई. इनमें अधिकांश हादसे हाईवे पर ही हुए. फोरलेन बनाने के लिए जरूरी मापदंड पूरे करता है हाईवे सबसे जरूरी पैसेंजर कार यूनिट 10 हजार से ज्यादा है, जो फोरलेन के लिए तय मानकों के अनुसार है. पहाड़ी या घाटी वाला क्षेत्र नहीं है, फॉरेस्ट भी बहुत कम मात्रा में है. मैदानी या समतल हिस्सा ज्यादा है. छिंदवाड़ा से सिवनी के बीच रोड अलाइ‌मेट के बदलने की आवश्यकता नहीं है. टू लेन को आसानी से फोरलेन में तब्दील किया जा सकता है. मेजर रोड कनेक्टिविटी भी पर्याप्त है. हाईवे नागपुर और जबलपुर से जुड़ेगा, सिवनी से बालाघाट के लिए भी आसानी होगी. बंडोल से चौरई व चौरई से रेमंड चौक तक स्टेट हाइवे कनेक्ट है. चौरई में बायपास पहले ही बना हुआ है. 70 किमी के हाइवे पर दूसरी बड़ी बसाहटें नहीं है. तीन बसाहटों ईसरा उमरिया, झिलमिली और लखनवाड़ा में पहले ही फोरलेन के अनुसार चौड़ी सड़क बनी हुई है.

साल रक्षाबंधन कब है, कितनी देर रहेगा भद्रा का अशुभ साया? जान लें राखी बांधने का शुभ मुहूर्त

सावन महीने की पूर्णिमा के दिन रक्षाबंधन पर्व मनाया जाता है. रक्षाबंधन पर्व का इंतजार भाई-बहनों को बेसब्री से रहता है. इस दिन बहनें अपने भाईयों की कलाई पर राखी बांधकर उनकी लंबी उम्र और सुखी-समृद्ध जीवन की कामना करती हैं. राखी को रक्षासूत्र भी कहा जाता है. धर्म-शास्‍त्रों में कहा गया है कि राखी हमेशा शुभ मुहूर्त में बांधनी चाहिए. कम से कम भद्रा काल में तो राखी बांधना वर्जित बताया गया है. ऐसा करने से भाई-बहन दोनों के जीवन पर संकट आ सकता है. जानिए इस साल रक्षाबंधन कब है, इस दिन भद्राकाल कब रहेगा और राखी बांधने के लिए शुभ मुहूर्त क्‍या होगा?  रक्षाबंधन 2025 की तारीख  हिंदू पंचांग के अनुसार, सावन पूर्णिमा तिथि 8 अगस्त 2025 को दोपहर 2 बजकर 12 मिनट से शुरू होगी और 9 अगस्त को दोपहर 1 बजकर 24 मिनट पर समाप्त होगी. उदयातिथि के आधार पर रक्षाबंधन 9 अगस्त, शनिवार को मनाया जाएगा.  रक्षाबंधन के दिन भद्रा काल  हिंदू धर्म में भद्रा काल को अशुभ समय माना गया है. इस दौरान कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है. भद्रा काल में राखी बांधना रक्षाबंधन मनाना वर्जित है. साल 2025 में रक्षाबंधन को लेकर बात करें तो इस साल रक्षाबंधन के दिन भद्रा का साया ना के बराबर रहेगा. इस कारण पूरे दिन भाई-बहन रक्षाबंधन पर्व मना सकेंगे. दरअसल, 9 अगस्‍त को रक्षाबंधन के दिन भद्रा काल सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो जाएगा, जिससे पूरे दिन रक्षाबंधन पर्व मनाने में कोई समस्‍या नहीं होगी.  राखी बांधने का शुभ मुहूर्त  इस साल रक्षाबंधन पर कई शुभ योग बन रहे हैं, जिससे यह दिन और भी खास हो गया है. 9 अगस्‍त को रक्षाबंधन के दिन सौभाग्य योग, शोभन योग, और सर्वार्थ सिद्धि योग जैसे शुभ योग बन रहे हैं. इन शुभ योगों में रक्षाबंधन मनाना भाई और बहन दोनों के लिए सुख-समृद्धिदायक रहेगा. रक्षाबंधन के दिन राखी बांधने के लिए शुभ मुहूर्त सुबह सूर्योदय से दोपहर 1 बजकर 24 मिनट तक है.  

सर्पदंश की घटनाओं के नियंत्रण के लिए जिलों के कलेक्टर को आवश्यक तैयारी एवं जन जागरूकता सुनिश्चित करने के लिये निर्देश जारी

भोपाल राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण गृह विभाग ने वर्षाकाल के दृष्टिगत सर्पदंश की घटनाओं के नियंत्रण एवं बेहतर प्रबंधन के लिए सभी जिलों के कलेक्टर को आवश्यक तैयारी एवं जन जागरूकता सुनिश्चित करने के लिये निर्देश जारी किये हैं। सर्प-दंश स्थानीय आपदा घोषित है, इसके प्रभावी प्रबंधन के लिए हर ज़िले के लिए 23.17 लाख रुपए की राशि स्वीकृत की गई है। इस राशि का उपयोग प्रशिक्षण, जन-जागरूकता, मॉक ड्रिल, उपकरण की व्यवस्था और प्रचार-प्रसार जैसे कार्यों में किया जाएगा। वर्षाकाल में सर्पदंश की संवेदनशीलता वर्षा ऋतु में सांपों के प्राकृतिक आवासों में जलभराव हो जाने से वे मानव बस्तियों की ओर आ जाते हैं, जिससे सर्प-दंश की घटनाएं बढ़ जाती हैं। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों, खेतों, नदी किनारे एवं बस्तियों की परिधियों में यह खतरा अधिक होता है। उक्त के प्रति लोगों में जागरूकता लाना, तथा प्रशासनिक सतर्कता बढ़ाना अति आवश्यक है। सभी जिलों को निर्देशित किया गया है कि वे पंचायत एवं शहरी वार्ड स्तर पर जागरूकता अभियान संचालित करें। स्कूलों, आंगनबाड़ियों और सामुदायिक स्थलों पर जागरूकता सत्र आयोजित हों। सोशल मीडिया, रेडियो, दीवार लेखन, बैनर-पोस्टर एवं लोक-प्रदर्शन (नुक्कड़ नाटक आदि) के माध्यम से सूचना का व्यापक प्रसार किया जाए। निर्देशों में कहा गया है कि सर्पदंश के प्रति संवेदनशील इलाकों में स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षित कर ‘सर्प मित्र’, सिविल डिफेंस वालंटियर्स एवं स्नेक-कैचर्स की टीम बनाई जाए। स्नेक-कैचर्स का डाटाबेस करें तैयार, हेल्पलाइन नंबर करें जारी शासन द्वारा यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि सभी जिलों में ‘स्नेक-कैचर्स’ और ‘सर्प मित्रों’ का विस्तृत डाटाबेस तैयार कर, उन्हें पंचायत/वार्ड स्तर पर नियुक्त किया जाए। सर्प मित्रों के हेल्पलाइन नंबर जारी कर व्यापक प्रचार भी किया जाए। इन मित्रों को स्नेक रेस्क्यू किट, फर्स्ट एड किट एवं आवश्यक प्रशिक्षण प्रदान किया जाए, जिससे वे सर्पदंश की स्थिति में त्वरित और सुरक्षित बचाव कार्य कर सकें। अस्पतालों में एंटी-वेनम व उपचार की समुचित व्यवस्था के निर्देश शासकीय चिकित्सा संस्थानों में सर्पदंश के उपचार के लिए आवश्यक दवाइयाँ, उपकरण और पर्याप्त मात्रा में एंटी-वेनम स्टॉक सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों एवं जिला अस्पतालों में नागरिकों को प्राथमिक उपचार, चेतावनी संकेत, तथा सर्पदंश से संबंधित संपूर्ण प्रक्रिया की जानकारी देने वाले सूचना बोर्ड प्रदर्शित करने के लिए कहा गया है। आपदा प्रबंधन योजना में सर्प-दंश को शामिल कर बनायें योजना जिलों को निर्देशित किया गया है कि वे जिला आपदा प्रबंधन योजना में सर्प-दंश को स्थानीय आपदा के रूप में शामिल करें। इसके तहत पूर्व वर्षों की घटनाओं का जोखिम मूल्यांकन, प्रभाव क्षेत्र और प्रभावित वर्गों की पहचान कर एसओपी तैयार किया जाए। जीआईएस आधारित मैपिंग करते हुए डिजिटल डाटाबेस बनाया जाए, जिसमें घटनाओं की संख्या, स्थान, सांप की प्रजाति, एवं मृत्यु/रोगी की जानकारी सहेजी जाए। सर्पदंश से बचाव के लिए सावधानियाँ एवं सलाह जन सामान्य को सलाह दी गई है कि वे वर्षा ऋतु में विशेष सतर्कता बरतें। खेतों में कार्य करते समय जूते-मोज़े पहनें, गहरे रंग के कपड़े पहनें और हाथों में दस्ताने लगाएं। झाड़ियों, पुआल के ढेर, लकड़ी के गट्ठर आदि स्थानों में काम करने से पहले वहां डंडे या लाठी से हल्का प्रहार करें। अंधेरे में टॉर्च का उपयोग करें और बच्चों को बिना देखरेख खुले स्थानों पर न भेजें। घर के आसपास साफ-सफाई रखें, झाड़ियाँ काटें और कूड़ा-कचरा हटाएं। घरों की दीवारों में मौजूद दरारें बंद करें और खुले में सोने से परहेज़ करें। यदि किसी को सर्प ने डस लिया हो तो घबराएं नहीं, शरीर को शांत रखें और तुरंत नज़दीकी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल पहुँचें। घाव को चाकू से काटना, चूसना या उस पर कोई रसायन लगाना अत्यंत हानिकारक है। झाड़-फूंक, टोना-टोटका या तांत्रिक क्रियाओं में समय न गंवाएं। यह समय जीवन रक्षक हो सकता है, इसलिए हर क्षण अमूल्य है। सर्पदंश ग्रसित व्यक्ति को यथाशीघ्र अस्पताल ले जाएं। यदि संभव हो तो सांप का रंग, लंबाई या कोई चित्र याद रखें लेकिन उसे मारने या पकड़ने का प्रयास न करें, क्योंकि इससे और खतरा हो सकता है। कई बार सांप विषैला नहीं भी होता, पर उपचार में देर जानलेवा साबित हो सकती है। सभी नागरिकों से अपील की गई है कि वे सर्प-दंश से संबंधित इस आपदा को गंभीरता से लें। शासन एवं जिला प्रशासन द्वारा किए गए प्रबंध तभी प्रभावी होंगे जब नागरिक स्वयं भी सावधानी बरतेंगे, समय पर उपचार लेंगे और जागरूकता फैलाने में सहयोग करेंगे। संयुक्त प्रयासों से ही सर्पदंश से होने वाली जनहानि को नियंत्रित किया जा सकता है।  

जनजागरूकता के लिए सिकल सेल मित्र पहल की होगी शुरुआत, सिकल सेल रोगियों के लिए 33 जिलों में लगाये जाएँगे विशेष शिविर

राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु की उपस्थिति में विश्व सिकल सेल दिवस 19 जून को बड़वानी में होगा राज्य स्तरीय कार्यक्रम राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु बड़वानी में उत्कृष्ट कार्य करने वाली पंचायतें होंगी सम्मानित जनजागरूकता के लिए सिकल सेल मित्र पहल की होगी शुरुआत, सिकल सेल रोगियों के लिए 33 जिलों में लगाये जाएँगे विशेष शिविर भोपाल  राष्ट्रीय सिकल सेल उन्मूलन मिशन-2047 के अंतर्गत विश्व सिकल सेल दिवस 19 जून को बड़वानी में ग्राम पंचायत तलून के खेल स्टेडियम में राज्य स्तरीय कार्यक्रम होगा। कार्यक्रम में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु मुख्य अतिथि रहेंगी। राज्यपाल मंगुभाई पटेल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल सहित अन्य मंत्रीगण कार्यक्रम में शामिल होंगे। इस अवसर पर कई नवाचारों का शुभारंभ किया जाएगा जिनमें जेनेटिक काउंसलिंग जागरूकता वीडियो और प्रभावित गर्भवती महिलाओं के लिए व्यापक दिशानिर्देश/मॉड्यूल शामिल हैं। लक्षित आयु वर्ग की शत-प्रतिशत स्क्रीनिंग पूर्ण करने वाली पंचायतों को सम्मानित किया जाएगा। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के एनसीसी निदेशॉलय के सहयोग से “सिकल सेल मित्र” पहल की शुरुआत भी की जायेगी। सिकल सेल मित्र युवा आबादी में जागरूकता के लिए सेवा प्रदाताओं के बीच लिंक के रूप में कार्य करेंगे। इस अवसर पर संपूर्ण प्रदेश में सिकल सेल रोग के प्रति जागरूकता लाने की गतिविधियाँ आयोजित की जायेंगी। सिकल सेल प्रभावित 33 जिलों में विशेष परामर्श शिविर लगाए जाएंगे, जहाँ उन्हें आनुवंशिक परामर्श, रोग प्रबंधन, भावी पीढ़ी के लिए संभावनाओं और आवश्यक चिकित्सकीय सेवाओं की जानकारी दी जाएगी। उप-केन्द्रों से लेकर जिला अस्पतालों तक सभी प्राथमिक एवं माध्यमिक स्वास्थ्य संस्थानों में विशेष शिविर लगाकर रोगियों की पहचान, स्क्रीनिंग तथा परिवार के अन्य सदस्यों की भी जांच की जायेगी। सिकल सेल रोगियों और उनके देखभाल कर्ताओं को पेन क्राइसिस जैसी तीव्र स्थितियों में प्रबंधन के तरीकों से अवगत कराया जाएगा। प्रभावित जिले की विशेष रूप से प्रभावित जनजातीय एवं ग्रामीण पंचायतों में स्क्रीनिंग और परामर्श के लिए अभियान चलाया जाएगा। राज्य स्तर पर विकसित जेनेटिक काउंसलिंग कार्ड का वितरण किया जाएगा, जिससे लोगों को आनुवंशिक जानकारी समझने में सुविधा होगी। दिव्यांगता योजनाओं और वित्तीय सहायता से सिकल-सेल रोगियों को जोड़ने की प्रक्रिया सरल करने के लिए यूडीआईडी कार्ड निर्माण के लिए मेगा शिविर भी लगाए जाएगे। प्रदेश में राष्ट्रीय सिकल सेल उन्मूलन मिशन के अंतर्गत अब तक 1 करोड़ 6 लाख से अधिक नागरिकों की सिकल सेल स्क्रीनिंग की जा चुकी है और इनमें से 2 लाख से अधिक वाहक चिन्हित हुए और 29 हज़ार 277 लोग सिकल सेल रोग से ग्रसित पाए गए। इन मरीजों का उपचार जारी है। अब तक 80 लाख 9 हज़ार से अधिक सिकल सेल कार्ड वितरित किए जा चुके हैं जिनसे प्रभावित नागरिक अपनी स्वास्थ्य स्थिति को समझ कर उचित उपचार प्राप्त कर रहे हैं। नेशनल सिकल सेल पोर्टल के माध्यम से स्क्रीनिंग व उपचार की सतत मॉनीटरिंग की जा रही है। रोगियों को नि:शुल्क उपचार, जेनेटिक काउंसलिंग, औषधियां, वैक्सीनेशन एवं ब्लड ट्रांस्फ्यूजन की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। अब तक 26,115 रोगियों को हाइड्रॉक्सीयूरिया दवा से उपचार मिला है। विभिन्न विभागों के साथ समन्वय कर जनजातीय स्कूलों, कॉलेजों व छात्रावासों में स्क्रीनिंग शिविर भी सतत आयोजित किए जा रहे हैं। प्रदेश में मिशन की शुरुआत 15 नवंबर 2021 को राज्य हिमोग्लोबिनोपैथी मिशन के रूप में अलीराजपुर और झाबुआ में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में की थी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मिशन को 1 जुलाई 2023 को राष्ट्रीय स्तर पर शहडोल से लॉन्च किया था। वर्तमान में प्रदेश के 33 जिलों में स्क्रीनिंग जारी है, जिसमें 20 जिलों के 89 विकासखंड एवं 13 अतिरिक्त जिले (पीएम जनमन योजना) शामिल हैं। सिकल सेल उन्मूलन के लिए एम्स भोपाल में नवजात शिशुओं की 72 घंटे में जाँच के लिए विशेष लैब स्थापित है। सभी चिन्हित मरीजों को हाइड्रॉक्सीयूरिया, फॉलिक एसिड और निःशुल्क रक्ताधान की सुविधा प्रदान की जा रही है। गंभीर मरीजों के लिए इंदौर मेडिकल कॉलेज में बोनमेरो ट्रांसप्लांट यूनिट स्थापित की गई है, जहाँ 100 से अधिक ट्रांसप्लांट हो चुके हैं। रीवा में सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस स्थापित किया गया है। मध्यप्रदेश में मिशन के तहत 2047 तक सिकल सेल को पूरी तरह समाप्त करने के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में सतत और सशक्त प्रयास किये जा रहे है।  

राम वन गमन पथ के लिए सरकार का बड़ा प्रोजेक्ट, अक्टूबर तक चिह्नित हो जाएंगे राम वन गमन पथ के सभी स्थल

भोपाल  मध्य प्रदेश में राम वन गमन पथ के कम ज्ञात स्थलों को चिह्नित करने के लिए राज्य सरकार ने इस क्षेत्र में लंबे समय से शोध कर रहे डॉ. राम अवतार शर्मा के प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी है। उन्होंने बताया कि चार माह में प्रदेश के कम ज्ञात स्थलों को चिह्नित कर शासन को रिपोर्ट सौंप देंगे। उनके साथ चार से पांच लोगों का दल भ्रमण कर प्रदेश में ऐसे स्थलों को चिह्नित और प्रमाणित करने की कोशिश करेगा। इसी रिपोर्ट के आधार पर मध्य प्रदेश में राम वन गमन पथ का पूरा मार्ग तय हो जाएगा। उन्होंने मंडला और बालाघाट के कुछ स्थलों को भी नए सिरे से इसमें जोड़ा है। सभी स्थलों का पर्यटन, सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टि से विकास किया जाएगा। अभी तक प्रदेश के 11 जिलों के 25 स्थलों को राम वन गमन पथ से जोड़ा गया है। ये वे स्थान हैं जहां वनवास के समय भगवान श्रीराम गए थे। इनमें सतना में चित्रकूट सहित कई स्थल पहले से श्रीराम के प्रवास के लिए जाने जाते हैं। कुछ ऐसी जगहें भी हैं जहां माना जाता है भगवान राम गुजरे थे या रुके थे पर वे प्रसिद्ध नहीं हैं यानी कम ज्ञात हैं। उनसे जुड़े प्रमाण भी कम मिलते हैं, इस कारण उन्हें खोजा जा रहा है। बता दें, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव राम वन गमन पथ निर्माण को लेकर सक्रिय हैं। वह इसके लिए बनाए गए न्यास के अध्यक्ष भी हैं। बजट में राम वन गमन पथ के लिए 25 करोड़ रुपये का प्रविधान इस वर्ष किया गया है। अभी तक इन स्थलों को किया चिह्नित सतना जिले के चित्रकूट में स्फटिक शिला, गुप्त गोदावरी, अत्रि आश्रम, शरभंग आश्रम, अश्वमुनि आश्रम, सिलहा गांव में सुतीक्ष्ण आश्रम, सिद्धा पहाड़, रक्सेला गांव में सीता रसोई और रामसेल। पन्ना में पहाड़ी खेरा गांव में बृहस्पति कुंड, सारंगधर गांव में सुतीक्ष्ण आश्रम, बड़े गांव में अग्निजिह्वा आश्रम और सलेहा में अगस्त्य आश्रम, मैहर जिले में राम जानकी मंदिर, कटनी जिले के भरभरा में शिव मंदिर, जबलपुर जिले में पिपरिया के पास रामघाट, नर्मदापुरम में पासी घाट और माच्छा के राम मंदिर, बालाघाट जिले में राम पायली, मंडला में सीता रपटन, उमरिया जिले में राम मंदिर दशरथ घाट और मार्कंडेय आश्रम, शहडोल के गंधिया और अनूपपुर के कनवाई में स्थित सीतामढ़ी। 48 वर्षों से श्रीराम से जुड़े तीर्थों पर शोध कर रहे डॉ. राम अवतार शर्मा आयकर विभाग में वरिष्ठ अधिकारी रह चुके डॉ. राम अवतार शर्मा 48 वर्षों से श्रीराम से जुड़े तीर्थों पर शोध कर रहे हैं। उन्होंने 290 स्थलों को राम तीर्थ के रूप में खोजा है। इनकी अनुशंसा पर केंद्र सरकार और विभिन्न राज्यों के पर्यटन विभाग ने अपने मानचित्र पर इन स्थलों को दिखाया और विकास योजनाएं बनाईं। सीएम ने कहा कि मार्गों का विकास तो होगा ही उससे ज्यादा जरूरी है कि पहले मार्ग पर आने वाले श्रीराम से जुड़े स्थलों को विकसित किया जाए। पहले चित्रकूट का समग्र विकास अयोध्या की तर्ज पर किया जाए। कनेक्टिविटी बढ़ाने पर भी जोर दिया। समग्र विकास की कार्ययोजना तैयार कर अगली बैठक में पेश करने को कहा। न्यास की बैठक हर तीन माह में होगी। सीएम ने कहा कि राम से जुड़ी स्मृतियों का सालभर प्रचार किया जाएगा। जिला पर्यटन परिषद और अन्य विभागों को इसके लिए कार्ययोजना बनाने को कहा। ऐसे जुटाएंगे राशि इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट प्लान के तहत पहले चित्रकूट सहित चार नगरों को नामांकित किया। 500 करोड़ की योजना में पहले फेज में चित्रकूट नहीं था। एशियन डेवलपमेंट बैंक से मिली राशि में अभी 100 करोड़ रुपए बचे हैं। सीएम ने प्रपोजल को रिवाइज करने को कहा। एडीबी से राशि मांगेंगे। पुरानी शेष राशि और नई राशि मिलाकर 400 करोड़ से चित्रकूट का विकास होगा। मप्र में राम वन गमन पथ के चार रूट प्रदेश में राम वन गमन पथ के लिए 1450 किमी लंबो चार रूट प्रस्तुत किए। इनमें 632 किमी नेशनल हाइवे, 493 किमी म.प्र. सड़क विकास निगम, 47 किमी लोनिवि, 184 किमी प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना और 93 किमी की क्षेत्रीय सड़क शामिल होंगी। इनका उन्नयन होगा। तैयार करें स्थल विकास के प्रस्ताव बैठक में श्रीराम से जुड़े 23 स्थलों की जानकारी रखी गई। सीएम ने कहा कि राम पर शोध करने वाले विद्वानों की समिति बनाकर पहले स्थल का निर्धारण करवा लें, ताकि स्थलों को लेकर विवाद की स्थिति न बने। अगली बैठक में इन स्थलों को विकसित करने के प्रोजेट रखे जाएं, लेकिन सबसे पहले चित्रकूट के समग्र विकास का रोड मैप तैयार किया जाए।

पंजाब,हरियाणा, राजस्थान तक पहुंचेगा सिंधु का पानी, बदलते वर्षा पैटर्न के संकट पर कंट्रोल

नई दिल्ली  सिंधु नदी के पानी का पूरा इस्तेमाल करने के लिए भारत एक बड़ी योजना पर काम कर रहा है। यह योजना नदियों को आपस में जोड़ने की है। TOI की एक रिपोर्ट के अनुसार, जम्मू और कश्मीर से पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में पानी ले जाने के लिए 113 किलोमीटर लंबी नहर बनाने की तैयारी चल रही है। यह नहर चिनाब नदी को रावी-ब्यास-सतलुज नदी प्रणाली से जोड़ेगी। इस योजना का लक्ष्य सिंधु जल समझौते के तहत भारत के हिस्से का बेहतर इस्तेमाल करना है। इससे पूर्वी (रावी, ब्यास, सतलुज) और पश्चिमी (सिंधु, झेलम, चिनाब) नदियों के पानी का सही उपयोग हो सकेगा और पाकिस्तान में बहने वाले अतिरिक्त पानी को रोका जा सकेगा। पंजाब,हरियाणा, राजस्थान तक पहुंचेगा सिंधु का पानी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को पचमढ़ी में बीजेपी के एक प्रशिक्षण सत्र के दौरान इस बड़ी योजना का संकेत दिया था। उन्होंने कहा, ‘सिंधु का पानी तीन साल के भीतर नहरों के माध्यम से राजस्थान के श्री गंगानगर तक पहुंचाया जाएगा।’ उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान ‘पानी की हर बूंद के लिए तरस जाएगा।’ रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि प्रस्तावित नहर नेटवर्क जम्मू और कश्मीर, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में 13 मौजूदा नहरों से जुड़ेगा और आखिरकार यह इंदिरा गांधी नहर प्रणाली में मिल जाएगा। जलवायु परिपर्तन और बदलते वर्षा पैटर्न के संकट पर कंट्रोल मनोहर पर्रिकर रक्षा अध्ययन और विश्लेषण संस्थान के वरिष्ठ फेलो उत्तम सिन्हा ने कहा, ‘जम्मू और कश्मीर से पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में अतिरिक्त पानी भेजने से इलाके में पानी की उपलब्धता को संतुलित करने में मदद मिल सकती है।’ उन्होंने यह भी कहा कि ‘आंतरिक स्तर पर पानी के वितरण में इस बदलाव से जलवायु परिवर्तन और बदलते वर्षा पैटर्न का सामना करना भारत के लिए ज्यादा आसान हो सकेगा।’ इस काम को आसान बनाने के लिए केंद्र सरकार रणबीर नहर की लंबाई 60 किलोमीटर से बढ़ाकर 120 किलोमीटर करने पर भी विचार कर रही है। साथ ही, प्रताप नहर का भी पूरी तरह से इस्तेमाल करने की तैयारी में है। इसके लिए फिजिबिलिटी असेसमेंट किए जा रहे हैं। उझ बहुउद्देशीय परियोजना को भी नई गति देने की तैयारी यही नहीं, कई सालों से रुका हुआ कठुआ जिले का उझ बहुउद्देशीय परियोजना भी फिर से शुरू किया जा रहा है। उझ, रावी नदी की एक सहायक नदी है। पहले रावी नदी के अतिरिक्त पानी को पाकिस्तान में जाने से रोकने के लिए उझ के नीचे एक अलग रावी-ब्यास लिंक बनाने की योजना थी। अब यह बड़ी नहर योजना का हिस्सा होगी। इसमें ब्यास बेसिन में पानी स्थानांतरित करने के लिए एक बैराज और सुरंग शामिल होगी। पनबिजली परियोजनाओं परियोजनाओं पर तेजी से काम इन योजनाओं के अलावा, चिनाब नदी पर बने बागलीहार और सलाल हाइड्रो परियोजनाओं के जलाशयों से गाद निकालने जैसे छोटे समय के उपायों पर भी काम चल रहा है। रिपोर्ट के अनुसार भारत अपनी सिंधु प्रणाली के पानी का बेहतर उपयोग करने के लिए कई पनबिजली परियोजनाओं, जैसे- पाकल दुल (1,000 मेगावाट), रतले (850 मेगावाट), किरू (624 मेगावाट), और क्वार (540 मेगावाट) पर भी तेजी से काम कर रहा है। दरअसल, मोदी सरकार की कोशिश है कि इन सारी परियोजनाओं के काम जल्द से जल्द पूरे हों,ताकि सिंधु नदी घाटी के पानी का इस्तेमाल भारतीय राज्यों के लिए हो सके। यही वजह है कि पर्यावरण मंत्रालय भी इस बात का पुख्ता इंतजाम कर चुका है कि इन परियोजनाओं को ग्रीन क्लियरेंस मिलने में जरा भी दे रही नहीं हो।

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