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आमला में धूमधाम से मनाई जाएंगी महाराज अजमीढ़ देव जयंती

Maharaj Ajmidh Dev Jayanti will be celebrated with great pomp in Amla. हरिप्रसाद गोहेआमला । आमला नगर में प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी मंगलवार स्वर्णकार समाज संगठन आमला के बैनरतले धूमधाम से महाराज अजमीढ़ देव जयंती, मनाई जाएंगी। संगठन के बंटी सोनी ने बताया स्वर्णकार समाज संगठन के बैनरतले दिनांक 7/10/25 को नगर में महाराज अजमीढ़ देव जयंती पर विशाल शोभायात्रा निकाली जाएगी जो सोनी मोहल्ला स्थित सोनी प्ले स्कूल से निकला जाएगा। बताया गया दोपहर 2.30 बजे से शोभायात्रा निकाली जाएगी जो पुराना पुलिस थाना परिसर, मेन रोड पीर मजील चौक, चार बत्ति चौक, श्री राम मार्केट होते हुए रतेडा रोड स्थित दादा जी लान पहुंचेगी। जहां महाराज अजमीढ़ देव जी की पुजा अर्चना के बाद विभिन्न कार्यक्रम होंगे जैसे सांस्कृतिक कार्यक्रम ,प्रतिभावान बच्चों का सम्मान, वृद्ध जनों का सम्मान, मात्र शक्तियों का सम्मान और भी अन्य कार्यक्रम होंगे बाद भोजन प्रसादी के साथ कार्यक्रम का समापन होंगा।

लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई: महिला एवं बाल विकास अधिकारी ₹20 हजार रुपए की रिश्वत लेते गिरफ्तार

Lokayukta takes major action: Women and Child Development Officer arrested for taking bribe of ₹20,000 छिंदवाड़ा। महिला एवं बाल विकास विभाग में रिश्वतखोरी के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। हाल ही में विभागीय अधिकारियों पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से धमकाकर रिश्वत लेने का आरोप लगा था, जिसकी जांच अभी जारी है। इसी बीच जुन्नारदेव से एक नया मामला सामने आया है। लोकायुक्त जबलपुर की टीम ने कार्रवाई करते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग की परियोजना अधिकारी सीमा पटले को ₹20,000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। बताया जा रहा है कि यह राशि विभागीय कार्यों में अनियमितताओं को दबाने और फाइलें आगे बढ़ाने के एवज में मांगी गई थी। इस कार्रवाई में परियोजना अधिकारी के साथ तीन आंगनबाड़ी सहायिकाएं भी पकड़ी गई हैं। लोकायुक्त टीम ने मौके से रिश्वत की राशि बरामद कर सभी आरोपितों को हिरासत में ले लिया है। मामले की जांच जारी है। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि विभाग में लगातार सामने आ रहे रिश्वतखोरी के मामलों ने पारदर्शिता और व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दे स्वास्थ्य मंत्री: जीतू पटवारी

Health Minister should resign on moral grounds: Jitu Patwari छिंदवाड़ा। छिंदवाड़ा जिले के परासिया तहसील में हुई दर्जनों बच्चों की मौत के मामले में प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सोमवार को मृतक बच्चों के परिजनों से भेंट करते हुए उन्हें यह भरोसा दिलाया कि हर हाल में कांग्रेस उनके साथ खड़ी है जीतू पटवारी ने प्रदेश के मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि नैतिकता के आधार पर मुख्यमंत्री प्रदेश स्वास्थ्य मंत्री का इस्तीफा से लेकर ड्रग कंट्रोलर, पी एस और स्वास्थ सचिव को निलंबित करने की कार्यवाही करे, तब लगेगा की प्रदेश की मोहन सरकार बच्चों की मौत के मामले में गंभीर है। मृतक बच्चों के परिजनों से श्री पटवारी ने वन टू वन बात करते हुए कहा सरकार अगर मृतक बच्चों के परिजनों के आसू पोछना चाहती है तो तत्काल परिजनों को एक एक करोड़ का मुहावजा देते हुए नागपूर में इलाजरत बीमार बच्चों की ईलाज की समुचित व्यवस्था कराए। जिले में अब तक किडनी फेल होने से मौत का आंकड़ा 18 के पार पहुंच गया है। लेकिन सरकारी आंकड़े कुछ ओर ही कह रहे हैं। 18 के पार पहुंच गया है। लेकिन सरकारी आंकड़े कुछ ओर ही कह रहे हैं।

सड़कों पर मौत का तांडव , मप्र में हर घंटे में एक जानलेवा दुर्घटना, हर दिन 150+ एक्सीडेंट, 38 से ज्यादा मौतें

Death on the roads: One fatal accident every hour in Madhya Pradesh, 150+ accidents daily, and over 38 deaths. भोपाल। मध्य प्रदेश 2023 में सड़क दुर्घटनाओं के मामले में देश के सबसे खतरनाक राज्यों में से एक रहा है। एनसीआरबी की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में कुल 14,098 लोगों की मौत हुई, जो भारत की कुल आकस्मिक मौतों का 9.8 प्रतिशत है। 2022 की तुलना में दुर्घटनाओं में 5.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। रिपोर्ट बताती है कि 2023 में मध्य प्रदेश में 54,763 सड़क दुर्घटनाएं हुईं। इन दुर्घटनाओं में 54,699 लोग घायल भी हुए। राज्य में आकस्मिक मृत्यु दर 49.8 रही, जो देश में छठी सबसे अधिक दर है। मध्य प्रदेश के हाईवे खतरनाकयात्रियों के लिए राजमार्ग सबसे खतरनाक साबित हुए। भारत की कुल सड़क दुर्घटना मौतों का 7 प्रतिशत केवल मध्य प्रदेश के राष्ट्रीय राजमार्गों पर दर्ज किया गया। शाम 6 बजे से रात 9 बजे के बीच का समय विशेष रूप से जोखिम भरा रहा, इस दौरान 10,613 सड़क दुर्घटनाएं हुईं। इसके अलावा, देश में हुई घातक बस दुर्घटनाओं में से 10.2 प्रतिशत मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में मिलाकर हुईं। छोटे वाहनों से ज्यादा हुए एक्सीडेंटखराब बुनियादी ढांचा और पर्यावरणीय कारक भी इन मौतों में योगदान करते हैं। एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार, भारी और यात्री वाहनों के कारण बड़ी संख्या में मौतें हुईं। राज्य की सड़कों पर स्ङ्क/जीप और कारों से होने वाली दुर्घटनाओं में मरने वालों की संख्या ट्रक/लॉरी/मिनी-ट्रक से होने वाली मौतों से अधिक थी। राजधानी भोपाल में भी बढ़ोतरीराष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, भोपाल में 2023 में सड़क दुर्घटनाओं में 4.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। यह वृद्धि 2022 की तुलना में हुई है। कुल 2,906 दुर्घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें 196 लोगों की जान गई और 2,196 लोग घायल हुए। रात 9 बजे से आधी रात तक का समय सबसे खतरनाक रहा। दोपहिया वाहन चालक और पैदल यात्री सबसे ज़्यादा असुरक्षित पाए गए। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने भी भोपाल को ओवर-स्पीडिंग के कारण होने वाली दुर्घटनाओं में चौथे स्थान पर रखा था।

कम नुकसान प्रतिशत की रिपोर्ट—SLR के सख़्त आदेश का कमाल! ”

Low loss percentage reported—the magic of SLR’s strict order!” चंदा कुशवाह (संवाददाता)अगर मालवा ! ज़िले में किसानों के लिए राहत अब बस एक छलावा बनकर रह गई है। प्राकृतिक आपदा से फसलें चौपट हो गईं, किसान मुआवज़े की उम्मीद में सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन राहत मिलने के बजाय उन्हें सिर्फ़ बहलाया जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि इस पूरी स्थिति के पीछे ज़िला अधीक्षक भू-अभिलेख (SLR) प्रीति चौहान का ही दबाव है। जानकारी के मुताबिक, विभाग द्वारा शासन को भेजी गई कम नुकसान प्रतिशत वाली रिपोर्ट भी SLR मैडम के सख़्त निर्देशों पर ही तैयार की गई थी। यानी आंकड़ों में ‘कटौती’ कर्मचारियों ने अपनी मर्ज़ी से नहीं, बल्कि दबाव में की। कर्मचारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि असली समस्या उनकी नहीं, बल्कि ऊपर से आने वाले आदेशों की है। “हम किसानों को सही नुकसान दिखाना चाहते हैं, लेकिन हमें निर्देश मिलता है कि नुकसान कम बताओ और किसानों को सिर्फ़ चक्कर कटवाओ। फिर जब हंगामा होता है तो दोष हम पर डाल दिया जाता है।” व्यंग्य की बात यह है कि जिस अधिकारी को जनता की शिकायतें सुननी चाहिए, दुख समझना चाहिए और किसानों की समस्या शासन तक साफ़ तौर पर पहुँचानी चाहिए, उनकी मंशा उलटी है—न शिकायत सुनने का इरादा, न दुख समझने का और न ही समस्या शासन तक पहुँचाने का। सूत्र बताते हैं कि SLR मैडम अपने कैबिन में कर्मचारियों को आने तक नहीं देतीं और दिनभर मोबाइल पर रील्स देखने में व्यस्त रहती हैं। किसानों की समस्याएँ फाइलों में धूल खाती रहती हैं और अधिकारी रीलों में ‘टारगेट’ अचीव करती रहती हैं। अब किसानों की नाराज़गी बढ़ने लगी है। कुछ किसान संघ प्रतिनिधियों ने SLR की वह रिपोर्ट मांगी है, जिसमें नुकसान का प्रतिशत घटाकर भेजा गया है। उनका कहना है कि यह स्पष्ट होना चाहिए कि आखिर किस दबाव में और किस मंशा से किसानों के साथ ऐसा अन्याय किया गया। किसानों का साफ कहना है कि यदि हालात ऐसे ही रहे तो वे आंदोलन करने को बाध्य होंगे। आखिर सवाल यही है—क्या प्रशासन जनता के लिए है या जनता को गुमराह करने के लिए?

सरकार इन किसानों को नहीं देगी 21वीं किस्त, तत्काल जानें

The government will not give the 21st installment to these farmers, know immediately नई दिल्ली। देश की तमाम राज्य सरकारें अपने नागरिकों के लिए कई तरह की योजनाएं चलाती हैं। इनमें कई योजनाएं सीधे किसानों के लिए होती हैं। छोटे और सीमांत किसान अक्सर आर्थिक रूप से कमजोर होते हैं और उन्हें सरकारी मदद की जरूरत होती है। केंद्र सरकार की ओर से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना शुरू की गई है। ताकि किसानों की आमदनी बढ़ सके और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो। पीएम-किसान योजना के तहत अब तक किसानों को 20 किस्तें भेजी जा चुकी हैं। सरकार की ओर से 4 महीनों के अंतराल किस्त की राशि सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर होती रही है। योजना का मकसद छोटे किसानों को आर्थिक राहत देना और उनकी खेती से जुड़ी जीवनशैली में सुधार लाना है। इससे किसान अपनी जरूरतें आसानी से पूरी कर सकते हैं। अब कई किसान 21वीं किस्त का इंतजार कर रहे हैं। लेकिन सभी इसके पात्र नहीं होंगे। कुछ किसानों के खाते में किस्त नहीं जाएगी। क्योंकि उनके दस्तावेज पूरी तरह अपडेट नहीं हैं। ऐसे किसानों को यह काम करने की जरूरत है। जिससे उन्हें योजना का लाभ मिल सके।आपको बता दें 21वीं किस्त का लाभ कई किसानों को नहीं मिलेगा। जिन किसानों ने अब तक ई-केवाईसी और भूसत्यापन की प्रक्रिया पूरी नहीं की है। उनके खाते में पैसे नहीं आएंगे। इन दोनों प्रक्रियाओं को पूरा करना जरूरी है। तभी 21वीं किस्त का लाभ मिल पाएगा। इसलिए जिन किसानों ने अबतक यह काम नहीं करवाया है। उन्हें तुरंत अपने दस्तावेज अपडेट करने की जरूरत है। ई-केवाईसी पीएम किसान योजना की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर पूरा कर सकते हैं। और अपने भूसत्यापन के लिए भूलेख रिकॉर्ड की वेबसाइट या विभाग जाना होगा। इसके अलावा 21वीं किस्त पाने के लिए जरूरी है कि बैंक खाता, आधार कार्ड और नाम की जानकारी सही हो। अगर कोई जानकारी अधूरी या गलत पाई जाता है तो भुगतान नहीं होगा। अगर आपने भी नहीं करवाया यह काम तो तुरंत करवा लें।

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