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रोजगार की बड़ी खबर: पचपदरा रिफाइनरी से 50 हजार युवाओं को मिलेगा जॉब मौका

बालोतरा. पश्चिमी राजस्थान में औद्योगिक विकास की धुरी बन रही पचपदरा रिफाइनरी अब पूर्णता की ओर तेजी से अग्रसर है। निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है और क्रूड ऑयल की प्रोसेसिंग और टेस्टिंग भी शुरू हो गई है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के साथ क्षेत्र में पेट्रोकेमिकल उद्योगों के विस्तार की संभावनाएं भी तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में बालोतरा में स्किल डेवलपमेंट हब स्थापित होने से जिले का औद्योगिक भविष्य नई दिशा लेता नजर आ रहा है। रोजगार का बढ़ेगा दायरा रिफाइनरी के आसपास सहायक उद्योगों के विकास के लिए राजस्थान पेट्रो जोन स्थापित किया गया है। इन उद्योगों में रोजगार के अवसरों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने हाल ही में अपने बजट में बालोतरा में स्किल डेवलपमेंट हब स्थापित करने की घोषणा की है। क्या कहना है विशेषज्ञों का विशेषज्ञों का मानना है कि यह हब स्थानीय युवाओं को उद्योगों की जरूरत के अनुरूप प्रशिक्षित कर उन्हें सीधे रोजगार से जोड़ेगा। वर्तमान में बालोतरा क्षेत्र में कपड़ा उद्योग में 50 हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिला हुआ है। जबकि टाई-डाई उद्योग में करीब 20 से 25 हजार लोग कार्यरत हैं। पेट्रोजोन के विकसित होने के साथ करीब 50 हजार नए रोजगार सृजित होने की संभावना जताई जा रही है, जिससे क्षेत्र में रोजगार का दायरा और व्यापक होगा। औद्योगिक विकास को मिलेगी गति रिफाइनरी से निकलने वाले बाय-प्रोडक्ट आधारित पेट्रोकेमिकल और प्लास्टिक उद्योगों के विस्तार की संभावनाएं बढ़ रही हैं। कौशल विकास हब की स्थापना से न केवल युवाओं को रोजगार मिलेगा। बल्कि क्षेत्रीय औद्योगिक विकास को भी नई गति मिलेगी। कुशल मानव संसाधन की मांग बढ़ेगी वहीं, उद्योगों की बढ़ती विविधता के साथ कुशल मानव संसाधन की मांग भी तेजी से बढ़ेगी। ऐसे में स्किल डवलपमेंट हब स्थानीय युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण देकर उन्हें रोजगार के लिए तैयार करेगा और उद्योगों को प्रशिक्षित वर्कफोर्स उपलब्ध कराएगा। प्रशिक्षित युवाओं की मांग तेजी से बढ़ेगी  बालोतरा में स्किल डेवलपमेंट हब की स्थापना समय की आवश्यकता थी। रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल उद्योगों के विस्तार के साथ प्रशिक्षित युवाओं की मांग तेजी से बढ़ेगी। ऐसे में स्थानीय युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण मिलने से उन्हें रोजगार के बेहतर अवसर मिलेंगे और उद्योगों को भी कुशल मानव संसाधन आसानी से उपलब्ध हो सकेगा। -रमेश जैन भाया, उद्यमी

सैमसन के बिना मुश्किल में राजस्थान! फाफ डुप्लेसी बोले- यह टीम के लिए बड़ा नुकसान

नई दिल्ली दक्षिण अफ्रीका के पूर्व कप्तान फाफ डुप्लेसी का मानना है कि जिस तरह से महेंद्र सिंह धोनी चेन्नई सुपर किंग्स और विराट कोहली रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के पर्याय बन चुके हैं, इसी तरह से संजू सैमसन को राजस्थान रॉयल्स का चेहरा माना जा सकता था। फाफ ने कहा कि आरआर से संजू का जाना टीम के लिए बहुत बड़ा नुकसान है। सैमसन राजस्थान रॉयल्स की तरफ से दो कार्यकाल में 11 सत्र में खेले। वह इस टीम के सबसे सफल खिलाड़ी रहे हैं। उन्होंने रॉयल्स की तरफ से सर्वाधिक मैच खेलने के अलावा सर्वाधिक रन भी बनाए हैं। इस बार इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में वह चेन्नई सुपर किंग्स की तरफ से खेलेंगे।   डुप्लेसी ने जिओ हॉटस्टार से कहा, ‘अगर हम आईपीएल की टीमों पर गौर करें तो अधिकतर टीमों के पास कोई एक ऐसा खिलाड़ी रहा है जो लंबे समय तक फ्रेंचाइजी का चेहरा रहा जैसे रोहित शर्मा, महेंद्र सिंह धोनी और विराट कोहली। मैं संजू सैमसन को राजस्थान रॉयल्स के लिए उसी तरह का खिलाड़ी मानता हूं।’ उन्होंने कहा, ‘भले ही वह नई पीढ़ी के खिलाड़ी हैं, लेकिन वह उस फ्रेंचाइजी का चेहरा बन गए थे। जब मैं राजस्थान रॉयल्स के बारे में सोचता हूं, तो मुझे संजू सैमसन याद आते हैं। इसलिए मुझे लगता है कि उनका किसी अन्य टीम से जुड़ना प्रशंसकों, आईपीएल और टूर्नामेंट के लिए बहुत बड़ा झटका है, क्योंकि उन्होंने वहां बहुत बड़ी भूमिका निभाई है।’ डुप्लेसी ने कहा कि सैमसन के जाने से राजस्थान रॉयल्स के शीर्ष क्रम के बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल पर अतिरिक्त जिम्मेदारी आ जाएगी। सैमसन की मौजूदगी में जायसवाल अपना स्वाभाविक खेल खेलते थे लेकिन अब उन पर अधिक जिम्मेदारी आ गई है। उन्होंने कहा, ‘संजू की मौजूदगी में यशस्वी जायसवाल को अपना नैसर्गिक खेल खेलने का मौका मिलता था क्योंकि दूसरे छोर से संजू लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहा था। अब ऐसा नहीं होगा और उन पर अधिक जिम्मेदारी होगी। उस तरह के बल्लेबाज के लिए यह महत्वपूर्ण होता है कि वह जिम्मेदारी के बारे में नहीं सोचें। इसलिए यह सत्र उनके लिए सीखने की एक प्रक्रिया होगी।’ पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज लक्ष्मीपति बालाजी ने कहा कि राजस्थान रॉयल्स के रियान पराग को कप्तान नियुक्त करने के फैसले से उन्हें हैरानी हुई जबकि टीम में जायसवाल, ऑलराउंडर रविंद्र जडेजा और इंग्लैंड के सैम कुरेन जैसे अधिक अनुभवी खिलाड़ी मौजूद थे। उन्होंने कहा, ‘मुझे इस फैसले से थोड़ी हैरानी हुई क्योंकि उसके पास यशस्वी जायसवाल, रविंद्र जडेजा जैसे भारतीय खिलाड़ी और सैम कुरेन के रूप में विदेशी खिलाड़ी है जो कप्तानी कर सकते थे। इसलिए मुझे यह एक तरह का जुआ लगता है।’ बालाजी ने कहा कि ऐसे में टीम के मुख्य कोच और क्रिकेट निदेशक कुमार संगकारा की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने कहा, ‘आईपीएल में कप्तानी सिर्फ मैदान पर फैसले लेने की क्षमता तक सीमित नहीं है बल्कि यह खिलाड़ियों को एकजुट रखने से भी जुड़ा है। इसलिए मुझे लगता है यह एक दोधारी तलवार है। कुमार संगकारा से निश्चित रूप से बहुत मदद मिलेगी।’ किशोर बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी के बारे में बालाजी ने कहा कि प्रतिद्वंद्वी टीमों ने शायद उनकी कमजोरियों की पहचान कर ली होगी, लेकिन इस 14 वर्षीय खिलाड़ी के लिए यह साबित करने का एक बड़ा अवसर है कि आईपीएल में पिछले साल का उनका प्रदर्शन महज संयोग नहीं था। उन्होंने कहा, ‘हमने पिछले सत्र में वैभव सूर्यवंशी की प्रतिभा देखी है। उन्होंने गुजरात टाइटंस के खिलाफ बहुत अच्छे गेंदबाजी आक्रमण के सामने शतक बनाया था। लेकिन दूसरा साल किसी भी खिलाड़ी के लिए हमेशा चुनौतीपूर्ण होता है।’ बालाजी ने कहा, ‘यहीं पर कुमार संगकारा का मार्गदर्शन काम आएगा। विपक्षी टीमों ने निश्चित रूप से उनकी कुछ कमजोरियों की पहचान कर ली होगी। उनके पास अपने प्रदर्शन में निरंतरता बनाए रखने का यह शानदार अवसर होगा।’  

हाईकोर्ट का अहम आदेश: छत्तीसगढ़ पुलिस भर्ती में वेटिंग लिस्ट को मिली मंजूरी

बिलासपुर. पुलिस आरक्षक भर्ती मामले में हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि चयनित अभ्यर्थियों की जॉइनिंग के बाद खाली रह जाने वाले पदों को वेटिंग लिस्ट से भरा जाए. कोर्ट ने साफ कहा कि सभी विज्ञापित पद केवल जारी चयन सूची से भर पाना संभव नहीं है. दरअसल, वर्ष 2024 में पुलिस विभाग द्वारा करीब 5967 पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया गया था. याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट में दायर याचिका में आरोप लगाया कि कई अभ्यर्थियों ने एक से अधिक जिलों से आवेदन किया और मेरिट में आने पर उन्हें कई जिलों की चयन सूची में शामिल कर लिया गया. इससे वास्तविक रूप से पद खाली रह जाने की स्थिति बन रही है. सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि चयन सूची में 5948 अभ्यर्थियों के नाम प्रकाशित किए गए हैं, लेकिन यह संभव है कि एक ही अभ्यर्थी एक से अधिक जिलों में चयनित हो. ऐसे में जब वह किसी एक जिले में जॉइन करेगा, तो बाकी जिलों के पद रिक्त हो जाएंगे. इन रिक्त पदों को बाद में वेटिंग लिस्ट से भरा जाएगा. मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस पार्थ प्रतिम साहू की सिंगल बेंच ने कहा कि वर्तमान स्थिति में यह स्पष्ट है कि सभी पद चयन सूची से नहीं भर पाएंगे. इसलिए राज्य सरकार को निर्देशित किया जाता है कि चयनित उम्मीदवारों की जॉइनिंग के बाद बचे हुए पदों को नियमों के तहत वेटिंग लिस्ट के अभ्यर्थियों से भरे. कोर्ट ने याचिका का निराकरण करते हुए यह भी स्पष्ट किया कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखते हुए रिक्त पदों को जल्द भरने की कार्रवाई की जाए. 

चांदी की कीमतों में भारी गिरावट, सोने में भी बड़ी मंदी, क्या आने वाली है कोई बड़ी घटना?

 नई दिल्ली शेयर बाजार में भारी गिरावट के बीच गुरुवार को सोने-चांदी की कीमतें भी धाराशायी हो गईं हैं. MCX पर चांदी की कीमतों में 5 फीसदी से ज्यादा की गिरावट देखी जा रही है. सोना भी करीब 2.50 फीसदी तक फिसल गया है। गुरुवार दोपहर साढ़े 12 बजे अचानक चांदी की कीमतें टूटने लगीं, और देखते ही देखते 12000 रुपये प्रति किलो सस्ती हो गई. जबकि सोने के भाव में करीब 4500 रुपये प्रति 10 ग्राम की गिरावट आई है। दरअसल, मिडिल ईस्ट का संकट गहाराता जा रहा है, पहले ईरान के तेल इंफ्रा पर अमेरिका ने हमला किया, अब बदले में ईरान ने भी कतर से बड़े ऑयल रिफाइनरी प्लांट पर हमला कर दिया है. जिससे भारी नुकसान का अनुमान  लगाया जा रहा है. इस बीच कच्चे तेल क्रूड ऑयल की कीमत बढ़कर 113 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। चांदी में बड़ी गिरावट के पीछे ये कारण सोने-चांदी में गिरावट के कई कारण हैं. लेकिन मुख्यतौर पर अमेरिका का एक फैसला है. बुधवार को अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों को स्थिर रखने का फैसला लिया, फेडरल रिजर्व ने संकेत दिए कि इस साल अब ब्याज दरों में कटौती की संभावना सीमित है. फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने कहा कि ग्लोबल तनाव के चलते आर्थिक स्थिति काफी खराब है, इस फैसले के बाद ग्लोबल मार्केट में सोने-चांदी की जमकर पिटाई हुई। बता दें, पिछले करीब दो साल से सोने-चांदी में एकतरफा रैली देखी गई थी. 29 जनवरी 2026 को चांदी (Silver) की कीमत रिकॉर्ड 4.20 लाख रुपये प्रति किलो पहुंच गई थी. लेकिन उसके बाद लगातार गिरावट देखने को मिल रही है. 2 फरवरी 2026 चांदी की कीमत गिरकर 2.25 लाख रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई थी. इसके पीछे मुनाफावसूली कारण थे। युद्ध के बीच सोने-चांदी में भी बिकवाली हावी  लेकिन अब एक बार फिर चांदी इसी कीमत के आसपास पहुंच गई है. चांदी अब 29 जनवरी की हाई से करीब 1.90 लाख रुपये प्रति किलो सस्ती हो चुकी है. फिलहाल चांदी की कीमत MCX पर 2.35 लाख प्रति किलो के आसपास बनी हुई है. जबकि सोना गुरुवार को ट्रेड के दौरान 1.50 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम से नीचे से फिसल गया है। बता दें, अक्सर ये देखा गया है कि ग्लोबल संकट के दौरान खासकर जब युद्ध चल रहा हो तो निवशक ऐसे माहौल में सोने-चांदी को सुरक्षित निवेश मानते हैं, लेकिन इस बार थोड़ी उल्टी तस्वीर देखने को मिल रही है।

छत्तीसगढ़ का नया धर्मांतरण कानून: सख्त सजा और खास प्रावधानों की पूरी जानकारी

रायपुर. छत्तीसगढ़ बहुप्रतीक्षित विधेयक आखिरकार विधानसभा में पारित किया गया। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के दौरान आज सदन में भारी गहमागहमी देखने को मिली। गृह मंत्री विजय शर्मा ने राज्य में धर्मांतरण पर रोक लगाने के उद्देश्य से ‘छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026’ सदन के पटल पर रखा। विधेयक पेश होते ही विपक्ष ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया और इसे जल्दबाजी में उठाया गया कदम करार दिया। क्या है छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण विधेयक? छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण स्वातंत्रय विधेयक 2026 के फॉर्मेट का अनुमोदन किया गया है. इस विधेयक का उद्देश्य छत्तीसगढ़ में एक धर्म से दूसरे धर्म में परिवर्तन के लिए बल प्रयोग, प्रलोभन, कपटपूर्ण नीति और साधनों पर सही तरीके से रोक लगाना है. अब अगर छत्तीसगढ़ में रहने वाले किसी व्यक्ति को कोई दूसरा इंसान जबरन दबाव डालकर धर्म परिवर्तन करवाता है, तो उसे दोषी मानते हुए उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी. अगर नियम के बाहर कोई व्यक्ति धर्म बदलता है, तो उसे कानूनी मान्यता नहीं मिलेगी. विधेयक साफ तौर पर यह कहता है कि धर्म परिवर्तन किसी भी व्यक्ति की इच्छा से होना चाहिए. दबाव या लालच से नहीं. छत्तीसगढ़ में पहले से ही धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 1968 लागू है, जो 1 नवंबर, 2000 को अस्तित्व में आया था. सार्वजनिक की जाएगी धर्मांतरण की जानकारी छत्तीसगढ़ में नए धर्मांतरण विधेयक के मुताबिक यदि कोई व्यक्ति अपनी इच्छा से धर्म परिवर्तन करना चाहता है, तो उसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत जिला मजिस्ट्रेट को पूर्व सूचना देनी होगी. प्रस्तावित धर्मांतरण की जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की जाएगी और 30 दिनों के भीतर आपत्ति दर्ज कराने का नियम होगा. विधेयक में प्रलोभन, प्रपीड़न, दुर्व्यपदेशन, सामूहिक धर्मांतरण और डिजिटल माध्यम से धर्मांतरण जैसे शब्दों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है. साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि पैतृक धर्म में वापसी को धर्मांतरण नहीं माना जाएगा. जबरन धर्मांतरण करवाने पर है सजा का प्रावधान     कानून में अवैध धर्मांतरण के मामलों के लिए कड़े दंड का प्रावधान किया गया है. अवैध तरीके से धर्मांतरण कराने पर 7 से 10 साल तक की जेल और कम से कम 5 लाख रुपए का जुर्माना हो सकता है.     यदि पीड़ित नाबालिग, महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य पिछड़ा वर्ग से संबंधित है, तो सजा 10 से 20 साल तक की जेल और कम से कम 10 लाख रुपए का जुर्माना हो सकता है.     सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में सजा और कठोर होगी, जिसमें 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास और कम से कम 25 लाख रुपए जुर्माना का प्रावधान किया गया है.     विधेयक के तहत आने वाले अपराध संज्ञेय और गैर जमानती होंगे. मामलों की सुनवाई विशेष न्यायालय में की जाएगी. सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य धार्मिक स्वतंत्रता को सीमित करना नहीं बल्कि अवैध तरीकों से होने वाले धर्मांतरण को रोकना है. दूसरे राज्यों से कैसे अलग है छत्तीसगढ़ का कानून छत्तीसगढ़ से पहले उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, उत्तराखंड, कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, ओडिशा, हरियाणा, झारखंड, अरुणाचल प्रदेश और राजस्थान सहित कई राज्यों में धर्म बदलने के खिलाफ कानून मौजूद हैं. सभी राज्यों में लगभग कानून एक जैसा ही है, लेकिन उसकी सजा और जुर्माने में अंतर है. जबकि छत्तीसगढ़ में आदिवासियों की एक बड़ी आबादी है और उन क्षेत्रों पर विशेष फोकस किया गया है. इसके अलावा सामूहिक धर्मांतरण ना हो इस पर जोर दिया गया है और सख्त सजा का प्रावधान किया गया है. छत्तीसगढ़ में धर्म परिवर्तन की आईं खबरें छत्तीसगढ़ के बस्तर और जशपुर क्षेत्र में कई बार आदिवासियों को ईसाई धर्म में परिवर्तन की खबरें आई थीं. कई बार ऐसा भी पता चला है कि आदिवासियों और धर्म परिवर्तन करने वाले लोगों के बीच भी विवाद हुआ था. अब धर्मांतरण विधेयक के बाद ऐसे मामलों में रोक लगने की उम्मीद होगी. छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण को लेकर पिछले कुछ महीनों में कई FIR भी दर्ज हुई हैं और पुलिस को शिकायत भी मिली है. उपमुख्यमंत्री ने कही ये बात धर्मांतरण विधेयक पर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ में 1968 का धर्म स्वतंत्र विधेयक लागू है. अब परिस्थितियां बदल गई हैं, तो नई परिस्थितियों के तहत धर्म स्वतंत्र विधेयक लाया गया है.

असम BJP ने जारी की लिस्ट, प्रद्युत दिसपुर से, CM हिमंता जालुकबारी से करेंगे चुनावी मुकाबला

 दिसपुर असम विधानसभा चुनाव 2026 के लिए बीजेपी ने अपने उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है. बीजेपी की इस सूची में कुल 88 उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की गई है। बीजेपी की इस पहली लिस्ट में सबसे बड़ा नाम मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का है. वो अपनी पारंपरिक सीट जालुकबारी से ही चुनाव मैदान में उतरेंगे. कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आए प्रद्युत को दिसपुर से टिकट दिया गया है। बीजेपी ने राज्य के अलग-अलग हिस्सों में अपने मजबूत चेहरों को मौका दिया है. गुवाहाटी और उसके आसपास की सीटों पर खास ध्यान दिया गया है। गोलकगंज से अश्विनी राय सरकार, धुबरी से उत्तम प्रसाद और मंदिया से बदल चंद्र आर्य को टिकट मिला है. गोआलपाड़ा वेस्ट से पबित्र राभा और दुधनाई से टंकेश्वर राभा को उम्मीदवार बनाया गया है. बिरसिंह-जरुआ से माधवी दास और अभयापुरी से भूपेन राय चुनावी मैदान में होंगे. वहीं, भोवानिपुर-सोरभोग सीट से रंजीत कुमार दास को उम्मीदवार बनाया गया है यहां देखें असम बीजेपी कैंडिडेट की लिस्ट नलबाड़ी: जयंत मल्ला बरुआ तिहू: चंद्रमोहन पटवारी रंगिया: भवेश कलिता कमलपुर: दिगंत कलिता गुवाहाटी सेंट्रल: विजय कुमार गुप्ता न्यू गुवाहाटी: दिप्लू रंजन शर्मा पलासबाड़ी: हिमांशु शेखर बैश्य बरखेरी: नारायण डेका चमरिया: ज्योत्सना कलिता बता दें कि असम में बीजेपी ने असम गण परिषद (AGP) और बोडोलैंड पीपल्स फ्रंट (BPF) के साथ गठबंधन किया है. राज्य की 126 विधानसभा सीटों में से बीजेपी 89 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी. वहीं, 26 सीटों पर AGP और 11 सीटों पर BPF चुनाव लड़ेगी। चुनाव प्रचार में जुटेंगे पीएम मोदी और अमित शाह असम विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अप्रैल के पहले हफ्ते में राज्य के दौरे पर रहेंगे, जहां वो 1 अप्रैल, 3 अप्रैल और 6 अप्रैल को तीन बड़ी जनसभाओं को संबोधित करेंगे. प्रधानमंत्री के साथ-साथ गृह मंत्री अमित शाह भी राज्य में चुनाव प्रचार की कमान संभालेंगे. वो असम के कई इलाकों में चुनावी रैलियां करेंगे।

फिर गूंजी किलकारी: दिनेश कार्तिक-दीपिका पल्लीकल के घर बेटी का जन्म, जानिए क्या है नाम

नई दिल्ली पूर्व भारतीय क्रिकेटर दिनेश कार्तिक एक बार फिर पिता बन गए हैं। उनकी पत्नी दीपिका पल्लीकल ने बेटी को जन्म दिया है। दीपिका मशहूर स्क्वैश खिलाड़ी हैं। दोनों ने तीसरे बच्चे का स्वागत किया। 2021 में उनके जुड़वां बच्चे हुए। कार्तिक और पल्लीकल 2021 में जुड़वां बेटों के पिता बने थे, जिनका नाम कबीर और जियान है। कपल ने बेटी का नाम का खुलास कर दिया है। उन्होंने बेटी का नाम राहा रखा है। कार्तिक ने गुरुवार (19 मार्च) को फैंस के साथ गुड न्यूज शेयर की। कार्तिक ने इंस्टाग्राम पर शेयर की गई पोस्ट में बताया, ”दिल में दुआओं और शब्दों से परे शुक्रिया के साथ हम खुशी-खुशी अपनी प्यारी बच्ची का इस दुनिया में स्वागत करते हैं। कबीर और जियान अपनी छोटी बहन राहा पल्लीकल कार्तिक को परिचित कराते हुए बहुत खुश हैं। प्यार, दीपिका और दिनेश।” कार्तिक-पल्लीकल ने 2015 में शादी की 40 वर्षीय कार्तिक की पोस्ट पर फैंस के जमकर रिएक्शन आ रहे हैं। कई बड़े क्रिकेटर ने भी उन्हें बेटी के जन्म पर शुभकामनाएं दीं। स्टार बल्लेबाज विराट कोहली ने कमेंट बॉक्स में हार्ट इमोजी शेयर की। पूर्व सलामी बल्लेबाज शिखर धवन ने लिखा, ‘’बधाई हो भाई।” ऑलराउंडर अक्षर पटेल ने कमेंट किया, ‘’शुभकामनाएं अन्ना।” कार्तिक रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) के मेंटोर हैं। फ्रेंचाइजी ने कार्तिक को बधाई हुए लिखा, ‘’राहा के लिए ढेर सारा प्यार और एक छोटी सी आरसीबी जर्सी भेज रहे।” बता दें कि कार्तिक और पल्लीकल साल 2015 में शादी के बंधन में बंधे थे। दोनो ने पारंपरिक हिंदू और ईसाई रीति-रिवाजों से शादी रचाई थी। पल्लीकल ईसाई हैं। 6 IPL टीमों के लिए खेले दिनेश कार्तिक कार्तिक क्रिकेट से रिटायरमेंट के बाद कोचिंग और कमेंट्री की दुनिया में आ गए हैं। उन्होंने भारत के लिए 26 टेस्ट, 94 वनडे और 60 टी20 इंटरनेशनल मैच खेले। उन्होंने आखिरी इंटरनेशनल मैच 2022 में खेला था। वह इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में 267 मैचों में मैदान पर उतरे। उन्होंने आईपीएल में आरसीबी और कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेकआर) समेत 6 टीमों के प्रतिनिधित्व किया। वहीं, दीपिका देश की सबसे सम्मानित एथलीटों में से एक हैं। वह कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के लिए गोल्ड मेडल जीत चुकी हैं। दीपिका ऐसा करने वाली पहली भारतीय पद्म श्री से सम्मानित दीपिक स्क्वैश की महिला वर्ल्ड रैंकिंग में टॉप-10 में रह चुकी हैं। वह टॉप-10 रैंकिंग में जगह बनाने वाली भारत की पहली महिला स्क्वैश खिलाड़ी हैं। उन्होंने आखिरी बार अक्टूबर 2023 में हांग्जो एशियन गेम्स में हिस्सा लिया था, जहां उन्होंने मिक्स्ड डबल्स में गोल्ड मेडल जीता। 2022 की शुरुआत में मैटरनिटी लीव से लौटने के बाद उन्होंने सफल वापसी की वर्ल्ड डबल्स स्क्वैश चैंपियनशिप में दो टाइटल जीते। उन्होंने 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल जीता।

पं. कुंजीलाल दुबे का विधानसभा अध्यक्ष के रूप में योगदान महत्वपूर्ण, मुख्यमंत्री डॉ. यादव का बयान

पं. कुंजीलाल दुबे का विधानसभा अध्यक्ष के रूप में कार्यकाल भुलाया नहीं जा सकता : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री ने तीन बार विधानसभा अध्यक्ष रहे स्व. पं. दुबे की 130वीं जन्म जयंती पर पुष्पांजलि अर्पित कर दी श्रद्धांजलि भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि स्व. पं. कुंजीलाल दुबे तीन बार मध्यप्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष रहे। विधानसभा अध्यक्ष के रूप में उन्होंने हिन्दी भाषा को प्रतिष्ठित स्थान दिलाने में बड़ा योगदान दिया। स्व. पं. दुबे के विधानसभा अध्यक्षीय कार्यकाल की सुदीर्घ सेवाओं और संसदीय परम्पराओं को और भी समृद्ध बनाने में उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरुवार को स्व. पं. कुंजीलाल दुबे की 130वीं जन्म जयंती के अवसर पर मध्यप्रदेश विधानसभा भवन परिसर में उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्व. पं. दुबे की समाजोन्मुखी सेवाओं के लिए वर्ष 1964 में इन्हें पद्मभूषण की उपाधि विभूषित किया गया। विद्या और ज्ञान के क्षेत्र में की गई सेवाओं और उपलब्धियों के लिए स्व. पं. दुबे को 1965 में एलएलडी की उपाधि दी गई, वहीं 1967 में विक्रम विश्वविद्यालय ने इन्हें डी-लिट की उपाधि प्रदान की थी। वे सदैव हमारी स्मृतियों में बने रहेंगे। म.प्र. विधानसभा के भूतपूर्व अध्यक्ष स्व. पं. कुंजीलाल दुबे का जन्म 19 मार्च 1896 को वर्तमान नरसिंहपुर जिले के ग्राम आमगांव में हुआ था। वकालत के पेशे से एक सुघड़ राजनीतिज्ञ के रूप स्थापित होकर स्व. पं. दुबे प्रथम विधानसभा (1956-57), द्वितीय विधानसभा (1957-62) एवं तृतीय विधानसभा (1962-67) में कुल तीन बार मप्र विधानसभा अध्यक्ष के रूप में सेवारत रहे। पुष्पांजलि कार्यक्रम में म.प्र. विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर, विधायक भगवानदास सबनानी, प्रमुख सचिव विधानसभा अरविन्द शर्मा तथा भूतपूर्व विधानसभा अध्यक्ष स्व. पं. दुबे के परिजन सहित विधानसभा के अधिकारी-कर्मचारी भी उपस्थित थे।  

धार्मिक माहौल में बड़ा फैसला: 3 दिन बंद रहेंगी मीट शॉप्स, नवरात्र पर गूंजे जय माता दी

रायपुर. शहर में आगामी धार्मिक पर्वों को ध्यान में रखते हुए नगर निगम ने तीन दिन मांस-मटन की दुकानों को बंद रखने का आदेश जारी किया है। निगम क्षेत्र में 20, 27 और 31 मार्च 2026 को मांस-मटन की बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। निगम प्रशासन के अनुसार 20 मार्च को चेट्रीचंड, 27 मार्च को रामनवमी और 31 मार्च को महावीर जयंती के अवसर पर पशु वध गृह सहित सभी मांस-मटन की दुकानों को बंद रखा जाएगा। मंदिरों में गूंजे ‘जय माता दी’ के जयकारे आज से चैत्र नवरात्र की शुरुआत हो चुकी है, जो 27 मार्च तक श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई जाएगी। जय माता दी के जयकारों के साथ सुबह से ही प्रदेशभर के देवी मंदिरों में भीड़ उमड़ पड़ी और श्रद्धालु पूजा-अर्चना में जुट गए। नवरात्र के दौरान भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। प्रदेशभर के मंदिरों में ज्योति कलश जलाने की विशेष तैयारियाँ की गई हैं। इस बार लंबे समय बाद ऐसा विशेष संयोग बन रहा है कि अमावस्या तिथि में कलश स्थापना हो रही है, जिसे ज्योतिष शास्त्र में अत्यंत दुर्लभ और शुभ माना गया है। साथ ही, शुक्ल और ब्रह्म योग का अद्भुत संयोग भी बन रहा है, जिसे धार्मिक दृष्टि से अत्यंत फलदायी माना जाता है। इस बार नवरात्रि की शुरुआत प्रतिपदा के बजाय अमावस्या तिथि में हो रही है, जिससे यह और भी विशेष बन गई है। खास बात यह है कि इस बार दुर्गा अष्टमी और राम नवमी एक ही दिन पड़ रही हैं, जिससे यह संयोग अत्यंत शक्तिशाली और पुण्यदायी बन गया है।

ईरान-इजरायल युद्ध पर थरूर ने उठाए सवाल, सोनिया गांधी को दिखाया आईना और कहा- चुप्पी मोरल सरेंडर नहीं

नई दिल्ली  अमेरिका और इजरायल ने जबसे ईरान पर अटैक किया है, भारत की राजनीति में भी उबाल आ गया है. तमाम विपक्षी दल इस मामले में भारत की चुप्‍पी पर सवाल उठाते हुए सरकार की तीखी आलोचना कर रहे हैं. सोनिया गांधी ने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्‍ला अली खामेनेई की एयर स्‍ट्राइक में मौत की निंदा न करने पर सरकार पर खूब खरी-खोटी सुनाई थी. उन्‍होंने ईरान की संप्रभुता को तार-तार करने के मामले में भारत की चुप्‍पी पर भी गंभीर सवाल उठाए थे. अब सोनिया गांधी को उनकी ही पार्टी के सीनियर लीडर और तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने आईना दिखाया है. थरूर का कहना है कि वेस्‍ट एशिया में छिड़ी जंग पर भारत की चुप्‍पी किसी भी तरह से मोरल सरेंडर यानी नैतिक आत्‍मसमर्पण नहीं है. कांग्रेस सांसद का कहना है कि भारत का साइलेंस एक रिस्‍पॉन्सिबल स्‍टेटक्राफ्ट (सोची-समझी और जिम्‍मेदार कूटनीति) है. वेस्ट एशिया में जारी संघर्ष को लेकर भारत सरकार की चुप्पी पर देश में छिड़ी बहस के बीच कांग्रेस नेता शशि थरूर ने इसे नैतिक आत्मसमर्पण नहीं, बल्कि रिस्‍पॉन्सिबल स्‍टेटक्राफ्ट करार दिया है. उन्होंने ‘इंडियन एक्‍सप्रेस’ अखबार में लिखे लेख में कहा कि भारत का यह रुख भावनात्मक प्रतिक्रिया के बजाय व्यावहारिक कूटनीतिक संतुलन को दर्शाता है. थरूर ने स्पष्ट किया कि वे खुद मानते हैं कि अमेरिका-इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ किया गया सैन्य अभियान अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप नहीं है. यह संप्रभुता, आक्रामकता-विरोध और शांतिपूर्ण समाधान जैसे उन सिद्धांतों के खिलाफ है, जिनका भारत ऐतिहासिक रूप से समर्थन करता रहा है. इसके बावजूद उन्होंने सरकार की आलोचना करने से इनकार करते हुए कहा कि हर स्थिति में सार्वजनिक निंदा ही एकमात्र विकल्प नहीं होती. बता दें कि इसी समाचारपत्र में कुछ दिनों पहले सोनया गांधी ने लेख लिखकर सुप्रीम लीडर अयातुल्‍ला अली खामेनेई और ईरान की संप्रभुता पर आक्रमण की खुले शब्‍दों में निंदा न करने के लिए भारत सरकार की तीखी आलोचना की थी. ‘सिद्धांत और व्‍यवहारिकता के बीच संतुलन’ अब शशि थरूर ने कहा कि भारत की विदेश नीति हमेशा सिद्धांत और व्यवहारिकता के बीच संतुलन पर आधारित रही है. जवाहरलाल नेहरू की गुटनिरपेक्ष नीति का हवाला देते हुए थरूर ने कहा कि यह नैतिक रुख से दूरी नहीं, बल्कि शीत युद्ध के दौरान राष्ट्रीय हितों की रक्षा का व्यावहारिक तरीका था. आज के बहुध्रुवीय विश्व (Multipolar World) में भारत मल्टी-अलाइनमेंट की नीति पर चल रहा है, जहां वह अलग-अलग शक्तियों के साथ संबंध बनाए रखते हुए अपने हितों को प्राथमिकता देता है. थरूर ने आलोचकों पर निशाना साधते हुए कहा कि वे यह भूल जाते हैं कि भारत ने अतीत में भी कई बार राष्ट्रीय हितों के चलते चुप्पी साधी है. 1956 में हंगरी, 1968 में चेकोस्लोवाकिया और 1979 में अफगानिस्तान में सोवियत हस्तक्षेप के दौरान भारत ने खुलकर विरोध नहीं किया था, क्योंकि उस समय सोवियत संघ भारत का प्रमुख रक्षा साझेदार था. शशि थरूर की दलील कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने तर्क दिया कि भारत के लिए खाड़ी क्षेत्र बेहद अहम है, जहां से हर साल करीब 200 अरब डॉलर का व्यापार होता है. देश की ऊर्जा जरूरतें काफी हद तक इसी क्षेत्र पर निर्भर हैं और करीब 90 लाख भारतीय वहां काम करते हैं. ऐसे में किसी एक पक्ष के खिलाफ कड़ा सार्वजनिक रुख इन संबंधों को प्रभावित कर सकता है. थरूर ने अमेरिका के साथ भारत के रणनीतिक रिश्तों का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि मौजूदा अमेरिकी नेतृत्व (खासकर डोनाल्‍ड ट्रंप) अक्सर अपने हितों के खिलाफ जाने वालों पर सख्त रुख अपनाते हैं. ऐसे में भारत के लिए रक्षा सहयोग, तकनीकी साझेदारी और चीन के बढ़ते प्रभाव जैसी चुनौतियों को देखते हुए अमेरिका के साथ संतुलित संबंध बनाए रखना जरूरी है. उन्होंने यह भी कहा कि विदेश नीति ‘नैतिक भाषणबाजी’ का मंच नहीं, बल्कि वह क्षेत्र है जहां सिद्धांत और शक्ति के बीच संतुलन साधना पड़ता है. बिना पर्याप्त प्रभाव (leverage) के किसी बड़ी शक्ति की खुलकर आलोचना करना व्यावहारिक नहीं होता. चुप्‍पी का मतलब युद्ध का समर्थन नहीं थरूर के मुताबिक, भारत की चुप्पी का मतलब यह नहीं है कि वह युद्ध का समर्थन करता है, बल्कि यह एक रणनीतिक विकल्प है, जो देश को अपने हितों की रक्षा करते हुए कूटनीतिक संवाद के रास्ते खुले रखने में मदद करता है. उन्‍होंने कहा कि चुप्पी भी एक रणनीति हो सकती है, जो अनावश्यक टकराव से बचाते हुए शांति की दिशा में काम करने का अवसर देती है. उन्होंने आलोचकों को सलाह दी कि वे नैतिक आदर्शवाद और वास्तविक कूटनीतिक जरूरतों के बीच फर्क समझें. महात्मा गांधी और नेहरू के मूल्यों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी विरासत कठोर सिद्धांतों पर अड़े रहने की नहीं, बल्कि समय के अनुसार समझदारी से उन्हें लागू करने की रही है. अंत में थरूर ने कहा कि मौजूदा वैश्विक हालात में भारत का संयम ही उसकी ताकत है. उन्‍होंने कहा कि संयम कमजोरी नहीं, बल्कि वह क्षमता है, जो हमें अपने मूल्यों का सम्मान करते हुए राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने में सक्षम बनाती है. सोनिया गांधी ने क्‍या कहा था? सोनिया गांधी ने लिखे लेख में कहा था कि 1 मार्च को ईरान ने पुष्टि की कि उसके सर्वोच्च नेता (अयातुल्लाह सैयद अली हुसैनी खामेनेई) की एक दिन पहले अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए टार्गेटेड हमलों में हत्या कर दी गई थी. वार्ता के बीच किसी मौजूदा राष्ट्राध्यक्ष की हत्या अंतरराष्ट्रीय संबंधों में एक गंभीर दरार को दर्शाती है. उन्‍होंने आगे कहा था कि इस घटना से परे जो बात उतनी ही स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आती है, वह है नई दिल्ली की चुप्‍पी. बकौल सोनिया गांधी भारत सरकार ने इस हत्या या ईरानी संप्रभुता के उल्लंघन की निंदा करने से परहेज किया है. जब किसी विदेशी नेता की हत्या पर हमारे देश की ओर से संप्रभुता या अंतरराष्ट्रीय कानून के पक्ष में कोई स्पष्ट समर्थन नहीं दिखता और निष्पक्षता छोड़ दी जाती है, तो यह हमारी विदेश नीति की दिशा और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करता है.

MP में 3 दिन तक आंधी और बारिश, मार्च में पहली बार ओलावृष्टि का अलर्ट

भोपाल  मध्यप्रदेश में गर्मी के बीच मौसम ने अचानक करवट ले ली है। तेज सिस्टम के एक्टिव होने से अगले तीन दिन प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में आंधी, बारिश और ओलावृष्टि का दौर देखने को मिल सकता है। प्रदेश में दो ट्रफ लाइनों और एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन के असर से यह बदलाव आया है, जिसका असर करीब 72 घंटे तक रहने का अनुमान है।  इससे पहले बुधवार को कई जिलों में बादल छाए रहे, कई स्थानों पर हल्की बारिश हुई और कुछ जगहों पर तेज हवाओं का दौर चला। बालाघाट में करीब एक इंच बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग ने 19 मार्च के लिए भोपाल, इंदौर, ग्वालियर समेत 30 से ज्यादा जिलों में आंधी और बारिश का अलर्ट जारी किया है। वहीं, सिवनी, मंडला और बालाघाट जिलों में ओले गिरने की संभावना जताई गई है। इन जिलों में तेज हवाओं की रफ्तार 30 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक रहने की आशंका है। मौसम का अलर्ट मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि 19 और 20 मार्च को मौसम का असर सबसे ज्यादा रहेगा। यह धीरे-धीरे पूरे प्रदेश को कवर करेगा। 22 मार्च के बाद मौसम सा 19-20 मार्च को सबसे ज्यादा असर मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि 19 और 20 मार्च को इसका असर सबसे ज्यादा रहेगा और यह सिस्टम धीरे-धीरे पूरे प्रदेश को कवर करेगा। 22 मार्च के बाद मौसम साफ होने के संकेत हैं। बदलते मौसम के कारण कई शहरों में तापमान में गिरावट दर्ज की गई है, जिससे लोगों को गर्मी से राहत मिली है। मार्च में पहली बार ओलों की एंट्री इस बार मार्च में पहली बार ओलावृष्टि होने जा रही है। खासतौर पर सिवनी, मंडला और बालाघाट जिलों में दो दिन तक ओले गिर सकते हैं, जबकि अन्य जिलों में हल्की से मध्यम बारिश का दौर रहेगा। फरवरी में भी मौसम ने चार बार करवट ली थी। कई इलाकों में ओले और बारिश से फसलों को नुकसान हुआ था, जिसके बाद सरकार को सर्वे कराना पड़ा था। अब मार्च में फिर से वैसा ही पैटर्न देखने को मिल रहा है। 15 से 20 दिन तक लू चलने का अनुमान मौसम विभाग के मुताबिक, मार्च के आखिरी हफ्ते से गर्मी फिर जोर पकड़ सकती है। अप्रैल-मई में 15 से 20 दिन तक लू चलने का अनुमान है। फिलहाल प्रदेश में “तीनों मौसम” का असर देखने को मिल रहा है—दिन में गर्मी, रात में हल्की ठंड और बीच-बीच में बारिश। कुछ दिन पहले नर्मदापुरम में पारा 40 डिग्री के पार पहुंच गया था। आने वाले दिनों में भोपाल, इंदौर और उज्जैन जैसे शहरों में भी दिन का तापमान 40 डिग्री के आसपास जा सकता है, जबकि रातें अपेक्षाकृत ठंडी रहेंगी।  फ होने के संकेत हैं। बदलाव के कारण कई शहरों में तापमान में गिरावट दर्ज की गई है, जिससे लोगों को गर्मी से राहत मिली है। मार्च में पहली बार ओलावृष्टि विशेष रूप से मार्च में यह पहली बार है जब ओलावृष्टि होने जा रही है। सिवनी, मंडला और बालाघाट जिलों में दो दिन तक ओले गिरने का अनुमान है, जबकि अन्य जिलों में हल्की से मध्यम बारिश का दौर रहेगा। फरवरी में भी मौसम ने चार बार करवट ली थी और कई इलाकों में ओले और बारिश से फसलों को नुकसान हुआ था। अप्रैल और मई में 20 दिन लू का अनुमान मौसम विभाग ने चेताया है कि मार्च के आखिरी हफ्ते से प्रदेश में गर्मी फिर जोर पकड़ सकती है। अप्रैल और मई में 15 से 20 दिन तक लू चलने का अनुमान है। फिलहाल प्रदेश में “तीनों मौसम” का असर देखने को मिल रहा है। दिन में गर्मी, रात में हल्की ठंड और बीच-बीच में बारिश। कुछ दिन पहले नर्मदापुरम में पारा 40 डिग्री के पार पहुंच गया था। आने वाले दिनों में भोपाल, इंदौर और उज्जैन जैसे शहरों में दिन का तापमान 40 डिग्री के आसपास रहने की संभावना है, जबकि रातें अपेक्षाकृत ठंडी रहेंगी।

पढ़ाई जरूरी है, क्योंकि पूरी जिंदगी नहीं खेल सकते: PV सिंधू ने दिया प्रेरणादायक संदेश

गुरुग्राम  दो बार की ओलंपिक पदक विजेता भारतीय बैडमिंटन स्टार पी वी सिंधू ने इस बात पर जोर दिया कि उभरते हुए खिलाड़ियों के लिए पढ़ाई करना बेहद जरूरी है और पढ़ाई को नजरअंदाज करके सिर्फ खेल पर ध्यान देना बहुत जोखिम भरा है क्योंकि एक ही चोट से खेल करियर खत्म हो सकता है. पूर्व विश्व चैंपियन ने डीपीएस इंटरनेशनल में एक बातचीत के दौरान शिक्षाविद देवयानी जयपुरिया से बात करते हुए ये बातें कहीं. हैदराबाद की इस खिलाड़ी ने अपनी बात को समझाने के लिए अपनी जिंदगी के कई पहलुओं का जिक्र किया. इनमें 2016 के ओलंपिक से पहले का वह दौर भी शामिल है जब वह अपने बाएं पैर में ‘स्ट्रेस फ्रैक्चर’ होने के कारण परेशान थीं और उन्हें खुद पर शक होने लगा था. उन्होंने कहा, ‘‘मैं इतने साल से खेल रही हूं. कभी न कभी तो आपको ‘रिटायर’ होना ही पड़ता है. और यही सच है. आप 45, 50 या 60 साल की उम्र तक शीर्ष स्तर पर नहीं खेल सकते.’’ सिंधू ने राष्ट्रीय कोच पुलेला गोपीचंद की बात का समर्थन किया जिन्होंने उभरते हुए खिलाड़ियों के माता-पिता से शिक्षा को प्राथमिकता देने की बात कही थी. इस खिलाड़ी ने कहा, ‘‘आपको इस बात को स्वीकार करना ​​ही होगा कि शिक्षा हमेशा पूरी जिंदगी आपके साथ रहेगी और हमेशा आपके पास रहेगी.’’ उन्होंने कहा, ‘‘कोई भी सोने की चम्मच लेकर पैदा नहीं होता और आपको कड़ी मेहनत करनी पड़ती है, चाहे वह पढ़ाई में हो या खेल में. पढ़ाई और खेल दोनों ही अहम हैं. मैंने अपना एमबीए किया है. इसलिए मुझे पता है कि यह आसान नहीं है. आप सुबह ट्रेनिंग के लिए जाते हैं, वापस आते हैं, पढ़ाई करते हैं, फिर शाम के सत्र के लिए जाते हैं.’’ सिंधू ने कहा, ‘‘सच तो यही है कि खेल एक बहुत छोटी सी चीज है. शिक्षा हमेशा आपके साथ रहेगी. खेल भी जरूरी है, लेकिन इतना भी नहीं कि आप अपनी पढ़ाई पूरी तरह से रोक दें.’’ तीस साल की यह खिलाड़ी अभी ब्रेक पर है. अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर बमबारी के चलते हवाई क्षेत्र बंद करने की वजह से उन्हें कुछ दिनों के लिए दुबई में रुकना पड़ा था. उन्होंने कहा कि खेल के दौरान लगने वाली चोटों से उबरना मुश्किल हो सकता है इसलिए उन्होंने उभरते हुए खिलाड़ियों से पढ़ाई का एक विकल्प अपने पास रखने की बात कही. सिंधू ने कहा, ‘‘हो सकता है मेरी बात थोड़ी कड़वी लगे, शायद अभी उन्हें यह बात समझ नहीं आए, लेकिन जिंदगी के बाद के पड़ाव में उन्हें यह जरूर समझ आएगा कि पढ़ाई भी उतनी ही जरूरी है. खेल कभी-कभी बहुत जोखिम भरा हो सकता है. इसमें कभी भी चोट लग सकती है.” उन्होंने कहा, ‘‘चोट से आपका करियर खत्म हो सकता है, आपकी सर्जरी हो सकती है। और चोटें बताकर नहीं आतीं, बस हो जाती हैं। ऐसे समय में, आपको यह पक्का करना होता है कि आप जिंदगी में हर चीज के लिए तैयार हैं.’’ उन्होंने 2015 को याद किया जब उनके बाएं पैर में ‘स्ट्रेस फ्रैक्चर’ हो गया था जिससे उनका करियर खत्म होने का खतरा पैदा हो गया था और उन्हें छह महीने तक खेल से बाहर रहना पड़ा था. इसके चलते 2016 के ओलंपिक से पहले उनके पास तैयारी के लिए बहुत कम समय बचा था। इसके बावजूद रियो डि जिनेरियो में हुए उन खेलों में उन्होंने रजत पदक जीता. उन्होंने कहा, ‘‘मामला गंभीर था. कई हफ्तों तक दर्द के साथ खेलने के बाद मैं ठीक समय पर डॉक्टर के पास पहुंच पाई. मेरे मन में खुद को लेकर शक पैदा हुआ था कि क्या मैं दोबारा खेल पाऊंगी या नहीं.’’

अधिमान्य पत्रकार नेतृत्व समिति के द्वारा जीतू पटवारी से की मुलाकात

अधिमान्य पत्रकार नेतृत्व समिति के द्वारा जीतू पटवारी से की मुलाकात भोपाल मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष माननीय जीतू पटवारी से अधिमान्य पत्रकार नेतृत्व समिति भोपाल के राष्ट्रीय अध्यक्ष डल्लू कुमार सोनी एवं रोहित यादव राष्ट्रीय महासचिव एवं मध्य प्रदेश प्रदेश कार्यवाहक अध्यक्ष हीरा सिंह ठाकुर इंदौर संभागीय अध्यक्ष,शिवम तिवारी एडवोके ,ओम प्रकाश ठाकुर, छबिलाल महारा एवं समिति के पदाधिकारीयों ने जीतू पटवारी जी को स्मृति चिन्ह एवं मांग पत्र देकर उनका स्वागत किया

41 साल की उम्र में दिव्यांका त्रिपाठी बनने वाली हैं मां, 10 साल बाद दिव्यांका और विवेक की खुशखबरी

भोपाल  दिव्यांका त्रिपाठी और विवेक दहिया टीवी इंडस्ट्री के सबसे चहेते कपल्स में से हैं। दोनों 2016 में शादी के बंधन में बंधे थे, यानी दोनों की शादी को 10 साल हो चुके हैं। पिछले दिनों ही दिव्यांका ने सोशल मीडिया पर कुछ खूबसूरत तस्वीरें शेयर करते हुए अपनी सगाई के 10 साल पूरे होने का जश्न मनाया था। जब से दिव्यांका और विवेक शादी के बंधन में बंधे हैं, फैंस गुड न्यूज का इंतजार कर रहे हैं। अक्सर एक्ट्रेस के फैंस उनसे पूछते रहते हैं कि वह कब गुड न्यूज देंगी? इस बीच चर्चा है कि दिव्यांका अपना पहला बेबी एक्सपेक्ट कर रही हैं। चर्चा है कि दिव्यांका त्रिपाठी और विवेक दहिया शादी के 10 साल बाद अपने पहले बच्चे का स्वागत करने के लिए तैयार हैं। ‘ये हैं मोहब्बतें’  में ईशी मां का किरदार निभाकर दिव्यांका त्रिपाठी ने दर्शकों के दिल में खास जगह  बनाई थी। ऐसे में अब जब उनकी प्रेग्नेंसी के चर्चे हो रहे हैं तो एक्ट्रेस के फैंस बेहद खुश हैं। प्रेग्नेंट हैं दिव्यांका त्रिपाठी?  रिपोर्ट के अनुसार, दिव्यांका त्रिपाठी प्रेग्नेंट हैं। दिव्यांका और विवेक अपनी जिंदगी का नया चैप्टर शुरू करने के लिए तैयार हैं। उनकी प्रेग्नेंसी की खबर से उनके परिवार और दोस्तों के बीच खुशी का माहौल है, क्योंकि दोनों की शादी को 10 साल हो चुके हैं और 41 की उम्र में दिव्यांका अपने पहले बच्चे को जन्म देने जा रही हैं। इस न्यूज के बाद दिव्यांका के फैंस की भी खुशी का ठिकाना नहीं है। हालांकि, अब तक दिव्यांका और विवेक की ओर से इस खबर की पुष्टि नहीं की है। दिव्यांका के लिए बेबी शॉवर की प्लानिंग  एक रिपोर्ट के अनुसार, दिव्यांका और विवेक के करीबी सूत्रों ने बताया कि उनके परिवार बेहद खुश हैं और नए सदस्य के स्वागत की तैयारियां भी शुरू कर दी हैं। यही नहीं, फैमिली ने दिव्यांका के लिए बेबी शॉवर पार्टी की भी योजना बनाई है। ये एक प्राइवेट पार्टी होगी, जिसमें करीबी दोस्त और कपल के टेलीविजन जगत के दोस्त जश्न मनाने के लिए इकट्ठा होंगे। जब दिव्यांका-विवेक ने बच्चे के बारे में की थी बात बता दें, 2025 में कपल ने बच्चों को लेकर होने वाले सवाल पर प्रतिक्रिया दी थी। विवेक ने एक फैन के सवाल का जवाब देते हुए कहा था- ‘इसका जवाब मेरे पास नहीं है। इसका जवाब खुदा के पास है। भगवान, अल्लाह, उनके पास है, उनसे जाकर पूछो। जब होगा, पता चल जाएगा।’ वहीं दिव्यांका ने इस पर रिएक्ट करते हुए कहा था- ‘इस इन्फॉर्मेशन को कौन ही रोक सकेगा?’ दिव्यांका-विवेक की लव स्टोरी दिव्यांका और विवेक की पहली मुलाकात टीवी सीरियल ‘ये है मोहब्बतें’ के सेट पर हुई थी, जहां पहले दोनों की दोस्ती हुई और फिर ये दोस्ती धीरे-धीरे रिश्ते में बदल गई। उन्होंने 8 जुलाई, 2016 को भोपाल में एक भव्य और निजी समारोह में शादी की, जिसमें करीबी दोस्त और कपल के टीवी इंडस्ट्री के कुछ करीबी दोस्त शामिल हुए थे।

गोमांस तस्करी केस: भोपाल में असलम चमड़ा को मिली जमानत, बड़ा अपडेट

भोपाल  मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में गोमांस तस्करी केस में 70 दिन बाद बड़ा अपडेट सामने आया है। ट्रक भरकर मुख्य आरोपी असलम कुरैशी उर्फ असलम चमड़ा को सेशन कोर्ट से जमानत मिल गई है। कोर्ट की तरफ से जांच में कई कमियों का हवाला दिया गया है। बताया जा रहा है कि, असलम कुरैशी की तरफ से कोर्ट में साबित किया गया कि, उसके ट्रक में गोमांस नहीं, बल्कि भैंस का मास था। इसप कोर्ट ने उन्हें 35 हजार रुपए के मुचलके पर जमानत मिली है। असलम चमड़ा के अधिवक्ता ने भोपाल जिला अदालत में कहा कि, जो मांस सैंपल के लिए हैदराबाद भेजा गया था। उसकी रिपोर्ट प्रस्तुत करें, लेकिन पुलिस ऐसा नहीं कर सकी। सत्र न्यायालय में द्वितीय जमानत आवेदन का हिंदू संगठन ने कड़ा विरोध किया था। भानु हिंदू ने न्यायमूर्ति पंकज कुमार जैन की कोर्ट में उपस्थित होकर आपत्ति दर्ज कराई थी। मथुरा लैब की रिपोर्ट में गोमांस होने की पुष्टि हुई थी, लेकिन हैदराबाद की लैब की रिपोर्ट पेश ही नहीं हुई।. क्या है मामला? हिंदू संगठनों ने पुलिस मुख्यालय के सामने दिसंबर 2025 में एक ट्रोक रोका, जिसमें 26 टन मांस भरा था तो उसमें 26 टन गोमांस होने का दावा किया गया था। पुलिस ने ट्रक को जब्त कर सैंपल जांच के लिए भेज दिए। इसके बाद प्रशासन ने भोपाल का स्लॉटर हाउस भी बंद करवा दिया। असलम कुरैशी पर आरोप लगा कि, स्लॉटर हाउस में गोवंश का अवैध कत्ल कर मांस मुंबई भेजा जा रहा था। फॉरेंसिक रिपोर्ट में गोमांस की पुष्टि के बाद आरोपी और उसके ड्राइवर को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। इस मामले में एसआईटी पहले ही 500 पन्नों का चालान अदालत के समक्ष प्रस्तुत कर चुकी है। जमानत के बाद हिंदू संगठनों का विरोध हिंदू उत्सव समिति और संस्कृति बचाओ मंच के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने सेशन कोर्ट से असलम चमड़े को कोर्ट से जमानत मिलने पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि, असलम चमड़े जैसे हत्यारे को इतनी आसानी से जमानत दे दी गई। ये एक सोचने वाला विषय है कि, सीट की रिपोर्ट किस प्रकार प्रस्तुत की गई? सिर्फ ड्राइवर और असलम चमड़े को मुजरिम बनाया गया, बाकी सहयोगियों को छोड़ दिया गया। इसमें सही तरीके से शासन ने अपना पक्ष नहीं रखा। हिंदू उत्सव समिति और संस्कृति बचाओ मंच ये मांग करता है कि, असलम पर तुरंत रासुका की कार्रवाई हो, वरना हम जन आंदोलन करेंगे।

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