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फायर इंजीनियरिंग में है शानदार करियर

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हाल के दिनों में आगजनी की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। चलती कारों में आग लग जाती है, तो बड़े-बड़े मॉल्स, काफी हद तक सुरक्षित मानी जानी वाली ऊंची-ऊंची इमारत भी पूरी तरप सुरक्षित नहीं है। यदि आग अनियंत्रित हो जाए, तो जान-माल का भी काफी नुकसान होता है। ऐसी स्थिति में फायर इंजीनियरिंग से जुड़े लोगों की जरूरत होती है, जो आग पर काबू करना अच्छी तरह जानते हैं।

क्या है फायर इंजीनियरिंग:- फायर इंजीनियरिंग में पब्लिक के बीच रहकर ही काम करना होता है। सिविल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, एनवॉयर्नमेंटल इंजीनियरिंग जैसे विषयों से तो इसका सीधा जुडाव होता ही है, आग लगने पर पब्लिक का कैसा व्यवहार हो, पब्लिक के साथ इन लाइफ गार्ड्स का क्या व्यवहार हो, इन सब पर भी जोर दिया जाता है। इसके अलावा ढेर सारी तकनीकी बातें होती हैं, जो इसे बाकी क्षेत्रों से अलग करती हैं, मसलन-आग बुझाने के यंत्रों की तकनीकी जानकारी, स्प्रिंक्लर सिस्टम, अलार्म, पानी की बौछार का सबसे सटीक इस्तेमाल और कम से कम समय और संसाधनों में ज्यादा से ज्यादा लोगों की जान और माल के बचाव के साइंटिफिक फॉर्मूले।

सबसे बडी बात है क्राइसिस मैनेजमेंट। इस करियर में आप इसे भी सीखते हैं। बडे-बडे मॉल्स या मेले तो आग के मामले इतने खतरनाक होते हैं कि एक साथ सैकडों की जान जाती है। जैसा कि कुछ समय पहले मेरठ के मेले में हुआ था। इस वजह से आज फायर इंजीनियरों की मांग काफी बढ गई है। फायर इंजीनियरों की मांग को पूरा करने के लिए आज कई सरकारी व निजी संस्थान खुल गए हैं। साथ ही, देश के कई विश्वविद्यालयों ने इस कोर्स को अपने पाठ्यक्रम में शामिल कर लिया है।

चुनौतियों तमाम:- कार्य के दौरान फायर इंजीनियर का सामना कई तरह की चुनौतियों से भरा होता है। इसके लिए साहस के साथ-साथ समाज के प्रति प्रतिबद्धता होनी भी जरूरी है। फायर इंजीनियर का कार्य इंजीनियरिंग डिजाइन, ऑपरेशन व प्रबंधन से संबंधित होता है। फायर इंजीनियर की प्रमुख जिम्मेदारी दुर्घटना के समय आग के प्रभाव को सीमित करना होता है। इसके लिए वे अग्निसुरक्षा के विभिन्न तरीकों को इस्तेमाल करते हैं। इसके अतिरिक्त अग्निशमन के आधुनिक उपकरणों के इस्तेमाल व उसके रख-रखाव की तकनीक में सुधार करना भी इनकी जिम्मेदारी होती है।

कोर्स और पाठ्यक्रम:- कुशल फायर इंजीनियर बनने के लिए बेचलर इन फायर इंजीनियरिंग की डिग्री या उप-फायर-अधिकारी या सर्टिफिकेट कोर्स इन फायर टेक्नोलॉजी एंड सेफ्टी, पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन फायर प्रोटेक्शन इंजीनियरिंग एंड इंडस्ट्रियल सेफ्टी, डिप्लोमा इन फायर इंजीनियरिंग कोर्स के अलावा फायर इंजीनियरिंग में अन्य छोटे-छोटे कोर्स भी उपलब्ध हैं।

योग्यता:- विभिन्न पाठ्यक्रमों के लिए योग्यताएं भी अलग-अलग होती हैं। फायर इंजीनियरिंग में अधिकांश कोर्स ग्रेजुएट स्तर पर उपलब्ध हैं, जिसके लिए साइंस विषयों में बारहवीं पास होना जरूरी है। इसके अलावा इन कोर्सो में प्रवेश के लिए कई संस्थान राष्ट्रीय स्तर पर प्रवेश परीक्षा और साक्षात्कार आदि भी आयोजित करते हैं। बैचलर ऑफ इंजीनियरिंग के अलावा आप इस क्षेत्र में स्नातकोत्तर स्तर पर मास्टर और डॉक्टरेट की पढ़ाई भी कर सकते हैं।

शारीरिक योग्यता:- इन पाठ्यक्रमों में फिजिकल फिटनेस के अंक भी जोड़े जाते हैं। पुरूष के लिए 50 किलो के वजन के साथ 165 सेमी लंबाई और आईसाइट 6/6, सीना सामान्य रूप से 81 सेमी और फुलाने के बाद 5 सेमी फैलाव होना जरूरी है। महिला का वजन 46 किलो और लंबाई 157 सेमी और आईसाइट 6/6 होनी चाहिए।

प्रशिक्षण:- इस पाठ्यक्रम के तहत आग बुझाने के विभिन्न तरीकों की जानकारी दी जाती है। इसमें बिल्डिंग निर्माण के बारे में भी जानकारी दी जाती है। ताकि, आग लगने की स्थिति में उसे बुझाने में ज्यादा परेशानी न हो। उन्हें आग लगने के कारणों और उसे बुझाने के उपायों के बारे में भी विस्तार से बताया जाता है।

संभावनाएं:- इस संबंध में दिल्ली इंस्टीट्यूट ऑफ फायर इंजीनियरिंग के चेयरमैन वीरेन्द्र गर्ग कहते हैं कि इसमें रोजगार की अपार संभावनाएं हैं। पहले जहां अवसर केवल सरकारी फायर बिग्रेड में ही होते थे, वहीं बदलते दौर के साथ फायर इंजीनियरिंग कोर्स करने वालों के लिए ढेरों नए विकल्प भी सामने आ गए हैं। इनमें प्रमुख इस प्रकार हैं…

कंसल्टेंसी:- जब से हर बडी इमारत के साथ आग से जुडे खतरों के लिए कुछ जरूरी नियमों का पालन करना अनिवार्य कर दिया गया है, इस फील्ड में कंसल्टेंट्स की मांग बढ गई है। कंसल्टेंसी की कंपनियां धीरे-धीरे बिल्डर्स का भरोसा जीत रही हैं और उनकी संख्या बढ रही है।

रिसर्च:- फायर प्रोक्टेशन के फील्ड में रिसर्च पहले भारत में नहीं होता था, लेकिन अब यहां भी होने लगा है। हालांकि, ऐसा अभी बहुत कम कंपनियों ने किया है, लेकिन बडे कैंपस वाली कंपनियां अब फायर प्रोटेक्शन इंजीनियरिंग की स्थाई भर्ती करने लगी हैं।

इंश्योरेंस:- जैसे-जैसे आग लगने के मामले बढ रहे हैं, वैसे-वैसे आग से जुडी बीमा पॉलिसियों की भी मांग बढ गई है। इसके साथ ही ऐसे लोगों की जरूरत भी बढ गई है, जो आग से होने वाले नुकसान का ठीक-ठीक अनुमान लगा सकें। मैन्युफैक्चरिंग अब हर बडे निर्माण में आग बुझाने के उपकरणों को रखना भी अनिवार्य कर दिया गया है। इससे उपकरणों का उत्पादन भी बढ गया है। उनके उत्पादन से लेकर मार्केटिंग तक के फील्ड में फायर इंजीनियर्स की मांग बढ गई है। अब सारे सिटी प्लानर भी फायर इंजीनियर्स को साथ रखकर ही टाउन प्लानिंग करते हैं।

सैलरी पैकेज:- सरकारी अथवा गैर सरकारी संगठनों में फायरकर्मियों के वेतन का आधार अलग-अलग होता है। दोनों में पर्याप्त भिन्नाता देखने को मिलती है। सरकारी संस्थानों में जहां एक फायरमैन की तनख्वाह दस हजार रुपये प्रतिमाह होती है। वहीं, फायर इंजीनियर को बीस हजार रुपये और मुख्य अग्निशमन अधिकारी को इससे अधिक वेतन मिलता है। इसकी तुलना में प्राइवेट संस्थाएं अपने यहां कार्यरत फायरमैन को 12000 से 14000, फायर इंजीनियर को 20000 तथा अग्निशमन अधिकारी को 25000 से 30000 रुपये प्रतिमाह तक का सैलरी पैकेज देती हैं। प्राइवेट संस्थान अपने यहां कुछ वर्ष का अनुभव रखने वाले लोगों को ही वरीयता देते हैं। वैसे निजी संस्थाओं में वेतन का आधार स्वयं की काबिलियत और अनुभव रखता है। अलग-अलग कंपनियां अपनी क्षमता के अनुसार वेतन तय करती हैं।

इंस्टीट्यूट वॉच…

-दिल्ली इंस्टीट्यूट ऑफ फायर इंजीनियरिंग, नई दिल्ली

-इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, खड़गपुर

-राष्ट्रीय अग्निशमन सेवा महाविद्यालय, पालम रोड, नागपुर

-कॉलेज ऑफ फायर टेक्नोलॉजी, अहमदाबाद

-इंटरनेशनल इंस्टीटयूट ऑफ फायर इंजीनियरिंग सेफ्टी एंड सिक्योरिटी मैनेजमेंट, पुणे

 

 

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